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Guest
"हाला, कौन गवलेकर?"
"क्या कर रहा है?"
"अबे इधर आजा. घर पर बोल देना कि रात मे कहीं गश्त पर जाना
है. यहीं रात गुजरेंगे. हमारे ब्रिज साहब की जमानत यहीं है
मेरी गोद मे."कहकाक उसने मेरे एक निपल को ज़ोर से उमेटा. दोनो निपल
बुरी तरह दर्द कर रहे थे. नहीं चाहते हुए भी मैं चीख उठी.
"सुना? अब झता झट आजा सारे काम छोड़ कर"रात भर अपन दोनो इसकी
जाँच पड़ताल करेंगे."
मैं समझ गयी की क़य्यूम ने इनस्पेक्टर गवलेकर को रात मे अपने घर
बुलाया है. और दोनो रात भर मुझे चोदेन्गे.
खाना खाने के बाद मुझे बाहों मे समेटे हुए ड्रॉयिंग रूम मे आगेया.
मुझे अपनी बाहों मे लेकर मेरे होंठों पर अपने मोटे मोटे भद्दे
होंठ रख कर चूमने लगा. फिर अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी. और
मेरे मुँह का अपनी जीभ से मुआयना करने लगा. फिर वो सोफे पर बैठ
गया और मुझे ज़मीन पर अपने कदमों पर बिठाया. टाँगें खोल कर
मुझे अपनी टाँगों की जोड़ पर खींच लिया. मैं उसका इशारा समझ कर
उसके लिंग को चूसने लगी. वो मेरे बालों पर हाथ फिरा रहा था. फिर
मैने उसके लिंग को मुँह मे ले लिया. उसके लिंग को चूसने लगी. जीभ
निकाल कर उसके लिंग के उपर फिराने लगी. धीरे धीरे उसका लिंग
हरकत मे आता जा रहा था. वो मेरे मुँह मे फूलने लगा. मैं और तेज़ी
से उसके लिंग पर अपना मुँह चलाने लगी. कुच्छ ही देर मे लिंग फिर से
पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया था. वापस उसे योनि मे लेने की सोच
कर ही झुरजुरी सी आ रही थी. योनि का तो बुरा हाल था.