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आराधना पता नही क्यू आज कॉलेज मे अपना मन नही लगा पा रही थी. और जैसे ही लास्ट सेशन की बेल बजती है वो तुरंत तेज़ी से अपने मस्त हिप्स मटकाते हुए कॉलेज के गेट की तरफ भागने लगती है. उसको सिमरन गेट पर अपनी कार मे मिल जाती है.
सिमरन -" आजा स्वीटी... मैं ड्रॉप कर दूँगी.". आराधना अपने अधूरे मन के साथ उसकी कार मे बैठ जाती है. आज सिमरन कार कुच्छ स्लो चलाती है.
आराधना -" क्यू इसे साइकल की तरह चला रही है. इससे अच्छा तो मैं पेदल ही चली जाती." आराधना गुस्सा दिखाते हुए बोलती है.
सिमरन -" कार स्लो नही लेकिन हाँ तुझे घर पहुँचने की कुच्छ ज़्यादा ही जल्दी है. क्यू आज कोई तुझसे मिलने आ रहा है क्या "
आराधना -" नही.... नही ऐसा कुछ... नही है". आराधना सिमरन की बात सुनकर घबरा जाती है. सिमरन स्लो स्पीड पे जाते जाते आराधना को घर छोड़ देती है.
आराधना घर मे आने के टाइम बहुत हॅपी थी. " हाई डॅडी". वो बहुत एनर्जी के साथ अपने डॅडी को ग्रीट करती है और उन्हे पहुँच कर हग कर लेती है. पूरी जान से अपने बूब्स उनके सीने मे दबा देती है.
पंकज -" कैसा रहा कॉलेज का दिन?"
आराधना -" पता नही क्यू मन नही लगा". आराधना हंसते हुए अपने डॅड को बताती है
पंकज -" पढ़ाई मे मन लगाना ज़रूरी है". पंकज सीरीयस होते हुए बोलता है. आराधना को उसकी इस बात से बहुत झटका लगता है.
इतने मे स्मृति भी वहाँ आकर पूछती है आराधना से -" बेटे थक गयी होगी तो खाना खा ले".
"मुझे भूख नही है". और आराधना गुस्से मे उपर अपने रूम मे भाग जाती है. वो अपने डॅड के रिएक्ट से हॅपी नही थी. खैर इतने टाइम वो अपने कपड़े चेंज करती है और फ्रेश होती है.
कुशल घर के बाहर जा चुका था और स्मृति अपने रूम मे थी. अब ग्राउंड फ्लोर पे बाहर बस पंकज ही बैठा हुआ था. आराधना को कॉलेज से आए हुए भी एक घंटे से ज़्यादा हो चुका था.
तभी मेन गेट से एक और एंट्री हुई. वाइट टॉप और वाइट मिनी स्कर्ट मे, बेल्ली पिन भी लगाई हुई थी. खुले हुए बाल और एक स्टाइलिश चाल मे एक लड़की एंट्री लेती है. हॉल फिर से मादक खुसबु से भर गया. शी वाज़ नन अदर दॅन सिमरन. डॅम हॉट... क्या लुक्स थे आज उसके.
पंकज को अपनी सीट से उठने पे मजबूर होना पड़ा. उसका मूँह खुला हुआ था.
सिमरन -" हाई अंकल!!!!ल"
पंकज -" आओ बेटा, आख़िर आ ही गयी याद तुम्हे". सिमरन के चेहरे पे एक सेक्सी स्माइल थी.
वो अंदर आते ही सोफे पे बैठ जाती है.
पंकज -" और सुनाओ".
सिमरन -" कुच्छ नही अंकल, बस ऐसे ही घर पे कोई नही था तो सोचा कि आराधना से मिलने आ जाउ".
पंकज -" कभी हम से भी मिलने आ जाया करो ". पंकज फिर से उसकी तरफ भूखी नज़रो से देखता है.
लेकिन सिमरन बस स्माइल करके चुप हो जाती है. तभी पंकज की निगाहे सिमरन की नेक पर बने ड्रॅगन टॅटू पर जाती है.
पंकज -" क्या तुम्हे ये टॅटूस पसंद है?"
सिमरन -" यस अंकल, आइ लाइक टॅटूस. इससे मेरी लुक्स और भी स्टाइलिश और सेक्सी हो जाती है".
पंकज मन मे सोचता है कि और कितना सेक्सी बनेगी. तभी बीच मे ही सिमरन खड़े होते हुए फिर बोलती है.
सिमरन -" मेरे बॉडी के अलग अलग पार्ट मे टॅटूस बने हुए है, क्या आप देखना चाहेंगे".
पंकज -" क्यूँ नही ......" पंकज तो जैसे सम्मोहित होता जा रहा था.
और डिफरेंट सी अदा मे सिमरन खड़ी होती है और अपना साँस अंदर लेते हुए और मिनी स्कर्ट को थोड़ा नीचे करती है. टी - शर्ट को थोड़ा सा उपर करती है. उफफफ्फ़ क्या सीन था.
पंकज का हाथ ऑटोमॅटिकली सिमरन के सपाट पेट की तरफ बढ़ने लगता है.
" सिमरन........" उपर से नीचे आती हुई आराधना पूरी जान से चिल्लाति है. पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है.
सिमरन -" आजा स्वीटी... मैं ड्रॉप कर दूँगी.". आराधना अपने अधूरे मन के साथ उसकी कार मे बैठ जाती है. आज सिमरन कार कुच्छ स्लो चलाती है.
आराधना -" क्यू इसे साइकल की तरह चला रही है. इससे अच्छा तो मैं पेदल ही चली जाती." आराधना गुस्सा दिखाते हुए बोलती है.
सिमरन -" कार स्लो नही लेकिन हाँ तुझे घर पहुँचने की कुच्छ ज़्यादा ही जल्दी है. क्यू आज कोई तुझसे मिलने आ रहा है क्या "
आराधना -" नही.... नही ऐसा कुछ... नही है". आराधना सिमरन की बात सुनकर घबरा जाती है. सिमरन स्लो स्पीड पे जाते जाते आराधना को घर छोड़ देती है.
आराधना घर मे आने के टाइम बहुत हॅपी थी. " हाई डॅडी". वो बहुत एनर्जी के साथ अपने डॅडी को ग्रीट करती है और उन्हे पहुँच कर हग कर लेती है. पूरी जान से अपने बूब्स उनके सीने मे दबा देती है.
पंकज -" कैसा रहा कॉलेज का दिन?"
आराधना -" पता नही क्यू मन नही लगा". आराधना हंसते हुए अपने डॅड को बताती है
पंकज -" पढ़ाई मे मन लगाना ज़रूरी है". पंकज सीरीयस होते हुए बोलता है. आराधना को उसकी इस बात से बहुत झटका लगता है.
इतने मे स्मृति भी वहाँ आकर पूछती है आराधना से -" बेटे थक गयी होगी तो खाना खा ले".
"मुझे भूख नही है". और आराधना गुस्से मे उपर अपने रूम मे भाग जाती है. वो अपने डॅड के रिएक्ट से हॅपी नही थी. खैर इतने टाइम वो अपने कपड़े चेंज करती है और फ्रेश होती है.
कुशल घर के बाहर जा चुका था और स्मृति अपने रूम मे थी. अब ग्राउंड फ्लोर पे बाहर बस पंकज ही बैठा हुआ था. आराधना को कॉलेज से आए हुए भी एक घंटे से ज़्यादा हो चुका था.
तभी मेन गेट से एक और एंट्री हुई. वाइट टॉप और वाइट मिनी स्कर्ट मे, बेल्ली पिन भी लगाई हुई थी. खुले हुए बाल और एक स्टाइलिश चाल मे एक लड़की एंट्री लेती है. हॉल फिर से मादक खुसबु से भर गया. शी वाज़ नन अदर दॅन सिमरन. डॅम हॉट... क्या लुक्स थे आज उसके.
पंकज को अपनी सीट से उठने पे मजबूर होना पड़ा. उसका मूँह खुला हुआ था.
सिमरन -" हाई अंकल!!!!ल"
पंकज -" आओ बेटा, आख़िर आ ही गयी याद तुम्हे". सिमरन के चेहरे पे एक सेक्सी स्माइल थी.
वो अंदर आते ही सोफे पे बैठ जाती है.
पंकज -" और सुनाओ".
सिमरन -" कुच्छ नही अंकल, बस ऐसे ही घर पे कोई नही था तो सोचा कि आराधना से मिलने आ जाउ".
पंकज -" कभी हम से भी मिलने आ जाया करो ". पंकज फिर से उसकी तरफ भूखी नज़रो से देखता है.
लेकिन सिमरन बस स्माइल करके चुप हो जाती है. तभी पंकज की निगाहे सिमरन की नेक पर बने ड्रॅगन टॅटू पर जाती है.
पंकज -" क्या तुम्हे ये टॅटूस पसंद है?"
सिमरन -" यस अंकल, आइ लाइक टॅटूस. इससे मेरी लुक्स और भी स्टाइलिश और सेक्सी हो जाती है".
पंकज मन मे सोचता है कि और कितना सेक्सी बनेगी. तभी बीच मे ही सिमरन खड़े होते हुए फिर बोलती है.
सिमरन -" मेरे बॉडी के अलग अलग पार्ट मे टॅटूस बने हुए है, क्या आप देखना चाहेंगे".
पंकज -" क्यूँ नही ......" पंकज तो जैसे सम्मोहित होता जा रहा था.
और डिफरेंट सी अदा मे सिमरन खड़ी होती है और अपना साँस अंदर लेते हुए और मिनी स्कर्ट को थोड़ा नीचे करती है. टी - शर्ट को थोड़ा सा उपर करती है. उफफफ्फ़ क्या सीन था.
पंकज का हाथ ऑटोमॅटिकली सिमरन के सपाट पेट की तरफ बढ़ने लगता है.
" सिमरन........" उपर से नीचे आती हुई आराधना पूरी जान से चिल्लाति है. पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है.