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पडोसन की मोहब्बत complete

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उसकी आँखें पहले तो रेणुका की चून्चियो पर पड़ीं जो इतनी बड़ी होने के बाद भी एकदम कड़क थी और तने हुए निप्पलों से सजी हुई थी. राजेश ने हाथ बढ़ाया और रेणुका के दोनों स्तनों को दोनों हाथों में पकड़ा और बोला, “साली तेरे इस कमसिन और इतने खूबसूरत बदन पर अगर मेरी नियत बिगड़ी तो मेरा क्या दोष है बोल”

फिर राजेश ने रेणुका की नाभि में अपनी उंगली डाली और उस छेद में उंगली घुमाते हुए रेणुका की छोटी सी चूत को आँखे गडा कर ताकने लगा. फिर राजेश ने धीरे से रेणुका के बदन को ऊपर उठाया और उसे बिस्तर पर पलट दिया. अब रेणुका की नंगी गाँड़ उसकी नजरो के सामने थी. राजेश रेणुका के बगल में लेट गया और अपना हाथ रेणुका की करारी गाँड़ पर फिराने लगा.

अचानक उसने रेणुका की गांड पर जोर से एक थप्पड़ मारा तो रेणुका की चीख निकल गयी और रेणुका की गांड लाल हो गयी.

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रेणुका संभलती उससे पहले ही राजेश ने उसकी गाँड़ में एक ऊँगली घुसा दी. रेणुका उत्तेजना के मारे सिहर उठी. रोमांच से उसके बदन के रोयें खड़े हो गए.

काफी देर तक राजेश मेरी बीवी की गाँड़ और गर्दन और पीठ की खाई को सहलाता रहा फिर उसने दुबारा रेणुका को सीधा किया और उसकी चूत को बड़े गौर से देखने लगा. रेणुका शर्म से पानी पानी हो रही थी. इतनी गहराई से उसके बदन को मैंने भी कभी नहीं देखा था. अब राजेश ने अपना एक हाथ रेणुका की चूची पर और दुसरा हाथ उसकी चूत पर रख दिया. राजेश ने सुबह ही सोच लिया था की इस बार वो रेणुका को ऐसे गाली दे देकर रंडियों की तरह चोदेगा की उसकी सारी शर्म दूर कर देगा जिससे वो दुबारा कभी भी नखरे न करे.

थोड़ी देर रेणुका को ताकने के बाद राजेश बोला“साली कुतिया हटा अपने हाथों को और खोल दे अपनी टाँगों को. अब मैं तुझे अपने इस लम्बे लण्ड से चोदुँगा. अब लेटी हुई क्या कर रही है. चल उठ मेरे लण्ड को बाहर निकाल.”

 
ऐसा कह कर राजेश ने रेणुका को बैठा दिया. रेणुका ने राजेश का बरमूडा खीच कर नीचे कर दिया और राजेश का लंड झटके से बाहर आ गया. राजेश ने अपनी टीशर्ट भी निकाल फेंकी. अब रेणुका के सामने राजेश पूरी तरह नंगा खड़ा हो था. रेणुका ने पहली बार पूरे होश में किसी पराये मर्द का पूरा कड़क और फुला हुआ लण्ड देखा था. राजेश का लण्ड अच्छा खासा लंबा था जिसे देख कर रेणुका की आँखों में एक लाली छा गयी. उसके लण्ड पर फैली हुई नसें उत्तेजना के कारण फड़क रही थीं.

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राजेश ने रेणुका का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो रेणुका ने राजेश के लण्ड को मुठ्ठी में लेकर लण्ड की ऊपर वाली चमड़ी को हलके से बड़े प्यार से उसके लंड पर सरकाने लगी. फिर राजेश ने रेणुका का सर पकड़ा और वह अपने लण्ड को उसके मुंह के पास ले गया और जैसे ही रेणुका ने अपना मुंह खोला राजेश ने लंड उसके मुंह में डाल दिया और उसका मुह चोदने लगा.

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कुछ समय तक राजेश मेरी बीवी के मुंह को चोदता रहा. रेणुका के मुंह में दर्द होने लगा तो वो पीछे हट गयी और राजेश का लण्ड उसने मुंह से निकाल दिया तो राजेश बोल पड़ा“साली रंडी लण्ड चूसने में थक गयी. मनीष का लण्ड तो अच्छी तरह से चूसती होगी तू”

रेणुका ने राजेश की और देखा और बोली “मुह दर्द करने लगा चूसते चूसते. अब आप मेरी चूत को भी चूसिये" यह कह कर उसने अपनी टांगें खोली और राजेश को चूत चूसने के लिए उकसाया. अचानक रेणुका को लगा की आज तक कभी उसने अपने पति को भी इस तरह बेशर्मी से चूत चाटने को नहीं बोला था. कभी जिंदगी में उसे ऐसी गन्दी गालीयाँ किसी नहीं दी थी पर आज उसे मज़ा आ रहा था. वो खुद अपने इस बर्ताव से हैरान थी.

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वो अपने पॉंव फर्श पर लटका कर बिस्तर पर लेट गयी और अपनी चूत राजेश को चूसने के लिए छोड़ दी. राजेश उसकी टाँगों के बिच आया और उसकी जाँघों को थोड़ा चौड़ा कर के बैठ गया. उसने रेणुका की चूत को ध्यान से एकदम करीब से देखा और अपना मुंह उसकी चूत से सटा दिया.

उसकी चूत की सबसे नाजुक जगह पर राजेश अपनी जीभ की नोक से चाटने लगा और चूत के होठोँ को अपनी जीभ से रगड़ कर रेणुका को उकसाने लगा.

रेणुका अंदर ही अंदर पागल हो रही थी फिर राजेश ने हलके से उसकी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल दीं और उसे उँगलियों से चोदने लगा.

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अब रेणुका सब्र नहीं कर पा रही थी. जैसे जैसे राजेश ने उँगलियों से चोदने की रफ़्तार बढ़ाई रेणुका उससे लण्ड से चोदने के लिए मिन्नतें करने लगी. रेणुका ने उससे कहा “राजेश अब सब हो गया. अब जल्दी करो."

राजेश ने अपनी उंगलिया अंदर बाहर करते हुए कहा "कुतिया जब तक तू अपने मुह से साफ़ साफ़ नहीं बोलेगी तब तक मैं कुछ नहीं करूंगा."

अब रेणुका की बर्दाश्त से बाहर था. वो चिल्लाई "मैं तुम्हारा लण्ड लेना चाहती हूँ. मुझे अब तुम्हारे इस मोटे लम्बे लण्ड से मेरी चूत की भूख और प्यास मिटानी है. तुम जल्दी ही मेरे ऊपर चढ़ जाओ और तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में पेलना शुरू करो. अब ठीक है या और कुछ साफ़ साफ़ बोलू."

पर राजेश ने एक ना सुनी. वह उँगलियों से तेज रफ़्तार से रेणुका की चुदाई करता रहा. राजेश ने थोड़ी देर और उँगलियों से रेणुका को चोदना जारी रखा तो रेणुका झड़ने लगी. उसने राजेश का हाथ पकड़ लिया और बोली "बस करो. आह्ह्ह्ह राजेश. गजब हो गया यार. आह… उफ़…. ओह…" रेणुका बिस्तर पर ही ढेर हो गयी.

राजेश ने अपनी उंगलियां रेणुका की चूत में से निकाल ली. उसकी उंगलियां रेणुका की मलाई से पूरी तरह लबालब थीं. राजेश ने एक उंगली खुद चाटी और एक उंगली रेणुका के मुंह में डाल दी.

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रेणुका ने अपनी ही चूत के रस को चाट लिया. उसकी साँसे फूल रही थी और छाती तेजी से ऊपर निचे हो रही थी जिससे दोनों चून्चिया इधर उधर हिल रही थी. राजेश ने उन्हें अपनी हथेलियों में दबोच लिया और उन्हें कस के दबाने और मसलने लगा.

थोड़ी देर बिस्तर पर पड़े रहने के बाद रेणुका की साँसों की तेज रफ़्तार थोड़ी धीमी हुई. वो अभी भी राजेश का लंबा और मोटा लण्ड मेरी चूत में डलवाने के लिए बेकरार थी. अब राजेश उसकी दोनों टाँगों के बीच आ गया. उसने रेणुका की टाँगें अपने कंधे पे रखीं और अपना लण्ड उसकी चूत के छेद पर रख दिया. रेणुका ने उसके लण्ड को अपनी उँगलियों में पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगी और राजेश को इशारा किया की अपना लण्ड वह उसकी चूत में डाल दे.

राजेश ने एक धक्का मारा और उसका लण्ड रेणुका की फड़कती चूत में घुस गया. रेणुका के मुह से एक कराह निकल गयी तो राजेश ने अपना लण्ड बाहर निकाला और एक और धक्का दे कर उसे फिर मेरी बीवी की चूत में घुसेड़ दिया.

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धीरे धीरे राजेश ने अपना पूरा लण्ड रेणुका की चूत में घुसेड़ दिया और हौले हौले धक्के लगाने लगा. राजेश के बड़े अंडकोष रेणुका की चूत और गाँड़ पर “छप छप” थपेड़ मार रहे थे. जैसे ही राजेश ने चोदने के रफ़्तार तेज की रेणुका का बदन राजेश के धक्कों से तेजी से हिलने लगा.

राजेश में टिकने की क्षमता देख कर रेणुका हैरान रह गयी. कम से कम आधे घंटे तक राजेश ने उसे अच्छी तरह चोदा. रेणुका को राजेश के लण्ड की चुदाई से इतनी उत्तेजना हो रही थी की वो राजेश से पहले ही दुबारा झड़ने वाली थी. रेणुका ने नीचे से ही ऊपर की ओर धक्का मारना शुरू किया. राजेश ने जब यह देखा तो उसने अपनी रफ़्तार और तेज कर दी. रेणुका कामोन्माद की चरम सीमा पार कर चुकी थी और झड़ने लगी. साथ साथ ही उसे महसूस हुआ की उसकी चूत में गरम गरम वीर्य का फौव्वारा छूटा और उसकी चूत राजेश के वीर्य से से भर गयी.

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अपना माल छोड़ कर राजेश मेरी बीवी के ऊपर ही निढाल होकर गिर गया. रेणुका ने राजेश को अपने ऊपर से हटाया और वो बाथरूम की तरफ चली गयी. ५ मिनट राजेश ऐसे ही पड़ा रहा फिर उसने अपना फ़ोन उठाया और मेरा नंबर मिला दिया.

 
इधर मैं और दिव्या कौसानी पहुच गए थे. हमे ५ घंटे लग गए थे. बीच बीच में बारिश भी हो रही थी. आधे रस्ते कार दिव्या ने ड्राइव की थी और अभी मैं चला रहा था तो मैंने दिव्या से पुछा "बताइए कहा चलेंगी."

दिव्या ने कहा "पहले होटल ही चलते है. थोडा रेस्ट कर लेते है."

मैंने भी सोचा की इन पहाड़ो को देखने से पहले दिव्या के उन्नत उरोजो के दर्शन करने चाहिए. दिव्या के पास होटल की सब डिटेल्स थी तो हम दोनों सीधे होटल पहुच गए.

हम दोनों रूम में पहुचे ही थे की मेरे पास राजेश का फोन आ गया. राजेश बोला "पहुच गए तुम लोग"

मैंने कहा "हाँ. बारिश की वजह से काफी टाइम लग गया. उधर का क्या हाल है."

"बढ़िया है. वैसे भी अब वो मेरी भी बीवी बन गयी है तो मनाना थोडा आसान था. एक बार चुद चुकी है तुम्हारी बीवी मुझसे लेकिन अभी थोडा और समझाना पड़ेगा. तुम शाम को रेणुका को फोन करके बोल देना की बारिश की वजह से आने जाने का रास्ता बंद हो गया है और रास्ता खुलने में दो दिन लगेगे और तुम लोग तभी वापस आओगे." राजेश ने बोला.

"बहुत अच्छा. अब फोन रखिये तो मैं भी आपकी बीवी के साथ सुहागरात मना लूं" मैंने राजेश से कहा.

"अरे अब वो तुम्हारी बीवी भी है तो जैसा तुम चाहो करो बस तुम शाम को रेणुका को फ़ोन कर देना." राजेश ने ये कह कर फोन काट दिया और बाथरूम की तरफ गया. उसने देखा की रेणुका ने दरवाजा लॉक नहीं किया है तो वो बाथरूम में घुस गया. रेणुका अब शावर लेने जा रही थी. उसने राजेश को देख कर चौंक गयी और बोली "अरे आप दुसरे बाथरूम में जाओ न. मुझे नहा तो लेने दो."

राजेश ने कुछ नहीं बोला और शावर जेल उठा कर रेणुका के बदन पर लगाने लगा. फिर राजेश ने एक हाथ से शावर ऑन कर दिया. शावर से ठंडा पानी निकलते ही रेणुका राजेश से चिपक गई और बोली "उफ्फ्फ क्या करते है आप... इतना ठंडा पानी है."

"क्या आप आप लगा रखा है. मुझे जानू बुलाया करो मेरी जान" राजेश ने रेणुका को बाहों में लेते हुए कहा और उसे रगड़ रगड़ कर साबुन लगाने लगा.

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रेणुका ने भी राजेश का लंड पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.राजेश ने रेणुका के होंठ चूसना शुरू कर दिया. रेणुका के बदन में गर्मी आने लगी. वो भी राजेश को डीप स्मूच कर रही थी.

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फिर रेणुका नीचे बैठ कर राजेश के लंड पर साबुन मलने लगी. धीरे धीरे उसका लंड एकदम टाइट हो गया. अब रेणुका राजेश के लंड के सुपाडे पर जीभ फेरने लगी.

राजेश को बहुत अच्छा लगा की रेणुका १ ही दिन में पूरी चुदक्कड़ बन गयी. रेणुका राजेश का लंड दस मिनट तक चूसती रही. राजेश का लंड फनफ़ना गया और वो रेणुका को चोदने के लिए बेचैन होने लगा. वो रेणुका की चूत में दो उंगली डाल के अन्दर बाहर करने लगा. उसकी चूत गीली हो चुकी थी.

अब राजेश ने रेणुका को खड़ा किया और खुद नीचे बैठते हुए रेणुका की चूत चूसने लगा.

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रेणुका गनगना उठी और बोली "आह.. ऐसे ही चूसो मेरी जान"

थोड़ी देर चूत चूसने के बाद राजेश ने रेणुका की टांग उठाई और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा दिया. रेणुका की चूत में भी पूरी आग लग चुकी थी और राजेश रेणुका को एक गेंद की तरह उछाल उछाल कर चोद रहा था. फच फच.. फट फट की आवाज से बाथरूम ही नहींपूरा होटल का कमरा भी गूंज रहा था. रेणुका मस्ती में चिल्लाने लगी "आआह्ह… आअह्ह क्या मजा आ रहा है जानू… उफ्फ्फ चोदते हो जान…"

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राजेश थोड़ी देर पहले ही झड़ा था तो इस बार वो लम्बी पारी खेलने के लिए तैयार था. १५ मिनट ऐसे ही चोदने के बाद उसने रेणुका को दीवार पर हाथ रख कर झुका दिया और पीछे से लंड घुसा कर जोर से झटके देने शुरू कर दिए.

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रेणुका चीखी "आउउइइइ.. माँआआ.. हाय्यय मर गई.."

राजेश ने पीछे से झटके पे झटके देना शुरू किया. फट फट फ्छ्क फच की आवाज गूंजने लगी.रेणुका की सिस्कारिया रुक ही नहीं रही थी. शावर पूरी स्पीड पे पानी फेंक रहा था. काफी देर ऐसे ही चोदने के बाद राजेश ने अपना लंड मेरी बीवी की चूत से बाहर निकाला और उसकी गोरी बेदाग गांड पर अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी. कुछ देर वो दोनों शावर में खड़े रहे फिर राजेश ने टावेल से रेणुका का बदन पोछा और उसे गोद में उठा कर वापस रूम में आ गया.

राजेश ने रेणुका को कुछ कपडे देते हुए कहा "मेरी जान मैं तुम्हारे ये ड्रेस लाया था. जल्दी से पहन कर तैयार हो जाओ फिर हम थोडा घूमने चलते है." फिर राजेश भी कपडे पहनने अपने रूम में चला गया.

रेणुका इस दुहरी चुदाई से काफी थक गयी थी फिर भी उसने अपने नए पति को मना करना ठीक नहीं समझा और वो टीशर्ट और हाफ पेंट पहन ली. राजेश भी तब तक कपडे पहन कर आ गया. रेणुका को देख कर सीटी बजाते हुए बोला "हाय क्या माल लग रही हो. जरा पोज़ दो तो एक फोटो ले लू."

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रेणुका शर्मा कर पोज़ करने लगी और राजेश ने उसकी फोटो लेकर मुझे भेज दी और लिखा देखो मुझसे चुदने के बाद रेणुका कैसे खिल गयी है.
 
इधर होटल में आकर दिव्या भी बाथरूम में घुस गयी थी. जब वो वापस निकली तो उसने एक मोतियों की माला और पेंटी पहनी हुई थी. कमरे में आकर उसने पेंटी भी उतार दी.

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मैंने भी अपने कपडे उतारे और आगे बढ़ कर उसके बूब्स को सहलाने लगा. उसके बूब्स बहुत सॉफ्ट थे. वो आँखे बंद कर के मजे ले रही थी. अब मैंने उसकी दोनों चूचियाँ कसकर पकड़ ली और उनपर अपने होठ रख कर चूसने लगा.

दिव्या भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैं उसे किस कर रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. मैं दिव्या को गले पर किस करने लगा तो वो मदहोश हो जोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

मैंने दिव्या से पुछा "कल हम चारो के बीच जो हुआ उससे रेणुका तो मुझसे काफी नाराज़ थी. आप राजेश ने नहीं लड़ी."

दिव्या बोली "जब राजेश ने मुझसे कह दिया की उन्हें मुझे तुम्हारे या किसी और के साथ सोने से कोई दिक्कत नहीं है तो मुझे क्या प्रॉब्लम. और वैसे भी ये २-४ साल और है मस्ती के उसके बाद मुझ बुढ़िया को कौन पूछेगा."

मै दिव्या की चूंची चूसते हुए बोला "अरे आज हमारी शादी की सुहागरात है और आज तुमसे वादा करता हूँ की ५० की हो जाओगी तब भी तुमको ऐसे ही चोदुंगा मेरी जान और तुमसे एक बच्चा भी पैदा करूंगा समझी."

अब मैंने अपने कपडे भी उतार दिए और दिव्या को बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया. मैंने उसको उल्टा किया और कमर पर किस करने लगा.

ऐसा करते वक्त मेरा लण्ड उसकी गांड के बीच में रगड़ रहा था. उसको भी बड़ा मजा आ रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद वो बहुत कामुक हो गयी और सिसकारियाँ लेकर बेडशीट नोचने लगी. फिर मैंने उसे सीधा किया और उनके बूब्स को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा. वो तड़पने लगी और अहहहह अहहहहह आहहहहहह करने लगी.

उसकी दोनों चूचियाँ चूसने के बाद मैंने उसको सिर से लेकर पाँव तक चूमा. मेरे हर किस पर वो मचल रही थी. फिर मैं उनकी जांघों पर किस करने लगा और धीरे धीरे उसकी बिना बालों वाली चूत की तरफ बढ़ा. ये वही चूत थी जिसकी तमन्ना बहुत दिनों से मेरे दिल में थी और कल ये मुझे पहली बार नसीब हुई थी. पर कल तो हम दोनों नशे में थे आज सारा काम होश में होना है. मैं पागलो की तरह दिव्या की चिकनी चूत चूसने लगा.

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दिव्या भी मस्ती से अपने हाथ पैर पटकने लगी. फिर अचानक से मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी तो उसके मुंह से अहहहह निकल गयी. कई साल लंड खाने के बाद भी दिव्या की चूत कसी हुई थी. मैं धीरे धीरे उसकी चूत में अपनी ऊँगली को अंदर बाहर करने लगा था.

वो जोर जोर से अहहआा स्सस्सस्सस्स अहहहहहह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् कर रही थी. थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद दिव्या ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल दिया और मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली "अह्ह्ह्ह मनीष अब और मत तड़पाओ…"

लेकिन मुझे तो अभी उसकी चूत का और मजा लेना था तो मैं ६९ पोजीशन में आ गया और अपना मुंह फिर से उसकी टांगो के बीच में लगा दिया.

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मेरा लण्ड अब उसके मुंह के सामने थे. मैंने उसकी कमर के नीचे एक पिलो लगा दिया और चूत को फिर से चाटना शुरू कर दिया. दिव्या बहुत ही उत्तेजित हो उठी और मेरे लण्ड को पकड़ हिलाने लगी. फिर उसने भी मेरा लण्ड अपने मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

करीब १० मिनट के बाद हम दोनों झड़ गए. वो मेरा सारा पानी पी गई और उस ने मेरे लण्ड को चाटकर फिर से कड़क कर दिया.अब उसकी चूत में लण्ड डालने की बारी थी. मैं बेड पर खड़ा हो गया और मैंने दिव्या की दोनों टांगो को फैला कर हवा में उठा लिया. फिर मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर लगाया और रगड़ना शुरू कर दिया.

दिव्या एकदम से तड़प उठी और अपनी गांड को उठा कर मेरे लण्ड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी. मैंने एक जोरदार धक्का मार कर अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर कर दिया. चूत गीली होने की वजह से लण्ड पूरा एक ही बार में अंदर चला गया. दिव्या के मुह से एक चीख निकल गयी. मैं ताबड़ तोड़ धक्के मार मार कर दिव्या की बुर का बाज़ा बजाने लगा.

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दिव्या से बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन मैंने दिव्या की टांगो को कसकर जकड लिया था और मैं उसी पोजीशन में धक्के लगाये जा रहा था. दिव्या बोली "बस करो. मेरी फट जाएगी."

मैंने दिव्या की बात सुन कर उसे वापस लिटा दिया और वापस लंड उसकी चूत में डाल दिया. अब दिव्या को मजा आ रहा था और वो अहहहहह अहहहहह अहहहह ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके मजे ले रही थी. पुरे रूम में फट फट की आवाज़ गूंज रही थी.

दिव्या भी मजे से मेरे लण्ड को अंदर ले रही थी. उसको चोदते हुए मैं उसकी गदराई हुई जांघो को दबा रहा था. कुछ देर में दिव्या का पानी निकल गया तो मैंने उसे पलटा कर पीछे से लंड उसकी चूत में पेल दिया और अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

दिव्या की हालत ख़राब होने लगी. वो बोली "बसस्सस्सस्स करो म्मम्ममनीष आःह्ह्ह अब आऔऊर नहीईईईईईईईईईईईईईईइ" लेकिन मैं अब रुक नहीं सकता था. मैंने धक्के लगाने रखे और थोड़ी देर बाद मैंने अपना सारा माल दिव्या की चूत में डाल दिया और फिर उसके ऊपर ही लेट गया.

मैंने दिव्या से पुछा "कैसा लगा मेरी जान." वो मुस्कुरा कर बोली "जान निकाल दी तुमने तो आज पर मजा आ गया."

मुझे जान कर ख़ुशी हुई की दिव्या को मेरी चुदाई से संतुष्टि हुई थी. मैं दिव्या के नंगे बदन से खेलता रहा और कुछ देर में फिर से मेरा लण्ड खड़ा हो गया. मैंने दिव्या को घुटनो के बल बिठाया और वो मेरे लण्ड को मुंह में ले कर चूसने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे कि स्वर्ग में पहुंच गया हु. फिर मैंने उसको आगे की तरफ झुकाया और दुसरे राउंड के लिए उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपने लण्ड को पीछे की तरफ से उनकी चूत में लगा दिया और उनकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो भी अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी और लण्ड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी. मैंने पूरा लण्ड दिव्या की चूत में डाल दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के लगाने लगा.

वो फिर से अहहह अहहहह अहहह कर के अपनी कमर को जोर से हिला रही थी. उसके मुंह से ये आवाजे और कामुक लग रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और गांड में डाल दिया.

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लंड दिव्या की चूत के रस से भीगा हुआ था इसीलिए आराम से गांड में घुस गया पर दिव्या को काफी दर्द हुआ. वो बोली "आह्ह्ह्ह यार कल राजेश ने भीईईई सूखी ले ली थी और आआअआज तुमने भीईईइ. अह्ह्ह्ह कम से क्क्क्ककमम्मम्म ग्गग्ग्गगांड में क्रीमम्मम्मम्म तो लगा देतेईईईईए."

मैंने कहा "अब तो घुस ही गया है डार्लिंग बस तुम अपनी टाँगे खोल लो." और फिर दिव्या की टाँगे चौड़ी करके एक धक्का और मार दिया.

अब दिव्या कुछ नही बोली तो मैं वापस फुल स्पीड में पिस्टन चलाने लगा.

१० मिनट दिव्या की करारी गांड मारने के बाद मैंने फिर से लंड उसकी चूत में डाल दिया. कुछ देर बाद मैंने लंड निकाला और अपना माल दिव्या की गांड का छेद जो १० के सिक्के के बराबर खुल गया था उसी पर छोड़ दिया.

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थोड़ी देर आराम करने के बाद दिव्या अपने कपडे पहनने लगी तो मैंने उसे रोका "क्या हुआ जान, क्या कर रही हो."

"वो बोली चलो थोडा बाहर घूम कर आते है." दिव्या कपडे पहनते हुए बोली.

"अभी घूमने का बहुत टाइम है. राजेश का फोन आया था. हमे यहाँ २-३ दिन रुकना पड़ेगा. समझी जानेमन." मैंने उसका हाथ पकड़ा तो हसने लगी "समझी की अब २-३ दिन तुम चोद चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दोगे."

मैंने हँसते हुए कहा "छी छी स्कूल में बच्चों को ऐसी ही भाषा सिखाती हो"

दिव्या ने वापस कपडे उतारे और मेरे साथ बेड में घुस कर हँसते हुए बोली "मुझे तो खुद ऐसी भाषा नहीं आती थी. तुमने और राजेश ने मुझे ये भाषा सिखाई है."
 
मैंने और दिव्या ने एक राउंड और खेला फिर हम दोनों ने थोडा आराम किया. रात होते होते दिव्या बोली "अरे थोड़ी देर के लिए तो बाहर चलो." हम दोनों तैयार हुए और होटल के बाहर निकल पड़े.

यहाँ आकर दिव्या एकदम बिंदास हो गयी थी. काफी ठण्ड होने के बावजूद उसने एक बहुत छोटी और ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहनी थी जिसमे दिव्या का शरीर बहुत खूबसूरत लग रहा था.

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उसकी भरी हुई चूचियां और उसकी गोल मटोल गांड बहुत ही सेक्सी लग रही थी. रास्ते में ज्यादा लोग नहीं थे लेकिन जो थे वो पीछे से उसकी गांड को मटकते हुए बहुत वासना भरी नजरों से देख रहे थे जैसे उसका पिछवाड़ा नंगा करके वहीं चोद लेंगे. उस छोटी और ट्रांसपेरेंट ड्रेस में दिव्या ऐसा चुदाई वाला माल लग रही थी की 20 साल के लड़कों से लेकर 50 साल तक के आदमी दिव्या के शरीर को वासना भरी नजरों से नजरों से घूर रहे थे. दिव्या की ड्रेस जांघों पर सिर्फ वहीं तक आ रही थी जहां से चूत की लाइन शुरू होती है.

होटल से निकल कर हम लोग थोड़ी देर इधर उधर घुमते रहे. रास्ते में हमे कई अंग्रेज जोड़े दिखे. मैंने दिव्या से कहा "कभी कभी सोचता हूँ की इन फिरंगी लडकियों को चोदने में कितना मज़ा आता होगा."

दिव्या ने पुछा "क्यों कभी किसी फिरंगी के साथ किया नहीं."

"अपनी ऐसी किस्मत कहा?" मैं बोला.

दिव्या बोली "मैंने सुना है की इनका लंड भी काफी बड़ा होता है."

"हाँ बड़ा तो होता है लेकिन नीग्रो जितना नहीं." मैंने कहा.

"फिर तो मैं भी बोलूंगी की काश किसी फिरंग से चुदती" दिव्या हँसते हुए बोला.

"तुमको क्या दिक्कत. इनमे से किसी से भी बोलो, अभी तैयार हो जायेगा." मैंने कहा.

इसी तरह की बाते करते हुए हम होटल वापस आ गए. दिव्या बोली "चलो डिनर करते है"

मैंने कहा "पहले बार में चलते है. कुछ पीते है."

हम दोनों होटल के बार में चले गए. दरअसल वो एक पब था जहाँ लोग पी भी रहे थे और नाच भी रहे थे. दिव्या बोली की वो बियर पीयेगी तो मैंने उससे कहा "बियर वीयर में क्या होता है. आज हम लोग स्कॉच पियेंगे." और मैंने हम दोनों के लिए ड्रिंक आर्डर किया और एक किनारे बैठ कर लोगो को डांस करते देखने लगे. वहां का माहौल बहुत ही सेक्सी था. भीड़ ज्यादा नहीं थी लेकिन शराब के नशे में लड़के और लड़कियां चिपक चिपक कर नाच रहे थे. ३-३ पेग पीने के बाद हम दोनों को भी नशा चढ़ गया था. मैंने दिव्या से कहा की चलिए हम भी थोडा डांस करे और हम दोनों भी नाचने पहुच गए. मैं तो आराम से नाच रहा था पर दिव्या काफी बेपरवाह होकर नाचने लगी. हमारे पास एक खूबसूरत सा फिरंगी आदमी भी नाच रहा था. मैंने देखा की वो लड़का जान बूझ कर नाचते नाचते दिव्या को टच कर रहा था. मुझे ये देख कर बहुत उत्तेजना हुई पर दिव्या उस से थोड़ा अलग हटने लगी. मैंने दिव्या को रोका और लड़के का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और हम तीनो डांस करने लगे.

वो आदमी करीब ५०-५२ साल का होगा पर सुंदर था उसकी बॉडी भी काफी अच्छी थी. जब दिव्या उस आदमी की तरफ मुंह करके नाची तो मैं मौका देख कर दिव्या के पीछे की तरफ आ गया और दिव्या से चिपक कर डांस करने लगा. मैंने दिव्या को पीछे से पकड़ लिया और उसको धीरे-धीरे आगे सरका कर उस आदमी के साथ सटा दिया. अब हम दोनों ने दिव्या को बीच में दबा लिया था और दिव्या को बीच में लेकर सैंडविच की तरह सहलाना शुरू किया.

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मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. दिव्या भी डांस को एंजॉय कर रही थी. उसने दोनों हाथों से उस आदमी की कमर पकड़ ली और इस तरह से डांस करने लगी जिससे मुझे लगा कि शायद उस का लंड दिव्या की चूत से टच हो रहा है. मुझे लगा की अगर वो अपना हलब्बी लंड दिव्या की चूत में डाले तो कितना मजा आयेगा. थोड़ी देर में मैंने दिव्या का मुंह अपनी तरफ घुमा लिया अब वो आदमी भी डांस करते हुए दिव्या की गांड के बीच में अपने लंड को रगड़ रहा था. मैंने उसके हाथ उठा कर दिव्या की चून्चियो पर रख दिए. मेरी तरफ से छूट पाकर उसने दिव्या की चूचियां दबाना शुरू कर दिया. दिव्या की ड्रेस छोटी थी तो उस लड़के ने उसे ऊपर उठा दिया और दिव्या की पेंटी पर अपना लंड रगड़ने लगा.

 
मैंने देखा की काफी लोग वहां खुले आम किस कर रहे है तो मैंने भी दिव्या को पकड़कर किस कर लिया. दिव्या अब शर्मा गयी और हमसे अपने को छुड़ा कर टेबल पर वापस आ गयी. मैं भी उस आदमी को लेकर उस टेबल पर आ गया. मैं उससे बात करने लगा. उसने बताया की वो बेल्जियम से है और फिलहाल यहाँ अकेले घुमने आया है. उसने अपना नाम ब्रैड बताया. मैंने उससे हमारे साथ खाना खाने को बोला तो वो तैयार हो गया. हम तीनो रेस्त्रा में गए और खाना आर्डर किया और खाने लगे. उसने मेरे बारे में पुछा तो मैंने बताया की हम दोनों पति पत्नी है. उसने मुझसे कहा की आपकी पत्नी उम्र में आपसे थोड़ी ज्यादा लगती है तो मैंने कहा की हमारी लव मैरिज है और दिव्या की ये दूसरी शादी. दिव्या की सारे शरीर की रगड़ाई करके अब वह खुल गया था और दिव्या भी उससे खुल गई थी.

फिर वो दिव्या से बोला "You are an amazing lady. Very hot and sexy"

दिव्या के चेहरे पर शर्म से लाली आ गई पर फिर दिव्या बोली "You are also very handsome and I enjoyed dancing with you."

हम दोनों ब्रैड से बातें करते रहे. खाना खाते खाते हमारी अच्छी दोस्ती हो गई. खाना खत्म होने के बाद जब चलने की बारी आई तो मैंने दिव्या से पुछा की क्यों न ब्रैड को कमरे में ले चले पर दिव्या बोली की "नहीं. बस डांस तक ठीक था"

मेरा बहुत मन होने के बाद भी मैंने ब्रैड को बाय किया और वापस रूम की तरफ चल दिए. कुछ माहौल, कुछ शराब का नशा और इन सबके ऊपर एक खूबसूरत अजनबी के बीच सैंडविच डांस का मजा दिव्या को पागल कर रहा था.

मैं और दिव्या दोनों ही बहुत एक्साइटेड थे. मैंने आते ही दिव्या की ड्रेस उतार दी और उसने मेरे कपड़े उतार दिए और एक दूसरे को चाटने लगे. अब मैं नीचे लेट गया और दिव्या ने मेरे ऊपर आकर 69 वाला आसन बनाकर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत मेरे मुंह के ऊपर रख दी मैंने चूत में जीभ डालकर उसे जोर जोर से चाटने लगा और दिव्या भी मेरा लंड पूरा मुंह में लेकर जोर जोर से चाटने लगी.

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उसकी चूत चाटने वजह से बहुत पानी छोड़ रही थी और वह बुरी तरह चुदना चाहती थी पर दिव्या ने मेरा लंड चूसते हुए मेरा पानी निकाल दिया और पूरा पी गयी. दिव्या बोली "जल्दी दुबारा खड़ा करो और मुझे चोदो."

मैंने दिव्या से कहा "मेरी बात मान लेती तो आज तुम्हारी मस्त चुदाई होती. थ्रीसम का मजा और वो भी फिरंग के साथ."

दिव्या सेक्स में पागल हुई जा रही थी मेरी तरफ देख कर बोली "सही में मजा तो आता पर राजेश क्या सोचता."

मैं बोला "राजेश को कैसे पता चलता? और फिर मैं भी तो तुम्हारा पति हूँ तो कुछ हक तो मेरा भी है."

"सही है पहले मेरे पति राजेश ने तुमसे चुदवा दिया और अब तुम पति बन गए हो तो उस गोरे से चुदवाना चाहते हो. लेकिन फिर भी वो आदमी था भी बहुत सही और आज तक मैंने किसी फिरंगी के साथ किया भी नहीं है" दिव्या बोली.

मैंने दिव्या से पुछा "गलती की क्या बात है. अभी बुला लेता हूँ."

दिव्या बोली "अब कहां से आएगा"

मैंने कहा "मैंने उसका रूम नंबर पूछ लिया था. तीन कमरे छोड़ कर उसका रूम है. अभी फोन करता हूँ.."

दिव्या अपनी चूत को अपनी उंगली से रगड़ते हुए बोली "बुला लो उसको. आज मुझे सेंडविच बनवा ही लो. आज जन्नत की सैर हो ही जाये." मैंने ब्रैड के रूम में फ़ोन किया.

उसने फ़ोन उठाया तो मैंने कहा "Hi Brad. This is Manish. Are you Busy right now?"

ब्रैड बोला "Not at all. Just watching TV."

मैंने उससे साफ़ साफ़ बोला "Divya is missing you very much. If you want to fuck her, please come to room no 347."

वो फ़ौरन तैयार हो गया "I will be there in 5 minutes."

उसके आने के एक्साइटमेंट से दिव्या में और मुझ में जोश भर गया. दिव्या अपनी चूत पर अभी उंगली फिरा ही रही थी की ब्रैड ने दरवाजे पर दस्तक दी. दस्तक सुनकर दिव्या उठकर कपड़े पहने की तरफ चली. मैंने मना कर दिया "यार जब चुदाई ही करवानी है तो फिर शर्म कैसी? और वैसे भी वह तुम्हें कपड़ों के ऊपर तो रगड़ ही चुका है और तुम भी उसे कपड़ों के ऊपर रगड़ चुकी हो तो फिर शर्म छोड़ो. तुम उसको नंगा करो तब तक मैं पैग और बनाता हूं. दो दो पैग लगाकर फिर चुदाई शुरू करेंगे."

मैंने दरवाजा खोलकर ब्रैड को अंदर बुला लिया उसका हाथ पकड़ कर डबल बेड के पास लेकर गया और बोला "Now the bitch is yours. Fuck her hard."
 
उसे देखते ही दिव्या सेक्स से पागल हो गई. दिव्या ने बेड पर से उठ कर तेजी से ब्रैड का हाथ पकड़कर बेड पर खींच लिया और बदहवासी में उसकी कमीज फाड़ दी और उसको ऊपर से नंगा करके उसकी छाती, कमर और पेट पर हाथ फिराने लगी. ब्रैड तो पहले से ही दिव्या के शरीर पर फिदा हो गया था. दिव्या के इस तरह छेड़ने से बहुत बहुत उत्तेजित होने लगा.. दिव्या अब उसके लंड से खेलना चाहती थी. दिव्या ने उसकी पैंट की हुक को खोला और उसके पैंट की चैन को खोल दिया अब दिव्या को बहुत एक्साइटमेंट हो रहा था.

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पैंट की चैन खोलने के बाद दिव्या ने पैंट नीचे उतार दी. अंडरवेअर में ब्रैड बहुत सेक्सी लग रहा था उसके गठीले बदन को देख कर दिव्या चेहरा खुशियों से खिल गया. दिव्या उसके सामने अपने घुटनों पर बैठ गयी और अपने दोनों हाथों से ब्रैड की गांड को सहलाने लगी. ब्रैड की गांड को सहलाने के बाद दिव्या ने ब्रैड के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाने शुरु किया. उसके लंड को पकड़ कर दिव्या की सांसे और तेज होने लगी. अब दिव्या से सब्र नहीं हो रहा था. दिव्या ने उसका फिरंगी लंड अंडर वियर से बाहर निकाल लिया.

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उसका लंड राजेश और मेरे लंड से काफी बड़ा और ज्यादा मोटा रहा होगा. उसका लंड देखकर दिव्या पागल हो गई और उसकी खुशी देखकर मेरा भी लंड दोबारा से खड़ा हो गया. दिव्या ने ब्रैड का लड बुरी तरह से चाटना शुरू कर दिया था. ब्रैड ने दिव्या को उठाकर 69 का पोज बना लिया और उसकी चूत को चाटने लगा ब्रैड दिव्या की चूचियां दबा रहा था नीचे से और फिर उसकी कमर उसकी गांड सहला रहा था. इसी बीच में मैंने दोनों को एक एक पैग बना कर दे दिया. उन्होंने अपना पैग जल्दी से खत्म करके अपना काम फिर शुरू कर दिया.

दिव्या के शरीर से खेलते हुए ब्रैड को बहुत मजा आ रहा था और मुझे देखते हुए. ब्रैड दिव्या को नंगा देखकर वासना मैं पागल हो गया.

ब्रैड के नंगे शरीर को दिव्या भी बहुत अच्छी तरह भोग रही थी वह ब्रैड के शरीर के हर हिस्से को छेड़ रही थी और जीभ से चाट रही थी और दांतों से काट रही थी. ब्रैड और दिव्या एक दूसरे को पूरा मजा दे रहे थे अब दिव्या और ब्रैड से बर्दाश्त नहीं हो रहा था. ब्रैड ने दिव्या को बेड पर लिटा दिया और उसकी टांग खोल कर उसकी चूत के मुंह पर अपना लंड लगा दिया.

दिव्या को ब्रैड के खूबसूरत लंड को अंदर लेने की फीलिंग लेते हुए देखना बहुत एक्साइटिंग था जैसे जैसे ब्रैड ने अपना लंड दिव्या की चूत में धीरे धीरे अंदर सरकाया तो दिव्या तड़प उठी और उसने ब्रैड की गांड को पकड़ते हुए उसको अपनी चूत की तरफ खींचा जिससे उसका लंड दिव्या की चूत के और अंदर जाए.

ब्रैड ने धीरे-धीरे सारा लंड दिव्या की चूत के अंदर पहुंचा दिया.

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दिव्या अब जन्नत के मजे लेने लगी थी. अब ब्रैड ने चुदाई धीरे-धीरे तेज कर दी थी और अब दिव्या को और मजा आने लगा था. दिव्या ने मेरी तरफ देख कर कहा "बहुत मजा आ रहा है. तुम भी आ जाओ न".

मैंने उसके पास जाकर अपना लंड दिव्या के मुंह में डाल दिया और ब्रैड दिव्या की चूत में अपने लंड से मालिश करता रहा. हम दोनों दिव्या के मुंह और चूत को चोदते रहे. थोड़ी देर चुदाई के बाद ब्रैड ने कहा "Now I need a blowjob too."

तब मैंने दिव्या को घोड़ी बनाया और उसके मुंह के सामने खुद अपना लंड लेकर खड़ा हो गया मैंने पीछे से दिव्या की चूत की चुदाई शुरू कर दी. चूत की चुदाई से दिव्या को मजा आ रहा था और ब्रैड का लंड पीने में उसे और मजा आ रहा था क्योंकि मेरा और राजेश का लंड पीते-पीते काफी टाइम हो गया था. थोड़ा चेंज मिलने उसको भी अच्छा लगा और जब एक नया और बड़ा लंबा लंड चूसने को मिला तो दिव्या बहुत एक्साइटेड हो गई थी और मुझे भी बहुत अच्छा लगा. मैं भी यही चाहता था दिव्या इस चेंज के पूरे मजे ले और खुलकर चुदाई करें और करवाए.

ब्रैड का लंड बड़ा था लेकिन दिव्या फिर भी उसे काफी अंदर ले रही थी और उसके मुंह से लार टपक रही थी. दिव्या को ब्रैड का लंड चाटना इतना अच्छा लग रहा था कि उसका रुकने का मन नहीं कर रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई के बाद दिव्या बोली "अब दोनों एक साथ आ जाओ".

तो मैंने और ब्रैड ने कहा "She wants it in her both holes." ब्रैड बेड पर लेट गया और दिव्या उसके ऊपर बैठकर उसके लंड को अपनी चूत में लेकर हिलने लगी उसके बाद दिव्या ब्रैड की छाती के ऊपर अपनी चूचियां रखे लेट गई और उसने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा लिया जिससे मैं उसकी गांड में लंड डाल सकूं. चुदाई से और चटाई से दिव्या की चूत और गांड बहुत चिकनी हो गई थी तो मैंने उसकी गांड पर लंड रखकर धीरे से धक्का दिया तो लंड अंदर चला गया. हम दोनों ने दिव्या को सेंडविच बनाकर उसकी चूत और गांड की चुदाई शुरू कर दी और दिव्या उचक उचक कर मचलने लगी और चूत और गांड में एक साथ चुदाई के मजे लेने लगी.

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