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प्यास

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प्यास

प्यास इस शब्द का हमारी जिंदगी में बहुत उँचा स्थान है. किसी को राजनीति की प्यास है तो किसी को पैसे की प्यास है. और एक प्यास ऐसी है जो कभी बुझती ही नही और वो है जिस्म की प्यास. हम इस स्टोरी में कुछ ऐसे ही प्यासे इंसानो की बात करेंगे और स्टोरी एरॉटिक होने के साथ-2 एक लव स्टोरी का मज़ा भी देगी और मुझे यकीन है कि आप सब को इसे पढ़ने में मज़ा आएगा

रीत सुबह-2 अपने घर से रेडी होकेर कॉलेज के लिए निकली थी. वो अपने घर से निकल कर अपनी एक दोस्त अमनप्रीत के घर की तरफ जा रही थी. गाओं की गलियों में मटक-2 कर रीत कदम उठा रही थी और रीत ने इस वक़्त एक ग्रीन कलर का पटियाला शाही सलवार कमीज़ पहना था जोकि उसके जिस्म से सटा हुया था. अक्सर रीत टाइट सलवार कमीज़ या टाइट पाजामी सूट ही पहनती थी. पैरो में हाइ हील्स संदेल पहने होने की वजह से जब वो चल रही थी तो उसकी कमर इस माफिक थिरक रही थी कि देखने वाला बस देखता ही रह जाता था. परमात्मा ने उसे बनाया ही ऐसा था. गोरी चिट्टी , 5'8" हाइट , 18 साल की उमर में 34-28-36 का कातिलाना फिगर. उपर से रीत के टाइट-2 कपड़े...ओह गॉड देखने वालो की जान निकालने के लिए ये हुस्न काफ़ी था लेकिन अभी तक रीत का कुँवारा हुस्न उन टच था. किसी भंवरे को कभी रीत ने अपने आस पास भी फटकने नही दिया था. स्कूल में बहुत से लड़को ने उसे प्रपोज किया मगर किसी भी लड़के का प्रपोज आक्सेप्ट नही हो पाया. ऐसा नही था कि रीत आक्सेप्ट करना नही चाहती थी बल्कि असल बात ये थी कि वो अपने घरवालो से इतना डरती थी कि उसकी हिम्मत ही नही हुई कभी किसी लड़के को इस नज़र से देखने की लेकिन जबसे उसने स्कूल छोड़ कर कॉलेज में अड्मिशन ली थी तब से ही उसमे बहुत चेंज आ गया था अब वो थोड़ा खुलने लगी थी. चोरी-2 अब लड़को को ताड़ना उसे अच्छा लगने लगा था. वैसे भी उसके घर में उसके मम्मी पापा ही थे उसका कोई भाई तो था नही इस लिए उसे किसी का ज़्यादा डर तो नही था. स्कूल में पढ़ते वक़्त भी उसे उसके मम्मी पापा ने कभी डराया या धमकाया नही था वो खुद ही बस डरती थी उनसे लेकिन अब कॉलेज में उसकी लाइफ बदलने वाली थी. वो तेज़-2 कदमो के साथ अपनी फ्रेंड के घर की तरफ बढ़ रही थी और रास्ते में अभी तक 3-4 लड़के उसके पास से गुज़रे थे और सभी ने वापिस पलट कर रीत के लहराते जिस्म का अपनी आँखो से बलात्कार किया था और एक लड़के ने तो उसे कॉमेंट भी दिया था मगर रीत इस सब की परवाह किए बिना अपनी दोस्त अमन के घर पहुँच गई बल्कि उसे तो ऐसे सुन ना अब अच्छा लगने लगा था. रीत ने अपनी फ्रेंड को आवाज़ लगाते हुए कहा 'अमन मैं बाहर हूँ आजा जल्दी लेट हो गये आज'

अमन बाहर आती उस से पहले ही उसका भाई सुखप्रीत बाहर आ गया और बोला 'अरे रीत तुम आ भी गई ये देखो अभी तक रेडी नही हुई'

सुखप्रीत अमन का बड़ा भाई था उसका और अमन का 1 साल का ही डिफ्रेन्स था और वो रीत और अमन के साथ ही उनके कॉलेज में पढ़ता था और उन तीनो ने इसी सेशन में 1स्ट एअर में अड्मिशन ली थी. आख़िर अमन तैयार हुई और वो तीनो अपने गाओं के बस स्टॉप की तरफ चल पड़े. उनका गाओं पंजाब में चंडीगढ़ के पास ही पड़ता था और वो तीनों मोहाली में एक सरकारी. कॉलेज में स्टडी करते थे. गाओं मैन रोड से थोड़ा पीछे था इसलिए उनके गाओं से शहर की तरफ जाने के लिए ऑटो या मिनी बसस की सुविधा थी. अमन , रीत न्ड सुख तीनो बस स्टॉप की तरफ जा रहे थे. सुख दिखने में काफ़ी अट्रॅक्टिव था. रंग ज़्यादा गोरा भी नही था लेकिन फिर भी उसका चेहरा अट्रॅक्टिव था. बाल कटवा रखे थे और चेहरे पे हल्की दाढ़ी और मूछ वो हमेशा रखता था. और हल्की दाढ़ी और मूछ उसे खूब जचती थी. उसके घर में उसके और उसकी बेहन अमन के इलावा उसके मम्मी और पापा भी थे और वो दोनो टीचर थे और सुबह ड्यूटी चले जाते थे और शाम को वापिस आते थे. अमन उसकी बेहन थी और अपने भाई की तरह ही वो भी बहुत सुन्दर थी. सुख का रंग यहाँ इतना गोरा नही था वही पे अमन एकदम गोरी और चिकनी थी और साथ ही साथ बहुत सेक्सी भी. अभी तक रीत और अमन साथ ही पढ़ी थी और रीत के बिल्कुल उलट अमन शुरू से ही बिंदास टाइप की लड़की थी. स्कूल में पढ़ते वक़्त उसका 2 लड़को के साथ चक्कर रह चुका था और दोनो ही लड़के अमन के होंठो का रस तो बहुत बार पी चुके थे लेकिन किसी का हाथ उसकी सलवार के नाडे तक गया हो इसका कोई पक्का सबूत नही था. हालाँकि स्कूल में अक्सर लड़के बातें करते थे कि एक लड़के ने अमन की ली है मगर कोई यकीन से नही कह सकता था. सच क्या था ये तो अब तीन लोग ही जानते थे. अमन , वो लड़का और भगवान.

 
अमन ने आज ब्लॅक कलर का पाजामी सूट पहना हुआ था. उसके कमीज़ में येल्लो कलर की लाइन्स थी. वो बहुत ही सेक्सी दिख रही थी. कॉलेज में उसके और रीत के पहले दिन से ही चर्चे थे मगर अभी तक किसी की हिम्मत नही हुई थी प्रपोज करने की. वो तीनो बस स्टॉप पे पहुँचे और बस का वेट करने लगे. जल्दी ही बस आई और वो तीनो उसमे चढ़ गये. सुबह के वक़्त हमेशा बस में भीड़ रहती थी और बस आस पास के गाओं में से घूम कर आती थी तो रोज़ जाने पहचाने चेहरे ही बस में होते थे. सुख सबसे आगे खड़ा था और उसके पीछे अमन और रीत खड़ी थी बस अपनी रफ़्तार से चल पड़ी. सुख की नज़रें किसी को ढूंड रही थी और जल्दी ही उसकी तमन्ना पूरी हो गई थी क्यूंकी उसकी आँखों ने वो देख लिया था जो वो देखना चाहती थीं. जेसे ही उसने उनसे कोई 4-5 सीट्स आगे सीट पे बैठ अमन न्ड रीत की फरन्ड न्ड क्लासमेट सिमरन को देखा तो उसका दिल खुश हो गया. सिमरन एक बहुत ही शरीफ और इनोसेंट लड़की थी और उसकी ये शराफ़त ही सुख को इतनी अच्छी लगी थी कि वो मन ही मन उसे दिल दे बैठा था लेकिन सिमरन को अभी तक कोई ऐसा अनुभव नही हुआ था और वैसे भी वो एकदम अलग लड़की थी शुरू से ही वो इन झमेलो से दूर रही थी और अपने माता पिता की एक अच्छी और संस्कारी लड़की थी. वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी इसमे कोई शक नही था मगर वो हमेशा सिंपल बनकर रहती थी ज़्यादा बन ठन कर घूमना उसे संस्कारों के खिलाफ लगता था लेकिन वो नही जानती थी कि उसकी ये सिंप्लिसिटी ही सुख को इतनी भा गई थी कि अब वो अपने एक तरफ़ा प्यार में ही उसके लिए सभ कुछ कुर्बान करने के लिए भी तैयार था.

बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी कंडक्टर आया और उसने सुख को टिकेट्स दी और रीत न्ड अमन को घूरता हुआ सेक्सी स्माइल के साथ आगे निकल गया. उसकी स्माइल देखते ही अमन ने रीत को छेड़ते हुए कहा 'लट्टु है तेरे पे बंदा'

रीत ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए जवाब दिया 'चुप कर्जा तू समझी'

बस कॉलेज पहुँची और वो सभी नीचे उतर गये. अमन न्ड रीत ने सिमरन को हग किया. सिमरन और सुख की नज़रें एक पल के लिए मिली और फिर सिमरन पलट कर रीत न्ड अमन के साथ कॉलेज के अंदर जाने लगी. कॉलेज के गेट पे ही रोज़ की तरह कुछ सीनियर'स जोकि पक्के नशेड़ी थे वो इन तीनो परियो को आता देख एक दूसरे को इन्हे देखने का इशारा करने ल्गे. जैसे ही वो तीनो पास से गुज़री तो एक ने फ़िकरा कसा 'अरे देख ना क्या चाल है बीच वाली की'

उन तीनो के बीच रीत चल रही थी. जेसे ही रीत ने सुना तो वो मन ही मन बहुत खुश हुई लेकिन उसने शो नही होने दिया और अपनी चाल को और मस्तानी कर दिया. ऐसे कॉमेंट्स तो रोज़ की बात थी. अमन न्ड रीत को तो ये अच्छे भी लगते थे लेकिन सिमरन को ये बिल्कुल भी अच्छे नही लगते थे. सुख पीछे अपने दोस्तो के पास रुक गया था और उनके साथ ही अब अंदर की तरफ जा रहा था. सुख के ज़्यादा दोस्त नही थे बस सिर्फ़ 2 लड़को से ही उसकी ज़्यादा बनती थी और वो थे चीनू और गुरजोत. वो तीनो अच्छे दोस्त थे लेकिन उनकी दोस्ती में कितनी गहराई थी इसके बारे में कुछ नही कहा जा सकता था क्योंकि अभी नयी-2 दोस्ती हुई थी उनकी. वो तीनो सीधा अपनी क्लास की तरफ निकल गये.

कॉलेज में एक पार्टी और थी जिसका काम था सिर्फ़ गुंडागर्दी करना और नशे करना. इस पार्टी का लीडर था पर्म. पर्म अपने गाओं के सरपंच का लड़का था और एक नंबर. का निकम्मा और नशेबाज़ था. कॉलेज की हर सुंदर लड़की के उपर उसकी आँख रहती थी और बहुत सी लड़किया उसके नीचे से गुज़र चुकी थी और तो और एक मेडम भी उसके चुंगल से बच नही पाई थी और वो मेडम का नाम रमण था और सभी उन्हे रमण मॅम ही बुलाते थे. पर्म ने रमण मॅम को कॉलेज की लॅब में कॉलेज के ही एक लेक्चरार राजपूत सर के साथ नगन हालत में पकड़ लिया था बस तब से ही ये सिलसिला चला आ रहा था और रमण मॅम परम से चुदती आ रही थी. परम का गॅंग कॉलेज में मशहूर था कोई उनसे पंगा लेने की हिम्मत नही करता था और उसकी गॅंग में दो और स्टूडेंट थे जिनका कि कॉलेज में काफ़ी प्रभाव था और वो थे तेजवीर और समीर. ये दोनो लड़के और परम इन सब से सारा कॉलेज डरता था और कोई इनसे पंगा लेने की हिम्मत नही करता था. ये सब खुद तो नशा करते ही थे साथ ही साथ कॉलेज के बाकी स्टूडेंट्स को भी इस दलदल में खीच रहे थे. कॉलेज में कुछ स्टूडेंट्स ने एकजुट्ट होकर कयि दफ़ा पर्म गॅंग के खिलाफ आवाज़ उठाई थी मगर उनकी आवाज़ को सुना तक नही गया और उल्टा उन स्टूडेंट्स को पर्म की पिटाई का शिकार होना पड़ा था.

सुख , अमन , रीत न्ड सिमरन इन सब के लिए कॉलेज एकदम नया माहौल था अब देखना था कि वो इस माहौल में खुद को केसे अड्जस्ट कर पाते हैं.

सभी लेक्चर. ख़तम होने के बाद रीत , अमन न्ड सिमरन कॉलेज से निकल कर बस स्टॉप की तरफ चल पड़ी. सुख उन्हे कहीं दिखाई नही दिया. अमन ने उसे कॉल की तो पता च्ला सुख पहले से ही बस स्टॉप पे उनका वेट कर रहा था.

पर्म न्ड पार्टी कॉलेज के गेट पे ही खड़ी थी और हर आने जाने वाली लड़की को ताड़ रही थी. तभी तेजवीर की नज़र मटक-2 कर उनकी तरफ आ रही 3 लड़कियों के उपर पड़ी ये कोई और नही रीत , अमन न्ड सिमरन ही थी. उसने उन्हे देखते ही अपने बाकी दोनो दोस्तो परम अंड समीर को कहा 'अरे देखो कितनी मस्त आइटम आ रही है'

पर्म न्ड समीर ने उस तरफ देखा जिस तरफ से वो तीनो आ रही थी और वो दोनो भी उन्हे देखते ही रह गये. जैसे ही वो तीनो उनके पास आई तो पर्म ने अपनी जगह से उठ कर उनके रास्ते में आते हुए कहा 'हेलो जी कैसी हो'

रीत को पर्म की इस हरकत से बहुत गुस्सा आया मगर वो कुछ बोली नही क्योंकि पर्म के बारे में कॉलेज के कुछ ही दिनो में उन्होने सुन लिया था. वो तीनो नज़रें झुकाए आगे निकलने लगी लेकिन पर्म ने अपनी राइट आर्म उनके आगे करते हुए कहा 'अरे यार मेरी बात तो सुनती जाओ'

उसकी आवाज़ सुनते ही वो तीनो रुक गई और पर्म के बोलने का वेट करने लगी. पर्म ने आगे कहा 'मैं तो सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि आप जूनियर की सुरक्षा हम सीनियर'स का फ़र्ज़ है इस लिए जब भी आपको यहाँ कोई तंग करे तो सीधा हमे आकर बताना'

 


रीत , अमन और सिमरन ने पर्म के बारे में ऐसा तो नही सुना था जैसा कि वो बोल रहा था. फिर भी रीत न्ड पार्टी को अच्छा लगा और रीत न्ड अमन ने मुस्कुरा कर उसे थॅंकस बोला. पर्म ने सिमरन की तरफ देखा वो बिचारी नज़रें झुकाए चुप चाप खड़ी थी. पर्म ने रीत न्ड अमन को हस्ता देख अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा 'बाइ दा वे आइ म पर्म'

रीत न्ड अमन ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया और अपना परिचय दिया. पर्म ने सिमरन की तरफ हाथ बढ़ाया तो सिमरन ने भी डरते-2 उससे हाथ मिला लिया और वो तीनो आगे निकल गई. पर्म जैसे ही समीर न्ड तेजवीर के पास आया तो वो बोले 'वाह भाई क्या आक्टिंग की लगता है मछलिया फस जाएगी जाल में'

पर्म ने हाथ को सूंघते हुए कहा 'यार मछलिया तो कयामत है कयामत'

फिर वो तीनो उन तीनो लड़कियों की मटकती गान्ड को घूरते रहे जब तक वो बस स्टॉप तक नही पहुँच गई. पर्म से दूर होते ही अमन बोली 'अरे यार ये तो अच्छा बंदा है लोग तो ऐसे ही ग़लत बोलते है इसके बारे में'

रीत बोली 'इतनी जल्दी किसी पे विश्वास नही करते'

अमन बोली 'अरे मेरा मतलब् है कि पहली मुलाक़ात में तो अच्छा इंप्रेशन है ना उसका'

रीत हँसते हुए बोली 'हां ये बात तो है'

सिमरन उन्दोनो की बातों को सुन कर मुस्कुराती रही. आख़िर वो बस स्टॉप पे पहुँची और बस के आते ही सुख को साथ लेकर उसमे चढ़ गई.

.........................

मनप्रीत घर में टीवी देख रही थी. मनप्रीत रीत की मम्मी थी और उनकी एज 36-37 के करीब थी. दिखने में वो टिपिकल पंजाबन औरतें जेसी दिखती थी और उनका जिस्म एकदम कसा हुया था. असल में रीत बिल्कुल उनके उपर ही तो गई थी. मनप्रीत ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहनती थी और वो भी एकदम कसे हुए और पारदर्शी होते थे. सजने सँवरने का शॉंक तो उसे शुरू से ही था. शादी के बाद हालाँकि उसके इस शॉंक में कमी ज़रूर आई थी लेकिन फिर भी उसे जब भी मोका मिलता वो खुद को सजाने लग जाती थी. आज भी उसने ऑरेंज कलर का हल्का सा सलवार कमीज़ पहना था और कमीज़ के उपर वाइट कलर के हल्के फूल थे और सलवार बिल्कुल प्लेन थी. उसका कमीज़ बिल्कुल टाइट था जोकि उसके बदन से चिपका हुआ था और मनप्रीत की सब से बड़ी ख़ासियत थी उसके बड़े-2 मम्मे जोकि हमेशा तन कर खड़े रहते थे. गाओं के सभी लड़के और उसकी उमर के बंदे उसपे मरते थे लेकिन मनप्रीत ने शादी के बाद कभी किसी को आँख उठा कर नही देखा था. शादी से पहले कॉलेज में उसके 2 लड़कों के साथ अफेर थे और उन दोनो ने मनप्रीत को खूब चोदा था मगर शादी के बाद मनप्रीत ने खुद को अपने पति हरजीत तक ही सीमित रखा था. शादी के पहले कुछ साल तो हरजीत ने उसे खूब चोदा था मगर अब उसकी दिलचस्पी इसमे कम हो गई थी. वैसे भी घर की ज़मीन कम होने की वजह से हरजीत एक प्राइवेट जॉब करता था और थक हर कर घर आने की वजह से अब वो मनप्रीत को टाइम नही दे पाता था. मनप्रीत को भी अब इस से कोई शिकायत नही थी और वो भी अपने पति और एक बेटी के साथ खुश थी. आज भी उसने घर का काम निपटाने के बाद नाहकर खुद को अच्छे से सज़ा संवार कर ही टीवी देखना शुरू किया था. इस उमर में भी उसका जिस्म एकदम कसा हुया था और उसका फिगर नॅचुरल पंजाबन औरतों जेसा 36-30-36 था. मनप्रीत टीवी देख रही थी और उसके पति काम पर गये हुए थे और रीत भी अभी कॉलेज से नही लौटी नही थी. मनप्रीत को डोर बेल सुनाई दी तो वो पास ही पड़ी अपनी चुन्नी उठाकर दरवाज़ा खोलने गई. उसने चुन्नी को गले में डालते हुए दरवाज़ा खोला.

सामने खड़े शख्स ने दोनो हाथ जोड़कर कहा 'सत श्री अकाल भरजाई जी'

मनप्रीत ने मुस्कुराते हुए दोनो हाथ जोड़े और जवाब दिया 'सत श्री अकाल जीजा जी आइए अंदर आ जाइए'

ये शक्ष मनप्रीत की ननद का पति गुरनाम था और पोलीस में उँची पोस्ट पर था. दिखने में अच्छा था पूरा ताकतवर और मूछ उपर को चढ़ा कर रखता था. पहली नज़र में उसको देखने वाला डर सा जाता था. उसके साथ एक और आदमी था जोकि पोलीस की वर्दी पहने हुए था शायद वो कोई हवलदार था. मनप्रीत ने उनके अंदर आते ही दरवाज़ा बंद किया और उन्हे सोफे पे बैठने का इशारा करते हुए बोली 'जी आप बैठिए मैं पानी लाती हूँ'

गुरनाम सोफे पे बैठ गया और अपने साथ वाले हवलदार को बैठने का इशारा करते हुए किचन की तरफ जा रही मनप्रीत के हिलते चूतड़ देखने लगा. गुरनाम की आँख तो मनप्रीत के उपर शुरू से ही थी लेकिन वो कभी आगे नही बढ़ पाया था. मनप्रीत को भी इसकी भनक थी कि गुरनाम उसको गंदी नज़र से देखता है मगर उसने कभी ऐसा कदम नही उठाया था कि गुरनाम को आगे बढ़ने का मोका मिले. मनप्रीत पानी लेकर वापिस आई और झुक कर दोनो को पानी दिया. गिलास उठाते वक़्त गुरनाम की नज़र मनप्रीत के कमीज़ से झाँक रहे मम्मो पे पड़ी और दूसरे ही पल मनप्रीत के सीधा हो जाने से वो फिरसे उसके कमीज़ में क़ैद हो गये.

मनप्रीत पास ही सोफे पे बैठ गई और बोली 'जी और बताओ दीदी केसी है'

गुरनाम ने मूछो को ताव देते हुए कहा 'सब ठीक आ जी मालक की किरपा से आप बताओ'

मनप्रीत बोली 'सब ठीक है जी आज केसे आना हुआ'

गुरनाम टाँग पे टाँग रख कर बीती मनप्रीत की उठी हुई जाँघ को घूरता हुआ बोला 'बस यही पास के गाओं में इंक्वाइरी के लिए आए थे सोचा आपसे मिलता चलूं'

मनप्रीत ने गुरनाम की नज़र को पहचानते हुए अपनी टाँग दूसरी टाँग से उतार कर सीधी करते हुए कहा 'ये तो अच्छा किया आपने आप बैठिए मैं छाई बनाती हूँ'

गुरनाम बोला 'वो हरजीत नही दिख रहा'

'वो तो काम पे गये है अभी प्राइवेट जॉब शुरू की है एक' मनप्रीत ने उठते हुए कहा और किचन की तरफ चली गई.

गुरनाम फिरसे उसकी लहराती गान्ड को घूरता रहा. कुछ देर ऐसे ही बैठने के बाद गुरनाम उस हवलदार को बोला 'मैं वॉशरूम होकर आता हूँ'

 
गुरनाम वॉशरूम कर के बाहर निकला और ड्रॉयिंग रूम की तरफ आने लगा. जेसे ही वो किचन के सामने से गुज़रा तो उसकी नज़र अंदर चाइ बना रही मनप्रीत के उपर पड़ी. मनप्रीत उसकी तरफ पीठ किए खड़ी थी और उसके बड़े-2 चूतड़ एकदम कसे हुए थे और उसका कमीज़ कमर से टाइट होने की वजह से उसकी गान्ड की गोलाई बहुत ही जबरदस्त लग रही थी. मनप्रीत ने चुन्नि को उतारकर साइड पे रखा हुया था. गुरनाम का दिल कर रहा था कि वो अभी जाकर उसे पीछे से पकड़ ले लेकिन अगर मनप्रीत ने शोर मचा दिया तो उसका क्या होगा. यही डर उसे सता रहा था. एक पल के लिए कुछ सोचता हुआ वो किचन को तरफ बढ़ गया और मनप्रीत के बिल्कुल पास जाकर बोला 'वो अभी बनी नही चाइ'

मनप्रीत ने जेसे ही उसकी आवाज़ सुनी तो एकदम से घबरा गई और तेज़ी से पीछे पलटी तो गुरनाम की मजबूत छाती से टकरा गई. उसके बड़े-मम्मे एक पल के लिए गुरनाम की छाती में दब से गये. गुरनाम की नज़र सीधी मनप्रीत के ब्स्डे-2 मम्मो पे गई और उसके हाथ मनप्रीत को संभालने के लिए उसकी कमर में. बिना चुन्नी के मनप्रीत के बड़े-2 कबूतर सूट से बाहर निकलने को हो रहे थे. मनप्रीत ने खुद को संभाला और एकदम उनसे दूर होकर अपनी चुन्नि उठा ली और गले में डालते हुए बोली 'जी आप यहाँ'

गुरनाम भी संभलता हुया बोला 'वो मैं वॉशरूम से आ रहा था तो सोचा पूछता चलूं कितना टाइम लगेगा'

मनप्रीत अपने बालों की लट को चेहरे से हटाती हुई बोली ' जी बस तियार है अभी लाई'

गुरनाम कुछ देर के लिए चुप रहा और फिर बोला 'वो हरजीत को कितनी सॅलरी मिलती है'

मनप्रीत अब सम्भल चुकी थी और बोली 'जी यही कोई 7-8 हज़ार'

गुरनाम बोला 'इतने में तो गुज़ारा मुश्क़िल है'

मनप्रीत बोली 'जी वो खेती के पेसे भी आ जाते हैं'

गुरनाम बोला ' फिर भी कमाई तो जितनी ज़्यादा हो उतना अच्छा है'

मनप्रीत बोली 'जी ये बात तो सही है आपकी'

गुरनाम फिरसे बोला 'वैसे मेरे एक दोस्त का खुद का बिज्नीस है अगर हरजीत चाहे तो वहाँ जॉब लगवा सकता हूँ मैं उसकी वो सॅलरी भी कम से कम 15000 तक देगा तुम पूछ लेना उससे'

मनप्रीत उसकी बात सुनकर खुश होती हुई बोली 'जी इसमे पूछना क्या ये तो बहुत अच्छा ऑफर है'

गुरनाम ने मनप्रीत की आँखों में चमक देखते ही असली बात की 'लेकिन एक प्रॉब्लम. है'

मनप्रीत ने चाइ कप में डालते हुए कहा 'जी केसी प्रॉब्लम'

गुरनाम उसके बिल्कुल नज़दीक होकर अपने एक हाथ से मनप्रीत के नर्म चूतड़ को दबाता हुया बोला 'उसके लिए तुम्हे कुछ करना होगा'

मनप्रीत एकदम सिहर उठी और गुरनाम का हाथ झटकती हुई बोली 'ये आप क्या कर रहे हो'

गुरनाम ने आगे बढ़ते हुए मनप्रीत को पीछे से बाहों में भर लिया और कहा 'बस मुझे खुश कर दो एक बार'

मनप्रीत को बहुत गुस्सा आ रहा था और उसने पूरे ज़ोर से गुरनाम को पीछे धकेला और बोली 'आप प्लीज़ बाहर चले जाइए यही अच्छा होगा'

गुरनाम फिरसे बोला 'सोच लो ऐश करोगी वैसे भी तुम्हारी जवानी ऐसे ही बीत रही है किसी काम आ जाएगी और तेरी बच्ची का फ्यूचर अच्छा हो जाएगा'

मनप्रीत को कुछ सुन ना अच्छा नही लग रहा था और वो फिरसे गुस्से मे बोली 'मैने कहा ना बाहर जाइए यहाँ से नही तो मैं शोर मचा दूँगी'

गुरनाम ने आखरी दाव खेला 'सोच लो सिर्फ़ एक बार की ही बात है सारी जिंदगी ऐश करोगी. मुझे सोच कर बता देना'

कहते हुए गुरनाम बाहर चला गया. मनप्रीत की आँखों में आँसू आ गये थे. किसी तरह से उसने खुद को संभाला और चाइ लेकेर बाहर चली गई. किसी तरह से उसने चाइ पीने तक गुरनाम की नज़रो का सामना किया और फिर जैसे ही वो जाने के लिए उठे तो मनप्रीत ने राहत की साँस ली. घर से निकलते वक़्त एक दफ़ा फिरसे गुरनाम ने मनप्रीत का हाथ पकड़ा और मुस्कुरा कर बाहर निकल गया. मनप्रीत ने गुस्से से दरवाज़ा बंद किया और सीधा अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और आज हुई घटना के बारे में सोचने लगी.

बस रीत के गाओं के बस स्टॉप के रुकी और रीत , अमन और सुख उसमे से नीचे उतर गये और बस आगे बढ़ गई. सिमरन का गाओं उनके गाओं से आगे था इसलिए वो बस में ही खड़ी रहकर अपने गाओं के आने का इंतज़ार करने लगी. सुख और अमन अपने घर की तरफ मूड गये और रीत तेज़-2 कदमो के साथ अपने घर की तरफ बढ़ने लगी. गर्मी शुरू होने लगी थी जिसकी वजह से धूप अपना रंग दिखा रही थी. रीत के तेज़ चलने की वजह से उसके चूतड़ कुछ ज़्यादा ही मटक रहे थे. वो अपने घर से थोड़ा ही दूर थी कि उसे आगे से दो लड़के आते हुए दिखाई दिए. ये दोनो का रोज़ का काम था रीत को इसी वक़्त गली में मिलना. ये दोनो रीत के गाओं के ही थे और पिछले काफ़ी दिनो से रीत के उपर लाइन मार रहे थे. रीत भी अब जवानी की दहलीज़ पर थी इसलिए अपने इर्द-गिर्द इस तरह लड़को का मंडराना अब उसे भी अच्छा लगने लगा था. इन दोनो लड़को में से एक लड़का जो की रीत को अच्छा लगने लगा था वो था गुलशन. दिखने में एकदम मस्त पूरी मस्क्युलर बॉडी और जिम का शोकीन था. बाल पहलवानो की तरह बिल्कुल छोटे-2 और चेहरे पे हल्की दाढ़ी और मूछ रंग ना ज़्यादा गोरा और ना ज़्यादा काला जेसा की आम तौर पे गाओं के लड़को का होता है बिल्कुल वैसा ही था. उसकी सब से अट्रॅक्टिव चीज़ थी उसकी बॉडी. एकदम बॉडी बिल्डर जेसी खूब कसा हुया बदन चौड़ी छाती और डोले-शोले कुल मिलाकर वो दिखने में मस्त था और 10 में से 6-7 लड़किया उसे पहली नज़र में दिल देने के लिए तैयार हो सकती थी. उसके साथ जो दूसरा लड़का था वो भी रीत के गाओं का ही था और उसका नाम हरप्रीत था. शकल सूरत में अगर हरप्रीत को गुलशन से मिलाया जया तो वो उससे कही आगे था एकदम गोरा चिकना और चेहरे पे हल्की दाढ़ी और मूछ थी. लेकिन बॉडी के मामले में वो थोड़ा गुलशन से पीछे था. एक नॉर्मल सी बॉडी थी उसकी लेकिन फिर भी वो एकदम परफेक्ट था किसी भी लड़की के सपनो के राजकुमार जेसा. ये दोनो काफ़ी दिनो से आते जाते रीत का रास्ता रोक रहे थे. जबसे इन भावरों को रीत के जवान होने की महक महसूस हुई थी तब से ही दोनो भावरे इस महक फैलाने वाले फूल का रस पीने के लिए मचल रहे थे लेकिन रीत नाम का ये फूल इतनी जल्दी किसी को अपना रस पिला दे ऐसा ना तो कुदरत को मंजूर था और नही रीत की जवानी को अब देखना था कोन्सा भावरा इस फूल का रस पीने में कामयाब होने वाला था.

 
उन दोनो को जेसे ही रीत आती हुई दिखाई दी तो दोनो एकदुसरे को देखते हुए बोले 'अरे देख माल आ गया'

रीत को ज़्यादा तो नही मगर उनका 'माल' शब्द सुनाई दे गया था और उसने आइडिया लगा लिया था कि वो उसे ही माल बोल रहे थे. जेसे ही रीत उनके पास से गुज़री तो गुलशन उसके साथ-2 चलने लगा और बोला 'किवे ओ सोहनेयो'

रीत ने कोई जवाब तो नही दिया मगर उसका नज़रो को झुकाकर मुसकराना देख गुलशन समझ गया की चिड़िया पिंजरे में आ सकती है.

गुलशन ने हिम्मत दिखाते हुए धीरे से साथ चलते हुए रीत की कलाई पकड़ ली और कहा 'आइ लव यू सोहनेयो'

रीत एक तरफ कलाई पकड़े जाने से घबरा गई तो दूसरी और गुलशन की बात सुनकर शर्मा भी गई. उसने ज़ोर लगाते हुए अपनी क्लाई छुडाइ और तेज़ी से भाग कर अपने घर के पास हो गई. गुलशन वही खड़ा होकर उसे देखता रहा. रीत जेसे ही अपने घर के मेन गेट के सामने पहुँची तो उसने एक दफ़ा घूम कर गुलशन की तरफ देखा और मुस्कुराती हुई दरवाज़ा खोल कर अंदर दाखिल हो गई. गुलशन ने जेसे ही रीत को मुस्कराते हुए देखा तो उसने दिल के साथ अपने लंड को भी उछलते हुए महसूस किया और भाग कर हरप्रीत के पास आकर बोला 'देखा साले कहा था ये सेट हो जाएगी'

हरप्रीत उससे जलता हुया बोला 'अभी सेट कहाँ हुई'

गुलशन बोला 'साले तूने देखा नही केसे मुस्कुरा कर गई वो'

हरप्रीत उसकी खिचाई करता हुया बोला 'अरे वो इसलिए हँसी कि केसा बंदर मुझे प्रपोज कर रहा है'

गुलशन ने एक घुसा उसे मारते हुए कहा 'साले अब जल मत देखना केसे नंगी करके चोदुगा तेरे सामने इसे'

हरप्रीत हस्ता हुआ बोला 'अरे मैं तो मज़ाक क्र रहा था तू इसे पता ले मैं किसी और को देखता हूँ वैसे भी हम मिल कर ही तो मज़े करेंगे हमेशा की तरह'

गुलशन उससे हाथ मिलाता हुया बोला 'बिल्कुल यार चल अब ट्यूब्ल पे चलते हैं आज तो दारू बनती है शाम को'

हरप्रीत बोला 'अरे पहले शाम को ग्राउंड में भी जाना है प्रॅक्टीस के लिए शाम को देखेगे अगर मूड बना तो'

फिर वो दोनो अपने खेतों की तरफ निकल गये.

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शाम हो चुकी थी और रीत सो कर उठी थी और हाथ में चाइ का कप पकड़ कर ड्रॉयिंग रूम में टीवी देख रही थी. उसने कपड़े चेंज कर लिए थे और अब एक ब्लॅक टी शर्ट और पिंक कलर का लोवर पहना था. लोवर उसकी टाँगों से चिपका हुआ था और उसकी गान्ड भी फुटबॉल की तरह शेप में दिखाई दे रही थी. टीवी में कुछ खास नही आ रहा था इसलिए बोर होकर रीत ने चाइ ख़तम की और टीवी बंद करके मम्मी के रूम में गई. मनप्रीत भी अलमारी में कपड़े ठीक कर रही थी. रीत ने मनप्रीत को कहा 'मम्मी मैं अमन के घर जा रही हूँ'

मनप्रीत ने चेहरा घूमकर उसे जवाब दिया 'ओके बेटा जल्दी आ जाना'

रीत बोली 'ओके मम्मा'

रीत ने एक चुन्नि ऐसे ही टी शर्ट के उपर से गले में डाल ली और अमन के घर की तरफ चल पड़ी. गाओं होने की वजह से लड़कियों के लिए चुन्नी का इस्तेमाल करना लगभग ज़रूरी ही था. रीत अपनी गान्ड मटकाती अमन के घर पहुँची तो अमन भी टीवी ही देख रही थी और सेम सिचुयेशन में वो भी बोर हो रही थी. रीत के आते ही उसने टीवी बंद किया और बोली 'रीत चल ना घूम के आते हैं ग्राउंड की तरफ मैं तो बोर हो रही हूँ'

रीत को भी घूम कर आना ही सही लगा लेकिन अकेले जाने की बात से चिंतित होकर वो बोली 'हम दोनो अकेली थोड़ा ना जाएगी उस तरफ कितने लड़के होते है शाम को'

अमन को भी उसकी बात सही लगी वैसे अमन को कोई प्रॉब्लम नही थी बल्कि वो तो जाना ही उन लड़को को देखने के लिए चाहती थी. लेकिन घरवालो और अपने भैया सुख की वजह से उसने अपनी भाभी को साथ लेजाना सही समझा. उसकी कोई ओरिज्णल भाभी तो नही थी लेकिन उसके ताया के लड़के की शादी हो चुकी थी और उसकी वाइफ का नाम कमल था उससे अमन की अच्छी बनती थी. कमल भी दिखने में एकदम पटाका थी. अभी शादी को 2 ही साल हुए थे लेकिन कोई बेबी नही था. पूरे गाओं के लड़को में कमल फेमस थी

 
हर कोई उसकी लेना चाहता था मगर अभी तक तो यह सुख केवल उसके पति को ही मिल पाया था. वैसे स्वाभाव से कमल एक नंबर. की चालू थी लेकिन शादी के बाद अभी तक उसका चालूपना निकल कर बाहर नही आया था. अमन ने अपने ताया के घर जाकर भाभी को आवाज़ दी और वो तीनो ग्राउंड की तरफ घूमने निकल गई. अमन ने क्रीम रंग का साकवर सूट पहना था और वही कमल भाभी ने येल्लो कलर का हल्का ट्रांसपेरेंट सूट पहना था और पीछे पीठ पे उनकी काले रंग की ब्रा की स्ट्रिप्स सॉफ दिखाई दे रही थी. भाभी का फिगर 34-30-36 बहुत मस्त था. उनकी एज 28 के करीब थी. वो बातें करती हुई ग्राउंड के पास पहुँच चुकी थी और काफ़ी सारे गाओं के लड़के वहाँ कब्बड़ी और कुश्ती की प्रॅक्टीस कर रहे थे. बहुत से लड़को की नज़र पास के रास्ते से गुज़र रही इन तीन हसिनाओ पे भी गढ़ी हुई थी और वो तीनो भी चोरी-2 उन लड़को के जिस्म को घूर रही थी. अमन की नज़र एक लड़के की बॉडी पे जाकर अटक सी गई. क्या बॉडी थी उस लड़के की एकदम कसी हुई और चौड़ी छाती और वो भी वॅक्सिंग करवाई हुई बिल्कुल किसी हीरो की तरह. अमन के जिस्म में उस बॉडी को देखकर सनसनाहट सी हुई. जेसे ही उसने नज़र उठाकर उस लड़के का चेहरा देखा तो वो खुश हो गई. ये लड़का कोई और नही गुलशन ही था. अमन मन ही मन बोली 'कितनी सेक्सी बॉडी है दिल करता है अभी कस कर उसके सीने से लग जाउ'

जेसे ही रीत और कमल की नज़र उसकी बॉडी पे पड़ी तो वो दोनो भी खुद को उसकी तरफ अट्रॅक्ट होने से बचा नही पाई. रीत और गुलशन की नज़र मिली और दोनो मुस्कुरा उठे और जेसे ही गुलशन की नज़र अमन से टकराई तो वो भी मुस्कुरा पड़ी. गुलशन के लिए तो दोनो हाथो में जेसे लड्डू आ गये. उसका लंड उसके अंडरवेर में अकड़ गया. वो तीनो चलती हुई आगे निकल गई और हरप्रीत बिचारा उदास खड़ा देखता रहा लेकिन उसे किसी ने घास नही डाला. फिर वो प्रॅक्टीस करने लगे और अंधेरा होते ही घरो को लौट गये. अमन , रीत न्ड कमल भाभी भी वहाँ से सीधा गुरुद्वारे गई और फिर घर वापिस आ गई.

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रात को हरजीत काम से वापिस आ गया था और मनप्रीत ने रात का खाना बनाया और रीत ने अपने पापा को खाना दिया और फिर खुद भी खा लिया और आख़िर में मनप्रीत ने खुद भी खाना खाया और किचन का सारा कम ख़तम करके अपने बेडरूम में पहुँची. हरजीत बैठे अख़बार पढ़ रहे थे. मनप्रीत उनके पास बैठ कर बोली 'जी आपको सॅलरी मिली आज या नही'

हरजीत अख़बार पढ़ता हुया बोला 'हां मिल गई'

मनप्रीत ने खुश होकर कहा 'ओके तो मेरा 1000 रुपया. कहाँ है आपने सूट दिलाने का वादा किया था'

हरजीत थोड़ा परेशानी भरे स्वर में बोला 'प्रीत इस वार और रुकजा अगली वार पक्का ले लेना तू तो जानती है रीत की अड्मिशन में कितने पैसे खरच हो गये'

मनप्रीत थोड़ी रूठ कर बोली 'पिछले 3 महीने से रुकती आ रही हूँ अब और कितना रुकु'

हरजीत को गुस्सा आ गया और वो बोला 'तो मैं क्या करू अब खुद को बेच दूं'

मनप्रीत को ऐसी उम्मीद नही थी और वो एकदम से खड़ी हुई और फिरसे किचन में आकर दूध गरम करने लगी. अपने परिवार की माली हालत वो अच्छे से जानती थी और इसी वजह से वो अब तक रुकती आ रही थी मगर इस महीने भी हरजीत ने उसे रुकने के लिए बोल दिया था जिसकी वजह से उसका गुस्सा भी कही ना कही जायज़ था. वो किचन में खड़ी दूध गर्म कर रही थी कि उसे सुबह की घटना याद आ गई. केसे उसकी ननद के हज़्बेंड ने उसे पीछे से पकड़ लिया था. एक पल के लिए उसका दिल किया अभी जाकर उसका मूह तोड़ दे लेकिन दूसरे ही पल उसे गुरनाम के आखरी बोल याद आए 'सोच ले सिर्फ़ एक बार ही करना है सारी जिंदगी ऐश करेगी'

एक पल के लिए मनप्रीत ने सोचा कि सिर्फ़ एक बार की ही तो बात है लेकिन दूसरे ही पल उसकी मर्यादा ने उसे दुतकार दिया. वो इसी कशमकश में थी एक तरफ उसका दिमाग़ कह रहा था कि जेसा है सब ठीक है लेकिन दूसरी तरफ वो सोच रही थी कि अगर एक बार उसके साथ करने से सब कुछ सही हो सकता है तो इसमे ग़लत भी क्या है. वो कोई फ़ैसला नही कर पा रही थी आख़िर उसने दूध गिलास में डाला और रीत को उसके कमरे में दूध देकेर अपने कमरे में पहुँच गई और हरजीत को गिलास पकड़ाते हुए उसके मूह से खुद ही निकल गया 'वो आज गुरनाम जीजू आए थे और एक नोकरी के लिए बोल रहे थे आपके लिए सॅलरी भी अच्छी है'

अगले ही पल जब मनप्रीत को एहसास हुआ कि उसने ये क्या बोल दिया. लेकिन अब क्या हो सकता था. शायद मनप्रीत के दिमाग़ में वोही बातें घूम रही थी और उसे पता भी नही चला था कि उसने कब ये बात बोल दी थी.

हरजीत उसकी बात सुनकर बोला 'अच्छा कब आए थे'

मनप्रीत बिस्तर पर बैठती हुई बोली 'सुबह आए थे उन्हे काम था पास के किसी गाओं में'

हरजीत बोला 'केसी जॉब है कुछ बताया'

 
मनपीट कुछ बताना नही चाहती थी उसे पता था कि अगर ये जॉब उसके पति ने करने की इच्छा ज़ाहिर की तो उसे गुरनाम के बिस्तर में जाना ही पड़ेगा. हरजीत ने फिरसे पूछा तो मनप्रीत ने बता ही दिया 'कोई उनके दोस्त का बिज्निस है उसी में बोल रहे थे और सॅलरी भी कम से कम 15-16000 बता रहे थे'

हरजीत की आँखें चमक उठी और वो बोला 'क्या फिर तो सुबह ही बात करता हूँ उनसे'

फिर मनप्रीत और हरजीत ने कुछ इधर उधर की बातें की और सो गये.

सुबह हो चुकी थी और रोज़ की तरह रीत कॉलेज के लिए रेडी होकर अपनी फ्रेंड अमन के घर की तरफ जा रही थी. रीत ने आज रेड कलर का पाजामी सूट पहना था जो कि उसके बदन से चिपका हुआ एकदम टाइट था. टाइट पाजामी में साइड से रीत की मांसल जांघों की पूरी शेप आसानी से दिख रही थी और पाजामी थोड़ी पारदर्शी थी इसकी वजह से उसके नीचे रीत द्वारा पहनी हुई काली पैंटी व सॉफ दिखाई दे रही थी. उसका सूट ग़ज़ब का था और उसके जिस्म के उपर ग़ज़ब लग रहा था. एक हाथ में पर्स उठाए वो मटकती हुई अमन के घर की तरफ बढ़ रही थी. जेसे ही वो अमन के घर की तरफ मूडी तो गुलशन पहले से ही रोज़ की तरह रास्ते में उसका इंतेज़ार कर रहा था. रेड कलर के सूट में रीत को देखते ही गुलशन के होश से उड़ गये. दोनो की नज़र एक दफ़ा टकराई और फिर दोनो मुस्कुरा उठे. जेसे ही रीत उसके पास से गुज़री तो वो बोल उठा 'वाह ओ रब्बा आज तो कहर लग रही हो'

रीत उसकी बात सुनकर मुस्कुरा पड़ी लेकिन बिना कोई जवाब दिए आगे निकल गई. गुलशन की नज़र रीत की बल खाती कमर और मटकती गान्ड पे पड़ी तो उसका लंड ताव में आ गया और वो उससे थोड़ी दूरी बनाकर उसके पीछे चलता हुआ बोला 'वाह डार्लिंग तुम्हारी चाल तो एकदम क़ातिलाना है'

रीत को तो अपनी तारीफ हमेशा ही अच्छी लगती थी. उसने एक दफ़ा गर्दन घुमा कर गुलशन को देखा और मुस्कुरा कर फिरसे चेहरा सामने करते हुए अपनी कमर को और ज़्यादा मटका कर चलने लगी जिसकी वजह से उसके दोनो चूतड़ कुछ ज़्यादा ही आपस में रगड़ने लगे. गुलशन ने भी इस बात को नोटीस किया और उसका हाथ खुद ब खुद ही पॅंट के उपर से ही अपने लंड पे चला गया. जल्दी ही रीत अमन के घर में दाखिल हो गई और फिर कुछ देर बाद अमन और सुख के साथ ही बाहर निकली. वो थोड़ा आगे आए तो रीत ने देखा गुलशन फिरसे वही बैठा था लेकिन अब उनके साथ सुख था इसलिए वो कुछ नही बोला. सुख से उसकी अच्छी बन ती थी और दोनो अच्छे दोस्त थे. सुख ने उसे चलते-2 हाल चाल पूछा और आगे निकल गेया. गुलशन पीछे से रीत और अमन की मटकती गान्ड को घूरता रहा. उसे पता था कि रीत एक दफ़ा घूम कर उसे ज़रूर देखेगी लेकिन उसकी अपेक्षा से उलट रीत की जगह अमन ने उसे घूम कर देखा और सेक्सी स्माइल भी दी और जवाब में गुलशन भी मुस्कुरा उठा लेकिन उसे समझ नही आया कि ये हो क्या रहा था. कुछ-2 तो वो समझ रहा था कि अमन भी उसकी लाइन में आ रही थी लेकिन वो तो रीत की गान्ड का दीवाना था. जो भी था गुलशन के दोनो हाथो में इस वक़्त मोटी चूर के लड्डू थे.

वो तीनो बस स्टॉप पे पहुँच कर बस का वेट करने लगे और जेसे ही बस आई तो वो तीनो बस में चढ़ गये और भीड़ से भरी बस उनके कॉलेज की तरफ चल पड़ी. गुलशन वहाँ से अपने खेतों की तरफ चल पड़ा और रास्ते उसे हरप्रीत भी मिल गया. फिर वो दोनो ट्यूबिवेल की तरफ निकल गये. गाओं में गेहू की कटाई का काम चल रहा था जिसकी वजह से उनका सारा दिन खेत में ही निकल जाता था. पढ़ाई तो उन्दोनो ने छोड़ दी थी और अब खेती में ही अपने घरवालो का हाथ बँटाते थे.

बस में रीत , अमन और सुख को रोज़ की तरह खड़े रहकर ही जाना पड़ रहा था और भीड़ होने की वजह से भीड़ का फ़ायदा उठाने वालो ने मोका मिलते ही रीत और अमन के चुतड़ों को दबा दिया था लेकिन ये तो अब रोज़ की बात थी और अमन के साथ-2 रीत भी अब इसका मज़ा लेने लगी थी. सिमरन रोज़ की तरह आगे सीट पे ही बैठी थी. बस उनके गाओं से इक गाओं पीछे से चलती थी जिसकी वजह से सिमरन को ज़्याटर सीट मिल ही जाती थी कभी कभार ही उसे खड़ी रहकर जाना पड़ता था. सुख ने उसका चेहरा देखा और उसमे ही खो गेया. एकदम पर्फेक्ट पंजाबन लड़की थी सिमरन. सादगी ही उसका सबसे सुंदर रूप था. आज के मॉडर्न युग में ऐसी सिंप्लिसिटी वाली लड़की का मिलना लगभग मुश्क़िल था लेकिन सिमरन इस कथन को ग़लत साबित कर रही थी. लड़के भी अक्सर मॉडर्न लड़कियों के पीछे ही भागते हैं मगर सुख को तो सिमरन की सादगी ही पसंद थी और शायद भगवान ने भी इन दोनो को एकदुसरे के लिए बनाया था. सिमरन को हालाँकि अभी तक इस का आभास नही हुआ था कि सुख उसे चाहता है लेकिन देखना था कि कब तक वो इस आभास से बची रहने वाली थी. सुख सपनो में खोया था कि कनडक्टर की आवाज़ ने उसे सपनो की दुनिया से निकला. सुख ने फ्टाफ़ट 3 टिकेट्स ली और कनडक्टर उसके पास से गुज़रता हुआ पीछे निकल गया. उसने आँखें फाड़ ते हुए रीत और अमन को देखा और गंदी सी मुस्कान देता हुया बोला 'थोड़ा साइड को हो जाइए प्लीज़'

उसकी नज़र रीत की कमीज़ को फाड़ने को उतारू हो रहे रीत के मम्मों पे थी और रीत ने भी उसे भाँप लिया था मगर उसने चुन्नी से अपनी दोनो मिसाइल'स को ढकने को कोशिश नही की क्यूंकी वो तो उसे और भड़काना चाहती थी. कंडक्टर उसके मम्मो को घूरता हुआ अपना हाथ रीत की दोनो जांघों पे फिराता हुआ गुज़र गया. रीत को उसके स्पर्श से करंट सा लगा और कनडक्टर ने बिल्कुल वेसा ही पीछे खड़ी अमन के साथ भी किया और अमन को तो उसका हाथ अपनी योनि पे भी महसूस हुया. अमन ने रीत के कान में कहा 'यार ये तो आगे ही बढ़ता जा रहा है'

रीत मुस्कुरा कर बोली 'कोई बात नही कल इसको मज़ा चखाएँगे'

 


कनडक्टर अब पीछे जा चुका था. वो दिखने में ठीक ठाक था लगभग रीत और अमन की एज का ही था या उनसे थोड़ा बहुत बड़ा हो सकता था. बाल कटे हुए मूह पे दाढ़ी काफ़ी बढ़ा रखी थी और रंग ज़्यादा काला नही नगर फिर भी ज़्यादातर उसका चेहरा काला सा ही था. बस कॉलेज पहुँची और सभी स्टूडेंट्स नीचे उतर गये और कॉलेज की तरफ बढ़ने लगे. रोज़ की तरह सिमरन उन सब से मिली और जेसे ही सिमरन ने सुख की तरफ हाथ बढ़ाया तो सुख ने पलक झपकने की भी देरी ना करते हुए उसका कोमल हाथ पकड़ लिया. कोई 15-20 सेकेंड तक सुख ने सिमरन का हाथ नही छोड़ा और वो एकटक सिमरन का चेहरा देखता रहा. कितना प्यारा और मासूम था उसका चेहरा. उसके चेहरे का अंग-2 उसकी मासूमियत की गवाही देता था. आख़िर में सिमरन ने अपना हाथ खीच लिया तो सुख कल्पना की दुनिया से बाहर आया. आज पहली दफ़ा सिमरन को भी सुख की आँखों में कुछ ऐसा दिखाई दिया जो शायद हर लड़की अपने लवर की आँखो में देखना चाहती थी. लेकिन सिमरन के लिए ये सब आसान नही था वो तो कॉलेज सिर्फ़ और सिर्फ़ पढ़ने के लिए आती थी प्यार मुहब्बत जेसे झमेलों से दूर रहने की उसने कसम खाई थी और उसके परिवार वालो ने भी हमेशा इन सब बातों से दूर रहना ही उसे सिखाया था लेकिन यहाँ चिंगारी उसे दिखाई दे चुकी थी लेकिन फिर भी सिमरन इस चिंगारी को बुझाने में ही अपनी भलाई समझती थी. वो चारो कॉलेज में दाखिल हुए और सुख अपने दोस्त गुरजोत और चिनू के पास जाकर उनसे मिलने लगा और सिमरन , रीत और अमन क्लासस की तरफ चली गई.

पहला लेक्चर. ख़तम होते ही वो तीनो बाहर आई और कॅंटीन की तरफ चली गई. सुख लेक्चर. वगेरा कम ही लगाता था और अपने दोस्तो के साथ ही इधर उधर घूमता रहता था.

अमन , रीत और सिमरन कॅंटीन में आकर एक टेबल के इर्द गिर्द बैठ गई और कुछ खाने को ऑर्डर किया.

उधर पर्म न्ड पार्टी भी कॅंटीन में एंटर हो गई और जेसे ही उन्होने तीनो हसीनाओं को वहाँ देखा तो वो सीधे उन्ही के टेबल पे जाकर खड़े हो गये और पर्म बोला 'हम बैठ सकते हैं जी यहाँ'

अमन ने मुस्कुरा क्र जवाब दिया 'जी बिल्कुल बैठिए'

पर्म , समीर और तेजवीर तीनो वही चेर्स पे बैठ गये और पर्म बोला 'और बताइए क्या हाल है आपके'

अमन ने ही फिरसे जवाब दिया 'एकदम बढ़िया'

पर्म रीत की तरफ देखता हुआ बोला 'तो क्या लेंगी आप तीनो'

पर्म चाहता था रीत कुछ बोले लेकिन इस बार भी अमन ही बोली 'जी कुछ नही थॅंकयू सो मच'

असल में पर्म अट्रॅक्ट तो रीत को करना चाहता था मगर अट्रॅक्ट अमन हो रही थी. आख़िर अमन भी कम नही थी तो पर्म ने उसकी और मुखातिब होते हुए मुस्कुरा कर कहा 'ऐसा तो नही चलेगा जी आप हमारे कॉलेज के मेहमान हो फ्रेशर्ज़ हो तो आपकी सेवा तो बनती है'

उसने कहते हुए कॅंटीन के छोटू को 6 कोल्ड ड्रिंक लाने को कहा. अमन ने आगे से सिर्फ़ मुस्कुरा दिया. सिमरन इस बीच चुप चाप बैठी थी और वही रीत अपने मोबाइल से छेड़ छाड़ कर रही थी. रीत की पर्म के प्रति बेरूख़ी का भी एक रीज़न था असल में उसने पहले ही दिन पर्म को कॉलेज के बस स्टॉप पे एक लड़के को बे रहमी से मारते हुए देखा था. इसलिए रीत अच्छी तरह समझ रही थी कि ये सब अच्छेपन का दिखावा पर्म सिर्फ़ उसे पटाने के लिए कर रहा था लेकिन उसकी सहेली तो उसकी ओर अट्रॅक्ट होती जा रही थी. रीत देख रही थी कि अमन खूब हंस-2 कर उनसे बात कर रही थी और वही सिमरन उसकी तरह ही चुप बैठी थी. आख़िर कोल्ड ड्रिंक ख़तम हुई और पर्म ने उठते हुए कहा 'ओके तो फिर मुलाक़ात होगी और हां आप मेरा नंबर. लिख लो अगर कॉलेज में कोई भी प्रॉब्लम हो तो बस याद कर लेना'

फिर उसने अपना न. 99885***** लिखाया और अमन ने मोबाइल में झट से फीड कर लिया और वो तीनो वहाँ से चले गये. उनके जाते ही रीत भड़क कर अमन की तरफ देखती हुई बोली 'ओये मेडम इनसे ज़्यादा चिपक मत ये अच्छे लड़के नही है समझी'

अमन हँसती हुई बोली 'अरे देखा नही कितनी हेल्प की तो बात कर रहा था वो तू भी ना रीत बस सभी को एक ही नज़र से देखती है'

सिमरन ने भी यहाँ कुछ कहना सही समझा 'आइ थिंक रीत सही कह रही है अमन ये पर्म एक नंबर. का बदमाश है और मेरे ही गाओं का है'

अमन को ये सब अच्छा नही लगा और वो बोली 'लीव इट यार मैं तो जस्ट उनसे बात कर रही थी छोड़ो चलो लेक्चर. में चलते हैं'

वो तीनो उठी और क्लास की तरह चल पड़ी.

सुख अपने दोस्त गुरजोत और चिनू के साथ गाड़ी में जेडी रूट पे था और तीनो ने निकलने से पहले थोड़ी-2 अफ़ीम भी खाई थी और तीनो अच्छे सरूर में थे. सुख ने कॉलेज आने से पहले ऐसा कुछ नही किया था लेकिन कॉलेज में इन दोस्तो के संग वो काफ़ी गंदी आदतों का शिकार हो चुका था लेकिन वो दिल का बहुत ही अच्छा था हमेशा अपने दोस्तो के लिए जान तक हाज़िर करने को तैयार रहता था मगर उसके ये दोनो दोस्त तो उसको जेम लगा हुआ ब्रेड समझ रहे थे और मज़े से खा रहे थे. घर की ज़मीन अच्छी थी और अच्छे ख़ासे पेसे भी सुख को पॉकेट मनी के रूप में मिलते थे लेकिन फिर भी घरवालो ने उसे बाइक ले कर नही दी थी. कुछ हद तक तो पेरेंट्स का उसके उपर कंट्रोल था लेकिन अब कॉलेज में आकर उसके तेवर कुछ बदलने लगे थे और वो घर में भी अब बाइक की ज़िद्द कर रहा था.

वो तीनो गाड़ी में घूम रहे थे कि तभी गुरजोत का फ़ोन ब्ज़ा. उसने कॉल पिक की और बात करने के बाद बोला 'अरे सुख गाड़ी घुमा यार तेरी भाभी बुला रही है'

सुख ने एकदम ब्रेक लगाई और गाड़ी को.घुमा कर पीछे की तरफ चलने लगा और बोला 'अरे यार कहाँ जाना है'

गुरजोत बोला 'उसके स्कूल के बस स्टॉप पे ही है बोल रही है मुझे 17 सेक्टर. छोड़ दो'

सुख हँसते हुए बोला 'सिर्फ़ छोड़ना ही है या चोदना भी है भाई'

चिनू जोकि सुख के साथ वाली सीट पे बैठा था वो बोला 'अरे चोदे बिना कभी छोड़ ता है ये साला उसे'

गुरजोत बोला 'अबे साली में आग ही बहुत है अब क्या करूँ सुख तू तो जानता ही है तेरे गाओं की ही तो है'

सुख बोला 'हां भाई अच्छे से हमारे पड़ोस में ही रहती है अब तू ही देखले साली मेरी शरम भी नही करती'

चिनू बोला 'गुरी भाई एक बात बता तूने पटाई केसे ये चिड़िया साली अभी 10थ क्लास में है और आग किसी औरत से भी ज़्यादा'

गुरजोत अपना लंड मसलता हुआ बोला 'बस ऐसे ही पट गई साला बाद में पता चला सुख के गाओं की ही है'

वो बाते करते-2 उसकी गर्लफ्रेंड के स्कूल के बस स्टॉप पे पहुँच गये वहाँ खड़ी गुरजोत की गर्लफ्रेंड किरण को देखते ही तीनो के लंड में हरकत आ गई.

 


स्कूल के बस स्टॉप पे खड़ी गुरजोत की गर्लफ्रेंड किरण को देखते ही उन तीनो के लंड में हरकत होने लगी. किरण के साथ गुरजोत की फ्रेंडशिप को 3 महीने ही हुए थे और इन तीन मंत में ही गुरजोत ने उसे 5 बार चोद दिया था. इस सब की वजह थी किरण के अंदर की आग. किरण का पूरा नाम किरणदीप कौर था और वो सुख के गाओं की ही थी और उसके पड़ोस में ही रहती थी. गुरजोत से उसके चक्कर से पहले तक उसने कभी सुख से बात नही की थी लेकिन अब वो दोनो काफ़ी खुल गये थे क्यूंकी अक्सर गुरजोत जब भी उसे मिलने आता था तो सुख और चिनू साथ ही होते थे. किरण दिखने में पूरी पटाका थी. अभी 10थ में ही पढ़ रही थी और अपनी एज से पहले ही कली से फूल बन गई थी. वो एकदम स्लिम ट्रिम थी लेकिन दिखने में बहुत ही सेक्सी थी. गुरजोत से पहले भी उसके दो लड़को के साथ चक्कर रहे थे और उनमे से एक तो उसकी लेने में कामयाब हो गया था लेकिन दूसरे को सिर्फ़ चूमा चाटी से ही सबर करना पड़ा था. ये गाड़ी गुरजोत की ही थी और वो कभी-2 कॉलेज लेकेर आता था और इसी गाड़ी में उसने किरण को दो बार चोदा था और सुख और चिनू ने बाहर खड़े होकर बॉडीगार्ड का काम किया था.

किरण ने आज स्कूल ड्रेस ही पहनी थी ब्लू कमीज़ और उसके साथ वाइट सलवार जोकि उसके उपर काफ़ी फॅब रहा था. उसकी आँखें बहुत ही नशीली थी और वो हमेशा उनमे सूरमा डाल कर रखती थी. जेसे ही उन्होने किरण को देखा तो सुख ने गाड़ी को उसके पास रोका और गाड़ी पहचानते ही किरण आगे बढ़ी और पिछली विंडो खोलकर गाड़ी में बैठ गई. गुरजोत भी पीछे ही बैठा था. किरण ने गाड़ी में बैठ ते ही गुरजोत को हग किया और कहा 'केसे हो मेरे जानू'

गुरजोत ने भी उसे कसकर अपनी छाती से भींचते हुए कहा 'तुम्हारे बिन बुरा ही हाल है डार्लिंग'

किरण खुद को उससे दूर करने की कोशिश करती हुई बोली 'ओके अब आ गई हूँ ना अभी ठीक करती हूँ' फिर उसने सुख और चिनू को देखा और बोली 'तुम दोनो हमेशा इसके साथ ही रहा करो कभी लेक्चर भी लगा लो'

सुख ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ गर्देन की और बोला 'ये लड़कियों को बाय्फ्रेंड के दोस्तो से जलन क्यूँ होती है हमेशा'

किरण गुरजोत को दूर हटाना चाहती थी मगर वो तो अपने होंठो से उसके गालों को चूमने लगा था. किरण ने सुख की तरफ देखते हुए कहा 'सुख जल्दी चलो मुझे 17 सेक्टर. छोड़ देना बहुत जल्दी है अगर ये शुरू हो गया तो फिर तो पहुँच गई मैं'

सुख ने गाड़ी 17 सेक्टर. की तरफ दौड़ा दी और गुरजोत ने एक हाथ नीचे किया और किरण की टाँगो के नीचे से निकाल कर उसे अपनी तरफ खिचते हुए उसे अपनी गोद में बिठाना चाहा मगर वो सफल नही हुआ लेकिन किरण की जंघें ज़रूर उसकी गोद में आ गई. उसने एक हाथ किरण की दोनो जांघों के बीच डाल दिया और किरण ने एकदम से उसका हाथ अपनी जांघों में भींच लिया और बोली 'जानू प्लीज़ छोड़ दो ना बहुत जल्दी है मेरी बुआ का लड़का मेरा वेट कर रहा है वहाँ उसके साथ मुझे बुआ के यहाँ जाना है आज'

गुरजोत ने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपने होंठ उसके होंठो पे रख दिए और चूसने लगा. जेसे ही गुरजोत ने कुछ देर उसके होंठ चूसे तो वो भी मस्त हो गई और अपने आशिक़ का साथ देने लगी. सुख और चिनू भी चोरी-2 उन्हे देख लेते थे. पहले भी केयी दफ़ा वो ऐसे सीन देख चुके थे इन दोनो के क्यूंकी अक्सर गुरजोत अपनी गाड़ी में बिठा कर उसे ऐसे ही चूस्ता रहता था. जेसे-2 किरण को मस्ती चढ़ रही थी तो उसकी जांघे भी खुल गई थी और अब गुरजोत के हाथ को रास्ता मिल गया था उसने हाथ आगे बढ़ाया और सीधा किरण की चूत पे रख दिया और सलवार के उपर से हल्का-2 मसल्ने लगा. किरण उसकी इस हरकत से मदहोश होने लगी. उसके होंठ गुरजोत बेरेहमी से चूस रहा था और किरण भी इसका पूरा मज़ा ले रही थी और उसे पता भी नही चला कि कब गुरजोत ने उसकी सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार के अंदर हाथ डाल लिया. किरण जेसे नींद से जागी और उसने झट से गुरजोत के हाथ को पकड़ लिया जोकि उसकी योनि को अब पैंटी के उपर से रगड़ रहा था. वैसे तो कयि दफ़ा उसकी सलवार गुरजोत के सामने उतर चुकी थी लेकिन पहला मोका था जब उसके दोनो दोस्तो के सामने उसकी सलवार उतारने की नोबत आई हो. पहले हमेशा चिनू और सुख बाहर निकल जाते थे जब गुरजोत ने उसे चोदता या नंगी करना होता था. किरण ने अपने होंठ उसके होंठो से छुड़ाते हुए धीरे से कहा 'शरम करो तुम्हारे दोस्त देख रहे हैं'

लेकिन गुरजोत ने कुछ नही सुना और फिरसे उसके होंठो पर टूट पड़ा और खीच कर उसकी सलवार नीचे उतारने लगा. बड़ी मुश्किल से वो उसकी सलवार केवल जाँघो तक उतारने में कामयाब हुया और किरण ने अपने होंठो का रास्पान करवाते हुए अपने कमीज़ के पल्ले से नंगी हुई जांघों को ढकना चाहा मगर गुरजोत ने उसके हाथ से उसका पल्ला खीच कर उपर चढ़ा दिया. उसकी गोरी-2 जांघे अब नंगी दिखाई दे रही थी और सुख बॅक मिरर से उन्हे चोरी-2 घूर रहा था और चिनू का भी कुछ ऐसा ही हाल था. किरण को पहली दफ़ा आज शरम आ रही थी आगे हमेशा वो खुल कर गुरजोत का साथ देती थी लेकिन फिर भी उसे इससे ज़्यादा फ़र्क नही पड़ता था उसका मकसद तो बस जिंदगी के मज़े लूटना था. गुरजोत ने उसे थोड़ा उपर उठाया और अपनी ज़िप खोलते हुए अंडरवेर में अपना लंड भी बाहर निकाल लिया. किरण ने जेसे ही उसका लंड देखा तो अपना मूह उसकी छाती में छिपा लिया. गुरजोत ने अपना लंड उसकी दोनो जांघों के बीच फँसा दिया अब उपर से देखने से उसका टोपा ही दिखाई दे रहा था. किरण ने अपने होंठ गुरजोत के होंठो से मिला दिए और अपनी जांघों में उसका लंड भीचने लगी. गुरजोत को अपनी जान की इस हरकत से बहुत मज़ा आया और वो भी ज़ोर-2 से उसे चूसने लगा. किरण आँख बचा कर चिनू और सुख को भी देख रही थी कि कही वो तो उसकी नंगी जांघे नही घूर रहे. इस हवस के खेल में किरण के मोबाइल ने खलल डाल दिया. किरण ने अपने होंठ अपने आशिक़ के होंठो से जुदा किए और अपने बॅग में से फ़ोन निकाला तो देखा उसके बुआ के लड़के का था वो एकदम बोली 'अरे यार भैया का फ़ोन है अभी कितना टाइम लगेगा सुख'

सुख बोला 'बस पहुँच ही गये'

किरण ने उन्हे चुप रहने का इशारा किया और फ़ोन उठाया.

किरण-हेलो.

दूसरी तरफ से कोई आवाज़ आई.

किरण-जी भैया मैं पहुँच ही गई. आप कहाँ हो.

फिरसे दूसरी और से कुछ बोला गया और किरण बोली.

किरण-ओके भैया.

किरण ने फ़ोन रख दिया और खुद को गुरजोत की गोद से उतारा और शरमाते हुए सलवार ऊपर की और नाडा बाँध लिया. सुख ने भी गाड़ी रोकते हुए कहा 'लो पहुँच गये हम'

 


किरण ने गुरजोत को बाइ बोला और हग किया और जेसे ही बाहर निकलने लगी तो गुरजोत ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया और बोला 'जान एक किस मेरे लोड्‍े पे तो देती जा'

उसकी बात सुनकर वो शरमा गई बोली 'बहुत बेशरम हो गये हो छोड़ो मुझे'

गुरजोत बोला 'पहले किस'

किरण ने मजबूर होकर आगे देखा तो वो दोनो उसे ही देख रहे थे और हंस रहे थे. उनके सामने गुरजोत का लंड चूमने में उसे बहुत शरम आ रही थी. आख़िर उसने कोई और रास्ता ना मिलता देख झुक कर गुरजोत के 7" लंबे लंड के टोपे को एक दफ़ा अपने होंठो में लिया और फिर किस करते हुए छोड़ दिया. इस सीन को देखकर चिनू और सुख ने भी अपने लंड पॅंट के उपर से ही पकड़ क्र मसल दिए. किरण फ्टाफ़ट कपड़े ठीक करती हुई बाहर निकल गई और वो तीनो भी कॉलेज की तरफ चल पड़े.

..........................

सुबह रीत के जाने के बाद उसके पापा ने अपने जीजा जी को फ़ोन किया और उनसे नयी जॉब के बारे में पूछा. अपने साले के मूह से ये बात सुनते ही गुरनाम के चेहरे के उपर खुशी दौड़ गई. वो समझ रहा था अब उसकी सलहज उससे चुदने के लिए तैयार हो गई है. उसने कहा कि वो कल को उनके घर आकर ही बात करेंगे. हरजीत बहुत खुश था क्यूंकी उसे अच्छी नोकरी मिलने के चान्स थे लेकिन वो क्या जानता था कि इस अच्छी नोकरी के लिए उसकी बीवी को उसके ही जीजा का बिस्तर गरम करना पड़ेगा. मनप्रीत भी किसी डिसीजन पे नही पहुँच पा रही थी. अब जीजा जी को फ़ोन भी हो चुका था अब वो इतना तो समझ गई थी कि किसी भी हालत में अब उसे कम से कम एक बार तो गुरनाम से चुदना ही पड़ेगा. अब वो कुछ नही कर सकती थी अगर कर सकती थी तो सिर्फ़ इतना कि अपने आप को उस के साथ चुदाई के लिए तैयार करे. मनप्रीर काफ़ी परेशान थी लेकिन उसने सोच लिया था कि जो होगा देखा जाएगा. हरजीत काम पे चला गया था और मनप्रीत भी उसके जाने के बाद अपने घर के काम काज़ में बिज़ी हो गई.

उधर गुलशन और हरप्रीत उनके ट्यूबिवेल पे बैठे थे और बातें कर रहे हैं. हरप्रीत बोला 'भाई तेरे तो मज़े है. साली रीत के साथ-2 वो सुख की बेहन भी पूरी लाइन दे रही है तुझे'

गुलशन ने जवाब दिया 'हां यार बात तो सही है कल से देख रहा हूँ पहले ग्राउंड में और आज सुबह कॉलेज जाते टाइम भी पलट-2 कर देख रही थी'

हरप्रीत अपना लंड मसलता हुआ बोला 'यार है तो दोनो ही मस्त लोंड़िया ये अमन भी बहुत सेक्सी है यार'

गुलशन बोला 'हां यार दोनो ही एक से बढ़कर एक है लेकिन मैं तो रीत को ही पटाउन्गा और अगर वो पट गई तो अमन की सेट्टिंग तेरे साथ पक्की'

हरप्रीत खुश होकर बोला 'भाई पक्का ना'

गुलशन बोला 'हां साले पक्का लेकिन इस बात का धिंडोरा मत पीट देना. सुख की बेहन है वो अगर उसे पता चल गया तो प्रॉब्लम होगी'

हरप्रीत बोला 'हां भाई ये बात भी है लेकिन साले की बेहन है बहुत टॉप का माल'

वो दोनो ऐसे ही बातें करते रहे और आगे क्या करेंगे इसके सपने देखते रहे.

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कॉलेज से लेक्चर. ख़तम हुए तो रीत अपनी दोनो फरन्डज़ के साथ कॉलेज बस स्टॉप की तरफ चल पड़ी. जेसे ही वो कॉलेज से निकली तो एकदम तेज़ बारिश आ गई और वो तीनो बस स्टॉप तक आते हुए काफ़ी भीग गई. सुख रोज़ की तरह वही था. बस स्टॉप पे सभी भीगी हुई इन हसीनाओं को ही घूर रहे थे. सुख ने भी सबको उन तीनो को घूरते महसूस कर लिया था लेकिन अब वो कर ही क्या सकता था ऐसा तो आम बात थी. आख़िर बस आई और वो सभी बस में चढ़ गये और बस अपनी मंज़िल की तरफ चल पड़ी. बस में काफ़ी भीड़ थी वो सभी खड़े ही थे और ख़ास बात ये थी कि सिमरन आज सुख के आगे ही खड़ी थी. सुख तो उसकी गोरी गर्देन को घूर्ने में ही खोया हुया था और कभी-2 साइड से जब भी सिमरन का गोरा चेहरा उसे दिखाई देता तो उसे अनुभव होता कि वो स्वर्ग में बैठा किसी अप्सरा को देख रहा हो. सुख उसे देखने में खोया था कि तभी उसे अपने आगे कुछ एहसास हुआ.

सुख सिमरन का चहरा देखने में खोया था कि बस के एक झटके से उसे अपने आगे कुछ स्पर्श महसूस हुआ. वो ख्यालो की दुनिया से बाहर आया तो उसने नीचे देखा और एकदम हैरान रह गया. उसके लंड वाले हिस्से से सिमरन के चूतड़ बिल्कुल सटे हुए थे. सुख को समझ नही आ रहा था कि सिमरन जान बुझ कर पीछे हुई था या उसे मजबूरी में होना पड़ा था. जहाँ तक सुख उसे जानता था उसे लग रहा था कि ज़रूर भीड़ की वजह से ही सिमरन पीछे हटी थी. अगले ही पल एक और झटका लगा और सिमरन के चूतड़ सुख के लंड पे और अच्छे से सट गये. अब की बार सिमरन को भी सुख के लंड का स्पर्श अपने चुतड़ों पे महसूस हुया लेकिन वो अच्छे से जानती थी कि सुख की इसमे कोई ग़लती नही थी वो ही भीड़ की वजह से पीछे हट रही थी. वो आगे होना चाहती थी लेकिन जगह नही थी. कुछ देर तक वो ऐसे ही खड़े रहे इस वजह से सुख का लंड अब पूरा तन गया और सिमरन को अपनी सलवार के उपर से चुतड़ों की दरार में महसूस होने लगा. उसका कमीज़ भी भीगा हुआ था जिसकी वजह से उसे सुख का लंड और भी अच्छे से महसूस हो रहा था उसे बहुत बुरा लग रहा था पर वो कर ही क्या सकती थी. सुख भी ये सब नही चाहता था उसके खड़े लंड ने उसे परेशान कर दिया था वो सोच रहा था पता नही सिमरन केसा सोच रही होगी उसके बारे में. अगले ही पल सुख पीछे को ज़ोर लगाता हुआ थोड़ा पीछे हट गया और अब उसके और सिमरन के बीच थोड़ा गॅप बन गया लेकिन वो गॅप कोई 1-2" का ही था. सिमरन को सुख की शराफ़त देख बहुत अच्छा लगा. वो जानती थी की ऐसे मोके तो अक्सर लड़के ढूढ़ते रहते हैं लेकिन सुख ने ऐसे मोके को नज़र अंदाज़ ही कर दिया था. कही ना कही सुख की अच्छाई ने उसे प्रभावित ज़रूर किया था लेकिन उसके दिल में सुख के लिए कोई ऐसी वेसी फीलिंग बिल्कुल नही थी. जल्दी ही सुख का गाओं आ गया और तब तक सुख ने ऐसे ही सिमरन से डिस्टेन्स बनाए रखा. वो भीड़ को चीरता हुया नीचे उतर गया और रीत न्ड अमन भी अपने चुतड़ों पे हाथ फ़िरवाती हुई भीड़ में से निकल कर नीचे उतर गई. बारिश अब कम हो गई थी लेकिन फिर भी थोड़ी-2 गिर ज़रूर रही थी. वो तीनो फ्टाफ़ट अपने घरो की तरफ चल पड़े. अमन न्ड सुख दोनो अपने घर की गली में मूड गये और रीत तेज़-2 अपने घर की और जाने लगी. उसके कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे और पीछे उसकी कमीज़ और पाजामी बिल्कुल उसके चुतड़ों से चिपक गई थी. उसका घर अब सामने ही दिखाई दे रहा था कि तभी उसे उसका आशिक़ गुलशन उसके घर के पास वाली गली में दिखाई दिया. वो गली आगे जाकर बंद हो जाती थी. जेसे ही रीत उसके पास पहुँची तो वो एकदम से उसके सामने आ गया और उसका हाथ पकड़ कर उसे उस गली में खीच लिया. बारिश की वजह से रास्ते में कोई नही था. रीत उसकी इस हरकत से घबरा गई और बोली 'क्या करते हो छोड़ो कोई देख लेगा मरवाओगे क्या'

गुलशन ने उसे दीवार से लगाया और अपने हाथ उसकी कमर पे रखते हुए कहा 'बारिश में कॉन देखेगा'

रीत उसकी गिरफ़्त से आज़ाद होने के लिए मचलती हुई बोली 'प्लीज़ जाने दो ना'

गुलशन ने उसके पास होते हुए कहा 'ओके जाने दूँगा पहले बताओ प्यार करती हो मुझसे'

रीत को बहुत शरम आ रही थी और उससे कही ज़्यादा डर लग रहा था वहाँ कोई भी आ सकता था.

उसने फिरसे कहा 'प्लीज़ मुझे जाने दो बाद में बात करेंगे'

गुलशन धीरे से उसकी कमर पे दोनो साइड हाथ फिराता हुया बोला 'बाद में तू मिलती ही कब है अभी बता ना यार'

रीत को कमर पे स्पर्श से सरीर में सिरहन दौड़ती हुई महसूस हुई और वो शरमा कर बोली 'मैं सोच कर बताउन्गी'

गुलशन जानता था कि उसकी लगभग हां ही है लेकिन फिर भी उसने जल्दबाज़ी ठीक नही समझी और जेब से अपना नंबर. निकालते हुए उसे रीत को पकड़ाता हुया बोला 'ले फोन कर लेना इस नंबर. पे मेरा है'

रीत ने उसके हाथ से पर्ची ली जिसपे नंबर. लिखा था और गुलशन के थोड़ा पीछे हट ते ही भाग कर उस गली से निकल मेन गली मे आ गई. उसके भागने से उसके पिछवाड़े में जो हलचल हुई उसे देखकर गुलशन अपना लंड मसले बिना नही रह पाया. रीत ने मेन गली में पहुँचते ही मुस्कुरा कर गुलशन की तरफ देखा उसे जीभ दिखाती हुई तेज़-2 अपने घर की ओर चल पड़ी.

शाम को वो अमन के पास गई और वहाँ से दोनो गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए चल पड़ी. रीत ने क्रीम कलर का सूट पहना हुया था और अमन ने एक ब्लू कलर का टाइट सा सलवार कमीज़ पहना था. वो दोनो गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद वापिस आई और फिर दोनो कुछ देर अमन के घर की छत पे टहलती रही और अंधेरा होने से पहले ही रीत घर वापिस आ गई. रात को मनप्रीत ने खाना तैयार किया और सभी ने खाना खाया और फिर रीत अपने रूम में चली गई उसने अपने पर्स में से गुलशन का नंबर. निकाला और कुछ सोच कर मुस्कुराते हुए नंबर. मिला लिया. 2-3 रिंग जाने के बाद गुलशन ने फ़ोन उठाया.

गुल-हेलो.

रीत-हेलो गुलशन.

गुलशन लड़की की आवाज़ सुनते ही समझ गया कि रीत का फ़ोन है और वो बोला.

गुल-हंजी आ गई हमारी याद.

रीत शरमाते हुए बोली.

रीत-हंजी आ गई. केसे हो.

गुल-अच्छा हूँ तू बता केसी है कुछ सोचा फिर.

रीत-किस बारे में.

उसने जानबूझ कर उसे छेड़ना चाहा.

गुल-आजी हमे दिल देने के बारे में.

रीत-क्यूँ चाहिए आपको दिल.

गुल-अरे क्यूँ चाहिए मतलब्. बस चाहिए अपनी जान का दिल हमें.

रीत-अच्छा जी अगर मैं ना दूं आपको अपना दिल.

गुल-फिर हम छीन कर ले जाएगे.

गुलशन ने हँसते हुए कहा.

रीत-अच्छा जी इतनी हिम्मत.

गुल-हिम्मत तो बहुत है जानेमन.

रीत-मैं आपकी जानेमन केसे हुई अभी तो दिल दिया ही नही.

गुल-तो देदो ना रीत आइ लव यू यार.

रीत उसके लव यू बोलने से शरमा गई और धीरे से बोली.

रीत-लव यू टू गुलशन.

गुलशन को तो जेसे यकीन ही नही हुया और वो बोला.

गुल-एक दफ़ा फिरसे बोलना.

रीत शरमाते हुए बोली.

रीत-आइ लव यू जानू.

गुलशन के दिल के साथ-2 लंड ने भी ठुमकि लगाई और वो बोला.

गुल-क्या बात है इतनी हसीन लड़की मेरी गर्लफ्रेंड.

रीत-हन्जी.

गुल-मुझे तो यकीन नही हो रहा.

रीत-तो कर लीजिए ना यकीन.

गुल-वो तो जब पास आओगी तब ही करूँगा.

रीत उसकी बात का मतलब समझती हुई बोली.

रीत-मैं नही आने वाली पास अब आसानी से.

गुल-अच्छा देखते हैं.

रीत को मम्मी की आवाज़ सुनाई दी और उसने बाइ बोलकर फ़ोन काट दिया और बाहर चली गई. उसकी मम्मी उसे दूध लेने के लिए बोल रही थी. रीत ने दूध पिया और वापिस अपने कमरे मे. आके सो गई.

 
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