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भाई बहन,ननद भाभी और नौकर

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PART-31

विमल का लण्ड चूसकर उसका वीर्य पी जाने के बाद अब पल्ल्वी उसके अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रही थी और अभी तक घुटनों के बल ही बैठी हुई थी.

विमल ने अब पल्ल्वी से कहा-" अब चलो ऐसा करो फटाफट मुर्गा बनकर दिखाओ. यह तुम्हारा लेसन नंबर सिक्स है "

पल्ल्वी ने अपने कान पकडे और मुर्गा बन गयी

विमल ने सोफे पर बैठे बैठे अपने दोनों पैरों को आगे बढ़ाया और मुर्गा बनी हुई पल्ल्वी के ऊपर अपने पैरों को रखकर उसके चिकने नितम्बों और पीठ पर अपने पैरों को रगड़ने लगा.

विमल अपनी सभी इच्छाएं पल्ल्वी से पूरी करवा लेना चाहता था- काफी देर तक जब पल्ल्वी मुर्गा बनी रही तो विमल ने उससे कहा-" अब उठकर खड़ी हो जाओ और कान पकड़कर १०० बार उठक बैठक लगाओ. यह तुम्हारा लेसन नंबर सेवन है."

पल्ल्वी जो अब तक मुर्गा बनी हुई थी, उठकर खड़ी हो गयी और विमल के कहे अनुसार कान पकड़ कर उठक बैठक लगाने लगी. पल्ल्वी अपनी उठक बैठकों की बोल बोल कर गिनती भी करती जा रही थी-पल्ल्वी जिस तरह से विमल के पूरी कंट्रोल में आ चुकी थी, उसे देखकर विमल अपने अंदर जबरदस्त उत्तेजना महसूस कर रहा था.

उसकी उठक बैठकों को और भी एन्जॉय करने के लिए विमल ने अपनी टाँगे थोड़ी फैलाते हुए पल्ल्वी से कहा-" यहां मेरी दोनों टांगों के बीच में आकर खड़ी हो जाओ और बाकी की उठक बैठक यहां पर ही खड़ी होकर लगाओ."

पल्ल्वी विमल का इशारा समझ गयी और विमल की टांगों के बीच में आकर इस तरह खड़ी हो गयी ताकि वह उसके शरीर को कहीं से भी छूकर दबा सहला सके.

पल्ल्वी अब उठक बैठक लगाती जा रही थी और विमल उसके शरीर को दबाता सहलाता भी जा रहा था. कभी वह उसकी जाँघों को साइड से सहला देता तो कभी वह उसके जाँघों के अंदर सामने से सहला देता. उसके चिकने नाभि प्रदेश और योनि पर भी विमल की छेड़खानी लगातर जारी थी. विमल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की कभी कोई इतनी खूबसूरत लड़की पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर उसके आगे इस तरह से उठक बैठकें लगा रही होगी मानो वह कोई ख़रीदा हुआ सेक्स स्लेव हो-लेकिन अब यह सब एक हकीकत था और विमल उसका भरपूर मज़ा ले रहा था.

१०० उठक बैठकें पूरी होने पर विमल ने पल्ल्वी को दुबारा से वहीं अपनी टांगों के बीच घुटनों के बल बिठा लिया और फिर से बोला-" मेरा लंड फिर से बेकाबू हो रहा है-इसे अपने मुंह में लेकर फिर से इसकी मालिश करो."

पल्ल्वी ने विमल के खड़े लण्ड को अपने मुंह में लिया और उसकी अपनी जीभ से सहला सहला कर मालिश करने लगी.

विमल तो अपनी मस्ती में मानो उछलने लगा लेकिन विमल ने अचानक अपना लण्ड पल्ल्वी के मुंह से निकाल लिया और उसे जमीन पर ही लेटने के लिए कहा. जैसे ही पल्ल्वी कमरे के फर्श पर लेटी, विमल उठकर पल्ल्वी के नज़दीक आया और अपने लण्ड को पल्ल्वी की योनि में डाल कर उसके साथ सेक्स करने लगा. अब पल्ल्वी के मुंह से भी हर्ष मिश्रित आवाज़ें आ रही थीं.

काफी देर एक दूसरे के बदन से खेलने के बाद दोनों अपने अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच गए और वहीं होटल के कमरे के फर्श पर नंगे ही लेटे रहे .

विमल कुछ देर बाद पल्ल्वी से बोला-" अब उठो और बाथरूम में चलो-आज का आठवां लेसन वहीं होगा."

पल्ल्वी उठकर जाने लगी तो विमल ने उसे टोका-"अपनी ब्लाउज , पेटीकोट और साड़ी सब पहनकर बाथरूम में जाओ."

कुसुम जैसे ही बाथ रूम में पहुंची पीछे पीछे विमल भी वहीं आ गया-"अब तुम्हे टिप टिप बरसा पानी पर वैसा ही सेक्सी डांस करना है जैसे मोहरा में रवीना टंडन ने किया था." यह कहते ही तेज़ आवाज़ में बाहर टी वी पर "टिप टिप बरसा पानी" गाना बजने लगा और पल्ल्वी थिरक थिरक कर उस पर डांस करने लगी. बाथरूम के दोनों शॉवर विमल ने खोल दिए थे जिसमे कुसुम लगातार भीग भीग कर नाच रही थी.

कुछ देर बाद विमल भी पल्ल्वी के पास आ गया और उसने एक झटके से उसकी साड़ी खेंचकर साइड में फेंक दी और उसके भीगे बदन को सहला सहलाकर जगह से दबा दबा कर मज़े लेने लगा. गाना ख़त्म होते होते पल्ल्वी को विमल ने पूरी तरह नंगा कर दिया था और उसे वहीं फर्श पर लिटाकर उसके साथ सेक्स का मज़ा लेने लगा. इसके बाद दोनों ने एक दुसरे को साबुन से मल मलकर नहलाया और दुबारा से अपने अपने कपडे पहनकर होटल के कमरे में बैठकर टी वी देखने लगे.

शाम के ५ बज चुके थे.

विमल ने अचानक होटल के रिसेप्शन पर फोन करके दो चाय और सैंडविच का आर्डर दिया.

जब विमल को लगा कि अब वेटर कमरे में आने वाला ही होगा, तभी उसने पल्ल्वी से कहा-" इधर आकर मेरी दोनों टांगों के बीच बैठ जाओ"

पल्ल्वी बोली-" यह क्या कर रहे हो. अभी तो वेटर आने वाला होगा और उसने देख लिया तो...."

विमल अब सख्त और रौबीली आवाज़ में बोला-" वह कुछ नहीं देख पायेगा. अब तुम देर मत करो और जो हुक्म दिया गया है, उसका पालन करो."

पालवी अब न चाहते हुए भी अपनी कुर्सी पर से उठी और विमल के पास जाकर उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गयी.पल्ल्वी और विमल दोनों ने ही टी शर्ट और निक्कर पहने हुए थे.

पल्ल्वी जैसे ही विमल की टांगों के बीच बैठी, विमल ने उसके दोनों हाथों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपनी दोनों जांघों को पल्ल्वी के गालों पर धीरे धीरे सहलाने लगा.

जैसे ही कमरे की घंटी बजी तो पल्ल्वी ने विमल की गिरफ्त से अलग होने की कोशिश की लेकिन विमल ने उसके दोनों हाथ पकडे हुए थे और अपनी जाँघों को वह उसके दोनों गालों पर रगड़ते हुए उससे बोला-" चुपचाप ऐसे ही बैठी रहो. वेटर को भी तो मालूम पड़े कि कितनी हॉट सेक्स स्लेव को मैंने अपनी वाइफ बनाया है."

विमल ने वेटर से कहा-" प्लीज़ कम इन " और वेटर दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गया

वेटर ने एक पल के लिए विमल की तरफ देखा और जब वहां देखा कि विमल किसी लड़की के साथ मस्ती कर रहा है तो वेटर सारे सामान को जल्दी से टेबल पर रखकर जाने लगा.

लेकिन विमल ने उसे रोका और कहा-" कप में चाय लौटकर उसमे चीनी वगैरा मिला दो."

वेटर चाय कप में लौटकर उसमे चीनी मिलाकर चम्मच चलाने लगा और तब तक विमल अपनी जांघों को पल्ल्वी के गालों पर रगड़ता रहा.

पल्ल्वी का शर्म और ज़लालत से बुरा हाल हो रहा था. एक अजनबी शख्स के सामने विमल जिस तरह से पल्ल्वी को ज़लील कर रहा था, उससे विमल के लण्ड का साइज तो बेकाबू हुआ ही जा रहा था, पल्ल्वी की योनि से भी पानी निकलने लगा था. वेटर कमरे के बाहर चला गया तो विमल पल्ल्वी से बोला-" अब चाय बाद में पी जाएगी, पहले तुम मेरे लण्ड का जूस पियो"

यह कहकर विमल ने पल्ल्वी के हाथ छोड़ दिए और अपने निक्कर को खिसकाते हुए उसमे से अपने तने हुए लण्ड को पल्ल्वी के होंठों पर टिका दिया और कडककर बोला -" इसे मुंह में अंदर लो और इसके जूस को पियो"

विमल को इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ था जब उसने पल्ल्वी की इच्छा के खिलाफ उससे कुछ करवाया हो.

पल्ल्वी ने जब उसके लण्ड को अच्छी तरह चूसने के बाद उसका सारा जूस पी लिया तो विमल उससे बोला-" यह तुम्हारा आज का लेसन नॅम्बर नाइन था. अब बस एक और आखिरी लेसन बाकी है. अब आओ चाय नाश्ता कर लेते हैं."

रश्मि यह वीडियो देख कर पूरी तरह गर्म हो चुकी थी, उसके अर्जुन की तरफ देखा, जहाँ वह उसके निक्कर में तने हुए लण्ड पर अपने पैर रगड़े जा रही थी. अर्जुन का निक्कर एकदम गीला हो चुका था. रश्मि ने घड़ी की तरफ देखा- शाम के 5 बज चुके थे.

रश्मि अर्जुन से बोली-" अब उठो और जाकर अपने कपडे बदल लो. बाकी की वीडियो फिर कभी देखी जाएगी अगर समय मिला तो."

इसके बाद अर्जुन भी अपना सर झुककर शर्माता हुआ वहां से चला गया और उसके जाने के बाद रश्मि भी बाथ रूम में अपनी गर्मी शांत करने चली गयी.

शेष अगले भाग में....
 
Part-32

रश्मि जब बाथरूम से निकली तब तक पौने 6 बज चुके थे। उसने अर्जुन को फोन करके अपने लिए चाय मंगाई और उससे पूछा-" मम्मी का खाना तैयार हो गया ? "

अर्जुन बोला- " जी मेमसाब, खाना तैयार है।"

मम्मी रोज की तरह 6 बजे मंदिर से आई और फ्रेश होने के बाद खाना खाकर अपने कमरे में सोने चली गईं।

सात बजे थे। रश्मि ने किचिन में खुद जाकर अर्जुन से कहा- " डिनर तैयार करके 8 बजे तक टेबल पर लगा देना । कुसुम भाभी भी साथ मे ही डिनर करेंगीं। "

अर्जुन डिनर की तैयारी में ही लगा हुआ था और बोला - " जी मेम साब "

इसके बाद रश्मि अपने कमरे में वापस आ गई और कुसुम के आने का इंतज़ार करने लगी।

8 बजे के करीब कुसुम की कार का हॉर्न सुनाई दिया दिया तो अर्जुन ने दरवाजा खोलकर गाड़ी से कुसुम का बैग निकाला और कुसुम के साथ ही अंदर आ गया।

अंदर आते ही कुसुम का सामना जैसे ही रश्मि से हुआ, इससे पहले कि कुसुम कुछ बोल पाती, रश्मि ने कुसुम को अपने कमरे में बुलाते हुए कहा-" भाभी आपसे कुछ बात करनी है। "

साथ ही रश्मि ने अर्जुन से कहा- " जाओ भाभी का बैग ऊपर वाले कमरे में

रखो।"

कुसुम को कुछ समझ नही आ रहा था कि यह क्या हो रहा था। वह रश्मि के साथ उसके कमरे में आ गयी और वहां सोफे पर बैठ गयी। रश्मि भी कुसुम के साथ ही सोफे पर बैठ गयी और उसने अपना मोबाइल खोलकर कुसुम को वह वीडियो खोलकर दे दिया जिसे शोभित ने अपनी पेन ड्राइव में कल गलती से अपने कमरे में छोड़ दिया था और जिसका पता कुसुम को भी नही था।

कुसुम ने बहुत हैरानी और परेशानी के साथ वह वीडियो देखा और कहने लगी - " तेरे पास यह वीडियो कहाँ से आया।"

रश्मि के स्वर अब बदल चुके थे- " सिर्फ यही वीडियो नही, मेरे पास आपके वे सभी वीडियो आ चुके हैं जिनमें आप अपने भाइयों के साथ सेक्स लीला कर रही हो। फिलहाल यह सभी वीडियो मेरे पास सुरक्षित हैं लेकिन भैया और मम्मी को भी जरूरत पड़ने पर भेजे जा सकते हैं। "

कुसुम का चेहरा एकदम फक पड़ गया था। उसे समझ आ चुका था कि रश्मि क्या कह रही थी और उसका क्या मतलब था।

कुसुम को अपनी गिरफ्त में आता देख रश्मि ने अपनी आवाज़ में थोड़ा और रौब लाते हुए कहा- " चलो अब खड़ी हो जाओ और अपने कमरे में जाकर फ्रेश हो जाओ। बाकी की बातचीत डिनर के बाद होगी। ठीक 9 बजे डिनर की टेबल पर आ जाना। देर नही होनी चाहिए। "

कुसुम अब रश्मि से आंखें भी नही मिला पा रही थी और उसकी तरफ देखे बिना कमरे से बाहर निकलकर ऊपर अपने नए कमरे की तरफ जाने लगीं।

ठीक 9 बजे रश्मि और कुसुम डिनर की टेबल पर थे। उन लोगों ने बिना कुछ बातचीत किये लगभग सवा नौ बजे तक डिनर किया। डिनर के बाद रश्मि कुसुम से बोली- " भाभी अभी आप अपने कमरे में जाकर आराम कर लो लेकिन ठीक 10 बजे मेरे कमरे में आ जाना ताकि आगे की बातचीत की वज सके। "

कुसुम से रश्मि यह सब अर्जुन के सामने ही कह रही थी जिसे अर्जुन भी बड़े ध्यान से सुन रहा था।

कुसुम " ठीक है " कहती हुई रश्मि और अर्जुन से नज़रें बचाते हुए फटाफट ऊपर जाने लगी।

अब रश्मि ने अर्जुन की तरफ देखा- " तुम भी फटाफट खाना खाओ और जल्द से जल्द मेरे पास आओ। "

अर्जुन तो जैसे तैयार ही बैठा था- " जी मेम साब लेकिन मम्मी जी का खाना बनाया था, उसमे से जो बचा हुआ था, मैं तो उसे पहले ही खा चुका हूँ। "

रश्मि उसे देखकर हल्के से मुस्कराई और बोली- " ठीक है, फिर अभी आजा मेरे पास। "

रश्मि अपने कमरे की तरफ चल दी। पीछे पीछे अर्जुन भी आ गया।

अर्जुन कमरे को अंदर से बंद करने लगा तो रश्मि ने उसे रोक दिया- " बंद करने की जरूरत नही है। 10 बजे कुसुम आएगी और कोई नही आने वाला है। "

रश्मि अर्जुन को लेकर साइड रूम में आ गयी और टी वी स्क्रीन ऑन करके कुसुम के कमरे का लाइव देखने लगी। कुसुम फोन पर किसी से बात कर रही थी- " तु"मने मेरी जिंदगी बिल्कुल बर्बाद कर दी है। तुमने चोरी से मेरी वीडियो भी बना ली और उसे रश्मि के हाथों में भी सौप दिया। अब वह 18 साल की लौंडिया मुझे ब्लैकमेल कर रही है और मैं शायद कुछ भी नही कर पाऊंगी।"

फोन पर शायद कुसुम शोभित से बात कर रही थी जिसकी बनाई वीडियो रश्मि ने अभी थोड़ी देर पहले कुसुम को दिखाई थी।

इसके बाद फोन बंद करके कुसुम चिंतित मुद्रा में अपना सिर पकड़कर सोफे पर बैठ गयी और उसके साथ आगे क्या होने वाला है, इसके बारे में सोचने लगी।

रश्मि ने अर्जुन की तरफ देखा और शरारत से मुस्कराते हुए बोली- " अब चिड़िया पूरी तरह से मेरे जाल में फंस चुकी है। जिसने जितनी बदमाशी अब तक मेरे साथ की है, सबका हिसाब करने का अब मुझे मौका मिला है। सुनो तुम यहीं साइड रूम में चुपचाप बैठे रहना और जब तक मैं ना बुलाऊँ, उस कमरे में मत आना। 10 बजे कुसुम आएगी तो उससे पहले मैं ही उसकी खबर लूंगी।"

अब अर्जुन अजीब तरह से रश्मि की तरफ देखने लगा -" मेम साब, आपसे कुछ बात करनी थी। "

रश्मि बोली- " हाँ बोल, क्या बात है ? "

अर्जुन ने अब झिझकते हुए लेकिन हिम्मत दिखाते हुए रश्मि से कहा-" कुसुम ने मेरे साथ भी बहुत बदमाशी की है। क्या मुझे भी बदला लेने का मौका आप देंगी ? "

रश्मि को पता था कि यह सब होने वाला ही है और वह उसे रोक नही पाएगी फिर भी उसने अर्जुन को चेतावनी देते हुए कहा-" मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है लेकिन बिना कंडोम के तू कुसुम के साथ कभी भी कुछ नही करेगा।"

अर्जुन खुश होने की बजाए मुंह लटकाकर बैठ गया तो रश्मि का माथा ठनका- " मेरे कहने का मतलब था कि बिना कंडोम के सेक्स नही करना है क्योंकि उससे बच्चा होने का खतरा है। बाक़ी सभी काम तुम बिना कंडोम के

भी करो तो मुझे कोई ऐतराज नहीं है।"
 
Part 33

रश्मि ने जब अर्जुन से यह कहा कि वह सेक्स के अलावा बाकी सभी काम बिना कंडोम लगाए कर सकता है, तो वह मानो ख़ुशी से झूम उठा और रश्मि का धन्यवाद करने के लिए उसके पैरों में अपना सर रखने लगा। रश्मि को उसका यही सेवा भाव और वफादारी पसंद थी जिसका इनाम वह अब अर्जुन को देने जा रही थी।

रश्मि ने उसे उठाया और बोली- " अब तुम यहाँ चुपचाप बैठो। मैं उस कमरे में जा रही हूँ। 10 बजने वाले हैं। "

रश्मि जैसे ही कमरे में आकर सोफे पर बैठी, कुसुम ने दरवाज़े पर दस्तक दी और अंदर आ गयी।

रश्मि ने अपनी आवाज़ में रौब लाते हुए कहा-' " दरवाजा अंदर से बंद कर दो।"

कुसुम ने दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया और वहां खड़ी हुईं रश्मि की तरफ देखने लगी

कुसुम ने इस समय एक गाउन पहना हुआ था।

रश्मि ने एक टी शर्ट और टाइट निक्कर पहना हुआ था।

रश्मि अपनी जांघों पर हाथ फिराते हुए बोली : " चलो अपना गाउन उतारो।"

कुसुम को इस बात की उम्मीद नही थी कि यकायक इतनी जल्दी उसकी दुनिया बदल जाएगी और वह अपने से उम्र में लगभग 9 साल छोटी ननद के हाथों का खिलौना बन जाएगी।

कुसुम ने अपना गाउन नही उतारा तो रश्मि शरारत से मुस्कराई- " तुम नही उतारना चाहती तो मैं मदद के लिए अर्जुन को बुलाऊँ। उसे तुम्हारे कपड़े उतारने में बहुत मज़ा आएगा। "

रश्मि ने जैसे ही अर्जुन का नाम लिया, कुसुम ने फ़टाफ़ट अपना गाउन उतार दिया। अब उसके खूबसूरत और सुडौल बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी बचे थे।

रश्मि ने कुसुम को देखा और बोली - " क्या मस्त फिगर है एकदम हॉट। इसिलए तेरे भाइयों ने भी तुझे नही छोड़ा। "

रश्मि ने अब अपने पास रखी एक छड़ी को उठा लिया और उस छड़ी को कुसुम की पैंटी पर घुमाते हुए बोली- " चल इसे भी उतार "

कुसुम ने न चाहते हुए भी अपनी पेंटी उतार दी

अब रश्मि ने अपने हाथ की छड़ी को उसकी दोनों टाँगों के बीच योनि प्रदेश पर घुमाते हुए कहा - " अपनी टाँगे फैलाओ- स्प्रेड योर लेग्स "

कुसुम ने अपनी टाँगे फैला दीं।

रश्मि अब अपनी छड़ी को उसके चिकने पेट के ऊपर से घुमाते हुए उसकी ब्रा पर ले गई और ब्रा में कैद उसके उरोजों पर छड़ी घुमाने लगी - " ब्रा को उतारो और एकदम नंगी हो जाओ। "

कुसुम का चेहरा शर्म और ज़लालत से लाल हो चुका था। लेकिन वह रश्मि के आगे पूरी तरह विवश थी। उसने फ़टाफ़ट अपनी ब्रा भी उतार दी।

" अब अपने कान पकड़ो और 100 उठक बैठक लगाओ। गिनती भी करती रहना वरना और सज़ा मिलेगी। " रश्मि ने कुसुम को आर्डर दिया

कुसुम कान पकड़ कर काउंटिंग करते हुए उठक बैठक लगाने लगी ।

रश्मि बीच बीच मे उसकी जांघों पर छड़ी के स्ट्रोक लगा लगा कर कह रही थी- " ठीक से लगाओ। नीचे तक बैठो और फिर उठो। "

50 उठक बैठक लगाकर कुसुम वहीं फर्श पर ढेर हो गई और रश्मि के पैरों को पकड़कर गिड़गिड़ाने लगी - " बस अब आज और उठक बैठक मत लगवाओ। और जो कुछ भी कहोगी मैं वह करने के लिए तैयार हूं। "

रश्मि ने कुसुम को अपनी उँगली के इशारे से अपनी तरफ बुलाया और बोली- " चलो इधर आकर मेरी योनि को अपनी जीभ से चाटो और इसके जूस को पियो। "

यह कहकर रश्मि ने अपना निक्कर उतार दिया और कुसुम के चेहरे को अपने गीले हो चुके योनि प्रदेश पर खींचकर ले आयी और कडककर बोली-' " चाटो इसे "

कुसुम यह सब पहली बार कर रही थी शायद इसलिये ठीक से नही कर रही थी। रश्मि ने अब कुसुम के दोनों गालों पर तमाचे लगा लगाकर उसे ठीक से चाटने के लिए कहा।

रश्मि अपनी मस्ती में मस्त थी। उसने फिर से एक जोर का थप्पड़ कुसुम को लगाया और बोली - " अपनी जीभ को मेरी योनि के अंदर घुसाकर उसे चाट। मुझे मज़ा नही आ रहा है। "

कुसुम अपनी जीभ को रश्मि की योनि के अंदर ड़ालकर उसे चाटने लगी।

रश्मि अब कुसुम से पूरा मज़ा ले रही थी। कुछ देर बाद रश्मि अपने क्लाइमेक्स पर पहुंच गई और उसने कुसुम को अपनी गिरफ्त से आज़ाद करते हुए कहा - " अपने गाउन से अपने चेहरे को साफ करो। "

कुसुम ने गाउन उठाकर उससे अपने चेहरे को साफ किया और फिर उसे पहनने लगी।

रश्मि ने कुसुम को रोक दिया और बोली - " जब तक मैं हुक्म न दूं तुम ऐसे ही नंगी रहोगी। चलो अब खड़ी हो जाओ। "

कुसुम खड़ी हो गई।

अर्जुन साइड रूम में बैठा बैठा यह सब सुन रहा था और उसका लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था।

रश्मि ने अचानक उसे आवाज़ लगाई - " अर्जुन इधर आओ। "

अर्जुन फौरन रश्मि के कमरे में आ गया। कुसुम का चेहरा एकदम शर्म और जलालत से लाल हो गया था। उसे उम्मीद नही थी कि घर का नौकर अर्जुन भी साइड रूम में बैठकर इस तमाशे का गवाह बनेगा।

अर्जुन को देखते ही कुसुम अपने एक हाथ से अपने उरोजों को और दूसरे हाथ से अपने योनि प्रदेश को छिपाने का प्रयास करने लगीं।

रश्मि ने अर्जुन से कहा - " कुसुम को उसके कमरे तक ले जाओ। "

यह कहकर उसने अर्जुन के हाथ में अपनी छड़ी भी पकड़ा दी। अर्जुन छड़ी मिलते ही रश्मि का इशारा समझ गया और कुसुम से बोला- " अपने दोनो हाथ ऊपर उठाओ और कमरे से बाहर चलो। "

कुसुम फिर से अपने कपड़े उठाकर उन्हें पहनने की कोशिश करने लगी। इस बार अर्जुन ने उसके नितम्बों पर छड़ी का जोर से स्ट्रोक लगाया और बोला - " ऐसे ही निर्वस्त्र अवस्था मे ऊपर चलना है। चलो फ़टाफ़ट। "

कुसुम ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए और कमरे से बाहर आ गई। अर्जुन उसके पीछे पीछे छड़ी लेकर चल रहा था। कुसुम के बदन पर छड़ी के स्ट्रोक मारते हुए अर्जुन कुसुम के कमरे तक आ गया।

शेष अगले भाग में....
 
PART-34

पल्ल्वी के साथ अर्जुन उसके कमरे में जैसे ही पहुंचा, उसने दरवाज़े को अंदर से बंद कर लिया और अपने हाथ की छड़ी को भी एक तरफ रख दिया. पल्ल्वी उसके आगे निर्वस्त्र अवस्था में अपने दोनों हाथों को ऊपर किये हुए खड़ी थी. यह सीन देखकर अर्जुन का लण्ड बेकाबू हुआ जा रहा था. उसने आगे बढ़कर अपने बदन को पल्ल्वी के बदन से सटा लिया और अपने दोनों हाथों से उसके उन्नत उरोजों को दबाने सहलाने और मसलने लगा. निक्कर में बंद उसका तना हुआ लण्ड पल्ल्वी के नितम्बों में धंसा जा रहा था जिसे पल्ल्वी बखूबी महसूस कर रही थी. उसके सीने की मस्त गोलाइओं को जी भरकर मसलने के बाद अर्जुन के हाथ उसके चिकने पेट को सहलाते हुए उसके योनि प्रदेश तक पहुंचकर रुक गए और अर्जुन उसके चिकने योनि प्रदेश पर अपनी हथेली को फिराने लगा.

पल्ल्वी यकायक अर्जुन से गिड़गिड़ाते हुए बोली-" क्या मैं अपने हाथ अब नीचे कर लूँ. बहुत दर्द हो रहा है."

अर्जुन से पल्ल्वी जिस तरह से हाथ नीचे करने की परमिशन मांग रही थी, उसके सुनकर अर्जुन का लण्ड और भी तन गया

उसने पल्ल्वी से कहा- " ठीक है, अब अपने हाथ नीचे कर लो"

पल्ल्वी ने अपने हाथ नीचे कर लिए

अर्जुन अब सोफे पर बैठ गया और उसने पल्ल्वी को अपनी गोद में बिठा लिया. अब अर्जुन ने दुबारा से पल्ल्वी के बदन को जगह जगह से चूमना चाटना और सहलाना शुरू कर दिया. पल्ल्वी के गलों और चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगाते हुए अर्जुन ने उसके होंठों को इमरान हाशमी स्टाइल में चूमना शुरू कर दिया. पल्ल्वी की तरफ से अर्जुन की हरकतों का कोई विरोध नहीं हो रहा था -यह देखकर अर्जुन की हिम्मत और भी बढ़ गयी. उसने अब पल्ल्वी को कुछ ट्रेनिंग देने का मन बनाया और उससे कहा-" यहां फर्श पर मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठो"

पल्ल्वी अब अर्जुन की गोद से उठकर फर्श पर उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गयी.अर्जुन ने अपनी दोनों जाँघों के बीच उसके चेहरे को एडजस्ट किया.अब अर्जुन के निक्कर में तना हुआ लण्ड एकदम पल्ल्वी के होंठों के सामने था लेकिन वह फिलहाल निक्कर में बंद था. अर्जुन ने अब पल्ल्वी के दोनों गालों पर हलकी हलकी चपत लगाई और बोला- " तुम अगर मुझे इसी तरह सहयोग देती रहोगी तो तुम्हारे लिए बेहतर होगा वरना तुम्हारी जिंदगी यहां अब नर्क से बदतर बना दी जाएगी. तुम्हारे इस खूबसूरत बदन पर अब सिर्फ मेरा अधिकार है. रश्मि मेम साब भी तुम्हे अपने तरीके से इस्तेमाल करेंगी लेकिन उनके अलावा अब मैं भी तुम्हारा पूरा इस्तेमाल अपनी मौज़ मस्ती के लिए करूंगा. तुम एक तरह से मेरी सेक्स स्लेव बनकर रहोगी. बोलो तुम्हे यह सब मंजूर है या नहीं ? "

पल्ल्वी बोल पडी-" मुझे यह सब मंजूर है."

अर्जुन बोला : " ऐसे नहीं. जैसे मैं कहता हूँ वैसे बोलकर सुनाओ. चलो अब खड़ी हो जाओ और २५ बार कान पकड़कर उठक बैठक लगाते हुए हर बार यह बोलो कि मैं अर्जुन की सेक्स स्लेव हूँ."

पल्ल्वी खड़ी होकर कान पकड़कर उठक बैठक लगाने लगी. हर उठक बैठक के बाद वह यह भी बोल रही थी-" मैं अब अर्जुन की सेक्स स्लेव हूँ."

अर्जुन एकदम मस्ती में आ चुका था- उसने इतना मज़ा आज तक जिंदगी में कभी नहीं लिया था- उससे उम्र में लगभग ८ साल बड़ी खूबसूरत जवान मालकिन उसकी सेक्स स्लेव बनकर उसके आगे निर्वस्त्र अवस्था में कान पकड़कर उठक बैठक लगा रही थी और अपने आप को सेक्स स्लेव भी बनना कबूल कर रही थी.

अर्जुन ने अब अपना निक्कर उतार दिया और पल्ल्वी से बोला-" आओ मेरी सेक्स स्लेव, अब अपने मुंह में लेकर मेरा यह खड़ा लण्ड चूसो और इसका सारा जूस पी जाओ."

पल्ल्वी एक एक्सपर्ट की तरह अर्जुन के लण्ड को अपने मुंह में लेकर उस पर अपनी जीभ घुमा फिराकर उसे चूमने चाटने लगी. अर्जुन का लण्ड तो पल्ल्वी पहले भी चूस चुकी थी लेकिन तब उसने कंडोम लगाकर अर्जुन के लण्ड को चूसा था. आज वह नंगे लण्ड को अपने मुंह में लेकर अर्जुन को अकल्पनीय आनंद दे रही थी. कुछ देर बाद अर्जुन ने अपने लण्ड की पिचकारी छोड़ी और पल्ल्वी उसके सारे जूस को पी गयी.

अर्जुन ने अब पल्ल्वी से कहा-" लण्ड देखो बहुत गीला हो गया है. इसे अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ करो."

पल्ल्वी ने लण्ड के ऊपर अपनी जीभ फिर फिराकर उसे साफ़ कर दिया लेकिन इस तमाशे में अर्जुन का लण्ड दुबारा से तनकर खड़ा हो गया

अब अर्जुन ने पल्ल्वी को पकड़कर उठा लिया और उसके नितम्बों को सहलाते हुए बोला- " जाओ, कंडोम लेकर आओ"

पल्ल्वी भला कंडोम कहाँ से लाती. उसने कहा-" मेरे पास तो कंडोम नहीं हैं"

अर्जुन हंसकर बोला-" कोई बात नहीं. आज मई दे देता हूँ. कल से तुम्हारे पास ही कंडोम होने चाहिए." इसके बाद अर्जुन ने अपना निक्कर फटाफट पहना और जल्दी से नीचे अपने कमरे में कंडोम लेने चला गया. कुछ ही देर में अर्जु कंडोम के दो पैकेट लेकर वापस आया और उसे पल्ल्वी को पकड़ाते हुए बोला-" यह रख लो और इनमे से एक कंडोम निकलकर मेरे लण्ड पर चढ़ाओ"

पल्ल्वी ने एक कंडोम निकल लिया और बाकी के कंडोम अपनी अलमारी में रख दिए. इसके बाद वह फर्श पर बैठकर अपने हाथ में लिए कंडोम को अर्जुन ले लण्ड पर चढाने लगी. अर्जुन के लण्ड का साइज उत्तेजना से बढ़ता ही जा रहा था.

अर्जुन ने एक बार फिर से अपने कंडोम चढ़े लण्ड को पल्ल्वी के होंठों पर सहलाया और उससे बोला-" अब जाओ और बिस्तर पर अपनी टाँगे फैलाकर लेट जाओ. अब तुम्हारे साथ की मौज मस्ती आज आखिरी बार की जाएगी."

पल्ल्वी अर्जुन के हुक्म का पालन करते हुए अपने बिस्तर पर जाकर लेट गयी और अपनी टाँगे फैलाकर अर्जुन का इंतज़ार करने लगी. अर्जुन कुछ देर बाद उसके पास पहुंचा और उसके बदन को जगह जगह चूमते चाटते और सहलाते हुए अपने कंडोम चढ़े तने लण्ड को पल्ल्वी की योनि में डालकर उसके साथ जबरदस्त तरीके से सेक्स करने लगा. दोनों को कुछ ही देर में अपनी अपनी जन्नत मिल गयी.

कुछ देर तक दोनों बिस्तर पर इसी तरह लेते रहे और अर्जुन उसके बदन पर अपना हाथ फिरता रहा. इसके बाद अर्जुन वहां से उठा और अपने कपडे पहनते हुए बोला-" अब मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ. तुम भी सो जाओ. बाकी की मस्ती तुम्हारे साथ कल की जाएगी."

शेष अगले भाग में ......
 
PART-35

अगले दिन सुबह ९ बजे नाश्ते की टेबल पर मम्मी और पल्ल्वी की काफी देर बातचीत होती रही. पल्ल्वी अपने १५ दिनों का लेखा जोखा और पापा की तबियत के बारे में मम्मी को बता रही थी. मम्मी ने रश्मि की पढाई के बारे में पल्ल्वी से कुछ पुछा तो पल्ल्वी ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा-" मंम्मी जी, मोहित और शोभित ने रश्मि को अच्छी तरह से पढाई पूरी करवा दी है, अब बस इसे प्रेक्टिस करने की जरूरत है जो यह कर भी रही है-इस बार यह जरूर पास हो जाएगी."

पल्ल्वी की इस बात को सुनकर मम्मी बहुत खुश हुईं और इस तरह से सब लोग दस बजे के आसपास नाश्ता करके अपने अपने कमरों में चले गए. रश्मि को पता था की अब मजबूरी में पल्ल्वी को उसकी तारीफ़ मम्मी से करनी पड़ रही है लेकिन उसका पल्ल्वी के प्रति गुस्सा अभी भी कायम था और उसने पल्ल्वी से बदला लेने के लिए अर्जुन के साथ मिलकर उसे ज़लील करने के कई प्लान बना रखे थे.

रोजाना की तरह जब ११ बजे के करीब मम्मी मंदिर के लिए रवाना हो गयीं तो रश्मि ने अर्जुन को इण्टरकॉम किया-" क्या कर रहे हो अर्जुन ?"

अर्जुन बोला-" जी मेम साब मैं तो अब नाश्ता कर रहा हूँ. उसके बाद किचिन की सफाई वगैरा करूंगा और बर्तन वगैरा साफ़ कर्रूँगा. लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रही हैं, यह तो मैं रोज ही करता हूँ."

रश्मि ने उससे कहा-" बेबकूफ तू यह सब काम करेगा तो पल्ल्वी क्या करेगी? "

रश्मि ने तो यह कहकर फोन काट दिया लेकिन अर्जुन के दिमाग की घंटी उसने बजा दी थी. अर्जुन समझ गया था कि रश्मि मेम साब क्या कह रही थीं और उनका क्या मतलब है.

नाश्ता ख़त्म करने के बाद अर्जुन ने पल्ल्वी के कमरे में फोन लगाया और पल्ल्वी के फोन उठाते ही उससे बोला-" नीचे किचिन में आओ फटाफट."

पल्ल्वी कुछ ही देर में अपने कमरे से निकली और नीचे किचिन में पहुँच गयी जहां अर्जुन खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था. पल्ल्वी ने हल्के नीले रंग की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था.

अर्जुन पल्ल्वी को देखते ही उससे बोला-" चलो इधर आकर किचिन की सफाई करो, बर्तन साफ़ करो और मेरे साइड रूम की भी सफाई करो."

पल्ल्वी एकदम हैरान परेशान होकर कहने लगी-" लेकिन यह सब काम तो तुम्हे करने होते हैं- तुम्हे इसी बात की तनखा मिलती है."

अर्जुन को लगा कि रात उसने जो पल्ल्वी को इतनी ट्रेनिंग दी थी वह सब बेकार हो गयी और यह तो अपने पुराने रंग में आने लगी.

उसने पल्ल्वी की साड़ी का पल्लू पकड़कर उसे खींचते हुए उसकी साड़ी उतारते हुए कहा-" अब तू मुझसे जुबान लड़ाएगी और मुझे बताएगी कि मुझे क्या करना है और तुझे क्या करना है. जल्दी से शुरू हो जा वरना तुझे पूरी तरह नंगा करके तुझसे वही सब काम करवाऊंगा."

पल्ल्वी अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी और उसकी साड़ी को अर्जुन ने उतारकर एक तरफ फेंक दिया था.

पल्ल्वी अब अर्ध नग्न अवस्था में ही किचिन में बर्तन साफ़ करने लगी -अर्जुन उसके पास ही खड़ा होकर उसके पेटीकोट में कैसे हुए नितम्बों को बीच बीच में सहला रहा था -बर्तन साफ़ करने के बाद पल्ल्वी किचिन की सफाई करने लगी. किचिन की सफाई करके जब पल्ल्वी अर्जुन के साइड रूम में सफाई करने आयी तो अर्जुन ने उसे आर्डर दिया-" अपनी ब्लाउज और पेटीकोट भी उतारो- फिर मेरे कमरे की सफाई करो."

पल्ल्वी बेबस थी. उसने अपनी ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दिए और अब सिर्फ एक ब्रा और पेंटी में ही हाथ में पोंछा लेकर अर्जुन के कमरे में फर्श पर बैठकर सफाई करने लगी. अर्जुन पल्ल्वी के पीछे पीछे ही चल रहा था और अपने हाथ में पकड़ी हुयी छड़ी को पल्ल्वी के नितम्बों पर मार-मार कर बार-बार कह रहा था-" ठीक से करो सफाई. ठीक से लगाओ पोछा."

जब पल्ल्वी फर्श पर पोछा लगाकर खड़ी हुई तो अर्जुन ने उसके चिकने पेट पर अपना हाथ फिरते हुए उसे अपने गिरफ्त में ले लिया और अपने खड़े हुए लन्ड को उसके नितम्बो पर रगड़ते हुए बोला-" आज से सारे घर का झाड़ू पोछा,सफाई और बर्तन वगैरा की सफाई तुम्हे ही करनी है-मुझे दुबारा न कहना पड़े. समझी या नहीं ?"

पल्ल्वी कुछ नहीं बोली तो अर्जुन ने एक थप्पड़ उसके गाल पर लगा दिया -" बोल समझी कि नहीं ?"

पल्ल्वी अब फटाफट बोल पडी-" हाँ समझ गयी, सारे घर की साफ़-सफाई, झाड़ू पोछा और बर्तन वगैरा आज से मैं ही साफ़ करूंगी."

इसके बाद अर्जुन ने पल्ल्वी को अपने हाथों में उठा लिया और उसे अपने बिस्तर पर लाकर लिटा दिया. अर्जुन ने अब अपनी टी शर्ट, निक्कर और अंडरवियर भी उतार फेंका और पल्ल्वी के बदन को सब जगह से दबाने सहलाने लगा -उसने पल्ल्वी की ब्रा और पेंटी भी अब उतार दी थीं और दोनों अब पूरी तरह नंगे होकर मौज़ मस्ती कर रहे थे.

अर्जुन पल्ल्वी के चेहरे पर अपना चेहरा रगड़ते हुए उसके रसीले होंठों को चूमने लगा -उसका लन्ड लगातार बड़ा होता जा रहा था लेकिन उसे फिर से ध्यान आया कि वह सारे कंडोम तो पल्ल्वी के कमरे में ही रख आया है. उसने यह फैसला किया कि अभी पूरा दिन पड़ा है, फिलहाल पल्ल्वी से अपना लण्ड चुसवा कर ही अभी की गर्मी शांत कर ली जाए.

उसने पल्ल्वी से कहा-" चल बिस्तर से उठ और फर्श अपर बैठकर मेरा लण्ड चूस."

पल्ल्वी बिस्तर से उठकर फर्श पर अर्जुन की दोनों टांगों के बीच में बैठ गयी और अर्जुन के लण्ड को अपने मुंह में रखकर उसे चूमने सहलाने लगी."

जब अर्जुन का क्लाइमेक्स आया तो उसने पल्ल्वी के मुंह में अपने लण्ड की पिचकारी छोड़ दी जिसे पल्ल्वी खुशी खुशी पी गयी.

रश्मि अपने कमरे के टी वी स्क्रीन पर अर्जुन और पल्ल्वी का यह सारा खेल तमाशा देख रही थी. उसे लगा कि अब अर्जुन का काम निपट गया है तो उसने अर्जुन को फोन लगा दिया-" अर्जुन किचिन की सफाई के बाद पल्ल्वी को मेरे कमरे में ले आना -यहां भी कब से सफाई नहीं हुई है और पोछा भी ठीक से नहीं लगा है."

अर्जुन ने अब पल्ल्वी से कहा-" चलो अब तुम्हे रश्मि मेम साब के कमरे की भी सफाई करनी है."

अर्जुन जब पल्ल्वी को लेकर रश्मि के कमरे में पहुंचा तो रश्मि सोफे पर आराम से बैठी हुई टी वी पर फ़िल्मी गाने सुन रही थी. पल्ल्वी को पूरी तरह निर्वस्त्र देखकर रश्मि की उत्तेजना एकदम बढ़ गयी लेकिन फिलहाल उसने अपनी उत्तेजना को दबाते हुए पल्ल्वी को आदेश दिया-" कमरे की सफाई बाद में करना.पहले ऐसा करो फर्श पर पोछा लगा दो."

पल्ल्वी वाशरूम से पोछा ले आयी और फर्श पर अधलेटी होकर पोछा लगाने लगी. अर्जुन का लण्ड पल्ल्वी के इस सेक्सी पोज को देखकर दुबारा से खड़ा हो गया था. वह उसके नितम्बों पर लगातार छड़ी मार मार कर ठीक से पोछा लगाने का निर्देश दे रहा था.

जब पल्ल्वी फर्श पर पोछा लगाकर उठने लगी तो रश्मि ने उसे टोक दिया-" इधर आओ मेरे पास और मेरे पैरों की भी सफाई करो."

पल्ल्वी फर्श पर बैठकर रश्मि के पैरों पर पोछा लगाने ही वाली थी कि रश्मि ने उसके एक जोर का थप्पड़ रसीद किया और बोली-" बेबकूफ, मेरे पैरों को पोछे से नहीं, अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ कर. अर्जुन तुम यहीं खड़े रहो और पीछे से इसके नितम्बों पर लगातार छड़ी मार मार कर इसे याद दिलाते रहो कि इसे मेरे पैरों की किस तरह से सफाई करनी है."

" जी मेम सब" कहकर अर्जुन ने पल्ल्वी के नितम्बों पर लगातर दो-तीन छड़ी लगा दीं और बोला-" मेम साब के पैरों को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ करो."

रश्मि लगातार अपने फोन में पल्ल्वी के इस तरह ज़लील होने का वीडियो भी बनाती जा रही थी. पैरों की सफाई के बाद, रश्मि ने पल्ल्वी से कहा-" अब मेरे पैरों के तलवे भी चाटो."

और पल्ल्वी रश्मि के तलवे भी चाटने लगी.

इसके बाद पल्ल्वी से रश्मि ने अपने पूरे कमरे की सफाई भी करवाई-सफाई के दौरान कभी अर्जुन और कभी रश्मि पल्ल्वी के शरीर को जगह जगह से दबा सहलाकर उसे ज़लील करते रहे, जिसे पल्ल्वी चुपचाप सहन करती रही.

सफाई और झाड़ू-पोछा के बहाने पल्ल्वी के बदन के साथ खिलवाड़ करते करते साढ़े बारह बज गए थे. अब रश्मि ने पल्ल्वी से कहा-" अब अपने कमरे में जाकर आराम कर लो.लंच के बाद दुबारा से तुम्हारी खबर ली जाएगी."

पल्ल्वी फटाफट अपने कमरे की तरफ दौड़ गयी.

रश्मि ने अर्जुन से कहा-" अब तुम दोपहर के खाने का इंतज़ाम करो. मेरी बात को ध्यान से सुना करो. खाना तुम्हे खुद ही बनाना है-पल्ल्वी की कोई मदद खाना बनाने में नहीं लेनी है."

" जी मेम साब समझ गया." कहकर अर्जुन खाना बनाने के लिए किचिन की तरफ चला गया.

शेष अगले भाग में...
 
PART-36

अर्जुन ने खाना तैयार कर दिया था और पल्ल्वी समेत सभी लोगों ने अपना अपना लंच २ बजे तक निपटा लिया था- इसके बाद सब लोग अपने अपने कमरे में आराम कर रहे थे.

अर्जुन भी अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था. यकायक उसे कुछ ख्याल आया और उसने पल्ल्वी को फोन लगा दिया-" नीचे किचिन में आओ"

पल्ल्वी कुछ ही देर में किचिन में हाज़िर हो गयी

अर्जुन ने पल्ल्वी की तरफ देखा और बिस्तर पर लेटे लेटे ही बोला-" खाने के बर्तन साफ़ करो और उसके बाद किचिन की सफाई भी कर दो. इन सब बातों का ध्यान खुद ही रखना सीख लो. रोज रोज मैँ यह सब याद नहीं दिलाऊंगा."

पल्ल्वी बिना कुछ बोले बर्तन साफ़ करने लगी. इसके बाद उसने किचिन की सफाई भी कर दी.

जब वह वापस जाने लगी तो अर्जुन ने उसे रोका और अपने पास बुलाते हुए कहा-" इधर आओ मेरे पास"

पल्ल्वी अर्जुन के बिस्तर के नज़दीक जाकर खड़ी हो गयी.

अर्जुन के निक्कर में उसका लण्ड एकदम तनकर खड़ा हो गया था जिसे वह धीरे धीरे निक्कर के ऊपर से ही सहला सहला कर खुद को शांत किये जा रहा था.

अर्जुन अब पल्ल्वी से बोला-" अपनी साड़ी उतारो और बिस्तर पर आकर मेरे साथ लेट जाओ."

पल्ल्वी ने साड़ी उतार दी और बिस्तर पर अर्जुन से सटकर लेट गयी. यह बिस्तर डबल बेड नहीं था इसलिए इस पर अगर दो लोग लेटते तो उन्हें एक दुसरे से सटकर ही लेटना पड़ेगा

अब अर्जुन ने पल्ल्वी को पकड़कर उसका मुंह अपनी तरफ किया और उसके मुंह को बेतहाशा चूमने चाटने लगा. पल्ल्वी के बदन से खिलवाड़ करते करते अर्जुन ने धीरे धीरे उसकी ब्लाउज पेटीकोट पैंटी और ब्रा सब कुछ उतार फेंके थे -पल्ल्वी एकदम निर्वस्त्र अवस्था में अर्जुन की गिरफ्त में थी और उसके दबाने सहलाने और चूमने चाटने को सहन किये जा रही थी लेकिन लगता था की अर्जुन का इस खेल से मन ही नहीं भर रहा था.

वह बिस्तर से उठा और पल्ल्वी को बिस्तर पर लेटे रहने का हुक्म देकर बोला-" अब तुम्हारे साथ थोड़ी और मस्ती की जाए "

यह कहकर अर्जुन ने पल्ल्वी के दोनों हाथ और दोनों पैरों को बिस्तर के चारों कोनों पर रस्सी से बांध दिया अब पल्ल्वी के चारों हाथ पैर बिस्तर से बंधे हुए थे और वह पूरी तरह से असहाय होकर अर्जुन की तरफ देख रही थी. अर्जुन ने अपने मोबाइल में पल्ल्वी की इस हालत की वीडियो बनानी शुरू कर दी -वीडियो बनाने के बाद अर्जुन ने अपना मोबाइल एक तरफ रख दिया और बिस्तर पर बैठकर पल्ल्वी के नंगे बदन को फिर से छेड़ने लगा.

पल्ल्वी के चिकने योनि प्रदेश पर अर्जुन हाथ फिराते हुए उसकी तरफ देखकर पूछने लगा-" क्यों चिकनी मज़ा आ रहा है ?"

पल्ल्वी बोल पडी-" हाँ "

अर्जुन ने उसकी योनि पर जोर से चपत लगाई और बोला-" ठीक से बोल"

अबकी बार पल्ल्वी बोली-" हाँ मज़ा आ रहा है."

अब अर्जुन हंसकर बोला-" गुड़ गर्ल. अब आगे से ऐसे ही पूरी बात बोला करो. और सुनो आगे से यह साड़ी पहनना बंद करो और सिर्फ गाउन पहनो. गाउन के अंदर कुछ नहीं होना चाहिए-न ब्लाउज न पैंटी . गाउन हटा तो पल्ल्वी एकदम नंगी दिखनी चाहिए. क्या समझी"

पल्ल्वी एकदम शर्म से लाल हुई जा रही थी. अर्जुन खेल खेल में जान बूझ कर उसे ज़लील करने के लिए ऐसी बातें कर रहा था लेकिन वह उन सबका जबाब देने के लिए मजबूर थी.

अबकी बार अर्जुन ने उसके गालों पर चपत लगा दी और बोला- " बोल क्या समझी"

पल्ल्वी गिड़गिड़ाते हुए कहने लगी-" अब से मैँ साड़ी की जगह सिर्फ गाउन ही पहनूंगी और गाउन के अंदर और कुछ भी नहीं पहनूंगी. गाउन खुलते ही मैँ एकदम नंगी दिखूंगी आपको."

अर्जुन ने उसके उरोजों को दबाते हुए कहा-" गुड़.वैरी गुड. इसी तरह मेरे हुक्म का पालन करती रहो नहीं तो मैँ तुम्हे इसी तरह नंगी हालत में दरवाज़े पर ले जाकर भी खड़ा कर सकता हूँ."

अब जब अर्जुन ने देखा की पल्ल्वी उसके कंट्रोल में पूरी तरह आ चुकी है तो वह बिस्तर पर चढ़कर उसके बदन पर दोनों टांगों को इधर उधर करके बैठ गया और अपने लण्ड को उसके होंठों पर ले जाकर उसे पल्ल्वी के होंठों पर रगड़ने लगा. पल्ल्वी ने मुंह खोलकर उसके लण्ड को अपने मुंह में लेना चाहा तो अर्जुन ने उसे रोक दिया-" जब मैँ कहूँ तभी इसे अपने मुंह के अंदर लेना. अभी मैँ इसे तुम्हारे होंठों और चेहरे पर इसी तरह फिरा फिराकर थोड़ी मस्ती करूंगा." इसके बाद अर्जुन ने अपने मोबाइल में एक गाना चला दिया-" मैँ चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त-मैँ चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त"

अर्जुन कभी अपने लण्ड को उसके होंठो पर फिराता कभी उसके गालों पर फिराता पल्ल्वी ने शर्म से अपनी ऑंखें बंद कर लीं तो अर्जुन ने अपने लण्ड को उसकी आँखों पर भी फिराना शुरू कर दिया अब जब अर्जुन से नहीं रहा गया तो उसने पल्ल्वी से कहा-" चल अब अपना मुंह खोल और लण्ड को अंदर लेकर इसे चूस."

पल्ल्वी ने वही किया जो अर्जुन चाहता था - पल्ल्वी के साथ काफी देर मुख मैथुन करने के बाद अर्जुन ने अपना जूस पल्ल्वी के मुंह में निकाल दिया जिसे पल्ल्वी को न चाहते हुए भी पी जाना पड़ा.

अर्जुन ने अब पल्ल्वी के हाथ पैर खोल दिए और उससे बिस्तर से उठने के लिए कहा -लेकिन इतनी ही देर में वहां अचानक रश्मि हाथ में हंटर लिए आ गयी और कडककर बोली-" यह सब क्या बदमाशी चल रही है ?"

उसने दो तीन चमड़े के हंटर पल्ल्वी के नंगे बदन पर लगाए और बोली-" तुम दोनों अब मेरे साथ मेरे कमरे में आओ"

अर्जुन भी इस समय पूरी तरह निर्वस्त्र खड़ा था और पल्ल्वी भी पूरी तरह नंगी थी.

रश्मि ने अर्जुन से कहा- " तुम अपना निक्कर और टी शर्ट पहन लो"

अब रश्मि ने पल्ल्वी से कहा-" तुम भी अपनी ब्लाउज पेटीकोट और साड़ी पहनो और दोनों मेरे कमरे में आओ. आगे की खबर तुम लोगों की वहीं ली जाएगी."

अर्जुन और पल्ल्वी दोनों ही हैरान थे की रश्मि आखिर क्या चाहती है

दोनों ने अपने अपने कपडे पहने और रश्मि के कमरे में आ गए.

रश्मि ने अपना वाशरूम खोला और दोनों से कहा-" तुम दोनों जाकर उस बात टब में खड़े हो जाओ और जो गाना बजेगा उस पर एक धमाकेदार डांस करके दिखाओ - दोनों शावर चला लेना ताकि बरसात जैसा माहौल बन जाए क्योंकि यह गाना बरसात का है."

अर्जुन मन ही मन बहुत खुश हुआ- उसने सोचा कि वह तो बेवजह ही डर रहा था-अब तो रश्मि मेम साब ने मेरी डबल मौज़ करवा दी.

दोनों बाथ टब में जाकर खड़े हो गए और दोनों शावर चलाकर भीगने लगे. अब रश्मि ने म्यूजिक सिस्टम पर "टिप टिप बरसा पानी" गाना लगा दिया और दोनों उस गाने के हिसाब से नाचने लगे. रश्मि ने बाथरूम में कैमरा फिट कर रखा था जो इस गाने की रिकॉर्डिंग भी कर रहा था.

नाच गाने के बीच ही अर्जुन ने पल्ल्वी की साड़ी उतार फेंकी थी और उसके बदन से चिपक चिपक कर डांस कर रहा था.

गाना ख़त्म होते होते अर्जुन ने पल्ल्वी को टब के अंदर लिटा दिया और उसके ऊपर लेटकर उसके बदन को चूमते चाटते हुए उसके चेहरे तक पहुंच गया और गाने की समाप्ति पर वह उसके होंठों को बेतहाशा चूम रहा था.

गाना ख़त्म हुआ तो रश्मि ने पहले अर्जुन से कहा-"तौलिया उठाओ और अपने बदन को पोछो"

अर्जुन भी अब फिर से नंगा हो गया था. उसने अपने बदन को टॉवल से पोछ कर सुखा लिया.

पल्ल्वी अभी भी एकदम निर्वस्त्र और भीगी हुई खड़ी हुई थी.

अब रश्मि ने अर्जुन से कहा-" वह दूसरा टॉवल उठाओ और पल्ल्वी के बदन को भी पोछ पोछ कर सुखाओ"

अर्जुन की तो मानो मौज़ ही मौज़ थी. उसने टॉवल लेकर पल्ल्वी के बदन को पोछना शुरू कर दिया. पल्ल्वी की हालत भी अब बेकाबू सी हो चुकी थी और उसके मुंह से भी अजीब अजीब आवाज़ें निकल रही थीं.

रश्मि ने मुस्करा कर अर्जुन की तरफ देखा और वाशरूम का दरवाज़ा बंद करते हुए बोली-" तुम लोग अपने अपने बदन को पोछ लो, फिर बाहर आ जाना."

रश्मि भी जानती थी कि अब अंदर क्या होने वाला है, इसलिए उसने जानबूझकर दरवाज़ा बंद कर दिया था.

दरवाज़ा बंद होते ही पल्ल्वी बाथ रूम के फर्श पर बैठ गयी और अर्जुन के लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी..अर्जुन भी इस जन्नत का मज़ा लूटने लगा.

दोनों बाहर आ गए तो रश्मि ने दोनों से कहा-" इस समय ठीक ४ बजे हैं. आधे घंटे बाद दोनों मेरे पास दुबारा से आओ. पल्ल्वी तुम सिर्फ गाउन पहनकर आओगी और अर्जुन तुम सिर्फ शर्ट और निक्कर पहनकर आओगे."

"जी मेम साब" अर्जुन खुश होकर बोला

पल्ल्वी को लगा कि अगर वह कुछ नहीं बोली तो वह पिट जाएगी, इसलिए वह भी रश्मि की तरफ देखकर बोली- " जी मेम साब"

रश्मि ने खुश होकर अर्जुन की तरफ देखा-" तुमने लगता है बिलकुल ठीक से ट्रेनिंग दे दी है मेरी सेक्स स्लेव को. गुड़. मैँ खुश हुई."

इसके बाद पल्ल्वी और अर्जुन दोनों वहां से चले गए

शेष अगले भाग में.....
 
Part 37

आधे घंटे बाद कुसुम और अर्जुन दोनों रश्मि के कमरे में पहुंच गए। रश्मि ने देखा कि साढ़े 4 बज चुके हैं और मम्मी को 6 बजे आना होता है। उसने कुछ सोचकर अर्जुन से कहा- " तुम जाओ और अपना किचिन का काम निपटाओ। मम्मी 6 बजे आएंगी तो उनके लिए खाना वगैरा तैयार करो।'

अर्जुन " जी मेम साब" कहकर वहां से चला गया । अब वहां सिर्फ कुसुम थी जो अपना गाउन पहने खड़ी थी।

रश्मि दरअसल इस समय कुसुम से अकेले में ही मस्ती करने के मूड में थी इसलिए उसने अर्जुन को बहाना बनाकर वापस भेज दिया।

रश्मि कुसुम से बोली- " अपने गाउन की ज़िप नीचे करो। "

कुसुम ने गाउन की ज़िप नीचे करनी शुरू की। रश्मि ने देखा कि कुसुम ने अंदर कुछ भी नही पहना हुआ है। कुसुम के उरोज नज़र आ रहे थे। ज़िप को कुसुम ने नाभि पर लाकर रोक दिया।

रश्मि बेचैन होकर बोली- " और नीचे करो ज़िप को। पूरी ज़िप खोलो।"

कुसुम ने ज़िप को और नीचे कर दिया अब उसकी योनि और जाँघे सब रश्मि के सामने थे।

इससे पहले कि रश्मि कुछ और बोलती, कुसुम अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए रश्मि से कहने लगीं- " मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है । मामला सीरियस है और जबसे में आई हूँ तुम लोग मुझे कुछ बोलने का मौका ही नही दे रहे हो। "

कुसुम को इस तरह से बोलते देख रश्मि का मूड एकदम बदल गया और बोली- " ठीक है अपना गाउन बंद करो और बोलो। "

अब कुसुम ने पास पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोलना शुरू किया- " मैं काफ़ी समय से तुम्हारी मम्मी के बारे में बात करना चाह रही थी लेकिन मामला कुछ इस तरह का है कि अभी भी मुझे बताने में संकोच हो रहा है। लेकिन अब मेरे पास कोई दूसरा रास्ता भी नही है। तुम्हे बताना तो पड़ेगा ही क्योंकि मेरा वीजा इन्होंने लगवाया हुआ है और उसके आते ही मुझे तो हमेशा के लिए विमल के पास अमेरिका जाना पड़ेगा। इसके बाद घर का सारा ख्याल तुम्हे ही रखना है। "

रश्मि को अब तक कुछ समझ नही आया था कि कुसुम क्या कह रही है। कुसुम का वीजा बन जायेगा और वह विमल के पास अमेरिका चली जायेगी, यह बात तो रश्मि को भी एक तरह से मालूम ही थी, लेकिन वह जो असली बात कहने में हिचक रही थी, उसका अंदाज़ा रश्मि नही लगा पा रही थी।

रश्मि ने कुसुम की तरफ देखा- " मुझे कुछ पल्ले नही पड़ रहा है कि आप क्या कहना चाहती हो। "

कुसुम फिर बोलने लगी- ठीक है मै तुम्हे विस्तार से सब बताती हूँ। दरअसल तुम्हारे पापा की काफी कम उम्र में ही डेथ हो गई थी। उनकी उम्र उस समय 48 साल की ही थी और तुम्हारी मम्मी उस समय 43 साल की थीं। अब तुम्हारी मम्मी लगभग 46 साल की हैं। तुम्हारी मम्मी की मानसिक हालत पापा की डेथ के बाद काफी खराब हो गई थी। हमने उन्हें एक मनोचिकित्सक को दिखाया था लेकिन उसने जो दवा बताई उसका कुछ फायदा नही हुआ। जब हम दूसरे मनोचिकित्सक के पास गए तो उसने तुम्हारी मम्मी की काउंसलिंग की और यह बताया कि इन्हें दवा की जरूरत नही है बल्कि जो पति की कमी इनकी जिंदगी में आई है, उस कमी को किसी तरह पूरा करना पड़ेगा। विमल ने डॉक्टर से कहा कि क्या अब इस उम्र में दूसरी शादी करने से यह समस्या हल हो जाएगी तो डॉक्टर ने कहा कि इन्हें बिल्कुल अपने पति जैसा ही मर्द चाहिए । "

कुसुम बोलते बोलते फिर रुक गयी।

रश्मि की उत्सुकता और बढ़ गई - " फिर क्या हुआ भाभी ? "

कुसुम बोली- " डॉक्टर भी साफ साफ नही बोल रहा था इसलिए उसने पति जैसा मर्द चाहिए कहकर अपनी बात खत्म कर दी। लेकिन जब हम लोगों ने उससे कहा कि हमे उसकी बात बिल्कुल भी पल्ले नही पड़ी तो उसने हमें सब कुछ साफ साफ बताना शुरू किया। डॉक्टर बोला कि मम्मी पूरी तरह से सबमिसिव नेचर की महिला हैं और उन्हें हर समय उन्हें अपने काबू में रखने वाला एक ऐसा मर्द चाहिए होता है जो उन्हें अपने इशारों पर नचा सके यानि ऐसा मर्द जो अपनी पत्नी को एक सेक्स स्लेव की तरह ट्रीट कर सके। क्योंकि पापा शुरू से ही तुम्हारी मम्मी को बहुत रौब दाब में रखते थे और उन्हें एक सेक्स स्लेव की तरह ट्रीट करते थे इसलिए अब मम्मी को उस सबकी लत लग चुकी है जिसके पूरा न होने पर उनका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है। "

शेष अगले भाग में....
 
PART-38

पल्ल्वी जितना ज्यादा मम्मी के बारे में बता रही थी, उससे ज्यादा लगता था कि वह उनके बारे में छुपा रही थी और रश्मि के लिए यह सब एक रहस्य बनता जा रहा था. वह फिर से पल्ल्वी से बोली; " लेकिन भाभी, मम्मी तो बिलकुल ठीक और स्वस्थ नज़र आती है. रोजाना नियम से मंदिर भी जाती हैं और भजन -कीर्तन भी करती हैं, फिर यह आप उनके बारे में क्या बात कर रही हैं ? "

पल्ल्वी बोली : मम्मी की मानसिक हालत में सुधार के लिए ही उनकी एक फ्रेंड ने हम लोगों को मंदिर का रास्ता दिखाया था कि "सुखसागर आश्रम" में बने मंदिर में जाने से मम्मी की मानसिक हालत में सुधार हो सकता है. मम्मी की वह फ्रेंड भी इसी आश्रम में बने मंदिर में काफी समय से जा रही थी. विमल ने और मैंने भी मंदिर और आश्रम में जाकर देखा तो यही लगा कि यहां आकर शायद मम्मी की मानसिक हालत में सुधार आ जाए और तभी से मम्मी हर रोज सुबह ११ बजे मंदिर के लिए निकल जाती हैं और शाम को ६ बजे वापस आती हैं.

अब रश्मि बोली : इसका मतलब अब तो मम्मी ठीक हैं. मंदिर जाने से उन्हें कौन रोक रहा है. वह मंदिर जाती रहें और अपनी मानसिक हालत को दुरुस्त रखें.

पल्ल्वी बोली : " दरअसल मंदिर के आश्रम में भी मम्मी इसीलिए खुश हैं और उनका मानसिक संतुलन सम्भला हुआ है, क्योंकि उनके साथ वहां पर सारे दिन वही सब कुछ होता है, जो वह चाहती हैं. मंदिर में एक आश्रम भी है जिसके मालिक या समझो कि गुरूजी बहुत रंगीन मिज़ाज़ के हैं. उन्हें मम्मी जैसी औरतों और लड़कियों के साथ रास लीला करने का शौक है. ऊपर से देखो तो मंदिर के इस आश्रम में भजन कीर्तन ही होता है. महिलायें वहां जाती हैं और भजन कीर्तन करते हुए नाचती रहती हैं. आश्रम के नियमों के अनुसार अभी महिलाओं को अपनी साड़ी उतारकर सिर्फ ब्लॉउस और पेटीकोट पहनकर ही नाच नाच कर भजन कीर्तन करना होता है. बस यहीं से इन महिलाओं के यौन शोषण की शुरुआत हो जाती है. जो औरतें आसानी से गुरूजी और उनके मुस्टंडे चेलों का यौन शोषण खुशी खुशी बर्दाश्त कर लेती हैं, उन्हें ही आगे प्रोमोट करके आश्रम में गुरूजी के दर्शन के लिए तैयार किया जाता है. देखा जाए तो यह गुरूजी, उनके चेलों और वहां जाने वाली औरतों सब के लिए "विन विन फार्मूला" है. "

पल्ल्वी अब थोड़ा रुकी और रश्मि की तरफ देखने लगी. रश्मि को भी अब मामला काफी हद तक समझ में आने लगा था.

पल्ल्वी ने अब आगे बोलना शुरू किया-" देख मेरे पास तेरी मम्मी के साथ आश्रम में क्या कुछ हो रहा है, उसकी जानकारी तो नहीं है लेकिन एक और वीडियो मुझे कहीं से मिली थी जिसमे आश्रम की कारगुजारियों के बारे में पूरी जानकारी है. उसे देखकर इस बात का आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आश्रम में मम्मी के साथ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा होगा जिसकी वजह से वह पूरी तरह खुश, संतुष्ट और अपने पूरे मानसिक संतुलन को बनाये रखने में सफल हैं. वह वीडियो मेरे पास एक पेन ड्राइव में हैं. वह पेन ड्राइव मैं तुम्हे दिखा सकती हूँ. उससे तुम्हे बाकी की कहानी का अंदाज़ा भी लग जाएगा."

रश्मि ने यह सब सुना तो मानो उसका सर चकराने लगा. वह बोली-" भाभी, यह सब आपकी और भैया की जानकारी में ही हो रहा है. ? "

पल्ल्वी बोली-" हाँ रश्मि, यह सब हमारी पूरी जानकारी में ही हो रहा है. इसका घरेलू इलाज़ तो यह था कि विमल खुद अपनी मम्मी को वह सुख पहुंचाए, जिसकी तलाश में वह आश्रम तक चली गयी हैं या फिर मैंने तो यहां तक सुझाव दिया था कि यह जिम्मेदारी अर्जुन को सौंप दी जाए, लेकिन विमल इस बात पर भी राजी नहीं हुए थे. उनका कहना था कि मंदिर और आश्रम की आड़ में ही मम्मी को अपनी इच्छाएं पूरी करने दो."

अब रश्मि कहने लगी : " लेकिन विमल भैया यह सब कैसे कर लेते ?"

पल्ल्वी बोली : तुम्हारे भैया बिलकुल अपने पापा पर ही गए हैं और अपनी वाइफ को "सेक्स स्लेव" की तरह ही ट्रीट करते हैं.

( यह कहने के बाद पल्ल्वी हालांकि खुद ही शर्मा गयी थी लेकिन जो हकीकत थी, वह उसने बखूबी बयान कर दी थी)

रश्मि फिर बोल पडी : और भाभी, आप जो कह रही हैं कि आपने अर्जुन का नाम इस काम के लिए सुझाया था , वह क्या सोचकर सुझाया था . क्या अर्जुन भी ...?"

अब पल्ल्वी हंसने लगी : रश्मि, अर्जुन के बारे में तो अब तुझे ज्यादा मालूम होगा लेकिन मैंने जो अंदाजा अर्जुन के बारे में लगाया था, वह उससे भी कहीं ज्यादा तेज निकला. मेरा आज भी यह मानना है कि हमें मंदिर-आश्रम का चक्कर छोड़कर मम्मी को अर्जुन के हवाले कर देना चाहिए."

रश्मि एकदम सकते में आ गयी : " आपका क्या मतलब है कि मम्मी को अर्जुन के हवाले कर देना चाहिए.?"

पल्ल्वी बोली : मैं वही कह रही हूँ जो तुम समझ रही हो. इसी में हम सब की भलाई है. मुझे तो मंदिर और आश्रम की करतूतों के बारे में सोच सोचकर ही डर लगता है. कम से कम अर्जुन तेरे पूरे कंट्रोल में तो है. घर की बात घर में भी बनी रहेगी और किसी को कभी कुछ पता भी नहीं चलेगा. अब शायद विमल भी इस बात के लिए राजी हो जाएंगे. उन्हें पहले यह लग रहा था कि अर्जुन नौकर है और मम्मी को कंट्रोल में लेकर हम सब को कंट्रोल कर लेगा. लेकिन मैंने देखा है कि तुमने बड़ी चालाकी से अर्जुन जैसे दबंग इंसान को किस तरह से अपने कंट्रोल में कर रखा है. अगर अर्जुन को तुम इसी तरह अपने पूरे कंट्रोल में रख सको तो अर्जुन मम्मी को भी कंट्रोल कर ले तो मरे ख्याल से उसमे कोई बुराई नहीं है."

अब बातों बातों में पल्ल्वी ने रश्मि की जमकर तारीफ़ कर दी और रश्मि उस तारीफ़ से फूलकर एकदम कुप्पा हो गयी थी. रश्मि बोली-" भाभी, जैसा आप कहो, मैं वैसा करने के लिए तैयार हूँ. मम्मी हर हालत में ठीक रहनी चाहिए. हम सब यही तो चाहते हैं."

बातों बातों में साढ़े पांच बज गए थे. रश्मि का मूड एकदम बदल चुका था. उसके दिमाग से पल्ल्वी के प्रति जो दुर्भावना थी, वह भी एकदम ख़त्म हो गयी थी. उसने पल्ल्वी से कहा-" भाभी, अब आप जाकर आराम कर लो. आधे घंटे बाद मम्मी भी आ जाएंगी.वह आश्रम वाली वीडियो अगर आप चाहो तो आज रात को खाना खाने के बाद देख लेंगे ?"

पल्ल्वी उठती हुई रश्मि से बोली-" मैं जब खाना खाने आऊंगी तो आश्रम वाली पेन ड्राइव लेकर ही आऊँगी. फिर तेरे कमरे में ही उस आश्रम की वीडियो को देख लेंगे."

यह कहकर पल्ल्वी अपने कमरे में चली गयी और रश्मि सोफे पर पीछे की तरफ बैठकर न जाने किन ख्यालों में डूब गयी.

शेष अगले भाग में....
 
पल्ल्वी के जाने के बाद सबसे पहले रश्मि ने अर्जुन को फोन करके बुलाया.

अर्जुन रश्मि के पास आया और बोला-" जी मेम साब, आपने मुझे बुलाया."

रश्मि अर्जुन से बोली : अब जब तक मैं तुम्हे न कहूँ, तब तक तुम पल्ल्वी से बिलकुल दूर रहोगे और अपना सारा काम भी खुद ही करोगे. समझे ?"

" जी मेम साब समझ गया. मैं अपना सारा काम खुद ही करूंगा और पल्ल्वी से एकदम दूर रहूंगा." अर्जुन बोला

" ठीक है, अब तुम जाओ और मम्मी के और उसके बाद हम सबके खाने की तैयारी करो" रश्मि उससे बोली और वह वहां से चला गया.

मम्मी रोजाना की तरह शाम को लगभग ६ बजे वापस आ गयी थीं और उन्होंने फ्रेश होने के बाद खाना भी खा लिया था और अपने कमरे में सोने के लिए भी चली गयी थीं.

इसके बाद जब डिनर की टेबल पर पल्ल्वी और रश्मि इकट्ठे हुए तो भी वह दोनों चुपचाप ही रहे. खाना खत्म करने के बाद पल्ल्वी रश्मि के साथ उसके कमरे में आती हुई बोली- " मैं वह आश्रम वाली पेन ड्राइव ले आयी हूँ. इस समय देख सकते हैं. लगभग एक घंटे की वीडियो है."

रश्मि बोली : " ठीक है. देखते हैं क्या चल रहा है आश्रम में."

इसके बाद दोनों कमरे में अंदर आ गए और रश्मि ने उस पेन ड्राइव को टी वी स्क्रीन पर लगा दिया और वीडियो चलनी शुरू हो गयी.

रश्मि साइड रूम में एक सोफे पर बैठ गयी और पल्ल्वी सामने पडी एक कुर्सी पर बैठकर वीडियो देखने लगी.

पहले वीडियो में आश्रम में एक महिला मंदिर के पुजारी के पास आती है.और कहती है-" गुरु जी, मेरी शादी को दो साल हो गए हैं और अभी तक..."

पुजारी उसे बीच में रोकते हुए कहता है-" हम सब समझ गए तुम्हे क्या परेशानी है. हमारे गुरूजी की कृपा से तुम जल्द ही पुत्र रत्न की प्राप्ति करोगी. अब ऐसा करो आज से हर रोज मंदिर में भजन कीर्तन के कार्यक्रम में अपना योगदान देना शुरू कर दो. बाकी काम हमारे गुरु जी पर छोड़ दो."

इसके बाद वह पुजारी उस नवयौवना को मंदिर के पीछे बने आश्रम के एक कमरे में ले जाता है, जहां पर लगभग २०-२५ महिलाएं पहले से ही नाच नाच कर भजन कीर्तन कर रही हैं. सभी ने सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट ही पहना हुआ था और वे सब अपने हाथ ऊपर उठाकर नाच रही थीं. वहां पर गुरु जी के दो तीन चेले भी बैठे हुए थे जो उन लोगों के नाच को देखकर उस पर टीका टिप्पणी भी कर रहे थे और बीच बीच में कुछ निर्देश भी दे रहे थे.

वहां सभी आयु वर्ग की महिलायें मौजूद थीं. २० साल से लेकर ५० साल तक की आयु वर्ग की औरतें वहां मौजूद थीं और सब की सब वहां मस्त होकर भजन कीर्तन करते हुए नाच रही थीं. अगर कोई महिला गलती से अपना हाथ नीचे कर लेती तो वहां बैठा कोई न कोई चेला उसे टोक देता-" सबको हाथ ऊपर उठाकर नाचना है-गुरु जी की पूरी कृपा पाने के लिए हाथ ऊपर उठाकर नाचना जरूरी है." चेले के कहने पर वह महिला फिर से अपने हाथ उठाकर नाचना शरू कर देती. जिस महिला को लेकर वहां मंदिर का पुजारी अभी अभी लेकर आया था, उसे देखते ही एक चेला उठकर उस महिला के पास आ गया और बोला-" ठीक है पुजारी जी, आप मंदिर में जाओ, इन्हे गुरु जी के भजन कीर्तन में मैं लगवाता हूँ."

इसके बाद वह चेला उस महिला को लेकर एक अलग कमरे में आ जाता है, जहां पर चार पांच महिलायें अलग अलग चेलों के साथ नाच रही हैं. अब वह चेला उस साथ लाई गयी नयी महिला की साड़ी एक झटके में उतार देता है और कहता है-" आश्रम के नियमों के अनुसार यहां साड़ी उतारकर ही भजन कीर्तन करते हुए नाचा जाता है." वह महिला कुछ नहीं बोली और चुपचाप देखती रही कि कैसे उस चेले ने उसकी साड़ी को एक दीवार पर लगे बॉक्स में रखकर उस बॉक्स को बंद कर दिया और महिला से बोला-" यह ५६ नंबर का बॉक्स है. यह नंबर याद रखना. शाम को जाते समय इसी बॉक्स में से अपनी साड़ी निकलकर पहन लेना. अब आओ मेरे साथ तुम्हे नाचने का अभ्यास कराना पड़ेगा ताकि कल से तुम भी भजन कीर्तन मंडली में नाच नाच कर गुरु जी की कृपा प्राप्त कर सको."

अब वह महिला भी अपने बलाउज और पेटीकोट में थी. उसका पेटीकोट नाभि से काफी नीचे बंधा हुआ था और उसकी पतली कमर और चिकना पेट किसी को भी बेकाबू करने के लिए काफी था. उस कमरे में भजन कीर्तन का संगीत जोर जोर से पहले से ही चल रहा था. उस चेले ने उस महिला के पीछे खड़े होकर अपने दोनों हाथ उसकी कमर के दोनों तरफ टिका दिए और बोला-" अब अपने हाथ ऊपर उठाओ और मेरे साथ थिरक थिरक कर नाचो."

उस महिला ने देखा की उस कमरे में मौजूद बाकी की महिलाओं को भी अलग अलग चेले उसी तरह हाथ ऊपर करवाकर उनकी कमर को पीछे से पकड़कर नाचने का अभ्यास करवा रहे थे. लिहाज़ा उसने भी अपने आप को चेले के हवाले कर दिया और उसके दिए निर्देशों के हिसाब से नाचना शुरू कर दिया.

इसके बाद कैमरा दुबारा से उसी कमरे में आ गया जहां पर २०-२५ महिलायें भजन कीर्तन पर नाच रही थीं. वहां जो चार पांच चेले बैठे उस नाच को देख रहे थे, वे आपस में बात चीत भी कर रहे थे. एक चेला अपने साथ बैठे दूसरे चेले से बोला-" महेश भाई, वह जो नीले ब्लॉउज और पेटीकोट में महिला नाच रही है ,उसका क्या नाम है ?"

महेश चेले ने जबाब देते हुए कहा-" राहुल भाई, यह तो कल्पना है. अपने पति की नपुंसकता से परेशान है और उसका समाधान कराने के लिए गुरूजी से मिलना चाहती है. लेकिन बात क्या है ?"

राहुल चेला अब बोला-" देख भाई उसका पेट कुछ आगे नहीं निकल आया है ? "

महेश चेला बोला- " हाँ निकल तो आया है, इसका इलाज़ करना पड़ेगा." यह कहता हुआ महेश कल्पना के पास पहुंच गया और उसे लेकर एक तीसरे कमरे में आ गया और उससे बोला-" तुम अपनी फिटनेस का बिलकुल ख्याल नहीं रख रही हो तो फिर गुरु जी से तुम्हारी मुलाक़ात कैसे हो सकती है ? "

उस कमरे में भी तीन चार महिलाएं अलग अलग तीन चार चेलों के साथ कोई न कोई योगासन इत्यादि कर रही थीं.

महेश चेले ने कल्पना के चिकने पेट को सहलाते हुए कहा-" शरीर का यह हिस्सा एकदम सपाट होना चाहिए लेकिन तुम्हारा कुछ कुछ आगे आने लगा है, इसे अंदर करने के लिए तुम्हे मुर्गासन करना होगा. चलो मुर्गासन करो." यह कहने के साथ ही महेश चेले ने कल्पना को जबरन मुर्गा बना दिया और उसके नितम्बों पर हाथ फिराते हुए बोला-" अब हर रोज तुम्हे इसी तरह एक घंटा यह आसान करना है ताकि तुम्हारा पेट दुबारा से सपाट हो सके."

महेश चेला कल्पना के पास ही एक कुर्सी डालकर बैठ गया और बीच बीच में उसके बदन को किसी न किसी बहाने छूता सहलाता जा रहा था.

उस कमरे में मौजूद अन्य चेले भी अलग अलग महिलाओं को "फिट" रखने के लिए अलग अलग योग क्रियाएं करवा रहे थे-एक चेला अपने सामने खड़ी महिला से कान पकड़कर दंड बैठके लगवा रहा था तो एक चेला महिला के पीछे सटकर खड़ा होकर उससे दंड-बैठकें लगवा रहा था और इस कोशिश में उसका पूरा बदन महिला के बदन से ठीक से रगड़ा जा रहा था. सभी महिलाओं की ड्रेस सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट ही थे. इससे ज्यादा कपडे पहनना आश्रम के नियम के खिलाफ था. चेलों ने भी गेरुआ रंग का कुरता और धोती पहन रखी थी और उनके इस पहनावे की वजह से इस बात का अंदाज़ा लगाना संभव नहीं था की उनका लण्ड इन भक्त महिलाओं को छूने सहलाने में खड़ा होता है या नहीं.

अब कैमरा एक चौथे कमरे की तरफ आ गया था जहां सिर्फ दो नवयुवतियां दिखाई दे रही थीं. दोनों बला की खूबसूरत थीं और उन्हें शायद आज ही अभी अभी गुरूजी के दर्शन करवाए जाने थे इसलिए उन्हें गुरूजी के सामने पेश होने के लिए तैयार किया जा रहा था. यहां भी इन दोनों महिलाओं के साथ दो चेले लगे हुए थे. एक चेले ने अपने सामने खड़ी युवती का पेटीकोट खुद नारा खोलकर उतार दिया था और अब वह उससे अपनी ब्लॉउज उतारने को कह रहा था-" आज तीन महीने बाद तुम्हारा नंबर आया है और गुरूजी तुमसे मिलने के लिए तैयार हुए हैं- आज ही उनकी सारी कृपा पाने के लिए जैसे मैं कहता हूँ, वैसा ही करती जाओ-वरना तुम अपनी सास के ताने ही सुन सुन कर परेशान हो जाओगी." उस युवती ने अपनी बलाउज भी उतार दी थी और अब उसके बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी ही बाकी रह गए थे. चेले ने जी भरकर उसके गदराये बदन को चारों तरफ से देखा भी और छूता, दबाता और सहलाता भी रहा. इसके बाद उसने अपने हाथ में किसी पाउडर को लेकर अपनी दोनों हथेलियों पर मला और बोला-"अब इस चमत्कारी पाउडर से तुम्हारे पूरे बदन की पोलिश की जाएगी ताकि गुरूजी की कृपा तुम्हे जल्द से जल्द प्राप्त हो सके." यह कहकर उसने अपने हाथों को उसके पूरे बदन पर फिराना शुरू कर दिया. उसके हाथ उसकी जाँघों के अंदर बाहर, उसके नाभि प्रदेश और चिकने पेट से होते हुए उसकी ब्रा के चारों और बहुत तेजी के साथ घूम रहे थे. चेला उस युवती से बोला-"चलो अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ". युवती ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए और चेला उसके बदन के पीछे से सटकर खड़ा होते हुए उसकी बगलों पर अपने हाथ फिराने लगा.

कमरे में मौजूद दूसरी युवती के साथ भी दूसरा चेला लगभग यही सब कुछ कर रहा था.

कुछ देर बाद दोनों चेले उन दोनों युवतियों को लेकर एक महलनुमा कमरे में आ गए जहां एक बड़े से मखमली बिस्तर पर गुरूजी यानि महाराज सुख सागर जी बैठे हुए थे.

दोनों चेलों ने अपने अपने साथ आयी युवतियों को निर्देश दिया-" आज का दिन तुम्हारे लिए बहुत भाग्यशाली है क्योंकि आज पूज्य गुरूजी ने तुम दोनों को अपने दर्शन का सौभाग्य प्रदान किया है. इस अवसर का भरपूर फायदा उठाओ और गुरूजी की हर इच्छा को भगवान् का आदेश मानकर उसे पूरा करती जाओ-इसी में तुम्हारा कल्याण है."

यह कहकर दोनों चेले उस कमरे से बाहर आ गए और दोनों युवतियां गुरूजी के पास जाकर उनके बिस्तर की शोभा बन गयीं.

इसके बाद इस कमरे से कैमरा हैट गया था और उस कमरे में आ गया था जहां महिलायें अपने अपने नंबर के बॉक्स में से अपनी अपनी साड़ियां निकलकर पहन रही थीं और अपने अपने घर की और प्रस्थान कर रही थीं. आश्रम का एक नियम यह भी था की यहां शाम ६ बजे के बाद कोई महिला नहीं रह सकती थी. जो कुछ भी यहां होता था, दिन दहाड़े ही किया जाता था.

अब यह वीडियो ख़त्म हो गयी थी और पल्ल्वी ने अब रश्मि की तरफ देखकर पूछा-" अब आया कुछ समझ में ?"

रश्मि बोली-" हाँ भाभी, काफी कुछ समझ में आ गया है-शायद इसीलिए मम्मी जब शाम को ६ बजे वापस आती हैं तो बहुत थकी होने के कारण जल्द ही फ्रेश होकर, खाना खाकर अपने कमरे में सोने चली जाती हैं."

पल्ल्वी बोली-" रश्मि, जितना इस वीडियो में दिखाया गया है, सिर्फ उतना ही थोड़े होता है. यह तो एक नमूना भर है. आश्रम और मंदिर की साफ़-सफाई, झाड़ू पोछा, गुरूजी और चेलों के कपड़ों की धुलाई और उनके कमरों का रख रखाव सब इन्ही महिलाओं से करवाया जाता है. गुरु जी को अपनी मस्ती के लिए हर रोज नयी नयी लडकियां और औरतें मिल जाती हैं और इसके लिए उन्होंने चेलों को पूरा फ्री हैंड दे रखा है. मंदिर और आश्रम में जो चंदा और दान दक्षिणा आती है, उससे गुरु जी और उनके चेलों का रहना-खाना तो आराम से चल ही रहा है, अय्याशी के लिए यह महिलायें भी वहां अपनी मर्ज़ी से ही जाती हैं. इसलिए इस वीडियो बनाने वाले जिस पत्रकार ने इस आश्रम में चल रही गतिविधियों का पर्दाफाश करने की कोशिश की थी तो मामला अदालत में टिक ही नहीं पाया था क्योंकि कोई भी औरत गुरूजी और उनके चेलों के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं थी."

रश्मि बोली-" फिर अब हमें क्या करना चाहिए भाभी ?"

पल्ल्वी बोली- " मम्मी को अगर यही "ट्रीटमेंट" करवाना है, जो आश्रम के गुरु और चेले मिलकर करते हैं, तो उससे अच्छा "ट्रीटमेंट" तो अपना अर्जुन ही कर देगा. बात घर की घर में भी रहेगी"

रश्मि बोली- " भाभी आपकी बात तो ठीक लग रही है. अब तो नींद आ रही है. आप भी जाकर सो जाओ. इस बारे में कल बात करते हैं."

शेष अगले भाग में....
 
पल्ल्वी के जाने के बाद रश्मि काफी देर तक सो नहीं सकी.

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उसने पल्ल्वी को तो यह बहाना बनाकर भेज दिया कि उसे नींद आ रही है लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी

दरअसल वह पल्ल्वी की बातों को सच तो समझ रही थी लेकिन यह नहीं समझ पा रही थी कि आखिर कैसे अपनी ही मम्मी को घर के एक नौकर के हवाले कर दिया जाए तो उन्हें अभी तक "बड़ी मालकिन" कहता आया था

रश्मि ने हालांकि कभी अपनी मम्मी के प्रति इस नज़रिये से सोचा भी नहीं था कि उनकी उम्र अभी सिर्फ ४६ साल की है और उन्होंने अपने आप को एकदम फिट रखा हुआ है.

सबसे बड़ी समस्या तो उसे यह लग रही थी कि क्या वह अर्जुन से यह सब करने के लिए कह भी पाएगी ? यह तो उसे पता था कि अगर अर्जुन को रश्मि की तरफ से छूट मिल गयी तो वह अपनी "बड़ी मालकिन" को भी अपना सेक्स स्लेव बनाने में कोई देर नहीं लगाएगा लेकिन यह सब होगा कैसे ?

यह सब सोचते सोचते रश्मि को भी नींद आ गयी

अगले दिन सब लोगों ने रोज की तरह नाश्ता वगैरा किया और जब मम्मी रोजाना की तरह मंदिर चली गयीं तो रश्मि और पल्ल्वी फिर अपनी कल की बातचीत को आगे बढ़ाने लगीं.

रश्मि : बताओ अब क्या करें भाभी-मैं तो आपकी बात से सहमत हूँ.

पल्ल्वी : देख, कल रात मैंने विमल से भी फोन पर बात करके सारी बात बतायी है. विमल का भी यही कहना है कि मंदिर-आश्रम भेजने में ज्यादा रिस्क है क्योंकि वहां अगर कभी पुलिस वगैरा की रेड हुई तो हमारी भी बदनामी हो सकती है. वह भी यही कह रहे हैं कि अर्जुन के जिम्मे ही यह काम सौंप देना चाहिए.लेकिन उस पर हमारी निगरानी भी रहनी चाहिए.

रश्मि : भाभी, अर्जुन पर निगरानी की फ़िक्र आप बिलकुल मत करो. वह मेरी मर्ज़ी के बिना इस घर में अब कुछ नहीं कर सकता है.

पल्ल्वी : यही देखकर तो मैंने यह सारी बातचीत अब छेड़ी है , क्योंकि मुझे जो अब वैसे भी यहां से अगले १०-१५ दिनों में अमेरिका चले जाना है. जब मैंने यह देख लिया कि अर्जुन तेरे पूरे कंट्रोल में है तभी मुझे यह बात ध्यान आयी कि मंदिर-आश्रम के यौन शोषण से बढ़िया तो अर्जुन का यौन शोषण ही रहेगा.

रश्मि : भाभी , अब आप यह बताओ कि मुझे क्या करना है -मैं तैयार हूँ.

पल्ल्वी : सबसे पहले तो मैं तेरे टी वी स्क्रीन में मम्मी के कमरे की भी सेटिंग कर देती हूँ ताकि तुझे उस कमरे का भी लाइव देखने को मिल सके.

पल्ल्वी इस समय रश्मि के कमरे में ही बैठी थी. उसने टी वी पर सेटिंग करके मम्मी के कमरे को भी लाइव सेटिंग के लिए कनेक्ट कर दिया. अब इस कमरे से घर के बाकी सभी कमरों को लाइव देखा जा सकता था.

इसके बाद पल्ल्वी ने बोलना शुरू किया : अब तुझे अर्जुन को इस काम के लिए तैयार करना होगा. सबसे मुश्किल यही काम है लेकिन इसे सिर्फ तू ही कर सकती है. कल से मम्मी मंदिर नहीं जाएंगी, यह सुनिश्चित करना अर्जुन का काम होना चाहिए. आज रात से ही अर्जुन को अपने काम पर लग जाना चाहिए.

अब रश्मि को सब कुछ समझ आ गया था कि उसे अब क्या करना है

उसने पल्ल्वी से कहा- " ठीक है भाभी, यह जो आश्रम वाली पेन ड्राइव है, आप अभी एक दो दिन के लिए मेरे पास ही रहने दो. मैं इसे अर्जुन को भी दिखाना चाहती हूँ."

यह सब बात करते करते १२ बज गए थे. अर्जुन दोपहर का खाना बनाने की तैयारी कर रहा था. रश्मि ने पल्ल्वी से कहा-" लंच के बाद मैं अर्जुन को अपने कमरे में बुलाकर उसे जरूरी हिदायत दूंगी और उसके बाद आपको भी बताऊंगी कि क्या प्लान है."

२ बजे तक सबने अपना -अपना लंच कर लिया और इसके बाद पल्ल्वी अपने कमरे में चली गयी और रश्मि ने अर्जुन को अपने कमरे में बुला लिया.

अर्जुन आते ही रश्मि से बोला-" जी मेम साब आपने मुझे बुलाया ?"

रश्मि बोली- " हाँ देखो सामने कुर्सी पर बैठ जाओ और एक वीडियो मैं दिखा रही हूँ, उसे ध्यान से देखो."

अर्जुन कुर्सी पर बैठ गया. रश्मि ने आश्रम वाली वीडियो टी वी पर चला दिया और अर्जुन उसे देखने लगा.

एक घंटे में वीडियो ख़त्म हो गया. अर्जुन का लण्ड इस वीडियो को देखकर भी निक्कर के अंदर ही तन कर खड़ा हो गया था

रश्मि ने उससे पुछा-" हाँ, क्या समझ आया.?"

अर्जुन बोला: मेम साब मुझे तो यह सब पहले से ही मालूम है. सुखसागर आश्रम और मंदिर के किस्से तो पूरे शहर में मशहूर हैं- वहां यही सब कुछ नहीं, और भी बहुत कुछ होता है.

रश्मि हैरान होकर बोली : और क्या क्या होता है वहां और तुझे यह सब कैसे मालूम है ?

अर्जुन : मेम साब मैं सुबह शाम पार्क वाले जिम में कसरत करने जाता हूँ, वहां उस मंदिर के एक दो चेले भी कसरत करने आते हैं, वे सब वहां के बारे में बताते रहते हैं.

रश्मि हंसकर बोली : तो तुझे भी क्या आश्रम में चेला बनने की इच्छा है ?

अर्जुन : अरे नहीं मेम साब, वहां तनखा नहीं मिलती है- बस रहो, खाओ और वहां आने वाली औरतों के साथ मौज मस्ती करो. बस......

अर्जुन की बातों को सुनकर अब रश्मि को भी लगने लगा कि पल्ल्वी ठीक कह रही है और मम्मी का वहां जाना तुरंत बंद कर देना चाहिए.[IMG]]

रश्मि को अब यह समझ नहीं आ रहा था कि अर्जुन के साथ बात को कहाँ से शुरू करे.

उसने कुछ सोचने के बाद अर्जुन से कहा-" देख अर्जुन. तू मेरी हर बात मानता आया है इसलिए मैं तुझे एक और काम की जिम्मेदारी देना चाहती हूँ- लेकिन यह बात मेरे और तुम्हारे बीच ही रहनी चाहिए और किसी को इसके बारे में पता भी नहीं लग्न चाहिए, मम्मी को भी नहीं."

अर्जुन बोला : ठीक है मेम साब, आप जो कहो मैं वह करने के लिए हमेशा ही तैयार हूँ.

रश्मि : मैं यह चाहती हूँ कि मम्मी कल से मंदिर जाना बंद कर दें क्योंकि मुझे यह मालूम पड़ा है कि जिस मंदिर में मम्मी जाती हैं, यह आश्रम उसी मंदिर का हिस्सा है

अर्जुन अब रश्मि को टोकते हुए बोला : " मेम साब आप बुरा न माने तो मैं कुछ कहना चाहता हूँ."

रश्मि बोली : हाँ बोलो, मैं बुरा नहीं मानूंगी.

अर्जुन ने अपना मोबाइल फ़ोन खोलकर उसे रश्मि को देते हुए कहा : " मेम साब जो पार्क के जिम में मंदिर में काम करने वाला चेला राकेश आता है, उसने मुझे अपने मोबाइल में से यह वीडियो दिया है."

रश्मि ने उस वीडियो को देखना शुरू किया : वीडियो में आश्रम के अंदर मम्मी एक चेले के सामने खड़ी हुई थीं उन्होंने सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट पहना हुआ था. चेला मम्मी के सामने एक कुर्सी पर बैठकर उनके पेट पर हाथ फिर रहा था -" तुम्हारा पेट थोड़ा बाहर की तरफ आना शुरू हो गया है, इसका मतलब है कि आपको फिटनेस के लिए कुछ मेहनत करनी पड़ेगी. ऐसा करो अपनी ब्लॉउज उतारो "

मम्मी ने अपनी ब्लॉउज उतार दी

ब्लॉउज उतारने के बाद चेले ने मम्मी के ब्रा में बंद उरोजों को थोड़ा दबाया सहलाया और फिर बोला-"इसे भी उतारो"

मम्मी ने ब्रा भी उतार दी.

ब्रा उतारने के बाद मम्मी अपने हाथों को अपने उरोजों पर लाकर उन्हें ढकने का प्रयास करने लगीं , लेकिन चेले ने मम्मी से कहा-" अपने दोनों हाथ एकदम सीधे करके ऊपर की तरफ उठाओ और १०० उठक बैठक लगाओ"

मम्मी ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए और चेले के सामने खड़े होकर उठक बैठक लगाने लगीं. कुछ देर बाद मम्मी थक कर रुक गयीं तो चेला बोला- " अभी सिर्फ ४० उठक बैठक हुई है. बिना रुके लगाती रहो. तुम्हारा बदन एकदम फिट होना जरूरी है- जो औरतें फिट नहीं रह सकती हैं, उन्हें आश्रम में एंट्री आगे से नहीं मिलेगी."

मम्मी बड़ी गिड़गिड़ाते हुए बोलीं : लेकिन स्वामी जी, मैं बहुत थक गयी हूँ, कुछ देर बाद रूककर बाकी की उठक बैठक लगा लूंगी."

चेला बोला : ठीक है, अपना पेटीकोट उतारो और यहां मेरी गोद में बैठ जाओ. मैं तुम्हारी थकान भी दूर कर देता हूँ और थोड़ी मालिश भी कर देता हूँ."

मम्मी ऊपर से तो पूरी निर्वस्त्र ही थीं. पेटीकोट उतारने के बाद उनके बदन पर सिर्फ एक पैंटी ही बची थी. चेले ने मम्मी को अपनी गोद में बिठाया और उनके पूरे निर्वस्त्र बदन को जगह जगह से सहलाने-दबाने और मसलने लगा."

यह वीडियो यहीं पर ख़त्म हो गयी थी . रश्मि ने देखा कि वीडियो सिर्फ १० मिनट की थी.

रश्मि ने इस वीडियो को अपने मोबाइल में भी डाउनलोड कर लिया लेकिन अर्जुन के मोबाइल से डिलीट नहीं किया. उसे मन ही मन लगा कि उसका काम अब काफी आसान हो गया है

उसने अर्जुन की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा-" तुम्हारे पास ऐसी वीडियो थी और तुमने मुझे बताया तक नहीं."

अर्जुन : मेम साब यही राकेश चेला है जो बड़ी मालकिन के साथ बदतमीजी कर रहा है. यह दो तीन दिन पहले मुझे चिढ़ा रहा था कि "तुम्हारी मालकिन भी हमारे आश्रम में आती है और मैं भी उनके साथ खूब मौज मस्ती करता हूँ." मैंने उसके एक थप्पड़ लगाते हुए कहा था कि तू क्या बकवास कर रहा है तो कल उसने सबूत के तौर पर मुझे यह वीडियो लाकर दी थी और बोला कि "देख मैंने तेरी मालकिन के साथ आज कैसे मजे लिए हैं, उन्हें तू अपनी आँखों से दख ले". मैंने तो डर के मारे आपको कुछ नहीं बताया कि कहीं आप इसे देखकर मुझ पर ही गुस्सा न हो जाओ.[IMG]]

एक के बाद एक नए खुलासे होने से रश्मि एकदम हैरानी की मुद्रा में थी लेकिन फिर भी उसने अपना संतुलन बनाये रखते हुए अर्जुन से कहना शुरू किया-" कल ने मम्मी मंदिर या आश्रम कहीं भी ना जाएँ, यह तेरी जिम्मेदारी है. जो यह चेला मम्मी के साथ कर रहा है यह सब मम्मी की जरूरत है जो उन्हें डॉक्टर ने बतायी हुई है. अगर मम्मी के साथ कोई इस तरह नियमित रूप से नहीं करेगा तो उनकी मानसिक हालत ख़राब हो सकती है. तुम्हे अपनी "बड़ी मालकिन" के साथ अब वही सब करना है तो एक दबंग मर्द अपनी औरत के साथ करता है. इसी में मम्मी की और हम सबकी भलाई है और तेरी तो मौज़ ही है (रश्मि आखिर में मज़ाक करते हुए हंसती हुई बोली) रश्मि ने देखा कि यह सुनकर अर्जुन का लण्ड अपने निक्कर में एकदम तनकर खड़ा हो गया था.

अर्जुन बोला _ " जी मेम साब. आप कह रही हैं तो मैं यह काम कर दूंगा क्योंकि आपकी कोई बात तो मैं ताल ही नहीं सकता हूँ. लेकिन यह सब मैं करूंगा कैसे ?"

रश्मि बोली-" मेरी हर बात को ध्यान से सुन. आज शाम को जैसे ही हम सब डिनर करके अपने अपने कमरों में चले जाएंगे तो तुम भी अपना डिनर कर लेना और उसके बाद मम्मी के कमरे में चले जाना. यह इस घर के सभी कमरों की मास्टर चाबी है. कमरे के बाहर और अंदर दोनों तरफ से सभी कमरे इस अकेली चाबी से बंद किये या खोले जा सकते हैं. कमरे में घुसने के बाद मम्मी अगर जाग रही हों तो ठीक है, वरना उन्हें जगा देना और यह वीडियो जो तुमने अभी मुझे दिखाया है, उसे मम्मी को भी दिखाना और कड़कदार आवाज़ में पूछना कि यह सब क्या चल रहा है और आप क्या मंदिर में यह सब करने जाती हो ? यह भी कहना कि यह वीडियो मैंने अभी तक किसी को भी नहीं दिखाया है लेकिन जरूरत पड़ने पर किसी को भी दिखा सकता हूँ. बस तुम्हारा काम इतना ही है. इसके बाद मम्मी तुम्हारे कंट्रोल में होंगी. उन्हें यह पता न लगे कि मैंने या पल्ल्वी ने तुम्हे उनके पास भेजा है. इसलिए जो कुछ भी तुम करो उसकी खबर हम लोगों को न लगे, यह दिखाने की कोशिस करना वरना उन्हें लगेगा कि हम सब इस खेल में शामिल हैं. बाकी मेरी तरफ से तुम्हे पूरी छूट है. मेरी दो ही शर्ते हैं- एक तो वही कि बिना कंडोम के सेक्स नहीं होना चाहिए और मम्मी को यह लगे कि यह सारा मामला उनके और तुम्हारे बीच ही है और घर के बाकी लोगों को इसके बारे में कुछ नहीं मालूम है."[IMG]]

अर्जुन बोला-" ठीक है मेम साब, मैं इसी तरह करने की कोशिश करूंगा. मुझसे कहीं गलती हो तो बीच में आप मुझे रोक कर ठीक करा देना क्योंकि आपने बड़ी शर्तें लगा दी हैं और काम थोड़ा मुश्किल है."

रश्मि बोली-" ठीक है, अब तुम जाकर अपना काम कर लो"

अर्जुन वहां से चला गया. शाम के साढ़े चार बज चुके थे. रश्मि ने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर लेटकर अपने मन को शांत करने का प्रयास करने लगी.

उसे चैन नहीं मिला तो उसने फोन करके पल्ल्वी को अपने कमरे में बुला लिया.

पल्ल्वी आयी तो रश्मि ने अर्जुन से हुई सारी बातचीत भी पल्ल्वी को बता दी और यह भी बता दिया कि अर्जुन आज रात मम्मी के साथ क्या करने वाला है.

पल्ल्वी ने अपने सर पर हाथ रखकर कहा- " ओह माय गॉड. कैसे कैसे नाटक हमें अभी और देखने हैं. हमने लगता है मम्मी के मामले में देरी कर दी लेकिन चलो देर आये दुरुस्त आये."

रश्मि बोली : भाभी आज रात आप भी मेरे कमरे में ही आ जाना . यहीं सो जाएंगे. अर्जुन आज पहले दिन क्या करता है, यह भी देखना है. सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक अर्जुन को यह पता था कि वह मेरी निगरानी में है. आज उसे पहली बार ऐसा लग रहा होगा कि आज उसे कोई नहीं देख रहा है. क्योंकि उसे यही पता है कि सिर्फ तीन कमरों का ही लाइव मेरे टी वी पर आता है. मुझे भी आज दोपहर तक यही मालूम था कि सिर्फ तीन कमरों का लाइव हो सकता है लेकिन मम्मी के कमरे का भी लाइव हो सकता है, यह अभी तक मुझे और आपको ही मालूम है."

पल्ल्वी हँसते हुए बोली : तो तू शैतान आज की रात अर्जुन और मम्मी की सेक्सी फिल्म देखेगी ? चल मैं भी देखने के लिए तैयार हूँ.

रश्मि थोड़ी सीरियस होते हुए बोली : नहीं भाभी, पहला दिन है. देखना जरूरी है. कहीं ऐसा न हो कि अर्जुन लो लगे कि कोई देखने वाला तो है नहीं और वह कुछ ऐसा मम्मी के साथ कर दे जो उसे नहीं करना चाहिए."

पल्ल्वी बोली : तेरा सोचना अपनी जगह ठीक है. लेकिन जहां तक मुझे लग रहा है कि अर्जुन जो कुछ भी करेगा, मम्मी को उससे फायदा ही होगा. मम्मी अगर खुश तो हम सब खुश. बस यही सच है."[IMG]]

इस बातचीत में साढ़े पांच बज गए थे. पल्ल्वी अपने कमरे में चली गयी थी और रश्मि भी फ्रेश होने के लिए वाशरूम में चली गयी.
 
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