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राजीव सन्न रह गया फिर कमीनेपन से मुस्कुराया: ओह तो तुमने सब देख लिया। चलो अच्छा ही हुआ। हाँ मुझे और तुम्हारी दीदी दोनों को बल्कि सच कहूँ तो शिवा को भी बहुत मज़ा आया। अरे हम ये सब मज़े के लिए तो करते हैं।
चारु: लेकिन ये आप दीदी के साथ कैसे कर सकते हैं? वो तो आपकी बहू है ना?
राजीव: अरे बेटी बहू है तो क्या हुआ? है तो वो जवान औरत ही ना। उसे भी चुदाई का मज़ा चाहिए और मुझे भी चाहिए। बस हो गया मिलन और बन गया काम।
चारु: अंकल , और जीजा जी को भी इसपर कोई आपत्ति नहीं?
राजीव: अरे उसे तो बहुत मज़ा आता है । असली मज़ा तो वोहि लेता है।
चारु: हे भगवान! मेरा तो सिर ही चकरा गया था ये सब देखकर।
राजीव: चलो फिर भी मज़ा तो आया ही होगा ना देखकर। बाथरूम जाकर ऊँगली करी ही होगी। सच है ना?
चारु ने कोई जवाब नहीं दिया। तब तक वो बाज़ार पहुँच गए थे। अगले एक घंटे सामान ख़रीदने में चले गए। फिर राजीव सारा सामान एक जान पहचान वाले की दुकान पर रखा और चारु को लेकर एक रेस्तराँ में घुसा और एक कोने की टेबल पर बैठकर कोल्ड ड्रिंक ऑर्डर किया।
कोल्ड ड्रिंक पीते हुए वो बोला: बेटी मैंने पहले भी कहा था ना कि दुनिया में औरत और मर्द का एक ही रिश्ता सबसे ऊपर होता है और वो है चुदाई का। इसके सामने सब रिश्ते फीके पड़ जाते हैं।
चारु: पर अंकल आप दीदी के पिता समान हो ना? फिर ये सब क्यों?
राजीव: बेटी पिता समान हूँ ना अगर पिता भी होता तो भी मालिनी जैसे मस्त माल को छोड़ता नहीं।
अब चारु सन्न रह गयी: इसका मतलब अगर आपकी बेटी आपको अच्छी लगेगी तो आप उसके साथ भी ये सब-----
राजीव मुस्कुराया: हाँ बेटी उसके साथ भी ये सब करूँगा।
( वो सोचा कि उसके साथ करके उसको माँ भी बना चुका हूँ, पर अभी इसको ये सब बताना ठीक नहीं होगा) ।
चारु चुपचाप होकर सोच में पड़ गयी। राजीव उसके पास आकर उसके साथ वाली कुर्सी पर बैठा और उसकी जाँघ सहलाते हुए बोला: बेटी देखो जिस तरह से तुम उसका लंड सहला रही थी मुझे मालूम है कि तुम मज़ा करी थी, फिर इस बात को मानने में क्या हर्ज है।
चारु: अगर मान भी लूँ तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा? आपने तो सब देखा ही है।
अब राजीव का हौंसला बढ़ा:अरे बेटी इसलिए तो कह रहा हूँ कि जब इस काम में मज़ा आता है तो खुल कर कर मज़ा लो ना। यह कह कर वो उसकी जाँघों के बीच हाथ डालकर उसकी बुर दबा दिया। जींस के ऊपर से ही ये दबाव चारु को अंदर तक हिला दिया। वह बोली: आऽऽऽऽह अंकल हटाइए ना हाथ। कोई देख लेगा ।
राजीव: अरे बेटी मेरा हाथ टेबल के नीचे है कोई नहीं देख सकेगा । अच्छा ये बताओ कि करन के साथ क्या क्या किया?
वह अब उसकी बुर दबाकर उसको मस्ती से भर रहा था।
चारु: आऽऽह कुछ नहीं किया था उनके साथ।
राजीव : अरे वो मुझे कल फ़ोन किया था और सब बताया कि वो तुम्हारे साथ क्या क्या किया था। मुझे विश्वास नहीं हुआ इसीलिए तो तुमसे पूछ रहा हूँ बेटी।
चारु: उफफफफ अंकल आप मुझे बेटी बेटी कहते हैं और ये सब करते हैं। आऽऽऽऽह हाथ हटायिए ना प्लीज़।
राजीव: अरे बेटियाँ तो होती ही हैं मज़े देने के लिए। बताओ ना करन ने सच में इसको चूसा था क्या? वो यही बोल रहा था। वो उसकी बुर दबाते हुए बोला।
चारु: आऽऽऽऽऽह अंकल प्लीज़ उफफफफ हाँ चूसा था।
राजीव: उफफफफ सच? वाह । अच्छा पूरी पैंटी निकाली थी उसने या सिर्फ़ साइड से हटाकर चूसा था?अब वो अपना हाथ उसकी पीठ पर ले गया और टॉप के अंदर हाथ डालकर सहलाता हुआ ब्रा के स्ट्रैप को दबाने लगा। अब चारु बोली: उफफफफ पैंटी उतार दी थी। आऽऽह पर आप हटाओ ना कोई देख लेगा।
राजीव अब अपना हाथ सामने की ओर लाया और उसके चिकने पेट और नाभि को सहला कर बोला: वाऽऽऽह बेटी पूरी नंगी होकर मज़ा ले लिया। फिर वो तो तुम्हारी इस मुनिया में लंड भी डाला होगा? वो फिर से उसकी बुर के हिस्से को दबाकर बोला। वो उसकी जींस की जीप नीचे किया और हाथ अंदर डाला तो उसकी पैंटी पूरी गीली थी।
चारु: आऽऽऽह्ह नहीं वो नहीं डाले।
राजीव: क्या नहीं डाले? वो उसकी पैंटी में से उसकी बुर को मसलकर बोला।
चारु अब गरम हो चुकी थी। वो: आऽऽऽऽह अंकल लंड नहीं डाले।
अब राजीव ने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाला और पूछा: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटी कहाँ नहीं डाला उसने अपना लंड?
उसकी बुर खुजा कर बोला।
चारु अब पूरी गरम हो चुकी थी बोली: आऽऽऽऽऽह वहीं जहाँ आऽऽऽऽऽऽपकी उँगली है।
राजीव उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखा और वो उसे बेशर्मी से दबाने लगी पैंट के ऊपर से । वो बोला: आऽऽऽऽह बेटी क्या नाम है इसका? वो उसकी बुर के क्लिट को सहलाकर बोला।
चारु: उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ बुर आऽऽऽह।
राजीव : उफफफ बेटी तुम्हारी बुर तो आँसू बहा रही है। पूरी चड्डी गीली हो गयी है।
चारु: उफफफ अंकल हाथ बाहर निकालिए वरना आऽऽऽऽह मेरी पैंट गीली हो जाएगी। उस दिन करन अंकल के यहाँ भी ऐसा ही हो गया था और पूरी पैंट में मैंने जैसे सूसू कर दी थी। ये कहकर वो अपनी जाँघों को चिपका ली।
राजीव: अरे मेरा हाथ तो छोड़ो । देखो तुम्हारी बुर में फँस गया है।
चारु ने अपनी जाँघें फैला दी और वो अपना हाथ बाहर लाया और अपनी गीली ऊँगलियाँ उसे दिखाकर चाटने लगा और बोला: वाह क्या स्वाद है बेटी तुम्हारी बुर। म्म्म्म्म्म।
चारु अब जल्दी से अपनी पैंटी ठीक की और ज़िप को उठा कर पैंट बंद की।
कोल्ड ड्रिंक ख़त्म हो चुकी थी । चारु खड़ी हुई और राजीव उसकी गाँड़ को टेबल में नीचे सा दबाकर कहा: बेटी अब तुझे मज़ा देना है। बताओ कब का प्रोग्राम बनाऊँ?
चारु: ओह अंकल अभी तो चलिए यहाँ से । कोई देख लेगा।
राजीव उसकी गाँड़ की दरार ने हाथ डाला और बोला: बेटी करन से मज़ा ली हो ना। एक बार मुझसे भी लो ज़िन्दगी भर याद रखोगी ।
चारु बाहर आकर: अंकल मैंने आपका वो देखा है। करन अंकल का तो काफ़ी छोटा है आपके सामने। पता नहीं दीदी कैसे ले पाती है आपका? वैसे जिजु का भी आपके जैसा ही बड़ा सा है।
राजीव गर्व से : अरे उसका भी तो बड़ा ही होगा ना आख़िर मेरा ही बेटा है।
चारु चुप चाप चलती रही। गली सुनसान ही थी।
राजीव: वैसे बेटी अभी तुमको मैं चोदूँगा नहीं। बस वैसे ही मज़ा दूँगा जैसे कि करन ने दिया था । और हाँ मैं तुमको उसी दिन चोदूँगा जब तुम ख़ुद मेरा लंड अपने हाथ में लेकर अपनी बुर में लगाकर बोलोगी कि अंकल अंदर डालो। मैं तभी डालूँगा ये मेरा वादा है।
चारु मुस्कुराती हुई अपनी गाँड़ मटका कर चलती हुई बोली: वो भी देखंगे अंकल मैं आपको कभी नहीं बोलूँगी कि अंदर डालो। मेरी तो फट ही जाएगी। आपका है ही इतना बड़ा।
राजीव: अरे बेटी लंड जितना बड़ा हो लड़की को उतना ही ज़्यादा मज़ा आता है। समझी?
तभी सामने से शकील भाई आते दिखे उनके साथ एक सलवार क़ुर्ती में एक लड़की थी। शकील भाई की टेलरिंग की शॉप थी और राजीव की पत्नी हमेशा वहीं जाती थी कपड़े सिलवाने। अब वो ६५ का हो चला था। उसके साथ की लड़की ताज़ा ताज़ा जवान हुई थी उसकी उम्र अब १८ के आसपास रही होगी। पर वो काफ़ी छोटी सी लग रही थी। मासूमियत की पुतली ।
शकील चारु के अमरूदों को घूरते हुए: भाई कहाँ से आ रहे हो?
राजीव भी उस मासूम सी लड़की के दुपट्टे से झाँकते अमरूदों को देखा और बोला: बस भाई बाज़ार से आ रहा हूँ। ये कौन है मैंने पहचाना नहीं।
शकील उस लड़की की कमर सहलाकर: अरे ये मेरी पोती है। ये अपने वालिद के साथ तीन दिन पहले ही आयी है । मैं इसे बाज़ार दिखाने ले जा रहा हूँ।
शकील ने जिस तरह से उस लड़की की कमर को सहलाया तो राजीव का लंड हिलने सा लगा। वो भी अपने दादा से चिपकी हुई खड़ी थी।
शकील: ये लड़की कौन है भाई? वो अब जाँघों के जोड़ पर उभरे हुए उसकी बुर को देखकर बोला।
राजीव: अरे ये मेरी बेटी जैसी है। मेरी बहु की बहन है।
शकील: भाभी के जाने के बाद तो अपने हमारी दुकान में आना ही बंद कर दिया। अपनी बहु और इसको भी लाओ ना। एक से एक ड्रेस सिलूँगा इनके लिए।
फिर शकील चारु से बोला: देखो रूहि की ड्रेस ये मैंने ही सिली है। वो रूहि के दुपट्टे को हटाया और उनको दिखाकर बोला: देखो कितनी मस्त फ़िटिंग है। उसके अमरूद क़ुर्ती में मस्त तने हुए साफ़ दिखाई दे रहे थे। फिर वो उसे पलटा और क़ुर्ती को ऐसे उठाया कि गाँड़ में चिपकी सलवार दिखने लगी और बोला: देखो पीछे की फ़िटिंग भी कितनी मस्त है।
राजीव का लंड कपड़े में फँसी हुई उसकी गोल गोल गाँड़ को देखकर अकड़ गया। चड्डी की लाइनिंग भी साफ़ दिख रही थी। वो अपना लंड एडजस्ट करते हुए बोला: बेटी चारु , सही में बहुत बढ़िया फ़िटिंग है। तुम भी इनके यहाँ एक सूट सिलवा लेना। ठीक है?
चारु: जी ठीक है।
शकील भूकि नज़रों से चारु के बदन को घूरता हुआ बोला: वैसे बेटी तुम्हारा बदन तो अभी जवान हो रहा है। इस मस्त फ़िगर पर सब कपड़े जंचेंगे।
राजीव : अच्छा भाई मैं इनको लेकर आऊँगा। फिर वो लार टपकाते हुए रूहि को बोला: बेटी अभी कितने दिन यहाँ रहोगी?
रूहि : अंकल अभी मैं पूरी छूट्टियाँ दादू के पास ही रहूँगी। वो शकील से चिपकती हुई बोली।
राजीव मन ही मन सोचा कि उफफफफ लगता है साले बुढ़ढ़े ने अपनी पोती को शीशे में उतार लिया है। साला कमीना । उसे याद था कि उसे हमेशा अपनी बीवी पर शक होता था जब वो इस कमीने से कपड़े सिलवाती थी कि कहीं वो इस कुत्ते से लगवा तो नहीं रही है। हालाँकि उसे कभी सबूत नहीं मिला था पर एक बार वो जब इसके दुकान से आयी थी तो उसकी चूचियाँ लाल थी जो रात को चुदाई के समय उसने देखा था। वो बोली थी कि शायद कोई एलर्जी हो गयी है। बाद में उसने वॉशिंग मशीन में चेक किया था और उसकी पैंटी में कामरस के दाग़ पाए थे। साला कमीना कहीं का ज़रूर अपनी पोती को भी लगा रहा होगा।
शकील: भाई किस ख़याल में खो गए? बच्चों को लेकर आना। अच्छा अब चलता हूँ।
राजीव भी अच्छा कहकर चल पड़ा। पता नहीं थोड़ी देर बाद वो पलटा और देखा कि सुनसान गली में शकील का हाथ अपनी पोती की गोल गाँड़ पर था।
वो आगे चल रही सामान उठायी चारु के पास आया और उसकी गाँड़ सहलाकर बोला: पता है ये शकील अपनी पोती को ज़रूर चोद रहा होगा।
चारु उसका हाथ अपनी गाँड़ से हटायी और बोली: छी आप कैसी बात करते है? ऐसा भी कहीं होता है?
राजीव हँसकर: अरे बेटी कमसिन जवानी तो सबको पागल बना देती है। फिर वो उसका बाप हो या भाई या दादा।
चारु हैरान से सेक्स के बारे में इन सब नयी जानकारीयों पा कर हैरान सी होकर चलती रही।
अब चारु चुप ही रह गयी क्योंकि बातों ही बातों में घर आ गया था।