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प्यास

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उधर अमन ने जबसे गुलशन की बॉडी को देखा था तो वो उसकी दीवानी हो गई थी उसे नही मालूम था कि उसकी सहेली रीत उससे पहले ही गुलशन पे बाज़ी मार चुकी थी. अमन ऐसे ही दिल फेंक लड़की थी. गाओं में उसे जहाँ गुलशन पसंद आगया था वहीं कॉलेज में पर्म ने उसकी रातो की नींद उड़ा दी थी. वो कब्से पर्म को फ़ोन लगाने का सोच रही थी मगर फिर ये सोचकर कॅन्सल कर देती कि आख़िर वो उससे क्या बात करेगी.

आख़िर उससे रहा ना गया और उसने सोचा जो होगा देखा जाएगा और उसने परम का नंबर. मिला दिया और आगे से आवाज़ आई.

पर्म-हेलो.

अमन-हेलो पर्म मैं अमन बोल रही हूँ.

पर्म लड़की की आवाज़ सुनते ही चहक उठा और बोला.

पर्म-जी अमन कॉन..?

अमन-जिसे आप आज कॅंटीन में मिले थे. याद आया कुछ तीन लड़किया.

पर्म तो एकदम से खुश हो गया और बोला.

पर्म-ओह अच्छा-2 आइ एम सॉरी यार अपने अपना नाम नही बताया था कॉलेज में.

अमन-ईट्ज़ ओके जी.

पर्म-और सूनाओ केसे याद किया.

अमन-जी बस ऐसे ही...सोचा आपसे थोड़ी जान पहचान की जाए हम तो कॉलेज में फ्रेशर है और आप सीनियर.

पर्म-अरे बिल्कुल यार जान पहचान तो होनी चाहिए.

अमन ने जो फ़ोन करने से पहले सोचा था वोही बोला.

अमन-वो मुझे आपकी एक हेल्प चाहिए थी.

पर्म-ओह जी हुकम करो.

अमन-मुझे कुछ बुक्स इश्यू करवानी है लेकिन बुक इश्यू करवाने का प्रोसीज़ेर नही पता आप प्लीज़ मेरी हेल्प क्रार देंगे.

पर्म-लो जी ये कोन्सि बड़ी बात है आप कल फ्री लेक्चर. में मुझे कॉल कर लेना मैं करवा दूँगा.

अमन खुश होते हुए बोली.

अमन-ओके थॅंकयू सो मच जी.

पर्म-माइ प्लेषर मॅम.

पर्म ऐसे ही अपने शिकार से प्यार से बात करता था और अब वो जान गया था कि अमन आसानी से उसके लंड के नीचे आ सकती है इसलिए उसने रीत का ख्याल दिल से निकाल अब अपने लंड को अमन की ओर सीधा कर दिया था. अमन भी तो जेसे उसकी गोद में बैठने को तैयार ही थी ये बुक्स इश्यू का तो एक बहाना था. फिर अमन ने उसे बाइ कहकर फ़ोन काट दिया और उसके बारे में ही सोचती हुई सो गई.

......................

सुबह हुई और रीत के कॉलेज जाने के बाद उसके पापा ड्रॉयिंग रूम में बैठकर अपने जीजा गुरनाम का इंतेज़ार करने लगे. आज गुरनाम उनको नयी जॉब के लिए अपने किसी दोस्त से मिलाने वाले थे और सुबह ही उनका फ़ोन आया था कि वो घर से उसे लेने आएँगे. मनप्रीत का दिल बहुत ही घबरा रहा था उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि आगे क्या होने वाला था. आख़िर 10 बजे के आस पास उनके घर के सामने एक ब्लॅक कलर की चम चमाती ऑपटरा आकर रुकी और उसमे से गुरनाम बाहर निकला और घर के अंदर की तरफ आने लगा. मनप्रीत ने किचन की विंडो से ही उसे आते देख लिया और उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. गुरनाम अंदर आते ही हरजीत से मिला और दोनो ड्रॉयिंग रूम में बैठ कर बाते करने लगे. मनप्रीत को पानी लेकर उनके सामने जाना था लेकिन उसमे गुरनाम का सामना करने की हिम्मत ही नही हो रही थी. आख़िर अपने पति की पानी लेकर आने की आवाज़ सुनते ही वो दिल पे पत्थर रखकर दो पानी के गिलास ट्रे में रखकर ड्रॉयिंग रूम की तरफ बढ़ी. जेसे ही वहाँ पहुँच कर उसकी नज़र गुरनाम की नज़र से मिली तो उसका शरीर काँपने लगा लेकिन वो खुद को संभालती हुई उनके पास पहुँच गई. उसने येल्लो कलर का टाइट सा सलवार कमीज़ पहना था अक्सर वो टाइट कपड़े ही पहनती थी. उसे गुरनाम आँखों से नंगी करता हुआ महसूस हुआ. उसने झुक कर उसके सामने ट्रे करते हुए कहा 'सत श्री अकाल भ्रा जी ये लीजिए पानी'

गुरनाम ने मुस्कुराते हुए गिलास उठा लिया और कहा 'सत श्री अकल भरजाई जी'

मनप्रीत ने एक पल के लिए उसकी आँखो में देखा तो वो उसे ही घूर रहा था और मुस्कुरा रहा था. मनप्रीत तेज़ी से वापिस किचन की ओर चली गई. वो दरवाज़े पास ही खड़ी थी उसे डर था की उस्दिन की तरह कही आज भी गुरनाम किचन में ना आ जाए क्योंकि आज तो उसका पति भी घर पे ही था. वो दोनो जॉब के बारे में ही बातें कर रहे थे. गुरनाम ने हरजीत को चलने के लिए कहा और हरजीत ने उसे 10 मिनट रुकने को कहा क्योंकि उसे रेडी होना था. वो मनप्रीत को आवाज़ लगाकर चाइ के लिए बोलता हुआ अंदर चला गेया. जेसे ही हरजीत रेडी होने के लिए अपने कमरे में गया तो मनप्रीत की दिल की धड़कन तेज़ हो गई उसे पता था अब गुरनाम ज़रूर किचन में आएगा. मनप्रीत कर ही क्या सकती थी वो चुप चाप गॅस के सामने खड़ी होकर चाइ बनाने लगी. उसे किचन में किसी के आने का आभास हुआ मगर उसने पीछे मुड़कर नही देखा. वो जानती थी कि उसके पीछे गुरनाम ही था और उसकी गुरनाम की आँखों में आँखें डालने की हिम्मत नही थी. अगले ही पल किसी ने उसे पीछे से बाहों में जाकड़ लिया और दो हाथ उसके पेट पे आकर बँध गये. मनप्रीत बुरी तरह से काँप उठी और उसने अपनी आँखें बंद करके दोनो मुठिया भीच ली. गुरनाम पीछे से उसके साथ बिल्कुल सट कर खड़ा हो गेया और अपने होंठ उसके गालों पे फिराता हुया बोला 'मुझे पता था कि तू मान जाएगी'

मनप्रीत ने कोई जवाब नही दिया वो आगे को होने की कोशिश कर रही थी मगर आगे से वो पहले ही शेल्फ को लगी हुई थी और पीछे उसके विशाल चूतड़ गुरनाम के लंड से बिल्कुल सटे हुए थे. गुरनाम ने हाथ उपर लाकर मनप्रीत के उपर नीचे होते मम्मो को दोनो हाथों में पकड़ कर धीरे से दबाते हुए कहा 'कुछ बोलो ना मेरी सेक्सी सालेहर जी'

मनप्रीत ने हिम्मत जुटाते हुए उसके हाथों को अपने मम्मों से हटाते हुए इतना ही कहा 'आप प्लीज़ बाहर जाओ ना रीत के पापा हैं घर में'

गुरनाम ने थोड़ा पीछे हट ते हुए दोनो हाथो से मनप्रीत के बड़े-2 चुतड़ों को पकड़ कर दोनो साइड को बाहर की तरफ खीचते हुए कहा 'कोई बात नही जानेमन अब नेक्स्ट टाइम तों उसके काम पे जाने के बाद ही आउन्गा तैयार रहना'

दोनो नितंब मसले जाने की वजह से मनप्रीत के मूह से एक आह निकली और बाद में इस तरह सिसकने पे उसे शर्मिंदगी महसूस हुई. गुरनाम उससे दूर हट गया. मनप्रीत को ये अच्छा लगा कि कम से कम उसके कहने से वो रुक गया था. गुरनाम ने अपनी जेब से कुछ निकाला और एक पॅकेट मनप्रीत को पकड़ाते हुए कहा 'मेरी तरफ से एक छोटा सा नज़राना'

मनप्रीत ने बिना उसकी तरफ देखे वो पॅकेट पकड़ लिया और गुरनाम पॅकेट उसे पकड़ा कर बाहर निकल गया और ड्रॉयिंग रूम में जाकर बैठ गया. कुछ ही देर में हरजीत भी बाहर आ गया. मनप्रीत ने उन्हे चाइ दी और इस बीच गुरनाम और मनप्रीत की 2-3 बार नज़रे मिली और हर बार गुरनाम ने शरारती मुस्कान से उसे छेड़ा. जवाब में मनप्रीत की तरफ से फीकी सी मुस्कान ही देखने को मिली. मनप्रीत किचन में वापिस आई और उसने वो पॅकेट खोल कर देखा तो उसके चेहरे पे मुस्कान फैल गई. उस पॅकेट में लाल और काले रंग की बहुत ही सुंदर चूड़िया थी जोकि देखने पे ही पता चल रहा था कि काफ़ी महनगी होंगी. मनप्रीर की सूनी कलाईयों को शायद गुरनाम ने पहली मुलाक़ात में देख लिया था जो उसने ये चूड़िया उसे तोहफे के रूप में दी थी. मनप्रीत ने पूरा पॅकेट खोला तो उसने देखा कि साथ में पायल की जोड़ी भी थी और वो भी बहुत ही खूबसूरत थी. मनप्रीत को तोहफा तो बहुत पसंद आया था क्योंकि हरजीत ने भी कभी उसे ऐसा कोई तोहफा लाकर नही दिया था. मगर उस तोहफे के बदले काफ़ी बड़ी कीमत चुकानी थी मनप्रीत को. उसे ड्रॉयिंग रूम में उनके उठने की हलचल सुनाई दी तो वो वहाँ पहुँच गई. हरजीत उसे जाने के लिए बोलकर बाहर गया और चल पड़ा. गुरनाम भी जाते-2 एक दफ़ा फिरसे मनप्रीत को घूरते हुए मुस्कराया और इस दफ़ा तो मनप्रीत भी थोड़ा अच्छे से मुस्कुराइ और वो दोनो बाहर निकल गये
 
गुरनाम और अपने पति हरजीत के जाते ही मनप्रीत फिरसे घर के काम काज़ में लग गई.

उधर रीत न्ड पार्टी कॉलेज पहुँच गई थी और अभी-2 रीत , अमन न्ड सिमरन लेक्चर. लगाकर निकली थी. अब नेक्स्ट लेक्चर. फ्री था इसलिए वो कॅंटीन की तरफ जा रही थी. अमन ने कुछ सोचते हुए कहा 'रीत तुम दोनो कॅंटीन में बैठो मैं अभी आती हूँ'

सिमरन बोली 'कहाँ जा रही है हम भी चलती है साथ'

अमन एकदम से बोली 'नही बस मैं अभी आई तुम दोनो बैठो ना'

रीत बोली 'ओके हम कॅंटीन में वेट करते हैं'

अमन उसकी बात सुनकर लाइब्ररी की ओर चली गई और रीत न्ड सिमरन कॅंटीन में जाकर बैठ गई. अमन ने आज पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहना था जोकि उसके उपर काफ़ी फॅब रहा था और कमीज़ के पीछे उसकी कमर तक ज़िप थी. अमन ने अपना फ़ोन निकाला और पर्म का नंबर. मिला दिया.

पर्म-हेलो जी केसी हो तुम.

अमन-मैं अच्छी हूँ कहाँ हो आप.

पर्म-अजी आप बताइए कहाँ हो.

अमन-मैं तो कॉलेज हूँ आप कही दिखाई नही दिए आज.

पर्म-मैं उपर 2न्ड फ्लोर पे रूम में हूँ बताओ क्या बात है.

अमन-वो आपसे मिलना था.

पर्म ने कुछ सोचते हुए कहा.

पर्म-तो आ जाओ उपर.

अमन कुछ सोचते हुए बोली.

अमन-जी उपर कोन्से रूम में.

पर्म-अरे आओ तो सही उपर खुद ही पता चल जाएगा.

अमन-ओके आती हूँ जी.

अमन कुछ सोचते हुए 2न्ड फ्लोर पे जाने लगी. कॉलेज में ग्राउंड और 1स्‍ट फ्लोर पे ही ज़्यादातर क्लासस लगती थी और 2न्ड फ्लोर पे कभी कभार ही कोई क्लास होती थी. इसीलिए पर्म न्ड पार्टी ने वहाँ अपना अड्डा जमाया हुआ था अक्सर वो तीनो यहाँ आकर नशा वगेरा करते थे क्योंकि उपर कोई ज़्यादा आता जाता नही था और लगभग सभी रूम खाली होते थे. अमन जेसे ही उपर पह्नची तो उन्हे रूम्स में देखने लगी. तभी उसे एक रूम में से पर्म निकलता हुआ दिखाई दिया. वो थोड़ा नॉर्मल हुई और पर्म को देखते ही स्माइल दी और सामने से पर्म ने भी आँखों से अमन का शरीर नापते हुए स्माइल दी और पास आकर बोला 'हां बोलो अमन क्या बात है'

अमन नज़रे झुकाकर धीरे से बोली 'जी वो बुक्स इश्यू करवानी थी'

पर्म को याद आया और वो बोला 'अरे हां तुमने रात बोला था कोई बात नही चलो अभी करवा देता हूँ तुम्हारा काम'

तभी रूम में से तेजवीर और समीर निकले और उनकी तरफ ही आने लगे. अमन ने उन्हे देखते ही कहा 'आप यहाँ उपर क्यूँ बैठे थे'

पर्म बोला 'अरे बस ऐसे ही फ्री लेक्चर. था तो यहाँ आकर बैठ गये हम अक्सर आ जाते है उपर'

उन दोनो ने आकर अमन से हेलो की और फिर पर्म बोला 'समीर यार मैं अभी आता हूँ तुम लोग बैठो'

समीर ने पर्म की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर कहा 'वाह भाई अब लड़की मिल गई तो हमें भूल गया'

अमन उसकी बात सुनकर शरमा गई और मुस्कुराने लगी.

पर्म ने उसे मुस्कुराते देखा और अंदर ही अंदर खुश होता हुआ बोला 'अरे यार तू उल्टा ही सोचा कर हम लोग अभी सिर्फ़ दोस्त हैं'

तेजवीर भी कहाँ पीछे रहने वाला था 'तो लवर बनते कॉन सा टाइम लगेगा'

अमन को इतने सीधे कॉमेंट की उम्मीद नही थी अबकी बार तो वो अपनी मुस्कुराहट उन तीनो से भी ना छिप सकी'

पर्म ने हालात को समझते हुए कहा 'ओये यार चुप करो चलो अमन तुम'

और वो दोनो नीचे की तरफ चल पड़े. पर्म ने पीछे देखा तो उंदोनो ने उसे मुस्कुराते हुए बेस्ट ऑफ लक का इशारा किया. तेजवीर और समीर अमन की मटकती गान्ड को घूरते रहे जब तक वो स्टेर्स नही उतर गई. पर्म उसे लेकेर लाइब्ररी में गया और जो भी था बुक्स इश्यू करवाने के लिए वो सब आसानी से करवा दिया और अमन को जो बुक्स चाहिए थी वो मिल गई. जेसे ही वो लाइब्ररी से बाहर निकलने लगे तो रमण मॅम लाइब्ररी में एंटर हुई और जेसे ही उसकी नज़र पर्म के साथ मिली तो दोनो मुस्कुरा उठे. ये वोही रमण मॅम थी जिनको पर्म ने राजपूत सर के साथ लॅब में नंगी पकड़ लिया था और उसके बाद कयि बार खुद भी रमण मॅम की चुदाई कर चुका था. अब तो रमण मॅम को भी उसकी चुदाई की आदत पड़ने लगी थी और वो खुल कर उसका साथ देती थी जब भी पर्म उन्हे चोदने के लिए बुलाता था. उन्दोनो में मुस्कुराहट के इलावा कुछ नही हुआ और पर्म लाइब्ररी से बाहर निकल गया और अमन के साथ चलने लगा. अमन ने चलते-2 कहा 'थॅंक यू सो मच पर्म'

पर्म ने आगे से जवाब दिया 'अरे यार थॅंक्स मत बोलो'

अमन भी अब थोड़ा खुलना चाहती थी 'अछा जी तो और क्या करू'

पर्म उसकी ओर से भी आग बराबर देखता हुआ बोला 'और क्या कर सकती हो तुम'

अमन थोड़ा सोच कर बोली 'जो आप कहे'

कहने के बाद अमन ने पर्म की आँखो में देखा और पर्म उसकी आँखों को पढ़ते हुए झट से बोला 'अमन एक बात बोलू आप खूबसूरत बहुत हो'

अमन मुस्कुराती हुई बोली 'अच्छा जी मुझे तो नही लगता'

पर्म बोला 'खुद को तो किसी को भी नही लगता. हम थोड़ी देर उपर चल कर बातें करें अगर आपके पास टाइम हो तो'

अमन को वैसे तो कॅंटीन में जाना था मगर वो ये मोका भी गवाना नही चाहती थी और उसने कहा 'ओके पर जल्दी मुझे फिर कॅंटीन में जाना है रीत और सिमरन वेट कर रही है'

पर्म एकदम से बोला 'ओके जी चलो आपकी फरन्डज़ का भी नाम पता चल गया'

अमन बोली 'हंजी अपने तो पूछा ही नही उस्दिन'

पर्म फ्लर्ट करता हुया बोला 'तुम्हे देखने से फ़ुर्सत मिलती तो नाम पूछते'

अमन उसके उत्तर. से पूरी तरह से शरमा गई. वो चलते-2 अब उपर पहुँच चुके थे और एक रूम के अंदर चले गये. अंदर समीर और तेजवीर बैठे थे. अमन को साथ देख दोनो की आँखें चमक उठी मगर वो चुप ही रहे. पर्म एक बेंच के उपर बैठ गया और अमन उसके पास खड़ी हो गई. तेजवीर और समीर पीछे एक बेंच पे बैठे थे. पर्म ने बैठते ही कहा 'वो मेने तुम्हे कुछ खास बात बताने के लिए ही यहाँ आने को कहा है अमन'

अमन कुछ-2 समझती हुई बोली 'जी कहिए क्या बात है'

पर्म ने भी धीरे से अमन का एक हाथ पकड़ लिया और बोला 'तुम बहुत खूबसूरत हो अमन'

अमन के शरीर में करंट सा दौड़ गया और वो कुछ नही बोली.

पर्म ने उसके दोनो हाथो को अपने हाथो में लिया और कहा 'आइ लव यू अमन'

अमन उसकी बात सुनकर पूरी तरह से शरमा गई और उसने बहुत हिम्मत जुटाते हुए एक बार नज़र उठाकर पर्म की आँखों में देखा और अगले ही पल मुस्कुराहट के साथ उसकी नज़रें फिरसे झुक गई. पर्म ने उसे थोड़ा पास खीचते हुए कहा 'कुछ बोलो ना यार प्लीज़'

अमन बोलना तो चाहती थी मगर शरमा रही थी आख़िर हिम्मत जुटा कर उसने बोल ही दिया 'लव यू टू पर्म'

अमन के मूह से ये बात सुनते ही पर्म ने उसे झटके के साथ अपनी ओर खीच लिया अब वो बिल्कुल उसके पास आ गई थी. पर्म अपनी जगह से उठा और अमन को कमर पे हाथ डाल कर तोड़ा उठा दिया और बेंच पे बिठा दिया यहाँ वो पहले आप बैठा था. अमन को इस सब से बहुत शरम आ रही थी. पर्म ने उसका चेहरा पकड़ा और उपर उठा कर अपने सामने किया. अमन उससे नज़रें नही मिला पा रही थी. पर्म की नज़र जेसे ही अमन के काँपते होंठो पे पड़ी तो वो अपना कंट्रोल खो बैठा और अपने होंठ अमन के सुराख गुलाबी होंठों ले रख दिए. अमन भी अपने यार के इस पहले चुंबन में जेसे खो सी गई. उसे याद ना रहा कि रूम में उन्दोनो के अलावा और भी दो लड़के हैं. अमन ने अपने हाथ में पर्म का चेहरा पकड़ लिया. पर्म के होंठों मे अमन मे नीचे वाले होंठ को जाकड़ रखा था और उसका रस निकाल रहे थे और वही अमन भी पर्म के उपर वाले होंठ को अपने दोनो होंठों से खूबसूरती के साथ चूस रही थी. आख़िर कोई 5 मिनट तक अमन के होंठ चूसने के बाद पर्म ने अपने होंठो को जुदा किया और होंठ जुदा होते ही अमन एकदन से शरमा गई और उसे एहसास हुआ कि समीर और तेजवीर उन्हे देख रहे थे. वो एकदम से बेंच के उपर से उठी और अपने बॅग उठाकर बाहर की तरफ़ जाने लगी लेकिन पर्म ने आगे बढ़कर उसे पीछे से बाहों में भर लिया उसे खुद से अच्छी तरह सटाते हुए उसकी गर्देन और गालों को चूमने लगा. अमन को अपने आशिक़ की हरकतों पे प्यार भी आ रहा था और शरम भी आ रही थी. उसने अपने आप को पर्म की गिरफ़्त से छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा 'प्लीज़ मुझे जाने दो पर्म नीचे रीत न्ड सिमरन मेरा वेट कर रही है'

पर्म ने भी इतनी जल्दबाज़ी ठीक नही समझी और उसे छोड़ते हुए कहा 'ओके जान जाओ'

अमन उसकी तरफ देख कर मुस्कुराइ और फिर समीर और तेजवीर की तरफ (जोकि उसे ही घूर रहे थे देखती) हुई बाहर निकल गई और नीचे आ गई.

सिमरन और रीत ने उसे इतनी लेट आने का कारण पूछा तो उसने लाइब्ररी से बुक्स इश्यू की बात उन्हे बता दी और पर्म के साथ हुई मुलाक़ात को छुपाते हुए कोल्ड ड्रिंक पीने लगी.
 
कॅंटीन में कुछ देर और बैठने के बाद वो तीनो फिरसे क्लास में चली गई. उधर सुख रोज़ की तरह गुरजोत और चिनू के आठ जेडी रूट पे था. चिनू और गुरजोत तो पक्के नशेड़ी थे अब उन्होने सुख को भी इसकी लत ल्गा दी थी. सुबह सुख कॉलेज आके सबसे पहले उन्दोनो को ही ढूंढता था ताकि कुछ नशा वगेरा करके थोड़ा सरूर ब्ना स्के.

आख़िर किसी तरह कॉलेज ख़तम हुआ और सिमरन और वो दोनो बस स्टॉप की ओर चल पड़ी. रास्ते में कॉलेज के गेट के पास पर्म न्ड पार्टी खड़ी थी. अमन की नज़र जेसे ही पर्म से मिली तो वो दोनो मुस्कुरा उठे और पर्म के लंड ने एकदम से हरकत की. अमन अपनी चाल को और मस्तानी करते हुए नशीली आँखों से पर्म को देखती हुई उनके पास से गुज़र गई और वो तीनो लड़के भी उन तीन हुस्न के परियो की मटकती गान्ड को तब तक घूरते रहे जब तक वो उनकी रेंज से बाहर नही हो गई. उनकी बल खाती कमर को देख कर तेजवीर बोला 'भाई तीनो की तीनो मस्त माल है'

समीर ने भी कहा 'हां भाई तेरी तो सेट्टिंग हो गई अब हमारी भी करवा इन्दोनो से'

पर्म उन्दोनो को देखते हुए बोला 'अरे थोड़ा सबर तो करो तुम दोनो की सेट्टिंग भी करवा दूँगा पहले मेरी तो अच्छे से हो जाने दो'

फिर वो तीनो भी घर जाने के लिए पर्म की गाड़ी की तरफ चल पड़े.

.................

सुख रोज़ की तरह बस स्टॉप पे ही था और उसे देखते ही अमन बोली 'भैया तुम कभी क्लास भी लगा लिया करो'

सुख कुछ नही बोला उसकी आँखो में लाल रंग सॉफ दर्शा रहा था कि उसने कोई नशा किया था. सुख अच्छे सरूर में था और अपनी जान सिमरन जो घूर रहा था. सिमरन की नज़रे एक दो बार उससे मिली और वो सुख को एकटक अपनी तरफ घूरता पाकर असमनजस में पड़ गई. इतने में बस आई और सिमरन को कुछ सोचने का मोका ही नही मिला और वो सभी बस में चढ़ गये और अपनी मंज़िल की तरफ चल पड़े.

शाम को रीत गुरद्वारे जाने के लिए घर से निकली और अमन के घर की तरफ चल पड़ी. उसने एक पिंक लोवर के साथ वाइट टी शर्ट पहनी थी. अमन को साथ लेकर वो गुरद्वारे के लिए निकल पड़ी. रास्ते में रीत अमन को कुछ बताना चाहती थी और उसने धीरे से अमन को कहा ' अमन एक बात बताऊ'

अमन उसकी तरफ देखते हुए 'हां बताओ ना'

रीत थोड़ा शरमाते हुए बोली 'वो अपने गाओं का लड़का है ना गुलशन'

अमन एकदम से हैरान होते हुए 'हां-2 क्या हुआ उसे'

रीत फिरसे होंठो में मुस्कुराते हुए बोली 'अरे हुआ कुछ नही उसने मुझे प्रपोज किया कल'

अमन को थोड़ा झटका भी लगा और थोड़ी खुशी भी हुई और वो बोली 'अरे वाह तूने मुझे कल क्यूँ नही बताया'

रीत बोली "आज कॉलेज में बताने वाली थी मगर तू फ्री लेक्चर. में लाइब्ररी चली गई'

अमन को भी लाइब्ररी का जिकर होते ही पर्म की याद आ गई और उसने भी अपनी सबसे प्यारी सहेली को आख़िर बताने का फ़ैसला करते हुए कहा 'रीत मैं आज लाइब्ररी तो गई थी मगर एक और बात भी है'

रीत हैरान होते हुए 'क्या..??'

अमन बोली 'वो आज पर्म ने मुझे प्रपोज किया'

रीत चोन्क्ते हुए 'क्या उस फुकरे ने'

अमन हँसते हुए बोली 'हां और मेने हां भी कर दी'

रीत पूरी तरह से चोंक गई और बोली 'तू जानती है ना वो एक नंबर. का बदमाश है अमन' .

अमन मुस्कुराते हुए 'तू भी ना रीत बस मुझे पसंद है'

रीत को अमन की खुशी का एहसास हुआ तो बोली 'ओके मेरे फुकरे जीजू की स्वीटी'

फिर वो दोनो हँसती हुई गुरद्वारे के अंदर एंट्री कर गई और माथा टेकने के बाद वो लॅंगर की तरफ चली गयी और वहाँ जाकर सेवा करने लगी. गुलशन तो पहले से ही अपने दोस्त हरप्रीत के साथ वहाँ था उसे पता था रीत रोज़ इस टाइम गुरद्वारे आती है. अपनी माशूका के टाइट लोवर में कसे चूतड़ देख गुलशन मस्ता उठा. रीत भी चोरी-2 उसे घूर रही थी और अमन अब आँखो ही आँखो में रीत को गुलशन की तरफ इशारे करती हुई छेड़ रही थी. रीत और गुलशन की नज़रें मिली तो गुलशन ने उसे अपने पीछे आने का इशारा किया और इस इशारे को अमन ने भी देख लिया और रीत के पास आकर बोली 'जा अब बुला रहा है'

रीत डरती हुई बोली 'यार यहाँ कोई देख लेगा'

अमन बोली 'अरे यार कितना डरती है कहो तो मैं चली जाउ'

रीत उसे घूरती हुई 'चुप बदमाश मैं ही जाती हूँ'

रीत गुलशन के पीछे-2 चली गई और गुलशन उसे स्टोर रूम की तरफ ले गया यहाँ लकड़ी वगेरा रखी हुई थी. वहाँ अक्सर कोई नही होता था. अंदर आते ही गुलशन दरवाज़े के पीछे खड़ा हो गया. जेसे ही रीत अंदर आई तो उसकी नज़र लोवर में क़ैद रीत के बड़े-2 चुतड़ों पे पड़ी और उसने आगे बढ़कर रीत के दोनो चुतड़ों को अपने हाथों में भर लिया और ज़ोर से भींच दिया. रीत उसकी इस हरकत से एकदम चोंक गई और पीछे घूम गई. उसके पीछे घूमते ही गुलशन ने उसे बाहों में भर लिया और रीत गुलशन को देखते ही शरमा गई. गुलशन ने अपने हाथों से रीत की कमर सहलाते हुए कहा 'आज तो ग़ज़ब लग रही हो'

रीत शरमाते हुए बोली 'अच्छा जी झूठ मत बोलो'

गुलशन धीरे-2 हाथों को नीचे लेजाता हुआ बोला 'कसम से जान'

रीत को जेसे ही लगा कि अब अगर गुलशन के हाथ थोड़े नीचे हुए तो सीधे उसके नितंबों पे होंगे तो उसने हाथ पीछे लेजाकर गुलशन के हाथों को उपर उठा दिया. गुलशन की नज़र रीत के होंठों पे थी और उसने मोका ना गँवाते हुए अपने होंठ रीत के लरज़ते हुए होंठो पे टिका दिए. रीत ने अपने होंठ वापिस खीचने चाहे मगर गुलशन के होंठों ने उसके होंठो को नही छोड़ा. कुछ ही सेकेंड्स में रीत ही उसका साथ देने लगी और उसके हाथ खुद ही गुलशन के चेहरे के उपर पहुँच गये. गुलशन ने कस कर रीत को भींच लिया और रीत के मम्मे उसकी मस्क्युलर छाती में धँस से गये. गुलशन को उसके मम्मो का नरम-2 एहसास हो रहा था. अब उसने धीरे से अपने हाथ नीचे किए और रीत के दोनो चूतड़ कस कर लोवर के उपर से ही अपने हाथों में भर लिए. रीत उसके ऐसा करते ही पंजो के बल उपर उठ गई और गुलशन की छाती में और धसती चली गई. गुलशन के होंठ थे कि रीत को छोड़ने का नाम ही नही ले रहे थे. तभी स्टोर रूम के पास हुई आहट ने उन्हे एकदम से जुदा कर दिया. रीत को जब थोड़ी देर पहले हुए इस लाजवाब चुंबन का एहसास हुआ तो वो एकदम से शरमा गई और बाहर भाग गई. वो स्टोर रूम से बाहर निकली तो गेट पे हरप्रीत को खड़े पाया. एक पल के लिए उसके दिमाग़ ने सोचा कहीं हरप्रीत ने उन्हे...अगले ही पल उसने कहा नही-2 वो तो अभी आया होगा और वो तेज़-2 चलती हुई अमन के पास पहुँच गई और दोनो घर की ओर चल पड़ी. रास्ते में अमन ने उसे छेड़ा और पूछा कि अंदर क्या हुआ तो रीत ने बता दिया जो पर्म के साथ तूने किया वोही हमारे बीच हुआ और वो ऐसे ही बातें करती हुई घर पहुँच गई.

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हरजीत वापिस आ चुका था और गुरनाम उसे घर के बाहर ही छोड़ कर चला गया था. उसे कोई ज़रूरी काम था नही तो वो मनप्रीत के दर्शन किए बिना केसे जा सकता था. मनप्रीत ने काम के बारे में पूछा तो हरजीत ने बताया कि काम मिल गया है और बहुत ही अच्छा काम है और सॅलरी भी 15000 के करीब है और काम भी कोई ज़्यादा नही बस बैठने का ही है. मनप्रीत को बहुत खुशी हुई और उसने दिल ही दिल अपने जीजा का धन्यवाद किया क्यूंकी अब उनका गुज़ारा अच्छे से होने वाला था और चार पेसे वो बचा भी सकते थे. पहले सॅलरी कम और खेती में से ही थोड़े बहुत पेसे आते थे वो भी खरच ही जाते थे. उनकी ज़मीन हरजीत ने अपने ताया के लड़के गुरमेल सिंग को ही ठेके पे दी थी और वोही उसपे खेती करता था और हरजीत को ठेका देता था. अब सॅलरी और ठेका दोनो को मिला कर एक महीने के 20-25 ज़ार उन्हे मिलने वाले थे इसलिए मनप्रीत अब खुश थी. मनप्रीत ने कयि दफ़ा हरजीत को कहा था कि वो अपनी खेती खुद कर सकते हैं मगर हरजीत उसकी बात टाल देता था. मनप्रीत चाहती थी कि 2 भैंसे रख कर वो कुछ खेती तो कर ही सकते हैं. इससे दूध का खरच भी बच सकता था जोकि अभी गुरमेल के घर से ही मनप्रीत लेकर आती थी और उसके पेसे भी देती थी. मनप्रीत ज़्यादातर खुद ही दूध लेने जाती थी. मनप्रीत ने अक्सर महसूस किया था कि उसका जेठ गुरमेल उसे बहुत घूरता था लेकिन उसने कभी आँख उठा कर अपने जेठ की तरफ नही देखा था. उसका जेठ गाओं का सरपंच भी था और साथ ही साथ मनप्रीत भी पंचायत मेंबर थी लेकिन जब भी कही पंचायत के सिलसिले में जाना होता था तो हरजीत खुद ही जाता था. अब मनप्रीत खुश तो थी लेकिन उसे एक ही परेशानीी थी कि गुरनाम के साथ वो केसे करेगी. जाहिर था कि अब उसने ये तो मान लिया था कि गुरनाम को अब देनी पड़ेगी बस उसे शरम आ रही थी क़ी केसे वो उसके सामने नंगी होगी लेकिन क्या होने वाला था ये तो वक़्त ही बताने वाला था.

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रीत और गुलशन न्ड पर्म और अमन की बात को हुए हफ़्ता हो चुका था और अब वो एकदुसरे के साथ काफ़ी खुलने लगे थे रोज़ फ़ोन पे बात भी होती थी. हरजीत भी नये काम पे जाने लगा था लेकिन गुरनाम अभी तक अपनी सालेहर को चोद नही पाया था. उसे ड्यूटी की वजह से वक़्त ही नही मिल पा रहा था लेकिन एक दिन उसे मोका मिल ही गया. आज उसे उसी गाओं में फिरसे जाना था जिस गाओं में वो पिछली दफ़ा गया था और आते वक़्त मनप्रीत के यहाँ होते हुए आया था. वो आज बहुत खुश था आख़िर आज उसकी सालेहर जो उससे चुदने वाली थी. वही मनप्रीत भी अब बेचैन सी हो रही थी वो चाहती थी कि एक दफ़ा गुरनाम उसे चोद ले ताकि फिर वो उससे हमेशा के किए दूरी बना सके. गुरनाम ने अपनी पसंदीदा गाड़ी स्कोडा निकाली और ऑफीस से सीधा उस गाओं की ओर चल पड़ा और रास्ते में उसने गाड़ी में से डब्बी निकाली और अफ़ीम की एक मोटी सी डली बनाकर मूह में डाली और मुस्कुराते हुए एक्षसीलटेर पे पैर रख दिया.

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हरजीत के जाने के बाद रीत भी तैयार होके घर से निकली और अमन के घर की तरफ चल पड़ी. वहाँ से वो दोनो बस स्टॉप की तरफ निकल पड़ी. सुख आज मम्मी के साथ रिश्तेदारी में जा रहा था इसलिए अमन अकेली ही कॉलेज जा रही थी. अमन ने आज वाइट कमीज़ और ब्लू पटियाला शाही सलवार पहनी थी और रीत ने ग्रीन कलर का टाइट सलवार कमीज़ पहना था. जेसे ही वो चली जा रही थी तो सामने उन्हे गुलशन और हरप्रीत बुलेट बाइक पे खड़े दिखाई दिए. गुलशन को देखते ही रीत ने मुस्कुराते हुए उसे देखा. जेसे ही वो पास आई तो गुलशन बोला 'आज तो आग ही लगा रही हो जान'

रीत ने शरमाते हुए नज़रें झुका ली और गुलशन ने अमन की तरफ देखा तो वो भी उसे ही घूर रही थी. गुलशन ने उसे आँख मार दी और अमन मुस्कुरा उठी. अमन ने हरप्रीत की तरफ देखा तो उसने भी मुस्कुराते हुए उसे आँख मार दी. अमन ने फीकी सी मुस्कान से उसकी आँख का भी जवाब दे दिया. आगे निकल कर रीत ने फिरसे गर्देन घूमकर उन्हे देखा तो पाया वो दोनो उन दोनो की गान्ड को घूर रहे थे. रीत ने शरमाते हुए फिरसे गर्देन घुमा ली. वो बस स्टॉप पे पहुँची और बस आते ही उसमे चढ़ गई. भीड़ होने की वजह से वो खड़ी ही थी कंडक्टर आया तो उन्हे देखकर गंदी सी स्माइल देने लगा. रीत ने पेसे उसे दिए और जेसे ही उसने टिकेट वापिस पकड़ाई तो रीत का हाथ मसल दिया. रीत ने गुस्से से उसे घूरते हुए अपना हाथ छुड़ा लिया. कंडक्टर ने रीत के बदले तेवेर देख कर चुप चाप आगे बढ़ना ही सही समझा. उनका कॉलेज आते ही वो उतर गई. आगे की विंडो से सिमरन भी उतर गई और तीनो सहेलिया मिली और कॉलेज की तरफ़ चल पड़ी. पर्म न्ड पार्टी ने दूर से उन्हे देख लिया और तेजवीर बोला 'पर्म भाई आज तो तेरा साला साथ नही आया लगता है आएगा भी नही आज मैदान सॉफ है'

पर्म बोला 'हां आज तो कुछ करना पड़ेगा'

वो जेसे ही उनके पास से गुज़री तो रीत ने उनकी तरफ़ देखते ही नाक चढ़ा लिया और अमन ने पर्म को एक सेक्सी सी स्माइल दी और आगे बढ़ गई.

क्लास में 2 लेक्चर. लगाने के बाद वो तीनो कॅंटीन में आ गई और जेसे ही बैठी तो अमन का फ़ोन बजने लगा.

अमन-हंजी क्या हाल है जनाब के.

पर्म-हाल तो बुरा है तेरे बिना.

अमन-अच्छा तो इलाज़ करवाइए ना.

पर्म-तुम कर दो इलाज़ आकर.

अमन-अच्छा मैं कोन्सि डॉक्टेर हूँ.

पर्म-आजा ना यार उपर बहुत मन कर रहा है मिलने का.

अमन-अच्छा जी मेरे साथ रीत न्ड सिमरन भी तो है.

पर्म-उनको भी ले आ.

अमन-ओके देखती हूँ.

अमन ने फ़ोन रखा और रीत को कहा 'रीत चल ना पर्म बुला रहा है'

रीत बोली 'मैं नही जाने वाली उस फुकरे के पास सिमरन को लेजा'

सिमरन एकदम से बोली 'ना बाबा ना'

अब सिमरन को भी पर्म न्ड अमन के रीलेशन का पता चल चुका था.

रीत उसे छेड़ते हुए बोली 'अकेली ही जा ना वैसे भी हमारे सामने तुझे उसकी गोद में बैठने में शरम आएगी'

अमन उसे मारते हुए उपर की तरफ चल पड़ी.

जेसे ही उपर जाकर अमन उसी रूम में घुसी तो उसने देखा समीर और तेजवीर पीछे एक बेंच पे बैठे थे. अगले ही पल उसे किसी ने पीछे से बाहों में भरा और उपर उठाते हुए पीछे ले गया. जेसे ही अमन ने चेहरा घूमकर पर्म को देखा तो बोली 'क्या करते हो जान निकाल दी'

पर्म ने उसे नीचे उतारकर घुमाया और अमन कुछ बोलती उससे पहले ही उसके होंठ अपने होंठो से बंद कर दिए और ज़ोर-2 से चूसने लगा. थोड़ा नाज़ नखरा दिखाने के बाद अमन भी उसका भरपूर साथ देने लगी और पर्म के हाथ अब अमन के दोनो चुतड़ों को कमीज़ के उपर से अपने आगोश में लेने लगे. जेसे ही पर्म के हाथ उसके चुतड़ों को मसल्ते अमन अपने पंजो के बल हो जाती. अमन को पता भी नही चला कि कब पर्म का एक हाथ आगे आया और झट से उसने अमन का नाडा भी खोल दिया. अमन जेसे नींद से जागी. इससे पहले कि सलवार ढीली होकर नीचे सरक्ति अमन के हाथो ने उसे पकड़ लिया और अमन उससे जुदा होकर सलवार का नाडा बाँधते हुए बोली 'प्लीज़ पर्म इससे आगे नही'

अमन ने समीर और तेजवीर की तरफ देखा वो उसे ही घूर रहे थे. पर्म ने रीत के दोनो हाथ पकड़ लिए और उसे नाडा बाँधने से रोक दिया और उन्दोनो की तरफ देखकर बोला 'तुम लोग दरवाज़े पे नज़र रखो'

वो दोनो उठे और दरवाज़े के पास जाकर खड़े हो गये. अब भी उन्हे नज़ारा तो दिख रहा था लेकिन थोड़ा दूर जाने से अमन को थोड़ी राहत मिली थी. पर्म ने उसे गोद में उठा लिया और उसका नाडा बीच में ही छूट गया. लेकिन गोद में होने की वजह से उसकी सलवार सरकने से बच गई. पर्म ने उसे एक बेंच पे लिटा दिया और खुद उसके उपर लेट गया और फिरसे दोनो के होंठ मिल गये. पर्म थोड़ा उपर उठा और अपनी और अमन की छाती के बीच अपने हाथ घुसाते हुए अमन के दोनो मम्मे कमीज़ के उपर से मसल्ने लगा. अमन भी अब मदहोश होने लगी. पर्म ने दोनो हाथो से उसकी कमीज़ को उपर सरकाते हुए अमन के मम्मो को बाहर निकाल लिया. अगले ही पल उसके हाथो ने ब्लू कलर की ब्रा को नीचे करते हुए उसके दोनो मम्मे बाहर निकाल लिए. पर्म ने अमन के होंठ छोड़े और जेसे ही उसकी नज़र अमन के नंगे गोल और गोरे गोरे मम्मो पे पड़ी तो वो अपना होश गँवा बैठा और उनपर टूट पड़ा. वो उन्हे होंठो से चूस भी रहा था और हल्का काट भी रहा था. अमन की हल्की सिसकिया और चीखें कमरे में गूँज उठी. समीर और तेजवीर एकटक उन्हे ही घूर रहे थे लेकिन पर्म अमन के उपर था इसकी वजह से उन्हे अमन के मम्मे दिखाई नही दे रहे थे और इतना ज़रूर पता था कि अमन के मम्मो को पर्म ने नंगा किया हुआ है. दोनो के लंड पूरे उफान पे थे और दोनो पॅंट के उपर से लंड को मसल रहे थे. पर्म और अमन तो दुनिया से बेख़बर एकदुसरे के साथ लगे हुए थे. आख़िर अमन के फ़ोन की रिंग ने उन्हे जगाया और पर्म को गुस्सा तो बहुत आया मगर वो अमन के उपर से उठ गया. अमन उठकर बेंच पे बैठ गई. और उसने अपने मम्मो को ब्रा के अंदर किया और कमीज़ नीचे कर लिया. समीर और तेजवीर को उसके मम्मो की हल्की झलक देखने को मिल गई. पर्म ने पास ही बेंच पे पड़ा उसका फ़ोन देखा तो रीत का नंबर. था. उसने स्पीकर ऑन किया और अमन की तरफ फ़ोन कर दिया.

अमन-हां रीत.

रीत-कहाँ है अभी तक जी नही भरा उस फुकरे की गोद में बैठकर.

पर्म को सुनते ही रीत पे गुस्सा तो बहुत आया.मगर वो शांत रहा.

अमन ने नाडा बाँधते हुए पर्म को थोड़ा खुश करने के मकसद से कहा.

अमन-अरे वोही फुकरा अब तेरा जीजू है. और तू उसकी सेक्सी साली आई समझ.

पर्म ने उसे एक सेक्सी स्माइल दी.

रीत- अच्छा तो बोल देना उस जीजू से कि साली से डोर ही रहे.

अमन-अच्छा बाबा अब बता फ़ोन क्यूँ किया.

रीत-क्यूँ किया मतलब अब लेक्चर. नही लगाना सारा दिन उसी की गोद में रहने का इरादा है क्या.

अमन-ओके बाबा अभी आई.

अमन ने फ़ोन कट किया और पर्म की तरफ़ देख कर बोली 'सॉरी इसकी बात का बुरा मत मानना ये दिल की बुरी नही है'

पर्म ने फिरसे उसे सीने से लगाते हुए कहा 'अरे कोई बात नही साली है उसका हक है वैसे भी मेरी तो दोनो सालियाँ पूरी सेक्सी है'

अमन बोली 'बस बस ज़्यादा साली-2 किया तो पास भी नही आउन्गी ओके अब जाने दो प्लीज़'

पर्म उसके होंठ चूमता हुआ बोला 'ओके जा मेरी जान पर हां मेरे दोस्त तेजवीर और समीर की तू अपनी दोनो फरन्डज़ के साथ कराएगी आई समझ'

आमना बोली 'अरे मैं केसे कराउन्गी'

पर्म बोला 'मुझे कुछ नही पता तेजवीर कि रीत के साथ और समीर की सिमरन के साथ'

अमन बोली 'ओके बाबा करा दूँगी ओके चलती हूँ'

अमन बाहर की तरफ़ चल पड़ी. दरवाज़े पे समीर और तेजवीर खड़े थे अमन की उनसे नज़र मिलाने की हिम्मत नही हुई वो जेसे ही दरवाज़े से बाहर निकली तो तेजवीर ने हल्के से उसके एक चूतड़ पे हाथ फिरा दिया. अमन ने उसकी तरफ़ देखा और बिना कोई एक्सप्रेशन दिए नीचे की तरफ चली गई.
 
गुरनाम ने अपना काम जल्दी से निपटाया और गाड़ी को अपनी सेक्सी सालेहर के गाओं की तरफ दौड़ा दिया. जल्दी ही वो उसके घर के सामने था. मनप्रीत ने आज एक ऑरेंज कलर का सलवार कमीज़ पहना था. सलवार प्लेन थी और वही कमीज़ पे हल्के वाइट कलर के फूल थे. गुरनाम ने गाड़ी गली में लगाते हुए बाहर निकल कर गाड़ी को लॉक किया और डोर बेल बजाई.

मनप्रीत किचन में थी उसे डोर बेल बजते ही लगा कि कही गुरनाम तो नही आ गया. उसने चुन्नी से अपने मम्मो की ढका और दरवाज़े की तरफ बढ़ी और दरवाज़ा खोला तो सामने गुरनाम को पाया. उसे देखते ही मनप्रीत एकदम से घबरा गई और हकलाती हुई बोली 'सत श्री अकल भ्रा जी'

गुरनाम ने अंदर आते हुए मुस्कुरा कर रहा 'सत श्री अकल भरजाई'

मनप्रीत ने दरवाज़ा बंद किया और उन्हे कहा 'जी बैठिए' और सोफे की तरफ इशारा किया.

गुरनाम सोफे पे बैठ गया और बोला 'केसी हो जानेमन'

मनप्रीत उसकी बात सुनकर शरमा गई और बोली 'जी ठीक हूँ आप बैठो मैं पानी लाती हूँ'

मनप्रीत जेसे ही उसके पास से होकर जाने लगी तो गुरनाम ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खीच लिया. मनप्रीत अनबॅलेन्स होकर सीधा उसकी गोद में आ गिरी और गुरनाम ने दोनो हाथ उसकी कमर पे कस दिए ताकि वो उठ ना पाए और बोला 'पानी तो निकालने आया हूँ भरजाई जी'

मनप्रीत बुरी तरह से शरमा गई और उसकी गोद से उठने की कोशिश करती हुई बोली 'भ्रा जी छोड़िए ना प्लीज़'

गुरनाम ने उसकी बात को अनसुना करते हुए एक हाथ से मनप्रीत के मम्मो को कमीज़ के उपर से दबाना शुरू कर दिया. अब महज़ एक हाथ उसकी कमर पे था. मनप्रीत को बहुत शरम आ रही थी उसे मोका अच्छा लगा और वो एकदम से उठी और अंदर बेडरूम की तरफ भाग गई. गुरनाम को अपनी नयी महबूबा की शरारत अच्छी लगी और वो भाग रही मनप्रीत की बड़ी गान्ड को हिलते देखता रहा.

आख़िर वो भी उठा और बेडरूम की तरफ बढ़ा और जेसे ही बेडरूम में एंटर हुआ तो उसने देखा मनप्रीत बेड के पास उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी. वो आगे बढ़ा मनप्रीत को भी इसका आभास हो गया लेकिन वो ऐसे ही खड़ी रही और अपनी चुन्नी को दोनो हाथो से मरोडती रही. गुरनाम ने पास जाकर उसे पीछे से बाहों में भर लिया. मनप्रीत के मूह से आहह निकली और उसकी आँखें बंद हो गई.

गुरनाम के होंठ उसकी गर्देन और गालों पे घूमने लगे और हाथ मनप्रीत के दोनो मम्मो को बेरेहमी से मसल्ने लगे. मनप्रीत शादी के बाद आज पहली दफ़ा किसी गैर मर्द के साथ इस हालत में थी. हालाँकि शादी से पहले उसने काफ़ी मज़े लिए थे और शायद वोही आग फिरसे भड़कने वाली थी. मनप्रीत से अब सहन नही हो पा रहा था और वो एकदम से गुरनाम की बाहों में घूम गई और अपने होंठ खुद ही गुरनाम के होंठो के हवाले कर दिए. गुरनाम को मनप्रीत के इस कदम ने सर्प्राइज़ कर दिया और वो मनप्रीत के अंदर छुपि आग को पहचान गया और उसने दोनो हाथो से मनप्रीत के चूतड़ थाम लिए और जितना ज़ोर उससे लगा उसने उन्हे मसल्ने के लिए लगाया.

मनप्रीत पूरी मस्ती से अपने नये आशिक़ से.लिपट ती चली गई. आज भी वो एक हफ्ते के बाद चुदने वाली थी. हरजीत उसे बहुत कम चोदता था अब लेकिन वो तो ऐसी आग थी जो रोज़ जलना चाहती थी. आज उसे जलाने का काम गुरनाम कर रहा था. उसने हाथ आगे बढ़ाया और मनप्रीत का नाडा खोल दिया. मनप्रीत को उसे पकड़ने का मोका मिलता उससे पहले ही उसकी सलवार उसके पैरों में जा गिरी. अगले ही पल उसने मनप्रीत का कमीज़ पकड़ा और उसे उपर उठाने लगा. मनप्रीत ने हाथ उपर उठाए और कमीज़ भी उसके गोरे बदन से जुदा हो गया. सिर्फ़ ब्लॅक ब्रा और पैंटी में जब गुरनाम ने इस काम की देवी को देखा तो वो अपने होश सुध बुध गँवा बैठा. मनप्रीत ने उसे खुद को घूरता पाया तो वो भी शर्मा गई और आगे बढ़कर उसकी छाती से लिपट गई और उसकी वर्दी को उतारने के लिए शर्ट के बटन खोलने लगी. गुरनाम उसे बटन खोलते देखने लगा और बोला 'तू तो बहुत गर्म है भरजाई मुझे तो लगा था बहुत मुश्किल से देगी'

मनप्रीत को अपनी ग़लती का एहसास हुया क्यूंकी वो हवस में मजबूर होकर ज़्यादा ही तेज़ी दिखा रही थी लेकिन अब उसके लिए रुकना मुश्क़िल था. उसने शर्ट को खोल दिया और अपने बड़े-2 मम्मो को गुरनाम की बालों वाली छाती से दबाते हुए उससे लिपट गई. गुरनाम ने पीछे हाथ लेजा कर उसकी ब्रा की हुक खोली और अगले ही पल ब्रा उसकी सलवार के पास पहुँच गई. गुरनाम ने उसे बेड के किनारे पे बिठा दिया और उसके सामने खड़ा हो गया. मनप्रीत उसका इशारा समझ गई और उसकी बेल्ट खोलते हुए पॅंट खोलने लगी. पॅंट खुलते ही मनप्रीत की नज़र उसकी अंडरवेर में क़ैद भारी भरकम हथियार पे गई और अंडर वेअर का उठा हुया हिस्सा बता रहा था कि इसके अंदर बहुत ही बड़ा हथियार है.

जेसे तेसे मनप्रीत ने अंडरवेर नीचे की और लंड को देखते ही उसके होश से खो गए. उसका औज़ार बहुत बड़ा था और उसके पति हरजीत से तो कम्से कम 2 इंच तक बड़ा था और मोटा भी. मनप्रीत ने उसे हाथ में पकड़ा और हिलाने लगी. उसने उपर नज़र उठा कर देखा तो गुरनाम की नज़रें उसके उपर ही थी वो ओह बुरी तरह से झेंप गई. गुरनाम ने कहा 'मूह में लेकर चूस इसे'

मनप्रीत ने होंठो को लंड के पास किया और धीरे-2 उसे अंदर लेने लगी और आख़िरकार आधे से ज़्यादा लंड उसके मूह में चला गया. मनप्रीत किसी पक्के खिलाड़ी की तरह गुरनाम का लंड चूसने लगी. गुरनाम मुस्कुराते हुए बोला 'लगता है अच्छी प्रॅक्टीस है चूसने की'

मनप्रीत उसकी बात सुनकर एक बार रुकी और फिरसे लॉलीपोप को चूसने लगी. गुरनाम ने फिर उसे उपर उठाया और बेड पे झुकने को कहा. मनप्रीत बेड पे हाथ लगाकर झुक गई और गुरनाम के अगले कदम का इंतज़ार करने लगी. गुरनाम ने एक ही झटके में उसकी पैंटी को भी खीच कर नीचे कर दिया और एक हाथ मनप्रीत की चूत पे फिराता हुआ और दूसरे से लंड हिलाता हुआ बोला 'तो क्या कहती हो भरजाई डाल दूं अंदर'

मनप्रीत शरम की वजह से कुछ नही बोली. गुरनाम ने फिरसे मनप्रीत की गोरी और फुटबॉल की तरह गोल गान्ड को घूरते हुए कहा 'बता भी तभी डालुगा अगर बोलेगी'

मनप्रीत भी उसके द्वारा चूत रगडे जाने से मदहोश थी और बोली 'डाल दो जल्दी से भ्रा जी'

उसकी बात सुनते ही गुरनाम ने अपना लंड मनप्रीत की चूत पे सेट किया और एक ही झटके में आधे से ज़्यादा अंदर कर दिया. मनप्रीत हल्का सा चीखी और पीछे गुरनाम की ओर देखने लगी. गुरनाम ने उसे सेक्सी मुस्कराहट दी और मनप्रीत फिरसे शरमा गई. अब गुरनाम हल्के धक्को से शुरुआत करता हुआ अपनी स्पीड बढ़ाने लगा और जेसे जेसे स्पीड बढ़ती गई वैसे ही मनप्रीत की आहें और सिसकियाँ और उसके कंगन और पायल खनकने की आवाज़ें भी आने लगी जोकि माहौल को और भी सेक्सी बना रही थी. मनप्रीत घोड़ी के माफिक झुकी हुई गुरनाम से चुदवा रही थी और गुरनाम उसकी कमर को पकड़ कर बदहवासी से तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था.

अब चुदाई इतनी भयंकर हो गई थी कि मनप्रीत पहले यहाँ बेड पे हाथ रखकर खड़ी थी अब कोहनियो के बल होने के बाद बिल्कुल नीचे आ गई थी और उसका चेहरा बेड के उपर था और उसकी गान्ड और पीछे को निकल गई थी. मनप्रीत जेसी मस्त औरत को खुश कर पाना इतना आसान नही था लेकिन गुरनाम भी घोड़े जेसा मर्द था और गधे जेसा लंड लिए मनप्रीत की फाड़ने पे उतारू हो रहा था.

मनप्रीत हाथों में चद्दर को भींच रही थी. आचनक गुरनाम ने लंड बाहर निकाला और मनप्रीत को बेड किनारे पे बिठाते हुए उसे लीचे लिटा दिया और उसकी टाँगो को उठाकर अपने कंधो पे रखा और एक दफ़ा फिरसे उसका लंड मनप्रीत की चूत की सैर करने लगा. मनप्रीत और गुरनाम की नज़रें अब सामने थी लेकिन मनप्रीत उनका सामना नही कर पा रही थी और आँखें बंद करके चुदाई का मज़ा ले रही थी. कभी-2 वो चोरी से अपने आशिक़ को देखती और फिर उसका भारी भरकम हथियार अपनी चूत में जाता देख उसका दिल उछलने लगता.

करीब आधा घंटा उसकी चुदाई होते हुए हो चुका था और बहुत दिन बाद मनप्रीत की एसी चुदाई हो रही थी. हरजीत भी चुदाई में अच्छा था मगर गुरनाम से उसका कोई मुक़ाबला नही था. मनप्रीत को गुरनाम का स्टॅमिना देख बहुत अच्छा लग रहा था. आख़िरकार मनप्रीत की चूत ने गुरनाम के लंड का एनकाउंटर कर ही दिया और गुरनाम हान्फते हुए मनप्रीत के उपर गिर गया और सारा पानी मनप्रीत की चूत में छोड़ दिया. थोड़ी देर बाद गुरनाम उठा और बेड पे टेक लगा कर बैठ गया और मनप्रीत भी उठ कर शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बाल सवारने लगी. गुरनाम उठा और पॅंट की जेब से कुछ निकाल कर मनप्रीत की तरफ बढ़ा और उसने नंगी मनप्रीत को पीछे से पकड़ लिया. मनप्रीत अपने बाल संवारती हुई बोली 'प्लीज़ अब जाओ आप रीत आती होगी'

गुरनाम कुछ नही बोला और उसने एक चैन निकाली और पीछे से मनप्रीत के गले में डालते हुए बाँध दी. सोने की चैन देखते ही मनप्रीत एकदम से उछल पड़ी और उसने घूम कर गुरनाम को जॅफी पाते हुए कहा 'इसकी क्या ज़रूरत थी भ्रा जी'

गुरनाम ने पीछे उसके दोनो चुतड़ों को अलग-2 करते हुए कहा 'ऐश कर मेरे सिर पे जान बस खुश करती रहना'

मनप्रीत उसके होंठ चूमती हुई बोली 'आपने तो एकबार ही कहा था देने को'

गुरनाम ने उसके चूतड़ पे चिकोटी काट ते हुए कहा 'तू तो अब भागी भागी आएगी मुझे देने के लिए'

मनप्रीत ने हँसते हुए उसकी छाती पे मुक्का मारा और उसे दूर हटा कर कपड़े पहन ने लगी. गुरनाम भी कपड़े पहन कर फटाफट वहाँ से निकल गया.
 
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