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बहू नगीना और ससुर कमीना

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शिवा की नींद क़रीब १२ बजे खुली और वो उठकर मुन्नी के कमरे में गया। मुन्नी गहरी नींद सो रही थी। वो उसके पास जाकर बैठा और उसके गाल सहलाकर उसे उठाने लगा। वो चौंक कर उठ बैठी और शिवा को देखकर मुस्करायी: क्या हुआ जिजु ? भूक़ लगी है ?

शिवा उसके होंठ चूसते हुए बोला: मुझे तो प्यास लगी है। यह कहते हुए उसने उसकी चूचियाँ दबा दीं।

चारु हँसकर: क्या जिजु हमेशा प्यासे ही रहते हो। वह उठी और बाथरूम से बाहर आयी तो देखा कि शिवा अभी भी वहीं था। शिवा उसको अपनी गोद में खिंचा और प्यार करने लगा।

वह भी चुपचाप मज़े लेती रही। शिवा अब उसके गाल चूसते हुए उसकी चूचियाँ दबा रहा था। तभी उसका फ़ोन बजा। वो मुन्नी के पाजामा में हाथ डाला और उसकी मुनिया को सहलाते हुए फ़ोन उठाया: हेलो पापा। सब ठीक है ना?

राजीव: हाँ बेटा सब ठीक है। मालिनी को भूक़ लग रही है। उसके लिए खाना और जूस ले आओ।

शिवा: ठीक है पापा अभी लाता हूँ।

अब मुन्नी खड़ी हुई और बोली: आप खाना खा लो और फिर दीदी का डिब्बा ले जाओ।

शिवा: तुम भी खा लो और साथ ही चलते हैं अस्पताल।

मुन्नी: नहीं बाबा मुझे बोर लगता है वहाँ। आप ही जाओ।

शिवा: अच्छा चलो एक बार मुनिया की चुम्मी तो दे दो प्लीज़।

मुन्नी शर्मा कर अपने मुँह को अपने हाथ से छिपा कर बोली: छी जिजु आप बहुत गंदे हो।

अब तक शिवा बिस्तर पर बैठे हुए उसका पाजामा और पैंटी नीचे कर दिया था । अब उसकी चिकनी मासूम सी बुर उसके सामने थी। वो नीचे घुटनों के बल बैठा और अपने हाथ से बुर को सहलाकर मस्ती से भर गया। अब वो अपना मुँह वहाँ डालकर उसकी बुर को चूमने और चाटने लगा। मुन्नी की आऽऽऽऽऽऽह निकल गयी और वो जिइइइइइइइइइजु कहकर अपनी गाँड़ हिला कर अपनी मस्ताई हुई बुर को शिवा के मुँह पर रगड़ने लगी। शिवा के हाथ अब उसकी गाँड़ को गोलाइयों को नाप रहे थे और उसकी दो उँगलियाँ उसकी गाँड़ के छेद में अठकेलियाँ कर रही थी। उसकी सिकुड़ी हुई नाज़ुक से छेद में ऊँगली मानो धमाल मचा रही थी। तभी वो जीभ से उसकी पूरी बुर को चाटने लगा और बीच बीच में वो उसकी क्लिट को भी जीभ से कुरेदने लगा। अब मुन्नी ने उसका सिर पकड़ा हुआ था और वो उसे अपनी बुर में ज़ोर से दबा रही थी और खुलकर आऽऽऽऽऽऽऽह मरीइइइइइइइइइ उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ चिल्लाए जा रही थी। अचानक मज़ा उसके सहनशक्ति से बाहर हो गया और वो जिइइइइइइजु मैं गयीइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। शिवा मस्ती से उसका पानी पी गया। अब वो उठा और अपनी पैंट नीचे करके अपने खड़े लौड़े को बाहर निकाला और उसको बिस्तर में बिठाकर उसकी मस्त चूचियों के बीच अपने लौड़े को रगड़ने लगा। थोड़ी देर बाद वो अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने ले आया और मुन्नी अपना मुँह खोल कर उसे मुँह में ले कर चूसने लगी। शिवा उसकी मस्त चूचियाँ दबाकर अपना लौड़ा उसके मुँह में अंदर बाहर करने लगा। क़रीब दस मिनट में ही वो अत्यधिक उत्तेजना वश उसके मुँह में आऽऽऽऽऽह करके झड़ने लगा और मुन्नी भी मज़े से उसका वीर्य पीने लगी। शिवा ने देखा कि मुन्नी जो थोड़ा बहुत वीर्य उसके होंठों पर लगा था वो उसे भी ऊँगली से साफ़ करके ऊँगली चूस ली। शिवा सोचा कि उफफफफ इस उम्र में क्या रँडी बनती जा रही है। कितनी टाइट बुर है इसकी और पता नहीं अगर चोद दिया तो फट ही ना जाए। वो सोचा कि अभी कुछ दिन और इंतज़ार किया जाए। उसने देखा कि मुन्नी अभी भी बड़ी ही मस्ती से उसका लौड़ा चूसे ही जा रही थी मानो उसका पूरा रस ही निचोड़ लेगी। उसे बहुत प्यार आया इस नन्ही सी जान पर।

अब जब उसका लौड़ा नरम हो गया तो वो उसके मुँह से निकाला और उसके गाल सहलाकर बोला: मुन्नी लगता है मेरा लौड़ा बहुत पसंद आ गया है तुमको?

मुन्नी शर्माकर लौड़े के सुपाडे को चूमकर बोली: हाँ जिजु देखो ना कितना प्यारा है म्म्म्म्म्म। वो उसे कई बार चूमकर बोली।

शिवा हँसकर : जब तुम्हारी बुर में जाएगा ना तब तुम इसका दीवाना हो जाओगी जैसे तुम्हारी दीदी है ।

मुन्नी हँसकर बाथरूम जाकर सफ़ाई की और फिर खाना लगाई। दोनों ने खाना खाया और फिर मुन्नी ने टिफ़िन बना दिया मालिनी के लिए। शिवा टिफ़िन लेकर वहाँ से अस्पताल के लिए निकल गया।

उधर अस्पताल में राजीव और मालिनी को देखकर चारु मस्त हो गयी थी। मालिनी का हाथ ससुर के पैंट पर लौड़े पर था और ससुर का हाथ बहू की चूची पर था। सुबह के १० बजे थे। राजीव बोला: बहु चूची चूसने का मन कर रहा है।

यह सुनकर चारु के लाल गाल हो गए और मालिनी मुस्कुराई और उसको अपने पास आने का इशारा किया। जब चारु आकर बिस्तर में राजीव के सामने बैठी तो भी मालिनी का हाथ ससुर के लौड़े पर ही था जिसे वो पैंट के ऊपर से हल्के से दबाकर मस्ती ले रही थी। अब चारु की पैंटी गीली होने लगी पर वो शर्मा गयी। अब मालिनी मुस्कुराई और बोली: वाह पापा के साथ सब मज़े ले ली और अब शर्म आ रही है?

चारु बोली: अंकल आपने सब बता दिया क्या?

राजीव हाथ बढ़ाकर उसके गाल सहला के बोला : अरे बहू से क्या छिपाना?

मालिनी: चारु जाओ दरवाज़ा बंद कर के आओ। पापा को मेरी चूची चूसनी है।

चारु उठकर दरवाज़ा बंद की और आकर बिस्तर पर बैठ गयी।

मालिनी ने मुस्कराके अपना गाउन खोला और ब्रा के सामने लगे हुक को खोलकर अपनी चूचियाँ बाहर निकाली । दूध से भरी हुई उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत सेक्सी दिख रहीं थीं। उसने पास रखे तौलिए से चूचियों का पसीना पोंछा और फिर एक हाथ से पकड़कर अपनी चूची उठाकर बोली: लो पापा पी लो।

राजीव मस्ती में आकर एक चूचि पर झुका और पहले दबाकर निपल से दूध बाहर निकाला और पीने लगा। चारु आँखें फाड़ कर ये सब पास ही बैठी देखे जा रही थी। मालिनी का हाथ अभी भी राजीव के लंड को पैंट के ऊपर से सहला रहा था। तभी मालिनी चारु को देखकर बोली: चारु , तुमको भी पीना है क्या? वो अपने एक दूध को उठाकर उसे दिखाती हुए बोली। चारु शर्मा कर हाँ में सिर हिला बैठी।

मालिनी ने प्यार से उसका मुँह अपनी ओर झुकाया और अपना एक निपल उसके मुँह में भी दे दिया। अब चारु भी एक चूची चूसने लगी। क़रीब पाँच मिनट बाद मालिनी बोली: चलो अब दोनों हटो दोनों गुड़िया के लिए भी कुछ छोड़ दो।

दोनों ने अपना मुँह उठा लिया और अब मालिनी ने तौलिए से अपनी चूचियाँ साफ़ कीं और वापस ब्रा में डाल कर गाउन बंद कर दिया।

मालिनी: पापा आपका हथियार तो बहुत कड़ा हो गया है। उसे बाहर निकाल दो चारु चूस देगी। हैं ना चारु?

चारु शर्मा कर हाँ में सिर हिलाई।

राजीव: चारु बेटी तुम ख़ुद ही बाहर निकाल कर मज़े कर लो ना। यह कहकर वो मालिनी के पास ही लेट गया उसका सिर मालिनी के पैर की तरफ़ था। चारु झिझकी पर उसका बेल्ट खोली और जींस खोली और नीचे की। फिर चड्डी में से वो ख़तरनाक हथियार पूरा तना हुआ मस्त लग रहा था। मालिनी ने भी प्यार से उसे चड्डी के ऊपर से महसूस किया और चारु ने उसे चड्डी खिसका कर बाहर निकाला। उफफफ क्या लग रहा था मस्त लौड़ा। अब चारु से नहीं रहा गया और वो झुक कर उसके लंड को हर जगह चूमने लगी और जल्दी ही जीभ से पूरी लम्बाई को चाटने लगी। अब वो उसकी गोटियों को भी चूस रही थी। फिर वो उसके सुपाडे को चूसने लगी और जल्दी ही राजीव आऽऽहहह करने लगा। मालिनी भी उसकी गोटियाँ दबाकर उसे मस्त कर रही थी। दस मिनट में ही राजीव ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा और चारु ने उसका पूरा रस गटक लिया। अब राजीव भी उठा और तभी मालिनी ने टिश्यू पेपर से उसके लंड को साफ़ किया।

मालिनी: पापा कपड़े ठीक कर लो। डॉक्टर गुड़िया का चेक अप करने आएगी।

राजीव और चारु तय्यार हो गए और चारु ने दरवाज़ा खोल दिया। थोड़ी देर बाद डॉक्टर आयी और दवाई वगेरह देकर चली गयी और बता दिया कि कल अस्पताल से छुट्टी हो जाएगी। सब ख़ुश हो गए।

मालिनी: पापा चारु ने तो आपको मज़ा दे दिया अब आप भी उसे मज़ा दे दो ना।

राजीव मुस्कुरा कर: हाँ हाँ क्यों नहीं। चलो चारु दरवाज़ा बंद कर लेटो।

चारु दरवाज़ा बंद की और आकर बग़ल के बिस्तर पर लेती और आँख बंद कर ली शर्म से । राजीव आकर उसका टॉप उठाया और हाथ डालकर ब्रा से उसके सख़्त अमरूदों को बाहर निकाला और दबाकर चूसने लगा। चारु आऽऽऽऽहहह कर उठी। कुछ देर चूसने के बाद वो उसकी स्कर्ट उठाया और पैंटी को सूँघा और बोला: बहू देखो कितनी गीली ही गयी है इसकी पैंटी। अब वो उसे भी उतारा और उसकी टांगों को फैलाया और बुर सहला कर बोला: देखो बहू क्या मस्त बुर है। वो दो ऊँगली डाला और बोला: देखो कितनी टाइट है। फिर वो ऊँगली चाटने लगा। अब उसने अपना मुँह बुर में घुसाया और उसकी बुर की चुसाई शुरू कर दी। वो उसकी गाँड़ उठाकर उसकी गाँड़ के छेद से लेकर पूरी बुर चाट रहा था। चारु उइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उछालकर मज़े ले रही थी। क़रीब दस मिनट की मस्त चुसाई के दौरान वो दो बार झड़ी और निढ़ाल होकर गिर गयी। उसकी बुर चाटकर राजीव अपने मुँह को पोंछा और बोला: बहू मस्त स्वाद कामरस है चारु का। म्म्म्म्म्म मज़ा आ गया।

अब दोनों ने सफ़ाई की और फिर से दरवाज़ा खोल दिया।

अब वो शिवा का इंतज़ार करने लगे।

शिवा १ बजे के बाद आया और मालिनी ने खाना खाया।

राजीव: शिवा तुम अभी बैठो । मैं और चारु बाहर खाना खाकर आते हैं।

राजीव चारु को लेकर पास के एक रेस्तराँ में गया और एक कोने के टेबल पर बैठ गया। तभी एक आदमी क़रीब ६५ साल का एक कमसिम जवानी के साथ अंदर आया। राजीव ने पहचाना कि वो तो उनका पुराना टेलर शकील भाई ही था और साथ में उसकी पोती रूहि ही थी जो उनको कुछ दिन पहले रास्ते में मिली थी। जैसे ही शकील की नज़र चारु और राजीव पर पड़ी वो ख़ुश होकर उनके पास आया और बोला: अरे वाह आप दोनों भी यहाँ हो।

राजीव ने रूहि को देखा टाइट क़ुर्ती और लेग्गिंग में क्या मस्त लग रही थी। वह उसकी कमसिन जवानी को घूरकर बोला: आओ आप लोग यहाँ ही बैठो ना। साथ में लंच करते हैं।

रूहि का दूधिया रंग और निखरती हुई जवानी राजीव को मदहोश किए जा रही थी।

शकील भी चारु को घूरता हुआ बोला: बिटिया रानी आयी नहीं तुम कपड़े सिलवाने , मैंने कहा था ना कि एक से एक कपड़े सिल दूँगा। देखो ये रूहि की क़ुर्ती मैंने ही सिली है।

चारु ने देखा कि क़ुर्ती बहुत ही सेक्सी सिली थी उसमें से उसके गोल गोल अमरूदों की अच्छी ख़ासी झलक मिल रही थी। दोनों अमरूद अलग से क्लीवेज़ में से दिख रहे थे।

रूहि चारु के सामने बैठी और शकील राजीव के सामने बैठा।

चारु रूहि से स्कूल का पूछने लगी और अपने कोलेज के बारे में बताने लगी। राजीव और शकील थोड़ी देर इधर उधर की बात किए और खाने का ऑर्डर भी कर दिए।फिर अचानक शकील राजीव को धीरे से बोला: आओ भाई ज़रा बाहर चलते हैं, मुझे एक सिगरेट पीना है।

खाना आने में थोड़ी देर थी सो दोनों बाहर आ गए। शकील उसे रेस्तराँ के एक कोने में बाहर की ओर ले गया और सिगरेट सुलगाया। राजीव ने उसे मना कर दिया कि वो नहीं पीता। शकील:भाई आपने भाभीजी के जाने के बाद हमारी दुकान पर आना ही बंद कर दिया।

राजीव मन ही मन में सोचा कि साला मेरी बीवी से मज़े ले चुका है अब अगर बहू को लेकर गया तो उसे भी पटा लेगा।

राजीव: हाँ बस आजकल सब रेडी मेड ही पहनते हैं ना इसलिए मौक़ा नहीं मिला।

शकील: वो तो है। पर जो फ़िटिंग मैं दे सकता हूँ वी रेडी मेड में कहाँ मिलेगी। ले आना कभी बहु रानी को और चारु को भी। वैसे चारु बड़ी प्यारी बच्ची है। वो अपना लंड पाजामा के ऊपर से खुजा कर बोला।

राजीव भी मुस्कुराया: हाँ है तो और रूहि भी बहुत नाज़ुक सी प्यारी सी बच्ची है।

शकील: हाँ यार मस्त लौड़िया है रूहि भी। वो आँख मारकर बोला।

राजीव अब खुलते हुए: तो क्या हाथ वगेरह फेर लिए हो क्या पोती पर।

शकील सिगरेट का कश मारकर: हाँ यार पोती को तो पूरी तरह अपने शीशे में उतार लिया है। तुम बताओ कि चारु के साथ तुम कहाँ तक पहुँचे?

राजीव मुस्कुरा कर: चारु भी मस्त माल है। उसकी बुर की सील तोड़ दी है भाई। मस्त मज़ा ले रही है अपनी कमसिन जवानी का।

शकील अपना लंड मसलकर: वाह भाई आप तो मस्त बंदे हो बहु की बहन पर ही हाथ साफ़ कर दिया?

राजीव: और आप कौन से कम हो अपनी पोती को भी नहीं छोड़ा आपने।
 


शकील हँसकर : यार अपना हाल तो काफ़ी अलग है। पहले इसकी माँ याने बहू को पटाया और अब उसकी बेटी यानी मेरी पोती से मज़े ले रहा हूँ।

राजीव: ओह बहू को पहले ही पता रखा है? कितनी बड़ी थी जब उसको पटाया?

शकील: अरे शादी के पहले महीने में ही बहू को पटा लिया था। बेटे से ज़्यादा तो मैंने उसे चोदा है।

अब वो खुलकर अश्लील बात करने लगा। वो फिर बोला: तुमने अपनी बहू को पटाया या नहीं?

राजीव हँसकर: यार हम दोनों एक जैसे ही कमीने हैं । हाँ यार मैं भी बहू को अपनी बीवी की तरह ही चोदता हूँ। और अब ये कमसिन चारु भी मस्त मज़ा देगी।

शकील: एक बात बोलूँ? बुरा नहीं मानना। पसंद ना आए तो मना कर देना।

राजीव: हाँ हाँ बोलो ना।

शकील: यार मैं चारु को चोदना चाहता हूँ। बदले में तुम चाहो तो रूहि की ले लो।

राजीव उसका मुँह हैरानी से देखता रह गया। क्या चारु इसके लिए मानेगी? रूहि की जवानी का सोचकर उसका लौड़ा अकड़ने लगा। पर अभी भी वो तय नहीं कर पा रहा था कि क्या ये सही है।

तभी शकील बोला: यार देखो मेरा घर पास ही है और वहाँ कोई नहीं है। मेरा बेटा और बहू बाहर गए है। खाना खाकर वहीं चलते हैं और लौड़ियों की मस्त चुदाई करते हैं । बोलो क्या कहते हो?

राजीव थोड़ा हिचकते हुए: यार पता नहीं चारु मानेगी या नहीं? क्या रूहि मान जाएगी?

शकील: रूहि को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। वो मेरे दो दोस्तों से पहले ही चुदवा चुकी है। और चारु का तुम मुझपर छोड़ दो मैं उसे मना लूँगा।

राजीव अपने खड़े लंड का एडजेस्ट किया और बोला: चलो ठीक है पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं होगी किसी के भी साथ।

शकील हँसकर: अरे साली दोनों लौंडिया हमारा लंड ख़ुद पकड़कर अपनी फुद्दी में डालेंगी देखना तुम ?

अब दोनो हँसते हुआ अंदर आए और आकर लड़कियों के साथ बैठ गए । तभी खाना आ गया और सब खाने लगे।

शकील: रूहि बिटिया, राजीव अंकल तुम्हारी बड़ी तारीफ़ कर रहे थे । वो बोल रहे थे बाहर में कि रूहि बहुत प्यारी गुड़िया सी है। मैं बोला कि रूहि अब गुड़िया नहीं मस्त माल है जो मज़ा देती है। मैं ठीक बोला ना?

रूहि के गाल लाल हो गए: क्या दादू आप भी छी कुछ भी बोलते हो।

राजीव: वैसे चारु , शकील भाई तुम्हारे बारे में भी पूछ रहे थे कि क्या जवानी के मज़े ले रही हो या नहीं? तो मैंने भी कहा कि हाँ पूरा मज़ा ले रही है। ठीक कहा ना?

अबकि बार चारु के गाल लाल हो गए थे वो शर्मा कर मुँह झुका कर खाना खाती रही।

तभी राजीव बोला: शकील भाई ने आज हमें अपने घर आने को कहा है अभी खाना खाने के बाद।

शकील: हाँ चारु हमने एक नया फ़िश एकुएरियम लिया है जिसमें बहुत सुंदर मछलियाँ हैं । तुम देखना तुमको बहुत पसंद आएँगी।

चारु: जी अंकल देख लूँगी। फिर सबने खाना खाया और बिल राजीव ने दिया। अब राजीव की कार में सब शकील के घर पहुँचे जो पास में ही था। अंदर ड्रॉइंग रूम में एकुएरीयम रखा था। रूहि ख़ुश होकर चारु को दिखाने लगी। दोनों बहुत मज़े से आगे झुकी हुईं मछलियों को देखकर ख़ुश हो रही थीं।

राजीव और शकील सोफ़े पर बैठ कर उन दोनों की कमसिन गाँड़ जो कि झुकने के कारण मस्त गोल गोल दिखाई पड़ रहीं थी देखकर अपने अपने लौड़े मसल रहे थे। तभी राजीव ने प्रश्न भरी नज़रों से शकील को देखा: कैसे शुरू करेंगे?

शकील कमिनी मुस्कुराहट के साथ बोला: बस यार थोड़ा सबर करो सब हो जाएगा। क्या मस्त गाँड़ है चारु की? उफफफफ।

राजीव: हाँ यार बहुत मस्त है उसकी गोल गाँड़ चिकनी भी बहुत है।

शकील: मार ली क्या?

राजीव: अरे नहीं यार अभी तो एक ऊँगली भी बड़ी मुश्किल से घुसती है। थोड़ी और बड़ी हो जाए तो ऊँगली डाल डाल कर ढीला करूँगा फिर ही गाँड़ मारूँगा।

शकील: मैंने तो रूहि की बुर और गाँड़ दोनों खोल दी है। गाँड़ खोलने के समय इसकी माँ की भी मदद लेनी पड़ी थी। वैसे माँ बेटी को एक साथ चोदने में बहुत मज़ा आता है।

राजीव: क्या तुम्हारे बेटे को ये पता है?

शकील: अरे नहीं वो तो दुबई में रहता है। आता जाता रहता है। बहू तो मेरे भरोसे ही है और अब रूहि को भी जवान कर ही दिया है मस्त काम में आ रही है माँ बेटी दोनों।

राजीव: तो क्या एक साथ चोदते हैं दोनों को?

शकील: हाँ रात को हम तीनों एक साथ ही सोते हैं। आजकल बेटा आया हुआ है पर अभी दोनों बाहर गए हुए है। जब वो यहाँ होता है तो मैं सिर्फ़ रूहि को ही चोदता हूँ क्योंकि रात को बहू बेटा साथ सोते हैं।

राजीव: यार बड़ा लकी है तू।

शकील: हाँ वो तो हूँ। पर अभी चारु को चोदने का बहुत मन है। वो अपना लौड़ा दबाकर बोला।

राजीव: अब शुरू कैसे करें इन लड़कियों के साथ?

शकील: अरे अभी सब हो जाएगा आप देखते जाओ।

अब दोनों लड़कियाँ मोबाइल पर एक दूसरे को गेम्ज़ दिखा रहीं थीं ।

शकील: रूहि बेटी बीयर पीने का मन कर रहा है। जाओ ना दो बोतल और गिलास लाओ।

रूहि: जी दादू । कहकर चली गयी। चारु भी उसके साथ किचन में गयी। अब ट्रे में दो गिलास और दो बोतल फ्रिज से निकाल कर वो बाहर आने लगी। चारु भी उसके पीछे पीछे बाहर आयी। अब वो ट्रे को शकील के सामने टेबल पर रखी तो शकील ने प्यार से अपनी पोती की कमर पर हाथ फेरा और बोला: बेटी गिलास में डाल दो ना। जब वो दो गिलास में डाल रही थी तो वो उसकी जाँघ सहलाता हुआ बोला: अरे बेटी सिर्फ़ दो गिलास ही लायी? तुम तो पीती हो ना। चारु भी तो पीती होगी ना?

चारु : नहीं अंकल मैंने कभी नहीं पिया।

राजीव: अरे बेटी तो क्या हुआ ? आज ले लो। और कोलेज की स्मार्ट लड़कियाँ तो सब पीती हैं।

शकील: जाओ बेटी दो गिलास और ले आओ। अबकि रूहि फिर से जाकर और दो गिलास ले आयी और कुछ काजू भी ले आयी।

अब रूहि ने चार गिलास में बीयर डाली और सबने लेकर चीयर किया और चारु को छोड़कर सब पीने लगे। गुड़िया सी रूहि क्या मज़े से बीयर सिप कर रही थी। राजीव बोला: अरे चारु पी कर देखो तो सही। मस्त मज़ा आएगा।

चारु ने हिचकते हुए एक सिप लिया और नाक सिकोड़कर बोली: छी बहुत कड़वी है।

रूहि हँसी और बोली: अरे एक गिलास पी लो फिर और माँगोगी। यह सुनकर सब हँसने लगे।

अब सब पी रहे थे और फ़िल्मों की बातें होनी लगीं।

शकील: वैसे मुझे तो दीपिका पदकोने बहुत पसंद है। क्या मस्त फ़िगर है उसका।

राजीव: हाँ अपनी रूहि भी वैसी ही दिखती है। रूहि यह सुनकर ख़ुशी से शर्मा गयी।

शकील: और हमारी चारु भी तो बहुत स्वीट है बिलकुल श्रध्धा कपूर सी दिखती है। वैसे ही सेक्सी फ़िगर है।

अबकि चारु शर्मा गयी। अब चारु रूहि के द्वारा बार बार कहने पर सिप ले ले कर गिलास आधा ख़ाली कर चुकी थी। अब वो हल्के से सुरुर में आ चुकी थी। अचानक शकील बोला: चलो एक घूँट में गिलास ख़ाली करते हैं। देखते ही देखते सबके गिलास ख़ाली हो गए। चारु को थोड़ा दिक़्क़त हुई पर वो भी ख़ाली कर ली। अब रूहि और चारु की आँखें लाल होने लगीं थीं। राजीव ने देख लिया था कि बीयर एक्स्ट्रा स्ट्रोंग थी।

शकील: रूहि जाओ दो बीयर और लाओ। रूहि उठी और हल्के से डगमगायी तो शकील बोला: राजीव आप ज़रा रूहि की मदद कर देना कहीं वो गिर ना जाए। यह कहकर उसने राजीव को आँख मार दी। राजीव समझ गया और उठ कर किचन में रूहि के पीछे पीछे चला गया। जब रूहि फ्रिज खोलकर बीयर लेने को झुकी तो उसकी टाइट लेग्गिंग से उसकी मस्त गाँड़ देखकर वो मस्ती में आकर उसके पिछवाड़े में अपना लंड दबा दिया। रूहि: आऽऽऽह अंकल क्या कर रहे है?

राजीव उसे पकड़कर: बेटी कहीं तुम गिर ना जाओ। इस लिए पकड़ा हुआ हूँ। रूहि ने अब एक बोतल निकाली और खड़ी हुई। जैसे ही वो सीधी हुई राजीव के लौड़े का कड़ापन महसूस करके वो मस्त होने लगी। बीयर का सरूर तो था ही। अब राजीव ने उसके कंधे पर पीछे से चुम्बन लिया और बोला: म्म्म्म्म क्या मस्त गंध है बिटिया तुम्हारे बदन की। उफफफफ क्या मस्त जवान हो गयी हो तुम। यह कहते हुए वो उसके पेट के हिस्से को सहलाते हुए अपना लंड उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। अब रूहि भी आऽऽऽऽह अंकल कहकर अपनी मस्ती का इजहार की।

उधर शकील बोला: क्या हो गया इनको इतनी देर क्यों लग रही है? मैं देखकर आता हूँ तुम बैठो चारु।

वो जब किचन में पहुँचा तो राजीव रूहि से पीछे से चिपका हुआ था और उसके गाल चूम रहा था और उसके हाथ उसकी चूचियों के निचले हिस्से तक पहुँच चुके थे। अचानक आए शकील को देखकर रूहि शर्मायी और बोली: उफफफ अंकल छोड़िए ना।

शकील मुस्कुराया और बोला: अरे बिटिया क्या हुआ? अरे मज़े लो ना। इसमें शर्माने की क्या बात है! अंकल बहुत अच्छें हैं । बहुत मज़ा देंगे। वैसे अगर तुम अंकल को मज़ा करने दोगी तो मैं भी चारु से थोड़ा मज़ा ले लूँगा। ठीक है ना बिटिया? ये कहकर उसने रूहि के गाल सहलाए और उसके मस्त सख़्त अमरूदों को दबाया और बोला: देखो राजीव भाई ऐसे सख़्त अमरूद कभी दबाए आपने?

राजीव भी कमिनी मुस्कुराहट के साथ उसके अमरूदों को दबाया और बोला: आऽऽऽह सच यार ये तो चारु से भी सख़्त हैं। मस्त हैं बेबी तुम्हारे। अब दोनों मर्द उसकी एक एक चूची दबाने लगे। अब शकील ने उसकी लेग्गिंग के ऊपर से उसकी बुर को दबाया और कहा: बिटिया अंकल को मज़ा दोगी ना?

रूहि मज़े से आँख बंद कर ली और बोली: ठीक है दादू वैसे ही ना जैसे आपके दोस्त रहीम अंकल को दिया था और आपने उनकी बेटी से मज़ा लिया था?

शकील: हाँ बेटी बिलकुल हो वैसे। राजीव चौंक कर शकील को देखा और उसके मुँह पर कमिनी मुस्कान देखकर समझ गया कि ये साला टेलर ऐसा पहले भी कर चुका है।

शकील: चलो अब चारु को थोड़ी सी और पिलाओ तो वो भी शीशे में उतर जाएगी।

सब बाहर आए तो चारु चुपचाप बैठी थी और हल्के से नशे में लग रही थी। शकील उसके लिए एक और गिलास भरा और उसके बग़ल में बैठ कर बोला: लो बिटिया और लो। मस्त मज़ा आएगा।

अब राजीव रूहि से सट कर बैठा था और अब वो पीते हुए रूहि की जाँघ सहला रहा था । चारु को ये थोड़ा अजीब सा लगा पर वो चुप रही। तभी शकील बोला: लो बिटिया इसको ख़त्म करो ना एक घूँट में। अब चारु जल्दी जल्दी पीने लगी और नशे से मस्त होने लगी।

शकील ने राजीव को इशारा किया और राजीव बोला: चारु एक बात कहनी है अगर तुम बुरा नहीं मानो तो।

चारु: आऽऽऽं क्या अंकल?

राजीव: मुझे रूहि बहुत अच्छी लग रही है क्या मैं उसे अपनी गोद में लेकर प्यार कर लूँ? तुम बुरा तो नहीं मानोगी?

चारु चौंकी पर नशे की हालत में बोली: मुझे क्यों बुरा लगेगा?

अब राजीव ने रूहि को अपनी गोद में बिठाया और उसको चूमने लगा। चारु आँखें फाड़े सब देख रही थी। वो हैरानी से शकील को देखी पर वो तो उसे ही देख रहा था और मुस्कुरा रहा था। वो बोला: क्या हुआ चारु? देखो कैसे मज़ा ले रही है मेरी पोती?

चारु ने देखा कि अब वो उसकी क़ुर्ती में हाथ डालकर उसके मस्त अमरूदों को दबा रहा था और दोनों के होंठ एकदम चिपके हुए थे।चारु भी मस्ती में आने लगी। उसके निपल्ज़ कड़े हो गए और उसकी बुर खुजाने लगी। तभी उसे किसी का हाथ अपनी जाँघ पर महसूस हुआ और वो देखी कि शकील उसकी जाँघ सहला रहा था। वो चुप रही और मस्ती में आने लगी। शकील बोला: राजीव भाई आप तो मेरी पोती से मज़ा कर रहे हो तो क्या मैं भी थोड़ा चारु से मस्ती कर लूँ?

चारु चौकी और राजीव को देखी और हैरान रह गयी क्योंकि राजीव रूहि की क़ुर्ती उतार रहा था और वो भी मज़े से नशे में हाथ उठाकर अपनी क़ुर्ती उतरवा रही थी। जल्दी ही अब वो ब्रा में थी और छोटी सी ब्रा में उसकी जवानी राजीव को मानो पागल किए जा रही थी। राजीव ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा।रूहि अपनी गाँड़ हिलाकर राजीव के लंड को अपनी गाँड़ ने महसूस करने लगी।

शकील: देखो बेटी रूहि कितना मज़ा ले रही है? राजीव भाई तुम दोनों मज़ा ले रहे हो और मैं और चारु तुमको देख रहे हैं। भाई क्या हम दोनों भी मस्ती कर लें?

राजीव: अरे भाई ये भी कोई पूछने की बात है? चारु मज़ा लो ना अंकल से ।

चारु अब नशे और उत्तेजना से अपना आपा खोने लगी थी। वो शकील को देखी और नज़र झुका ली। शकील इसको हरी झंडी समझा और उसे खींचकर अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठ चूमने लगा। चारु को भी अपनी गाँड़ के नीचे कड़े लंड का अहसास होने लगा था। म

रूहि कई बार चुदवा चुकी थी और पूरी मस्ती ले रही थी पर चारु तो आज दूसरी बार ही चुदने वाली थी और वो भी एक नए मर्द से, इसलिए थोड़ा झिझक रही थी। पर नशे ने उसे थोड़ा सा बेशर्म बना दिया था। अब वो भी मज़े से शकील के होंठ चूस रही थी। कमरा गरम होने लगा था।

 
कमरा गरम हो चुका था। दो मस्त कमसिन जवानियाँ दो अधेड़ मर्दों की गोद में बैठीं थीं। राजीव रूहि की जवानी से खेल रहा था। उसका टॉप तो उतर ही चुका था और अब वो उसके ब्रा के हुक को भी खोला और अब सामने आए मस्त और सख़्त अमरूदों को देखकर वो मस्ती से उनको सहलाने और दबाने लगा। ताज़ा बने चूचकों को वो मसलने लगा। रूहि आऽऽऽऽऽह कर उठी।

उधर शकील अब चारु के होंठ चूसते हुए उसके कंधे चूमने लगा और उसके हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसकी पतली चिकनी कमरको सहलाने लगे। नशे में मदमस्त चारु अब गरम हो चुकी थी और ख़ुद अपनी कमर हिलाकर मस्ती से अपनी बुर उसके लौड़े पर रगड़ रही थी। शकील समझ गया कि लोहा गरम है सो उसने भी चोट की और उसकी दोनों मस्त चूचों पर अपने पंजे दबाने लगा। अब चारु की बारी थी आऽऽऽह करने की। अब वो उसके होंठ चूसते हुए उसके मम्मों को मसलने लगा। जल्द ही चारु की सिसकियाँ कमरे में गूँजने लगीं। राजीव और रूहि ने उसे देखा और राजीव मुस्कुरा कर बोला: शकील बहुत मस्त चूचियाँ हैं रूहि की। म्म्म्म्म्म

बताओ हमारी चारु की कैसी लगीं?

शकील: आऽऽऽह बहुत सख़्त अमरूद हैं भाई ये तो। वो उनको मसलकर बोला। चारु : आऽऽऽऽऽह अंकल धीरे से प्लीज़ ।

शकील: चलो बिटिया अब टॉप उतारते हैं। देखो रूहि तो ऊपर से पूरी नंगी है और देखो राजीव भाई कैसे उसके मम्मे चूस रहा है?

चारु ने देखा कि राजीव अब सच में उसके नंगे मम्मे चूसने में मस्त था और रूहि उइइइइइइइ आऽऽऽऽऽह चिल्ला रही थी।

अब शकील ने उसका टॉप उतारा और ब्रा के ऊपर से उसके अमरूदों को दबाने लगा। फिर वो उसकी भी ब्रा खोला और सख़्त गोल गोल अमरूद अब उसके सामने थे जिनको वो मज़े से सहलाया और फिर बारी बारी से चूसने लगा। अब आऽऽऽऽऽऽह करने की बारी चारु की थी। अब शकील बोला: यार पूरा मज़ा यहाँ नहीं बिस्तर पर आएगा। आप एक काम करो वो सामने वाले कमरे में ले जाओ रूहि को और मैं इसके पीछे वाले कमरे में ले जाता हूँ ।

शकील उठा तो उसके पाजामा में एक ज़बरदस्त तंबू बना हुआ था और वो चारु को बच्ची की तरह अपनी गोद में उठाया और अपने कमरे की ओर चला गया। वो अब भी उसकी चूचि दबाते हुए उसके होंठ को बीच बीच में चूसता रहा। फिर वह उसे बिस्तर पर लिटा दिया। कमरा बड़ा था और बिस्तर भी बहुत बड़ा था। अब वो अपना कुर्ता और पाजामा उतारा और सिर्फ़ चड्डी में आकर उसके ऊपर लेटा और उसके बदन को सहलाते हुए उसे चूमने लगा। अब वो उसकी लेग्गिंग निकाला और पैंटी में उसकी गीली उभरी हुई बुर देखकर मस्ती से उसे चाटने लगा। अब वो उसकी पैंटी एक झटके से निकाला और उसकी बुर और नरम नरम फाँक देखकर मस्ती से उस जगह को सहलाने लगा। वह उसकी चिकनी बुर के स्पर्श से सिहर उठा और वो बोला: उफफफफ बिटिया क्या मस्त टाइट बुर है। मेरा एक काम करोगी?

चारु : जी अंकल बोलिए?

शकील: बिटिया ज़रा पेट के बल लेटो और अपनी गाँड़ ऊपर कर लो, मुझे इस पोज़ में तुम्हारी बुर और गाँड़ चाटनी है।

चारु शर्मा कर पेट के बल हुई और अपनी गाँड़ थोड़ा सा उठा ली। अब शकील ने उसकी गोल गोल गाँड़ सहलाकर उसकी गाँड़ को खींचकर और ऊपर उठाया। अब उसकी आँखों के सामने कमसिन जवानी की गाँड़ का भूरा सा छेद और थोड़ी सी खुली बुर से झाँकती उसकी गुलाबी छेद बहुत मस्त लग रहा था। वो दोनों गाँड़ सहलाकर अपना मुँह स्वर्ग के द्वार में डाल दिया और उसकी गाँड़ के छेद को बड़ी देर तक चूमता और चाटता रहा। फिर वो नीचे होकर उसकी बुर को भी चाटा और चारु उग्फ़्फ़्फ़्फ़ अंकल जीइइइइइइइइइ आऽऽऽऽहहहह

करने लगी। फिर उसने अपनी दो उँगलियाँ उसकी बुर में पेल दीं। चारु आऽऽऽऽऽह कर उठी। वो उँगलियाँ अंदर बाहर करके उनको निकाला और चूसने लगा।

अब वह बिस्तर पर लेट और बोला: बिटिया आओ मेरी चड्डी से मेरा लौड़ा बाहर निकालो।

चारु उठकर उसकी चड्डी नीचे की और अब उसका लौड़ा उसके आँखों के सामने था। उफफक क्या मस्त लग रहा है वो सोची। पापा के लौड़े जैसे ही बड़ा और मोटा था पर कुछ अलग था जो उसे समझ नहीं आया। कुछ कुछ सेक्सी विडीओ क्लिप जैसा ही था । शकील: बिटिया पसंद आया?

चारु शर्मा कर: जी अंकल बहुत प्यारा है। वो उसे मस्ती से मूठ्ठी में लेकर सहलाकर बोली।

शकील: बिटिया वो तुम्हारे किस्स के लिए तरस रहा है। देखो उसके आँसू भी आ गए। वो उसे प्रीकम की एक सफ़ेद बूँद दिखा कर बोला। अब चारु ख़ुद मस्त हो चुकी थी । वो झुकी और उसके लौड़े को मस्ती से चूमने लगी। फिर जीभ से उसने उसे और बॉल्ज़ को चाटा। उफफफ कितने बड़े बॉल्ज़ हैं इनके। अब वो लौड़े के सुपाडे को चाटी और फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लगी। शकील मस्ती से नीचे से अपना लौड़ा उछाल कर उसके मुँह को मानो चोदने लगा। जल्दी ही दोनों मस्ती में डूबकर ओरल सेक्स का मज़ा लेने लगे। शकील उसकी चूचियाँ भी दबाए जा रहा था और उसकी गाँड़ भी सहला रहा था।

अब शकील बोला: बिटिया चलो अब चुदाई करते हैं। तुम नीचे लेटो और मैं ऊपर से आता हूँ। चारु को लिटाकर उसकी दोनों टांगों को फैलाकर अपने कंधे पर रखा और अपने विशाल लौड़े को उसकी बुर में ऊपर से लेकर नीचे कर रगड़ने लगा। सुपाड़ा उसकी बुर के छेद और किल्ट से रगड़ कर उसकी बुर में गुदगुदी का अहसास करा रहा था । फिर वो अपने हाथ में थूक लगाकर अपने लौड़े पर मला और दो उँगलियों को थूक लगाकर उसकी बुर में डाल कर अंदर बाहर किया। उसकी बुर मस्त गरम और गीली थी। वह टाइट बुर पाकर मस्ती से भर गया और अपने लौड़े के सुपाडे को उसके छेद में सटा कर धीरे से दबाव बनाने लगा।

चारु आज सिर्फ़ दूसरी बार चुद रही थी। उसके मुँह से आऽऽऽऽह निकली जैसे ही पूरा सुपाड़ा अंदर घुस गया। अब शकील उसकी चूचियाँ दबाकर उसके बुर में एक मस्त धक्का मारा और उसका आधा लौड़ा उसकी टाइट बुर में समाता चला गया। अब चारु को दर्द हुआ और वो चिल्लाई: आऽऽऽह अंकल दुखता है।

शकील उसको प्यार से बोला: बस बस एक धक्का और पूरा लंड अंदर हो जाएगा। ये कहते हुए उसने एक और धक्का मारा और अब पूरा लौड़ा उसकी बुर में फ़ँसा दिया।चारु की आँख में आँसू आ गए। अब वो उसकी चूचियाँ दबाकर उसे मस्ती से भरने लगा। थोड़ी देर में चारु अब फिर से गरम होने लगी। अब वो मज़े से उसकी पीठ दबाकर शायद कह रही थी कि अब मारो मेरी फुद्दी । शकील मस्ती से भर कर ज़ोर से चुदाई करने लगा। इस उम्र में भी वो एक जवान मर्द की तरह चोद रहा था । कमरा अब फ़च फ़च की आवाज़ से गूँज रहा था । अब चारु भी उइइइइइइ आऽऽऽह हाऽऽऽय्यय कहकर चुदवा रही थी। शकील का लंड पूरा अंदर जाकर उसकी बुर में ज़बरदस्त हलचल मचा रही था। शकील: बिटिया मज़ा आ रहा है ना? आऽऽऽहहहह।

चारु: आऽऽऽऽह अंकल हाँआऽऽऽऽऽऽ बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है।

शकील: बेटी और चोदूँ? या बस करूँ?

चारु: आऽऽऽऽऽह अंकल और चोओओओओओओओदिये नाआऽऽऽऽऽ।

इस तरह वो अश्लील बातें करते हुए मज़े से उसे चोदते रहा और फिर आऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म कहकर वो झड़ने लगा और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और चारु भी उइइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। अब दोनों शांत होकर एक दूसरे से चिपक कर पड़े रहे।

उधर राजीव रूहि को लेकर दूसरे कमरे में गया और उसे बिस्तर के पास खड़ा किया और अब उसके नीचे का कपड़ा और पैंटी एक झटके में निकाल दिया और पूरी नंगी रूहि के बदन को खड़े खड़े ही अपने बदन से भींचकर उसकी पीठ सहलाने लगा। रूहि को अपने पेट में उसका लौड़ा चुभ रहा था। अब वो रूहि को बोला: बेटी चलो अब मुझे नंगा करो।

रूहि मुस्कुरा कर उसकी क़मीज़ खोली और फिर उसकी पैंट भी उतार दी।अब चड्डी में से उसका मोटा लौड़ा देखकर वो चुदासि हो गयी और झट से चड्डी भी निकाल दी। अब वो उत्तेजित होकर उसको सहलाने लगी और बोली: वाह अंकल आपका भी बड़ा मस्त है। वो उसके बॉल्ज़ को भी सहलाई और बोली: आऽऽऽऽह ये तो दादू से भी बड़े हैं।

राजीव उसके चूतरों पर हाथ फेरा और बोला: तुम्हारी फ़िगर भी मस्त सेक्सी है बेबी। चलो मैं लेटता हूँ तुम मेरे ऊपर उलटा लेटो और हम ६९ करेंगे।

यह कहकर वो बिस्तर पर लेटा और रूहि उसके ऊपर उलटा लेटी और अपनी बुर को उसके मुँह पर रखी और ख़ुद उसका लौड़ा चूसने लगी। वह भी उसके गाँड़ को फैलाया और अपनी जीभ से उसकी गाँड़ के छेद को मानो चोदने लगा।उसने नोटिस किया कि वो छेद भी काफ़ी खुला सा था। वो समझ गया कि दादू ने गाँड़ का भी उद्घाटन कर रखा है। अब वो उसकी गुलाबी बुर के छेद में जीभ डाला और उसे मस्ती से भिगोने लगा।

थोड़ी देर में दोनों गरम हो गए और अब राजीव बोला: आओ मेरे ऊपर चढ़ो और चुदाई करो। वो मुस्कुराई और अपनी टाँगें फैलाकर उसके लौड़े पर अपनी बुर दबाई और उसे धीरे से अंदर करने लगी। राजीव ने ध्यान दिया कि वो उसके मोटे लौड़े को बिना किसी परेशानी के अंदर ले ली। वो समझ गया कि खेली खाई लौंडिया है इस छोटी सी उम्र में भी। अब वो उसके लौड़े पर जैसे कूद रही थी। कमरा अब गरम हो चला था और ख़ुद ही चोदते हुए वो सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी: आऽऽऽऽऽह उम्म्म्म्म्म्म्म उम्म्म्म्म उम्मम्म कहकर हर धक्के में मस्ती से भरी जा रही थी। क़रीब १० मिनट के बाद वो आऽऽऽऽह मैं गयीइईई कहकर झड़ गयी और फिर जैसे राजीव के ऊपर गिर सी गयी।

अब राजीव उसको चिपकाए हुए ही पलटा और उठकर उसकी पूरी भीगी बुर को एक तौलिए से पोंछा और फिर उसकी टाँग फैलाकर उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा। जल्दी ही वो गरम हो कर अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। अब फ़च फ़च की आवाज़ से कमरा गूँज उठा और दोनों की आवाज़ें भी कमरे में मस्ती के आलम का अहसास करा रही थी। क़रीब २० मिनट की चुदाई के बाद दोनों आऽऽऽऽहह उइइइइइ कहकर झड़ने लगे और फिर एक दूसरे से चिपक कर लेट गए।

उधर शकील चारु के साथ बाथरूम गया और साफ़ सफ़ाई करके बाहर आया और बोला: चलो देखते हैं रूहि का क्या हाल है?

चारु ने अपने कपड़े की ओर हाथ बढ़ाया तो उसे रोकते हुए बोला: अरे बिटिया अभी से कपड़े क्यों पहन रही हो? अभी तो एक राउंड और करेंगे। वह उसकी मस्त गाँड़ और चूचियाँ दबाकर बोला: ठीक है ना?

चारु ने भी मस्ती में आकर उसका लम्बा लटकता हुआ लंड सहलाया और बोली: ठीक है अंकल जैसे आप चाहो।

अब दोनों नंगे ही दूसरे कमरे में पहुँचे। उस समय राजीव और रूहि भी बाथरूम से बाहर आकर बिस्तर पर फिर से लिपट कर लेटे हुए थे और रूहि उसका नरम लंड सहला रही थी और वो उसकी चूचियाँ चूस रहा था।

शकील: वाह लगता है एक राउंड हो गया है और दूसरे की तय्यारी है। कैसी लगी हमारी गुड़िया? शकील रूहि की गाँड़ सहलाते हुए बोला। वो अब बिस्तर पर बैठ गया था।

राजीव: मस्त माल है भाई, क्या मज़े से चुदवाई है। बहुत दिनों बाद ऐसी चुदक्कड लौंडिया मिली है। और आप सुनाओ हमारी गुड़िया की बुर कैसी लगी?

शकील ने पास खड़ी चारु की बुर पर हाथ फेरा और कहा: मस्त माल है ये भी। पर अभी चुदाई का उतना अनुभव नहीं है ना। जल्दी ही सीख जाएगी। वो उसकी चूचि चूसते हुए बोला।

शकील: रूहि उठो ना एक एक गिलास बीयर और पिलाओ फिर दूसरे राउंड का मज़ा आएगा।

रूहि मुस्कुरा कर उठी और चारु के साथ कमरे से बाहर चली गयी। अब शकील भी उसी बिस्तर पर राजीव के बग़ल में बैठ गया। दोनों पलंग के हेडरेस्ट से अपनी पीठ सटा कर बैठे थे और उनके नरम लम्बे लौड़े उनकी जाँघों के बीच में से एक तरफ़ को होकर पड़े थे। जब दोनों लड़कियाँ बीयर के गिलास लेकर आयीं तो ये दृष्ट देखकर मस्ती से भर गयीं। अब चारों बीयर पीने लगे। राजीव के साथ चारु आकर बैठी और शकील की दूसरी तरफ़ रूहि बैठी थी। रूहि ने हाथ बढ़ाकर अपने दादू का लंड सहलाना चालू किया और चारु भी उसकी देखा देखी राजीव का लंड सहलाने लगी।

शकील प्यार से रूहि की एक चूचि दबाकर बोला: हमारी गुड़िया को मैंने और भाई जान ने मस्त ट्रेनिंग दी है।

राजीव: कौन भाई जान?

शकील: अरे मेरे बड़े भाई साहब। वो भी बहुत रंगीलें हैं। वो एक बार आए तो रूहि को देखकर बोले: आ मेरे पास । फिर वो रूहि को अपने से चिपका कर उसका बदन सहलाने लगे। मुझे बड़ा अजीब लगा। रूहि अब अपने कमरे में चली गयी थी। उसके जाने के बाद वो मुझसे बोले: भाई तुमने अपनी पोती को शीशे में उतारा या नहीं? क्या मस्त गदरा गयी है इसकी जवानी? तू मज़े कर ले वरना पड़ौसी हाथ मार लेंगे। मैं थोड़ा सा हिचकिचाया था पर वो बोले: अरे मैं तो अपनी पोती को बिलकुल ट्रेन कर दिया हूँ। और अब बहु और पोती दोनों मज़े से चुदवाती हैं। मुझे पता था कि वो भी अपनी बहु को चोदते हैं । पर पोती की भी ले रहे हैं इस बात का मुझे इल्म नहीं था। तभी मेरी बहु बाज़ार से सामान लेकर आयी।

 


वो आकर भाई जान को सलाम की और भाई जान ने उसे अपनी गोद में खींचकर बिठाया और कहा: कैसी हो मेरी जान?

बहु: अच्छी हूँ ताया अब्बा। अब वो उसके गाल चूमे और चूचियाँ दबाकर बोले: वाऽऽहह क्या मस्त मोटी हो गयीं हैं चूचियाँ । ३८ की तो होंगी ना?

बहु शर्माकर: क्या ताया अब्बा आप भी ना? आऽऽऽह छोड़िए ना। रूहि अंदर होगी।

राजीव: ओह तो क्या आपके भाई जान भी आपकी बहू को चोद चुके थे?

शकील: हाँ यार कई बार। असल में मैं एक बार जब भाई जान के घर गया था तो उन्होंने अपनी बहु को मुझसे चुदवाया था । इसीलिए जब वो मेरी बहु को चोदने को बोले तो मैं भी मना नहीं कर पाया।

राजीव का लंड अब खड़ा होने लगा था और वो चारु से बोला: बेटी ज़रा चूसो ना इसे। चारु प्यार से उसके लंड को चूसने लगी। शकील ने भी रूहि को इशारा किया और वो भी उसके लंड को चूसने लगी।

राजीव चारु की चूचियाँ दबाते हुए: फिर क्या हुआ? आपके भाई ने पोती को चोदने वाली बात बहु को बतायी?

शकील रूहि की गाँड़ दबाकर: हाँ भाई जान मेरी बहू यानी रूहि की माँ से बोले कि मैं तो अपनी पोती से मज़ा लेने लगा हूँ। अब तो रूहि भी जवान हो गयी है वो भी तो अपने दादू से मज़ा ले सकती है। मेरी बहू पहले तो मना करी पर बाद में समझाने से मान गयी और फिर मैंने धीरे धीरे रूहि को जवान किया और उसकी सील एक दिन तोड़ ही दी। बाद में मेरे भाई जान भी इसके साथ मस्ती किए और मैं भी भाई की पोती से उनके घर जाकर मज़े किया। इस तरह रूहि अब काफ़ी अनुभवी हो गयी है और देखो कितने मज़े से मेरा चूस रही है।

राजीव: हाँ चूसती बहुत बढ़िया है और नीचे से मस्त गाँड़ उछालकर मज़ा भी देती है। वैसे चारु अब तुमको भी नीचे से गाँड़ उछाल कर मस्ती से चुदवाना चाहिए। वो चारु के सिर पर हाथ फेरकर बोला जो उसके लंड पर ऊपर नीचे हो रहा था।

चारु: उम्म्म्म्म्म्म जी उम्म्म्म्म्म।

अब शकील बोला: चलो चुदाई करते हैं। आओ रूहि तुम मेरे ऊपर चढ़ो और चारु भी राजीव के ऊपर चढ़ेगी। चारु रूहि से सीखो कैसे चुदाई करते हैं । ठीक है?

चारु ने हाँ में सिर हिलाया। अब चारु राजीव के लंड को अपनी बुर में वैसे ही डालने लगी जैसे रूहि ने शकील के लंड को अपनी बुर में डाल लिया था। अब चारु रूहि की तरह उछलकर चुदवाने लगी। चारु ने देखा कि रूहि अपनी गाँड़ को गोल गोल घुमाकर भी चुदवा रही थी सो वो भी वैसे ही करने लगी। फिर रूहि पूरी लम्बाई में अपनी कमर हिलाकर उसके लंड को एक विशेष तरह से जकड़कर पूरा लंड अंदर लेकर अपनी बुर में लेने और निकालने लगी। चारु भी उसकी नक़ल करके आऽऽऽऽह उम्म्म्म्म करने लगी। रूहि भी उम्मम्म उम्मम कहकर चुदवा रही थी। क़रीब दस मिनट के बाद शकील बोला: चारु बिटिया आओ अब मेरे लंड पर चढ़ो और चुदाई का मज़ा लो। रूहि तुम अंकल पर जाकर चढ़ो।

अब दोनों लड़कियों ने अपनी जगह बदली और चुदाई में लग गयीं। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या दृश्य था । दोनों अधेड़ लेते हुए उन दोनों कमसिन लड़कियों की अमरूद के माफ़िक़ चूचियों को दबाकर लाल करके चूस रहे थे। उनके हाथ उन लड़कियों के गाँड़ को अपने लंड पर दबा कर उनको मस्ती से भर रहे थे। दोनों लड़कियाँ उम्मम उम्मम्म अम कहकर चुदवा रहीं थी । अचानक चारु की सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं और वो उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी। अब शकील उसको अपने से चिपकाकर पलटा और चारु को नीचे करके उसकी बुरी तरह से चुदाई करने लगा। चारु की चीख़ें निकलने लगी। यह बताना मुश्किल था कि चीख़ें मज़े की थीं या दर्द की। क़रीब दस मिनट की ज़बरदस्त चुदाई के बाद वो भी हाँफते हुए उसकी छाती पर ढेर हो गया।

उधर राजीव भी नीचे लेटा हुआ रूहि की बुर का मस्त मज़ा ले रहा था और नीचे से अपनी कमर उछालकर चुदाई को और मस्त बना रहा था। अब रूहि बोली: आऽऽऽऽह अंकल मैं थक गयी अब आप ऊपर आओ ना प्लीज़।

राजीव मुस्कुरा कर उसको नीचे किया और उसकी धमासान चुदाई में लग गया। लगा कि पलंग टूट ही जाएगा। ऐसी चूँ चूँ और फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी। अब दोनों चीख़ने लगे और झड़ने लगे। उफ़्फ़्फ़्फ क्या Wild ऑर्गैज़म था – वो सोचा।

अब चारों बिस्तर पर लेते हुए लम्बी लम्बी साँस ले रहे थे। सबसे पहले राजीव उठा और चारु से बोला: चलो फ़्रेश हो जाओ अब घर जाना है । वैसे भी बहुत देर हो गयी है।

फिर सब तय्यार होकर बाहर ड्रॉइंग रूम में आए। शकील बोला: चलो यार ज़रा बाहर बरामदे में चलते हैं मुझे सिगरेट पीना है।

दोनों बाहर आए और शकील सिगरेट पीने लगा। तभी राजीव बोला: शकील भाई एक बात पूछूँ ? आपको अजीब तो लगेगा पर फिर भी मैं जानना चाहता हूँ।

शकील: हाँ हाँ पूछो भाई जो पूछना है?

राजीव: क्या मेरी बीवी सरिता आपसे चुदवाई थी?

शकील चौंक कर: आज इतने साल बाद भाभी के बारे में ये सवाल? जब की बिचारि को गुज़रे हुए भी कई साल हो गए?

राजीव: बस ऐसे ही एक उत्सुकता है समझ लो।

शकील सिगरेट का कश लेता हुआ: हाँ मैंने उसे चोदा था। वो नाप लेने आती थी और मैं उसकी चूचियाँ और गाँड़ दबाता था। वो थोड़ा बहुत ऑब्जेक्ट करती थी। कई साल तक ऐसे ही चला। पर शायद तुम बीमार हो गए थे तो वो चुदाई के लिए प्यासी थी , तभी मेरा काम बन गया। हर बार की तरह नाप लेने के समय उसकी चूचियाँ दबाने पर जब वो विरोध नहीं की तो मेरा हौसला बढ़ा और मैंने उसकी गाँड़ और फिर पीछे से कपड़े के ऊपर से उसकी बुर भी दबा दी । उसका विरोध ना देखके मैं उसको पीछे के एक कमरे में के गया और वहाँ ज़मीन पर पड़े एक गद्दे में लिटाकर उसे चोद दिया। उस दिन वो दो बार चुदवायि थी। तभी उसने तुम्हारी बीमारी का बताया था।

राजीव: ओह तो तुमने उसे कितनी बार चोदा होगा?

शकील: यही कोई २०/२५ बार। वैसे वो औरों से भी चुदवाती थी उन दिनों।

राजीव: औरों से? मतलब? किसी का नाम बताया था।

शकील: हाँ बताया था। वो बोली थी कि तुम्हारा जो उन दिनों एक ड्राइवर था ना वो उससे रोज़ एक या दो बार चुदवा लेती थी। और कोई तुम्हारा दोस्त भी उससे मज़े ले रहा था।

राजीव: ओह ड्राइवर भी !! हाँ उन दिनों एक ड्राइवर रखा था पर वो तो एकदम छोटी उम्र का था। उफ़्फ़्फ़्फ क्या क्या पता चला आज। और हाँ मेरा कौन दोस्त है वो मैं जानता हूँ।

शकील: पर एक बात है कि अचानक उसने मेरी दुकान में आना बंद कर दिया। मेरे पूछने पर बतायी थी कि अब तुम ठीक हो गए हो। इसलिए उसे किसी और के पास जाने की ज़रूरत नहीं है।

राजीव: ओह हाँ ये मुझे समझ आ गया था। मेरे दोस्त ने भी बाद में आना बंद कर दिया था।

तभी चारु की आवाज़ आयी: अंकल घर नहीं चलना क्या?

इस पर राजीव और शकील अंदर आए और शकील ने चारु को गले से लगाकर प्यार किया और उसके गाँड़ सहला कर बोला: बिटिया फिर आना और ज़्यादा मज़ा करेंगे।

राजीव ने भी रूहि के गाल और होंठ चूमे और फिर मिलने का बोलकर राजीव और चारु अपने घर पहुँचे तब शाम के पाँच बज चुके थे। घर में सिर्फ़ मुन्नी थी। शिवा मालिनी के पास अस्पताल में ही था।

मुन्नी ने चाय बनाई और सब पी रहे थे तभी शिवा का फ़ोन आया: पापा मेरी सास को आप लेने जाओगे या मैं जाऊँ? वो आठ बजे तक आ जाएँगी।

राजीव: बेटा मैं ही चला जाऊँगा तुम बहु के पास रहो। मैं सरला को सीधे लेकर अस्पताल ही आ जाऊँगा।

शिवा: ठीक है पापा। और मालिनी के लिए खाना भी लाना होगा।

राजीव: हाँ हाँ मालिनी और सरला दोनों के लिए ही के आऊँगा।

मुन्नी: वाह आज तो चाची आ रही हैं।

चारु: हाँ पर अंकल मैं सोने जा रही हूँ। बहुत थकावट लग रही है। मुझे आप जाने के पहले उठा देना।

उसके जाने के बाद मुन्नी बोली: अंकल मैं खाना बना देती हूँ। आप ले जाइएगा।

यह कहकर वो किचन ने घुस गयी। राजीव भी थका हुआ था इसलिए वो भी थोड़ा सा आराम कर लिया अपने कमरे में।

क़रीब ७ बजे उसे किसी ने उठाया तो वह देखा कि मुन्नी उसे हिलाकर बोल रही थी: अंकल उठिए जिजु का फ़ोन आया है। चाची की बस ८ बजे आ जाएगी।

राजीव उठकर बैठा और मुन्नी को देखा । वो काले स्लीव्लेस टॉप और स्कर्ट में मस्त माल लग रही थी। उसने उसे अपनी गोद में खिंचा और उसके गाल और होंठ चूसने लगा। वह भी मस्ती में आकर बोली: अंकल चाची को लेने नहीं जाना है क्या? वो अपने चूतरों के नीचे लूँगी से उसके आधे खड़े लंड को महसूस करती हुई बोली।

राजीव उसके अमरूदों को दबाकर बोला: हाँ हाँ मालूम है अभी जाता हूँ पर तुम्हारी जवानी का थोड़ा मज़ा तो ले लूँ।

मुन्नी हँसने लगी और बोली: आऽऽऽऽह थोड़ा धीरे से दबाइए ना। कोई बॉल थोड़े हैं।

राजीव उसकी स्कर्ट में हाथ डाला और पैंटी की साइड से उसकी मुनिया को सहलाने लगा और बोला: उफ़्फ़्फ बिटिया रानी ये कब दोगी?

मुन्नी भोला सा मुँह बना कर बोली: ये तो मेरी है मैं आपको कैसे दे सकती हूँ।

राजीव उसके बनावटी भोलेपन को साँझ कर हँसा और बोला: अच्छा इसे चोदने को कब दोगी?

मुन्नी शर्मा कर: छि अंकल आप कुछ भी बोलते हैं । मैं अभी इस काम के लिए छोटी हूँ ना।

राजीव उसकी मुनिया में ऊँगली डालकर बोला: उफ़्फ़्फ़्फ बिटिया रानी तुमसे छोटी लड़कियाँ भी आजकल मज़े से चुदती हैं , फिर तुम तो अब जवान हो गयी हो। सच कहता हूँ एक बार चुदवा लो फिर ज़िंदगी भर मज़े ही मज़े लो।

मुन्नी अपने आप को छुड़ाकर वहाँ से भाग गयी।

थोड़ी देर बाद तय्यार होकर राजीव बाहर आया और देखा कि मुन्नी टिफ़िन बना रही थी किचन में। वो चुपके से चारु के कमरे में घुसा और वो अभी भी करवट में सो रही थी। अब वो पजामा और टॉप पहनी थी। वो उसके गाल को चूमकर बोला: उठो चारु अब शाम हो गयी है। वो उसकी गाँड़ सहलाने लगा।

चारु: आऽऽह अंकल उठती हूँ ना।

राजीव: अपनी चाची को लेने बस स्टेशन चलोगी क्या?

चारु: नहीं अंकल आज तो मुझे आपने और शकील अंकल ने बहुत थका दिया है। मेरी नीचे की दुःख रही है।

राजीव ने उसकी बुर को पाजामा के ऊपर से हल्के से सहलाया और कहा: बस बेटी अब नहीं दुखेगी। आज तो पक्की खुल गयी होगी। बस अब मज़ा लो अपनी जवानी का।

चारु: आपको मज़े की पड़ी है पता नहीं मैं ठीक से चल भी पाऊँगी कि नहीं।

राजीव : चलो उठो और चलकर बताओ।

चारु उठी और चल कर देखी और बोली: नहीं अंकल बस थोड़ी सी जलन हो रही है। चलने में कोई समस्या नहीं है।

अब राजीव खड़ा होकर उसकी गाँड़ सहलाया और बोला: बस अब मज़े से चुदवाओ और ऐश करो। यह कहकर वो उसके सख़्त अमरूदों को भी दबा दिया और हँसते हुए बाहर आ गया।चारु बाथरूम में चली गयी। तभी किचन से मुन्नी बाहर आइ और टेबल पर टिफ़िन रख कर बोली: लो अंकल अब जाओ।

राजीव मस्ती से उसकी गाँड़ सहलाकर उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डाला और पैंटी से बाहर आए हुए नंगे चूतरों को सहलाया और बोला: उफ़्फ़्फ़्फ बिटिया क्या चिकनी गाँड़ है तुम्हारी। मस्त मज़ा आएगा इसे फाड़ने में। वो पैंटी के ऊपर से ही उसकी गाँड़ की सुराख़ में ऊँगली करता हुआ बोला। मुन्नी के मुँह से उइइइइइ निकल गयी और वो बोली: उफ़्फ़्फ अंकल क्या कर रहे हो?दुखता है ना।

राजीव अपनी ऊँगली बाहर किया और नाक के पास ले जाकर सूंघकर बोला: आऽऽऽह क्या मस्त गंध है।

मुन्नी: छी अंकल क्या कर रहे हो आप! उफ़्फ़्फ । अब जाओ पहले हाथ धोकर टिफ़िन लो और बस स्टेशन जाओ।

राजीव हँसते हुए हाथ धोकर सरला को लेने बस स्टेशन को कार से निकल पड़ा।

सरला आने वाली है —— अब आगे तो और बहुत कुछ होगा——

 
रात के आठ बजे थे जब राजीव बस स्टेशन पहुँचा। वहाँ पता चला कि जाम की वजह से बस आधे घंटे बाद आएगी तो वो वापस कार में बैठा और ख़यालों में खो गया। उसे शकील की बातें याद आ रहीं थीं कि वो सरिता याने उसकी स्वर्गीय पत्नी को कई बार चोदा था। वो ड्राइवर अनवर से भी चुदी है यह सोचकर उसे थोड़ा बुरा लगा। वो ड्राइवर उसके यहाँ करीब तीन साल काम किया था।बाद में वो दुबई चला गया था। वह उसके दोस्त समीर से भी चुदती थी और उसे इस बात का शक तो था ही। क्योंकि जैसे राजीव का स्वास्थ्य ठीक हुआ उसने आना छोड़ दिया था।

राजीव जब एक बार हाल में समीर से एक माल में मिला था तो बातों बातों में वो बोला था कि अनवर वापस आ गया है और काम ढूँढ रहा है। पता नहीं राजीव को क्या सूझा कि वो समीर को फ़ोन लगाया: हाय समीर । फिर कुछ देर इधर उधर की बात करने के बाद वो बोला: समीर तुम उस दिन बोल रहे थेना कि अनवर वापस शहर में है क्या उसका नम्बर है?

समीर: हाँ है मैं भेजता हूँ। देखो यार बिचारे को कहीं काम दिलवा दो।

राजीव: ठीक है देखता हूँ। अब वो फ़ोन बंद कर दिया।

राजीव ने समीर के sms आने के बाद अनवर को फ़ोन लगाया और कहा: अनवर मैं राजीव बोल रहा हूँ। तुम्हारा पुराना मालिक।

अनवर: नमस्ते सर आपने कैसे याद किया?

राजीव: अरे तुम्हारे बारे में समीर ने बताया था।

अनवर: जी साहब मुझे काम चाहिए।

राजीव: एक काम करो रात को ९:३० बजे अस्पताल के सामने वाले रेस्तराँ में आ जाओ। ठीक है?

अनवर ख़ुश होकर: ठीक है सर ।

अब राजीव ने फ़ोन काटा और तभी बस से सरला उतरते दिखी। वो उसकी तरफ़ भागा । उसका बैग उसके हाथ में था। सरला ने एक गुलाबी रंग की क़ुर्ती पहनी थी और साथ ही टाइट क्रीम कलर की लेग्गिंग भी पहनी थी। उफ़्फ़्फ क्या मस्त लग रही थी इस उम्र में भी। वो राजीव को देखकर मुस्कुराई और नमस्ते की। राजीव उसके पास आकर उसका बैग लेकर बोला: नमस्ते क्या हाल हैं आपके? उफ़्फ़्फ़्फ आप तो बहुत मस्त दिख रहीं हैं। लगता है आप वापस से जवानी की तरफ़ बढ़ रही हैं। वह उसकी विशाल छातियों को देखकर बोला।

सरला हँसकर: अब क्या जवान होऊँगी अब तो नानी जो बन गयी हूँ। आप भी संभल जाओ और दादा के जैसे बर्ताव करो।

इस पर दोनों हँसते हुए कार तक पहुँचे और जब वो अंदर बैठने लगी तो उसका मस्त पिछवाड़ा देखकर राजीव के लौड़े ने मानो ठुमकी ली।

कार चलाते हुए राजीव ने सरला की ओर एक बार भरपूर नज़र से देखा और कहा: उफ़्फ़्फ सेक्सी नानी क्या खाती हो जो इतनी मस्त दिख रही हो। लगता है बेटा बड़ी सेवा कर रहा है और ध्यान रख रहा है?

सरला: इसमे क्या शक है। वो मेरा पूरा ध्यान रखता है।

राजीव उसकी जाँघ पर हाथ रखा और सहलाते हुए बोला: सच सरला मस्त फ़िगर हो गया है अब तुम्हारा? देखो क्या मस्त गदराई हुई जाँघें है। अब वो उसकी जाँघों के बीच अपना हाथ ले गया और सरला ने अपनी जाँघें खोल दीं । उसका हाथ लेग्गिंग के ऊपर से उसकी बुर पर पड़ा। वो उसे मूठ्ठी में लेकर भींचा और बोला: उफ़्फ़्फ क्या मस्त बुर है। पैंटी नहीं पहनी हो ना?

सरला: आऽऽऽह हाँ अब छोड़ दी हूँ पैंटी पहनना । राजेश को पसंद नहीं है।

राजीव: तुम्हारी चूचियाँ भी और बड़ी हो गयीं हैं । लगता है राजेश बहुत दबाता और चूसता है।

सरला: हाँ अब मेरी ब्रा ४२ DD साइज़ की हो गयी है। सच में दिन भर मेरे दूध से लटका रहता है मेरा बेटा। पागल है इनके पीछे। वो अपनी छातियाँ देखकर बोली।

राजीव: लकी बोय्य।

सरला: आप अपना सुनाओ। मालिनी तो बेचारी अभी एक महीने आपके काम की नहीं रहेगी। क्या मेरी भतीजियों को शीशे में उतार लिए हो?

राजीव: हा हा सही कहा तुमने। चारु की सील तो खोल दी है। पर मुन्नी अभी पूरी तरह तय्यार नहीं हुई है। उसे थोड़ा और बड़े हो जाने देते हैं।

सरला: अरे आजकल तो मुन्नी से भी छोटी लड़कियाँ मस्ती कर रही हैं । वो भी तय्यार हो गयी होगी।

राजीव: चलो तुम उससे मिलोगी तो बताना कि उसकी सील तोड़ने का समय आया है या नहीं।

सरला ने हाथ बढ़ाकर राजीव के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया और बोली: वैसे ये मुझे भी कई बार याद आता है।

इस पर दोनों हँसने लगे। तभी अस्पताल आ गया और दोनों अंदर गए। राजीव: सरला तुम्हारा पिछवाड़ा पहले से ज़्यादा सेक्सी लग रहा है।

सरला सिर्फ़ मुस्कुरा दी।

कमरे में शिवा एक पलंग पर लेटा था और मालिनी अपनी बेटी के साथ लेटी थी। सरला को देखकर मालिनी उठ बैठी और अपनी माँ से लिपट गयी। फिर सरला ने शिवा को भी गले लगकर प्यार किया और फिर अपनी नतिनि के पास जाकर उसे गोद में लेकर उसे चूमने लगी।

बड़ी देर तक सब बातें करते रहे और सरला ने एक मिनट के लिए भी गुड़िया को अपनी गोद से नहीं उतरा। शिवा ने नानी और नतिनि की फ़ोटो खिंची और सरला ने उसे राजेश को watsapp करने को कहा।

तभी राजेश का फ़ोन आया और सरला ने कहा: हाँ राजेश फ़ोटो देखी?

राजेश: हाँ बहुत प्यारी है हमारी गुड़िया। चलो आप ठीक से पहुँच गए ना। रात को फिर बात करूँगा। बाई ।

अब राजीव ने टिफ़िन दिया और कहा: इसमें मालिनी और सरला का खाना है। शिवा आज तुम घर पर सो जाओ। कल तो हम इनको घर ले ही जाएँगे।

शिवा: ठीक है पापा। हम देख लेंगे। आप चलो अब घर जाओ। दोनो लड़कियाँ वहाँ अकेली हैं।

अब राजीव ठीक है कहकर वहाँ से बाहर आया । उसकी घड़ी में ९:३० बज रहे थे। वो सामने वाले रेस्तराँ में पहुँचा। वहाँ बाहर अनवर उसका इंतज़ार कर रहा था। अब वो काफ़ी परिपक्व दिख रहा था। जब वो उनके घर पर नौकरी करता था तब वो शायद १९/२० साल का था।

अनवर ने नमस्ते किया और राजीव मुस्कुराकर उसे साथ लेकर रेस्तराँ में घुसा और उसे एक कोने की टेबल लिया और साथ बैठने को बोला। वो झिझक कर बैठ गया।

राजीव: तुम कितने साल दुबई में थे?

अनवर: जी दस साल।

राजीव: फिर वापस क्यों आए? तभी वेटर आया और राजीव ने व्हिस्की ऑर्डर की। फिर पूछा: पीते हो ना?

अनवर शर्मा कर हाँ में सिर हिलाया। अब अनवर बोला: साहब यहाँ अम्मी और अब्बा का ध्यान रखने वाला कोई नहीं था। और फिर दुबई से मन भी भर गया था तो वापस आ गया।

राजीव: अभी कहाँ काम कर रहे हो?

अनवर: सर एक सेठ के पास पर वो बहुत कमीना है १४ घंटे काम करवाता है और पैसे भी नहीं देता।

राजीव: ओह । चलो देखता हूँ तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ।

तभी व्हिस्की आ गयी और दोनों पीने लगे। राजीव ने थोड़ी धीरे से कम पीने का मन बनाया और अनवर को पिलाता चला गया। जल्दी ही वो बहकने लगा।

राजीव: अनवर वो कितने अच्छे दिन थे ना जब तुम हमारे साथ काम करते थे।

अनवर की नशे में आँखें चमक उठीं वो बोला: जी सर वो मेरे ज़िंदगी का सबसे अच्छा समय था।

राजीव: हाँ और तुम मस्त जवान भी तो थे सिर्फ़ १८/१९ के होगे।है ना?

अनवर: जी सर आऽऽऽह क्या मस्त दिन थे वो। राजीव उसको एक और पेग पिलाया और बोला: अच्छा ये बताओ। उस समय की सब बातें तुमको याद हैं या कुछ भूल भी गए हो?

अनवर: क्या बोल रहे हो साहब। एक एक बात याद है।

राजीव: और हाँ कल मैं शकील टेलर से मिला था। वो बता रहा था कि सविता को लेकर तुम उसके यहाँ अक्सर जाते थे। याद है या भूल गए?

अनवर की आवाज़ अब लड़खड़ा रही थी: याद है सर सब याद है। फिर वो धीरे से बोला: साहब वो आदमी सही नहीं था।

राजीव: वो क्यों?

अनवर आगे होकर फुसफुसाया: सर वो मैडम ( सविता) पर गंदी नज़र रखता था।

राजीव: ऐसा क्या? पर तुमको कैसे पता?

अनवर: साहब एक बार मैडम उसके पास गयीं और कपड़ा कार में ही भूल गयीं। मैं उसे देने पहुँचा तो देखा उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़।

राजीव: क्या देखा?

अनवर: आप ग़ुस्सा हो जाएँगे।

राजीव हँसकर: अरे अब ग़ुस्सा होने से क्या होगा वो तो भगवान के पास जा चुकी है।
 


अनवर: मैंने देखा कि वो साला टेलर मैडम के नाप लेने के बहाने उनकी चूचियाँ दबा रहा था और मैडम मज़े से आऽऽऽऽह कर रही थी।

राजीव: फिर क्या हुआ?

अनवर: फिर वो बहुत देर तक उनकी गाँड़ और कमर सहलाया और आख़िर में वो उनको एक अंदर के कमरे में ले गया। दरवाज़ा बंद था सो मै कुछ देख तो नहीं पाया। पर अंदर की आवाज़ों से मैं समझ गया कि वो मैडम की बजा रहा था ।

राजीव अनजान बनके: तुम्हारा मतलब है कि वो सविता को चोद रहा था।

अनवर: हाँ जी साहब पक्के से चोद रहा था ।

राजीव: फिर तुम क्या किए?

अनवर: मैं क्या करता साहब? चुपचाप वापस आके गाड़ी में बैठ कर मैडम का इंतज़ार करने लगा। वो क़रीब एक घंटे के बाद आयीं और बहुत थकी सी लग रही थी। आप समझे ना? वो आँख मारकर बोला। अब वो पूरे नशे में था और खुल गया था। वो ये भी भूल गया था कि वो जिसके बारे में बात कर रहा है वो राजीव की बीवी थी।

राजीव: फिर तुमने इसका फ़ायदा कैसे उठाया? तुम मैडम को बोले होगे कि आप टेलर से चुदवायि हो तो मैं साहब को बता दूँगा। कुछ पैसे वगेरह बनाए होगे। है ना? हा हा।

अनवर: हा हा नहीं साहब पैसे की कोई बात नहीं की मैंने पर — छोड़िए ना साहब पुरानी बातों को क्या याद करना?

राजीव उसके गिलास में एक और पेग डाला और वो उसे आधा एक घूँट में ही गटक गया।

राजीव: बताओ ना यार कैसे मैडम से फ़ायदा उठाया?

अनवर की आँखे पूरी चढ़ गयीं थीं वो बोला: ह्म्म्म्म्म मैं तो मैडम की मस्त जवानी पर फ़िदा था। आप बुरा नहीं मानना। मैं मैडम को बोला कि मुझे पता है आप टेलर से चुदवा रही हो। मैडम डर गयी वो बोलीं कैसी को बताना नहीं मैं तुमको पैसे दूँगी। तो मैं बोला कि मुझे तो आपकी जवानी चाहिए । मैडम बोलीं तुम तो अभी बच्चे हो। मैं तुमसे बहुत बड़ी हूँ। ये क्या अच्छा लगेगा। तब साहब मैंने कर एक सुनसान पार्किंग में रोकी और पैंट का जीपर खोलकर अपना लंड बाहर निकाला और मैडम को दिखाकर बोला कि देखो मैं बच्चा हूँ क्या? वो मेरा खड़ा लंड देखकर बोली हे भगवान तु तो पूरा जवान हो गया है? तेरा तो टेलर से भी ज़्यादा बड़ा है। मैं बोला कि आप बस हाँ करो मैं आपको मस्त मज़ा दूँगा।

राजीव: फिर क्या हुआ?

अनवर: वो बोलीं कि अच्छा आज नहीं कल का प्लान बनाते हैं पर जगह का क्या करेंगे? मैं बोला कि मैडम आप मेरी खोली में आ सकती हो। वो अलग से बनी है वहाँ कोई नहीं आएगा। मैं आपको कल वहीं ले जाकर चोदूँगा। वो हँसने लगी और बोली कि ठीक है , कल करेंगे। अगले दिन मैं मैडम को अपनी खोली में ले गया और ज़मीन पर बिछे बिस्तर पर एक घंटे से ज़्यादा चोदा।साहब उस दिन के बाद तो मैडम मेरी ग़ुलाम हो गयीं। वो रोज़ मुझसे दो बार चुदवातीं थी और मुझे इनाम भी देती थीं। फिर वो टेलर के पास भी जाना बहुत कम कर दीं थीं। फिर आप ठीक हो गए तो वो बोलीं कि देखो अब मुझे घर में ही मस्त चुदाई का मज़ा मेरे पति से मिलने लगा है तो अब मैं तुझसे नहीं चुदवाऊँगी। मैं काफ़ी निराश हो गया था पर तभी मुझे दुबई में काम मिल गया और मैं भी बाहर चला गया।

राजीव: क्या टेलर और तुम्हारे अलावा वो किसी और से भी चुदवाती थी?

अनवर: मुझे शक है कि आपके दोस्त समीर भी कई बार आपके घर आते थे पक्का पता नहीं पर मुझे शक है।

राजीव को जो पता करना था वो पता कर चुका था सो वो उठते हुए बोला: जब भी मेरे पास कोई काम होगा तुमको बताऊँगा। ठीक है?

अनवर : जी साहब ठीक है।

राजीव बिल पटा कर बाहर आया और सोचा कि सरिता की कोई ग़लती नहीं थी क्योंकि वह सिर्फ़ उसकी बीमारी के दौरान ही दूसरों से चुदवायि थी बाद में उसने अपने पर कंट्रोल कर लिया था। वह सोचा कि अनवर से मिलकर उसकी ग़लत फ़हमी दूर हो गयी है। वो जब घर पहुँचा तो चारु TV देख रही थी। रात के ११ बज चुके थे। वो चारु के पास जाकर बैठा और बोला: सोयी नहीं अब तक?मुन्नी कहाँ है?

चारु: वो सो गयी है। बस अब जा ही रही थी सोने।

राजीव ने मुस्कुराकर उसको अपनी गोद में खिंचते हुए कहा: जहाँ इतनी देर जाग ली हो तो थोड़ी देर और सही मेरे लिए। वो उसके होंठ चूमने लगा। वो: छी आपके मुँह से शराब की बास आ रही है। आप पीकर आए हो?

राजीव उसकी चूचियों को मैक्सी के ऊपर से दबाकर बोला: चलो एक इलायची चबा लेता हूँ फिर तुमको बास नहीं आएगी। वो टेबल से इलायची लिया और चबाने लगा।

वो: बिटिया चलो मैक्सी उतारो ना। तुमको चोदने का बहुत मन कर रहा है।

चारु: अंकल आज तो मेरी आपने और शकील अंकल ने बहुत बजाई है । आज रहने दो ना।

राजीव उसकी बुर को मैक्सी के ऊपर से दबाकर : अरे ये मज़ा तो बार बार लेना चाहिए। चलो बेडरूम में चलो और वो उसको एक बच्ची की तरह गोद में उठाकर अपने कमरे मे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया।अब वो बाथरूम जाकर अपने लंड की सफ़ाई किया और पूरा नंगा होकर बाहर आया। चारु की हालत उसके लम्बे आधे खड़े लंड को देखकर ख़राब होने लगी। वो बोला: बेटी मैक्सी नहीं उतारी?

अब चारु बिस्तर पर खड़ी हुई और मैक्सी निकाल दी। ब्रा और पैंटी में कमसिन जवानी मस्त लग रही थी। दुबला पतला बदन पर जवानी भरपूर । वो अब लेट गयी। अब राजीव का लंड पूरा तन गया और वह बिस्तर पर बैठकर उसके बदन पर हाथ फेरा और बोला: आऽऽऽह बेटी क्या मस्त चिकना बदन है। उफ़्फ़्फ क्या दूध हैं । यह कहकर वो उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फिर उसे पलट दिया और उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी गरदन चूमने लगा। अब वो जीभ से उसकी गरदन पीठ और चूतरों को चाटने लगा। चारु आऽऽऽऽऽह कर उठी। अब वो उसकी ब्रा का हुक खोला और फिर नीचे जाकर उसकी जाँघे चाटने लगा। अब वो उसकी पैंटी को नीचे किया और उसकी गाँड़ चाटने लगा। जब वो उसकी गाँड़ के छेद को छेड़ा अपनी जीभ से तो वो बोली: आऽऽऽऽऽऽऽह्ह्ह। अब वो उसे पलटा और पीठ के बल लिटाया और अब उसके होंठ चूसते हुए उसकी गरदन और फिर चूचि चूसने लगा।नीचे आते हुए उसने उसके पेट और नाभि को भी चाटा। जब उसका मुँह उसकी बुर पर पहुँचा तो चारु अपनी गाँड़ उचका बैठी और चिल्लाई: आऽऽऽऽहहह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़। कितनाआऽऽऽऽऽऽ अच्छाआऽऽऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽऽ है अंकल।

राजीव भी पूरी शिद्दत से उसकी बुर चूस और चाट रहा था। जीभ उसकी क्लिट से भी छेड़खानी कर रही थी।

फिर वो अपना लंड उसके मुँह के सामने रखा और चारु बिना किसी निमंत्रण के उसे चूसने और चाटने लगी। राजीव मस्ती में आकर उसके मुँह को मानो चोदने ही लगा। अब वो उठा और उसके मुँह से अपना लौड़ा निकाला और उसकी गाँड़ के नीचे एक तकिया रखा और बोला: बेटी अब चोदूं ?

चारु शर्मा कर: आऽऽऽऽऽह जीइइइइइइइ । और अपनी गाँड़ उछाल दी।

राजीव उसके रंडीपने पर मुस्कुराया और बोला: लो बेटी मेरा लौड़ा लो। यह कहकर उसने अपना लौड़ा उसकी बुर में फ़िट किया और हल्के से धक्का मारा और आधा लौड़ा उसकी टाइट बुर में धँस गया। चारु उइइइइइइ कर उठी।

उसकी चीख़ की आवाज़ मुन्नी ने भी सुनी जो बाहर आयी थी बाथरूम जाने के लिए। वो चारु को ढूँढ रही थी कि वो सोने अब तक क्यों नहीं आयी? वो आवाज़ सुनकर अंकल के बेडरूम में आयी और दरवाजे के पास आकर कान लगाई। चारु अभी भी आऽऽऽऽऽऽऽह कर रही थी। वो चुपचाप खिड़की के परदे को हटा कर अंदर झाँकी और उसका मुँह खुला का खुला रह गया। अंदर चारु अपनी दोनों टाँगें फैलाकर राजीव से चुदवा रही थी।

अब राजीव ने उसकी दोनों चूचियाँ मसलते हुए एक और करारा धक्का मारा और पूरा लौड़ा जड़ तक अंदर समा गया। इस बार चारु हाऽऽऽऽऽय्यय कर उठी। अब राजीव ने थोड़ी देर तक उसकी चूची चूसी और फिर जब चारु शांत होकर आऽऽऽह करने लगी तो उसने चुदाई शुरू की। पाँच मिनट चोदने के बाद वो बोला: बिटिया तुम भी नीचे से अपनी गाँड़ उछालो ना जैसे रूहि उछालती थी। मस्त मज़ा आएगा तुम्हें और मुझे भी।

अब नादान चारु ने अपनी कमर उछाली पर शायद टाइमिंग ग़लत हो गयी क्योंकि लौड़ा बाहर आ गया। राजीव हँसकर: कोई बात नहीं सीख जाओगी। बिटिया जब मैं नीचे धक्का मारूँ तब तुम ऊपर को अपनी गाँड़ उछालो।

जल्दी ही वो कमसिम चुदवाना सीख गयी और चुदाई का पूरा मज़ा लेने लगी। अब वो गाँड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी। क़रीब आधे घंटे की चुदाई के बाद वो आऽऽऽऽऽऽऽह कहकर झड़ने लगी। राजीव भी झड़ने वाला था। वो बोला: आऽऽऽहह बेटी मेरा पानी मुँह में लोगी या बुर में छोड़ दूँ?

चारु: आऽऽऽऽऽऽह जो आपको अच्छा लगे वो करो।

अब राजीव ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसकी चूचियों पर सफ़ेद रस गिराया और फिर उसके मुँह के ऊपर भी रस गिराया। चारु अपना मुँह खोली और उसके रस को चाटने लगी। अब वो उसका लौड़ा अपने मुँह में ले ली और पूरा लौड़ा चूसी और फिर चाटकर साफ़ की। बाद में वो अपनी चूची पर लगा रस भी अपनी ऊँगली में लपेटी और फिर ऊँगली भी चाटने लगी।

मुन्नी की आँखें बाहर को आ रही थीं । वो सोची हे भगवान चारु तो अंकल का इतना बड़ा लौड़ा अंदर ले लेती है। उसकी बुर गीली हो चुकी थी। वो पैंटी के अंदर हाथ डालकर अपनी बुर में ऊँगली करने लगी।

राजीव को विश्वास हो गया कि ये अब पक्की चुदक्कड बन गयी है और आने वाले दिनों में बहुत मज़ा देगी। वह बड़े प्यार से उसको गोद में उठकर बाथरूम में ले गया और दरवाज़ा भी बंद नहीं किया। मुन्नी को सब दिख रहा था। राजीव ने चारु की बुर और गाँड़ साफ़ की और फिर शॉवर लेकर तौलिए से उसका बदन पोंछा। अब बिस्तर में लाकर उसको लिटाया और फिर से उसके बदन को चूमने लगा। चारु हँसकर : अंकल क्या फिर से करोगे?

राजीव: आऽऽऽऽऽह मन तो बहुत कर रहा है पर अब सो जाओ। चलो कपड़े पहनो।

चारु उठकर अपने कपड़े पहनी और राजीव को लिपट कर प्यार किया और अपने कमरे की ओर चल पड़ी। इसके पहले ही मुन्नी अपने कमरे में आकर सोने का नाटक कर रही थी। तभी चारु आइ और आकर सो गयी।

उधर सरला और मालिनी ने खाना खाया। शिवा बाहर जाकर कैंटीन से खाना खा कर आ गया। उसने देखा कि सरला मालिनी को बच्चे को सम्भालने के गुर सिखा रही थी। वह चुपचाप माँ बेटी को बातें करते देखता रहा। थोड़ी देर बाद गुड़िया रोने लगी । सरला ने मालिनी को उसे दूध पिलाने को कहा। वो उसे दूध पिलाने लगी। अब सरला आकर शिवा के बग़ल में बैठी और बोली: और शिवा क्या हाल है? कैसा लग रहा है पापा बनकर?

शिवा: मम्मी बड़ा अच्छा लग रहा है। आप सुनाओ आपकी और राजेश की कैसी चल रही है।

सरला थोड़ा सा झिझक कर: सब ठीक है।

शिवा: मम्मी आपकी बस्ती वालों को शक नहीं होता आप माँ बेटे पर?

सरला: हम बाहर वालों के सामने तो माँ बेटा ही हैं। बस घर के अंदर क्या होता है किसको पता है?

शिवा: पर फिर भी मम्मी कभी बाहर वालों के सामने ऐसा कुछ हो सकता है ना कि उनको शक हो जाए।

सरला: बुरा नहीं मानना बेटा, पर तेरे पापा और उनकी बहू के बारे में किस किस को शक हुआ, बता तो?

शिवा झेंप गया और बोला: हाँ मम्मी आप ठीक कह रही हो। किसी को शक नहीं हुआ है।

सरला: वैसे ही हम पर भी शक नहीं हुआ। ठीक है?

शिवा : जी समझ गया। अच्छा ये बताओ कि आप अपनी फ़िगर कैसे इतनी मस्त रखती हो?

सरला: राजेश मुझे लेकर सुबह वॉक पर जाता है। मेरी डाईट का भी बहुत ख़याल रखता है।

शिवा धीरे से : और लगाता कितनी बार है दिन में?

सरला मुसकुआयी: बदमाश कहीं का । मैं उसका माल हूँ जितनी दफ़ा भी लगाए तुमसे क्या?

मालिनी: क्या खुसर पुसर हो रहा है आप दोनों में?

शिवा: कुछ नहीं मम्मी की खिंचाई कर रहा था।

मालिनी: मम्मी इनकी किसी बात का बुरा मत मानो। क्योंकि इनको कई दिनों से मैं नहीं मिली हूँ।

सरला: इसलिए इसका दिमाग़ घूम गया है क्या?

शिवा: क्या मालिनी तुम भी ना कुछ भी बोलती हो ।

मालिनी: मम्मी ये बहुत दिनों से प्यासे हैं । आप इनको आज ख़ुश कर दीजिए ना। राजेश आपका बेटा है तो ये भी तो आपके दामाद ही हैं आख़िर। और आप पहले भी तो इनसे ये सब कुछ कर चुकी हैं।

सरला नाटकीय अन्दाज़ में बोली: हे भगवान देखो ये मेरी बेटी है वो मुझे अपने दामाद के साथ सोने को बोल रही है।

शिवा: मम्मी नाटक छोड़ो और अगर मूड है तो बोलो। वरना कोई बात नहीं मैं करवट ले कर सो जाऊँगा।

सरला हँसने लगी और बोली: अच्छा बाबा जैसा चाहो कर लो। पर बत्ती बंद कर लो। मुझे रौशनी में शर्म आएगी।

उसकी इस बात पर तीनों हँसने लगे। और शिवा उसको अपनी बाँह में खींचकर उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिया।

 
शिवा सरला को चूमने लगा और सरला शर्मा रही थी । शायद बहुत दिन बाद वो बेटे के सिवाय किसी और से चूदने जो जा रही थी। शिवा उसको पलंग पर लिटाकर उसके ऊपर आ गया और उसके होंठ चूसते हुए उसकी टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा।

सरला: आऽऽऽह शिवा छोड़ो मुझे । मेरी क़ुर्ती का सत्यानाश मत करो मैं इसे उतार ही देती हूँ। यह कहकर वो उठी और अपनी क़ुर्ती उतार दी।नाइट लैम्प में ब्रा से उसके बड़े बड़े दूध बहुत ही आकर्षक दिख रहे थे। उसका पेट भी अब पहले से स्लिम लग रहा था।

मालिनी हंस कर: मम्मी लेग्गिंग भी उतार दो वरना उसका भी सत्यानाश कर देंगे।

सरला: हाँ सही कह रही है तू। वो अपनी लेग्गिंग उतारी और जब खड़ी हुई तो उसकी मस्त गोरी मांसल जाँघें और उसके बीच फूली हुई बुर शिवा के सामने थी। मालिनी के सामने उसके गोल गोल बड़े चूतर थे। अब वो पलटी और मालिनी को बोली: राजेश ने मेरी पैंटी छुड़वा दी है। अब शिवा के सामने उसकी मस्त गाँड़ आ गयी थी और वो सोचा कि आज गाँड़ तो लूँगा ही इनकी चाहे कुछ हो जाए।

मालिनी हँसकर: मम्मी मेरी भी इन बाप बेटे ने काफ़ी समय से छुड़वा दी है। दोनों हँसने लगे। शिवा बिस्तर से उठा और अपने कपड़े भी निकाल दिया और नंगा होकर अपना खड़ा लंड अपनी सास की गाँड़ में दबाकर सामने से ब्रा में से उसकी चूचियाँ दबाने लगा।

सरला: आऽऽऽऽऽह आराम से बेटा। दुखता है ना।

मालिनी हँसी: मम्मी बहुत प्यासे हैं । उनकी प्यास बुझा दो ना। अब शिवा ने ब्रा का हुक खोला और उसकी चूचियों को नंगा करके पूरे पंजों में दबोचकर मज़े से उनकी कोमलता का अहसास करके अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में दबाने लगा।

सरला: आऽऽऽह चल बाबा बिस्तर में चल। आज तो लगता है मेरे दूध उखाड़ ही डालेगा। यह कहकर वो अपने आप को छुड़ाकर बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी। उसने अपने घुटनो से पैरों को मोड़ा और उनको खोल दिया ताकि उसकी बुर शिवा के लिए खुली हो । शिवा सास का यह मादक रूप और अदा देखकर मस्त हो गया और उसके ऊपर आकर चढ़ गया और फिर से उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूसने लगा। जल्दी ही दोनों की जीभ एक दूसरे के मुँह में घुसे जा रही थी। ज़बरदस्त तरीक़े से शिवा अपना लौड़ा उसकी जाँघों और बुर पर रगड़ रहा था और सरला की आखें मस्ती से भरकर लाल हुई जा रही थीं। अब वो झुका और उसकी चूचियाँ चूसने लगा। सरला आऽऽऽऽऽऽह करने लगी।

मालिनी बोली: गंदा बच्चा मेरी मम्मी का दूधु पी रहा है।

शिवा हँसा: तुमको जलन हो रही है तो आओ तुम भी पी लो। मम्मी के पास दो दो हैं ।

सरला ने उसके सिर पर एक चपेट लगायी और बोली: बदमाश कहीं का आऽऽऽऽऽह कुछ भी बोलता है।

अब शिवा उसके पेट को चूमने लगा और जीभ से उसकी गहरी नाभि को कुरेदने लगा। थोड़ा और नीचे जाकर वह उसकी जाँघों को चाटा और फिर अपना मुँह उसके फूले हुए बुर में रखा और बोला: मम्मी बिलकुल चिकनी कर रखी है आपने।

सरला: हाँ वो राजेश को बाल बिलकुल पसंद नहीं हैं। जैसे ही बढ़ते हैं वो ख़ुद से साफ़ कर देता है।

अब शिवा उसकी बुर को लम्बाई में चाटा और फिर उसकी फाँकों को फैलाकर उसकी गुलाबी माल को देखकर बोला: मालिनी तुम्हारा जन्म स्थल बहुत सुंदर है इसीलिए तुम भी इतनी सुंदर हो।

मालिनी हँसने लगी और बोली: बात कम करो और मेरी मम्मी को मज़ा दो। मस्ती से चाटो मेरी जन्म्स्थली।

शिवा अब जीभ डालकर उसकी बुर चोदने लगा। सरला की हाऽऽऽऽऽय्य निकलने लगी। अब वो उसकी टांगों को और ऊपर किया और उसकी मस्त गाँड़ के छेद को भी चाटने लगा। सरला उइइइइइइइइ कर उठी। अब वो उठा और उसके ऊपर उलटा हो गया और सरला उसके मस्त लंड को अपने मुँह के पास पाकर मस्ती से पकड़ ली और चूसने लगी। जीभ से वो उसके सुपाडे को भी चाट रही थी मानो वो लॉलीपॉप हो । उधर शिवा की बुर चटाई से मस्त होकर वो अपनी गाँड़ भी उछाल रही थी।

सरला: आऽऽऽह बेटा अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।चल अब चोद दे मेरी बुर को। उइइइइइइइइइ।

शिवा उठा और मालिनी की जाँघों के बीच आके उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और अपने लौड़े को हाथ से पकड़कर उसकी बुर के छेद में रगड़ने लगा। अब सरला नीचे से गाँड़ उछाल कर मानो कह रही थी कि मेरे राजा बेटा इसे अंदर पेल दो। अचानक शिवा ने एक मस्त धक्का लगाया और आधा लौड़ा अंदर चला गया। सरला आऽऽऽहह कर उठी। फिर उसने बिना रुके दूसरे धक्के में पूरा लौड़ा अंदर पेल दिया ।अब वो मस्ती में आकर सरला को चोदने लगा। सरला भी अपनी गाँड़ उछालकर उसका साथ देने लगी। अब कमरा सरला की उंन्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न और पलंग की चूँ चूँ से गूँज उठा और जब सरला की बुर पनिया गयी तो फ़च फ़च की आवाज़ भी आने लगी।

मालिनी यह सब देखकर उत्तेजित हो गयी और अपने निपल्ज़ को दबाने लगी। अपनी बुर को तो उसने नहीं छुआ। पर बाक़ी शरीर उसका पूरा उत्तेजित हो चुका था। अब शिवा पूरी शिद्दत से अपनी सास को अपनी बीवी के सामने चोद रहा था। तभी सरला का फ़ोन बजा जो मालिनी के बिस्तर पर ही रखा था। मालिनी ने देखा कि राजेश का ही फ़ोन था। वो: हाँ भाई क्या हाल है?

राजेश: बस बढ़िया । और हमारी भांजी कैसी है?

मालिनी शिवा और मालिनी की चुदाई देखते हुए: मस्त है अभी सो रही है। तू कब आ रहा है उसे देखने?

राजेश: बस दीदी एक हफ़्ते में । तभी मम्मी को वापस भी ले जाऊँगा। वैसे मम्मी से बात कराओ ना, क्या कर रहीं हैं?

मालिनी मुस्कुराई : वह अभी बहुत व्यस्त हैं । उनसे अभी बात नहीं हो सकती। वो देखी कि सरला उन्नन उन्नन कहकर चुदवा रही थी। अचानक वो आऽऽऽऽऽऽह मैं तोओओओओओओओ गयीइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी।

राजेश: ओह गुड़िया को सम्भाल रही है। कोई बात नहीं मैं बाद में फ़ोन करता हूँ। वो फ़ोन काट दिया। मालिनी सोची कि वो गुड़िया को नहीं गुड़िया के बाप को सम्भाल रही है।

सरला झड़कर आऽऽह कहते हुए चुपचाप पड़ गयी। शिवा का लौड़ा तो जैसे पागल हो चुका था । जब वो देखा कि सरला ढीली पड़ गयी है और उसकी बुर भी पानी से भरकर अब ढीली सी हो गयी है तो वो उसकी टांगों को थोड़ा और उठाया और अपनी दो उँगलियों में ढेर सारा थूक लगाकर उसकी गाँड़ के छेद में लगाया। फिर दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं । सरला : आऽऽऽऽऽह क्या अब गाँड़ भी मारेगा? हाय्य्य्य्य्य्य कितना गरम हो गया है बेटा तू?

शिवा ने अपना गीला लौड़ा उसकी गाँड़ के छेद में रखा और धीरे से दबाकर अंदर पेलने लगा। लौड़ा मस्त गाँड़ में जाने लगा और वो धीरे धीरे दबाकर पूरा लौड़ा अंदर ठेल दिया। सरला :उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना मोटा है तेरा।आज मेरी गाँड़ फट कर ही रहेगी।

शिवा अब ज़ोर ज़ोर से गाँड़ मारने लगा। अब आवाज़ ठप्प ठप्प की आने लगी ।

मालिनी बोली: शिवा आप मम्मी को घोड़ी बनाकर गाँड़ मारो। ऐसे मुश्किल होगी।

शिवा पीछे होकर अपना लौड़ा बाहर किया और सरला को पलट दिया और वो अब पेट के बल लेट गयी। अब वो उसकी गाँड़ को ऊपर उठाया और अब उसकी चुदीं हुई बुर और फटीं हुई गाँड़ उसके सामने थी। वो मस्त गोल गोल गाँड़ पर थप्पड़ मारा और बोला: मम्मी मस्त गाँड़ है आपकी। फिर वो अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में घुसेड़कर उसकी गाँड़ को मस्ती से चोदने लगा। अब सरला फिर से ऊँनंन उन्न्न्न्न्न करने लगी। अब वो शिवा के हर धक्के का जवाब अपनी गाँड़ को पीछे करके उसके लौड़े पर दबा कर दे रही थी। शिवा ने उसकी नीचे को होकर झूलती हुई चूचियाँ मसलनी शुरू कीं और सरला अब आऽऽऽऽऽह मरीइइइइइइइइ कहकर चिल्लाने लगी।

मालिनी: उफ़्फ़्फ मम्मी आप अस्पताल में हो। ज़रा धीरे आवाज़ निकालो।

सरला: आऽऽऽऽऽह अपने पति को बोल ना कि आराम से चोदे । उफ़्फ़्फ़क क्या भयंकर चुदक्कड है तेरा पति।

मालिनी मुस्कुरा कर: मम्मी तभी तो आपको बहुत मज़ा आ रहा है ना।

सरला: आऽऽऽऽह मज़ाआऽऽऽऽऽ तो बहुत आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है। हाय्य्य्य्य्य्य काऽऽऽऽऽऽश ये मुझे रोज़ ऐसे चोऊऊऊऊदे। उफ़्क्फ़्क्फ़्फ़ । वो अपनी गाँड़ पीछे दबाते हुए उसके पूरे लौड़े को अंदर दबाते हुए बोली: मस्त लग रहा है उम्म्म्म्म्म्म्म्म।

अब शिवा भी गरम होकर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। उसका वीर्य अपनी सास की गाँड़ की गहराइयों में गिरता चला गया। अब वो उसकी गाँड़ में एक थप्पड़ मारकर बग़ल में लुढ़क गया। सरला भी अपने पेट के बल लेट गयी।

मालिनी ने देखा कि उसकी माँ की गाँड़ से शिवा का सफ़ेद रस बाहर आ रहा था। उफ़्फ़्फ कितना मादक दृश्य है वो सोची।

अब सरला उठी और हाय्य्य्य्य कहकर बाथरूम में गयी और सफ़ाई करके नंगी बाहर आयी। अब वो कपड़े पहनने लगी। शिवा भी अलसाते हुये उठा और बाथरूम में चला गया। वो भी आकर कपड़ा पहना। मालिनी: चलो अब दरवाज़ा खोल दो। नर्स आ सकती है ।

सरला बिस्तर पर लेटकर: आऽऽऽऽह शिवा तूने तो आज मेरी तीनों छेदों का बुरा हाल कर दिया। यहाँ तक कि मेरा मुँह भी दुःख रहा है। तेरा मोटा लंड चूस चूस कर। मालिनी, तू इसे कैसे झेलती है? वो हँसकर बोली। शिवा उसके पास आकर बैठा और उसकी कमर सहलाने लगा।

मालिनी: मम्मी आपने तो सिर्फ़ इनको झेला है । मुझे तो इनके पापा को भी झेलना पड़ता है। जब दोनों मिलकर चोदते हैं ना तब तीनों छेदों का बुर हाल हो जाता है।

शिवा: वाह और जो मज़ा आता है उसका क्या?

मालिनी: हाँ मज़ा तो आता ही है। पर उसके बाद हालत पतली हो जाती है मम्मी। बहुत चुदक्कड हैं दोनों बाप बेटा।

सरला शिवा का बदन सहलाकर बोली: पर गुड़िया है किसकी बेटी? तुम्हारी या राजीव की?

शिवा : ये तो भगवान ही जानता है। पर हमको उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। आख़िर है तो हमारे ख़ानदान की ही ना। वो सरला की गाँड़ को लेग्गिंग के ऊपर सा दबाकर बोला: मम्मी की गाँड़ बहुत मस्त हो गयी है ना?

मालिनी हँसकर : आप जानो । अच्छा मम्मी राजेश का फ़ोन आया था । आप फ़ोन लगा लो। ११ बज गए हैं उसे भी तो सोना होगा ।

 
सरला ने फ़ोन लगाया: हाँ बेटा कैसे हो?

राजेश: क्या मम्मी आपके बग़ैर भला अच्छा कैसे हो सकता हूँ। नींद हो नहीं आ रही है। पूरा खड़ा है मेरा और आपको याद कर रहा है।

सरला हँसी: अरे तो मेरे नाम की मूठ्ठ मार ले ना और आराम से सो जा।

राजेश: ठीक है मम्मी लगता है वही करना पड़ेगा। बहुत मन कर रहा है आपको चोदने का।

सरला: बस बेटा एक हफ़्ते की ही तो बात है फिर जी भर कर अपनी मन मर्ज़ी की कर लेना। चल रखती हूँ।

मालिनी: क्या मॉ है मेरी, भई वाह जो अपने बेटे को कह रही है कि मेरे नाम की मूठ्ठ मार लो।

सरला हँसी: और क्या बेटी है मेरी जो अपनी माँ को अपने पति से अभी अपने सामने चुदवाई है।

इस पर सब हँसने लगे । फिर थोड़ी देर इधर उधर की बातें हुईं और सब सोने लगे। शिवा सरला से लिपट कर सो गया।

उधर घर पर राजीव से चुदकर चारु तो बिस्तर पर आकर सो गयी पर मुन्नी को नींद नहीं आ रही थी क्योंकि वो चारु और राजीव की चुदाई देखकर बहुत उत्तेजित थी। वो अपनी पैंटी में ऊँगली डालकर अपनी मुनिया को छेड़ने लगी। अब उसकी ऊँगली उसकी क्लिट को भी छेड़ रही थी और उसके आँखों के सामने राजीव का मोटा लंड चारु की बुर के अंदर बाहर होते हुए दिखने लगा मानो वीडीयो रीवाइंड हो कर दिखा रहा है। अब वो बुरी तरह से उत्तेजित हो कर झड़ने लगी। फिर वो अपने हाथ को चद्दर में पोंछकर सो गयी।

अगली सुबह सबसे पहले राजीव की नींद खुली तो वह उठकर लड़कियों के कमरे में आया। दोनों लड़कियाँ सो रहीं थीं। बहुत ही मासूम सी लग रहीं थीं। कोई कह नहीं सकता था कि एक तो चुदाई का मज़ा लगातार ले रही है और दूसरी भी जल्द ही चुदने वाली है। वो किचन में जाकर तीनों के लिए चाय बनाया और ड्रॉइंग रूम में चाय रखा और आकर चारु के पास बैठा और उसको चूमकर बोला: चलो बिटिया सुबह हो गयी अब उठो।

चारु: ओफ़्फ़्फ अंकल सोने दो ना।

राजीव: नहीं उठना पड़ेगा अभी। आज मालिनी वापस आ रही है ना। देखो ७ बज गए हैं। चाय मैंने बना दी है। चलो अब उठो। वो उसकी गाँड़ दबाकर बोला।

चारु आँख मलती हुई उठी और बाथरूम को भागी। अब वो मुन्नी के पास गया और उसे भी चूमा और उठाने लगा। वो आँख खोली और राजीव को देखकर एकदम से उठ गयी। उसके टॉप से उसके सख़्त अमरूद मानो बाहर आने वाले थे । राजीव ने उसके अमरूदों को मानो एडजस्ट किया ब्रा के अंदर और बोला: अरे बेटी तुम्हारे अमरूद बाहर आ रहे हैं । इनको सम्भालो।

मुन्नी शर्मा गयी और उसे रात की चारु और अंकल की चुदाई याद आ गयी। वो बोली: धत्त अंकल ऐसे कैसे बाहर आ जाएँगे?

राजीव उनको हल्के से दबाकर : मैंने ठीक से ब्रा में सेट कर दिए। अब नहीं आएँगे बाहर। अब वो उसकी जाँघों पर चढ़ी स्कर्ट से उसकी पैंटी में से उसकी बुर को दबाकर बोला: और हमारी मुनिया कैसी है?

मुन्नी: अंकल हाथ हटा लो। ज़ोर से सुसू आयी है। अपना हाथ गंदा हो जाएगा।

राजीव: ऐसा है तो मेरा बाथरूम यूज़ कर लो क्योंकि दूसरे बाथरूम में तो चारु गयी हुई है।

मुन्नी खड़े होकर: थैंक यू अंकल । कहकर वहाँ से बाहर जाने लगी। राजीव ने उसकी गाँड़ को स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर पैंटी के ऊपर से दबाकर कहा: बाहर चाय रखी है । आकर पी लेना।

मुन्नी: जी अंकल कहकर चली गयी।

राजीव बाहर आकर अपनी चाय पीने लगा। तभी चारु आयी और वो भी चाय पीने लगी। राजीव: चारु कल तो तुम कई बार चुदीं मज़ा आया ना?

चारु शर्मा कर: अंकल आप भी बहुत उलटे सीधे सवाल पूछते हो।

तभी मुन्नी आयी और चाय पीने लगी। अब चारु चाय पीकर किचन में चली गयी । मुन्नी एक टाँग सोफ़े में रखकर और एक नीचे रखकर चाय पी रही थी। वो जानती थी कि इस हालत में उसकी पैंटी में क़ैद बुर राजीव को साफ़ दिखाई से रही होगी। उसका स्कर्ट ऊपर चढ़ गया था। वो कल से चारु की चुदाई देख कर परेशान थी। और अब ख़ुद भी चुदना चाहती थी। राजीव की निगाह जब उसकी पैंटी पर पड़ी तो वो मस्त होने लगा। पतली सी पैंटी से बुर की फाँकें साफ़ दिखाई दे रही थीं। उफ़्फ़्फ क्या मस्त कमसिन जवानी है। उफ़्फ़्फ क्या सख़्त अमरूद हैं और कितनी मादक गोल गोल गाँड़ है। क्या मज़ा आएगा इसकी तंग बुर में लौड़ा पेलने में।

तभी चारु चिल्लाई: मुन्नी अगर चाय हो गयी हो तो आ किचन में मेरी मदद कर दे। अब मुन्नी उठकर चली गयी अपनी गोल गोल गाँड़ मटकाती हुई।

तभी काम वाली बाई भी आ गयी। उसके बाद और कुछ नहीं हुआ।

उधर शिवा सुबह अस्पताल में उठा और मालिनी को बोला: मैं घर जाकर आता हूँ। फिर डॉक्टर के आने के बाद तुमको घर ले जाएँगे।

मालिनी: ठीक है आप हो आइए। मम्मी तो है यहाँ। वो सरला को देखकर बोली जो अभी भी सो रही थी।

शिवा वहाँ से घर आया और देखा कि राजीव ड्रॉइंग रूम में बैठा अख़बार पढ़ रहा था और लड़कियाँ किचन में थीं। ।

राजीव: आओ बेटा कैसा है अस्पताल में सब ?

शिवा: सब ठीक है पापा। दस बजे तक मालिनी को छोड़ देंगे । मैं जाकर ले आऊँगा कार में। अभी नहा लेता हूँ ।

तभी चारु और मुन्नी शिवा की आवाज़ सुन कर आयीं और चारु: जीजू सब ठीक है अस्पताल में? दीदी कब आएँगी।

शिवा: अभी थोड़ी देर में मैं जाकर ले आऊँगा। वहाँ सब ठीक है। तुम्हारी चाची भी वहीं है ।

राजीव: ठीक है बेटा । मैं ज़रा सामान ले आता हूँ। चारु ने लिस्ट दी है।

राजीव घर के पास की दुकान से कुछ सामान लेने चला गया और शिवा अपने कमरे में चला गया।

वो अपने कपड़े उतारा और पूरा नंगा होकर अपने बाथरूम में जाकर देखा कि तौलिया नहीं है। तो वो बाहर आकर आवाज़ दिया: चारु मेरा तौलिया देना ज़रा। देखो वहाँ बालकनी में सूख रहा होगा।

मुन्नी: जीजू चारु दी तो नहाने गयीं है । मैं देखती हूँ जीजू। आपका गुलाबी रंग का है ना?

शिवा: हाँ वही है।

मुन्नी : अभी लाती हूँ। वह तौलिया लेकर आयी और दरवाज़ा खटखटायी । शिवा को मस्ती सूझी और वो हल्का सा दरवाज़ा खोल कर तौलिए को लेने को हाथ बढ़ाया और मुन्नी का हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया। मुन्नी अचानक हड़बड़ा गयी और देखी कि शिवा पूरा नंगा खड़ा था और उसका लम्बा लंड सामने की ओर झूल रहा था। वो शर्मा गयी। और मुँह घुमा ली। शिवा उसको पकड़कर घुमाया और बोला: मुन्नी देखो मेरा लंड कैसे तुम्हें देखकर ख़ुश हो रहा है? देखो ध्यान से।

मुन्नी हैरानी से देखी और वो अपने लटके हुए लंड को दिखाकर बोला: देखो ये तुमको कितना प्यार करता है। अब मुन्नी आँखें फाड़कर देख रही थी कि कैसे एक एक पल में उसका लंड खड़ा होने लगा। कैसे वो अपना मुँह उठाकर मानो उसे देखने लगा हो। अब वो पूरा खड़ा हो कर शिवा की नाभि की तरफ़ झुक गया था। उफ़्फ़्फ़्फ मुन्नी की पैंटी गीली होने लगी। क्या दृश्य था उस कमसिन जवानी के लिए।ऐसा उसने कभी देखा नहीं था। कितना बड़ा और मोटा लंड था जीजू का- वो सोची।

अचानक शिवा ने उसका एक हाथ पकड़ा और अपने गरम सख़्त लंड पर रखा और कहा: मुन्नी कैसा है मेरा लंड? पसंद है ना?

मुन्नी जैसे निंद्रा में हो वैसे उसने उसको ज़ोर से दबाकर उसकी सख़्ती को महसूस किया और फिर शिवा ने उसका हाथ अपने लंड पर ऊपर नीचे करवाया और जल्दी ही वो ख़ुद उसका लंड सहलाने लगी। अब शिवा ने अपना हाथ हटाया और मुन्नी अपने आप ही लंड को मुठियाने लगी।

मुन्नी की पैंटी में गंगा जमुना बहने लगी। उसकी बहुत इच्छा हो रही थी कि वो अपने निपल्ज़ दबाए और बुर में ऊँगली करे। पर अफ़सोस वो ऐसा शर्म के मारे कर ना सकी। तभी शिवा ने उसके स्कर्ट को उठाया और पैंटी में ऊँगली डाल दिया और उसकी मस्त कुँवारी बुर को मसलने लगा। मुन्नी आऽऽऽऽऽह करके उसका लंड दबाकर मस्त हो रही थी।

तभी चारु की आवाज़ आयी: मुन्नी कहाँ हो? जाओ नहा लो।

मुन्नी ने हड़बड़ाकर उसके लंड को छोड़ा और बाहर को भागी। शिवा मुस्कुराकर बाथरूम में घुस गया।

चारु: अरे तुम जीजू के कमरे में क्या कर रही थी?

मुन्नी: वो वो उनको तौलिया चाहिए था सो दे आयी। वो अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गयी।

शिवा अपने बाथरूम में और मुन्नी अपने बाथरूम में हस्तमैथुन कर रहे थे एक दूसरे के जवान अंगों का सोचकर।

चारु नहाकर कपड़े पहनते हुए सोच रही थी कि आज दीदी और चाची भी आ जाएँगी तो अंकल और उसकी चुदाई कैसे हो पाएगी? वो अपने जवान बदन को शीशे में देखी और ख़ुद पर मुग्ध होने लगी। उसका हाथ अपने मस्त बदन पर था और वो मस्त हो रही थी।

सब जवान थे और सबकी मस्ती बढ़ती ही जा रही थी——
 
राजीव बाज़ार गया तो उसे ख़ुरापत सूझी वो ड्राइवर अनवर को फ़ोन किया और बोला: क्या हाल है? कहाँ हो अभी?

अनवर: सर बस अभी काम से आया हूँ रात की ड्यूटी थी। कुछ काम था?

राजीव: नहीं बस ऐसे हो फ़ोन किया । कुछ मस्ती करते हो या नहीं?

अनवर: कहाँ साहब कुछ नहीं बस काम और काम।

राजीव: क्या तुम्हारे साहब के घर में कोई माल नहीं है क्या?

अनवर: नहीं साहब कोई नहीं है। साहब के घर में मेम साहब है पर वो चूसी हुई आम है,६० साल की। साहब भी यहाँ वहाँ मुँह मारता रहता है। वैसे दोनो अमेरिका जा रहे हैं अपने बेटे बहू के पास २ महीने के लिए। मेरी लम्बी छुट्टी होने वाली है। पता नहीं क्या करूँगा मैं इन दिनों।

राजीव: अरे मैं बुला लूँगा तुमको अपने यहाँ । हमारी गाड़ी चला लेना इन दिनों। चलो अभी रखता हूँ।

वो मन ही मन कुछ सोचकर बोला।

जब वो वापस आया तो चारु और मुन्नी टीवी देख रहीं थीं। शिवा अभी आया नहीं था। राजीव के हाथ से सामान लेकर चारु किचन में रखने लगी। जब वो झुककर फ्रिज में सब्ज़ी डाल रही थी तो राजीव पीछे से उसके पाजामा के ऊपर से उसकी गोल गोल गाँड़ दबाकर धीरे से बोला: उफ़्फ़्फ क्या मस्त गाँड़ है। यह कहते हुए उसने उसकी दरार में अपना हाथ डाला और बुर मसलने लगा।

चारु :उफ़्फ़्फ अंकल क्या कर रहे हैं आप? वैसे भी आज चाची आ जाएगी और दीदी भी फिर आपको कहाँ मेरे लिए टाइम रहेगा?

राजीव उसको उठाया और अपने सीने से चिपका कर बोला: अरे बिटिया उनके आने से क्या होगा? हमारी चुदाई यूँ ही चलती रहेगी। तुम फ़िक्र मत करो। वो उसके गाल और होंठ चूमकर बोला।

चारु: इतने लोगों के रहते हुए एकांत कैसे मिलेगा?

राजीव उसकी गदरायी गाँड़ दबाकर बोला: क्या ज़रूरत है एकांत की? तुम देखना कैसी मस्त चुदाई होगी?

चारु: अच्छा चलिए देखेंगे अभी तो छोड़िए। मैं आपके लिए चाय बना देती हूँ।

राजीव बाहर आया और मुन्नी अभी भी टी वी देख रही थी। वो उसके सामने बैठ गया और तभी प्यासी मुन्नी ने अपनी एक टाँग उठाकर सोफ़े पर रखा और स्कर्ट से अपनी पैंटी में छुपी बुर दिखाने लगी। राजीव उसकी उत्तेजना को समझ कर मन ही मन मुस्कुरा दिया और बोला: बिटिया आज पैंटी नहीं बदली क्या? कल भी तो काली ही पहनी थी ना?

मुन्नी ने बेशर्मी से कहा: नहीं अंकल कल गुलाबी थी । मैंने बदली है। उसने पैंटी को छुपाने की कोई कोशिश नहीं की। आज शिवा जीजू भी उसे अभी अभी गरम कर गया था।

राजीव पता नहीं क्या सूझा वो बोला: बिटिया ज़रा पैंटी साइड में करके अपनी मुनिया दिखाओ ना। बहुत मन कर रहा है देखने का।

मुन्नी शर्मा कर: छी मैं क्यों दिखाऊँ? वैसे भी चारु दी यहीं है।

राजीव: चारु है इसीलिए तो कह रहा हूँ कि दिखा दो वरना आके मैं ख़ुद ही देख लेता और चूम भी लेता तुम्हारी मस्त मुनिया को।

मुन्नी ने एक बार किचन की तरफ़ देखा और चारु की वहाँ से आवाज़ आ रही थी । पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो अपनी पैंटी में दो उँगलियाँ साइड से डाली और इसे एक तरफ़ को हटाकर अपने बाप से बड़े उम्र के आदमी को अपनी पनियायी हुई बुर दिखाने लगी।

राजीव की आँखें इस सेक्सी दृश्य को देखकर मस्ती से भर गयीं वो बोला: थोड़ा छेद को खोलो ना।

मुन्नी भी अब अपनी बुर के पूत्तियों को खोली और अपनी गुलाबी कुँवारी बुर के दर्शन कराने लगी।

राजीव से नहीं रहा गया और वह उठकर ज़मीन पर आकर उसकी बुर के पास आकर बैठा और अपना मुँह डालकर उसकी बुर चाटने लगा। मुन्नी उसका सिर अपनी बुर में दबाकर मस्त होने लगी। तभी चारु की आवाज़ आयी और राजीव वहाँ से हटकर ज़मीन पर बैठकर सोफ़े के नीचे मानो कुछ ढूँढने लगा। मुन्नी ने भी स्कर्ट नीचे कर ली।

चारु: अंकल आपकी चाय। अरे क्या ढूँढ रहें हैं आप?

राजीव: चप्पल नहीं दिख रही है। मैं सोचा कि सोफ़े के नीचे होगी। हो सकता है अपने कमरे में ही छोड़ आया हूँगा।

वो खड़ा हुआ और सोफ़े पर बैठ कर चाय पीने लगा। तभी बाहर से घंटी बजी और चारु ने दरवाज़ा खोला और चिल्लाई: अंकल सब आ गए।

अब सरला , मालिनी , गुड़िया और शिवा अंदर आए।

वो सब बहुत ख़ुश थे और नयी गुड़िया को सब बहुत प्यार कर रहे थे। क़रीब ११ बजे शिवा दुकान चला गया। मुन्नी स्कूल और चारु कोलेज चली गयी। राजीव आकर मालिनी के बिस्तर पर बैठा और बातें करने लगा।मालिनी बिस्तर पर ही बैठी थी। सरला बाथरूम में नहा रही थी। तभी गुड़िया रोने लगी। सरला बाथरूम से चिल्लाई: मालिनी उसे दूध पिला दे।

मालिनी ने राजीव को मुस्कुरा कर देखा और अपने मैक्सी का सामने का ज़िपर खोली और अपना एक मोटा सा दूध बाहर निकाला और गुड़िया को गोद में लेकर उसके मुँह में अपना निप्पल डाल दी। तभी राजीव ने उसकी ज़िपर को और नीचे किया और अंदर हाथ डालकर उसका दूसरा दूध भी बाहर निकाला । अब वो उसके दूध को दबाने लगा और मालिनी के निपल पर दो बूँद दूध आ गया। राजीव अब झुका और अपनी जीभ से उसके निपल को चूसने लगा। मालिनी ने बड़े प्यार से राजीव के बाल सहलाये और अपना दूध दोनों को पिलाने लगी। उसका एक हाथ राजीव की लूँगी के ऊपर से उसके आधे खड़े लौड़े को सहलाने लगा।

तभी बाथरूम से सरला बाहर आयी और यह दृश्य देखकर बोली: वाह दादा और पोती दोनों लगे हुए हैं। बेचारी मेरी बेटी दोनों की सेवा में लगी है।

राजीव ने अपना मुँह उठाया और मुँह पर लगे दूध को चाट कर बोला: अरे बड़ी क़िस्मत से इसके स्तनों में दूध आया है उसे कैसे छोड़ दें बिना पिए। फिर वो सरला को देखा तो मस्त हो गया। उसके गीले बालों में तौलिया लगा था। उसने एक ब्लाउस पहना था टाइट सा जिसके नीचे से ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी। बड़े से क्लीवेज़ से आधे गोरे गोरे दूध बाहर झाँक रहे थे। उसने नीचे एक पेटिकोट पहना था और जब वो अपने सूट्केस से साड़ी निकालने को झुकी तो उसकी मोटी गाँड़ की दरार में पेटिकोट का कपड़ा फँस गया। राजीव मस्त होकर बोला: मालिनी देखो तुम्हारी मम्मी की गाँड़ कितनी सेक्सी है।

मालिनी ने उसके लौड़े को दबाया और लूँगी के उभार को दिखाकर बोली: देखो मम्मी आपने पापा का एकदम टाइट कर दिया।

सरला हँसकर: अरे इनका तो हमेशा ही टाइट रहता है। यह कहकर वो राजीव के पास आकर बोली: अरे मेरी बेटी को क्यों तंग कर रहे हो। अभी उसको टाइम है आपकी सेवा करने में।

राजीव उसकी गाँड़ सहलाकर : अरे आपके होते क्या समस्या है। आपकी बेटी अभी चुदवा नहीं सकती तो क्या हुआ आप तो हैं ना। वह उसकी गाँड़ में फँसे कपड़े को निकालते हुए बोला: अच्छा ज़रा एक बार गाँड़ दिखा दो ना। लगता है बेटे ने मार मार के मस्त कर दी है।

सरला हँसकर: देख लो मैंने कब मना किया है।

वो इस समय ऐसे खड़ी थी कि उसका मुँह राजीव की ओर था। राजीव ने उसे पकड़कर घुमाया और बोला: रानी अपने हाथ से पेटिकोट उठाओ और गाँड़ दिखाओ।

सरला हँसकर अपना पेटिकोट उठाई और अपनी नंगी गाँड़ राजीव के सामने कर दी। अब उसका मुँह अपनी बेटी की तरफ़ था।

राजीव झुका और उसकी गाँड़ दबाकर मस्ती में आ गया और फिर घुटनों के बल होकर उसकी गोल गोल गाँड़ की चुम्मियाँ लेने लगा। अब वो उसके चूतरों को फैलाया और उसकी मस्त चुदी हुई छेद को देखकर वहाँ ऊँगली फेरता हुआ बोला: लगता है राजेश अक्सर गाँड़ बजाता है। काफ़ी मस्त खुल गयी है।

मालिनी हँसकर: राजेश का तो पता नहीं पर कल रात शिवा ने मम्मी की चूत के साथ गाँड़ भी ठोकी थी।

तभी राजीव ने उसकी गाँड़ के छेद में अपनी जीभ डाली और उसे कुरेदने लगा। सरला उइइइइइइ कहकर बोली: हाँ राजेश तो हफ़्ते में ३/४ बार गाँड़ मार ही लेता है।

मालिनी भी मस्ती से अपनी मम्मी के पेटिकोट को सामने से उठाई और उसकी जाँघें सहलाते हुए उसकी चूत भी सहला दी। अब उसकी तीन उँगलियाँ अपनी मम्मी के भोसड़े में चली गयीं और वो उनको हिलाकर सरला को मस्त करने लगी।

अचानक सरला वहाँ से साइड में हो गयी और राजीव से बोली: क्या हो रहा है ये सब? अभी नौकरानी भी घर पर है। ये सब बाद में करना आप।

मालिनी राजीव के लौड़े को दबाकर बोली: पापा जब खाना खाकर सब आराम करेंगे उस समय आप मम्मी को चोद लेना।

राजीव उसकी चूची दबाकर बोला: देखा सरला तुम्हारी बेटी मेरा कितना ख़याल रखती है।

सरला: हाँ देख रही हूँ, भले इसके लिए उसकी अपनी माँ ही चुद जाए।

सरला की बात सुनकर सब हँसने लगे।

इसके बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ। मुन्नी क़रीब १ बजे स्कूल से आयी और जाकर कपड़े बदली। वो अब एक स्कर्ट और टॉप में थी।चारु ४ बजे आने वाली थी।

 


क़रीब २ बजे सब खाना खाए। मुन्नी राजीव के बग़ल में बैठी थी। सो उसने उसकी जाँघ सहलाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा। मुन्नी भी मस्त हो कर उसकी लूँगी के ऊपर से उसका लंड दबा देती थी। ख़ैर खाना खाकर सब टी वी देखने लगे। फिर मालिनी और मुन्नी नींद आ रही है कहकर अपने अपने कमरे में जाने को उठे। जाते हुए मालिनी ने राजीव को आँख मारी। अब राजीव ने सरला को आँख मारी और उठकर अपने कमरे में आने का इशारा किया। वह मुस्करायी और उठ कर उसके पीछे चली गयी।

मुन्नी अब होशियार हो चली थी । उसने मासूम सा चेहरा बना रखा था पर उसकी आँखों से मालिनी और राजीव का आँख मारना नहीं छिप सका। वो अपने कमरे में आकर खिड़की से ड्रॉइंग रूम में झाँकी और तभी उसने देखा कि राजीव और सरला उठ गए और राजीव के कमरे में घुस गए। वो चुपके से बाहर आयी और एक खिड़की से पर्दा हटाकर अंदर झाँकी वैसे ही जैसे उसने चारु और अंकल की चुदाई देखी थी। वो देखने लगी——

कमरे में आकर राजीव ने दरवाज़ा बंद किया और बोला: आज कितने दिनों के बाद तुमको चोदने का मौक़ा मिला है। मस्ती से सभी छेदों का मज़ा लूँगा।

सरला ने अपनी साड़ी का पल्लू गिराते हुए अपनी साड़ी खोलती हुई बोली: कौन रोक रहा है। मैं भी तो मरी जा रहीं हूँ आपसे चुदवाने के लिए।

राजीव ने भी अपनी शर्ट निकाली और फिर लूँगी खोलकर पूरा नंगा हो गया। उसका लंड अभी आधा खड़ा था और इस हालत में भी काफ़ी बड़ा लगा सरला को।

वो अपनी ब्लाउस निकालती हुई बोली: उफ़्फ़्फ़्फ ये तो और क़ातिल नज़र आ रहा है। लगता है मेरी बेटी ने काफ़ी सेवा की है इसकी।

राजीव अपने लंड को सहलाकर बोला: हाँ बहुत प्यारी बहू है हमारी। अपने ससुर के लंड का पूरा ख़याल रखती है।

अब वो अपनी ब्रा खोलते हुए बोली: वैसे कल शिवा ने भी जमकर चोदा। अब मस्त सीख गया है। पूरा ट्रेंड हो गया है। वो अपने नंगे मम्मों का पसीना पोंछते हुए बोली।

मुन्नी चौंकी और सोची कि चाची शिवा से भी चुदवा चुकी हैं। हे भगवान —

अब सरला पेटिकोट का नाड़ा खोलकर उसे भी सरका दी। अब वो पूरी नंगी होकर राजीव के सामने खड़ी थी जो कि तब तक बिस्तर पर लेट चुका था। उसका खड़ा लंड सरला के मस्त भरे बदन को देखकर ऊपर नीचे हो रहा था। उसने बाँह फैलायीं और सरला उसके ऊपर आ गयी। अब दोनों के होंठ जुड़ गए और बहुत देर तक चूमना चाटना जारी रहा।दोनों एक दूसरे की जीभ का भी मज़ा ले रहे थे। फिर राजीव ने अपना मुँह खोला और सरला समझ गयी कि वो क्या चाहता है। उसने अपना थूक उसके मुँह में गिराया और वो मस्ती से उसे पीने लगा।

अब सरला ने अपना धड़ उठाया और उसके मोटे मम्मे राजीव के मुँह के ऊपर आ गए वो उनको बारी बारी से चूसने लगा। उसके हाथ सरला की पीठ और गाँड़ पर घूम रहे थे।

सरला थोड़ी देर बाद बोली: ६९ करें?

राजीव मुस्कुरा कर : हाँ जान क्यों नहीं । चलो उलटी लेट जाओ।

अब सरला उलटी होकर उसके ऊपर लेटी और राजीव के मस्त लौड़े को और बॉल्ज़ को चाटने लगी। जल्दी ही वो ज़ोर ज़ोर से लंड चूसने लगी। उधर राजीव भी उसकी चूत और गाँड़ चाटने लगा। जल्दी ही वो बहुत गरम हो गयी और अचानक से उठ कर उसके लंड पर बैठ गयी। फिर हाथ से उसने लंड को पकड़ और अपनी चूत में घुसेड़ ली और फिर अपनी गाँड़ को दबाकर दो झटकों में ही पूरा लंड अंदर करके आऽऽऽऽहह कर उठी।

जल्दी ही वो उसके लंड पर उछलने लगी और कमरे में उसकी सिसकियाँ गूँजने लगीं।

मुन्नी का हाथ पैंटी के अंदर जाकर अपनी मुनिया पर पहुँचा और वो ऊँगली करके अपनी जवानी का मज़ा लेने लगी।

अब सरला अपनी चूचियाँ नीचे करके राजीव का हाथ पकड़कर उन पर रखी और राजीव उसके निपल्ज़ मसलने लगा। फिर एक चूचि चूसने भी लगा। अब सरला लम्बे लम्बे स्ट्रोक्स लगा रही थी और पूरा लंड अंदर करके महसूस करके मस्त हो रही थी। क़रीब १५ मिनट के बाद वो उन्न्न्न्न उन्ननन करते हुए वह झड़ने लगी।

उधर मुन्नी भी अपनी चाची के साथ झड़ने लगी।

अब राजीव उठा और सरला को पेट के बल लिटाया और फिर उसकी गाँड़ पीछे से ऊपर किया और अपने गीले लंड पर थूक लगाया और फिर ढेर सारा थूक लगाकर अपनी २ उँगलियाँ उसकी गाँड़ में डाला और अंदर बाहर करने लगा। अब वो उसकी गाँड़ के छेद में अपना सुपाड़ा लगाया और एक हल्के से धक्का लगाया और सुपाड़ा उसकी गाँड़ के छेद में धँस गया और फिर वो एक और धक्का लगाकर अपना लंड पूरा अंदर कर दिया। सरला की आऽऽऽहहह निकल गयी। अब वो अपने लंड को दबाकर उसकी गाँड़ की ठुकाई में लग गया। सरला भी जल्दी ही गरम हो गयी ।अब वो भी अपनी गाँड़ पीछे कर के गाँड़ चुदाने का मज़ा लेने लगी। कमरा ठप्प ठप्प की आवाज़ से भर गया और साथ ही सरला की आहें और उइइइइइइइइ हाय्य्य्य्य्य कमरे में गूँजने लगी। अब राजीव मस्ती से उसकी गाँड़ में झड़ने लगा। सरला ने अपनी चूत में ऊँगली डाली और हिलाकर जल्दी ही झड़ने लगी। अब वो पेट के बल गिर गयी। राजीव भी हाँफते हुए उसके बग़ल में लेट गया।

बाथरूम से आकर दोनों ने कपड़े पहने और बातें करने लगे।

राजीव: मज़ा आया जान?

सरला: बहुत मज़ा आया। आपके साथ तो हमेशा मज़ा आता है।

राजीव: ये बताओ राजेश अब कैसे चोदता है?

सरला: वो भी बहुत मस्त चुदाई करता है। असल में हम दोनों अब प्यार भी करने लगे हैं एक दूसरे से। हम दोनों पागल हैं एक दूसरे के लिए। अच्छा ये बताओ चारु और मुन्नी की ले ली या नहीं?

मुन्नी ध्यान से सुनने लगी।

राजीव: चारु की तो ले ली है। पर मुन्नी को अभी जवानी की छेड़छाड का मज़ा दे रहा हूँ। जल्दी ही उसकी भी ले लेंगे। मस्त माल है दोनों।

सरला: मालिनी को पता है क्या?

राजीव: चारु का तो पता है। मुन्नी का अभी बताया नहीं है। वैसे एक बात कहनी थी, पता नहीं तुम उसे कैसे लोगी?

सरला: बोलिए ना क्या है आपके मन में?

राजीव: असल में हमारे यहाँ एक कार ड्राइवर काम करता था जब बच्चे छोटे थे। वो मेरी बीवी सरिता को कई बार चोद चुका है। अब वो क़रीब ४० का है। वो काम माँग रहा है। मैं उसे ड्राइवर की नौकरी पर रखना चाहता हूँ। साथ ही वो हमारे घर की लड़कियों की चुदाई भी कर सकता है। तुमको भी मज़ा दे सकता है। उसका नाम अनवर है। बोलो क्या कहती हो?

सरला: आप अपने घर की लड़कियों को बाहर वालों से चुदवाएँगे?

राजीव: देखो मालिनी भी कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी और तब मुझे और शिवा को तीन तीन लड़कियों की जवानी सम्भालनी होगी। सच तो ये है कि मैं अब जवान तो नहीं रहा और ये लड़कियाँ जवानी के उबाल पर हैं । शिवा अकेला कितना संभाल सकेगा। और मैं दिन भर में ज़्यादा से ज़्यादा दो राउंड ही कर पाउँगा। जबकि ये लड़कियाँ तो ३/४ बार चूदना चाहेंगी। इसीलिए अनवर रहेगा तो मामला संभाल लेगा।

सरला: पर वह तो बाहरी आदमी है ना?

राजीव: है तो बाहरी पर हम उसको अपने घर में रख सकते हैं । मैं उसे जानता हूँ सही आदमी है। कभी किसी से बात नहीं करेगा कि घर में क्या हो रहा है।

सरला: ठीक है फिर आप जैसा ठीक समझो।

राजीव उसकी चूचियाँ सहलाकर बोला: तुम चुदवाओगी उससे ? कहो तो बुला लेता हूँ।

सरला: शिवा को पूछ लो। वो अपनी सास को किसी और से चुदवाने को तय्यार है क्या?

राजीव: वो मान जाएगा। अनवर को भी तुमको चोदने में सविता को चोदने का मज़ा आएगा।

सरला: आप अभी भी सविता भाभी को भूल नहीं पाए हो ना?

राजीव: अरे उसे कैसे भूल सकता हूँ। उसके साथ कई यादें जो जुड़ी हैं । बहुत जल्दी चली गयी वो।

सरला: चलो उदास मत होईए । मुझे ही सविता समझ लीजिए।

राजीव उसको बाहों में लेकर चूमने लगा।

मुन्नी हैरान हो गयी कि अंकल उन सबको एक बाहर वाले से भी चुदवाने का प्लान बना रहे हैं। उसका दिमाग़ घूमने लगा था और चुत में चिटियाँ रेंगने लगीं थीं । वो अब अपने कमरे में चली गयी।

सरला भी उठकर मालिनी के पास आयी तो वो जाग गयी और बोली: हो गया मम्मी?

सरला: हाँ हो गया।

मालिनी: पापा ने पीछे भी किया?

सरला हँसकर: हाँ जैसे कहा था तीनों छेदों का मज़ा लिए। वैसे भी उनसे चुदवाए बहुत दिन हो गए थे । दोनों ने ख़ूब मज़ा किया।

फिर सरला ने मालिनी को राजीव का अनवर से चुदाई का प्लान बताया।

मालिनी: मम्मी आप परेशान मत होईए पापा जो भी करेंगे सबकी अच्छाई ही होगी उसमें। वो हम सबको बहुत प्यार करते हैं । इसलिए सब ठीक होगा। वैसे भी अच्छा ही होगा ना कि शिवा बेचारा तीन तीन जवानियों को कहाँ तक सम्भालेगा। अनवर से उसे मदद हो जाएगी। वो अपनी चूत सहलाते हुए बोली।

सरला सोच रही थी कि पारिवारिक चुदाई में बाहर वाले को शामिल करना क्या अक़्लमंदी होगी? देखते हैं शाम को शिवा इस मामले में क्या कहता है?

यही सब सोचते हुए उसकी आँख लग गयी।

 
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