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बहू नगीना और ससुर कमीना

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उस दिन शिवा के आने तक और कुछ नहीं हुआ। शिवा के आने के बाद सब खाना खाए और फिर ड्रॉइंग रूम में बैठ कर बातें करने लगे। तीनो लड़कियों ने रात के कपड़े पहने थे। मुन्नी और चारु ने टॉप और पाजामा पहना था और मालिनी ने गाउन पहना था। तभी सरला आयी और धम्म से सोफ़े पर बैठ कर बोली: बहुत मुश्किल से सोयी है गुड़िया, थका दिया उसने। वो एक गाउन में थी जिसमें से उसका भरा बदन मस्त उत्तेजक दिख रहा था।

राजीव: मुन्नी अब सोना नहीं है क्या? चलो सुबह स्कूल है ना?

मुन्नी बुरा सा मुँह बनाकर सबको गुड नाइट कहकर चली गयी। सब हँसने लगे और शिवा बोला: लगता है उसको अभी सोना नहीं था। आपने उसे ज़बरदस्ती भेज दिया।

राजीव: वो इसलिए ताकि हम सोच सकें कि कौन किसने साथ सोएगा?

मालिनी: मेरे साथ जो भी सोना चाहे सो सकता है पर चुदाई तो होगी नहीं। इसलिए मैं जा रही हूँ जो चाहे आ कर सो सकता है जब उसकी मर्ज़ी हो।मैं क्यों कबाब में हड्डी बनूँ? यह कह कर वो चली गयी।

राजीव: फिर शिवा क्या कहते हो? कौन किसके साथ सोएगा?

शिवा अपने लंड को हाफ़ पैंट के ऊपर से दबाकर : पापा आप बताइए आप बड़े हैं मैं तो आपके आदेश का पालन करूँगा।

सरला राजीव से : आपने उसे असली बात तो बताई नहीं है कि आप चारु को चोद चुके हो।

शिवा ने देखा कि चारु का चेहरा लाल हो गया। वो शर्मा कर अपना मुँह छिपा ली।

शिवा: वाह ये तो बड़ी मस्त बात हुई। अगर ऐसा है तो पापा हम सब आपके बेडरूम में चलते हैं और वहीं मस्त चुदाई करते हैं । मुझे भी अपनी साली की बुर लेने का मन हो रहा है।

सरला: हाँ हाँ मस्त लौंडिया मिल गयी हैं तो अपनी बूढ़ी सास का क्यों सोचेगा तू?

शिवा: क्या मम्मी क्या बोल रही हो। आप और बूढ़ी? आप तो अभी भी मस्त गदराई हुई रखी हो। आपको चोदने में तो स्वर्ग का मज़ा आता है। फिर वो उठ कर सरला के पास जाकर बैठा और उसके गाल चूमने लगा। तभी राजीव भी उठा और उसकी दूसरी तरफ़ जाकर बैठा और उसके दूसरे गाल को चूमने लगा। चारु हैरानी से देख रही थी किबाप बेटा दोनों उसकी चाची को चूम रहे थे और अब उनके एक एक हाथ उसकी एक एक चूचि को दबाने लगे थे।

राजीव: अरे सरला तुम तो मस्त माल हो, बूढ़ी होगी तुम्हारी दुश्मन। हम बाप बेटा तो तुम्हारे आशिक़ हैं ।

इस पर सरला हँसने लगी और बोली: अरे अच्छा बस करो। वो देखो मेरी भतीजी अपना जवान बदन लेकर बैठी है, उसका भी तो ध्यान रखो।

राजीव: तुमने चारु को अब तक नहीं चोदा है ना। चलो उसको गोद में उठाके बिस्तर पर ले चलो । हम अभी आते है। वो सरला को अपनी गोद में खींचकर बोला।

शिवा उठा और चारु को किसी फूल की तरह उठाकर अपनी गोद में लेकर राजीव के बेडरूम में चला गया।

उधर राजीव सरला को चूमकर बोला: जानू तुमसे एक बात करनी थी।

सरला: हाँ बोलिए।

राजीव: वो क्या है ना मुन्नी भी अब जवान हो चली है। पर अभी उसकी सील टूटी नहीं है। ओरल सेक्स तो मस्ती से करती है और करवाती है। क्या अब उसकी सील भी तोड़ देनी चाहिए?

सरला: मैं क्या बताऊँ? क्या वो तय्यार है?

राजीव: यही तो पता करना है। मैं चाहता हूँ कि तुम ये पता करो। वैसे भी वो अभी जाग रही होगी। तुम्हारा क्या ख़याल है मेरा लंड ले लेगी वो?

सरला: अरे आजकल तो इससे भी छोटी लड़कियाँ मज़े से चुदवा रहीं हैं तो भला ये तो ओरल कर ही रही है। आप चोद डालो उसे।

राजीव: नहीं एक बार तुम थोड़ा चेक कर लो कि वो अभी तय्यार हुई है या नहीं?

सरला: अच्छा तो क्या अभी ये करना है?

राजीव: हाँ मैं चाहता हूँ कि अभी शिवा एक राउंड चारु को चोद ले तभी हम उस कमरे में जाएँ। तुम मुन्नी से बात करो और अगर लगे तो मुझे बुला लेना।

सरला हँसकर उसका लंड दबायी और उठ कर मुन्नी के कमरे में गयी। वहाँ मुन्नी एक किताब पढ़ रही थी। वो चाची को देखकर चौंक गयी।

वो: चाची आप? कुछ चाहिए क्या?

सरला मुस्कुरा कर उसके पास बिस्तर में बैठी और बोली: नहीं बस ऐसे ही, सोचा तेरा हाल चाल पूछ लूँ। कैसी है? मन लग गया? स्कूल कैसा है?

मुन्नी: हाँ चाची सब ठीक है। मन भी लग गया है। स्कूल भी अच्छा है।

सरला: स्कूल में लड़के तंग तो नहीं करते? ख़ास कर तेरे अमरूद इतने बड़े हो गए हैं ना? इसलिए पूछ रही हूँ। वह हाथ बढ़ाकर उसके एक अमरूद को सहला दी।

मुन्नी लाल होकर: आह चाची क्या बोल रही हो? आऽऽऽऽह छोड़ो ना। गुदगुदी होती है। वैसे मेरे इतने भी बड़े नहीं हैं। कई लड़कियों के तो मेरे से भी बहुत बड़े हैं । ज़्यादा लड़के उन्ही लड़कियों के पीछे भागते हैं । वह सरला का हाथ अपनी चूची से हटा कर बोली।

सरला: अरे तेरे भी जल्दी ही बड़े हो जाएँगे। शिवा और उसके पापा दबा तो रहे ही हैं ना। उसने अंधेरे में तीर मारा।

मुन्नी चौंक कर: नहीं तो आपको किसने कहा?

सरला: अरे दोनों बाप बेटा ही बोले। मस्त दबवाती है मुन्नी और चूसती भी है और ये भी चूसवाती है। सरला उसकी बुर को पजामा के ऊपर से दबा कर बोली।

मुन्नी: आऽऽऽऽह बड़े गंदे हैं दोनों। आपको सब बता दिया?

सरला: कहाँ तक पहुँची? सील टूट गयी क्या?

मुन्नी शर्मा कर नहीं में सिर हिलाई।

सरला: अच्छा कौन ज़्यादा मज़ा देता है? शिवा या उसके पापा?

मुन्नी शर्माकर: उफ़्फ़्फ़्फ चाची क्या क्या पूछ रही हैं आप?

मुझे दोनों अच्छे लगते हैं पर जीजू ज़्यादा पसंद हैं । वो बड़े प्यार से मज़ा देते हैं। वो जवान भी है ना।

सरला: तो किससे सील तुड़वाएगी ? जीजू से ?

मुन्नी शर्मा कर : जी ।

सरला: तो कब तुड़वाएगी? आज या बाद में?

मुन्नी: आऽऽज? नहीं चाची परसों छुट्टी है। कल तुड़वा लूँगी। क्योंकि एक दिन तो सही तरीक़े से चल नहीं पाऊँगी ना।

सरला: अच्छा कौन बताया तुमको कि ऐसा होगा?

मुन्नी: चाची मेरी सभी सहेलियाँ चुदवा चुकी हैं । वो ही बतायीं थीं।और वैसे भी दोनों बाप बेटा बहुत बड़ा हथियार लेकर घूम रहे हैं।

सरला: ठीक है कल चुदवा लेना। जैसी तुम्हारी मर्ज़ी। मैं शिवा को बोलूँगी कल तुम्हारी सील तोड़ देगा। अभी राजीव अंकल को बुलाऊँ थोड़ा सा ओरल कर लेना।

मुन्नी: वो कहाँ है?

सरला: बाहर इंतज़ार कर रहे हैं। बुलाऊँ?

मुन्नी ने शर्मा कर हाँ में सिर हिला दिया।

सरला उठकर बाहर आयी और राजीव को बोली: वो शिवा से भी मज़े ले रही है। जैसे आपसे ले रही है।

राजीव: ओह ऐसा क्या है? मस्त माल है गरम गरम।

सरला: वह बोली है कि वो शिवा से चुदवाएगी और वो भी कल। अभी आपको ओरल देने के लिए तय्यार है।

राजीव: चलो ये अच्छा ही है कि वो शिवा से सील तुड़वाएगी । वैसे भी चारु की सील तोड़ने में मुझे थोड़ा दिक़्क़त हुई थी। शिवा जवान है वही तोड़ेगा तो सही रहेगा।

सरला: जाओ आप अपना लौड़ा चूसवा लो आप। मैं यहाँ आपका इंतज़ार करती हूँ।

राजीव: अरे ऐसा थोड़े होगा तुम भी चलो ना अंदर । वह सरला का हाथ पकड़ा और अंदर ले गया। मुन्नी वहाँ बिस्तर पर बैठी थी। राजीव और सरला अंदर आए। राजीव मुस्कुराकर अपनी लूँगी खोल दिया। उसका लम्बा लौड़ा अभी नरम था और लटक रहा था। वो बिस्तर पर बैठा और मुन्नी को अपनी गोद में खींच लिया और उसे चूमने लगा। मुन्नी भी शर्मा कर उसकी छाती में मुँह छिपा ली। उसे सरला के सामने शर्म आ रही थी।

राजीव: सरला इसे तुम्हारे सामने शर्म आ रही है। इसकी झिझक दूर कर दो। वह सरला को अपने लंड की ओर इशारा करके बोला।
 


सरला मुस्कुराई और बिस्तर पर आकर बैठ गयी। अब राजीव ने मुन्नी को गोद से उतारा और बग़ल में बिठा दिया। मुन्नी की सांसें तेज़ चल रही थी। राजीव ने उसका टॉप उतारा और ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। उसका लौड़ा अब खड़ा होने लगा था। सरला ने उसे बड़े प्यार से पकड़ा और उसे मुठियाने लगी। फिर वो झुक कर उसके लौड़े को चूमने लगी। पूरी लम्बाई में चूमने के बाद वो उसके बड़े बड़े आंड भी चूम कर चाटने लगी। अब मुन्नी की झिझक भी कम होने लगी। वो अब राजीव के चुंबनों का जवाब देने लगी। राजीव के हाथ उसके ब्रा के अंदर जाकर उसके सख़्त अमरूदों का मज़ा ले रहे थे।

अब सरला बोली: लो मुन्नी अब तुम चूस लो।

मुन्नी अब बिना झिझके उठी और राजीव के पैरों के बीच आकर उसका लौड़ा हाथ में लेकर सहलाई और सरला की तरह ही उसे चूसने लगी। सरला ने उसकी ब्रा का हुक खोला और राजीव उसके सख़्त अमरूदों को दबाकर मस्ती से भर कर अपनी कमर उछालकर उसके मुँह को मानो चोदने लगा। सरला भी गरम हो कर राजीव के होंठ चूसने लगी। जल्दी ही राजीव एक हाथ से सरला के गाउन का ज़िपर नीचे किया और उसकी एक चूचि दबाने लगा और दूसरे हाथ से मुन्नी की चूचि बारी बारी से दबा रहा था।

मुन्नी अब ज़ोर ज़ोर से मुँह ऊपर नीचे करके उसका लौड़ा चूस रही थी। अब उसकी जीभ सुपाडे पर साथ ही घूम रही थी। अचानक राजीव आऽऽऽऽऽह करके अपना रस उसके मुँह में छोड़ने लगा जिसे वो मादक कमसिन पीते चली गयी। एक बूँद भी उसने नहीं छोड़ा और पूरा लौड़ा चाटकर साफ़ कर दी।

अब राजीव उसको लिटाया और उसके पाजामा को पैंटी के साथ उतार दिया। अब उसकी मासूम सी बुर को सरला को दिखाकर बोला: देखो क्या मस्त बुर है? ये ले लेगी शिवा का मूसल?

सरला ने उसकी बुर सहलाई और उसकी पूत्तियों को फैलायी और एक अंगुली डाल कर अंदर बाहर की। मुन्नी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। सरला: हाँ ले लेगी शिवा का मूसल, पर पहली बार का दर्द तो बर्दाश्त करना ही पड़ेगा। जैसे हम सबने बर्दाश्त किया था।

अब राजीव ने उसका हाथ हटाया और झुककर उसकी बुर पूरी लम्बाई में चाटा और फिर दोनों पैर उठाकर फैलाया और उसकी फाँकों को भी अलग करके अपनी जीभ और होंठ उसकी बुर के गुलाबी छेद में डाला और उसकी बुर की मस्त चुसाई करने लगा। अब कमरे में मुन्नी की आहें गूँजने लगीं। सरला ने भी उसके सख़्त अमरूदों को दबाया और उसके निपल्ज़ को मसला और मुन्नी उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ कर के अपनी गाँड़ उछालकर अपनी बुर को चूसवाने लगी। उसने राजीव का सिर पकड़ा और उसे अपनी बुर पर दबाने लगी। अब वो उंन्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न्न करके झड़ने लगी। राजीव उसका फ़ौवारे का मज़ा लेने लगा और उसका पूरा पानी पी गया। अब मुन्नी लस्त होकर बिस्तर पर पड़ी थी। राजीव और सरला ने उसे चूमा और उसके नंगे बदन पर चादर डाल दिया और सरला बोली: चलो अब तुम सो जाओ। गुड नाइट । राजीव भी उसे प्यार करके सरला के साथ बाहर ड्रॉइंग रूम में आकर बोला: चलो चारु की चुदाई देखते हैं ।

सरला: आप बैठो मैं देखती हूँ क्या चल रहा है।बेचारे आपके आने से झिझक ना जाएँ।

राजीव वहाँ बैठते हुए हँसकर बोला: चलो ठीक है तुम देख आओ।

सरला वहाँ जाकर दरवाज़ा खोली —

उधर शिवा चारु को लेकर कमरे में पहुँचा और उसको बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी बिस्तर पर आकर लेट गया। फिर उसे चूमते हुए बोला: यार चारु तुम तो मस्त खिलाड़ी निकली । मैं तो तुमको कुँवारी मान रहा था पर तुम तो पापा से चुदवा चुकी हो।

चारु शर्मा कर: वो क्या है ना पापा मुझे बहुत उत्तेजित कर देते थे तो जब वो मुझे चोदना चाहे तो मैं मना नहीं कर सकी। वैसे भी कोलेज में मेरी सभी सहेलियाँ चुदवा चुकी है। इसलिए मैंने भी सोचा कि मैं भी क्यों इस मज़े से वंचित रहूँ। और फिर ये तो घर की ही बात है। कोई बदनामी का भी डर नहीं है।

इस पर शिवा बोला: सच में तुम बहुत समझदार हो जो कि पापा से ही चुदवा ली। पापा तो मज़े से और धीरे से चोदें होंगे ना। बाहर वाला होता तो बिना तुम्हारे दर्द का ख़याल किए तुम्हारी बुर चीथड़े कर देता।

चारु: हाँ पापा ने बड़े आराम से किया और मुझे ज़्यादा दर्द नहीं हुआ। अब सिर्फ़ बातें ही करोगे प्यारे जीजू या कुछ मज़ा भी दोगे । वो उसके होंठ पर अपने होंठ रखकर बोली।

अब शिवा भी उसके होंठ चूसने लगा। दोनों जवानी की मस्ती में भीगने लगे। थोड़ी देर बाद शिवा उसके कपड़े निकालने लगा और चारु भी उसके कपड़े खोलने लगी। जल्दी ही दोनों नंगे हो गए और शिवा उसको मस्त चूचियों पर टूट पड़ा। वो मस्ती में भरकर मज़ा लेने लगी। जब शिवा के हाथ उसकी गाँड़ पर पहुँचे तो वो उनको दबाकर उसकी पिछवाड़े में एक ऊँगली डाला।

चारु चीहुंक उठी और उसके मुँह से निकल गया: आऽऽऽऽह आप तो बिलकुल शकील अंकल की तरह कर रहे हो।

शिवा चौंक और बोला: ये शकील अंकल वही ना जो टेलर है? क्या तुम उससे भी चुदवा चुकी हो?

चारु : आऽऽऽह हाँ । पापा ने उनकी पोती को चोदा था और अंकल ने मुझे। वो भी पीछे ऐसे ही ऊँगली कर रहे थे।

शिवा सोचा कि ये मैंने उनसे तो ही सीखा है क्योंकि जब मॉ को शकील अंकल चोदते थे तो ऐसे ही एक ऊँगली उनकी गाँड़ में डालते थे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ उसे सब याद आ रहा था। वो छिप कर सब देखता था।

अब शिवा बोला: ओह ऐसा तो पापा ने और किस किस से चुदवा दिया तुमको?

चारु: और कोई नहीं बस पापा और शकील अंकल से ही करवाई हूँ।

अब शिवा उसकी चूचियाँ चूसने लगा और फिर उसके साथ ६९ की पोज़ीशन में आ गया। दोनों अब करवट लेकर एक दूसरे के सामने थे पर उलटे थे। शिवा ने चारु की एक टाँग उठायी और उसकी कोमल मस्त बुर को सूँघने लगा। फिर बोला: उफ़्फ़्फ क्या मस्त गंध है तुम्हारी बुर की। फिर वो नीचे जाकर उसकी गाँड़ के छेद को भी सूँघा और मस्ती में आकर उसकी भूरि गाँड़ के कुँवारे छेद को अपनी जीभ से चाटने और कुरेदने लगा। उसकी एक ऊँगली उसकी बुर के अंदर बाहर होने लगी थी। अब चारु भी मस्ती में आकर उसका लौड़ा चूसने और चाटने लगी। वो उसके आंड भी चूस रही थी। चारु के हाथ शिवा के चूतरों पर थे और वो उनको दबाकर अपने मुँह की ओर खींच रही थी मानो कह रही हो मेरे मुँह को ज़ोर से चोदो। शिवा की कमर हिलने लगी और चारु भी अपनी कमर हिलाकर मस्ती से अपनी बुर चटवाने लगी। शिवा उसकी बुर चाटकर मस्ती से भर गया और उसके लौड़े ने प्रीकम छोड़ना शुरू किया जिसे चारु मज़े से उसे चाटकर पी गयी।

अब शिवा से नहीं रुका गया और वो उठा और चारु की टाँगो के बीच में आकर उसकी बुर में ख़ूब सा थूक लगाया और अपने लौड़े पर भी थूक मला । फिर उसने अपना सुपाड़ा उसके बुर के छेद में फँसाया और एक हल्का सा धक्का मारा और अपना आधा लौड़ा उसकी तंग बुर में पेल दिया। चारु आऽऽऽऽऽहह कर उठी।

फिर से शिवा ने एक धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर डालकर उसके ऊपर छा सा गया। अब उसके मस्त मम्मों को दबाकर वो उसे काफ़ी मस्त किया और फिर अपने लौड़े को हिलाकर उसे चोदने लगा। पलंग ज़ोर ज़ोर से चूँ चूँ कर रहा था और बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी।

तभी हल्का सा दरवाज़ा खुला और सरला अंदर झाँकी और उसे चारु पर सवार शिवा दिखाई दिया जो पूरी शिद्दत से उसे चोद रहा था। चारु ने सरला को देखा तो वह शर्मा कर मुँह फेर ली। सरला चुपचाप वापस आयी और आकर राजीव के पास बैठी और बोली: उफ़्फ़क मस्त पलंग तोड़ चुदाई चल रही है अंदर आपके कमरे में।

राजीव उसकी जाँघ सहलाकर बोला: अरे दोनों जवान है मज़ा तो लूटेंगे ही।

उधर चारु बोली: उइइइइइइइइ चाची आयीं थीं झाँक कर वापस चलीं गयीं हैं।

शिवा हाँफते हुए: ह्म्म्म्म हम्म यहीं रुक कर चुदाई देख लेती। ह्न्न्न्न्न्न्न ।

चारु: उन्नन उन्नन आऽऽऽऽह हाऽऽऽय्यय । मैं गयीइइइइइइइइइइ।

शिवा जल्दी जल्दी धक्के मारता हुआ बोला: मैं भीईईईईई।

अब दोनों शांत नंगे पड़े हुए साँस क़ाबू में कर रहे थे। चारु को अपनी बुर में शिवा का गीला मसाला बहुत अच्छा अहसास दे रहा था । वो बोली: उफ़्फ़्फ़्फ आप कितना माल डाल दिए हो अंदर? पापा का इतना नहीं निकालता।

शिवा : हाँ जवान आदमी का माल ज़्यादा होता है ना। पापा अब मेरे से २६ साल तो बड़े हैं ना। वैसे पापा पिल्ज़ तो दिए होंगे ना खाने के लिये वरना कहीं परेगनेंट ना हो जाओ।

चारु: हाँ दिए हैं और समझा दिया है कि कैसे खाना है।

फिर पता नहीं क्या हुआ शिवा को, कि वो ज़ोर से आवाज़ दिया: मम्मी ज़रा आइए ना।

चारु उठने लगी। तो वो उसे पकड़कर नीचे लिटा दिया।

अब सरला और राजीव अंदर आए और नंगेबदन लेटे हुए जोड़े को देखकर मुस्कुराए। चारु शर्मा रही थी पर शिवा बेशर्म सा अपना लम्बा लौड़ा एक तरफ़ को लटकाकर लेटा हुआ था। चारु ने अपनी जाँघें जोड़ ली थी।

शिवा: मम्मी चारु की बुर में मेरा माल पड़ा है उसे साफ़ कर दीजिए ना प्लीज़।

सरला मुस्कुराई और आकर चारु की जाँघें फैलायीं और उसके बीच बुर से बाहर आते हुए शिवा के वीर्य को देखकर बोली: आऽऽऽऽह क्या माल गिराया है बेटा तुमने? वो हाथ बढ़ाकर ऊँगली से उसका माल छुई और ऊँगली को मुँह में लेकर बोली: उम्म्म्म्म्म मस्त है।

फिर वो झुकी और उसकी बुर चाटने लगी । वो जीभ निकालकर एक एक बूँद चाट ली।

राजीव पास ही खड़ा सरला की हरकत को देख रहा था। जैसे ही चारु की बुर साफ़ करके सरला उठी वो बोला: अरे और शिवा का ये गीला लौड़ा कौन साफ़ करेगा?

सरला भी मुस्कुराई और अब खिसक कर शिवा के टांगों के पास आकर उसका नरम लौड़ा चाट कर साफ़ करने लगी और उसमें लगा रस साफ़ कर दी। फिर चटकारा लेकर बोली: म्म्म्म्म्म मस्त मज़ा आ गया। बड़ा स्वाद रस है तुम्हारा बेटा।

अब चारु उठकर बाथरूम को भागी और शिवा ने सरला को अपने ऊपर खिंचा और उसके होंठ चूसने लगा। राजीव अभी भी बिस्तर के पास खड़ा मुस्कुरा रहा था। वो हाथ बढ़ाकर सरला की मोटी गाँड़ दबा दिया। तभी चारु बाहर आइ और अपने कपड़े की तरफ़ हाथ बधाई। राजीव उसे पकड़ लिया और बोला: बेटी अभी से कपड़े पहन रही हो। तो इसका क्या होगा? वो अपनी लूँगी निकाल कर अपना लौड़ा हिलाकर बोला। फिर वो उसे अपने पास खींचा और उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया। कमसिन जवानी गरम लौड़े को छूते ही मस्त होने लगी। राजीव बोला: शिवा ज़रा खिसक ना। मैं भी चारु की लूँगा अभी।

शिवा हँसकर सरला के साथ लिपटा हुआ दो बार करवट लेकर बिस्तर के दूसरे कोने में चला गया और राजीव चारु को लेकर बिस्तर पर आ गया।

अब बिचारा पलंग दो दो जोड़ों की चुदाई झेलने वाला था। ———

 
राजीव चारु को अपने से लिपटा कर बोला: मज़ा आया अपने जीजू से चुदवा कर?

चारु उसके सीने में सिर छिपा कर: जी अंकल बहुत मज़ा आया। उफ़्फ़्फ़्फ जीजू तो बहुत हॉट हैं।

राजीव: आख़िर बेटा किसका है? वो उसके होंठ चूसते हुए बोला।

चारु भी अपना हाथ उसके जाँघों के ऊपर छू रहे उसके आधे खड़े लौड़े पर रखी और उसे हल्के से दबाने लगी।

राजीव भी उसके होंठ चूसते हुए उसके गले और कंधे पर लव बाइट देने लगा। नीचे आते हुए उसकी मस्त चूचियों को दबाने और चूसने लगा। चारु अब उसके लौड़े को मुठियाने लगी और वो उसके हाथ में अपना आकार बढ़ाने लगा।

उधर शिवा भी सरला को अपने से चिपटाए हुए पड़ा था और दोनों के होंठ एक दूसरे से जुड़े थे। सरला करवट लेकर लेटी थी और उसकी मोटी गाँड़ राजीव को दिख रही थी। शिवा के हाथ उसके पीठ से होते हुए उसकी मस्त उभरे गाँड़ पर आ गए और वो उनको दबाकर मस्ती से भर कर बोला: मम्मी आपके जैसे मस्त गाँड़ मैंने कभी नहीं देखा।

राजीव हँसकर: वैसे तेरी माँ की गाँड़ भी ऐसी ही मस्त थी बेटा। बहुत मज़ा आता था उसे दबाने और चोदने में।

शिवा सोचा कि हाँ माँ की भी गाँड़ बिलकुल ऐसी ही मस्त गोरी और बड़ी बड़ी थीं। उफ़्फ़्फ कितनी बार देखा था उनको संदीप अंकल से और ड्राइवर अनवर

(( यहाँ एक परिवर्तन कर रहा हूँ क्योंकि मुझे एक सलाह दी गयी है कि ड्राइवर का नाम अनवर की जगह नीरज होना चाहिए मैं इस सलाह को मान लिया हूँ और यह परिवर्तन किया हूँ ))

से चुदवाते हुए। वो दोनों तो उनकी गाँड़ भी मारते थे। वो माँ की गाँड़ का सोचकर पूरा उत्तेजित हो गया और सरला ने नीचे हाथ ले जाकर अपने दामाद का लौड़ा पकड़ा और सहलाने लगी। वो भी अब उसकी चूचियाँ चूसकर उसे मस्त करने लगा। जल्दी ही सरला की आऽऽह गूँजने लगी।

उधर चारु भी अपनी चूचियों और निपल्ज़ के मर्दन और चुशन से मस्त होकर हाऽऽय्य करने लगी। अब वो करवट में लेटी हुई अपनी एक टाँग उठाकर राजीव की कमर पर रख दी। राजीव समझ गया कि वो क्या चाहती है। वो अपना हाथ नीचे ले गया और उसकी बुर सहलाकर अपनी २ उँगलियाँ अंदर डाल कर उसकी बुर की गरमी से मस्त होकर उनको अंदर बाहर करने लगा। अब चारु खुलके आऽऽऽऽह करने लगी। राजीव का खड़ा लौड़ा उसके हाथ में अब पूरा तन चुका था। वो मोटे सुपाडे पर अंगुली फिराकर मस्त होकर बोली: आऽऽऽऽऽह अंकल अब करिए ना प्लीज़।

राजीव: क्या करूँ मेरी बिटिया रानी?

चारु : हाऽऽऽऽय्य अंकल आप बहुत गंदे हैं उन्ननन चोदिए ना प्लीज़ ।

तभी राजीव ने देखा कि सरला अपनी मोटी गाँड़ हिला रही थी। वो समझ गया कि शिवा ने भी उसकी बुर उँगलियों से चोदना शुरू किया होगा।

शिवा: मम्मी आपको डोग्गी पोज़ीशन में चोदना है।

सरला हँसी: ठीक है जैसे चोदना हो चोद लो बेटा पर जल्दी करो बहुत गरम हो गयी हूँ ।

शिवा: मम्मी क्या गरम हो गयी है?

सरला: बदमाश मेरी बुर बहुत गरम हो गयी है। बस अब चल उसे ठंडी कर इस मूसल से । वो उसके लौड़े को दबाकर बोली।

अब शिवा उससे अलग हुआ और उसको पीठ के बल लिटाकर उसकी छाती पर अपने दोनों पैर फैलाकर उकड़ूँ बैठा और अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने करके सुपाडे को उसके होंठों पर फिराने लगा। सरला भी किसी प्यासे की तरह अपना मुँह खोल दी और जीभ निकालकर उसके सुपाडे को चाटने और होंठों से चूसने लगी। अब शिवा ने अपना लौड़ा उसके मुँह में डाला और मानो उसके मुँह को चोदने लगा। सरला भी अपने गालों को सिकोड़ कर उसे मस्ती से चूसने लगी। जल्दी ही वो उसे डीप थ्रोट भी देने लगी। साथ ही वो उसके आंड भी सहलाने लगी। शिवा को लगा कि अब उसका निकल ना जाए तो वह अपना लौड़ा निकाल कर पीछे हो गया।

शिवा: मम्मी पेट के बल लेटिए ना और अपनी गाँड़ उठा दीजिए।

सरला: बेटा दो तकिए रख दे मेरे पेट के नीचे ।

शिवा ने तकिए रखे और सरला अपनी गाँड़ उठाकर लेट गयी। शिवा उसके पीछे आया और बोला: उफ़्फ़्फ मम्मी क्या मस्त गाँड़ और चूत है आपकी? म्म्म्म्म्म्म। वो वहाँ गाँड़ की दरार में पूरी लम्बाई में हाथ फेरा और गाँड़ के छेद और चूत के अहसास को पाकर मस्ती में आकर बोला: मम्मी अभी तो मैं आपकी चूत और गाँड़ चाटूँगा। चुदाई तो इसके बाद ही होगी।

सरला भी मस्ती से अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: ठीक है बेटा जो करना है करो।

शिवा झुका और उसकी गाँड़ के मोटे मांसल हिस्से को दबाकर दाँत से काटने लगा। सरला आऽऽऽऽऽऽऽह कर उठी। अब वो उसके गाँड़ की दरार में अपना मुँह डाला और उसके भूरे से सिकुड़े से छेद को चाटने लगा और अपनी उँगलिया उसकी चूत पर चलाने लगा। अब सरला उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कर उठी। जल्दी ही उसकी जीभ सरला के पूरे दरार में लम्बाई में चलने लगी और सरला मस्ती से अपनी गाँड़ हिलाने लगी। अब उसकी तीन उँगलियाँ उसकी चूत की गहरायियाँ नाप रहीं थीं और सरला की मस्ती का ठिकाना नहीं था।

राजीव सरला की उठी हुई गाँड़ देखकर चारु से बोला: बेटी इस पोज में तुम भी चुदवाओ ना, मज़ा आएगा।

चारु ने शिवा का मुँह सरला की गाँड़ में देखा और सरला की मस्ती देखी तो बोली: आऽऽऽह अंकल ठीक है आप भी ऐसा ही करो।

अब वो भी ऐसे ही पेट के बल लेट गयी और अपनी गाँड़ ऊपर उठा ली। अब राजीव भी उसके पीछे आकर उसकी गाँड़ के छोटे से छेद को देखकर मस्ती से वहाँ ऊँगली लाकर सहलाया और बोला: उफ़्फ़्फ़्फ बिटिया क्या रेशमी गाँड़ है तुम्हारी। बहुत मज़ा आएगा तुम्हारी गाँड़ मारने में। फिर वो नीचे उँगलियाँ ले जाकर उसकी बुर को मूठ्ठी में दबाकर मस्ती से भरकर उसकी गाँड़ को चाटने लगा और जल्दी ही वो भी पूरी लम्बाई में उसकी गाँड़ और चूत चाटकर मस्त कमसिन जवानी को मज़े देने लगा। चारु भी अब आऽऽऽऽऽऽहह उइइइइइइइइ करने लगी। वो अपनी चाची को देखी जो अपने दामाद से मज़े कर रही थी। उसने देखा कि अब शिवा ने अपना मोटा लौड़ा अपनी सास की चूत की गहराई में पेल दिया था और उसे बुरी तरह चोदने लगा था। चुदाई से पूरा पलंग हिले जा रहा था । सरला की उन्ननन उन्ननन गूँज रही थी। तभी उसने महसूस किया कि अंकल ने अपना मुँह उसकी गाँड़ की दरार से हटा लिया है और फिर उसे उनके गरम सुपाडे का अहसास अपनी चूत के छेद पर हुआ। जल्दी ही अंकल ने अपना सुपाड़ा उसके छेद के अंदर किया और दबाकर एक धक्के में आधा लौड़ा अंदर कर के चारु की आऽऽऽऽऽहह निकाल दिए। फिर दूसरा धक्का और पूरा लौड़ा अंदर । वो उइइइइइइइइ कहकर अपनी गाँड़ पीछे की ताकि एक एक इंच लौड़ा उसकी बुर में चले जाए और उसकी मस्ती को और ऊँचाइयों पर ले जाए। अब राजीव ने भी अपनी चुदाई शुरू की।

अब पलंग का बुरा हाल था । दोनों चाची भतीजी मज़े से बाप बेटे से गाँड़ हिला हिला कर चुदवा रहीं थीं। कमरा बहुत गरम हो गया था। थप्प ठप्प की आवाज़ें निकल रहीं थी जो उनके मोटी गाँड़ और जाँघों के टकराने से आ रहीं थीं। साथ ही चूत से फ़च फ़च की आवाज़ भी आए जा रही थी।

सरला आऽऽऽऽऽह करके अपने निप्पल्स मसल रही थी। और राजीव अपने दोनों हाथों में लेकर चारु की चूचियाँ मसल रहा था और पीछे से धक्के भी मारे जा रहा था।

राजीव: शिवा सरला की चूचियाँ मसल यार। देख बिचारि ख़ुद ही दबा रही है अपनी चूचियाँ ।

शिवा ने अपने पापा को देखा कि वो चारु की चूचियाँ मसल रहे थे सो वो भी मुस्कुरा कर अपना हाथ नीचे ले गया और सरला की नीचे की ओर झूल रहीं मोटी चूचियाँ दबाने लग।

अब सरला और चारु की सिसकारियाँ गूँजने लगीं।

सरला: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ और चोओओओओओओदो फाऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ आऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽह बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽऽहह मैं गयीइइइइइइइइइइ

उधर चारु भी चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽऽह अंकल और जोओओओओओओर से करोओओओओओओओओ नाआऽऽऽऽऽऽ उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मैं गयीइइइइइइइइइ।

जब दोनों चाची भतीजी झड़ रहीं थीं तब कमरे का दरवाज़ा खुला और मालिनी अंदर आयी। वो देखी की कैसे उसका पति और उसका ससुर उसकी माँ और उसकी कज़िन को चोद रहे हैं । वो बोली: उफ़्फ़्फ़्फ आप लोग थोड़ा कम आवाज़ नहीं कर सकते। मैं गुड़िया को दूध पिलाने उठी और आप लोगों का शोर सुन कर यहाँ आ गयी।

तभी राजीव ने अपना पानी उसकी बुर में छोड़ा और चारु के बग़ल में लुढ़क कर कहा: आऽऽऽऽऽह मज़ा आ गया बिटिया क्या मस्त टाइट चूत है तुम्हारी।

मालिनी ने देखा कि चारु अब भी अपने पेट के बल ही थी। और उसकी चूत से सफ़ेद रस बाहर आ कर गिर रहा था।

अब वो शिवा को देखी और वहाँ सरला भी झड़कर अपने पेट के बल ही गिरी हुई थी और तभी शिवा ने अपना पूरा खड़ा गीला लौड़ा बाहर निकाला उसकी चूत से और मालिनी से बोला: आऽऽऽऽऽह जानू ज़रा उस ड्रॉर से लूब की शीशी निकाल कर देना। वो अपना लौड़ा सरला की गाँड़ के छेद पर रख कर उसे दबाकर अपनी मंशा ज़ाहिर कर दिया।

मालिनी लूब निकाल कर उसको देती हुई बोली: मम्मी अगर आप थक गयी हो तो बोल दो , शिवा आपकी गाँड़ नहीं मारेगा ।

तब तक शिवा ने अपनी दो उँगलियों में लूब लगा कर सरला के पिछवाड़े में घुसेड़ दिया और उनको धीरे से अंदर बाहर करने सरला को मस्त करने लगा।

सरला मालिनी से बोली: आऽऽऽऽह बेटी अब तू तो अभी इसे कुछ दे नहीं सकती तो मुझे और चारु को ही तेरे पति का ख़याल रखना है अभी। आऽऽऽऽऽह करने दे उसे अपने मन की। हाऽऽऽऽऽय्यय मार ले बेटा मेरी गाँड़ भी। उइइइइइइ । वो अपनी गाँड़ हिलाकर बोली जिसमें शिवा की दो उँगलियाँ अब आराम से अंदर बाहर हो रहीं थीं। अब शिवा ने अपने लौड़े पर भी लूब लगाया और ट्यूब का मुँह उसके गाँड़ के छेद पर रखकर लूब उसके छेद में भी डाला और अब अपना सुपाड़ा उसके छेद में रखकर दबाने लगा। ज़रा से विरोध के बाद छेद का मुँह खुल गया और लौड़ा अंदर समाता चला गया।

सरला: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना मोटा है तेरा आऽऽऽऽऽऽह बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ ।आऽऽऽऽऽऽऽज्ज फटेगी मेरी गाँड़ उईईईईओओओओओओओ ।

अब शिवा उसकी गाँड़ को पूरे मज़े से चोदेने लगा। सरला की सिसकारियाँ फिर से गूँजने लगीं और पलंग फिर से चूँ चूँ करने लगा। चारु मालिनी और राजीव मज़े से सरला को शिवा से गाँड़ फडवाते हुए देख रहे थे। मालिनी का भी हाथ मैक्सी के ऊपर से ही अपने बुर के ऊपर चला गया। वो वहाँ हल्के से दबा उठी।

राजीव का हाथ अब चारु की गाँड़ को सहलाने लगा और एक ऊँगली में थूक लगाकर उसके पिछवाड़े के छेद में डालने लगा। चारु उइइइइइ कह कर बोली: आऽऽऽऽह अंकल दुखता है ना।

मालिनी मुस्कुरा कर बोली: चारु जल्दी ये दोनों तेरी गाँड़ भी मारेंगे । अभी से तय्यार हो जा। ये लो पापा अपनी ऊँगली में लूब लगा लो और फिर ऊँगली डालो। राजीव ने लूब लिया और एक ऊँगली में लगाकर चारु के पिछवाड़े में डाला और अब हिलाने लगा।

चारु : आऽऽऽह अंकल म्म्म्म्म्म्म।

 


मालिनी चारु के पास आकर खड़ी हुई और बोली: अच्छा लग रहा है ना अब ?

चारु: हाँ अब अच्छा लग रहा है आआईईइ ।

तभी राजीव मुस्कुराकर मालिनी को बोला: बहू तुम भी घूम जाओ और अपनी मैक्सी उठाओ और अपनी गाँड़ दिखाओ।

मालिनी मुस्कुराती हुई बोली: क्या हुआ पापा ? आपको पता है ना मुझे सब मना है।

राजीव : अरे बहु मैक्सी तो उठाओ देखें तुम्हारी गाँड़ का क्या हाल है? बच्ची तो तुमने चूत से जनी है गाँड़ तो सलामत होगी। दिखाओ तो ज़रा।

मालिनी हँसकर घूम गयी और अपनी मैक्सी उठाकर बोली: पापा मैंने डॉक्टर से पूछा था कि क्या पीछे ले सकती हूँ तो वो बोली थी कि नहीं क्योंकि पीछे लेने से भी चूत पर अंदरूनी दबाव तो पड़ेगा ही। अब आगे आप देख लो।

राजीव उसकी गोल गोल गाँड़ को सहला कर बोला: आऽऽऽह बहू मस्त हो गयी है तुम्हारी गाँड़। अच्छी भर गयी है। फिर वो उसकी गाँड़ को फैलाकर बोला: बहू ह्म्म्म्म्म्म्म क्या मस्त छेद है । वो छेद पर उँगली फेर कर मस्ती से बोला। उसकी एक ऊँगली अभी भी चारू की गाँड़ में ही थी।

राजीव: बहू ज़रा लूब देना तो ।

मालिनी ने उसे लूब दिया और वो अपनी दो उँगलियों में लूब लगाकर मालिनी की गाँड़ में पहले एक ऊँगली डाला और उसे धीरे से अंदर किया। मालिनी आऽऽऽऽह कर उठी। अब वो दूसरी ऊँगली भी डाला और अब मालिनी की उइइइइइइइइ निकल गयी।

राजीव: बहू चूत में कुछ दबाव महसूस हो रहा है क्या?

मालिनी: आऽऽऽऽह पापा अभी नहीं हो रहा है। दो उँगलियों से थोड़े कुछ होगा। पर हाँ आपका मोटा लौड़ा अंदर डालोगे तो चूत पर दबाव ज़रूर पड़ेगा।

अब राजीव एक हाथ से चारु की गाँड़ में एक ऊँगली और मालिनी की गाँड़ में दो ऊँगली करने लगा।

उधर शिवा सरला की गाँड़ पूरे ज़ोर से मार रहा था और सरला अब फिर से आऽऽऽऽऽऽऽह बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ फ़ाआऽऽऽऽऽड़ देईएएईएएईए मेरीइइइइइइइ गाँड़ चिल्ला रही थी।

तभी मुन्नी की नींद आवाज़ों से खुली और वो बाहर आकर राजीव के बेडरूम की खिड़की के पास आकर हल्का सा पर्दा हटाई और उसकी साँसे मानो थम गयीं। उफ़्फ़्फ क्या दृश्य था। उसका जीजू अपनी सास की गाँड़ मार रहा था और उसकी चाची मज़े से चिल्ला रही थी। उधर अंकल अपनी बहू की गाँड़ में ऊँगली कर रहे थे और बहू मज़े से अपनी मैक्सी उठाकर अपनी गाँड़ नंगी करके मज़ा ले रही थी। और उसकी बहन भी पूरी नंगी पड़ी थी और अंकल से वो भी अपने गाँड़ में उँगली करवा रही थी। चारु पीठ के बल लेटे हुए अंकल से करवट लेकर चिपकी हुई थी और साफ़ दिख रहा था कि वो हल्के हल्के से अपनी गाँड़ हिलाकर अपना मज़ा बयान कर रही थी। अंकल की उँगली उसकी चिकनी गाँड़ में अंदर बाहर हो रही थी। और उधर मालिनी भी अपनी गाँड़ हिलाकर अपने आनंद का इजहार करने लगी। उसकी गाँड़ में भी उसके ससुर की दो उँगलियाँ आराम से जा रहीं थीं।

मुन्नी मस्ती में आकर अपने पाजामा को नीचे करी और पैंटी में हाथ डालकर अपनी बुर सहलाती हुई अचानक अपने मुँह में एक ऊँगली डाली और उसे गीली करके अपनी गाँड़ के छेद में डालने की कोशिश करने लगी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितनी जलन हो रही है एक ऊँगली डालने में वो सोची और यहाँ चाची शिवा का मोटा मूसल क्या मज़े से ले रही हैं ।उसने ज़बरदस्ती एक ऊँगली अंदर डाली अपने टाइट चिकनी गाँड़ के छेद में और वो अपनी सिसकी दबाकर मस्ती से भर गयी जब वो ऊँगली अंदर करने में सफल हो गयी। अब वो आऽऽऽऽऽहहह करके उसे अंदर बाहर करके मस्ती से भरने लगी।

अंदर का दृश्य अब भी उतना ही मादक था। तभी शिवा ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। और वो सरला के ऊपर गिर सा गया। फिर वो पलट कर पीठ के बल होकर लेटा और सरला की गाँड़ से उसका सफ़ेद रस बाहर आने लगा।

राजीव ने चारु की गाँड़ से ऊँगली निकाली और उसे सूँघते हुए बोला: ह्म्म्म्म मस्त गंध है बेटी। अच्छा चारु बेटी देखो सरला की गाँड़ से शिवा का रस कैसे बाहर आ रहा है। जाओ चाट कर चाची की गाँड़ साफ़ कर दो।

चारु की आँख वासना से लाल हो रही थीं। वो उठकर अपनी चाची की उठी हुई गाँड़ के पास आयी और जीभ से उसकी गाँड़ से निकालता हुआ सफ़ेद रस चाटकर पीती हुई मस्ती से भरने लगी। मुन्नी की आँख फैल गयीं थीं । ये क्या हो गया है दीदी को ? कितने मज़े से चाची की गाँड़ चाट रही हैं। जीजू का पूरा रस पी रही है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आऽऽऽऽह कहकर वो अपनी गाँड़ में ऊँगली करके मस्त होती गयी। चूत भी पूरी बह रही थी। क्या गरम हो चुकी थी उसकी प्यारी सी छोटी सी कुँवारी मुनिया भी।इसके साथ ही वो भी झड़ने लगी।

उधर राजीव मालिनी को बोला: बहू मज़ा आ रहा है?

मालिनी: आऽऽऽह पापा अब लगता है लूब सूख गया है अब जलन सी हो रही है। रहने दीजिए बस करिए।

राजीव ने अच्छा बहू कहकर जब अपनी ऊँगलियाँ निकाली तो पककक्क सी आवाज़ के साथ मालिनी की गाँड़ का छेद फिर से बंद हो गया। राजीव ने अपनी उँगलियाँ सूँघी और बोला: दोनों बहनों की गाँड़ की गन्ध एकदम एक जैसी है।

इस पर सब हँसने लगे और मालिनी ने अपनी मैक्सी नीचे की और बोली: चलो अब सोना नहीं है क्या ? मुझे तो नींद आ रही है। जिसे मेरे साथ सोना है आ जाए। शिवा बोला : चलो मैं फ़्रेश होकर आता हूँ।

चारु उठते हुए बोली: अंकल मैं तो अपने कमरे में जा रही हूँ।

राजीव: सरला तुम यहीं मेरे पास सो जाओ।

सरला हँसकर: एक शर्त पर कि अब आप कोई शरारत नहीं करेंगे।

राजीव: अरे ये दोनों बहिनों ने मुझे दो बार झाड़ दिया है। अब औक़ात नहीं है और कुछ करने की।

सरला: और आपके बेटे ने तो एक राउंड में ही मेरे तीनों छेद घायल कर दिए हैं ।

इस पर सब हंस पड़े और फिर उस रात कुछ ख़ास नहीं हुआ। मुन्नी चारु के आने के पहले ही अपने बिस्तर पर आ कर सो गयी।

राजीव सोते हुए नीरज के बारे में सोचा कि जल्दी ही उसे बुलाने का समय आ रहा है। आज वो अपने आप को थका सा महसूस कर रहा था। सरला के जाने के बाद मालिनी और उसकी दो कमसिन जवानियों को सम्भालना अब उसके बस की बात नहीं थी। वैसे भी दिन में शिवा तो दुकान में ही रहेगा।

तभी उसे याद आया कि मुन्नी की बुर का उद्घाटन का भी समय आ गया है। वो शिवा से अपनी नथ उतरवाना चाहती है। इसका भी इंतज़ाम करना होगा।

यह सोचते हुए उसकी आँख लग गयी ।

अगली सुबह राजीव उठा तो सरला बिस्तर पर नहीं थी। वो उठा और फ़्रेश होकर बाहर ड्रॉइंग रूम में आया । वहाँ सरला और मालिनी चाय पी रहे थे। सरला उसके लिए भी चाय निकाली और बोली: नींद तो मस्त आयी आपको। सुबह मैं जब उठी तो लगता है आप मस्त सपना देख रहे थे और आपका पूरा खड़ा था और लूँगी से बाहर भी आ गया था।

मालिनी हँसकर: यही हाल शिवा का भी था । उसने जो हाफ़ पैंट पहनी थी उसमें से उसका सुपाड़ा बाहर आकर झाँक रहा था। मैंने उसे दबाया तो वो उठ गए । मैंने कहा कि सपने में किसे चोद रहे थे। तो वो हँसकर करवट लेकर फिर सो गए।

सरला हँसते हुए: बाप बेटा एक जैसे हैं । हर वक़्त खड़ा किए रहते हैं।

तभी सरला का फ़ोन बजा और वो बोली: लो एक और साँड़ उठ गया। हेलो राजेश कैसे हो बेटा?

राजेश:—

सरला: हाँ हाँ मैं भी तुमको बहुत मिस कर रही हूँ बेटा।

राजेश-

सरला: हाँ हाँ बस तुम प्लान के हिसाब से लेने आ जाना। अरे बेटा बस अब तीन चार दिन की ही तो बात है। मेरे राजा बेटा अप्सेट नहीं होओ । हम जल्दी मिलेंगे। अच्छा बाई । लव यू ।

फ़ोन काट कर सरला: ये भी मेरे बिना एक दिन भी नहीं रह सकता। बिलकुल पागल है मेरे पीछे।

राजीव उसकी जाँघ दबाकर बोला: अरे जानू तुम चीज़ ही ऐसी हो कितुमको सब खा जाना चाहते हैं । वह उसके गाल चूमते हुए बोला।

मालिनी: पापा आप मेरी मम्मी को खा मत जाना।

इस बात पर सब हँसने लगे। अब मालिनी बोली: मै मुन्नी को उठाती हूँ। उसको स्कूल जाने का है।

सरला: चलो मैं भी उसका टिफ़िन बना देती हूँ।

मुन्नी आँख मलती हुई मालिनी के साथ बाहर आई और बाथरूम चली गयी।

बाथरूम से आकर वो सोफ़े पर बैठने लगी तो राजीव ने उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसके गाल चूमकर बोला: नींद खुली या नहीं ?

मुन्नी: अंकल बिलकुल मन नहीं है स्कूल जाने का । प्लीज़ आज दीदी को बोल कर छुट्टी दिलवा दीजिए ना।

राजीव ने उसे गोद से उतारा और अपने बग़ल में बिठा लिया ।

मालिनी आयी तो राजीव बोला: बिटिया आज स्कूल नहीं जाना चाहती बोलो क्या कहती हो?

मालिनी जो कि सामने बैठी थी, चाय पीते हुए: बिलकुल छुट्टी नहीं मिलेगी स्कूल तो जाना ही होगा। चलो तय्यार हो।

अचानक मालिनी की नज़र उसके स्कर्ट के ऊपर पड़ी। वो बोली: अरे रात में तो तुमने पाजामा पहना था ये स्कर्ट कब पहन लिया। मुन्नी क्या बताती कि रात को पाजामा गीला हो गया था तो उसने उसे बदलकर स्कर्ट पहन लिया था। वो बोली: वो दीदी गरमी लग रही थी ना इसलिए बदल लिया था।

अब राजीव उसकी पीठ सहलाया और बोला: बिटिया दीदी नहीं पिघल रही है चलो तय्यार हो जाओ।

मुन्नी ने अपना पैर शायद फैलाया और तभी मालिनी की आँख उसकी स्कर्ट के अंदर गयी और वो देखी कि मुन्नी ने पैंटी नहीं पहनी है।उसकी चिकनी छोटी सी बुर बहुत सुंदर दिख रही थी। वो सोची कि उफ़्फ़्फ़्फ ये लड़की भी ना- शायद ज़्यादा ही गरम हो रही है। वो सोची कि इस घर में जहाँ बाप बेटा इतने हॉर्नी हैं इसका क्या हाल होगा?

उसे अभी पता नहीं था कि उसका अपना ही पति कल ही इस छोटी सी मस्त कमसिन जवानी की कुँवारी बुर की धज्जियाँ उड़ाने वाला है।

 
मुन्नी नहा कर तय्यार होकर स्कूल ड्रेस में बहुत प्यारी लग रही थी । सरला उसको नाश्ता कराई और डिब्बा देकर बोली: बेटी तेरी कल छुट्टी है ना?

मुन्नी: जी चाची ।

सरला: फिर शिवा को बता दूँ कि आज रात वो तेरी सील तोड़ देगा।

मुन्नी के गाल गुलाबी हो गए और वो शर्मा कर हाँ में सिर हिला दी। सरला ने ख़ुशी से उसके गाल चूम लिए।

तभी राजीव भी अपने कमरे से फ़्रेश होकर आया और मुन्नी के गाल चूमकर बोला: वाह बिटिया स्कूल के लिए रेडी?

सरला: सिर्फ़ स्कूल के लिए ही नहीं बल्कि रात जो शिवा से चुदवाने के लिए भी रेडी ।

राजीव उसके बग़ल में बैठा और उसकी जाँघ को स्कर्ट ऊपर करके सहलाया और मुन्नी ने भी मस्ती में अपनी टाँगें खोल दीं। राजीव उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से दबाकर: वाह तो आज इसकी सील टूट ही जाएगी। सरला आज रात को एक स्पेशल प्रोग्राम करो इसको लड़की से औरत बनाने का।

मुन्नी शर्मा कर खड़ी हुई और राजीव का हाथ हटाकर : आऽऽह अंकल अभी नहीं प्लीज़। स्कूल से आने के बाद जो करना हो कर लीजिएगा।

राजीव ख़ुश होकर: ठीक है बिटिया जाओ । ऑल दी बेस्ट । वह उसके सिर को झुका कर उसके होंठ चूमकर बोला।

मुन्नी हँसती हुई बाई कहकर बाहर को भाग गयी ।

मुन्नी के जाने के बाद मालिनी किचन से बाहर आयी और राजीव को नाश्ता देकर बोली: मुन्नी गयी?

राजीव: हाँ चली गयी और रात को शिवा से सील तुड़वाने को भी तय्यार हो गयी है। रात को जश्न होना चाहिए।

तभी शिवा भी बाहर आया और उसके कान में जश्न शब्द पड़ा तो पूछा: कैसा जश्न?

राजीव: अरे बढ़िया पार्टी होनी चाहिए।

शिवा खड़े खड़े ही एक सेब खाता हुआ बोला: किस ख़ुशी में ?

मालिनी हँसकर: आपकी और मुन्नी की सुहाग रात की ख़ुशी में।

शिवा : वाऽऽह सच क्या आज मुन्नी मुझसे चुदवाएगी? आप लोगों ने उसकी मर्ज़ी जान ली है ना?

ये कहते हुए उसने अपने तनाव में आ रहे लंड को लोअर के ऊपर से दबा दिया। सबने देखा कि वहाँ एक अच्छा ख़ासा तंबू बन गया था।

राजीव: हाँ हाँ वो एकदम तय्यार है । वो आज रात चुदवाएगी क्योंकि कल परसों स्कूल में छुट्टी है। सो अगर लँगड़ा कर भी चली तो घर में रहेगी।कोई और दिन चुदवाएगी तो स्कूल में सब पूछेंगे कि किससे चुदी?

शिवा: वाह बड़ी तगड़ी प्लानिंग की है मुन्नी ने।

मालिनी: फिर जश्न का क्या हुआ?

सरला: ठीक है मुन्नी को मैं तय्यार कर दूँगी रात के लिए।

मालिनी: मैं रात का खाना बाहर से मँगा लूँगी।

राजीव: मैं बढ़िया वाइन ले आऊँगा। सब मस्ती में झूमेंगे।

शिवा: अरे वाह आप सबने तो कुछ ना कुछ करने की प्लानिंग कर ली। मैं क्या करूँ?

मालिनी: आप अपना लंड तय्यार रखो मुन्नी की टाइट चूत के लिए। ये कहते हुए उसने लोअर के ऊपर से उसके आधे खड़े लंड को दबा दिया।

इस बात पर सब हँसने लगे।

शिवा नाश्ता करके अपने कमरे में जाकर दुकान जाने के लिए तय्यार होने लगा। तभी मालिनी अंदर आयी। वो अभी सिर्फ़ एक चड्डी में था और उसका लौड़ा अभी भी रात को मुन्नी की कुँवारी मुनिया का सोचकर खड़ा था। मालिनी आकर इसका लौड़ा दबाकर बोली: मैं एक सुंदर सा हार आपको दूँगी जो पापा ने मुझे दिया है। आप उसे मुन्नी को पहना देना। वो ख़ुश हो जाएगी।

शिवा: थैंक्स डार्लिंग पर बेचारी चारु को कोई गिफ़्ट नहीं मिली आख़िर वो भी तो पापा से चुदवाई थी।

मालिनी: ठीक है मैं उसे भी पापा से कुछ दिलवा दूँगी।

अचानक शिवा ने मालिनी को अपनी बाँह में लेकर पूछा: जानू तुम ग़ुस्सा तो नहीं हो? ये जो सब चारु या मुन्नी के साथ हो रहा है?

मालिनी: नहीं वैसे मुझे ख़ुशी है कि घर की बात घर में ही है । वरना ये अपनी जवानी बाहर में दूसरों को लुटातीं। जो हो रहा है सही हो रहा है। मैं बहुत ख़ुश हूँ कि आपको और पापा को मेरी कमी नहीं खल रही है।

अब शिवा मालिनी के होंठ चूसने लगा और उसकी बड़ी बड़ी गाँड़ दबाने लगा। थोड़ी देर बाद मालिनी बोली: दुकान नहीं जाना है क्या? फिर उसके लौड़े को सहला कर बोली: चूस दूँ क्या अभी?

शिवा: आऽऽऽह नहीं रात के लिए माल इकट्ठा करता हूँ। ठीक है ना?

मालिनी हँसकर बाहर चली गयी।

बाहर अब चारु नहा कर आ गयी थी। राजीव उसे भी अपनी गोद में बिठाकर बोला: आज तुम्हारी बहन की नथ शिवा उतारेगा । ठीक है ना? तुम शिवा से गिफ़्ट लेना मुन्नी की नथ उतराई की।

चारु ने अपनी गाँड़ के नीचे राजीव के आधे खड़े लौड़े का अहसास किया और बोली: आऽऽह आपने भी तो मेरी नथ उतारी थी, मुझे क्या दिया?

राजीव उसकी चूचियाँ दबाकर: बिलकुल सही कहा तुमने। आज मैं ये उधारी भी चुका दूँगा। वो अब उसकी सलवार के अंदर हाथ डाला और पैंटी के अंदर से उसकी बुर को सहलाकर बोला: उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त बुर है हमारी रानी बिटिया की।

तभी सरला किचन से आयी और बोली: उफ़्फ़्फ आप भी ना । छोड़िए उसे अभी कोलेज जाने दीजिए। रात को ये सब कर लीजिएगा।

राजीव: रात को क्यों। ये दोपहर को वापस आएगी तभी कर लूँगा।

तभी मालिनी आयी और बोली: नहीं आज दोपहर को कोई मस्ती नहीं होगी। सब लोग अपना अपना माल बचा कर रखो रात के लिए। ऐसा शिवा बोले हैं अभी।

इस बात को सबने मज़े से सुना और हँसने लगे।

चारु सबको प्यार करके चली गयी। शिवा भी दुकान चला गया।

राजीव मालिनी को अपनी गोद में बिठा कर बोला: अब जल्दी से अपनी चूत ठीक कर लो। जो मज़ा अपनी बहू को चोदने में है ना वो किसी और में नहीं। वो उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ दबाकर बोला।

सरला: मालिनी सच में तुम बहुत क़िस्मत वाली हो जो तुमको इतना प्यार करने वाला ससुर मिला है।

मालिनी : पापा, मुन्नी और चारु को गिफ़्ट देना चाहिए।

राजीव हँसकर : बेटी आज मैंने काफ़ी बड़ा बजट बनाया है सबके लिए। देखो तुम भी तो मुझे दादा बनाई हो तुमको भी मुझे कुछ देना चाहिए ना।

सरला सामने बैठी थी वो हँसी और बोली: दादा या पापा?

राजीव: अरे क्या फ़र्क़ पड़ता है । है तो अपना ही ख़ून ना ।

मालिनी हँसकर : आऽऽऽह पापा आप चूची दबा दिए तो देखो दूध बहने लगा। पियोगे क्या?

राजीव: हाँ बहू पिलाओ ना।

अब मालिनी ने अपनी क़ुर्ती उठाई और ब्रा से एक चूची बाहर की । उसके निपल पर दूध की एक बड़ी सी बूँद साफ़ चमक रही थी। वो जीभ से उसे चाटा और फिर चूची मुँह में लेकर उसे दबा दबा कर चूसने लगा। मालिनी भी अब उसके सिर के बालों में हाथ फेरने लगी।

मालिनी: मम्मी जब राजेश की बीवी बच्चा पैदा करेगी तो उसे कहना कि वो ऐसे ही राजेश को भी दूध पिलाये।

सरला: अरे राजेश को शादी के लिए राज़ी करना बहुत मुश्किल होगा। वो तो बस मेरा ही दीवाना है। पागलों की तरह मुझे प्यार करता है।

मालिनी: सच में हम दोनों माँ बेटी बहुत भाग्यशाली हैं जो हमें अपने परिवार से इतना प्यार मिला है। देखो दादू अपनी पोती के हिस्से का दूध कितने मज़े से पी रहे हैं।

अब मालिनी ने इशारा किया कि उसे चूची बदलनी है। उसने एक चूचि अंदर की और दूसरी चूची बाहर की और राजीव अपनी बहू का दूध फिर से पीने लगा। उसका लंड लूँगी में तन गया था जिसे मालिनी सहलाने लगी थी। सरला भी उसके खड़े लौड़े को खा जाने वाली दृष्टि से देख रही थी और वो गरम होकर अपनी बुर खुजा दी।

अब मालिनी ने राजीव को हटाया और कहा: अब बस करिए वरना गुड़िया के लिए कुछ नहीं बचेगा।

राजीव मुँह साफ़ करके बोला: शिवा को पिलाती हो या नहीं?

मालिनी: जी वो रोज़ एक चूची पीकर सोते हैं। दूसरी गुड़िया के लिए छोड़ देते हैं।

राजीव ने देखा कि सरला की आँखें उसके लौड़े पर थीं । वो बोला: जानू आज सबको लौड़ा रात को ही नसीब होगा। अपना अपना माल बचाना है रात के लिए। ख़ूब मस्ती होगी रात को।

सरला: ठीक है जैसा आप बोलो।

राजीव: सरला तुम तय्यार हो जाओ हम बाज़ार जाएँगे और सबके लिए गिफ़्ट्स लाएँगे और वाइन की बोतलें भी।

सरला : ठीक है मैं तय्यार होती हूँ। यह कहकर वो चली गयी।

राजीव : मालिनी चलो अब तुम भी आराम करो । हम दो घंटे में आते हैं।
 


राजीव तय्यार होकर आया और सरला का इंतज़ार करने लगा। जब सरला आयी तो वो उसे देखाता ही रह गया। वो बहुत ही छोटे से स्लीव्लेस ब्लाउस में थी ,जिसमें उसकी पीठ पूरी नंगी ही थी। चूचियाँ ब्लाउस से आधी बाहर थीं और पतली सी साड़ी उसकी चूचियों को छिपाने की जगह उजागर ही कर रहीं थीं। उसका पिछवाड़ा तो और भी ग़ज़ब ढा रहा था। मेकअप में वो इस तरह सजी थी कि वो मालिनी की माँ नहीं बड़ी बहन दिख रही थी।

राजीव: उफ़्फ़्फ क्या इरादा है? आज पता नहीं बाज़ार में कितने लोग बेहोश होंगे तुम्हारे इस मादक बदन को देखकर।

सरला हँसी: बस बस इतना भी मत चढ़ाइए इस बुढ़िया को। नानी हूँ अब मैं। मुझे पता है मेरी उम्र। कोई बेहोश नहीं होगा , अब चलिए ।

दोनों बाहर आए और एक स्कूटर करके राजीव उसको एक जवेल्लरि की दुकान में ले गया और वहाँ का मालिक उसका पुराना दोस्त संजीव था। वो राजीव को सरला के साथ देखकर बोला: वाह आज इतने दिन बाद दिखाई दिया तू। और ये क्या साले बिना बताए शादी भी कर ली।

राजीव हँसकर: अरे यार ये सरला जी है ,मेरी समधन है बीवी नहीं।

सरला झेंप कर नमस्ते की। संजीव भी उसके उभारों पर आँख सेकता हुआ बोल: ओह सरला जी माफ़ कीजिएगा भूल हो गयी। आइए अंदर मेरे चेम्बर में आइए।

संजीव उन दोनों को लेकर अंदर चेम्बर में गया बाहर दुकान में कई सेल्ज़ गर्ल्ज़ ग्राहकों को सामान दिखा रहीं थीं। उसके चेम्बर में शानदार सोफ़ा लगा था। तीनों बैठे।

सरला: भाई साब चेम्बर तो आपका बहुत शानदार है।

संजीव: सरला जी साथ में एक छोटा सा कमरा भी है और उसके साथ एक बाथरूम भी है। अब हम लोग तो सुबह १० बजे से रात १० बजे तक यहीं रहते हैं । थोड़ा आराम करने की जगह भी तो चाहिए ना।

राजीव कमिनि हँसी के साथ बोला: आराम या मौज मस्ती?

संजीव : हे हे, अरे यार वो भी थोड़ी बहुत हो ही जाती है। सरला जी अब जीवन में कुछ रस भी तो होना चाहिए ना।

सरला शर्मा गयी क्योंकि वह समझ गयी थी कि इशारा किस तरफ़ को है।वह सोची कि ये कमीना ज़रूर यहाँ लड़कियाँ चोदता होगा। उसने बाहर कई सेल्ज़ गर्ल्ज़ देखीं थीं ।

संजीव: सरला जी आप क्या लेंगी?

राजीव: यार ये क्या जी जी लगा रखा है। सरला बोल ना। और वो सब ले लेगी जो तू देगा। यह कहकर वो फिर से अपनी क़मिनी हँसी हँसा। सरला समझ गयी कि ये जान बूझकर द्वीअर्थी डायलोग बोला जा रहा है।

सरला: भाई सब मुझे कुछ नहीं चाहिए। फिर वो राजीव से बोली: आप तो ज़ेवर देखने आए थे ना फिर यहाँ आकर बैठ गए।

संजीव: अरे सरला अभी मैं यहीं सब मँगा देता हूँ । तुम यहीं बैठकर पसंद कर लो। बोलो क्या दिखाऊँ?

राजीव: अरे साले बोल क्या दिखाऊँ, ज़ेवर में? वरना वो सोचेगी तू और कुछ दिखाने की बात कर रहा है? हा हा।

सरला का चेहरा लाल हो गया वो बोली: आज आपको क्या हो गया है? कुछ भी बोले जा रहे हो? आप कुछ हार और कान के बूँदे बुला लीजिए देखने के लिए।

संजीव मस्ती से : जो आज्ञा मैडम । फिर फ़ोन उठाया और बोला: लिली को बोलो हार और बूँदे लाएगी। अच्छी क्वालिटी के लाएगी मेरे ख़ास मेहमानों के लिए।

राजीव: अरे लिली कोई नयी लड़की है क्या? पिछली बार तो कोई और थी ना शबनम शायद।

संजीव: अरे यार शबनम को निकाल दिया। साली मुझे और मेरे बेटे को एकसाथ बेवक़ूफ़ बना रही थी। वो मेरी बहू बनने के चक्कर में थी। अब बताओ मेरी प्रेमिका मेरी बहू कैसे बन सकती है? हा हा ।

सरला समझ गयी कि राजीव और संजीव साँझी चुदाई भी कर चुके है तभी एक दूसरे से इतने खुले हुए हैं।

तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और एक बहुत ही बला की ख़ूबसूरत लड़की अंदर आयी। उसकी उम्र कोई २५ के आसपास थी और बहुत ही मस्त भरा हुआ बदन था। राजीव की तो आँख उसके उभारों से चिपक गयी थी। वो सोचा कि इसके उभार तो मालिनी से भी बड़े हैं। वो लड़की जब ज़ेवर के डिब्बे टेबल पर रखी तो झुकने से उसके पिछवाड़े के उभार को देखकर तो राजीव के लौड़े ने मानो बग़ावत ही कर दी।पतली सी कमर पर वो उभार और भी ज़्यादा क़ातिलाना लग रहे थे। वो अपने पैंट के ऊपर से अपना लौड़ा ऐडजस्ट किया।

उसने स्लीव्लेस बड़े गले की क़ुर्ती और लेग्गिंग पहनी थी। उसके बड़े बड़े बूब्ज़ आधे बाहर झाँक रहे थे। राजीव उसके गोरे गोरे बूब्ज़ को देखा और बोला: क्या मस्त सुंदर हैं ?

सरला मुस्कुरा कर: क्या सुंदर हैं?

राजीव कमीनी मुस्कुराहट के साथ: ये गहने और क्या?

संजीव भी एक कमीनी मुस्कान दे दिया।

सरला ने हार देखे और उसका दाम पूछने लगी। लिली उसको दाम बताने लगी। तभी संजीव ने हाथ बढ़ाया और झुकी हुई लिली की गाँड़ को लेग्गिंग के ऊपर से सहला कर बोला: बेबी दाम मत बताओ। इनसे हम कोई ज़्यादा थोड़े ही लेंगे। अच्छा डिस्काउंट देंगे सरला को ।

राजीव संजीव के हाथ को बहुत हसरत से देख रहा था जो मस्तानी गाँड़ का मज़ा ले रहे थे। तभी संजीव ने राजीव को देखा और लिली की गाँड़ दबाते हुए बोला: यार लिली बहुत अच्छी लड़की है और बहुत कोऑपरेट करती है। फिर लिली को बोला: बेबी देखो ये मेरा ख़ास दोस्त है और तुम्हारे बम का मज़ा लेने को मारा जा रहा है। उसे इजाज़त दे दो ना प्लीज़ ।

लिली ने सरला की तरफ़ देखा और शर्मा कर चुप रही।

राजीव: सरला अगर तुमको बुरा ना लगे तो मैं ज़रा लिली को छू लूँ- उफ़्फ़्फ़्फ क्या माल है।

सरला: मुझे क्यों बुरा लगेगा ? लिली को कोई ऐतराज़ नहीं होना चाहिए।

राजीव: लिली देखो अब तो सरला की भी इजाज़त मिल गयी है। मैं छू लूँ?

लिली: आंटी आप अपने पति को कंट्रोल नहीं करती क्या?

अबके संजीव हँसकर बोला: अरे ये इनकी बीवी नहीं है समधन हैं।

लिली: ओह सॉरी । अब वो सीधी खड़ी हुई तो संजीव ने अपना हाथ हटा लिया । वो मुस्कुराई और बोली: आंटी और हार लाऊँ क्य? अगर आपको इनमे से कोई पसंद नहीं आया हो तो। ये कहते हुए वो थोड़ा पीछे को हुई और अब उसकी मस्तानी गाँड़ बैठे हुए राजीव के ठीक सामने थी। अब राजीव से नहीं रुका गया और वो उसकी गाँड़ को दोनों हाथों में लेकर दाबकर मस्ती से भरने लगा। लिली अब भी ऐसे दिखा रही थी मानो कुछ हुआ ही ना हो।

सरला: नहीं ये चार मैंने फ़ाइनल किए हैं। फिर राजीव को देखी और बोली: अगर आपका दबाना हो गया हो तो ये हार देख लीजिए ।

राजीव: आऽऽऽह अभी से दबाना कैसे हो जाएगा? मस्त माल है ये तो। अच्छा चलो दिखाओ कौन सा हार किसके लिया है?

सरला: आप जानो आप किसको क्या देना चाहते हो?

राजीव: मेरी बहु के लिए ये बड़ा सा हार होगा। चारु और मुन्नी के लिए ये चेन सुंदर लगेगी। और तुम ये मस्त हार ले लो। ठीक है?

सरला: जी ठीक है। पर पैसा बहुत लग जाएगा।

संजीव: अरे पैसा पैसा क्या कर रही हो? राजीव के पास बहुत पैसा है। क्यों भाई सही कहा ना?

सरला राजीव को देखी जो अभी भी लिली की गाँड़ सहलाता हुआ अब अपनी हथेली उसकी गाँड़ की दरार में भी डाल रहा था और लेग्गिंग के ऊपर से उसकी चूत दबाकर मस्ती से भर गया।

राजीव: आऽऽऽह संजीव ये लड़की मस्त माल है। मुझे इसे चोदना है अभी के अभी। वो उसे खींचकर गोद में बिठाया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।

संजीव : यार एक मिनट के लिए बाहर आजा, कुछ बात करनी है।

राजीव लिली को गोद से हटाया और खड़ा हुआ तो उसकी पैंट का सामने भाग फूला हुआ दिखाई दे रहा था। दोनों बाहर चले गए।

बाहर आकर संजीव बोला: यार एक बात पूछना है थोड़ा सा हिचक रहा हूँ।

राजीव: हाँ पूछो ना यार ।

संजीव: वो तुम लिली को चोदना चाहते हो तो चोद लो। पर ये बताओ कि मुझे सरला की चूत मिल सकती है क्या? वो क्या है ना तुम सरला के सामने लिली के साथ मस्ती कर रहे थे तो मैंने सोचा कि वो ज़रूर तुमसे भी फँसी होगी। अगर ऐसा है तो शायद वो मुझसे भी चुदवा लेगी।

राजीव: उफ़्फ़्फ इतनी सारी बात कह डाली। अरे भाई चोद ले उसे । वो तो बनी ही है चुदाई के लिए। चलो मैं उसे बोल देता हूँ।

राजीव मुस्कुराते हुए अंदर आया और सरला को बोला: ये संजीव तुम पर लट्टु हो गया है। उसकी मन की इच्छा पूरी कर दो ना प्लीज़।

सरला चौंक कर: क्या मतलब?

राजीव : अरे वो तुमको चोदना चाहता है अभी।

सरला: अभी मतलब? ये कैसे हो सकता है?

संजीव: अरे डार्लिंग , ये अंदर वाले कमरे में राजीव लिली को ले जाएगा और यहाँ सोफ़े पर हम दोनों मज़े कर लेंगे।

सरला: पर कोई आ गया तो।

संजीव: ये दरवाज़ा बंद रहेगा और बाहर एक लाल बत्ती जलती रहेगी जिसका मतलब है कि कोई हमें डिस्टर्ब नहीं करेगा। ठीक है ?

सरला: ओह मगर, मेरा मतलब है कि , असल में सब कुछ इतनी जल्दी जल्दी हो रहा है, मैं कुछ कन्फ़्यूज़्ड हूँ।

संजीव सरला को बाँहों में लेकर उसकी मोटी गाँड़ दबाकर बोला: जानू बस अब कुछ मत बोलो और मज़े करो। वो यह कहते हुए उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिया।

लिली राजीव को बोली: आप इस अंदर वाले कमरे में चलिए । राजीव मुस्कुराता हुआ कमरे में लिली के साथ चला गया। संजीव सरला के होंठ चूसते हुए उसकी गाँड़ सहलाकर बोला: चलो सरला अब हम भी मज़े करते हैं।

 


राजीव लिली को लेकर कमरे में चला गया और सरला और संजीव वहीं सोफ़े पर पसर गए।

संजीव: जान जब से तुमको देखा है मरा जा रहा हूँ तुम्हारा भरा बदन देखने को। उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त जोबन है । वह यह कहते हुए उसकी चूचियाँ दबा दिया और उसके गाल चूमने लगा। दोनों सोफ़े पर अधलेटे से पड़े थे। अब संजीव बोला: जान ब्लाउस खोलो ना बूब्ज़ चूसने हैं। सरला हँसकर अपने ब्लाउस खोलने लगी और बोली: मैं अपनी ज़िंदगी में इतनी जल्दी किसी से नहीं पटी हूँ जैसे आज आपने पटा लिया है।

संजीव उसके ब्लाउस को निकालने में मदद किया और और ब्रा में कसे उसके बड़े बड़े दूध देखकर मस्ती में आकर वहाँ चूचियों को ऊपर से ही चूमने लगा। जल्दी ही ब्रा भी खुली और चूचियाँ बाहर आ गयीं और संजीव के हाथ और मुँह में समा भी गयीं। सरला के मुँह से उफ़्फ़्फ़्फ निकलने लगा।

उधर राजीव और लिली कमरे में गए और राजीव लिली की चूचियाँ दबाने की कोशिश किया तो वो राजीव से बोली: अंकल आप अपने कपड़े उतार दीजिए मैं भी उतार देती हूँ। अगर आप ऊपर से दबाएँगे तो जब मैं इनको वापिस पहनूँगी तो ख़राब दिखेंगे।

राजीव मुस्कुराया और अपने कपड़े खोलने लगा। अब वो पूरा नंगा होकर बिस्तर पर लेता और लिली भी अपनी ब्रा और पैंटी में आकर उसके बग़ल में लेट गयी।

अब राजीव करवट लिया और उससे लिपट कर उसे चूमने लगा तब लिली बोली: अंकल आपसे एक बात कहनी थी बुरा मत मानिएगा।

राजीव ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: हाँ हाँ बोलो ।

लिली: अंकल मैं चुदवाने के पैसे लेती हूँ। मुझे संजीव अंकल और उनके बेटे दोनों चोदते हैं और बदले में मुझे महीने के एक लाख देते हैं। मैं एक तरह से बाप बेटे की रखेल हूँ। आप क्या देंगे?

राजीव उसकी जाँघ सहलाता हुए उसकी बुर को मूठ्ठी में जकड़ लिया पैंटी के ऊपर से और बोला: बोलो कितना चाहिए?

लिली: अंकल तीन हज़ार दे दीजिएगा।

राजीव अब अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और उसकी बुर सहलाकर बोला: बिटिया तीन नहीं पाँच हज़ार देंगे बस ख़ुश कर दो हमको।

लिली यह सुनकर ख़ुशी से उससे लिपट गयी और बोली: ठीक है अंकल आपकी हर इच्छा पूरी करूँगी।

राजीव उसके गाँड़ पर हाथ फेरकर बोला: आऽऽह क्या मस्त गोल गोल और सॉफ़्ट गाँड़ है। फिर अपनी ऊँगली उसकी गाँड़ के छेद में डालकर बोला: यहाँ लेती हो ना बिटिया, देखो ऊँगली कितने आराम से अंदर चली गयी।

लिली: जी अंकल लेती हूँ। दोनो बाप बेटा गाँड़ भी मारते हैं। पर उनका आपके जैसा मोटा नहीं है।आपका लेने में थोड़ी तकलीफ़ होगी पर सह लूँगी। वह अब उसका लौड़ा सहला रही थी।

अब राजीव ने उसकी ब्रा और पैंटी खोली और उसकी चूचियों को चूसकर उसके जाँघों के बीच आया और थूक से अपना लौड़ा गीला किया और उसकी चूत भी गीला किया और अपना लौड़ा अंदर डालने लगा। मस्त जवान चूत थी और उसके लौड़े को अपने टाइट ग्रिप में ले ली।

अब वो मस्ती से उसे चोदने लगा। वो भी नीचे से गाँड़ उछालकर उसका साथ देने लगी। अब उसकी सिसकियाँ कमरे में गूँजने लगीं थीं। क़रीब २० मिनट की घमासान चुदाई के बाद वो झड़ने लगी और राजीव ने अब उसको पलटा और अब उसकी गाँड़ मारने लगा। क़रीब और १५ मिनट के बाद वो भी झड़ गया।

अब वो दोनों लिपटकर पड़े थे।

उधर सरला और संजीव की भी ज़बरदस्त चुदाई हुई और वो भी लिपट कर एक दूसरे से चिपके पड़े थे। अब संजीव बोला: चलो अंदर चलते हैं। बाथरूम अंदर ही है।

अब दोनों नंगे अंदर कमरे में आए तो लिली बाथरूम से बाहर आ रही थी। राजीव पहले ही फ़्रेश हो चुका था। वो अभी भी नंगा लेटा था और संजीव उसके बड़े से साँप को देखा और बोला: लिली इसका तो बहुत तगड़ा है तुमको तो मज़ा आ गया होगा ?

लिली बिस्तर ओर आकर नंगी बैठी और बोली: जी चूत में तो मज़ा आया पर गाँड़ में थोड़ी सी तकलीफ़ हुई थी।

अब बारी बारी से सरला और संजीव भी फ़्रेश होकर आए और सभी बिस्तर पर बैठ गए।

राजीव: लिली कितने दिनों से चुदवा रही हो संजीव से?

संजीव: अरे ये लम्बी कहानी है फिर किसी दिन बताएँगे?

राजीव: अरे यार हमारे पास टाइम ही टाइम है बताओ ना ।

सरला: हाँ हमने जो ख़रीदना था सब ले लिया है अब कोई जल्दी नहीं है।

संजीव: एक शर्त पर आज तुम खाना भी हमारे साथ ही खाओगे। मैं घर पर बोल देता हूँ ।

लिली: नहीं अंकल आज सब मेरी मम्मी के हाथ का खाना खाएँगे। मैं उनको फ़ोन कर देती हूँ।

संजीव: वाह ये बढ़िया रहेगा और तुम दोनों इसकी हॉट मम्मी से मिल भी लोगे।

इस बात पर सब हँसने लगे। लिली ने अपनी माँ को फ़ोन करके बता दिया कि वो लोग ३ बजे तक आएँगे खाना खाने। सरला ने भी मालिनी को बता दिया कि आज उसका और राजीव का लंच बाहर है।

राजीव: हाँ बताओ अब क्या कहानी है तुम्हारी?

अब बिस्तर में राजीव अधलेटा सा था और लिली उसके पास बैठी थी और उसके नरम लौड़े को सहला रही थी। उसके बग़ल में राजीव भी अधलेटा सा सरला के बदन पर हाथ फेर रहा था और वो भी उसका लौड़ा सहला रही थी।

लिली ने कहना शुरू किया: ( आगे की कहानी लिली की ज़बानी ))। ——-

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जब से मैंने होश सम्भाल था घर में किसी बात की कोई कमी नहीं थी। पापा का अच्छा सा जॉब था और मम्मी भी हाउस्वाइफ़ थी और मेरापूरा ध्यान रखती थी आख़िर मैं इकलौती संतान जो थी। सब कुछ बढ़िया चल रहा था और मैं जवान होने लगी। मम्मी ने मुझे अच्छे बुरे की पहचान बता दी थी। स्कूल में सब मुझे बहुत प्यार करते थे मैं सुंदर जो थी। मम्मी ने बता रखा था कि अपना ध्यान रखना सो मैं बहुत सावधानी से रहती थी। अब मैं ११ थ में आ गयी थी। जवानी सब जगह से मानो फूटी जा रही थी। स्कर्ट ब्लाउस में तो मैं समाती ही नहीं थी। हर तीन महीने में ब्रा और टॉप का साइज़ बदल रहा था।

राजीव ने उसकी चूचियाँ दबाकर कहा: हाँ वो तो दिख ही रहा है इतनी बड़ी तो अभी से हो गयीं हैं बिटिया रानी।

लिली आऽऽऽह करके: पर समय एक जैसा नहीं रहता। अचानक से पापा को कैन्सर डिटेक्ट हुआ और हमारे होश उड़ गए। पापा की बीमारी का महँगा इलाज चला और हमारा सब कुछ उसमें लग गया और पापा फिर भी नहीं बचे।

एक तरफ़ पापा के जाने का ग़म और दूसरी तरफ़ घर में मुश्किल से ५/६ हज़ार रुपए ही बचे थे। मम्मी बिचारि को पापा का ग़म मनाने का भी समय नहीं मिला। अगले कुछ महीने बहुत ख़राब निकले । मम्मी के सब गहने बिक गए और फिर एक दिन मम्मी मुझे लेकर बैठी और बोली: देखो बेटी अब तुम १८ की होने वाली हो तो मैं तुमसे दो टूक बात करना चाहती हूँ। तुमने देख ही लिया है कि अब हमारे पास इस घर के अलावा कुछ नहीं बचा है। अगर हम इसे भी बेच देंगे तो रहेंगे कहाँ? सो मै इसे नहीं बेचूँगी। अब सवाल है कि अगले महीने से घर का ख़र्च कैसे चलेगा? हमारा कोई रिश्तेदार भी मदद करने वाला नहीं है।

मैं: फिर मम्मी क्या होगा हमारा? मैं अब रोने लगी।

मम्मी ने मुझे प्यार से चुप कराया और बोली: बेटी देखो मैं ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं हूँ और कोई काम भी नहीं जानती। इसलिए मेरे पास एक ही चारा है।

मैं: वो क्या है मम्मी?

मम्मी: बेटी मेरा जिस्म ही है मेरे पास । उसे थोड़ा सा सवारूँगी और फिर बेचूँगी।

मैं अब बड़ी हो चुकी थी और अपनी मम्मी की बात समझ गयी थी और इसे सुनकर बहुत विचलित भी हुई थी। पर आख़िर में मम्मी ने मुझे समझाया : बेटी मैं कोठे पर थोड़े ही जाऊँगी। यहीं घर में कुछ लोगों से मिलूँगी और पैसे कमा लूँगी। मैंने तुमको इस लिए बता दिया कि कल को तुमको पता चले तो तुम दुखी मत होना। इससे तुम अपनी पढ़ाई भी आगे जारी रख सकोगी और अपने सपने भी पूरे कर सकोगी।

मैं : ओह मम्मी और कोई चारा नहीं है क्या? उफ़्फ़्फ़्फ ये सुनकर इतना अजीब लग रहा है।

मम्मी: सब ठीक हो जाएगा मुझपर विश्वास रख।

मैं चुप रह गयी। उसके बाद मम्मी में जैसे बदलाव सा आ गया और वो अगले दिन पार्लर गयी और फिर कुछ कपड़े भी ख़रीद लायीं। मैंने वो कपड़े देखे तो मैं हैरान रह गयी। छोटे छोटे से कपड़े थे और नॉटी अंडर्गार्मेंट्स भी थे। सीधी सी दिखने वाली मेरी माँ ऐसे कपड़े पहनेगी सोचकर ही मैं हैरान थी।

मैं: मम्मी आप ऐसे कपड़े पहनोगी?

मम्मी: हाँ बेटी ऐसे ही पहनूँगी तभी तो सेक्सी लगूँगी। देख अब मैं ४० साल की हो चली हूँ। थोड़ा सा मेकअप नहीं करूँगी तो कौन मुझे भाव देगा? वैसे मैं तुमको बता दूँ कि आज सुबह मैंने एक शिकार फँसा लिया है?

मैं: क्या सच इतनी जल्दी?

मम्मी: वो तीन घर छोड़कर जो शर्मा जी हैं ना जिनकी पत्नी का स्वर्गवास पिछले साल हो गया था वो मुझे ज़रा ज़्यादा ही ध्यान से देख रहे थे जब मैं पार्लर से निकली थी। वो शायद बग़ल की दुकान से कपड़े ख़रीदे थे। वो मुझे और मेरे उभारों को घूर रहे थे। मुझे पता है कि ये बड़े पोस्ट से रेटायअर हुए हैं और काफ़ी तगड़ा आसामी है। इसलिए मैंने भी चारा डाला और जान बूझकर सैंडल को टेढ़ा कर के गिरने की ऐक्टिंग की। वो दौड़कर मुझे बचाए और फिर मैं उनका सहारा लेने के नाम से उनसे लिपट गयी।

मैं पूछी: मम्मी फिर क्या हुआ?

मम्मी: बस मेरे बदन के स्पर्श से ही वो भड़क गया और मुझे पूछने लगा कि चोट तो नहीं आयी? मैं बोली कि मैं ठीक हूँ। फिर वो बोला: चलो सामने कोफ़ी पीते हैं । मैं मान गयी और वो मुझे लेकर कोफ़ी शोप में गया और वहाँ बातें होने लगी। फिर जल्दी ही वी मेरे हुस्न की तारीफ़ करने लगे और फिर मेरे हाथ सहलाने लगे। मैं भी शर्माने का नाटक की और बाद में चुपचाप उनको मेरी बाँह भी सहलाने दी। अब वो उत्तेजित हो चुके थे । वो बोले : देखो तुम भी अकेली हो और मैं भी। क्यों ना हम एक दूसरे के सुख दुःख में साथ दें?

मम्मी: आप मुझसे शादी करोगे क्या?

शर्मा जी: देखो ये नहीं हो सकता क्योंकि मेरी उम्र अब ५२ साल की है और बेटा बहू भी घर पर हैं । हाँ हम एक दूसरे को प्यार कर सकते हैं।

मम्मी: साफ़ साफ़ बोलिए ना कि आप मेरे साथ सेक्स करना चाहते हैं ।

शर्मा हड़बड़ा कर: देखो वो भी और प्यार भी।

मम्मी: देखिए मुझे सेक्स करने में कोई परहेज़ नहीं है।पर आपको इसकी क़ीमत देनी होगी।

शर्मा: क़ीमत कैसी? मैं समझा नहीं।

मम्मी: देखिए मेरी आमदनी का कोई साधन नहीं है। आप मेरे साथ सेक्स कर लीजिए पर क़ीमत देनी पड़ेगी। इसी से मैं अपना घर चलाऊँगी।

शर्मा: क्या क़ीमत होगी?

मम्मी: हर मुलाक़ात की क़ीमत देंगे या महीना बाधेंग़े?

शर्मा: महीना बाँध दूँगा। देखो मैं हफ़्ते में एक या दो बार से ज़्यादा नहीं मिल सकता हूँ। वो भी सिर्फ़ दिन में ही।

मम्मी: मुझे मंज़ूर है। कितना पैसा देंगे?

शर्मा: ५००० महीना।

मम्मी हँसकर: चलो चलते हैं । आप मेरा ख़र्च नहीं उठा पाएँगे।
 


शर्मा: अरे तो तुम बताओ ना कितना चाहिए तुमको? वो मेरे उभारों को देखते हुए बोला। मैंने अपने साड़ी का पल्लू उभारों के बीच में कर दिया था ताकि वो मेरे उभारों को अच्छे से देख लें।

मम्मी: मुझे कम से कम २०००० महीना चाहिए।

शर्मा मेरे उभारों को देखकर अपने होंठ पर जीभ फेरकर बोला: मुझे मंज़ूर है। कब शुरू करेंगे?

मम्मी: कल आप १२ बजे दिन में पैसे लेकर आ जाइए और अपनी मन मर्ज़ी कर लीजिए।

वो ख़ुश हो गया और बोला: चलो कल मिलते है। वो मेरे हाथ सहलाते हुए बोला। फिर हम खड़े हुए और मैंने उसकी पैंट में एक तंबू बना हुआ देखा और मैं समझ गयी कि मैंने अपने पत्ते सही फेंके हैं तभी वो अपने खड़े लंड के कारण मज़बूर है।

राजीव लिली की चूत सहलाया और बोला: ये बात तुम्हारी मम्मी ने बतायी?

लिली: हाँ पर बहुत बाद में। कब बतायी ये भी बताऊँगी। पर बाद में।

सरला संजीव का लंड सहलाकर: फिर क्या हुआ?

लिली राजीव के लंड को चूमी और बोली: जब मम्मी खड़ी हुई तो वो चुपके से उनकी मोटी गाँड़ दबा दिया। सरला आंटी मम्मी की गाँड़ आपके जैसी ही बड़ी बड़ी हैं।

अगले दिन मम्मी ने अपनी चूत के बाल साफ़ किए और बहुत तय्यार हुई । सेक्सी गाउन और सेक्सी अंडर्गार्मेंट्स भी पहनी। मस्त मेकअप भी किया। शर्मा जी तय समय पर आ गए। मम्मी को देखकर वो हैरान रह गए और मस्त होकर बोले: वाह क्या माल लग रही हो। फिर जेब से पैसे निकाले और मम्मी को दे दिए। मम्मी पैसे लेकर बेडरूम में गयी और पैसे गिनी और आलमारी में अपनी पहली कमाई रख दी और पापा की फ़ोटो के सामने आकर रो बैठीं। फिर आँसू पोंछे और शर्मा जी को लेकर गेस्ट बेडरूम में ले गयी। वहाँ उन्होंने कमरा काफ़ी सज़ा कर रखा था। बेडरूम में एक सोफ़ा भी था डबल बेड के साथ।

शर्मा ने मम्मी को अपनी गोद में खिंचा और मम्मी को बड़ा अजीब सा लगा था पहली बार अपने पति के अलावा किसी और गोद में बैठी थी। फिर उसने मम्मी को चूमा और उसकी आँखों में मम्मी ने पूरी वासना देखी। फिर वो मम्मी को नंगी किया और ख़ुद भी नंगा हो गया। मम्मी ने उसके लंड का पापा के लंड से तुलना किया और शर्मा के लम्बे लंड से मस्त हो गयी। हालाँकि वो बहुत मोटा नहीं था पर फिर भी मम्मी को वो मस्त लगा। उसका लंड पाकर मम्मी की दबी हुई प्यास बढ़ गयी और वो भी उसका साथ देने लगी और जहाँ वो मम्मी की चूचियाँ चूस रहा था मम्मी भी उसका लौड़ा दाबकर मस्त हो रही थी। फिर वो मम्मी को नीचे लिटाया और लेटी हुई मम्मी के मुँह में अपना लंड डाल दिया और मम्मी उसे प्यार से चूसने लगी। फिर उसने मम्मी को बुरी तरह से चोदा और मम्मी भी मस्ती से चुदवाने लगी। वो बोली: बेटी वो चुदाई उस समय तक की सबसे बढ़िया चुदाई थी। मैं तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रही थी। फिर हम दोनों झड़ गए। इसके बाद तो वो हफ़्ते में दो तीन बार आ जाता और मम्मी की चुदाई कर जाता। इसी बीच उसने मम्मी की गाँड़ भी मार ली। क्योंकि उसका लौड़ा मोटा नहीं था इसलिए वो झेल गयीं। इसी तरह चलता रहा।

फिर एक दिन मेरी तबियत ख़राब हो गयी और मैं स्कूल से जल्दी आ गयी। मेरे पास भी एक चाबी थी सो मैं अंदर आयी और घर में गेस्ट बेडरूम से चिल्लाने की आवाज़ें आ रहीं थीं। मैं चुप चाप कमरे की खिड़की से झाँकी और मैंने देखा कि पूरी नंगी मम्मी घोड़ी बनी हुई है और शर्मा अंकल उनके पीछे खड़े होकर उनकी ज़बरदस्त चुदाई कर रहे थे। फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी और मम्मी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रहीं थीं। मेरी हालत ख़राब हो गयी। मेरा हाथ अपनी पैंटी के अंदर चला गया और मैंने ऊँगली से अपनी बुर खुजानी शुरू की। बाद में अंकल ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उनकी गाँड़ में डाल दिया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ की आवाज़ से मम्मी की चीख़ें निकलने लगीं।

फिर शर्मा अंकल भी झड़ने लगे और आऽऽऽऽह करके ढीले पड़ गए। मैं चुपके से वहाँ से हट गयी। बाद में अंकल के जाने के बाद जब मम्मी ने मुझे घर में देखा तो वो समझ गयीं कि मैंने सब देख लिया है।

फिर उन्होंने ख़ुद ही सब बात मुझे बतायी जैसे कि मैंने अभी आपको सब बताया।

राजीव: वाह तो फिर क्या अभी भी वो शर्मा से चुदवा रहीं हैं?

संजीव: शर्मा से भी और भी दो लोगों से भी। वो हम बाप बेटे से भी चुदवा चुकी है

सरला: बेटी तुम बताओ फिर आगे की बात? वो संजीव के लौड़े को सहलाती हुई पूछी।

लिली राजीव के बॉल्ज़ को सहला कर उसके लौड़े को प्यार से मुठियाते हुए आगे बताने लगी:———/

आंटी उसके बाद मम्मी और शर्मा अंकल का ऐसा ही चलता रहा। एक दिन मम्मी बोलीं: बेटी इतने कम पैसे जो शर्मा जी देते है उसमें गुज़ारा मुश्किल है। मुझे एक ग्राहक और पटाना पड़ेगा।

मैं: मम्मी कैसे पटाओगी?

मम्मी: मुझे थोड़ी महँगी जगह जाना पड़ेगा और वहीं मुझे ऐसे बंदे मिलेंगे।

मैं: जैसे?

मम्मी: जैसे फ़ाइव स्टार होटेल के कोफ़्फ़ी शोप। या कोई बड़ी जवेल्लेरी शोप।

फिर अगले दिन मम्मी योजना बनाकर एक बड़े होटेल के कोफ़्फ़ी शोप में गयी । उस समय शाम के पाँच बजे थे । अलग अलग टेबल पर लोग ग्रूप में बैठे बातें कर रहे थे। क्योंकि मम्मी आज के अवसर के लिए विशेष रूप से तय्यार हुई थी इसलिए जब वो अंदर आयीं तो सबकी नज़र उन पर ही पड़ीं और एक सुंदर औरत वो भी अकेली सबकी नज़र में प्यास थीं । आज मम्मी ने एक छोटा स्लीव्लेस टॉप और नीचे स्कर्ट पहनी थी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या क़ातिल लग रहीं थीं।भरी हुई गोरी जाँघें और नंगा पेट और आधे निकले हुए बड़े बड़े दूध और स्कर्ट के पिछले भाग को उठाए हुए बड़े बड़े चूतड़ बहुत ही मादक दिख रहे थे।

पूरे हाल में सब बार बार उनको ही देख रहे थे। मम्मी जिस टेबल पर बैठी उसके सामने वाले टेबल पर एक लड़का बैठा था जो कि एक किताब पढ़ रहा था और शायद कोफ़ी का इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही उसने नज़र उठाई और मम्मी को देखा तो बस देखता ही रह गया। वो एक गहरी नज़र मम्मी के उभारों को देखा और फिर से चेहरे को देखने लगा। मम्मी उसकी ओर देख कर मुस्कुरा दी। वो भी मुस्कुराया और उठ कर मम्मी के पास आया और बोला: आंटी जी आप किसी का इंतज़ार कर रहीं हैं क्या?

मम्मी: नहीं तो। क्या बात है?

लड़का: आंटी क्या है ना आप भी अकेली और मैं भी अकेला तो क्या मैं आपके साथ कोफ़्फ़ी पी सकता हूँ।

मम्मी हँसकर: एक शर्त पर कि अपना बिल ख़ुद दोगे।

लड़का भी हँसकर: आंटी बिल तो हमें देना ही नहीं पड़ेगा।

मम्मी: अच्छा बताओ क्या नाम है और अपने पापा क्या करते है? कॉलेज में हो या स्कूल में?

लड़का: बाप रे बाप इतने सवाल एक साथ? अच्छा बताता हूँ। मेरा नाम तुषार है और मैं कामर्स कोलेज में फ़र्स्ट यीअर में हूँ। मेरे पापा यहाँ के बड़े बिज़्नेस मैन हैं और राज़दान ग्रूप होटेल का नाम सुना होगा। हिंदुस्तान में हमारे कुल १० होटेल हैं। और ये होटेल भी हमारा ही है। इसी किए कहा था कि बिल नहीं लगेगा।

मम्मी मन ही मन में ख़ुश हुई कि पार्टी तो तगड़ी है पर उम्र बहुत छोटी होगी , दाढ़ी मूँछ भी अभी निकल ही रही थी। वो पूछी: तुम १८/१९ के होगे? अभी कोलेज शुरू ही किया है ना?

तुषार: हाँ जी मैं १८ अभी पिछले महीने ही पूरा किया हूँ।

मम्मी उसकी टी शर्ट से झाँक रहे मसल्स को देखकर बोली: तुम्हारा बदन तो काफ़ी तगड़ा है १८ की उम्र के लिहाज़ से। वैसे मेरी एक बेटी भी बस तुम्हारी उम्र की है।

तुषार मुस्कुरा कर: आंटी मुझे जिम का शौक़ है और वैसे भी मुझे बड़ी उम्र की औरतों से ही दोस्ती करनी है। मुझे छुई मुई लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है।

मम्मी: वो क्यों? तभी कोफ़ी आयी और दोनों पीने लगे।

तुषार: आंटी बहुत लम्बी कहानी है। वैसे आप बहुत सुंदर हो और कोई आपको एक जवान बेटी की माँ कह ही नहीं सकता। ये बात उसने मम्मी के उभारों को देखकर कहा।

अब मम्मी समझना चाहती थी कि क्या टाइम वेस्ट हो रहा है या सच में ये कुछ आगे बात बढ़ाएगा। सो वह बोली: देखो तुषार मैं तुमसे साफ़ साफ़ कहूँगी कि मैं यहाँ एक शिकार ढूँढने आयी हूँ। हाल में मेरे पति की डेथ हो गयी है और अब मेरे पास अपने बदन को बेचने के अलावा और कोई चारा नहीं है। अगर तुमको इसमें इंट्रेस्ट है तो ठीक वरना जाओ यहाँ से ताकि कोई और आकर मुझे प्रस्ताव दे।

तुषार: वाह आंटी आपने तो मेरा काम आसान कर दिया। मुझे हिचक हो रही थी और आपने ख़ुद कह दिया। आंटी मुझे आप चाहिए और अभी चाहिए। आप अपनी क़ीमत बोलिए।

मम्मी: देखो मैं ऐसे एक बार के लिए नहीं मिलती। मेरा तरीक़ा ये है कि मेरा महीना बाँध दो और फिर जब फ़ुर्सत हो मज़े कर लो।

तुषार मम्मी का हाथ अपने हाथ में लेकर सहलाता हुआ: आंटी पैसे की कोई बात नहीं है। आपको आशा से ज़्यादा दूँगा बस मेरी एक शर्त होगी जो अपनी माननी पड़ेगी।

मम्मी: बोलो क्या शर्त है। मैं तुमको हर तरह से ख़ुश कर दूँगी।

तुषार: आंटी आपको मेरी मम्मी बनना पड़ेगा सेक्स के दौरान।

मम्मी: क्या मतलब? क्या तुम अपनी माँ के साथ सेक्स का सोचते हो?

तुषार: हाँ आंटी मैं पागल हूँ अपनी मम्मी के ऊपर पर हिम्मत नहीं जुटा पाता। इसलिए रोल प्ले करके काम चलाना चाहता हूँ।

मम्मी: ठीक है बेटा जैसा तुम चाहोगे हो जाएगा।

तुषार बेटा शब्द से ख़ुश होकर: थैंक्स मम्मी आप बहुत अच्छी हो। तो अब चलें?

मम्मी: कहाँ?

तुषार: आप उठो तो । फिर वो फ़ोन पर एक मेसिज लिखने लगा और उसे भेजकर मम्मी को लेकर लिफ़्ट में पहुँचा और सबसे ऊपर का बटन दबाया। लिफ़्ट में बस दोनों ही थे। अचानक उसने मम्मी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके गाल और फिर होंठ चूमने लगा। उसका एक हाथ मम्मी की पीठ पर और दूसरा मम्मी के सिर के पीछे था । मम्मी भी जल्दी ही उसके चुम्बन का जवाब देने लगी। जैसे ही लिफ़्ट रुकी वो अलग हुआ और दोनों बाहर आए और वो एक कमरे के सामने आकर अपने जेब से कार्ड निकाल कर दरवाज़ा खोला । फिर दोनों अंदर घुसे और मम्मी की आँख जैसे बाहर आने लगी। क्या बड़ा सा पेंट्हाउस था। सभी सुविधाओं से सुसज्जित । वो फिर से मम्मी को अपने से खड़े हुए ही चिपका लिया और बोला: मम्मी आप कितनी सुंदर हो। वो फिर से होंठ चूसने लगा। मम्मी भी आऽऽऽह बेटा कहकर उसे मज़े देने लगी। तभी कॉल बेल बजी और वो अलग हुए और तुषार ने दरवाज़ा खोला और सामने एक वेटर था, वो ट्रे लेकर अंदर आया और ट्रे टेबल में रखा और एक शेंपेन की बोतल और स्नैक्स रखा और एक काग़ज़ का पैकेट तुषार को दिया। उसके जाने के बाद तुषार ने वो पैकेट खोला और उसमें से नोटों की गड्डी मम्मी को देकर बोला: लीजिए आपके दो लाख दो महीने के लिए । मैंने आपको एक लाख महीने का देने का सोचा है ठीक है ना?

मम्मी ख़ुश होकर: हाँ बेटा ठीक है। पर ये तुमने कब मँगाए?

तुषार: वो मैंने ऑफ़िस में मेसिज किया था ना ये वहीं से आया है।

मम्मी ने पैसे अपने पर्स में डाले और आकर तुषार को गले लगाकर बोली: बेटा तुमने एक विधवा की बहुत मदद की है। बोलो कैसे तुमको ख़ुश करूँ?

वो हँसकर मम्मी को सोफ़े पर बैठाया और ख़ुद मम्मी की गोद में लेटा और बोला: मम्मी बस ख़ूब सारा प्यार कीजिए इस बेटे से ।

अब मम्मी झुकीं और उसके गाल और होंठ चूमने लगी। उन्होंने उसका टी शर्ट ऊपर किया और उसकी मर्दाना छाती पर हाथ फेरने लगी। तुषार भी मस्ती में अपना मुँह घुमाया और उसके पेट को चूमते हुए बोला: उफ़्फ़्फ़्फ मम्मी आपका पेट कितना सॉफ़्ट है। वो उसकी नाभि में अपनी जीभ फिराकर मस्त हो गया। फिर बोला: मम्मी दूधु पिलाओ ना। वह अपना मुँह टॉप के ऊपर से उसके बूब्ज़ पर रखकर बोला।

मम्मी ने मुस्कुरा कर कहा: देखो तो इतना बड़ा हो गया है अब भी दूधु पिएगा। यह कहते हुए मम्मी ने अपना टॉप उतरना शुरू किया तुषार की आँखें मानो वहीं जम गयी थी कि अब क्या मस्त दृश्य उसकी आँखों के सामने आने वाला है।

 
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