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फॅमिली में मोहब्बत और सेक्स

कुशल उसके पीछे पीछे चल रहा था. कुशल की निगाहे बस उसकी मतकती हुई गांद पर ही थी. कुशल पूरी बेशर्मी वाले मोड पर था. वो पीछे से ही सीटी बजाता हुआ बोलता है -" क्या मस्त गांद है............. वन इन आ मिलियन". स्मृति रुक जाती है. पीछे मुड़ती है और कहती है -

" क्या कहा अभी तुमने......."

कुशल -" मैने..... मैने कहा कि घर कैसे जाउ मे......"

स्मृति -" लुक..... कुशल!! अगर अबसे तूने कुच्छ बोला तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.." स्मृति उंगली दिखा कर कुशल से बोलती है और फिर से आगे चल देती है

कुशल अभी भी पीछे पीछे चल रहा था लेकिन कुच्छ बोल नही रहा था. धीरे धीरे स्मृति उस फार्म हाउस से बाहर निकल जाती है. कुशल भी उसके पीछे पीछे बाहर आ जाता है. स्मृति अपनी गान्ड को मॅटकाति हुई फिर पार्किंग मे अपनी कार लेने चली जाती है.

कुशल बाहर आकर रोड पे बैठ जाता है. स्मृति वहाँ से कार लेकर आती है और कुशल को बैठते हुए देखती है. एक जोरदार ब्रेक के साथ गाड़ी उसके पास रुक जाती है. स्मृति विंडो ग्लास खोलती है और बोलती है. "यहीं मरने का इरादा है"

कुशल -" आप रहने दीजिए. मैं कैसे भी चला जाउन्गा.... अगर नही भी आया तो रात को रोड पर ही सो जाउन्गा....." कुशल बहुत मासूम बनते हुए बोलता है.

स्मृति गुस्से मे विंडो डोर बंद करती है और तेज़ी के साथ कार आगे ले जाती है. गाड़ी थोड़ी डोर ही चली थी कि एक बार फिर तेज़ी से ब्रेक लगती है और कार रिवर्स आने लगती है. कार फिर से कुशल के पास आकर रुक जाती है. लेकिन स्मृति कुच्छ बोलती नही.... हॅपी मूड के साथ कुशल खड़ा होकर गेट खोलता है और कार मे बैठ जाता है.

" आइ लव यू मोम....." कुशल स्मृति की तरफ देख कर बोलता है लेकिन तब तक स्मृति कार आगे बढ़ा चुकी थी.

कार एक सुनसान रास्ते से गुजर रही थी. स्मृति ने फुल स्पीड की हुई थी.

" मोम....... मोम......" कुशल बोलता है

" भोंक..... क्या बात है....." स्मृति बोलती है

" वो मोम..... वो.... पेशाब लगा है......." कुशल बोलता है.

पूरी ताक़त के साथ स्मृति फिर से ब्रेक लगाती है. " जा जल्दी कर के आ......" स्मृति बोलती है

कुशल गेट के बाहर निकल कर कार के ठीक सामने अपनी पॅंट खोलने लगता है. कार की हेडलाइट जली हुई थी.

" क्या यही जगह मिली है तुझे.... स्मृति चिल्लाति है

" मोम मुझे डर लगता है....." तब तक वो पॅंट खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लेता है. और बाहर निकल कर एक स्माइल देता है.

" तो कम से कम मूँह तो दूसरी साइड कर ले...." स्मृति फिर से चिल्लाति है

ये सुनकर कुशल अपना मूँह दूसरी डाइरेक्षन मे कर लेता है.

कुशल काफ़ी देर तक ऐसे ही पेशाब करता रहता है. स्मृति भी जल्दी मे थी और बार बार उसे हॉर्न दिए जा रही थी. फाइनली कुशल अपनी ज़िप बंद करके भाग कर कार मे आकर बैठ जाता है.

स्मृति फिर से गुस्से मे तेज़ी के साथ गियर डाला और कार फिर से उस सुनसान रोड पे भागने लगी. लेकिन स्मृति का चेहरा तम तमाया ही हुआ था

" इतना टाइम लगता है तुझे पेशाब करने मे..... क्या सालो से रोक रखा था..." स्मृति गुस्से मे बोलती है.

" मोम... क्या आप तो हर बात पर ही गुस्सा हो रही है. मैने कोई टाइम वेस्ट तो किया नही. जितनी देर आया उतनी ही देर तक किया. अगर मुझे पता होता कि आप इतना गुस्सा हो जाएँगी तो मैं जाता ही नही." कुशल बोलता है

" चल अब अपने ड्रामे बंद कर..... " स्मृति कार चलाते हुए सामने देखकर बोलती है.

कार चल रही थी और दोनो शांत थे. कुशल तिर्छि निगाहो से बार बार स्मृति को देखे जा रहा था.

" मोम एक बात कहु....." कुशल बहुत ही पोलाइट स्टाइल मे स्मृति से बोलता है

" नही.... मुझे कुच्छ नही सुन ना....." स्मृति रिप्लाइ करती है

कुशल चुप होकर कार मे साद अंदाज़ मे कॉर्नर मे मूँह करके बैठ जाता है. अब कुशल का मूँह बाहर की तरफ था, स्मृति भी उसे तिर्छि निगाहो से देखती है.

" भोंक जल्दी क्या बात है....." स्मृति उसे थोड़ा सा सॅड देख कर बोलती है.

कुशल खुश होकर अपनी मा की तरफ घूमता है. और बोलता है -

कुशल -" मोम, चाहे जो भी बात है लेकिन एक बात कहु... चलो कही देता हू. आज मैने अपनी वर्जिनिटी खो दी. आज मैं कुँवारा नही रहा." कुशल सॅड स्टाइल मे अपने माथे पे हाथ मारते हुए बोलता है.

स्मृति -" तू फिर शुरू हो गया. मैने कहा ना तुझे कि मुझे ये बकवास पसंद नही है. और वैसे भी तेरा क्या भरोसा....... भूल गया वो बाते... आज मैने पार्टी मे एक लॅडीस के साथ ये किया और ये किया. फिर भी आज तक कुँवारा था तू. पता नही इतना फ्रॉड कैसे हो गया तू". स्मृति उसे वो बाते याद दिलाती है जो वो लाइयन बन कर बोलता था

कुशल -" मोम, चाटिंग मे ऐसा तो चलता ही है. लेकिन सच मे आज तक मैने किसी के साथ ..... नही किया था. आज पहली बार ऐसा हुआ."

स्मृति -" तुझे ये फार्म हाउस किसने बताया था?"

कुशल -" मेरा एक फ्रेंड है. उसका नाम सन्नी है, उसने बताया था यहाँ के बारे मे....."

स्मृति -" तो क्या तूने उसे ये भी बता दिया कि तू आज यहाँ किसके साथ आ रहा है....?"

कुशल -" मोम आप तो मुझे बिल्कुल पागल समझती है. भला ये बाते भी बताने की होती है, ऐसा तो कभी कोई नही बता सकता...."

स्मृति -" इससे पहले भी यहाँ किसी के साथ आया है तू.?" स्मृति कार चलाते हुए ये सारी बाते कर रही थी.

कुशल -" मोम मैने कहा ना कि आज पहली बार आया हू यहाँ. आप कहेंगी तो दोबारा भी आ जाउन्गा.... हाहहहाहा..."

स्मृति उसकी तरफ गुस्से भरी निगाहो से देखती है और ये देख कर कुशल की हँसी फिर से बंद हो जाती है.

थोड़ी देर बाद कुशल फिर से बात करना शुरू करता है-

" मोम एक बात पुच्छू ...." कुशल बोलता है

" हाँ बोल...." स्मृति का बिहेवियर इस बार थोड़ा पोलाइट था

" क्या आपको मेरे साथ...... यानी जो हमारे बीच हुआ अगर हम उस मे रीलेशन शिप को भूल जाए तो क्या आपको अच्छा नही लगा.... प्लीज़ प्लीज़ गुस्सा मत होना. ये एक सिंपल सवाल है" कुशल अपनी मा से पुछ्ता है.
 
स्मृति गाड़ी चलाने मे बिज़ी थी. उसने कुशल की इस बात का जवाब देना उचित नही समझ. लेकिन कुशल चुप हो ही नही रहा था और वो फिर से बोलता है -

" आप जितनी सेक्सी दिखती है.... उससे कहीं ज़्यादा सेक्सी आप उस दौरान हो जाती हैं जब आप..... जब आप सेक्स करती हैं...." कुशल बोलता जा रहा था लेकिन स्मृति उसकी किसी बात का जवाब देना उचित नही समझ रही थी.

लेकिन कुशल को तो जैसे भूत ही सवार था कि आज वो चुप नही होगा.

" किचन मे काम करते हुए देख कर नही लगता कि आप इतनी आक्टिव हो सकती है सेक्स के दौरान.... रियली यू आर ग्रेट मोम. हर बार मैं आपका ही बेटा बन कर पैदा होना चाहता हू."

" देख कुशल... मुझे एक और ग़लती का अहसास हो गया है कि तुझे मैं साथ लेकर आई. उससे पहले मैं एक ग़लती कर ही चुकी थी, अब मुझसे और ग़लतियाँ मत करा. मैं नही चाहती कि तू मेरे हाथो से एक थप्पड़ और खा ले" स्मृति उसे समझाती है.

" लेकिन आप इतना तेज गाड़ी क्यूँ चला रही है... मुझे डर लग रहा है..." कुशल बोलता है

" क्यूंकी मैं घर जल्दी पहुँचना चाहती हू." स्मृति रिप्लाइ करती है

" आज तक तो कभी आपको इतना तेज गाड़ी चलाते हुए नही देखा. आख़िर बात क्या है."

" क्यूंकी...... क्यूंकी...... मुझे भी बहुत तेज पेशाब लगा है.... अब समझा". स्मृति बहुत तेज चिल्ला कर कुशल से कहती है

" तो मोम, अभी तो घर पहुँचने मे बहुत टाइम लगेगा. और अगर आप ऐसे ही चलाएंगी तो शायद पहुँचनगे ही नही. अभी रोड खाली है, आप चाहे तो आप भी कर सकती है.." कुशल उसे एक आइडिया देता है

" मुझे रोड पर करना अच्छा नही लगता..." स्मृति बोलती है

कुशल -" मोम अच्छा तो किसी को नही लगता. लेकिन मजबूरी मे तो काम चलाना ही पड़ता है. प्लीज़ आप कार रोकिए, मैं वादा करता हू कि कोई परेशानी नही होगी." कुशल उसके हाथ पर हाथ रख कर बोलता है.

स्मृति - " तेरे जैसी बेशर्म नही हू. मुझसे नही होगा ये सब रोड पे. और कितनी घनी झाड़ियाँ है रोड के दोनो साइड, पता नही इनमे क्या होगा. ". स्मृति रोड के दोनो साइड देखती हुई बोलती है

कुशल -" मोम आपको झाड़ियो मे जाने की ज़रूरत ही नही है. आराम से कार के सामने जाकर कर लीजिए वैसे भी रोड पे और कोई गाड़ी दिख नही रही है. ये रोड बस उस फार्म हाउस ही जाती है जहाँ से लोग इतनी जल्दी नही आते...." कुशल सीरीयस होकर उसे समझाता है

स्मृति भी गाड़ी की स्पीड को कम कर चुकी थी, शायद वो कुशल की बातो से अग्री थी. और वैसे भी पेशाब वग़ैरा ऐसी बाते है कि जब कोई करता है तो और आता है.

वो कार को रोड के साइड मे लगा देती है. कुशल समझ जाता है कि उसको बहुत तेज पेशाब लगा है. वो कार को ऑफ करती है, हेडलाइट्स को भी ऑफ करती है.

" अच्छा तू यहीं बैठ....." स्मृति बोल कर कार का गेट खोलती है और बाहर चली जाती है. कुशल ये सब देख रहा था. स्मृति बाहर निकल कर चारो तरफ देखती है, ड्रेस को थोड़ा उपर करके अपने हाथ पैंटी तक ले जाती है और एक झटके मे पैंटी को नीचे कर देती है. कुशल कार मे बैठा ये सब देख रहा था, इस सेक्सी सीन को देख कर उसके हाथ खुद ब खुद अपने लंड पर पहुँच जाते है. स्मृति को भी आइडिया था कि शायद कुशल देख रहा होगा लेकिन वो जल्दी से पैंटी नीचे करके बैठ जाती है. उसकी गान्ड कुशल की तरफ थी, वो बैठते ही ऐसे पेशाब करती है कि उसकी आवाज़ कार मे बैठा कुशल भी सुन सकता था. कुशल समझ जाता है कि वाकई मे उसे बहुत तेज लगा है. कुशल अपने राइट हॅंड पर टर्न होमर गाड़ी की हेडलाइट ऑन कर देता है.

स्मृति की गदराई मस्त गांद, कार की दूधिया रोशनी मे बिल्कुल विज़िबल हो जाती है. लेकिन स्मृति का कोई रियेक्सन नही था, शायद वो पेशाब करने तक कुच्छ नही करना चाहती थी. थोड़ी देर बाद स्मृति खड़ी होती है, उसकी मस्त गान्ड को कुशल एक बार फिर से देखता है. स्मृति खड़े होते ही अपनी पैंटी उपर करती है और ड्रेस नीचे करती है. और वापिस मूड कर कार की तरफ तेज तेज कदमो से आने लगती है.

" कमीनेपन की सारी हदों जो तोड़ दे तू. कुत्ते कुच्छ तो लिहाज कर...." स्मृति कार मे बैठते हुए बोलती है

कुशल -" मोम जब मैं पेशाब करने गया तब भी तो लाइट ऑन थी. मैने तो नही कहा कि आप लिहाज करो. आपने तो मेरा लंड तक भी देखा...." कुशल भी एक झटके मे बोल जाता है

स्मृति -" मैने तेरा.... देखा? अबे जब तू बेशर्मो की तरह खुद ही कार के सामने आकर खड़ा हो गया तो क्या करती मैं..."

कुशल -" मोम चाहे लडो या कुच्छ भी कहो. आपकी गांद 200 आउट ऑफ 100 है. डॅड की तो निकल पड़ी है. ही ईज़ सो लकी..." कुशल अभी भी अपनी बदतमीज़ी वाली बातो से पीछे नही हट रहा था.

स्मृति ( कार को चलाते हुए) - " तेरे डॅड तेरे जैसे नही है. वो कभी मुझे इस नज़र से नही देखते..."

कुशल -" तो क्या आप अभी तक बॅक साइड से......... कुँवारी हो?"

स्मृति कुशल की तरफ देखती है गुस्से मे लेकिन कुच्छ बोलती नही. कुशल फिर से पुछ्ता है

" मोम बताइए ना कि आपको गान्ड को पापा ने चोदा है या नही...."

स्मृति का पारा एक दम से हाइ हो जाता है.

" नही...... नही ....... नही...... और कुच्छ पुच्छना चाहता है तो भोंक जल्दी"

कुशल -" सॉरी मोम... गुस्सा मत होइए प्लीज़. आप बहुत स्वीट है...." कुशल अपनी मम्मी के गालो को पकड़ते हूर बोलता है.

स्मृति -" हाँ सवाल ही ऐसे करेगा.... कि गुस्सा आता ही है"

कुशल -" नही सच मे मोम... यू आर अमेज़िंग. मैने आपको एक मर्द की निगाहो से देखा है..."

स्मृति को उसकी ये बात सुनकर थोड़ी सी हँसी आ जाती है.

" अबे ओ मर्द... अब चुप हो जा. घर आने वाला है.." स्मृति उसे बोलती है

कुशल -" मोम दूध पिलाओगी ना...घर चल कर." कुशल की निगाहे स्मृति के बूब्स पे थी.

स्मृति -" जूते खिलाउंगी.... खाएगा?"

इसी नोक झोंक मे कुच्छ ही देर मे घर पहुँच जाते है. स्मृति गाड़ी पार्क करती है और कुशल वो दोनो फाइनली गाड़ी के बाहर आ जाते है. दोनो घर के अंदर जाने लगते है - सबसे पहली एंट्री स्मृति करती है और उसके पीछे पीछे कुशल.

हॉल मे प्रीति और पंकज दोनो बैठे हुए थे.

पंकज -" क्या दोनो साथ गये थे...?"

पंकज स्मृति की तरफ देखते हुए पुछ्ता है. कुशल की तो जैसे जान ही निकल जाती है. उसके चेहरे पे डर के भाव सॉफ थे.

स्मृति -" नही ये तो आते टाइम रास्ते मे मिल गया था तो इसे भी ले आई...." और स्मृति एक स्माइल देती है कुशल को.

पंकज -" बहुत जल्दी आ गयीं, क्या मन नही लगा पार्टी मे...."

स्मृति -" नही पार्टी मे कुच्छ ऐसी आक्टिविटीस हो गयी कि मैं थक गयी और जल्दी आ गयी.".

" मोम लेकिन ऐसी कौन सी पार्टी थी जिसमे आप इतनी सेक्सी बन कर गयी थी..." प्रीति स्माइल करके अपनी मोम से पूछती है और फिर कुशल की तरफ देखती है.

" अबे क्या बाप बेटी पीछे पड़ गये हो. सेक्सी तो मैं हू ही तो बन कर क्या जाउ..... ला एक ग्लास पानी पिला." स्मृति प्रीति से बोलती है और उसे उठा कर खुद सोफे पे बैठ जाती है.

कुशल सीधा उपर चला जाता है. प्रीति की निगाहे कुशल पर ही थी जाते हुए. प्रीति पानी पिलाती है और खुद भी उपर चली जाती है.

कुशल अपनी टी-शर्ट उतार रहा था. प्रीति उसके रूम मे घुसती है और उसके मूँह के पास अपना मूँह लाती है और फिर दूर कर लेती है.

" मोम भी ड्रिंक करके आई है और तू भी. कहाँ से आ रहे हो तुम दोनो...." प्रीति कुशल से पूछती है.

कुशल -" तुझसे मतलब...... तू डिस्टर्ब मत कर मुझे. वैसे ही आज मूड इतना फ्रेश है और तू आ गयी मेरे रूम मे..."

प्रीति -" तो आज जनाब अपना मूड फ्रेश कर कर आए है. वैसे भी तेरे चेहरे की खुशी बता रही है कि तू कुच्छ करके आ रहा है...." प्रीति साइड मे मूँह करके बोलती है

कुशल -" क्या करके आ रहा हू.... चुदाई?"

प्रीति -" शायद........." प्रीति कुशल की आँखो मे देखती हुई बोलती है.

कुशल -" हा हा हा हा हा...... अबे लंड है मेरे पास. अगर चुदाई ना करू तो क्या गांद मराऊ. वैसे तू निकल यहाँ से अपनी चूत को लेकर...." कुशल उसे अपने डोर का रास्ता दिखाते हुए बोलता है.
 
प्रीति उसे अपनी उंगली दिखाती हुई बोलती है -" बता कि तुम दोनो कहाँ से आ रहे हो. कहाँ गयी थी मोम आधी नंगी होकर, और तू कहाँ गया था. दोनो ने ड्रिंक कहाँ करी. जल्दी बता नही तो पापा से जाकर पुछ्ना पड़ेगा". प्रीति के मूँह से पापा की बात सुन कर कुशल थोड़ा घबरा जाता है और प्यार से प्रीति को समझाता है.

" देख मेरी प्यारी बहना.... मैं तो अपने दोस्त के साथ पी रहा था. आते टाइम रोड पे मोम मिल गयी तो उसके साथ आ गया. तू इतना टेन्षन क्यू ले रही है. तू मस्त रह..." कुशल प्रीति के गालो पर चिकोटी काट ते हुए बोलता है.

प्रीति -" इससे पहले तो तू कभी बाहर पी कर नही आया, और ये तेरे गालो पे ये निशान कैसे है". प्रीति कुशल के गालो पर हाथ लगा कर उससे पूछती है. दर असल आज कुशल बहुत थप्पड़ खा चुका था अपनी मा के हाथ तो ये उसी के निशान थे.

कुशल फिर से एक बार घबरा जाता है कि कहीं प्रीति को शक ना हो जाए. वो फिर से एक नयी स्टोरी बनाता है.

" प्रीति अब तुझसे क्या च्छुपाना. मेरी एक फ्रेंड बनी थी, आज उसने मुझे अपने फ्लॅट पर बुलाया था. हम दोनो ने मिल कर ड्रिंक करी, और साली को जब चोदना चाहा तो उसने मुझे एक थप्पड़ मार दिया..."

प्रीति -" हे हे हे हे हे.... सही हुआ. तो इसीलिए तू इतने भाव खा रहा था मेरे लिए.". ये बोल कर प्रीति अपनी बाँहे कुशल के गले मे डाल देती है.

कुशल उन बाँहो को अपने गले से हटाते हुए बोलता है -

" प्रीति मुझे नींद आ रही है. प्लीज़ तू जा यहाँ से".

प्रीति उसके और करीब आते हुए बोलती है -" आख़िर ऐसी कैसी नींद है तेरी जो तू इतना गुस्सा हो रहा है......." और कस कर अपने बूब्स उसकी पीठ मे गढ़ा देती है.

" स्टॉप इट प्रीति ......." कुशल गुस्से मे उसे अपनी पीठ से हटाता हुआ बोलता है.

प्रीति -" आख़िर बात क्या है..... तू बताता क्यूँ नही"

कुशल -" साली मेरा दिमाग़ खराब मत कर...... बच्ची है तू अभी. एक दिन ज़बरदस्ती चोद दूँगा फिर रोती फ़िरेगी. मैं तुझे पहले भी समझा चुका हू कि मुझसे दूर रहा कर....." कुशल प्रीति को अपनी उंगली दिखाता हुआ बोलता है.

" कुशल.... कुशल" तभी नीचे से तेज तेज आवाज़े आती है जो कि स्मृति की थी. ये आवाज़े सुन कर कुशल जैसे भागा चला जाता है नीचे की तरफ और प्रीति रूम मे अकेले रह जाती है.

प्रीति को अभी भी कुच्छ समझ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है. खैर वो अपने रूम मे चली जाती है और गेट बंद कर लेती है.

कुशल नीचे पहुँचता है, पंकज हॉल मे बैठा था और स्मृति किचन मे थी. कुशल सीधा किचन मे भागता हुआ जाता है - " जी मोम......."

स्मृति -" खाना खाएगा......?"

कुशल -" मोम मैं तो दिन रात ख़ाता रहू आप खिलाओ तो सही.." कुशल फिर से डबल मीनिंग बाते करता है

स्मृति थाली पटकते हुए उसे देती है और बोलती है कि उपर ले जा और खा ले. मैं सोने जा रही हू.

कुशल अपसेट माइंड से उपर आ जाता है. खाना ख़ाता है और सो जाता है.

नेक्स्ट मॉर्निंग.....

पंकज हॉल मे बैठ कर चाइ पी रहा है. उसे ऐसी आवाज़ सुनाई देती है जैसे कोई उपर से हाइ हील पहन कर उतर कर आ रहा हो -" ख़त खत...." वो उपर निगाहे करता है तो जैसे..... ओह्ह्ह्ह वो आराधना थी जिसने एक डिफरेंट टाइप की ड्रेस पहनी हुई थी. खुले बाल वो भी स्ट्रेट करे हुए, शॉर्ट ड्रेस जिसमे क्लियर दिख रहा था कि आज उसने अंदर ब्रा नही पहनी है. लाइट मेक अप किया हुआ था, पंकज का मूँह खुला का खुला रह जाता है ये सब देख कर लेकिन वो किसी तरह कंट्रोल करता है.

पंकज के लिए वाकई मे ये एक गुड मॉर्निंग थी. आराधना धीरे धीरे नीचे उतर आती है.

आराधना -" गुड मॉर्निंग डॅडी..." एक स्माइल के साथ वो डॅड को ग्रीट करती है

पंकज -" गुड मॉर्निंग बेटा. क्या आज बिल्कुल डिफरेंट लुक, नया अंदाज़. क्या बात है भाई..."

पंकज के मूँह से अपनी तारीफ सुनकर वो शरमा जाती है. और आप जान कर पंकज के टेबल के सामने रखे एक ग्लास को झुक कर उठाती है. उफफफफफ्फ़..... उसके कयामत जैसे बूब्स बाहर निकलने को तैयार हो जाते है. और वैसे भी उसने ब्रा नही पहनी थी. पंकज ये सब देख कर शॉक्ड रह जाता है. उसके अंदर का आदमी बाहर आने को तैयार हो जाता है लेकिन आराधना सीधा खड़ा होती है और कहती है.

" ओके डॅडी... कॉलेज जा रही हूँ...." और ये बोलते बोलते वो गेट तक आ जाती है. पंकज की निगाहे अब तक नही हटी थी. वो पीछे मूड कर देखती है और पंकज की निगाहे फिर से आराधना से मिल जाती है. आराधना को हँसी आ जाती है.

" आरू बेटी........" पंकज पीछे से बोलता है.

" जी डॅडी......" आराधना बिना मुड़े बोलती है.

" आज कॉलेज से कितने बजे तक आएगी...." पंकज आराधना से पूछता है.

आराधना की खुशी का ठिकाना नही था क्यूंकी पहली बार पंकज ने ऐसे पुछा था.

" जी बहुत जल्दी आ जाउन्गि....." और ये कह कर वो एक स्माइल के साथ बाहर चली जाती है.

पंकज की निगाहे गेट पर ही थी. किसी को पता नही कि उसके दिमाग़ मे क्या चल रहा था.

प्रीति रात भर सही सो नही पाई. उसको समझ नही आ रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है. वो सुबह उठ कर नहाई और नॉर्मल कपड़े पहन कर बैठी है. उसके बाल गीले थे क्यूंकी अभी थोड़ी देर पहले ही वो नहा कर आई थी.

कुशल ब्रश करते करते अपने रूम से बाहर निकलता है. और साइड मे से प्रीति के रूम मे से झाँकता है. उसे एक दम फ्रेश प्रीति बैठी हुई दिखाई देती है. वो साइड मे से देख रहा था और ये प्रीति भी देख चुकी थी लेकिन प्रीति ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे कि उसको पता नही कि कुशल देख रहा है.

" ओह्ह ये कपड़े अच्छे नही है. मुझे चेंज कर लेने चाहिए.." प्रीति अपने आप से बात करते हुए कुशल को ये बात सुनाती है. कुशल प्रीति के ये बात सुनकर और साइड मे हो जाता है और दरवाजे की दरार मे से देखने लगता है.

प्रीति को पता था कि कुशल देख रहा है. वो उसी जगह पर बैठे हुए घूम जाती है. सब से पहले अपना पयज़ामा नीचे करती है और उसके थोड़ी देर बाद स्लो मोशन मे अपनी पैंटी को भी.

ऊफ्फ क्या सीन था..... कुशल का लंड तो जैसे दीवार तोड़ने के लायक हो गया था. अब प्रीति का पयज़ामा भी नीचे था और पैंटी भी.

 
Kushal -" Achha !!!! Phir se dhamki. Ab aap bataeye papa ko. Main bhi dekhta hu ki aap kya batati hai. Kya bolengi aap unhe ki aap lion se chudi aur jab pata chala ki wo Kushal hai to gussa aa gaya? Ya ye bolengi ki maine jabardasti chod diya aapko."

Smriti uski baat sunkar thoda ghabra jaati hai. Wo usse najre chura kar bolne lagti hai -" Main tujhse koi aur baat nahi karna chahti hu."

Kushal aage badh kar apni maa ka hath phir se pakad leta hai. " Chhod mera hath kamine......". Lakin Kushal uski ek baat nahi sunta aur use khinch kar apni baanho me phir se bhar leta hai.

" Maine kaha chhod mujhe...." smriti chhatpatati hai. Uski peeth Kushal ke seene me gad rahi thi. Kushal apna ek hath le jakar phir se uski gaand par rakh deta hai.

" Lagta hai aaj is audio CD ko dono side se bajana padega". Kushal ka ishara ab Smriti ki gaand ki taraf tha.

Smriti puri takat laga kar phir se Kushal ki pakad se bach nikal jaati hai. Uski saanse bahut tej chal rahi thi " Tu..... Tu ....... Kya sochta hai ki jo tu chahega wo kar sakta hai...." smriti gid gidati hai.

" jhut se pyar maanga to chut mili. Lakin sach se sirf gaaliya mil rahi hai. Kyun aapko mera lund pasand nahi aaya...." Kushal bolta hai

Smriti -" Mujhse aisi baate mat kar........."

Kushal -" Main bhi ek young adult hu. Aapse aisi baat kar sakta hu. Aap mujhe bataeye ki kya is lund me jaan nahi hai. Aapki chut kya sahi nahi chodi maine...." Aage badh kar phir Smriti ka hath pakad kar apne lund par rakh deta hai.

Smriti apna hath jhatak kar phir se peechhe ki taraf ho jaati hai. Lakin Kushal chup nahi hota -

" Aap ki chut me jo ras hai , is gaand me jo dum hai wo is pure farm house me kisi ladki ke pass nahi hoga. Aapki gadrayi jawani ko dekh kar me pagal ho raha tha. Plan banaya aur wo safal bhi hua lakin galti se light jal gayi nahi to aap is lion se dobara milti...."

" Main dobara nahi milti............" Smriti bolti hai

" Khana apne husband ki kasam..." Kushal usse puchhta hai.

" Is ghatiya lion ke liye me apne husband ki kasam nahi kha sakti..." Smriti bolti hai.

" Lion ghatiya hai. Me janta hu lakin kya uska lund bhi ghatiya hai? Kya aap usse satisfy nahi hui?" Kushal puchhta hai

Smriti chup khadi ho jaati hai aur wo kuchh nahi bolti. Kuchh seconds ke liye room me silence ho jata hai. Lakin Kushal phir se bolna shuru karta hai -

" Mom, believe me. Hum enjoy kar sakte hai lakin kisi ko pata bhi nahi chalega. Aap ko dekh kar koi bhi nahi kah sakta ki aap meri maa hai. Yahan tak ki jawan ladkiya bhi aapke samne pani nahi mangengi. Aur aap apne bete ki halat ka to sochiye. Bhagwan ne mujhe itna bada lund diya hai- Kisliye. Sirf subah uth kar mutne ke liye. Isse bhala ho sakta hai. Main din raat aapki sewa karunga, badle me mujhe kuchh bhi nahi chahiye. Kisi aur ladki ki taraf najre utha kar ke bhi nahi dekhunga. Please mujhe apna pura pyar de do". Aur Kushal apna sar Smriti ke kandho pe rakh deta hai.

" Kuchh aur kahna hai ya main jau...". Smriti apna kandha hatate hue bolti hai.

" Try to udnerstand mom.... Ab sab ho chuka hai. Hum is relationship ko continue kar sakte hai. Maine aapko taste kar liya hai aur hume ek hi ghar me rehna hai. Sochiye ki main kaise control karunga. Aap apne is bete pe thoda sa to raham kariye...." Kushal request karta hai.

Smriti -" Tere baap se bol kar sabse pehle teri shadi kara dungi. Phir sab sahi ho jayega...."

Kushal -" Main sahi kah raha hu ki mera lund bhi khada nahi hoga chahe puri raat koi try bhi kar le. Ab ye bas meri maa ke liye hi khada hoga.."

Smriti -" Bas bahut hua.... Ab main ja rahi hu..." aur kah kar wo bahar nikalne lagti hai

Kushal -" Kya aap mujhe sath lekar nahi chalengi......"

Smriti -" Kyu tu mere sath aaya tha...."

Kushal -" Main to aa jata lakin aap ko lion se milne me thodi pareshani hoti, isiliye nahi aaya...."

Smriti -" Mujhe nahi pata aur main ja rahi hu..." Aur ue kah kar wo us flat se bahar nikal kar ground me aa jati hai.

Kushal uske peechhe peeche chal raha tha. Kushal ki nigaahe bas uski matkati hui gaand par hi thi. Kushal puri besharmi wale mode par tha. Wo peechhe se hi seeti bajata hua bolta hai -" Kya mast gaand hai............. One in a million". Smriti rook jaati hai. Peechhe mudti hai aur kahti hai -

" Kya kaha abhi tumne......."

Kushal -" Maine..... Maine kaha ki ghar kaise jaun me......"

Smriti -" Look..... Kushal!! Agar abse tune kuchh bola to mujhse bura koi nahi hoga.." Smriti ungli dikha kar Kushal se bolti hai aur phir se aage chal deti hai

Kushal abhi bhi peeche peeche chal raha tha lakin kuchh bol nahi raha tha. Dheere dheere Smriti us farm house se bahar nikal jaati hai. Kushal bhi uske peechhe peechhe bahar aa jata hai. Smriti apni gaand ko matkati hui phir parking me apni car lene chali jaati hai.

Kushal bahar aakar road pe beth jata hai. Smriti wahan se car lekar aati hai aur Kushal ko bethe hue dekhti hai. Ek jordaar break ke sath gaadi uske paas rook jati hai. Smriti window glass kholti hai aur bolti hai. "Yahin marne ka irada hai"

Kushal -" Aap rehne dijiye. Main kaise bhi chala jaunga.... Agar nahi bhi aaya to raat ko road par hi so jaunga....." kushal bahut masoom bante hue bolta hai.

Smriti gusse me window door band karti hai aur teji ke sath car aage le jaati hai. Gaadi thodi door hi chali thi ki ek baar phir teji se break lagti hai aur car reverse aane lagti hai. Car phir se Kushal ke pass aakar rook jaati hai. Lakin Smriti kuchh bolti nahi.... Happy mood ke sath Kushal khada hokar gate kholta hai aur car me beth jata hai.

" I Love you mom....." Kushal Smriti ki taraf dekh kar bolta hai lakin tab tak Smriti car aage badha chuki thi.

Car ek sunsaan raste se gujar rahi thi. Smriti ne full speed ki hui thi.

" Mom....... Mom......" Kushal bolta hai

" Bhonk..... Kya baat hai....." Smriti bolti hai

" Wo mom..... Wo.... Peshab laga hai......." Kushal bolta hai.

Puri takat ke sath Smriti phir se break lagati hai. " Ja jaldi kar ke aa......" Smriti bolti hai

Kushal gate ke bahar nikal kar car ke thik saamne apni pant kholne lagta hai. Car ki headlight jali hui thi.

" Kya yehi jagah mili hai tujhe.... Smriti chillati hai

" Mom mujhe dar lagta hai....." Tab tak wo pant khol kar apna lund bahar nikal leta hai. Aur bahar nikal kar ek smile deta hai.

" To kam se kam moonh to dusri side kar le...." Smriti phir se chillati hai

Ye Sunkar Kushal apna moonh dusri direction me kar leta hai.

Kushal kafi der tak aise hi peshab karta rehta hai. Smriti bhi jaldi me thi aur baar baar use horn diye ja rahi thi. Finally Kushal apni zip band karke bhag kar car me aakar beth jaata hai.

Smriti phir se gusse me teji ke sath gear daala aur car phir se us sunsan road pe bhagne lagi. Lakin Smriti ka chehra tam tamaya hi hua tha

 
" Itna time lagta hai tujhe peshab karne me..... Kya saalo se rok rakha tha..." Smriti gusse me bolti hai.

" Mom... Kya aap to har bat par hi gussa ho rahi hai. Maine koi time waste to kiya nahi. Jitni der aaya utni hi der tak kiya. Agar mujhe pata hota ki aap itna gussa ho jayengi to main jata hi nahi." Kushal bolta hai

" Chal ab apne drame band kar..... " Smriti car chalate hue samne dekhkar bolti hai.

Car chal rahi thi aur dono shant the. Kushal tirchhi nigaaho se baar baar Smriti ko dekhe ja raha tha.

" Mom ek baat kahu....." Kushal bahut hi polite style me Smriti se bolta hai

" Nahi.... Mujhe kuchh nahi sun na....." Smriti reply karti hai

Kushal chup hokar car me sad andaaz me corner me moonh karke beth jaata hai. Ab kushal ka moonh bahar ki taraf tha, Smriti bhi use tirchhi nigaaho se dekhti hai.

" Bhonk jaldi kya baat hai....." Smriti use thoda sa sad dekh kar bolti hai.

Kushal khush hokar apni maa ki taraf ghumta hai. Aur bolta hai -

Kushal -" Mom, chahe jo bhi baat hai lakin ek baat kahu... Chalo kahi deta hu. Aaj maine apni virginity kho di. Aaj main kunwara nahi raha." Kushal sad style me apne maathe pe hath marte hue bolta hai.

Smriti -" Tu phir shuru ho gaya. Maine kaha na tujhe ki mujhe ye bakwas pasand nahi hai. Aur vaise bhi tera kya bharosa....... Bhul gaya wo baate... Aaj maine party me ek ladies ke sath ye kiya aur ye kiya. Phir bhi aaj tak kunwara tha tu. Pata nahi itna fraud kaise ho gaya tu". Smriti use wo baate yaad dilati hai jo wo Lion ban kar bolta tha

Kushal -" Mom, chatting me aisa to chalta hi hai. Lakin sach me aaj tak maine kisi ke sath ..... nahi kiya tha. Aaj pehli baar aisa hua."

Smriti -" Tujhe ye farm house kisne bataya tha?"

Kushal -" Mera ek friend hai. Uska naam Sunny hai, usne bataya tha yahan ke baare me....."

Smriti -" To kya tune use ye bhi bata diya ki tu aaj yahan kiske sath aa raha hai....?"

Kushal -" Mom aap to mujhe bilkul pagal samjhti hai. Bhala ye baate bhi batane ki hoti hai, aisa to kabhi koi nahi bata sakta...."

Smriti -" Isse pehle bhi yahan kisi ke sath aaya hai tu.?" Smriti car chalate hue ye saari baate kar rahi thi.

Kushal -" Mom maine kaha na ki aaj pehli baar aaya hu yahan. Aap kahengi to dobara bhi aa jaunga.... Hahahahaha..."

Smriti uski taraf gusse bhari nigaaho se dekhti hai aur ye dekh kar kushal ki hansi phir se band ho jaati hai.

Thodi der bad Kushal phir se baat karna shuru karta hai-

" Mom ek baat puchhu ...." Kushal bolta hai

" Han bol...." Smriti ka behavior is baar thoda polite tha

" Kya aapko mere sath...... Yani jo hamare beech hua agar hum us me relation ship ko bhul jaaye to kya aapko achha nahi laga.... Please please gussa mat hona. Ye ek simple sawal hai" Kushal apni maa se puchhta hai.

Smriti gaadi chalane me busy thi. Usne Kushal ki is baat ka jawab dena uchit nahi samjh. Lakin Kushal chup ho hi nahi raha tha aur wo phir se bolta hai -

" Aap jitni sexy dikhti hai.... Usse kahin jyada sexy aap us dauran ho jaati hain jab aap..... Jab aap sex karti hain...." Kushal bolta ja raha tha lakin Smriti uski kisi baat k jawab dena uchit nahi samjh rahi thi.

Lakin Kushal ko to jaise bhut hi sawar tha ki aaj wo chup nahi hoga.

" Kitchen me kaam karte hue dekh kar nahi lagta ki aap itni active ho sakti hai sex ke dauran.... Really you are great mom. Har baar main aapka hi beta ban kar paida hona chahta hu."

" Dekh Kushal... Mujhe ek aur galti ka ahsaas ho gaya hai ki tujhe main sath lekar aayi. Usse pehle main ek galti kar hi chuki thi, ab mujhse aur galtiyan mat kara. Main nahi chahti ki tu mere hatho se ek thapadd aur kha le" Smriti use samjhati hai.

" Lakin aap itna tej gaadi kyun chala rahi hai... Mujhe darnlag raha hai..." Kushal bolta hai

" Kyunki main ghar jaldi pahunchna chahti hu." Smriti reply karti hai

" Aaj tak to kabhi aapko itna tej gaadi chalate hue nahi dekha. Aakhir baat kya hai."

" Kyunki...... Kyunki...... mujhe bhi bahut tej peshab laga hai.... Ab samjha". smriti bahut tej chilla kar Kushal se kahti hai

" To Mom, abhi to ghar pahunchne me bahut time lagega. Aur agar aap aise hi chalayengi to shayad pahunchnge hi nahi. Abhi road khali hai, aap chahe to aap bhi kar sakti hai.." Kushal use ek idea deta hai

" Mujhe road par karna achha nahi lagta..." Smriti bolti hai

Kushal -" Mom achha to kisi ko nahi lagta. Lakin majburi me to kaam chalana hi padta hai. Please aap car rokiye, main vaada karta hu ki koi pareshani nahi hogi." Kushal uske haath par hath rakh kar bolta hai.

Smriti - " Tere jaisi besharm nahi hu. Mujhse nahi hoga ye sab road pe. Aur kitni ghani jhadiyan hai road ke dono side, pata nahi inme kya hoga. ". Smriti road ke dono side dekhti hui bolti hai

Kushal -" Mom aapko jhadiyo me jaane ki jarurat hi nahi hai. Aaram se car ke saamne jakar kar lijiye vaise bhi road pe aur koi gaadi dikh nahi rahi hai. Ye road bad us farm house hi jaati hai jahan se log itni jaldi nahi aate...." Kushal serious hokar use samjhata hai

Smriti bhi gaadi ki speed ko kam kar chuki thi, shayad wo kushal ki baato se agree thi. Aur vaise bhi peshab vagaira aisi baate hai ki jab koi karta hai to aur aata hai.

Wo car ko road ke side me laga deti hai. Kushal samjh jaata hai ki usko bahut tej peshab laga hai. Wo car ko off karti hai, headlights ko bhi off karti hai.

" Achha tu yahin beth....." Smriti bol kar car ka gate kholti hai aur bahar chali jaati hai. Kushal ye sab dekh raha tha. Smriti bahar nikal kar charo taraf dekhti hai, dress ko thoda upar karke apne hath panty tak le jaati hai aur ek jhatke me panty ko neeche kar deti hai. Kushal car me betha ye sab dekh raha tha, is sexy scene ko dekh kar uske hath khud be khud apne lund par pahunch jaate hai. Smriti ko bhi idea tha ki shayad Kushal dekh raha hoga lakin wo jaldi se panty neeche karke beth jaati hai. Uski gaand Kushal ki taraf thi, wo bethte hi aise peshab karti hai ki uski aawaj car me betha Kushal bhi sun sakta tha. Kushal samjh jaata hai ki wakai me use bahut tej laga hai. Kushal apne right hand par turn homar gaadi ki headlight on kar deta hai.

Smriti ki gadrayi mast gaand, car ki dudhiya roshni me bilkul visible ho jaati hai. Lakin Smriti ka koi reaction nahi tha, shayad wo peshab karne tak kuchh nahi karna chahti thi. Thodi der bad Smriti khadi hoti hai, uski mast gaand ko Kushal ek baar phir se dekhta hai. Smriti khade hote hi apni panty upar karti hai aur dress neeche karti hai. Aur wapis mood kar car ki taraf tej tej kadmo se aane lagti hai.

" Kameenepan ki saari hado jo tod de tu. kutte kuchh to lihaaj kar...." Smriti car me bethte hue bolti hai

Kushal -" Mom jab main peshab karne gaya tab bhi to light on thi. Maine to nahi kaha ki aap lihaaj karo. Aapne to mera lund tak bhi dekha...." Kushal bhi ek jhatke me bol jata hai

Smriti -" Maine tera.... Dekha? Abe jab tu besharmi ki tarah khud hi car ke saamne aakar khada ho gaya to kya karti main..."

Kushal -" Mom chahe lado ya kuchh bhi kaho. Aapki gaand 200 out of 100 hai. Dad ki to nikal padi hai. He is so lucky..." Kushal abhi bhi apni badtameeji wali baato se peeche nahi hat raha tha.

Smriti ( car ko chalate hue) - " Tere dad tere jaise nahi hai. Wo kabhi muje is najar se nahi dekhte..."

Kushal -" To kya aap abhi tak back side se......... Kunwari ho?"

Smriti kushal ki taraf dekhti hai gusse me lakin kuchh bolti nahi. Kushal phir se puchhta hai

" Mom bataeye na ki aapko gaand ko papa ne choda hai ya nahi...."

Smriti ka para ek dum se high ho jata hai.

" Nahi...... Nahi ....... Nahi...... Aur kuchh puchhna chahta hai to bhonk jaldi"

Kushal -" Sorry mom... Gussa mat hoiye please. Aap bahut sweet hai...." Kushal apni mummy ke gaalo ko pakdate hur bolta hai.

Smriti -" Han sawal hi aise karega.... Ki gussa aata hi hai"

Kushal -" Nahi sach me mom... You are amazing. Maine aapko ek mard ki nigaaho se dekha hai..."

Smriti ko uski ye baat sunkar thodi si hansi aa jaati hai.

" Abe o mard... Ab chup ho ja. Ghar aane wala hai.." Smriti use bolti hai

Kushal -" Mom doodh pilaogi na...Ghar chal kar." Kushal ki nigaahe Smriti ke boobs pe thi.

Smriti -" Joote khilaungi.... Khayega?"

Isi nok jhonk me kuchh hi der me ghar pahunch jaate hai. Smriti gaadi park karti hai aur Kushal wo dono finally gaadi ke bahar aa jate hai. Dono ghar ke ander jaane lagte hai - Sabse pehli entry Smriti karti hai aur uske peeche peechhe Kushal.
 
Hall me Preeti aur Pankaj dono bethe hue tha.

Pankaj -" Kya dono sath gaye the...?"

Pankaj smriti ki taraf dekhte hue puchhta hai. Kushal ki to jaise jaan hi nikal jaati hai. Uske chehre pe dar ke bhav saaf the.

Smriti -" Nahi ye to aate time raste me mil gaya tha to ise bhi le aayi...." Aur smriti ek smile deti hai kushal ko.

Pankaj -" Bahut jaldi aa gayin, kya man nahi laga party me...."

Smriti -" Nahi party me kuchh aisi activities ho gayi ki main thak gayi aur jaldi aa gayi.".

" Mom lakin aisi kaun si party thi jisme aap itni sexy ban kar gayi thi..." Preeti smile karke apni mom se puchhti hai aur phir Kushal ki taraf dekhti hai.

" Abe kya baap beti peeche pad gayi ho. Sexy to main hu hi to ban kar kya jau..... La ek glass pani pila." Smriti Preeti se bolti hai aur use utha kar khud sofe pe beth jaati hai.

Kushal seedha upar chala jaata hai. Preeti ki nigaahe Kushal par hi thi jaate hue. Preeti pani pilati hai aur khud bhi upar chali jaati hai.

Kushal apni t-shirt utar raha tha. Preeti uske room me ghusti hai aur uske moonh ke pass apna moonh lati hai aur phir door kar leti hai.

" Mom bhi drink karke aayi hai aur tu bhi. Kahan se aa rahe ho tum dono...." Preeti kushal se puchhti hai.

Kushal -" Tujhse matlab...... Tu disturb mat lar mujhe. Vaise hi aaj mood itna fresh hai aur tu aa gayi mere room me..."

Preeti -" to aaj janab apna mood fresh kar kar aaye hai. Vaise bhi tere chehre ki khushi bata rahi hai ki tu kuchh karke aa raha hai...." Preeti side me moonh karke bolti hai

Kushal -" kya karke aa raha hu.... Chudai?"

Preeti -" Shayad........." Preeti Kushal ki aankho me dekhti hui bolti hai.

Kushal -" Ha ha ha ha ha...... Abe lund hai mere pass. Agar chudai na karu to kya gaand marau. Vaise tu nikal yahan se apni chut ko lekar...." Kushal use apne door ka rasta dikhate hue bolta hai.

Preeti use apni ungli dikhati hui bolti hai -" Bata ki tum dono kahan se aa rahe ho. Kahan gayi thi mom aadhi nangi hokar, aur tu kahan gaya tha. Dono ne drink kahan kari. Jaldi bata nahi to papa se jakar puchhna padega". Preeti ke moonh se papa ki baat sun kar Kushal thoda ghabra jata hai aur pyar se preeti ko samjhata hai.

" Dekh meri pyari bahna.... Main to apne dost ke saath pee raha tha. Aate time road pe mom mil gayi to uske sath aa gaya. Tu itna tension kyu le rahi hai. Tu mast rah..." Kushal Preeti ke gaalo par chikoti kat te hur bolta hai.

Preeti -" Isse pehle to tu kabhi bahar pee kar nahi aaya, aur ye tere gaalo pe ye nishan kaise hai". Preeti Kushal ke gaalo lar hath laga kar usse puchhti hai. Dar asal aaj Kushal bahut thappad kha chuka tha apni maa ke hath to ye usi ke nishan the.

Kushal phir se ek bar ghabra jata hai ki kahin preeti ko shak na ho jaye. Wo phir se ek nayi story banata hai.

" Preeti ab tujhse kya chhupana. Meri ek friend bani thi, aaj usne mujhe apne flat par bulaya tha. Hum dono ne mil kar drink kari, aur saali ko jab chodna chaha to usne mujhe ek thappad mar diya..."

Preeti -" He he he he he.... Sahi hua. To isiliye tu itne bhav kha raha tha mere liye.". Ye bol kar Preeti apni baanhe Kushal ke gale me daal deti hai.

Kushal un baanho ko apne gale se hatate hue bolta hai -

" Preeti mujhe neend aa rahi hai. Please tu ja yahan se".

Preeti uske aur kareeb aate hue bolti hai -" Aakhir aisi kaise neend hai teri jo tu itna gussa ho raha hai......." aur kas kar apne boobs uske peeth me gada deti hai.

" Stop it Preeti ......." Kushal gusse me use apni peeth se hatata hua bolta hai.

Preeti -" Aakhir baat kya hai..... Tu batata kyun nahi"

Kushal -" Saali mera dimaag kharab mat kar...... Bachchi hai tu abhi. Ek din jabardasti chod dunga phir roti phiregi. Main tujhe pehle bhi samjha chuka hu ki mujhse door raha kar....." Kushal preeti ko apni ungli dikhata hua bolta hai.

" KUSHAL.... KUSHAL" tabhi neeche se tej tej aawaje aati hai jo ki smriti ki thi. Ye awaje sun kar Kushal jaise bhaga chala jaata hai neeche ki taraf aur Preeti room me akele rah jaati hai.

Preeti ko abhi bhi kuchh samjh nahi aa raha tha ki aakhir baat kya hai. Khair wo apne room me chali jaati hai aur gate band kar leti hai.

Kushal neeche pahunchta hai, Pankaj hall me betha tha aur Smriti kitchen me thi. Kushal seedha kitchen me bhagta hua jaata hai - " Ji Mom......."

Smriti -" Khana khayega......?"

Kushal -" Mom main to din raat khata rahu aap khilao to sahi.." Kushal phir se double meaning baate karta hai

Smriti thali patakate hue use deti hai aur bolti hai ki upar le ja aur kha le. Main sone ja rahi hu.

Kushal upset mind se upar aa jata hai. Khana khata hai aur so jaata hai.

Next morning.....

Pankaj hall me beth kar chai pee raha hai. Use aisi aawaj sunai deti hai jaise koi upar se high heel pahan kar utar kar aa raha ho -" khat khat...." wo upar nigaahe karta hai to jaise..... Ohhhh wo Aradhna thi jisne ek different type ki dress pahni hui thi. Khule baal wo bhi straight kare hue, short dress jisme clear dikh raha tha ki aaj usne ander bra nahi pahni hai. Light make up kiya hua tha, Pankaj ka moonh khula ka khula rah jaata hai ye sab dekh kar lakin wo kisi tarah control karta hai. Agar aap jan na chahte hai ki usne kis tarah ki dress pahni to below link par click kare.

http://pzy.be/v/12/ar.jpg

Pankaj ke liye wakai me ye ek good morning thi. Aradhna dheere dheere neeche utar aati hai.

Aradhna -" Good morning daddy..." ek smile ke sath wo dad ko greet karti hai

Pankaj -" Good morning beta. Kya aaj bilkul different look, naya andaaz. Kya baat hai bhai..."

Pankaj ke moonh se apni tarif sunkar wo sharma jati hai. Aur aap jaan kar pankaj ke table ke saamne rake ek glass ko jhuk kar uthati hai. Uffffff..... Uske kamayat jaise boobs bahar nikalne ko teyaar ho jaate hai. Aur vaise bhi usne bra nahi pahni thi. Pankaj ye sab dekh kar shocked raha jaata hai. Uske ander ka aadmi bahar aane ko teyar ho jata hai lakin Aradhna seedha khada hoti hai aur kahti hai.

" Ok daddy... College ja rahi hun...." aur ye bolte bolte wo gate tak aa jaati hai. Pankaj ki nigaahe ab tak nahi hati thi. Wo peeche mud kar dekhti hai aur Pankaj ki nigaahe phir se Aradhna se mil jaati hai. Aradhna ko hansi aa jaati hai.

" Aru beti........" Pankaj peeche se bolta hai.

" Ji Daddy......" Aradhna bina mude bolti hai.

" Aaj college se kitne baje tak aayegi...." Pankaj Aradhna se Puchhta hai.

Aradhna ki khushi ka thikana nahi tha kyunki pehli baar Pankaj ne aise puchha tha.

" Ji bahut jaldi aa jaungi....." Aur ye kah kar wo ek smile ke sath bahar chali jaati hai.

Pankaj ki nigaahe gate par hi thi. Kisi ko pata nahi ki uske dimaag me kya chal raha gha.

Preeti raat bhar sahi so nahi paayi. Usko samjh nahi aa raha tha ki aakhir kya ho raha hai. Wo subah uth kar nahayi aur normal day wear pahan kar bethi hai. Uske baal geele the kyunki abhi thodi der pehle hi wo naha kar aayi thi.

Kushal brush karte karte apne room se bahar nikalta hai. Aur side me se Preeti ke room me se jhankta hai. Use ek fresh preeti bethi hui dikhai deti hai. Wo side me se dekh raha tha aur ye Preeti bhi dekh chuki thi lakin Preeti aise react kar rahi thi jaise ki usko pata nahi ki Kushal dekh raha hai.

" Ohh ye kapde achhe nahi hai. Mujhe change kar lene chahiye.." Preeti apne aap se baat karte hue Kushal ko ye baat sunati hai. Kushal preeti ke ye baat sunkar aur side me ho jata hai aur darwaje ki dararo me se dekhne lagta hai.

Preeti ko pata tha ki Kushal dekh raha hai. Wo usi jagah par bethe hue ghum jaati hai. Sab se pehle apna payjama neeche karti hai aur uske thodi der bad slow motion me apni panty ko bhi.

Uff kya scene tha..... Kushal ka lund to jaise deewar todne ke layak ho gaya tha. Ab Preeti ka payjama bhi neeche tha aur Panty bhi.

 
फॅमिली में मोहब्बत और सेक्स --25

प्रीति जिस हालत मे थी वो हालत किसी भी जवान मर्द को भड़का सकती थी. भड़का क्या आग लगा सकती थी सो वैसा ही कुशल के साथ भी हो रहा था लेकिन पता नही क्यू वो अभी भी बाहर दरवाजे के किनारो मे से देख रहा था. प्रीति अब नीचे से बिल्कुल नंगी थी और उसकी गान्ड सॉफ दिखाई दे रही थी कुशल को.

प्रीति को पता था कि कुशल बाहर खड़ा है और आप जान कर वो लड़की होने के सारे फ़ायदे उठा रही थी. प्रीति अब एक हाथ अपनी चूत के नीचे से ले जाते हुए अपनी गान्ड तक ले जाती है. फिर उस हाथ को वापिस लाकर उस की एक उंगली अपने मूँह मे देती है और उसे अच्छे से गीला कर के फिर से पीछे लाती है. उस सीधी गीली उंगली को वो अपनी चूत पर मसलती है. और फ़चककक...... और सीधा अपनी गीली चूत मे घुसती है. कुशल पर तो जैसे अटॅक पर अटॅक हो रहे थे, वो फिर से इधर उधर देखता है कि कहीं और कोई तो नही है फ्लोर पर लेकिन पूरा फ्लोर खाली पड़ा था.

कुशल भाग कर पीछे की साइड जाता है और देखता है कि कहीं आराधना दीदी तो अपने रूम मे नही है. लेकिन वो रूम खाली पड़ा था, कुशल वापिस भाग कर आता है और फिर से दीवार के किनारो मे से झाँक कर देखने लगता है. उसकी कुँवारी चूत को देख कर वो एक बार फिर से पागल हो जाता है. प्रीति कुच्छ कर सके या नही लेकिन उसने कुशल को ऐसा तो कर दिया था कि उसका लंड उसके शॉर्ट से बाहर आने को फड़ फाडा रहा था. कुशल अपनी निगाहे और गढ़ा देता है उस दरवाजे के किनारो मे. वो क्लियर देखता है कि प्रीति अपनी पूरी उंगली चूत मे घुसाती है और बाहर निकालती है.

कुशल का चेहरा लाल हो चुका था. और ब्लड प्रेशर हाइ हो चुका था. उसने शायद लास्ट मोमेंट तक वेट किया लेकिन जब उससे नही रहा गया तो उसने अपना लंड शॉर्ट के बाहर निकाल लिया.

" काश मैने इसकी इन्सल्ट ना की होती तो आज इसे चोद देता...... कसम से इसकी चूत कितनी मस्त है." कुशल अपने आप मे बड़बड़ाता है.

कुशल अपने विशाल लंड को बाहर निकाल कर उसे आगे पीछे करने लगता है. एग्ज़ाइट्मेंट जवानी मे अँधा कर देती है और यही रीज़न था कि खुले आम गॅलरी मे वो अपना लंड निकल कर खड़ा था.

" साली क्या खाती है.... इतनी पटाखा चूत तो किसी की भी नही देखी आज तक मैने..." वो फिर से बड़बड़ाता है.

" कुशल................" बहुत तेज़ी से एक आवाज़ कुशल के कानो से टकराती है. कुशल की तो जैसे जान ही निकल जाती है. वो नज़रे फिरा कर देखता है -" मोम.............."

सीढ़ियो से उपर आकर स्मृति खड़ी थी और जैसे ही वो कुशल को देखती है कि वो खुले आम अपने लंड को ऐसे बाहर निकाल कर खेल रहा है तो वो उसे आवाज़ लगाती है.

कुशल को तो जैसे काटो तो खून नही. स्मृति तेज तेज चल कर कुशल के पास आती है. कुशल अपने लंड को तेज़ी से अपने शॉर्ट के अंदर डाल लेता है लेकिन खड़ी हालत मे इतना बड़ा लंड आख़िर कैसे समाए उसमे. लंड का उपरी हिस्सा अभी भी बाहर ही था और उसे बार बार कुशल अंदर करना चाह रहा था.

स्मृति पास आती है और कस के एक और तमाचा - "चटककक..........."

" बद तमीज़. तेरी हिम्मत इतनी बढ़ गयी कि आज तू खुले आम घर मे ये काम कर रहा है. क्या देख रहा था यहाँ से....." स्मृति फिर प्रीति के गेट के अंदर झान्कति है लेकिन वहाँ कोई नही होता. कुशल भी भगवान का शुक्रिया अदा करता है.

कुशल अपने कान पे हाथ लगाए खड़ा था. शायद थप्पड़ की गूँज अभी तक उसके कान मे थी.

" सच बता क्या कर रहा था यहाँ...." स्मृति उसे फिर से वॉर्निंग देती है

कुशल -" मोम.... मोम....वो........."

स्मृति -" क्या मोम मोम लगा रखा है. जल्दी बोल नही तो अभी तेरे डॅडी को बुलाती हू......"

कुशल -" मोम वो..... वो आपकी याद ज़्यादा आ रही थी तो ......." कुशल को उस टाइम जो ठीक लगा उसने वो बोल दिया.

ये बात सुन कर स्मृति की भी एक बार को हँसी छूट गयी लेकिन उसने कुशल को अहसास नही होने दिया.

" देख कुशल मैं तुझे पहले ही समझा चुकी हू. कल रात मुझे ये लगा कि तू नादान है और तू सुधर जाएगा लेकिन तू तो यहाँ खुले आम अपनी मा को याद कर रहा है. तेरी दो जवान बहने भी है, अगर वो देख लेती तो उन्हे कैसा लगता बता....." स्मृति उसे समझाते हुए बोलती है.

" सॉरी मोम....... अबसे अपने रूम मे ही आपको याद कर लिया करूँगा....." कुशल भी बहुत इनोसेंट बनते हुए बोलता है.

" फिर वोही बात..... देख तेरे जैसे लड़के गर्ल फ्रेंड बनाते है. तेरी उमर है, लेकिन तुझे शोभा नही देता कि तू अपनी मोम के बारे मे सोचे...." स्मृति उसे फिर समझाती है

" मोम... मैं सच बोल रहा हू. मेरी क्लास मे एक लड़की ने ट्राइ किया लेकिन मेरा लंड किसी और के साथ खड़ा नही होता लेकिन जैसे ही आपके बारे मे सोचता हू तो वैसे ही देखो खड़ा हो जाता है..". कुशल एक बार फिर से अपने लंड के दर्शन अपनी मा को करा देता है.

स्मृति -" ओह माइ गॉड. ये लड़का तो पागल हो गया है." और स्मृति नीचे जाने लगती है.

कुशल उपर वाले का शुक्र माना रहा था कि सारी सिचुयेशन कंट्रोल हो गयी. नही तो लेने के देने पड़ जाते. वो फिर से एक बार दरवाजे के अंदर झाँक कर देखता है लेकिन वहाँ कोई नही था. कुशल वापिस अपने रूम मे आता है और नहाने लगता है.

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इधर आराधना कॉलेज पहुँचती है, आज उसे सब डिफरेंट आइज़ से देख रहे थे. उसने कभी अपनो बॉडी को इतना शो ऑफ नही किया था. कॉलेज के एंट्रेन्स गेट से लेकर अंदर की कॅंटीन तक उसे सब लड़को ने ऐसे देखा जैसे इससे पहले कभी हॉट आइटम देखा ही ना हो. लड़कियो की भी हालत खराब थी, क्यूंकी उनके बाय्फरेंड्स की नज़रे आराधना से हट नही रही थी. आराधना के चेहरे पे एक अलग ही स्माइल भी थी, लड़की होने का अहसास उसे होने लगा था औट उसका कॉन्फिडेन्स भी बढ़ रहा था. चाल मे एक बात आती जा रही थी.
 
कॅंटीन मे जैसे ही एंट्री लेती है, एक पल के लिए तो उसे सिमरन पहचान भी नही पाती. वो एक नज़र हटा कर जब दोबारा देखती है तो उसे समझ आता है कि वाकई मे ये आराधना है. सिमरन अपनी चेर से खड़ी हो जाती है.

" मेरी जान, सारी लड़कियो की दुकान बंद कराएगी तू तो"...... सिमरन जाकर हग करती है आराधना को

आराधना " क्या मतलब है तेरा दुकान से....".

सिमरन -" तू छोड़ लेकिन बाइ गॉड यार क्या लग रही है. कॉलेज के क्लीनर से लेकर प्रोफेसर तक की निगाहे रहेंगी तुझ पर. और क्या ब्रा भी नही पहनी. मेरी जान इन अनटच बूब्स को आज कहीं कोई टच ना कर दे..."

आराधना -" किसी की हिम्मत है जो टच करे.... लेकिन सब छोड़ ये बता कि तू घर से क्यू भाग गयी थी....?"

सिमरन -" अबे यार मत पुच्छ.... मेरे डॅड की गर्ल फ्रेंड घर पर थी और मेरी मा आ गयी. मेरे डॅड घबरा गये थे तो मेरी हेल्प माँग रहे थे. इसीलिए जल्दी जाना पड़ा."

आराधना( शॉक्ड होते हुए)-" तेरे डॅड की गर्ल फ्रेंड? ओर तुझे पता भी है कि उनकी गर्ल फ्रेंड है. वो तो मॅरीड है, फिर उनकी गर्ल फ्रेंड क्यू? क्या कहा तेरी मोम ने..."

सिमरन -" अबे तू जानती नही है, आज कल तो सभी के डॅड की गर्ल फ्रेंड होती है. अपने डॅड की सेट्टिंग तो मैने ही कराई.... सिमी से. बस 19 साल की मस्त लड़की है. बिंदास रहती है एक दम मेरी तरह. वो डॅड के साथ थी तो मोम शॉपिंग करके जल्दी आ गयी, मोम ने तो बस आते ही सवाल शुरू कर दिए और डॅड को बोलना पड़ा कि ये सिमरन की फ्रेंड है."

आराधना -" 19 साल की लड़की? यार उसे क्या तेरे डॅड ही मिले बस बॉय फ्रेंड बनाने के लिए?"

सिमरन - " अब सारे सवाल अभी करेगी. तू बता कि उस रात गाड़ी कुच्छ आगे बढ़ी या नही."

आराधना शरमा जाती है और कुच्छ नही बोलती.

" ओये होये मेरी जान के लाल गाल तो देखो. शरम से एक दम लाल हो चुकी है.... बता ना कि रात को क्या हुआ?" सिमरन उसे ज़ोर देते हुए पूछती है

आराधना-" चल कैसी बाते करती है....."

सिमरन -" मेरी जान एक बात कहु?"

आराधना ( नज़रे झुकाते हुए) -" हाँ बोल?"

सिमरन -" लंड लेने के लिए थोड़ा बेशर्म बन ना पड़ता है. ये जमाना ही ऐसा है, गोल्ड मिल जाता है लेकिन लंड नही मिलता. तो मेरी जान शरमाना छोड़ और अपनी इस फ्रेंड की अगर हेल्प चाहिए तो सॉफ सॉफ बता..."

आराधना ( गुस्से मे)- "कुच्छ भी नही हुआ.... पूरी रात वेट किया लेकिन वो उपर नही आए.... ओके".

सिमरन -" तो गुस्सा क्यू होती है. सब सही हो जाएगा. लेकिन एक बात का ख्याल रख. लड़कियो को ज़ुबान से ज़्यादा बॉडी के मध्यम से बोलना होता है...."

आराधना -" देख मेरा मूड खराब मत कर. अगर हेल्प करनी है तो सॉफ सॉफ बता...."

सिमरन -" अबे तो क्या अपने डॅड से जाकर ये बोल सकती है कि मुझे चोद दो.... "

आराधना -" यार तू जो ना..... जा मुझे तुझसे बात नही करनी." और वो उठ कर चल देती है. तभी सिमरन उसका हाथ पकड़ती है और बोलती है

सिमरन -" मेरी जान, बैठ. सुन अब मेरी बात, लड़की जितनी सादगी मे रहे उतना अच्छा है. तेरे डॅड एक दम मस्त आदमी है लेकिन एक अच्छे इंसान भी. हो सकता है कि वो तुझे चोदना ना चाहते हो. तो तेरा काम है कि उनके अंदर के मर्द को इतना जगाना कि वो मजबूर होकर तुझे खुद ही चोद दे. और जहाँ उन्होने एक बार तुझे चोदा, मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मम्मी की चूत मे उन्हे मज़ा नही आएगा फिर. लेकिन तुझे मेहनत पूरी करनी पड़ेगी. लेकिन मुझे तेरी बॉडी पे पूरा भरोसा है कि वो जल्दी ही फिसल जाएँगे...". अपनी तारीफ सुनकर आराधना शरमा जाती है.

सिमरन फिर बोलना शुरू करती है - " तेरे साथ सबसे बड़ी प्राब्लम ये है कि तेरी मोम भी बहुत सेक्सी है. हो सकता है कि वो खूब प्यार देती हो तेरे डॅड को".

आराधना -" यार मेरी मोम एक दम हॉर्नी है. वो पापा का पीछा नही छोड़ती. दिन मे भी उनके पीछे लगी रहती है..." आराधना थोड़ा एग्ज़ाइटेड होकर बोलती है

सिमरन -"ओये होये मेरी जान. मोम को पहले से ही अब्ज़र्व कर रही है. वैसे बता कि तुझे ऐसा क्यू लगा कि वो हॉर्नी है...?

आराधना -" क्या बताऊ लेकिन मैने एक बार देखा कि मॉर्निंग मे ही ....."

सिमरन -" मॉर्निंग मे ही क्या?"

आराधना -" मॉर्निंग मे ही.... मॉर्निंग मे ही प्यार कर रहे थे...."

सिमरन -" साली खुल कर नही बता सकती कि क्या कर रहे थे वो...." सिमरन गुस्से मे बोलती है

आराधना -" गाली? तूने मुझे गाली दी....."

सिमरन -" मेरी बुलबुल ये तो प्यार की गाली है.... अब बता कि कैसा प्यार कर रहे थे वो?"

आराधना -" मोम डॅड का वो पार्ट चूस रही थी.."

सिमरन -" ओये कितनी लकी है मेरी दोस्त. लंड देख भी चुकी है? कैसा है?"

आराधना -" अबे यार पुच्छ मत. ऐसा लगा जैसे नकली है. एक दम मोटा और लंबा. "

सिमरन ( एग्ज़ाइटेड होते हुए)- " तेरी तो लाइफ बन गयी. आज कल तो साले लड़के उच्छलते है बहुत और जब बेड मे पहुँचो तो पता चलता है कि 6 इंच की लुल्ली."

आराधना " क्यूँ तेरे बॉय फ्रेंड का छोटा है क्या?"

सिमरन -" देख मैं फेक लाइफ नही जीती. और झूठ भी नही बोलती. मेरा बॉय फ्रेंड अच्छा प्यार करता है बेड मे लेकिन साले का लंड बस 6 इंच होगा. लड़की को ड्रामा करना लड़ता है कि वो हॅपी है लेकिन यार उससे खुजली नही मिट ती है"

आराधना -" हे हे हे हे हे. यू आर फन्नी गर्ल."

सिमरन -" तुझे एक बात बताऊ?"

आराधना " हाँ बता."

सिमरन -" पता है मैं तेरे घर पर मिली ना उसके साथ. तो वो मेरे उपर था, उसने लंड मेरी चूत मे घुसाया. मैं बहुत एग्ज़ाइटेड थी तो मैने उसे बोला कि बेबी मोर इनसाइड, मोर इनसाइड. वो बेचारा शर्मा कर मुझसे बोला कि सिमरन मैं पूरा अंदर कर चुका हू..."

आराधना -" हा हा हा हा हा हा. व्हाट अ जोक. ग्रेट , एनीवे आज मुझे घर जल्दी जाना है.

सिमरन -" क्यू?"

आराधना -" ये मैं तुझे बाद मे बताउन्गि...."

सिमरन -" ओके जैसी तेरी मर्ज़ी...."

दोपहर हो चुकी थी. पंकज घर मे ही था तो उसे एक फोन कॉल आता है जिसे सुनकर पंकज बहुत एग्ज़ाइटेड हो जाता है. और भागा भागा स्मृति के रूम मे जाता है.

पंकज -" डार्लिंग...... डार्लिंग.....?"

स्मृति -" क्या बात है, क्यू इतना एग्ज़ाइटेड हो रहे हो?" स्मृति बेड पे बैठ कर काम कर रही थी.

पंकज -" डार्लिंग मेरा बिज़्नेस प्रपोज़ल देल्ही मे पास हो गया है." ऑर वो भाग कर स्मृति को हग कर लेता है.

स्मृति -" सच मे..... ये तो बहुत अच्छी खबर है ". स्मृति भी पंकज को हग करते हुए बोलती है.

पंकज -" मुझे आज ईव्निंग ही देल्ही जाना पड़ेगा वो भी 15 दिनो के लिए. प्लीज़ मेरे कपड़े पॅक कर देना"

स्मृति -" मैं भी साथ चलूंगी आपके.."

पंकज -" नही स्वीटी, बच्चो को अकेला नही छोड़ सकते. और वैसे भी मैं 15 दिनो के लिए ही तो जा रहा हू."

स्मृति -" लेकिन मेरा मन नही लगेगा आपके बिना." स्मृति भी उसे टाइट्ली हग करते हुए बोलती है

पंकज -" मेरी जान अगर ये प्रॉजेक्ट सक्सेस्फुल हो गया ना तो अपना अगला घर देल्ही मे ही बनेगा. चल अब टाइम कम है मेरी पॅकिंग शुरू कर दे. आज ईव्निंग मे ही निकलना पड़ेगा". पंकज उससे अलग होते हुए बोलता है

 
स्मृति वहाँ से उठ कर बॅग वग़ैरा निकालने लगती है. और पंकज बाहर आ जाता है, वो सोचते सोचते सोफे तक आया ही था कि तभी -

" हाई डॅडी......." आराधना भाग कर अपने डॅड को हग कर लेती है. वो कॉलेज से आ गयी थी और पूरी ताक़त से अपने डॅड के सीने से लग जाती है. उसके हार्ड स्टोन टाइप बूब्स अपने डॅड के सीने मे गढ़ रहे थे. उसके डॅड अपने हाथ उसके पीछे ले जाते है और उसकी नंगी पीठ पर पहुँच जाते है. क्यूंकी उसकी ड्रेस बॅक लेस थी. किसी भी जवान मर्द का एरेक्षन पासिबल था, कुच्छ ही सेकेंड्स मे पंकज का लंड बाहर निकल कर आराधना के पेट को टच करने लगा. आराधना को इस बात का अहसास हो चुका था और वो तुरंत अलग हो जाती है. आराधना की एक नज़र नीचे और फिर अपने डॅड के चेहरे पे जाती है. आराधना के चेहरे पे एक हल्की सी स्माइल आ जाती है. और वो बिल्कुल अलग हो जाती है. दोनो मे से अब कोई कुच्छ नही बोल रहा था, पंकज की तो जैसे हार्ट बीट ही रुक गयी थी और उसका मूँह भी खुला हुआ था.

आराधना फिर से स्टाइल मे अपने रूम की तरफ जाने लगती है. सीढ़ियो पे चढ़ने से पहले एक कॉर्नर मे वो अपनी ड्रेस को थोड़ा सा उपर कर लेती है. उफ़फ्फ़ आराधना ने भी जैसे पंकज को बिल्कुल टीज़ करने का फ़ैसला कर लिया था. सीढ़ियो पे चढ़ते टाइम, जैसे आराधना की हाफ गान्ड और पैंटी पंकज को विज़िबल हो गयी थी.

पंकज की निगाहे जैसे पत्थर की बन चुकी थी और वो अपनी नज़रे हिला नही रहा था. आराधना एक बार फिर से पीछे मूँह कर के देखती है और पंकज को अपनी गान्ड की तरफ घुरती हुई पाती है. वो फिर से एक स्माइल देती है और उपर चली जाती है. अपने रूम मे आकर चेंज करने लगती है.

थोड़ी देर बाद वो नीचे खाना खाने के लिए आती है.

आराधना -" डॅड, मोम कहाँ है मुझे खाना खाना है," आराधना अपने डॅड से पूछती है

लेकिन पंकज तो जैसे कहीं और ही खोया था. आराधना उसके चेहरे के पास जाकर चुटकी बजाती है -" डॅड..... डॅड?

पंकज -" यस.... यस बेटा...." वो होश मे आता है

आराधना -" मोम कहाँ है, मुझे भूख लगी है तो खाना चाहिए"

पंकज -" वो पॅकिंग कर रही है...."

आराधना ( बहुत हॅपी होते हुए)- " क्यू मोम कहीं जा रही है?"

पंकज -" नही मैं जा रहा हू...." पंकज उसे रिप्लाइ करता है

आराधना की तो जैसे पाँव तले से ज़मीन खिसक जाती है. उसके चेहरे से तो जैसे हँसी ऐसे गायब हो जाती है जैसे पर झाड़ मे पत्ते. फिर भी वो कंट्रोल करते हुए अपने चेहरे को दूसरी और घुमाती है और बोलती है-

" आप..... आप कहाँ जा रहे......?" आराधना पूछती है

पंकज -" वो.... वो एक बिज़्नेस डील है. देल्ही जाना है....."

आराधना -" कितने दिन के लिए.....?" आराधना की आवाज़ बहुत डाउन हो चुकी थी.

पंकज -" मिनिमम 15 डेज़ के लिए..."

आराधना की तो जैसे आँखो मे से आँसू निकलने को तेय्यार हो जाते है. वो बिना टाइम वेस्ट किए सीधा अपने रूम की तरफ भागती है. अपना रूम भड़ाक से बंद करती है और बेड पे लेट जाती है. गेट इतनी तेज बंद हुआ था कि उसकी आवाज़ नीचे पंकज भी सुन सकता था. यूँ ही टाइम बीत रहा था और उसने खाना भी खाया.

अब ईव्निंग हो चुकी थी. पंकज भी अच्छे तरह से फ्रेश होकर और खाना वाना खाकर जाने के लिए तैयार था. स्मृति का मन भी उदास था.

" मैं बच्चो को बुला कर ले आती हू...." स्मृति पंकज के बॅग को बाहर लाते हुए बोलती है.

पंकज -" ठीक है?"

स्मृति उपर जाती है. सबसे पहले आराधना का रूम पड़ता है. उसका गेट बंद था, स्मृति उसे नॉक करती है -" आरू...... आरू बेटा. " आराधना अंदर ही थी लेकिन कोई रिप्लाइ नही करती, वो तुरंत वॉशरूम मे भागती है क्यूंकी वो अपनी मा को अपने आँसू नही दिखाना चाहती थी. वो वॉशरूम मे से ही अपनी मोम को कहती है -"

" यस मोम..... मैं वॉशरूम मे हू.... बोलो क्या बात है...?"

स्मृति -" बेटे नीचे आ जा. तेरे डॅड देल्ही जा रहे है..."

आराधना -" आप चलिए मैं आ रही हू...."

स्मृति ठीक है बोल कर आगे की तरफ चली जाती है. उसके बाद कुशल का रूम पड़ता है, स्मृति उसके रूम मे जाने ही वाली थी कि पता नही क्या सोच कर रुक जाती है और सीधा चल कर प्रीति के रूम मे चली जाती है. प्रीति बेड पर बैठ कर गेम खेल रही थी.

" प्रीति ....." स्मृति उसके रूम मे घुस कर उसे आवाज़ लगाती है

प्रीति -" यस मोम...." वो बेड से खड़े होते हुए बोलती है

स्मृति -" बेटे नीचे आ जा और कुशल को भी बुला ला. तेरे डॅड देल्ही जा रहे है...."

प्रीति -" मोम आप बुला लीजिए ना कुशल को...."

स्मृति -" मैं जल्दी मे हू. तू प्लीज़ बुला ला...." और ये कह कर वो वहाँ से चली जाती है.
 
प्रीति थोड़ा फ्रेश होकर कुशल को बुलाने जाती है लेकिन उसका रूम बंद था और शायद वो सो रहा था. काफ़ी देर नॉक करने के बाद प्रीति भी नीचे चली जाती है. उसके थोड़े पीछे पीछे आराधना भी नीचे चली जाती है लेकिन कुशल का कहीं पता नही होता.

नीचे ग्राउंड फ्लोर पे पंकज जाने को जैसे तैयार ही खड़ा था. उसके पास स्मृति उसके थोड़ी दूरी पर प्रीति खड़ी थी. सबसे पीछे आराधना खड़ी थी. वो तो हाथ बाँध कर ऐसे खड़ी हुई थी जैसे आज उसकी जिंदगी का आख़िरी डे है.

प्रीति -" डॅडी, आप वहाँ रहेंगे कहाँ." प्रीति अपने डॅड से पूछती है

पंकज -" बेटे मेरा होटेल बुक हो चुका है. 15 दिन वहीं रहूँगा....."

प्रीति -" डॅड प्लीज़ देल्ही से कुच्छ ड्रेस लेकर आना. सुना है वहाँ बहुत हाइ फॅशन स्टोर्स है." प्रीति रिक्वेस्ट करते हुए बोलती है. उसकी आँखो मे चमक थी.

पंकज -" ज़रूर लेकर आउन्गा...." और वो बाहर आ जाता है. अपने बॅग को अपनी गाड़ी मे डालता है. आराधना तो पता नही कैसे अपने एमोशन्स को कंट्रोल कर रही थी. इसीलिए वो सबसे पहले खड़ी थी ताकि प्रीति और स्मृति उसको इस हालत मे ना देखे.

पंकज गाड़ी मे बैठने से पहले सबको हग करता है. आराधना भी इस बार भाग कर साइड मे उसे पूरी जान से हग करती है. अपने बूब्स को उसकी छाती मे जैसे बुरी तरीके से गढ़ा देती है. और लो वाय्स मे कहती है -" प्लीज़ जल्दी आना, मैं वेट करूँगी...."

और फिर सब पंकज से अलग हो जाते है. पंकज गाड़ी स्टार्ट करता है, सबको हाथ हिलाता है.

" उस सोतू कुशल से बोल दियो कि मुझे फोन करे...." पंकज जाते हुए बोलता है. कार मे गियर डालता है और कार आगे बढ़ जाती है. पंकज साइड मिरर से देखता है कि स्मृति और प्रीति अंदर जा रही है लेकिन आराधना की निगाहे अभी भी पंकज की कार पर ही थी. धीरे धीरे कार घर से बाहर चली जाती है. आराधना बहुत अपसेट थी.

प्रीति अंदर आकर उपर चली जाती है. वो अपने रूम मे जा ही रही थी कि फिर सोचती है कि एक बार फिर से कुशल को चेक कर लू अगर जगा हो तो. वो फिर से उसके गेट को नॉक करती है...." कुशल..... कुशल......."

थोड़ी देर तक कोई आवाज़ नही आती लेकिन फिर गेट खुलता है. सामने कुशल खड़ा था वो भी बस फ्रेंची मे, उसकी हालत बता रही थी कि वो सो रहा था. प्रीति की निगाहे नीचे उसकी फ्रेंची पर जाती है --" ऊप्स सॉरी ब्रो..... मोम ने बोला था तुझे जगाने को........." प्रीति नीचे उसकी फ्रेंची को देखते हुए बोलती है

कुशल -" क्यू..... मोम क्यू बुला रही है....." कुशल अपनी आँखे मलता हुआ बोलता है.

प्रीति -" वो डॅड देल्ही गये है ना 15 डेज़ के लिए......"

कुशल -( बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होकर)- " क्या कहाँ तूने..........."

प्रीति -" डॅड 15 दिनो के लिए देल्ही गये है. यानी 15 दिनो तक वो घर पर नही है......."

कुशल ये बात सुनकर इतना एग्ज़ाइटेड हो जाता है कि प्रीति को हग करता है और उसके गाल पे एक किस करता है.

प्रीति उसे थोड़ा पीछे जाते हुए बोलती है -" ब्रो..... कुच्छ पहन ले. और डॅड गये तो तू इतना खुश क्या हो रहा है."

कुशल -" मस्ती और बस मस्ती........." कुशल घूमते हुए बोलता है.

प्रीति -" ये लड़का तो पागल है" और ये कह कर अपने रूम मे जाने लगती है. प्रीति के माइंड मे भी पता नही क्या चल रहा था लेकिन थी बहुत हॅपी आज वो.

आराधना बहुत धीमे धीमे कदमो के साथ अपने रूम मे आ जाती है और रूम बंद कर लेती है. बेड पे लेट ते ही उसकी आँखो से आँसुओ की नादिया बह जाती है. पता नही उसने क्या प्लान बनाए थे और वो सब पानी मे मिल जाते है.

कुशल अपने रूम मे डॅन्स सॉंग्स पे थिरक रहा था. अच्छा सा म्यूज़िक चला कर वो बाथरूम मे जाता है, आज उसको बिल्कुल फ्री फील हो रहा था. वो अपना रेज़र उठाता है और अपने लंड के आस पास के बालो को क्लीन करने लगता है. " आज रात तेरी सारी भूख मिटा दूँगा...... तू परेशान ना हो....." कुशल अपने लंड पर हाथ फिराता हुआ बोलता है.

कुशल अपने लंड के आस पास की जगह अच्छे से शेविंग करने के बाद, उस पर कस कर आयिल की मालिश करता है. क्या गजब लंड लग रहा था उसका. एक अलग ही शाइनिंग थी उसके लंड मे. उसके लंड की नसें क्लियर दिख रही थी. अब तक पता नही था कि आख़िर उसके माइंड मे क्या प्लान चल रहे थे लेकिन आज बहुत हॅपी था वो.
 
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