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पंकज अपना हाथ नीचे आराधना की चूत पर ले जाता है और और उसके उपर से ही हाथ फिराने लगता है. आराधना भी अपने हाथो को पंकज के सीने पर फिरा रही थी. आराधना के होठ पंकज को और भी ज़्यादा रसीले लग रहे थे.
लिप्स जैसे ही अलग होते है, पंकज फोरप्ले स्टार्ट करता है और आराधना की गर्दन पर किस करना शुरू कर देता है.
“ ओह……लव मी डॅड……… मुझे बहुत प्यार चाहिए…….ह्म्म्म्मममममममममम” आराधना फिर से एक बार गरमा रही थी.
उसका बदन बहुत ज़्यादा गरम हो चुका था और पंकज भी एक अनिमल की तरह उसे चट रहा था. उस होटेल के एक रूम मे ये टाइम थमने का नाम ही नही ले रहा था. लाइफ मे पता नही कितने ही राज ऐसे होते है जिनका कभी किसी को कुच्छ पता नही चलता और ये उन्ही मे से एक है जहाँ एक जवान और बेहद गरम लड़की अपने ही डॅड की बाँहो मे मचल रही थी.
पंकज उसे प्यार करते करते नीचे पहुँच चुका था. वो उसकी पतली कमर को थामते हुए उसकी गोरी और गहरी नाभि पर किस करता है और धीरे धीरे नीचे उसकी चूत तक पहुँचता है. वो आराधना की थाइस को पकड़ कर उन्हे थोड़ा सा फेलाने का इशारा करता है. पूरी तरह से गरमाई हुई आराधना उसके इशारो पर बंद आँखो से अपनी टांगे फेला लेती है.
पंकज अपना मूँह फिर से उसकी चूत पर लगा देता है. “ह्म्म्म्मममम……………उफफफफफफफफफ्फ़…………क्या…..आग लगती है इसमे……………” आराधना का इशारा अपनी चूत की तरफ था. पंकज भी अपने घुटनो के बल बैठा हुआ था और उसकी चूत चाट रहा था. एक बार चुदने से चूत बेहद ही मस्त हो चुकी थी. रंग और भी ज़्यादा गुलाबी हो चुका था, उसकी चूत के लिप्स के बीच की दूरी थोड़ी और बढ़ गयी थी जिससे कि वो और भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी.
“ह्म्म्म्मम………….ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…….इस्शहस्शसशसशहस्शसशससश्” खुले हुए माहौल मे जहाँ उन्हे कोई जानता भी नही था तो दोनो बहुत अच्छे से मज़े ले रहे थे.
करीबन ऐसे ही बहुत डेट तक पंकज उसकी चूत को चाटने मे लगा रहा…..” नही रहा जा रहा है……. प्लीज़ इसकी आग बुझा दो………………..उफफफफफफफफफफफ्फ़……….” आराधना का अपना एक हाथ भी अपनी चूत पर पहुँच चुका था.
“ तुम……….. दूसरी बार ले पाओगि ना……………??” पंकज अपना मूँह उसकी चूत से हटा कर पुछ्ता है, वो धीरे धीरे अपने शॉर्ट को भी उतार रहा था. लेकिन आराधना तो जैसे होश मे ही नही थी.
“ प्लीज़………. मैं दूसरी बार क्या………..मैं पूरी रात ले पाउन्गि………………….” आराधना की आवाज़ और भी सेक्सी होती जा रही थी. पंकज खड़ा होता है और उसे अपनी गोद मे उठाता है. आराधना पंकज की गोद मे आते ही अपनी दोनो बाँहे पंकज की गर्दन मे डाल देती है और अपने होंठ उसके होंठ पर लगा देती है. पंकज अनएक्सपेक्टेड उसे फिर से बाथ टब मे ले जाता है और फिर से वहाँ ले जाकर खड़ा कर देता है. एक ही झटके मे फिर अपनी टीशर्ट उतार देता है. अब फिर से दोनो बदन पूरी तरीके से नंगे थे.
आराधना को समझ नही आ रहा था कि आख़िर पंकज का प्लान क्या है और वो बेड पर जाने की बजाय फिर से बाथटब मे आ गया था. लेकिन बाथ टब मे काफ़ी जगह थी और पंकज के पूरे पाँव उसमे आ रहे थे. उसमे लेटने के बाद और अपने सारे कपड़े उतारने के बाद वो आराधना का हाथ पकड़ कर खींचता है. आराधना को इतना तो समझ आ जाता है कि पंकज उसे अपने उपर चढ़ाता है. ठीक वैसे ही आराधना पंकज के उपर बैठ जाती है, बैठते ही आराधना को उसके खड़े लंड का अहसास हो जाता है जो कि काफ़ी विकराल हो चुका था.
पंकज आराधना को थोड़ी सी गान्ड उपर उठाने के लिए बोलता है और ठीक उसी के कहने से आराधना अपनी गान्ड को उठाती है. आराधना की चूत अभी भी पानी के अंदर ही थी, पंकज अपना हाथ ले जाकर ठीक अपने लंड को पकड़ता है और सीधा उसकी चूत पर लगाता है. आराधना एग्ज़ाइटेड थी इस बाथटब सेक्स के लिए…….. पंकज उसके सोचने से पहले ही पानी मे छप से उसे नीचे करता है और लंड आधा अंदर.
“आआअहह….. पेन होता है………….आराम से………….” आराधना पानी के अंदर ही एक मुक्का पंकज के सीने मे जमा देती है.
दोनो का बस उपरी हिस्सा पानी से बाहर था. आराधना की चूत मे लंड घुस भी चुका था लेकिन ठंडा पानी उसकी चूत की सर्फेस पे रहते हुए आराम भी दे रहा था. नही तो अगर ये झटका उसे बेड पर लगता तो शायद उसे संभालना बड़ा मुश्किल होता आराधना के लिए.
करीब दो मिनिट पंकज कोई मूव्मेंट नही करता और उस ठंडे पानी मे ऐसे ही आराधना को अपने सीने से चिपका कर रखता है. फिर धीरे धीरे से नीचे हाथ ले जाकर आराधना की गान्ड को उठाता है जिससे कि लंड बाहर आ जाता है और फिर से नीचे टिका देता है. पानी मे भी छप्प की आवाज़ आती है.
लिप्स जैसे ही अलग होते है, पंकज फोरप्ले स्टार्ट करता है और आराधना की गर्दन पर किस करना शुरू कर देता है.
“ ओह……लव मी डॅड……… मुझे बहुत प्यार चाहिए…….ह्म्म्म्मममममममममम” आराधना फिर से एक बार गरमा रही थी.
उसका बदन बहुत ज़्यादा गरम हो चुका था और पंकज भी एक अनिमल की तरह उसे चट रहा था. उस होटेल के एक रूम मे ये टाइम थमने का नाम ही नही ले रहा था. लाइफ मे पता नही कितने ही राज ऐसे होते है जिनका कभी किसी को कुच्छ पता नही चलता और ये उन्ही मे से एक है जहाँ एक जवान और बेहद गरम लड़की अपने ही डॅड की बाँहो मे मचल रही थी.
पंकज उसे प्यार करते करते नीचे पहुँच चुका था. वो उसकी पतली कमर को थामते हुए उसकी गोरी और गहरी नाभि पर किस करता है और धीरे धीरे नीचे उसकी चूत तक पहुँचता है. वो आराधना की थाइस को पकड़ कर उन्हे थोड़ा सा फेलाने का इशारा करता है. पूरी तरह से गरमाई हुई आराधना उसके इशारो पर बंद आँखो से अपनी टांगे फेला लेती है.
पंकज अपना मूँह फिर से उसकी चूत पर लगा देता है. “ह्म्म्म्मममम……………उफफफफफफफफफ्फ़…………क्या…..आग लगती है इसमे……………” आराधना का इशारा अपनी चूत की तरफ था. पंकज भी अपने घुटनो के बल बैठा हुआ था और उसकी चूत चाट रहा था. एक बार चुदने से चूत बेहद ही मस्त हो चुकी थी. रंग और भी ज़्यादा गुलाबी हो चुका था, उसकी चूत के लिप्स के बीच की दूरी थोड़ी और बढ़ गयी थी जिससे कि वो और भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी.
“ह्म्म्म्मम………….ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…….इस्शहस्शसशसशहस्शसशससश्” खुले हुए माहौल मे जहाँ उन्हे कोई जानता भी नही था तो दोनो बहुत अच्छे से मज़े ले रहे थे.
करीबन ऐसे ही बहुत डेट तक पंकज उसकी चूत को चाटने मे लगा रहा…..” नही रहा जा रहा है……. प्लीज़ इसकी आग बुझा दो………………..उफफफफफफफफफफफ्फ़……….” आराधना का अपना एक हाथ भी अपनी चूत पर पहुँच चुका था.
“ तुम……….. दूसरी बार ले पाओगि ना……………??” पंकज अपना मूँह उसकी चूत से हटा कर पुछ्ता है, वो धीरे धीरे अपने शॉर्ट को भी उतार रहा था. लेकिन आराधना तो जैसे होश मे ही नही थी.
“ प्लीज़………. मैं दूसरी बार क्या………..मैं पूरी रात ले पाउन्गि………………….” आराधना की आवाज़ और भी सेक्सी होती जा रही थी. पंकज खड़ा होता है और उसे अपनी गोद मे उठाता है. आराधना पंकज की गोद मे आते ही अपनी दोनो बाँहे पंकज की गर्दन मे डाल देती है और अपने होंठ उसके होंठ पर लगा देती है. पंकज अनएक्सपेक्टेड उसे फिर से बाथ टब मे ले जाता है और फिर से वहाँ ले जाकर खड़ा कर देता है. एक ही झटके मे फिर अपनी टीशर्ट उतार देता है. अब फिर से दोनो बदन पूरी तरीके से नंगे थे.
आराधना को समझ नही आ रहा था कि आख़िर पंकज का प्लान क्या है और वो बेड पर जाने की बजाय फिर से बाथटब मे आ गया था. लेकिन बाथ टब मे काफ़ी जगह थी और पंकज के पूरे पाँव उसमे आ रहे थे. उसमे लेटने के बाद और अपने सारे कपड़े उतारने के बाद वो आराधना का हाथ पकड़ कर खींचता है. आराधना को इतना तो समझ आ जाता है कि पंकज उसे अपने उपर चढ़ाता है. ठीक वैसे ही आराधना पंकज के उपर बैठ जाती है, बैठते ही आराधना को उसके खड़े लंड का अहसास हो जाता है जो कि काफ़ी विकराल हो चुका था.
पंकज आराधना को थोड़ी सी गान्ड उपर उठाने के लिए बोलता है और ठीक उसी के कहने से आराधना अपनी गान्ड को उठाती है. आराधना की चूत अभी भी पानी के अंदर ही थी, पंकज अपना हाथ ले जाकर ठीक अपने लंड को पकड़ता है और सीधा उसकी चूत पर लगाता है. आराधना एग्ज़ाइटेड थी इस बाथटब सेक्स के लिए…….. पंकज उसके सोचने से पहले ही पानी मे छप से उसे नीचे करता है और लंड आधा अंदर.
“आआअहह….. पेन होता है………….आराम से………….” आराधना पानी के अंदर ही एक मुक्का पंकज के सीने मे जमा देती है.
दोनो का बस उपरी हिस्सा पानी से बाहर था. आराधना की चूत मे लंड घुस भी चुका था लेकिन ठंडा पानी उसकी चूत की सर्फेस पे रहते हुए आराम भी दे रहा था. नही तो अगर ये झटका उसे बेड पर लगता तो शायद उसे संभालना बड़ा मुश्किल होता आराधना के लिए.
करीब दो मिनिट पंकज कोई मूव्मेंट नही करता और उस ठंडे पानी मे ऐसे ही आराधना को अपने सीने से चिपका कर रखता है. फिर धीरे धीरे से नीचे हाथ ले जाकर आराधना की गान्ड को उठाता है जिससे कि लंड बाहर आ जाता है और फिर से नीचे टिका देता है. पानी मे भी छप्प की आवाज़ आती है.