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मजबूरी का फैसला complete

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साथ ही साथ वकास का लंड जो उसकी बहन की फुद्दी के सुराख के एन ऊपर पड़ा था | वो ज़ाकिया की नाज़ुक नशीली फुद्दी को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया |

ज्यों ही वकास का लंड पूरी शिद्दत से बहन की चूत की दीवारों को चीरता हुआ चूत की गहराईओं में घुसा तो ज़ाकिया की आँख खुल गई |

मगर अब ज़ाकिया के लिए काफी देर हो चुकी थी | क्योंकि सयाने कहते हैं कि

“कमान से निकला तीर और चूत में गया लंड कभी वापिस नहीं होता” |

और अब एक भाई का लंड उसकी अपनी ही सगी बहन की चूत में जा घुसा था और इस अमल को वापिस करना अब एक नामुमकिन बात थी |

जब ज़ाकिया ने अपने भाई को अपने उपर चढ़े देखा तो उसके होश उड गए | ज़ाकिया ने तो कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि उसका भाई जो कि उसकी इज्ज़त का रखवाला था , कभी इस तरह उसकी चूत को लूट भी सकता है |

“भाई यह आप क्या कर रहे हैं मैं आप की बहन हूँ” , ज़ाकिया ने वकास को अपन ऊपर से हटाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा |

“ज़ाकिया मैं जानता हूँ कि तुम मेरी बहन हो, मगर मेरी बहन मैं क्या करूँ कि मैं अब तुमसे पयार करने लगा हूँ, तुम्हारे प्यार और तुम्हारे इस खूबसूरत जिस्म ने आज मुझे एक इंसान से जानवर बनने पर मजबूर कर दिया है“ वकास ने अपनी बहन के जिस्म पर पड़े ज़ाकिया के गालों को चूमते हुए कहा |

भाई की बात सुनकर ज़ाकिया के तो जैसे होश ही उड गए | मर्द का यह रूप पहली बार ज़ाकिया के सामने आया था | वो सोच भी नहीं सकती थी कि जिन रिश्तों की दुनिया पूजा करती है वो जब एक मर्द के रूप में सामने आते हैं तो हर औरत बस एक औरत ही होती है | जिससे वो अपना दिल बहलाना चाहते हैं और अपनी जिंसी तस्कीन हासिल करना चाहते हैं |

यह सोचते हुए ज़ाकिया की आँखें भर आईं | वो वकास से कहने लगी , प्लीज मुझे छोड़ दो और अपने आप को वकास की गिरफ्त से आज़ाद करने लगी |

वकास जो दो तीन साल से मुठ मार कर अपने लौड़े की गर्मी निकाल रहा था | उसको आज इतने अरसे बाद एक असल फुद्दी का मज़ा मिला था | इसीलिए वो आज पूरी तरह बहन की चूत का मज़ा लेने के मूड में था |

“ज़ाकिया प्लीज आज मुझे मत रोको , मैं जानता हूँ कि हम दोनों इस जवानी की आग में जल रहे हैं , तो क्यों ना आज हम दोनों एक दुसरे की प्यास को बुझा दें” , कहते हुए वकास ने बहन की शर्ट के उपर से ही उसके मोटे बड़े मम्मो पर मुंह रखा और उनको चूसने लगा |

साथ ही वकास ने एक झटका मारा और उसका लंड दुबारा उसकी बहन ज़ाकिया की फुद्दी के अन्दर घुस गया | अपने आप को भाई की कैद से आज़ाद करवाती ज़ाकिया के मुंह से भी बेइख्तिअर निकला ,

“हाएएएए.... ईई.... मैं मररर... गईईईई....”

ज़ाकिया जो के आज से पहले एक बूढ़े और ढीले लंड की आदि थी | आज पहली बार उसे वाकिया ही यूं लगा कि जैसे उसके भाई के जवान और तगड़े लंड ने उसकी सारी जान उसकी फुद्दी के रास्ते निकल दी हो |

आज पहली बार ज़ाकिया एक असल मर्द से चुद रही थी और वो मर्द कोई और नहीं बल्कि उसका अपना सगा भाई था |

अभी ज़ाकिया भाई के पहले झटके की ताब भी ना झेल सकी कि वकास ने दूसरा भरपूर झटका दिया | जिसकी वजह से वकास का भरपूर लंड बहन की बच्चेदानी तक जा कर ठोकर मारने लगा |

ज़ाकिया की फुद्दी का हर पार्ट , हर तह , वकास के फौलाद जैसे लंड के सामने हार मान रही थी |

 
भाई की ज़बरदस्त झटकों के आगे ज़ाकिया अपनी हिम्मत हार बैठी और एक वेबस इंसान की तरह अपनी टांगें खोल अपने ही भाई से चुदती रही |

वकास के लंड को ज़ाकिया की फुद्दी का मज़ा आ रहा था | ज़ाकिया की फुद्दी अन्दर से इन्तेहाई गरम थी कि जैसे कोई आग हो | फिर क्या था , वकास पागल सा हो गया इन्तेहाई जोरदार झटके देने लगा | उसके झटके इतने जोरदार थे कि बेड में से भी चूं चूं की आवाजें निकलने लगी |

और ज़ाकिया अपने भाई की चुदाई की शिद्दत से बेहाल हो गई | हर झटके के साथ वो कभी हाए... मर गई कहती तो कभी कहती बस...स...स , सी... बस्सस्सस्स | लेकिन वकास था कि उसके झटके तेज़ से तेज़ तार होते चले जा रहे थे |

ज़ाकिया की फुद्दी पूरी तरह से खुल चुकी थी , फट चुकी थी | अब वकास का लंड फुद्दी में अन्दर बाहर होने की वजह से ज़ाकिया की फुद्दी से पिच... पिच... पिच जैसी आवाजें आना शुरू हो गई थीं |

वकास बहन की चुदाई के साथ साथ अपनी बहन ज़ाकिया की छातियों से भरपूर तोर पर लुत्फ़ अंदाज़ हो रहा था | वो कभी बहन की छातियों को हाथ से पकड़ कर दबाता और कभी शर्ट के ऊपर से उनको किस करता |

वकास पसीने से सरोबर था , गर्मी उसके दिमाग तक चढ़ चुकी थी और आखिरकार उसके गर्म लंड ने अपना बीज निकाला तो निचे से बहन की फर्टाइल बच्चेदानी ने एक भूखे बच्चे की तरह अपना मुंह खोल कर भाई के बीज को फ़ौरन अपने अन्दर निगल लिया |

ज़ाकिया की फुद्दी उसके अपने भाई की मणि से भर गई | वकास काफी देर तक रिलीज़ होता रहा |

और आखिरकार उसने अपना लंड एक झटके के साथ ज़ाकिया की फुद्दी से निकाला और वो ज़ाकिया के साथ ही बिस्तर पर ढेर हो गया |

पूरे बेड पर जगह जगह नमी थी , वकास की मणि की नमी, ज़ाकिया की प्यासी गर्म चूत की नमी |

मगर बिस्तर पर पड़ी नमी के साथ साथ ज़ाकिया की उदास आँखें भी आंसुओं की शकल में अपनी नमी छोड़ रहीं थी लेकिन वकास इस नमी को देखे बगैर ही नींद की आगोश में चला गया |

थोड़ी देर ज़ाकिया भी भाई के साथ उसी बिस्तर पर एक तरफ हो कर सीधी लेटी रही |

जिस वजह से उसके भाई की मणि उसकी चूत के आख़री कोने में जा कर जज़ब होती रही |

 
वकास की इन्तहाई बेरहम और भरपूर तरीके से की हुई चुदाई के असर उसकी बहन की सूजी हुई चूत पर साफ़ देखा जा सकता था |

अपने भाई को अपने साथ ज़बरदस्ती चुदाई करने के बाद अपने ही बिस्तर पर सोता देख कर ज़ाकिया के पूरे बदन में गुस्से की एक लहर से दौड़ गई |

ज़ाकिया का दिल चाहा , वो इसी तरह अधनंगी उठकर कमरे से बाहर निकल जाए और चीख चीख कर लोगो को अपने साथ अपने ही भाई के किये जुल्म की दास्ताँ सुनाए |

मगर ज़ाकिया यह सोच कर बिस्तर पर खामोश पड़ी रही कि अगर रात की “तन्हाई”“ में एक भाई के अन्दर का “जानवर” अपने जिन्सी जज़्बात के नशे में इस तरह जाग कर अपनी ही सगी बहन की अस्मत को बेदर्दी से तार तार कर सकता है तो फिर बाहर के लोगो से वो क्या उम्मीद रख सकती है |

वैसे भी ज़ाकिया रात को अपने जिस्म पर मर्दों की भूखी नज़रों को देख कर जान गई थी कि अगर वो अध नंगी हालत में रात के इस वक़्त लॉस वेगास जैसे गुनाहों से भरे सिटी में निकली तो बाहर के भूखे मर्द उसके जिस्म की बोटी बोटी नोच लेंगे |

इसी तरह की बातें अपने दिमाग में सोचते ज़ाकिया उस बेड से उठी | ज़ाकिया की स्कर्ट वकास और उसके अपने जूस लगने की वजह से काफी गीली हो गई थी | इसीलिए ज़ाकिया ने अपनी स्कर्ट को अपने जिस्म से उतार कर अपने अंडरवियर में वकास के बेड पर आ कर लेट गई |

उधर दूसरी तरफ सुबह सवेरे जब वकास की आँख खुली तो उसने देखा कि वो अपने बेड की बजाए अपनी बहन ज़ाकिया के बेड पर ही एक तरफ करवट किए हुए सो रहा है ,

“रात का नशा अभी

आँख से गया नहीं”

वाले गाने की मानिद वकास के “होशो हवास” पर अपनी बहन के साथ बिताए हुए “रात” के “नशे” का “खुमार” अभी तक छाया हुआ था |

वकास अपने दिल में बहुत खुश था कि कल रात उसने अपनी ही बहन की चूत में अपना लंड डालकर अपनी बहन के साथ अपने इश्क की तकमील कर ली थी |

वकास अपने आपको इस दुनिया का सब से खुशनसीब इंसान मानते हुए अभी भी अपनी बहन की चूत की “गर्माइश” को अपने लंड की एक एक रग में महसूस कर रहा था |

अभी वकास बहन की जवानी के नशे में ही मदहोश था कि इतने में उसके कानो में किसी के रोने की आवाज़ पड़ी |

जिसको सुनते ही वकास के दिमाग पर छाया हुआ सारा “सरूर” उतर गया और वो फ़ौरन अपने बेड से उठ बैठा |

बेड से उठते ही वकास ने अपने पीछे मुड कर देखा कि जिस बेड पर वो रात को मोटल में वापसी पर खुद सोया था, उधर उसकी बहन ज़ाकिया सिर्फ अपने अंडरवियर और शर्ट में ही उसकी तरफ पीठ कर के “ओंधे मुंह” लेटी हुई लगातार रोए जा रही है |

वकास समझ गया कि जाकिया अभी तक रात के वाकिया की वजह से अपसेट है | अपनी बहन को यूं रोते देख कर वकास का दिल टूट गया |

और चंद लम्हे पहले तक अपनी बहन की गर्म जवानी के नशे में धुत और बहन की फुद्दी की इन्तहाई गहराईओं में जा कर धूम मचाने वाला और बहन की फुद्दी के मज़े से मचलता वकास का मोटा और मज़बूत लंड “मूत्र की जाघ” की तरह बैठ गया |

बहन को यूं रोता देख कर वकास को भी अब अहसास हुआ कि रात को उससे कितनी बड़ी गलती ही नहीं हुई बल्कि अपनी जिंसी हवस के हाथों मजबूर होकर उससे एक बहुत बड़ा गुनाह हो गया है |

गुनाह का अहसास करके वकास को अपने आप से ही शर्मिंदगी महसूस होने लगी |

उसको समझ नहीं आ रही थी कि वो अब अपनी बहन का सामना किस मुंह से करे |

मगर अब जो भी हो वकास को अपनी बहन का सामना तो हर हाल में करना ही था |

इसीलिए वकास बोजल क़दमों के साथ आहिस्ता आहिस्ता चलता हुआ ज़किया की तरफ कदम बढने लगा | बहन की तरफ जाते हुए वकास को अपने कदम मनो भारी महसूस हो रहे थे |

“ज़ाकिया मेरी बहन, क्या बात तुम रो क्यों रही हो” वकास ने ज़किया के पीछे से जा कर उसके कंधे पर हाथ रखते और “अनजान” बनते हुए पूछा |

“छोडो मुझे बैगेरत इंसान, मुझे हाथ मत लगाओ और ना मुझे बहन कह कर बुलाओ , बहन भाई के मुकद्दस रिश्ते को तो तुम खुद कल रात अपने हाथों से कत्ल कर चुके हो”, ज़ाकिया ने वकास का हाथ अपने कंधे से एक ज़ोरदार झटके से हटाते हुए कहा |

“ज़ाकिया मुझे पता है कि रात को वेगास के माहौल और साथ वाले कमरे से आती आवाज़ों के असर से मैं बहक गया और तुमसे एक गलत काम कर बैठा और इसके लिए मैं तुमसे माफ़ी का तलबगार हूँ” वकास ने ज़ाकिया के सामने आते हुए कहा |

ज्यों ही वकास ज़ाकिया के सामने आया तो ज़ाकिया ने देखा कि उसका भाई उसके सामने बिलकुल नंगा खड़ा है |

वकास की टांगों के दरमियाँ लटके हुए उसके मोटे और लम्बे लंड पर ज़किया की चूत का जूस जम कर खुशक हो गया था और इस जमे हुए चूत के जूस की वजह से लंड पर एक छोटी सी तह बन गई थी |

जिस वजह से वकास के लंड को पहली नज़र में देख कर ऐसा लगता था कि जैस किसी ने उसके हलके सांवले लंड पर थोडा सा सफ़ेद पेंट लगा दिया हो |

ज़ाकिया ने भाई को इस हालत में देखते हुए फ़ौरन अपनी आँखों पर हाथ रखा और जोर से चिल्लाई ,“बेशरम इंसान अब तो अपने कपडे पहन लो” |

वकास को अपनी बहन की गुस्से भरी आवाज़ सुन कर एक दम याद आया कि वो तो नंगा ही बिस्तर से उठ कर ज़ाकिया के सामने चला आया है |

वकास ने बेईख्तियारी में अपने लंड पर हाथ रखा और दौड़ते हुए ज़ाकिया के बेड से कपडे उठा कर बाथरूम में घुस गया और अपने कपडे पहनने लगा |

इधर वकास के बाथरूम जाने के बाद ज़ाकिया बिस्तर पर लेटते हुए अपने साथ बीतने वाले वाकिया को एक भयानक ख्बाव समझ कर भूल जाना चाहती थी |

लेकिन उसकी चूत से उठती हुई सख्त दर्द की लहरें उसे फील करा रही थी कि रात उसके साथ होने वाला वाकिया एक ख्वाब नहीं था बल्कि उसके भाई ने हक़ीकत में उसकी चूत की पहली बार सही मानों में तसल्ली से चुदाई की है |

 
ज़ाकिया ने बेड से उठना चाहा तो उसे बेड से उठने में भी तकलीफ हुई | बहुत हिम्मत करके वो उठी और अपने बैग में पड़ी अपनी शलवार कमीज़ को निकालने के लिए कमरे के कोने में रखे बैग की तरफ कदम बढाए तो उसे चलते हुई अपनी चूत के सुराख़ में सख्त दर्द हुआ |

जिस वजह से ज़ाकिया से अभी सही तौर पर चला भी नहीं जा रहा था | मजबूरन वो अपनी टांगें थोडा खोल कर चलने लगी |

दूसरी तरफ बाथरूम में कपडे पहनते वक़्त वकास को चंद लम्हे पहले वाली अपनी हरकत पर खुद ही थोड़ी हंसी आने लगी कि उसने ज़ाकिया के सामने नंगा होने के अहसास होते ही कैसे अपने लंड को हाथ से छुपाने की कोशिश की थी |

हालांकि यह वो ही लंड था जिसे वो रात अपनी ही बहन की चूत में दाखिल कर के उसे चोद भी चूका था |

अपने ही ऊपर इस तरह हंसी आने की वजह से वकास जो कुछ देर पहले तक टेंस था अब थोडा रिलैक्स फील करने लगा |

उसने अपने आप को तसल्ली दी कि वो जो तकरीबन एक साल से अपनी बहन के बारे में सोच कर गर्म होता रहा है तो एक ना एक दिन उसकी गर्म सोच का अंजाम इसी तरह का ही होना था |

वैसे भी कहते हैं कि “मोहब्बत और जंग में सब जायज़ है” और फिर “जब प्यार किया तो डरना क्या” के बकोल अब जो हो गया था उसको वापिस किया नहीं जा सकता है |

और रही ज़ाकिया का इस तरह गुस्सा करने और उससे नाराज़ होने की बात तो वकास को उम्मीद थी कि ज़ाकिया का यह रविया वक्ती है और चंद दिनों के बाद शायद वो भी हालात से समझोता कर ले |

यही सोचता हुआ वकास बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि ज़ाकिया अपनी शलवार कमीज़ पहनकर ना सिर्फ तैयार हो गई थी बल्कि वो रूम से अपनी जाती चीज़ों को समेट कर अपने ट्रेवल बैग में रख रही है |

वकास ने जब ज़ाकिया को तैयार हुआ देखा तो उसने ज़ाकिया से धीमी आवाज़ में पुछा “ज़ाकिया तुमने नाश्ता करने बाहर चलना है या मैं खुद ही बाहर से कुछ ले आऊँ” |

“मुझे नहीं करना कोई नाश्ता वाश्ता, बस मैं तैयार हूँ और मुझे अभी और इसी वक़्त वापिस न्यू यॉर्क वापिस जाना है” ज़ाकिया ने वकास की तरफ देखे बिना जवाब दिया |

“आज? और अभी? मगर हमने तो दो दिन और इधर रुकना था”? वकास ने हैरान होते हुए ज़ाकिया से कहा |

“आप दो दिन की बात कर रहे हैं, रात को आपने जो हरकत मेरे साथ की है उसके बाद मैं तो अब दो पल भी इधर नहीं ठहर सकती” ज़ाकिया ने वकास को जवाब दिया |

“देखो ज़ाकिया मैं अपनी इस बात से बहुत शर्मिंदा हूँ और मैं अब वादा करता हूँ कि आइन्दा कभी ऐसी हरकत नहीं करूंगा” वकास ने ज़ाकिया के सामने जाकर अपने कानो को हाथ लगाते हुए कहा |

“वकास भाई मैं बच्ची नहीं, मैं जानती हूँ कि इंसान ज़िन्दगी में सिर्फ पहली दफा कोई गलत हरकत करते हुए झिज्कता और डरता है और जब एक दफा वो कोई गलत काम कर बैठता है तो फिर शर्म का अहसास खत्म हो जाता है |

मैं एक दफा तो रात के अँधेरे में आप से लुट चुकी हूँ अब बार बार अपने ही भाई से लूटने की मुझमें हिम्मत नहीं इसीलिए मुझे ना सिर्फ अभी न्यू यॉर्क जाना है बल्कि मैं अब एक दो दिन में ही वापिस पकिस्तान भी चली जाना चाहती हूँ” ज़ाकिया ने गुस्से से फुंकारते हुए वकास को अपना फैसला सुना दिया |

वकास जोकि अभी थोड़ी देर पहले तक यह सोच कर निश्चिंत हो रहा था कि ज़ाकिया थोड़े दिनों में संभल जाएगी उसे अब ज़ाकिया का फैसलाकुन अंदाज़ यह बता रहा था कि अब उसके सामने मजीद किसी “अगर मगर” की गुंजाइश नहीं है |

इसीलिए उसने रूम में लगा फ़ोन उठाया और एयरलाइन को कॉल करके उसी दिन की नेक्स्ट अवैलब्ल फ्लाइट में अपनी सीट बुकिंग को चेंज करवाया और इस तरह दोनों बहन भाई शाम 4 बजे की फ्लाइट से वापिस न्यू यॉर्क चले आये |

न्यू यॉर्क पहुँचने के दुसरे दिन वकास ने ज़ाकिया का अमेरिकन पासपोर्ट अर्जेंट फीस देके बनवाया और उसके बाद दुसरे दिन उसने पाकिस्तानी कांसुलेट में जाकर ज़ाकिया का पाकिस्तानी वीसा भी हासिल कर लिया |

ज़ाकिया के ट्रेवल डाक्यूमेंट्स तैयार करने के बाद वकास ने ट्रेवल एजेंट के ज़रिए पाकिस्तान के लिए ज़ाकिया के साथ अपनी सीट भी बुक करवा ली और दो दिन बाद वो दोनों पाकिस्तान रवाना होने वाले थे |

लॉस वेगास से वापिस आ कर ज़किया का रविया वकास से खिंचा खिंचा था वो अब वकास से सिर्फ मतलब ही की बात करती और वो भी बात कम और “हूँ हाँ” ज्यादा होती |

वकास जब घर में होता तो ज़ाकिया अपने आप को अपने कमरे में बंद कर लेती और वकास की मौजूदगी में सिर्फ खाना बनाना और किसी बहुत जरूरी काम से ही अपने कमरे से बाहर निकलती |

ज़ाकिया में वकास को सामना करने की हिम्मत ना थी और वो पाकिस्तान जाने के दिनों का इंतज़ार अपनी उँगलियों पर कर रही थी |

ज़ाकिया का प्रोग्राम यह था कि अब वो पाकिस्तान वापिस जाकर अपनी बाकी की ज़िन्दगी अपनी बहनों और उनके बच्चों के दरमियाँ गुज़ार दे |

और फिर चार दिन बाद वो वक़्त आन पहुंचा जब उनको अमेरिका से इस्लामाबाद फ्लाई करना था |

 
दोनों बहन भाई अपने बोर्डिंग पास ले के एअरपोर्ट के लाउंज में अपनी बोर्डिंग के इंतज़ार में बैठे थे | दोनों बहन भाई खामोश बैठे अपनी अपनी सोचो में गुम थे |

ज़ाकिया सोच रही थी कि काश वो भाई की बात ना मानती और अकरम की मौत के फ़ौरन बाद वापिस अपने माँ बाप के पास चली जाती तो उसे अपने भाई का यह घिनोना रूप देखने को ना मिलता और ना बहन भाई का एक मुकद्दस रिश्ता रात के अँधेरे में यूं शर्मशार होता |

इधर वकास जो जाने अनजाने में अपनी ही बहन को अपना दिल दे बैठा था | वो भी ज़ाकिया को अपने आप से इस तरह जुदा होते देखकर अन्दर ही अन्दर बहुत ग़मगीन था | मगर उसमें अपनी बहन को अब रोकने की हिम्मत ना थी | इसीलिए वो भी अब बेवसी से आने वाले वक़्त का इंतज़ार कर रहा था |

वकास को यह तो शक था कि पाकिस्तान जाकर ज़ाकिया शायद दुबारा शादी ना करे , मगर उसे यह पूरा यकीन था कि अब वो दुबारा कभी वापिस उसके पास न्यू यॉर्क नहीं आएगी |

वकास एक अजीब सी उलझन में था कि वो करे तो क्या करे , आखिरकार थोड़ी देर सोचने के बाद वकास ने अपने दिल में एक फैसला किया कि आज आखरी मौका है कि वो अपने दिल की बात पूरी तरह अपनी बहन के सामने खोल दे और फिर उसके बाद जो होगा वो उसको फेस कर लेगा |

यह सोचकर उसने ज़ाकिया को मुख्तिब किया, “ज़ाकिया मैं आज तुमसे आखरी बार एक बात करना चाहता हूँ” |

ज़ाकिया : भाई अब बात करने को रह क्या गया है |

“ज़ाकिया कुछ भी हो, मैं अब खुद को नहीं रोक पाऊंगा , इसीलिए जब तक मैं अपनी बात पूरी मुकम्मल ना कर लूं , प्लीज मुझे रोकना मत” वकास ने यह कहते हुए ज़ाकिया को उसकी सीट से उठाया और उसे साथ लेकर लाउंज के एक कोने में जिधर “देसी” लोग कम थे उधर जाकर दोनों बहन भाई बैठ गए |

इसके बाद वकास ने अपनी बात उस वक़्त से स्टार्ट की जब उसे अपने जाली निकाह की तरकीब में पहली दफा ज़ाकिया के नंगे मम्मे का दीदार किया था |

और फिर वो कैसे एक रात जल्दी घर वापिस आया और गलती से अकरम और ज़ाकिया की चुदाई की आवाजें सुनी |

फिर ज़किया और उसके दरमियाँ होने वाले छोटे छोटे वाकिया की वजह से वो कैसे आहिस्ता आहिस्ता अपनी ही बहन की मोहब्बत में गिरफ्तार होता गया |

वकास इन तमाम बातों को मुक्तसर लिफाज़ में ब्यान करता चला गया |

ज़ाकिया ना चाहते हुए भी अपने भाई के दिल के जज़्बात सुनती रही और सुन कर हैरत जदा होती रही |

उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब उसका अपना ही भाई उसका आशिक बन जायेगा |

वकास ने खुल कर ज़ाकिया को बता दिया कि वो जानता है कि दुनिया का कोई भी मज़हब इस बात की इजाजत नहीं देता | मगर फिर भी वो अब ज़ाकिया को एक बहन की हैसियत से नहीं बल्कि एक औरत के रूप में देखता और चाहता है |

और बेशक उसका ज़ाकिया से होने वाला निकाह जाली था | मगर वेगास में ज़ाकिया के साथ रात गुजारने के बाद अब वो ज़ाकिया को अपनी बीवी की हैसियत से प्यार करने लगा है और वो ज़ाकिया को हमेशा इसी तरह चाहता रहेगा चाहे कुछ भी हो जाए |

ज्यूँ ही वकास ने अपनी बात मुकम्मल की , फ्लाइट की बोर्डिंग स्टार्ट हो गई और वो दोनों बिना कोई मजीद बात किए जहाज़ में सवार हो गए |

जहाज़ के सफर के दौरान दोनों बहन भाई ने आपस में इस मुद्दे पर और कोई बात ना की ,क्योंकि एक तो पूरी फ्लाइट पाकिस्तानी पैसेंजर से भरी पड़ी थी, दूसरा अब उनके दरमियाँ अब कोई बात करने को रह भी नहीं गई थी |

इस्लामाबाद एअरपोर्ट पर वकास का एक बहनोई उनको लेने आया हुआ था , जिसके साथ वो दोनों पहले अपने गाँव पहुंचे |

जिधर वकास और ज़ाकिया की सब बहने और उनके बच्चे उनके इंतज़ार में थे | वो सब लोग एक दुसरे से मिल कर बहुत खुश हुए |

अकरम और ज़ाकिया के गाँव वाले मकान में अब ज़ाकिया की बड़ी बहन मुख्तार बीवी और उसका खानदान रिहाइश कर रह था |

ज़ाकिया और वकास एक दो दिन गाँव में ठहरे | जिस दौरान उन दोनों ने अपने माँ बाप की कबर पर हाजरी दी और अपने पुराने घर को जाकर देखा , जिधर वो दोनों पल बढ़ कर जवान हुए थे |

उस घर की हालत पहले ही बहुत ख़राब थी और अब इतने अरसे बाद तो वो घर बिलकुल खंडर बन चूका था |

दो दिन बाद वो लोग लाहौर चले आये | ज़ाकिया का लाहौर वाला मकान डबल स्टोरी था |

जब से ज़ाकिया के माँ बाप मरे थे, उसके बाद ज़ाकिया की दोनों बड़ी बहने अपने बच्चो के साथ लाहौर शिफ्ट हो गए थे |

अब मकान के निचले हिस्से में जाकिया और वकास की बहन रेहाना और उसकी फैमिली रहती थी और ऊपर वाले हिस्से में उनकी दरमियाँ बहन अस्मत बीवी और उसकी फैमिली का बसेरा था |

 
लाहौर में अपने बच्चों और उनकी फैमिलीज़ के साथ वकास का अच्छा टाइम पास हो रहा था | ज़ाकिया भी अपनी फैमिली में वापिस आकर अपने आप को थोडा रिलैक्स महसूस कर रही थी | मगर इस के बावजूद वो अपने भाई से थोडा अलग थलग ही रहती |

ज़ाकिया और वकास को लाहौर में आए हुए दो तीन दिन ही गुज़रे थी कि रेहाना बाज़ी का देवर उस्मान और नन्द शाजिया जिनकी फोटो वकास की माँ ने मरने से पेहले रिश्ते के लिए उनको न्यू यॉर्क पोस्ट की थी , वो भी अपने गाँव से उनके घर शिफ्ट हो गए |

ज़ाकिया ने उन दोनों के आते ही उनकी हरकतों से अंदाज़ा लगा लिया था कि उस्मान तो काफी सीधा और शर्मीली तबीअत का नौजवान है जो उससे मिलते हुए ऐसे झिझक रहा था कि जैसे वो लड़की हो और ज़ाकिया लड़का |

जबकि उसके विपरीत जाकिया को उस्मान की बहन शैज़ा एक निहाइत चालू चीज़ नज़र आई |

शैज़ा ने वकास से मिलते ही वकास को घेरने के लिए उस पर डोरे डालने शुरू कर दिए |

जाकिया ने नोट किया कि शैज़ा हर वक़्त वकास के इर्द गिर्द मंडराती रहती है और उसको अपनी अदाओं के जाल में फसाने की कोशिश कर रही है |

शैज़ा के लाहौर आने के तीसरे दिन जब वकास शोपींग के लिए अनारकली बाज़ार गया हुआ था तो ज़ाकिया ने शैज़ा को चुपके से वकास के कमरे में घुसते देखा |

जाकिया को ताजूब हुआ कि जाकर देखा कि शैज़ा वकास के कमरे में क्या करने गई है |

जब ज़ाकिया शैज़ा के पीछे पीछे वकास के कमरे में दाखिल हुई तो उसने शैज़ा को वकास के बिस्तर के सिरहाने के निचे एक रुका रखते हुए पकड लिया |

शैज़ा पहले तो अपनी चोरी पकडे जाने पर थोड़ी घबराई मगर फिर फ़ौरन ही संभल गई |

ज़ाकिया ने तकिये के निचे से शैज़ा का रखा हुआ रुका उठा कर फाड़ा तो पता चला कि शैज़ा ने वकास के नाम एक लव लैटर लिखा है |

उस लव लैटर का आगाज़ शैज़ा ने एक शेयर से किया था कि

“डब्बे में डब्बा और डब्बे में केक

मेरा वकास तो है लाखों में एक”

“यह क्या बकवास है शैज़ा” , ज़ाकिया ने बहुत गुस्से से शैज़ा के सामने ख़त को लहराते हुए पूछा |

“यह बकवास नहीं बल्कि वकास से मेरे प्यार का इज़हार है बाज़ी” शैज़ा ने जवाब दिया |

“तुम्हे शर्म नहीं आती, गैर मर्दों पर डोरे डालते हुए और ऐसे वाहियात किसम के ख़त लिखते हुए” , ज़ाकिया ने शैज़ा को गुस्से में डांटते हुए कहा |

शैज़ा ज़ाकिया का यह रविया देखकर बहुत हैरान हुई और बोली , “ख़त तो मैंने वकास को लिखा है मगर पता नहीं आपकी “झांटें” क्यों सुलगने लगी है बाज़ी” |

जाकिया गुस्से में बोली: अपनी जुबां को लगाम दो चुड़ैल |

“बाज़ी आप तो मुझसे यूं लड़ रही हैं जैसे आप वकास की बहन नहीं बल्कि बीवी हैं और मैं आप की होने वाली सोकन” , शैज़ा ने जब ज़ाकिया को गुस्से में आते देखा तो उसने भी ज़ाकिया को तार्कि बा तार्कि जवाब दिया और गुस्से से अपने पैर पटकती कमरे से बहार निकल गई |

शैज़ा के चले जाने के बाद ज़किया को खुद भी शैज़ा से किये गये अपने बर्ताव पर हैरत हुई |

ज़ाकिया जोकि इससे पहले अपने भाई से शायद नफ़रत करने लगी थी मगर आज ना जाने क्यों शैज़ा के इस ख़त को पडते और उसे अपने भाई से प्यार की पींगे बढाते देखकर ज़ाकिया को अच्छा ना लगा |

इस का सबब शायद यह था कि शैज़ा की कही हुई बातों ने ज़ाकिया की अन्दर पोशीदा औरत को आज जैसे जगा दिया |

ज़ाकिया एक बहन के साथ-साथ थी तो एक औरत और यह औरत की फितरत है कि वो कभी भी अपने प्यार में किसी और औरत को हिस्सेदार बनता नहीं देख सकती |

बेशक आज से पहले तक ज़ाकिया वकास को एक भाई के रिश्ते में ही देखता और सोचा था मगर कभी शैज़ा का यूं वकास से खुला इज़हारे मोहब्बत करना ज़ाकिया को एक आँख ना भाया और शैज़ा से ना चाहते हुए भी एक अजीब सी जलन महसूस करने लगी ,

“इस प्यार को मैं क्या नाम दूं

रब्बा मेरे रब्बा , रब्बा मेरे रब्ब्बा”

इस गाने की तरह जाकिया को भी इस बात की समझ नहीं थी कि वो अपने अन्दर पैदा होने वाली इस जलन को क्या नाम दे |

उस दिन के बाद शैज़ा और जाकिया के दरमियाँ एक तनाव सा आ गया जिस को घर में किसी और ने तो ना सही लेकिन वकास ने जरूर महसूस कर लिया मगर उसने उन दोनों में से किसी एक से भी इसकी वजह मालूम करने की कोशिश नहीं की |

 
इस दौरान ज़ाकिया का ज्यादा तर वक़्त उसके अपने कमरे में ही गुजरने लगा | इसकी वजह यह थी कि एक दो दिन से वो अपने आप को कुछ थकी थकी सी महसूस करने लगी थी | इसीलिए उस का कहीं आने जाने को दिल नही चाह रहा था |

अपनी थकावट के साथ साथ ज़ाकिया को याद आया कि उसका लास्ट पीरियड आए हुए एक महीना होने वाला था मगर अभी तक उसका पीरियड स्टार्ट नहीं हुआ था |

लेकिन ज़ाकिया इस बात से जयादा परेशान ना हुई क्योंकि इससे पहले भी एक अध दफा उसके हारमोन इनबैलेंस होने की वजह से उसके पीरियड की डेट ऊपर निचे हो गई थी |

उधर वकास जो सिर्फ दो हफ्ते के लिए पाकिस्तान आया था और उसके यह दो हफ्ते पलक झपकते में ही गुज़र गये और उसकी वापसी का दिन आन पंहुचा |

वकास की न्यू यॉर्क वापसी से एक दिन पहले की बात है कि ज़ाकिया अपने कमरे में पड़े बैग में अपना अमेरिकन पासपोर्ट तलाश कर रही थी कि उसे याद आया कि उसका पासपोर्ट तो वकास के पास है जिसको लेने के लिए वो अपने भाई के कमरे की तरफ चली आई |

वकास के कमरे में दाखिल होने के लिए ज्यों ही ज़ाकिया ने कमरे के बंद दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया तो दरवाज़ा बगैर कोई आवाज़ पैदा किए थोडा सा खुल गया |

ज़ाकिया की नज़र जैसे ही रूम के अन्दर पड़ी तो अन्दर का मंज़र देखकर जाकिया बस देखती ही रह गयी |

अन्दर कमरे में उसका भाई वकास अपने सारे कपडे उतार कर ना सिर्फ बिलकुल नंगा खड़ा था बल्कि वो साथ ही अपने तने हुए लंड को हाथ में लिए जोर जोर से अपने लंड के साथ खेल भी रहा था |

अपने भाई को इस हाल में देख कर तो ज़ाकिया , आँखें झपकाना ही भूल गई |

उसके सीने की धड़कन बढ़ गई | ज़ाकिया के सामने उसका भाई अपने हाथ में अपना तना हुआ लंड लेकर मुठ मारने में मशरूफ था |

ज़ाकिया ने अपने भाई को इस हालत में देखा तो एक शर्मो ह्या वाली मश्रकी लड़की होने की वजह से ज़ाकिया के दिमाग ने उसे वहां से हटने को कहा |

मगर लगता था कि जैसे ज़ाकिया के क़दमों को ज़मीन ने जैसे जकड लिया हो और वो ना चाहते हुए भी उस जगह से हिल ना पायी और दम बा खुद होकर अपने भाई की हरकतों को देखती रही |

ज़ाकिया इससे पहले भी वेगास में सरसरी तौर पर अपने भाई के लंड को एक दफा देख चुकी थी | मगर आज पहली दफा वो अपने भाई को अपने ही लंड से इस तरह खेलते देख रही थी |

ज़ाकिया ने आज से पहले सिर्फ अपने मशरूम शोहर अकरम को ही पूरी नंगी हालत में देखा था | अकरम का बुढा बदन तो वक़्त के साथ साथ ढीला पड गया था |

ज़ाकिया ने अपनी सहेलियों से मर्दों की मरदाना वजाहत के बारे में सुन तो रखा था लेकिन आज पहली बार वो एक मर्द की जवानी को अपनी आँखों से देख रही थी जोकि उसका अपना ही भाई था |

ओह , क्या सीन था !!! पूरी जवानी में आया हुआ , कसरती बदन वाला एक जवान, उसके सामने नंगा खड़ा था | वकास का खुला और चौड़ा सीना किसी भी लड़की को पागल बनाने के लिए काफी था |

वकास की टांगें बहुत मज़बूत नज़र आ रही थी और उन मज़बूत टांगों के दरमियाँ में पूरा जोर से उठा हुआ उसका गधे जैसा लौड़ा !!!!!!!!

जिसको देखकर ज़ाकिया के सीने की धडकन तेज़ हो गई और उसके जिस्म में एक हलचल मच गई |

जाकिया की नज़रें अपने भाई के तने हुए लौड़े पर जमी हुई थी | यह वोही ही लंड था जो रात के अँधेरे में एक दफा उसकी चूत की गहराईओं में घुस कर उसकी चूत की गर्मी को दूर कर चूका था |

वकास कमरे में अपने काम में मगन था और जोर जोर से मुठ लगा रहा था | अपने गधे जैसे लंड की मुठ मारते हुए वकास अपने हाथों को तेज़ी से चला रहा था |

यूं यूं वकास मुठ लगाता जा रहा था त्यों त्यों उसके लंड की रगों में मजीद तनाव आता जा रहा था | जिस वजह से वकास का लंड और मोटा और सख्त होते जा रहा था |

और फिर थोड़ी देर में अपने लंड से खेलते खेलते वकास के मुंह से एक हलकी सी सिसकरी के साथ ज़ाकियाआआआ का नाम निकला और साथ उसके लंड से पानी छूट गया |

वकास के लंड की पिचकारी कमरे में पड़े बेड की चादर को गिला कर गए |

उसकी पिचकारी की धार इतनी लम्बी थी कि उसकी मणि की छीटें कमरे की दीवार तक भी जा पहुंचे |

भाई को इस तरह अपने नाम की मुठ लगाते और फिर फारिग होते देखने के बाद ज़ाकिया के पैर कांपने लगे और उसका वहाँ पर खड़ा रहना उसके लिए मुश्किल हो गया और वो चुपचाप वहां से चली आई |

जब जाकिया वापिस अपने कमरे में पहुंची तो उसे अपनी चूत वाली जगह में गिलापन महसूस हुआ | जब जाकिया ने अपनी फुद्दी पर हाथ लगाया तो उसे समझ आई कि उसकी चूत भी अपने भाई को मुठ लगाते देख कर गीली हो चुकी थी |

ज़ाकिया ने बाथरूम में जाकर अपने कपडे बदल लिए | मगर अपने भाई की “मुठजनी” वाला नज़ारा उसके दिमाग में जैसे नकश हो गया | जिस वजह से ज़ाकिया सारा दिन अपनी चूत में गर्मी महसूस करती रही |

 
उसी दिन शाम को बाज़ी रेहाना ने वकास और ज़ाकिया से शैज़ा और उस्मान के रिश्ते की बात की | मगर वकास और जाकिया ने शादी से साफ़ इनकार कर दिया |

जब रेहाना ने इनकार की वजह पूछी | ज़ाकिया ने तो कह दिया कि वो अब दुबारा कभी शादी नहीं करेगी |

जबकि वकास ने साफ़ कह दिया कि वो किसी और से मोहब्बत करता है | इसीलिए वो शैज़ा को अपनी बीवी नहीं बना सकता |

शैज़ा को जब वकास के जवाब का इल्म हुआ तो वो दिल बर्दाश्त होकर अपने भाई के साथ वापिस अपने गाँव चली गई |

दुसरे दिन एअरपोर्ट पर जब वकास सब से अलविदा हो रहा था तो उसकी आँखों की पुतली से छलकते आंसुओं को सिर्फ ज़ाकिया ही देख पाई |

वकास का दिल चाहता था कि काश ज़ाकिया उसके साथ चली आए या उसे ही जाने से रोक ले | मगर ऐसा कूछ ना हुआ और वकास टूटे दिल और बोजल क़दमों के साथ डीपारचर्र लाउंज की तरफ चला गया |

वकास को गए अभी तीन दिन ही हुए थे कि ज़ाकिया ने नोट किया कि उसकी बहनों का उससे सलूक पहले के मुकाबले थोडा मुक्तलफ़ हो गया है | जिन बहनों के साथ वो अपनी बाकी की ज़िन्दगी गुजारने अमेरिका छोड़ कर चली आई थी , लगता था कि उन बहनों को जैसे उसकी कोई परवाह ही ना हो |

ज़ाकिया की दोनो बहनों का ज्यादा टाइम अपने बच्चों को दरमियाँ ही गुजरता और चंद ही दिनों में ज़ाकिया अपने आप को अपने ही घर में एक अजनबी सा महसूस करने लगी |

पहले तो ज़ाकिया ने इस बात को अपना वहम समझा | मगर फिर एक दो दिन बाद उसे यकीन हो गया कि कोई वजह जरूर है , जिसकी वजह से उसकी बहने उससे बदली बदली सी हैं |

इस बात की वजह पहले तो ज़ाकिया को समझ नहीं आई मगर फिर एक दिन उस पर यह राज़ भी खुल ही गया |

एक रात ज़ाकिया को नींद नहीं आ रही थी और बिस्तर पर करवटें बदलते बदलते उसे पानी की प्यास महसूस हुई , तो वो आहिस्ता से अपने कमरे से निकल कर किचन की तरफ चली आई |

किचन की तरफ जाते हुए जब वो अपनी बहन रेहाना के कमरे के पास से गुजरने लगी तो ज़ाकिया को बहन के कमरे से बाजी रेहाना और अस्मत की बातों की आवाज़ सुनाई दीं |

रेहाना : अस्मत बहन, मुझे तो शक था कि ज़ाकिया वकास के साथ ही वापिस अमेरिका चली जाएगी , मगर लगता है वो तो पक्की ही इधर रहने का इरादा रखती है |

अस्मत : लगता तो मुझे भी कुछ ऐसा ही है लेकिन अगर वो मनहूस इधर रहना चाहती है तो परेशानी की क्या बात है रेहाना ?

रेहाना : कैसी बात करती हो तुम , परेशानी तो है ना , तुम जानती हो कि गाँव वाला और यह मकान दोनों ज़ाकिया के नाम हैं और हम लोग तो यह समझ रहे थी कि वो अब कभी

वापिस नहीं आएगी और यूं गाँव वाले मकान पर बड़ी बाजी और इस मकान पर अब हम दोनों बहनों का ही क़ब्ज़ा होगा |

साथ ही मेंरी पूरी कोशिश थी कि वकास से शैज़ा और ज़ाकिया से उस्मान की शादी करवा कर शैज़ा और उस्मान के ज़रिए वकास और ज़ाकिया का सारा रूपया पैसा काबू कर लूं |

मगर वो मंसूबा भी नाकाम हो गया और अब यह चुड़ैल ज़ाकिया इधर ही रहना चाहती है तो अब हमें ज़ाकिया के मकानों को अपनी मल्कियत बनाने का ख्याल दिल से निकाल देना होगा |

बहनों की बातें सुन कर ज़ाकिया अपनी प्यास को भूल गई और पानी पिए बगैर वापिस अपने कमरे में चली आई |

उसे अपनी बहनों की बात सुन कर बहुल दिली तकलीफ पहुंची |

अकरम की जायदाद में से अब ज़ाकिया के पास गाँव और लाहौर वाला मकान ही बाकी रह गये थे और अगर ज़ाकिया यह दोनों मकान भी अपने हाथ से गँवा बैठी तो उसे डर था कि आखरी उम्र में वो किधर धक्के खाती फिरेगी |

इसीलिए दुसरे दिन उसने सुबह अपनी बहन रेहाना को सब बता दिया कि उसने रात को उन दोनों बहनों की सब बातें सुन ली हैं और साथ ही रेहाना को यह भी बता दिया की “हाँ” वो अब वापिस अमेरिका भी नहीं जा रही , इसीलिए उसके जीते जी वो लोग उसके मकानों पर कब्जे का ख्याल दिल से निकाल दें |

ज़ाकिया की बात सुन कर रेहाना को गुस्सा तो बहुत आया मगर वो किसी मसलिहत की वजह से चुप हो गई |

रेहाना एक चलाक औरत थी और वो ज़ाकिया को काबू करने के लिए किसी मुनासिब मौके की तलाश में लग गई और यह मौका उसको जल्द ही मिल गया |

 
कुछ ही दिन गुजरे थे | एक शाम रेहाना ने ज़ाकिया को बाथरूम में उल्टियाँ करते देखा तो उसका माथा ठनका |

रेहाना ने फ़ौरन ज़ाकिया से जा कर पुछा, “क्या बात है ज़ाकिया तुम्हारी तबीअत तो ठीक है” |

ज़ाकिया ; मैं ठीक हूँ बाज़ी, लगता है कि कोई बासी चीज़ खा ली थी जिससे पेट खराब हो गया है |

रेहाना जोकि अब तक तीन बच्चों की माँ बन चुकी थी | उसे नाजाने क्यों शक पड़ा कि यह उल्टियाँ पेट ख़राब होने की वजह से नहीं बल्कि मामला कुछ और है |

इसीलिए उसने फ़ौरन ज़ाकिया को साथ लिया और नजदीकी क्लिनिक में एक लेडी डॉक्टर के पास चेकअप के लिए चली आई |

लेडी डॉक्टर ने चेकअप के बाद जब ज़ाकिया को बताया कि वो ना सिर्फ “उम्मीद” से है बल्कि उसकी प्रेगनेंसी का दूसरा मंथ स्टार्ट हो गया है तो डॉक्टर की बात सुन कर ज़ाकिया के तो होश ही उड़ गए और उसके पैरों तले से ज़मीन निकल गई |

ज़ाकिया को अब याद आया कि वकास से चुदाई के वक़्त उसकी बच्चेदानी अपने पूरे जोबन पर थी |

फिर जब वकास ने अपना पानी उसकी फुद्दी में छोड़ा था तो उसकी बच्चेदानी ने वकास के लौड़े का सारा पानी अपने अन्दर पूरा जज़ब कर लिया था और उस का नतीजा आज जाकिया के सामने ज़ाहिर हो गया था |

रेहाना पर भी यह खबर एक बिजली बन कर गिरी मगर उसने क्लिनिक में ज़ाकिया से पूछ ताश मुनासिब ना समझी |

यों ही रेहाना ज़ाकिया के साथ घर में दाखिल हुई उसने ज़ाकिया पर सवालों की बोछार कर दी |

रेहाना : ज़ाकिया यह किसका गुनाह अपने पेट में पाल रही हो |

ज़ाकिया खामोश रही , जवाब देती भी तो क्या कि उसके पेट में पलने वाले बच्चे का बाप उसका अपने ही सगा भाई है |

रेहाना : खामोश क्यों हो , जवाब दो, कौन है इस बच्चे का बाप , किसी अंग्रेज़ के साथ रंगरलियाँ मनाती रही हो तुम, जवाब दो |

“कोई अंग्रेज़ नहीं है बाज़ी”, ज़ाकिया अपनी नज़रें झुकाए शर्मिंदगी से बोली |

“कोई अंग्रेज़ नहीं तो फिर कौन है जिससे तू अपना मुंह काला करती रही है” , रेहाना चिल्लाई |

ज़ाकिया कुछ ना बोली |

ज़ाकिया की खामोशी देखकर रेहाना के दिमाग में अचानक एक बात आई और उस बात को सोचते ही रेहाना फ़ौरन चौंक गई और बोली, “अच्छा अब मुझे यह सारा मामला समझ आया है , लगता है कि वकास और तुमने निकाह तो जाली किया था मगर सुहागरात असल वाली मना कर बच्चा भी असली ही बना लिया है , क्यों मैं ठीक कह रही हूँ ना” |

रेहाना के मुंह से यह बात सुनकर ज़ाकिया का रंग फक हो गया और वो अपनी बहन से नज़रें चुराने लगी |

ज़ाकिया के चेहरे का रंग उड़ता देखकर रेहाना समझ गई कि उसका तीर सही निशाने पर लगा है |

“ज़ाकिया तुम्हे शर्म नहीं आई , अपने ही भाई से नाजायज़ तालुक्कात कायम करते, अगर तुम्हे इतनी ही गर्मी चडी थी तो किसी और को काबू कर लेती , मगर अपने ही भाई..... , लानत है तुम पर बेगैरत” रेहाना ने ज़ाकिया को कोसते हुए कहा |

ज़ाकिया : क्या बकवास कर रही है आप , मैंने वकास को नहीं फंसाया बल्कि उसने मेरे साथ ज़बरदस्ती ज्यादती की है |

रेहाना : ज़बरदस्ती , वाह जी वाह, जैसे तुम अभी मासूम बच्ची हो ना |

ज़ाकिया : बाजी , आप मेरी बात का यकीन करें मैं बेगुनाह हूँ |

रेहाना : अपनी बेगुनाही अब तुम बाज़ी मुख़्तार और बाजी अस्मत के सामने ही पेश करना |

“नहीं बाज़ी, आप उन दोनों को कुछ ना बताना वरना मैं खुदकुशी कर लूंगी” ज़ाकिया ने रोंदी आवाज़ में अपनी बहन के सामने हाथ बांधते हुए कहा |

जब रेहाना ने ज़ाकिया को अपनी मिन्नत करते देखा तो उसने सोचा कि अब उसके लिए यह एक सुनहरी मौका था कि वो ज़ाकिया को ब्लैकमेल करके उसकी सारी जायदाद अपने नाम करवा सकती है |

रेहाना : अच्छा अगर तुम कहती हो , मैं किसी को कुछ नही बताउंगी मगर इसके लिए मेरी एक शर्त है |

जाकिया : वो क्या ?

रेहाना : यह बात राज़ में रखने के लिए तुम्हे अपने दोनों मकान हम तीनो बहनों के नाम लिखवाना होंगे और अपना यह नाजायज़ बच्चा भी गिराना होगा |

ज़ाकिया : एबॉर्शन की बात तो ठीक है मगर मकान बाजी?

“अगर मगर की कोई गुंजाश नही , मेरी शर्त मंजूर है तो बता दो वरना मैं तुम्हें पूरे खानदान में रूसवा कर दूंगी “ रेहाना ने एक स्फ़ाक लहजे में अपना फैसला सुना दिया |

बहन के दो टूक फैसले के सामने ज़ाकिया की इनकार की हिम्मत और कोई चॉइस नहीं थी इसीलिए “ अच्छा बाज़ी मैं राज़ी हूँ , मगर मुझे दो दिन की मोहलत दो” , ज़ाकिया ने अपनी हार मानते हुए कहा और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी |

कमरे में वापिस आते वक़्त ज़ाकिया को पीछे से रेहाना की आवाज़ सुनाई दी, “अगर तुमने दो दिन तक अपना वादा पूरा ना किया तो याद रखना, मैं तुम्हें हीरा मंडी में जाकर किसी कोठे पर बैठा दूंगी , समझी तुम” |

अपनी बहन की बकवास को सुनकर जाकिया की आँखों में आंसू उमड़ आए |

लेकिन वो रेहाना की बात को अनसुनी कर अपने कमरे में पहुँच गई और दरवाज़ा बंद करके अपने बिस्तर पर गिर पड़ी और फूट फूट कर अपनी किस्मत पर रोने लगी |

रात का अधेरा आहिस्ता आहिस्ता बढने लगा और ज़ाकिया बिना कुछ खाए पिए ही अपने बिस्तर पर लेटे रही |

वो काफी देर तक सोने की कोशिश करती रही | मगर उसके दिमाग में चलने वाली सोचों ने उसे सोने ना दिया |

अपनी बहन का सफकाना और ब्लैकमेल वाला रैवीया देखकर ज़ाकिया को इस बात की अब समझ आ गई कि इस दुनिया में सिर्फ और सिर्फ माँ बाप का ही एक रिश्ता ऐसा है जो बेलोस होता है बाकी सब रिश्ते वक़्त के साथ साथ कभी ना कभी लालची हो जाते हैं |

जिन बहनों के घर आबाद करने के लिए ज़ाकिया ने कुर्बानी दी और अपनी जवानी को एक बूढ़े आदमी के हवाले कर दिया था | आज इन ही बहनों का लालची पन खुलकर उसके सामने आ गया था |

आज उसकी बहने उसकी कुर्बानी का सिला उसके सर से छत का साया छीन कर लोटाना चाह रही थीं | अपनी बहनों के इस सलूक से ज़ाकिया का दिल खून के आंसू रो रहा था |

इसी किस्म की बातें सोचते सोचते ज़ाकिया का दिमाग अपने आप उसके भाई वकास की तरफ मुड गया |

वकास का ख्याल दिल में आते ही बचपन से लेकर जवानी तक ज़ाकिया को अपने और भाई के दरमियाँ होने वाले तमाम वाकियात और बातें अपनी जागती आँखों में एक ख्वाब की तरह सामने आने लगीं |

अपने जाली निकाह से लेकर उसके शोहर अकरम की मौत के बाद वकास ने उसे हौंसला दिया और ज़ाकिया को एक गमज़दा जिंदगी से बाहर निकाला |

उसके बाद कई मौके पर वकास का ज़ाकिया से अपनी बातों और हरकतों के ज़रिए इज़हारे मोहब्बत करना और आखिरकर अपनी ही बहन के साथ ज़बरदस्ती जिस्मानी तालोक़त कायम करके उसे अपने बच्चे की माँ बना यह ज़ाकिया के ख्याल में उसके भाई वकास की उसके साथ प्यार की इंतिहा थी |

 
कहते हैं कि माँ बनने के बाद ही एक औरत की तकमील होती है |

इसीलिए हर औरत की तरह अपनी शादी के बाद ज़ाकिया की भी यह दिली ख्वाइश थी कि वो एक बच्चे की माँ बनकर अपने आप को एक मुकम्मल औरत के रूप में ढाले मगर अकरम बुढा होने की वजह से ज़ाकिया को औलाद की ख़ुशी ना दे सका |

और आज जब ज़ाकिया को पता चला कि वो प्रेग्नेंट है तो इस बात के बाजवूद कि उसके पेट में उसके अपने ही भाई का नाजायज़ बच्चा पल रहा है , फिर भी नाजाने क्यों आज ज़ाकिया अपने आप को एक मुकम्मल औरत महसूस करने लगी थी |

यह बातें सोचते सोचते ज़ाकिया के हाथ अपने आप शलवार के ऊपर से उसकी फूली हुई चूत के मोटे लिप्स तक जा पहुंचे | उसकी चूत में एक तंदूर जैसी आग लगी हुई थी |

“नहीईईइ.... मैं यह क्या बातें सोचने लगी हूँ , कुछ भी हो , बहन भाई का किसी भी किसम का जिस्मानी ताल्लुक़ एक बहुत बड़ा गुनाह है और मैं यह गुनाह नहीं कर सकती”, ज़ाकिया ने अपने जज़्बात से लडते हुए फ़ौरन अपनी चूत से अपना हाथ हटाया |

बाबा बुल्ले शाह का एक बहुत ही प्यारा शेयर है कि

“ऐविं रोज़ शैतान दे नाल लड़दा

कदी नफस अपने नाल लडया ही नई”

यह सच्ची बात है कि इंसान एक शैतान से तो लड़ सकता है मगर अपने जिस्म के अन्दर छूपे हुए “नफस” (अपनी ख्वाइश और जज़्बात” से लड़ना हर किसी के बस की बात नहीं |

इसीलिए यह लगता था कि आज ज़ाकिया भी अपनी नफस से लड़ते हुए अपनी लड़ाई हारने लगी थी |

आखिरकार ज़ाकिया खुबसूरत और जवान थी और हर जवान औरत की तरह उसके जिस्म में भी उमंगें और जज़्बात कूट-कूट कर भरे हुए थे | उसके जिस्म की भी कुछ जरूरतें थीं |

जिनको अकरम सारी ज़िन्दगी कभी भी सही तरीके से पूरा नहीं कर पाया था | वो ज़ाकिया को हर दफ़ा प्यासा और तडपता छोड़ देता और ज़ाकिया इसे अपनी किस्मत समझकर सबर शुक्र के साथ बर्दाश्त करती रही |

मगर आज अपनी बहनों के सलूक की वजह से ज़ाकिया के अन्दर अपनी बहनों के लिए ना सिर्फ नफरत पैदा हो गई बल्कि इस नफरत ने फ़ौरन ही एक बगावत की शकल इख़्तियार कर ली |

ज़ाकिया यह सोचने लगी कि जब उसकी बहनें लालच में आ कर उसके साथ बहन के सगे रिश्ते को बुला बैठी हैं तो फिर उसका भी यह हक बनता है कि वो भी

“चाहत में क्या दुनियादारी

इश्क में कैसी मजबूरी”

वाले इस शेयर के बकोल अपने आपको रिश्तों की क़ैद से आज़ाद करके अपनी ज़िन्दगी को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक गुज़ारे और एन्जॉय करे |

हमारे इलाके में एक मिसाल बहुत मशहूर है कि “रंडी (बेवा औरत) तो शायद अपना रंडेपा काट ही ले मगर उसे मोहल्ले के “छ्दाई ((Bachelor) नहीं काटने देते |

इसी तरह कहते हैं कि पहली बार किसी से भी चुदवाने में हर लड़की या औरत नखरा जरूर करती है , लेकिन एक बार चुदने के बाद जब उसे चुदाई का स्वाद आता है तो फिर वो चुदाई के बगैर रह नहीं पाती |

और पेप्सी के टी.वी. ऐड की तरह हर वक़्त यह ही कहती है कि

“यह चूत मांगे मोर”

ऐसा ही कुछ हाल उस वक़्त ज़ाकिया का हो रहा था |

वोही ज़ाकिया जो इससे पहले अपने भाई से जिंसी ताल्लुक़ात को गुनाह समझती थी |

आज वो इस क़दर बागी हो गई थी कि बिस्तर पर पड़ी अपने भाई के लंड के बारे में सोचने पर मजबूर हो गई |

ज़ाकिया उलटी हो कर बिस्तर पर लेटी हुई थी | अब दुबारा उसका एक हाथ उसके पेट के निचे से और दूसरा हाथ उसकी कमर के पीछे से होकर उसकी चूत पर आ कर उसकी फुद्दी से खेलने लगा था |

ज़ाकिया ने अपनी आँखें मूँद लीं और उस लम्हे को याद करने लगी जब वेगास में वकास का लंड उसकी चूत की दीवारों को छेदता हुआ उसकी फुद्दी में पहली बार दाखिल हुआ था तो एक शादी शुदा औरत होने के बावजूद ज़ाकिया को उस वक़्त ऐसा लगा जैसे वो अपनी सुहागरात को पहली दफ़ा चुदवा रही हो |

“भाई के लंड का तड़का

बहन की चूत का अंग अंग फड़का”

 
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