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पडोसन की मोहब्बत complete

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कहां उसको दर्द हुआ करता था लेकिन आज वह इतनी एक्साइटेड भी कि खुद ही उछल उछल कर जग रही थी और कह रही थी "मुझे मेरी चूत में और गांड में ऐसे ही चोदो और जोर जोर से चोदो. चोदते रहो कुत्तों चोदो चोदो मुझे खूब चोदो…. कुत्तों मैं तुम्हारी कुतिया हूं... मेरी चूत गांड फाड़ डालो... ऐसे ग़दर माल को ग्रुप में चोदते हुए मुझे और ब्रैड को बहुत मजा आ रहा था और हम दोनों से एक साथ चुदते हुए दिव्या की हवस और मजे का तो कोई ठिकाना ही नहीं था. वो वासना में पागल हुई जा रही थी. थोड़ी देर बाद दिव्या बोली "Now Brad will fuck my ass. I want him in every hole of my body".

ब्रैड बोला "You don't know how sexy you are. If you want I can fuck you all my life. I will not spare any hole of your body. I will fuck your cunt, ass and mouth. I will use you as my slave bitch."

उसके बाद दिव्या मुझसे बोली "साले तुम भी तो चोदो. तुम दोनों मुझे चोदो आज और मुझे चोद चोद कर रंडी बना दो और जहां चाहे वहां चोदो मेरी चूत गांड मे जैसे चाहो मुझे वैसे चोदो … कभी मुंह में कभी कभी गांड में कभी चूत मे जैसे चाहो वैसे चोदो…. …..चाहे मेरी चूत में दोनों लंड एक साथ डाल दो चाहे मेरी गांड में दोनों लंड एक साथ डाल दो… चाहे मेरे मुंह में दोनों लंड एक साथ डाल दो और जगह बदल बदल कर चोदो …..मेरे शरीर का कोई सा हिस्सा ऐसा नहीं बचना चाहिए जहां पर तुम दोनों का लंड ना रगड़ा हो….………मेरा जीवन सफल कर दो आज मुझे चोदकर….………मुझे एक साथ चोद कर पूरी औरत बना दो…..………मेरी चूत मुंह और गांड में एक साथ मजा देकर मुझे औरत होने का संपूर्ण सुख दे दो आज तुम…."

दिव्या की उत्तेजक बातें सुनकर हम एक्साइटेड हो गए और हम उसे आसन बदल-बदल कर कई बार चोदा. तीन बार चोद कर मैं तो बैठ गया लेकिन ब्रैड उस को दो बार और चोदा. दिव्या की चुदाई से ब्रैड का मन ही नहीं भर रहा था उसका तो मन हो रहा था कि वह दिव्या की चूत और गांड सबकुछ फाड़ डाले. जितना मजा दिव्या को और मुझे आज दिव्या की ग्रुप चुदाई में आया इतना मजा तो अकेले अकेले चुदाई करके नहीं आया. आज दिव्या ने भी जी भर के चुदवाया और उसने चुदाई का पूरा मजा लिया. कभी बीच में कभी ऊपर कभी नीचे कभी सेंडविच कभी गांड में कभी दोनों जगह. जबरदस्त चुदाई के बाद दिव्या के होठ, चूत और गांड बहुत सेक्सी लग रही थी. तीनों से ही हम दोनों का भरा हुआ माल टपक रहा था..

हमने रात को ११ बजे चुदाई शुरू की थी और सुबह के ४ बजे तक चलती रही. उसके बाद दिव्या को बीच में लेकर मैं और ब्रैड सो गए. करीब 5 घंटे की नींद लेने के बाद जब हमारी नींद खुली तो हम रात के मजे के बारे में सोच कर फिर एक्साइटेड हो गए और दिव्या ने ब्रैड का लंड पकड़ कर फिर से चूसना शुरू कर दिया और उसने कहा कि मुझे फिर चुदवाना है. हम तो इंतजार कर रहे थे. हमने फिर मिलके चुदाई शुरू कर दी. मैंने एक बार निकाला और इसके बाद मैं बाथरुम में चला गया जबकि ब्रैड ने और भी दो बार चुदाई की. थक तो दिव्या भी गई थी पर वह ब्रैड को पूरा मजा देना चाहती थी इसलिए जब भी जितनी बार थी ब्रैड चोद रहा था वह खुशी खुशी मजा लेकर चुद रही थी.

मुझे दिव्या को ब्रैड से चुद्वाते देख कर बहुत मजा आ रहा था तो मैंने दिव्या से बोला कि हम आपस में तो चुदाई करते ही रहेंगे पर यहाँ तुम ब्रैड के साथ खुलकर चुदो. अब बाकी के २ दिन वह हमारे साथ रहेगा. मैं चाहता हूं कि २ दिन तुम लोग जैसे चाहो वैसे चुदाई करो. दिव्या ने हामी भरी और अगले २ दिन मैंने और ब्रैड ने मिलकर दिव्या को आगे पीछे से खूब बजाया. २ दिन बाद राजेश का फोन आया पर दिव्या ने उससे नहीं बताया की वो मेरे साथ साथ किसी फिरंगी से भी चुदवा रही है. राजेश ने हमको २ दिन रुकने को बोला तो मैंने उससे रेणुका के बारे में पुछा तो उसने कहा की मिल कर बताऊँगा.

पर अगले दिन सुबह सुबह ब्रैड को वापस जाना था तो हमने उसे अलविदा कहा. उसके जाने के बाद दिव्या बोली "यार सच में मजा आ गया. अंग अंग टूट रहा है. क्या चोदता था."

मैंने उससे कहा "राजेश ने एक दो और रुकने को बोला है पर मेरी छुट्टिया ख़तम हो रही है."

दिव्या बोली "छुट्टी तो मेरी भी ख़तम हो गयी है और अब मेरा भी यहाँ मन नहीं लगेगा. राजेश को क्या? चलो हम लोग कल वापस चलते है और राजेश रेणुका को सरप्राइज देते है." हमने ये तय कर लिया. दिन रात दारू और चुदाई से हम दोनों बहुत थके थे तो हम दोनों ने एक साथ नहाया और बिना कपडे पहने ही सो गए.

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अगले दिन दिव्या और मैं सुबह जल्दी तैयार हुए. दिव्या ने पूल साइड अपनी एक सेल्फी लेकर राजेश को भेजी ताकि उसे लगे की हम यही है और हम वापस निकल गए.

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उधर से राजेश ने भी रेणुका की एक सेक्सी से फोटो भेज दी जिसे देखकर दिव्या थोडा चिढ गयी. वो मुझसे बोली "ये राजेश हमको दो दिन रुकने को क्यों बोल रहा होगा. लगता है वो तुम्हारी बीवी के साथ कुछ ज्यादा ही मजे कर रहा है." मैंने कहा "अभी पहुच कर पता कर लेते है डार्लिंग." दोपहर को हम दोनों होटल पहुच गए. पहले हम दिव्या के रूम में गए. रूम खाली था पर मेरे रूम से कुछ कुछ आवाज़ आ रही थी. हमने बीच का दरवाजा खोला तो देखा की राजेश बुरी तरह से रेणुका को चोद रहा था.

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हमने राजेश के रूम में ही इंतज़ार किया. करीब १५ मिनट बाद रेणुका की सिसकिया आनी बंद हो गयी तो हम उस कमरे में गए. राजेश रेणुका के ऊपर पड़ा हांफ रहा था. हमे देखकर वो मुस्कुराया और रेणुका ने चादर से अपने ढकने की कोशिश की पर दिव्या ने चादर उसके हाथ से खीच ली और बोली "अरे जरा मैं भी तो देखूं अपनी सौत का बदन जिसके पीछे राजेश दीवाना है."

राजेश रेणुका के ऊपर से हट गया और बोला "अच्छे से देख लो मेरी जान. रति है रेणुका. देखो ये कसी हुई ऊंची ऊची चून्चिया. ये गहरी नाभि और ये पत्तेदार भुर. वैसे तो तुम भी लाजवाब हो लेकिन रेणुका की बात ही कुछ और है."

राजेश की बात सुनकर रेणुका शर्मा गयी और उसने दिव्या के हाथ से लेकर चादर से अपने को ढक लिया और बाथरूम में घुस गयी और राजेश भी उठ कर कपडे पहनने लगा. वैसे सच में आज राजेश के बगल में अपनी नंगी बीवी को देखकर मुझे भी वो बहुत सेक्सी लग रही थी.

राजेश की बात सुनकर दिव्या बोली "तो ठीक है. अब वापस जाकर मैं तो मनीष के घर में जाकर रहूंगी. तुम रेणुका को अपने साथ रखना."

तब तक रेणुका भी कपडे पहन कर वापस आ गयी तो राजेश बोला की "मुझे कोई ऐतराज नहीं है, रेणुका और मनीष से पूछ लो."

रेणुका बोली "क्या बात हो रही है"

दिव्या बोली "राजेश को तुम इतनी पसंद हो तो अब से तुम रहोगी राजेश के घर में और मैं मनीष के घर में"

मैंने कहा "देखिये हम दोनों आप दोनों से बहुत प्यार करते है इसीलिए नाराज़ न हों. और आप दोनों हम दोनों की बीविया है तो आपको अपने दोनों पतियों का ख्याल रखना है इसीलिए एक हफ्ते दिव्या मेरे साथ रहेगी और एक हफ्ते रेणुका. क्यों राजेश भाई"

राजेश दिव्या को गुस्सा देख कर मजे ले रहा था. वो बोला "मैं तो दिव्या को चिढ़ा रहा था सच तो ये है की मैं दिव्या के बगैर ज्यादा दिन रह ही नहीं सकता इसलिए पूरे हफ्ते अपनी बीवी चोदेंगे और फ्राइडे रात को बीवियां बदल लेंगे. सोमवार की सुबह अपनी बीविया वापस. क्यों रेणुका ठीक है न"

"ठीक तो है लेकिन मुझे तो लखनऊ वापस जाना होगा" रेणुका बोली.

"उसकी फ़िक्र न करो. वो मैं देख लूँगा." मैंने रेणुका को बोला तो वो खुश हो गयी.

अगले दिन हम चारो वापस लौट आये. मैंने अपने घर में बोल दिया की मुझे अकेले काफी दिक्कत हो रही है तो रेणुका यही रहेगी. मम्मी पापा को कोई एतराज़ नहीं था. उसके बाद हम हर वीकेंड अपनी बीविया बदल देते थे और जब किसी एक के पीरियड चल रहे होते तो दूसरी हम दोनों के साथ सोती थी.

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बीच बीच में हम फोरसम भी करते थे. मैं ५ साल वहां रहा और इन सालों में हर वीकेंड दिव्या मेरे साथ मेरी बीवी बन कर रही और रेणुका राजेश की बीवी बनकर. हमारी सेक्स लाइफ बेहतरीन थी. हम हर रोज सेक्स करते थे.

फिर मेरा ट्रान्सफर वापस लखनऊ हो गया और मैं और रेणुका वापस लौट आये. उसके बाद मैंने कभी स्वैप नहीं किया लेकिन फिर कभी मैं रेणुका से बोर नहीं हुआ. जब भी उसके लिए मेरा प्यार कम होने लगता मैं याद करता की कैसे राजेश उसे चोदता था और वो मुझे फिर से उतनी ही आकर्षक लगने लगती थी.

समाप्त (THE END)
 
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