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कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता था और यह जानता था कि आजकल के वैज्ञानिक युग में चमत्कारों की कहीं कोई गुंजाईश नहीं है।
उसने बड़ी ही कमजोर सी आवाज में अपने सेक्रेटी से कहा-'वह प्रेस कांफ्रेंस कैंसिल कर दो सेठी। वजह कोई भी बता देना।'
जेल से भागे एक अपराधी द्वारा चंगल के खामोश अंधेरों में
खेला गया रूह को कंप-कंपा देने वाला खूनी खेल।
अखवार की इन सुर्खियों के नीचे छोटे अक्षरों में पूरी खबर इस प्रकार छपी थी-पिछले दिनों जेल से भागकर जगतार नामक एक खतरनाक खुजरिम जंगल में आ छपा। कहा जाता है कि इस मुजरिम की सहायक न केवल कुछ देवी शक्तियां हैं बल्कि इसन एक वशीकरण मंत्र भी सद्ध कया हुआ। यह अजीबो गरीब रक्तरंजित कहानी उसके इस वशीकरण मंत्र से ही सम्बन्धित है।
पिछले दिनों जंगल में एक नए फारेस्ट आफिसर श्री के. सी. केसरी की नियुक्ति हुई। श्री केसरी न केवल एक ईमानदार
और मेहनती अफसर हैं बल्कि एक ऐसे परिवार से सम्बन्धित हैं जिसकी रगों में साहस और तपस्या कूट-कूटकर भरी हुई है। जिसका जीता जागता उदाहरण है उनकी बड़ी बहन कुमारी साधना। त्याग और तपस्या की इस देवी ने बचपन में ही मां बाप के मर जाने के कारण अनाथ हो गए अपने भाई-बहनों की जिम्मेदारी जिस साहस के साथ सम्भाल कर उन्हें पढ़ा लिखा कर शिक्षित किया इसकी मिसाल कहा और मिलनी मुश्किल है।
उस देवी की सुशीलता और सच्चरित्रता की कसमें खाई जाती
था।
किन्तु यहां आते ही अनहोनी हो गई। उस देवी की सुन्दरता पर जगतार की कुटिल दृष्टि पड़ी और उसने कुमारी साधना के धवल यश रूपी चन्द्रमा को राहु की तरह ग्रस लिया।
अपने सिद्ध वशीकरण मंत्र का प्रयोग करके उसने उस देवी की ऐसी बुद्धि हरी कि वह दीन दुनिया भूलकर उसी की दीवानी हो गई। यह बात जब फारेस्ट आफिसर केसरी को मालूम हुई तो एक भाई होने के नाते अपनीवहन की वह हालात देखकर चिन्तित हुए। जो कि स्वाभाविक भी था। बहन को समझाने की कोतिश की लेकिन बेसुद। क्योंकि वह बेचारी तो वशीकरण मंत्र के प्रभाव में होने के कारण कुछ भी सोचने समझने से लाचार थी।
श्री केसरी पुलिस में भी इस रिपोर्ट को दर्ज नहीं कराना चाहते थे। क्योंकि इसमें बदनामी का डर था और एक शरीफ भाई भला अपनी बहन की बदनामी कैसे बर्दाश्त कर सकता था।
आखिर उन्होंने अपने मित्र कालिया से जो कि जंगल के ठेकेदार भी हैं, अपनी परेशानी का जिक्र किया।श्री कालिया ने बातचीत द्वारा मामले को सुलझाने के उद्देश्य से जगतार से मिलने का निश्चय किया।
चूंकि जगतार एक फरार मुजरिम था इलिए वह दिन में मिलने का खतरा तो मोल नही बे सकता था। इसलिए रात में मिलना निश्चित हुआ। निश्चित समय पर थी कालिया अपने छोटे भाई हरिया के साथ जगतार से मिलने के लिए जंगल में गए। उन्होंने जगतार
को प्रेमपूर्वक समझाने की कोशिश की कि वह उस देवी का पीछा छोड़ दे और उसे अपने वशीकरण मंत्र से मुक्त कर दें। बदले में जितना भी धन वह चाहता है वे देने के लिए तयार
लेकिन उस काम लोलुप कुटिल कामी जगतार के कानों पर जूं तक न रेंगी।
जब श्री कालिया ने उस पर किसी भी तरह की बातचीत और अनुनय-विनय का असर होते न देरवा तो उसे डराने के लिए धमकी दी कि अगर वह जंगल छोड़कर नहीं गया तो वे उसके बारे में पुलिस को सूचना दे देंगे। बस इतना सुनते ही वह नरपिशाच इतना उत्तेजित हुआ कि उसने वही श्री कालिया के छोटे भाई हरिया की हत्या कर दी
और श्री कालिया को भी बुरी तरह घायल कर दिया। श्री केसरी ने बीच बचाव किया जिसमें जगतार भी कुछ घायल हुआ।
दोनों का इलाज शहर के अस्पताल में हो रहा है जहां श्री
कालिया की जिन्दगी और मौत के बीच एक गहरी कशमकश चख रही है।
हम अधिकारियों से पूछना चाहते हैं कि जगतार जैसा
भयानक कैदी जेल से आखिर भागा कैसे? उसे फांसी पर क्यों नहीं चढ़ा दिया गया।
हरिया का पिछले ही साल विवाह हुआ था। उसकी विधवा पत्नी अपनी सूनी मांग और उजड़े सुहाग के साथ यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक जगतार जैसा क्रूर कर्मी अपराधी उस जैसी सुहागनों के सुहाग को छीनता रहेगा। उसकी छ: माह की अनाथ हो गई अबोध बच्ची अपनी आंसू भरी आंखों के साथ अपने उस बाप को ढूढ़ रही है जो उसे अब कभी नहीं मिलेगा।
आखिर कब तक जगतार जैसा खतरनाक अपराधी लोगों का सुख-चैन छीनता रहेगा। उनकी खूबसूरत जिन्दगियों को रौंदकर मौत के घाट उतारता रहेगा?'
आखिर कब तक?
केसरी ने पूरा अखबार पढ़ा और जगत सेठ की ताकत को मन-ही-मन माना कि स्याह को सफेद और सफेद को स्याह कर देना उस आदमी के बाएं हाथ का खेल है।
अभी साधना को साफ बचा ले गया है वह। लेकिन अगर उसने उसके चंगुल से निकलने की कोशिश की तो तस्वीर के दूसरे पहलू का प्रचार करने में भी वह देर नही लगायेगा।
सुपरवाईजर ही उसे अखवार देकर गया है। अखबार देने के साथ वह उसके बारे में कुछ चर्चा भी करना चाहता था। लेकिन उसे टालकर भेज दिया था।
वह खबर पढ़ने बैठ गया था।
साधना हास्पिटल जाने की तैयारी कर रही थी। वह तो रात
को भी वहीं रुकना चाहती थी लेकिन पुलिस वालों ने रुकने नहीं दिया।
दोनों भाई-बहनों में बातचीत लगभग बन्द-सी ही थी। फिर भी अखबार लेकर वह उसके पास गया।
'अगर हास्पिटल न जाओ तो बेहतर है।' केसरी ने उसकी
ओर अखबार बढ़ाते हुए कहा-'अखबारों तक में चर्चे होने लगे हैं।'
'बदनामी से सिर्फ वे ही लोग डरते हैं जिनके दिल में पाप होता है।' साधना ने अखबार को बिना पड़े ही एक ओर रखते हुए कहा।
'नही।' वह दोषपूर्ण स्वर में बोला-'बदनामी से वो लोग डरते हैं जिनमें थोड़ा भला-बुरा सोचने-समझने की बुद्धि होती है।'
लेकिन साधना ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह जाने के लिए उद्यत थी। लेकिन फिर भी न जा सकी। क्योंकि तभी एक जीप वहां आकर रुकी और उसमें से वही पुलिस अधिकारी नीचे उतरा जिसने कल हास्पिटल में साधना को समझाने की कोशिश की थी।
'लगता है मैं सही वक्त पर आया हूं।' साधना को तैयार देखकर वह बोला-'कल ही तुम्हारी बातों से मैंने अन्दावा लगा लिया था कि तुम काफी जिद्दी किस्म की लड़की हो आर
शायद अखबार पढ़ने के बाद भी रुषेगी नहीं। मेरा अनुमान ठीक ही निकला। मैं वैसे इन मंत्र-वंत्र की बातों में विश्वास नहीं रखता। लेकिन तुम्हारी हालत देखकर मुझे भी यकीन होने लगा है कि वाकई उसने तुम पर किसी वशीकरण मंत्र का प्रयोग किया हुआ है। बहरहाल मुझे इन बातों से क्या लेना-देना। लेकिन तुम अब हास्पिटल न जा सकोगी क्योंकि अखबारों में यह सब छपने के बाद खतरा है कि लोग तुम्हें देखने के लिए हास्पिटल के बाहर जमा होना न शुरू हो जाए। पहले ही हमारी दिक्कतें बहुत बढ़ी हुई हैं। अब उन्हें और बढ़ाने की जरूरत नहीं।'
पुलिस के आगे साधना भी मजबूर थी और उसे विवश होकर रुकना ही पड़ा।
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सांप की कोटर।
वह सुबह के इस वक्त जबकि सूरज आसमान पर काफी ऊंचा उठ आया था दीगर के ऊपर लिखे हुए शब्दों को नहीं देख रहा था। बल्कि बरामदे के बाहर खड़ा सामने के पेड़ की एक कोटर को देख रहा था जिसमें से एक काला सांप अपनी चिरी हुई जोमों को लपलपाता हुमा धीरे-धीरे रेंगकर गहर निकल रहा था।
कालिया नाग-पहले यही शब्द उसके मस्तिष्क में उभरे। फिर वह गर्दन को झटका देता हुत्रा मन-ही-मन बोला कालिया नहीं जगन सेठ। नहीं यह नाग जगन सेठ भी नहीं हो सकता। क्योंकि जगन सेठ तौ आदमी के वेष में इससे भी अधिक खतरनाक और जहरीला नाग है। जिसका काटा पानी भी न मांगे।
नाग कोटर से निकनकर पेड़ की डाल पर बन खाता इमा सरककर आंखों से ओझल हो गया। लेकिन यह फिर मी बपने असम्बद्ध विचारों में उलझा रहा।
तभी सुपरवाईजर की आवाज सुनकर चौंका। देखा कि बहु हाथ में अबजार लिए हुए तेजी से उसी की ओर लपका चला रहा था-'कुछ सुना आपने सर? कमाल हो गया। कल रात जगतार हास्पिटल से कालिया की हत्या करके
भाग गया।'
'क्या कहते हो?' वह एकदम चौंककर आश्चर्य मिश्रित स्वर में बोला।
'अखबार देखिए सर, आज की सबसे बड़ी सनसनीखेब
खबर तो यही है।' उसने झपटकर सुपरवाईजर से अखबार ले लिया और पढ़ने लगा। मुख पृष्ठ पर ही छपी थी वह खबर-खतरानक कैदी जगतार पुलिस निगरानी के बावजूद हास्पिटल से भागने में कामयाब।
भागते समय भी वह अपना बदला लेना नहीं चूका। जाते-जाते कालिया की हत्या करता गया।
कल रात लगभग दस बजे अचानक ही हास्पिटल की लाईट चली गई और चारों ओर घष्य अंधेरा छा गया। उस अंधेरे का लाभ उठाकर पुलिस निगरानी से भागने में कामयाब हो गया। जब बत्ती आई जोकि जगतार के ही किसी सहयोगी द्वारा मेन- स्विच बन्द कर दिए जाने के कारण चली गई थी, तो एक नर्स ठेकेदार कालिया के कक्ष में प्रविष्ट हुई और यह देखकर वह चीख पड़ी कि ठेकेदार कालिया की लाश फटी-फटी आंखों से उप घूर रही थी। ठेकेदार के मफलर से हा गला घोंट कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इन पंक्तियों के प्रेस में जाने तक कोई विशेष विवरण प्राप्त नहीं हो सका लेकिन पुलिस का अनुमान है कि यह जगतार का ही काम है।
पाठकों को याद होगा कि इस संवाददाता ने कल ही
अधिकारियों को जगतार के बारे में सावधान |
लेकिन उसने अन्तिम लाईनों को पूरा पढ़ना जरूरी नहीं समझा। वह अखबार लेकर भीतर गया जहां साधना अपनी पूत्रा की तैयारी कर रही थी।
'लो देख लो अपने उस जगतार का नया करिश्मा।' यह
अखबार उसकी ओर बढ़ाता हुआ बोला-'अब वह कालिया की हत्या भी करके भाग गया।'
साधना ने अखबार लेकर एक सरसरी सी नजर सुर्खियों पर डाली और उपेक्षा से उसे एक ओर रख दिया।
'क्यों पूरी खबर पड़ने के की हिम्मत नहीं।' बह बोला-'अब तो आंखें खोलो दीदी और समझो कि उस खूनी और बहशी के लिए आदमी की जान की कोई कीमत नही, वह तुम्हारी पवित्र भावनाओं को क्या कभी समझ पाएगा।'
'मुझे कितनी बार कहना होगा केशो कि मैं उनके बारे में एक
शब्द भी गलत नहीं सुन सकती।'
उसक चेहरा फिर कस गया। पुछ क्षण तक अपलक देखता रहा। फिर बोला
'आखिर तुम्हें क्या हो गया है दीदी?' वह अजीब बिबशता
भरे स्वर में बोला-'एक खतरनाक अपराधी के पीछे तुम अपनी अच्छी-भली जिन्दगी खराब करने पर तुली हुई हो। अब तो मुझे भी इस बात का यकीन हो गया है कि उसने तुम पर किसी वशीकरण मन्त्र का ही प्रयोग किया है। कहो तो किसी ओझा को।'
'हां हां वशीकरण मन्त्र का प्रयोग दिया है उन्होंने मुझ पर।' साधना मानो फ्ट-सी पड़ी-'जानते हो बह वशीकरण मन्त्र है उनका उस रात अपनी जान पर खेल जाना जब कालियाने अपने गुण्डे हम लोगों को मारने केलिए भेजे थे। वह वशीकरण मन्त्र है उनका दो रात पहले उस कालिया से उलझ जाना जो रात के अंधेरे में हमें मारने के लिए खुद आया था। उस दरिन्दे से जूझते हुए वे खद मौत के मुंह में पहुंच गए लेकिन हम लोगों पर कोई आंच नहीं आने दी। वेह वशीकरण मन्त्र उस पापी कालिया को उसके किए की सजा देना जिसने हमारी जिन्दगी हराम कर दी थी। नही तो मुझे बताओ कि उनकी कालिया से अपनी क्या दुश्मनी थी?'
इस बात का कोई जवाब नहीं था उसके पास। उसने नजरें घुमाकर देखा तो सुपरवाइजर के बातें सुनता पाया। उसे अपनी ओर देखता पाकर सुपरवाइजर नाक का चश्मा ठीक करके वहां से सरकता हुआ बोला-अच्छा तो मैं जाकर मजदूरों को देखता हूं सर।'
सुपरवाइजर के पीछे-पीछे वह भी बाहर निकल आया।
दीदी से बहस करने का कोई लाभ नही था।
अचानक उसकी नबर पेड़ के उस कोटर की ओर उठ गई जिसमें से उसने नाग को निकलते हुए देखा था।
पहले रेंगकर नजरों से ओझल हो गया हुआ नाग इस बीच लौट आया था और कोटर के किनारे पर बड़े मजे से फन उठाए धूप सेक रहा था।
उसे लगा जैसे वह नाग नहीं बल्कि खुद जगन सेठ बैठा हुआ उसका मुंह चिढ़ा रहा है। इच्छा हुई कि अभी जाकर इस नाग
का फन कुचलकर मार डाले।
फिर उसने अपने-आपको समझाया कि ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें
सोचने से क्या फायदा? इस नाग को मारने से कोई जगन सेठ थोड़े ही मर जाएगा।
एक दीर्घ निःश्वास के साथ वह धीरे से बड़बड़ाया-'तुम क्या जानो दीदी कि सिर्फ कालिया को मार देने भर से कुछ नहीं होने वाला। और भी न जाने कितने बड़े-बड़े नाग हैं जिन्होंने जिन्दगी में जहर घोल दिया है। तुम्हारा जगतार कितनों को मारेगा?'
सोचते-सोचते उसे लगा कि उसकी आंखें सजल हो आई हैं।
आस्तीन से उन्हें पोंछते हुए उसने महसूस किया कि कितना कमजोर और बेबस हो गया है वह।
जगतार ने अपने भागने का समाचार अखबार में पढ़ा और फिर उसे एक ओर रखते हुए उसने जगन सेठ की ओर
देखकर कहा-'लेकिन यह कालिया बाला किस्सा क्या हुआ? मैंने तो उसे मारा नहीं है।'
उसने बड़ी ही कमजोर सी आवाज में अपने सेक्रेटी से कहा-'वह प्रेस कांफ्रेंस कैंसिल कर दो सेठी। वजह कोई भी बता देना।'
जेल से भागे एक अपराधी द्वारा चंगल के खामोश अंधेरों में
खेला गया रूह को कंप-कंपा देने वाला खूनी खेल।
अखवार की इन सुर्खियों के नीचे छोटे अक्षरों में पूरी खबर इस प्रकार छपी थी-पिछले दिनों जेल से भागकर जगतार नामक एक खतरनाक खुजरिम जंगल में आ छपा। कहा जाता है कि इस मुजरिम की सहायक न केवल कुछ देवी शक्तियां हैं बल्कि इसन एक वशीकरण मंत्र भी सद्ध कया हुआ। यह अजीबो गरीब रक्तरंजित कहानी उसके इस वशीकरण मंत्र से ही सम्बन्धित है।
पिछले दिनों जंगल में एक नए फारेस्ट आफिसर श्री के. सी. केसरी की नियुक्ति हुई। श्री केसरी न केवल एक ईमानदार
और मेहनती अफसर हैं बल्कि एक ऐसे परिवार से सम्बन्धित हैं जिसकी रगों में साहस और तपस्या कूट-कूटकर भरी हुई है। जिसका जीता जागता उदाहरण है उनकी बड़ी बहन कुमारी साधना। त्याग और तपस्या की इस देवी ने बचपन में ही मां बाप के मर जाने के कारण अनाथ हो गए अपने भाई-बहनों की जिम्मेदारी जिस साहस के साथ सम्भाल कर उन्हें पढ़ा लिखा कर शिक्षित किया इसकी मिसाल कहा और मिलनी मुश्किल है।
उस देवी की सुशीलता और सच्चरित्रता की कसमें खाई जाती
था।
किन्तु यहां आते ही अनहोनी हो गई। उस देवी की सुन्दरता पर जगतार की कुटिल दृष्टि पड़ी और उसने कुमारी साधना के धवल यश रूपी चन्द्रमा को राहु की तरह ग्रस लिया।
अपने सिद्ध वशीकरण मंत्र का प्रयोग करके उसने उस देवी की ऐसी बुद्धि हरी कि वह दीन दुनिया भूलकर उसी की दीवानी हो गई। यह बात जब फारेस्ट आफिसर केसरी को मालूम हुई तो एक भाई होने के नाते अपनीवहन की वह हालात देखकर चिन्तित हुए। जो कि स्वाभाविक भी था। बहन को समझाने की कोतिश की लेकिन बेसुद। क्योंकि वह बेचारी तो वशीकरण मंत्र के प्रभाव में होने के कारण कुछ भी सोचने समझने से लाचार थी।
श्री केसरी पुलिस में भी इस रिपोर्ट को दर्ज नहीं कराना चाहते थे। क्योंकि इसमें बदनामी का डर था और एक शरीफ भाई भला अपनी बहन की बदनामी कैसे बर्दाश्त कर सकता था।
आखिर उन्होंने अपने मित्र कालिया से जो कि जंगल के ठेकेदार भी हैं, अपनी परेशानी का जिक्र किया।श्री कालिया ने बातचीत द्वारा मामले को सुलझाने के उद्देश्य से जगतार से मिलने का निश्चय किया।
चूंकि जगतार एक फरार मुजरिम था इलिए वह दिन में मिलने का खतरा तो मोल नही बे सकता था। इसलिए रात में मिलना निश्चित हुआ। निश्चित समय पर थी कालिया अपने छोटे भाई हरिया के साथ जगतार से मिलने के लिए जंगल में गए। उन्होंने जगतार
को प्रेमपूर्वक समझाने की कोशिश की कि वह उस देवी का पीछा छोड़ दे और उसे अपने वशीकरण मंत्र से मुक्त कर दें। बदले में जितना भी धन वह चाहता है वे देने के लिए तयार
लेकिन उस काम लोलुप कुटिल कामी जगतार के कानों पर जूं तक न रेंगी।
जब श्री कालिया ने उस पर किसी भी तरह की बातचीत और अनुनय-विनय का असर होते न देरवा तो उसे डराने के लिए धमकी दी कि अगर वह जंगल छोड़कर नहीं गया तो वे उसके बारे में पुलिस को सूचना दे देंगे। बस इतना सुनते ही वह नरपिशाच इतना उत्तेजित हुआ कि उसने वही श्री कालिया के छोटे भाई हरिया की हत्या कर दी
और श्री कालिया को भी बुरी तरह घायल कर दिया। श्री केसरी ने बीच बचाव किया जिसमें जगतार भी कुछ घायल हुआ।
दोनों का इलाज शहर के अस्पताल में हो रहा है जहां श्री
कालिया की जिन्दगी और मौत के बीच एक गहरी कशमकश चख रही है।
हम अधिकारियों से पूछना चाहते हैं कि जगतार जैसा
भयानक कैदी जेल से आखिर भागा कैसे? उसे फांसी पर क्यों नहीं चढ़ा दिया गया।
हरिया का पिछले ही साल विवाह हुआ था। उसकी विधवा पत्नी अपनी सूनी मांग और उजड़े सुहाग के साथ यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक जगतार जैसा क्रूर कर्मी अपराधी उस जैसी सुहागनों के सुहाग को छीनता रहेगा। उसकी छ: माह की अनाथ हो गई अबोध बच्ची अपनी आंसू भरी आंखों के साथ अपने उस बाप को ढूढ़ रही है जो उसे अब कभी नहीं मिलेगा।
आखिर कब तक जगतार जैसा खतरनाक अपराधी लोगों का सुख-चैन छीनता रहेगा। उनकी खूबसूरत जिन्दगियों को रौंदकर मौत के घाट उतारता रहेगा?'
आखिर कब तक?
केसरी ने पूरा अखबार पढ़ा और जगत सेठ की ताकत को मन-ही-मन माना कि स्याह को सफेद और सफेद को स्याह कर देना उस आदमी के बाएं हाथ का खेल है।
अभी साधना को साफ बचा ले गया है वह। लेकिन अगर उसने उसके चंगुल से निकलने की कोशिश की तो तस्वीर के दूसरे पहलू का प्रचार करने में भी वह देर नही लगायेगा।
सुपरवाईजर ही उसे अखवार देकर गया है। अखबार देने के साथ वह उसके बारे में कुछ चर्चा भी करना चाहता था। लेकिन उसे टालकर भेज दिया था।
वह खबर पढ़ने बैठ गया था।
साधना हास्पिटल जाने की तैयारी कर रही थी। वह तो रात
को भी वहीं रुकना चाहती थी लेकिन पुलिस वालों ने रुकने नहीं दिया।
दोनों भाई-बहनों में बातचीत लगभग बन्द-सी ही थी। फिर भी अखबार लेकर वह उसके पास गया।
'अगर हास्पिटल न जाओ तो बेहतर है।' केसरी ने उसकी
ओर अखबार बढ़ाते हुए कहा-'अखबारों तक में चर्चे होने लगे हैं।'
'बदनामी से सिर्फ वे ही लोग डरते हैं जिनके दिल में पाप होता है।' साधना ने अखबार को बिना पड़े ही एक ओर रखते हुए कहा।
'नही।' वह दोषपूर्ण स्वर में बोला-'बदनामी से वो लोग डरते हैं जिनमें थोड़ा भला-बुरा सोचने-समझने की बुद्धि होती है।'
लेकिन साधना ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह जाने के लिए उद्यत थी। लेकिन फिर भी न जा सकी। क्योंकि तभी एक जीप वहां आकर रुकी और उसमें से वही पुलिस अधिकारी नीचे उतरा जिसने कल हास्पिटल में साधना को समझाने की कोशिश की थी।
'लगता है मैं सही वक्त पर आया हूं।' साधना को तैयार देखकर वह बोला-'कल ही तुम्हारी बातों से मैंने अन्दावा लगा लिया था कि तुम काफी जिद्दी किस्म की लड़की हो आर
शायद अखबार पढ़ने के बाद भी रुषेगी नहीं। मेरा अनुमान ठीक ही निकला। मैं वैसे इन मंत्र-वंत्र की बातों में विश्वास नहीं रखता। लेकिन तुम्हारी हालत देखकर मुझे भी यकीन होने लगा है कि वाकई उसने तुम पर किसी वशीकरण मंत्र का प्रयोग किया हुआ है। बहरहाल मुझे इन बातों से क्या लेना-देना। लेकिन तुम अब हास्पिटल न जा सकोगी क्योंकि अखबारों में यह सब छपने के बाद खतरा है कि लोग तुम्हें देखने के लिए हास्पिटल के बाहर जमा होना न शुरू हो जाए। पहले ही हमारी दिक्कतें बहुत बढ़ी हुई हैं। अब उन्हें और बढ़ाने की जरूरत नहीं।'
पुलिस के आगे साधना भी मजबूर थी और उसे विवश होकर रुकना ही पड़ा।
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सांप की कोटर।
वह सुबह के इस वक्त जबकि सूरज आसमान पर काफी ऊंचा उठ आया था दीगर के ऊपर लिखे हुए शब्दों को नहीं देख रहा था। बल्कि बरामदे के बाहर खड़ा सामने के पेड़ की एक कोटर को देख रहा था जिसमें से एक काला सांप अपनी चिरी हुई जोमों को लपलपाता हुमा धीरे-धीरे रेंगकर गहर निकल रहा था।
कालिया नाग-पहले यही शब्द उसके मस्तिष्क में उभरे। फिर वह गर्दन को झटका देता हुत्रा मन-ही-मन बोला कालिया नहीं जगन सेठ। नहीं यह नाग जगन सेठ भी नहीं हो सकता। क्योंकि जगन सेठ तौ आदमी के वेष में इससे भी अधिक खतरनाक और जहरीला नाग है। जिसका काटा पानी भी न मांगे।
नाग कोटर से निकनकर पेड़ की डाल पर बन खाता इमा सरककर आंखों से ओझल हो गया। लेकिन यह फिर मी बपने असम्बद्ध विचारों में उलझा रहा।
तभी सुपरवाईजर की आवाज सुनकर चौंका। देखा कि बहु हाथ में अबजार लिए हुए तेजी से उसी की ओर लपका चला रहा था-'कुछ सुना आपने सर? कमाल हो गया। कल रात जगतार हास्पिटल से कालिया की हत्या करके
भाग गया।'
'क्या कहते हो?' वह एकदम चौंककर आश्चर्य मिश्रित स्वर में बोला।
'अखबार देखिए सर, आज की सबसे बड़ी सनसनीखेब
खबर तो यही है।' उसने झपटकर सुपरवाईजर से अखबार ले लिया और पढ़ने लगा। मुख पृष्ठ पर ही छपी थी वह खबर-खतरानक कैदी जगतार पुलिस निगरानी के बावजूद हास्पिटल से भागने में कामयाब।
भागते समय भी वह अपना बदला लेना नहीं चूका। जाते-जाते कालिया की हत्या करता गया।
कल रात लगभग दस बजे अचानक ही हास्पिटल की लाईट चली गई और चारों ओर घष्य अंधेरा छा गया। उस अंधेरे का लाभ उठाकर पुलिस निगरानी से भागने में कामयाब हो गया। जब बत्ती आई जोकि जगतार के ही किसी सहयोगी द्वारा मेन- स्विच बन्द कर दिए जाने के कारण चली गई थी, तो एक नर्स ठेकेदार कालिया के कक्ष में प्रविष्ट हुई और यह देखकर वह चीख पड़ी कि ठेकेदार कालिया की लाश फटी-फटी आंखों से उप घूर रही थी। ठेकेदार के मफलर से हा गला घोंट कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इन पंक्तियों के प्रेस में जाने तक कोई विशेष विवरण प्राप्त नहीं हो सका लेकिन पुलिस का अनुमान है कि यह जगतार का ही काम है।
पाठकों को याद होगा कि इस संवाददाता ने कल ही
अधिकारियों को जगतार के बारे में सावधान |
लेकिन उसने अन्तिम लाईनों को पूरा पढ़ना जरूरी नहीं समझा। वह अखबार लेकर भीतर गया जहां साधना अपनी पूत्रा की तैयारी कर रही थी।
'लो देख लो अपने उस जगतार का नया करिश्मा।' यह
अखबार उसकी ओर बढ़ाता हुआ बोला-'अब वह कालिया की हत्या भी करके भाग गया।'
साधना ने अखबार लेकर एक सरसरी सी नजर सुर्खियों पर डाली और उपेक्षा से उसे एक ओर रख दिया।
'क्यों पूरी खबर पड़ने के की हिम्मत नहीं।' बह बोला-'अब तो आंखें खोलो दीदी और समझो कि उस खूनी और बहशी के लिए आदमी की जान की कोई कीमत नही, वह तुम्हारी पवित्र भावनाओं को क्या कभी समझ पाएगा।'
'मुझे कितनी बार कहना होगा केशो कि मैं उनके बारे में एक
शब्द भी गलत नहीं सुन सकती।'
उसक चेहरा फिर कस गया। पुछ क्षण तक अपलक देखता रहा। फिर बोला
'आखिर तुम्हें क्या हो गया है दीदी?' वह अजीब बिबशता
भरे स्वर में बोला-'एक खतरनाक अपराधी के पीछे तुम अपनी अच्छी-भली जिन्दगी खराब करने पर तुली हुई हो। अब तो मुझे भी इस बात का यकीन हो गया है कि उसने तुम पर किसी वशीकरण मन्त्र का ही प्रयोग किया है। कहो तो किसी ओझा को।'
'हां हां वशीकरण मन्त्र का प्रयोग दिया है उन्होंने मुझ पर।' साधना मानो फ्ट-सी पड़ी-'जानते हो बह वशीकरण मन्त्र है उनका उस रात अपनी जान पर खेल जाना जब कालियाने अपने गुण्डे हम लोगों को मारने केलिए भेजे थे। वह वशीकरण मन्त्र है उनका दो रात पहले उस कालिया से उलझ जाना जो रात के अंधेरे में हमें मारने के लिए खुद आया था। उस दरिन्दे से जूझते हुए वे खद मौत के मुंह में पहुंच गए लेकिन हम लोगों पर कोई आंच नहीं आने दी। वेह वशीकरण मन्त्र उस पापी कालिया को उसके किए की सजा देना जिसने हमारी जिन्दगी हराम कर दी थी। नही तो मुझे बताओ कि उनकी कालिया से अपनी क्या दुश्मनी थी?'
इस बात का कोई जवाब नहीं था उसके पास। उसने नजरें घुमाकर देखा तो सुपरवाइजर के बातें सुनता पाया। उसे अपनी ओर देखता पाकर सुपरवाइजर नाक का चश्मा ठीक करके वहां से सरकता हुआ बोला-अच्छा तो मैं जाकर मजदूरों को देखता हूं सर।'
सुपरवाइजर के पीछे-पीछे वह भी बाहर निकल आया।
दीदी से बहस करने का कोई लाभ नही था।
अचानक उसकी नबर पेड़ के उस कोटर की ओर उठ गई जिसमें से उसने नाग को निकलते हुए देखा था।
पहले रेंगकर नजरों से ओझल हो गया हुआ नाग इस बीच लौट आया था और कोटर के किनारे पर बड़े मजे से फन उठाए धूप सेक रहा था।
उसे लगा जैसे वह नाग नहीं बल्कि खुद जगन सेठ बैठा हुआ उसका मुंह चिढ़ा रहा है। इच्छा हुई कि अभी जाकर इस नाग
का फन कुचलकर मार डाले।
फिर उसने अपने-आपको समझाया कि ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें
सोचने से क्या फायदा? इस नाग को मारने से कोई जगन सेठ थोड़े ही मर जाएगा।
एक दीर्घ निःश्वास के साथ वह धीरे से बड़बड़ाया-'तुम क्या जानो दीदी कि सिर्फ कालिया को मार देने भर से कुछ नहीं होने वाला। और भी न जाने कितने बड़े-बड़े नाग हैं जिन्होंने जिन्दगी में जहर घोल दिया है। तुम्हारा जगतार कितनों को मारेगा?'
सोचते-सोचते उसे लगा कि उसकी आंखें सजल हो आई हैं।
आस्तीन से उन्हें पोंछते हुए उसने महसूस किया कि कितना कमजोर और बेबस हो गया है वह।
जगतार ने अपने भागने का समाचार अखबार में पढ़ा और फिर उसे एक ओर रखते हुए उसने जगन सेठ की ओर
देखकर कहा-'लेकिन यह कालिया बाला किस्सा क्या हुआ? मैंने तो उसे मारा नहीं है।'