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Guest
रिचा ने ये सुनकर ही सॉफ इनकार कर दिया कि उसे घर जाना होगा और यही सुनके ललिता ने एक दम से हां कर दी...
रिचा को समझ आ गया था कि ललिता ने हां क्यूँ करी थी और रूठ कर वो अपने घर के लिए चली गयी...
साथ ही साथ एक और लड़की और दो लड़के उनके भी अपने घर चले गये थे.... अब सिर्फ़ ललिता के साथ उसकी दोस्त पायल,
अमित, सुमित सिद्धार्थ (सिड) बचे थे.... सबने दिल्ली मेट्रो पकड़ी और राजीव चोव्क के लिए रवाना हो गये...
ललिता ने कयि बारी सुना था कि मेट्रो में लड़कियों के साथ छेड़ छाड़ होती है मगर उसको ऐसा कुच्छ भी नहीं लगा... शायद उसके साथ 3 लड़के खड़े थे तो शायद किसी ने हिम्मत नही करी होगी... खैर मेट्रो से उतरते वक़्त ललिता
को उसकी कमर पर एक हाथ ज़रूर महसूस हुआ जिसका उसने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया... पाँचो दोस्त राजीव चोव्क से निकले
और जनपथ की तरफ बढ़े... सिड का काम पूरा होकर ही अमित बोला "यार पालिका बेज़ार भी चलो मैं कपड़े ले लूँगा अपने लिए"
ललिता बोली "हां बेटा मेरे जाने से पहले मुझे दिल्ली दर्शन करवा दो पूरा" ये सुनके सब हंस पड़े और सिड के साथ
पालिका बाज़ार चले गये...
ललिता पालिका बाज़ार काई सालो के बाद आई थी.. पहले वो अपने पापा और शायद भाई के साथ आई थी मगर अकेले कभीनहीं आई थी क्यूंकी यहा का माहौल ही बड़ा ख़तरनाक हुआ करता था लड़कियों के लिए...
रात के कुच्छ 7 बजे जब वो पालिका पहुचे तो ललिता वहाँ लगे मेटल डिटेक्टर को देख कर चौक गयी...
उसे नहीं लगता कि पालिका बाज़ार में भी सेक्यूरिटी चेक होने लग गयी है.... जब वो अपने पर्स को चेक करवाकर
निकली तो तीनो को लड़को ने 2 मिनट माँगे और साथ में लड़को के टाय्लेट में चले गये.... पायल और ललिता वही खड़े
थे और जो भी आदमी वहाँ से आता जाता उन दो लड़कियों पे नज़र पड़ते ही मचल जाता.... फिर पायल भी टाय्लेट जाने के
लिए ललिता को कहने लगी शायद वो इन्न गंदे आदमियो की वजह से परेशान हो गयी थी तो ललिता और वो दोनो लड़कियों
के टाय्लेट चले गये.... ललिता जब पायल के साथ वाले टाय्लेट में घुसी तो उसे बड़ा अचम्बा हुआ कि उस दरवाज़े पे
कयि सारे फोन नंबर. और गंदी चीज़े लिखी हुई थी.... ललिता को अचम्बा इसलिए हुआ कि ये सारी चीज़े लड़को ने यहाँ
घुसकर कैसे लिख दी क्यूंकी ये तो लड़कियों का टाय्लेट है..... उधर एक चित्र भी बनाया हुआ था जिसमे एक लंबा सा लंड एक लड़की की चूत में घुसा हुआ था और इसके नीचे लिखा हुआ था "अगर ऐसा लंड चाहिए तो कॉल करें इस नंबर. पर"
इन चीज़ो को पढ़कर ललिता को हल्की सी नमी महसूस होने लगी.... ना चाहते हुए भी उसने अपनी जीन्स का बटन खोला और अपनी
चड्डी समैत उसको उतारा और एक गंदे से हुक में टाँग दिया.... उस इंडियन टाय्लेट के उधर बैठ गयी जिसका आलसी रंग
तो सफेद था मगर पेशाब की वजह से पीला हो पड़ा था... उसकी चूत में से धार की तरह पानी आने लगा और
उस सफेद टाय्लेट पर पड़ कर शोर मचने लगा.... ललिता पूरी कोशिश कर रही थी कि ज़्यादा आवाज़ ना आए मगर
उसका कोई फरक नही पड़ रहा था.... उस तरह बैठने में भी उसकी टाँगो में दर्द होने लगा क्यूंकी कयि साल हो गये
थे उसे इंडियन टाय्लेट इस्तेमाल करें हुए.... उसने अपने पर्स में से टिश्यू निकाला और अपनी चूत को सॉफ करते
हुए अपनी जीन्स को पहना और वहाँ से निकल गयी.... जब वो टाय्लेट के बाहर आई तो तीनो लड़को के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी... जब वो पालिका के अंदर की तरफ गयी तो इतने सालो के बाद कुच्छ बदलाव नहीं आया था...
हां थोड़ा सॉफ सुथरा लग रहा था, एस्कलाटेर्स लगा रखके थे मगर वहाँ की जनता वैसी की वैसी ही थी...
मुँह में पान गंदे कपड़े, दाढ़ी बढ़ी हुई अपनी पॅंट को खुजाते हुए जितनी भी लड़किया थी उनको कुत्तो की तरह ललचा रहे
थे... ललिता को हँसी इस बात पे आ रही थी कि उसकी दोस्त पायल और उसने जीन्स और टी-शर्ट पहेन रखी थी तब भी
वहाँ के लोग आँखो से उन दोनो का बलात्कार कर रहे थे...
खैर कपड़े लेते हुए अमित को कयि साल लग गये और बाकी दोनो लड़के भी उसकी मदद करने लग गये...
पायल और ललिता इतना बोर हो गये थे कि अब और वहाँ रुकना उनके बॅस की नहीं थी.... लड़को को बताकर वो वहाँ से
चले गये... दोनो ने सोचा तो यही था कि वो पालिका से निकलके बाहर घूमेंगे मगर कुच्छ देर में ही पायल ने ललिता
को रोक लिया.... ललिता को बिना कुच्छ बताए पायल उसे फर्स्ट फ्लोर पे ले गयी जाहान नीचे से कुच्छ कम भीड़ थी
मतलब कुच्छ कम आदमी थे... अब दो लड़कियों के देखकर कुच्छ लड़के उनके आगे पीछे मंडराने लगे थे और
काफ़ी आदमी उनके पास कुच्छ ना कुच्छ बेचने के समान ला रहे थे... पायल ललिता को लेके चलती रही और फिर
एक खाली दुकान में जाके रुक गयी... वो दुकान काफ़ी छोटी सी थी और वहाँ एक 30-35 साल का हरयान्वी आदमी बैठा हुआ था... एक साधारण सी शर्ट और पॅंट में में एक कुर्सी पे बैठा हुआ न्यूसपेपर पढ़ रहा था...
"हेलो" पायल की आवाज़ सुनकर ही उसने न्यूसपेपर झट से हटाया और दो जवान और खूबसूरत लड़कियों के देखकर
एक बड़ी सी मुस्कान उसके चेहरे पे छा गयी... ललिता की नज़र उस आदमी के पेट पर पड़ी जोकि उसके दुकान के
कोने कोने पर टक्कर खा रहा था...
रिचा को समझ आ गया था कि ललिता ने हां क्यूँ करी थी और रूठ कर वो अपने घर के लिए चली गयी...
साथ ही साथ एक और लड़की और दो लड़के उनके भी अपने घर चले गये थे.... अब सिर्फ़ ललिता के साथ उसकी दोस्त पायल,
अमित, सुमित सिद्धार्थ (सिड) बचे थे.... सबने दिल्ली मेट्रो पकड़ी और राजीव चोव्क के लिए रवाना हो गये...
ललिता ने कयि बारी सुना था कि मेट्रो में लड़कियों के साथ छेड़ छाड़ होती है मगर उसको ऐसा कुच्छ भी नहीं लगा... शायद उसके साथ 3 लड़के खड़े थे तो शायद किसी ने हिम्मत नही करी होगी... खैर मेट्रो से उतरते वक़्त ललिता
को उसकी कमर पर एक हाथ ज़रूर महसूस हुआ जिसका उसने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया... पाँचो दोस्त राजीव चोव्क से निकले
और जनपथ की तरफ बढ़े... सिड का काम पूरा होकर ही अमित बोला "यार पालिका बेज़ार भी चलो मैं कपड़े ले लूँगा अपने लिए"
ललिता बोली "हां बेटा मेरे जाने से पहले मुझे दिल्ली दर्शन करवा दो पूरा" ये सुनके सब हंस पड़े और सिड के साथ
पालिका बाज़ार चले गये...
ललिता पालिका बाज़ार काई सालो के बाद आई थी.. पहले वो अपने पापा और शायद भाई के साथ आई थी मगर अकेले कभीनहीं आई थी क्यूंकी यहा का माहौल ही बड़ा ख़तरनाक हुआ करता था लड़कियों के लिए...
रात के कुच्छ 7 बजे जब वो पालिका पहुचे तो ललिता वहाँ लगे मेटल डिटेक्टर को देख कर चौक गयी...
उसे नहीं लगता कि पालिका बाज़ार में भी सेक्यूरिटी चेक होने लग गयी है.... जब वो अपने पर्स को चेक करवाकर
निकली तो तीनो को लड़को ने 2 मिनट माँगे और साथ में लड़को के टाय्लेट में चले गये.... पायल और ललिता वही खड़े
थे और जो भी आदमी वहाँ से आता जाता उन दो लड़कियों पे नज़र पड़ते ही मचल जाता.... फिर पायल भी टाय्लेट जाने के
लिए ललिता को कहने लगी शायद वो इन्न गंदे आदमियो की वजह से परेशान हो गयी थी तो ललिता और वो दोनो लड़कियों
के टाय्लेट चले गये.... ललिता जब पायल के साथ वाले टाय्लेट में घुसी तो उसे बड़ा अचम्बा हुआ कि उस दरवाज़े पे
कयि सारे फोन नंबर. और गंदी चीज़े लिखी हुई थी.... ललिता को अचम्बा इसलिए हुआ कि ये सारी चीज़े लड़को ने यहाँ
घुसकर कैसे लिख दी क्यूंकी ये तो लड़कियों का टाय्लेट है..... उधर एक चित्र भी बनाया हुआ था जिसमे एक लंबा सा लंड एक लड़की की चूत में घुसा हुआ था और इसके नीचे लिखा हुआ था "अगर ऐसा लंड चाहिए तो कॉल करें इस नंबर. पर"
इन चीज़ो को पढ़कर ललिता को हल्की सी नमी महसूस होने लगी.... ना चाहते हुए भी उसने अपनी जीन्स का बटन खोला और अपनी
चड्डी समैत उसको उतारा और एक गंदे से हुक में टाँग दिया.... उस इंडियन टाय्लेट के उधर बैठ गयी जिसका आलसी रंग
तो सफेद था मगर पेशाब की वजह से पीला हो पड़ा था... उसकी चूत में से धार की तरह पानी आने लगा और
उस सफेद टाय्लेट पर पड़ कर शोर मचने लगा.... ललिता पूरी कोशिश कर रही थी कि ज़्यादा आवाज़ ना आए मगर
उसका कोई फरक नही पड़ रहा था.... उस तरह बैठने में भी उसकी टाँगो में दर्द होने लगा क्यूंकी कयि साल हो गये
थे उसे इंडियन टाय्लेट इस्तेमाल करें हुए.... उसने अपने पर्स में से टिश्यू निकाला और अपनी चूत को सॉफ करते
हुए अपनी जीन्स को पहना और वहाँ से निकल गयी.... जब वो टाय्लेट के बाहर आई तो तीनो लड़को के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी... जब वो पालिका के अंदर की तरफ गयी तो इतने सालो के बाद कुच्छ बदलाव नहीं आया था...
हां थोड़ा सॉफ सुथरा लग रहा था, एस्कलाटेर्स लगा रखके थे मगर वहाँ की जनता वैसी की वैसी ही थी...
मुँह में पान गंदे कपड़े, दाढ़ी बढ़ी हुई अपनी पॅंट को खुजाते हुए जितनी भी लड़किया थी उनको कुत्तो की तरह ललचा रहे
थे... ललिता को हँसी इस बात पे आ रही थी कि उसकी दोस्त पायल और उसने जीन्स और टी-शर्ट पहेन रखी थी तब भी
वहाँ के लोग आँखो से उन दोनो का बलात्कार कर रहे थे...
खैर कपड़े लेते हुए अमित को कयि साल लग गये और बाकी दोनो लड़के भी उसकी मदद करने लग गये...
पायल और ललिता इतना बोर हो गये थे कि अब और वहाँ रुकना उनके बॅस की नहीं थी.... लड़को को बताकर वो वहाँ से
चले गये... दोनो ने सोचा तो यही था कि वो पालिका से निकलके बाहर घूमेंगे मगर कुच्छ देर में ही पायल ने ललिता
को रोक लिया.... ललिता को बिना कुच्छ बताए पायल उसे फर्स्ट फ्लोर पे ले गयी जाहान नीचे से कुच्छ कम भीड़ थी
मतलब कुच्छ कम आदमी थे... अब दो लड़कियों के देखकर कुच्छ लड़के उनके आगे पीछे मंडराने लगे थे और
काफ़ी आदमी उनके पास कुच्छ ना कुच्छ बेचने के समान ला रहे थे... पायल ललिता को लेके चलती रही और फिर
एक खाली दुकान में जाके रुक गयी... वो दुकान काफ़ी छोटी सी थी और वहाँ एक 30-35 साल का हरयान्वी आदमी बैठा हुआ था... एक साधारण सी शर्ट और पॅंट में में एक कुर्सी पे बैठा हुआ न्यूसपेपर पढ़ रहा था...
"हेलो" पायल की आवाज़ सुनकर ही उसने न्यूसपेपर झट से हटाया और दो जवान और खूबसूरत लड़कियों के देखकर
एक बड़ी सी मुस्कान उसके चेहरे पे छा गयी... ललिता की नज़र उस आदमी के पेट पर पड़ी जोकि उसके दुकान के
कोने कोने पर टक्कर खा रहा था...