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बहुरानी की प्रेम कहानी complete

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आई पापा!’ वो बोली और मेरे सामने आ खड़ी हुई।‘देखो बेटा, जरा अभिनव को फोन तो लगा और बुला उसे, कुछ काम है उससे; वो कल रातभर से बगल वाले मिश्रा जी के यहाँ और रिश्तेदारों के साथ सो रहा है।’

मैंने ‘रात भर’ शब्द थोड़ा जोर देकर बोला।

मेरी बात सुनते ही अदिति बहू रानी के चेहरे का रंग उड़ गया और अब वो चिंतित और घबराई सी लगने लगी।‘अभी बुलाती हूँ।’ वो बोली और तेज तेज क़दमों से चलती हुई दूसरे कमरे में चली गई।

मेरा उद्देश्य पूरा हो गया था। देर सवेर तो उसे यह बात पता चलना ही थी कि उसका पति रात को कहीं और सो रहा था। फिर यह समझने में उसे क्या देर लगती कि वो कल रात किसी और से ही चुद गई है।

मैं दोपहर लंच तक उस पर निगाह रखता रहा, बहूरानी के चेहरे पर भय, चिन्ता और घबराहट स्पष्ट झलक रही थी, उसकी मनःस्थिति को मैं अच्छे से समझ रहा था, उसे सिर्फ यही चिन्ता सताये जा रही होगी कि इतने सारे रिश्तेदारों में वो कौन था जिससे वो कल रात चुदी थी।अब उसे यही डर हमेशा सताता रहेगा कि ज़िन्दगी के किस मोड़ पर कोई उसे उस रात की चुदाई याद दिला देगा और कहेगा कि उस रात तेरे साथ वो सब करने वाला मैं ही था।वो तो यह सुन कर जीते जी मर जायेगी।

बहूरानी की ऐसी दशा देखना मेरे लिए भी असह्य हो चला था, अगर उसके यह चिन्ता दूर न हुई तो यह तनाव उसका सुख चैन छीन के उसके जीवन में जहर सा भर देगा।

ये सब बातें विचार करके मैंने अदिति को सब कुछ बताने का निश्चय कर लिया।गलती न मेरी थी न उसकी… जो हुआ वो परिस्थितिवश ही हुआ!यही सब बातें मैंने उसे बताने समझाने का सोच लिया।

लंच के बाद सभी लोग आराम के मूड में आ गये और यहाँ वहाँ लुढ़क गये। फिर मैं भी अपने कमरे में चला गया, वहाँ और कोई भी नहीं था, मैंने मौका ठीक समझ अदिति को अपने पास बुलाया।

वो डरी हुई सी मुद्रा में मेरे सामने आ खड़ी हुई।

‘क्या बात है बेटा, तुम सुबह से ही परेशान और किसी गहरी चिन्ता में दिख रही हो. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है न?’ मैंने बड़े प्यार से उससे पूछा।‘जी, पापा जी, ऐसी कोई बात नहीं, मैं ठीक हूँ, बस थोड़ी थकावट सी है और कोई बात नहीं!’ उसने बात को टालने की तरह जवाब दिया।

‘देखो बेटा, घबराओ मत, तुम्हारी चिन्ता का कारण मुझे पता है, तुम किसी भी बात की चिन्ता फिकर मत करो।’‘कौन सी चिन्ता पापा? मुझे कोई टेंशन नहीं है!’देखो, घबराओ मत, तुम्हारी चिन्ता का कारण मुझे पता है, तुम किसी भी बात की चिन्ता फिकर मत करो।’‘कौन सी चिन्ता पापा? मुझे कोई टेंशन नहीं है!’

‘देखो अदिति बेटा, मुझे सब पता है कि तुझे किस बात का टेंशन है, अब मैं इस बात को कैसे कहूँ… देखो, ध्यान से सुनना बेटा! गलती न तुम्हारी थी न मेरी… वो सब आकस्मिक ही हुआ, कल रात मैंने अपना बिस्तर ऊपर सामान वाली कोठरी में लगा लिया था और मैंजैसे रोज सोता हूँ वैसे ही निर्वस्त्र सो रहा था। अब मुझे क्या पता था कि कोई आधी रात के बाद वहाँ आ जाएगा।’

मेरी बात सुनते ही अदिति ने सर झुका लिया।

‘और फिर मैंने कितना प्रयास किया था उन सब बातों से बचने का… लेकिन तू तो पूरी निर्वस्त्र होकर मुझसे लिपटी जा रही थी और तो और मेरा लिंग भी तूने अपने मुंह में भर के चूसा और न जाने क्या क्या…’ मैंने जानबूझ कर अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

‘पापा जी, सारी की सारी गलती मेरी ही थी, मेरा ही दिमाग ख़राब हो गया था, अभिनव ने ही मुझे वहाँ ऊपर वाले कमरे में बुलाया था लेकिन वो खुद यहाँ सबके साथ पार्टी करता रहा ऊपर गया ही नहीं! मैं उससे मिलने को बहुत उतावली और बेचैन थी इसलिए अभिनव के धोखे में आपसे लिपट गई और तरह तरह से रिझाने मनाने लगी, मैं समझी थी कि मेरे इंतज़ार में अभिनव लेटा है, मुझे माफ़ कर दीजिये!’

‘लेकिन अदिति बेटा, कम से कम तुम्हें अपने पति और दूसरे आदमी में फर्क तो पहचानना चाहिए था?’

‘पापाजी, शुरू शुरू में तो मुझे आपमें और अभिनव में मुझे कोई फर्क नहीं लगा, पर जब मैंने आपका वो अंग पकड़ा तो मुझे लगा कि यह तो अभिनव के अंग से बहुत मोटा और लम्बा है लेकिन मैंने अपनी उत्तेजना में इसे भी अपना वहम समझा और फिर जब आप मुझमें समा गये थे तब भी मुझे लगा कि यह कोई और आदमी है। फिर उस स्टेज पर मैं क्या कर सकती थी तो जो हो रहा था वो होने दिया।’‘फिर जब सुबह मैं सोकर उठी तो अकेली थी, अगर रात अभिनव मेरे साथ होता तो वो तब तक सो रहा होता क्योंकि वो काफी देर तक सोता है। मैं समझ गई थी कि मैं छली जा चुकी हूँ और तभी से चिन्ता में थी पता नहीं वो कौन था जिसे अनजाने में ही मैंने अपना तन सौंप दिया था। आपने अच्छा किया जो मुझे हकीकत बता दी, नहीं तो मैं पता नहीं क्या करती!’

‘पापा जी, भगवान् जी गवाह हैं कि इसके पहले अभिनव के सिवा किसी और ने मुझे गलत नीयत से छुआ भी नहीं था। मैंने अपना कौमार्य भी सुहागरात को अभिनव को ही समर्पित किया था। पापा जी, मैं यकीन करो, मैं ऐसी वैसी बिल्कुल नहीं हूँ, आपने तो बहुत कोशिश की थी कि गलत काम न करो मेरे साथ लेकिन मेरी ही मति मारी गई थी; मैं आपको तरह तरह से उत्तेजित कर रही थी फिर आप भी कहाँ तक खुद पर काबू रख सकते थे।’

कहानी जारी रहेगी

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‘पापा जी, भगवान् जी गवाह हैं कि इसके पहले अभिनव के सिवा किसी और ने मुझे गलत नीयत से छुआ भी नहीं था। मैंने अपना कौमार्य भी सुहागरात को अभिनव को ही समर्पित किया था। पापा जी, मैं यकीन करो, मैं ऐसी वैसी बिल्कुल नहीं हूँ, आपने तो बहुत कोशिश की थी कि गलत काम न करो मेरे साथ लेकिन मेरी ही मति मारी गई थी; मैं आपको तरह तरह से उत्तेजित कर रही थी फिर आप भी कहाँ तक खुद पर काबू रख सकते थे।’

अदिति रुआंसी होकर बोली और मेरे कदमों में सर झुका कर रोने लगी।और जल्दी ही उसका रोना थोड़ा तेज हो गया।

रोने की आवाज सुन के कोई भी आ सकता था, ‘अदिति बेटा, कोई बात नहीं, चल भूल जा उस बात को!’ मैंने उसे सांत्वना दी लेकिन उसकी रुलाई रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।फिर मैंने अदिति को पकड़ के उठाया और अपने से लगा कर उसकी पीठ सहलाते हुए उसे सांत्वना देने लगा। मेरे आत्मीय आलिंगन की अनुभूति कर अदिति का रोना और तेज हो गया जैसे कि बच्चों में होता ही है।

‘अब जल्दी से चुप हो जा, देख मेहमानों से भरा घर है, कोई भी तेरे रोने की आवाज सुन के कभी भी यहाँ आ सकता है।’ मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसे सांत्वना दी।

मेरी बात सुन के अदिति ने खुद पर कंट्रोल किया और उसका सुबकना कम हो गया लेकिन वो मेरे आलिंगन में बंधी रही।मैंने प्यार से उसके आंसू अपने रुमाल से पौंछ दिए और उसे फिर से कलेजे से लगा लिया और उसकी पीठ और सर पर आहिस्ता आहिस्ता दुलारते हुए उसे शान्त करने लगा, वो भी मेरी छाती में सिर छुपाये चुप बंधी रही मुझसे!समय जैसे थम सा गया और दो जिस्म जैसे आपस में बातें करने लगे।

सांसारिक रिश्तों के बंधनों से अलग स्त्री-पुरुष, नर-मादा जिस्मों का मिलन अपनी ही रागिनी छेड़ देता है, प्रकृति के अपने स्वतंत्र नियम हैं, युवा भाई बहन, पिता पुत्री इत्यादि को इसीलिए एकान्त में एक साथ रहने, सोने को मना किया गया है। उत्तरी दक्षिणी ध्रुवों में परस्पर खिंचाव होता ही एक दूजे में समा जाने के लिए…

हमारे बीच भी वही हुआ, मेरे स्नेह प्यार का बंधन, आलिंगन बहुत जल्दी काम-पाश में बदलने लगा और अब मेरे बाहुपाश में जकड़ी हुई एक भरपूर जवान नारी देह थी जिसे मैंने कल रात पूर्ण नग्न रूप में भोगा था।

बहूरानी अदिति के जिस्म की उष्णता, उसके गुदाज भरे भरे स्तनों का वो मादक स्पर्श मुझमें वासना की आग भरने लगा जिसके प्रत्युत्तर में मेरे लंड ने फुंफकार कर बहूरानी के जिस्म में टोहका लगा कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी।जिसके जवाब में मुझे लगा कि जैसे अदिति ने अपना बदन मेरे और नजदीक ला दिया हो!आखिर अब तो वो जान ही गई थी पिछली रात वो मुझसे ही चुदी थी और उसका तन मन भी जरूर उसी सुख की लालसा फिर से करने लगा होगा।

हालांकि मेरे भीतर से आत्मा का एक क्षीण सा प्रतिवाद उठा, मेरे संस्कारों ने मुझे झिंझोड़ा, चेताया कि यह पाप मार्ग है, अब भी संभल जा लेकिन मन ने अपना ही तर्क दिया कि जब एक बार चोद लिया या चोदना पड़ा तो अब क्या आदर्शवादी बने रहना?

और मैं चाह कर भी अदिति को अपने बाहुपाश से मुक्त न कर सका और न अदिति ही मुझसे छूटने का कोई प्रयास कर रही थी जबकि मेरा खड़ा लंड उसके पेट पर दस्तक दे ही रहा था और यह भी संभव नहीं था कि वो लंड के स्पर्श से अनजान रही हो!

‘अदिति बेटा तू बहुत अच्छी है!’ मैंने कहा और उसका गाल चूम लिया।
 
‘अदिति बेटा तू बहुत अच्छी है!’ मैंने कहा और उसका गाल चूम लिया।

‘अच्छा? वो कैसे पापा जी?’ वो मेरी आँखों में आँखें डाल के बोली और उसकी बाहें मेरे इर्द गिर्द और कस गईं।‘बताऊंगा, पहले यह बता कि जो रिश्ता कल अनजाने में बन गया उसमें तुझे कुछ आनन्द आया था या नहीं?’‘कैसे बताऊँ पापाजी, वैसा स्वर्गिक सुख मुझे कभी नहीं मिला! मेरा तन मुझे इतना आनन्द भी दे सकता है मैंने कभी कल्पना ही नहीं की थी इसकी!’ वो आँखें झुका कर धीमे से बोली।

‘तो फिर वही रिश्ता हमारे बीच फिर से बन सकता है न?’‘मैं क्या बोलूं पापा जी? कल तो गलती से गलती हो गई मेरे से लेकिन बहुत रिस्क है इसमें! कभी बात खुल गई तो मैं मर ही जाऊँगी।’

‘सिर्फ एक बार और मिल ले बेटा, दो तीन दिन बाद तो अभिनव की छुट्टियाँ ख़त्म हो जायेंगी फिर तू उसके साथ चली ही जायेगी न!’

‘पापा जी अब मैं आपको मना भी कैसे कर सकती हूँ आपको उस काम के लिए, जैसे आप चाहो!’ वो सर झुका कर धीमे स्वर में बोली।‘थैंक यू बेटा!’ मैंने कहा और फिर से बहूरानी को चूम लिया।

‘पापा जी, अब बताओ मैं कैसे अच्छी लगी थी आपको?’ अब वो थोड़ा इठला कर बोली।‘मेरे कहने का मतलब था तेरा वो नया रूप जो कल मैंने देखा, कितनी सजीली रसीली, मस्त मदमस्त है तू!’ मैंने कहा और उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी ब्रा का हुक छेड़ने लगा।

‘हुंम्म, ऐसा क्या नया लगा मुझमें जो मम्मी जी में नहीं है?’ वो मेरे सीने में अपना मुंह छिपाकर बोली।‘तेरा ये जवान जिस्म ये भरे भरे बूब्स और…’ मैंने कहा और एक हाथ उसके ब्लाउज में घुसा कर दूध को मुट्ठी में भर लिया।‘और क्या पापा जी?’‘और तेरी ये…’ मैंने वाक्य को अधूरा छोड़ कर साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया।‘ये क्या?’‘तुम्हारी प्यारी रसीली कसी हुई टाइट चूत!’ मैं उसके कान में फुसफुसाया।

‘धत्त…. कैसे गन्दे शब्द बोलते हो आप? मुझे जाने दो अब!’ वो बोली और मुझसे छूटने का उपक्रम करने लगी।लेकिन मैंने उसे जोर से चिपटा लिया और उसके होठों पर होंठ रख दिए।

उसने कुछ देर अपने होंठ मुझे चूसने दिए फिर छिटक कर अलग हो गई- कोई आ जाएगा पापा जी, मैं जाती हूँ, आप आज रात को भी वहीं छत पर कोठरी में ही सोना!’ वो कहती हुई भाग गई।

मेरा मन अब प्रफुल्लित हो गया था और सारी चिन्ताएं मिट गईं थी।दोपहर के तीन बजने वाले थे, पिछली रात सो न पाने की वजह से एक नींद लेने का मन कर रहा था।

सो कर उठा तो टाइम पांच से ऊपर ही हो गया था, अब मन में अजीब सी उमंग और युवाओं जैसा उत्साह और जोश रगों में ठाठें मार रहा था।वाशरूम में जाकर अपनी झांटें कैंची से कुतर दीं, झांटों के ठूंठ चूत के दाने से रगड़ कर संगिनी को एक अलग ही आनन्द देते हैं और मैं वही मज़ा अपनी बहूरानी की चूत को देना चाहता था।

और फिर अच्छे से नहा धोकर तैयार हो गया।

शाम घिरने लगी थी तो मैं मेहमानों के चाय पानी, डिनर का इंतजाम करने में व्यस्त हो गया। इसी बीच ऊपर जाकर कोठरी में एक बार झाँकने का मन हुआ। फिर ध्यान आया कि वहाँ का बल्ब तो कब का फ्यूज है; कुछ सोच कर मन ही मन मुस्कुराया और एक तेज रोशनी वाला नया एल ई डी बल्ब ले जाकर वहाँ लगा दिया।

कोठरी तेज रोशनी में नहा गई।

देखा तो चकित रह गया, कोई आकर वहाँ की साफ़ सफाई कर गया था, तीन मोटे मोटे गद्दे का बिस्तर बिछा था जिस पर धुली हुई बेडशीट बिछी थी और तीन चार मोटे मोटे तकिये और एक सफ़ेद नेपकिन भी बिस्तर पर पड़ा था।

यह सब देख मैं मन ही मन मुस्कुराया कि कितनी सुघड़ और चतुर है मेरी बहूरानी!

अँधेरा घिरते ही अभिनव एंड पार्टी ने कल वाला बियर और ड्रिंक्स का दौर शुरू कर दिया, मैंने भी कोई टोका टाकी करना मुनासिब नहीं समझा, मेरे लिए तो ये और भी अच्छी बात थी कि अब बेटे की तरफ से भी कोई चिन्ता नहीं रहेगी।

सबका खाना पीना होते होते टाइम ग्यारह से ऊपर का ही हो गया। अभिनव एंड पार्टी कल रात की ही तरह मिश्रा जी के यहाँ शिफ्ट हो गई और बाकी मेहमान भी कल ही की तरह एडजस्ट हो गये।

मेरी आँखें अदिति को खोज रहीं थीं लेकिन पट्ठी कहीं नज़र ही नहीं आई।

मैंने भी अपनी ऊपर वाली कोठरी की राह ली और जा कर लेट गया।‘अदिति आयेगी?’ यह प्रश्न मन में उठा साथ में मैंने अपनी चड्डी में हाथ घुसा के लंड को सहलाया।

कहानी जारी रहेगी।
 
टाइम ग्यारह से ज्यादा हो गया, मैं ऊपर वाली कोठरी में जाकर लेट गया।‘अदिति आएगी?’ यह प्रश्न मन में उठा, साथ में मैंने अपनी चड्डी में हाथ घुसा कर लंड को सहलाया।

‘जरूर आयेगी… जब उसे कल की चुदाई बार बार याद आयेगी और उसकी चूत में सुरसुरी उठेगी तो आना ही पड़ेगा!’ मेरे मन ने जैसे मुझे जवाब दिया।

‘वो घर की बहू है, उसे भी तो तमाम जिम्मेवारियाँ निभानी हैं, उसके मायके से भी कितनी लेडीज आई हुईं हैं, सबको एंटरटेन करना पड़ रहा होगा।’ यही सब सोचते सोचते मैं सोने की कोशिश करने लगा।

पर नींद कहाँ, आ भी कैसे सकती थी!यूं ही ऊंघते ऊँघते पता नहीं कितनी देर बीत गई, फिर किसी की धीमी पदचाप सुनाई दी, दरवाजा धीरे से खुला कोई भीतर घुसा और दरवाजा बंद कर दिया।

उस नीम अँधेरे में मैंने अदिति को उसके जिस्म से उठती परफ्यूम की सुगंध से पहचाना! हाँ वही थी!वो चुपके से आकर मेरे बगल में लेट गई।

‘पापा जी. सो गये क्या?’ वो धीमे से फुसफुसाई।‘नहीं, बेटा. तुम्हारा ही इंतज़ार था!’ मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपने से सटा लिया।‘मेरा इंतज़ार क्यूँ? मैंने यहाँ आने को थोड़े ही बोला था।’ बहू रानी मेरे बालों में उँगलियों से कंघी करती हुई बोली।‘फिर भी मुझे पता था कि तुम आओगी, आईं या नहीं?’ कहते हुए मैंने उसके दोनों गाल बारी बारी से चूम लिए।

‘पापाजी, वो तो नीचे सोने की जगह ही कहीं नहीं मिली तो आ गई!’ वो बोली और मेरी बांह में चिकोटी काटी।बदले में मैंने उसके दोनों मम्मे दबोच लिए और उसके होंठों का रस पीने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी और चुम्बनों का दौर चल पड़ा।

कभी मेरी जीभ उसके मुंह में कभी उसकी मेरे मुंह में… कितना सरस… कितना मीठा मुंह था बहूरानी का! बताना मुश्किल है।‘अदिति बेटा!’‘हाँ पापा जी!’‘आज मैं तुझे जी भर के प्यार करना चाहता हूँ।’‘तो कर लीजिये न अपनी मनमानी, मैं रोकूंगी थोड़े ही!’

‘मैं लाइट जलाता हूँ, पहले तो तेरा हुस्न जी भर के देखूंगा!’‘नहीं पापा जी, लाइट नहीं. कल की तरह अँधेरे में ही करो।’

‘मान जा न… मैं तुझे जी भर के देखना चाहता हूँ आज!’‘नहीं, पापा जी, मैं अपना बदन कैसे दिखाऊं आपको? बहुत शर्म आ रही है।’

वो मना करती रही लेकिन मैं नहीं माना और उठ कर बत्ती जला दी, तेज रोशनी कोठरी में फैल गई और बहूरानी अपने घुटने मोड़ के सर झुका के लाज की गठरी बन गई।मैं उसके बगल में लेट गया और उसे अपनी ओर खींच लिया वो लुढ़क कर मेरे सीने से आ लगी।

बहूरानी ने कपड़े बदल लिए थे और अब वो सलवार कुर्ता पहने हुए थी और मम्मों पर दुपट्टा पड़ा हुआ था।

सबसे पहले मैंने उसका दुपट्टा उससे अलग किया, उसकी गहरी क्लीवेज यानि वक्ष रेखा नुमायां हो गई। गोरे गोरे गदराये उरोजों का मिलन स्थल कैसी रमणीक घाटी के जैसा नजारा पेश करता है।मैंने बरबस ही अपना मुंह वहाँ छिपा लिया और दोनों कपोतों को चूमने लगा, उन्हें धीरे धीरे दबाने मसलने लगा, भीतर हाथ घुसा कर स्तनों की घुण्डी चुटकी में मसलने लगा।

ऐसे करते ही बहूरानी की साँसें भारी हो गईं।

फिर उसके बदन को बाहों में भर कर मैं उस पर चढ़ गया उसके चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर दी। उसने आंखें खोल कर एक बार मेरी तरफ देखा फिर लाज से उसका मुख लाल पड़ गया। गले को चूमते ही उसने अपनी बाहें मेरे गले में पिरो दीं और होंठ से होंठ मिला दिए।

बहूरानी का नंगा जिस्म

फिर मैं बहूरानी को कुर्ता उतारने को मनाने लगा, बड़ी मुश्किल से उसने मुझे कुर्ता उतारने दिया।कुर्ता के उतरते ही मैंने उसकी सलवार का नाड़ा एक झटके में खोल दिया और उसे भी खींच के एक तरफ फेंक दिया। ऐसा करते ही बहू रानी ने अपना मुंह हथेलियों से छिपा लिया लेकिन मैंने दोनों कलाइयाँ पकड़ कर अलग कर दीं और उसका जिस्म निहारने लगा.

बहूरानी अब सिर्फ ब्रेजरी और पैंटी में मेरे सामने लेटी थी। ऐसा क़यामत ढाने वाला हुस्न तो मैंने सिर्फ फिल्मों में ही देखा था, साक्षात रति देवी की प्रतिमूर्ति थी वो तो!

मेरे यूँ देखने से अदिति ने अपनी आँखें मूंद लीं और उसका चेहरा आरक्त हो गया।उसके काले काले घने बालों के चोटी भी मैंने खोल दी और उसके बालों को यूं ही छितरा दिया, घने बादलों के बीच गुलाबी चाँद सा खिल उठा उसका चेहरा!

हल्के गुलाबी रंग की डिजाइनर ब्रा पैंटी में बहूरानी का हुस्न बेमिसाल लग रहा था। ब्रा में छिपे बड़े बड़े बूब्स उसकी साँसों के उतार चढ़ाव के साथ उठ बैठ रहे थे और पैंटी के ऊपर से दिख रहा उसकी चूत का उभरा हुआ त्रिभुज जिसके मध्य में त्रिभुज को विभाजित करती उसकी चूत की दरार की लाइन का मामूली सा अहसास हो रहा था।

साढ़े पांच फुट का कद, सुतवां बदन, न पतला न मोटा, जहाँ जितनी मोटाई गहराई अपेक्षित होती है बिल्कुल वैसा ही सांचे में ढला बदन, चिकनी मांसल जांघें और उनके बीच बसी वो सुख की खान!

जैसे कई दिनों का भूखा खाने पर टूट पड़ता है, वैसे ही मेरी हालत हो रही थी कि जल्दी से बहूरानी की चड्डी भी उतार फेंकू और उसकी टाँगें अपने कंधों पे रख के अपने मूसल जैसे लंड को एक ही झटके में उसकी चूत में पेल दूं!

लेकिन नहीं, अगर कोई पैसे से खरीदी गई रंडी वेश्या रही होती तो जरूर मैं उसे वैसी ही बेदर्दी से चोदता लेकिन अपनी बहूरानी की तो बड़े प्यार और एहतियात से लेने का मन था मेरा!

 
फिर मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके और पूरा नंगा हो गया, मेरा लंड तो पहले ही बहूरानी की छिपी चूत देखकर फनफना उठा था। मैं नंगा ही बहूरानी के ऊपर चढ़ गया और उसे चूमने काटने लगा।बहूरानी का बदन भी अब गवाही दे रहा था कि वो मस्ता गई है लेकिन लाज की मारी अभी भी आँखें मूंदें पड़ी थी। मैंने उसकी पीठ के नीचे हाथ ले जा कर ब्रेजरी का हुक खोल दिया और उसके कन्धों के ऊपर से स्ट्रेप्स पकड़ कर ब्रा का खींच लिए!

वाऊ… 34 इंची ब्रा मेरे हाथ में थी अदिति के नग्न स्तन का जोड़ा मुझे एक क्षण को दिखा पर उसने तुरन्त अपनी बाहें अपने मम्मों पर कस दीं।

‘अदिति बेटा, देखने दे ना!’ मैंने कहा।‘ऊं हूं…’ उसके मुंह से निकला और वो पलट के लेट गई। मैं भी उसकी नंगी पीठ पर लेट गया और उसकी गर्दन चूमने लगा, नीचे हाथ डाल कर उसके नंगे बूब्स अपनी मुट्ठियों में भर लिए और उन्हें मसलने लगा।

उधर मेरा लंड उसकी उसकी जाँघों के बीच रगड़ रहा था और उसके मांसल कोमल नितम्बों का स्पर्श मुझे बड़ा ही प्यारा लग रहा था, तभी सोच लिया था कि बहू की गांड भी एक बार जरूर मारूंगा आज!

उसकी गुदाज सपाट पीठ को चूमते चूमते मैं नीचे की तरफ उतरने लगा. उसके जिस्म से उठती वो मादक भीनी भीनी सी महक एक अजीब सा नशा दे रही थी।

उसकी कमर को चाटते चूमते मैंने उसकी पैंटी में अपनी उँगलियाँ फंसा दीं और उसे नीचे खिसकाना चाहा, लेकिन तभी बहूरानी पलट कर चित हो गई।

‘पापाजी, मुझे तो अब नींद आ रही है आप तो बत्ती बुझा दो अब और मुझे सोने दो!’ बहूरानी बड़े ही बेचैन स्वर में बोली।‘अभी से कहाँ सोओगी बेटा जी. इन पलों का मज़ा लो, ये क्षण जीवन में फिर कभी नहीं आयेंगे।’ मैंने कहा और उसका एक मम्मा मुंह में लेकर चूसने लगा।

बहू रानी का शरीर शिथिल पड़ने लगा था और वो गहरी गहरी साँसें भरने लगी थी। मतलब साफ़ था कि अब वो चुदास के मारे बेचैन होने लगी थी उसकी पैंटी के ऊपर की नमी गवाही दे रही थी कि उसकी चूत अब पनिया गई है।

फिर मैं उठ कर बैठ गया और उसके पैर की अंगुलियाँ और तलवे जीभ से चाटने लगा। मेरा ऐसे करते ही बहूरानी अपना सर दायें बाएं झटकने लगी और अपने बूब्स खुद अपने ही हाथों में भर के दबाने लगी।

जैसे ही मैंने उसकी पिंडलियों को चाटते चाटते चूम चूम के जाँघों को चाटना शुरू किया, वो आपे से बाहर हो गई और अपनी कमर उछालने लगी।

बहूरानी की नंगी चूत

अब बहूरानी की पैंटी उतारने का सही समय आ गया था, मैंने उसकी पैंटी को उतारना शुरू किया।बहूरानी ने झट से अपनी कमर ऊपर उठा दी जैसे वो खुद भी यही चाह रही थी।

बहूरानी की गीली पैंटी उसकी चूत से चिपटी हुई सी थी उसके उतरते ही उसकी नंगी चूत मेरे सामने थी।कल जब मैंने उसे चोदा था तो उस पर झांटें उगी थी पर आज वो एकदम चिकनी थी।

‘वाओ! क्या बात है!’ अचानक मेरे मुंह से निकला।‘क्या हुआ पापा जी, चौंक क्यों गये?’ अदिति मुस्कुरा कर बोली।

‘अदिति बेटा कल तो यहाँ घना जंगल था? और आज मैदान सफाचट कैसे हो गया?’ मैंने उसकी चूत को सहलाते हुए पूछा।‘मुझे क्या पता कौन चर गया पूरी घास? मैं तो अपने काम में बिजी थी सारा दिन!’ वो हंस कर बोली।

‘अभी देखना मैं इसमें अपना हल चला के इसे जोत देता हूं और बीज भी बो देता हूं फिर देखना कितनी मस्त फसल उगती है।’ मैंने कहा।और उसकी चूत में उंगली घुसा दी।

‘उई माँ…उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ वो बोली और अपनी टाँगें ऊपर उठा के मोड़ लीं।

बहूरानी के बदन की गोरी गुलाबी जाँघों के बीच वो सांवली सी गद्देदार फूली हुई चूत कितनी मनोहर लग रही थी, चूत के ऊपर बाएं होंठ पर गहरा काला तिल था जो उसे और भी सेक्सी बना रहा था।

 
मैंने झट से अपने होंठ बहूरानी की चूत पर रख दिए और उसे ऊपर से ही चाटने लगा। उसकी चूत का चीरा ज्यादा बड़ा नहीं कोई चार अंगुल जितना ही था लम्बाई में!

मेरे चाटते ही बहू के मुंह से कामुक आहें कराहें निकलने लगीं।

‘अदिति बेटा!’ मैंने कहा।तो उसने प्रश्नवाचक नज़रों से मुझे देखा।

‘खोल दो इसे अपने हाथों से!’ मैंने कहा।उसने झट से अपना हाथ अपनी चूत पर रखा और अंगूठे और उंगली के सहारे उसने अपनी चूत को यूं ओपन कर दिया जैसे हम अपने टच स्क्रीन फोन पर कोई फोटो ज़ूम करते हैं!

‘ऐसे नहीं… अपने दोनों हाथ से खोलो अच्छी तरह से मेरी तरफ देखते हुए!’ मैंने कहा।‘आप तो मुझे बिल्कुल ही बेशर्म बना दोगे आज! ऐसे तो मैंने अभिनव के सामने भी नहीं खोल के परोसी कभी!’ वो शरमा कर बोली।

‘देखो बेटा, जो स्त्री सम्भोग काल में बिल्कुल निर्लज्ज होकर भांति भांति की काम केलि करती हुई अपने हाव भाव से, अपनी अदाओं से, अपने गुप्त अंगों को प्रदर्शित कर अपने साथी को लुभा लुभा कर उसे उत्तेजित कर समर्पित हो जाती है वही हमेशा उसकी ड्रीम गर्ल बन के रहती है।’ मैंने कहा और उसकी चूत को चुटकी में भर के हिलाया।

‘ठीक है पापा जी, समझ गई यह ज्ञान!’ वो बोली और उसने झट से अपने दोनों हाथ अपनी चूत पर रखे और उंगलियों से उसे पूरा फैला दिया और मेरी होठों पर मीठी मुस्कान लिए मेरी आँखों में झाँकने लगी।

मुझे लड़की का यह पोज बहुत ही पसन्द आता है जब वो चुदासी होकर चुदवाने को अपनी चूत अपने दोनों हाथों से खोलकर चोदने को आमंत्रित करती है।

उसके वैसे करते ही चूत के भीतर का लाल तरबूज के जैसा रसीला गूदा दिखने लगा. साथ ही उसकी चूत का दाना खूंटे जैसा उभर के लपलपाने लगा।

फिर मैंने उसके दोनों बूब्स कस के पकड़ लिए और जैसे ही मैंने उसकी चूत के दाने पर जीभ रखी वो उत्तेजना के मारे उछलने लगी और उसकी चूत मेरी नाक से आ टकराई।लेकिन मैंने उसकी जांघें कस के दबा के उसकी चूत को गहराई तक चाटने लगा, उसकी चूत रस बरसाने लगी। साथ साथ मैं उसका कुच मर्दन भी करता जा रहा था।

उत्तेजना के मारे अदिति ने बेडशीट को अपनी मुट्ठियों में जकड़ लिया और अपनी चूत बार बार ऊपर उछालने का प्रयास करने लगी।

‘जीभ मत डालो पापा जी.. असली चीज डाल दो अब तो! नहीं रहा जा रहा अब!’ वो अपनी कमर उचका के बोली।‘क्या डाल दूं अदिति? उसका नाम तो बताओ?’‘अपना पेनिस!’

‘हिंदी में बताओ न?’‘अपना लिंग डाल दो न पापा जी!’‘लिंग नहीं कोई और नाम बताओ!’ मुझे अदिति को सताने में मजा आ रहा था।

‘उफ्फ… मुझे कुछ नहीं पता अब! मत करो आप कुछ!’ वो थोड़ा झुंझला के बोली लेकिन मैंने उसकी चूत चाटना और बूब्स मसलना जारी रखा।

मुझे बहूरानी की चूत मारने की कोई जल्दी नहीं थी, मुझे अपने पे पूरा कंट्रोल था, बस चूत को खूब देर तक रस ले ले चाटना मुझे बहुत पसन्द है, और वही मैं करने लगा।भला अदिति बहूरानी की चूत चाटने चूमने का ऐसा बढ़िया मौका जीवन में दुबारा मिले न मिले, किसे पता?

‘आह.. हूं… करो… मत करो! मान जाओ पापा .. सुनो!’‘हाँ बोलो बेटा जी?’ मैंने उसकी चूत के दाने को चुभला कर पूछा।

‘अपना लंड घुसा दो अब जल्दी से…’ अदिति ने अपनी कमर उछाली।‘कहाँ लोगी.. यहाँ लोगी?’ मैंने उसकी गांड के छेद को सहलाते हुए पूछा।

‘धत्त… वहाँ नहीं, कल की तरह मेरी वेजाइना में डाल के जल्दी से फक कर दो मुझे!’ वो मिसमिसाते हुए बोली।‘वेजाइना नहीं, अपनी बोली में कहो कि कहाँ लोगी मेरा लंड?’ मैंने उसकी नारंगियों को मसकते हुए पूछा।‘मेरी योनि में घुसा दो अब लंड को!’ उसने जैसे रिक्वेस्ट सी की।

‘योनि नहीं, कोई दूसरा नाम बताओ इसका तभी मिलेगा मेरा लंड!’ मैंने उसे और सताया फिर उसके भगान्कुर को होठों में ले के चुभलाने लगा।

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योनि नहीं, कोई दूसरा नाम बताओ इसका, तभी घुसाऊँगा लंड!’ मैंने उसे और तंग किया फिर उसके भगांकुर को होंठों में लेकर चुभलाने लगा।‘उफ्फ पापा जी, आप और कितना बेशर्म बनाओगे मुझे आज… लो मेरी चूत में पेल दो अपना लंड और चोदो मुझे जल्दी से!’ बहूरानी अपनी चूत मेरे मुंह पर मारती हुई बेसब्री से बोली।चूत के रस से मेरी नाक, मुंह भीग गया।

बहूरानी अब अच्छे से अपने पे आ गई थी, लड़की जब पूरी गर्म हो जाए, अपने पे आ जाए तो फिर वो चूत में लंड लेने के लिए कुछ भी कर सकती है।

‘अदिति बेटा, थोड़ा सब्र और कर, बस एक बार लंड चूस दे मेरा अच्छे से, फिर तेरी मस्त चुदाई करता हूँ।’ मैंने उसकी चूची मरोड़ते हुए कहा।उसके न कहने का तो प्रश्न ही नहीं था अब… मैं उठ कर पालथी मार के बैठ गया, मेरा लंड अब मेरी गोद में 90 डिग्री पर खड़ा था।बहू रानी ने झट से लंड की चमड़ी चार पांच ऊपर नीचे की फिर झुक कर लंड को मुंह में भर लिया और कल ही की तरह चूम चूम कर चाट चाट कर चूसने लगी।

बहूरानी के मेहंदी रचे गोरे गोरे हाथों में मेरा काला कलूटा लंड कितना मस्त दिख रहा था, देखने में ही मज़ा आ गया।

बहूरानी कभी मेरी और देख देख के सुपारा चाटती कभी मेरे टट्टे सहलाती। मेरे ऊपर झुकने से उसकी नंगी गोरी पीठ मेरे सामने थी जिस पर उसके रेशमी काले काले बाल बिखरे हुए थे।

मैंने उसकी पीठ को झुक कर चूम लिया और हाथ नीचे ले जा कर उसके कूल्हों पर थपकी दे दे कर सहलाने लगा।इस तरह मेरे झुकने से मेरा लंड उसके गले तक जा पहुंचा और वो गूं गूं करने लगी जैसे उसकी सांस अटक रही हो।

मैं फिर सीधा बैठ गया तो बहूरानी ने लंड मुंह से बाहर निकाल लिया लेकिन उसकी लार के तार अभी भी मेरे लंड से जुड़े हुए थे और उसका मुखरस उसके होंठों के किनारों से बह रहा था।उसने फिरसे लंड मुंह में ले लिया और मैंने उसका सर अपने लंड पर दबा दिया और नीचे से उसका मुंह चोदने लगा। ऐसे एक दो मिनट ही चोद पाया मैं उसका मुंह कि वो हट गई।

‘बस, पापाजी. सांस फूल गई मेरी. अब नहीं चूसूंगी; इसे अब जल्दी से घुसा दो मेरी चूत में!’ वो तड़प कर बोली।मैंने भी वक्त की नजाकत को समझते हुए उसकी गांड के नीचे एक मोटा सा तकिया लगा दिया जिससे उसकी चूत अच्छे से उभर गई।

बहू रानी की चूत में पुनः लंड

तकिया लगाने से बहूरानी की कमर का नीचे का हिस्सा एक दर्शनीय रूप ले चुका था, अदिति ने अपनी घुटने ऊपर मोड़ लिए थे जिससे उसकी जांघे वी शेप में हो गईं और नीचे उसकी चूत की दरार अब पूरी तरह से खुली हुई नज़र आ रही थी और उसकी चूत का छेद साफ़ साफ़ दिखने लगा था जो कि उत्तेजना वश धड़क सा रहा था।उसके कोई दो अंगुल नीचे उसकी गांड का छिद्र अपनी विशिष्ट सिलवटें लिए अलग ही छटा बिखेर रहा था।

एक बार मन तो ललचा गया कि पहले गांड में ही पेल दूं लंड को लेकिन मैंने इस तमन्ना को अगले राउंड के लिए सेव कर लिया।लंड पेलने से पहले मैंने बहूरानी के मम्मों को एक बार और चूसा, गालों को काटा और फिर नीचे उतर कर चूत को अच्छे से चाटा।

‘अब आ भी जाओ पापा जी, समा जाओ मुझमें… और मत सताओ मुझे, अब नहीं रहा जाता ले लो मेरी कल की तरह!’ अदिति बहुत ही कामुक और अधीर स्वर में बोली।‘ये लो अदिति बेटा!’ मैं बोला और लंड को उसकी चूत के मुहाने पर लगा दिया और फिर वहीं घिसने लगा।

‘पापा जी, जरा आराम से डालना, बहुत मोटा है आपका! दया करना अपनी बहू पे!’ अदिति ने जैसे विनती की मुझसे!‘अदिति बेटा, थोड़ा हिम्मत से काम लेना, अब मोटे को मैं दुबला पतला नहीं कर सकता, जैसा भी है कल की तरह चूत अपने आप संभाल लेगी इसे!’‘जी, पापा जी!’

‘और अब इधर देख, मेरी आँख से आँख मिलाती रहना और चुदती रहना!’‘ठीक है अब आ भी जाओ जल्दी!’ वो बोली और मेरी आँखों में अपनी आँखें डाल दीं।मैंने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और प्यार से धकेल दिया उसकी चूत में।

चूत बहुत ही चिकनी और रसीली हो गई थी, इस कारण सुपारा निर्विरोध घुस गया बहूरानी की बुर में! उसके मुंह पर थोड़ी पीड़ा होने जैसे भाव आये लेकिन वो मेरे आँखों में झांकती रही।

 
कुछ ही पलों बाद मैं लंड को पीछे खींच कर एक बार में ही पेल दिया उसकी चूत में!‘हाय मम्मी जी… मर गई. कैसे निर्दयी हो पापा जी आप?’ वो बोली और मुझे परे धकेलने लगी।

मैंने उसके प्रतिरोध की परवाह किये बिना लंड को जरा सा खींच कर फिर से पूरी ताकत से पेल दिया उसकी चूत में!इस बार मेरी नुकीली झांटें चुभ गईं उसकी चूत में और वो फड़फड़ा उठी।

फिर दोनों दूध कस के दबोच के उसका निचला होंठ चूसने लगा, फिर अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी। बहूरानी मेरी जीभ चूसने लगी और मैं उसके निप्पल चुटकी में भर के नीम्बू की तरह निचोड़ने लगा।

ऐसे करने से उसकी चुदास और प्रचण्ड हो गई और वो अपनी कमर हिलाने लगी।

फिर मैंने उसकी दोनों कलाइयाँ पकड़ कर उसकी ताबड़तोड़ मस्त चुदाई शुरू कर दी और अपनी झांटों से चूत में रगड़ा मारते हुए उसे चोदने लगा।बहूरानी के मुंह से कामुक किलकारियाँ निकलने लगीं और वो नीचे से अपनी चूत उठा उठा के मुझे देने लगी।

बस फिर क्या था, कोठरी में उसकी चूत से निकलती फच फच की आवाज और उसकी कामुक कराहें गूंजने लगीं।‘अच्छे से कुचल डालो इस चूत को पापा जी! बहुत सताती है ये मुझे! आज सुबह से ही जोर की खुजली उठ रही है इसमें उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

‘अदिति मेरी जान… ये लो फिर!’ मैंने कहा और उसकी चूत कुचलने लगा जैसे मूसल से ओखली में कूटते हैं, और आड़े, तिरछे, सीधे शॉट मारने लगा।

‘हाँ, पापा राजा… बस ऐसे ही चोदते रहो अपनी बहू को… हाँ आ… याआअ… फाड़ डालो इसे पापा!’इसी तरह की चुदाई कोई दस बारह मिनट ही चली होगी कि मैं झड़ने पे आ गया।

‘अदिति बेटा, अब मेरा निकलने वाला है, कहाँ लोगी इसे!’‘मैं तो एक बार झड़ भी चुकी हूँ पापा, अब फिर से झड़ने वाली हूँ… आप मेरी चूत में ही झड़ जाओ, बो दो अपना बीज अपनी बहू की बुर में!’ वो मस्ता के बोली।

लगभग आधे मिनट बाद ही बहूरानी ने मुझे कस के भींच लिया और और कल की ही तरह अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट के कस दीं और मुझे प्यार से बार बार चूमने लगी।

मेरे लंड से भी रस की बरसात होने लगी और उसकी चूत में convulsions होने लगे मतलब मरोड़ उठने लगे, चूत की मांसपेशियां लंड को जकड़ने छोड़ने लगीं जिससे मेरे वीर्य की एक एक बूँद उसकी चूत में निचुड़ गई।

अदिति इस तरह मुझे काफी देर तक बांधे रही अपने से! जब वो बिलकुल नार्मल हो गई तब जाकर उसने मुझे रिलीज किया। मेरा लंड भी सिकुड़ कर बाहर निकल गया।फिर उसने चूत से बह रहे मेरे वीर्य और चूतरस के मिश्रण को नैपकिन से पौंछ डाला और मेरा लंड भी अच्छे से साफ़ करके सुपारा फोरस्किन से ढक दिया।

चुदाई के बाद बहुत देर तक हम दोनों बाहों में बाहें डाले चिपके लेटे रहे। बहू रानी के नंगे गर्म जिस्म का स्पर्श कितना सुखद लग रहा था उसे शब्दों में बताना मेरे लिए संभव नहीं है।

‘पापा जी, कर ली न आपने अपने मन की? अब बत्ती बुझा दो और सो जाओ आप भी!’ बहूरानी उनींदी सी बोली।

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बहू ससुर की चूत चुदाई के बाद बहुत देर तक हम दोनों बाहों में बाहें डाले चिपके लेटे रहे।बहू रानी के नंगे गर्म बदन की छुअन कितनी सुखद लग रही थी, उसे शब्दों में बताना मेरे लिए सम्भव नहीं है।‘पापा जी, आपने कर ही ली न अपने मन की! अब लाइट बंद कर दो और सो जाओ आप भी!’ बहू रानी उनींदी सी बोली।

बहू रानी की गांड

‘इतनी जल्दी नहीं बेटा रानी, अभी तो एक राउंड तेरी इस गांड का भी लेना है।’ मैंने कहा और उसकी गांड को प्यार से सहलाया।‘नहीं पापा जी, वहाँ मैंने कभी कुछ नहीं करवाया. वहाँ नहीं लूंगी मैं आपका ये मूसल। फिर तो मैं खड़ी भी नहीं हो पाऊँगी।’ उसने साफ़ मना कर दिया।

‘अदिति बेटा, गांड में भी चूत जैसा ही मस्त मस्त मज़ा आता है लंड जाने से, तू एक बार गांड मरवा के तो देख, मज़ा न आये तो कहना!’‘न बाबा, बहुत दर्द होगा मुझे वहाँ! अगर आपका मन अभी नहीं भरा तो चाहे एक बार और मेरी चूत मार लो आप जी भर के!’ वो बोली।

‘अरे तू एक बार ट्राई तो कर लंड को उसमें, फिर देखना चूत से भी ज्यादा मज़ा तुझे तेरी ये चिकनी गांड देगी।’ऐसी चिकनी चुपड़ी बातें कर कर के मैंने बहूरानी को गांड मरवाने को राजी किया, आखिर वो बुझे मन से मान गई मेरी बात- ठीक है पापा जी, जहाँ जो करना चाहो कर लो आप, पर धीरे धीरे करना!

‘ठीक है बेटा, अब तू जरा मेरा लंड खड़ा कर दे पहले अच्छे से!’मेरी बात सुन के बहूरानी उठ के बैठ गई और मेरे लंड को सहलाने मसलने लगी, जल्दी ही लंड में जान पड़ गई और वो तैयार होने लगा।फिर मैंने बहूरानी को अपने लंड पे झुका दिया, मेरा इशारा समझ उसने लंड को मुंह में ले लिया और कुशलता से चूसने लगी।कुछ ही देर में लंड पूरा तन के तमतमा गया, फिर मैंने उसे जल्दी से डोगी स्टाइल में कर दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा जिससे वो अच्छे से पनिया गई, फिर लंड को उसकी चूत में घुसा कर चिकना कर लिया और फिर बाहर निकाल कर गांड के छेद पर टिका दिया।

 
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