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Guest
ज़ाकिया को याद आने लगा कि कैसे उस रात वकास के लौड़े ने उसकी चूत के अंग अंग में हलचल मचाई थी |
वकास के लौड़े में ऐसी सख्ती थी जिसका ज़ाकिया ने कभी अकरम के लंड में तसव्वुर भी ना किया था |
ज़ाकिया की आँखें बंद थीं और उसे अपनी बंद आँखों में अपना भाई अपने सामने नंगा हो कर खड़ा नज़र आ रहा था |
ज़ाकिया को यूं महसूस हो रहा था जैसे वकास का खालिस मरदाना हिस्सा उसे अपनी तरफ खीच रहा है कि वो आगे बढे और वकास के मज़बूत और मोटे लंड से अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझा ले |
लेकिन इससे पहले कि ज़ाकिया आगे बढती वकास का तसव्वुर उसकी निगाहों के सामने से एक दम गायब हो गया |
वकास के बारे में सोचते सोचते ज़ाकिया का एक हाथ खुद बाखुद उसकी शलवार के अन्दर चला गया |
ज़ाकिया बिस्तर पर पड़ी सिसक रही थी , तडप रही थी और अपनी चूत से खेल रही थी |
ज़ाकिया के जिस्म में एक ऐसी आग थी , जिससे ज़ाकिया का बदन पिघलता जा रहा था | ज़ाकिया का दिल चाह रहा था कि वकास इसी वक़्त उसके पास हो और वो ज़ाकिया के जिंसी हिस्सों को छुए , उन्हें चूसे , उन्हें मसले और उसे चोदे |
ज़ाकिया के जिस्म का हर हिस्सा जवानी के महकते रस से भरा हुआ था | उसकी छातियाँ जैसे तन कर अकड़ गई थी और ऐसे लगता था कि शिद्दत– ए–जज़्बात से फट जाएँगी |
ज़ाकिया के दिमाग में बस अपने भाई वकास की शकल ही आ जा रही थी और साथ ही उसका हाथ कभी उसके मम्मो पर आ जाता तो कभी पेट से होता हुआ शलवार के अन्दर चला जाता |
ज़ाकिया की चूत अब तक ना जाने कितनी ही बार अपने ही पानी से से भीग चुकी थी |
ज़ाकिया ने अपनी चूत से खेलते हुए अपनी शलवार का नाडा खोला |
और अपनी शलवार को आहिस्ता से अपनी टांगों से थोडा निचे किया जिससे उसकी मोटी टांगें नंगी हो गईं | अब ज़ाकिया थोड़ी साइड पर लेटी हुई थी और इस तरह लेटकर वो अकरम और वकास की चुदाई की तुलना करने लगी |
कि कैसे अकरम उससे चुदाई के वक़्त उसके जिंसी जज़्बात को भड़काता , उनको आंच देता मगर फिर वो ज़ाकिया की चूत की तसल्ली करने से पहले ही फ़ारिग हो जाता |
मगर इसके उलट वकास में कुछ अलग ही था | आज पहली बार ज़ाकिया यह महसूस करने पर मजबूर हो गई कि वकास सही मायनों में उसके लिए एक ज़बरदस्त जिंसी कशिश रखता है |
अगर चे कि ज़ाकिया ने अकरम से शादी मजबूरी में की थी लेकिन हर लड़की की तरह ज़ाकिया ने भी अपनी चढ़ती जवानी में अपने ज़ेहन और दिल के एक कोने में अपना एक आइडल बनाया था |
आज ज़ाकिया को समझ आई कि जिस आइडियल को वो आज तक अपने दिल के कोने में बैठा कर उसकी “पूजा” करती रही और उसे बाहर तलाश करती रही | उसके ख्वाबों का वो शह्जादा तो उसके भाई की शकल में हमेशा से ही उसके सामने ही था |
वकास ने एक शह्जादे की तरह आकर ज़ाकिया की प्यासी और बंजर चूत को चोद कर ना सिर्फ ज़ाकिया को असल चुदाई का मज़ा दिया बल्कि अपनी बहन को उसकी बेवगी की क़ैद से भी निजात दिलाई थी |
वकास के लौड़े में ऐसी सख्ती थी जिसका ज़ाकिया ने कभी अकरम के लंड में तसव्वुर भी ना किया था |
ज़ाकिया की आँखें बंद थीं और उसे अपनी बंद आँखों में अपना भाई अपने सामने नंगा हो कर खड़ा नज़र आ रहा था |
ज़ाकिया को यूं महसूस हो रहा था जैसे वकास का खालिस मरदाना हिस्सा उसे अपनी तरफ खीच रहा है कि वो आगे बढे और वकास के मज़बूत और मोटे लंड से अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझा ले |
लेकिन इससे पहले कि ज़ाकिया आगे बढती वकास का तसव्वुर उसकी निगाहों के सामने से एक दम गायब हो गया |
वकास के बारे में सोचते सोचते ज़ाकिया का एक हाथ खुद बाखुद उसकी शलवार के अन्दर चला गया |
ज़ाकिया बिस्तर पर पड़ी सिसक रही थी , तडप रही थी और अपनी चूत से खेल रही थी |
ज़ाकिया के जिस्म में एक ऐसी आग थी , जिससे ज़ाकिया का बदन पिघलता जा रहा था | ज़ाकिया का दिल चाह रहा था कि वकास इसी वक़्त उसके पास हो और वो ज़ाकिया के जिंसी हिस्सों को छुए , उन्हें चूसे , उन्हें मसले और उसे चोदे |
ज़ाकिया के जिस्म का हर हिस्सा जवानी के महकते रस से भरा हुआ था | उसकी छातियाँ जैसे तन कर अकड़ गई थी और ऐसे लगता था कि शिद्दत– ए–जज़्बात से फट जाएँगी |
ज़ाकिया के दिमाग में बस अपने भाई वकास की शकल ही आ जा रही थी और साथ ही उसका हाथ कभी उसके मम्मो पर आ जाता तो कभी पेट से होता हुआ शलवार के अन्दर चला जाता |
ज़ाकिया की चूत अब तक ना जाने कितनी ही बार अपने ही पानी से से भीग चुकी थी |
ज़ाकिया ने अपनी चूत से खेलते हुए अपनी शलवार का नाडा खोला |
और अपनी शलवार को आहिस्ता से अपनी टांगों से थोडा निचे किया जिससे उसकी मोटी टांगें नंगी हो गईं | अब ज़ाकिया थोड़ी साइड पर लेटी हुई थी और इस तरह लेटकर वो अकरम और वकास की चुदाई की तुलना करने लगी |
कि कैसे अकरम उससे चुदाई के वक़्त उसके जिंसी जज़्बात को भड़काता , उनको आंच देता मगर फिर वो ज़ाकिया की चूत की तसल्ली करने से पहले ही फ़ारिग हो जाता |
मगर इसके उलट वकास में कुछ अलग ही था | आज पहली बार ज़ाकिया यह महसूस करने पर मजबूर हो गई कि वकास सही मायनों में उसके लिए एक ज़बरदस्त जिंसी कशिश रखता है |
अगर चे कि ज़ाकिया ने अकरम से शादी मजबूरी में की थी लेकिन हर लड़की की तरह ज़ाकिया ने भी अपनी चढ़ती जवानी में अपने ज़ेहन और दिल के एक कोने में अपना एक आइडल बनाया था |
आज ज़ाकिया को समझ आई कि जिस आइडियल को वो आज तक अपने दिल के कोने में बैठा कर उसकी “पूजा” करती रही और उसे बाहर तलाश करती रही | उसके ख्वाबों का वो शह्जादा तो उसके भाई की शकल में हमेशा से ही उसके सामने ही था |
वकास ने एक शह्जादे की तरह आकर ज़ाकिया की प्यासी और बंजर चूत को चोद कर ना सिर्फ ज़ाकिया को असल चुदाई का मज़ा दिया बल्कि अपनी बहन को उसकी बेवगी की क़ैद से भी निजात दिलाई थी |