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वकास और ज़ाकिया पर यह खबर बिजली बन कर गिरी | वो दोनों भाई बहन फ़ौरन पाकिस्तान पहुँच गए | उनके लाहौर वाले घर में वकास और ज़ाकिया की सारी बहने और उनके बाकी रिश्तेदार आये हुए थे |
माँ बाप का कफ़न दफ़न करने के बाद वकास तकरीबन एक महीना पाकिस्तान रहा और अपनी जो थोड़ी बहुत जायदाद थी उसको बेच दिया |
अक्टूबर में वकास ने अमरीका वापसी का इरादा किया तो ज़ाकिया ने उसे बताया कि वो अभी अपनी बहनों के पास कुछ देर मजीद ठहरना चाहती है | इसीलिए ज़ाकिया को पाकिस्तान छोड़ कर वकास अकेला न्यूयॉर्क चला आया |
न्यूयॉर्क पहुँच कर उसने ज़ाकिया की अमेरिकन सिटीजनशिप की एप्लीकेशन जमा करवा दी | कुछ टाइम बाद ज़ाकिया की फिंगर प्रिंट्स की डेट का लैटर वकास को मिला | तो वकास ने ज़ाकिया को वापिस न्यूयॉर्क आने को कहा |
दिसम्बर के आखरी हफ्ते में ज़ाकिया का अमेरिकन सिटीजनशिप का इंटरव्यू हो गया जोकि ज़ाकिया ने पास कर लिया |
अब ज़ाकिया का दिल था कि वो जल्दी से अपना अमेरिकन पासपोर्ट बनवा कर पाकिस्तान चली जाए | मगर वकास का दिल कुछ और ही चाह रहा था |
वो दिसम्बर की 18 तारीख थी | वकास शाम को काम से वापिस आया तो देखा कि उसकी बहन ज़ाकिया अपने कमरे में अपने बिस्तर पर बैठी हुई थी |
वकास की नजर बहन के चहरे पर पड़ी तो उसे ज़ाकिया शक्ल से थकी थकी सी लगी |
वकास : ज़ाकिया क्या बात है, बहुत थकी हुई लग रही हो , तबीअत तो ठीक है |
ज़ाकिया : कुछ नहीं भाई , मैं ठीक हूँ |
असल में आज ही ज़ाकिया की माहवारी स्टार्ट हुई थी | माहवारी के स्टार्ट के पहले एक दो दिन ज़ाकिया को पिठ में बहुत शदाद किस्म का दर्द होता और साथ ही उसे काफी हैवी ब्लीडिंग होती थी | जिसकी वजह से उसे पीरियड के पहले दिन काफी थकावट भी होती थी |
अब ज़ाकिया इन सब बातों का इज्हार अपने भाई से तो करने से रही | इसीलिए वो “कुछ नहीं भाई, मैं ठीक हूँ” के अलावा भाई को “कह” भी क्या सकती थी |
वकास बहन का जवाब सुनकर खामोश हो गया | इतनी देर में ज़ाकिया ने बिस्तर पर बैठे बैठे अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं |
वकास की नज़र बहन की खुली हुई टांगों के दरमियाँ पड़ी तो उसे बहन की शलवार पर गांड के करीब “खून” के चंद “धब्बे” लगे नज़र आए |
“ज़ाकिया तुम कहती हो कि तुम ठीक हो, जबकि तुम्हारे जिस्म से तो “खून” निकल रहा है , लगता है कि तुम्हें कोई चोट वोट लगी है , चलो मैं तुम्हें किसी डॉक्टर के पास लेकर जाता हूँ”, वकास ने घबराए अंदाज़ में बहन को मुखातिब करते हुए कहा |
अपने भाई के मुंह से अपनी शलवार पर लगे खून का सुन कर ज़ाकिया का तो जैसे “रंग” ही “उड़” गया |
वो फौरन समझ गई कि उसका भाई जिस चीज़ को खून देख रहा है असल में वो उसकी माह्बारी ब्लीडिंग के धब्बे हैं |
असल में जब तक अकरम जिंदा था तब तक ज़ाकिया को कभी पैड्स की कमी का मसला नहीं हुआ था | चूँकि अकरम को ज़ाकिया की पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ें मसलन हेयर रेमोविंग क्रीम और पैड्स वगैरा हर बार खरीद कर लाना अच्छा नहीं लगता था |
इसीलिए जब भी अकरम शापिंग के लिए जाता | वो ज़ाकिया के लिए चार ,पांच महीने के पैड्स और दूसरी चीज़ें खरीद कर उनको घर में स्टॉक कर देता था |
और आज जब दोपहर को ज़ाकिया के पीरियड्स स्टार्ट हुए तो ज़ाकिया ने पैड्स लगाना चाहा तो उसे पता चला कि ना सिर्फ अकरम के लाये हुए पैड्स ख़त्म हो चुके थे बल्कि ज़ाकिया खुद भी पाकिस्तान से आते हुए जल्दी में अपने पैड्स साथ लेना भूल गई |
ज़ाकिया को इस बात की बहुत परेशानी हुई | उसने कॉटन को एक पुराने कपडे में रख कर उसे अपने अंडरवेअर में रखा तो था मगर उसे नहीं मालूम था कि यह कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोक नहीं सकेगा |
अब उसका भाई उसके सामने खड़ा ना सिर्फ उसकी शलवार पर लगे हुए “खून” को देख चूका था बल्कि वो उसे नासमझी में किसी डॉक्टर के पास ले जाने की जिद भी कर रहा था | ज़ाकिया को समझ नहीं आ रही थी कि वो कैसे बिस्तर से उठ कर बाथरूम जाए और अपने जिस्म को साफ़ करे |
ज़ाकिया : भाई मैं ठीक हूँ आप फिक्र ना करें |
वकास : अगर मैं तुम्हारी फिक्र नहीं करूँगा तो और कौन करेगा , चलो उठो डॉक्टर के पास चलते हैं |
ज़ाकिया : भाई यह डॉक्टर के पास जाने वाला मसला नहीं , आप बाहर जाओ मैं कपडे चेंज कर लूं |
वकास : अगर तुम्हें कोई चोट नहीं लगी तो फिर यह खून कैसे लगा , तुम क्यों नही मुझे खुल कर बताती | वकास ने एक बच्चे की तरह जिद करते हुए पुछा |
“मेरे बुद्दू भाई, मैं आप को कैसे समझाऊँ , मेरी शलवार पर लगा खून किसी ज़ख्म का नहीं , बल्कि औरतों को जो हर महीने माहवारी होती है, यह उसका दाग है” वकास की ज़िद के आगे हार मानते , ज़ाकिया ना चाहते हुए भी आखिर बोली और जल्दी से उठ कर बाथरूम में घुस गई |
वकास को अपनी बहन के मुंह से यह बात सुनने की उम्मीद नहीं थी | इसीलिए वो यह बात सुन कर उधर ही एक बुत की मानिद “हक्का बक्का” खड़ा बहन को बाथरूम की तरफ जाता देखता रहा |
वकास ने शायद कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि उसकी बहन अपनी डेट्स के बारे में उससे कहेगी |
बाथरूम में जाते ही ज़ाकिया ने अपनी शलवार उतारी तो देखा कि कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोकने में नकारा हो गया थे , जिसका नतीजा यह निकला कि “खून” से उसकी सारी शलवार और टांगें भर गईं थी |
ज़ाकिया ने फौरन ही अपनी टांगें और चूत को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ़ किया और नया कॉटन और एक पुराने टॉवल का छोटा सा टुकड़ा अपनी चूत के उपर रख कर दुबार नया अंडरवेअर और शलवार पहन ली |
माँ बाप का कफ़न दफ़न करने के बाद वकास तकरीबन एक महीना पाकिस्तान रहा और अपनी जो थोड़ी बहुत जायदाद थी उसको बेच दिया |
अक्टूबर में वकास ने अमरीका वापसी का इरादा किया तो ज़ाकिया ने उसे बताया कि वो अभी अपनी बहनों के पास कुछ देर मजीद ठहरना चाहती है | इसीलिए ज़ाकिया को पाकिस्तान छोड़ कर वकास अकेला न्यूयॉर्क चला आया |
न्यूयॉर्क पहुँच कर उसने ज़ाकिया की अमेरिकन सिटीजनशिप की एप्लीकेशन जमा करवा दी | कुछ टाइम बाद ज़ाकिया की फिंगर प्रिंट्स की डेट का लैटर वकास को मिला | तो वकास ने ज़ाकिया को वापिस न्यूयॉर्क आने को कहा |
दिसम्बर के आखरी हफ्ते में ज़ाकिया का अमेरिकन सिटीजनशिप का इंटरव्यू हो गया जोकि ज़ाकिया ने पास कर लिया |
अब ज़ाकिया का दिल था कि वो जल्दी से अपना अमेरिकन पासपोर्ट बनवा कर पाकिस्तान चली जाए | मगर वकास का दिल कुछ और ही चाह रहा था |
वो दिसम्बर की 18 तारीख थी | वकास शाम को काम से वापिस आया तो देखा कि उसकी बहन ज़ाकिया अपने कमरे में अपने बिस्तर पर बैठी हुई थी |
वकास की नजर बहन के चहरे पर पड़ी तो उसे ज़ाकिया शक्ल से थकी थकी सी लगी |
वकास : ज़ाकिया क्या बात है, बहुत थकी हुई लग रही हो , तबीअत तो ठीक है |
ज़ाकिया : कुछ नहीं भाई , मैं ठीक हूँ |
असल में आज ही ज़ाकिया की माहवारी स्टार्ट हुई थी | माहवारी के स्टार्ट के पहले एक दो दिन ज़ाकिया को पिठ में बहुत शदाद किस्म का दर्द होता और साथ ही उसे काफी हैवी ब्लीडिंग होती थी | जिसकी वजह से उसे पीरियड के पहले दिन काफी थकावट भी होती थी |
अब ज़ाकिया इन सब बातों का इज्हार अपने भाई से तो करने से रही | इसीलिए वो “कुछ नहीं भाई, मैं ठीक हूँ” के अलावा भाई को “कह” भी क्या सकती थी |
वकास बहन का जवाब सुनकर खामोश हो गया | इतनी देर में ज़ाकिया ने बिस्तर पर बैठे बैठे अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं |
वकास की नज़र बहन की खुली हुई टांगों के दरमियाँ पड़ी तो उसे बहन की शलवार पर गांड के करीब “खून” के चंद “धब्बे” लगे नज़र आए |
“ज़ाकिया तुम कहती हो कि तुम ठीक हो, जबकि तुम्हारे जिस्म से तो “खून” निकल रहा है , लगता है कि तुम्हें कोई चोट वोट लगी है , चलो मैं तुम्हें किसी डॉक्टर के पास लेकर जाता हूँ”, वकास ने घबराए अंदाज़ में बहन को मुखातिब करते हुए कहा |
अपने भाई के मुंह से अपनी शलवार पर लगे खून का सुन कर ज़ाकिया का तो जैसे “रंग” ही “उड़” गया |
वो फौरन समझ गई कि उसका भाई जिस चीज़ को खून देख रहा है असल में वो उसकी माह्बारी ब्लीडिंग के धब्बे हैं |
असल में जब तक अकरम जिंदा था तब तक ज़ाकिया को कभी पैड्स की कमी का मसला नहीं हुआ था | चूँकि अकरम को ज़ाकिया की पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ें मसलन हेयर रेमोविंग क्रीम और पैड्स वगैरा हर बार खरीद कर लाना अच्छा नहीं लगता था |
इसीलिए जब भी अकरम शापिंग के लिए जाता | वो ज़ाकिया के लिए चार ,पांच महीने के पैड्स और दूसरी चीज़ें खरीद कर उनको घर में स्टॉक कर देता था |
और आज जब दोपहर को ज़ाकिया के पीरियड्स स्टार्ट हुए तो ज़ाकिया ने पैड्स लगाना चाहा तो उसे पता चला कि ना सिर्फ अकरम के लाये हुए पैड्स ख़त्म हो चुके थे बल्कि ज़ाकिया खुद भी पाकिस्तान से आते हुए जल्दी में अपने पैड्स साथ लेना भूल गई |
ज़ाकिया को इस बात की बहुत परेशानी हुई | उसने कॉटन को एक पुराने कपडे में रख कर उसे अपने अंडरवेअर में रखा तो था मगर उसे नहीं मालूम था कि यह कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोक नहीं सकेगा |
अब उसका भाई उसके सामने खड़ा ना सिर्फ उसकी शलवार पर लगे हुए “खून” को देख चूका था बल्कि वो उसे नासमझी में किसी डॉक्टर के पास ले जाने की जिद भी कर रहा था | ज़ाकिया को समझ नहीं आ रही थी कि वो कैसे बिस्तर से उठ कर बाथरूम जाए और अपने जिस्म को साफ़ करे |
ज़ाकिया : भाई मैं ठीक हूँ आप फिक्र ना करें |
वकास : अगर मैं तुम्हारी फिक्र नहीं करूँगा तो और कौन करेगा , चलो उठो डॉक्टर के पास चलते हैं |
ज़ाकिया : भाई यह डॉक्टर के पास जाने वाला मसला नहीं , आप बाहर जाओ मैं कपडे चेंज कर लूं |
वकास : अगर तुम्हें कोई चोट नहीं लगी तो फिर यह खून कैसे लगा , तुम क्यों नही मुझे खुल कर बताती | वकास ने एक बच्चे की तरह जिद करते हुए पुछा |
“मेरे बुद्दू भाई, मैं आप को कैसे समझाऊँ , मेरी शलवार पर लगा खून किसी ज़ख्म का नहीं , बल्कि औरतों को जो हर महीने माहवारी होती है, यह उसका दाग है” वकास की ज़िद के आगे हार मानते , ज़ाकिया ना चाहते हुए भी आखिर बोली और जल्दी से उठ कर बाथरूम में घुस गई |
वकास को अपनी बहन के मुंह से यह बात सुनने की उम्मीद नहीं थी | इसीलिए वो यह बात सुन कर उधर ही एक बुत की मानिद “हक्का बक्का” खड़ा बहन को बाथरूम की तरफ जाता देखता रहा |
वकास ने शायद कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि उसकी बहन अपनी डेट्स के बारे में उससे कहेगी |
बाथरूम में जाते ही ज़ाकिया ने अपनी शलवार उतारी तो देखा कि कॉटन और पुराना कपडा उसकी हैवी ब्लीडिंग को रोकने में नकारा हो गया थे , जिसका नतीजा यह निकला कि “खून” से उसकी सारी शलवार और टांगें भर गईं थी |
ज़ाकिया ने फौरन ही अपनी टांगें और चूत को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ़ किया और नया कॉटन और एक पुराने टॉवल का छोटा सा टुकड़ा अपनी चूत के उपर रख कर दुबार नया अंडरवेअर और शलवार पहन ली |