अब मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. बात ही खुशी की थी उन्नीस बरस की गांव की कड़क जवान हसीन लौंडिया राजी खुशी अपनी चूत देने को तैयार थी तो कौन खुशी से पागल न हो जाय. सबसे पहले मैंने अपना बैग खोल कर सेक्स वर्धक गोली निगल ली; ऐसी दवा मैं हमेशा अपने साथ इसी प्रकार की इमरजेंसी के लिए रखता हूं; हालांकि सामान्य तौर पर इसकी जरूरत नहीं पड़ती लेकिन जब लड़की ‘चोदना’ हो तो अपना हथियार भी भीषण युद्ध के लिए तैयार होना चाहिये ताकि सामने वाली से अपना लोहा मनवा सके और कामयुद्ध को निर्णायक रूप से जीत सके; ऐसा न हो कि मेरे लंड के नाम पर बट्टा लगे. जवान लड़की की गर्मी जब तक उसकी चूत के रास्ते से न निकल जाए और उसकी चूत चरमरा न उठे तब तक उसकी चूत चुदाई मांगती है.
इतना सब करने के बाद मैं प्रसन्नचित्त होकर धर्मशाला के बाहर आ गया. घोड़ी सजी खड़ी थी और वो डी जे वाला फिर से कुड़कुड़ करने लगा था कि दो किलोमीटर दूर बारात जानी है कम से कम दो घंटे तो लगेंगे ही पहुँचने में और आठ यहीं बज चुके है.
अदिति के चाचा जी ने जैसे तैसे सबको हांक कर बारात साढ़े आठ तक दूल्हा निकासी करवाई और बारात निकल सकी, बहूरानी का भाई घोड़ी चढ़ चुका था और आगे आगे बारात में लोग नाचते हुए चलने लगे थे.
सबके जाने के बाद मैंने सारे कमरे लॉक किये और बाहर निकला. केटरिंग वाले बन्दे भी निकल लिए थे सब जगह सुनसान हो गया था. मैं बाहर निकलने ही वाला था कि धर्मशाला का वृद्ध चौकीदार मेरे सामने हाथ फैलाये आ खड़ा हुआ.
“साब कुछ इनाम, बख्शीश मिल जाती तो …” इतना कह कर उसने अपना फैला हुआ हाथ तीन चार बार अपने माथे से लगाया साथ में उसके मुंह से देशी दारु का भभका छूटा.
मेरे मन में भी एकदम विचार जागा कि इस चौकीदार का तो कुछ करना ही पड़ेगा नहीं तो जब मैं कम्मो को लेकर अभी यहां वापिस आऊंगा तो ये देख लेगा और कुछ गड़बड़ भी कर सकता है फिर.
“ये लो बाबा. और कुछ चाहिये तो बोलो” मैंने पचास का नोट उसकी तरफ बढ़ाते हुए पूछा.
“साब, दो घूंट और मिल जाती तो रात आराम से कट जाती; ठंड बहुत होती है रात में!” वो बोला.
“तूने पी तो रखी है अब और क्या पियेगा?” मैंने थोड़ा डांट कर कहा.
“साब छै बजे पी थी ठेके पे जाके, अब वो तो कबकी उतर गयी.” वो हंसते हुए बोला.
मैंने उसे रुकने का बोला और वापिस रूम खोल कर अपने बैग में से सिग्नेचर व्हिस्की का क्वार्टर निकाल के लाया.
“तू अपना गिलास ले के आ जल्दी” मैंने चौकीदार को बोला तो वह लगभग दौड़ता हुआ अपनी झोपड़ी में गया और गिलास ले आया. मैंने आधी व्हिस्की उसके गिलास में उंडेल दी.
“ले ऐश कर!” मैंने उसे कहा तो उसने गिलास माथे से लगाया और हाथ जोड़ दिये.
“और सुन, मेन गेट अन्दर से बंद नहीं करना. मैं अभी लौट के आता हूं. मुझे यहीं सोना है आज!” मैंने चौकीदार से कहा.
“जी साब, मैं इन्तजार करूंगा आपका!” वो बोला.
“अरे तू इन्तजार मत करना. मेरा कोई पक्का नहीं मैं कब लौटूं. तू तो दारु पी के सो जा आराम से.” मैंने उसे समझाया.
“ठीक है साब फिर आप बाहर का ताला लगा के चाभी ले जाओ अपने साथ!” उसने मुझे राय दी.
मैंने मेन गेट का ताला चाभी लेकर बाहर से गेट बंद किया और निकल लिया. अब मैं बिल्कुल निश्चिंत महसूस कर रहा था; सारी बाधाएं दूर हो गयीं थीं. बस अब तो ‘कम्मो की कुंवारी चूत और मेरा लंड’ मैंने खुश हो कर सोचा और जेब से क्वार्टर निकाल कर तीन चार तगड़े घूंट नीट ही गले से उतार लिए और खाली क्वार्टर वहीं फेंक कर तेज कदमों से बारात में शामिल होने चल दिया.
बारात में डी जे के कानफोडू गानों पर लोग नाचते हुए चल रहे थे. मेरी बहूरानी और कम्मो दोनों भी खूब जम के डांस कर रहीं थीं; मैंने जेब से रुपये निकाल कर उन दोनों के ऊपर से न्यौछावर कर बैंड वालों को दे दिये.
बहूरानी ने देखा तो उसने खुश होकर मुझे अपने होंठों से चूमने का इशारा किया. कोई पंद्रह मिनट बाद जब सब लोग अपनी अपनी धुन में मस्त हो गये तो मैंने कम्मो को लौटने का इशारा किया; आंखों ही आंखों में हमारी बात हुई और हम धीरे धीरे बारात के पीछे और पीछे होते चले गये और मौका देख कर स्पीड से धर्मशाला की ओर वापिस चल पड़े.
धर्मशाला में अंधेरा ही था क्योंकि सारी बत्तियां मैंने जानबूझ कर बुझा दी थीं. मैंने मेन गेट खोला और भीतर दाखिल हुआ. चौकीदार के कमरे में अंधेरा छाया था. जरूर वो टुन्न होकर सोया पड़ा होगा.
मेरे पीछे कम्मो भी आ गयी. हम लोग दबे पांव चलते हुए एक कोने वाले कमरे तक गये और उसे खोल कर अन्दर चले गये और फिर मैंने भीतर से दरवाजा बंद करके बत्तियां जला दीं. फिर सारी खिड़कियां बंद करके फर्श पर चार पांच गद्दे एक के ऊपर एक बिछा कर बढ़िया मोटा बिस्तर चुदाई के लिए तैयार कर लिया और कम्मो का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर पर गिरा लिया और उसे दबोच कर मैं उसके ऊपर चढ़ बैठा.
“हाय राम सबर तो बिल्कुल नहीं है आपको!” कम्मो कमरे में चारों ओर देखती हुई बोली.
“मेरी जान कल से तो सबर किये हुए हूं; कितने पापड़ बेलने के बाद तू हाथ आई है अब!” मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा.
“हां वो तो मैं कल ही आपकी नज़रें देख कर समझ गयी थी कि आपकी नज़र मुझ पर है लेकिन ये पता नहीं था कि बात यहां तक पहुंचेगी.” वो धीरे से बोली.
सूट पहने हुए कम्मो का आलिंगन करने में मज़ा नहीं आ रहा था सो मैंने अपनी टाई निकाल दी और कोट भी उतार डाला. कम्मो के गले से दुपट्टा निकाल कर उसके मम्में सहलाते हुए उसे चूमने लगा, उसके शहद से मीठे होंठ चूसने लगा और सलवार के ऊपर से ही उसकी जांघें सहलाते हुए मेरा हाथ उसकी चूत तक पहुँचने लगा.
ऐसा थोड़ी देर तक करने से ही वो सुलगने लगी उसकी सांसें भारी होने लगीं और उसकी बांहें मुझे कसने लगीं. कड़क जवान छोरी थी सो जल्दी गर्म होनी ही थी.
“अंकल जी जल्दी करो जो करना हो. कोई आ जायेगा!” उसने वही पुराना राग अलापा.
“कम्मो मेरी जान … कोई नहीं आने वाला. तू सब कुछ भूल कर इन पलों का मज़ा ले; ऐसा हसीन मौका और समय ज़िन्दगी में बार बार नहीं मिलता!” मैंने उसे कहा और अपनी शर्ट और बनियान भी उतार कर फेंक दी.
कम्मो ने मेरे सीने को कुछ देर तक निहारा और फिर उठ कर मेरी छाती से लग गयी और अपना मुंह वहीं छुपा कर गहरी गहरी सांस लेने लगी, फिर वहीं पर दो तीन बार चूम लिया.
कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैं कम्मो को धर्मशाला के कमरे में ले आया था.
“कम्मो मेरी जान … कोई नहीं आने वाला. तू सब कुछ भूल कर इन पलों का मज़ा ले; ऐसा हसीन मौका और समय ज़िन्दगी में बार बार नहीं मिलता!” मैंने उसे कहा और अपनी शर्ट और बनियान भी उतार कर फेंक दी.
कम्मो ने मेरे सीने को कुछ देर तक निहारा और फिर उठ कर मेरी छाती से लग गयी और अपना मुंह वहीं छुपा कर गहरी गहरी सांस लेने लगी, फिर वहीं पर दो तीन बार चूम लिया.
मैंने उसका मुंह ऊपर उठाया और उसके होंठों का रसपान करने लगा. मेरी जीभ कम्मो के मुंह में घुसने की कोशिश करने लगी. उधर मेरा हाथ उसकी ब्रा में घुस चुका था और उसके फूल से कोमल उरोजों से खेल रहा था फिर जल्दी ही उनसे खिलवाड़ करने लगा. उसके काबुली चने जैसे निप्पलस को मैं चुटकी से दबाने, मरोड़ने लगा.
मेरे ऐसे करने से कम्मो की चूत की चुदास और प्यार की प्यास जग उठी थी सो उसने अपना मुंह खोल दिया और मेरी जीभ भीतर ले ली. उस देहाती बाला के मुखरस का स्वाद बेमिसाल था जिसे उचित शब्द देना मेरे बस में नहीं है. हमारी जीभें कितनी ही देर तक आपस में गुटरगूं करती रहीं, लड़ती झगड़ती रहीं और फिर वो हट गयी और लेट कर अपनी अपना मुंह अपनी हथेलियों से छिपा लिया और गहरी गहरी सांसें भरने लगी.
वो अपना मुंह हथेलियों से ढके सीधी लेटी थी, उसके उन्नत उरोज सांसों के उतार चढ़ाव के साथ उठ बैठ से रहे थे; दोनों पैर अलग अलग से फैले थे जिससे उसकी मांसल जांघों का वो फैलाव उसके बदन की कामुकता को और प्रबलता से दर्शा रहा था.
इस समय उसकी चूत पैंटी के भीतर कैसी लग रही होगी; चूत की दरार खुली होगी या दोनों लब आपस में चिपके होंगे? इस बात का फैसला मैं नहीं कर सका. जो होगा जैसा होगा अभी सामने आ जाएगा ऐसा सोचते हुए मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच कर खोल दिया और इसके पहले कि वो कुछ रियेक्ट करे मैंने सलवार ढीली करके सामने का हिस्सा नीचे सरका दिया.
मेरी गिफ्ट की हुई पैंटी उसकी फूली हुई चूत पर डेरा डाले थी. यह मैं क्षणमात्र के लिए ही देख सका कि कम्मो ने घबरा कर अपनी सलवार झट से ऊपर कर ली और उसे कसके मुट्ठी में पकड़ लिया.
मैंने जोर लगा कर सलवार छुड़ाने का प्रयास किया तो उसने अब दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया और इन्कार में गर्दन हिलाने लगी.
“अरे छोड़ तो सही गुड़िया रानी!” मैंने कहा.
“ऊं हूं…” उसकी गर्दन फिर इनकार में हिली.
“अरे छोड़ दे कम्मो, एक बार देखने तो दे. तू तो मेरी प्यारी प्यारी गुड़िया रानी है न!” मैंने बहुत ही मीठी आवाज में उसे मक्खन लगाया.
“नहीं अंकल जी, मुझे शर्म आती है.”
“अरे तो फिर कैसे क्या होगा सलवार तो उतारनी ही पड़ेगी न?”
“मुझे नीं पता वो सब!” उसने जिद की.
“अरे मान जा बेटा, देख टाइम खराब मत कर बेकार में. अभी काम बहुत है करने को और समय कम है.” मैंने उसे याद दिलाया.
“अच्छा पहले बत्ती बुझा दो फिर जल्दी से!” वो अपना फैसला सुनाती हुई सी बोली.
“अरे यार तू भी न… बेटा अँधेरे में क्या मजा आयेगा, कुछ भी नहीं दिखेगा?”
“आ जायेगा, नहीं आयेगा तो मत कीजिये कुछ, जाने दो मुझे. हमें कुछ नहीं करवाना है आपसे न कुछ दिखाना है आपको, बस!” कम्मो अभी भी जिद पर अड़ी थी.
“मान जा बेटा, तू तो मेरी अच्छी सी प्याली प्याली गुड़िया रानी है न!”
“नहीं नहीं नहीं … मुझे जाने दीजिये बस या फिर अंधेरे में कर लो!” वो अपनी जिद पर अड़ी रही.
“यार तू भी अजीब है. सारे दिन से ललचा रही है, कुछ भी करने को तैयार थी. अब क्या हो गया तेरे को आखिर. एन टाइम पर के एल पी डी करने पर तुली है?”
“क्या क्या … मैं क्या के डी एल पी कर रही हूं?” उसने तुनक कर पूछा.
“अरे के डी एल पी नहीं के एल पी डी, मतलब खड़े लंड पर धोखा दे रही है तू!”
“अंकल देखो, मैं कोई धोखा नहीं दे रही आपको, मुझे शर्म आती है उजाले में बस. आप बत्ती बुझा दो फिर जल्दी से करो जो करना है.” उसने मुझे अपनी तर्जनी दिखा कर कहा.
मैं कम्मो की बात भी समझ रहा था; गांव के संस्कार थे न. छोरी चुदासी तो थी पर चुदना अपने हिसाब से चाहती थी. उजाले में अपनी चूत न दिखाने की सोच के ही आई लगती थी. मैंने भी मन ही मन तय कर लिया कि इसे रोशनी में पूरी नंगी करके अपने लंड पर झूला न झुलाया तो मेरा भी नाम नहीं. आखिर अँधेरे में क्या ख़ाक मज़ा आयेगा. जब तक इसकी मदमस्त जवानी के दर्शन न मिलें, इसकी चूत और मम्में देखने का मज़ा न मिले तो फिर चूत मारने का मजा ही क्या.
इतना सोच के मैंने कम्मो की सलवार नीचे सरकाने की फिर से कोशिश की पर उसे दोनों हाथों से ताकत से पकड़ रखी थी. फिर मैंने दूसरी तरकीब की; उसकी सलवार को पकड़े पकड़े ही मैंने अपने बीच की उंगली से सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को कुरेदना शुरू किया. दूसरे हाथ से उसके स्तन दबा रहा था. मुझे पता था कि अभी मेरी उंगली इसकी चूत में हाय तौबा मचाएगी तो ये अपनी सलवार क्या अपनी पैंटी भी खुद उतार के देगी मुझे; आखिर अपनी चूत की खुजली कब तक सहन कर सकेगी.
जैसा कि होना ही था. कामदेव ने अपना पुष्पबाण चला ही दिया और कम्मो अपनी एड़ियाँ रगड़ने लगी. उसकी आँखों में अनुनय विनय का भाव आ गया और सलवार पर उसकी पकड़ स्वयमेव ढीली पड़ गयी और उसने सलवार छोड़ कर अपने हाथ ऊपर कर दिए. सलवार ढीली पड़ते ही मेरी उंगली अब और आराम से उसकी चूत का जायजा लेने लगी. उसके मम्मे कड़क हो गये थे और चूचुकों ने अपना सिर उठा लिया था और वे मेरी छाती के नीचे पिसने को मचलने लगे थे. नीचे उसकी चूत भी पक्का प्रेमाश्रु बहा रही होगी.
“अंकल जी देर हो रही है देखो बारात पहुँचने वाली होगी!” उसने कमजोर सी आवाज में कहा उसकी आवाज में वो दृढ़ता वो आत्मविश्वास नहीं था अब. उसकी बात मैंने अनसुनी की और अपनी उंगली की रफ़्तार और तेज कर दी; उसकी चूत की चिपचिपाहट और गीलापन अब मुझे अच्छे से महसूस होने लगा था.
“अंकल जी क्यों सताते हो मुझे. अच्छा लो कर लो जैसे आपको करना हो!” उसने हथियार डाल दिए.
मैं अब उसके ऊपर लेट गया और फिर से उसके होंठ चूसने लगा; वो मेरी पीठ बेसब्री से जल्दी जल्दी सहलाने लगी फिर वो अपने हाथ नीचे की तरफ ऐ गयी और अपनी सलवार उसने खुद और नीचे सरका दी.
“लो अंकल जी, देख लो जो देखना है कर लो अपने मन की जी भर के. मुझे पूरी बेशर्म बना देना आप तो!” कम्मो समर्पित भाव से बोली.
“कम्मो, कितनी प्यारी प्यारी है न तू. मुझे पता था कि तू मेरा दिल नहीं तोड़ेगी.” मैंने प्यार से उसे चूमते हुए कहा; मैं नहीं चाहता था खुद को हारी हुई समझे. उसके स्त्रीत्व का नारीत्व का, उसकी गरिमा का आदर सम्मान बनाए रखना मेरी जिम्मेवारी थी. जबकि मैं जानता था कि वो अपनी चूती हुई चूत से हार कर अपनी सलवार नीचे खिसकाए पड़ी थी.
“कम्मो बेटा एक बात और मान ले जल्दी से!” मैंने कहा तो उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से मुझे देखा.
“ये कुर्ता और उतार दे. बाकी तो मैं कर लूंगा.” मैंने उसे अत्यंत प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा.
“अच्छा ये लो, आज आप मुझे पूरा बेशर्म बना कर ही छोड़ना.” वो बोली और अपने हाथ ऊपर उठा दिए.
मैंने झट से कुर्ता नीचे से पकड़ा और उसे निकालने लगा. मेरे हाथ उसके सीने की गोलाइयों से रगड़ खाते हुए ऊपर चले गये और उसका कुर्ता उतार लिया और उसे तह करके वहीं साइड में रख दिया.
शमीज तो उसने पहनी ही नहीं थी. मेरी गिफ्ट की हुई ब्रा में उसके मांसल दूध जैसे मेरी ही राह तक रहे थे. उसके सुडौल कंधों पर ब्रा के स्ट्रेप्स बहुत अच्छे लग रहे थे. ब्रा के दोनों कप जैसे किसी स्तूप की तरह शान से खड़े थे.
“कम्मो ये ब्रा भी उतार दो अब”
“क्यों, क्या मुझपे अच्छी नहीं लगी ये?”
“अरे बेटा, वो बात नहीं है. तू तो इसमें बहुत सुन्दर लग रही है पर इसे उतारना तो है ही ना नहीं तो मैं दूध कैसे पियूंगा ?”
“तो अभी तक दूध पीते बच्चे हो आप, क्यों?”
“हां… और भूख भी लगी है मुझे!”
“हम्म्म्म तो ये लो पी लो!” कम्मो ने कहा और अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया.
हुक खुलते ही ब्रा के स्ट्रेप्स तेजी से उछल गये. और उसके पके तोतापरी आम जैसे विशाल गुलाबी मम्में मेरे सामने उजागर हो गये. मैंने बिना देरी किये उन्हें दबोच लिया और बारी बारी से चूसने लगा. उधर कम्मो मेरे सिर को थपकी दे दे के ममत्व भाव से सहलाने लगी.
वासना की आग में मैं भी जलने लगा था अब मैंने कम्मो का गला, कान की लौ, गाल सब के सब चूम डाले और नीचे की ओर होकर उसके सपाट सुतवां पेट को चूमते चूमते उसकी नाभि में अपनी जीभ घुमाने लगा. मेरा ऐसे करते ही कम्मो को गुदगुदी हुई और उसकी हंसी छूट गयी; बिल्कुल बच्चों जैसी निश्छल, उल्लासपूर्ण खिलखिलाहट उसके मुंह से फूट पड़ी और उसके मोतियों से चमकते दांत ट्यूबलाइट की तेज रोशनी में दमक उठे.
उसकी सलवार का नाड़ा तो खुला ही पड़ा था सो मैंने सलवार उतारने का उपक्रम किया तो कम्मो ने तुरंत अपनी कमर उठा दी और उसका सफ़ेद चूड़ीदार मैंने निकाल कर फिर उसे अच्छे से तह करके बगल में रख दिया; आखिर उसे अभी इसे ही तो पहन कर शादी में जाना था. अब मैंने उसके दोनों अमृत कलश के चूचुकों को चिकोटी से हौले हौले दबाते हुए उसकी जांघें पूरी तन्मयता से चाटने लगा.
मैं पहले भी बता चुका हूं कि मुझे अपनी संगिनी की नग्न जांघें चाटने में विशेष आनन्द आता है तो मैं कम्मो रानी के दोनों मम्में कसके दबोचे हुए उसके घुटनों से ऊपर चूत के आस पास सब जगह चाट डाला. फिर उसकी पिंडलियां भी चूम चाट डालीं और पांव की उंगलियां भी अपने मुंह में भर कर चुभलाने लगा, तलवे भी चाटने लगा.
प्यासी कम्मो इतना सब कैसे सहन करती सो उसने गद्दों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपनी चूत बार बार ऊपर उठाने लगी. अभी तक मैंने उसकी चूत को जरा भी नहीं छेड़ा था.
“अंकल जी, मुझे अजीब सा लग रहा है, मेरे पैरों से कमर तक जैसे चीटियां रेंग रहीं है और पैंटी में खुजली मची है.” वो सिसियाते हुए बोली.
“बेटा, यही तो होना था. अभी देखना तेरी चूत की खुजली मैं अपने लंड से खुजाऊंगा तुझे तभी चैन पड़ेगा, मेरा लंड लोगी न अपनी चूत में?” मैंने उसकी जांघ पर चिकोटी काट कर कहा.
“धत्त, कैसे कैसे गंदे बोल बोलते हो आप भी ना, लाज शरम तो है नहीं आपको. पराई लड़की का भी कोई लिहाज नहीं आपको तो?”
“कम्मो मेरी जान, अब तू पराई थोड़े ही है. बस थोड़ी से कसर रह गयी है फिर तू पूरी तरह से मेरी हो जायेगी, बस जरा सी देर और!” मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से चूत की दरार में उंगली फिराई.
“तो जल्दी जल्दी कर दो ना जो कुछ रह गया हो, मुझसे नहीं रहा जा रहा अब.” तो बेसब्री से बोली.
“कम्मो रानी, ये नयी ब्रा पैंटी पहन के अच्छा किया तूने. मस्त लग रही है तेरे बदन पर!” मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत मसलते हुए कहा.
“अंकल जी, मुझे पता था आप कोई न कोई जुगाड़ जरूर फिट कर लोगे. ऐसी ही कोरी कोरी तो मुझे जाने नहीं दोगे. तो मैंने सोचा कि आपसे ही इनका उद्घाटन करवा कर आपकी कीमत ही वसूल करवा दूं!” वो बड़े ही सेक्सी अंदाज में बोली और मुझे प्यार से चूम लिया.
“वाह बेटा, क्या बात कह दी तूने. मजा आ गया. तू सच में बहुत प्यारी है.” मैंने इस बार उसकी पैंटी में अपना हाथ घुसा दिया और उसकी नंगी चूत मुट्ठी में भर ली और उसकी झांटों में अपनी उँगलियों से कंघी करने लगा. उसकी मुलायम चूत मुझे कचौरी की तरह फूली फूली सी महसूस हुई.
अब मुझसे भी सब्र नहीं हो रहा था. मेरा लंड तो कब का खड़ा खड़ा परेशान हो रहा था और कपड़ों से आजादी चाह रहा था. लेकिन सबसे जरूरी मुझे कम्मो की चूत देखना थी पहले. कुंवारी लड़की की चूत देखे हुए एक ज़माना बीत गया था. मैंने उसकी पैंटी नीचे की तरफ सरकाई और कम्मो ने अपनी कमर उठा कर पैंटी उतर जाने दी. ज्यों ही उसकी पैंटी उतरी उसने झट से चूत को अपने हाथों से ढक लिया; अब लाज तो इतनी जल्दी नहीं उतरती न.
मैंने उसके हाथ चूत पर से हटा दिए जिन्हें उसने थोड़ी सी ना नुकुर के बाद हटा लिया और उसकी चूत अब मेरे सामने अनावृत थी.
कम्मो मेरे सामने मादरजात नंगी लेटी थी. ट्यूबलाइट की तेज रोशनी में उसका जवां हुस्न मेरे तन मन में हाहाकार मचाने लगा. मैं उसके बगल में बैठा हुआ उसे निहारने लगा. कम्मो ने तो आंखें बंद कर लीं थीं. बेदाग़ हुस्न की मलिका निकली कम्मो रानी; उसके चिकने बदन पर मुझे एक भी तिल या और कोई दाग नज़र नहीं आया, खूब भरा भरा सा पुष्ट बदन था उसका. गांव की मेहनतकश लड़कियों के जिस्म में मजबूती और मांसपेशियों का सौन्दर्य अलग ही छलकता है.
मैंने उसके चेहरे को बार बार चूम डाला और उसके पैरों के पास जा बैठा और उसकी पिंडलियां पकड़ कर पांव ऊपर उठा कर घुटने मोड़ दिए.
अब उसकी चूत का तिकोना खुल कर स्पष्ट रूप से मेरे सामने था; कम्मो ने एक बार फिर से अपनी चूत हाथों से ढकने की व्यर्थ सी कोशिश की पर मैंने उसके हाथ हटा दिए और चूत पर अपने हाथ रख दिए और उसे सहलाने लगा. उसकी चूत पर झांटों का ऊबड़ खाबड़ सा जंगल उगा हुआ था; झांटों के बाल कहीं एकदम छोटे छोटे जिनके बीच से खाल भी दिखती थी कहीं झांटें थोड़ी सी बड़ीं बड़ीं थीं.
“कम्मो ये तेरी चूत के बाल ऐसे ऊबड़ खाबड़ से छोटे बड़े कैसे हैं?” मैंने चूत को सहलाते हुए पूछा.
“अंकल जी, हमारे पास कोई बाल काटने का साधन तो है नहीं. घर में एक पुरानी सी कैंची है वो भी ठीक से चलती नहीं. आते समय उसी कैंची से जैसे बने काट लिए थे.” वो बोली.
मैं उसकी बात समझ रहा था. गांव की छोरियों, औरतों के साथ ये बड़ी दिक्कत है कि उन्हें अपनी चूत के बाल साफ़ करने के लिए प्रॉपर सामान नहीं मिलता. न हेयर रिमूविंग क्रीम, न रेजर ब्लेड. गांव के ज्यादातर पुरुष भी अपनी शेविंग नाई से ही कराते हैं और ब्लेड रेजर वगैरह घर में नहीं रखते. तो मैंने कम्मो से वादा किया कि मैं उसे कल जाने से पहले हेयर रेमूविंग क्रीम और नयी कैंची ला कर दूंगा ताकि वो अपनी सुहागरात के लिए अपनी चूत को चिकनी चमेली बना सके.
मैंने उसके हाथ चूत पर से हटा दिए और उसकी चूत अब मेरे सामने अनावृत थी. कम्मो मेरे सामने मादरजात नंगी लेटी थी. ट्यूबलाइट की तेज रोशनी में उसका जवां हुस्न मेरे तन मन में हाहाकार मचाने लगा.
फिर मैंने कम्मो की चूत का जायजा लिया, उसकी चूत का चीरा खूब लम्बा था और बुर के होंठ भी खूब भरे भरे से गद्देदार थे. उसकी पुष्ट कदली जांघों के बीच उसकी चूत का नजारा बेहद शानदार था. चूत का भी अपना निराला सौन्दर्य, निराला वैभव और शान होती है. जिससे हम जन्म लेते हैं जिसके पीछे सारी उमर भागते हैं. जिसके आनन्द के सामने सब सुख फीके हैं उसका रूप भी आनंददायक तो होना ही चाहिए.
मैंने मुग्ध होकर उसकी चूत को चूम लिया. फिर मैंने धीरे से उसकी चूत का चीरा दोनों ओर उंगलियां रख के खोल दिया; भीतर जैसे रसीले तरबूज का गहरा लाल गूदा भरा हुआ था; उसकी चूत का दाना मटर के आकर का फूला हुआ सा था और भीतरी होंठ मुश्किल से तीन अंगुल लम्बे रहे होंगे. मैंने उसके लघु भगोष्ठ भी खोल दिए और उन्हें चूम लिया. कम्मो की चूत के भीतरी कपाट बड़े अदभुत लगे मुझे; भीतरी भगोष्ठों के किनारों पर गहरी काली रेखा सी थी जैसे किसी गुलाबी नाव के किनारों पर काजल लगा दिया हो या जैसे हम आंख में अपनी निचली पलक पर काजल लगाते हैं तो आंखों की शोभा और बढ़ जाती है; ठीक उसी अंदाज में कम्मो की चूत शोभायमान हो रही थी.
“कम्मो, कितनी प्यारी प्यारी मस्त चूत है तेरी; इसे चख कर तो देखूं जरा!” मैंने कहा और अनारदाना चाटने लगा.
कम्मो की चूत की बास बहुत ही कामोत्तेजक लगी मुझे; मैंने उस गंध को गहरी सांस लेकर अपने भीतर तक समा लिया और दाने के नीचे नाव की गहराई में अच्छे से जीभ घुसाकर लप लप करके चाटने लगा. बिल्कुल मलाई कोफ्ता या रसमलाई के जैसी नर्म गर्म रसीली चूत थी कम्मो रानी की.
“छी अंकल जी … वहां गन्दी जगह मुंह क्यों लगा रहे हो?” उसने प्रतिवाद किया. लेकिन मैंने उसकी बात अनसुनी करते हुए उसकी चूत चाटना जारी रखा और साथ में उसके दोनों दूध भी दबाता मसलता रहा. जल्दी ही उसकी चूत से रस की नदियाँ बहने लगी और उसके निप्पलस कड़क हो चले. अब वो बुरी तरह मस्ता चुकी थी, मेरा मुंह उसकी चूत के ऊपर था तो उसने अपने दोनों पैर मेरी पीठ पर रख दिए और उन पर एड़ियाँ रगड़ने लगी, साथ में मेरे बाल पकड़ कर खींचने लगी.
“अंकलल्ल जीईईई …” उसके मुंह से निकला और उसने मिसमिसा कर अपनी चूत जोर से उठा कर मेरे मुंह पर दे मारी … एक बार … दो बार … फिर तीसरी बार.
“अब आ जाओ जल्दी से!” कह कर उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरा सिर जोर से हिलाया. हालत तो मेरी भी खराब हो रही थी. मुझपर उस गोली का भरपूर असर हो चुका था और लंड कबसे तैयार खड़ा था और चड्डी में दबा आजादी मांग रहा था.
“आया हुआ ही तो हू मेरी जान …” मैंने कहा और अपना मुंह उसकी चूत से हटा कर उसे दबोच लिया और चूत रस से गीले अपने होंठों से उसके गाल चूमने लगा.
“उफ्फ अंकल … मेरा मुंह भी गन्दा कर दिया न आपने!” उसने शिकायत की और मुझे परे धकेलने लगी.
“अच्छा अब जो करना हो जल्दी कर लो बहुत देर हो गयी वैसे भी; कहीं आंटी जी मुझे न ढूंढ रहीं हों!” वो व्यग्रता से बोली.
“अरे बेटा तू टेंशन न ले बिल्कुल. मैं अदिति को जानता हूं अच्छे से; वो तो मजे से ठुमके लगा रही होगी.” मैंने कहा.
“फिर भी जल्दी कर दो अब आप तो … मुझे पता नहीं कैसा कैसा लग रहा है.”
“क्या कर दूं मेरी जान?” मैंने उसके दोनों दूध कसके दबोचे.
“मुझे अपना बना लो जल्दी से!” कम्मो ने मेरे गले में अपनी बाहों का हार डाल के मुझे अपने से चिपटा कर बोली.
फिर मैं उसके ऊपर से उतर गया और अपनी पैंट उतार डाला और अपनी चड्डी भी फुर्ती से उतार दी. मेरा लंड आजाद होकर हवा में लहराया और उसने कम्मो को दो बार जम्प लगा कर सलाम ठोंका.
“अरे बाप रे इतनाआआ… बड़ा लौड़ा?” मेरा लंड देख कम्मो चकित होकर बोली; भय और आश्चर्य उसके चेहरे पर साफ़ झलक रहा था और वो डर कर थोड़ा पीछे हो गयी.
“और ये मोटा भी कित्ता ज्यादा है.” कम्मो मेरी तरफ देख शिकायत से बोली जैसे बड़ा मोटा लंड होने में मेरी कोई गलती हो गई हो.
मैंने कम्मो का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखने की कोशिश की पर वो आनाकानी करने लगी लेकिन मैंने जबरदस्ती उसे लंड पकड़ा ही दिया.
“कितना काला सा है ये देखने में ही डरावना लगता है और गर्म की कितना हो रहा है.” कम्मो बोली.
उसकी मुट्ठी में मेरा लंड जैसे ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा था.
मैंने कम्मो के हाथ पर अपना हाथ रखकर लंड को ऊपर नीचे किया जिससे मेरा सुपारा बाहर निकल आया. फिर मैं उसके दूसरे हाथ की उंगली अपने मुंह में घुसा के चूसने लगा.
“देख कम्मो, तुझे लंड को ऐसे चूसना है!” मैंने उसकी उंगली जोर से चूसी और छोड़ दी फिर जोर से चूसी और उसे समझाया.
“नहीं मैं नहीं मुंह लगाऊँगी इसे!” वो बोली.
मुझे पता था कि वो यही कहेगी तो मैंने उसकी चूत को उंगली से छेड़ना शुरू किया और दाना दबा कर हिलाने लगा. उसकी चूत में आग तो पहले से ही लगी थी मेरे ऐसे करने से वो और भी धधक उठी.
“अब और मत सताओ अंकल कुछ और करो जल्दी से!” वो जलबिन मछली की तरह तड़प कर बोली.
“तो फिर चूस ना लंड को जल्दी से, तभी तो करूंगा ना… बेटा ये एक रस्म होती है जो तू निभा दे जल्दी से!” मैंने उसे चूमते हुए कहा.
“ठीक है अंकल, सिर्फ एक बार चूसूंगी. फिर मत कहना कुछ!” वो मजबूर होकर बोली.
“ठीक है गुड़िया रानी, चूस दे जल्दी से!”
फिर मैं उसके ऊपर हुआ और लंड खोल कर सुपारा बाहर निकाल कर उसके गालों और होंठों पर घिसा. उसने अपनी आंखें कसकर मींच लीं.
“लो अब मुंह खोलो!” मैंने लंड से उसके मुंह पर पटक कर दो तीन बार नॉक किया. उसने डरते हुए मुंह खोल दिया और सुपारा चाट के मुंह में भर लिया और कोई आधे मिनट तक चूसती रही.
मेरा मन तो किया कि लंड को उसके मुंह में और भीतर तक ठेल दूं पर मैंने वो इरादा फिर कभी के लिए पोस्टपोन कर दिया. थोड़ी देर बाद उसने लंड से मुंह हटा लिया और अपने दुपट्टे से मुंह पौंछ डाला.
“अब तो खुश हो गये न?” उसने मुझे उलाहना सा दिया.
मैं हंस कर रह गया.
“अच्छा अब जल्दी करो जो करना हो, बहुत टाइम ख़राब कर रहे हो आप!” वो बोली.
“तो फिर जल्दी लेट जा और अपनी चूत परोस दे लंड के सामने!” मैंने कहा.
कम्मो लेट गयी तो मैंने दो तकिये उसकी कमर के नीचे लगा दिए जिससे उसकी चूत अच्छे से उठ गयी. फिर मैंने उसकी चूत को खोल कर खूब चाटा जिससे वो और अच्छी तरह से गीली हो गयी. फिर उसकी टांगें उठा कर घुटने मोड़ दिए और लंड को उसकी चूत में चार पांच बार स्वाइप किया और उसके दाने पर लंड घिसा जिससे कम्मो झनझना गयी और आनन्द भरी किलकारी उसके मुंह से निकल पड़ी.
उसकी चूत का छेद स्वयमेव सांस लेता, कम्पन सा करता दिखाई दे रहा था.
“कम्मो बेटा, चूत कायदे से परोसी जाती है लंड के सामने!” मैंने कहा तो उसने असमंजस से मेरी तरफ देखा जैसे मेरी बात उसकी समझ न आई हो.
“देखो बेटा, लंड के स्वागत के लिए अपनी चूत पर अपने दोनों हाथ रखो और उंगलियों से इसका दरवाजा पूरी तरह खोल दो अच्छे से. कल तेरी शादी हो जायेगी और तू पराये घर चली जायेगी इसलिए सब सीख ले पहले ताकि तेरा पति खुश रहे तेरे से!” मैंने कहा तो मेरी बात सुनकर कम्मो की हंसी छूट गयी.
“लो अंकल जी, आप तो मुझे से सिखा पढ़ा कर भेजना ससुराल!” वो बोली और उसने अपनी बुर के होंठों को अपने हाथों से खूब अच्छे से खोल के चूत परोस दी मेरे फनफनाते लंड के सामने.
अब मैंने अपने लंड को जन्नत का दरवाजा दिखाया और उसे एक हाथ से दबा लिया ताकि वो फिसले न; फिर मैंने कम्मो की आंखों में झांका. डर और आशंका की परछाईयाँ वहां तैर रहीं थीं.
“कम्मो, तैयार?”
“मेरा पहली पहली बार है अंकल जी!” वो बोली.
“बस थोड़ा सा चुभेगा; सह लेना. आवाज नहीं निकालना. ठीक है?”
उसने सहमति में सिर हिलाया और अपना निचला होंठ दांतों से दबा लिया.
मैंने लंड को हल्का सा चूत पर दबाया और कमर को जरा सा पीछे करके फिर पूरी ताकत से लंड उसकी धधकती चूत में धकेल दिया. कम्मो के मुंह से घुटी घुटी सी आवाज निकली लेकिन उसने अपनी बहादुरी का परिचय दिया और लंड का पहला वार झेल गयी अपनी चूत में. फिर मैंने एक बार और उसे अच्छे से अपनी ग्रिप में लिया और एक धक्का और … इस बार पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में धंस गया और मेरी झांटें उसकी झांटों से जा मिलीं.
कम्मो मेहनतकश लड़की थी तो वो दर्द को पी गयी. उसकी आंखों में आंसू छलछला उठे थे पर उसने ज्यादा हाय तौबा नहीं मचाई और जैसे तैसे खुद को संभाले रही.
कुंवारी बुर में लंड आराम से तो कभी घुसने वाला है नहीं जब तक जोर नहीं लगेगा चूत बिल्कुल भी जगह नहीं देगी. इसीलिए कहते हैं कि चूत को मारना पड़ता है, मारा जाता है लंड से तब कहीं जा के वो घुसने देती है लंड को.
कम्मो की चूत बेहद कसी हुई निकली उसकी चूत ने मेरे लंड को इस कदर कसके भींच रखा था कि जैसे किसी शेरनी के जबड़े में पहला शिकार फंसा हो. मैंने लंड को बाहर खींचना चाहा तो चूत लंड को ऐसे दबोचे थी कि पूरी की पूरी चूत ही लंड के साथ खिंच के बाहर की तरफ आने लगती थी. मैंने थोड़ा धैर्य रखना उचित समझा और रुक गया. कम्मो को चूमने पुचकारने दुलारने लगा. मेरे ऐसे प्यार जताते ही उसकी रुलाई फूट पड़ी.
आखिर थी तो कच्ची कली ही.
उसके चेहरे और माथे पर इतनी सर्दी में भी पसीना छलक उठा था. मैंने दुपट्टे से उसका माथा गाल सब अच्छे से पोंछ डाले और उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसे छोटी बच्ची की तरह दुलारने लगा.
कम्मो की टाँगे अब दायें बाएं पूरी चौड़ाई में फैलीं हुईं थीं और उसकी चूत में मेरा लंड किसी खूंटे की तरह अडिग गड़ा हुआ था.
“अब कैसा लग रहा है मेरी बिटिया रानी को?” मैंने उसके दोनों मम्में दबोच कर उसके होंठ चूम कर पूछा.
“अंकल निर्दयी हो आप. दया ममता तो है नहीं आपके दिल में बिल्कुल!” वो भरे गले से बोली.
“नहीं बेटा, ऐसे नहीं कहते. मैं आराम से करता तो हो ही नहीं पाता. आई एम सॉरी बेटा!” मैंने उसे सांत्वना दी.
वो कुछ नहीं बोली चुप रही.
थोड़े ही समय बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे लंड पर चूत की पकड़ कुछ ढीली पड़ी है. मैंने धीरे से कोई दो तीन अंगुल लंड को बाहर की तरफ खींचा तो इस बार चूत साथ नहीं आयी. कम्मो का चेहरा भी अब कुछ शान्त नजर आ रहा था और उसकी सांसें भी नार्मल, व्यवस्थित रूप से चलने लगीं थीं.
मैंने लंड को अब अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. कम्मो के मुंह से कामुक कराहें निकलनें लगीं. जाहिर था कि उसे अपनी पहली चुदाई का मज़ा आने लगा था. इस तरह मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करता रहा. थोड़ी ही देर बाद उसकी चूत अच्छे से पनियां गयी और लंड सटासट इन आउट इन होने लगा.
अब मैंने लंड को अच्छे से बाहर तक निकाल निकाल कर वापिस चूत में पेलना शुरू किया तो कम्मो को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी चूत उठा उठा कर मेरे लंड से लोहा लेने लगी. जल्दी ही चुदाई अपने शवाब पर आ गई और चूत लंड में घमासान मच गया. लंड अब बड़े मजे से गचागच, सटासट उसकी चूत में अन्दर बाहर होने लगा था.
“कम्मो बेटा, मेरा लंड खाकर अब तू लड़की से औरत बन गयी अब तो मजा आ रहा है न मेरे लंड का?” मैंने उससे पूछा. वो कुछ नहीं बोली और उसने अपना मुंह मेरे सीने में छुपा लिया और अपनी उंगली से मेरी छाती पर कुछ लिखने लगी.
“तू डर रही थी न मेरे लंड से. अब यही लंड तुझे अच्छा लगने लगा है न!” मेरी बात सुन के कम्मो ने सिर हिला कर हामी भरी.
“अंकल जी, मुझे क्या पता था ये सब. मैं तो सोच रही थी कि जहां मेरी छोटी उंगली भी नहीं घुसी कभी वहां आपका ये दैत्य सरीखा काला कलूटा डरावना सा डंडा तो मेरे पेट में घुस के मुझे मार ही डालेगा आज!” वो बड़ी मासूमियत से बोली.
“मेरी जान… लंड ने आज तक किसी की जान नहीं ली कभी, ये तो सिर्फ मज़ा देता है.” मैं बोला और लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.
उसकी चूत से ‘पक्क’ जैसी आवाज निकली जैसी कोल्ड ड्रिंक की छोटी बाटल का ढक्कन ओपनर से खोलने पर निकलती है; ऐसी आवाज नयी चूत का वैक्यूम रिलीज होने से ही आती है. अब मेरा मन उसे घोड़ी बना के चोदने का था.
“कम्मो, अब तू घोड़ी की तरह खड़ी हो जा!” मैंने उससे कहा और उसे समझाया कि क्या करना है. मेरी बात समझ कर वो झट से किसी चौपाये की तरह औंधी होकर अपने हाथ पैरों के सहारे खड़ी हो गयी.
उसके मस्त भरे भरे गोल मटोल कूल्हे जिन पर कल उसकी चोटी लहरा रही थी इस वक़्त मेरे सामने अनावृत थे. मैंने उसके दोनों हिप्स को अच्छे से सहलाया और उन पर खूब चपत लगाईं फिर बीच की दरार खोल कर देखा. उसकी गांड की चुन्नटें बहुत ही कसीं हुईं थीं मैंने लंड को पूरी दरार में दबा के तीन चार बार स्वाइप किया.
ये स्थान भी बड़ा संवेदनशील था उसका; मेरे लंड छुलाते ही वो मज़े के मारे कमर हिलाने लगी. लेकिन मैंने उसकी चूत को ही निशाना बना के लंड घुसेड़ दिया और नीचे हाथ लेजाकर उसके मम्में दबोच कर उसकी पीठ चूम चूम कर उसे चोदने लगा.
फिर उसके सिर के बाल खींच लिए मैंने जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और उसकी चूत को बेरहमी से ठोकने लगा. कम्मो धीरे धीरे करने की गुहार लगाती रही पर जोश में सुनता कौन है.
ये कम्मो तो लम्बी रेस की घोड़ी निकली; उसे चोदते हुए पंद्रह मिनट से ऊपर ही हो चुके थे पर वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी; मेरा लंड तो टनाटन खड़ा था पर मुझे थकान होने लगी थी. मैंने लंड बाहर खींच लिया और थोड़ा रेस्ट करने लेट गया. कम्मो भी मेरे बगल में आ लेटी और मेरा सीना सहलाने लगी.
कम्मो की सांसें भी तेज तेज चल रहीं थीं पर वो मुझसे लिपटी जा रही थी और उत्तेजना से उसने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपनी चूत की दरार में घिसने लगी.
“कैसा लग रहा है मेरी गुड़िया रानी को?” मैंने उसकी चूत पर चिकोटी काट कर पूछा.
“मुझे नहीं पता, आपका काम आप ही जानो!” वो शर्माते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया लेकिन लंड अपने हाथ से नहीं छोड़ा.
“अब दर्द तो नहीं हो रहा न?” मैंने पूछा तो उसने इन्कार में सिर हिला दिया पर बोली कुछ नहीं.
“कम्मो बेटा, आजा अब तू मेरे ऊपर बैठ कर राज कर मुझ पर!”
“क्या अंकल? मैं समझी नहीं?”
“अरे अब तू मेरे ऊपर चढ़ जा और मुझे चोद डाल अच्छे से!”
मैं कम्मो के हुस्न का मजा उसे अपने ऊपर बैठा कर लेना चाहता था. उसके उछलते मम्में देखना चाहता था, उसकी चूत लंड को कैसे लीलती है इसका रसास्वादन करना चाहता था.
मेरे कहने पर कम्मो मेरे ऊपर आकर बैठ गयी. ट्यूबलाइट की तेज रोशनी में उसके ठोस तने हुए उरोज, उसका सुगठित बदन दमक उठा. फिर उसने अपने दोनों हाथ उठा कर अपने बाल समेटे और उनका जूडा बना कर बालों में गांठ बांध ली.
वो नजारा भूलना मुश्किल है मेरे लिए. इस पोज में लड़की कितनी सुन्दर लगती है. वो आपके ऊपर नंगी बैठी हो और अपने बालों का जूडा बांध रही हो! ऐसे में उसकी बाहों के तले हिलते उसके स्तन, उसकी कांख के बाल, उसकी आर्मपिटस में उगा हुआ वो बालों का गुच्छा और वहां से निकलती उसके बदन की प्राकृतिक सुगन्ध… मैं तो धन्य हो गया वो सब देख महसूस करके!
इसके बाद कम्मो ने मोर्चा संभाल लिया, चुदाई की कमान अपने हाथो में ले ली; वो थोड़ी सी ऊपर उठी और मेरा लंड पकड़ कर उसने अपनी चूत के छेद पर सेट किया और बड़े आहिस्ता से बैठती गयी. मैंने महसूस किया कि मेरा टोपा उसकी रिसती चूत में गप्प से घुस गया.
कम्मो के मुंह पर दर्द के निशान उभरे पर उसने अपने दांत भींचे और ईईई ईईई ईईई जैसी आवाज करते हुए समूचा लंड लील गयी और फिर हांफती हुई सी मेरी छाती पर सिर टिका के सुस्ताने
लगी.
“शाबाश बेटा, ये हुई न कोई बात. अब तू मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर कर; ध्यान रखना लंड को चूत से बाहर मत निकलने देना!” मैंने उसे सीख दी.
समझदार छोरी थी तो मेरा मकसद फौरन समझ गयी और उसने अपने दोनों हाथ मेरी छाती पर टिकाये और कमर को ऊपर उठाया और फिर बैठ गयी; मेरा लंड किसी पिस्टन की तरह उसकी चूत में से बाहर निकला और फिर से वहीं जा छुपा.
कम्मो ने यही एक्शन बार बार दुहराया और फिर तेजी से मुझे चोदने लगी और फिर थोड़ी ही देर में किसी कामोनमत्त नवयौवना की भांति लज्जा का परित्याग कर कामुक आहें कराहें किलकारियां निकालती हुई मुझे चोदने लगी.
मैं बड़े आराम से उसकी नटखट चूचियों का उछालना कूदना देखता रहा; बीच बीच में मैं उसके निप्पलस खींच कर अपने सीने पर रगड़ने लगता और उसके कूल्हों के बीच की दरार को, उसकी गांड के झुर्रीदार छिद्र को अपनी उँगलियों से सहलाने लगता जिससे कम्मो की वासना और प्रचण्ड रूप ले लेती और वो किसी हिस्टीरिया के मरीज की तरह अपनी कमर चलाने लगती.
कई बार ऐसा हुआ कि मेरा लंड फिसल कर उसकी चूत से बाहर निकल गया लेकिन उसने जल्दी ही मेरे लंड की लेंग्थ के हिसाब से अपनी कमर उठाना और गिराना सीख लिया और फिर एक बार भी लंड को बाहर नहीं निकलने दिया. कम्मो ऐसे ही करीब पांच सात मिनट मुझे चोदती रही फिर थक कर उतर गयी मेरे ऊपर से.
“अंकल जी थक गयी मैं तो. अब आप आओ मेरे ऊपर!” वो मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई बोली.
कम्मो के संग चुदाई का पहला दौर ही काफी लम्बा खिंच गया था जिसकी मुझे कतई उम्मीद नहीं थी. समय बहुत हो चुका था. बारात लड़की वालों के द्वार पहुँचने वाली ही होगी, ऐसा सोच कर मैंने कम्मो को दबोच लिया और फचाक से उसकी चूत में लंड पेल कर उसे चोदने लगा; अब झड़ने की जल्दी मुझे थी सो मैंने ताबड़तोड़, आड़े तिरछे गहरे शॉट्स उसकी चूत में मारने शुरू किये; कम्मो किसी कुशल प्रतिद्वन्दी की तरह लगातार मेरे लंड से अपनी चूत लड़वाती रही.
“अंकल जी अंकल जी, मुझे कसके पकड़ लो आप, जमीन सी हिल रही है मेरे भीतर से कुछ तेज तेज निकल रहा है.” वो बोली और फिर वो झटके से मुझसे लिपट गयी.
और मुझे अपनी बांहों में पूरी शक्ति से कस लिया और अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट दीं.
“अरे बेटा रुक तो सही, मेरा पानी निकलने वाला है; मुझे बाहर निकालने दे.” मैंने उसे चेतावनी दी.
“मेरे भीतर ही भर दो आप तो!” वो मुझसे कस के लिपटते हुए बोली कि कहीं मैं उससे अलग न हट जाऊं.
“अरे तुझे कुछ हो गया तो?”
“होने दो … अंकल अब मेरी शादी होने वाली है; कुछ हो गया तो मैं अपने होने वाले को बुला भेजूंगी और सो जाऊँगी उसके साथ. वो तो कई बार मुझसे मिन्नतें कर चुका है मेरे साथ सोने की. पर अभी तक मैंने उसे हाथ भी न धरने दिया अपने ऊपर!”
कम्मो की बात सुन कर अब मुझे क्या चिंता होनी थी, मैंने आखिरी दस बीस धक्के और लगा कर अपना काम भी तमाम किया और मेरा लंड लावा उगलने लगा. उधर कम्मो की चूत के मस्स्ल्स फैल सिकुड़ कर मेरे लंड से वीर्य को निचोड़ने लगे, एक एक बूंद निचुड़ गयी उसकी चूत में और फिर उसकी चूत एकदम से सिकुड़ गयी और मेरा लंड शहीद होकर बाहर निकल गया.
इसके बाद हम अलग हो गये और कम्मो ने अपनी चूत पास पड़ी चादर से अच्छे से पौंछ डाली और ब्रा पैंटी पहन कर सलवार कुर्ता भी पहन लिया और बालों का जूडा खोल कर बाल फिर से बिखरा लिए.
मैंने भी लंड पौंछा और अपना सूट टाई बूट पहन के कम्मो को सहारा देते हुए बाहर ले आया.
कम्मो को चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी; अब ये तो होना ही था न. मैंने कम्मो को समझा दिया कि अगर कोई पूछे तो बोल देना कि डांस करते टाइम पैर मुड़ गया था.
धर्मशाला से बाहर निकले तो किस्मत से एक खाली रिक्शा मिल गया और हम लोग उस पर बैठ कर निकल लिए.
लड़की वालों के द्वार पर बारात पहुँचने ही वाली थी कि हम दोनों चुपके से बारात में शामिल हो गये और किसी को भी कानों कान खबर नहीं हुई कि कौन कहां गया था और कहां से आया.
प्यारी आरएसएस के प्यारे मित्रो, कम्मो की कथा यहीं समाप्त होती है. इस तरह शादी अटेंड करके मैं अगले दिन शाम की ट्रेन से अपने घर वापिस आ गया. हां आने से पहले मैंने कम्मो को हेयर रेमूविंग क्रीम और कैंची लाकर दे दी.
मेरी अदिति बहूरानी मेरे साथ नहीं आयीं क्योंकि उन्हें तो अपनी नयी भाभी के साथ कुछ दिन रुकना था, उसकी सुहागरात की तैयारियां भी उसी के जिम्मे थीं. अब मुझे इन बातों से क्या लेना देना. शादी के एक हफ्ते बाद मेरी बहू फ्लाइट से बैंगलोर चली गयी.
हां, कम्मो से व्हाट्सएप्प और फेसबुक पर आज भी खूब बातें होतीं हैं; लंड चूत चुदाई सब तरह की. अभी पिछले अप्रैल में उसकी शादी थी, मैं भी गया था उसके गांव; गया क्या … जाना पड़ा था उसने कसम दे दे कर जो बुलाया था.
शादी खूब अच्छी तरह से धूमधाम से हुई; हां कम्मो को चोदने का मौका दुबारा नहीं मिल सका.
हालांकि वो ससुराल जाने से पहले एक बार फिर से चुदना चाहती थी; लेकिन शादी की भीडभाड़ में अपना जुगाड़ फिट हो नहीं पाया; इसमें कुछ गलती मेरी भी रही कि मैं शादी के एक दिन पहले शाम को ही पहुंचा था सो उसके घर में खूब सारे रिश्तेदार थे और हमें अकेले कहीं जाना संभव ही नहीं था, शादी की रस्में जो चल रहीं थीं.
अगर मैं दो तीन दिन पहले चला जाता तो फिर पक्का उसे चोद कर ही आता. हां कम्मो ने इतना जरूर किया कि अपनी चूत हेयर रिमूवर से चिकनी बना कर मुझे जरूर दिखा दी एक बार और मेरा हाथ पकड़ कर वहां रख दिया, इस तरह मुझे उसकी चूत छूने और सहलाने का मौका एक मिनट के लिए जरूर मिला.
मैंने सोचा चलो इतना ही काफी है. क्या पता हम फिर कभी मिलें.दोस्तो आपको बता दु की कम्मो को लड़की और अदिती बहुरानी को लड़का हुआ जो मेरे चुदाई से हुये है.
मित्रो आपको यह कहानी अवश्य पसंद आई होगी ऐसा मेरा विश्वास है. कृपया अपने अपने सुझाव और कमेंट्स करे ताकि मैं अपनी अगली कहानियों में और सुधार ला सकू। धन्यवाद.