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मजबूरी का फैसला complete

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वकास और ज़ाकिया पर यह खबर बिजली बन कर गिरी | वो दोनों भाई बहन फ़ौरन पाकिस्तान पहुँच गए | उनके लाहौर वाले घर में वकास और ज़ाकिया की सारी बहने और उनके बाकी रिश्तेदार आये हुए थे |

माँ बाप का कफ़न दफ़न करने के बाद वकास तकरीबन एक महीना पाकिस्तान रहा और अपनी जो थोड़ी बहुत जायदाद थी उसको बेच दिया |

अक्टूबर में वकास ने अमरीका वापसी का इरादा किया तो ज़ाकिया ने उसे बताया कि वो अभी अपनी बहनों के पास कुछ देर मजीद ठहरना चाहती है | इसीलिए ज़ाकिया को पाकिस्तान छोड़ कर वकास अकेला न्यूयॉर्क चला आया |

न्यूयॉर्क पहुँच कर उसने ज़ाकिया की अमेरिकन सिटीजनशिप की एप्लीकेशन जमा करवा दी | कुछ टाइम बाद ज़ाकिया की फिंगर प्रिंट्स की डेट का लैटर वकास को मिला | तो वकास ने ज़ाकिया को वापिस न्यूयॉर्क आने को कहा |

दिसम्बर के आखरी हफ्ते में ज़ाकिया का अमेरिकन सिटीजनशिप का इंटरव्यू हो गया जोकि ज़ाकिया ने पास कर लिया |

अब ज़ाकिया का दिल था कि वो जल्दी से अपना अमेरिकन पासपोर्ट बनवा कर पाकिस्तान चली जाए | मगर वकास का दिल कुछ और ही चाह रहा था |

वो दिसम्बर की 18 तारीख थी | वकास शाम को काम से वापिस आया तो देखा कि उसकी बहन ज़ाकिया अपने कमरे में अपने बिस्तर पर बैठी हुई थी |

वकास की नजर बहन के चहरे पर पड़ी तो उसे ज़ाकिया शक्ल से थकी थकी सी लगी |

वकास : ज़ाकिया क्या बात है, बहुत थकी हुई लग रही हो , तबीअत तो ठीक है |

ज़ाकिया : कुछ नहीं भाई , मैं ठीक हूँ |

असल में आज ही ज़ाकिया की माहवारी स्टार्ट हुई थी | माहवारी के स्टार्ट के पहले एक दो दिन ज़ाकिया को पिठ में बहुत शदाद किस्म का दर्द होता और साथ ही उसे काफी हैवी ब्लीडिंग होती थी | जिसकी वजह से उसे पीरियड के पहले दिन काफी थकावट भी होती थी |

अब ज़ाकिया इन सब बातों का इज्हार अपने भाई से तो करने से रही | इसीलिए वो “कुछ नहीं भाई, मैं ठीक हूँ” के अलावा भाई को “कह” भी क्या सकती थी |

वकास बहन का जवाब सुनकर खामोश हो गया | इतनी देर में ज़ाकिया ने बिस्तर पर बैठे बैठे अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं |

वकास की नज़र बहन की खुली हुई टांगों के दरमियाँ पड़ी तो उसे बहन की शलवार पर गांड के करीब “खून” के चंद “धब्बे” लगे नज़र आए |

“ज़ाकिया तुम कहती हो कि तुम ठीक हो, जबकि तुम्हारे जिस्म से तो “खून” निकल रहा है , लगता है कि तुम्हें कोई चोट वोट लगी है , चलो मैं तुम्हें किसी डॉक्टर के पास लेकर जाता हूँ”, वकास ने घबराए अंदाज़ में बहन को मुखातिब करते हुए कहा |

अपने भाई के मुंह से अपनी शलवार पर लगे खून का सुन कर ज़ाकिया का तो जैसे “रंग” ही “उड़” गया |

वो फौरन समझ गई कि उसका भाई जिस चीज़ को खून देख रहा है असल में वो उसकी माह्बारी ब्लीडिंग के धब्बे हैं |

असल में जब तक अकरम जिंदा था तब तक ज़ाकिया को कभी पैड्स की कमी का मसला नहीं हुआ था | चूँकि अकरम को ज़ाकिया की पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ें मसलन हेयर रेमोविंग क्रीम और पैड्स वगैरा हर बार खरीद कर लाना अच्छा नहीं लगता था |

इसीलिए जब भी अकरम शापिंग के लिए जाता | वो ज़ाकिया के लिए चार ,पांच महीने के पैड्स और दूसरी चीज़ें खरीद कर उनको घर में स्टॉक कर देता था |

और आज जब दोपहर को ज़ाकिया के पीरियड्स स्टार्ट हुए तो ज़ाकिया ने पैड्स लगाना चाहा तो उसे पता चला कि ना सिर्फ अकरम के लाये हुए पैड्स ख़त्म हो चुके थे बल्कि ज़ाकिया खुद भी पाकिस्तान से आते हुए जल्दी में अपने पैड्स साथ लेना भूल गई |

ज़ाकिया को इस बात की बहुत परेशानी हुई | उसने कॉटन को एक पुराने कपडे में रख कर उसे अपने अंडरवेअर में रखा तो था मगर उसे नहीं मालूम था कि यह कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोक नहीं सकेगा |

अब उसका भाई उसके सामने खड़ा ना सिर्फ उसकी शलवार पर लगे हुए “खून” को देख चूका था बल्कि वो उसे नासमझी में किसी डॉक्टर के पास ले जाने की जिद भी कर रहा था | ज़ाकिया को समझ नहीं आ रही थी कि वो कैसे बिस्तर से उठ कर बाथरूम जाए और अपने जिस्म को साफ़ करे |

ज़ाकिया : भाई मैं ठीक हूँ आप फिक्र ना करें |

वकास : अगर मैं तुम्हारी फिक्र नहीं करूँगा तो और कौन करेगा , चलो उठो डॉक्टर के पास चलते हैं |

ज़ाकिया : भाई यह डॉक्टर के पास जाने वाला मसला नहीं , आप बाहर जाओ मैं कपडे चेंज कर लूं |

वकास : अगर तुम्हें कोई चोट नहीं लगी तो फिर यह खून कैसे लगा , तुम क्यों नही मुझे खुल कर बताती | वकास ने एक बच्चे की तरह जिद करते हुए पुछा |

“मेरे बुद्दू भाई, मैं आप को कैसे समझाऊँ , मेरी शलवार पर लगा खून किसी ज़ख्म का नहीं , बल्कि औरतों को जो हर महीने माहवारी होती है, यह उसका दाग है” वकास की ज़िद के आगे हार मानते , ज़ाकिया ना चाहते हुए भी आखिर बोली और जल्दी से उठ कर बाथरूम में घुस गई |

वकास को अपनी बहन के मुंह से यह बात सुनने की उम्मीद नहीं थी | इसीलिए वो यह बात सुन कर उधर ही एक बुत की मानिद “हक्का बक्का” खड़ा बहन को बाथरूम की तरफ जाता देखता रहा |

वकास ने शायद कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि उसकी बहन अपनी डेट्स के बारे में उससे कहेगी |

बाथरूम में जाते ही ज़ाकिया ने अपनी शलवार उतारी तो देखा कि कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोकने में नकारा हो गया थे , जिसका नतीजा यह निकला कि “खून” से उसकी सारी शलवार और टांगें भर गईं थी |

ज़ाकिया ने फौरन ही अपनी टांगें और चूत को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ़ किया और नया कॉटन और एक पुराने टॉवल का छोटा सा टुकड़ा अपनी चूत के उपर रख कर दुबार नया अंडरवेअर और शलवार पहन ली |

 
ज़ाकिया बाथरूम में खड़ी अपने और भाई के दरमियाँ कमरे में होनी वाली गुफ्तगू के बारे में सोचने लगी |

उसने भाई की जिद्द से मजबूर होकर अपनी माहवारी की बात तो उसे बता दी थी लेकिन अब ज़ाकिया को यह बात सोच कर भी अपने आप से शर्म आने लगी थी |

ज़ाकिया जानती थी कि अपनी हैवी ब्लीडिंग को रोकने के लिए उसे अब पैड्स की बहुत जरुरत है | मगर शर्म के मारे उसमें हौसला नहीं था कि वो भाई से कहती कि उसे स्टोर से पैड्स लेने जाना है |

ज़ाकिया बाथरूम से बाहर आई और भाई को खाना दिया | खाने से फारिग होकर वकास टीवी देखने में मशगुल था कि ज़ाकिया उसके पास आई और झिझकते हुए बोली |

ज़ाकिया : भाई मुझे किसी स्टोर पर ले चलो |

वकास : क्यूँ क्या लेना है वहां से?

ज़ाकिया : बस मुझे अपने लिए कुछ जरुरी चीज़ें लेनी हैं

वकास ज़ाकिया को साथ ले कर घर के करीब ही एक अमेरिकन स्टोर पर चला गया | स्टोर में दाखिल होते ही ज़ाकिया ने एक शौपिंग बास्केट हाथ में उठा ली |

एक तो ज़ाकिया इस स्टोर पर पहली बार आई थी | दूसरा उसकी इंग्लिश भी इतनी अच्छी नहीं थी | स्टोर के अन्दर लिखे हुए साइन को पड़कर यह जान सकती कि कौन से एस्त्ले नंबर में पीरियड्स के पैड्स रखे हुए हैं | ज़ाकिया स्टोर में दाखिल हो कर हर एस्त्ले में निगाह दौड़ाने लगी |

वकास : मुझे बताओ तुम ने क्या लेना है, मैं वो चीज़ ढूँढ़ने में तुम्हारी मदद करता हूँ |

“कोई खास नहीं भाई , मैं खुद ही ढून्ढ लेती हूँ”, ज़ाकिया ने भाई को टालते हुए कहा |

“अच्छा मैं बाथरूम से हो कर आता हूँ” , कहता हुआ वकास स्टोर के एक कोने में बने रेस्ट रूम की तरफ चला गया |

भाई को बाथरूम की तरफ जाता देखकर ज़ाकिया की जान में जान आई | वो तेजी से सब एस्त्ले में घुमने लगी और आखिरकार स्टोर के लास्ट एस्त्ले में ज़ाकिया को पैड्स रखे नज़र आ ही गये |

उस सेक्शन में डिफरेंट साइज़स और स्टाइल्स के पैड्स मुक्तलिफ़ पैकेट्स में लपेटे पड़े हुए थे |

ज़ाकिया ने एक पैकेट उठाया और उसे गौर से देखने लगी | ज़ाकिया अभी इस सोच बिचार में थी कि कौन से पैड्स खरीदे कि उसे भाई की आवाज़ कानो में पड़ी |

“ज़ाकिया तुम क्या देख रही हो” ,वकास ने उसके हाथ में पकड़ा पैकेट देख कर पूछा |

ज़ाकिया की तो जान ही निकल गई | उसके भाई ने उसे अपने हाथ में पैड्स का पैकेट पकडे रंगे हाथों पकड लिया था | इसीलिए अब वो भाई से कोई झूठ नहीं बोल सकती थी |

“मुझे भाई अपनी डेट्स के पैड्स लेने हैं” , ज़ाकिया अपनी नज़रें झुकाए शर्माते हुए बोली |

वकास बहन की यह बात सुन कर झेंप सा गया | उसने ज़ाकिया के हाथ में पैड्स का पैकेट देखा तो वो रेगुलर पैड्स की बजाए टेम्पों का पैकेट था |

वकास को अपनी अमेरिकन बीवी के साथ रहते हुए लेडीज के पैड्स के बारे में इतनी तो इनफार्मेशन हो गई थी कि टेम्पों को ज्यादातर अमेरिकन लेडीज ही इस्तेमाल करती हैं |

क्योंकि टेम्पों को चूत के ऊपर रखने की बजाए अमेरिकन औरतें उसे अपनी चूत के अन्दर डालती हैं | जिसकी वजह यह होती है कि इस तरह टेम्पों माहवारी के दौरान चूत से निकलने वाला सारा “खून” चूस लेता है |

वकास को ज़ाकिया के चेहरे के तेवर बता रहे थे कि उसकी बहन ने इस किसम के पैड्स इससे पहले नहीं देखे और उसको अब समझ नहीं आ रही थी कि वो यह पैड्स ले जा ना ले |

वकास ने बहन को इस शशोपंज में देखा तो उसने अचानक काउंटर पर पड़ा एक “आल्वेज मैक्स ओवरनाइट एक्स्ट्रा हैवी फ्लो” वाला पैकेट उठाया और उसे अपनी बहन के हाथ में थमाते हुए बोला ,“वो रख दो यह अच्छा है” और यह कहता अपनी बहन को “हैरान परेशान” करता चेकआउट काउंटर की तरफ बढ़ गया |

ज़ाकिया को अपने भाई की इस हरकत से बहुत शर्म आई | मगर वो अब कर भी क्या सकती थी | भाई के अलावा अब इधर कौन था जिसके साथ जाकर वो अपनी पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ें खरीदती |

ज़ाकिया को पता था स्टोर के क्लोजिंग टाइम होने की वजह से चेकआउट काउंटर्स पर रश था और इसी वजह से वकास उससे पहले ही लाइन में जाकर खड़ा हो कर उसके इंतज़ार में है |

इसीलिए उसने साथ वाले एस्त्ले से अपनी हेयर रेमोविंग क्रीम और एक दो और चीज़ें उठाकर बास्केट में रखीं और लाइन में लगे वकास से टैक्सी की चाभी लेकर भाई को बास्केट दी और खुद बाहर टैक्सी में आ कर बैठ गई |

जब वकास ने काउंटर पर खड़ी लड़की को सब चीज़ें स्कैन करने के लिए दीं तो वकास अपनी बहन की हेयर रेमोविंग क्रीम को देख कर दिल ही दिल में खुश हुआ |

वो समझ गया कि उसकी बहन ने अपने पीरियड्स के बाद अपनी चूत को निखारने और सवारने का पूरा इन्तिज़ाम कर लिया है |

वकास को उस लम्हे यूँ महसूस हुआ जैसे शलवार में छुपी उसकी बहन की चूत उसके पैंट में बंधे लंड के कान में सरगोशी करते गुनगुना रही हो,

“सजना है मुझे, सजना के लिए” |

 
यह सोच आते ही वकास बेईख्तियर खुद ही हंस पड़ा जिस पर केशियर लड़की उसे ऐसे देखने लगी जैसे वो कोई पागल हो |

वकास उस वक़्त वाकिया ही पागल हो रहा था | पेमेंट करते वक़्त वकास को यकीन नहीं आ रहा था कि आज एक सगा भाई अपनी सगी बहन की हेयर रेमोविंग क्रीम और अपनी बहन के पीरियड्स के पैड्स खुद ही शौपिंग कर रहा है |

वकास अपनी किस्मत पर रक्श करता हुआ टैक्सी में आन बैठा और दोनों बहन भाई एक दुसरे से कोई बात किए बगैर घर चले आये |

एक हफ्ते बाद ज़ाकिया के पीरियड्स ख़त्म हो गये और वो “गुस्सल” करके “पाकसाफ” हो गई |

दिसम्बर 1994 का आखरी हफ्ता चल रहा था और न्यू इयर नाईट करीब आ रही थी |

पूरे अमेरिका में आम तौर पर और न्यूयॉर्क सिटी में ख़ास तौर पर सब टैक्सी ड्राइवर्स पूरे साल न्यू इयर का इंतज़ार करते हैं |

क्योंकि टैक्सी ड्राईवर इस एक रात में ही पूरे हफ्ते की कमाई के बराबर पैसे बनाते हैं |

लेकिन इस बार अगर किसी को इस रात का शिद्दत से इंतज़ार था तो वो वकास था |

वकास आने वाली न्यू इयर की रात को टैक्सी चला कर नहीं बल्कि वो इस दफा न्यू इयर की रात को अपनी बहन ज़ाकिया के साथ लॉस वेगास नेवडा में जाकर सेलिब्रेट करना चाहता था |

वकास जब अमेरिका आया था तो उसने लॉस वेगास के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था |

जिस तरह पाकिस्तान में लाहौर के मातुल्क यह बात कही जाती है कि ,

“जिहने लाहौर नहीं तकया ओ जामिया ही नई”

इसी तरह वकास को उसके वो दोस्त जो वेगास का विजिट कर चुके थे , अक्सर कहते थे कि अगर तुमने अमेरिका में रहते हुए वेगास नहीं देखा तो फिर तुमने अमेरिका नहीं देखा |

लॉस वेगास को “सिन सिटी “गुनाहों का शहर” भी कहा जाता है |

लॉस वेगास के बारे में मशहूर है कि

“WHAT HAPPENS IN VEGAS STES IN VEGAS”

वकास ने अपनी बहन ज़ाकिया को बताए बिना ही लॉस वेगास का प्रोग्राम बनाकर जहाज़ की टिकट्स खरीद लीं | मगर उसने होटल की बुकिंग ना करवाई |

वकास का इरादा था कि लॉस वेगास पहुँच कर उधर ही वो कोई होटल देख लेगा |

लॉस वेगास जाने से एक दिन पहले वकास ने ज़ाकिया को अपने प्रोग्राम के बारे में बताया |

ज़ाकिया भी जब से अमेरिका आई थी उसने भी कभी न्यूयॉर्क से बाहर का सफर नहीं किया था | इसीलिए ज़ाकिया भी भाई का प्रोग्राम सुन कार काफी खुश हुई |

 
1994 और 1995 की आखरी रात

31 दिसम्बर की सुबह दोनों बहन भाई फ्लाइट से 5 घंटे का सफर करके लॉस वेगास पहुँच गए |

एअरपोर्ट से निकल कर दोनों ने टैक्सी ली और सब से पहले वो टैक्सी ड्राईवर की मदद से किसी होटल की तलाश में निकले |

लॉस वेगास में न्यू इयर को सेलिब्रेट करने वालो का काफी रश होने की वजह से एक तो बहुत से होटल सोल्ड आउट हो गये थे और जिनमें कोई रूम मिल भी रहा था | उसका रेट आसमान से बातें कर रहा था |

वकास को एक डिसेंट होटल में कोई रूम नहीं मिला तो उसने काफी देर के बाद तंग आकर एक लो क्लास वाले गंदे से मोटल में ही रात बसर करने का इरादा कर लिया |

वकास ने एक रूम लिया जिसमें दो अलग अलग बेड लगे हुए थे |

दिन के 3 बजे अपने रूम में चेकइन होने के बाद दोनों बहन भाई ने शोवर लिया और फ्रेश होने के बाद लेट दोपहर का खाना खाने निकले |

लॉस वेगास की सड़क पर चलते हुए वकास ने महसूस किया कि चूँकि उसकी बहन ज़ाकिया ने शलवार कमीज़ पहनी हुई है | इस वजह से लोग साथ गुजरते हुए उसको थोडा अजीब अजीब नज़रों से देख रहे हैं |

एक इंडियन रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद दोनों बहन भाई लॉस वेगास के एक मॉल में चले गये तो वकास को एक ड्रेस नज़र आई |

वकास : ज़ाकिया यह ड्रेस चेक करो, कैसी है ?

ज़ाकिया ने उस ड्रेस की तरफ देखा तो वो एक लो कट शर्ट और उसके साथ एक लॉन्ग स्कर्ट थी |

ज़ाकिया : अच्छा ड्रेस है भाई , मगर आपने किस के लिए लेना है ?

वकास : तुम्हारे लिए |

ज़ाकिया : मेरे लिए क्यों? मैं तो इस तरह की ड्रेस नही पहनती हूँ भाई |

वकास : मुझे पता है , लेकिन मैं चाहता हूँ कि आज शाम तुम यह ड्रेस पहनो |

ज़ाकिया : मगर क्यों भाई ? मेरी शलवार कमीज़ में क्या खराबी है ?

वकास : खराबी कुछ नहीं, लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम शलवार कमीज़ की जगह आज यह पहनो |

“मगर मुझे कुछ वजह तो बताओ भाई”, ज़ाकिया ने जिद्द करते हुए भाई से पूछा |

“ज़ाकिया तुमने गौर किया कि जब हम सडक पर चल रहे थे तो लोग कैसे गौर से तुम्हे देख रहे थे , मुझे पता है कि न्यू इयर की रात को हर बंदा ड्रंक होता है, इसीलिए मैं नहीं चाहता कि कोई शराबी तुम्हें शलवार कमीज़ में देख कर तुमसे किसी किसम की बद्तमीजी करे” वकास ने बहन को समझाया |

अपने भाई की बात सुन कर ज़ाकिया ने थोड़ी देर सोचा और फिर अपने साइज़ का ड्रेस हेंगर से उठा कर स्टोर में बने फिटिंग रूम में ड्रेस को ट्रई किया और वो फिर दोनों बहन भाई ड्रेस खरीद कर वापिस अपने रूम में आ गये |

रूम में आने के बाद वकास ने ज़ाकिया से कहा कि वो थोड़ा आराम कर ले और फिर शाम को वो दुबारा बाहर घुमने निकलेंगे |

लॉस वेगास में अभी शाम के 6 बजे थे | मगर वो लोग न्यूयॉर्क के टाइम का आदि थे और न्यूयॉर्क का टाइम वेगास से 3 घंटे आगे होने की वजह से ज़ाकिया और वकास को नींद आ रही थी | इसीलिए वो थोडा सोना चाहते थे |

लॉस वेगास के टाइम के मुताबिक रात के 8 बजे दोनों बहन भाई उठे और बाहर जाने के लिए तैयार होने लगे |

ज़ाकिया ने बाथरूम में जाकर अपना नया ड्रेस पहना और तैयार हो कर जब बाहर आई तो वकास ने अपनी बहन को पहली बार एक वेस्टर्न ड्रेस में देखा तो देखता ही रह गया |

 
आज ज़ाकिया ने अपने सीने को दुप्पटे से नही ढका हुआ था बल्कि आज दुपट्टे की बजाए एक छोटे से कपडे की पट्टी उसकी बाँहों में झूल रही थी | जिसकी वजह से वकास उसकी बड़ी बड़ी चूचियां का खुला नज़ारा कर सकता था |

ज़ाकिया ने अपने बाल भी आज खुले रखे थे जो उसकी खूबसूरती में और निखार पैदा कर रहे थे |

“भाई मैं इन कपड़ों में कैसी लग रही हूँ”, ज़ाकिया ने एक अदा से अपने भाई को देखते हुए पूछा |

वकास: ज़ाकिया तुम बहुत्त्त्त ही प्यारी लग रही हो |

ज़ाकिया: क्या भाई, आप तो बस मेरे सब कपड़ो की वैसे ही तारीफ करते रहते हैं |

“मैं वैसे ही तुम्हारी तारीफ नहीं करता, तुम वाकिया ही बहुत प्यारी लग रही हो”, वकास ने अपनी बहन के बदन पर ऊपर से निचे एक भरपूर नज़र डालते हुए कहा |

वकास का लंड अपनी बहन की जवानी की मस्ती का मज़ा चखने के लिए बेक़रार होने लगा |

दोनों बहन भाई रात के 10 बजे रूम से बाहर निकले और न्यू इयर नाईट को वेगास की रौनक देखने चल पड़े |

वेगास को रात में देखने का अपना ही एक मज़ा है | लॉस वेगास में सिर्फ जुआ ही नहीं होता बल्कि इधर बने हुए मुक्तालफ़ होटल्स भी देखने लायक हैं | हर होटल एक दुसरे से डिफरेंट स्टाइल में बनाया और सजाया गया है |

वेगास के होटल्स और वेगास की सड़कों पर न्यू इयर की सेलिब्रेशन फुल जोरों पर थी |

लड़कियों ने छोटे छोटे ड्रेस पहने हुए थे | जिनमें से उनके आधे से ज्यादा मम्मे और आधी से ज्यादा नंगी टांगों का नज़ारा देखने को मिलता था |

शराब के नशे में धुत काफी कपल्स हर कोने में एक दुसरे में लिपटे हुए किस्सस में मशरूफ थे |

ज़ाकिया ने महसूस किया कि आते जाते मर्दों की भूखी नज़रें उसका भी पीछा कर रही हैं |

ज़ाकिया जानती थी कि उनकी नज़रों में क्या भूख और हवस है | मगर वो इन सब नज़रों से बे परवाह हो कर अपने भाई के साथ चलती रही |

दोनों बहन भाई काफी देर इधर उधर घुमते रहे और फिर आखिर कर रात के 12 बज गए |

रात के 12 बजने की देर थी कि वेगास की फिजा आतिशबाज़ी और हैप्पी न्यू इयर की आवाज़ों से गूँज उठी |

वकास और ज़ाकिया के इर्द गिर्द लड़के लड़कियां एक दुसरे के मुंह में मुंह डाले एक दुसरे को चूमने चाटने में लगे हुए थे |

दोनों बहन भाई के आस पास का माहौल बहुत गर्म हो गया था और इस का असर उन दोनों पर भी पड़ने लगा |

वकास ने सब लोगो को एक दुसरे से चिपके होते देखा तो उससे भी रहा ना गया और उसने आगे बढ़ कर जकिया को अपनी बाँहों में भर लिया | जिसकी वजह से दोनों के जिस्म आपस में चिपक गये |

“हैप्पी न्यू इयर एंड हैप्पी 26 बर्थ डे मेरी बहन” वकास ने ज़ाकिया के जिस्म को अपनी बाँहों की ग्रिफ्त में घेरते हुए कहा |

ज़ाकिया जो अपने भाई की उसे यूं अपने साथ एकदम चिपक जाने से हैरान हो रही थी कि अपने भाई की कही हुई बात को सुनकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया |

ज़ाकिया जनवरी ,1 को पैदा हुई थी और इसीलिए यूं ही रात के 12.01 मिनट हुए तो जनवरी फर्स्ट स्टार्ट हो गई जिस पर वकास ने अपनी बहन को न्यू इयर के साथ साथ उसकी सालगिरह की मुबारक भी दे दी |

ज़ाकिया को अपनी सालगिरह कुछ याद नही थी क्योंकि बचपन से ले कर जवानी तक गुरबत के दौर में जब कि घर में रोटी के लाले पड़े हों तो फिर सालगिरह मनाने के चोंचले नहीं होते |

और शादी के बाद भी अकरम ने ज़ाकिया की सालगिरह सेलिब्रेट करना तो दूर की बात, उसे सालगिरह वाले दिन कभी विश तक नहीं किया था |

इसीलिए ज़ाकिया को बहुत ख़ुशी हुई कि आज पहली बार किसी ने उसको ऐसे उसकी सालगिरह पर मुबारक दी थी |

ज़ाकिया : थैंक यु भाई, मगर आप को मेरी सालगिरह कैसे याद है |

वकास: क्योंकि तुम मुझे सब से प्यारी हो, इसीलिए मुझे याद नहीं होगी तो और किसे याद होगी मेरी बहन, मैंने इसीलिए लॉस वेगास आने का सोचा था कि इस तरह हम न्यू इयर और तुम्हारी सालगिरह इकट्ठे मना लेंगे |

ज़ाकिया भाई की बात सुनकर मस्त हो गई | उसकी बहन भी खुद बा खुद अपने भाई के जिस्म के गिर्द लिपट गई और वो एक दुसरे से मज़ीद चिमट गये |

थोड़ी देर वो दोनों एक दुसरे से इस तरह लिपटे एक दुसरे की गर्म सांसें सुनते रहे और उसके बाद ज़ाकिया ने भाई से वापिस मोटल जाने का कहा तो वो एक दुसरे से अलग हो कर मोटल की तरफ चल पड़े |

 
रास्ते में ज़ाकिया अपने भाई की प्यासी निगाहों का अपने जिस्म के हर हिस्से को टटोलते हुए महसूस कर रही थी | आज शयद लॉस वेगास के गर्म माहौल का असर था कि ज़ाकिया को अपने भाई के इस तरह अपने जिस्म को खोजना ना सिर्फ बुरा ना लगा बल्कि आज वो खुद भी शायद यह चाहती थी कि उसका भाई उसको देखे और वो अपने जिस्म को उसकी निगाहों के सामने ललचा कर उसकी बेक़रारी बढाती रहे |

मोटल के रूम में आते ही वकास बाथरूम घुस गया और ज़ाकिया अपने बिस्तर पर लेट कर भाई के बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करने लगी ताकि वकास के बाद बाथरूम में जाकर अपने कपडे चेंज कर सके |

वकास ने बाथरूम से बाहर आने में कुछ देर लगा दी तो ज़ाकिया जो दिनभर की थकी हुई थी वो बेड पर लेटी और थकान के मारे फौरन ही उसकी आँख लग गई | जिस वजह से वो अपने कपडे भी चेंज ना कर सकी |

थोड़ी देर बाद जब वकास बाथरूम से अपने कपडे चेंज कर के बाहर निकला तो उसने अपनी बहन को उसके बिस्तर पर सोते पाया |

वकास ने ज़ाकिया को डिस्टर्ब करना मुनासिब ना समझा और उसने ज़ाकिया के जिस्म पर बिस्तर की चादर दे दी |

वकास ने कमरे की लाइट ऑफ की मगर बाथरूम की लाइट ओन रहने दी | जिसकी वजह से कमरे में मामूली सी रौशनी थी | इसके बाद वकास भी अपने बेड पर लेट गया और थोड़ी देर में उसको भी नींद आ गई |

दोनों बहन भाई को सोते हुए थोड़ी देर ही गुजरी थी कि साथ वाले कमरे से “थक्क्क्कक थक्क्क “ की आवाज़ों ने दोनों बहन भाई को सोते से जगा दिया |

दोनों को पहले तो समझ नहीं आई कि साथ वाले कमरे में क्या हो रहा है | लेकिन फिर साथ वाले कमरे से “Haaaaaaa ohhhhhh do it, fuck meeee hardddddddddd,Thaaap Taaap” के साथ बेड की की “चीं चीं” की आवाज़ और बेड का जोर जोर से कमरे की दिवार से लगने की आवाजें भी वकास और ज़ाकिया के कानो में गूंजने लगी |

“yesssss Do meeeee harddd baby” साथ वाले कमरे से आती आवाजें सुन कर वकास को समझ आ गई कि कोई मर्द और औरत आपस में सेक्स कर रहे हैं |

न्यू इयर की रात और ऊपर से एक चीप मोटल में इस किसम की आवाजें तो एक आम सी बात थी |

लेकिन वकास को इस बात का अंदाज़ा दिन के वक़्त मोटल का रूम रेंट करते वक़्त ना हुआ कि इस घटिया मोटल में रात के वक़्त उसको इस किसम की सूरते-हाल का भी सामना करना पड सकता है कि साथ वाले कमरे से चुदाई की आवाजें उनके कमरे में भी सुनाई दे और वो भी उस वक़्त जब वो अपनी सगी बहन के साथ सो रहा हो |

वकास अपने दिल में दुआ मांगने लगा कि यह आवाजें सुन कर ज़ाकिया की आँख ना खुले और वो बराबर सोती रहे |

मगर इस के साथ ही वकास का लंड उसके पजामे में खड़ा हो गया और वकास चुदाई की आवाज़ सुन कर अपनी चादर के अन्दर ही आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड से खेलने लगा |

वकास तो अपने दिल में दुआ मांग रहा था मगर उसे यह इल्म नहीं था कि उसकी दुआ आज पूरी नहीं हुई थी |

क्योंकि साथ वाले कमरे से आती हुई आवाज़ों से ज़ाकिया भी अपनी नींद से उठ गई थी | लेकिन कमरे में कम रौशनी की वजह से दोनों बहन भाई को एक दुसरे के जागने का इल्म ना हुआ था |

ज़ाकिया बच्ची नहीं थी कि उसे अंदाज़ा ना होता कि साथ वाले कमरे में क्या खेल खेला जा रहा है |

ज़ाकिया ने भी यह “खेल” अपने मरहूम शोहर के साथ काफी दफा खेला था मगर ज़ाकिया और अकरम ने कभी चुदाई के वक़्त इस तरह शोर नहीं किया था | ना इससे पहले ज़ाकिया ने किसी और की चुदाई की आवाजें सुनी थी |

इसीलिए ज़ाकिया को यह आवाजें सुन कर अँधेरे में भी शर्म आने लगी कि वो अपने भाई के साथ एक ही कमरे में लेटे किसी और की चुदाई की आवाज़ों को सुनने पर मजबूर है |

ज़ाकिया ने भी बिस्तर पर लेटे लेटे अपना सर हल्का सा उठाया और अपने भाई के बेड की तरफ देखा तो उसे कमरे में कम रौशनी की वजह से भाई की चेहरा तो नज़र नहीं आया, जिससे वो अंदाज़ा लगा सकती कि उसका भाई सो रहा है कि नहीं |

लेकिन ज़ाकिया को जब अपने भाई के बिस्तर पर से किसी किस्म की आवाज़ सुनाई ना दी तो उसे यकीन हो गया कि उसका भाई सो रहा है |

वकास की तरह ज़ाकिया भी दुसरे कमरे से आती आवाजें सुन कर गर्म होने लगी और उसका भाई की तरह उसका हाथ भी बिस्तर की चादर के अन्दर से खुद बा खुद उसकी चूत पर चला गया |

ज़ाकिया ने अपने हाथ से अपनी तंग पेंटी को आहिस्ता से एक तरफ करके जब अपनी चूत को हाथ लगाया तो ज़ाकिया को महसूस हुआ कि उसकी चूत तो चुदाई की आवाज़ों के असर से ही पानी पानी हो रही थी |

चीप मोटल होने की वजह से मोटल की पुरानी और खस्ता हाल दीवारें एक रूम की आवाज़ को दुसरे रूम में जाने से रोकने में नाकाम थी | इसीलिए दोनों बहन भाई अपने अपने बिस्तर पर लेटे साथ वाले कमरे से आने वाली आवाजों को ना चाहते हुए भी सुनने पर मजबूर थे |

दुसरे कमरे में चंद लम्हों की खामोशी की बाद दोनों बहन भाई के कानो में एक औरत की आवाज़ पड़ी ,

“How YO Like My Motha Fucka Pussy NIGA”

यह आवाज़ और बोलने वालों का एक्सेंट सुन कर वाक्स को अंदाज़ा हो गया कि साथ वाले कमरे में शायद कोई अफ्रीकन अमेरिकन चुदाई में मशरूफ हैं और चौदाई के दौरान ही “सलंग” में आपस में बातें कर रहे हैं |

(सलंग एक ऐसी एक जुबां जो काले लोग अक्सर आपस में बातचीत करते हुए इस्तेमाल करते हैं, “सलंग” को आप “मुम्बो गम्बो” या “बैड इंग्लिश” भी कह सकते हैं)

“Yo motha fuckan pussy is tight, you fuckan whoooo… आवाज़ से लगा था कि काले ने अब काली की चूत में अपना लंड दुबारा डाल दिया है |

"Is it good NIGAAA….I told you it was nice and tight….Go head Plea…work dat dick…You own that motha-fucka pussy now…That's your pussy." काली ने भी जज़्बात में आते हुए कहा | थप थप की ज़ोरदार अवाजों के साथ काली भी अब पूरी आवाज़ में शोर मचा रही थी |

"Cum…..Cum…Motha-fucka…fuck me.. Cum in dat pussy Plea…take it… make

me your bhitch

"Cum…..Cum…. Motha-fucka…. Come in my Pussy."

"Agggghhhh…Agghhhhh…. Oh My God!!!" और लगता था कि अब काला भी चूत में फारिग हो गया था क्योंकि उसके बाद साथ वाले कमरे में फिर मुकम्मल ख़ामोशी छा गई |

 
इधर ज़ाकिया बिस्तर पर लेटे हुए साथ वाले कमरे से आती आवाज़ों को सुन कर अपने जवान जिस्म को भी तपते हुए महसूस कर रही थी | ज़ाकिया की चूत में जैसे एक आग सी जल उठी थी |

इससे पहले ज़ाकिया अक्सर अपनी जवानी की गर्मी को अपने हाथों से निकाल लेती थी | लेकिन आज अपने भाई के साथ एक कमरे में सोने की वजह से ज़ाकिया के दिल में खौफ था कि कहीं उसका भाई उसको अपनी चूत से खेलता हुआ देख ना ले | इसीलिए वो आज खुल कर अपनी फुद्दी में ऊँगली भी नहीं कर पा रही थी |

आज काफी टाइम के बाद ज़ाकिया की फुद्दी फुल तप रही थी | मगर ज़ाकिया को समझ नहीं आ रहा था कि फुद्दी की गर्मी को भाई की मौजूदगी में ठंडा करे भी तो कैसे?

यही सोचते सोचते ना जाने कब उसकी आँख दुबारा लग गई और वो अपनी प्यासी चूत की गर्मी भी ना निकाल पाई |

नींद के दौरान भी साथ वाले कमरे से आती सिसकियों की आवाजें ज़ाकिया के कानों में गूंज रहीं थी जिसकी वजह से उस रात कई बार ज़ाकिया की चूत काफी गीली होती रही |

उधर दूसरी तरफ वकास भी कुछ देर चादर के अन्दर अपने गर्म लंड से खेलता रहा मगर अपन लंड का पानी नहीं निकल पाया और फिर उसको भी नींद ने दुबारा घेर लिया और वो भी दुबारा सो गया |

रात का आखरी पहर था कि वकास पेशाब की वजह से नींद से दुबारा जाग उठा |

वकास बाथरूम से फारिग हो कर बाहर आया तो उसकी नज़र अपनी बहन के जिस्म पर पड़ी |

कमरे में बाथरूम से आने वाली हलकी रौशनी में वकास ने देखा कि उसकी बहन बहुत बेखबर सो रही है |

चादर ज़ाकिया के जिस्म से थोड़ी हटी हुई होने की वजह से ज़ाकिया के जिस्म का ऊपर वाला हिस्सा नंगा नज़र आ रहा था |

वकास आहिस्ता से चलता हुआ ज़ाकिया के बेड के नज़दीक आया और जोर जोर से “खर्राटे” लेती हुई अपनी बहन को सोते हुए गौर से देखने लगा |

वकास ने अपनी बहन को इस तरह सोते हुए पहली दफा देखा | इसीलिए उसको बहन का जिस्म इस हालत में अच्छा लगने लगा |

कमरे में खड़े खड़े बहन के बदन का नज़ारा करते वकास को नाजाने क्या सुझा कि वो जाकर अपनी बहन के करीब उसके बेड पर बैठा और अपनी बहन के जिस्म का नज़दीक से जायज़ा लेने लगा |

वकास को पता था कि ज़ाकिया जब सोती है तो “घोड़े बेच कर सोती है” और वो एक दफ़ा सो जाए तो फिर सुबह से पहले नहीं जागती |

इसीलिए वो बहन के नज़दीक बैठा और बिस्तर की चादर के अन्दर “ऊपर निचे “ होते हुए अपनी बहन के नीम नंगे जवान सीने का दीदार करता रहा |

वकास को ज़ाकिया के जिस्म के उपरी हिस्से का जायज़ा लेते थोड़ी ही देर गुजरी थी कि ज़ाकिया ने एक करवट ली तो उसके जिस्म पर पड़ी उसके बिस्तर की चादर उसके जिस्म के निचले हिस्से से थोड़ी सरक गई |

जिसकी वजह से ज़ाकिया की टांगें चादर से बाहर निकल कर उसके भाई की प्यासी निगाहों को अपना दीदार करवाने लगीं |

वकास ने देखा कि गहरी नींद में होने की वजह से ज़ाकिया का ड्रेस भी बेतरतीब हो कर उपर को उठ गया था जिस वजह से ज़ाकिया की गोश्त भरी पिंडलिया और नंगी होती हुई टांगें का नज़ारा आँखों को ठहरा देने वाला था |

वकास अपनी बहन ज़ाकिया की नंगी टांगों को देखकर दांग सा रह गया |

ज़ाकिया की राने निहायत गोरी थल थल करती इन्तहाई सेहतमंद और रेशमी थी जिन पर एक बाल भी ना था |

वकास ने अपनी बहन को इस हालत में देखा तो उसकी बांछे ही खिल गई | उसका लंड अभी तक कल की चुदाई की गर्मी की वजह से फुल गर्म था | वो अपनी बहन की नंगी टांगों को देख कर फुल तन गया |

वकास ने जो पजामा पहना हुआ था | उसकी लंड वाली जगह पर बटन लगे हुए थे | वकास के दिल में ना जाने क्या सूझी कि उसने पाजामे के बटन को खोल कर अपना लंड जो कि फुल खड़ा हुआ था , निकाला और अपनी बहन के बिस्तर पर बैठ कर अपनी बहन की गुदाज जिस्म को देखते हुए हलके हलके अपनी मुठ लगाने लगा |

अपने लंड से खेलते हुए वकास अभी बहन के कूल्हों का, गोलाईयां लिए हुए गोल और मोटी मोटी सख्त रानों को देखकर ही बेकरार हो रहा था | मगर वो शायद यह नहीं जानता था कि एक और झटका उसके मुन्तजिर है |

 
ज़ाकिया ने लेटे हुए एकदम दुबारा करवट ली तो उसके जिस्म पर पड़ी चादर उसके जिस्म से स्लिप हो कमरे के फर्श पर जा गिरी |

दुसरे ही लम्हे ज़ाकिया ने अपनी टांगें थोड़ी समेटी तो ज़ाकिया का ड्रेस और ऊपर हो कर उठ गया | जिसकी वजह से ज़ाकिया की पैंटी और उसमें फंसी हुई उसकी गर्म चूत उसके भाई के सामने अपने पूरे आबो ताब से नुमायाँ हो गई |

यह नज़ारा देख कर वकास हक्का बक्का रह गया | उसका मुंह हैरत से खुल गया और वो अपने लंड की मुठ मारना भी भूल गया |

वकास की नज़र वाकिया ही अपनी बहन के शबाब को यूं बेनकाब होता देख कर पथरा गई थी |

वकास ने देखा कि ज़ाकिया की पैंटी उसकी चूत की जगह से बहुत गीली हो रही है | बहन की गीली पैंटी को देखकर वकास पहले तो यह समझा कि शायद छोटे बच्चों की तरह उसकी बहन ज़ाकिया को भी रात में सोते वक़्त बिस्तर पर ही पेशाब करने की बीमारी है |

लेकिन जब वकास ने गौर किया तो उसको ज़ाकिया की गांड के सिर्फ निचे वाली जगह ही थोड़ी गीली थी इसके इलावा बिस्तर की चादर किसी भी जगह से गीली नज़र ना आई |

इस पर वकास समझ गया कि उसकी बहन की चूत पेशाब की वजह से नहीं बल्कि कालों की चुदाई की आवाजों के असर से गीली होती रही है |

वकास दम बा खुद एक बुत की तरह चुपचाप बैठा अपनी बहन की चूत वाली जगह पर नजरें जमाए देखता रहा |

ज़ाकिया की पैंटी में उसकी मक्खन मलाई जैसी गोरी चिट्टी चुत साफ़ नज़र आ रही थी |

ज़ाकिया की पैंटी के दोनों तरफ डबल रोटी की तरह फूली हुई उसकी चूत के लिप्स और सफ़ेद भारी और गोल गांड पर कसी हुई पैंटी को देख कर वकास की बर्दाशत जवाब देने लगी |

बहन की चूत को इस तरह पैंटी में नुमायाँ देखते हुए वकास को ऐसे लगा | जैसे उसकी बहन की चूत उससे कह रही हो कि भाई जान,

“मेरा गोरा बदन कसा कसा हुआ

विच रेशम दे रेशम है फसया हुआ”

वकास अपनी बहन के कसे हुए जवान बदन और बहन की रेशम जैसी नर्म मुलायम फुद्दी का मज़ा लेना चाहता था |

इसी लम्हे उसके दिल ने उसको एक दफा समझाने की कोशिश की कि वो आज जो कुछ भी देख और कर रहा है वो गलत है , जो भी हो ज़ाकिया है तो उसकी सगी बहन, इसलिए वकास को उधर से हट जाना चाहिए |

लेकिन वकास का लंड आज अपनी बहन की पैंटी में छुपी हुई चूत का दीदार करने के लिए मचला जा रहा था |

क्योंकि उसके लंड को पता था कि उसको यह मौका शायद दुबारा ना मिले | इसीलिए वो आज इस मौके से पूरा फायदा उठाने पर वकास को मजबूर कर रहा था |

वकास अभी अपने दिल और लंड की कही हुई बातों पर ही गौर कर रहा था कि ज़ाकिया ने लेटते हुए एक साइड पर करवट बदल ली |

आखिरकार वकास ने अपने लंड की ही सुनी और उसने डरते डरते अपना हाथ आगे बढाते हुए अपनी बहन की पैंटी को एक साइड्स से उठा कर अपनी बहन की फुल नंगी चूत का पहली बार दीदार किया |

“उफ्फ्फफ्फ्फ़” बहन की चूत को देखते ही दिल ही धड़कन रूक सी गई | वकास ने कभी सोचा भी ना था की उसकी बहन की चूत इतनी प्यारी और खूबसूरत होगी |

 
वकास ने देखा कि उसकी बहन ज़ाकिया की चूत पर बहुत ही हलके बाल थे | जिनको देख कर यूं लगता था कि जैसे ज़ाकिया ने तीन चार दिन पहले ही अपनी हसीन चूत की शेव की हो |

ज़ाकिया की चूत के मोटे और भारी होंठों को आपस में चिपके हुए देखकर वकास दिल ही दिल में गुनगुनाने लगा

“तेनु पीन गे नसीबां वाले

तू नशे दिए बंद बोतले” |

वकास को यह तो पता था कि अब उसकी बहन की चूत बंद बोतल तो नही | मगर उसे यह भी इल्म था कि

“शराब जितनी पुरानी हो , उसका मज़ा भी उतना ही ज्यादा होता है” |

वकास ने एक दीवानगी के साथ आहिस्ता से अपनी ऊँगली से अपनी बहन की चूत के दोनों लिप्स को खोला |

जैसे कोई तितली अपने छोटे छोटे फर फैला रही है | अन्दर से वकास को अपनी बहन की पिंक कलर की चूत का छेद साफ़ नज़र आने लगा |

बहन की रस भरी चूत को इस तरह ओपन करते वक्त वकास को अपने महरूम बहनोई अकरम से एक जलन सी महसूस होने लगी |

जिसने उसकी बहन की कुंवारी चूत की सील तोड़ कर उसे एक औरत बनाया था | वकास सोचने लगा कि काश अकरम की जगह अगर वो अपनी बहन की सील तोड़ता तो कितना मज़ा आता |

“अब गया वक़त तो हाथ नहीं आ सकता , इसीलिए अब पुरानी बातों पर अफ़सोस करने की बजाए मुझे इस मौजूदा लम्हे का मज़ा लेना चहिये” , वकास ने अपने दिल को तसल्ली देते हुए अपना हाथ बिस्तर पर पड़े बहन के आधे नंगे बदन पर डाला |

वकास का अपने बहन की चूत को ऐसे हाथ लगाने से बहुत मज़ा आया | ज़ाकिया की फुद्दी बहुत नर्म थी | वकास ने जब ज़ाकिया की चूत को हल्का सा टच किया तो उसे महसूस हुआ कि उसकी बहन की गर्म फुद्दी रात भर छूटने की वजह से अभी तक चिप चिप कर रही है |

अपनी बहन की चूत को इस तरह नंगा करने और उसे पहली बार छूने से ही वकास की हालत बुरी होने लगी |

कमरे में लगे एसी के बावजूद वकास को बहन की चूत के इतने नज़दीक होने की वजह से शायद गर्मी महसूस हुई तो चंद सेकंड्स के अन्दर वकास अपने कपड़ो से आजाद हो कर बिलकुल नंगा हो गया | उसका लंड तन कर उसके पेट से लग गया था |

अब कमरे में हालत यह थी कि वकास बिलकुल नंगा नींद में बेहोश बहन के बिस्तर पर चढ़ कर उसकी टांगों के दरमियाँ बैठा हुआ था |

वकास आज अपने जिंसी जज़्बात में इतनी बुरी तरह से बहक चूका था और उसे कुछ होश और समझ ना रही कि वो क्या कर रहा है |

इस वक्त उस पर सिर्फ और सिर्फ अपनी बहन की जवानी का नशा चढ़ा हुआ था |

और उसी नशे में डूबे हुए वकास ने बिस्तर पर बैठे बैठे अपने लंड से खेलना शुरू किया | लंड से खेलते वक्त वकास ने अपनी बहन की पैंटी को एक हाथ में पकड़ कर अपनी बहन की चूत पर लगी हुई बहन की कम को देखने लगा |

पता नहीं वकास को क्या सुझा कि उसने जिझ्कते जिझ्कते अपनी दुसरे हाभ की ऊँगली आगे बढाई और ज़ाकिया की चूत में लगी उसकी कम को हल्का सा छुआ तो ज़ाकिया की चूत का पानी उसकी ऊँगली पर लग गया |

वकास के इस तरह ज़ाकिया की चूत को छूने से ज़ाकिया नींद में थोड़ी से हिली | जिस पर वकास का खून उसके जिस्म में खुशक हो गया |

 
उसे लगा कि जैसे ज़ाकिया अब उठ गई है | मगर दुसरे ही लम्हे ज़ाकिया ने फिर खर्राटे लेना शुरू कर दिए | जिस पर वकास की जान में जान आई |

वकास ने अपनी बहन के जूस से भरी ऊँगली अपनी नाक के पास लेजाकर पहले तो उसे सुंघा | फिर उसने अपनी ऊँगली को मुंह में लेकर चाटना शुरू कर दिया |

“उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़, हाआआअ, मज़ेदाररररर , वकास ने बहन की नमकीन चूत के स्वाद को अपनी जुबां से पहली बार चखते हुए दिल में कहा |

ज़ाकिया अपने बिस्तर पर बेहोश पड़ी सो रही थी | उसे क्या मालूम था कि उसका भाई उसके जिस्म से क्या खेल खेल रहा है |

वकास को अपनी शादी के बाद जब उसकी विदेशी बीवी ने चुदाई के तौर तरीके सिखाये थे तो उनमें एक वकास का फेवरेट खेल यह था कि वो फुद्द्दी की लकीर में अपना लंड डाल कर ऊपर निचे फेरता | इस तरह फुद्दी के ऊपर लंड फेरने में वकास को बहुत ही मज़ा आता |

आज अपनी बहन की नंगी चूत के इतने नज़दीक होने की वजह से वकास का लंड उसे अपनी बहन की चूत के साथ मस्ती करने के मशवरे देना लगा था |

वकास यह खूब जनता था कि यह “खेल” उसके लिए “खरतनाक” भी हो सकता है | मगर पता नहीं आज उस पर जैसे कोई जनून सवार हो गया था |

वो जनता था कि उसके लिए अपनी बहन की चूत में अपना लंड डालना एक नामुमकिन बात है |

लेकिन आज वकास का दिल और लंड उसे कह रहा था कि आज मौका है और इस मौके से फायदा उठाते हुए वो अपनी बहन की चूत अपने लंड से एक दफा जरूर रगड़े क्योंकि ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता |

उस वक़त वकास पर एक आग सवार थी | एक पागलपन सवार था जिसने उसके सोचने समझने की शक्ति ख़त्म कर दी |

और इस पागलपन की वजह से वकास ने आगे बढ़कर अपनी बहन की पैंटी को हाथ से हटाते हुए अपनी सगी बहन की चूत को अपने लंड से टच किया |

स्स्स्सी... ईई..... बहन की मखमली चूत से लंड की टोपी टकराते ही वकास के मुंह से एक सिसकारी सी निकल गई |

ज़ाकिया की इन्तहाई नरम और प्यासी चूत के लम्स ने वकास की गर्मी में और इजाफा कर दिया |

ज़ाकिया जो कि नींद में थी वो अपने भाई के लंड के “लम्स” से थोड़ी “कसमसाई” मगर फिर भी ना जागी |

वकास ने अपनी सोती हुई बहन के चेहरे पर एक भरपूर नज़र डाली तो उसे यकीन हो गया कि ज़ाकिया अभी तक सो रही है | इस बात का यकीन होने पर वकास का हौसला बढ़ गया |

बहन की चूत की गर्मी अपने लंड पर महसूस करके वकास बुरी तरह से बहक गया | वकास का तना हुआ लंड एक फन करते हुए सांप की तरह अपने फुल जोबन पर था |

अब वकास ज़ाकिया की टांगों के दरमियाँ आया और अपने दोनों हाथों की कूहनियों पर अपना वज़न डालते हुए अपनी बहन के बदन पर झुका और इस तरह अपनी बहन की चूत पर लंड दुबारा रगडा |

ज़ाकिया की पानी छोडती फुद्दी पर वकास का लंड फिसलता चला गया | वकास अपनी बहन की पिच पिच करती चूत पर आहिस्ता आहिस्ता अपना लंड टकराते हुए बहुत लुत्फ अंदाज़ हो रहा था |

वकास को बहन की चूत से लंड टकराते हुए बहुत स्वाद तो मिल रहा था मगर फिर भी उसकी हिम्मत नहीं पड रही थी कि वो अपने लंड को बहन की प्यासी चूत में दाखिल कर दे |

वकास के लंड का टोपा ज़ाकिया की फुद्दी के सुराख पर रखा था |

वकास के लंड ने आज तकरीबन तीन साल बाद एक गर्म जवान फुद्दी को छूआ था और चूत की गर्मी महसूस करते हुए उसे बहुत मज़ा आया | इसीलिए वकास में अपने आप पर काबू रखने की हिम्मत जवाब दे रही थी |

वकास अभी अपनी एस सोच में गुम था कि बहन की फुद्दी को चोदे जा ना चोदे कि उसी लम्हे ज़ाकिया का बदन थोड़ी देर के लिए एक दम से ऊपर की तरफ फुदका |

जिसके साथ ही वकास की कोहनियों ने वकास के जिस्म का बोझ उठाने से इन्कार कर दिया और वकास अपनी बहन के आधे नंगे बदन पर गिरता चला गया |

 
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