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भाभी का बदला

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मैं दीदी के चेहरे की तरफ देख के बोला, जैसा तुम चाहो दीदी और तुरंत अपना हाथ बॉक्सर के अंदर डाल दिया, और अपने लंड को हिलाने लगा. डॉली दीदी थोड़ा हँसी और अपने हाथ पीछे ले जाके अपनी ब्रा के हुक को खोला. एक हाथ से दीदी ने अपनी चूंचियाँ छुपा ली और दूसरे हाथ से ब्रा को अपनी बाहों से निकाल के मेरी तरफ पर फेंक दिया. मैं हंसा और ब्रा जो कि मेरी टाँग पर गिरी थी उसे वहीं पड़ा रहने दिया, और अपनी खूबसूरत दीदी को निहारने लगा जो कि मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी में खड़ी थी, अपनी चूंचियाँ दीदी ने अपने एक हाथ से छुपा रखी थी जिस से मैं सब कुछ ना देख पाऊँ.

दीदी भी थोड़ा नर्वस थी, लेकिन ऐसा लग नही रहा था, दीदी ने मस्ती में अपनी गान्ड और कंधे हिला हिला के डॅन्स करना शुरू कर दिया. डॉली दीदी का लगभग नग्न शरीर देखकर मेरा हाथ बॉक्सर के अंदर लंड के उपर चल रहा था. दीदी बला की खूबसूरत लग रही थी, उनके पोनीटेल में बँधे बाल, उनके ब्रा में से निकलने को बेचैन चुचियाँ, दीदी के मस्त गोल गोल हिप्स मुझे मस्त कर रहे थे. दीदी मेरे पास आकर झुक गयी जिस की वजह से उनकी चूंचियाँ ब्रा में से और ज़्यादा बाहर निकल आई और उनका क्लीवेज देख कर मेरा लंड उफान मारने लगा. दीदी ने अपने दोनो हाथों से अब अपनी दोनो चूंचियों को पकड़ लिया और गान्ड हिला हिला के डॅन्स करने लगी.

दीदी अब घूम गयी और उनकी पीठ मेरे सामने थी, दीदी ने अपने हाथ अपनी चूंचियों पर से हटा लिए और अपने बालों में अपनी उंगलियाँ फिराने लगी, और फिर अपने कंधे के उपर से अपना सिर घूमाकर मेरी तरफ देखा, दीदी थोड़ा सा घूम भी गयी, जिसकी वजह से मुझे उनके एक गोरे गोरे, मुलायम मम्मों को साइड से देखने का मौका मिल गया.

दीदी: कैसा चल रहा है राज? (बड़ी मासूमियत के साथ दीदी ने पूछा)

मैने दीदी के चेहरे की तरफ देखते हुए कहा, दीदी, आप लाजवाब हो

दीदी को शायद मेरा जवाब पसंद आया, और सो थोड़ा सा हंस दी. दीदी अपने बाल ठीक करने के बहाने हिलने डुलने लगी जिस से मुझे उनकी मस्त चूंचियों को साइड से और ज़्यादा देखने का मौका मिल सके.

मैं और ज़्यादा देखने के लिए बेकरार था, लेकिन जितना देखा था उतना देख के ही मेरा लंड अपना लावा उगलने को तय्यार था. मैं अपने लंड को और ज़्यादा घिसने लगा, क्योंकि दीदी दूसरी तरफ देख रही थी इसलिए मैने बॉक्सर की एलास्टिक को दूसरे हाथ से और ज़्यादा उपर कर दिया जिस से मूठ मारने में आसानी हो. दीदी के मस्त बदन का रस्पान करते हुए मैने अपने प्रेकुं को अपनी आंगालियों से सुपाडे के उपर फैला दिया.

जैसे ही दीदी ने अपने हाथ अपनी चूंचियों को पकड़ने के लिए बढ़ाए, ये सोच और देख के मुझ से बर्दाश्त नही हुआ और मेरे लंड ने ढेर सारे वीर्य की पिचकारी चला दी, जो कि मेरे पेट और छाती पर आकर गिरी.

जब दीदी मेरी तरफ घूमी और देख कर स्माइल किया तब तक मैं अपने बॉक्सर को ठीक कर चुका था, दीदी ने मेरे पेट और छाती पर पड़ी वीर्य की पिचकारियों को देखा तो अनायास ही दीदी के मूँह से निकल गया... हे भगवान.... लेकिन अब मैं बेशरम हो चुका था और मुझे इस बात का कोई फरक नही पड़ा.

दीदी ने अब उस को इग्नोर करते हुए मुझ से अपनी ब्रा माँगी, मैने नीचे से उठा कर दीदी की तरफ ब्रा बढ़ाई और फिर वापस दीदी से दूर अपनी तरफ खींच ली, दीदी ने अपने दोनो होंठ दांतो से दबाए और मेरी तरफ बढ़कर ब्रा के उपर झपट्टा मारने का प्रयास किया, लेकिन मैने तुरंत दीदी की ब्रा बेड की चादर के नीचे छुपा ली, और उसके उपर अपनी टाँगें रख दी.

दीदी धीरे से फुसफुसा, राज मेरी ब्रा दो

मैने दीदी की तरफ कुटिल मुस्कान के साथ देखा, लेकिन ब्रा नही दी. दीदी मेरे पास आकर बेड की चादर के नीचे से ब्रा निकालने का प्रयास करने लगी, लेकिन मैं उसको अपने टाँगों से दबाए रहा, जब दीदी ने बहुत ट्राइ किया तो मैने चादर को एक दम टाँगों को उठा लिया, एक दम हटाने के कारण दीदी मेरे उपर आ गिरी, मैं दीदी के गुदगुदी करने लगा.

दीदी हंसते हुए तुरंत संभली और मुझे धक्का दिया, इस बीच वो भूल चुकी थी कि वो मेरे सामने टॉपलेस है. कुछ सेकेंड के लिए, जैसे ही दीदी के हाथ अपनी चूंचियों के उपर से हटे, मैने उनके मस्त मम्मों का दीदार कर लिया, दीदी तुरंत संभली और अपनी खुली चूंचियों को अपने हाथों से ढक लिया, दीदी के गाल सुर्ख लाल हो गये थे.

मुझे हंसते हुए देखकर, दीदी ने मुझे एक हाथ से धक्का दिया, लेकिन मैं इस के तय्यार था, मैने तुरंत दीदी को कमर से पकड़ कर बेड पर लिटा दिया, और दीदी के उपर आ गया. कुछ सेकेंड्स को लगा जैसे हम एक बचपन वाले भाई बेहन की प्यार भरी लड़ाई लड़ रहे हैं, मैने दीदी की दोनो बाहों को दोनो तरफ उपर कर के पकड़ के लिटा रखा था. हम ने लड़ना बंद किया, हमारी साँसें अब भी ज़ोर ज़ोर से चल रही थी, और हम हंस रहे थे, लेकिन ये खेल जल्दी ही ख़तम हो गया जब हम दोनो को एहसास हुआ कि दीदी केवल पैंटी पहने मेरे नीचे नग्न लेटी हुई है, मेरी नंगी छाती उसकी चूंचियों को दबा रही थी और मेरा लंड बॉक्सर के अंदर से दीदी की पैंटी के उपर से दबाव डाल रहा था.

हम ने एक दूसरे की आँखों में आँखें डाल के देखा, कुछ सेकेंड मुस्कुराए और फिर मैने दीदी की बाहों को छोड़ दिया, और उठने लगा. दीदी ने मुझे रोका, और बोली, नही राज, अभी नही. मेरी पीठ को अपनी बाहों से जकड के अपने उपर लिटा कर झप्पी मारने लगी. मैने तुरंत दीदी की बात की अनुपालना की और दीदी के नीचे अपनी बाहें घुसा के, दीदी को अपने गले से ज़ोर से चिपका लिया, दीदी को अपने साथ, इतने करीब, इस अवस्था में पाकर ऐसा लग रहा था जैसे जन्नत मिल गयी हो.

आख़िर में हम एक दूसरे से अलग हुए, मैं दीदी के उपर से हट गया, और दूसरी तरफ देखने लगा, जिस से दीदी अपनी ब्रा उठा सके, जब दीदी ये सब कर रही थी मैं उनकी हल्की हल्की हँसने की आवाज़ सुन पा रहा था.

मैं बोला ह्म्म्म्म

दीदी बोली राज, मुझे तुमने पूरा गीला कर दिया है अपने उस से. मुझे देखने को इशारा किया, मैने देखा दीदी सच कह रही है, दीदी की छाती, पेट सब कुछ मेरे वीर्य से सने हुए थे. दीदी की पैंटी पर भी गीला निशान था. दीदी ने अपना वाइट गाउन पहना और हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा दिए. दीदी मेरे रूम से नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी. मैं अपने बेड पर लेट कर आज हुई सारी घटनाओं की मूवी एक बार फिर से अपने दिमाग़ में चलाने लगा....

अगली सुबह कल सनडे की सुबह से बिल्कुल अलग थी, मेरे दिमाग़ में बस ये ही ख़याल आ रहे थे कि मैं और दीदी कितना ज़्यादा फिज़िकल होते जा रहे हैं. मैं शायद घबरा गया था, और कल रात अपनी गोलियों में से वीर्य की आख़िरी बूँद तक निकाल लेने के बाद, जो कुछ हम दोनो कर रहे थे, उस बात को सही ठहराना बड़ा मुश्किल हो रहा था.

मैने अपने आप से कसम खाई की अब मैं दीदी को मेरे साथ ये सब नही करने दूँगा, लेकिन मुझ में इतनी हिम्मत नही थी कि दीदी को ये बात बोल सकूँ, फिर मैने एक कागज के टुकड़े पर एक नोट बनाया उसमे लिखकर कल रात के लिए दीदी से माफी माँगी और लिखा कि आगे ऐसा हमें कुछ नही करना चाहिए, हम इस बारे में कभी और बात करेंगे.

 
2-3 दिनों तक डॉली दीदी से मैं दूर दूर ही रहा, और हम जब भी मिलते मैं कुछ नही बोलता. दीदी कन्फ्यूज़ हो गयी थी, वो मुझ से बात करना चाहती थी, लेकिन मैं उस को ऐसा कोई मौका ही नही दे रहा था, मैं ज़्यादातर घर से बाहर ही रहता, जिस से मैं इस सब से दूर रह सकूँ.

.....................

मेरे पापा के बिज़्नेस पार्ट्नर की बेटी का नाम तान्या था, वो भी मेरे साथ मेरे ही कॉलेज में पढ़ती थी. टान्या के डार्क ब्राउन बाल और नीली आँखें थी, उसका फिगर पर्फेक्ट था और मादक मुस्कुराहट थी. वो मेरी अच्छी दोस्त थी, लेकिन वो एक चालू लड़की थी और उसे लड़कों के साथ फ्लर्ट करने में बहुत मज़ा आता था.

पिछले कुछ दिनों से टान्या मेरे में कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी ले रही थी, जब भी वो मेरे साथ बात करती तो उसके हाव भाव थोड़े अलग हो जाते, वो मुझ से चिपक के खड़ी होती, अपने कंधे मेरे कंधों से टच करती, इस सब से मुझे कुछ कुछ हो रहा था. लेकिन जैसे ही टान्या के बारे में सोचना शुरू करता, डॉली दीदी के विचार मेरे दिमाग़ में आने लगते. यहाँ टान्या जैसी खूब्बसूरत लड़की मेरे पास थी और एक मैं था जो अपनी दीदी के पास रहना चाहता था.

लेकिन पाँचवे दिन, शाम दोस्तों के साथ बिता कर, थक कर जब मैं वापस लौटा तो देखा मम्मी पापा अब भी जागे हुए हैं और टीवी देख रहे हैं. थोड़ी देर उनके साथ आस्था चॅनेल देख के मैं बोर हो गया और अपने रूम में चला गया. कुछ देर टेक्स्टबुक से पढ़ाई की, फिर अपना ईमेल चेक किया. काफ़ी देर बाद मेरी उंगलियाँ उन पॉर्न वेब साइट का अड्रेस टाइप करने को लालायित हो उठी जो मैं अक्सर देखा करता था. मैं ऐसा नही करना चाहता था लेकिन कमरे में अकेले लॅपटॉप के सामने बैठ के इस में कुछ बुराई भी नज़र नही आ रही थी.

मैने सनडे को मिले चरम सुख को याद किया, जो मुझे अच्छा लगा. लेकिन यदि दीदी के साथ सही ढंग से रहना है तो पॉर्न साइट्स देखने के सिवा कोई और विकल्प भी नज़र नही आ रहा था. मैं पॉर्न वेबसाइट का अड्रेस टाइप करने लगा.... फिर रुका... मैने अपने ज़ोर से धड़के हुए दिल को महसूस किया और देखा कि मेरे हाथ काँप रहे हैं.

मैने अपना लंड खड़ा करने के लिए कुछ लिंगेरिए और स्विमवेर किस साइट्स भी ब्राउज़ की , और कुछ खूबसूरत मॉडेल्स की फोटोस भी देखी, लेकिन कुछ अच्छा नही लगा. ये सब भी मुझे कुछ ठीक नही लग रहा था, और आज से पहले मुझे इन सब चीज़ों से इतनी परेशानी भी नही हुई थी, मैं कुर्सी पर पीठ टिका के बैठ गया और अपनी आँखें बंद कर ली. कुछ देर बाद मैने आँखें खोली और अपने आप को अपनी फॅवुरेट पॉर्न साइट्स देखते हुए इमॅजिन किया, मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा, मैने अपने सिर को ज़ोर से हिलाया, और जब तक मैं कुछ और करता मैने लॅपटॉप को पवर स्विच दबा कर ऑफ कर दिया.

मैने ज़ोर की साँस ली, और शांत होने का प्रयास किया, ये सब मेरे साथ क्या हो रहा था, मैं अपनी दीदी को नाराज़ नही करना चाहता था. दीदी ने मेरे लिए इतना कुछ किया, अब मैं उनका दिल नही दुखाना चाहता था.

आत्म ग्लानि से भरा हुआ, परेशान और कन्फ्यूज़ होकर मैने अपने सिर टेबल पर रख दिया.

15 मिनिट बाद मुझे डोर पर नॉक की आवाज़ सुनाई दी, मैं फिर दोराहे पर खड़ा था, मुझे मालूम था कि ये डॉली दीदी ही है. मुझे ये भी पता था मैं इस तरह उस के बिना नही रह पाउन्गा. मैने एक फ़ैसला लेते हुए कहा, दीदी अंदर आ जाओ... दीदी अंदर आ गयी...

दीदी ने धीरे से पूछा, हे राज, क्या कर रहे थे, पहले लॅपटॉप और फिर मेरी तरफ देखा....

दीदी (धीरे से बोली): पता नही मुझे आज ऐसा क्यूँ लग रहा था कि तुम परेशान हो

राज (अपनी आइब्रोज चढ़ाते हुए): हां आप शायद सही कह रही हो

दीदी: सब ठीक तो है ना?

मैने हां में सिर हिलाया और लॅपटॉप की तरफ इशारे करते हुए कहा देखो ये बंद है

दीदी ने कुछ कदम आगे बढ़ाए और अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. मैने दीदी की आँखों में देखा. दीदी को प्राउड और थॅंकफुल फील हो रहा था, दीदी बोली, लेकिन तुमने कुछ नही किया, थॅंक्स राज. दीदी थोड़ा नीचे झुकी और मेरे माथे पर अपने होंठ रख कर एक छोटा सा किस ले लिया. दोबारा दीदी ने कहा, थॅंक यू और पीछे होकर खड़ी हो गयी.

अगले कुछ मिनिट्स के लिए हम दोनो के बीच शांति रही. मैं दीदी के बालों को अपनी बाहों पर महसूस कर पा रहा था, और दीदी के किस के बाद एक अलग ही दुनिया में खो गया था;

इन हसीन लम्हों के बीच अपनी परेशानी बताने का कोई मतलब नही था.

 
दीदी, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, मैने इतने दिनों से आप से बात नही की

दीदी ने अपने कंधे उचकाए, वो थोड़ा नाराज़ दिखी, फिर बोली, हां शुरुआत में तो मुझे बहुत गुस्सा आया, लेकिन मुझे लगता है मैं सब कुछ समझ रही हूँ

राज: दीदी, क्या हम को ये सब करना चाहिए?

दीदी कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन उन्होने अपने शब्दों को अपने मूँह में ही रोक लिया, अपने होठों को दबाते हुए दीदी ने एक गहरी साँस ली

दीदी: मुझे लगता है हम को इस बारे में बात कर लेनी चाहिए. तुम को कहीं डर तो नही लगता कि ये........ दीदी ने आगे कुछ नही बोला

मुझे पता था दीदी आगे क्या बोलना चाह रही है. लेकिन वो बोलना शायद जायज़ नही था, कुछ ऐसा जिसे हम दोनो एक दूसरे के सामने बोलना नही चाह रहे थे

राज: हां दीदी, मेरा मतलब ऐसा कुछ?

दीदी ने फिर से अपने कंधे उचकाए और मेरी तरफ देखा

दीदी (थोड़ा फुसफुसाते हुए): लेकिन मुझे लगता है कि हम ऐसा कुछ ज़्यादा ग़लत नही कर रहे, जहाँ तक मेरा सवाल है, मुझे लगता है कि हम सिर्फ़ थोड़ी सी मस्ती कर रहे हैं. और अगर हम एक सीमा के अंदर ये सब कुछ करें तो इसमे मुझे कोई बुराई नज़र नही आती, और आख़िर ये सब हम दोनो सहमति से कर रहे हैं

मैने भी अपने कंधे उँचका दिए

थोड़ी देर बाद ये सब कुछ अटपटा सा लगने लगा, मैने दीदी से पूछा, क्या आपको विश्वास होता है कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं?

दीदी (थोड़ा सहरमाते हुए): नही राज, नही होता

फिर से कुछ देर हमारे बीच खामोशी रही, फिर मैं बोला, दीदी, अगर हम दोनो को इस से कोई प्राब्लम नही है, और हम को ये सब करके अच्छा लगता है, तो फिर सब ठीक है

दीदी (अपनी आँखों को चढ़ाते हुए): क्या सब ठीक है?

राज (धीरे से) : नही शायद मैं कुछ ग़लत बोल गया

दीदी ने मेरी तरफ एक प्यार भरी स्माइल के साथ देखा, और मेरे सामने अपने घुटनों पर बैठ गयी, और मुझसे पूछा, आज रात क्या मूड है?

मैने दीदी की चमकती हुई आँखो की तरफ देखा और बोला, हां दीदी आज आपकी सख़्त ज़रूरत है

दीदी थोड़ा मुस्कुराइ, मैने दीदी के गुलाबी गालों को छूने से पहले दो बार सोचा और फिर अपने हाथों से दीदी के गालों को सहला दिया

दीदी: तो क्या चाहते हो? क्या मैं अपने कपड़े पहने रहूं?

राज (थोड़ा ज़ोर से): नही बिल्कुल नही

दीदी ने अपना निचला होंठ अपने दाँतों से काटते हुए, अपने हाथों से अपनी टी-शर्ट को अपने गले से निकाल के दूर फेंक दिया, दीदी ने आज क्रीम कलर की लेस वाली ब्रा पहनी थी. दीदी ने अपने बाल ठीक किए और मेरी तरफ देखा.

दीदी: तुम अपनी जीन्स उतारोगे या फिर?

मैने गुर्राते हुए अपनी जीन्स को बटन खोला और फिर ज़िप खोलने के बाद, दोनों टाँगों से खीच कर जीन्स को अपने से दूर कर दिया और कुर्सी पर बॉक्सर पहन के बैठ गया. दीदी थोड़ा मुस्कुराइ, फिर अपने घुटनो के बल मेरे सामने बैठ गयी. मैने अपना एक हाथ अपनी जांघों पर फिराया और फिर बॉक्सर के उपर से अपने लंड के उपर रख दिया. दीदी ने देखा और फिर से स्माइल किया, अब मैने अपने हाथ से अपने बॉक्सर के उपर से ही लंड को मसलना शुरू कर दिया और उसे आगे पीछे करने लगा, मैने दीदी के खूबसूरत शरीर की तरफ देखा और दीदी की मस्त चुचियों में खो गया.

जब दीदी ने मुझे अपनी ब्रा के तरफ देखते हुए देखा तो प्यार में हल्के से गुर्राई और फिर स्माइल कर दिया. मैं भी स्माइल कर बिना नही रह पाया. दीदी ने अपनी ब्रा के स्ट्रॅप्स को अपने कंधे से नीचे कर दिया अपनी बाहों को उनमे से निकाल लिया, ये सब करने की वजह से ब्रा के कप्स भी थोड़ा नीचे खिसक गये. मैने अपनी गर्दन हिलाई और दीदी के मस्त चुचों की गोलाईयों को देख के मस्त हो गया. इस गजब नज़ारे को देख के मैं लगातार बॉक्सर के उपर से ही अपने लंड को सहलाए जा रहा था. दीदी ने मेरी जांघों के बीच देखा और मुझे लंड सहलाते हुए देखने लगी. दीदी थोड़ा मुस्कुराते हुए थोड़ा सा और मेरी दोनो टाँगों के बीच आ गयी. दीदी की बाहें मेरी जांघों को छू रही थी, और दीदी की चूंचियों बस इतनी दूर कि अगर चाहूं तो उनको अब मैं अपनी हथेलियों में भर लूँ.

मैं दीदी की तरफ देख के मुस्कुराया और बॉक्सर के उपर से अपने लंड को आगे पीछे सहलाना जारी रखा, फिर मैने अपना हाथ बॉक्सर के अंदर डाल दिया, और अपने हाथ में लेके लंड को हिलाने लगा. मैने इस चीज़ की सावधानी बरती कि मेरा लंड बॉक्सर, के अंदर ही रहे, हालाँकि जिस तरह दीदी मेरी जांघों के बीच देख रही थी, वो भी मेरे लंड का दीदार करने को बेताब थी. मैने अपनी आँखें दीदी की चूंचियों के उपर घुमाई, और सोचा काश कितना अच्छा होता अगर दीदी ने ये ब्रा ना पहनी होती. लेकिन जो कुछ मैं देख पा रहा वो भी कुछ कम ना था, मैं उसी में आनंद लेने लगा.

दीदी: राज क्या तुमको मुझे ब्रा में देखना अच्छा लगता है?

राज (थोड़ा गुस्से में): दीदी, क्या तुमको मुझे मूठ मारते देखना अच्छा लगता है?

दीदी: मुझे लगता है तुम अपनी दीदी को और ज़्यादा नंगी देखना चाहते हो

राज (हंसते हुए) : हां दीदी, हे भगवान....

दीदी ने ज़्यादा कुछ ना कहते हुए, अपने दोनो हाथ पीछ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया, फिर एक हाथ से अपनी चूंचियों को छुपाते हुए ब्रा को पूरी तरह उतार दिया. दीदी अपनी छातियाँ दिखाने के लिए थोड़ा सा पीछे हुई.

मेरे मूँह से शब्द नही निकल रहे थे, मेरी सग़ी बड़ी बेहन ने मेरे सामने अपनी ब्रा उतारी थी ओए मेरे पैरों के बीच अपने मम्मों को अपने हाथ से छुपाए मेरे सामने घुटनों पर बैठी थी. मैं अगर कुछ बोलना भी चाहता तो मेरे पास शब्द नही थे. मैं दीदी के मस्त फिगर का दीदार कर के, दीदी के गोरे गोरे बदन के नशे में डूबने लगा.

दीदी: आज गुदगुदी करने की गुस्ताख़ी मत करना

राज (हंसते हुए): ह्म

मैं अपना हाथ बॉक्सर में से निकालने लगा, दीदी ने गौर से मेरी इस हरकत को देखा और थोड़ा डर गयी कि कहीं मैं फिर से गुदगुदी ना करने लगू.

दीदी: राज, मान जाओ, उस दिन के तरह नही प्लीज़

मैं दीदी की तरफ देख के बस प्यार में थोड़ा सा गुर्राया

दीदी अब स्माइल करने लगी लेकिन सो मुझे ऐसे देख रही थी मानो मुझे सावधान कर रही हो.

छोटा भाई होने के कारण दीदी की गुदगुदी करने में कोई बुराई नही थी, लेकिन जब खुद का लंड खड़ा हो तो ये अच्छा नही लगता. मैने दीदी की बाहों में नीचे से अपने हाथ डाल के, उनके आर्म्पाइट्स पर ले गया. दीदी हंस कर मुझे दूर हटाने का प्रयास करने लगी, इस बीच मुझे दीदी के निपल्स देखने का मौका मिल गया, दीदी थोड़ा हिली और कसमसाई, दीदी अपने हाथों से अपने छाती को ढके मुझसे दूर होने का प्रयास करने लगी. तभी दीदी ने अपने आप को मेरे उपर गिरा दिया, दीदी की छाती मेरी जांघों के बीच मुझे दबा रही थी, दीदी ने अपने हाथ बढ़ाकर मुझे मेरी आर्म्पाइट्स में गुदगुदी करनी शुरू कर दी.

 
हम एक दूसरे को गुदगुदी करने से रोकने का प्रयास करते हुए अठखेलिया कर हँसने लगे, अब मैने दीदी का एक हाथ अपने एक हाथ से पकड़ लिया और दीदी ने मेरा एक हाथ अपने हाथ से पकड़ लिया, जिस से हम एक दूसरे को गुदगुदी ना कर पायें. हम दोनो एक गहरी साँस ली और हँसने लगे, और खुशी से एक दूसरे की तरफ देखा. ज़ोर ज़ोर से साँसे लेते हुए हम हंस रहे थे, लेकिन तभी हम को एहसास हुआ कि हम किस अवस्था में हैं, दीदी की छातियाँ मेरे लंड को दबा रही थी. हम एक दूसरे की तरफ देख कर स्माइल करने लगे, लेकिन अब इस स्माइल की वजह कुछ और ही थी.

दीदी (थोड़ा हिम्मत करते हुए): राज, अगर तुम चाहो तो कुछ आगे बढ़ सकते हो..

राज (थोड़ा घबराते हुए) : सही में दीदी

दीदी ने हां में सिर हिलाया, और अपने होंठ को दाँत से काटती हुए कातिल अंदाज में बोली, प्लीज़...

मैने दीदी के बाँह को छोड़ दिया और दीदी के कंधे पर अपना हाथ रख दिया. दीदी ने भी मेरा हाथ छोड़ दिया और अपनी बाहें मेरी पीठ के पीछे कर मुझे बाहों में ले लिया. मैने अपने को थोड़ा उपर उठाते हुए अपने लंड का दबाव दीदी के उपर बनाया. थोड़ा उपर उठकर दीदी ने मुझे अपनी बाहों मे और ठीक से लेते हुए, अपना सिर मेरे पेट पर रख दिया. मैने अपने लंड को एक उपर की तरफ उछाल मारा, जिस से वो दीदी की छातियों के बीच आ गया. दीदी की चूंचियों का एहसास निराला था, दीदी की दोनो चूंचियाँ बहुत मुलायम मुलायम थी.

मैं थोड़ा पीछे हुआ फिर उपर की तरफ धक्का लगाया. हम दोनो के शरीर पसीने से भीग हुए थे, दीदी ने मुझ को कस के पकड़ा हुआ था. मैने फिर से एक झटका मारा, हर झटके के साथ मेरा बॉक्सर थोड़ा थोड़ा नीचे होता जा रहा था. मैने इस बात की कोई परवाह नही की और हल्के हल्के झटके मारता रहा. मुझे लग रहा था कि मेरे लंड का सुपाड़ा बॉक्सर से बाहर निकलने लगा है, और दीदी के शरीर को हर झटके के साथ छू रहा है. मेरे लंड के शिश्न पर आई प्रेकुं की बूँदें और दीदी के पसीने ने सब कुछ चिकना कर दिया था. मैने दीदी के शरीर पर एक और घिस्सा मारा. दीदी अब ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी वो बहुत गरम हो चुकी थी, और पसीने से तर बतर. जिस तरह हम एक दूसरे से चिपके हुए थे उस की वजह से दीदी के बाल हम दोनों के शरीर से चिपकने लगे थे. दीदी की गरम गरम साँसों को मैं अपनी छाती पर महसूस कर रहा था. दीदी ने अपने होठों से मेरे को छाती पर किस किया, फिर एक बार और. जैसे ही मैने अपना लंड से दीदी की दोनो चूंचियों के बीच से घिस्सा मारा, दीदी ने भूकि आँखों से मुझे देखा और मेरी छाती पर किस करने लगी, दीदी के मूँह से हल्की हल्की आहह ऊओ की आवाज़ निकल रही थी.

मैने दीदी के सिर पर हाथ फिराया और उनके बालों के बीच अपनी उंगलियाँ घुमाने लगा. मैने दीदी को कराहते हुए सुना, ये अविश्वसनीय था.

मुझे लग रहा था कि अब मेरा पानी छूटने ही वाला है... अंदर से लावा मानो निकलने को तयार हो चुका था... लेकिन मैं रोक रहा था... मैं रोके रहा... दीदी फिर से थोड़ा कराही... बस अब निकलने ही वाला था... मैने दीदी को ज़ोर से पकड़ लिया.. मैने दीदी को सिर से अपनी जांघों की तरफ खींच लिया... दीदी फिर से कराही और धीरे से बोली... मेरे उपर ही निकाल दो राज...

एक दम मेरे वीर्य की पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और हम दोनो के उपर पानी की बौछार होने लगी, मेरे वीर्य ने दोनो को भिगो दिया. मेरा लंड वीर्य की धार पे धार छोड़े जा रहा था और दीदी आहह करते हुए अपनी छाती को मेरे लंड के उपर नीचे कर सहला रही थी, मैं दीदी को कस के पकड़े हुए था और हर पिचकारी के साथ गुर्रा रहा था. मेरे लंड ने मेरी छाती और दीदी की गर्दन के उपर अपनी बौछारें मारी थी, वो पानी अब बहकर मेरे पैरों के बीच से और दीदी के पेट के उपर से नीचे की तरफ बह रहा था. मेरे वीर्य की धार ने हम दोनो को भरपूर गीला कर दिया था, हम दोनो अब हाँफ रहे थे...

दीदी अब भी हाँफ रही थी, और थोड़ा काँप भी रही थी. बिना कुछ बोले, दीदी ने मेरी छाती पर किसी भूकि शेरनी की तरह किस करना शुरू कर दिया, मैने महसूस किया कि दीदी ने मेरी गीली छाती को किस करते हुए अपनी दोनो चूंचियाँ को अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया है और उनको मसल रही है, वो किस करते हुए नीचे आ रही थी. जैसे ही दीदी की ठोडी ने मेरे बॉक्सर में से निकले सुपाडे को छुआ, दीदी ने तुरंत अपना चेहरा पीछे कर लिया और ज़ोर की साँस ली, और एक बार फिर से मेरी छाती पर किस कर लिया.

दीदी ने अपनी नज़रें उठा के मेरी तरफ देखा, मैं तो बस दीदी के मस्त शरीर के नज़ारे का दीवाना हो चुका था, दीदी के सारे बाल गीले हो गये थे, दीदी ने अपने दोनो हाथों से वीर्य से सनी अपनी दोनो चूंचियाँ पकड़ रखी थी, दीदी का माथा चमक रहा था...

हम दोनो एक दूसरे को देख के मुस्कुराए. ये मुस्कुराहट शायद कह रही थी हम को यहाँ पर रुक जाना चाहिए, लेकिन हमारा मन नही भरा था. मैने अपने बॉक्सर के एलास्टिक को उपर की तरफ खींचा, जिस से मैं अपने आप को ठीक से ढक सकूँ, और दीदी ने अपनी ज़मीन पर गिरी ब्रा उठा ली. मैने टेबल पर रखे टिश्यू बॉक्स से कुछ टिश्यूस निकाले और दीदी को दे दिए, दीदी ने दूसरी तरफ घूम के अपने आप को पोंच्छा, फिर अपनी ब्रा और टी-शर्ट पहन ली.

मैं जाकर अपने बेड पर बैठ गया, दीदी भी कुछ सेकेंड्स के लिए वहाँ बेड पर बैठी. हम दोनो के बीच खामोशी थी, शायद हम इस कॅरीबी का मज़ा ले रहे थे. आख़िर में दीदी उठी, और आगे बढ़कर मेरे को एक झप्पी दी. पीछे घूमकर एक स्माइल पास करते हुए दीदी मेरे रूम से बाहर चली गयी, और डोर को बंद कर दिया.

जिस तरह से दीदी मेरी शारीरिक ज़रूरतों का ध्यान रख रही थी, उस की वजह से मैं अब खुश रहने लगा था, कुछ दिन पहले मैं जिस डिप्रेशन से गुजर रहा था, वो अब नही था, जिस तरह से हम दोनो की बात चीत हुई थी उस से मुझे लगा कि दीदी को ऐसा नही लग रहा कि मैं उनका नाजायज़ फ़ायदा उठा रहा हूँ.

हालाँकि मेरी इच्छाओं की कोई सीमा नही थी. टान्या को कॉलेज में देख के मेरा लंड खड़ा हो जाता था, और कॉलेज से घर आने का मन ही नही करता था, जिस तरह वो मेरे जोक्स पर स्माइल करती थी और क्या बड़े बड़े मस्त मम्मे थे, ये सोच के कॉलेज से किसी तरह घर आते ही मूठ मारने का मन करता था. कल वो मस्त काली जीन्स पहन के आई थी और उस दिन वो बड़े गले वाली टाइट पिंक टी- शर्ट. मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा था कि उसका दीवाना ना हो जाऊं, और उसके साथ क्लास प्रॉजेक्ट्स में उसके ज़्यादा से ज़्यादा करीब रहकर ही खुश था, जिस से उस के बारे मैं ज़्यादा ना सोचूँ और डॉली दीदी के प्रति मेरे विचार कहीं बदल ना जायें. मैं दीदी की बहुत इज़्ज़त करता था, और उनके विश्वास को धोका देना मेरे लिए संभव नही था.

ये सब आसान नही था, लेकिन मैं कोशिश कर रहा था.

पिछला वीक डॉली दीदी के साथ अच्छा बीता, हमारी अपनी अपनी लाइफ में जो कुछ भी चल रहा था, हम एक दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का प्रयास करते, हम इस साथ का मज़ा ले रहे थे. एक दिन हम ने एक दम मूवी देखने का प्लान बनाया और मूवी देखने चले गये, हम दोनो ने एक साथ कोई मूवी थियेटर में पिछले कई सालो से नही देखी थी. बहुत अच्छा लग रहा हा कि घर में कोई तो है जो तुम्हारी देखभाल करता है. हम एक दूसरे का पहले से बहुत ज़्यादा ध्यान रखने लगे थे. केवल शारीरिक ही नही हम मानसिक तौर पर भी एक दूसरे के काफ़ी करीब आ चुके थे.

शनिवार की शाम को, मैने चाहा था कि दीदी मेरे पास हों जिस से मैं मूठ मार सकूँ, लेकिन मैने दीदी के साथ टीवी पर मूवी देखना बेहतर समझा. जब मूवी ख़तम हुई तब तक दीदी सो चुकी थी, मैं दीदी को गोद में उठाकर उनके रूम तक ले गया. रूम तक ले जाते टाइम मेरी गोद में दीदी जाग गयी, रूम में दीदी ने मेरे सामने अपनी पॅंट उतार के अपना पाजामा पहना और मेरे को दूसरी तरफ देखने को कहा. जब दीदी बेड पर लेट गयी तो मैने दीदी को चादर ऊढाई और दीदी के माथे पर एक चुम्मि ली, और रूम से बाहर आ गया.

सनडे की शाम को मुझे फिर से दीदी की ज़रूरत महसूस होने लगी. जैसे ही मम्मी पापा सोने अपने बेड रूम में गये, मैने दीदी से पूछा की दीदी बुरा तो नही मानोगी. हम दोनो टीवी देख रहे थे, लेकिन टीवी पर कुछ भी मजेदार नही आ रहा था, हम दोनो सिर्फ़ एक दूसरे के साथ रहने के लिए एक ही सोफे पर बैठे थे.

दीदी तुरंत तय्यार हो गयी और टीवी बंद कर दिया.

दीदी: तो फिर आज कैसे मारने का मूड है राज?

राज: आप हर बार मुझसे ये ही पूछती हो, और मुझे इस बारे कुछ भी कहना अच्छा नही लगता

दीदी : मुझसे कभी समझ में नही आता, कहाँ से शुरू करूँ, कुछ तो बोलो

राज: अगर आप चाहो तो आप अपने सारे कपड़े उतार दो, ये ठीक रहेगा, मैं ऐसा बोल के मुस्कुराया

दीदी ने अपनी भंवे उपर के मुझे देखा और हँसने लगी, मुझे यकीन है कि तुमको ये अच्छा लगेगा, थोड़ा रुक के दीदी आगे बोली, ऐसे देखना हर आदमी को अच्छा लगता है

मैं थोड़ा रुका, मैं ऐसा कुछ एक्सपेक्ट नही कर रहा था, मैने दीदी से पूछा. सच में दीदी? मैं तो मज़ाक कर रहा था

दीदी (चिढ़ाते हुए): हां, मुझे ऐसा लगता है, मैं ऐसा इसलिए कह रही हूँ, क्यों कि जिस तरह से तुम मुझे देखते हो... मैं ऐसा करूँगी तो तुम्हारा फेस कैसा होगा, ये मैं देखना चाहूँगी

वाह... क्या मस्त बातें चल रही थी

राज : देखा मैने मैने क्या मस्त आइडिया दिया है... (मज़ाक में)

दीदी (मुस्कुराइ, फिर कुछ सोचा): अगर तुम चाहो तो एक काम करते हैं.... मैं तुम्हे आज कुछ ऐसा दिखाउन्गी लेकिन उसके लिए तुमको मेरे रूम में आना पड़ेगा

मैं तुरंत तय्यार हो गया

 
दीदी सोफे से उठी, मैं दीदी के पीछे पीछे उनके रूम में चला गया, और दीदी रूम को थोड़ा ठीक करने लगी. दीदी ने मुझे बेड पर बैठने का इशारा किया और खड़े होकर मुझे कपड़े उतारते हुए देखती रही. थोड़ा शरमाते हुए मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए और दीदी के सामने सिर्फ़ बॉक्सर में बैठ गया.

डॉली दीदी ने अपने बाल सही किए और मुझे रिझाने वाली आँखों से देखा. दीदी ने टी-शर्ट पहने हुए ही अपने ब्रा के एक स्ट्रॅप को अपने कंधे से नीचे किया, फिर दूसरा. ये देख के मेरा लंड खड़ा होने लगा, और मैने लंड को बॉक्सर के अंदर अड्जस्ट किया और उसके खड़े होने के लिए जगह बनाई.

दीदी (पलक झपकाते हुए): तो मज़ा आ रहा है?

मैने हां में सिर हिलाया और अपनी साँसें रोक के बैठ गया

दीदी मुस्कुराइ और सहज नारी सुलभ लज्जा के साथ धीरे धीरे अपनी टी-शर्ट उतारने लगी. क्योंकि अब नीचे ब्रा नही थी इसलिए, इसलिए मुझे और ज़्यादा दिखाई दे रहा था. दीदी के कंधे अब नग्न थे, और उनके मम्मों का उपरी भाग दिखाई दे रहा था, करीब 1-2 इंच जहाँ से चूंचियाँ उठनी शुरू होती हैं. दीदी ने जैसे ही टी-शर्ट अपने गले से निकाली, दीदी का क्लीवेज अब और ज़्यादा सॉफ दिखाई देने लगा, क्या मस्त गोरी गोरी स्किन थी दीदी की.

दीदी की ब्रा का उपरी भाग बस निपल्स से एक इंच ही दूर था.

दीदी थोड़ा रुकी और मेरी तरफ देखा. मैं अपने लंड पर बॉक्सर के अंदर हाथ चलाना शुरू कर चुका था, हालाँकि मुझे याद नही था कि ये कब अपने आप शुरू हो गया था. मैने दीदी की तरफ देखा और बस मूँह से निकला.... वॉववव....

मेरी साँसें रुक गयी थी, और मेरे दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था

दीदी ने अपनी ब्रा को पीछे हुक से खोला और दूर फेंक दिया

अब मेरे सामने बस कुछ फुट दूर, मेरी सग़ी बड़ी बेहन, अपनी टी-शर्ट और ब्रा उतार के खड़ी थी. दीदी के मम्मे किसी आँसू की बूँद की तरह लटके हुए लग रहे थे, दीदी उनको थोड़ा थोड़ा हिला रही थी. किसी गुलाब की कली तरह निपल्स एक दम खड़े होकर मानो मेरी तरफ देख रहे थे. क्या मस्त बॉडी थी दीदी की. मुझे दीदी की चूंचियों को निहारते हुए अपनी आँखों पर यकीन नही हो रहा था. दीदी मुझे देख के मुस्कुरा रही थी और उनके मम्मे मेरे सामने नंगे थे. ये दीदी ने आज क्या गजब की चीज़ की थी.

मैं अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था, तभी दीदी ने कहा... ठीक है... और खुशी से मुझे देखा...दीदी को मालूम था कि मैं क्या सोच रहा हूँ. मैने बस अपने सिर हिलाया या और कुछ नही बोल पाया.

मैं बॉक्सर के अंदर हाथ डाल के मूठ मार रहा था और दीदी के निपल्स को घूर रहा था. दीदी ने स्माइल किया और अपने दोनो हाथ छत की तरफ उपर उठा दिए और थोड़ा पीछे की तरफ अपनी कमर झुकाई मानो एक अंगड़ाई ली हो, इस के कारण दीदी की छाती और ज़्यादा उभर के सामने निकल आई और मुझे ये नज़ारे देखने का फ़ायदा हो गया. मैं अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था, मुठियाते हुए हर झटके के साथ ऐसा लग रहा थे जैसे कि ये आख़िरी हो. दीदी ने अंगड़ाई ख़तम की और अपने पेट के उपर हाथ फिराने के बाद अपने दोनो हाथों से अपनी दोनो चूंचियाँ हल्के से पकड़ ली. मैं बस झड़ने ही वाला था, मैं जो ज़ोर से अपने लंड को हिलाने लगा.

तभी मेरे लंड ने शिश्न से ढेर सारा पानी उगल दिया, कुछ ने तो मेरे बॉक्सर को गीला कर दिया और कुछ फ्लोर पर गिरा हुआ दिखाई दे रहा था. दीदी को जब इस सब का एहसास हुआ तो उनके मुँह से निकल गया ओह्ह्ह. मेरे को कुछ नही समझ आ रहा था, मैं अपने लंड को ढंग बॉक्सर के अंदर करने का प्रयास करने लगा लेकिन नाकामयाब रहा और मेरे और ज़्यादा पानी ने मेरे हाथ और बॉक्सर को गीला कर दिया, जब मैने लंड को ठीक से अंदर किया तो मेरा माल बॉक्सर के अंदर जमा होना शुरू हुआ.

दीदी: मज़ा आ गया

मैं हाँफ रहा था, और मेरे को थोड़ी शरम भी आ रही थी. दीदी अभी भी अपने नंगे मम्मे दिखाती हुई मेरे सामने खड़ी थी, और खुशी से मुस्कुरा रही थी. मैं उनको घूर नही रहा था लेकिन दीदी को इस सब में मज़ा आ रहा था.

दीदी: पहली बार किसी लड़के ने मुझे टॉपलेस देखा है, कैसा लगा?

राज: मस्त दीदी मज़ा आ गया

दीदी (इशारा करते हुए): टिश्यूस वहाँ रखे हैं

मैने उठ के कुछ टिश्यू लिए, तब तक दीदी मेरे पास आ गयी ये देख मैं रुक गया. दीदी ने फ्लोर पर मेरे वीर्य के पानी के धब्बे देखे. मुझे दीदी को इतना करीब पाकर नर्वसनेस होने लगी.

राज: फ्लोर गंदा करने के लिए सॉरी दीदी

दीदी मुड़कुराइ और एक कदम और आगे बढ़ आई, और बोली कोई बात नही राज, लेकिन अब तुम्हे वो करना होगा जो मैं कहूँगी.

मेरे दिमाग़ में एक दम हज़ारों आइडिया आना शुरू हो गये कि दीदी क्या कहेगी, लेकिन मैने सिर्फ़ ह्म किया

मेरी आँखों में आँखे डाल के दीदी ने पूछा क्या मुझे एक झप्पी दोगे?

मैं तुरंत तय्यार हो गया.

दीदी जो कि टॉपलेस थी, मेरे और पास आई और मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी. मुझे दीदी के चुचे अपनी छाती से छूए हुए महसूस हुए, इस अंतरंगता के बीच मैं हमारे करीब करीब नंगे शरीरों को लिपटे महसूस करने लगा. मेरे शरीर को गर्माहट का एहसास हो रहा था. दीदी ने अपना चेहरा मेरी गर्दन से चिपका रखा था और थोड़ा थोड़ा शायद कराह भी रही थी, मुझे दीदी ने प्यार से पकड़ रखा था. मैं अपने हाथ दीदी की नंगी पीठ पर ले गया और दीदी की स्मूद स्किन को महसूस करने लगा.

हमारी ये झप्पी कुछ ज़्यादा ही लंबी चल रही थी और हम एक दूसरे को गले लगाए हुए थे.

दीदी ने मेरी गर्दन पर एक लंबी साँस छोड़ी, मैं अपने सिर को दीदी के सिर के पास ले गया. दीदी के हाथ धीरे धीरे मेरी पीठ को सहला रहे थे और मेरे हाथ दीदी की पीठ को. दीदी को एनकरेज करने के लिए मैं दीदी के सिर को सूंघने लगा, दीदी के होठों को मैं अपनी गर्दन पर महसूस कर रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वो किस कर रही हो. मैं अपने दोनो हाथ दीदी के साइड में ले गया, और दीदी की पंसलियों को महसूस किया, और फिर अपने हाथ उपर लाने लगा. जब मेरे अंगूठों ने दीदी के मम्मों को साइड से छुआ तो दीदी ने एक गहरी साँस ली, और मेरी गर्दन को अपने खुले हुए मूँह के लिप्स से छू लिया. मैं अपने अंगूठों को अंदर की तरफ लाने लगा, दीदी की चूंचियों की गोलाई के साथ साथ. दीदी ने मुझ पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, जिस से दीदी के मम्मे जो मेरी छाती से ज़ोर से चिपके हुए थे वो अब आराम से मुझे छू रहे थे. मैं अपने अंगूठों को दीदी की गोलाईयों के साथ साथ वहाँ पर ले आया जहाँ दीदी की चुचियों का उभार मेरी छाती को छू रहा था.

दीदी ने अपना पेट मुझसे दूर करते हुए, मेरी गर्दन को एक बार फिर ज़ोर से सूँघा, और अपने होठों को मेरी गर्दन पर फिराया. इस के कारण दीदी के मम्मों का प्रेशर मेरी छाती पर और हल्का हो गया, और मुझे अपने अंगूठों को और ज़्यादा आगे लाने में आसानी हो गयी, अब मुझे लगने लगा कि शायद मैं दीदी के निपल्स को छू रहा हूँ. कुछ देर हम दोनो रुके, फिर मालूम नही कौन पहले शुरू हुआ, दीदी मुझे किसी भूकि शेरनी की तरह मेरी गर्दन पर किस करने लगी और मेरे अंगूठे दीदी के निपल्स के उपर सरकने लगे. इस के बाद हमारा अपने उपर कंट्रोल ख़तम हो चुका था, मैं अपने हाथ दीदी की चूंचियों पर फिराने लगा और उनको थोड़ा थोड़ा मसल्ने लगा, दीदी अब ज़ोर से कराहने लगी थी, दीदी मेरी गर्दन पर अब भी किस कर रही थी और मेरे सिर और गर्दन को अपने हाथों से पकड़े हुए थी.

 
हम दोनो को बहुत मज़ा आ रहा था, एक दूसरे को पकड़े हुए हम एक दूसरे को छू रहे थे, महसूस कर रहे थे और किस कर रहे थे. दीदी ने मेरी गर्दन पर ज़ोर से किस किया और मुझे ज़ोर से जकड के अपने मम्मे मेरी छाती से दबा लिए. हम एक दूसरे के बेहद करीब थे, हमारे होंठ कब इतना करीब आ गये पता ही नही चला, हम ने अपने होंठ दूसरे के होंठों पर रख दिए और कुछ क्षणों के लिए ऐसा नाटक करने लगे जैसे हम किस नही कर रहे हो, बस होंठों को होंठों के उपर घिस रहे हो, लेकिन फिर कंट्रोल नही हुआ और हम एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. दीदी ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरी कमर पकड़ ली, और फिर ज़ोर से किस करने लगी. मैं भी दीदी को जी भरकर चूम रहा था, दीदी इस बीच अपने हाथ मेरे गीले बॉक्सर के अगले भाग की तरफ ले आई, हाथ थोड़ा नीचे करके दीदी ने मेरे लंड को पकड़ लिया. मेरा लंड जो थोड़ी देर पहले मूठ मारने के बाद बैठा हुआ था, वो भी अंगड़ाई लेने लगा, लेकिन अभी पूरी तरह खड़ा नही था, वो दीदी की इस हरकत से पूरी तरह खड़ा होने लगा....

दीदी का हाथ मेरी गोलियों तक पहुँचने ही वाला था तभी एक ज़ोर से कोई एलेक्ट्रॉनिक आवाज़ हुई और उसने हम दोनो को एक दम भौंचक्का कर दिया. हम एक दूसरे से तुरंत अलग हुए, दो सेकेंड बाद हमारी समझ में आया कि ये आवाज़ दीदी के मोबाइल फोन पर आए टेक्स्ट मेसेज की थी. हम दोनो ने अपने मूँह पोंछे और अपने कपड़े ढूँढने लगे, इस से पहले क़ी हम शांत और ठंडे हो पाते. मैने दीदी की तरफ देखा, वो अपनी टी शर्ट पहन रही थी, हम दोनो ने एक शरम भरी मुस्कान के साथ एक दूसरे को देखा और फिर कुछ सेकेंड के लिए रुके.

दीदी: उस आवाज़ ने तो मुझे डरा ही दिया था

राज: मेरी तो फट ही गयी थी

फिर हम दोनो शांत हो गये, और फिर एक दूसरे की तरफ देख के हँसने लगे. दीदी के गाल शरम से लाल हो रहे थे, और शायद मेरे भी. हम फिर एक दूसरे को देख के मुस्कुराए लेकिन इस बार शरम थोड़ी कम थी.

राज: मैं अभी सॉफ करके आता हूँ

दीदी: ओके ठीक है, मैं तो अब ठंडे पानी से शवर के नीचे नहाउन्गी

मैने कुछ सोचा और फिर पूछा, कंपनी दूं क्या?

दीदी हँसी और मेरे कंधे पर एक थप्पड़ मारा, मैं चहकता हुआ रूम से बाहर चला गया. मैने अपने रूम में आके अपने आप को सॉफ किया, और फिर कुछ देर के लिए बेड पर लेट गया, और सोचने लगा जो कुछ भी आज हुआ था उसके बारे में. मुझे मालूम नही था लेकिन दीदी भी अपने रूम में ही थी और शायद ये ही कर रही थी.

.....................

आज दोपहर को मौसम बहुत सुहावना था. मुझे घर से बाहर जाके मौसम का आनंद लेने की इच्छा हुई, मैने दीदी से पूछा कुछ देर के लिए ड्राइव पर चलोगि? दीदी मेरे इस प्रस्ताव पर थोड़ा चौंकी, फिर वो तुरंत तय्यार हो गयी, थोड़ी देर बाद मैं और दीदी कार में बैठकर शहर से बाहर एक सुनसान सड़क पर चल पड़े.

एक जगज मैने कार पार्क की, और बाहर निकल के एक खेत की पगडंडी पर खड़े हो गये, दीदी उस सुहाने मौसम में बेहद खूबसूरत लग रही थी. दीदी के काले घने बाल हवा में उड़ रहे थे, दीदी का चेहरा चमक रहा था और दीदी मस्ती के साथ खेत की मंड (बाउंड्री) पर मस्तानी चाल के साथ चल रही थी.

जब भी हम पहले कभी बाहर घूमने ड्राइव पर जाते थे तो ढेर सारी बातें किया करते थे, लेकिन अब ये असंभव था कि हमारी बातों में जो कुछ हमारे बीच चल रहा था, उसका जिकर ना आए. इस सुहाने मौसम में, हम को किसी चीज़ का डर या परवाह नही थी, हम काफ़ी सहज महसूस कर रहे थे.

राज: दीदी आपको नही लगता हम कई बार काफ़ी आगे बढ़ जातें हैं, मैने ये स्वीकार किया और दीदी की राय पूछी

दीदी ने हां में सिर हिलाया और फिर थोड़ा हँसी. हां... लेकिन पता नही, मुझे तो बहुत अच्छा लगता है, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो और सब कुछ अच्छा लगता है. तुम कहीं फिर से परेशान तो नही हो?

राज (कंधे उँचकाते हुए): पता नही कुछ समझ में नही आता, अच्छा तो मुझे भी बहुत लगता है, मैने दीदी को निहारते हुए कहा, आप बहुत मस्त हो दीदी.

दीदी ने मुझे देखा और स्माइल किया, फिर हम कुछ देर शांत होकर से चलते रहे.

दीदी : क्या मम्मी ने तुमको बताया कि टान्या का फोन आया था?

टान्या का नाम सुनकर मैं थोड़ा चौंका, फिर किसी तरह बोला नही तो...

दीदी : हां, कल शाम को उसका घर के लॅंडलाइन पर फोन आया था, और वो पूछ रही थी कि तुम घर पर हो क्या? किसी प्रॉजेक्ट के बारे में शायद तुमसे बात करना चाह रही थी, लेकिन मम्मी को लगा कि वो झूठ बोल रही है. राज, मैं आज तुम को कुछ ऐसा बताउन्गी कि तुम को मेरी बात पर विश्वास नही होगा.

राज: ऐसी क्या बात है दीदी?

दीदी: एक रात को जब मैं टीवी देखकर उपर अपने रूम में जा रही थी तो मैने मम्मी पापा के रूम के पास से गुज़रते हुए मैने जो सुना उस पर मुझे विश्वास ही नही हुआ. कपूर अंकल जो पापा के बिज़्नेस पार्ट्नर हैं, और अपनी इकलौती बेटी टान्या के पापा भी, वो चाहते हैं कि टान्या की शादी तुम्हारे साथ हो जाए. हमारे मम्मी पापा भी इस रिश्ते के लिए तय्यार हैं क्यूंकी ये दोनो की बिज़्नेस पार्ट्नरशिप के लिए भी अच्छा रहेगा.

मैं गौर से दीदी की बातें सुन रहा था, मुझे विश्वास नही हो रहा था.

दीदी (आगे बोलते हुए): लेकिन अपने मम्मी पापा चाहते हैं कि पहले मेरी शादी हो जाए उसके बाद तुम्हारी और टान्या की शादी करेंगे. मेरे लिए पापा और कपूर अंकल कोई पैसे वाला बिज़्नेसमॅन लड़का ढूँढ रहे हैं. तुम्हारी और टान्या की शादी के बारे में दोनो के पेरेंट्स शायद कोई लेन देन की रसम भी कर चुके हैं. इस बारे में केवल हम दोनो को ही नही मालूम लेकिन टान्या को उसके पेरेंट्स सब कुछ बता चुके हैं. वो भी तुम्हारे साथ शादी करने को तय्यार है, बस अब तो पहले मेरी शादी होने की देर है. इसी कारण कल जब टान्या का फोन आया तो मम्मी को कुछ शक हुआ होगा.

दीदी ज़ोर से हँसने लगी, और मुझसे पूछा, तुम को टान्या अच्छी लगती है ना?

मुझे दीदी के हँसने से बहुत झुंझलाहट हुई, और कोई जवाब समझ में नही आया. दीदी ये देख के कुछ समय के लिए चुप हुई फिर बोली, मैं तुम्हे चिढ़ा नही रही हूँ, लेकिन , मुझे तो वो बहुत सुंदर लगती है, तुमको वो सुंदर नही लगती?

मैने दीदी की तरफ देखा, और फिर टान्या के बारे में दीदी को बताने लगा, जब मैने अपनी बात पूरी कर ली तो दीदी ने फिर मुझ को वो ही बात पूछी, और मुझे आख़िर में मानना पड़ा कि हां टान्या को मैं पसंद करता हूँ.

ये सुनकर दीदी चहक कर बोली, चलो तो फिर सब ठीक है. दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनो साथ साथ चलने लगे. कुछ दूर जाने के बाद दीदी ने कनखियों से मुझे देखा और बोली, जब तक तुम ये सब टान्या के साथ करने के लिए उस से पूछने की हिम्मत नही जुटा पाते हो तब तक तो तुम्हे मेरी सहायता की शायद और ज़्यादा ज़रूरत पड़ेगी. ये बोल के दीदी हँसने लगी.

मैं दीदी के पीछे भागा, करीद 200 मीटर और वो हंसते हुए आगे आगे दौड़ती रही.

हमारी इसके बाद बाकी सारी बात चीत अच्छी रही और हम दोनो को एक दूसरे से बातें कर के अच्छा लगा. हम जब एक ट्यूबिवेल के पास खड़े थे, वहाँ दीदी मेरा सहारा लगा के खड़ी हो गयी, और मेरे हाथों को अपने हाथों में ले लिया. मैने दीदी के गाल पे एक प्यारी सी चुम्मि ली और दीदी ने एक ज़ोर से साँस ली. हम दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए कार तक आ गये.

उस रात हम ने जो किया था, उसके बाद कुछ दिनों तक मैने इंतजार किया. मैने अपने उपर काबू रखा और ये समझने और समझाने की कोशिश की मैं दीदी का ग़लत इस्तेमाल नही कर रहा हूँ. मुझे पता था दीदी को कोई फरक नही पड़ता, लेकिन मैं अपने दिल में दीदी की इज़्ज़त करता था और दीदी को मूठ मारने के साधन के रूप में नही सोचता था.

लेकिन कुछ दिन बाद मेरी वो स्थिति हो गयी कि मेरे दिमाग़ में बस दीदी, लड़की और सेक्स के सिवा और कुछ नही सूझ रहा था. वो दिन ट्यूसडे का दिन था, वीकेंड मैने किसी तरह पार कर लिया था, अब और बर्दाश्त नही हो रहा था.

रात को डिन्नर के बाद मम्मी पापा ड्रॉयिंग रूम में टीवी देख रहे थे, दीदी फेमिना मॅगज़ीन पढ़ रही थी, मैं भी दीदी के पास इंडिया टुडे लेकर बैठ गया.

 
राज (धीरे से): मैने दीदी को कनखियों से देखा और पूछा, दीदी, आज थोड़ा हेल्प करोगी?

दीदी ने मेरी तरफ देखा और स्माइल के साथ धीरे से बोली, हां क्यों नही, आज कैसे करने का मूड है?

हर बार की तरह ना चाहते हुए भी मुझे जवाब देना पड़ा, मैं बोला, दीदी आपकी ये टाइट जीन्स, जो आपने पहन रखी है, जब आप झुकती हो तो......

दीदी (मूँह दबा के हंसते हुए धीरे से): जब मैं झुकती हूँ..., हुह, तो लगता है तुम और ज़्यादा अच्छे से देखना चाहते हो?

राज: शायद हां दीदी, मैं स्वीकार करते हुए बोला

दीदी: रूको मैं देखती हूँ, हम क्या कर सकते हैं

हम ने अपनी अपनी मॅगज़ीन्स बंद की, मम्मी पापा भी टीवी बंद कर के अपने बेड रूम की तरफ जा रहे थे, मैने और दीदी ने उनको गुड नाइट कहा. दीदी और मम्मी रुक के कुछ बातें करने लगी और मैं अपने रूम में चला गया और बेड पर जाके बैठ गया.

करीब 10 मिनिट के बाद दीदी डोर पर नॉक कर के मेरे रूम में आ गयी, दीदी ने अब भी वो ही ड्रेस पहन रखी थी.

दीदी: तो तुम को मेरी हेल्प चाहिए क्यों?

राज: ह्म..., करके मैने अपनी शर्ट और फिर जीन्स उतार दी, और अपने बेड पे बॉक्सर्स पहन के बैठ गया, लंड खड़ा होना शुरू हो चुका था.

दीदी ने मेरे बॉक्सर्स की तरफ देखा और बोली, लगता है तुम तो एकदम तय्यार हो, वो घूमी और गर्दन घूमाकर मेरी तरफ देखा और पूछा, तो तुम को ये जीन्स मेरे उपर अच्छी लगती है?

राज: हां दीदी, सच कह रहा हूँ, आप पर ये जीन्स बहुत अच्छी लगती है. जीन्स में दीदी की गान्ड के उभार सॉफ नज़र आते थे.

दीदी: तान्या से अच्छी या खराब? दीदी ने हंसते हुए कहा, मज़ाक कर रही हूँ, तुम कुछ मत जवाब दो.

दीदी अपनी जीन्स का बटन खोलकर अब उसकी ज़िप खोल रही थी

दीदी: ये जीन्स मैने शॉपर्स स्टॉप से सेल में खरीदी थी, ये कहते हुए दीदी ने जीन्स अपने हिप्स से नीचे करनी शुरू कर दी. जीन्स के नीचे होते ही दीदी की ग्रे पैंटी जिस पर पिंक स्ट्रिपेस थे दिखाई देने लगी, दीदी पर ये बहुत अच्छी लग रही थी.

दीदी को जीन्स उतारते देख मैं बोला, सेल में चाहे आपको सस्ती मिली हो, लेकिन ये फुल प्राइस का मज़ा दे रही है.

दीदी ने पीछे देखा और मुस्कुराइ. दीदी फिर से सीधी खड़ी हो गयी और अपने गोल गोल हिप्स पर हाथ फिराने लगी. दीदी अपना हाथ उपर पैंटी की एलास्टिक पर ले गयी, और पैंटी को धीरे धीरे नीचे करने लगी.

मुझे दीदी के हिप्स के बीच का क्रॅक दिखाई देने लगा, दीदी ने पैंटी इतनी नीचे कर दी कि अब दीदी के पूरे हिप्स नंगे हो गये.

दीदी: ये पैंटी भी मैने सेल में ही खरीदी थी, 3 पैंटी, एक पैंटी के प्राइस पर, ऐसा बोलते हुए दीदी ने अपनी पैंटी नीचे फ्लोर पर गिरा दी.

मैने मज़ाक में कहा: मुझे ये फुल्ली ऑफ वाला डिसकाउंट अच्छा लगा

दीदी ने पीछे देखा और अपनी भोहें चढ़ा के बोली, ये मज़ाक बहुत बेहूदा था, और फिर मुस्कुराइ.

हां शायद, मेरा ध्यान कहीं और ही है, मैं अपने लंड को बॉक्सर्स के उपर से ही सहलाता हुआ बोला. क्या मस्त गान्ड थी दीदी की, दीदी के हिप्स क्या मस्त गोलाइयाँ लिए हुए थे, एक दम कड़क बम्स थे, एक दम चिकने. मैं दीदी की नंगी गान्ड देख के मूठ मार रहा था और दीदी मुझे ऐसा करते हुए देख रही थी. जिस तरह मैं दीदी के घूर्ने को नज़रअंदाज कर रहा था उसी तरह दीदी भी मुझे कर रही थी. ये बेहद नाज़ुक स्तिथि थी कि हम इतना ज़्यादा सेक्सी माहौल बनाने के बाद भी ये कोशिश कर रहे थे कि इससे ज़्यादा आगे ना बढ़ें.

दीदी एक सेकेंड के लिए थोड़ा सा घूमी तो मुझे उनकी हल्की हल्की झान्टो के त्रिकोण की एक झलक मिल गयी, मेरे मूँह से आहह की आवाज़ निकल गयी.

दीदी: क्या हुआ राज?

राज: कुछ नही दीदी, बस थोड़ा सो झुक जाओ ना प्लीज़

जैसे ही मैने ये कहा दीदी थोड़ा आश्चर्य में पड़ गयी. दीदी ने अपने पैर चौड़ा रखे थे और मैं उनके बीच कुछ कुछ देख पा रहा था.

एक सेकेंड रूको, दीदी बोली और सीधे खड़े होते हुए घूमकर मेरी तरफ देख के हँसने लगी. दीदी ने अपने होंठ दाँत से दबा के मेरी तरफ आश्चर्य में सिर हिलाया, और बोली कैसे लड़के हो तुम, मेरे हाथ की तरफ देखते हुए बोली जिस से मैं लंड आगे पीछे कर रहा था. एक बात कहूँ राज.... अगर तुम मेरा सब कुछ देखने में इतना इंट्रेस्टेड हो तो मैं भी तुम्हारे उसको देखूँगी, बाहर निकालो उसको.

राज (दीदी की तरफ देखते हुए): मुझे कोई आपत्ति नही है, पक्का ना दीदी?

दीदी ने हां में सिर हिलाया, फिर थोड़ा नर्वस हो गयी कि कहीं इस बात को लेकर बाद में उसकी खिंचाई ना करूँ

दीदी सोच के बोली: क्या ये करना चाहिए?

कुछ क्षणों के लिए खामोशी छा गयी

मैं बोला पछताओगी दीदी आप

दीदी ने मेरी और मैने दीदी की तरफ देखा, और फिर मुस्कुराने लगे, थोड़ा शरमाते हुए

दीदी: क्या मैं उपर बेड पर आ जाउ?

मैं दीदी के लिए जगह बनाने के लिए घूमा, और बेड के दूसरी तरफ देखने लगा. दीदी बेड पर उपर आ गई, थोड़ा साइड की तरफ से जिस से मैं कुछ देख ना पाऊँ. दीदी बेड के दूसरे किनारे पर बैठ गयी और फिर मेरी तरफ घूमी, दीदी ने अपने दोनो घुटनों को जोड़ रखा था. ये बड़ा अजीब लग रहा था कि हम दोनो एक ही बेड पर बैठ कर एक दूसरे को अपनी बेहद पर्सनल चीज़ दिखाने जा रहे हैं.

तुमको ऐसा नही लगता जैसे हम फिर से छोटे बच्चों की तरह घर-घर खेल रहे हों? दीदी ने पूछा

मैं एक सेकेंड सोचा और बचपन की वो सारी यादें ताज़ा हो गयी जब हम घर-घर खेला करते थे.... और नाटक करते थे जैसे हम मम्मी पापा हों

हां दीदी, सही कह रही हो आप, वो सब आपको अब भी याद है, मैं हंसते हुए बोला

दीदी के गाल गुलाबी हो गये और वो हँसने लगी, फिर बोली.... आइ आम सॉरी राज, मुझे कुछ ज़्यादा ही उत्सुकता हो गयी थी. हम दोनो हँसने लगे जिस से माहौल थोड़ा लाइट हो जाए.

जब हम तोड़ा शांत हुए तो मैने पूछा, पहले मुझे देखना चाहोगी दीदी? दीदी ने वहीं बैठे हुए ही मेरी तरफ देखा, अपने घुटनों को बाहों में भरते हुए, अपने हाथ के अंगूठे के नाख़ून को दाँत से काटते हुए हां में गर्दन हिला दी. मैने अपने बॉक्सर्स को नीचे खिसकाना शुरू कर दिया, मैने अपने बड़े खड़े लंड के उपर से बॉक्सर को हटा दिया, और अपने बॉक्सर को पूरी तरह उतारने के लिए अपने हिप्स को थोड़ा उपर उठाया और फिर उतार के फेंक दिया. दीदी मेरे खड़े हुए 7 इंच ले लंड को आँखें फाड़ फाड़ के देख रही थी.

जब मैं थोड़ा पीछे होकर अपनी पीठ के सहारे बैठ गया, तो दीदी ने शरमाते हुए अपने नीचे की तरफ देखा. अपने दोनों घुटनों को जोड़े रखे हुए ही दीदी ने अपने दोनो पैरों को नीचे से करीब एक फुट फैला दिया. अब दीदी की गोरी गोरी नंगी जांघें मुझे दिखाई दे रही थी, और ज़्यादा नीचे गहराई में देखने पर, दीदी के नीचे वाले लिप्स थोड़ा छुपे हुए दिखाई दे रहे थे. मेरी दीदी की सब से प्राइवेट चीज़ अब मेरे सामने थी, नीचे वाले वो दो लिप्स दीदी का सबसे बड़ा ख़ज़ाना था, जो अब तक सब से छिपा हुआ था मेरे सिवाय. दीदी ने जब मेरे खड़े हुए लंड को देखा, मैं दीदी के उस नाज़ुक से द्वार की रखवाली करते ढंग से कटी हुई झान्ट के बालों को देर तक निहार रहा था.

करीब 2 मिनिट तक हम ऐसे ही चुप चाप और बिना हिले बैठे रहे, हालाँकि मेरे पूरे शरीर में उत्तेजना हो रही थी और मैं अपने कानों में अपने दिल की धड़कन के सिवा और कुछ नही सुन पा रहा था.

मैं दीदी की चूत को घूरते हुए अपने हाथ से फिर से अपने लंड को पकड़ के आगे पीछे करने लगा, दीदी मेरे हर झटके के साथ मेरी गोलियों को हिलते हुए देखकर अब भी अपने दाँत से नाख़ून काट रही थी.

कुछ देर बाद दीदी ने अपना गला थोड़ा खांस के सॉफ किया और फुसफुसाई, मैं थोडा और पास आऊँ क्या?

मैने हां में सिर हिलाया, थोड़ा मैं भी सर्प्राइज़ हुआ. दीदी खिसक के मेरे इतना पास आ गयी कि दीदी के पैर मेरे पैरो के पास आ गये, मैने अपने पैर थोड़ा फैलाए जिस से दीदी के पैर मेरे पैरो की पिंदलियों के नीचे आ गये.

दीदी ने फुसफुसा कर पूछा, अब ठीक है?

मैं इस सब में इतना खो गया कि मैने अपना लंड हाथ में लिया और दीदी की चूत को देखने लगा. मुझे दीदी की चूत अब सॉफ दिखाई दे रही थी, दो मोटे मोटे चूत के लिप्स, और उनके अंदर सलवट लिए हुए अंदर के छोटे छोटे लिप्स, जो बाहर वाली स्किन से बाहर निकले हुए थे. और दोनो पैरों के बीच झान्टो की वो क्यारी जो प्यार से ट्रिम की हुई थी और चूत को घेरे हुए बड़ी सेक्सी लग रही थी.

मेरी गोलियाँ और लंड पानी छोड़ने के लिए बेचैन होते जा रहा थे. मैं बस झड़ने ही वाला हूँ .... मैं दीदी से बोला. झूठी हँसी के साथ मैने पूछा, आप के उपर निकाल दूं पानी? मैने दीदी की तरफ देखा तो उस को अपने दाँत से से होंठ काटते हुए मेरी तरफ घूरते हुए पाया.

आज नही राज, दीदी ने धीरे से कहा.

दीदी का एक पैर मेरी पिंडली को छू रहा था, मैने एक लंबी साँस लेते हुए दीदी की लंबी टाँगों के बीच नीचे की तरफ देखा. दीदी ने अपना पैर उठाया और इतना आगे कर लिया कि दीदी के पैर का पंजा अब मेरे हाथ के काफ़ी पास आ गया. हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, लेकिन दोनो ने कुछ भी कहना मुनासिब नही समझा.

दीदी के पैर का पंजा मेरी गोलियों को साइड से छूने लगा, जैसे ही दीदी ने थोडा ज़ोर से ऐसी सेन्सिटिव जगह दबाया, मेरे मूँह से आहह की आवाज़ निकल गयी.

इसके बाद जो हुआ उसके लिए हम दोनो शायद तय्यार नही थे. सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि मैं बिना कुछ सोचे अपने आप को रोक नही पाया, मैने दीदी के पैर को घुटने से पकड़ के उपर उठा दिया, फिर लंड पर अपने हाथ से एक दो जोरदार झटके मार के अपना सारा पानी दीदी के पैर के पंजे के उपर निकाल दिया. मेरे लंड से निकला हुआ पानी जो पिचकारी से मेरे हाथ, दीदी के पैर के पंजे के उपर से लुढ़क के मेरे बेड के उपर गिर रहा था, मेरा शरीर काँप रहा था, दीदी ये सब देख रही थी लेकिन वो अपनी जगह से हिली नही.

पानी की आख़िरी बूँद निकालने के बाद जब मैं थोड़ा शांत हुआ, तो मैने पास ही रखे टिश्यू बॉक्स में से 2-3 टिश्यूस निकाले (मैं हमेशा अपने कमरे में टिश्यू रखता हूँ, इसी काम के लिए) और प्यार से दीदी के पैर को पोंछ दिया, जब मैं पैर के पंजे के नीचे से पोंछ रहा था तो दीदी गुदगुदी होने के कारण हँसने लगी.

मैं दीदी का पैर नीचे रख के पीछे होकर बैठ गया. मुझे अपने नंगे होने का एहसास था लेकिन दीदी भी कपड़े पहनने की कोई जल्दी नही दिखा रही थी. मैने दीदी की तरफ देखा तो पाया कि वो मेरी तरफ ही प्यार से देख रही थी. मेरे को अपनी तरफ देखता पा के दीदी ने एक बड़ी सी स्माइल कर दी.

दीदी ने एक अंगड़ाई ली और ख़ुसी के साथ एक लंबी साँस ली. कुछ देर बाद साँस छोड़ते हुए बोली, ये सगे रिश्तों में ग़लत है.

मैं अचंभित होके बोला, दीदी...

उसने अपने कंधे उचकाए और थोड़ा मेरी तरफ देखा, फिर खड़े होकर अपने कपड़े पहनने लगी.

मैं दीदी को देख रहा था, किसी खूबसूरत लड़की को कपड़े पहनते देखने का आनंद ले रहा था, फिर मैं भी उठा और अपने कपड़े पहनने लगा.

जब हम दोनो ने कपड़े पहन लिए तो हम एक दूसरे के पास खड़े थे, बड़ा अजीब लग रहा था. दीदी ने फिर से अपना होठ दाँत से काटा, और मेरी तरफ देखा, मैने दीदी के माथे पर एक पप्पी ले ली और एक झप्पी भी ले डाली. सारे कपड़े पहन के इस तरह दीदी को झप्पी देना कुछ अजीब लगा ये सोच के कुछ देर पहले हम क्या कर रहे थे. इसलिए मैने फिर से दीदी के माथे पर पप्पी ली, और थोड़ा पीछे हो गया, दीदी मेरी तरफ देखे जा रही थी.

मैं रूम के डोर के पास पहुँचा तो दीदी डोर खोलने देने के लिए थोड़ा साइड में हो गयी, मैने डोर नही खोला बस दीदी की तरफ देखता रहा. जब दीदी ने देखा कि मैं डोर नही खोल रहा हूँ तो फिर मेरे चेहरे की तरफ देखा. मैं दीदी के पास आया, वो बिल्कुल नही हिली. मैं झुक के आगे बढ़ा और दीदी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, दीदी ने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

मेरे हाथ दीदी की शर्ट के अंदर दीदी की कमर को पकड़े थे, मैने दीदी को हल्का धक्का देकर दीवार से लगा दिया, और फिर किस करना लगा. मैं अपना शरीर दीदी के शरीर से चिपका के बहुत ज़ोर से किस कर रहा था. मैं दीदी की जीन्स का बटन खोलने लगा. दीदी अब और ज़ोर से साँसे लेने लगी, जब बटन खुला उस समय दीदी हाँफ रही थी. दीदी ने जीन्स उतारने में मेरी मदद की, और अपने पैरों से निकाल के फेंक दी, अब मेरे हाथ अब दीदी की पैंटी के अगले हिस्से पर घूम रहा था. दीदी अब कराह रही थी, मैं अपना हाथ पैंटी के अंदर डाल दीदी की झान्टो के उपर से सहलाने लगा, ऐसा करने से दीदी अब काँपने लगी.

मेरी उंगलियाँ अब दोनो पैरों के बीच जाके दीदी की चूत को सहला रही थी. जैसे ही मैने चूत के दाने को सहलाया, तब तक दीदी की पैंटी गीली हो चुकी थी, और दीदी अपने फिंगर्स को मेरी पीठ पर ज़ोर से गढ़ा रही थी, दीदी ने ऐसा पहले किसी को करने का मौका नही दिया था.

अगले 10 मिनिट तक मैं दीदी को कामुक तरीके से छूता और सहलाता रहा, दीदी को कांपता हुआ महसूस करता रहा, और दीदी की जीभ का अपनी जीभ से स्वाद लेता रहा, दीदी की चूंचियाँ मेरी छाती से दब रही थी. मेरी उंगलियाँ दीदी की जांघों के बीच सहला रही थी और दीदी के कराहने की आवाज़ों से पता चल रहा था कि दीदी क्या चाहती है. मैने दीदी को थोड़ा अपनी तरफ करते हुए, दीदी की चूत की दरार के उपर और आगे उंगलियाँ ले जाते हुए उस छेद को ढूँढने लगा, दीदी की जांघें अब काँप के हिलने लगी थी.

अब दीदी हिल हिल के अपनी चूत मेरी उंगलियों पर घिस रही थी, तभी गिरते गिरते बची और अपना पूरा बोझ मेरे हाथ पर डाल दिया, दीदी ने अपना चेहरा मेरी गर्दन में घुसा रखा था, और उनकी बाहें मेरे सिर के चारो ओर थी, और मैं दीदी को पकड़े उनकी उस कुँवारी जगह छू रहा था. कुछ सेकेंड्स बाद दीदी की चूत ने कई सारी अंगड़ायाँ ली, और अगर दीदी साँस ले पा रही थी तो थोड़ा गुर्राने की आवाज़ निकाल के अब एक दम ठंडी पड़ गयी. मुझे लगा मानो दीदी के पैरों में से जान निकल गयी हो, मैने तुरंत दीदी को संभाला और दीदी को फ्लोर पर गिरने से बचाया.

मैने दीदी के काँपते हुए और निढाल शरीर को उठा के बेड पे लिटाया. मैं दीदी के उपर आ गया, दीदी के माथे को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा, और फुसफुसाते हुए कहने लगा, दीदी आप कितनी सुंदर हो..... विश्वास नही होता..... आप को पता नही है आप मुझको कितना अच्छी लगती हो...

थोड़ी देर बाद दीदी नॉर्मल साँसें लेने लगी और आँखें बंद करे हुए ही मेरी बातें सुन के मुस्कुराने लगी. दीदी ने फिर आँखें खोल के मेरी तरफ देखा और मेरे हाथ अपने माथे से हटा के उस पर एक किस ले लिया. दीदी ने मुझे नीचे खींच के मुझे अब तक की सबसे जोरदार और प्यारी झप्पी दी.

जब दीदी को लगा कि अब उठना चाहिए तो मैने दीदी की उठने में सहारा दिया और दीदी को अपने कपड़े सीधे करते हुए और जीन्स पहनते देखने लगा. मैने दीदी की एक झप्पी ली और एक बार फिर से हम ने किस किया, फिर दीदी मेरे कमरे से निकल के अपने रूम में चली गयी.

.................

 
अगले दिन दीदी काफ़ी देर तक सोती रही और कॉलेज के लिए बहुत लेट हो गयी.

जैसे ही मैने कार के पॅसेंजर की तरफ जाकर डोर खोलने के लिए हॅंडल खींचा, मैने देखा कि मानो किसी मूक दर्शक की तरह चंद्रमा मेरे सिर के उपर चमक एक अपनी चाँदनी बिखेर रहा है. तान्या मुझे देख के मुस्कुराइ और अपना पर्स उठा के कार से बाहर निकल आई, मैने गेट बंद लिया और उसे उसके अपार्टमेंट तक छोड़ने के लिए उसके साथ साथ चलने लगा. जब हम उसके अपार्टमेंट के शीशम की लकड़ी से बने गेट तक चल कर पहुँचे, वहाँ उपर 20 वॉट की सीएफएल लाइट जल रही थी, मैं थोड़ा नर्वस हो रहा था.

मैं अपने आप को कॉन्फिडेंट दिखाते हुए बोला, आज की शाम मस्त रही, मज़ा आ गया.

अपने चेहरे पर आए बालों को हटते हुए तान्या बोली, हां बहुत मज़ा आया, मैने तो ना जाने कितने सालों से बोलिंग की ही नही थी, जब मैं छोटी थी तब किया करती थी.

गुड नाइट कहने से पहले कुछ खामोशी के बीच वो अजीब क्षण अब आ चुका था. तभी मैने शरारत करते हुए कहा, हां पर अगली बार तुम इस छोटी सी पिंक बॉल की बजाय असली बॉल से खेलना.

शायद तान्या को मेरा ऐसा बोलना अपनी इन्सल्ट लगी वो तुरंत बोली, ठीक है लेकिन आज भी अगर असली बॉल मिल जाती तो मैं तो तय्यार थी खेलने के लिए, वो ऐसा बोल के हँसने लगी और मेरी सुलग गयी.

तान्या ने दरवाजा खोलते हुए कहा, देखो अब मुझे जाने दो कल की क्लास के लिए मुझे पढ़ाई भी करनी है, तुम मुझे कॉल करना ओके?

मैं हकलाते हुए बोला हां ज़रूर, मैं जैसे ही अपने कार की तरफ चला तभी तान्या की बिल्डिंग के किसी अपार्टमेंट का किरायेदार बाहर निकला और मुझे और तान्या को देखता हुआ पास से निकल गया.

तान्या अंदर घुसते हुए स्माइल करते हुए बोली, ओके बाइ गुड नाइट, तुम्हारे साथ मैने आज बहुत एंजाय किया.

उसका दरवााज़ा बंद हो गया लेकिन मैं एक मिनिट वहीं खड़ा रहा और कार के चाबियों को अपनी उंगलियों पर घुमाता रहा. मैं कार की तरफ चलते हुए चमकते हुए चंद्रमा को देखने लगा जो आज तान्या को तीसरी बार, हर बार की तरह मेरे मूँह पर दरवाजा बंद कर के अंदर घुसते हुए देख चुका था और इस बात का गवाह था.

मैं पिछले हफ्ते हुई सारी घटनाओं के बारे में सोचने लगा. तान्या ने करीब 2 हफ्ते पहले किसी प्रॉजेक्ट के बारे में अपनी क्विरीस पूछने के लिए मुझे फोन किया था. हम दोनो शुरू में तो क्लास असाइनमेंट्स के बारे में बातें करते रहे, फिर हम अपने बारे में बातें करने हुए मस्ती करने लगे. डॉली दीदी को पता था कि मेरे से फोन पर बातें कर रही लड़की कोई और नही तान्या ही है, दीदी मेरे रूम के डोर पर आ गयी और मुझे चिढ़ाने लगी. कुछ देर बाद एक कागज के पुर्ज़े पर लिखकर मुझसे पूछा, .तान्या से पूछा क्या? जब मैने ना में सिर हिलाया तो दीदी ने रोनी सूरत बनाई और निराश होके अपनी गर्दन हिलाई. ये अब सॉफ था कि दीदी चाहती थी कि मैं तान्या से इस बारे में जल्द से जल्द बात करूँ, और मैं भी ऐसा ही चाहता था, इसलिए मैने तान्या से अगले ट्यूसडे को डिन्नर पर चलने को प्रपोज़ किया तो तान्या थोड़ी सर्प्राइज़ हुई और फिर तुरंत तय्यार हो गयी. डॉली दीदी के चेहरे पर ये सुन के एक बड़ी सी स्माइल आ गयी और बाद में मुझ से बोली, मुझे मालूम है राज तुम तान्या को पसंद करते हो, और मुझे इस बात की खुशी है. मैं ये देख के इस बात पर खुश हो गया कि दीदी भी मेरे को तान्या के साथ बाहर जाने को एनकरेज कर रही है.

मैं और तान्या ट्यूसडे को और फिर फ्राइडे को बाहर गये, और आज सनडे को बोलिंग के लिए गये, ये एक्सपीरियेन्स भी अच्छा रहा. मुझे लगने लगा था कि अब हम क्लासमेट्स से ज़्यादा एक दूसरे को जानने लगे हैं. मुझे इस बात की उम्मीद नही थी कि तान्या मुझे अंदर बुलाकर अपने कमरे में, अपनी दोनो टाँगें चौड़ा के और चूत खोल के मुझे चोदने के लिए कहेगी, लेकिन हां मैं केवल एक गुड नाइट से ज़्यादा एक किस या हग की उम्मीद तो कर ही रहा था. शायद मुझे ज़्यादा ही जल्दी थी, सब जवानी का दोष था.

निराश होकर मैं अपनी कार में बैठ गया और ड्राइव कर के अपने घर की तरफ चल पड़ा. आधे घंटे की ड्राइव के बाद जब मैं घर पहुँचा मैं काफ़ी कुछ नॉर्मल हो चुका था. मुझे मालूम था कि मेरी निराशा का मूल कारण ये था कि तान्या पहली लड़की थी जिसे मुझे घुमाने ले जाने का मौका मिला था और शायद एक नॉर्मल भारतीय लड़की से कुछ ज़्यादा ही एक्सपेक्ट कर रहा था,वो भी जब, जब कि तान्या को मालूम था कि उसकी शादी मेरे साथ दोनो के पेरेंट्स पक्की कर चुके हैं. वो शायद अपनी इमेज मेरी नज़रों में खराब नही होने देता चाहती थी. मैं तान्या को बहुत चाहने लगा था वो मुझे बहुत अट्रॅक्टिव लगती थी. मैं ये समझ नही पा रहा था कि वो क्लास में ऐसा बिहेव क्यों करती है जिस से सभी लड़कों को लगे कि वो लाइन दे रही है.

जैसे ही मैं घर के दरवाजे पर पहुँचा तब तक मेरी समझ में कुछ नही आ रहा था, और दिमाग़ से इन सब फालतू बातों को फिलहाल निकालने के लिए मैने अपने सिर को ज़ोर से झटका.

रात के साढ़े बारह बज चुके थे और मैं होशियार था कि ज़्यादा आवाज़ ना करूँ जिस से कहीं मम्मी पापा और डॉली दीदी जाग ना जायें. जैसे ही मैं घर में घुसा मैने ड्रॉयिंग रूम में टीवी चलने के आवाज़ सुनी, ड्रॉयिंग रूम में कोई नही था बस सेंटर टेबल पर एक बोवल में पॉपकोर्न्स रखे थे और एक खाली पानी का ग्लास, जब मैं अपने रूम की तरफ बढ़ा तो मैने टाय्लेट की लाइट जलती हुई देखी, मतलब डॉली दीदी अभी जाग रही थी, मुझे टाय्लेट से पानी बहने की आवाज़ सुनाई दी.

मैने टाय्लेट के डोर को धीरे से खटखटाया तो दीदी कुछ धीरे से बोली. मैने डोर के हॅंडल को पकड़ के घुमाया और जैसे ही अंदर सिर घुसाया, इस से पहले कि मैं कुछ देख पाता मेरे नथुने एक महकती हुई खुसबु से भर गये, दीदी किसी सुगंधित साबुन से शवर के नीचे नहा रही थी, दीदी तुरंत जैसे ही आगे बढ़ी, मैं बोला बस ये बताने के लिए कि मैं आ गया हूँ. दीदी मेरा मूँह बाहर धकेलते हुए और डोर को बंद करते हुए बोली, अच्छा ठीक है.

मैने अपने रूम में जाके जीन्स उतार के बॉक्सर्स पहना और फिर से नीचे ड्रॉयिंग रूम में आकर टीवी पर नॅशनल जियोग्रॅफिक देखे लगा, प्रोग्राम था कि क्या एक पेड़ पौधों के पत्ते खाकर जीने वाली चिंटी इस मूसलाधार बरसात के मौसम को बर्दाश्त कर पाएगी? भगवान बचाए इन नेचर शोस से. तभी डॉली दीदी आ गयी और मुझे टीवी पर ये प्रोग्राम देखते हुए मुस्कुराइ.

तभी एक अड्वर्टाइज़्मेंट आ गया जिसमे घर में एक यन्त्र लगाने से लक्ष्मी की बरसात होने का दावा किया जा रहा था, मैं उस अड्वर्टाइज़्मेंट को देख के बोला, ऐसे अड्वर्टाइज़्मेंट्स को बॅन कर देना चाहिए.

डॉली दीदी ने मेरी तरफ आँख गोल गोल घुमा के देखा और मेरे सोफे के सामने वुडन फ्लोर पर बैठ गयी. दीदी ने नाइट्गाउन पहन रखा था और उनके बाल अभी भी थोड़े गीले थे.

मेरे हाथ से रिमोट लेते हुए दीदी बोली, इसीलिए तो मैं मूवी देख रही थी बुद्धू, रिमोट लेकर उसे डीवीडी प्लेयर की तरफ पॉइंट करते हुए अपनी पॉज़ की हुई मूवी रिज्युम कर दी. आशिक़ी 2 हालाँकि मेरी फॅवुरेट मूवी थी, लेकिन अगर कोई और भी होती तो भी आज मैं अपने दिमाग़ को डाइवर्ट करने के लिए कुछ भी देखने को तय्यार था.

कुछ मिनट के बाद, मैने देखा कि दीदी अपना सिर गोल गोल घुमा रही है, और अपनी गर्दन सीधी कर रही है. दीदी अपने एक हाथ को उपर उठाकर उस से दूसरे कंधे की मालिश कर रही थी

राज: क्या गर्दन में फिर से दर्द हो रहा है?

दीदी मूवी में खोई हुई थी, उसने शायद सुना नही, इसलिए मैने दोबारा पूछा. दीदी ने हां में सिर हिलाया और बोली, इस सिर दर्द ने तो परेशान कर रखा है.

रूको दीदी, मुझे करने दो, मैं दीदी के पीछे बैठ गया, और दीदी के कंधों की मालिश करने लगा. दीदी को ये प्राब्लम पिछले कयि सालों से थी, शायद जब वो 10थ में थी तब से. दीदी के कंधे और गर्दन की मालिश करने से उनका सिर दर्द कम हो जाता था, और ज़्यादा तीव्र नही होता था, मैं और पापा दोनो अब दीदी की गर्दन की मालिश करने में एक्सपर्ट हो चुके थे, जब भी वो चाहती हम दोनो में से एक उसकी ये मालिश किया करता था.

दीदी ने एक ज़ोर से साँस ली और बोली, थॅंक यू राज, और अपने हाथ नीचे कर लिए.

 
जिस तरह हम करीब आ चुके थे उसके बाद, दीदी के कंधों के उपर हाथ फिराने में अब और ज़्यादा मज़ा आ रहा था. ये वासना से भरा हुआ नही था, बस एक भाई का अपनी बेहन के लिए प्यार था. दीदी को भी ये बात पता थी.

मूवी के जब 2-3 सीन ख़तम हुए तब दीदी ने अपना सिर पीछे किया, (अब वो पहले से रिलॅक्स लग रही थी) और मुझसे पूछा, मेरे पैर के पंजे की भी मालिश कर दो.

मैने हां में सिर हिलाया, दीदी मेरे साथ मेरे 3 सीटर सोफे पर दूसरी तरफ बैठ गयी और मेरी गोदी में अपने पैर के पंजे को रख दिया. हालाँकि ये नया नही था लेकिन ऐसे वो कभी कभार ही करवाती थी. जब दीदी ज़्यादा स्ट्रेस में होती थी तभी अपने पैर के पंजों की मालिश करवाती थी. दीदी के पैर के पंजे बहुत नाज़ुक कोमल से बहुत सुंदर थे, मुझे उनको सहलाने में कोई आपत्ति नही थी. हम दोनो टीवी की तरफ देख रहे थे और मैं दीदी के पैर के पंजों को दबा दबा के, कभी पंजे की तो कभी दीदी के पैर की उंगलियों में अपनी उंगलियाँ घुसा के उनकी मालिश कर रहा था. दीदी को और ज़्यादा आराम देने के लिए, मैने दीदी के घुटनों तक उनकी पिंदलियों को हल्के हल्के दबा दबा के कुछ देर मालिश की. मैं दीदी के चिकने पैरों और दीदी की सुडौल पिंदलियों का स्पर्श सुख ले कर रोमांचित हो रहा था.

दीदी ने स्माइल करते हुए मुझसे पूछा, तो फिर कैसी रही तुम्हारी आज की डेट?

मैने कंधे उँचकाते हुए कहा, हां मज़ा आया, बढ़िया रही

मैं दीदी की पिंदलियों को हल्के हल्के आटे की तरह गूँथ रहा था, दीदी के मूँह से आहह निकल गयी. फिर दीदी खिलखिलाई और पूछा, तो आज किस ली या आज भी नही?

मैं फिर से दीदी के पंजों के निचले हिस्से, उनकी उंगलियों की मालिश करने लगा, और दीदी के पंजे के साथ खेलने लगा, दीदी के पैर के पंजे की उंगलियों को जॉइंट पर से थोड़ा धीरे से नीचे करता और फिर बीच के हिस्से को मसलता.

नही ऐसा कोई चान्स नही मिला, मैं बोला.

दीदी ने मेरी तरफ देखा, मैं दीदी के चेहरे पर आए निराशा के भाव को पढ़ पाया.

तुम खुश रहा करो राज, क्यों? दीदी ने पूछा,

मैने हां में सिर हिलाया. दीदी ने अपना पैर मेरे पास से दूर कर लिया और खड़ी हो गयी, फिर मुझे फ्लोर पर सोफे के पास लेटने को कहा.

देखो, जैसे तुम मेरी इतनी अच्छी सेवा करते हो, आज मैं भी तुम्हारी करती हूँ. दीदी मेरे साथ फ्लोर पर बगल में लेट गयी, लेकिन दीदी का सिर मेरे पैरों की तरफ था और दीदी के पैर मेरे सिर की तरफ.

दीदी मे मेरे पैर का पंजा पकड़ा और धीरे से उसकी मालिश करने लगी. ये देख मैं भी दीदी के पैर के पंजे को पकड़ के वहीं से शुरू हो गया, जहाँ से मैने सोफे पर बैठ के छोड़ा था.

मेरी ऐसी मालिश दीदी ने पहले कभी नही की थी, दीदी जिस तरह से मेरे पैर के पंजों के उंगलियों की मालिश कर रही थी उस से सारा तनाव ख़तम हो रहा था, और तान्या के साथ हुई निराशा को भूलने में ये मालिश बहुत मदद कर रही थी. मैं भी दीदी की उसी तरह प्यार से मालिश करने लगा.

थोड़ी देर बाद इतना ज़्यादा सुकून मिलने लगा कि मैने कुछ भी सोचना बंद कर दिया, बस दीदी के पैरो को सहला रहा था और मूवी देख रहा था. दीदी की आवाज़ सुन के मैं चौंका, मैने दीदी की तरफ देखा, दीदी के चेहरे पर कुछ अजीब से ही भाव थे. मैने उसे प्रश्न भरी निगाह से देखा और पूछा, कुछ कहा आपने?

दीदी: हां, मैने कहा कि मुझे कुछ कुछ हो रहा है, ऐसा बोल के दीदी थोड़ा शर्मा गयी

मैं भी मुस्कुराया और बोला, ओह्ह्ह सॉरी दीदी. मैं दीदी के पैर के पंजे को सहलाते हुए बोला, बस इतना सा करने से?

दीदी ने हां में सिर हिलाया और बोली, पहले तो आराम मिल रहा था, लेकिन अब कुछ अलग ही हो रहा है

मेरे समझ में नही आया कि क्या कहूँ, तो मैं बस थोड़ा मुस्कुराया और जहाँ मैं सहला रहा था वहाँ अब दबाने लगा.

दीदी ने खीजते हुए अपने होंठ भींचे और हंस कर डाँटते हुए बोली, राज नही मानोगे तुम. मैने कंधे उँचका के दीदी को चिढ़ा दिया.

मैने दीदी के पैर के पंजे को सहलाते हुए दीदी की तरफ देखा. दीदी ने मुझे देखा. पता नही मुझे क्या हुआ मैं दीदी के पैर के पंजे जिसकी उंगलियों पर गुलाबी रंग की नेल पोलिश लगी हुई थी, उसे अपने करीब लाके उसको चूमने लगा.

दीदी थोड़ा हँसी फिर जल्दी से बोली, राज !

मैने अपना काम जारी रखा और फिर छोटी वाली उंगली की एक चुम्मी ले डाली. दीदी ने अपना निचला होंठ दाँतों से दबाया और फिर आराम से अपने पंजा मेरे हवाले कर दिया. मैने एक और उंगली ली और उसे चूसने लगा, और अपनी जीभ को सबसे छोटी और उसकी पड़ोसी उंगली के बीच फिराने लगा. दीदी अब कराहने लगी थी, दीदी ने अपने पैरों की उंगलियों को और ज्याद फैला के दूर दूर कर दिया जिस से मैं उनके बीच आसानी से चाट सकूँ.

दीदी बोली, हे भगवान...., मैने अपनी जीभ उन नाज़ुक उंगलियों के संवेदन शील हिस्सों के बीच फिराना जारी रखा. बड़ा अजीब लग रहा था कि मैं अपनी बेहन के पैर की उंगलियों को मूँह में लेकर चाट रहा हूँ, लेकिन मुझे इस बात की खुशी थी कि ऐसा करने से दीदी को अच्छा लग रहा है.

मैने महसूस किया कि दीदी खिसक के मेरे और पास आ गयी है, दीदी का फेस मेरी पिंदलियों के पास था. दीदी की चूंचियाँ मेरी जांघों को दबा रही थी और मेरा लंड दीदी के पेट को दबा रहा था. मैने दीदी के पैर की उंगलियों का चाटना और चूसना जारी रखा, दीदी अपने पैर का पंजा आगे पीछे करती और कभी इधर उधर घुमा लेती फिर सीधा कर लेती.

कुछ देर बाद दीदी कुछ हिलने लगी, दीदी ने अपना पंजा मेरे मूँह से दूर किया और मेरे को हल्का धक्का देकर सीधा पीठ के बल लिटा दिया, और मेरे उपर आ गयी. दीदी ने मेरे दोनो कंधों के नीचे से अपने पैर निकाले और घुटनों के बल अपनी गान्ड मेरे चेहरे के ठीक उपर कर ली मैने भी अपनी बाँहों को सही पोज़िशन में कर लिया. मेरे चेहरे को दीदी के नाइट्गाउन के किनारे ने ढक रखा था, मुझे अपने चेहरे के कुछ इंच उपर दीदी की पैंटी दिख रही थी जिसमे फूली हुई चूत क़ैद थी.

दीदी ने एक गहरी साँस लेते हुए पूछा, सब लड़के किसी लड़की के साथ डेट से लौटने के बाद ऐसे ही मूड में रहते होंगे, क्यों राज?

मूवी के डाइलॉग्स की आवाज़ आ रही थी, दीदी के शरीर का उभार जो मेरे उपर था और दीदी की पैंटी के हर धागे को देखकर अब मेरी धड़कन तेज होने लगी थी. दीदी की चूत से निकल रही खुश्बू और मेरी नाक के नथुनो में घुस रही वो मादक खुश्बू और गर्माहट मुझे पागल कर रही थी. मैं अपने हाथ को बॉक्सर्स के अंदर डाल के अपने खड़े लंड को हिलाने लगा. मैं ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहा था और मेरे लंड को अपने हाथ से शांत करने का प्रयास कर रहा था, मुझे मालूम था कि दीदी ये सब देख रही है.

दीदी ने अपने दोनो हाथ मेरी कमर पे मेरी हिप्स के ऊपर रखे और मुझे अपने लंड को सहलाते देख अपनी गान्ड को मेरे चेहरे के उपर गोल गोल घुमा के मटकाने लगी, दीदी की पैंटी के अंदर फूली हुई चूत मेरी आँखों के सामने थी. मेरे लंड से निकली प्रेकुं की कुछ बूँदों ने मेरे बॉक्सर्स को गीला करना शुरू कर दिया था, मैं दीदी की पैंटी को घूर्ने लगा. दीदी ने मेरी कमर ज़ोर से पकड़ ली, बदले में मैने अपना दूसरा हाथ दीदी की नंगी जाँघ पर रख दिया.

 
दीदी की गान्ड हिलाने के कारण, पैंटी में बंद उनकी चूत मेरे चेहरे के काफ़ी पास आ गयी थी, शायद दीदी को इस बात का एहसास नही था, मैने दीदी की जांघों को आगे से पकड़कर पीछे की तरफ खींचा, जिस से दीदी थोड़ा नीचा हो जाए. दीदी समझ गयी और उसने अपनी पैंटी से मेरे चेहरे को दबा लिया. मैने अपना मूँह खोला और भूखे शेर की तरह टूटते हुए दीदी की चूत को पैंटी के उपर से ही किस करने लगा. मैं जो कर रहा था वो दिमाग़ हिला देने वाली बात थी कि मैं अपनी दीदी की चूत को किस कर रहा हूँ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन जिस तरह से दीदी अपनी चूत को मेरे चेहरे के उपर घिस रही थी, उस से लगता था कि दीदी को भी मज़ा आ रहा है. मेरे दिमाग़ फिर से अंतरद्वंद चलने लगा कि कितना मज़ा आ रहा है और शायद हम को ऐसा नही करना चाहिए क्यों कि ये मेरी बड़ी बेहन है, लेकिन मैं रुकना नही चाहता था.

मैने मूठ मारना जारी रखा. बॉक्सर्स की एलास्टिक थोड़ी नीचे हो गयी थी और शायद मेरा लंड भी थोड़ा बाहर निकल आया था, लेकिन मुझे कोई परवाह नही थी. मैने अपने आप को समझाया कि दीदी टीवी की रोशनी में शायद ज़्यादा कुछ नही देख पा रही होगी. मैने अपनी जीभ को दीदी की चूत में पैंटी के उपर से ही घुसा के चूसने लगा, मेरी नाक दीदी की गान्ड के उपर थी. दीदी की पैंटी एक दम टाइट थी और मेरे चूसने से वो गीली हो गयी थी, अंदर छिपी हुई मस्त मुलायम चूत को मैं महसूस कर पा रहा था.

दीदी अपने हाथ नीचे की तरफ सरका रही थी और सरकते हुए अब वो मेरे बॉक्सर की एलास्टिक के पास पहुँच चुके थे और अब मेरी झान्टो को छू रहे थे.

दीदी की पैंटी में से दिख रहे चूत के उभार को देख कर मैं मस्त हो रहा था और जवान लड़की के शरीर की मादक सुगंध को सूंघते हुए अपने जीभ को चूत वाली जगह गीली हो चुकी पैंटी के उस हिस्से को अपने होंठों से दबा रहा था. दीदी की उंगलियाँ अब मेरे लंड के नीचे तक पहुँच चुकी थी. मैं पैंटी के उपर से ही, पूरी शिद्दत के साथ दीदी की कुँवारी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसाने की कोशिश कर रहा था, दीदी मेरे लंड के आस पास अपना हाथ फिरा रही थी. दीदी का शरीर यकायक अकड़ने लगा और वो थोड़ा सा झुक भी गयी.

जब तक मुझे होश आया, दीदी मेरे बॉक्सर्स के अगले भाग और मेरे खड़े लंड को छू रही थी.

दीदी शुरू में थोड़ा रुकी और बस अपना चेहरा मेरे लंड के उपर रख दिया. मैने अपना हाथ बॉक्सर्स के अंदर से निकाल लिया, और बिना ज़्यादा कुछ सोचे एलास्टिक को खींच कर लंड तो पूरी तरह से ढक लिया. दीदी अपने हिप्स को मेरे चेहरे के उपर घुमा रही थी और मैं दीदी की चूत को अपने होंठों से पैंटी के उपर से ही मसल रहा था. मैने महसूस किया कि दीदी अपना चेहरा मेरे लंड पर घिस रही है. लंड की पूरी लंबाई तक दीदी अपने गाल और होंठों को बॉक्सर्स के उपर से ही लंड के उपर घिस रही थी. दीदी शुरू में ये सब थोड़ा धीरे धीरे और सावधानी के साथ कर रही थी, लेकिन जैसे ही मैने दीदी के दोनो पैरों के बीच उनकी चूत को ज़ोर से दबाया, दीदी भी ज़ोर से दबा के मेरे लंड को अपने चेहरे से सहलाने लगी.

जैसे ही मैने दीदी की उस जगह को अपने चेहरे से दबाया जहाँ शायद नही दबाना चाहिए, दीदी ने मेरे उपकार का तुरंत बदला चुका दिया. दीदी अब मेरे लंड को चूम रही थी और दीदी की उंगलियाँ मेरी झान्टो के बीच सहला रही थी. मेरा लंड अब ख़ूँख़ार तरीके से पूरी तरह कड़क होकर खड़ा हो चुका था, मैने दीदी के हिप्स पकड़े और अपने चेहरे के उपर उनको ज़ोर से दबा लिया, और अपने मूँह से दीदी की चूत को मसल्ने लगा. दीदी के मूँह से निकल रही कराहने की आवाज़ को मैं सुन पा रहा था, दीदी ने मेरे लंड के सुपाडे को बॉक्सर्स के उपर से ही अपने होंठों के बीच ले लिया, मुझे लगा जैसे जन्नत मिल गयी हो.

मैने जैसे ही पानी छोड़ा मेरा शरीर मानो तीर कमान बन गया और दीदी गिरते गिरते बची, मुझे मालूम है, मेरा वीर्य बॉक्सर्स के कपड़े से निकल के दीदी के होंठों तक आ गया था. जब मेरा लंड वीर्य उंड़ेल रहा था तब दीदी लंड के सुपाडे को किस कर रही थी, मैं भी दीदी की पैंटी को और उस कोमल जगह को ज़ोर ज़ोर से किस कर रहा था. जब मेरे लंड से माल निकलना धीरे हुआ, दीदी थोड़ा उपर हो गयी और अपनी पैंटी के अंदर अपना अपना हाथ डालकर अपने आप घिसने लगी. दीदी ने फिर से अपनी चूत के हिस्से को मेरे मूँह के उपर रख दिया, और मैं महसूस कर रहा था कि दीदी पैंटी के अंदर से चूत के दोनो तरफ अपनी उंगलियों से वी शेप बना के मेरे मूँह को एक ख़ास जगह पर ध्यान देने के लिए कह रही थी. मैं तुरंत समझ गया और उस जगह पर अपना मूँह और जीभ ज़ोर से दबाने लगा, दीदी का शरीर अब अकड़ने लगा और दीदी आआहह की आवाज़ निकालते हुए काफ़ी देर तक काँपति रही. थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गयी.

उस शांति में हम दोनो हाँफ रहे थे और ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहे थे, और एक दूसरे को प्यार से सहला रहे थे. दीदी ने अपना हाथ पैंटी में से निकाला और अपने पैरों पर खड़ी हो गयी.

दीदी धीरे से फुसफुसाई, मैं फ्रेश होके आती हूँ, और कमरे से बाहर निकल गयी. गॅलरी में बाथरूम से आ रही रोशनी बता रही थी कि दीदी अंदर है. मैं सोफे पर लेटा रहा, और आज जो हम ने किया था उसको सोच के मैं आश्चर्य करने लगा. टीवी पर चल रही मूवी अब क्लाइमॅक्स पर थी और ख़तम होने ही वाली थी. मैं उठा अपने आप को सॉफ किया और फिर से सोफे पर लेट गया.

जब तक दीदी लौट के आई मैं करीब करीब सो ही चुका था. मैने अपने मूँह को हाथ से पोन्छा और महसूस हुआ कि दीदी की चूत की मादक खुश्बू अब भी मेरे होंठों पर थी, दीदी मेरे को देख कर मुस्कुरा रही थी.

दीदी प्यार से बोली, राज लगता है तुम बहुत थक गये हो, मैं आधी नींद में थोड़ा मुस्कुराया. खड़ा होने में मदद के लिए दीदी ने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे उठने में मदद की और बोली चलो अब सो जाते हैं. मैं जैसे ही अपने रूम की तरफ बढ़ा, दीदी टीवी बंद करके मेरे पीछे पीछे आने लगी. मैं बाथरूम के सामने थोड़ा रुका, और जब मैं बाहर आया तब तक दीदी आराम से मेरा इंतेजार कर रही थी. दीदी ने एक जमहाई ली लेकिन वो बहुत खुश नज़र आ रही थी.

मैं अपने रूम में आके बेड पर धडाम से लेट गया. दीदी ने मुझे चादर ऊढाई . कमरे में बिल्कुल शांति थी, मैने अपने सिर पर दीदी के बालों को और दीदी की प्यारी साँस को अपने चेहरे पर महसूस किया और फिर दीदी के नरम नरम होंठ मेरे होंठों के उपर आकर धीरे धीरे दबाने लगे. ये कोई भाई बेहन वाली किस नही थी, लेकिन उस रात कुछ ऐसा ही हुआ. दीदी वासना की आग में बह कर वो कर रही थी जो किसी बेहन को अपने भाई के साथ जज्बातों में बह कर नही करना चाहिए, दीदी प्यार से अपनी जीभ मेरी जीभ के उपर घूमा रही थी, मैने भी धीरे धीरे प्यार से उसी तरह किस करना शुरू कर दिया मानो वो मेरी दीदी नही बीवी हो.

ऐसा लगा जैसे ये किस कभी ख़तम ही नही होगी, फिर दीदी ना चाहते हुए भी मुझ से दूर हुई, और फिर सोने जाने से पहले मेरे माथे पर फिर से एक छोटा सा किस किया. फिर मैं भी सोने की कोशिश करने लगा, पर मेरी आँखों से नींद कोसों दूर थी.

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