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बहू नगीना और ससुर कमीना

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राजीव सन्न रह गया फिर कमीनेपन से मुस्कुराया: ओह तो तुमने सब देख लिया। चलो अच्छा ही हुआ। हाँ मुझे और तुम्हारी दीदी दोनों को बल्कि सच कहूँ तो शिवा को भी बहुत मज़ा आया। अरे हम ये सब मज़े के लिए तो करते हैं।

चारु: लेकिन ये आप दीदी के साथ कैसे कर सकते हैं? वो तो आपकी बहू है ना?

राजीव: अरे बेटी बहू है तो क्या हुआ? है तो वो जवान औरत ही ना। उसे भी चुदाई का मज़ा चाहिए और मुझे भी चाहिए। बस हो गया मिलन और बन गया काम।

चारु: अंकल , और जीजा जी को भी इसपर कोई आपत्ति नहीं?

राजीव: अरे उसे तो बहुत मज़ा आता है । असली मज़ा तो वोहि लेता है।

चारु: हे भगवान! मेरा तो सिर ही चकरा गया था ये सब देखकर।

राजीव: चलो फिर भी मज़ा तो आया ही होगा ना देखकर। बाथरूम जाकर ऊँगली करी ही होगी। सच है ना?

चारु ने कोई जवाब नहीं दिया। तब तक वो बाज़ार पहुँच गए थे। अगले एक घंटे सामान ख़रीदने में चले गए। फिर राजीव सारा सामान एक जान पहचान वाले की दुकान पर रखा और चारु को लेकर एक रेस्तराँ में घुसा और एक कोने की टेबल पर बैठकर कोल्ड ड्रिंक ऑर्डर किया।

कोल्ड ड्रिंक पीते हुए वो बोला: बेटी मैंने पहले भी कहा था ना कि दुनिया में औरत और मर्द का एक ही रिश्ता सबसे ऊपर होता है और वो है चुदाई का। इसके सामने सब रिश्ते फीके पड़ जाते हैं।

चारु: पर अंकल आप दीदी के पिता समान हो ना? फिर ये सब क्यों?

राजीव: बेटी पिता समान हूँ ना अगर पिता भी होता तो भी मालिनी जैसे मस्त माल को छोड़ता नहीं।

अब चारु सन्न रह गयी: इसका मतलब अगर आपकी बेटी आपको अच्छी लगेगी तो आप उसके साथ भी ये सब-----

राजीव मुस्कुराया: हाँ बेटी उसके साथ भी ये सब करूँगा।

( वो सोचा कि उसके साथ करके उसको माँ भी बना चुका हूँ, पर अभी इसको ये सब बताना ठीक नहीं होगा) ।

चारु चुपचाप होकर सोच में पड़ गयी। राजीव उसके पास आकर उसके साथ वाली कुर्सी पर बैठा और उसकी जाँघ सहलाते हुए बोला: बेटी देखो जिस तरह से तुम उसका लंड सहला रही थी मुझे मालूम है कि तुम मज़ा करी थी, फिर इस बात को मानने में क्या हर्ज है।

चारु: अगर मान भी लूँ तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा? आपने तो सब देखा ही है।

अब राजीव का हौंसला बढ़ा:अरे बेटी इसलिए तो कह रहा हूँ कि जब इस काम में मज़ा आता है तो खुल कर कर मज़ा लो ना। यह कह कर वो उसकी जाँघों के बीच हाथ डालकर उसकी बुर दबा दिया। जींस के ऊपर से ही ये दबाव चारु को अंदर तक हिला दिया। वह बोली: आऽऽऽऽह अंकल हटाइए ना हाथ। कोई देख लेगा ।

राजीव: अरे बेटी मेरा हाथ टेबल के नीचे है कोई नहीं देख सकेगा । अच्छा ये बताओ कि करन के साथ क्या क्या किया?

वह अब उसकी बुर दबाकर उसको मस्ती से भर रहा था।

चारु: आऽऽह कुछ नहीं किया था उनके साथ।

राजीव : अरे वो मुझे कल फ़ोन किया था और सब बताया कि वो तुम्हारे साथ क्या क्या किया था। मुझे विश्वास नहीं हुआ इसीलिए तो तुमसे पूछ रहा हूँ बेटी।

चारु: उफफफफ अंकल आप मुझे बेटी बेटी कहते हैं और ये सब करते हैं। आऽऽऽऽह हाथ हटायिए ना प्लीज़।

राजीव: अरे बेटियाँ तो होती ही हैं मज़े देने के लिए। बताओ ना करन ने सच में इसको चूसा था क्या? वो यही बोल रहा था। वो उसकी बुर दबाते हुए बोला।

चारु: आऽऽऽऽऽह अंकल प्लीज़ उफफफफ हाँ चूसा था।

राजीव: उफफफफ सच? वाह । अच्छा पूरी पैंटी निकाली थी उसने या सिर्फ़ साइड से हटाकर चूसा था?अब वो अपना हाथ उसकी पीठ पर ले गया और टॉप के अंदर हाथ डालकर सहलाता हुआ ब्रा के स्ट्रैप को दबाने लगा। अब चारु बोली: उफफफफ पैंटी उतार दी थी। आऽऽह पर आप हटाओ ना कोई देख लेगा।

राजीव अब अपना हाथ सामने की ओर लाया और उसके चिकने पेट और नाभि को सहला कर बोला: वाऽऽऽह बेटी पूरी नंगी होकर मज़ा ले लिया। फिर वो तो तुम्हारी इस मुनिया में लंड भी डाला होगा? वो फिर से उसकी बुर के हिस्से को दबाकर बोला। वो उसकी जींस की जीप नीचे किया और हाथ अंदर डाला तो उसकी पैंटी पूरी गीली थी।

चारु: आऽऽऽह्ह नहीं वो नहीं डाले।

राजीव: क्या नहीं डाले? वो उसकी पैंटी में से उसकी बुर को मसलकर बोला।

चारु अब गरम हो चुकी थी। वो: आऽऽऽऽह अंकल लंड नहीं डाले।

अब राजीव ने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाला और पूछा: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटी कहाँ नहीं डाला उसने अपना लंड?

उसकी बुर खुजा कर बोला।

चारु अब पूरी गरम हो चुकी थी बोली: आऽऽऽऽऽह वहीं जहाँ आऽऽऽऽऽऽपकी उँगली है।

राजीव उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखा और वो उसे बेशर्मी से दबाने लगी पैंट के ऊपर से । वो बोला: आऽऽऽऽह बेटी क्या नाम है इसका? वो उसकी बुर के क्लिट को सहलाकर बोला।

चारु: उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ बुर आऽऽऽह।

राजीव : उफफफ बेटी तुम्हारी बुर तो आँसू बहा रही है। पूरी चड्डी गीली हो गयी है।

चारु: उफफफ अंकल हाथ बाहर निकालिए वरना आऽऽऽऽह मेरी पैंट गीली हो जाएगी। उस दिन करन अंकल के यहाँ भी ऐसा ही हो गया था और पूरी पैंट में मैंने जैसे सूसू कर दी थी। ये कहकर वो अपनी जाँघों को चिपका ली।

राजीव: अरे मेरा हाथ तो छोड़ो । देखो तुम्हारी बुर में फँस गया है।

चारु ने अपनी जाँघें फैला दी और वो अपना हाथ बाहर लाया और अपनी गीली ऊँगलियाँ उसे दिखाकर चाटने लगा और बोला: वाह क्या स्वाद है बेटी तुम्हारी बुर। म्म्म्म्म्म।

चारु अब जल्दी से अपनी पैंटी ठीक की और ज़िप को उठा कर पैंट बंद की।

कोल्ड ड्रिंक ख़त्म हो चुकी थी । चारु खड़ी हुई और राजीव उसकी गाँड़ को टेबल में नीचे सा दबाकर कहा: बेटी अब तुझे मज़ा देना है। बताओ कब का प्रोग्राम बनाऊँ?

चारु: ओह अंकल अभी तो चलिए यहाँ से । कोई देख लेगा।

राजीव उसकी गाँड़ की दरार ने हाथ डाला और बोला: बेटी करन से मज़ा ली हो ना। एक बार मुझसे भी लो ज़िन्दगी भर याद रखोगी ।

चारु बाहर आकर: अंकल मैंने आपका वो देखा है। करन अंकल का तो काफ़ी छोटा है आपके सामने। पता नहीं दीदी कैसे ले पाती है आपका? वैसे जिजु का भी आपके जैसा ही बड़ा सा है।

राजीव गर्व से : अरे उसका भी तो बड़ा ही होगा ना आख़िर मेरा ही बेटा है।

चारु चुप चाप चलती रही। गली सुनसान ही थी।

राजीव: वैसे बेटी अभी तुमको मैं चोदूँगा नहीं। बस वैसे ही मज़ा दूँगा जैसे कि करन ने दिया था । और हाँ मैं तुमको उसी दिन चोदूँगा जब तुम ख़ुद मेरा लंड अपने हाथ में लेकर अपनी बुर में लगाकर बोलोगी कि अंकल अंदर डालो। मैं तभी डालूँगा ये मेरा वादा है।

चारु मुस्कुराती हुई अपनी गाँड़ मटका कर चलती हुई बोली: वो भी देखंगे अंकल मैं आपको कभी नहीं बोलूँगी कि अंदर डालो। मेरी तो फट ही जाएगी। आपका है ही इतना बड़ा।

राजीव: अरे बेटी लंड जितना बड़ा हो लड़की को उतना ही ज़्यादा मज़ा आता है। समझी?

तभी सामने से शकील भाई आते दिखे उनके साथ एक सलवार क़ुर्ती में एक लड़की थी। शकील भाई की टेलरिंग की शॉप थी और राजीव की पत्नी हमेशा वहीं जाती थी कपड़े सिलवाने। अब वो ६५ का हो चला था। उसके साथ की लड़की ताज़ा ताज़ा जवान हुई थी उसकी उम्र अब १८ के आसपास रही होगी। पर वो काफ़ी छोटी सी लग रही थी। मासूमियत की पुतली ।

शकील चारु के अमरूदों को घूरते हुए: भाई कहाँ से आ रहे हो?

राजीव भी उस मासूम सी लड़की के दुपट्टे से झाँकते अमरूदों को देखा और बोला: बस भाई बाज़ार से आ रहा हूँ। ये कौन है मैंने पहचाना नहीं।

शकील उस लड़की की कमर सहलाकर: अरे ये मेरी पोती है। ये अपने वालिद के साथ तीन दिन पहले ही आयी है । मैं इसे बाज़ार दिखाने ले जा रहा हूँ।

शकील ने जिस तरह से उस लड़की की कमर को सहलाया तो राजीव का लंड हिलने सा लगा। वो भी अपने दादा से चिपकी हुई खड़ी थी।

शकील: ये लड़की कौन है भाई? वो अब जाँघों के जोड़ पर उभरे हुए उसकी बुर को देखकर बोला।

राजीव: अरे ये मेरी बेटी जैसी है। मेरी बहु की बहन है।

शकील: भाभी के जाने के बाद तो अपने हमारी दुकान में आना ही बंद कर दिया। अपनी बहु और इसको भी लाओ ना। एक से एक ड्रेस सिलूँगा इनके लिए।

फिर शकील चारु से बोला: देखो रूहि की ड्रेस ये मैंने ही सिली है। वो रूहि के दुपट्टे को हटाया और उनको दिखाकर बोला: देखो कितनी मस्त फ़िटिंग है। उसके अमरूद क़ुर्ती में मस्त तने हुए साफ़ दिखाई दे रहे थे। फिर वो उसे पलटा और क़ुर्ती को ऐसे उठाया कि गाँड़ में चिपकी सलवार दिखने लगी और बोला: देखो पीछे की फ़िटिंग भी कितनी मस्त है।

राजीव का लंड कपड़े में फँसी हुई उसकी गोल गोल गाँड़ को देखकर अकड़ गया। चड्डी की लाइनिंग भी साफ़ दिख रही थी। वो अपना लंड एडजस्ट करते हुए बोला: बेटी चारु , सही में बहुत बढ़िया फ़िटिंग है। तुम भी इनके यहाँ एक सूट सिलवा लेना। ठीक है?

चारु: जी ठीक है।

शकील भूकि नज़रों से चारु के बदन को घूरता हुआ बोला: वैसे बेटी तुम्हारा बदन तो अभी जवान हो रहा है। इस मस्त फ़िगर पर सब कपड़े जंचेंगे।

राजीव : अच्छा भाई मैं इनको लेकर आऊँगा। फिर वो लार टपकाते हुए रूहि को बोला: बेटी अभी कितने दिन यहाँ रहोगी?

रूहि : अंकल अभी मैं पूरी छूट्टियाँ दादू के पास ही रहूँगी। वो शकील से चिपकती हुई बोली।

राजीव मन ही मन सोचा कि उफफफफ लगता है साले बुढ़ढ़े ने अपनी पोती को शीशे में उतार लिया है। साला कमीना । उसे याद था कि उसे हमेशा अपनी बीवी पर शक होता था जब वो इस कमीने से कपड़े सिलवाती थी कि कहीं वो इस कुत्ते से लगवा तो नहीं रही है। हालाँकि उसे कभी सबूत नहीं मिला था पर एक बार वो जब इसके दुकान से आयी थी तो उसकी चूचियाँ लाल थी जो रात को चुदाई के समय उसने देखा था। वो बोली थी कि शायद कोई एलर्जी हो गयी है। बाद में उसने वॉशिंग मशीन में चेक किया था और उसकी पैंटी में कामरस के दाग़ पाए थे। साला कमीना कहीं का ज़रूर अपनी पोती को भी लगा रहा होगा।

शकील: भाई किस ख़याल में खो गए? बच्चों को लेकर आना। अच्छा अब चलता हूँ।

राजीव भी अच्छा कहकर चल पड़ा। पता नहीं थोड़ी देर बाद वो पलटा और देखा कि सुनसान गली में शकील का हाथ अपनी पोती की गोल गाँड़ पर था।

वो आगे चल रही सामान उठायी चारु के पास आया और उसकी गाँड़ सहलाकर बोला: पता है ये शकील अपनी पोती को ज़रूर चोद रहा होगा।

चारु उसका हाथ अपनी गाँड़ से हटायी और बोली: छी आप कैसी बात करते है? ऐसा भी कहीं होता है?

राजीव हँसकर: अरे बेटी कमसिन जवानी तो सबको पागल बना देती है। फिर वो उसका बाप हो या भाई या दादा।

चारु हैरान से सेक्स के बारे में इन सब नयी जानकारीयों पा कर हैरान सी होकर चलती रही।

अब चारु चुप ही रह गयी क्योंकि बातों ही बातों में घर आ गया था।

 


कुछ दिन ऐसे ही बीते ।राजीव चारु को गंदी तस्वीरें भेजता और करन गंदे मेसेज । उसकी सेक्स की भूक को दोनों कमीने बढ़ाते ही रहे।

उस दिन दोपहर के तीन बजे थे । सब खाना खा चुके थे और तभी मुन्नी स्कूल से आयी। राजीव, मालिनी और चारु टी वी देख रहे थे। चारु उठी और मुन्नी के लिए खाना लगाने गयी। मालिनी थकान का बोल कर अपने कमरे में चली गयी। अब उसकी ड़िलीवरी में बस कुछ दिन ही रह गए थे।

चारु किचन में खाना गरम कर रही थी अपनी बहन के लिए। पता नहीं राजीव को क्या ख़ुराफ़ात सूझी कि वो चुपचाप खिड़की से हल्का सा पर्दा हटा कर मुन्नी के कमरे में झाँकने लगा। अंदर का दृश्य मस्त कर देने वाला था। मुन्नी ने अपना टॉप उतार दिया था और उसकी छोटी सी ब्रा में क़ैद सख़्त अमरूद बहुत मादक दिख रहे थे । अब वो अपना स्कर्ट भी उतारी और सिर्फ़ अंडर्गार्मेंट्स में वो बहुत ही सेक्सी दिख रही थी। वो शीशे में अपनी नयी नयी जवानी को निहार रही थी। उसकी गोरी गोल गाँड़ पैंटी से भी बहुत मस्त लग रही थी। उसकी पैंटी उसकी गाँड़ की दरार में फँसी हुई थी और बहुत मादक दिख रही थी। वो अपने आप को आगे से निहारी और अपने सख़्त अमरूदों को ब्रा में ठीक से एडजस्ट किया और फिर घूमकर अपना पिछवाड़ा देखने की कोशिश की। राजीव को उसकी पैंटी सामने से गीली सी लगी। तभी उसने अपनी गाँड़ में फँसी हुई पैंटी को बाहर निकाला और फिर वहाँ सामने में हाथ लगाया और गीलेपन का अहसास की। अब वो आलमारी से एक धुली हुई पैंटी निकाली और शीशे के सामने आकर वो अपनी पैंटी निकाल दी। राजीव के लंड ने तो मानो ज़ोरदार झटका मारा। उफफफफ क्या मस्त जवान चिड़िया है? क्या गाँड़ है। सामने में शीशे में उसकी फूलि हुई फुद्दी थोड़े से काले बालों के साथ काफ़ी मस्त दिख रही थी। वो मानो पागल सा हो गया। अब वो अपनी फुद्दी पर स्कर्ट को फिराकर उसे साफ़ की और साफ़ पैंटी पहन ली।

अब फिर पहले घर का एक स्कर्ट पहना जो शायद थोड़ा पुराना था। वो स्कर्ट उसे टाइट था क्योंकि उसकी कमर और गाँड़ अब उम्र के हिसाब से बड़े हो चले थे जो कि उन पुराने कपड़ों में समा नहीं रहे थे। फिर उसने टॉप पहना । वो भी उसे टाइट ही था। उसके अमरूद अब काफ़ी बड़े हो गए थे और उस टाइट टॉप को मानो फाड़ने ही वाले थे। अब वो अपने आप को शीशे में देखी और मुस्कुरा कर अपनी चूचियों को एक आख़री बार एडजस्ट किया और बाल में कंघी फेरकर इठलाती हुई बाहर को आने लगी। बाहर आने के पहले उसने मैले कपड़े उठाए और पैंटी को उसमें छिपा दिया।

राजीव वहाँ से हट गया और आकर सोफ़े में बैठ गया। उधर मुन्नी बाथरूम में अपने स्कूल यूनीफ़ॉर्म को लेकर गयी। उसकी पैंटी उसने उसके अंदर ही छिपा कर लाई थी। वो कपड़े वॉशिंग मशीन में डाली और मुँह हाथ धोकर खाना खाने लगी। चारु उसके पास बैठ कर उसके स्कूल के बारे में पूछने लगी। दोनों बहने खाना खाते हुए बातें करने लगीं। अब राजीव उठकर उसी बाथरूम में गया और दरवाज़ा बंद किया और वॉशिंग मशीन से मुन्नी के कपड़े निकाले और स्कर्ट में छिपाई हुई पैंटी को बाहर निकाला और ध्यान से उसके सामने के हिस्से में लगे हुए गीले दाग़ को देखा और नाक के पास ले जाकर सूँघा और अपने खड़े लंड को दबाने लगा। वो सोचा कि इसका मतलब मुन्नी आज मज़ा लेकर आयी है। पर किसके साथ और कहाँ? वो अब पैंटी को अपने कुर्ते की जेब में डाला।बिना चड्डी की लूँगी में लंड सही किया और बाहर आकर सोफ़े में बैठ कर टी वी देखने लगा।

अब वो सोच रहा था कि मुन्नी को कैसे अकेले में पकड़ा जाए। तभी चारु ने मुँह फाड़कर उबासी ली और बोली: बहुत नींद आ रही है चल जल्दी खा।

मुन्नी: आप सो जाओ ना मैं खाकर बर्तन सम्भाल लूँगी।

राजीव के लंड ने यह सुनकर झटका मारा। अब चारु उठकर कमरे में सोने चली गयी और मुन्नी खाना खाकर किचन में बर्तन सम्भाली और वापस आकर राजीव के सामने वाले सोफ़े पर बैठकर टी वी देखने लगी।

राजीव : लो बेटी रिमोट ले लो जो देखना है देखो।

मुन्नी उठकर रिमोट लेने आयी और तभी राजीव ने उसका हाथ पकड़कर अपने पास खींचा और बग़ल में बिठा लिया। मुन्नी थोड़ा सा हैरान हुई और बोली: क्या हुआ अंकल?

राजीव: बेटी तुमसे कुछ पूछना था।

मुन्नी: जी पूछिए।

राजीव: बेटी स्कूल ठीक तो है ना? कोई परेशानी तो नहीं?

मुन्नी: नहीं अंकल सब ठीक है। आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?

राजीव: बेटी वो क्या है ना, अब तुम जवान हो गयी हो । इस उम्र में लड़के और कई बार टीचर भी जवान लड़की को तंग करते हैं। तुम्हारे साथ कोई कुछ ऐसा नहीं तो कर रहा है?

मुन्नी: वो वो ऐसा कुछ नहीं है अंकल।

राजीव: बेटी झूठ मत बोलो। मुझे सब सच बता दो। वो उसकी जाँघ स्कर्ट के ऊपर से सहला कर बोला।

मुन्नी: अंकल वो वो –।

राजीव: बेटी क्यों हिचक रही हो ? देखो ये तुम्हारी पैंटी क्या कह रही है। ये कहते हुए वो जेब से पैंटी निकाला और उसे दिखाकर बोला: देखो ये गीला दाग़ बता रहा है कि आज स्कूल में या बस में तुम्हारे साथ कुछ हुआ है जिसके कारण तुम अपनी पैंटी गीली कर बैठी। फिर वो उसे नाक के पास के जाकर सूँघा और बोला: आऽऽऽह क्या मस्त ख़ुशबू है तुम्हारे काम रस और सू सू की मिली जुली । बताओ ऐसा क्या हुआ कि तुम अपनी पैंटी गीली कर बैठी? राजीव उसकी जाँघ सहलाते हुए ऊपर की तरफ़ अपने हाथ ले जाकर बोला।

मुन्नी: अंकल वो वो आज बस में एक टीचर मेरे पास आकर बैठी और वो वो ---

राजीव: टीचर की उम्र क्या रही होगी?

मुन्नी: मेरी मम्मी की उम्र की होंगी। उनकी बेटी मेरे क्लास में है।

राजीव उसकी पैंटी तक अपने हाथ पहुँचाकर बोला: फिर क्या हुआ? वो पैंटी के ऊपर से उसकी बुर सहलाकर मस्त हो गया था।

मुन्नी: वो मुझसे बात करने लगी। फिर बात करते हुए पूछी कि मेरा कोई बॉय फ़्रेंड है क्या? मैं नहीं में सिर हिलाई। फिर वो मुझसे गंदी बातें करने लगी।

राजीव उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को दबाकर कहा: कैसी गंदी बातें? बताओ ना बेटी।

मुन्नी: आऽऽऽह अंकल वो मेरी मेरी छातियों को सहलाकर बोली थीं कि अगर कोई बीएफ़ नहीं है तो ये इतनी बड़ी कैसे हो गयी? फिर वो मेरी जाँघे ऐसे ही सहलायीं जैसे आप अभी कर रहे हो। आऽऽऽऽह ।

राजीव : वो यहाँ भी सहलायी थी क्या? वो उसकी बुर सहलाकर बोला।

मुन्नी: उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ हाँआऽऽऽऽऽऽ वोओओओओओ भीइइइइइइइ।

अब राजीव की ऊँगली उसकी पैंटी के अंदर थीं और वह वहाँ छेड़खानी करने लगा। उसकी नर्म नर्म झाँटें उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

मुन्नी अब अपनी कमर उठाकर आऽऽऽहहह करने लगी।

राजीव: तुमने भी उसकी बुर सहलाई?

मुन्नी: हाँ वो अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर मेरा हाथ अपनी पैंटी के अंदर डाली थी और मैं भी वहाँ ऊँगली डाली थी। उफफक क्या गरम था उनके अंदर का हिस्सा। आऽऽऽऽऽह अंकल अब बस करिए ना प्लीज़ ।

राजीव : बस में किसी ने देखा नहीं तुम दोनों को?

मुन्नी: अंकल आज मेरी बस छूट गयी थी तो मैं टीचर्ज़ की स्टाफ़ बस से आयी थी और हम पीछे अकेले बैठे थे। बस में कुछ टीचर्ज़ सामने बैठी थीं।

राजीव: फिर क्या हुआ? वो अब उसकी क्लिट को सहलाकर बोला।

मुन्नी: वो मेरी यहाँ ऊँगली कर रही थी और मैं उनकी वहाँ । थोड़ी देर बाद टीचर आऽऽऽऽह कहती हुई मेरा पूरा हाथ भिगो दिया। और मेरी भी पैंटी गीली हो गयी। फिर अंकल वो बोली कि किसी को बताना मत । ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आऽऽऽऽऽऽहाह मैं मरीइइइइइइइ। वह अपनी कमर उठाकर झड़ने लगी।

राजीव का पूरा हाथ भीग गया था। वो उसे चाटने लगा। मुन्नी शर्मा कर वहाँ से भाग गयी और बाथरूम में चली गयी। राजीव अब उठकर उसके बाथरूम के सामने इंतज़ार करने लगा। जब वो बाहर आयी तो राजीव को देखकर चौंकी। राजीव उसे लेकर वापस बाथरूम में खींच लिया और फिर उसको अपनी बाँहों में जकड़कर उसे चूमने लगा। मुन्नी ने कोई विरोध नहीं किया। अब वो उसके टॉप को उठाया और उसकी मस्त चूचियों को ब्रा के ऊपर से चूमा और फिर ब्रा से उसके सख़्त अमरूदों को बाहर किया और फिर दबाकर उनको चूसने लगा। मुन्नी आऽऽऽह कर उठी । उसने जी भर के उसके निपल्ज़ को मसला और उनको लाल कर दिया।

अब राजीव नीचे बैठा और उसने उसका स्कर्ट उठाया और मुन्नी को कहा: बेटी ज़रा इसे ऐसे ही ऊपर करके पकड़े रहो।

मुन्नी को भी अब मज़ा आ रहा था । आज पहली बार कोई उसकी फुद्दी को इस तरह से नंगी देख रहा था। वो चुपचाप स्कर्ट उठाकर खड़ी रही। अब राजीव ने उसकी पैंटी को नीचे किया और उसकी कोमल प्यारी सी मासूम फुद्दी को देखकर मस्ती से उसे सहलाने लगा और बालों को एक तरफ़ को करके उसकी फूली हुई फुद्दी को मस्ती से देखा और फिर चूमने लगा और बोला: बेटी ये बाल साफ़ कर लेना। हमारी बहु के पास क्रीम है । उसे लेकर साफ़ कर लेना ।

मुन्नी: आह ठीक है अंकल कर लूँगी। पर आपको कैसे पता कि दीदी क्रीम यूज़ करती हैं?

राजीव: अरे बेटी एक बार मैं उसके बाथरूम में गया था तो वहाँ वो क्रीम देखा था। तभी समझ गया था कि बहु वो क्रीम इस्तेमाल करती होगी।

वो सोचा कि तुमको क्या पता की उसके झाँटे मैं ही कितनी दफ़ा साफ़ कर चुका हूँ। और थोड़ी सी पुरानी हो जाओ तो रानी बिटिया तुम्हारी भी मैं ही साफ़ करूँगा। वो मन ही मन सोचकर मुस्कुराया।

अब वो मुन्नी की बुर को मस्ती से चूमने लगा। मुन्नी उइइइइइइइ करके अपनी गाँड़ हिलाने लगी। अब वो उसकी फाँकों को अलग करके उसके बीच जीभ डालकर उसे मस्ती से भरने लगा। उसके दोनों हाथ अब उसकी एक एक गोल गोल गाँड़ पर चिपक गए थे । वह उनको मज़े से दबाकर उसकी बुर की गहराई को जीभ से कुरेद रहा था। मुन्नी की घुटी हुई सिसकियाँ निकले जा रही थी।

अब वो एक एक हाथ उसकी चूचियाँ पर भी रखा और उसकी बुर को लम्बाई में चाटने लगा । इस तरह मुन्नी की क्लिट में मस्ती आने लगी और अब वो एक हाथ से चूची दबा रहा था और दूसरे हाथ से गाँड़ और जीभ से उसे पागल ही कर रहा था। गाँड़ दबाते हुए वो उसकी गाँड़ की छेद को भी सहलाने लगा। उसका दूसरा हाथ मुन्नी के ताज़ा ताज़ा बने निपल को ऐंठकर मानो उसे पागल कर रहा था। अब मुन्नी आऽऽऽह्ह्ह् अंकल उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके अपने कामरस का फ़व्वारा राजीव के मुँह में छोड़ने लगी जिसे राजीव बड़े प्यार से पी गया।

अब मुन्नी गहरी साँसे ले रही थी मानो मीलों दौड़ कर आयी हो। उसके अमरूद ऊपर नीचे हो रहे थे। राजीव खड़ा हुआ और बोला: बेटी मज़ा आया?

मुन्नी ने शर्माकर सिर झुका लिया। अब राजीव अपनी लूँगी खोला और उसके सामने अपना बड़ा सा खूँटा लहरा कर बोला: अब ये देखो बेटी चलो इसको सहलाओ। यह कहकर वो उसका हाथ अपने लौड़े पर रखा और उसको हिलाकर बोला: बेटी ऐसे हिलाओ इसको। उफफफफ तुम्हारी जवानी ने इसे पागल कर दिया है। बस थोड़ा सा हिला दो और ये शांत हो जाएगा।

मुन्नी ने शर्माते और झिझकते हुए उसका लौड़ा हिलाना चालू किया। उसे लगा कि उसके हाथ में वो और ज़्यादा मोटा और सख़्त हुए जा रहा है। और जल्दी ही राजीव भी आऽऽऽहहह बेटीइइइइइइइइइ कहकर अपना रस गिराने लगा। मुन्नी उसके लंड से निकलते हुए सफ़ेद वीर्य को बड़े ध्यान से देख रही थी जो कि बाथरूम के फ़र्श पर गिर रहा था। थोड़ा सा गरम रस उसकी उँगलियों पर भी लग गया था।

अब राजीव ने उसकी पैंटी से अपना लंड साफ़ किया और नीचे पानी डालकर अपना वीर्य भी बहा दिया। फिर वो मुन्नी को चूमकर बाहर आते हुए बोला: बेटी ये सब जो हम दोनों के बीच हुआ किसी को बताना नहीं। मैं भी उस टीचर और तुम्हारे बीच में क्या हुआ किसी को नहीं बताऊँगा। ठीक है?

मुन्नी ने हाँ में सर हिलाया और कपड़े पहनने लगी। वह थकी सी महसूस कर रही थी क्योंकि पिछले दो घंटों में वो तीन बार झड़ चुकी थी।

राजीव आकर अपने कमरे में लेटा और सोचने लगा कि ये छोटी वाली मुन्नी तो चारु से भी ज़्यादा गरम साबित हो रही है और अभी तक जो मैं चारु के साथ नहीं कर सका वो सब इस गुड़िया के साथ कर लिया।

उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। तीन चार दिनों के बाद चारु के कोलेज से ख़बर आयी कि उसे बुलाया गया है। मालिनी बोली: पापा आप इसके साथ चले जाओ,बाद में ये अकेली चली जाएगी।

राजीव ने हामी भर दी और चारु उसे ख़ास नज़रों से देखने लगी कि पता नहीं आज क्या क्या करेंगे अंकल।

राजीव ने करन को फ़ोन किया और कहा: अरे यार चारु को कोलेज ला रहा हूँ। तेरे ऑफ़िस में कुछ मज़ा लेने का मौक़ा मिल सकता है क्या?

करन: अरे यार मेरा ऑफ़िस तो है ही इन प्यारी गुड़िया लोगों से मज़े करने के लिए। तुम आ जाओ दोनों मिलकर मज़ा करेंगे।

राजीव: साले तुम तो मज़ा ले चुके हो अब मुझे मज़े लेने दो। दोनों साथ रहेंगे तो गुड़िया डर जाएगी।

करन: चलो यही सही। तुम दोनों के आने के बाद मैं आधा घंटे के लिए काम का बहाना बना कर चला जाऊँगा।

राजीव : हाँ यार ये ठीक रहेगा।

करन: तो आज तू उसकी सील तोड़ देगा क्या?

राजीव: पता नहीं देखते है कहाँ तक काम बनता है। चल रखता हूँ १२ बजे तेरे ऑफ़िस में आता हूँ।

क़रीब ११ बजे चारु तय्यार होकर आयी। सफ़ेद टॉप और गुलाबी स्कर्ट में मस्त जँच रही थी। राजीव भी तय्यार ही था दोनों कोलेज के लिए निकल लिए।

 
राजीव और मुन्नी बाहर आए और एक स्कूटर में बैठे । पूरे रास्ते राजीव उसकी जाँघ सहलाता रहा और वो चुपचाप रही और उसे मना नहीं की। कोलेज पहुँचकर चारु ने अपनी फ़ीस पटायी और बाक़ी की फ़ॉर्मैलिटीज़ पूरी कीं । राजीव हर जगह उसकी मदद करता रहा। काम ख़त्म होने के बाद राजीव बोला: बेटी चलो करन के ऑफ़िस चलकर चाय पीते हैं।

चारु: अंकल वहाँ कोई काम तो है नहीं फिर क्यों जाना?

राजीव: अरे बेटी कोलेज आया और मैं उससे नहीं मिला तो वो बुरा मान जाएगा। चलो दस मिनट के लिए ही चलते हैं।

चारु चुप लगा गयी और उसके साथ चल पड़ी।

करन के ऑफ़िस पहुँचकर राजीव ने ऑफ़िस का दरवाज़ा खटखटाया तो करन की आवाज़ आयी : कौन है?

राजीव : अरे भाई मैं हूँ राजीव।

करन ने करीब पाँच मिनट के बाद दरवाज़ा खोला और मुस्कुरा कर राजीव से हाथ मिलाया। चारु को देखकर वो उसके गाल सहलाया और बोला: वाह बेटी आज तो बड़ी प्यारी लग रही हो।

जब वो अंदर आए तो वहाँ सोफ़े पर एक लड़की बैठी थी जो कि चारु की ही उम्र की थी। उसके गाल लाल थे और सीना ऊपर नीचे हो रहा था। उसका बदन भरा हुआ था चारु की तुलना में और उसकी चूचियाँ बड़ी बड़ी थीं उसके उम्र के लिहाज़ से। भोला चेहरा पर बदन भरपूर जवान। राजीव के लंड ने ठुमका लगाया और वो उसकी हालत देखकर समझ गया कि उसका कमीना दोस्त इस जवानी के मज़े ले रहा था उनके आने के पहले। वो मन ही मन मुस्कुराया और सामने से बोला: ये लड़की कौन है?

करन: अरे ये उमा है बहुत प्यारी लड़की है। बस इसके नम्बर कम आए है तो थोड़ा मेरी मदद माँग रही थी सो मैंने कर दी। वो फिर उस लड़की से बोला: अच्छा बेटी अब तुम कल आओ और फ़ीस वगेरह ले आओ । कल तुम्हारा अड्मिशन करा दूँगा। करन ने उसके गाल सहला कर कहा।

वह चली गयी और करन चारु से बोला: बेटी कैसी हो? फ़ीस पटा दी?

चारु: जी अंकल । अब करन ने राजीव की तरफ़ देखा और बोला: यार तुम दोनों बैठो मैं ज़रा आधे घंटे का कुछ काम निपटा कर आता हूँ। यह कहकर वो शरारत से मुस्कुरा कर चला गया।

राजीव चारु को बोला: बेटी वो आधा घंटे में आएगा क्यों ना हम कुछ मस्ती करें? जाओ दरवाज़ा बंद कर दो।

चारु हिचकिचाई पर चुपचाप जाकर दरवाज़ा बंद करके वापस आइ तो राजीव ने उसे अपने पास बुलाया । वो आकर सोफ़े में बैठे राजीव के सामने आकर खड़ी हो गयी। राजीव ख़ुश था कि चारु ने दरवाज़ा बंद किया था इसका साफ़ मतलब था कि वो ख़ुद भी मज़े लेना चाहती है। वो उसकी बाहों को सहलाते हुए बोला: बेटी आज बहुत प्यार आ रहा है तुम पर। यहीं इस कमरे में करन अंकल ने भी तुम्हें प्यार किया था ना? आज मैं करूँगा।

चारु के गाल शर्म से लाल हो चुके थे । वो चुपचाप खड़ी रही। अब राजीव उसकी बाहँ सहलाता रहा और उसके नंगे पेट की चुम्मियाँ लेने लगा। वो उसके पेट को चूमते हुए उसकी गहरी नाभि में जीभ घूसेडने लगा। थोड़ी देर बाद वो अपना हाथ उसकी चूचियों पर ले जाकर उनको हल्के से दबाने लगा।चारु आऽऽह्ह कर उठी। अब वो उसके टॉप को उतारा और ब्रा में मस्त अमरूदों को देखकर वह उनको सहलाया और फिर पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा का स्ट्रैप खोला । अब उसके सामने सख़्त बिलकुल तने हुए अमरूद थे जिनके ऊपर भूरे से छोटे छोटे निप्पल बहुत मस्त दिख रहे थे। वह उनको सहलाया और निपल को मस्ती से ऐंठा । चारु उइइइइ कर उठी । अब वो उनको अपने मुँह में बारी बारी से लेकर चूसने लगा। आधे से ज़्यादा गोलायियाँ उसके मुँह के अंदर चली जाती थीं और वो उनको चूसकर मानो स्वर्ग का सुख पा रहा था। अब चारु को भी पता लगा कि सेक्स में क्या मज़ा है । उसकी आँखें मारे मज़े से बंद सी होने लगी। अब वो अमरूद चूसते हुए उसकी स्कर्ट खोला और नीचे गिराकर पैंटी में क़ैद उसकी नयी जवानी को दबाने और मसलने लगा। उसके होंठ अब उसके पेट और नाभि पर थे। फिर वह उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को चाट और पैंटी भी उतार कर उसे पूरी नंगी करके उसकी मदमस्त उभरती जवानी को देखने लगा। वो अब भी बैठे हुए राजीव के सामने नंगी खड़ी थी और मस्ती से उसकी बुर पूरी गीली हो चली थी। अब वो उसके मस्त गोल चूतरों को दबाने लगा और बुर की चुम्मियाँ लेने लगा। चारु आऽऽऽऽह्हा करके बोली: उफफफ अंकल मेरे पैर काँप रहे हैं । मैं खड़ी नहीं रह सकती।

राजीव मुस्कुराया और ख़ुद सोफ़े से उठकर उसे सोफ़े पर लिटा दिया। अब वो ख़ुद ज़मीन पर बैठा और झुककर उसके होंठ चूसने लगा और फिर से चूचियाँ मसलने लगा। फिर वो चूचियाँ चूसने लगा और आख़िर में उसकी एक ऊँगली उसकी छोटी सी बुर पर अठखेलियाँ करने लगीं। अब चारु उइइइइइइइ कहकर उछल सी गयी। अब राजीव ने उसकी एक टाँग अपने एक कंधे पर रखा और दूसरी टाँग सोफ़े पर मोड कर फैला दिया। उसकी मासूम सी बुर अब पूरी तरह उसके सामने थी। चिकनी बुर के होंठों पर गीलापन साफ़ चमक रहा था। मदन रस था कि अब निकला और तब निकला। अब वो अपनी जीभ उसकी बुर पर फिराकर मस्त होकर बोला: आऽऽऽऽह क्या मस्त चिकनी फूलि हुई बुर है तुम्हारी। फिर वह उसकी फाँकों को फैलाया और और उसकी गुलाबी बुर देखकर उसने एक ऊँगली डाली और बोला: बेटी अभी तक चुदी नहीं हो लगता है। देखो कैसी टाइट है तुम्हारी बुर। क्या मस्त गुलाबी बुर है । वह चूमते हुए और जीभ अंदर डालकर चाटते हुए बोला।

चारु ने आँखें बंद कर रखीं थीं और मस्ती से भरी हुई वो अपनी बुर में उठती हुई सुरसुरी को महसूस कर रही थी। अब राजीव ने अपनी जीभ लम्बाई में दबाकर उसकी बुर की गहराइयों से होते हुए उसकी पिशाब के छेद से लेकर उसकी क्लिट तक जीभ फेरा। चारु के बदन में जैसे सनसनी दौड़ने लगी। राजीव ने उसकी दोनों टाँगें फैलाई हुई थी और अपनी जीभ से उसकी जवान बुर को कुरेद करके वह उस गुड़िया को मस्ती से मदमस्त कर रहा था। अब अचानक चारु ने अपनी दोनों टाँगें चिपका लिया और उसने राजीव का मुँह अपने जाँघों में दबोच सा लिया और क्लाइमेक्स की ऊँचाइयों पर कई बार चढ़ती हुई उइइइइइइइइइइ करके मज़े के फ़ौवारे राजीव के खुले मुँह में छोड़ती चली गयी। राजीव भी मज़े से उसके मधुर कामरस तो पीता चला गया। अब चारु निढाल होकर अपनी जाँघों को फिर से फैलाकर लुढ़क सी गयी। राजीव ने अपना मुँह वहाँ से हटाया और रुमाल से अपना मुँह पोंछकर कहा: वाह बेटी क्या स्वाद है तुम्हारा रस । फिर वो रुमाल से ही उसकी बुर भी पोंछा और रुमाल को बाथरूम के कचरेदान में फेंक आया।

वह बाथरूम से वापस आया और देखा कि चारु अब ब्रा और पैंटी पहन ली थी। वो बोला: बेटी तुमने तो मज़ा ले लिया पर मैं तो प्यासा रह गया। वह पैंट के ऊपर से अपना लंड दबाकर कहा।

वह फिर से चारु को अपनी बाँह में भींचकर बोला: बेटी क्या मुझे प्यासा छोड़ दोगी?

चारु: अंकल मैं क्या करूँ?

राजीव: अरे बेटी ज़रा इसे थोड़ा सा प्यार कर दो ना। वह उसका हाथ अपने लंड पर रख कर बोला।

चारु उसे प्रश्न वाचक नज़रों से देखने लगी।

वो मुस्कुराया और बोला: बेटी मेरी पैंट खोलो और इस मस्त हथियार को बाहर निकालो और उसके साथ थोड़ी देर खेलो ना।

चारु चुपचाप सिर झुका कर उसकी पैंट का हुक खोलने लगी और फिर राजीव ने जीप की चेन खोलने का इशारा किया। वो जीप भी खोली और पैंट को नीचे गिरा दी। दोनों अब भी खड़े ही थे। अब राजीव ने उसे सोफ़े पर बिठाया और अपनी चड्डी में से फूला हुआ लंड उसके सामने लाकर कहा : बेटी अब इसे भी निकालो। वो चुपचाप उसकी चड्डी भी नीचे की और जब लंड उसमें फँस गया तो उसने अंदर हाथ डालकर उसके लंड को टेढ़ा करके बाहर निकाला। गरम मोटे लंड के स्पर्श से वो काँप सी गयी। उसने देखा कि एक बूँद सफ़ेद वीर्य की उसकी टोपी पर लगी हुई थी।

राजीव ने अपना लंड उसके होंठों से सटाया और चारु का मुँह अपने आप खुल गया और वो उसके रस की एक बूँद के स्वाद से मस्त हो गयी। उसकी मर्दानी गंध ने मानो उसे पागल ही कर दिया। अब राजीव अपना लंड उसके मुँह में थोड़ा सा डालकर अंदर बाहर करके मानो उसका मुँह चोदने लगा। चारु ने कई विडीओ देखे थे । उनको याद करके वो उसका लंड चूसने लगी। ये उसका पहला अनुभव था लंड चूसने का। पर राजीव ने देखा कि वो जल्दी ही चूसना सीख गयी और मज़े से लंड चूसने लगी। राजीव: बेटी अपनी जीभ का भी इस्तेमाल करो। उसे टोपी पर फिराओ और साथ ही चूसो भी।

चारु अब अच्छी तरह से चूसने और चाटने लगी। उसके छोटे से मुँह में अपना विशाल लौड़ा अंदर बाहर होते देखकर वो ख़ुद ही बहुत उत्तेजित हो गया धक्के लगाकर झड़ने लगा। चारु के मुँह में जब पहली बार वीर्य की धार गयी तो वो चौंकी और लंड को बाहर निकालने की कोशिश की पर राजीव ने उसे निकालने नहीं दिया और उसे पीने का इशारा किया और बोला: आऽऽऽऽह ,बेटी इसे गटक लो बहुत अच्छा लगेगा। पहली बार थोड़ा सा स्वाद अजीब लगेगा बाद में अपनी मालिनी दीदी की तरह इसकी दीवानी हो जाओगी।

चारु यह सुनकर रस को गटकने लगी वरना उसकी साँस ही रुक जाती। राजीव ने अपना पूरा रस ख़ाली होने पर ही उसे छोड़ा । अब वो लंड बाहर किया और फिर से उसपर लगी हुई बूँदों को चारु के होंठ से सटाया और इस बार चारु ने भी अपने होंठ और जीभ से उसे बड़े प्यार से चाट लिया।

अब चारु बाथरूम में गयी और अपने चेहरे पर लगे उसके गाढ़े वीर्य को देखकर मस्त होकर सोची कि उन सेक्सी विडीओ में लड़कियाँ ऐसी ही तो दिखतीं हैं जैसे मैं अभी दिख रही हूँ। उसने कुछ रस अपने मुँह से ऊँगली से साफ़ किया और इस ऊँगली को चाटने लगी। उग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त स्वाद है तभी तो दीदी को भी भाता होगा उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़। फिर उसने अपना मुँह धोया और बाल सँवार कर कपड़े पहने और बाहर आयी। राजीव ने भी अपनी पैंट पहन ली थी । वो उसे अपनी बाँहों में भरकर बोला: बोलो बेटा कैसा लगा?

चारु शर्मा कर उसकी छाती में अपना सिर छिपा कर बोली: आऽऽऽऽह अंकल बहुत मज़ा आया। आप बहुत अच्छे हैं।

राजीव ख़ुशी से उसका सिर उठाया और उसके होंठ चूसते हुए बोला: अरे बेटी ये तो ट्रेलर था अभी असली पिक्चर तो बाक़ी है। जल्दी ही तुमको चोदेंगे तब असली मज़ा पाओगी। समझी ना? वो उसके चूतरों को दबाकर बोला।

चारु: जी अंकल । पर पहली बार बहुत दुखता है मेरी सहेलियाँ बतायीं थीं ।

राजीव: अरे बेटा थोड़ा सा दर्द होगा फिर मज़े ही मज़े ।

चारु उसके लंड को सहलायी और बोली: पर अंकल आपका तो बहुत बड़ा है। करन अंकल का मैंने पैंट के ऊपर से पकड़ा था वो तो बहुत छोटा और पतला था।

राजीव: अरे बेटा लड़की को लम्बा और मोटा हथियार चाहिए। तुम देखना कि बड़े आराम से ले लोगी इसको तुम। वो उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: तुम्हारी दीदी भी तो इसकी दीवानी है।

तभी दरवाज़ा खटखटाया गया और राजीव ने दरवाज़ा खोला । सामने करन खड़ा था । उसने आँख मारकर कहा: सब ठीक?

राजीव मुस्कुराया: हाँ यार सब बढ़िया।

अब सब सोफ़े पर बैठे।

करन ने अंदर आकर चारु से कहा: बेटी सब ठीक है ना?

चारु शर्मा कर: जी अंकल सब ठीक है।

राजीव: अच्छा यार अब चलते हैं।

करन : ठीक है। वैसे चारु बेटी तुम्हारे स्टेज पर्फ़ॉर्मन्स का सब पक्का हो गया है। अगले महीने होगा।

चारु ख़ुश होकर: थैंक्स अंकल।

करन: बस थैंक्स । एक पप्पी तो दो।

चारु शर्मा कर राजीव को देखी और वो इशारा किया कि ठीक है ।

अब चारु करन के पास आयी और वो उसको अपनी गोद में खींचा और उसके गाल चूमा और उसके हाथ उसकी मस्त गाँड़ पर आ गए। वह उनको मस्ती से दबाने लगा।

राजीव ने ऐसा दिखाया मानो कोई बात ही ना हो।

करन: अरे तुम भी मुझे थैंक्स दो ना।

चारु ने भी करन के गाल चूमे और थैंक्स कहा।

अब राजीव खड़ा हुआ और बोला: यार बाक़ी का थैंक्स कभी और करवा लेना । अब हम चलते हैं। यह कहकर वो बाहर आ गया ताकि करन को जो थोड़ा बहुत मज़ा लेना है वो ले ले।

करन अब चारु के होंठ चूसा और उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: आऽऽऽह बेटी क्या मस्त सख़्त अमरूद हैं तुम्हारे। अब जल्दी ही तुमको चोदूँगा। ठीक है ना?

चारु शर्मा कर खड़ी हुई और अपना टॉप ठीक करके बोली: छी अंकल कितनी गंदी बात करते हैं आप। कोई लड़की से ऐसी बात करता है भला?

करन भी खड़ा हुआ और उसकी गाँड़ सहलाकर बोला: अरे बेटा लड़की को तो यही बात अच्छी लगती है। देखना चुदवाने में कितना मज़ा आएगा? अच्छा अभी जाओ । अगली बार प्रोग्राम बनाएँगे चुदाई का । ठीक है?

चारु: धत्त आप बहुत गंदे हो अंकल। यह कहकर वो मुस्कुराती हुई करन को बाई कहकर बाहर आ गयी।

बाहर राजीव उसे देखकर मुस्कुराया: क्या बात है ? बहुत ख़ुश दिख रही हो? ऐसा क्या कह दिया करन ने?

चारु: वो भी आपके जैसे गंदे अंकल हैं । गंदी बात कर रहे थे।

राजीव हँसकर: अरे चुदाई का बोल रहा था क्या?

चारु शर्माकर हाँ में सिर हिलाई।

राजीव चलते हुए बोला: अरे इसमे गंदा क्या है? मालिनी तो चुदवाते हुए बहुत चिल्लाती है और कहती है कि पाआऽऽऽऽऽपा और जोओओओओर से चोओओओओओओदो।

चारु: छि आप चुप रहो ना। कोई सुन लेगा।

राजीव बोला: अरे यहाँ कौन है सुनने के लिए। वह उसकी गाँड़ सहलाकर बोला।

फिर दोनों ऑटो से घर वापस आए। घर जाते हुए राजीव बोला: बेटा आज सच में तुम्हारी बुर चूस कर बहुत मज़ा आया।

चारु: अंकल चुप करिए ना। घर आने वाला है।

राजीव: बेटा घर पर भी ये सब होता है ना। तुम्हारी दीदी को तो बुर चूसवाने में बहुत मज़ा आता है। और वो बड़े मज़े से लंड भी चूसती है तुमने तो देखा ही है ना।

चारु की बुर इस तरह की बातों से फिर से गीली होने लगी। उसे अंकल का मोटा लंड याद आया जिसे वो प्यार से चूसी थी।

घर पहुँचकर वो सीधे बाथरूम में जाकर अपनी बुर में ऊँगली करके झड़ी और फिर अपने कमरे में जाकर कपड़े बदली।

 
अगले कुछ दिन ऐसे ही बीते पर अब एक बात थी कि दिन भर में जब भी राजीव चारु या मुन्नी को पाँच मिनट के लिए भी अकेला पाता वो उनके बदन सहलाने से नहीं चूकता था। वो उनकी चूचियाँ या गाँड़ दबा देता था। और मौक़ा मिलता तो उनकी बुर भी सहला देता था। चारु और मुन्नी भी अब मज़े लेने लगीं थीं । दोनों उसे कभी नहीं रोकतीं थीं । बस दिखावे के लिए कहती रहतीं थीं कि अंकल कोई देख लेगा। चारु तो अब ख़ुद भी राजीव की लूँगी के ऊपर से उसके लंड को मसल देती थी। मुन्नी अभी तक लंड का मज़ा नहीं ली थी।

एक बार तो मालिनी और चारु बातें कर रहे थे आमने सामने बैठकर । राजीव अपने कमरे से निकला तो मालिनी की पीठ उसकी तरफ़ ही थी। वो चारु को देखकर आँख मारा और अपनी लूँगी खोलकर अपना लंड उसे दिखाने लगा और उसे सहलाने लगा। बड़ी मुश्किल से चारु ने अपने चेहरे के भाव सामान्य बनाए रखे ताकि मालिनी को शक ना हो। ऐसे मौक़ों पर चारु की हालत बहुत ख़राब हो जाती थी और उसकी इच्छा होती कि पैंटी के ऊपर से ही बुर खुजा ले। पर मालिनी के सामने ऐसा नहीं कर सकती थी।

बाद में चारु बोली जब अकेले में मिली: उगफफफ अंकल आप क्या क्या करते रहते हो? ऐसा कोई नंगा होता है क्या किसी लड़की के सामने?

राजीव उसकी बुर को दबाकर: बेटी मैं तो बस तुमको मज़ा देना चाहता हूँ। मुझे पता है कि तुमको मेरा लंड बहुत पसंद है इसीलिए बीच बीच में दिखा देता हूँ।

चारु ने उसका लंड लूँगी के अंदर हाथ डालकर पकड़ा और बोली: अंकल किसी दिन मैं काट दूँगी इसको कैंची से । और फिर हँसकर वहाँ से भाग गयी।

इसी तरह दिन बीतते रहे। शिवा आजकल बहुत व्यस्त था दुकान पर सीज़न जो चल रहा था।

उस रात सब खाना खाकर बैठे बातें कर रहे थे । शिवा बोला: पापा मालिनी को कल डॉक्टर को दिखाना है। पर मेरा सीज़न चल रहा है , आप ले जाना मालिनी को।

राजीव बड़े प्यार से बहू को देखकर बोला: हाँ हाँ क्यों नहीं मैं ले जाऊँगा। अब बस दो तीन दिन की ही देर है मुझे दादा बनने में।

चारु मुस्कुराकर: अंकल आपको पोता चाहिए या पोती?

राजीव: अरे जो भी भगवान देगा स्वीकार है बस स्वस्थ होना चाहिए।

थोड़ी देर बातें करने के बाद सब सोने चले गए।

अगले दिन राजीव मालिनी को लेकर डॉक्टर के पास पहुँचा। शिवा कार छोड़ गया था। डॉक्टर ने मालिनी को देखा और मुस्कुराई और बोली: चलो समय आ गया लगता है। चलो लेटो वहाँ जाँच करते हैं ।

राजीव बाहर डॉक्टर की टेबल के सामने रखी कुर्सी पर बैठा इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर बाद डॉक्टर अंदर से बाहर आयी और मालिनी भी बाहर आयी।

डॉक्टर: देखिए अंकल मेरी सलाह है कि अभी ही हम मालिनी को भर्ती कर लेते हैं। आज कल में ही इसे लेबर पेन होंगे। इसलिए यहाँ रहेगी तो इसका हम ध्यान रख सकेंगे।

राजीव: ओह पर हम तो तय्यारी से नहीं आए हैं । इसके कपड़े वगेरह नहीं लाए हैं।

डॉक्टर: अरे वैसे भी इनको यहाँ अस्पताल के ही कपड़े पहनने होंगे। फिर भी इनका सामान आप ले आना बाद में।

राजीव: ठीक है जैसा आप कहो । बेटा तुमको कोई समस्या तो नहीं है ना भर्ती होने में?

मालिनी: नहीं पापा कोई समस्या नहीं है ।

डॉक्टर: आप पैसे पटा दीजिए और इनको भर्ती करा दीजिए।

राजीव मालिनी को लेकर सारी फ़ॉर्मैलिटीज़ करके उसको एक प्राइवेट वार्ड में एक कमरे में भर्ती करवा दिया। वहाँ एक बिस्तर मालिनी के लिए था और एक उसके साथ जो रहेगी या रहेगा उसके लिए था। एक नर्स आकर उसको कुछ दवाइयाँ दे गयी और ब्लड और पेशाब का सैम्पल ले गयी।

मालिनी लेटी हुई थोड़ी सी नर्वस दिख रही थी। राजीव उसके बग़ल में आकर बैठा और बोला: बेटी घबरा क्यों रही हो। सब ठीक होगा। मैं हूँ ना अपनी रानी के पास। यह कहकर उसने उसका माथा और गाल चूम लिया। फिर उसके पेट पर हाथ फेरकर बोला: देखो मेरे पोता या बेटा , अपनी माँ को तंग नहीं करना और आराम से बाहर आ जाना।

मालिनी हंस पड़ी: आपको क्या लगता है ये आपका पोता है या बेटा?

राजीव उसके पेट पर हाथ फेरकर पूछा: तुमको क्या लगता है?

मालिनी: मुझे तो आपका बेटा लगता है।

राजीव: चलो फिर वही सही। पर दुनिया के सामने तो वो मुझे दादा ही बोलेगा ना। वह मुस्कुराते हुए झुका और अबकि मालिनी के होंठों पर चुम्बन लिया और बोला: बेटी मैं अभी घर जाता हूँ और चारु या मुन्नी को लेकर आता हूँ। तुम्हारे पास कोई ना कोई तो रहेगा ना।

मालिनी: पापा चारु दिन में रह लेगी क्योंकि अभी उसका कोलेज नहीं खुला है। मुन्नी का स्कूल है इसलिए वो शाम से रात तक रह लेगी और शिवा या मुन्नी यहाँ मेरे साथ सो लेंगे।

राजीव: ठीक है बेटी ऐसा ही करते हैं। अच्छा मैं तुम्हारा खाना लेकर आता हूँ। साथ में चारु को भी ले आऊँगा।

मालिनी: आप भी खा लीजिएगा। मैं खाना बना कर आयी थी। चारु और मुन्नी दोनों को रोटियाँ बनाना आता है। वैसे वो पूरा खाना भी बना लेतीं हैं।

राजीव उसे फिर से उसके होंठ चूमा और बाई बोलकर बाहर आकर घर के लिए निकला । रास्ते ने उसने शिवा को फ़ोन पर बता दिया कि मालिनी को डॉक्टर ने अड्मिट कर लिया है।

जब वह घर पहुँचा तो चारु वहाँ अकेली थी । उसने दरवाज़ा खोला और बोली: अंकल दीदी कहाँ हैं ?

राजीव: उसे डॉक्टर ने अड्मिट कर लिया है। अब वो यह अनुभव किया कि इस समय घर में चारु अकेली है और मुन्नी के आने में अभी एक घंटा है। उसका लंड कड़ा होने लगा। तभी शिवा का फ़ोन आया: पापा मैं आ जाऊँ क्या?

राजीव: अरे तू आकर क्या करेगा? मैं , चारु और मुन्नी बारी बारी से उसका ध्यान रखेंगे। अभी मुन्नी आएगी तो मैं और चारु मालिनी का खाना लेकर अस्पताल जाएँगे। शाम से रात तक मुन्नी रहेगी वहाँ। तू चाहे तो रात को रुक जाना उसके साथ।

शिवा: ठीक है पापा। वैसे मालिनी से मेरी फ़ोन पर बात हुई है वो ठीक है।

राजीव : चल रखता हूँ। फिर वो चारु से बोला: तुम मालिनी से बात करो फ़ोन पर और उसको पूछो क्या क्या लेकर जाना है अस्पताल में?

राजीव किचन में जाकर पानी पीने लगा।

चारु ने मालिनी से बात की और फिर राजीव से बोली: अंकल मैं दीदी का सामान पैक करती हूँ। बात हो गयी उनसे।

वो शिवा के कमरे में जाने लगी तो राजीव भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा। वो बोला: क्या मँगाया है बहू ने?

चारु: टूथ ब्रश पेस्ट साबुन वगेरह और कुछ कपड़े अंदर पहनने के।

राजीव शरारत से मुस्कुरा कर: ओह ब्रा और पैंटी?

चारु हँसी: हाँ वो भी और कुछ नैप्किन भी। अब वो आलमारी से उसके अंडरगारमेंट निकालने लगी। राजीव वहीं बिस्तर पर बैठा उसके बदन को देखे जा रहा था । यह बात कि इस समय घर में कोई नहीं है उसके लंड को हरकत में ला रही थी। अब चारु ने मालिनी की तीन चार ब्रा और पैंटी निकाली और राजीव ने उनको देखकर अपने हाथ में लिया और बोला: अरे चारु ये क्या कर रही हो? ये तो उसकी पुरानी ब्रा हैं । देखो ३४ साइज़ की हैं अब वो ३८ की पहनती है। मैंने और शिवा ने दबा दबा कर उसके बहुत बड़े कर दिए हैं। और वो हा हा कहकर हँसने लगा।

चारु लाल होकर और ब्रा निकाली और उनमें से ३८ की निकाल कर बोली: ये तो ठीक है ना?

राजीव उनको सहलाकर बोला: हाँ ये ठीक है। मेरी प्यारी बहू की मस्त चूचियों के लिए इतनी बड़ी तो चाहिए ही।

चारु शर्म से दोहरी हो रही थी उसकी बात सुनकर। फिर वो पैंटी निकाली और राजीव बोला: क्या कर रही हो चारु? देखो ये छोटी सी पैंटी उसकी गाँड़ में फ़िट ही नहीं होगी। मैं उसकी बड़ी गाँड़ के साइज़ की बड़ी बड़ी पैंटी लाया था । देखो उस बैग में होगी शायद।

चारु ने वो बैग खोला तो सच में उसमें बड़ी बड़ी पैंटी रखी थी। राजीव: हाँ हमारी बहू की बड़ी बड़ी गाँड़ इस साइज़ में ही समाएगी। सही है ना?

चारु क्या कहती? उफफफफ अंकल अपनी बहू के बारे में कैसी बातें कर रहे हैं? अचानक चारु को महसूस हुआ कि उसकी बुर गीली होने लगी है । उसने चोरी से देखा तो पाया कि अंकल का लंड खूँटे सा खड़ा था और उनकी पैंट से साफ़ दिख रहा था।

अब चारु झुककर एक बैग में सब सामान डालने लगी तो राजीव उसके पीछे से आकर उसकी स्कर्ट से झाँकती उसकी पैंटी को देखकर मस्त होकर अपना हाथ उसकी गाँड़ की एक गोलाई पर रखा और बोला: बेटी आज घर में कोई नहीं है। और हम मुन्नी के आने के बाद खाना खाकर ही अस्पताल जाएँगे। कुछ मस्ती हो जाए? अब वो अपने पैंट के ऊपर से अपना लंड उसकी गाँड़ पर रगड़ते हुए बोला।

चारु के पूरे बदन में सिहरन दौड़ गयी। वो उठने की कोशिश की पर राजीव अपने लंड को उसकी गाँड़ पर रगड़ते ही रहा और बोला: उफफफ क्या जवानी है तुम्हारी? वो हाथ बढ़ाकर उसकी नीचे की ओर झुकी हुई चूचियाँ पकड़कर दबाने लगा। चारु का विरोध अब मस्ती के नीचे दब गया। वो समझ गयी कि आज अंकल उसके साथ मज़ा लेकर ही रहेंगे।

वो बोली: आऽऽऽह मुझे उठने तो दीजिए ना प्लीज़।

अब राजीव ने अपनी पकड़ ढीली की और बोला: ठीक है । उठो ।

वह खड़ी हुई तो फिर से राजीव ने उसे पीछे से पकड़ा और उसकी दोनों चूचियाँ दबाकर अपना लंड नीचे झुक कर उसकी गाँड़ में दबाने लगा। चारु की आऽऽऽह निकल गयी। अब वो उसे घुमाया और सामने से अपने से चिपका कर बोला: बेटी अभी काफ़ी समय है मुन्नी के आने में चलो मेरे कमरे में मस्ती करते हैं । अब वह चारु को अपनी गोद में एक छोटी सी बच्ची की तरह उठाया और उसके होंठ चूसते हुए अपने कमरे की ओर ले चला।

अब तक चारु भी गरम हो चुकी थी और वो ख़ुद भी चुम्बन में राजीव का साथ देने लगी। अब राजीव ने उसे लेज़ाकर अपने बिस्तर पर लिटाया और उसके जवान बदन को देखकर कहा: उफफफफ आख़िर आज तुम मेरे बिस्तर पर आ ही गयी। क्या जवान बदन है बेटी तुम्हारा। उफ़्फ़्क् क्या मज़ा आएगा तुमको चोदने में । वो अपना लंड दबाता हुआ उसके जवान बदन को घूरे जा रहा था।

अब चारु डर सी गयी कि ही भगवान इनका कितना बड़ा है बहुत दुखेगा । राजीव उसके डर को समझ गया और अपने कपड़े उतारता हुआ बोला: बेटी अभी नहीं चोद सकता तुमको। अभी तो तुमको लेकर बहू के पास जाना है । रात को देखते हैं अगर जमता है तो। अब तक वो अपनी शर्ट उतार चुका था और अब पैंट उतारकर वो सिर्फ़ चड्डी में बिस्तर पर आ कर बैठा और चारु का टॉप उतारने लगा। फिर उसने स्कर्ट भी उतार दी और अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में ही थी। उसने उसे लिटा दिया और उसके जवान बदन पर हाथ फेरकर मस्ती से भरने लगा। चारु की निगाह भी उसकी चड्डी से साफ़ दिख रहे मोटे लौड़े पर थी। चारु की पैंटी गीली हो गयी थी।

अब राजीव आकर उसको अपनी बलिष्ठ बाहों में भरकर उसके बदन को सहलाते हुए उसके गाल आँख और होंठ चूमने लगा। उसके हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए उसकी गोल गोल गाँड़ दबाने लगे थे। वो भी मस्ती से उससे चिपक गयी थी और उसका लंड उसकी टांगों से टकरा रहा था। राजीव के हाथ अब पैंटी के अंदर से उसकी गाँड़ मसलने लगे और वो उसकी दरार में हाथ डालकर उसकी बुर और उसकी गाँड़ के छेद पर उँगलियाँ चलाने लगा। वह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। अब राजीव ने उसकी ब्रा निकाली और उसके सख़्त अमरूदों पर जैसे टूट हो पड़ा। वो उनको बहुत देर तक दबाकर चूसता रहा।

चारु: आऽऽऽऽऽह अंकल अब छोड़िए इनको, उफफफ दुःख रहे हैं । आप बहुत ज़ोर से दबा रहे हैं।

राजीव ने मुस्कुरा कर उसकी चूचियों को छोड़ा और अब उसकी पैंटी उतार कर जाँघें फैलाया और दोनों टांगों को मोड़कर उसके बीच आके उसकी बुर को हाथ से सहलाने लगा। बुर बुरी तरह से पनियायी हुई थी। उसने एक ऊँगली अंदर करके उसे काम रस से भिगोया और फिर उसे उसके गाँड़ के छेद में डालकर हिलाने लगा।चारु इस अचानक हमले से हैरान होकर चिल्लाई: उइइइइइइ अंकल जलन हो रही है। निकालो ऊँगली उफफफफ। राजीव ने उसकी गाँड़ से ऊँगली निकाली और बोला: बेटी एक ऊँगली में इतना चिल्ला रही हो जब इसमें लौड़ा जाएगा तब कितना चिल्लाओगी।

चारु: अंकल वहाँ थोड़े ही डालेंगे आप , वो तो ग़लत छेद है ना।

राजीव हँसकर: बहू तो वहाँ भी मज़े से मेरा और शिवा का लौड़ा लेती है। वैसे कई बार मैं और शिवा तो उसके एक एक छेद में साथ ही डालकर चोदते है ।

चारु : ओह । वो सोची कि जैसे उसने वीडीयो में देखा था । उफफफ दीदी बहुत सेक्स का मज़ा लेती हैं शादी के बाद।

अब राजीव ने अपनी चड्डी उतारी और बोला: चलो आज मैं तुमको ६९ सिखाता हूँ। आज चुदाई के लिए अभी समय नहीं है।

अब वो ख़ुद लेट गया और चारु को अपने ऊपर आकर उलटा लेटने को बोला। वो अपनी बुर को उसके मुँह पर रखकर लेटी और अब चारु के सामने उसका लंड पूरा खड़ा होकर ऊपर नीचे हो रहा था । अब राजीव उसके चूतरों को दबाकर फैलाया और अपना मुँह उसकी गाँड़ की दरार में डालकर उसकी बुर चूमने और चूसने लगा। साथ ही वो बीच बीच में उसकी गाँड़ भी चाट लेता था। उसकी जीभ उसके दोनों छेदों को कुरेद रही थी।

उधर चारु भी उसका लंड चूसने लगी थी । आज उसके बॉल्ज़ को पहली बार मस्ती से सहलाकर वो गरम हो रही थी। उसने विडीओ में देखा था कि लड़कियाँ बॉल्ज़ भी चूसती थीं । सो वह भी बॉल्ज़ और लौड़ा दोनों सहलाकर चूसने लगी। उसका मुँह ऊपर नीचे हो रहा था और वो अपनी बुर में ज़बरदस्त गुदगुदी महसूस कर रही थी। अब उसकी कमर हिलने लगी और वो अपनी बुर राजीव के मुँह पर ख़ुद ही दबाकर रगड़ने लगी। उसके मुँह से उन्न्न्न्न्न्न की आवाज़ निकल रही थी

उधर अब राजीव भी मस्ती में आकर उसकी क्लिट को भी छेड़ने लगा था। अब चारु की उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ निकली और वो अपनी जाँघें भींचकर राजीव का मुँह दबा कर झड़ने लगी आऽऽऽऽऽऽऽह करके। अब राजीव उसका कमररस पीने लगा और ख़ुद भी अपना लंड जल्दी जल्दी हिलाकर उसके मुँह में झड़ने लगा। चारु ने एक बूँद भी उसका रस नहीं छोड़ा और पूरा गटक गयी।

राजीव चारु का हाथ पकड़कर उसे बाथरूम में ले गया और उसके सामने पेशाब करने लगा। वो बड़े ध्यान से उसके लम्बे लौड़े से निकलती पेशाब की मोटी धार को देख रही थी । राजीव ने उसका हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रखा और वो उसे पकड़कर उसकी धार की दिशा को कंट्रोल करके हँसने लगी। अब राजीव उसको पेशाब करते देखने लगा। उसने थोड़ा सीट से उठने को कहा ताकि वो उसकी धार देख सके। वो अपनी गाँड़ उठकर थोड़ा सा ऊपर होकर अपनी बुर और उससे निकलती हुई धार उसको दिखाई और शर्मा भी गयी।

अब राजीव ने साबुन से बड़े प्यार से उसकी बुर को हैंड शॉवर की मदद से साफ़ किया और उसको घुमाकर उसकी गाँड़ की दरार और छेद की भी सफ़ाई की। फिर वो तौलिए से उसकी गाँड़ और बुर साफ़ किया और फिर उसके गुप्त अंगों को बारी बारी से चूमने लगा। चारु ने कहा: अंकल मुन्नी आती होगी, प्लीज़ छोड़िए ना।

राजीव खड़ा होकर अपना लंड साफ़ करते हुए बोला: बताओ बिटिया ६९ में मज़ा आया या नहीं?

चारु अब बेशर्मी से उसके नंगे बदन से चिपक गयी और बोली: आऽऽऽहाह अंकल बहुत मज़ा आया।

राजीव उसकी नंगी गाँड़ दबाकर बोला: बेटी आज रात को मौक़ा मिला तो तुम्हारी बुर का उद्घाटन करेंगे। उसी में तो असली मज़ा है मेरी नन्ही सी जान।

चारु भी मस्ती से उसके नरम लंड को पकड़ी और सहलाकर बोली: अंकल ये तो मेरी फाड़ ही देगा।

राजीव झुक कर उसके होंठ चूमते हुए बोला: अरे थोड़ी देर का दर्द फिर ज़िंदगी भर का मज़ा ।

फिर दोनों बाहर आए और कपड़े पहने तभी कॉल बेल बजी और चारु ने दरवाज़ा खोला और मुन्नी अंदर आयी।

 
मुन्नी स्कूल ड्रेस में अंदर आयी और अपना बैग सोफ़े पर रखकर धम्म से बैठ गयी। उसकी स्कर्ट उसकी जाँघों पर चढ़ी और राजीव को उसकी पैंटी की एक झलक मिल ही गयी। फिर उसने अपना स्कर्ट ठीक किया और बोली: दीदी पानी पिलाओ ना बहुत प्यास लगी है।

चारु पानी लायी और बोली: मुन्नी जल्दी से फ़्रेश हो जाओ । मैं खाना लगा रही हूँ । उसके बाद मैं और अंकल मालिनी दीदी के पास अस्पताल जाएँगे । वो आज अड्मिट हो गयी हैं।

मुन्नी: वाऽऽऽऽह अब जल्दी घर में बेबी आएगा । हैं ना अंकल?

राजीव मुस्कुराकर:बिलकुल सही कहा तुमने बिटिया रानी।

थोड़ी देर बाद राजीव और मुन्नी अग़ल बग़ल बैठ कर खाना खाने लगे। चारु गरम रोटियाँ बना कर दे रही थी। राजीव ने अपना एक हाथ मुन्नी की जाँघ पर रखा और धीरे से पूछा: बेटी आज भी टीचर आंटी ने मज़ा दिया क्या?

मुन्नी लाल होकर: नहीं ।

अब राजीव उसकी जाँघ सहलाता हुआ उसके पैंटी तक अपना हाथ पहुँचाकर : और कोई मज़ा लिया क्या?

मुन्नी ने ना में सिर हिलाया और खाना खाती रही।

अब राजीव उसकी एक छाती दबाया और बोला: बेटी क्लास में लड़के इसको दबाते तो होंगे ना?

मुन्नी ने कोई विरोध नहीं किया पर नहीं में सिर हिलाया।

तभी चारु अपनी थाली भी लेकर आयी और राजीव ने अपना हाथ हटा लिया। सब खाना खाने लगे।

खाना खाकर राजीव चारु को लेकर और मालिनी का सामान और खाना लेकर अस्पताल के लिए चला गया और मुन्नी को ध्यान से रहने और किसी अजनबी के लिए दरवाज़ा नहीं खोलने का बोलकर चले गए।

मुन्नी उनके जाते ही अपने बैग से एक पेन ड्राइव निकाली और चारु के लैप्टॉप में लगाकर एक ब्लू फ़िल्म देखने लगी जो उसकी एक सहेली ने उसे दी थी। वो फ़िल्म देखते हुए अपनी छातियाँ दबाकर और बाद में अपनी पैंटी में हाथ डालकर अपनी बुर में ऊँगली करने लगी।फ़िल्म में आदमी का लंड बहुत बड़ा था । जल्दी ही वो सीइइइइइइइसी करके झड़ने लगी।अब वह करवट ली और सो गयी।

उधर राजीव और चारु अस्पताल पहुँचे । रास्ते में राजीव बोला: बेटी तुमने ध्यान दिया कि नहीं अपनी मुन्नी की छातियाँ बड़ी तेज़ी से बढ़ रहीं हैं। जल्दी ही तुम्हारे जितनी हो जाएँगे। उसने बताया क्या कि कोई उसका बोय्यफ़्रेंड तो नहीं है जो दबा दबा कर बड़े कर रहा है।

चारु: छि अंकल आप बहुत गंदी बात करते हैं । मुन्नी अभी इन सब चीज़ों के लिए छोटी है।

राजीव: छोटी? अरे उसके बब्बे देखो । कहाँ से छोटी है। मस्त जवान तय्यार माल है चुदाई के लिए ।

चारु: आपसे बात करना ही बेकार है।

राजीव: उसकी जाँघों में फँसी पैंटी से उसकी फुद्दी क्या मस्त फूली हुई दिखती है। वह यह कहकर अपना लंड पैंट के ऊपर से मसला। चारु ने ग़ुस्से से मुँह घुमा लिया।

अब राजीव हँसकर: हा हा मैं तो तुम्हें चिढ़ा रहा था। हाँ सच वो अभी छोटी है।

चारु ने अब भी कुछ नहीं कहा। अस्पताल में मालिनी को खाना खिलाया और फिर राजीव उसके पलंग पर बैठ कर उससे बातें करने लगा। चारु पास रखे पलंग पर लेट गयी। कमरा बंद था और एसी चल रहा था। चारु को नींद आने लगी वो आँख बंद कर ली। राजीव मालिनी को प्यार से चूमा और बोला: बस बहू एक दो दिन की बात है। फिर सब ठीक हो जाएगा।

मालिनी: पापा मुझे अब डर लग रहा है। कोई बड़ी उम्र की औरत होती तो मुझे सहारा हो जाता।

राजीव: बेटी तुम्हारी माँ को बुला लें क्या?

मालिनी: पापा मैंने उनको फ़ोन किया था वो ख़ुद दो दिन से बिस्तर पर पड़ीं हैं फ्लू हो गया है उनको। वो बोली हैं कि तीन चार दिनों में आएँगी और कम से कम दस दिन रहकर बेबी को सम्भालना सिखा देंगी मुझे।

राजीव ने उसके गाल सहलाए और चारु को सोते देखा और बोला: ये तो बड़ी अच्छी ख़बर है। चलो हमारा काम भी बन जाएगा। बहुत दिन से इसका उपवास चल रहा है। वो अपने लंड को दबाकर बोला। i

चारु सच में सोयी नहीं थी बस सोने का नाटक कर रही थी। उसने अपनी बाँह अपनी आँखों पर रखी थी और आँखों को थोड़ा सा खोल कर सब देख रही थी।

मालिनी हँसकर: पापा वो मेरी बेबी को संभालेंगी ना कि इसको। वो राजीव के लंड को प्यार से दबाकर सहलाने लगी।

राजीव: अरे बहू शिवा भी तो प्यासा है। तेरी माँ हम दोनों को एक साथ शांत कर देगी।

मालिनी हँसने लगी: बस आप दोनों उनके ऊपर चढ़े रहोगे तो बेचारी बेबी का तो क्या ही होगा। उसका हाथ अब भी उसके लंड पर ही था।

चारु यह सुनकर हैरान रह गयी। इसका मतलब चाची इन बाप बेटे से चुदवाती हैं और दीदी को भी सब पता है। हे प्रभु कैसा परिवार है हमारा। पता नहीं अभी और क्या क्या पता चलेगा ।

राजीव ने फिर से चारु को देखा और सोचा कि वो सो रही है। वो उठा और दरवाज़ा लॉक किया और अपना ज़िप खोलकर अपने लौड़े को बाहर निकाला और मालिनी के मुँह के पास ले जाकर बोला: बहू चूसो ना । बहुत दिन हो गए तुमसे चूसवाए हुए।

मालिनी मुस्करायी और उसको प्यार से हाथ में लेकर सहलायी और चारु को देखी। उसे भी लगा कि वो सो रही है। अब मालिनी ने अपना मुँह खोला और उसके लौड़े को चूसने लगी। राजीव पलंग पर लेटी मालिनी के मुँह को खड़े खड़े मानो चोदने लगा। उसकी कमर आगे पीछे हो रही थी और उसका लंड मालिनी के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था। चारु सोची कि सच में दीदी बहुत ही अनुभवी हैं क्या मस्त चूस रहीं हैं।वह बॉल्ज़ भी बड़े प्यार से चाट रही थी। अब चारु की पैंटी भी भीगने लगी थी। पर वो हिल नहीं सकती थी। वो साँस रोके सब देख रही थी। इतने में राजीव का फ़ोन बजा। उसने कमर हिलाते हुए उसे जल्दी से उठा लिया। वो धीरे से बोला: हेलो हाँ शिवा बोलो।

चारु सोची कि उफफफ जिजु का ही फ़ोन है।

राजीव: हाँ हाँ वो एकदम ठीक है। खाना खा ली है।

राजीव उधर से शिवा की बात के जवाब में: हाँ चारु सो रही है। आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह वो बहू मेरा चूस रही है। आऽऽऽऽहाह मैं गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ । आऽऽऽऽऽऽऽहहह हाँ बाक़ी सब ठीक है। ह्म्म्म्म्म्म चलो अब सफ़ाई करनी है रखता हूँ।

चारु सोची कि उफफफफ अंकल ने मज़े से बता दिया जिजु को कि वो उसकी बीवी से लंड चूसवा रहे हैं। हे भगवान इनको बिलकुल शर्म नहीं है। अब तक राजीव के कामरस की एक एक बूँद वो चाट कर पी चुकी थी। अब राजीव बाथरूम जाकर थोड़ी देर में वापस आया और आकर मालिनी के होंठ चूसकर बोला: आऽऽऽऽऽह बहु थैंक्स बहुत मज़ा आया। अब वह उसके बड़े बड़े दूध दबाकर बोला: बहू अब इनमे जल्दी ही दूध आएगा जिसे बड़े मज़े से पीऊँगा ।

मालिनी हँसकर: अरे तीन तीन होंगे पीने वाले। बेबी ,आप और शिवा। हा हा । राजीव भी हँसने लगा।

चारु हैरान होकर सोच रही थी कि उफ़्फ़्फ़क क्या परिवार है। एकदम खुला हुआ एक दूसरे से । उसकी बुर में ज़ोर की खुजली हो रही थी। वो किसी तरह से आवाज़ की और उठी आँख मलते हुए और बोली: अंकल कितना बज गया।

राजीव ने बहू के दूध से पहले ही हाथ उठा दिया था वो बोला: बेटी ४ बजे हैं।

चारु बाथरूम जाकर अपनी बुर में ऊँगली की और जल्दी ही झड़कर बाहर आयी। राजीव इस बीच बहू की गाँड़ में हाथ फेरकर बोला: बहू गाँड़ भी तुम्हारी मस्त मोटा गयी है। सच में मस्त भर गया है तुम्हारा बदन। मालिनी हंस दी।

राजीव: बहू एक बात बोलूँ ? मुझे लगता है कि चारु का कोई बोय्यफ़्रेंड है तभी तो उसकी चूचियाँ बहुत जल्दी जल्दी बड़ी हो रहीं हैं। तुम उसे पूछना।

मालिनी ने सिर हिलाकर कहा: अच्छा पूछूँगी।

जब चारु बाहर आयी तो राजीव अभी भी बहू की कलाइयाँ सहला रहा था।

अब राजीव बोला: मैं चाय लेकर आता हूँ। वो थरमस फ़्लास्क लेकर चला गया।

मालिनी: चारु तुम्हारा कोलेज कैसा चल रहा है?

चारु: दीदी ठीक है।

मालिनी: और तुम्हारे स्टेज पर्फ़ॉर्मन्स का क्या हुआ?

चारु: वो करन अंकल ने अगले महीने का तय किया है।

मालिनी: अच्छा एक बात पूछूँ ? सच बताओगी?

चारु: जी दीदी पूछो ना।

मालिनी: तुम्हारा कोई बोय्य फ़्रेंड है क्या?

चारु: नहीं दीदी कोई नहीं है। मगर आप ऐसा क्यों पूछ रही हो?

मालिनी: वो बस ऐसे ही । आजकल सभी लड़कियों का होता है ना, तो मैंने सोचा कि तुम्हारा भी कोई होगा।

चारु: नहीं दीदी मेरा कोई नहीं है।

मालिनी: तुम्हारी कोई सहेली बनी?

चारु: जी दीदी दो पक्की सहेलियाँ बनी हैं ।

मालिनी: उनका बोय्य फ़्रेंड है?

चारु: हाँ दीदी उनका है। पर मेरा कोई नहीं है।

मालिनी: सहेलियाँ बताती हैं कि वो लड़कों के साथ क्या क्या करती हैं?

चारु शर्मा कर: जी दीदी बताती हैं । वो बहुत मस्ती करतीं हैं उनके साथ।

मालिनी: कैसी मस्ती?

चारु: वो वो मतलब एक दूसरे को किस्स वगेरह करना और यहाँ वहाँ छूना। वही सब।

मालिनी: ओह उनकी छातियाँ तुम्हारी छातियों से बड़ी हैं क्या?

चारु इस सवाल से सन्न रह गयी पर फिर सम्भल कर बोली: जी दीदी उनकी काफ़ी बड़ीं हैं मेरे से । आप क्यों पूँछ रही हो ये सब?

मालिनी: देखो तुम मेरे घर में रहती हो तो तुम मेरी ज़िम्मेदारी हो। कुछ उलटा सीधा हो गया तो मुश्किल हो जाएगी ना।

चारु अब चुपचाप सोचने लगी कि इनको कैसे बताऊँ कि आपके ससुर , उनका दोस्त करन और वो मास्टर जी सब मिलकर मुझे दबा चुके है। वो चुप ही रही।

मालिनी: क्या सोच रही हो? कुछ छिपा रही हो क्या?

चारु: मैं मैं क्या छिपाऊँगी। आप भी ना दीदी।

तभी राजीव आ गया और सब चाय पीने लगे।

शाम को डॉक्टर आयी और बोली: देखो हो सकता है कि आज ही बेबी आ जाए बाहर। वह सब समझा कर चली गयी।

क़रीब ७ बजे शिवा का फ़ोन आया तो राजीव ने उसे घर जाकर खाना खाकर और फिर मुन्नी को लेकर अस्पताल आने को कहा। रात में वो दोनों ही यहाँ रुकेंगे। राजीव और चारु घर पर सोएँगे। राजीव की बात सुनकर चारु की बुर में एक अजीब सी झुरझुरी सी उठी। वो सोची कि आज अंकल घर में उसे अकेले पाकर पता नहीं क्या क्या करेंगे। उसका हाथ अपने आप ही अपनी बुर पर चला गया और वो उसे चुपके से खुजा बैठी।

उधर जब शिवा घर पहुँचा तो मुन्नी ने दरवाज़ा खोला। वो पसीने से भीगी हुई थी। उसका टॉप उसके पसीने से भीगकर उसकी चूचियों से चिपक गया था ।

शिवा: अरे इतना पसीना क्यों आ गया मुन्नी?

मुन्नी: जिजु कभी कभी खाना बनाने से ऐसे ही होता है ।

शिवा: वाह आज तुमने खाना बनाया है। शाबाश चलो मैं नहाकर आता हूँ। तुम भी नहा लो। फिर खाना खाकर अस्पताल जाएँगे।

शिवा अपने कमरे में जाकर नंगा हुआ और नहाने गया तो तौलिया नहीं था। वो लोअर पहना और बरामदे की ओर गया जहाँ जाने के लिए वो मुन्नी के कमरे के सामने से निकला। उसकी नज़र खुली खिड़की पर पड़ी। वह अपनी उत्सुकता नहीं रोक पाया और अंदर झाँका। उसकी आँख फट गयी। अंदर मुन्नी अब सिर्फ़ पैंटी और ब्रा में थी और क्या मस्त माल लग रही थी। फिर वो तौलिया लेकर अपनी चूचि से जाँघ तक लपेटी और बाहर आकर बाथरूम में चली गयी। शिवा भी चुपचाप बरामदे से अपना तौलिया लिया और वापस अपने कमरे को ओर चल पड़ा। तभी कॉमन बाथरूम का दरवाज़ा फिर से खुला और तौलिए में लिपटी जवानी उसके सामने आ गयी। मुन्नी शर्मा गयी और बोली: जिजु आप यहाँ क्या कर रहे हैं? वो शिवा के मर्दाने नंगे बदन के ऊपरी हिस्से को देखकर मस्त होकर बोली।

शिवा उसकी जवानी को घूरकर बोला: वो मेरा तौलिया बरामदे में था वही लेने आया था। उसने लोअर के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी। उसके लोअर में उठान आने लगा जो कि मुन्नी की नज़रों से छिप नहीं पाया। शिवा का लंड भी ऐसी मस्त अनछुई जवानी को देखकर अकड़ने लगा था। शिवा को तौलिए से बाहर झाँक रहे मस्त चूचियों का दीदार हो रहा था और साथ ही चिकनी जाँघें बभी ग़ज़ब ढा रही थी। असल में बाथरूम में जाकर मुन्नी ने ब्रा उतारी और तभी देखा कि साबुन नहीं है। सो वो बाहर आयी थी तौलिया लपेट कर साबुन लेने को।

शिवा: कुछ चाहिए क्या?

मुन्नी: जी जी वो साबुन नहीं है। मैं स्टोर रूम से ले लेती हूँ।

शिवा: चलो मैं मदद कर देता हूँ। वो ऊपर के खाने में रहता है।

शिवा स्टोर रूम गया और मुन्नी उसके पीछे गयी। वो साबुन निकाला और उसे देकर कहा: और कुछ तो नहीं चाहिए?

मुन्नी: नहीं जिजु और कुछ नहीं चाहिए। यह कहकर वो जैसे ही पलटी एक चूहा उसके पैर के पास से टकराकर भागा और मुन्नी उइइइइइइ माँ कहकर उछल सी पड़ी और उसका तौलिया उसके बदन से अलग होकर उसके पैरों पर गिर पड़ा।

शिवा की आँखें पहले फैलीं और फिर उन मस्त सख़्त अमरूदों पर मानो चिपक ही गयीं। नीचे भी पैंटी में क़ैद उसकी फूली हुई बुर बहुत ही क़यामत सी लग रही थी। उफफफफ क्या दृश्य था। और मज़ा तो उसे तब आया जब वो जिजुउउउउउउउ कहकर उसकी छाती से डरकर चिपक गयी। उसके सख़्त गोल गोल नंगे अमरूद उसकी नंगी छाती से सटकर उसे पागल कर दिए। वो उसकी नंगी पीठ को सहलाकर बोला: मुन्नी डरो नहीं। सिर्फ़ एक चूहा था।

मुन्नी: जिजु मुझे चूहे से बहुत डर लगता है। अब वो उसका तौलिया उठाया और मुन्नी को एक बच्ची की तरह अपने गोद में उठाया और जाकर उसे बाथरूम के सामने खड़ा किया और उसके अमरूदों को प्यार से देखकर बोला: मुन्नी अब भी डर लग रहा है तो नहला दूँ क्या?

अब मुन्नी को होश आया कि वो ऊपर से नंगी है और नीचे भी एक सिर्फ़ पैंटी में है। उसने जिजु के लोअर में खड़े हुए डंडे को देखा और वो शर्मा कर बाथरूम में घुसी और दरवाज़ा बंद कर ली। वह काफ़ी देर बाद सामान्य हो पायी। नहाते हुए उसका हाथ अपनी चूचियों की घुंडियों को मसल रहा था और उसकी उँगलियाँ बुर में मस्ती कर रहीं थीं । वो उइइइइइइइ कहकर झड़ी और फिर नहाकर कपड़े पहनी और बाहर आकर खाना लगाने लगी।

उधर शिवा भी अपने बदन पर साबुन मलते हुए मुन्नी की जवानी को याद करके मस्ती से अपने खड़े लौड़े को सहलाने लगा और जल्दी ही मूठ्ठ मारने लगा। आहह्ह्ह्ह्ह मुन्नीइइइइइइइइ कहकर वो झड़ गया और तय्यार होकर बाहर आया। मुन्नी शर्म से उससे आँख नहीं मिला पा रही थी। वो मन ही मन मुस्कुराया।अब दोनों ने खाना खाया।

शिवा: मुन्नी तुम बहुत बढ़िया खाना बनाती हो।

मुन्नी ख़ुश होकर: थैंक्स जिजु ।

शिवा शरारत भरी मुस्कुराहट के साथ बोला: वैसे तुम्हारा और भी बहुत कुछ बढ़िया है। वो उसके अमरूदों को देखकर बोला।

अब फिर से उसके गाल शर्म से लाल हो गए और वो बोली: जिजु आप बहुत गंदे हो।

शिवा: सच में चूहा बहुत प्यारा जानवर है । उसके कारण मुझे तो जन्नत के दर्शन हो गए।

मुन्नी शर्माकर वहाँ से भाग गयी। अब दोनों मालिनी के लिए टिफ़िन लेकर बाहर निकले और अस्पताल के लिए निकल पड़े। शिवा मुन्नी की स्कर्ट के अंदर मटकती हुई गाँड़ देखकर मस्त होने लगा।

आज रात शिवा और मुन्नी मालिनी के साथ अस्पताल में सोएँगे और राजीव और चारु घर पर सोएँगे।

आगे क्या होगा----

 
राजीव और चारु मालिनी को खाना खिला कर करीब ९ बजे अस्पताल से निकले और कार से घर के लिए निकले। शिवा और मुन्नी को राजीव ने कहा था कि मालिनी का पूरा ध्यान रखना। आते समय उसने बहू का माथा चूमा था और उसे आशीर्वाद भी दिया था कि प्रभु सब ठीक करेंगे।

रास्ते में कार में चारु बोली: अंकल क्या आज बच्चा हो जाएगा?

राजीव: हाँ लगता तो है देखो क्या होता है? अच्छा एक बात बताओ तुमको पता है कि बहु का बच्चा कहाँ से निकलेगा?

चारु का चेहरा लाल हो गया वो बोली: अंकल आप कुछ भी बोलते रहते हैं । मैं कोई बच्ची थोड़ी ही हूँ। मुझे सब पता है।

राजीव: अच्छा क्या पता है बताओ?

चारु शर्मा कर अपनी बुर की ओर इशारा करके बोली: यहाँ से । आप बहुत गंदे हो कुछ भी पूछते रहते हो।

कार चलाते हुए राजीव अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा और वहाँ सहलाते हुए बोला: पर तुम्हारी बुर में तो मेरी दो ऊँगली भी नहीं जाती फिर यहाँ से बच्चा कैसे निकलेगा?

चारु: अंकल हैरानी तो मुझे भी होती है कि इतने छोटे छेद से बच्चा कैसे बाहर आता है? पर सब कहते हैं तो सच ही होगा।

राजीव ने उसकी स्कर्ट को ऊपर खसकाया और पैंटी के ऊपर से उसकी बुर दबाकर बोला: हाँ बेटी ये सच है कि जब बच्चे को बाहर आना होता है तो ये बहुत बड़ी हो जाती है।

चारु के बदन में सुरसुरी दौड़ गयी जब राजीव के हाथ ने उसकी बुर में ऊँगली शुरू की। वो मज़े से अपनी टाँगों को फैलाकर उसको और अच्छी तरह से मस्ती करने का मौक़ा दी।

राजीव: और एक बात जिसमें अभी दो उँगलियाँ नहीं जा रहीं हैं ना वो मोटे से मोटे लौड़े के लिए भी रास्ता बना लेती है।

यह कहकर वो उसकी बुर को पैंटी की साइड से सहलाकर बोला : आह बेटी मेरा लौड़ा सहलाना ज़रा।बहुत गरम हो गया है।

राजीव अक्सर उसका हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रखता था पर आज वो देखना चाहता था कि लौंडिया कितनी तय्यार है चुदवाने के लिए इसीलिए वो ऐसे बोला।

राजीव की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब चारु ने अपना हाथ बढ़ाकर उसके पैंट पर लौड़े पर रखा और उसे दबाने लगी।

उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या अहसास था – राजीव सोचा कि ये अब तय्यार माल है मज़े के लिए। आऽऽऽऽह क्या मज़ा आएगा इसकी सील तोड़ने में। कितने साल हो गए किसी की सील तोड़े हुए- वो सोचने लगा। अब उसने अपना हाथ पैंटी से बाहर निकाला और उसकी एक चूची दबाने लगा। वह टॉप के ऊपर से ही उसकी निपल को टटोल कर मसला और चारु आऽऽऽऽहाह कर उठी और उसके लौड़े को और भी ज़ोर से दबा दी।

तभी घर आ गया और वो दोनों कार से उतरे और घर में चले गए। घर के अंदर घुसते ही राजीव ने दरवाज़ा बंद किया और चारु सामान रखने किचन में चली गयी। राजीव अपने कमरे में जाकर फ़्रेश हुआ और सिर्फ़ एक लूँगी में आ गया। उसने ऊपर भी कुछ नहीं पहना था। अब वो सोचने लगा कि शुरुआत कैसे की जाए? अचानक वो कुछ सोचकर मुस्कुराया और फ़ैसला किया कि शुरुआत लौंडिया की तरफ़ से ही होनी चाहिए । वो अपना लंड मसलकर बिस्तर पर बैठा और टी वी देखने लगा। उसके कमरे का दरवाज़ा खुला था।

उधर चारु अपने गरम बदन को लेकर परेशान थी। वो भी फ़्रेश हुई और रात को पहनने वाली टॉप और पाजामा पहनी और सोची कि अंकल को क्या हो गया? वो उसके कमरे में क्यों नहीं आते ? इतना गरम किया कार में और आज मौक़ा है फिर भी नहीं आ रहे हैं ।वो अपनी बुर खुजाई और सोची कि थोड़ा सा इंतज़ार कर लेती हूँ। वो बाहर आयी और ड्रॉइंग रूम में बैठकर टी वी देखने लगी।

इसी तरह क़रीब आधा घंटा बीत गया और दोनों अलग अलग कमरे में टी वी देखते रहे और सोचते रहे कि पहल दूसरा करेगा ,मैं क्यों करूँ?

राजीव परिपक्व पुरुष था उसे ये सब चालें अच्छी तरह से आती थीं।पर चारु अभी नादान मासूम लौंडिया थी । वो जल्दी ही बेचैन होने लगी और उसको एक दिन पहले अंकल के द्वारा की हुई बुर की चुसाई याद आने लगी और वो अपनी बुर खुजा बैठी। अब वो सोची कि कुछ बहाने से अंकल के कमरे में जाती हूँ और देखती हूँ कि क्या होता है ?वो अब चुदाई के लिए मरी जा रही थी।

वो फ्रिज से पानी की एक बोतल निकाली और एक गिलास लेकर राजीव कमरे में आयी और बिस्तर पर बैठे अधनंगे राजीव को देखकर शरमाई और बोली: अंकल पानी लाई हूँ।

राजीव: हाँ हाँ बेटी थैंक्स वहाँ टेबल पर रख दो।

चारु ने पानी रखकर पूछा: अंकल और कुछ तो नहीं चाहिए वरना मैं सोने जाती हूँ।

राजीव अपना हाथ लूँगी के अंदर ले जाकर लंड को दबाकर बोला: क्या बिटिया बड़ी नींद आ रही है? आज मुझे तो नींद नहीं आने वाली है।

चारु की आँखें बरबस ही लूँगी में बने तंबू पर पड़ी और उसकी बुर पनिया गयी। वह मुश्किल से वहाँ से आँख हटाकर मुस्कुराते हुए बोली: क्यों अंकल क्या हुआ? क्यों नींद नहीं आएगी?

राजीव: अरे बिटिया यहाँ कुछ काट लिया है बहुत दर्द हो रहा है। वह लंड को मसलकर बोला।

चारु हँसकर: मुझे पता है वहाँ क्या हो रहा है?

राजीव: जब पता है तो बिटिया इसका इलाज कर दो ना। आराम आ जाएगा इसे।

चारु अब खुल कर बोली: इसे तो आराम आ जाएगा पर मेरी तो फट जाएगी अंकल।

राजीव : अरे मेरी बच्ची एक ना एक दिन तो उसने फटना ही है आज ही सही। बोलो क्या कहती हो?

चारु बिस्तर के पास ही खड़ी थी । वह बोली: अंकल मेरी सहेलियाँ कहतीं हैं बहुत दर्द होता है पहली बार में।

राजीव: अरे वो अनाड़ियों से करवाई होंगी । मैं बड़े प्यार से करूँगा। बोलो क्या कहती हो?

चारु: ओह अंकल पता नहीं क्यों डर लग रहा है और वैसे भी आपका बहुत मोटा और लम्बा भी है।

राजीव ने अब अपनी लूँगी से लौड़े को बाहर निकाला और उसे सहलाते हुए बोला: देखो बिटिया कहाँ बड़ा है। नोर्मल साइज़ तो है।

अब चारु की आँखें जैसे उसके लौड़े पर ही चिपक गयीं थीं और उत्तेजना से उसकी छातियाँ ऊपर नीचे होने लगी। वो बोली: अंकल कितना बड़ा है? उफफफ मैं कैसे लूँगी अंदर?

राजीव उसको अपने पास आने का इशारा किया और बोला: डरो मत मेरी बच्ची । बहुत मज़ा आएगा। थोड़ा सा ही दर्द होगा उसके बाद हमेशा के लिए मज़ा मज़ा ।

चारु: और अंकल कहीं मैं परेगनेंट हो गयी तो?

राजीव: अरे बेटी उसका भी इलाज है ना हमारे पास। वो एक गोली का पत्ता निकाला और बोला: बस एक गोली खाओ और मज़े से बिना किसी चिंता के चुदवा लो।

चारु शर्माकर सिर झुका ली। अब राजीव बोला: आओ मेरे पास और यहाँ बैठो। चारु शर्माती हुई उसके बग़ल में आकर बिस्तर पर बैठ गयी और राजीव को अपना लौड़ा सहलाते हुए देख कर बहुत गरम हो गयी। राजीव ने उसे एक गोली दी जिसे वो पानी से पी गयी। राजीव समझ गया कि जब ये गोली खा ही ली है तो मज़े से चुदवाएगी ही।

राजीव: आओ मेरी गोद में बैठो प्लीज़ ।

चारु उठकर उसके खड़े लंड पर बैठ गयी और अपनी गाँड़ के नीचे उसकी सख़्ती को महसूस करके अपनी पैंटी गीली करने लगी। राजीव की छाती पर उसकी पीठ थी । वो उसके मुँह को घुमाया और उसके गाल और माथा चूमा और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिया। अब राजीव उसके होंठ चूसने लगा और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दिया। अब चारु को बहुत मज़ा आने लगा था । वो अपनी गाँड़ को हल्के से हिलाकर मस्ताने लंड को अपनी बुर के ऊपर रगड़ने लगी थी। राजीव ने अब अपने हाथ उसकी एक एक चूचि पर रखा और दबाकर मस्त होने लगा।

राजीव: आऽऽऽऽऽह बिटिया क्या मस्त चूचियाँ है बिलकुल सख़्त अमरूदों की तरह । फिर वह उसकी स्कर्ट को कमर तक उठा दिया । अब उसका नंगा लौड़ा चारु की चिकनी जाँघों को रगड़ रहा था और पैंटी के ऊपर से उसकी बुर पर भी अपना मुँह मार रहा था । अब चारु के मुँह से सीइइइइइइ निकल रही थी। अब उसने चारु के टॉप को नीचे से उठाया और उसके सिर के ऊपर से निकाल दिया। अब वो उसकी ब्रा में फँसे हुए सख़्त अमरूदों को देखकर मस्ती से उनको भी दबाने लगा। फिर उसने ब्रा का हुक खोला और उसके अमरूदों को क़ैद से आज़ाद कर दिया। अब वो उन नंगी मस्त चूचियों को जिनके ऊपर मटर के दाने सा निपल था दबाने लगा । अब वो चारु को उठाया और घुमाकर फिर से अपनी गोद में बिठा लिया। अब उसकी नंगी छाती चारु की छातियों से सट गयीं थीं । वह मस्ती में आकर उसके होंठ चूसे जा रहा था।

उसके हाथ अब चारु की पीठ सहलाते हुए उसके गोल गोल चूतरों को भी दबाने में लगे थे। अब चारु की बुर उसके लंड से रगड़ खा कर जैसे नदी बन गयी थी जिसमें से पानी निकले ही जा रहा था। अब वो झुका और एक चूचि दबाते हुए दूसरी को चूसने लगा। चारु को लगा कि वो अभी ही झड़ जाएगी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना मज़ा आ रहा है- वो सोची। अब उसने कमर हिलाकर अपनी बुर फिर से लौड़े पर रगड़ने लगी और उइइइइइ कर उठी।

राजीव उसकी चूचियाँ बदल बदल कर चूस रहा था। और उसके निपल भी मसल रहा था। अचानक चारु ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अंकल उइइइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽऽऽऽ कहती हुई अपनी गाँड़ हिलाते हुए बुर को लंड पर रगड़ कर झड़ने लगी।

राजीव मुस्कुराया और बोला: क्या हुआ बिटिया झड़ गयी क्या? उसने चारु की उठती गिरती छातियों को दबाकर कहा।

चारु: आऽऽऽऽह अंकल आप बहुत मज़ा देते हो। उफफफफ।

अब राजीव उसे चूमते हुए खड़ा किया और उसका स्कर्ट खोल कर निकाल दिया। अब उसकी पूरी गीली पैंटी उसके मुँह के सामने थी। राजीव ने अपना मुँह उसकी पैंटी के अंदर डाला और सूँघते हुए जीभ से उसे चाटने लगा। चारु फिर से उइइइइइइइ कर उठी। अब राजीव ने उसकी पैंटी को भी नीचे कर निकाल दिया और अब उसकी बुर को सूँघते हुए और चूमते हुए अपनी जीभ से चाटने लगा। एक बार फिर से चारु के बदन में मानो बिजली का करेंट सा लगा और वो आऽऽऽह कर उठी। राजीव के दोनों हाथ उसकी एक एक गाँड़ पर थे और वह उनको दबाकर पूरी शिद्दत से उसकी बुर चाट रहा था ।

चारु अब फिर से आऽऽऽऽऽऽऽह अंकल हाऽऽयय्य कर उठी। राजीव के आँखों के सामने पूरी नंगी जवानी उसे मदमस्त कर रही थी। क्या क़िस्मत पायी है उसने जो ऐसी मस्त कमसिन जवानी का आज मज़ा मिल रहा है – वो सोचा।

अब वो बिस्तर पर लेट गया और चारु को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठ चूसते हुए उसकी पीठ गाँड़ और चूचियाँ सहलाने लगा। उसका लौड़ा चारु की जाँघों पर मस्ती कर रहा था। अचानक वो चारु से बोला: बेटी अपना थूक मेरे मुँह में गिराओ।

चारु चौंकी और बोली: अंकल छी ये गन्दा नहीं लगेगा आपको?

राजीव: बेटी तुम्हारा कुछ गंदा हो हो ही नहीं सकता क्योंकि तुम हो ही इतनी प्यारी ।चलो थूक गिराओ मेरे मुँह में।

चारु हिचकिचाते हुए थोड़ा सा थूक बाहर निकाली और राजीव ने अपना मुँह खोल दिया और उसका थूक अपने मुँह में गिरा लिया और निगल लिया। चारु देखती ही रह गयी । राजीव फिर से बोला: बेटी और गिराओ ।

चारु अब थूक उसके मुँह में डाली और राजीव फिर से वो गटक गया। चारु का मुँह उसने नीचे करके उसके होंठ चूसने लगा और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दिया। फिर चारु को बोला: बेटी अपनी जीभ मेरे मुँह में डालो ना अब चारु भी मस्ती में थी और अपनी जीभ बाहर निकाली और राजीव उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी जीभ से अपनी जीभ दबाने लगा। दोनों पूरी तरह से गरम हो चुके थे।

अब राजीव बोला: चलो कल जैसे थोड़ी देर ६९ करें?

चारु मुस्कुराई और उठकर उसके ऊपर उलटी लेट गयी। अब राजीव के सामने उसकी बुर और मस्त गोल चिकनी गाँड़ थी। वो मस्ती से उसकी बुर चाटने लगा आऊँ गोल गोल गाँड़ दबाने लगा। उधर चारु भी उसका लंड ऊपर से नीचे तक चाटी और फिर बॉल्ज़ भी चाटी । अब उसने उसके लंड को चूसना शुरू किया। राजीव सोचा आऽऽऽऽऽऽह मासूम लड़की कितनी जल्दी सब सीख कर जवान हुए जा रही है। राजीव ने शीशे में देखा जिसमें वह उसका लंड चूसते हुए बहुत मस्त लग रही थी ।

अचानक वो बोली: आऽऽऽऽऽह अंकल रुकिए नहीं तो मैं फिर से झड़ जाऊँगी।

राजीव उसको बोला: अच्छा चलो अब लेटो यहाँ और वो उसके बग़ल में लुढ़क गयी। राजीव उठा और उसकी गाँड़ के नीचे एक तकिया लगाया और उठकर वो एक क्रीम लेकर आया। उसने अपने लंड पर वो क्रीम लगाई जो कि वो मालिनी की गाँड़ मारने के लिए इस्तेमाल करता था। फिर वो मालिनी की दोनों टांगों को घुटने से मोड़कर उसको उसकी छातियों की ओर उठा दिया। ऐसा करने से उसकी बुर पूरी तरह खुल गयी। वो उसमें दो ऊँगली डाला और पाया कि वो पूरी तरह से गीली थी। वो अब उसमें भी थोड़ी सी क्रीम अंदर तक लगाया और फिर बोला: बिटिया, तय्यार हो ना अपनी पहली चुदाई के लिए?

चारु उत्तेजनावश बोली: आऽऽऽऽऽऽह अंकल हाँआऽऽऽऽऽ।

 


राजीव ने अपना लौड़ा उसकी बुर के छेद में रगड़ना शुरू किया और वो हाऽऽऽऽऽऽय्य कर उठी। अब वो बोला: बेटी डालूँ अंदर ?

चारु: आऽऽऽहहह अंकल डाऽऽऽऽऽऽऽऽलो नाआऽऽऽऽऽऽ।

राजीव ने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बुर में हल्के से दबाया और आधा सुपाड़ा अंदर धँस गया। फिर उसे कुछ विरोध सा मिला उसकी बुर के अंदर से। चारु चिल्लाई: आऽऽऽऽऽह अंकल ।

राजीव: बेटी अब डाल रहा हूँ अपना लंड। ठीक है????! थोड़ा सा दर्द होगा । यह कह कर वो उसके ऊपर झुका और उसके होंठ चूसने लगा। अब उसके दोनों हाथ उसकी गाँड़ की एक एक गोलाई को दबोचे हुए थे । होंठ चूसते हुए उसने अपनी कमर दबाई और अब उसका सुपाड़ा उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर घुसते चला गया।

चारु अब दर्द से उइइइइइइइइइइइ मरीइइइइइइइइइइ। चिल्लाई। वह अपनी गाँड़ खिसकाने लगी ताकि लंड बाहर हो जाए पर राजीव की पकड़ उसकी गाँड़ पर पक्की थी । वो टस से मस नहीं हो पाई। अभी भी राजीव अपने लंड को उसकी एकदम टाइट बुर में दबाता चला गया और अबकि चारु अपना मुँह इधर उधर की ताकि उसके होंठ राजीव के होंठ से अलग हो जाएँ पर यहाँ भी उसे सफलता नहीं मिली। वो घुटी हुई चीख़ें निकाली जैसे गन्न्न्न्न्न्न्न्न ह्म्म्म्म्म्म्म्म करके चिल्लाने की कोशिश कर रही थी। राजीव ने देखा कि उसकी आँखें मानो बाहर आ रही थी। साफ़ पता चलता था कि वो काफ़ी दर्द महसूस कर रही थी। पर राजीव अनुभवी था इसलिए वो अपनी पकड़ उसके ऊपर से ढीला नहीं किया। अब तक उसका आधा लंड अंदर समा चुका था। सो उसने अपने लंड को बाहर निकाल कर आख़री धक्का मारा और उसका लंड उसकी बुर में पूरी तरह से समा गया। अब चारु की आँखों में आँसू आ गए थे और वो ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी अपने आप को छुड़ाने के लिए । अब राजीव ने उसकी गाँड़ से हाथ हटाया और अब उसकी चूचि दबाने लगा। उसके निपल्ज़ मसलने लगा। अब उसका लंड उसकी बुर में पूरा फ़ंसा हुआ था और उसने चारु के आँसुओं को अपने होंठों से चाट लिया और बड़े प्यार से बोला: बस बिटिया रानी बस , अब सब ठीक है । अब दर्द नहीं होगा। आराम से ऐसे ही पड़ी रहो। ठीक है?

चारु: आऽऽऽह अंकल आप बहुत गंदे हो। मुझे इतना दर्द हुआ और आप मेरी बात ही नहीं सुने। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मेरी तो जान ही निकल गयी थी।

राजीव अब उसकी एक चूचि चूस रहा था और दूसरे हाथ से उसके एक निपल को मसल रहा था। थोड़ी देर तक यूँ ही वो बदल बदल कर निप्पल्स चूसता और दबाता रहा। अब चारु के बदन में फिर से दर्द की जगह एक उत्तेजना का वास होता जा रहा था । अब राजीव ने उसकी मस्त आँखों को देखा और कहा: तो बिटिया अब अगर दर्द कम हो गया हो तो चुदाई शुरू करूँ?

चारु: हाँ अंकल अब दर्द तो नहीं हो रहा है पर थोड़ी जलन सी हो रही है।

राजीव ने मुस्कुराते हुए अपना लंड पीछे खींचा और आधा लंड बाहर करके फिर से पूरा पेल दिया। चारु फिर से आऽऽह कर उठी। पर इस बार उसे दर्द के अलावा सुख भी मिला। वो चुपचाप पड़ी रही और राजीव ने अपनी चुदाई की गति बढ़ा दी। उसके हाथ अभी भी उसके निपल्ज़ को मसलने में लगे थे।चारु की बुर अब मस्ती में आने लगी और उसकी खुजाल बहुत बढ़ गयी। वह राजीव के हर धक्के पर आऽऽऽह उन्न्न्न्न म्म्म्म्म कहती और मस्ती में आकर राजीव के बड़े चूतरों को पकड़ ली और नीचे की ओर दबाने लगी, मानो कह रही हो कि अंकल अपने बॉल्ज़ तक अंदर पेल दो। राजीव की कमर पिस्टन की तरह ऊपर नीचे हो रही थी और चारु की बुर में मस्ती का संचार सा हो रहा था। अचानक चारु चिल्लाई आऽऽऽऽहहह मैं गयीइइइइइइइइइ उफ़्फ़्क्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ हाऽऽयय्य उन्न्म्न्न्न्म्न और वो झड़ने लगी। जब वो झड़ने लगी तो उसकी बुर ने राजीव के लंड को मानो अपनी मुट्ठी में जकड़ सा लिया। वह भी मज़े में डूबकर ज़ोर ज़ोर से गाँड़ हिलाकर झड़ने लगा और ह्म्म्म्म्म्म्म आऽऽऽहहह करके उसकी बग़ल में लुढ़क गया। अब वो चारु की ओर करवट लिया और बोला: बेटी मज़ा आया?

चारु: अंकल शुरू में बहुत दर्द हुआ पर बाद में बहुत मज़ा आया। थैंक्स आज आपने मुझे लड़की से औरत बना दिया।

राजीव: अरे बेटी औरत तो तेरी दीदी बनी है तू तो अभी भी प्यारी सी लड़की ही है। बस फ़र्क़ इतना है कि अब कुँवारी नहीं चुदी हुई लड़की हो गयी है।

अब चारु उठी और झुक कर अपनी बुर को देखी और वहाँ ऊँगली लगा कर बोली: देखो अंकल मेरी आपने फाड़ दी है। देखिए ख़ून निकल रहा है।

राजीव उठा और उसकी बुर की जाँच किया और बोला: अरे बेटी जब लड़की की सील टूटती है तो ख़ून तो निकलेगा ही ना । ये ख़ून उसी समय निकला था पर अब बंद है। चलो बाथरूम में साफ़ करके और चेक कर लेते हैं।

चारु उठने की कोशिश की पर उसके क़दम लड़खड़ा गए। राजीव ने उसे गोद में उठा लिया और बाथरूम में ले जाकर उसे टोयलेट में सीट पर बिठा कर उसको पेशाब करने दिया। फिर उसने चारु को खड़ा किया और नीचे एक स्टूल पर बैठ कर उसकी बुर का मुआयना किया। उसने देखा कि बुर पूरी लाल हो रही थी और ख़ून भी काफ़ी था। वो हैंड शॉवर से उस जगह को साफ़ किया और फिर उसे घुमाकर उसकी गाँड़ और उसकी गाँड़ की दरार भी साफ़ किया। तौलिए से सुखाकर वह उठकर ऐंटिसेप्टिक क्रीम लाया और वहाँ अच्छी तरह से क्रीम लगाया और बोला: बेटी अभी कैसा लग रहा है।

चारु: अंकल जलन हो रही है थोड़ी सी। बस और कुछ नहीं।

राजीव : चलो ज़रा चल कर देखो । कोई दिक़्क़त तो नहीं है ना?

चारु थोड़ा सा चली और रुक कर बोली: अंकल कमज़ोरी सी लग रही है। और नीचे जलन हो रही है।

राजीव उसे गोद में उठाया और वापस ला कर कुर्सी पर बिठाया और ख़ुद बिस्तर की चद्दर निकाला जिसमें ख़ून और काम रस का दाग़ लगा हुआ था। फिर उसने साफ़ चादर बिछाई और चारु को बिस्तर पर लेटने का इशारा किया। वो उठकर बिस्तर पर लेट गयी और अब राजीव भी बाथरूम से फ़्रेश होकर आया और आकर उसके बग़ल में लेट गया और एक चादर से दोनों के नंगे बदन को ढक लिया। वो उसको करवट में अपनी ओर करके लिटाया। अब वो उसको अपनी बाँह में भरा और प्यार से उसके गाल चूमकर बोला: बस बेटी रात भर आराम करो। सुबह तक एकदम ठीक हो जाओगी। वह उसकी नरम गाँड़ पर हाथ फेरकर बोला। चारु की चूचियाँ उसकी चौड़ी छाती में दब सी गयीं थीं । चारु उसके बलिष्ठ बदन का अहसास पा कर मस्त होने लगी और बोली: अंकल कल कोलेज जा पाऊँगी या नहीं?

राजीव: हाँ बेटी बिलकुल जा पाओगी। अगर थोड़ा लँगड़ा कर चली तो बोल देना फिसल गयी थी घटना मुचक गया है। वो उसके चूचि को चूमकर बोला।

चारु: ठीक है अंकल । एक बात बोलूँ ? आप बहुत अच्छे हो। यह कहकर वो उसके सीने में सिर छुपा ली।

राजीव ने उसकी गरदन को चूमा और बोला: चलो अब सो जाओ । थक गयी होगी। गुड नाइट ।वह उसकी पीठ और गाँड़ सहलाता हुआ बोला।

वो: गुड नाइट अंकल । अब वो अपना सिर उठाई और अपने होंठ खोली और राजीव ने उसका एक गीला सा चुम्बन लिया। फिर दोनों एक दूसरे से लिपटे नींद की गोद में चले गए।

उस रात जब चारु और राजीव घर के लिए निकल गए तो मालिनी के पास शिवा बैठा बातें कर रहा था और मुन्नी पास ही रखे बिस्तर पर लेट गयी। उसने आज पाजामा और टॉप पहना था। वह अपनी आँख पर अपनी बाँह रख कर सोने की कोशिश की और उसे हल्की सी झपकी आ गयी।

शिवा मालिनी को हौंसला दे रहा था। मालिनी बोली : डॉक्टर बोली है कि अब कभी भी डिलीवरी हो सकती है

शिवा: अच्छा है ना । अब थोड़ा सा धेर्य रखो सब ठीक होगा। मैं तुम्हारे पास हूँ ना। वो उसका पेट सहलाकर बोला।

मालिनी फीकी सी मुस्कुराई। इसी तरह दोनों बातें करते रहे फिर मालिनी बोली: जी मुझे नींद आ रही है। उस समय ११ बज गए थे रात के।

शिवा: ठीक है जान सो जाओ तुम। वह झुका और उसके होंठ चूमा और बोला: गुड नाइट। और हाँ कुछ लगे तो मैं यहाँ ही कुर्सी पर बैठा हूँ।

मालिनी: आप मुन्नी को थोड़ा सा सरका कर वहीं सो जाओ ना।

तभी मुन्नी ने करवट ली और मालिनी बोली: मुन्नी तू थोड़ा सा खिसक जा ना। शिवा भी लेट जाएँगे। शिवा बत्ती भी बुझा दो। मुझे रोशनी में नींद नहीं आती।

मुन्नी आधी नींद में ही थोड़ा सा खिसक गयी और शिवा ने बत्ती बंद की और जाकर उसके बग़ल में पीठ के बल लेट गया। मुन्नी ने दीवार की ओर मुँह कर लिया था। पाजामे में उसकी छोटी सी मगर गोल गोल गाँड़ मस्त दिखाई दे रही थी। शिवा की आँखों में नींद नहीं थी। उसे मालिनी की चिंता तो थी ही पर साथ में उसके बग़ल में सोयी हुई कमसिन जवानी का भी अहसास था। आज ही वो उसके साथ हुए चूहे वाले हादसे का सोचकर मस्त होने लगा जब मुन्नी का तौलिया गिर गया था और उसे उसके मस्त अमरूदों का दीदार हो गया था। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त माल है ये छोकरी- वो सोचा और उसका लौड़ा सर उठाने लगा। तभी मालिनी के खर्राटे से बजने लगे । वो समझ गया कि वो गहरी नींद में है।

थोड़ी देर तक ऊहापोह में रहने के बाद अपनी वासना के आगे वो हार ही गया और अपना एक हाथ मुन्नी की गोल गाँड़ पर रख ही दिया। मुन्नी की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी। अब वो उसे धीरे धीरे दबाने लगा। अब मुन्नी हिली और फिर से सो गयी। शिवा ने भी अब मुन्नी की ओर करवट ली और अब वो उसकी गाँड़ फिर से सहलाने लगा। तभी मुन्नी की नींद खुली और उसे अपनी गाँड़ पर शिवा के हाथ का अहसास हुआ। वो चुपचाप ऐसे पड़ी रही मानो अभी भी गहरी नींद में हो। अब शिवा का हौसला बढ़ा और वह उसकी पीठ भी सहलाने लगा। जब उसने देखा कि वो कुछ नहीं बोल रही है तो वह अपने आप को उसके पिछवाड़े से चिपका लिया।अब उसके पैंट के ऊपर से लौड़ा उसकी गाँड़ पर ठोकर मार रहा था। मुन्नी की मुनिया के अंदर सुससुरी होने लगी थी। वह अब भी शांत पड़ी हुई शिवा की अगली हरकत का इंतज़ाम करने लगी।

अब शिवा ने अपना एक हाथ ऊपर से लेजा कर उसकी एक छाती पर रखा और इंतज़ार किया उसकी प्रतिक्रिया का। पर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो वो हल्के से उसे दबाने लगा और सोचा कि उफ़्फ़्फ़्फ़्क कितने मस्त सख़्त अमरूद हैं इसके। अचानक जोश में उससे थोड़ा ज़ोर से दब गए उसके बूब तो वो बोल उठी आऽऽऽह । अब शिवा को पक्का हो गया कि लौंडिया जाग रही है और मज़े ले रही है।अब उसकी हिम्मत और बढ़ी और वो उसको पकड़कर करवट से सीधा किया और वो अब पीठ के बल आ गयी थी। अब वो उसके गाल सहलाया और फिर गाल चूमने लगा। इसके बाद वो उसके होंठ पर अपने होंठ रखा और उनको चूमने लगा।

मुन्नी फुसफुसाई: जिजु , दीदी जाग जाएगी।

शिवा उसके होंठ चूसते हुए: अरे अभी तो सोयी है। वो जागेगी तो हिलेगी डुलेगी।डरो नहीं बस मज़े लो बेबी । अब वो खुलकर उसके अमरूद दबाने लगा और मुन्नी उइइइइइइ कर उठी और बोली: उफफफ जिजु धीरे से दबाओ ना। दुखता है।

शिवा: ओह सारी बेबी । बहुत मस्त हैं ना तुम्हारे अमरूद । इसलिए थोड़ा जोश में ज़ोर से दबा दिया। अब मज़े से करूँगा।

यह कहकर वो उसके टॉप को ऊपर किया और उसकी ब्रा के कप्स में से उसकी चूचियाँ बाहर निकाला और उनको दबाया और फिर एक एक करके उनको चूसने लगा। मुन्नी तो जैसे मज़े से पागल हो गयी ।शिवा उसके निपल भी मसले जा रहा था। मुन्नी बड़ी मुश्किल से अपनी चीख़ों को रोक पा रही थी। क़रीब १० मिनट की चुसाई में उसकी चूचियाँ पूरी लाल हो चलीं थीं। अब शिवा उसके पाजामा के अंदर हाथ डाला और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को सहलाया और फिर उसकी पैंटी के अंदर अपना हाथ डालकर उसकी बुर से खेलने लगा। पहले उसने बुर को अपने पंजे में दबाकर मज़ा लिया और बाद में दो ऊँगलियों से उसकी बुर में मानो गिटार सा बजाने लगा। अब मुन्नी अपने मुँह पर तकिया दबाकर अपनी घुटी हुई मस्ती से भरी आवाज़ों को दबा रही थी।

क़रीब पाँच मिनट में ही वो शिवा के हाथ को अपने ज़बरदस्त ऑर्गैज़म से भिगो बैठी। शिवा ने अब अपना हाथ बाहर निकाला और मुन्नी को दिखाकर उसे चाट लिया। मुन्नी की तेज़ साँसे अब धीरे धीरे सामान्य हो चलीं थीं। अब शिवा ने अपना पैंट खोला और अपना हथियार बाहर निकाला और मुन्नी का हाथ उसपर रख दिया। मुन्नी उसके मस्त मोटे गरम लौड़े को हाथ में लेकर सिहर उठी। पर जल्दी ही वो हाथ चलाकर मुठियाने लगी। शिवा अब तक काफ़ी उत्तेजित हो चुका था और वो मस्ती से झड़ने का इंतज़ार कर रहा था। तभी मालिनी की आऽऽह सुनाई दी। शिवा ने हड़बड़ाकर अपना लौड़ा वापस पैंट में डाला और अब फिर से करवट बदल कर मालिनी की तरफ़ मुँह कर लिया।

 


मालिनी अब शायद शांत हो गयी थी। शिवा धीरे से उठा और बाथरूम से सफ़ाई करके वापस आया और अब मुन्नी भी बाथरूम जाकर वापस आयी।

अभी दस मिनट ही बीते होंगे कि मालिनी फिर से आऽऽऽह की। अबके शिवा उठा और मालिनी को जाकर पूछा: सब ठीक है ना? कुछ लग रहा है क्या?

मालिनी: हाँ लगता है पेन शुरू हो गया है। आप नर्स को बुला लो।

शिवा मुन्नी को उठाया और बोला: तुम इसका ध्यान रखो। मैं नर्स को बुलाता हूँ।

शिवा थोड़ी देर में नर्स के साथ वापस आया और वो मालिनी की जाँच की और बोली: चलो आपको लेबर रूम में ले चलते हैं । लगता है समय आ गया है।

थोड़ी देर बाद मालिनी को लेबर रूम में ले जाया गया। शिवा उसके माथे को चूमा और बोला: सब ठीक होगा। बिलकुल नहीं डरना।

अब शिवा और मुन्नी बाहर बेंच पर बैठकर इंतज़ार करने लगे। उस समय रात के २ बजे थे। मुन्नी: जिजु आपको लड़का चाहिए या लड़की?

शिवा: मुझे तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कुछ भी हो। बस स्वस्थ और मालिनी की तरह सुंदर हो। अच्छा ये तो बताओ कि अभी मस्ती में मज़ा आया ना?

मुन्नी: छी जिजु । चुप करिए।

शिवा मुस्कुराकर: वाह ,जब मज़ा ले रही थी तब तो तकिए में अपनी आवाज़ को दबा रही थी अब क्यों शर्मा रही हो? बताओ ना बहुत मज़ा आया ना?

यह कहते हुए उसने उसका हाथ पकड़कर दबा दिया। वो दोनों एक कमरे में बैठे थे जिसके अंदर मालिनी गयी हुई थी। वहाँ इन दोनों के अलावा और कोई नहीं था। शिवा ने फिर से कहा: जानती हो तुम्हारी मुनिया बहुत मस्त है। वो उसकी बुर की ओर इशारा करके बोला।

मुन्नी शर्मा गयी। शिवा फिर से उसे छेड़ा: अच्छा मेरा हथियार पसंद आया कि नहीं? वो अपने लंड की ओर इशारा करते हुए बोला।

मुन्नी: बहुत बड़ा है आपका। पता नहीं दीदी कैसे आपका झेलती होगी।

शिवा: अरे वो तो मज़े से ले लेती है तभी तो अभी बच्चा पैदा कर रही है मेरी मुन्नी जान। अब शिवा खुलकर मस्ती में आकर उसकी बुर को पाजामा के ऊपर से दबोच लिया। मुन्नी उछलकर बोली: उफफफ जिजु क्या करते हो? कोई आ जाएगा ना।

शिवा मन ही मन ख़ुश हुआ कि इसे किसी के आने का ही डर है वैसे मज़ा लेने में कोई आपत्ति नहीं है। वो बोला: अरे कोई नहीं आएगा यहाँ। अब वो एक हाथ उसके कंधे पर रखकर उसे टॉप के अंदर डाला और ब्रा के भी अंदर डालकर उसके सख़्त बूब दबाने लगा। मुन्नी सिहर उठी। वो सोची कि उफफफफ इसमें कितना मज़ा है। ये दोनों बाप बेटा बहुत ही सेक्सी आदमी हैं। उफफफफ क्या हो रहा है मेरे बदन में – वो सोची।

अब शिवा का एक हाथ उसके बुर को पाजामा के ऊपर से मसल रहा था और दूसरा हाथ बूब और छोटे से निपल मसल को रहा था। उसकी घुटी हुई सिसकारियाँ निकल रही थीं। वो धीरे से उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ और हाऽऽऽऽय्य कह उठी। अब शिवा ने उसका हाथ अपने पैंट के ऊपर खड़े लंड पर रखा और वो अपने आप उसे दबाकर मज़े लेने लगी। यह कुछ मिनट ही चल पाया कि दरवाज़े में आहट हुई और दोनों ने अपने अपने हाथ हटा लिए। नर्स मालिनी के कमरे से बाहर आयी।

शिवा: क्या ख़बर है अंदर की?

नर्स: सब ठीक है। अगले आधे घंटे में सब हो जाना चाहिए। यह कहकर वो आलमारी से सामान निकाली और फिर अंदर चली गयी। अब शिवा खड़ा हुआ तो उसका लंड पैंट से तना हुआ दिख रहा था। चारु उसे देखकर मस्त होकर बोली: आपका इतना बड़ा पता नहीं दीदी कैसे ले लेती है।

शिवा उसको दिखाकर दबाकर बोला: बेबी तुम भी ले लोगी।

मुन्नी तुनक कर: मुझे नहीं लेना। दीदी का है उनको ही देना।

शिवा: अरे तेरी दीदी तो अभी महीना भर किसी काम की नहीं रहेगी। तुमको ही मेरी मदद करनी होगी। बोलो करोगी ना? ये कहते हुए उसने अपना लौड़ा ऐसे एडजस्ट किया कि वो अब उसकी जाँघ के साथ लम्बाई में चला गया था और बाहर से नहीं दिख रहा था। अब वो मस्ती में आकर चारु का हाथ पकड़कर जाँघ पर रखे लौड़े पर रखा और बोला: अब एक महीने तक तुम ही इस बेचारे की प्यास बुझा देना। ठीक है?

चारु उसकी पूरी लम्बाई और मोटाई का अहसास करके अपनी बुर पनिया बैठी और बोली: धत्त जिजु आप क्या क्या बोल रहे हो। यह कहते हुए वह उसका लौड़ा दबाना चालू रखी। अब शिवा बोला: बेबी ऐसे दबाओगी तो मैं अभी पकड़कर यहीं चोद दूँगा। आऽऽऽऽह क्या मस्त बूब्ज़ हैं। वो फिर से टॉप के ऊपर से उसके अमरूद दबाते हुए बोला: अच्छा चलो कॉफ़ी लेकर आता हूँ। तुम यहीं बैठो।

क़रीब दस मिनट के बाद वो कॉफ़ी लाया और दोनों उसे पीने लगे। तभी अंदर कुछ हलचल की आवाज़ें आयीं और फिर मालिनी की चीख़ें सुनाई दीं । और तभी एक बच्चे के रोने की आवाज़ भी आयी। मुन्नी उछलकर : जिजु लगता है हो गया है।

शिवा भी उत्तेजना से खड़े होकर दरवाज़े से सट कर बोला: हाँ लगता है हो गया है।

तभी दरवाज़ा खुला और नर्स बाहर आकर शिवा को बधाई दी: बधाई हो आपको बेटी हुई है।

शिवा ने ख़ुशी में आकर नर्स को ५००/ का नोट दिया और फिर मुन्नी उससे लिपट गयी और बोली: बधाई हो जिजु ।

वो भी मुन्नी को चूमकर बोला: तुमको भी बधाई हो मौसी बनने की।

फिर थोड़ी देर बाद नर्स एक बच्ची को लेकर बाहर आयी और शिवा को दिखाकर बोली: ये आपकी बेटी।

शिवा अचम्भित सा होकर उस गोरी सी बच्ची को देखते ही रह गया। वो पूछा: मालिनी ठीक है ना?

नर्स : हाँ दोनों माँ बेटी ठीक हैं। आप अब कमरे में चलो । थोड़ी देर बाद माँ बेटी वहाँ आ जाएँगी।

शिवा ने समय देखा ४ बजे थे। वह बोला: मुन्नी चल पापा को फ़ोन करते हैं।

मुन्नी:सुबह ६ बजे कर लीजिएगा ना। अभी सो रहे होंगे ।

शिवा: ठीक है। यह कहकर वो बिस्तर पर लुढ़क गया और बोला: बिटिया बहुत प्यारी है ना?

मुन्नी उसके पास आकर बैठी और बोली : हाँ बहुत सुंदर है।

अब शिवा ने मुन्नी को अपने ऊपर खींच लिया और उसके नरम नरम होंठ चूसने लगा। मुन्नी भी उसका साथ देने लगी। शिवा के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे और फिर उसने उसके गोल गोल गाँड़ को दबाना शुरू किया। अब उसने अपने हाथ उसके पाजामा के और पैंटी के अंदर डाल दिए और उसकी गाँड़ की दरार में हाथ घुसेड़ दिया। वो उसकी बुर के छेद को लम्बाई में सहलाने लगा और गाँड़ के छेद में भी उँगलियाँ फेरने लगा। मुन्नी उन्न्न्न्न्न्न आऽऽऽह कर उठी। मुन्नी को उसका खड़ा लंड अपनी जाँघों में ठोकर मारता महसूस हुआ। वह मस्ती से उउइइइइइइ कर उठी। शिवा के पंजे उसकी बुर और गाँड़ की गोलाइयों को दबोच कर उसे मस्ती से भर रहे थे। साथ ही उसकी गाँड़ के छेद में घूमती उसकी उँगलियाँ उसके अंदर उत्तेजना का संचार कर रही थी।

अचानक शिवा पलटा और मुन्नी को नीचे करके उसकी टॉप उठा दिया और ब्रा ऊपर करके उसके अमरूदों को बाहर निकाला और उनको एक एक करके चूसते हुए दबाने लगा। अब मुन्नी आऽऽऽऽऽऽऽह जीइइइइइजु मरीइइइइइइइइ चिल्ला उठी। अब वह नीचे आया और उसके पाजामा और पैंटी को नीचे खींचा और उसकी कोमल चिकनी बुर को देखकर मस्ती से भर गया और उस पर हाथ फेरकर बोला: उफफफ बेबी इतनी प्यारी और मासूम बुर पहली बार देख रहा हूँ। क्या मस्त चिकनी कर रखी हो। अब वो झुका और उसकी बुर को चूमने लगा। बुर तो वैसे ही पनियाई हुई थी वो उसको जीभ से पूरी लम्बाई में चाटा और फिर उसकी टांगों को ऊपर उठाया और अब उसके सामने उसकी भूरि सी उतनी ही मासूम सी गाँड़ का छेद था जिसे वो प्यार से पहले चूमा और फिर जीभ बाहर करके चाटने लगा। अब उसकी जीभ उसकी बुर की पूरी लम्बाई को नाप रही थी। फिर उसने उसकी टांगों को मोड़कर फैलाया और अब दोनों हाथ से उसकी बुर की फाँकों को फैलाया और गुलाबी बुर को देखकर पागलों की तरह उसे चाटने लगा।

अब मुन्नी के लिए अपनी सिसकियाँ दबाना असम्भव सा हो गया था। वो आऽऽऽहहहह जीइइइइइइइजु उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उछालकर उसके मुँह पर अपनी बुर को रगड़ने लगी। और जल्दी ही मस्ती के सागर में डूबकर उन्न्न्न्न्न्न्न कह कर झड़ने लगी। शिवा उसके फ़ौवारे का रस पीता चला गया। अब मुन्नी निढाल होकर पड़ी हुई थी। शिवा ने उसकी पैंटी और पाजामा वापस से पहना दिया। और ख़ुद बाथरूम में जाकर अपना लौड़ा बाहर निकालकर मूठ्ठ मारने लगा। वह इतना उत्तेजित था कि क़रीब पाँच मिनट में ही झड़ गया। अब वो फ़्रेश होकर बाहर आया। वो भी मुन्नी को अपने से चिपका कर लेट गया और फिर दोनों ने एक नींद भी मार ली।

शिवा ने क़रीब ७ बजे राजीव को फ़ोन किया।

राजीव की नींद में ही आवाज़ आयी: हेलो।

शिवा: पापा बधाई हो मालिनी को बेटी हुई है।

राजीव: अरे वाह दोनों ठीक है ना?

शिवा: हाँ पापा दोनों ठीक हैं । बस थोड़ी देर में कमरे में आ जाएँगे।

राजीव: चलो बहुत बहुत बधाई हो। मैं अभी तय्यार होकर आता हूँ।

फ़ोन रखकर राजीव ने बग़ल में धुत्त सो रही चारु को देखा और उसे उस पर प्यार आ गया। वो चादर से ढकी थी पर उसके नीचे पूरी नंगी थी। वो ख़ुद भी नंगा ही था। वो झुका और उसके होंठ चूम लिया। चारु हिली और अपनी बाँह उठाकर राजीव से लिपट गयी। राजीव: चलो उठो बेटी । अभी अस्पताल जाना है, तुम मौसी बन गयी हो। मालिनी को बेटी हुई है। चारु उछलकर उठ बैठी और तब उसे याद आया कि वो तो नंगी है। उसकी सख़्त अमरूद सी छातियाँ बाहर नंगी आ गयीं थीं जिनको अब राजीव बड़े प्यार से देखे जा रहा था। इसके पहले कि वो उनको चादर से ढक पाती राजीव ने अपना मुँह झुकाया और एक बूब को चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा। चारु: आऽऽऽह अंकल अभी छोड़िए ना। अस्पताल जाना है।

राजीव उसे छोड़ कर बोला: उफफफ बिटिया क्या मस्त माल हो।

चारु उठकर नंगी ही बाथरूम में घुस गयी। राजीव उसके जवान बदन को देखकर अपने लंड को मसल कर सोचा- जब तक मालिनी चुदवाने लायक नहीं होती ये बहुत मज़ा देगी।

क़रीब ८ बजे सुबह नर्स मालिनी को लेकर कमरे में आयी और शिवा और मुन्नी ने मालिनी को प्यार किया और बधाई दी। मालिनी थकी सी और कमज़ोर लग रही थी पर मुस्कुरा रही थी। उसने शिवा का हाथ पकड़कर कहा: ख़ुश हो आप?

शिवा उसके गाल चूमा और बोला: हाँ जानू बहुत ख़ुश हूँ । कितनी प्यारी ही हमारी गुड़िया।

मुन्नी: हाँ दीदी बिलकुल आप जैसी गोरी है।

मालिनी: पापा को बताया कि नहीं?

शिवा: हाँ बता दिया है। बहुत ख़ुश हो रहे थे अभी आने वाले हैं।

मालिनी सोची कि पता नहीं वो इस गुड़िया के दादा हैं या पापा? वैसे क्या फ़र्क़ पड़ता है?

शिवा: क्या सोचने लगी?

मालिनी मुस्करायी : नहीं कुछ नहीं। अब मैं थोड़ी देर के लिए सोती हूँ। वो चुपचाप आँख बंद कर ली।

शिवा और मुन्नी साथ वाले बिस्तर पर बैठ गए और शिवा को फिर से गरमी चढ़ने लगी। वह फुसफुसा कर बोला: मुन्नी कब दोगी?

मुन्नी: क्या दूँगी?

शिवा उसकी बुर को पाजामा के ऊपर से दबाकर: ये, अपनी बुर?

मुन्नी उसका हाथ हटाकर:: छी जिजु कभी भी कुछ भी बोलते हो। दीदी सामने लेटी है। चुप करो।

शिवा उसका हाथ अपने लंड पर रखा और बोला: देखो कितना तरस रहा है तुम्हारी बुर में घुसने के लिए?

मुन्नी एक दो बार उसे दबा दी और फिर हाथ हटाकर: अभी चुप रहिए।बाद में देखेंगे।

शिवा उसके टॉप के ऊपर से उसकी एक चूचि दबाकर: ठीक है मुन्नी । अब रहा नहीं जाता तुमको चोदे बिना।

मुन्नी उसके मुँह से यह शब्द सुन कर अवाक् रह गयी। उसने कोई जवाब नहीं दिया।

उधर चारु बाथरूम से फ़्रेश होकर आयी तो उसने राजीव का तौलिया लपेटा हुआ था। वो बोली: अंकल मैं चाय बना रही हूँ। आप फ़्रेश हो जाओ।

राजीव नंगा ही उसके पास आया और उसके होंठ चूमा और एक झटके में उसका तौलिया खींच कर निकाल दिया। अब वो उसे अपने नंगे बदन से लिपटा कर बोला: बेटी अब नीचे दर्द तो नहीं है ना?

चारु: अंकल थोड़ी सी जलन हो रही है। पर हाँ थोड़ा सा दर्द तो है।

राजीव: बस शाम तक सब ठीक हो जाएगा। रात में फिर से चुदाई के लिए तय्यार हो जाएगी तुम्हारी बुर ।

चारु शर्माकर उसकी छाती में मुँह छिपा ली। राजीव के हाथ उसकी पीठ सहला रहे थे। फिर नीचे जाकर वो दोनों हाथों में उसकी गोल गोल गाँड़ लेकर दबाने लगा।

चारु: अंकल चाय नहीं पीनी क्या?

 
राजीव अलग होकर उसपर झुका और एक एक चूचि को बारी बारी से चूसा और बोला: पहले दूध पिता हूँ फिर चाय पीऊँगा।

चारु हँसकर अपने कपड़े उठाकर भाग गयी । और तौलिया लेकर राजीव बाथरूम में घुसा।

थोड़ी देर बाद दोनों चाय पीते हुए बात करने लगे।

चारु: अंकल मैं जल्दी से नाश्ता बनाती हूँ फिर हम गुड़िया को देखने जाएँगे।

राजीव: हाँ ज़रूर। बाई को आने में अभी आधा घंटा है, चलो साथ में नहा लेते है।

चारु: धत्त मुझे शर्म आएगी।

राजीव: अरे मालिनी तो मेरे साथ कई बार नहाई है। वो तो बहुत मज़ा करती है। और हाँ एक बात सुन लो अगर शर्माते रहोगी तो जवानी का मज़ा नहीं ले पाओगी। चलो अभी नहाते है।

वो चारु को उठाया हाथ पकड़कर, और वो चुपचाप उठ गयी और दोनों बाथरूम की ओर चल पड़े। वहाँ पहुँचकर राजीव ने चारु का टॉप उतारा और उसका पाजामा भी निकाल दिया। अब वो ब्रा और पैंटी में क़ातिल लग रही थी। वो ख़ुद भी एक झटके में अपनी लूँगी उतारा और नंगा होकर चारु का हाथ पकड़कर शॉवर के नीचे खड़ा हो गया। फिर वो उसकी ब्रा और पैंटी निकाल दिया।अब वो उसे अपनी बाहों में भींचा और बोला: बिटिया क्या मस्त जवानी आइ है तुमपर। उफ़्फ़ एक एक अंग जैसे साँचे में ढला है। वो उसकी कमर सहलाकर और चूची दबाकर बोला। फिर उसने शॉवर चालू किया। अब दोनों उसमें भीगने लगे। राजीव का लौड़ा खड़ा होकर उसके पेट पर नाभि के पास ठोकर मार रहा था। वो अब गरम होने लगी थी। उसकी चूचियों के निपल्ज़ अब पूरे खड़े हो गए थे। उसकी बुर भीगने लगी थी।

अब राजीव उसके होंठ चूसने लगा। और उसके हाथ उसकी कमर पीठ और गाँड़ में घूमने लगे। अब वो शॉवर को बंद किया और बोला: पहले मैं तुमको साबुन लगाता हूँ फिर तुम मुझे लगाना। यह कहकर वो साबुन लेकर उसके गले से लेकर उसकी छातियाँ और पेट और पेड़ू तक साबुन लगाया। चारु की मज़े से सिसकियाँ निकल गयीं । अब वो उसके पीठ और गाँड़ में भी साबुन लगाया। फिर वो एक स्टूल लेकर सामने बैठ गया और उसके एक पैर को उठाकर नीचे से लेकर ऊपर जाँघ तक साबुन लगाया और फिर दूसरे पैर में भी वही किया। उसकी बुर पानी से भीगी उसके मुँह के सामने थी। वो उसे ३/४ बार चूमा और फिर उसे दोनों हाथों से अच्छे से फैलाया और अंदर लाल हुई बुर को देखकर बोला: बिटिया अब तो ठीक ही दिख रही है। कल तो काफ़ी फटी हुई और घायल दिख रही थी।

चारु: अंकल वो आप क्रीम लगाए थे ना उससे बड़ा आराम मिला था।

राजीव: ठीक है बेटी अभी नहाने के बाद एक बार और लगा दूँगा। अब वो साबुन से उसकी बुर को साफ़ किया और फिर उसे घुमाकर उसकी मस्तानी गोल गोल गाँड़ पर साबुन लगाया। फिर उसने कहा: बिटिया ज़रा अपनी गाँड़ फैलाना तो मुझे यहाँ भी सफ़ाई करनी है।

चारु अब तक मस्त गरम हो चुकी थी। उसने अपनी गाँड़ दोनों हाथों से फैलायी और राजीव उसकी भूरी सिकुड़ी हुई मस्त गाँड़ के छेद को देखकर दीवाना सा हो गया। अब वो साबुन लेकर पूरे गाँड़ की दरार को साफ़ किया और अपनी उँगलियाँ उसके छेद पर रखकर उसे सहलाते हुए बड़ी देर तक साफ़ किया।

उफफफफ क्या दृश्य था – एक १८/१९ साल की लड़की अपनी गाँड़ फैलाकर एक ५०/५२ साल के आदमी से अपनी गाँड़ मस्ती कर रही थी।

राजीव भी बड़ी देर तक चारु की चिकनी गाँड़ का मज़ा लिया और बोला: बिटिया, पता है मालिनी इस छेद में भी मज़े से मेरा और शिवा का लौड़ा ले लेती है। यह कहकर वो साबुन लगी हुई अपनी मोटी सी ऊँगली उसके गाँड़ के छेद में थोड़ा सा घुसेड़ दिया। चारु उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अंकल कर उठी। दर्द के साथ उसे कुछ अजीब सी फ़ीलिंग़स भी हुई। अब राजीव अपनी एक ऊँगली उसकी गाँड़ में अंदर बाहर करते हुए उसे मस्ती से भरने लगा। कुछ देर बाद चारु बोली: आऽऽऽह अंकल अब जलन हो रही है और देर भी । हमको अस्पताल जाना है ना।

राजीव ने अपनी ऊँगली निकाली और उसे सूँघा और बोला: आऽऽऽह बिटिया क्या ख़ुशबू है तुम्हारी गाँड़ की। फिर वो खड़ा हुआ तो चारु ने देखा कि उसके मोटे लौड़े के मुँह पर एक सफ़ेद सी बूँद लगी थी प्रीकम की। पता नही चारु को क्या हुआ कि वो झुकी और उस प्रीकम को चाट ली। राजीव उसको चूम लिया और बोला: कैसा टेस्ट है इसका?

वो: म्म्म्म्म्म मस्त है अंकल। अब मैं आपको साबुन लगा दूँ?

राजीव ने एक बार शॉवर लिया और बोला: हाँ अब लगाओ।

चारु अब उसकी छाती पर साबुन लगायी और फिर उसके निपल्ज़ को भी मसली। राजीव ह्ह्ह्ह्ह्ह्म्म्म्म कर उठा। अब वो उसके हाथ पेट और पीठ पर भी साबुन मली । अब वो भी नीचे स्टूल पर बैठी और उसकी टाँग और जाँघ में साबुन लगायी और बोली: अंकल आपके कितने बाल है सब जगह?

राजीव मुस्कुराया और उसे साबुन लगाता देखने लगा और उसका लौड़ा अब उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था । अब वो साबुन लेकर उसके पेड़ू और लंड के आसपास की जगह में साबुन लगायी। फिर उसने लौड़े को हाथ में लेकर उसे मूठियाते हुए साबुन लगाया। राजीव आऽऽऽह कर उठा। उसके नाज़ुक हाथ में उसका मोटा लौड़ा तो मानो समा ही नहीं रहा था। अब वो उसके बॉल्ज़ भी साफ़ की। और नीचे हाथ ले जाकर उसकी बॉल्ज़ के निचले हिस्से को भी साफ़ किया। फिर वो बोली: अंकल ज़रा घूमिए तो।

राजीव उलटा हो गया। अब उसके बालों से भरे हुए ठोस गोल गाँड़ उसके सामने थे। वो साबुन लेकर वहाँ मलने लगी और फिर उसकी दरार में हाथ डालकर सफ़ाई की। उसका हाथ उसके छेद पर भी पड़ा । राजीव आऽऽह कर उठा । चारु अब खड़ी हो गयी और शॉवर चालू की। अब दोनों एक दूसरे के बदन से साबुन साफ़ करने में लग गए। राजीव मस्ती में आकर उसके चिकने बदन के एक एक हिस्से को सहलाया और दबाया और चारु भी उसके सभी अंगों की सफ़ाई की।

अब राजीव फिर से नीचे बैठा और हैंड शॉवर से उसकी बुर को साफ़ किया और फिर मस्ती में आकर उसे चूमने और चाटने लगा। अब उसकी जीभ बाहर आकर उसकी बुर को मस्ती से चाटने लगी। और चारु भी मस्ती में आकर अपनी उसके सिर को अपनी बुर पर दबाने लगी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अंकल वह चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽहहहह । तभी राजीव उसको उलटा घुमाया और बोला: बिटिया ज़रा दीवाल पकड़कर अपनी गाँड़ उठाके सामने की ओर झुको ना।

चारु उत्तेजना वश मुड़कर दीवाल का सहारा लेकर अपनी गाँड़ उठाई और झुक गयी। अब राजीव पीछे से उसकी गाँड़ फैलाकर अपनी जीभ उसकी दरार में डाला और कुछ देर उसके पिछवाड़े के छेद को चाटा और फिर सामने के छेद में भी जीभ चलाने लगा। उसकी एक ऊँगली अब उसके क्लिट के दाने को भी सहला रही थी। जल्दी ही वो आऽऽऽऽऽऽहहह अंकल मैं तो गयीइइइइइइइइइइ कहकर अपनी बुर पीछे करके उसके मुँह पर रगड़ने लगी और झड़ती चली गयी। राजीव मस्ती से उसका पानी पीने लगा।

अब वो हाँफते हुए खड़ी हुई और दीवाल के सहारे टिक गयी। अभी भी वो लम्बी लम्बी साँस ले रही थी। अब राजीव उसे पकड़कर स्टूल पर बिठाया और उसके सामने अपना लंड जो बुरी तरह से ऊपर नीचे हो रहा था लेकर आया। चारु ने अपना मुँह खोला और उसको एक हाथ से पकड़कर चूसने लगी। नमकीन प्रीकम से वो मस्त होने लगी। राजीव ने उसका दूसरा हाथ अपने बॉल्ज़ पर रखा और वो एक हाथ से बड़े बड़े बॉल्ज़ सहलाते हुए उसका मस्त लंड चूसने लगी। उसकी आँखें मस्ती से बंद थीं। जल्दी ही राजीव भीअपनी कमर हिलाकर आऽऽऽहह बिटिया आऽऽऽऽऽऽऽ राआऽऽऽऽऽऽऽनी कहते हुए वो झटके से उसके मुँह में अपना वीर्य गिराने लगा और बोला: आऽऽऽऽह बिटिया पीइइइइइइइइ लोओओओओओओओ इसकोओओओओओ।

चारु को कहाँ कुछ कहने की ज़रूरत थी वो ख़ुद ही मज़े से उसे गटकने लगी। अब राजीव आऽऽऽह करके अलग हुआ। अब चारु भी खड़ी हुई और पूछी: अंकल मुझे चूसना आ गया ना?

राजीव मस्त होकर उसके होंठ चूसते हुए बोला: आऽऽऽऽह मेरी रानी बिटिया, अरे मस्त चूसती हो तुम।

फिर वो उसे शॉवर के नीचे लाया और एक और बार दोनों ने स्नान किया और फिर तौलिए से एक दूसरे का बदन पोंछकर। बाहर आए। अब वो हँसकर अपने कमरे में भाग गयी।

अभी राजीव ने कपड़े पहने ही थे कि काम वाली आ गयी। उसने और चारु ने जल्दी से नाश्ता बनाया और राजीव और चारु ने खाकर मालिनी के लिए नाश्ता लिया और जल्दी से अस्पताल के लिए चले गए।

रास्ते में कार में राजीव बोला: आज बहुत मस्त लग रही हो। काले टॉप में । देखो तुम्हारी बाहें कितनी सुंदर दिख रही हैं। और जींस में तुम्हारी जाँघें भी मस्त दिख रही हैं । और एक बात बोलूँ?

चारु आँख मटका कर: वो भी बोल ही दीजिए।

राजीव : जब तुम मेरे आगे चल रही थी तो क़सम से तुम्हारी जींस में फँसी हुई गोल गाँड़ देखकर मेरा लंड झटका मारने लगा था।

चारु हँसी और उसके लंड को पैंट के ऊपर से दबाकर बोली: इसको और काम ही क्या है झटके मारने के सिवा?

दोनों हँसने लगे। तब चारु बोली: वैसे अंकल एक बात बोलूँ, आप बुरा तो नहीं मानोगे?

राजीव उसकी जाँघ सहला कर: अरे नहीं बिटिया बोलो ना जो भी बोलना है।

चारु: अंकल आप वो जो मेरी पीछे चाट रहे थे आपको गंदा नहीं लगता?

राजीव: अरे बिटिया रानी, वो तुम्हारी गाँड़ का छेद तो मस्ती का पिटारा है। उसमें जो मज़ा है वो बयान करना मुश्किल है। इतनी स्वाद है तुम्हारी गाँड़ क्या बताऊँ? और हाँ जो तुम गंदी होने की बात कर रही हो तो मैंने उसे अच्छी तरह से साबुन से साफ़ करके ही चाटा था। सफ़ाई होने के बाद कुछ भी गंदा नहीं होता बस सेक्सी होता है। समझी?

चारु: ओह ऐसा है क्या?

राजीव: अच्छा ये बताओ कि तुमको मज़ा आया कि नहीं जब मैंने तुम्हारा पिछवाड़ा चाटा?

चारु ने शर्मा कर सिर को हाँ में हिलाया।

राजीव: बिटिया जब एक ऊँगली से इतना मज़ा मिला तो जब उसमें मेरा लौड़ा जाएगा तो सोचो कितना मज़ा आएगा।

चारु शर्माकर कार के बाहर देखने लगी।

तभी अस्पताल आ गया।

जब वो अस्पताल के कमरे में घुसे तो वहाँ मालिनी लेटी हुई थी और अभी शिवा उससे बातें कर रहा था । मुन्नी बग़ल के बिस्तर पर बैठी अपने मोबाइल में गेम खेल रही थी।

राजीव को देखकर मालिनी का चेहरा खिल उठा और राजीव को देखकर शिवा उठ गया और राजीव उसकी जगह बैठकर मालिनी के माथे और गाल को चूमा और बोला: बहू रानी बहुत बहुत बधाई हो। अरे हमारी गुड़िया कहाँ है?

मालिनी: आपको भी बधाई हो। दादा जी बन गए आप। और गुड़िया तो अभी डॉक्टर के पास ही है वो उसकी जाँच कर रहे हैं। थोड़ी देर में आएगी।

तभी चारु भी मालिनी से लिपटी और बधाई दी। सब बड़े ख़ुश नज़र आ रहे थे। तभी नर्स गुड़िया को लेकर आयी और सब उसको देखकर बहुत ख़ुश हुए । सबने उस गुड़िया को प्यार किया। अब मालिनी को नाश्ता कराया चारु ने । सब बहुत ख़ुश थे तभी गुड़िया रोने लगी। नर्स आकर बोली: चलो आप इसको दूध पिलाओ। फिर वो शिवा और राजीव से बोली: आप दोनों बाहर जाओ।

अब राजीव और शिवा बाहर आ गए और अंदर मालिनी आज पहली बार अपना दूध बच्ची को पिलाने के लिए अपना गाउन खोली और चारु की मदद से उसने अपना एक दूध ब्रा से बाहर निकाला और गुड़िया के मुँह में रखा। बहुत थोड़ा सा दूध आया और वो उसे पीने लगी। नर्स चली गयी और चारु और मुन्नी बड़े ध्यान से मालिनी को दूध पिलाते देखने लगीं। दोनों को याद आया कि जिजु और अंकल भी तो ऐसे ही उनका दूध पीते हैं । दोनों मस्त होकर देख रहीं थीं। चारु: दीदी आपके दूध कितने बड़े हो गए हैं। जब आप हमारे साथ रहती थीं तो काफ़ी छोटे थे।

मालिनी मुस्करायी: शादी के बाद तेरे जिजु ने दबा दबा कर बड़े कर दिए। और अब गुड़िया के होने के समय और बड़े हो गए हैं ।

चारु मन ही मन में मुस्करायी-- वाह दीदी सिर्फ़ जिजु ने दबाया है और अंकल ने नहीं? उसे याद था कि कैसे जिजु और अंकल दोनों दीदी को मज़ा से रहे थे।

अचानक मालिनी ने ऐसा दिखाया कि गुड़िया का दूध पीना हो गया और बोली: जा तेरे जिजु और पापा को अंदर भेज दे और तुम दोनों कुछ मिनट के लिए बाहर रुको। वह अपने दूध को गाउन से छुपा कर बोली।

मुन्नी और चारु बाहर गए और फिर शिवा और राजीव अंदर आए।

राजीव पास बैठ कर: क्या हुआ मालिनी ? सब ठीक है ना?

मालिनी ने पास खड़े शिवा का हाथ पकड़ा और साथ ही राजीव का भी हाथ पकड़ा और बोली: आप दोनों ख़ुश हो ना?

राजीव अब भावुक होकर उसके होंठ चूमकर बोला: हाँ बहू हम बहुत ख़ुश हैं । ये कैसा सवाल है?

शिवा: हाँ हाँ मालिनी हम बहुत ख़ुश हैं पगली। क्या हुआ बोलो ना? वो भी झुका और उसके होंठ और गाल चूमा।

मालिनी: वो क्या है ना, मुझे बेटे की इच्छा थी तो सोची कहीं आप लोग भी तो निराश ना जो गए बेटी के होने से ।

राजीव : अरे नहीं बेटी ऐसा कुछ भी नहीं है। हम सब बहुत ख़ुश हैं।

मालिनी ख़ुशी से रो पड़ी और दोनों उसे चूमने प्यार करने लगे।

( उधर बाहर चारु को पड़ी थी कि अंदर क्या हो रहा है? वो मुन्नी को बोली: थोड़ा कॉफ़ी पीने का मन हो रहा है ला दोगी क्या?

मुन्नी हाँ कहकर कॉफ़ी लेने चली गयी अस्पताल के केंटीन में। अब चारु चुपके से अंदर जाकर खिड़की से अंदर झाँकी और उसी समय दोनों मर्द मालिनी को प्यार कर रहे थे। वो देखने लगी। )

मालिनी भी उन दोनों को चुमी और फिर आँसू पोंछकर बोली: चलो आपकी गुड़िया को दूध पिलाती हूँ आप दोनों देखो।

वह अपना गाउन खोली और एक दूध बाहर निकाली और अपना निपल गुड़िया के मुँह में लगा दी। गुड़िया उसको पीने लगी। दोनों मर्द मज़े से ये दृश्य देख रहे थे।

मालिनी: आप दोनों सोच रहे हो ना कि ये दूध आपको कब मिलेगा?

शिवा: हाँ बताओ ना कब मिलेगा ?

राजीव: बेटी घर जाकर हम लोगों को पिला देना। ठीक है?

मालिनी : नहीं पापा थोड़ा अभी ही टेस्ट कर लो आप दोनों। यह कहकर वो गुड़िया को लिटा दी। अब वो अपनी ब्रा से दूसरा दूध भी बाहर निकाली और अब दोनों मर्दों के सामने उसके बड़े बड़े स्तन थे जो दूध से भरे हुए थे। उसने अपने एक एक स्तन को अपने हाथ में पकड़ा और कहा: चलो आप दोनों टेस्ट कर लो। पर थोड़ा सा ही पीना। बाक़ी गुड़िया के लिए छोड़ देना।

चारु की आँखें फट सी गयीं । वो देख रही थी कि मालिनी का पति और उसका ससुर अब एक एक दूध को मुँह में लेकर पी रहे थे और मालिनी के चेहरे में ग़ज़ब की ख़ुशी दिख रही थी।

फिर वह बोली: बस अब रुको आप लोग। आज इतना ही मिलेगा। घर जाकर अच्छे से पी लेना। दोनों ने अपना मुँह दूध से हटाया और शिवा बोला: उफ़्फ़ पापा क्या स्वाद है। मम्मम।

राजीव: हाँ बहुत स्वाद है। मैंने आज बहुत दिन बाद पिया है मस्त लगा।

मालिनी: आपने तो सासु माँ का भी पिया होगा जब शिवा और दीदी हुए होंगे तो?

राजीव मुस्करा कर: हाँ बिलकुल पिया है। सविता (शिवा की माँ) मुझे रोज़ कम से कम दो बार पिलाती थी। एक बार जब मैं ऑफ़िस से शाम को आता था तब और दूसरी बार सोने के पहले मस्ती करने के समय।

अब राजीव ने प्यार से उसके दूध दबाए और कहा: बेटी आज पुरानी याद ताज़ा हो गयी।

शिवा भी उसका एक दूध दबाकर बोला: हाँ मुझे भी मस्त लगा जानू।

अब मालिनी ने अपना गाउन ठीक किया और कहा: जाओ अब उन लड़कियों को अंदर बुला लो। बेचारी बाहर खड़ी हैं।

शिवा बाहर गया तो उसके पहले ही चारु सब देखकर वहाँ से हट गयी थी। तभी मुन्नी सबके लिए कॉफ़ी एक ट्रे में लेकर आयी और शिवा उसको बड़े प्यार से थैंक्स कहा और अंदर जाकर सब कॉफ़ी पीने लगे।

थोड़ी देर बाद शिवा बोला: पापा मैं और मुन्नी घर जाकर फ़्रेश होकर आते हैं । आप और चारु यहाँ रुकोगे ना?

राजीव: हाँ हाँ क्यों नहीं बिलकुल रुकेंगे। जाओ तुम दोनों हो आओ। और आराम करके मालिनी का लंच लेकर आना।

अब शिवा और मुन्नी घर चले गए कार की चाबी लेकर। राजीव और चारु वहीं रह गए मालिनी और बच्ची के पास।

आगे क्या होगा----

 
शिवा और मुन्नी अस्पताल से बाहर आए और कार में बैठकर घर की ओर चल पड़े। रास्ते में मुन्नी बोली: जिजु मैं आपसे गुड़िया होने की ख़ुशी में एक गिफ़्ट लूँगी।

शिवा प्यार से उसकी जाँघ सहलाकर बोला: बोलो मुन्नी क्या चाहिए? जो माँगोगी मिलेगा?

मुन्नी : बाद में बताऊँगी सोच कर। वैसे मुझे एक सुंदर ड्रेस चाहिए।

शिवा: अरे तो क्या समस्या है ?अपनी दुकान है और अपनी मुन्नी है। जो ड्रेस पसंद हो ले लेना।

मुन्नी ख़ुश होकर: थैंक यू जिजु ।

शिवा: वैसे मुझे पापा बनने की ख़ुशी में क्या दोगी?

मुन्नी: मैं भला आपको क्या दे सकती हूँ?

शिवा उसकी जाँघ के बीच में हाथ डालकर बोला: ये दे देना मुन्नी।

मुन्नी उछल पड़ी और बोली: छी जिजु आप बहुत गंदे हो। बस आपको एक ही चीज़ दिखती है।

शिवा: मुन्नी यही तो असली चीज़ है जिसके सामने सब कुछ बेकार है। बस ये मिल जाए तो और कुछ नहीं चाहिए।

मुन्नी उसका हाथ हटाकर: उफफफ जिजु हाथ हटाओ।

शिवा हँसने लगा। तभी कार घर पहुँच गयी।

अंदर जाकर शिवा अपने कमरे में चला गया और मुन्नी अपने कमरे में। दोनों नहाये और शिवा हाफ़ पैंट और बनियान पहनकर बाहर आया और मुन्नी पाजामा और टॉप पहनकर बाहर आयी और किचन में जाते हुए पूछी: नाश्ता बना रही हूँ। आप इंतज़ार करो।

वह यह कहकर मटकती हुई किचन में चली गयी। शिवा तो उसके गीले बाल और पाजामे में चिपकी गोल गोल गाँड़ देखता ही रह गया। उसके लौड़े में गुदगुदी होने लगी।

वो भी उठा और जाकर किचन में मुन्नी को बोला: मैं भी मदद कर देता हूँ। बोलो क्या बना रही हो?

मुन्नी: टोस्ट और ओम्लेट बना देती हूँ।

शिवा: चलो मैं प्याज़ टमाटर काट देता हूँ। तुम तय्यारी करो।

इस तरह दोनों ने मिलकर नाश्ता बनाया। जब मुन्नी ओम्लेट तल रही थी तो शिवा उसके पीछे आकर झुका और अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में रगड़ने लगा। मुन्नी आऽऽऽऽऽऽह कर उठी। शिवा के हाथ अब उसकी दोनों चूचियों पर आ गए थे और वो उनको मस्ती से दबा रहा था। मुन्नी: आऽऽऽऽऽह जिजु छोड़ो ना।

शिवा उसकी गरदन चूमकर: आऽऽऽह क्या मस्त अमरूद हैं तुम्हारे। फिर वह उसकी गाँड़ पर अपना लौड़ा रगड़ते हुए बोला: उफफफ क्या मस्त गाँड़ है।

अब अचानक वो अपना एक हाथ उसके पाजामा के ऊपर से ही उसकी बुर पर रखा और उसको मसलते हुए बोला: आऽऽऽह मुन्नी दे दो ना।

मुन्नी सिसकी लेकर: आऽऽऽऽह । ये आप मेरी मदद कर रहे हैं? आऽऽहहह छोड़ो ना जिजु । मुन्नी की मुनिया गीली होने लगी थी।

शिवा उसे छोड़ा और नाश्ता ले जाकर बाहर टेबल पर रखा। वह भी सामान लेकर आयी और कुर्सी पर बैठने लगी। पर शिवा उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया। वो ज़्यादा विरोध नहीं करी और उसे गोद में बैठते ही अपनी गाँड़ के नीचे एक कड़ी सी चीज़ का अहसास हुआ और वो जानती थी कि ये जिजु का बड़ा से लौड़ा ही था।

अब शिवा उसके मुँह में टोस्ट डाला और उसका एक टुकड़ा अपने मुँह में डाला। वह ऐसा करके ख़ुद भी नाश्ता करता रहा और मुन्नी को भी खिलाता रहा। मुन्नी की मुनिया अब क़ाबू से बाहर हो रही थी।

तभी शिवा ने एक और हरकत की। अब उसने मुन्नी को इस तरह से अपने गोद में बिठाया कि अब उसकी छाती शिवा की छाती से चिपक गयी। और उसकी मुनिया शिवा के हथियार से रगड़ खाने लगी। अब मुन्नी को लगा कि इस तरह तो वह झड़ जाएगी। वो बोली: जिजु नाश्ता हो गया है अब मुझे छोड़ दीजिए ना प्लीज़।

शिवा इसे गोद से उतार दिया और बोला: चलो अगर तुमको मज़ा नहीं आ रहा है तो कोई बात नहीं।

मुन्नी को काफ़ी ख़राब लगा कि उसे शिवा ने गोदी से उतार दिया। वो तो दिखावे के लिए ऐसा बोली थी। उसकी मुनिया को बहुत मज़ा आ रहा था शिवा के लंड से रगड़े जाने में। वह चुपचाप बर्तन उठा कर किचन में चली गयी और वहाँ जाकर अपनी बुर खुजा बैठी।

उधर शिवा अपने कमरे में गया और बिस्तर पर बैठ गया और अपनी पैंट नीचे करके अपने लौड़े को बाहर निकाला और मूठ्ठ मारने की तय्यारी करने लगा।

तभी मुन्नी अपनी बुर की खुजाल से मजबूर होकर शिवा के कमरे में जाने का सोची और कुछ बहाना भी सोच ली। पर दरवाज़ा बंद था। वो खिड़की से पर्दा हटा कर झाँकी तो उसने जो देखा कि उसके होश उड़ गए। शिवा अपने हाथ में थूक रहा था और अपने लम्बे और मोटे लौड़े पर मल रहा था। फिर वो सडका मारने लगा। उफफफ क्या लग रहा था। मुन्नी की हालत ख़स्ता होने लगी। वो अपनी बुर सहलाने लगी। फिर कुछ सोचकर वो दरवाज़ा खटखटाई। शिवा उठा और पैंट ऊपर किया और लौड़ा एडजस्ट करके दरवाज़ा खोला। वो बोला: क्या हुआ मुन्नी? कुछ काम था?

मुन्नी अंदर आकर बिस्तर पर बैठी और बोली: जिजु आपने तो बताया ही नहीं कि लंच में क्या लोगे? क्या बनाऊँ?

शिवा उसके अमरूदों को घूरकर कहा: मुन्नी खाने को तुमको ही खा जाऊँ पूरा ऊपर से नीचे। पर तुम मान ही नहीं रही हो? क्या करूँ? वो हाथ बढ़ाकर उसकी जाँघों को पाजामा के ऊपर से ही दबाकर बोला।

मुन्नी हँसकर: मुझे खाने से आपकी भूक़ नहीं मिटेगी जिजु। मैं तो लंच की बात कर रही हूँ।

शिवा जानता था कि लौंडिया को भी खुजली मची हुई है तभी वो यहाँ मेरे कमरे में आकर बिस्तर पर बैठी है। वो आगे होकर फिर से उसको अपनी गोद में खींचा और अब उसका मुँह उसके मुँह के सामने था और उसके एक एक पैर उसकी गोद के दोनों तरफ़ थे। इस अवस्था में दोनों के अंग एक दूसरे से रगड़ रहे थे। अब शिवा ने उसके दोनों अमरूदों पर हाथ रखा और उनको दबाते हुए उसके होंठ चूसने लगा। अब मुन्नी भी बहुत गरम हो चुकी थी और बिना विरोध किए चुम्बन का आनंद लेने लगी।

अब शिवा ने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी और उसे कहा: मुन्नी इसे चूसो। जल्दी ही दोनों एक दीर्घ चुम्बन में लीन हो गए। अब शिवा ने उसका टॉप उतारा और ब्रा में कसे अमरूदों को दबाया। फिर वो झुका और उसके सख़्त स्तनों को चूमने लगा। मुन्नी की आऽऽऽह निकल गयी। अब वो उसके ब्रा के स्ट्रैप को भी खोला और उसके मस्त सख़्त अमरूदों को दबाकर मस्त हो गया। गुलाबी निपल जो अभी पूरी तरह जवान हो ही रहे थे उसकी उँगलियों में आकर बहुत कड़े हो गए थे। फिर वो सर झुकाया और उसकी चूचियाँ चूसने लगा। मुन्नी को लगा कि उसके बदन में बिजली सी दौड़ रही है। अब शिवा ने उसे खड़ा किया और उसके पाजामा को एक झटके से उतार दिया । वो मस्ती में भरी कमसिन लौंडिया की छोटी सी और बिलकुल गीली पैंटी में फँसी हुई बुर को देखकर वहाँ अपने मुँह को ले गया और सूँघा और कहा: आऽऽऽऽऽह क्या मस्त गंध है। फिर वो जीभ से उसकी गीलीपैंटी को चाटने लगा। अब मुन्नी खुल कर मस्ती से सिसकियाँ लेने लगी थी। उसके मुँह से सीसीसी की आवाज़ें आ रही थी। अब शिवा ने उसकी पैंटी भी एक झटके से निकाल दी और अब उसकी चिकनी कुँवारी बुर उसकी आँखों के सामने थी। वो उसकी बुर को सहलाया और फिर उसे बेतहाशा चूमने लगा। उसके दोनों हाथ उसकी गोल गोल गाँड़ को दबा रहे थे। अब मुन्नी उइइइइइ कहकर अपने हाथ उसके सिर पर रखी और उसे अपनी बुर के अंदर दबाने लगी। उसकी कमर भी अब हिले जा रही थी। शिवा के हाथ अब उसकी गाँड़ की दरार में समा गए और उसकी गाँड़ के छेद को टटोलने लगे। एक हाथ से वो उसकी बुर में ऊँगली डालने की कोशिश करने लगा और दूसरा हाथ गाँड़ के छेद को छेड़ रहा था। उसकी बुर के क्लिट को भी वो बीच बीच में जीभ से रगड़ कर मुन्नी की हाऽऽऽय्य निकाल देता था। अब मुन्नी खुलकर आऽऽऽह जीइइइइइइइइइइइइइजु मरीइइइइइइइइइ कहकर ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर हिलाने लगी और अपना पानी शिवा के मुँह में छोड़ने लगी। शिवा भी मज़े से उसकी अनचुदी जवानी का रस पीकर मस्त हो गया। अब मुन्नी आऽऽऽऽह कर नीचे बैठ गयी।

अब शिवा मुस्कुराते हुए उठा और तौलिए से अपना गीला मुँह पोंछकर बोला: म्म्म्म्म्म क्या मस्त स्वाद बुर है और उतना ही स्वाद रस भी है। यह कहते हुए वो अपने कपड़े भी खोला और पूरा नंगा होकर अपने मस्त लौड़े को मसला। लौड़े को देखकर मुन्नी की आँख फैल गयी और वो डर सी गयी। वो सोची कि बाप रे इतना लम्बा और मोटा मेरी छोटी सी बुर में कैसे जाएगा? उसने देखा कि लौड़े के मुँह पर एक सफ़ेद सी बूँद सी आ गयी थी। शिवा भी इस कमसिन जवानी से मस्ती करके बहुत गरम हो गया था। वो नीचे खड़ा हुआ और मुन्नी को खींचकर इस तरह से बिठाया कि उसका लौड़ा अब मुन्नी के मुँह के सामने था। मुन्नी समझ गयी थी कि उसे क्या करना है पर डर के मारे चुपचाप बैठी रही। अब शिवा ने उसका हाथ अपने सख़्त गरम लौड़े पर रखा। वो उसे महसूस करके सिहर उठी और शिवा ने अपना लौड़ा उसके मुँह में सरका दिया। अब वो अपनी कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगा। मुन्नी बड़े मुश्किल से उसे चूस पा रही थी। उसका मुँह पूरा खुल गया था। शिवा समझ गया कि लौंडिया अनाड़ी है। अब वो अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसे मुठियाने का इशारा किया। मुन्नी उसके लौड़े को हिलाने लगी और क़रीब पाँच मिनट के बाद शिवा आऽऽऽऽऽऽहहह कहकर उसकी चूचियाँ दबाते हुए झड़ने लगा और उसने अपना वीर्य उसकी चूचियों पर गिरा दिया।

अब शिवा मुन्नी को बाथरूम ले जाकर उसके साथ शॉवर लिया और उसने मुन्नी की चूचियाँ और बुर साफ़ कर के वापस आकर कपड़े पहने।

मुन्नी : जिजु खाने में क्या बनाऊँ?

शिवा: अरे जो तुमको पसंद हो बना लो। पर एक बात है तुम्हारा बदन मस्त सेक्सी है। वह टॉप के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाकर बोला।

मुन्नी: जिजु , दीदी आपका इतना बड़ा ले लेती हैं ? उनको दर्द नहीं होता?

शिवा: अरे मज़े से ले लेती है। वो तो पागल है इसके लिए। एक बार तुम भी हिम्मत करो और ले लो, फिर मज़ा ही मज़ा करोगी।

मुन्नी: नहीं जिजु मुझे तो बड़ा डर लगता है।

शिवा: चलो तुम्हारी हम मालिनी की मदद से ही लेंगे। ठीक है ना?

मुन्नी: मतलब? आप दीदी को बता दोगे?

शिवा हँसकर: हम एक दूसरे से कुछ नहीं छिपाते। तुम्हारी बुर हम मालिनी की मदद से ही खुलवाएँगे, देखना तुम।

मुन्नी शर्माकर वहाँ से भाग गयी।

अब शिवा ने अपनी सास को फ़ोन किया और कहा: नमस्ते मम्मी आपको बहुत बधाई। आप नानी बन गयी हो।

सरला: हाँ अभी मालिनी का फ़ोन आया था। बेटा तुमको भी बहुत बहुत बधाई बेटी होने की। या बहन होने की। वो यह कहकर हँसने लगी।

शिवा भी हँसकर: अरे मम्मी बहन हो या बेटी । हैं तो अपना ख़ून ही ना? और आप सुनाओ आपके और राजेश के क्या हाल हैं?

सरला: सब बढ़िया हैं ।

शिवा: तो आजकल कितनी बार चोदता है आपको दिन में वो?

सरला हँसकर: आजकल तो २/३ बार ही करता है। पहले ५/६ बार भी कर लेता था।

शिवा: मेरा साला पक्का मादरचोद बन गया है। हा हा ।

सरला: हाँ बिलकुल सही कहा तुमने। वो तो मुझे तुम्हारे यहाँ भी नहीं जाने दे रहा था। पर मैंने कहा कि ऐसा थोड़े होता है। गुड़िया को कैसे सम्भालना है मालिनी को सिखा दूँगी ,तब जाकर वो एक हफ़्ते के लिए माना है। वो भी इस शर्त पर कि वो मुझसे कमसे कम दो बार वीडीयो चैट करेगा और मुझे देख कर वो मूठ्ठ मारेगा। नालायक कहीं का।

शिवा ज़ोर से हँसने लगा और बोला: सच में आपका बेटा आपका दीवाना है। पर आप आ कब रही हैं?

सरला: बस आज शाम को निकलूँगी। तुम्हारे यहाँ रात ८ बजे तक पहुँचूँगी।

शिवा: ठीक है मम्मी आपको लेने या मैं या पापा कोई भी आ जाएगा। बस अब आप आओ और हम बाप बेटा भी बहुत प्यासे हैं । मस्त चुदाई का मज़ा लेंगे सेक्सी नानी से।

सरला: मैं तुम बाप बेटे के लिए नहीं आ रही हूँ। मैं तो अपनी नतिनि के लिए आ रही हूँ। वह यह कहकर हँसने लगी।फिर बोली: अच्छा चारु और मुन्नी कैसी हैं?

शिवा: मस्त हैं । अपने कोलेज और स्कूल में व्यस्त रहती हैं।

सरला: तुम बाप बेटे ने उनको फंसा तो नहीं लिया ?

शिवा: क्या मम्मी हम शरीफ़ लोगों पर आप शक करती हो। हा हा ।

सरला: पता है कितने शरीफ़ हो तुम लोग? चलो मिलते हैं रात को। फिर बाई कहकर फ़ोन काट दिया।

अब शिवा थोड़ी देर आराम करने के मूड में आँखें बंद कर लिया और सो गया। मुन्नी भी खाना बनाकर सो गयी।

उधर राजीव मालिनी के बिस्तर पर बैठ कर उससे बातें कर रहा था। उसके हाथ को सहलाकर वो बड़े प्यार से बोला: अब सब ठीक है ना?

मालिनी: जी पापा सब ठीक है। मालिनी ने देखा कि चारु दूसरे बिस्तर पर बैठी मोबाइल पर गेम खेल रही थी।

राजीव : तुमको एक बात बतानी थी ।

मालिनी: बोलिए पापा।

राजीव आवाज़ को नीचे करके: कल रात मैंने इसकी सील तोड़ दी। वो चारु की तरफ़ इशारा करके बोला।

मालिनी का मुँह खुला रह गया। वो बोली: उफफफ पापा आप भी ना । क्या सच बोल रहे हैं?

राजीव: हाँ बिलकुल सच बोल रहा हूँ। बहुत मज़ा ली ये । बहुत मस्ती से फडवाइ थी। देखो कैसी रिलैक्स दिख रही है।

मालिनी ने एक नज़र चारु को देखा और लम्बी साँस लेकर बोली: चलो एक ना एक दिन तो ये होना ही था। अब कोलेज में पहुँच गयी है । कोई ना कोई तो फाड़ ही देता । एक तरह से अच्छा ही है कि घर की चीज़ घर में ही काम आ गयी। मुन्नी की भी फाड़ दी क्या?

राजीव: अरे अभी नहीं फाड़ी पर दो तीन महीने में वो भी ले ही लेगी।

मालिनी: चलो चारु आप दोनों के काम आ जाएगी जब तक मैं तय्यार होती हूँ इसके लिए। ये कहकर उसने राजीव का लंड दबा दिया।

राजीव मुस्कुराकर: अरे तुम्हारी मम्मी भी तो आने वाली है तुम्हारी। वो भी तो मज़े देगी ना। कब आ रही है सरला?

मालिनी: आज रात को ही आएँगी। आप या शिवा इनको बस स्टैंड लेने चले जाना।

राजीव उसकी चूचियों पर हाथ फेरकर बोला: हाँ हाँ बिलकुल जाएँगे अपनी सेक्सी समधन को लेने। मालिनी ने कनख़ियों से देखा कि चारु अभी भी गेम खेलने में व्यस्त थी। वो उसके लौड़े को दबाकर बोली: पापा ये तो मम्मी से मज़े का सोच कर मस्त खड़ा हुआ जा रहा है।

राजीव उसके होंठ चूमकर बोला: हाँ वैसे तुम्हारी बड़ी चूचियाँ दबाकर भी मस्त लग रहा है।

दोनों हँसने लगे। तभी चारु चौंक कर उन दोनों को देखी। राजीव के हाथ उसकी चूची पर थे और मालिनी का हाथ पैंट के ऊपर से उसके लौड़े पर था। चारु की बुर में भी ग़ज़ब की खुजली उठी ये सेक्सी दृश्य देखकर।

 
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