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बहू नगीना और ससुर कमीना

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लिली बोले जा रही थी:——-/——-//—-

मम्मी ने अपना टॉप उतारा और तुषार ने अपना मुँह मम्मी की ब्रा में घुसाने की कोशिश की और वहाँ चूमने लगा। फिर मम्मी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और उसे बदन से अलग किया और तुषार उनको दबाकर मस्त होकर बोला: उफ़्फ़्फ मम्मी आपके बूब्ज़ कितने मस्त और बड़े हैं । मेरी मम्मी के भी ऐसे ही मस्त बड़े बड़े हैं।

मम्मी: तुमने अपनी मम्मी के कब देखे?

तुषार: कई बार छिप कर उनको चेंज करते हुए देखा है। अब आप पिलाइए ना अपना दूध।

मम्मी: अरे निकाल तो दिया है बाहर पी लो।

तुषार बच्चे की तरह ज़िद करके; नहीं मम्मी आप अपने हाथ से पिलाओ।

अब मम्मी ने अपनी एक चूचि अपने एक हाथ में ली और उसके मुँह में दे दी। वो मस्ती से उसे चूसने लगा। उसने दूसरे हाथ से मम्मी की चूचि दबानी भी शुरू की। थोड़ी देर चूसने के बाद वो बोला: मम्मी अब दूसरा दुद्धु दो।

मम्मी ने अब अपनी दूसरी चूची उसके मुँह में दे दी और वो अब उसे चूसने लगा। मम्मी के हाथ उसकी टी शर्ट के अंदर जाकर उसके निपल्ज़ को सहलाने लगे। फिर उनका हाथ उसके पैंट के ऊपर से उसकी जाँघों पर घूमने लगा। फिर मम्मी ने पैंट के ऊपर से उसके लंड को सहलाया और महसूस किया। वो सोची उफ़्फ़्फ़्फ इतनी सी उम्र में सामान तो काफ़ी बड़ा लग रहा है। वो सोची कि सबका सामान मेरे स्वर्गीय पति से बड़ा ही है। मैं कितना मज़ा मिस कर रही थी। अचानक वो उसकी निपल में दाँत गड़ाने लगा। मम्मी आऽऽह करके बोली: उफ़्फ़्फ बेटा क्या कर रहे हो? मम्मी को दुःख रहा है ना?

तुषार उठकर: तो मम्मी आप क्या मुझे रोज़ की तरह सज़ा दोगी?

मम्मी को उसकी बात समझ नहीं आयी। वो बोली: मेरा सामने खड़ा हो जा बेटा मैं तेरी पैंट खोलती हूँ।

वो मम्मी के सामने खड़ा हुआ और अपनी टी शर्ट खोल दिया। मम्मी ने उसके पैंट की बेल्ट खोली और फिर चेन नीचे की। पैंट के सामने का हिस्सा बुरी तरह से फूला हुआ था । मम्मी ने मुश्किल से टाइट पैंट नीचे की और अब सामने वो सिर्फ़ एक फ़्रेंचि में खड़ा था और उसका भी बुरी तरह से खड़ा था और आधा लौड़ा बाहर निकल रहा था। मम्मी ने चड्डी नीचे की और उसका लौड़ा झटके से बाहर आया और ऊपर नीचे होने लगा। मम्मी ने आजतक इतना गोरा और गुलाबी लौड़ा नहीं देखा था। उम्र के लिहाज़ से काफ़ी बड़ा तक़रीबन ७ इंच का और काफ़ी मोटा था। नीचे बालों का एक छोटा सा झुंड सा था और नीचे मस्त बड़े बॉल्ज़ लटक रहे थे।

मम्मी उसे सहलायी और बोली: बाऽऽऽऽऽप रे कितना गोरा और गुलाबी है तुम्हारा? मैंने आजतक इतना सुंदर हथियार नहीं देखा। वो आगे बढ़कर उसके गुलाबी सुपाडे को चूम ली।

तुषार: मम्मी आप भी खड़ी हो ना मुझे आपको भी नंगी करना है।

मम्मी खड़ी हुईं और उसने उनकी स्कर्ट निकाल दी। मम्मी की सेक्सी पैंटी देखकर वो बोला: वाह मम्मी आप बहुत सेक्सी पैंटी पहनी हो। वो सोफ़े में बैठ करके मम्मी की पैंटी भी निकाला और मम्मी की चिकनी बुर देखकर वहाँ हाथ सहलाके बोला: उफ़्फ़्फ मम्मी आपकी बुर कितनी चिकनी और सुंदर है। फिर वो उनको घुमाकर उनकी मस्त गाँड़ सहलाया और दबाने लगा। फिर अपने होंठ वहाँ रखकर गाँड़ की गोलाइयों को चूमने लगा। फिर अचानक चूमते हुए उसने मम्मी की नर्म गाँड़ को दाँत से काट दिया। मम्मी आऽऽऽऽऽह कर उठी।

वो फिर से बोला: मम्मी मुझे सज़ा दोगी क्या?

मम्मी कुछ कुछ समझी और बोली: हाँ अब तो देनी ही पड़ेगी।

वो: ठीक है मम्मी उस ड्रॉर में स्केल रखा है। वो यह कह कर अपने पेट के बल लेट गया। मम्मी ने ड्रॉर खोला तो उसमें एक प्लास्टिक का स्केल रखा था।

तुषार के गोरे मस्क्युलर गोल चूतड़ उसके सामने थे । वो हल्के से एक स्केल उसके चूतड़ पर मारी। वो चिल्लाया: आऽऽऽह मम्मी मैं अच्छा बेटा हूँ । मत मारो।

मम्मी को पता नहीं क्या हुआ उन्होंने अबके ज़ोर से स्केल उसकी चूतड़ पर मारा और वहाँ लाल निशान बन गया। वो चिल्लाया: आऽऽऽऽऽह मम्मी अब मैं नहीं काटूँगा प्लीज़ माफ़ कर दो।

मम्मी भी अब मस्ती में आ चुकी थी, उन्होंने दो तीन और हाथ चलाए और बोली: चलो अब उठो, तुम्हारी सज़ा पूरी हुई। उसके चूतड़ लाल हो चुके थे मम्मी की मार से। वो जब पलटा तो मम्मी की आँख फट सी गयी। उसका हथियार पूरा तना हुआ था और उत्तेजना से मानो सिर हिला रहा था मम्मी से रहा नहीं गया और वो उसे चूसने लगी। अब वो भी आऽऽऽह मम्मी क्या चूस रही हो उफ़्फ़्फ़्फ वगेरह बड़बड़ा रहा था। फिर वो बोला: आऽऽह मम्मी मेरा होने वाला है। पर मम्मी नहीं रुकी और फिर मम्मी के अनुसार उन्होंने अपने जीवन का सबसे मस्त और स्वाद वीर्य का पान किया। अच्छे तरह से चूसकर मम्मी ने उसके लौड़े को साफ़ किया और हैरानी से देखती रही कि वो अब भी वैसे का वैसे ही खड़ा था।

अब वो मम्मी को अपने ऊपर खिंचा और उनके होंठ और चूचियाँ चूसने लगा। उसके हाथ उनके बड़े बड़े चूतडों पर भी घूम रहे थे। मज़े के मारे मम्मी की आँखें बंद हो रहीं थीं और बुर से नदियाँ बही जा रहीं थीं।

तुषार: मम्मी मेरे लौड़े को अंदर लेकर मुझे चोदो। जैसे पापा को आप चोदती हो।

मम्मी उसके लौड़े को अपनी बुर में डाली और नीचे दबाकर पूरा निगल ली और ऊपर नीचे होकर उसके पूरे लौंडे को महसूस करके बोली: हाय्य्य्य्य मस्त है रे बेटा तेरा। उइइइइइइइइ । क्या तुमने अपने पापा मम्मी की भी चुदाई देखी है।

वो: हाऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽंनन कई बाऽऽऽऽऽर देखी है उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़। मम्मी क्या मस्त लग रहा है। और ज़ोर से चोओओओओओओओओदो । अब वो नीचे से अपनी क़मर भी उछालने लगा और मम्मी की बच्चेदानी तक अपना लौड़ा पेलने लगा। अब मम्मी भी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कहकर उछल रहीं थीं। फिर वह हाँफकर बोलीं: आऽऽह बेटा अब तू ऊपर आकर अपनी माँ को चोद ना।

वो मम्मी को लपेटे हुए पलटा और ऊपर आकर मम्मी की ज़बरदस्त चुदाई करने लगा। अब वी क़रीब २५ मिनट मम्मी को चोदा और मम्मी तीन बार झड़ीं। जब वो भी झड़ा तो मम्मी ने चैन की साँस ली और कहा: उफ़्फ़्फ इतनी सी उम्र में ही पूरे साँड़ हो गए हुए तुम। आऽऽह क्या चोदा है। जानते हो आजतक मेरी ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई है।

वो: मम्मी मुझे भी बहुत मज़ा आया।

मम्मी: आजतक कितनी अंटियाँ चोद चुके हो?

वो: सिर्फ़ एक और वो मेरी मम्मी की दोस्त है। मैं उनको भी मम्मी बोलकर ही चोदता हूँ। पर उनको मिलना बहुत मुश्किल है क्योंकि वो अक्सर विदेश में ही रहती हैं। हाँ जब आतीं हैं तो एक दो बार ज़रूर से चुदवाती हैं। उन्होंने ही मुझे चोदना सिखाया है। वो मेरी मम्मी को भी हिंट दे चुकी हैं कि मैं उनका बेटा और आशिक़ दोनों हूँ। पर मम्मी उनकी बात को गम्भीरता से नहीं लेतीं। बस हँस देती हैं।

मम्मी: ओह चलो शायद कभी वो मान जाएँ और तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाए।

तुषार: देखें कब मेरी इच्छा पूरी होती है। यह कहकर वो मम्मी की गाँड़ पर हाथ फेरकर बोला: आप लोगों की इस उम्र में गाँड़ मस्त बड़ी हो जाती हैं। मम्मी और आंटी की भी ऐसी ही हैं। फिर वो उनकी गाँड़ के छेद को सहलाया और फिर एक ऊँगली डाला और बोला: मम्मी गाँड़ मरवाती हैं क्या?

मम्मी: अरे बेटा लोग पैसा देंगे तो गाँड़ नहीं मारेंगे क्या? सब लोग तीनों छेदों का मज़ा लेते हैं पैसा देते हैं तो।

तुषार: तो मम्मी मैं भी मार लूँ क्या? वो अपनी ऊँगली अंदर बाहर करते हुए बोला।

मम्मी: मार ले बेटा बस कुछ तेल या क्रीम लगा लेना।

तुषार उठा और जाकर बाथरूम से क्रीम लेकर आया और मम्मी को देकर बोला: लो आप लगा लो क्रीम।

वो अब बिस्तर पर लेट गया था। उसका लौड़ा आधा ही खड़ा था। मम्मी ने पहले उसे चूसना शुरू किया और क़रीब दस मिनट की चुसाई के बाद वो पूरा अकड़ गया था। तब उन्होंने बड़े प्यार से उस पर क्रीम लगाई। अब

तुषार उठा और मम्मी को घोड़ी बनने को कहा। वो अपनी गाँड़ उठाकर घोड़ी बनी और तुषार ने उनके चूतडों पर चुंबनों की झड़ी लगा दी। मम्मी भी मस्त होकर उंन्न्न्न्न्न कर उठी। अब वो चूतडों को फैलाया और गाँड़ के छेद को जीभ से चाटने लगा। मम्मी उइइइइइइइ कर उठी। फिर वो क्रीम लेकर अपनी दो उँगलियों में मलकर उनकी छेद में घूसेड़ा और मज़े से अंदर बाहर करने लगा। अब वो बोला: आऽऽऽऽह मम्मी क्या मस्त टाइट गाँड़ है आपकी, बहुत मज़ा आएगा मारने में।

अब वह अपने सुपाड़े को छेद में लगाया और अंदर की ओर दबाकर मम्मी को हाऽऽऽऽय कहने पर मजबूर कर दिया। अब वो एक दो बार आधा लंड अंदर बाहर किया और फिर पूरी ताक़त से अपना लौड़ा अंदर पेल दिया। मम्मी : उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेएएएएएएएटा धीरे से आऽऽऽहहह।

अब तुषार ने अपनी चुदाई चालू की। वो मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियाँ जो नीचे को लटक रहीं थीं दबाए जा रहा था और ठप्प ठप्प की आवाज़ के साथ गाँड़ मारे भी जा रहा था। मम्मी उईओईईईई आऽऽऽऽह चिल्ला रही थी।

तभी वो अपनी दो ऊँगली नीचे लेज़ाकर उनकी चूत में डाला और अंदर बाहर करने लगा। मम्मी का मजा दुगुना हो चला था। वो अब उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरी गाँड़ चिल्ला रही थी। तुषार ने किसी अनुभवी खिलाड़ी के माफ़िक़ अब मम्मी की क्लिट को सहलाना शुरू किया और अब मम्मी के लिए रूकना असम्भव हो गया और मैं गयीइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽ कहके झड़ने लगी।

उधर तुषार भी मज़े से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर बोला: आऽऽऽह मम्मी मैं भी झड़ने वाला हूँ।

मम्मी: आऽऽऽऽऽऽऽह बेटा पानी मेरे मुँह में दे दे ना प्लीज़ ।

अब उसने गाँड़ से लौड़ा बाहर निकाला और हाथ से हिलाकर मम्मी के मुँह में अपना पानी छोड़ने लगा। मम्मी भी वासना के ज्वार में मस्ती से गाढ़ा सफ़ेद रस पीती चली गयी।

अब वो भी मम्मी के बग़ल में निढाल होकर गिर गया।

मम्मी उसकी छाती सहलाकर बोली: बेटा आज दो बात हुई। एक तो मैंने इतना प्यारा लंड देखा और इतना स्वाद रस पिया।

तुषार मम्मी की चूचियाँ दबाकर: मम्मी मुझे भी आज तक इतना मज़ा नहीं आया चुदाई में जितना आपने आज दिया। अब फिर कब मिलेंगी?

मम्मी: बेटा मैं तो तुम्हारी ग़ुलाम हूँ तुमने पैसे जो दिए हैं। जब बुलाओगे हाज़िर हो जाऊँगी। ठीक है ना मेरे प्यारे बेटे? यह कहते हुए वो उसकी छाती को चूमने लगी।

दोनों लिपटकर सो गए और एक घंटे बाद शेंपेन का दौर चला और चुदाई का भी।

 


उस दिन जब मम्मी वापस घर आयीं तो ठीक से चल भी नहीं पा रहीं थीं। मेरे पूछने पर उन्होंने मुझे ये सब बताया जो कि मैंने अभी आपको बताया।

राजीव: वाह बड़ी सेक्सी है तुम्हारी मम्मी। तो क्या अब भी वो उस लड़के से चुदवा रहीं हैं ।

लिली: नहीं अब नहीं। वो मम्मी को दो साल तक चोदा। फिर एक दिन उसका फ़ोन आया कि माल में मिलो। जब वो वहाँ पहुँचीं तो देखा कि वो एक अधेड़ सुंदर और भरे हुई बदन वाली औरत के साथ आ रहा था। उसने उस औरत को अपने से चिपका सा रखा था। मम्मी को जलन सी हुई। पास आने पर तुषार ने मम्मी से कहा: आंटी मेरी मम्मी से मिलो। मम्मी ये मेरी वही आंटी है जिनको मैं मम्मी बोलकर करता था।

उसकी मम्मी ने हाथ बढ़ाकर मेरी मम्मी को पकड़ा और कहा: आपका बहुत धन्यवाद है जो इतने दिन इसका ख़याल रखा। अब हम दोनों समझ गए हैं कि हम एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। इसलिए अब मैं इसका ख़याल रखूँगी।

तुषार: आंटी , मम्मी आजकल मेरे से चुदवा रहीं हैं । इसलिए अब आपसे मिलना नहीं होगा। मैंने आपके अकाउंट में दस लाख डाल दिए हैं । भगवान आपको ख़ुश रखे।

मम्मी की आँख भर आयीं क्योंकि वो समझ गयी कि अब तुषार से मिलना नहीं होगा। वो तुषार और उसकी मम्मी से गले लगीं और वहाँ से वापस चलीं आयीं।

सरला: ओह तो अब कोई और तो होगा ना जो उनके साथ लगा होगा?

लिली: हाँ आंटी समय बीतता गया और मम्मी से कई लोग जुड़े और कई अलग हुए। इस बीच में मुझे भी समझ आ गया कि मेरे लिए भी यही कैरीअर बेस्ट होगा सो मैं भी मम्मी से बोली कि मुझे अब पढ़ना नहीं है और मैं भी यही करूँगी। कुछ दिन घर में टेन्शन रहा पर मम्मी मान गयीं। अब मेरे लिए प्लान बनने लगा। मम्मी बोली: बेटी तू तो अभी कुँवारी है, तुझे तो पहली चुदाई के ही मस्त दाम मिलने चाहिए। मैं कुछ सोचती हूँ।

फिर मम्मी ने कुछ लोगों से बात की। वो वही थे जो उनके साथ जुड़े हुए थे। उन लोगों में एक दलाल भी था। उसके द्वारा मम्मी को कई बार कई ख़ास लोग चोद चुके थे। वो बोलीं कि मैं इससे बात करती हूँ ताकि मुझे अच्छे दाम दिलवा सके।

मम्मी ने मेरे सामने ही उसे फ़ोन किया और फ़ोन को स्पीकर मोड में रखकर बोलीं: हाँ मैं भी बोल रही हूँ। अरे वो मेरी बेटी है ना लिली वो अब १९ साल की हो गयी है । वो भी इसी लाइन में आना चाहती है। वो अभी कुँवारी है। कोई है जो आराम से उसकी सील खोले और अच्छे पैसे भी दे देगे ?

उधर से दलाल: हाँ हाँ आज ही डिमांड आयी है। एक स्वामी जी हैं वो बताए हैं कि उनको एक मस्त जवान कुँवारी लड़की चाहिए एक हफ़्ते के लिए। वो एक लाख देने को तय्यार हैं। वो कह रहे थे कि एक पूजा करवानी है किसी मंत्री के द्वारा और फिर वही मंत्री और स्वामी उसकी बारी बारी से चुदाई करेंगे। एक हफ़्ते में लड़की घर वापस आ सकती है।

मम्मी ने मेरी तरफ़ प्रश्न सूचक निगाह से देखा तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मेरी बुर तो मम्मी की चुदाई देख देख कर प्यासी थी मुझे वहाँ खुजली सी होने लगी।

मम्मी: पर एक हफ़्ते के लिए वो भी दो दो आदमी। पैसे बढ़ाओ ना।

दलाल: अच्छा मैं उनको डेढ़ लाख के लिए राजी कर लूँगा। पर जाना आज शाम को ही होगा। और बिटिया को पार्लर वगेरह ले जाना। मस्त चमकनी चाहिए । आख़िर बड़े लोग हैं।

मम्मी: ठीक है शाम को ६ बजे के बाद ले जाना और हाँ पैसा लेते आना। यह कहकर मम्मी ने फ़ोन काट दिया।

मम्मी: बेटी अब जाकर अपनी झाँटे वगेरह साफ़ कर ले और पार्लर जाकर आ जाओ। और कुछ अच्छे सेक्सी कपड़े भी लेने होंगे। मैं साथ चलूँगी।

फिर मैंने अपने झाँटों और बग़ल के बाल साफ़ किए और बाद में मम्मी के साथ पार्लर गयी। वहाँ हाथ पैरों और मुँह के बाल भी साफ़ करवाई । बाद में मम्मी के साथ शॉपिंग की और छोटे छोटे गाउन और सेक्सी अंडर गर्मेंट्स ख़रीदे। सेल्ज़ गर्ल हैरानी से देख रही थी कि कैसी माँ है जो अपनी बेटी को ऐसे सेक्सी पैंटी और ब्रा दिलवा रही है? ट्राइयल रूम में माँ ने चेक किया कि मेरे आधे ३४ साइज़ के दूध ब्रा से बाहर थे या नहीं और पैंटी से मेरी बुर की फाँकें छोड़कर सब दिखता है या नहीं?

ख़ैर शाम को मैं नहा धो कर तय्यार हुई और एक सेक्सी स्लीव्लेस टॉप पहनी जिसमें से मेरी चूचियों की घाटियाँ साफ़ दिख रही थी और नीचे एक स्कर्ट पहना। मम्मी: मस्त माल दिख रही है। उस स्वामी और मंत्री का तो तुझे देखकर ही झड़ जाएगा।

इस बात पर हम दोनों हँसने लगे। मेरी बुर अभी से पनिया रही थी। तभी वो दलाल आया और मम्मी को पैसे दिया और मुझसे बोला: चलें?

मम्मी: शंकर ध्यान से ले जाना मेरी बिटिया को। आज उसका पहली बार है याद है ना?

शंकर: अरे क्यों घबरा रही हो? आज तक आपको कभी भी ग़लत आदमी से मिलवाया है क्या? फिर मुझसे बोला: चलो लिली डरो नहीं सब ठीक होगा।

शंकर एक तगड़ा आदमी था । थोड़ा गुंडा सा दिखता था और उम्र उसकी क़रीब ३५ के आसपास होगी। उसने टाइट जींस पहनी थी और उसके सामने का हिस्सा काफ़ी उठा हुआ था। शायद उसका हथियार काफ़ी बड़ा था- मैं सोचकर मस्त होने लगी। ख़ैर वो मेरे साथ टैक्सी में बैठा और मेरे जाँघ पर हाथ फेरकर बोला: लिली डरने की कोई बात नहीं है। मैं पूरे हफ़्ते आश्रम में ही रहूँगा और तुमको कोई तकलीफ़ हुई तो मुझे फ़ोन कर लेना। उसने अपना नम्बर देते हुए मेरी जाँघों के अंदर हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से मेरी बुर को मसल दिया।

मैं धीरे से उफफ़्फ़्फ़्फ करके ड्राइवर की ओर इशारा की।

वो हँसकर बोला: अरे ये तो अपना यार है। कभी मुँह नहीं खोलता। तुम ज़रा स्कर्ट ऊपर करो ना मैं ऊँगली डालकर देखता हूँ कि कुँवारी बुर कसी हुई है या नहीं? बहुत दिन हो ग़ये कोई कुँवारी बुर को छुए।

मैं शर्मा कर अपनी जाँघों को चौड़ा करी और उसकी उँगलियाँ पैंटी को साइड करके बुर के अंदर दाख़िल होने की कोशिश की और मेरी आऽऽऽऽह निकल गयी।

वो बोला: उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त कुँवारी बुर है। साला मंत्री और स्वामी को तो मज़ा ही आ जाएगा। फिर वो ऊँगली बाहर करके चाटा और बोला: म्म्म्म्म मस्त स्वाद है।

मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। फिर वो मेरी चूचि तो टॉप के ऊपर से दबाया और बोला: उफ़्फ़्फ क्या सख़्त अनार हैं। ये लो मेरा भी महसूस करो। ये कहकर उसने मेरा हाथ अपने पैंट के ऊपर से अपने लौड़े पर रख दिया और मेरे अंदर मानो करेंट दौड़ गया। उफ़्फ़्फ़्फ कितना मोटा और लम्बा लौड़ा था उसका। फिर वो बोला: लिली बाद में मुझसे भी चुदवा लेना प्लीज़। पर मैं तुमको पैसे नहीं दे पाउँगा ।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और हाथ वहाँ से हटा ली।

वह बोला: लिली मैंने तुम्हारी मम्मी को भी कई बार चोदा है वो भी बिना पैसे के। उनको मेरा लौड़ा बहुत पसंद है। तुम भी एक बार चुदवा लोगी तो मेरी दीवानी हो जाओगी।

तभी आश्रम आ गया। वह आश्रम शहर के बाहर बड़ी सी जगह पर बना हुआ था।

आश्रम के अंदर जाते ही मुझे एक औरत के हवाले कर शंकर वहाँ से चला गया। उस औरत का नाम शांति था। वो बोली: आओ बेटी तुमको अपना कमरा दिखा देती हूँ। पूरे आश्रम की सजावट देखते ही बनती थी। बहुत सुंदर ए सी रूम में मुझे सेटल होने को कह कर शांति चली गयी। मैं फ़्रेश हो कर बिस्तर पर लेटी और नींद में समा गयी। अचानक कोई मुझे हिलाया तो सामने शांति खड़ी थी वो बोली: चलो अब तय्यार हो जाओ अभी पूजा में भाग लेना होगा। उसने मुझे एक साड़ी दी और कहा कि बस यही पहनोगी और अंदर से कुछ नहीं।

मैं: अंडर गारमेंट और ब्लाउस?

शांति: नहीं नहीं पूजा में बस ये पवित्र सफ़ेद साड़ी हो पहनोगी।

मैं थोड़ा सा परेशान हुई फिर सोचा कि क्या फ़र्क़ पड़ता है । चुदवाने के लिए तो ये साड़ी भी उतारनी ही पड़ेगी। मैं बाथरूम में गयी और फ़्रेश होकर सिर्फ़ साड़ी में तय्यार होकर अपने आप को शीशे में देखा। उफ़्फ़्फ क्या लग रही थी। बड़े बड़े अनार से बूब्ज़ बिलकुल तने हुए गोल गोल से साफ़ दिख रहे थे। उत्तेजित निपल्ज़ तने हुए साड़ी से साफ़ नज़र आ रहे थे। शीशे में उसने अपने पिछवाड़े को देखा और ख़ुद ही शर्मा गयी ।उफ़्फ़्फ क्या मस्त लग रहे थे उसके गोल गोल चूतड़ बिना पेटिकोट और पैंटी के। शांति उसे देखकर मुस्कुराई और बोली: वाह बेटी बहुत सुंदर दिखाई दे रही हो। स्वामी जी और मंत्री जी तो पागल ही हो जाएँगे।

शांति उसे बाहर आने का इशारा की और मैं उसके पीछे चल पड़ी। अब हम एक हाल में पहुँचे तो वहाँ एक आसन लगा था और स्वामीजी बैठे थे। उनके कई भक्त भी बैठे थे। जैसे ही मैं पहुँचे तो सभी आदमियों की आँखे मेरे बदन से चिपक गयीं । और उनमें वासना साफ़ दिखाई दे रही थी। मेरे निपल्ज़ और कड़े हो गए। साथ ही वहाँ मौजूद औरतों की आँखों में जलन भी स्पष्ट दिख रही थीं। अब स्वामी जी जो ऊपर से पूरे नंगे थे और उनकी छाती बालों से भरी थीं, उनकी उम्र यही कोई ४५ के आसपास थी , मुझे देखे और मुस्कुराए और बोले: आओ बेटी आओ। यहाँ बैठो। वो एक आसन की ओर इशारा करके बोले। सामने एक हवन कुंड में आग जल रही थी।

अब स्वामी जी बोले: बेटी तुम्हारा नाम लिली है ना?

मैं: जी स्वामीजी।

वो मेरे निपल्ज़ को घूरते हुए धीरे से पूछे: बेटी कुँवारी हो ना? ये पूजा किसी कुँवारी लड़की के हाथ से ही सम्पन्न हो सकती है।

मैं शर्मा कर हाँ में सिर हिला दिया। वो अपनी धोती में शायद लंड ठीक करके बोले: शांति जाओ मंत्री जी को बुला लाओ।

स्वामी जी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया। तभी मंत्री जी आ गए वो एक पाजामा पहने थे और ऊपर से वो एक चादर ही ले रखे थे। उनकी उम्र क़रीब ५५ साल की थी। वो भी काफ़ी तगड़े मर्द लग रहे थे। उनकी निगाह मुझ पर पड़ी और मेरी चूचियों से उनकी आँख नहीं उठ पा रही थी। स्वामी जी बोले: आइए मंत्री जी यहाँ बैठिए।

मंत्री भी हवन कुंड के सामने बैठ गया। उसकी नज़र बार बार मेरे निपल पर जा रही थी। स्वामी जी ने क़रीब एक घंटा पूजा की। और मेरे हाथों से हवन में सामग्री भी डलवाई।मेरे स्तन कई बार नंगे हो जाते सब हवन सामग्री कुंड में डालती। मंत्री और स्वामी दोनों शायद मज़े ले रहे थे। बाद में उन्होंने मेरे माथे में टीका लगाया और सबको कहा: भक्तों पूजा समाप्त हुई। आप लोग प्रसाद लो और अपने अपने घर जाओ। सब चले गए और अब मैं मंत्री और स्वामी वहाँ रह गए।

स्वामी: मंत्री जी पूजा इस कुँवारी लड़की के हाथों सम्पन्न हुई है। अब आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

मंत्री मेरी चूचियाँ घूरते हुए: स्वामी जी आपके होते हमारा कोई क्या बिगाड़ लेगा। पर ये बताइए कि इस कुँवारी कन्या का प्रसाद कब मिलेगा?

स्वामी: अभी ले जाओ और खा लो।

मंत्री: पर स्वामी जी आप मेरा जुठा प्रसाद खाएँगे? मुझे आपका जुठा प्रसाद खाना चाहिए।

स्वामी: भक्त जैसा तुम चाहो। वैसे पहले तुम ही चख लो इस प्रसाद को।

मंत्री अपने होंठ पर जीभ फेरकर : ठीक है स्वामी जी। मुझे भी कई बरस हो गए किसी कुँवारी की सील खोले।

स्वामी: ठीक है आप अपनी इच्छा पूरी कर लो। जाओ बेटी इनके साथ और आज अपनी कुँवारी जवानी इन पर लुटा दो।

मेरा बस चलता तो मैं उस बूढ़े मंत्री के बजाय स्वामी से ही चुदवाती। पर मेरा तो सौदा हो चुका था और वो जैसे चाहते वैसा कर सकते थे मेरे साथ।

राजीव: तो तुम्हारी सील मंत्री ने खोली? ——

 
राजीव ने पूछा: तो तुम्हारी सील मंत्री ने खोली?

लिली आगे बताने लगी::——::::////::::—-

हॉ खोली भी और नहीं भी खोली।

सरला: इसका क्या मतलब?

लिली: हाँ बताती हूँ ना। वो क्या हुआ कि पूजा के बाद मुझे एक कमरे में ला जाकर बिठा दिया गया। वहाँ बिस्तर पर फूल भी थे मानो कि मेरी सुहाग रात हो। मैं अभी भी सिर्फ़ एक सफ़ेद साड़ी में थी। शांति मुझे बोली: जाओ नहा लो और ये गाउन पहन लेना। बस सिर्फ़ यही पहनना। वो शरारत से मुस्कुरा कर बोली: मैं तुम्हारा खाना यहीं ले आती हूँ।

मैं नहाकर जब वो कपड़े देखी तो वो भी वैसे ही सेक्सी कपड़े थे जैसे मैं ख़ुद भी लायी थी। बस फ़र्क़ इतना था कि इस पारदर्शी गाउन के नीचे कुछ भी पहनना नहीं था। मैंने शीशे में देखा कि मेरी चूचियाँ और निपल्ज़ साफ़ दिखाई दे रहे थे। और नीचे की भी मस्त झलक मिल रही थी।

मैं बिस्तर पर बैठ कर टी वी देखने लगी।शांति खाना लायी और मैंने चुपचाप खा लिया। उसके जाने के बाद मैं फिर से टी वी देखने लगी। तभी दरवाज़ा खुला और मंत्री अंदर आया। उसने पाजामा और कुर्ता पहना था और बहुत ही तगड़ा दिख रहा था। वो अंदर आया और दरवाज़ा बंद किया। मेरे पास आकर बैठा और बोला: उफ़्फ़्फ कितनी प्यारी लग रही हो तुम? कितने साल की हो? वो मेरी नग्न बाहों को सहलाकर बोला।

मैं: जी १९ की होने वाली हूँ।

वो: सच में कुँवारी हो? आज कल लड़कियाँ तो १६ साल से ही मस्ती लेने लगतीं हैं ना, इसीलिए पूछ रहा हूँ।

मैं: जी मैं ऐसी नहीं हूँ मैं अभी भी कुँवारी हूँ। वैसे भी पूजा के लिए तो कुँवारी लड़की ही चाहिए थी ना।

वो: हाँ सच कहा तुमने। तुम जानती हो मेरी एक बेटी है २० साल की । कोलेज में पढ़ती है। अब क्या बताऊँ मुझे उसके लक्षण अच्छे नहीं लगते।

मैं: क्यों उसने ऐसा क्या कर दिया?

वो: अरे वो अक्सर देर से घर आती है और हर बार कोई नया बहाना बनाती है। अब देखो तुमसे एक साल बड़ी है पर ३/४ साल बड़ी लगती है। अब क्या बताऊँ?

मैं: बता दीजिए ना मन हल्का हो जाएगा। पता नहीं क्यों मुझे उससे सहानुभूति सी हो रही थी।

वो: वो वो अब कहते हुए भी शर्म आ रही है। इतने लड़कों के साथ घूमती है। वो उसे छोड़ते होंगे क्या? उसकी फ़िगर से भी पता चलता है उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या कहूँ? २० साल में उसके दूध ३६ के हो गए हैं और गाँड़ तो ऐसी फैली है कि साफ़ लगता है जम के चुदवा रही है। मैं जब उसे टोकता हूँ लड़ने लगती है। इकलौती बेटी है इसका फ़ायदा उठा रही है। माँ की भी नहीं सुनती।

मैं: ओह ऐसा क्या?

वो: अब तुमको देख कर ही कोई कह सकता है कि तुम एक लड़की हो पर वो तो पूरी औरत दिखती है, उफ़्फ़्फ़्फ उसकी मोटी चूचियाँ और गाँड़ देखकर तो मैं भी ————-/-

मैं: आप भी क्या अंकल जी?

वो: चलो छोड़ो । आओ हम प्यार करते है। आओ मेरी गोद में बैठो। वो मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिए और मेरे होंठ चूमने लगे। मैं भी उनका साथ देने की कोशिश करने लगी। फिर वो मेरे कंधे चूमने लगे और गले में भी जीभ से चाटने लगे। मैं भी गरम होने लगी। मैंने अपनी गाँड़ हिलाई और उनके लंड को महसूस करने की कोशिश की पर कोई ख़ास सफलता नहीं मिली। अब वो मेरी अनार सी चूचियों को दबाकर मस्त होकर बोले: मैं तुमको बेटी बोलकर प्यार करूँ? तुम भी मुझे पापा बोलना। प्लीज़।

मैं हैरान हुई पर फिर मुझे याद आया कि मुझे तो पैसा भी कमाना है सो बोली: ठीक है पर आपको मुझे इसके लिए अलग से पैसे देने होंगे।

वो ख़ुश होकर: ज़रूर मेरी रानी बेटी क्यों नहीं?

मैं: ठीक है पापा आप मुझे प्यार करो।

वो अब ज़ोर ज़ोर से मेरी चूचियाँ दबाने लगे और मैं हाऽऽऽऽय्यय पापा चिल्ला उठी। अब वो अपना कुर्ता उतारे तो उनकी चौड़ी छाती देखकर मैं मस्त हो गयी। मैं उनकी छाती को चूमी और बोली: आऽऽह पापा आपका बदन कितना तगड़ा है।

वो अब मेरे गाउन को उठाने लगे और एक झटके में मेरी मदद से उन्होंने उसे उतार दिया और मैं मादरज़ाद उनके सामने नंगी पड़ी थी। अब वो मुझे लिटाए और मेरे बदन को चूमने लगे। वो: उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त नरम बदन है मेरी बिटिया का। म्म्म्म्म्म्म। वो जगह जगह चूमते हुए बोले। अब वो मेरी चूचियाँ भी दबाकर चूस रहे थे। वो: देखो ऐसी होती है कुँवारी लड़की की चूचियाँ। मेरी बेटी की अभी से पपीता बन गयीं है। पता नहीं कितना और किस किस से चुदवा रही है साली।

मैं: आऽऽऽह पापा आपने कभी बेटी की चूचियाँ देखीं हैं?

वो: मम्मम हाँ कई बार उसे कपड़े बदलते देखा है।वो दरवाज़ा बंद नहीं करती। शायद मुझे दिखाना चाहती है अपना नंगा बदन। उफ़्फ़्फ मोटी मोटी चूचियाँ हैं और उन पर लाल दाग़ रहते हैं जैसे किसी ने काटा हो उनको। अब वो मुझे पलटने को बोले और मैं पेट के बल हो गयी। वो मेरे मस्त चूतडों को दबाए और बोले: उफ़्फ़्फ़्फ क्या गोल गोल गाँड़ है। ऐसी गाँड़ होनी चाहिए लड़की की। मेरी बेटी की तो उफ़्फ़्फ क्या कहूँ किसी चुदक्कड औरत की तरह गाँड़ हो गयी है।

अब वो मेरी गाँड़ को दबाकर चूमने लगे थे।

मैं: एक बात पूछूँ पापा? आप बुर तो नहीं मानेंगे?

वो : हाँ हाँ पूछो बेटी।

मैं: पापा क्या अपनी सगी बेटी को चोदना चाहते हैं?

वो एक मिनट के लिए चुप हुए और फिर बोले: अब क्या कहूँ? हाँ सच में मैं उसकी कुँवारी जवानी को लेना चाहता था पर अब कोई फ़ायदा नहीं। अब वो मेरे किसी काम की नहीं?

मैं: वो क्यों पापा? अगर अब तक नहीं कर पाए तो अब कोशिश कर लीजिए।

वो : नहीं बेटी अब नहीं हो सकता। जब मैं अपना पाजामा उतारूँगा ना तो तुमको जवाब मिल जाएगा।

मैं हैरान सी उनको देखी। पर कुछ नहीं बोली। अब वो मुझे सीधे लिटाए और मेरी बुर को देखकर मस्ती से भरकर उसे पहले सहलाये और फिर झुक कर वहाँ चुंबनों की बौछार करने लगे। अब मेरी हाऽऽऽय्य पाऽऽऽऽऽप्पा निकल गयी। फिर वो एक ऊँगली अंदर डाले और बोले: उफ़्फ़्फ सच में तुम बिलकुल कोरा माल हो।

अब वो खड़े हुए और पाजामा खोला और उन्होंने एक बड़ी सी चड्डी पहनी हुई थी। उन्होंने वो भी खोली और मेरी आँखे हैरान रह गयीं। क्या तगड़ा आदमी था क़रीब ५५ साल का मस्त छाती और मस्त जाँघें पर उनके बीच में एक पतला सा छोटा सा बमुश्किल ४ इंचि लंड था। लंड क्या लुल्ली कहना ज़्यादा वाजिब होगा।

वो: देखा बेटी । अगर मेरी बिटिया कुँवारी होती तो शायद इसका मज़ा ले पाती। पर वो तो अब तक कई तगड़े लौड़ों से चुदवा चुकी है उसका काम इससे कैसे चलेगा? वो अपनी लुल्ली सहलाकर बोले : लो इसे सहलाओ ।

मैं अपने को क़ाबू में करके उनकी लुल्ली सहलाते हुए बोली: जी पापा आप सही कह रहे हो।

वो: बेटी तुमने तो बड़े लंड देखे होंगे ना? अपनी माँ को चुदवाते देखा होगा?

मैं: जी हाँ मैंने देखें हैं। पर इतना छोटा भी होता है मुझे तो सच में पता ही नहीं था। आपकी पत्नी इससे संतुष्ट रहती है? मैं अब भी उसे सहला रही थी।

वो : मैंने उसके किए घर में एक तगड़े लंड वाला नौकर रख दिया था शादी के फ़ौरन बाद। वो कुछ साल उसे चोदा और फिर उसके जाने के बाद एक दूसरा रखा है वो क़रीब ४० साल का है अब । मेरी बीवी को तगड़े लौड़े की मैंने कमी नहीं होने दी, वरना वो बाहर जाकर किसी से भी चुदवाती और मेरा नाम ख़राब होता।

मैं: ओह ये आपने अच्छा किया। तो क्या आपकी बेटी इसी नौकर की बेटी है?

वो: क्या पता? हो सकता है वो पहले नौकर की बेटी हो। इस नौकर से एक बेटा है ऐसा मुझे लगता है, पर वो अभी सिर्फ़ १२ साल का है। चलो अब तुम्हारी सील खोलते हैं। बेटी क्योंकि मेरा छोटा सा है इसलिए तुमको कोई ख़ास तकलीफ़ नहीं होगी।

यह कहकर वो मेरी गाँड़ के नीचे एक तकिया रखे और मेरी टांगों को फैलाये और बीच में आकर अपनी लुल्ली मेरी कुँवारी बुर में रगड़ने लगे। मैं गरम होकर उफ़्फ़्फ़्फ कर उठी। फिर वो बोले: मैं डाल रहा हूँ बेटी।

अब मुझे अपनी बुर में उनका पतला पर पूरा कड़ा लंड अंदर आते हुए महसूस हुआ और मैं उइइइइइइइइ करके चीख़ उठी। जब मेरी झिल्ली फटी और उनका लंड अंदर चला गया तो मैं दर्द से उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ चिल्ला उठी। अब वो धीरे से मेरे ऊपर आकर मेरी चूचियाँ दबाने और चूसने लगे। मैं भी मस्ती में आकर आऽऽऽऽऽह करने लगी। अब वो अपनी कमर हिलाकर मुझे चोदने लगे। मैं भी मस्त होकर चुदवाने लगी और उन्न्न्न्न उन्ननन करने लगी। उनकी चुदाई क़रीब २० मिनट चली और मैं मस्ती से झंडने लगी और वो भी झड़ गए। जब मैं शांत हुई तो वो मेरी जाँघों के बीच मेरी बुर का मुआयना किए और बोले: बेटी थोड़ा सा ही ख़ून निकला है। वो एक ऊँगली अंदर डालकर उसमें लगा ख़ून मुझे दिखाकर बोले: जाओ बाथरूम में जाकर साफ़ कर लो। बधाई हो अब तुम कुँवारी नहीं रही।

मैं उठी और मैंने अपनी बुर में मामूली सी जलन का अहसास किया और जाकर मूतने लगी। बाद में मैंने हैंड शॉवर से अपनी बुर साफ़ की। ठंडे पानी से जलन काफ़ी कम हो गई थी। जब बाहर आयी तो वो अपनी लुल्ली को नैप्किन से पोंछ रहे थे। वो लेट गए और मुझे भी बग़ल में लिटा लिए और मुझसे लिपट कर मेरा बदन सहलाने लगे। उनके हाथ मेरी पीठ, गाँड़ से होते हुए मेरी जाँघों पर घूम रहे थे।

मैंने भी उनकी छाती सहलाकर कहा: अंकल आपकी बेटी को पता है कि आपका ये इतना छोटा सा है?

वो: नहीं उसे नहीं पता है। वो नौकरों और उसकी मम्मी के रिश्ते के बारे में भी नहीं जानती।

मैं: नौकरों ने कभी आपकी बेटी को पटाने की कोशिश नहीं की?

वो: नहीं उसकी माँ इसका ध्यान रखती थी। नौकर तो कुछ नहीं कर पाए पर बाहर वालों ने ज़रूर उसकी बजा रखी है।

मैं अपना हाथ उनकी सिकुड़ी हुई लुल्ली पर लेजा कर सहलाने लगी ताकि शायद वो फिर से खड़ा हो और कुछ मज़ा करूँ।

वो बोले: बेटी इसे सहलाने से ये खड़ा नहीं होगा। अगर खड़ा करना है तो तुमको कुछ और करना पड़ेगा।

मैं: क्या करना पड़ेगा पापा?

वो मस्त होकर पेट के बल लेट गए और अपनी गाँड़ को छू कर बोले: बेटी इसकी दबाओ और सहलाओ।

मैं उठी और उनकी गोल गोल चूतडों को दबाने लगी। फिर वो अपने हाथ से अपने चूतडों को फैलाये और बोले: बेटी इस छेद में थूक लगाकर दो ऊँगली डालो।

मुझे बड़ा अजीब लगा और थोड़ी सी घिन भी आयी पर मैंने अपने दो उँगलियों में थूक लगाया और उनके गाँड़ में उँगलियाँ डाल दीं। बड़े आराम से उँगलियाँ अंदर चलीं गयीं और वो अपनी गाँड़ हिलाने लगे। जल्दी ही मैं समझ गयी कि क्या करना है और अपनी ऊँगलियों से उनकी गाँड़ चोदने लगी। जल्दी ही उन्होंने अपनी कमर उठाई और बोले: आऽऽऽऽह बेटी अब लंड सहलाओ। मैंने दूसरा हाथ उनके पेट के नीचे डाला और उनका खड़ा लंड मेरे हाथ में आ गया जिसे मैंने सहलाना शुरू किया।उनका लंड अब सख़्त होने लगा था। वो अब आऽऽऽऽहह म्म्म्म्म्म्म करके सिसकियाँ भर रहे थे। फिर वो उठे और मेरी उँगलियाँ बाहर आ गयीं। वो मुझे एक नैप्किन दिए और मैंने अपनी उँगलियों को साफ़ किया । फिर वो मुझे लिटाए और मेरे ऊपर आके अपने लंड को मेरी बुर में डाले और मुझे फिर से चोदें लगे। इस बार मुझे ज़्यादा मज़ा आया और क़रीब आधा घंटा चुदवाने के बाद हम दोनों झड़ गए।

 


इस बार हम दोनों थक गए थे । फ़्रेश होकर जब हम लेटे तो वो मुझे फिर से अपने से चिपका लिए थे और मेरे होंठ चूस रहे थे। अब मैं बोली: पापा आपने ये अपनी गाँड़ में ऊँगली क्यों करवाई?

वो: देखो बेटी जब मैंने अपने पहले नौकर को अपनी बीवी से मिलवाया तो मेरी बीवी बोली कि मैं तभी किसी और से चुदवाऊँगी जब आप वहाँ ख़ुद रहोगे। मुझे उसकी ज़िद के आगे झुकना पड़ा और पहली रात को नौकर ने मेरी बीवी को मेरे सामने ही चोदा। मैं भी बहुत उत्तेजित हो गया था। उसका लौड़ा ७ इंच था और बहुत मोटा भी था। मेरी बीवी को बहुत सुख मिला ये मैंने देख लिया था। अब जल्दी ही मेरी झिझक भी कम हो गयी। वो रोज़ रात को एक साइड के दरवाज़े से अंदर हमारे बेडरूम में आ जाता और फिर मेरे सामने मेरी बीवी को ज़बरदस्त चोदता था । इसी तरह कुछ दिन चलता रहा और फिर एक दिन बीवी बोली कि आज उसको बोल दो कि पाँच दिन मत आए क्योंकि मेरे पिरीयड चालू हो गए हैं।

मैं: ओह फिर ?

वो: मैंने उसे फ़ोन करने की कोशिश की पर सम्पर्क नहीं हो पाया। वो अपने ठीक समय क़रीब ११ बजे रात को साइड के दरवाज़े से अंदर आया और आकर पूरा नंगा हो गया। उसका मस्त लौड़ा मज़े से ऊपर नीचे हो रहा था। मैंने उसे रोकने की कोशिश की पर वो नहीं सुना। फिर मैंने इसे बताया कि इसका पिरीयड आ गया है। अब ४/५ दिन सबर करना होगा। वो बोला: मालिक आपकी बीवी नहीं तो क्या हुआ मैं आपसे ही काम चला लूँगा। फिर उसने मेरी बीवी के सामने नंगा किया और मेरी ले ली।

मैं: ओह मैंने सुना है कि ऐसा होता है पर बड़ा अजीब सा लग रहा है सुनकर।

वो: बस उसके बाद से हम दोनों उस नौकर के ग़ुलाम से हो गए थे। तभी से मुझे वहाँ पीछे ऊँगली करवाना अच्छा लगने लगा।

मैं: तो क्या ये दूसरा नौकर भी?

वो: अरे बेटी अब तो आदत लग गयी है। हाँ वो भी मेरी लेता रहता है।

मैं चुप रह गयी । शायद ये मेरा पहला अनुभव था सेक्स या चुदाई की नयी दुनिया का। मैं सोची कि पता नहीं और क्या क्या पता चलेगा आगे जाकर।

ये सोचते हुए मैं सो गयी।

अगली सुबह नींद खुली तो मंत्री जी अभी भी सो रहे थे। हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए थे। हाँ ऊपर से एक चादर ओढ़ रखी थी। मैं उठी और बाथरूम से फ़्रेश होकर आयी और अपना गाउन पहनी। तभी वो भी उठ गए और मुस्कुरा कर बाथरूम गए और बाहर आकर अपने कपड़े पहन लिए। उन्होंने अपना एक बैग खोला और उसने से कुछ नोट निकाले और मेरे पर्स में डालकर बोले: बेटी बहुत अच्छा लगा तुमसे मिलकर। अब चलता हूँ। अपना ख़याल रखना। ये कह कर वो मुझे अपने से चिपका कर प्यार किए और तेज़ी से बाहर चले गए। मैंने पर्स खोल कर देखा तो उसमें वो पचास हज़ार डाल गए थे। मैं बहुत ख़ुश हो गयी।

तभी शांति आयी और बोली: आपको स्वामी जी नाश्ते पर याद कर रहे हैं। मैं उसके पीछे पीछे चली गयी।

नाश्ते के टेबल पर सिर्फ़ स्वामी जी बैठे थे और अख़बार पढ़ रहे थे। मैं जाकर उनको नमस्ते की और उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी।

स्वामी: बेटी कैसी बीती रात? मंत्री जी ने ज़्यादा तंग तो नहीं किया?

मैं क्या कहती, मैंने ना में सिर हिला दिया।

वो: हाँ अभी अभी वो गए हैं और तुम्हारी तारीफ़ कर रहे थे। मैंने पूछा कन्या कुँवारी थी या नहीं? तब वो हंस कर बोले कि हाँ हाँ थी ना।

मैं शर्मा कर चुप रही। भला इस बात का कोई जवाब हो सकता था क्या?

स्वामी: बेटी , आज से तुम हमारी सेवा में रहोगी। हमारे मन की हर इच्छा पूरी करोगी ना?

मैं क्या कहती? पैसे जो लिए थे सो बोली: जी स्वामी जी।

स्वामी ख़ुश होकर: चलो नाश्ता करते हैं । नाश्ता बहुत ही स्वादिष्ट था और मैंने जी भर के खाया। फिर स्वामी जी मुझे लेकर एक कमरे में पहुँचे और कहा कि ये आज से तुम्हारा कमरा है। मेरा बैग वहीं रखा था। वो बोले: बेटी तुम अब कपड़े बदल लो। फिर हाल में आना। शांति तुमको वहाँ ले आएगी।

मैंने नहाने के लिए कपड़े निकाले तभी शांति वहाँ आयी और बोली: आप बस कपड़े पहन लो नहाना अभी नहीं होगा। स्वामी जी बताएँगे आपको नहाने के बारे में।

मैं थोड़ा सा हैरान हुई और ऐसे ही एक सेक्सी ब्रा और पैंटी पहनी फिर उसके ऊपर से एक सेक्सी सा छोटा सा टॉप और एक मिनी स्कर्ट पहनी। फिर हाथ मुँह धोकर बाल बनाए और बाहर आयी और शांति मुझे लेकर हाल में आयी जहाँ स्वामी जी का प्रवचन चल रहा था। सब भक्त आँख बंद करके भजन गा रहे थे। स्वामी जी ने मुझे देखा और मेरी आधी नंगी चूचियाँ और जाँघें देखकर उनकी आँखों में वासना छलक उठी। वो मुझे पास बैठने को बोले। मैं एक पास ही रखी कुर्सी पर बैठी और मेरी जाँघें उनके सामने थी। वो बार बार मेरी जाँघों को देख रहे थे।

मुझे भी मस्ती सूझी और मैंने अपनी जाँघें फैला दीं ताकि मेरी पैंटी उनको अच्छी तरह से दिख जाए। मेरी पैंटी भी काफ़ी सेक्सी थी और ढाँकने की जगह दिखा ज़्यादा रही थी। स्वामी जी ने मुझे घूरते हुए अपनी धोती में अपना लंड ऐडजस्ट किया और अपने होंठों पर जीभ फेरी। मुझे पता था कि आज मुझे इनसे ही चुदवाना है सो मैं भी मानसिक रूप से अपने को तय्यार कर रही थी। इस समय भी स्वामी की बालों से भरी छाती नंगी थी और वो सिर्फ़ एक धोती में ही थे।

ख़ैर काफ़ी देर बाद सत्संग समाप्त हुआ और सब स्वामी जी के पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगे। स्वामी जी सबकी पीठ सहला कर आशीर्वाद देते थे। मैंने देखा कि छोटी उम्र की कन्याओं को ख़ास आशीर्वाद मिलता था। मतलब उनकी पीठ ज़रा ज़्यादा देर सहलायी जाती। वो भरी पूरी महिलाओं को भी आशीर्वाद देते समय शायद उनकी ब्रा के स्ट्रैप को भी छू कर मस्त हो जाते। आदमीयों को बस एक पीठ में हल्की सी धौल लगाते थे।

ख़ैर ये नाटक भी समाप्त हुआ और सब चले गए। अब कुछ सेविकाएँ और मैं ही रह गए हाल में। स्वामी जी मुझे देखकर बोले: चलो बेटी अब हमारे कक्ष में चलो। फिर सेविकाओं से कहा: सब इंतज़ाम हो गया है?

सेविकाओं ने हाँ में सिर हिलाया। मैंने ग़ौर से देखा की सबकी उम्र २१/२२ की होगी। वो सब एक सफ़ेद साड़ी पहनी थी । और उनके शरीर का कोई भी अंग सामने दिखाई नहीं दे रहा था। पूरा शरीर उन सबका साड़ी से ढका हुआ था।

मैं स्वामी जी और सेविकाएँ उनके कक्ष की ओर चल पड़े । उनके कक्ष में घुसते ही मुझे लगा कि मैं किसी और ही दुनिया में आ गयी हूँ। क्या साज सज्जा थी । बड़े बड़े शीशे लगे हुए थे और बड़ा सा गोल बिस्तर था। बड़े बड़े फ़ानूस लगे हुए थे जहाँ से रौशनी आ रही थी। बिस्तर के पास एक ज़मीन में छोटा सा पूल सा था जिसमें पानी भरा था और गुलाब की पंखुडियां तैर रहीं थीं। बग़ल में एक बाथरूम भी था जिसमें शीशे का दरवाज़ा था जिसके आरपार सब दिखाई पड़े।

मेरी आँखें फटीं हुईं थीं । तभी स्वामी जी मेरे पास आकर मेरी बाँह सहलाए और बोले: बेटी कमरा पसंद आया?

मैं: जी स्वामी जी बहुत सुंदर है।

स्वामी जी सोफ़े पर बैठे और मुझे भी पास बैठने का इशारा किया।

उनके बैठते ही दो सेविकाएँ नीचे ज़मीन पर बैठीं और उनके पैर दबाने लगीं। दो सेविकाएँ बग़ल में खड़ी रहीं।

स्वामी जी ने मेरी नंगी जाँघ पर हाथ रखा और बोले: बेटी इन सेविकाओं का मैं भगवान हूँ। इनको मैंने छोटे से बड़ा किया है। ये सब मेरी विशिष्ट भक्त हैं। ये मेरी हर बात को आँख बंद करके मानती हैं। हैं ना बेटियों?

सभी सेविकाओं ने हाँ में सिर हिलाया।

स्वामी: देखो मैं तुमको दिखाता हूँ कि ये कैसे मेरी कोई भी बात मानती है।

फिर उन्होंने एक सेविका जो पैर दबा रही थी उसको कहा: बेटी मेरे पैर का अँगूठा चूसो जैसे लिंग चूस रही हो।

इस सेविका ने स्वामी जी के पैर का अँगूठा अपने मुँह में लिया और उसे वैसे ही चूसने लगी जैसे मम्मी लंड चूसती थीं। वो अपनी जीभ से उसे चाट भी रही थी। उफ़्फ़्फ क्या दृश्य था। क़रीब दस मिनट तक वो अंगूठे बदल बदल कर चूसी।

अब स्वामी जी बोले: बस करो बेटी । बहुत अच्छा चूसती हो। यह कहकर वो धोती से उभरे हुए लौड़े को दबाए। उनका एक हाथ अब मेरी जाँघ के ऊपर होकर स्कर्ट को उठा रहा था। अब वो बैठी हुई दूसरी सेविका से बोले: बेटी तुम अपने स्तन निकाल कर इस सेविका के मुँह में दो और वो उसे वैसे ही चूसेगी जैसे अभी अँगूठा चूसी थी।

मैं थोड़ा सा शॉक में आ गयी। पर वो सेविका अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दी और फिर अपना ब्लाउस खोली और अंदर उसने कोई ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसके बड़े बड़े स्तन बाहर आ गए और दूसरी सेविका ने अपना मुँह वहाँ डाल दिया और उसके दूध चूसने लगी। अचानक उसकी छाती से दूध गिरता देखकर मैं चौंकी तो स्वामी जी हँसे: अरे कुछ नहीं इस सेविका के लड़की हुई है चार महीने पहिले। इसीलिए दूध आ रहा है।

थोड़ी देर बाद वो सेविका से बोले: चलो हटो अब बच्ची के लिए भी कुछ छोड़ोगी या नहीं। वो मुस्कुराते हुए हट गयी। तब स्वामी जी उस सेविका से बोले: लाओ मुझे भी स्तनपान कराओ।

वह सेविका आगे आयी और अपने एक स्तन को पकड़कर स्वामी जी के मुँह पर रखी और स्वामी जी भी स्तन चूसने लगे। पाँच मिनट चूसने के बाद वो अपने मुँह में लगे दूध को साफ़ किए और सेविका को हटने को कहा। उसने अपने ब्लाउस को बंद कर लिया और साड़ी भी ठीक कर ली।

अब स्वामी जी ने पास खड़ी हुई सेविका से कहा: अपनी साड़ी ऊपर करो और अपनी योनि और गुदा दिखाओ।

उस लड़की ने चुपचाप अपनी साड़ी नीचे से पकड़ी और उसे कमर तक उठा दी और क्योंकि उसने कोई पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए उसकी बिना बालों की बुर बिलकुल नग्न स्वामी और मेरे सामने थी। उस पर शायद पसीने की दो बूँदें भी दिख रहीं थीं। स्वामी जी उसे पास बुलाए और पास आने पर वो उसकी बुर को हाथ सा सहलाए और फिर पसीने की बूँदों को ऊँगली में लेकर चूसने लगे। थोड़ी देर तक वो उसकी योनि को सहलाए और फिर उसे घूमने को कहा। वो घूमी और ख़ुद ही अपने चूतडों को एक एक हाथ से पकड़कर फैलायी और अपनी गुदा के छेद को स्वामी और मेरे सामने कर दी। वहाँ पर भी कुछ पसीना सा था और स्वामी ने मस्ती से उसकी गाँड़ की दरार में अपना हाथ डाला और पसीने को अपनी ऊँगली में लेकर सूँघा और फिर अपनी उँगलियाँ चाटने लगे। उफ़्फ़कफ कितना विचित्र था ये सब मेरे लिए। अब स्वामी जी का दूसरा हाथ जो कि मेरे जाँघ पर था अब अंदर जाकर मेरी पैंटी को छूने लगा था। फिर वो बोले: चलो साड़ी नीचे कर लो। वो सेविका अब सामान्य हो गयी। वो उसे फिर से बोले: जाओ एक बालटी लाओ।

वो जाकर एक स्टील की बालटी लायी।

अब आख़री सेविका से स्वामी जी बोले: साड़ी ऊपर करो और इस बालटी में मूत्र त्याग करो।

मैं जैसे उछल सी गयी। हे भगवान ये सब क्या हो रहा है?

वो सेविका चुपचाप अपनी साड़ी उठाई और अपने टाँग फैलायी और खड़े खड़े ही उस बालटी में मूतने लगी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या अजीब लग रहा था । एक २१/२२ साल की जवान लड़की एक आदमी के सामने खड़े खड़े मूत रही थी। थोड़ा सा पेशाब उसकी जाँघ में भी बह रहा था। अचानक स्वामी जी को पता नहीं क्या सूझा कि वो हाथ बढ़ाकर मूत के नीचे रखे और अपने गीले हाथ को सूँघे औरफिर उसे चाटने लगे। जब सेविका ने मूतना बंद किया तो वो सेविका उस बालटी को लेकर चली गयी और स्वामी जी ने उस लड़की को अपने पास खिंचा और उसकी मूत से सनी योनि को सूँघे और फिर जीभ से चाटने लगे। मैंने सेविका की ओर देखा तो उसके चेहरे पर सेक्स का आनंद साफ़ नज़र आ रहा था।

अब स्वामी जी मुँह पोंछकर बोले: बेटी साड़ी ठीक कर लो। फिर वो मेरी ओर देखकर बोले: देखा यहाँ मेरा हुक्म भगवान का हुक्म है। अब उनकी उँगलियाँ मेरी पैंटी के साइड से मेरी बुर को दबा रहीं थीं। मैं अब सेक्स के नशे पर सवार हो रही थी। अब स्वामी जी ने अपना दूसरा हाथ मेरी एक चूचि पर रखा और उसे बड़े ज़ोर से दबाया। मैं दर्द से बिलख उठी। तभी वो दूसरी चूचि भी दबाने लगे और मेरी चीख़ निकल गयी।

अब उसने मेरे होंठ चूसने शुरू किए । उफ़्फ़्फ पेशाब की गंदी गंध आ रही थी उसके मुँह से । पर वो मुझे जकड़ कर मेरे होंठ चूसते रहा और फिर अपनी मोटी जीभ मेरे मुँह में दे दिया। अचानक उसने मेरे होंठ काट दिए। मैं फिर से चीख़ उठी। सेविकाएँ चुपचाप मेरी ये हालत देखती रहीं । कोई कुछ नहीं बोला।

स्वामी: तुम नहायी तो नहीं हो ना?

मैं: नहीं नहायीं नहीं हूँ।

स्वामी: शाबाश । असल में मुझे लड़की के बदन की सामान्य गंध अच्छी लगती है। मुझे साबुन या शैम्पू की गंध पसंद नहीं है। अब तुम सुबह उठी हो और रात को चुदवाई थी तो ये सब गंध जो कि पसीने या मूत्र या काम रस की होगी। ये मुझे बहुत गरम करेंगी।

वह फिर से मेरा बदन सहलाकर बोला: चलो बिस्तर पर देखें मंत्री ने क्या क्या किया है तुम्हारे साथ?

वो मुझे लेकर बिस्तर पर गिरा दिए।

 
लिली बोले जा रही थी: ——-

अब स्वामी जी मेरे ऊपर आकर मुझे मस्ती से चूमने लगे। सभी सेविकाएँ हाथ बांधे खड़ी होकर तमाशा देख रही थीं।

मैं: स्वामी जी क्या ये सब यहीं रहेंगी ?

स्वामी: हाँ बेटी, ये सब यहीं रह कर तुम्हारी और मेरी मदद करेंगी।

अब वो मुझे और ज़ोर से अपने से भींचकर चूमे जा रहा था। अब मेरे बदन में भी मस्ती का संचार होने लगा था। अब वो बोले: बेटी पिशाब तो नहीं आ रही है?

मैं: जी स्वामी जी आ रही है। मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।

वो हँसकर बोले: चलो यही कर लो ना। फिर एक सेविका को इशारा किए और वो भाग कर एक बालटी लेकर आयी। अब स्वामी जी ने मेरा स्कर्ट उतारा और मेरी पैंटी में मुँह डालकर सूँघने लगे और फिर बड़े प्यार से मेरी सेक्सी पैंटी भी निकाल दिए। अब वो अपना मुँह मेरी बुर पर ले गए और जाँघों को पूरा चौड़ा करके मेरी बुर सूँघे और फिर चूमकर उसे चाटने लगे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मेरी तो मानो बुर पानी ही छोड़ने लगी थी। इतनी सेविकाओं के सामने मुझे शर्म भी आ रही थी। स्वामी जी के कहने से मैं नीचे ज़मीन पर रखे बालटी के ऊपर खड़ी हुई और मेरा मुँह स्वामी जी की ओर था जो कि अब बिस्तर पर बैठ कर मेरी बुर को देख रहे थे। वो बोले: चलो बेटी अब मूतो ।

मैं शर्मा कर लाल हुई पर ज़ोर लगायी और मेरी मूत की धार बालटी में गिरने लगी। स्वामी जी मस्ती में आकर मेरी बुर को मसलने लगे और उनके हाथ में मेरा पेशाब लगने लगा। अब मेरी बुर से सी सी की सीटी की आवाज़ भी आ रही थी और मैं सब सेविकाओं को अपनी बुर घूरते देखकर बहुत ही शर्मा गयी। अब स्वामी जी उठकर मेरे सामने ज़मीन पर बैठे और मेरी बुर पर अपना मुँह रख दिए और मेरी पिशाब पीने लगे। उफ़्फ़्फ़्फ मुझे बहुत घिन आयी पर उत्तेजित भी होने लगी थी। जब मेरी धार आनी बंद हो गयी तो स्वामी जी ने मेरी बुर चाटी और फिर उठकर बिस्तर पर बैठ गए। एक सेविका जल्दी से एक गीला तौलिया लायी जिससे उन्होंने अपना मुँह साफ़ किया और फिर एक सूखे तौलिए से अच्छे से पोंछा । अब वो मुझे पकड़कर बोले: आओ मेरे मुँह पर बैठो। वो बिस्तर पर लेटे तो और मैं उनके मुँह पर अपनी बुर रखकर बैठ गयी। अब वो मेरी बुर को फैलाकर चूमे और चाटने लगे। जल्दी ही मेरी आऽऽऽऽह निकलने लगी। थोड़ी देर बाद वो मुझे हटाए और एक सेविका से बोले: आओ मेरी धोती खोलो।

सेविका ने उनकी धोती खोली और उनके लंगोट में बहुत बड़ा सा उभार बना हुआ था। वो अब मेरी चूचियाँ मसल रहे थे। फिर सेविका ने उनका लंगोट भी खोला और एक बहुत काला मोटा और लम्बा हथियार मेरे सामने था। उफ़्फ़्फ़्फ कितना भयानक सा दिख रहा था। उस मंत्री का तो इसके सामने कुछ भी अस्तित्व ही नहीं था। मैं समझ गयी कि मेरी असली सील आज ही टूटेगी। अब वो मुझे अपना लौड़ा चूसने को बोले। मैं चुपचाप उसे चूसने लगी। मुझे आता नहीं था सो उन्होंने मुझे सिखाया। एक सेविका से कहा: ज़रा चूस कर दिखाओ ताकि ये भी चूस सके।

सेविका ने उनका लौड़ा चूस कर मानो ट्रेनिंग दी। अब मैं भी चूसने लगी। थोड़ी देर बाद स्वामी जी बोले: चलो अब चोदते हैं तुम्हें ।अब वो मुझे लिटा दिए और मेरी जाँघे फैलाकर मेरी बुर में एक ऊँगली डाले और बोले: उफ़्फ़्फ कितनी टाइट चूत है तुम्हारी? मंत्री चोदा नहीं क्या?

मैं: उइइइइइइइ आऽऽऽऽह चोदे थे पर उनका बहुत छोटा और पतला था। आपका तो बहुत बड़ा है मेरी फट ही जाएगी। थोड़ा आराम से कीजिएगा।

स्वामी सेविका से : ज़रा क्रीम लाओ। ये तो अभी कुँवारी ही है समझो। मंत्री कुछ ख़ास नहीं कर पाया।

अब वो मेरी बुर में अच्छे से क्रीम लगाया और फिर सेविका से अपने लौड़े पर भी क्रीम लगवाया। फिर मेरी टाँगों के बीच आकर अपना लौड़ा मेरी बुर से सटाकर उसे ऊपर से नीचे दबाने लगे। मैं उग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। अब वो मेरी बुर की पूत्तियों को फैलाए और छेद में अपना मोटा सा सुपाड़ा फ़ंसा कर हल्के से दबाए और मैं दर्द से चीख़ उठी। अब वो दबाते जा रहे थे और मेरी चीख़ निकलती चली गयी। जल्दी ही मुझे लगा कि मेरी बुर में कोई गरम लकड़ी घुसेड़ दिया है। मैं रोने लगी दर्द के मारे। स्वामी जी ने पूरा लौड़ा अंदर पेल कर ही दम लिया और फिर मेरी चूचियाँ दबाके चूसने लगे। क़रीब ५ मिनट बाद मुझे महसूस हुआ कि अब दर्द और जलन कम हुआ। स्वामी: बेटी अब दर्द कम हुआ। वैसे तुम पूरी कुँवारी हो। साला मंत्री कुछ किया ही नहीं शायद । उफ़्फ़्फ़क क्या टाइट चूत है तुम्हारी।

अब स्वामी ने अपना लौड़ा आधा बाहर किया और फिर से ज़ोर से अंदर पेल दिया। अब वो मज़े से चोदने लगे। अब मैं भी झेल रही थी और मज़े लेने लगी। जल्दी ही कमरा फ़च फ़च और मेरी सिसकियों से गूँज रहा था। मैंने देखा कि सभी सेविकाएँ अब गरम हो चुकी थीं। कोई अपनी चूची दबा रही थी तो कोई अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी बुर सहला रही थी। स्वामी जी क़रीब आधा घण्टे हमें चोदे फिर चिल्ला कर झड़ने लगे। मैं तो दो बार झड़ चुकी थी।

चुदाई के बाद सेविकाओं ने हमें साफ़ किया। मेरी बुर से एक बाद फिर से ख़ून निकला था।

इसके बाद स्वामी जी ने मुझे पूरे एक हफ़्ते चोदा और पूरी तरह से मज़ा लिया और दिया। एक हफ़्ते बाद पूरी औरत बनकर स्वामी जी ने मुझे बहुत प्यार किया और २५०००/ भी दिए और आश्रम से जाने की इजाज़त दे दी।

आश्रम के बाहर शंकर मेरा इंतज़ार कर रहा था। वो मुझे देखकर बोला: तो सील टूट गयी। जवान हो गयी अब हमारी बच्ची । मैं हँसने लगी। गाड़ी में बैठ कर शंकर बोला: चलो एक हफ़्ते बाद अब घर जाओगी। वैसे याद है ना तुमने कहा था कि मुझसे भी चुदवाओगी। शंकर ने मेरा हाथ पकड़ा और पैंट के ऊपर से अपने लंड पर रख दिया।

मैं: कोई जगह है तुम्हारे पास। मैं उसके लंड को दबाकर बोली।

वो : अरे यहीं कार में हो जाएगा ना। फिर वो ड्राइवर जिसका नाम चेतन था, से बोला: कार को साइड में एक सुनसान जगह पर पार्क करो।

चेतन ने कार एक सुनसान जगह पर पार्क की। शंकर के कहने से वो ख़ुद थोड़ा दूर चला गया। अब शंकर ने अपने पैंट से अपना लंड बाहर निकाला और मुझे चूसने का इशारा किया। मैं मस्ती से इसे चूसने लगी। वो बोला: आऽऽहह सब सीख गयी हो तुम। स्वामी जी ने मस्त ट्रेनिंग दी है ह्म्म्म्म्म्म्म।

फिर वो मुझे सीट पर लिटाया और मेरी स्कर्ट उठाकर पैंटी निकाला और फिर मेरी बुर में दो ऊँगली डाला और बोला: आऽऽऽह मस्त पनिया गयी है । लो अब इसे अंदर डालता हूँ। ये कहकर वो मेरी बुर में अपना लौड़ा डाला और मुझे चोदने लगा। मैं भी मज़े से उन्ननन उन्नन करने लगी। क़रीब दस मिनट चोदेने के बाद वो उफ़्फ़्फ़्फ़्क करके झड़ गया और मैं भी झड़ गयी।

फिर वो अपनी पैंट ठीक करके बाहर आया और एक तरफ़ होकर मूतने लगा और बोला: चेतन चल कार को बैक कर ।

चेतन अपने पैंट पर से तने हुए लौड़े को दबाकर बोला: भय्या मुझे भी लेनी है इसकी।

शंकर मेरे पास आकर बोला: लिली इसको भी देगी क्या? वैसे ये और मैं तुम्हारी मॉ को कई बार चोद चुके हैं।

मैं: आऽऽऽह अभी नहीं बाद में कभी कर लेना। अभी घर चलते हैं प्लीज़।

चेतन बुरा सा मुँह बनाकर कार चलाने लगा और बोला: यार इसकी माँ को फ़ोन कर । देख तो अगर कोई ग्राहक ना हो तो वो ही मुझसे चुदवा ले और मेरी गरमी उतार दे।

मैं हैरानी से उसे देखी पर शंकर मुस्कुरा कर फ़ोन लगाया माँ को, और बोला: अरे रानी हम तुम्हारी बेटी लेकर आ रहे हैं। वो मुझसे तो चुदवा ली पर चेतन से नहीं चुदवाई। तुम अगर फ़्री हो तो हम अंदर आ जाएँ।

अब चेतन ने फ़ोन स्पीकर मोड में रखा। मॉ की आवाज़ आयी: हाँ एक लड़के को आना था पर वो अब नहीं आ पाएगा क्योंकि उसका एक छोटा सा ऐक्सिडेंट हो गया है। तुम दोनों आ जाओ घर में लिली के साथ।

चेतन चिल्लाया: थैंक यू आंटी । बेटी ना सही माँ चुदवा लेगी।

माँ: हट बदमाश आ घर पर तेरे कान खींचूँगी ।

चेतन: आंटी कान भी खींच लेना और लंड भी। हा हा ।

माँ : बदमाश कहीं का , चल रखती हूँ।

जब हम घर पहुँचे तो खाना टेबल पर सज़ा हुआ था। माँ मुझसे गले मिली और बोली: सब ठीक रहा ना? कोई परेशानी तो नहीं हुई?

मैं: नहीं माँ सब ठीक रहा।
 


अब चेतन आकर माँ से लिपट गया और बोला: कैसी हो आंटी। बहुत दिन बाद आपके घर आया हूँ। वो यह कहते हुए माँ की मस्त गदरायी हुई गाँड़ दबाने लगा।

माँ हँसकर उसे चुमी और फिर उसे अलग किया और शंकर को अपने से लिपटा लिया। वो भी माँ के गाल चूमा और फिर होंठ भी चूस लिया।

माँ उसे भी अलग करके बोली: चलो पहले खाना खा लो। फिर मस्ती कर लेना।

शंकर: नहीं पहले आपकी चुदाई होगी खाना बाद में खाएँगे।

मैं: मॉ मैं नहा कर आती हूँ फिर खाना खाऊँगी।

चेतन: चलो ना आंटी पहले चुदवा लो ना।

माँ: अच्छा चलो मेरे बेडरूम में । मै अभी आती हूँ।

उनके जाने के बाद वो बोलीं: बेटी इन लोगों को हाथ में रखना पड़ता है। अच्छे ग्राहक ये ही तो लाते हैं। वैसे भी आज वाला लड़का आया नहीं तो क्यों ना इनको ही ख़ुश कर दूँ। चल तू नहा ले।

मम्मी के जाने के बाद मैं नहाई और फिर तय्यार होकर बाहर आयी तो देखा कि वो सब अभी भी बेडरूम में ही थे। मैं चुपके से उनके रूम की खिड़की से अंदर झाँकी और देखी कि माँ घोड़ी बनी हुई थी। शंकर का लौड़ा चूसते हुए वो पीछे से मज़े से चेतन से चुदवा रही थीं।उसका लौड़ा बहुत तेज़ी से आवाज़ के साथ अंदर बाहर हो रहा था। माँ भी उन्ननन उन्नन कहकर मस्ती से सिसकियाँ भर रहीं थीं।

मैं आकर टेबल पर बैठी और खाना खाने लगी। थोड़ी देर बाद वो तीनों बाहर आए और सबने खाना खाया। खाना खाते हुए भी अश्लील बातें हीं हो रहीं थीं। चेतन माँ की बुर की तारीफ़ कर रहा था। शंकर उनकी चूचियों के बारे में बता रहा था। ख़ैर खाना खाकर वो चले गए।

उसके बाद मैं पैसे के लिए कई बार चुदी और फिर आसपास के लोंगों को शक होने लगा कि हम कोई काम नहीं करते पर शान से कैसे रहते हैं। कुछ लोग कभी कभी घर पर भी आते थे।

माँ के कहने पर मैंने ये जॉब कर लिया और क़िस्मत की बात देखो यहाँ भी दोनों बाप बेटा मुझसे मस्ती करने लगे। बाद में इन दोनों ने मेरी माँ को भी एक रात को भरपूर चोदा।

लिली ने लम्बी साँस लेकर कहा: तो ये है मेरी कहानी।

उसकी कहानी सुनकर सब गरम हो चुके थे तो एक बार फिर से चुदाई का दौर चला।

जब राजीव और सरला थक कर उस दुकान से सब लड़कियों की गिफ़्ट लेकर बाहर आए तब सरला बोली: आप तो बोले थे कि माल बचा कर रखेंगे आज रात के लिए। मुन्नी की बुर के उद्घाटन के मौक़े के लिए। पर आप तो दो बार झड़ चुके हो और साथ ही मुझे भी २ बार झड़वा दिया।

राजीव: अरे मुझे क्या पता था कि इस गिफ़्ट के चक्कर में ऐसी मस्त चुदक्कड लड़की से मुलाक़ात हो जाएगी । कोई बात नहीं वैसे भी आज रात तो शिवा ने ही मुन्नी की लेनी है। हम तो दर्शक ही रहेंगे ना।

सरला: मुझे बस चारु के लिए दुःख हो रहा है। उसकी आज कौन लेगा?

राजीव: अरे उसके लिए रात तक मैं फिर से तय्यार हो जाऊँगा। चारु की चिंता मत करो।

सरला: हाँ ये सही रहेगा अगर आप रात तक फिर से तय्यार हो सके तो।

फिर वो दोनों घर के लिए निकल गए।

घर में मालिनी बोली: पापा आप दोनों कहाँ रह गए थे? कोई गिफ़्ट लेने में इतना समय लगता है भला?

अब वो दोनों भला क्या कहते कि कैसे लिली के चक्कर में देर हो गयी।

सरला: वो क्या है ना कि सिलेक्शन में टाइम लग गया।

अब मालिनी ने सबकी गिफ़्ट्स देखी और अपनी स्पेशल गिफ़्ट देखकर ख़ुशी से राजीव के गोद में आकर बैठी और उसे चूमते हुए बोली: पापा आज भी मैं ही आपके लिए स्पेशल हूँ ना?

राजीव उसकी बाँह सहलाता हुआ बोला: हाँ बेटी तुम ही सबसे स्पेशल हो। वो दोनों एक दूसरे से लिपट कर चुम्बन में खो गए। सामने बैठी सरला सोची कि सच में मेरी बेटी बहुत क़िस्मत वाली है जिसे दो दो मर्दों का भरपूर प्यार मिल रहा है। उसकी आँखें भीग गयीं।

तभी कमरे में चारु और मुन्नी आयीं और मालिनी को राजीव की गोद में देखकर मुस्करायीं। दोनों जाकर उनके पास खड़ी हुईं और राजीव दोनों को देखकर मुस्कुराया और बोला: तुम्हारी दीदी स्पेशल है। मैं इससे बहुत प्यार करता हूँ।

मालिनी हँसकर : चारु और मुन्नी भगवान ने चाहा तो तुम्हारी शादी भी ऐसे घर में होगी जहाँ तुम्हारे ससुर भी तुमको बहुत प्यार करेंगे।

सरला हँसकर : और क्या पता एक दो देवर और ज़ेठ भी हों जो तुम पर अपनी जान लुटाएँगे।

इस बात पर सब हँसने लगे। मालिनी उठी और बोली: चलो चाय बनाती हूँ।

अब राजीव ने चारु और मुन्नी को अपनी गोद में खींच कर बिठाया और उनको भी चूमने लगा।

सरला हँसकर : चारु तू तो इनके हथियार का मज़ा ले चुकी है। आज मुन्नी भी शिवा के मस्त हथियार का मज़ा लेगी।

राजीव ने चारु की चूचियाँ दबाकर कहा: देखो मुन्नी , इसके दूध क्या मस्त बड़े हो रहे हैं। अब तुम भी चुदवाओगी तो तुम्हारे भी बड़े बड़े ऐसे हो जाएँगे।

सरला: मुन्नी तुम्हारी सहेलियों के बड़े है या तुम्हारे जैसे ही छोटे छोटे हैं?

तभी राजीव ने मुन्नी की एक सख़्त चूची पकड़ ली और हल्के से दबा दी। मुन्नी : आऽऽऽह अंकल धीरे से ना प्लीज़। चाची ज़्यादातर की मेरे से बड़ी हीं है। सिर्फ़ चार पाँच लड़कियों की मेरी जितनी हैं। वैसे चाची क़रीब सभी लड़कियों के बोय्य फ़्रेंड्स हैं और सभी उनसे मज़े ले चुकी हैं। चार पाँच लड़कियाँ ऐसी है जिनके बहुत बड़े बड़े हैं और वो सब अपने परिवार में मज़े ले रहीं हैं। कोई पापा से कोई भाई से कोई किसी रिश्तेदार से । हम पाँच लड़कियों का एक ग्रूप है जो अपने घर वालों से ही मज़ा ले रहीं है।

सरला: ओह तो सब बताती होंगी कि कैसे कैसे मज़ा ले रहीं हैं ?

मुन्नी: हाँ सब बताती हैं।

राजीव: चारु तुम्हारे यहाँ भी ऐसा ग्रूप है क्या ?

चारु: जी अंकल हमारे यहाँ भी ५/६ लड़कियाँ खुल कर पारिवारिक मज़े की बात करती हैं।

सरला: तो तुमने भी बता दिया होगा कि तुम भी अपने अंकल और जीजे से चुदवा चुकी हो?

चारु: हाँ मैं भी बता चुकी हूँ। वैसे मेरा ग्रूप थोड़ा स्पेशल है क्योंकि उसने अपने पापा से करवाने वाली तीन लड़कियाँ हैं और बाक़ी सब अपने भाइयों से मज़े कर रहीं है।

राजीव: ओह क्या ग्रूप है? उनकी बातें कभी बताओगी क्या?

चारु: क्यों नहीं? बता दूँगी। वैसे कई लड़कियों के पापा अपनी बेटियों की भी अदला बदली भी करते हैं। एक लड़की ने हमारी ग्रूप फ़ोटो अपने पापा को दिखाई तो वो बोले कि ये यानी की मैं उनको अच्छी लगी। वो बोली कि उसके पापा चाहते हैं कि अगर आप (राजीव) चाहें तो मेरी सहेली और मेरी अदला बदली हो सकती है।

राजीव: ओह ऐसा क्या? सरला क्या कहती हो?

सरला : मुझे लगता है इस बारे में आप बाद में सोच लेना। आज को तैयारी करिए ना।

इस समय शाम के ५ बजे थे । शिवा आज सात बजे आने वाला था।

 
शाम के पाँच बजे थे। मालिनी सबके लिए चाय लाई तो चारु और मुन्नी राजीव से सटकर बैठीं थीं। सरला सामने सोफ़े पर गुड़िया को लेकर बैठी थी।

मालिनी : आप चाय पीओ मैं इसे दूध पिला कर लाती हूँ। वो ये कहकर गुड़िया को लेकर चली गयी।

उधर सब चाय पी रहे थे। राजीव ने शिवा को फ़ोन लगाया: अरे बेटा कब तक आओगे। यहाँ हम सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं। ख़ासकर मुन्नी तो मरी जा रही है।

मुन्नी लाल होकर: क्या अंकल मेरा नाम क्यों ले रहे हैं?

शिवा हँसकर: मैं शाम ७ बजे तक आ जाऊँगा। अच्छा पापा भीड़ है दुकान में, रखता हूँ।

राजीव मुन्नी की एक चूचि दबाकर: देखो मैंने तुम्हारे लिए उसे जल्दी बुला लिया है।

मुन्नी शर्माकर: वो वैसे भी ७ बजे ही आने वाले थे।

चारु: अंकल उसे क्यों तंग कर रहे हैं । वो वैसे भी डरी हुई है अभी बोल रही थी कि जीजू का इतना मोटा मैं कैसे लूँगी? मेरी तो फट ही जाएगी।

सरला: अरे चारु भी तो शिवा और तेरे अंकल का ली है। उसकी कौन सी फट गयी।

राजीव: हा हा फटी हुई तो सभी लड़कियों की होती है।

इस पर सब हँसने लगे।

तभी मालिनी झल्लाती हुई कमरे में आयी और गुड़िया को सरला को देकर बोली: देखो मम्मी ये नालायक दूध ही नहीं पी रही है। लगता है डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा।

सरला: अरे बच्चे कभी कभी एक टाइम का उपवास करते हैं।

मालिनी अपनी एक चूची छूकर बोली: मम्मी इसके ना पीने की वजह से देखो ये अब दुःख रहे है।

सरला मुस्कुरा कर: तो क्या हुआ? जा ना अपने ससुर को पिला दे। तेरा दुखना बंद हो जाएगा।

राजीव मुस्कुराकर: हाँ हाँ बहु आओ मुझे पिला दो।

मालिनी: अच्छा चलिए आपके कमरे में चलते हैं।

राजीव उठा और मालिनी के पीछे अपने कमरे में पहुँचा। मालिनी बिस्तर पर लेट गयी और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दी। उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ एकदम पत्थर सी सख़्त हो रहीं थीं। वो अपना ब्लाउस खोली और अब उसकी ब्रा में से बड़ी बड़ी चूचियाँ दिख रही थी। राजीव उसके बग़ल में आकर लेटा और बोला: बहू क्या हुआ?

मालिनी: पापा ये बहुत सख़्त हो गए हैं और दुःख रहे हैं।

राजीव: बेटी मैं समझ गया कि इनमे दूध भरा हुआ है। ब्रा भी खोलो।

मालिनी ने ब्रा का हुक खोला और राजीव उसकी बड़ी बड़ी पूरी तनी हुई चूचियाँ देखता ही रह गया। अब वो अपना मुँह एक चूची पर रखा और हाथ से चूचि दबाकर दूध निकालने की कोशिश किया। फिर वो चूसने लगा और थोड़ी देर बार दूध की धार निकलने लगी। अब मालिनी: आऽऽऽऽह पापा अच्छा लग रहा है बहुत। अब आराम मिल रहा है। और चूसो। आऽऽऽह ।

राजीव अब ज़ोर ज़ोर से चूसकर दूध पी रहा था। अब मालिनी बोली: आऽऽऽह पपाऽऽऽऽ प्लीज़ अब दूसरा वाला पियो ना।

राजीव ने अब दूसरी चूची दबाया और उसे भी चूसने लगा। जैसे ही उसमें से दूध बाहर आया मालिनी आऽऽऽहह पाआऽऽऽऽऽपा अच्छा लग रहा है। उफ़्फ़्फ़्फ ये गुड़िया आज सुबह से दूध पी नहीं रही है । अब जाकर आराम मिला।

राजीव अपना मुँह पोंछकर: क्या शिवा नहीं पीता?

मालिनी: वो तो रात को दूध पिए बिना सोते ही नहीं । कई बार तो मुँह में लेकर सो जाते हैं। राजीव: चलो बहू अब ब्लाउस बंद कर लो। वो उसे चूमता हुआ बोला।

मालिनी: पापा लौड़ा खड़ा हुआ हो तो मैं चूस दूँ?

राजीव: अरे नहीं बहू । रहने दो ना। वो क्या बोलता कि आज वो लिली की दो बार चुदाई कर चुका है।

अब दोनों बाहर आए और सरला बोली: तो मेरी नतिनि के हिस्से का दूध अपने ससुर को पिला दी?

मालिनी अपनी छाती को छूकर: उफ़्फ़्फ मम्मी अब। बड़ा आराम मिला। बहुत हो अजीब सा फ़ील हो रहा था।

मालिनी किचन में चली गयी।

राजीव चारु को आवाज़ दिया और बोला: चलो थोड़ा बाज़ार होकर आते हैं। जाओ तय्यार हो जाओ।

चारु ख़ुशी से तय्यार होने चली गयी। राजीव अपने कमरे में जाकर तय्यार हुआ और किचन में जाकर मालिनी को देखा तो वो आटा गूंद रही थी। वो पीछे जाकर उसके गाल चूमा और उसकी मस्त गाँड़ दबाकर बोला: बहू बाज़ार जा रहा हूँ। कुछ लाना है क्या?

मालिनी: अब क्यों जा रहे हैं बाज़ार? सब गिफ़्ट्स तो ले ही आए हैं ?

राजीव: वो सोच रहा था कि कुछ फूल ले आता और थोड़ा मोमबत्ती वगेरह । रात की तैयारी हो जाती। वाइन की बोतल भी ले आऊँगा।

मालिनी: मैं खाना तो बाहर से मँगा ली हूँ। आप आइस क्रीम भी ले आना। आऽऽऽह क्या कर रहे हैं ।उफ़्फ़्फ ज़ोर से मत दबाओ ना।

राजीव: अरे बहू तुम्हारी गाँड़ है ही इतनी मस्त कि दबाने में बहुत मज़ा आता है।

मालिनी: और हाँ वो आइ पिल भी ज़्यादा ले आना। अब तो आप दोनों तीन तीन लड़कियों की लोगे तो मैं और वो दोनों प्रेगंनेट नहीं होनी चाहिए ना।

राजीव ने उसकी गाँड़ में एक चपत मारी और कहा: हाँ ये तो है । ठीक है लेता आऊँगा। फिर वो उसे चूम कर बाहर आया तो चारु एक लाल टाइट स्लीव्लेस टॉप और एक चूतडों पर टाइट केप्रि में मस्त माल दिख रही थी। उफ़्फ़्फ़ इस लड़की पर भी क्या जवानी आयी है वो सोचा। अब वो चारु के पास आकर उसके गाल चूमा और बोला: उफ़्फ़्फ बेबी क्या माल लग रही हो? आज बाज़ार में कई घायल होंगे तुम्हारी जवानी के कटार से।

चारु हँसने लगी और बोली: चलें?

राजीव और चारु बाहर को निकल गए। दरवाज़े से बाहर निकलते हुए राजीव उसकी मस्त गाँड़ को दबाकर बोला: अब बड़ी हो रहीं हैं तुम्हारी गाँड़ भी। ग़ज़ब की दिखोगी जब ये थोड़ी और बड़ी हो जाएँगी।

बाहर आकर वो कार से एक बाज़ार में गए। रास्ते भर राजीव उसकी जवानी की तारीफ़ करता रहा। बाज़ार में उसने सब सामान लिया और चारु पूछी: अंकल ये इतने सारे फूल क्या करेंगे?

राजीव: आज हमारी मुन्नी की सील टूटेगी ना तो कमरे को थोड़ा सज़ा देंगे।

चारु: आपने मेरी सील तो बिना ये सब किए तोड़ दी थी?

राजीव: हा हा अगर मुन्नी की भी मैं ही सील तोड़ता ना, तो कोई ताम झाम नहीं होता। पर अब ये काम मुन्नी को शिवा से करवाना है तो चलो थोड़ा सा इंतज़ाम कर देते है।

फिर वो एक चाट की दुकान में जाकर चारु से बोला: बिटिया चाट खाओगी?

चारु: जी अंकल मुझे अच्छा लगता है।

वो दोनों एक टेबल पर बैठे और चाट खाने लगे।

चारु बोली: अंकल मुन्नी डरी हुई है मुझे पूछ रही थी कि क्या बहुत दर्द होता है पहली बार करवाने में?

राजीव: फिर तुम क्या बोली?

चारु: मैं बोली कि मेरे साथ तो अंकल ने बहुत प्यार से और धीरे से किया था पर दर्द तो हुआ था।

राजीव: शिवा भी प्यार से और धीरे से ही करेगा। ज़्यादा दर्द नहीं होगा बोल देना उसको। और बताओ कोलेज में कोई बोय्य फ़्रेंड बना?

चारु: नहीं अंकल । मेरी फ़्रेंड्स तो लड़कियाँ ही हैं ।

राजीव: वो तुम क्या कह रही थी कि एक लड़की का पापा तुम्हारी लेना चाहता है और बदले में मुझे अपनी बेटी की दिलवा देगा?

चारु: जी अंकल उसका नाम शमा है उसके अब्बा का नाम तारिक है। वो ही बोल रही थी।

राजीव: तारिक कबसे अपनी बेटी को लगा रहा है?

चारु: वो बस बतायी थी कि काफ़ी दिनों से वो अपने अब्बा से मज़ा ले रही है। हाँ उसकी अम्मी का देहांत हो चुका है।

राजीव: ओह तभी। कोई फ़ोटो है शमा की तुम्हारे पास?

चारु ने अपनी मोबाइल से फ़ोटो निकाली और दिखाकर बोली: ये नीले टॉप वाली लड़की है।

 
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