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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“बार-बार ये बात कहकर मुझे शर्मिंदा मत करो।” गरुड़ ने प्यार से कहा।

तवेरा मुस्कराई और आगे बढ़ गई। खुशी से गरुड़ के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।

वो तो तवेरा को शीशे में उतारना चाहता था, परंतु सारा काम अचानक ही उसके पक्ष में बन गया। तवेरा उससे ब्याह करने को तैयार थी।

वो नहीं चाहती थी कि उसके पिता महाकाली की कैद से आजाद हो।।

वो नगरी की मालकिन बनकर रहना चाहती थी और आजाद जिंदगी बिताना चाहती थी।

“ओह। गरुड़ बड़बड़ाया–“ये सब कितना अच्छा हो रहा है। बिल्कुल मेरी इच्छा की तरह। | गरुड़ सीधा अपने कमरे में पहुंचा और दरवाजा बंद करके अलमारी की तरफ बढ़ गया। वो इस बात को जरा भी महसूस नहीं कर सका कि उस कमरे में रातुला का आदमी पहले से ही छिपा हुआ

| गरुड़ ने अलमारी खोलकर वो किताब निकाली और उसके भीतर मौजूद यंत्र से सम्बंध बनाकर सोबरा से बात करने की कोशिश में लग गया।

सोबरा से बात हो भी गई। मैंने कर दिया सोबरा ।” गरुड़ खुशी से बोला।

क्या?” यंत्र में से महीन-सी सोबरा की आवाज उभरी।

“तवेरा मेरे से ब्याह करने को तैयार है।” गरुड़ ने कहा।

ये अच्छी खबर दी।”

“मेरी उससे स्पष्ट बात हुई है। परंतु अपने पिता के बारे में उसका व्यवहार अजीब-सा है।”

वो कैसे?

“तवेरा नहीं चाहती कि उसके पिता को आजादी मिले। वो पिता के बिना आजाद जीवन जीना चाहती है।”

सोबरा की तरफ से आवाज नहीं आई।

सोवरा ।” गरुड़ ने पुकारा।

सुन रहा हूं। सोच रहा हूं, तवेरा ऐसी तो नहीं थी।”

“हां, अचानक ही उसके व्यवहार में मैंने ये बदलाव पाया।”

मेरे खयाल में तुम्हें सतर्क हो जाना चाहिए गरुड़।”

क्या मतलब?”

“ये तवेरा की कोई चाल भी हो सकती है। हो सकता है कि उसे तुम पर शक हो गया हो।”

* “मुझे ऐसा नहीं लगता।” ।

“मुझे ऐसा ही लगता है। तवेरा तो जथूरा की भक्त है। अपने पिता की इच्छा के बिना कभी कोई कदम नहीं उठाती। ऐसे में वो एकाएक कैसे जथूरा के खिलाफ हो सकती है। अवश्य इसमें कोई रहस्य है।” सोबरा की आवाज यंत्र से निकल रही थी—“मेरे खयाल में तुम्हें तवेरा की बात पर यकीन नहीं करना चाहिए। परंतु उसके साथ ही रहो और चाल को पहचानो।”

समझ गया।” ।

“देवा और मिन्नो का क्या हुआ?”

वो और उनके साथी महल में आ पहुंचे...।”

जानता हूं, आगे की बात बताओ।” ।

“अभी तक देवा और मिन्नो जथूरा को महाकाली की कैद से छुड़ाने को तैयार नहीं हुए।”

क्या कहते हैं वे?”

गरुड़ ने वहां हुई बातचीत के बारे में बताया।

वो तैयार हो जाएंगे।” सारी बात सुनकर, उधर से सोबरा की आवाज आई–“इसके अलावा उनके पास अब दूसरा रास्ता नहीं।”

मैं क्या करूं?”

“तुम इसी तरह उनके बीच रहो। परंतु तवेरा के दिल में क्या बात है, उसे जानने की चेष्टा करो। मुझे तो ऐसा ही लगता है कि तवेरा को तुम पर किसी बात की वजह से शक हो गया है। वो शायद तुम्हें बातों से भटका रही हो।”

। “मुझे विश्वास नहीं होता तुम्हारी बात पर ।”

आने वाले वक्त का रुख देखो। शायद कोई नई बात पता चले।”

बातचीत खत्म करके गरुड़ ने किताब वापस अलमारी में रखी और कमरे से बाहर निकल गया। | कमरे में छिपा रातुला का आदमी छिपी जगह से बाहर निकला और गरुड़ को गया पाकर कमरे से बाहर आ गया।

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रातुला पोतेबाबा से मिला।

हमारी आशंका सही साबित हुई।” रातुला ने कहा-“गरुड़, यहां की खबरें सोबरा को दे रहा है। मेरे आदमी ने सारी बातचीत सुनी।”

“मुझे वो बातें बताओ।” रातुला ने अपने आदमी से सुनी सारी बातें बताईं।

गरुड़ गम्भीर अपराध कर रहा है। पोतेबाबा शांत स्वर में कह उठा।

“अति गम्भीर ।”

गरुड़ जन्म-भर की कैद का हकदार है। परंतु ये सजा अभी नहीं, जथूरा के आजाद होने के बाद देंगे।”

“सोबरा को शक है कि तवेरा कोई चाल चल रही है। उसने ई चाल चल रही है। उसने

“कोई बावधन किया है।

कोई बात नहीं, मैं तवेरा को इस बारे में सावधान कर दूंगा।”

“सोबरा आसानी से पहचान गया कि तवेरा कोई चाल खेल रही

“शक तो होना ही था, क्योंकि तवेरा ने अचानक ऐसी बात कह दी थी कि जिस पर फौरन विश्वास करना कठिन है। परंतु मुझे पूरा यकीन है कि तवेरा गरुड़ को धोखे में रखे रखेगी और सोबरा तक उल्टी खबरें पहुंचाएगी। तुम समझते हो कि ये बात यहीं खत्म हो गई। नहीं, अब सोबरा तवेरा के बारे में सोच रहा होगा कि वो उलट क्यों गई। वो सोच रहा होगा कि गरुड़ जब तवेरा से ब्याह कर लेगा तों, गरुड़ की आड़ लेकर, वो जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाएगा। ऐसे ढेरों खयाल उसके भीतर से उठ रहे होंगे। यानी कि वो जो सोचना चाहता होगा, वो नहीं सोच पा रहा होगा। गरुड़ का सहारा लेकर हुमने उसकी सोचों को भटका दिया। इसका फायदा हमें आने वाले वक्त में मिलेगा।” पोतेबाबा ने कहा।

“क्या सोबरा को भटकाना आसान है?”

गरुड़ के द्वारा खबरें उस तक पहुंचेंगी तो आसान है। उसे गरुड़ पर भरोसा होगा। तभी तो वो ये खेल खेल रहा है।”

“गरुड़ ने हमें धोखा दिया।”
 
*अवश्य। हम उसे जथूरा का सर्वश्रेष्ठ सेवक समझते रहे थे और वो भीतर ही भीतर सोबरा के लिए काम कर रहा था। मुझे कई बार लगता था कि सोबरा आसानी से हमारी चालों को पीट देता है। परंतु हमें कभी भी शक न हुआ कि गरुड़ ही वो भेदी है।”

देवा-मिन्नो की तरफ से कोई खबर आई?” रातुला ने पूछा। *अभी तक तो उनकी तरफ से कोई बुलावा नहीं आया।”

“क्या पता वो जथूरा को महाकाली की कैद से छुड़ाने को तैयार ही न हों। तब हम क्या करेंगे।”

“धैर्य रखो। वो अवश्य तैयार होंगे। इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं ।”

“देवा का कहना है कि जथूरा को पिता से मिली ताकतों का सोबरा के साथ बंटवारा करना चाहिए था।”

“ये हमारी समस्या नहीं है। इस बारे में देवा जाने, जथूरा जाने । हमें अपने कार्य की तरफ ध्यान देना है।”

जथूरा महान है।” रातुला ने कहा। “उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” कहने के साथ ही पोतेबाबा आगे बढ़ गया।

पोतेबाबा तवेरा से मिला। सारी बात उसे बताई।

“सोबरा ने गरुड़ के मन में, तुम्हारे लिए शक डाला है कि तुम कोई चाल खेल रही हो।” पोतेबाबा ने कहा।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

“तुम्हें सावधान रहकर, गरुड़ के साथ बातचीत करनी होगी मेरी बच्ची ।” ।

“मैं अवश्य सावधान रहूंगी।” तवेरा ने गम्भीर स्वर में कहा-“वो मेरे से ब्याह करने के लिए मरा जा रहा है।” ।

“ये सोबरा की योजना है। वो गरुड़ द्वारा जथूरा की हर चीज को अपने अधिकार में कर लेना चाहता है।” “उसका ये सपना कभी पूरा नहीं होगा।”

सोबरा का गरुड़ नाम का मोहरा हमारे बीच रहेगा तो खतरा बना रहेगा।” ।

गरुड़, मेरे द्वारा ही तो पिताजी का सब कुछ जीतना चाहता है।” तवेरा मुस्करा पड़ी–“आप निश्चिंत रहिए। सोबरा या गरुड़ को निशाना साधने के लिए मेरा कंधा नहीं मिलेगा।”

तुमने गरुड़ से ऐसी बातें कहनी हैं कि जिन्हें वो सोबरा को बताए और सोबरा की सोचें लक्ष्य से भटकें ।”

“ऐसा ही कर रही हूँ मैं।”

तुमने जो सोचा है, वो बताओ कि गरुड़ को कैसे इस्तेमाल करना चाहती हो?”

क्या देवा और मिन्नो तैयार हो गए, पिताजी को महाकाली की पहाड़ी से आजाद कराने के लिए।”

अभी तक तो नहीं ।”

क्या वो तैयार होंगे?”

मेरे ख़याल में तो अवश्य ।”

तो मैं उनके साथ जाऊंगी। साथ में गरुड़ को भी ले जाऊंगी। गरुड़ को मैं अपने साथ रखें तो बेहतर होगा।” तवेरा ने गम्भीर स्वर में कहा—“किसी मुनासिब मौके पर मैं गरुड़ को उसकी धोखेबाजी की सजा भी देंगी।

“ये काम तुम मत करना।”

क्यों?”

“तुम चूक गईं तो गरुड़ फिर तुम्हें नहीं छोड़ेगा ।”

तवेरा मुस्करा पड़ी। पोतेबाबा की निगाह तवेरा पर थी।

“क्या आपको लगता है कि गरुड़ को सजा देने में मेरे से चूक हो जाएगी।”

“हमारा लक्ष्य जथूरा की आजादी है।”

“मैं जानती हूं।”

ऐसी कोई हरकत मत कर देना मेरी बच्ची कि जथूरा की आजादी में समस्या पैदा हो जाए।” ।

“इस बात का मैं हमेशा ध्यान रखेंगी। क्योंकि मैं भी पिता की आजादी चाहती हूं।” तवेरा ने कहा-“आप किसी तरह देवा-मिन्नो को इस बात के लिए तैयार कीजिए कि वो पिताजी को आजाद कराने को तैयार हो जाएं।” ।

“मैंने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। अब उनकी तरफ से ही जवाब आना बाकी है।”

“पिताजी के बिना यहां मेरा मन नहीं लगता।” ।

“मुझे भी ऐसा ही लगता है। आशा है कि वे जल्दी आजादी पा जाएंगे।”

“मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि गरुड़ धोखेबाजी कर सकता है फिर भी हमें वक्त पर पता चल गया।” तवेरा कह रही थी—“मुझे इस बात की भी चिंता है कि महाकाली अपनी पूरी ताकत लगा देगी कि देवा-मिन्नो पिताजी को आजाद न कर सके।”

“उसने कैद में देवा-मिन्नों के नाम का तिलिस्म बांधा है, इस बात को हमेशा ध्यान रखो मेरी बच्चीं। देवा-मिन्नो समझदार हैं और अपनी समझदारी से वे तिलिस्म तोड़ते हुए जथूरा तक अवश्य पहुंच जाएंगे।” पोतेबाबा ने कहा।
 
“परंतु महाकाली कई नई समस्याएं उनके सामने खड़ी कर देगी।”

“खतरे की आशंका तो हर वक्त लगी रहेगी। इस बारे में चिंता करना व्यर्थ है। परंतु तुम उनके साथ रहोगी। तुम अपनी ताकतों के दम पर उन्हें रास्ते में पड़ने वाली कई समस्याओं से मुक्ति दिला सकोगी।”

“मेरे से जो होगा, वो मैं अवश्य करूंगी।” तवेरा गम्भीर थी। “जथूरा महान है।”

“सच में पिताजी जैसा दूसरा कोई नहीं ।” तवेरा ने गहरी सांस लेकर कहा।

पोतेबाबा बाहर चला गया। तवेरा अपने कमरे में पहुंची। वहां दो सेविकाएं पहले से ही मौजूद

थीं।।

तवेरा कुर्सी पर बैठी और हाथ में टेबल पर रखा फूल उठाकर मंत्रों का जाप करने लगी। आधा मिनट ही बीता होगा कि एकाएक फूल का रंग बदलने लगा। तवेरा ने फूल को टेबल पर रख दिया

और उसे देखने लगी। चंद पल बीते कि फूल का रंग बेहद तेजी से बदलने लगा। कभी कोई रंग तो, कभी कोई रंग। । “आह ।” जथूरा की आवाज वहां गूंजी–“मुझे दर्द हो रहा है।

क्या तुम हो तवेरा बेटी?” ।

“हां, पिताजी। बात करना जरूरी था। आपके लिए खुशखबरी

कहो, जल्दी कहो।”

देवा-मिन्नो महल में आ पहुंचे हैं। उनसे बात चल रही है, आपको कैद से छुड़ाने के लिए।”

ये खबर तो सच में अच्छी है। ये बात मैं पहले ही जान चुका हूं, जल्दी बात पूरी करो। मुझे अकेला छोड़ दो। तुम मुझसे बात करने के लिए अपनी ताकतों का इस्तेमाल करती हो तो मुझे बहुत दर्द होता है। देवा-मिन्नो तैयार हैं मुझे आजाद कराने के लिए?”

पोतेबाबा का कहना है कि वो तैयार हो जाएंगे।”

बहुत कष्ट में हूं मैं। महाकाली की सख्तियां बढ़ती ही जा रही हैं। वो मेरे से क्रूरता से पेश आती है।”

“सब ठीक हो जाएगा पिताजी। आप आराम कीजिए।”

अगले ही पल फूल का रंग बदलना रुक गया। तवेरा ने गहरी सांस ली और आंखें बंद कर ली। दोनों सेविकाएं अपनी जगह पर मौजूद थीं।

तभी महाकाली की आवाज वहां गूंजी तो, तवेरा ने तुरंत आंखें खोल दीं। । “तुमने अभी जथूरा से बात की ।”

“हां।” तवेरा ने हर तरफ नजरें घुमाईं तो टेबल पर उसे नन्ही-सी महाकाली की परछाई दिखी। ये देखकर तवेरा फौरन उठी और हाथ मारकर उस परछाई को नीचे गिरा दिया–“तेरे को कितनी बार कहा है कि तेरी जगह नीचे है, ऊपर नहीं ।”

महाकाली के हंसने की आवाज आई। बहुत नफरत करती है मुझसे ।”

बहुत ज्यादा।” तवेरा ने कठोर स्वर में कहा।

तू जानती है कि तू जब भी जथूरा से अपनी ताकतों द्वारा बात करेगी, उसे तकलीफ होगी। फिर भी तू बात करती है।”

तुझे क्या।”

मेरी शागिर्दी में आ जा। सब ठीक कर दूंगी मैं।”

कभी नहीं, तू अपनी ताकतों का बुरा इस्तेमाल करती है। मैं ऐसी नहीं हूं। मैंने तंत्र-मंत्र का ज्ञान हासिल किया है अपनी इच्छा से। किसी को दुख पहुंचाने के लिए नहीं। जथूरा की बेटी तेरी शागिर्दी नहीं कर सकती।”

बेशक तेरे पिता की तकलीफें बढ़ जाएं।”

तेरी ये बातें ज्यादा नहीं चलेंगी महाकाली । तेरा अंत हो के ही रहेगा।”

बेवकूफ! महाकाली को कोई नहीं मार सकता।” महाकाली के हंसने की आवाज आई–“मेरा कोई मुकाबला नहीं है। तू तो मेरे सामने नादान-सी बच्ची है। यदि तू मेरे पास आ जाए तो मैं तुझे निपुण बना देंगी—तुझे...।”

“तू चली जा यहां से।” तवेरा गुर्रा पड़ी।

महाकाली की तरफ से फौरन आवाज नहीं आई।

“ठीक है। एक बात तो बता कि तू कौन-सी चाल चल रही है?”

क्या मतलब?”

गरुड़ को तू कहती है कि तेरे को जथूरा की आजादी नहीं चाहिए और मुझसे दूसरी तरह बात करती है।”

तुझे गरुड़ वाली बात कैसे मालूम?” तवेरा चौंकी।

मुझे सब मालूम है।” महाकाली हँसी–“मैं जो चाहूं वो मालूम कर लेती हूं।”

तवेरा बेचैन दिखी।

क्या चाल खेल रही है तू गरुड़ से?”

“तुझे क्या?”

घबरा मत । तेरी चाल के बारे में मैं सोबरा को नहीं बताऊंगी। इधर की बात उधर करना मेरे काम का हिस्सा नहीं है।”

बेहतर होगा कि तू देवा-मिन्नो के बारे में सोच। वो....।”

वे दोनों तो मेरे बेवकूफ बच्चे हैं।”

“तूने पिताजी की आजादी को लेकर, तिलिस्म उन दोनों के नाम से बांध रखा है।”

“अवश्य। परंतु देवा-मिन्नो वहां तक पहुंच ही नहीं पाएंगे। रास्ते में मैं उनके लिए इतनी परेशानियां खड़ी कर दूंगी कि वे भटककर रह जाएंगे। भला जथूरा को मैं अपनी कैद से क्यों आजाद होने दूंगी।” महाकाली की परछाई ने कहा।

। “तूने तिलिस्म उनके नाम से बांधा है तो उनके लिए परेशानियां क्यों खड़ी करेगी?” ।

मेरा जो मन चाहेगा, वो करूंगी मैं ।” ।

“तू बेईमान है।” तवेरा दांत भींचकर कह उठी।।

बेईमान नहीं। ये ताकत है मेरी। मैं देवा-मिन्नो को इस तरह भटका दूंगी कि वे जान गवां बैठेंगे। तिलिस्म तक पहुंच ही नहीं पाएंगे। मेरी ताकत का तुझे अच्छी तरह अंदाजा है तवेरा।”

तवेरा होंठ भींचे खड़ी रही।

चलती हूँ। मेरे पास कामों का ढेर है, वो मुझे पूरे करने हैं।” इसके साथ ही महाकाली की परछाई लुप्त हो गई। तवेरा के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट नजर आ रही थीं।

आप महाकाली से डरती क्यों हैं?” एक सेविका ने कहा। तवेरा ने सेविका को देखा फिर शब्दों को चबाकर कह उठी।

“डरना पड़ता है। वो है ही ऐसी। महाकाली की ताकतों से पार पाना आसान नहीं है। उसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। तभी तो आज वो विद्या के सबसे ऊंचे चबूतरे पर विराजमान है।”

“फिर तो वो देवा-मिन्नों की जान अवश्य ले लेंगी। वो जो चाहती है, करके रहेगी।”

गुस्से से भरी तवेरा कमरे में टहलने लगी।

मखानी जब वापस लौटा तो वो उस बिल्ले की तरह लग रहा था जो ढेर सारी मलाई तबीयत से चट करके आया हो। उसके चेहरे पर असीम शांति के भाव थे। वो कुर्सी पर आ बैठा।

बांके ने रुस्तम राव के कानों में कहा।

छोरे। जरो मखानो की फोटू तो खींचो। हरी-भरी घासो चरों के आयो हो ।”

“तू क्यों जलेला है बाप ।”

उधरो देखो, कमला रानी भी आ गयो हो। थकी-थकी सी लागे हो। लगो हो मखानी उधेड़ दयो हो उसको।”

“बुरी नजर मत डाईला बाप ।” ।

“अंम तो निरीक्षण करो। का पतो बलात्कारों की गवाही देना पड़ो जावे।”

रजामंद है बाप। निश्चिंत रहेला ।”

म्हारी लाटरो न लागो हो। घणों सूखो पड़ो हो इधरो तो।”

कमला रानी मखानी के पास वाली कुर्सी पर आ बैठी।

मखानी उसे देखकर मुस्कराया। “तूने तो थका दिया मुझे।” कमला रानी ने मीठी शिकायत की।

बहुत देर बाद जो हाथ लगी तू।”

अब तो शांत हो गया तू।" ।

क्यों न होऊंगा। पेट जो भर गया। तू अपने बारे में बता, मजा आया।”

क्यों न आएगा।” कमला रानी मुस्कराकर बोली-“तेरा साथ है तो मजा ही मजा है।”

फिर चलें?”

“पागल है। जान लेगा मेरी।”
 
क्यों न आएगा।” कमला रानी मुस्कराकर बोली-“तेरा साथ है तो मजा ही मजा है।”

फिर चलें?”

“पागल है। जान लेगा मेरी।”

थोड़ा आराम कर ले। दोबारा मौका मिलते ही फिर बाथरूम में जाएंगे।” ।

मेरा दिमाग खराब नहीं है।”

तू नखरे बहुत दिखाती है।”

नखरे नहीं दिखाऊंगी तो तू कैसे मानेगा कि मैं औरत हूं।”

“वो मैं मान जाऊंगा।”

कैसे?”

“बाथरूम में जाकर ।”

“भूतनी के, तेरे को कोई और खयाल नहीं आता।” कमला रानी ने बेहद मीठे स्वर में कहा।

ये बता, यहां पर क्या हो रहा है। देवा-मिन्नो जथूरा को आजाद कराने के लिए राजी हो गए?” ।

तेरे को नहीं पता। तेरे सामने ही तो बातें हो रही थीं।”

“मैंने नहीं सुना। तब मेरा ध्यान दूसरी बात पर था। बता यहां पर क्या चल रहा है?” मखानी ने कहा।

कमला रानी मखानी को सारा मामला बताने लगी। नगीना, देवराज चौहान से कह उठी।

अब ये तो तय है न कि आपने जथूरा को आजाद कराने जाना हां ।”

तो वक्त क्यों बर्बाद कर रहे हैं। इस बारे में पोतेवाबा से बात कीजिए, ताकि रवानगी तय हो सके।”

देवराज चौहान ने सामने बैठी मोना चौधरी को देखा।

मोना चौधरी ने भी बात सुन ली थी। उसने सहमति से सिर हिला दिया।

देवराज चौहान उठा और दरवाजे के पास जा पहुंचा। बाहर जथूरा के दो सेवक मौजूद थे।

पोतेबाबा को बुलाओ।” देवराज चौहान ने कहा।

जी, अभी बुलाते हैं।” कहने के साथ ही एक सेवक वहां से चला गया।

देवराज चौहान वापस लौटा।

कह दिया पोतेबाबा से मिलने के लिए?” नगीना ने पूछा।

हां।” देवराज चौहान वापस कुर्सी पर जा बैठा। सामने बैठी मोना चौधरी कह उठी।।

हमारे लिए आसान नहीं होगा, जथूरा तक पहुंचना। सोबरा के कहने पर महाकाली ने, जथूरा को अपनी कैद में रखा हुआ है और हम दोनों के काम का तिलिस्म बांध रखा है कि हमारे अलावा कोई जथूरा तक न पहुंच सके। परंतु हम भी आसानी से नहीं पहुंच सकते। क्योंकि महाकाली की मंशा है कि जथूरा आजाद न हो सके। हम इस काम के लिए आगे बढ़ेंगे तो महाकाली हमारे रास्ते में, खतरनाक से खतरनाक रुकावटें डालेगी। वो हमें जथूरा तक नहीं पहुंचने देगी।”

“इस काम को किए बिना हमारे पास कोई रास्ता भी तो नहीं।” देवराज चौहान बोला।।

“मैं तुम्हें ये बताना चाहती हूं कि हमारे लिए ये काम आसान नहीं होगा। महाकाली हमारी जान भी ले सकती है।” | मोना चौधरी की बात पर नगीना के चेहरे पर दृढ़ता के भाव उभरे।

जो भी हो, हम पीछे नहीं हटेंगे।” नगीना बोली। “मैं पीछे हटने को नहीं कह रही। आने वाले खतरों के बारे में आगाह कर रही हूं।” मोना चौधरी ने कहा।

उधर बांकेलाल राठौर मखानी के पास पड़ी खाली कुर्सी पर जा बैठा। यानी कि एक तरफ कमला रानी और दूसरी तरफ बांकेलाल राठौर। मखानी ने नापसंदगी वाली नजरों से बांकेलाल राठौर को देखा।

बांकेलाल राठौर मुस्कराया।

क्या है?” मखानी खा जाने वाले अंदाज में बोला।

“अकेलो-अकेलो जा के मक्खनो खा आयो। सारो मलाई चट कर दयो ।”

कौन-सी मलाई?” ।

जो थारी बगलों में बैठी हो।”

तुम...तुम से मतलब?” मखानी ने मुंह बनाया।

“थोड़ी मलाईयो म्हारी झोली में भी डाल दयो तो थारा का जावे।”

“तुम...तुम पागल तो नहीं हो।”

मन्ने का कै दिया जो थारे को पागल दिखू?” बांकेलाल राठौर ने भोलेपन से कहा।

मेरे पास कोई मक्खन-मलाई नहीं है।” मखानी ने मुंह बनाकर कहा।

थारे उधरो बैठी हौवे मलाईयो ।”

“तो उधर जाकर खा ले। मेरे से क्या मांगता है।”

अंम चाहो तंम म्हारी मलाईयों को म्हारी सिफारिशों कर दयो कि वो म्हारी मूंछ पे भी लग जावे ।”

“तुममें इतनी हिम्मत नहीं कि मलाई सामने पड़ी हो और उसे खा भी न सको।” मखानी ने व्यंग से बोला। ।

“यों वालो हिम्मत म्हारे में होती तो म्हारे दस-बीसों बच्चे खेलो होते अंगने में।” बांकेलाल राठौर ने गहरी सांस ली–“म्हारी गुरदासपुरो वाली वोत बारों कहो कि म्हारी मलाई मूंछ पे लगाई लयो। पर मन्ने हां कीं । नतीजो सामने हौवे । वो चारों बच्चों को पैदा करके दूसरो से ब्याह कर लयो। अंम मूंछों को संभालो के रखो हो अम्भी तक।” ।
 
“तो अब क्यों पूंछ हिला रहा है। डिब्बे में बंद करके छ ।”

“मूछो ईब डिब्बो में न समायो। डिब्बो खड़-खड़ करो हो। बाहरो झांकने को मरो जावे।”

तभी कमला रानी मखानी से बोली। “क्या बात है?”

“मलाई मांग रहा है मूंछ पर लगाने के लिए।” मखानी कुढ़कर बोला।।

“मलाई, मूंछ पर लगाने के लिए?” कमला रानी उलझन में भर गई। फिर मुंह आगे करके बांकेलाल राठौर से कह उठी “क्यों भाई साहब, कौन-सी मलाई चाहिए आपको?”

“भायो ।” बांकेलाल राठौर हड़बड़ाकर बोला–“म्हारे को भायो बोल्लो हो ।”

भाई को भाई साहब ही कहूंगी न?”

बांकेलाल राठौर के चेहरे के भाव देखने लायक थे। मखानी उसे देखकर खुलकर मुस्कराया। बांकेलाल राठौर उठा और अपनी कुर्सी की तरफ बढ़ गया।

इसे क्या हो गया। मैंने ऐसा क्या कह दिया जो कि ये अचानक ही चल दिया।” कमला रानी मखानी से बोली।

“सब ठीक है। तुमसे बात करके उसकी मलाई खाने की इच्छा उड़न-छु हो गई।” मखानी ने व्यंग-भरे स्वर में कहा।

बांकेलाल राठौर अपनी कुर्सी पर बैठा तो रुस्तम राव कह उठा। “क्या होईला बाप?” “मलाईयो खा के आयो हो, तंम भी जाके खा लयो ।” ।

किधर होईला मलाई बाप?” रुस्तम राव ने मखानी और कमला रानी को देखा।

थारे को नेई दिखी?”

“नेई बाप ।”

तबो तो सारी अंम खा आयो ।” बांकेलाल राठौर ने गहरी सांस लेकर कहा।

पोतेबाबा और रातुला ने उस हाल के भीतर प्रवेश किया। बाहर अंधेरा छा चुका था। भीतर रोशनियां जगमगा उठी थीं। पोतेबाबा के चेहरे पर शांत मुस्कान छाई हुई थी।

“तुमने मुझे बुलाया देवा?” पोतेबाबा ने कहा।

“हां” देवराज चौहान बोला “हम जथूरा को महाकाली की कैद से निकालने की कोशिश करेंगे।”

“ये तो मेरे लिए सुखद समाचार है। मैं तो कब से ये शब्द सुनने को तरस रहा था।” पोतेबाबा कह उठा।

परंतु हमारी भी कुछ शर्ते हैं।” मोना चौधरी कह उठी। वो क्या मिन्नो?”

जथूरा को अपने पिता से मिली ताकतों का बंटवारा सोंबरा के साथ करना होगा।”

“इस बात से मेरा कोई मतलब नहीं। ये बात आप लोग जथूरा से तब कर लें जब उसे आजाद कराने जा रहे हों।” पोतेबाबा बोला।

जथूरा नए हादसे रचकर हमारी दुनिया में नहीं भेजेगा।” मोना चौधरी बोली।।

“ये बातें मौके पर जथूरा से हीं करें।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“क्योंकि मेरी हाँ-ना का कोई महत्त्व नहीं है। अंतिम फैसला तो जथूरा का ही होगा। इस बात का जवाब मैंने स्पष्ट तौर पर दिया है।”

“ठीक है। हम ये बात जथूरा से ही करेंगे।” देवराज चौहान बोला “तुम हमें उस जगह के बारे में बताओ, जहां जथूरा कैद है।”

क्यों नहीं।” पोतेबाबा ने कहा और रातुला के साथ खाली कुर्सियों पर जा बैठा-“मैं बताता हूं महाकाली ने जथूरा को कहां कैद करके रखा है। इसके अलावा आप लोगों को जो भी जानकारी चाहिए, मिल जाएगी।”

सबकी नजरें पोतेबाबा पर जा टिकी थीं। रातुला खामोश सा बैठा सबकी देख रहा था।

जथूरा को कैद करने के लिए महाकाली ने अपनी शक्तियों से एक रहस्यमय मायावी पहाड़ी का निर्माण किया और उसके भीतर जथूरा को तिलिस्म में कैद कर लिया। पहाड़ी के ठीक ऊपर जथूरा की लेटी मुद्रा में बहुत बड़ी मूर्ति बना रखी थी। पहाड़ी के भीतर जाने का रास्ता, उस मूर्ति के नाक के छेदों में से है, जो कि गुफा की तरह लगते हैं।”

मैं वो देख चुका हूं।” देवराज चौहान बोला।। “पहाड़ी के भीतर क्या है?” मोना चौधरी ने पूछा।

मैं नहीं जानता। क्योंकि उसके भीतर गया कोई भी सैनिक कभी बाहर नहीं आया। परंतु उस पहाड़ी में भी अंजाने रहस्य मौजूद हैं। क्योंकि उसका निर्माण, महाकाली ने अपनी रहस्यमय जादुई ताकतों से किया है। ये काम तुम लोगों के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि पहाड़ी के भीतर, महाकाली ने ऐसी ताकतों को फैला रखा होगा कि जो भी भीतर आए वो फंस जाए। बेशक महाकाली ने देवा और मिन्नो के नाम का तिलिस्म बांधा है, परंतु तुम दोनों का भी जथूरा तक पहुंच पाना आसान नहीं, क्योंकि महाकाली ने सोबरा के कहने पर जथूरा को कैद कर रखा है। वो नहीं चाहेगी कि जथूरा आजाद हो। महाकाली ने इस बात का पूरा इंतजाम कर रखा होगा कि पहाड़ी में प्रवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति जिंदा न बचे। महाकाली खुद में रहस्यमय शक्तियों से भरी ऐसी हस्ती है, जिसने आज तक हार का मुंह नहीं देखा। वो किसी को कैद करने वाले मामूली काम नहीं करती है। परंतु सोबरा के एक एहसान की वजह से, महाकाली ने उसके लिए ये काम किया।”

क्या यहां पर ऐसा कोई नहीं, जो महाकाली को टक्कर दे सके?” महाजन ने पूछा।

महाकाली के मुकाबले पर कोई नहीं आना चाहेगा।” रातुला कह उठा।

“महाकाली की उस पहाड़ी का फैलाव बहुत बड़ा है। भीतर जाने की बात तो दूर, पहाड़ी के ऊपर तक पहुंच पाना भी चुनौती भरा काम है, क्योंकि महाकाली ने अपनी ताकतें पहाड़ी पर छोड़ रखी हैं, वो किसी को पहाड़ी के ऊपर तक नहीं जाने देती। अगर कोई ऊपर तक पहुंच भी जाता है तो, नाकरूपी गुफा में प्रवेश करके फिर वापस कभी नहीं लौटता।”

“हम महाकाली की शक्तियों का मुकाबला कैसे करेंगे?” नगीना ने पूछा।

इसके लिए हम आपको बेहतरीन हथियार देंगे।”

“जैसे कि?”

तलवार, कटार, बछ-खंजर् ।”

“क्या इन हथियारों से महाकाली की शक्तियों का मुकाबला किया जा सकता है?”

“नहीं किया जा सकता। एक हद के बाद नहीं ।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा।

फिर तो जथूरा को आजाद कराने की चेष्टा करना, बेवकूफी होगी।” पारसनाथ ने कहा।

यो तो म्हारे को ‘वडनो’ को तैयारो करो हो।”

“कुछ हद तक महाकाली की ताकतों का मुकाबला किया जा सके, इसके लिए आपके साथ तवेरा जाएगी।”

“तवेरा?” देवराज चौहान के होंठों से निकला।

वो तो पहले ही इस बात के हक में है कि जथूरा को आजाद न कराया जाए। ऐसे में वो क्यों...?”

“उसकी बात पर मत जाइए। वो आपकी पूरी सहायता करेगी।” पोतेबाबा ने कहा।

वो किस तरह से सहायता करेला बाप?” “तवेरा जादुई शक्तियों की अच्छी ज्ञाता है। महाकाली से कम ताकत रखती है, परंतु वो आप सबकी बहुत सहायता कर सकती है। महाकाली को भी तवेरा की ताकतों का एहसास है।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा—“तवेरा पर आप सब पूरा भरोसा कर सकते हैं। वो अपने पिता को आजाद कराने के लिए, आपके साथ चलने को बेचैन है। उसके साथ जथूरा का सर्वश्रेष्ठ सेवक गरुड़ भी जाएगा। जो कि सिर्फ तवेरा के ही अधीन रहेगा।”
 
चंद पलों के लिए वहां खामोशी आ ठहरी।। हम भी साथ जाएंगे।”

कमला रानी कह उठी। हां-हां हम भी जाएंगे।” मखानी ने तुरंत कहा।

वहां जान जाने का खतरा है।” रातुला बोला।

“हमें क्या खतरा। हम तो कालचक्र के हिस्से बन चुके हैं। मर गए तो फिर किसी अन्य शरीर में प्रवेश कर जाएंगे।”

“जैसी तुम दोनों की इच्छा।” तभी देवराज चौहान कह उठा।

तुमने उस पहाड़ी या जथूरा की कैद के बारे में कोई विशेष बात नहीं बताई।”

जो बताया है, उतनी ही जानकारी है मुझे ।”

जथूरा किन हालातों में भीतर कैद है?”

“नहीं मालूम। क्योंकि आज तक जो भी पहाड़ी के भीतर गया हैं, वो वापस नहीं लौटा कि उससे पता चलता।” पोतेबाबा ने कहा।

“तुम्हारी जानकारी अधूरी है।” देवराज चौहान ने कहा।

“पहाड़ी पर कैसे-कैसे खतरे हमारे सामने आ सकते हैं?” नगीना ने पूछा।

“इस बारे में तवेरा बेहतर बता सकती हैं। वो आपके साथ ही चलेगी। रास्ते में ये बात आप लोग उससे पूछ सकते हैं।”

तंम तो चाहो कि अंम अम्भी चल दयों पहाड़ों पे।”

“मुझे इस बात का दुख है कि मैं आपकी ज्यादा सहायता नहीं कर पा रहा हूं।” पोतेबाबा ने कहा-“हमने जब-जब जथूरा के बारे में जानकारी पाने की चेष्टा की, महाकाली ने अपनी शक्तियों से हमें पीछे धकेल दिया।”

“महाकाली की वो पहाड़ी कितनी दूर है?” मोना चौधरी ने पूछा।

लम्बा सफर है। घोड़ों पर सवारी करने से एक दिन लग जाएगा।” पोतेबाबा ने कहा-“आप लोग कब यहां से रवाना होना चाहते हैं, ये बता दें तो मुझे तैयारी करने में आसानी होगी।”

कल सुबह दिन का उजाला फैलते ही हम चल देंगे।” देवराज चौहान ने कहा।

“बेहतर। सुबह तक चलने की तैयारी पूर्ण मिलेगी। कुछ और किसी को कहना हो?” पोतेबाबा ने पूछा।

“मुझे अभी भी नहीं समझ आ रहा कि महाकाली की शक्तियों का मुकाबला हम कैसे करेंगे?” महाजन कह उठा। “तवेरा पर भरोसा रखिए।” पोतेबाबा ने कहा।

आखिर वो कब तक हमें महाकाली के वारों से बचाती रहेगी?”

“जब तक वो ऐसा कर पाएगी।” “उसके बाद क्या होगा?”

कोशिश करना आप लोगों का फर्ज है, बाकी ऊपर वाला जानता है कि क्या होगा।” ।

“बलि का बकरा बनाईला ये आपुन को ।”

छुरो म्हारी गर्दनो पर रखो के धीरो-धीरों काटो हो।”

जथूरा महान है।” पोतेबाबा कह उठा।

उस जैसा कोई दूसरा नहीं ।” रातुला ने कहा।। उसके बाद पोतेबाबा और रातुला वहां से बाहर निकल गए।

बांकेलाल राठौर की निगाह मखानी की तरफ उठी तो सकपका उठा। मखानी उसे ही घूर रहा था।

| बांकेलाल राठौर ने तुरंत नजरें फेर लीं और मूंछ पर हाथ लगाया, परंतु वहां मलाई नहीं लगी हुई थी।

म्हारी किस्मतो हीं धोखोबाजो हौवे ।” बांकेलाल राठौर बड़बड़ा उठा।

“क्या होईला बाप?” उसकी बड़बड़ाहट सुनकर रुस्तम राव ने पूछा। ।

“कोणो बातों नेई। अंम तो महाकाली को यादो करो हो कि उसो को ‘वड' दयो। तंम म्हारे साथ हो ना?”

पक्का बाप ।”

नगीना देवराज चौहान से बोली। इस काम में भारी खतरा है।”

जहां भी हमारे पांव पड़ते हैं, वहां खतरा पहले आ जाता है।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।

“महाकाली की ताकतों का मुकाबला करने के लिए हमारे पास कुछ भी तो नहीं है।” नगीना ने सोंच-भरे स्वर में कहा। ।

“मेरे खयाल में पोतेबाबा हमें मौत के मुंह में भेज रहा है।”

महाजन कह उठा।

मौत के मुंह में तो हम तभी आ गए थे, जब पूर्वजन्म की जमीन पर हमारे कदम पड़े थे।” देवराज चौहान ने महाजन को देखा।

“नगीना भाभी का कहना सही है कि हम महाकाली का मुकाबला ज्यादा देर तक नहीं कर पाएंगे।”

हमारे पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं ।” देवराज चौहान ने कहा-“पूर्वजन्म में आने के बाद हम तभी वापस जा सकते हैं, जब पूर्वजन्म का कोई बिगड़ा काम संवार दें।”

पोतेबाबा हमें धोखे से यहां लाया है।”

“वो बात खत्म हो चुकी है। अब सवाल ये सामने है कि वापस अपनी दुनिया में जाने के लिए इस जन्म का कौन-सा बिगड़ा काम ठीक करें?”

दो पल की सोच के बाद महाजन बाहरी सांस लेकर कह उठा। । “सच में हमें ये काम करना ही होगा क्योंकि हमारे सामने कोई और दूसरा बिगड़ा काम नहीं है। किसी दूसरे बिगड़े काम को ढूंढने लगे तो जाने कितना वक्त बीत जाए।”

तभी कमला रानी उठी और बाथरूम जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ गई।

बांकेलाल राठौर ने उसे जाते देखा। उसी पल उसने मख़ानी को उठकर कमला रानी के पीछे जाते देखा।

। “छोरे।” बांकेलाल राठौर अपने होंठों पर जीभ फेरकर

बोला–“म्हारा मनो मलाईयो खाने को करो हो ।”

पोतेबाबा से कहेला बाप, वो मलाई का टोकरा...।”

“मलायो का टोकरो।” ।

हां बाप टोकरा।” ।

मलाई टोकेरा में भरी जावे। थारी बुद्धि में दूधो वाली मलाई ही आवे ।” बांकेलाल राठौर ने मुंह बनाया।

और कौन-सी मलाई होईला बाप ।” बांके ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला। उसी पल सब पारसनाथ की तेज आवाज सुनकर चौंक पड़े।

“मोना चौधरी! क्या हुआ तुम्हें..,मोना चौधरी।” सबकी निगाह मोना चौधरी की तरफ उठी।

मोना चौधरी की आंखें फटकर फैल चुकी थीं। मुंह भी खुला था। वो जैसे हैरानी भरे अंदाज में सामने की दीवार को देखे जा रही थी। उसकी मुद्रा देखने लायक थी।

सबने दीवार की तरफ देखा। वहां कुछ भी नहीं था जो मोना चौधरी की ये हालत होती।।

देवराज चौहान और नगीना की नजरें मिलीं।।

क्या हो गया मोना चौधरी को?” नगीना के होंठों से निकला।

तुम देखो।” देवराज चौहान ने कहा। नगीना फौरन उठकर मोना चौधरी के पास पहुंची।

“मोना...मोना चौधरी ।” नगीना ने उसे कंधे से पकड़कर हिलाया-“क्या हो गया तुम्हें तुम...।”

तभी मोना चौधरी की गर्दन हिली और नगीना की तरफ घूमी।

मोना चौधरी की आंखों में देखते ही नगीना को कुछ डर-सा लगा। | लाल-सुर्ख आंखें थीं मोना चौधरी की। बूंखारुता से भरी हुईं। चेहरे पर दरिंदगी-सी घिरने लगी थी।

ये देखकर देवराज चौहान की आंखें सिकुड़ गईं।

“त बेला है।” मोना चौधरी के होंठों से खरखराती-सी मर्दानी आवाज निकली-“मिन्नो की बहन बेला...।”

नगीना हड़बड़ाकर एक कदम पीछे हो गई।

तु...तुम कौन हो?” नगीना के होंठों से निकला। सब हक्के-बक्के से मोना चौधरी को देखे जा रहे थे।

मैं।” मोना चौधरी के होंठों से पुनः खरखराती मर्दानी आवाज निकली-“नीलकंठ हूं।”

पहचाना नहीं तूने मुझे बेला?”

न...नहीं ।” नगीना की हालत देखने लायक थी। उसी पल मोना चौधरी के होंठों से निकला नीलकंठ का ठहाका वहां गूंज उठा।

सच में, इस वक्त तो सबकी हालत देखने लायक थी।

घबराहट, बदहवासी, परेशानी, हैरानी, उलझन के मिले-जुले भाव सबके चेहरों पर नाच रहे थे।

समाप्त
 
महाकाली

देवराज चौहान और मोना चौधरी एक साथ तंत्र-मंत्र, तिलिस्म और नया उपन्यास

जहां पर 'पोतेबाबा' की कहानी रुकी थी, 'महाकाली' की कहानी को वहीं से आगे बढ़ाते हैं। ____

मोना चौधरी की आंखें फटी-सी पड़ी थीं। चेहरे पर ढेर सारे अजीब-से भाव इकट्ठे हुए पड़े थे जिसकी वजह से चेहरा बदरंग-सा हो रहा था। वो एकटक सामने की दीवार को देखे जा रही थी। ___

मोना चौधरी के इस हाल पर मखानी की निगाह सबसे पहले पड़ी।

“ये क्या हो गया इसको।”

सबकी निगाह मोना चौधरी की तरफ उठी। मोना चौधरी की हालत देखकर सब चौंके।

“मोना चौधरी।” पारसनाथ ने पुकारा। परंतु मोना चौधरी के रूप में कोई बदलाव नहीं हुआ।

नगीना ने आगे बढ़कर, मोना चौधरी को कंधे से हिलाते हुए कहा। "तुम्हें क्या हो गया है मोना चौधरी?"

"ये मैं हूं बेला, नीलकंठ...।" मोना चौधरी के होंठों से खरखराती मर्दाना आवाज निकली।

ये सब होता पाकर हर कोई हक्का-बक्का रह गया। "कौन नीलकंठ?"

जवाब में मोना चौधरी के होंठों से मर्दाना ठहाका निकला। मोना चौधरी का चेहरा नगीना की तरफ घूमा तो हड़बड़ाकर नगीना एक कदम पीछे हो गई। मोना चौधरी के होंठों से निकलता नीलकंठ का ठहाका रुका।

"हैरानी है कि तू मुझे भूल गई बेला।” मोना चौधरी के होंठों से पुनः नीलकंठ की आवाज निकली।

"मैं तुझे नहीं पहचानती।” नगीना ने कहा।

“तू भूल गई मुझे, याद कर।"

"मुझे कुछ भी याद नहीं।” “तुम अपने बारे में बताओ।” देवराज चौहान बोला।

"तुझे भी मैं याद नहीं रहा देवा?" .

"नहीं। कौन हो तुम?" देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े हुए थे।

बांकेलाल राठौर रुस्तम राव के कान में कह उठा। "तंम जाणों हो नीलकंठ को?"

"नेई बाप। पैली बार नाम सुनेला है।"

"यो मन्नो चौधरी के बीचो में घुस गयो का?" ‘

“पता नेई बाप क्या रगड़ेला है।"

"गुलचंद कहां है, वो मुझे जरूर पहचानेगा।” मोना चौधरी के होंठों से पूनः नीलकंठ की आवाज निकली।

"सोहनलाल यहां नहीं है।”

"ओह गुलचंद तो मेरा खास यार है।"

“तुम अपने बारे में बताओ।” महाजन कह उठा—“तुमने बेबी पर कब्जा कैसे कर लिया। छोड़ो इसे।" ।

"नहीं छोड़ता।” नीलकंठ हंसा—“तूने जो करना है कर ले नीलसिंह।"

महाजन दांत भींचकर रह गया।

“तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता नीलसिंह । कोई भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं तुम में से किसी की पकड़ में आने वाला नहीं। मिन्नो का दिमाग मेरे कब्जे में है।” नीलकंठ ने कहा—“कोई भी कुछ नहीं कर सकता।” |

“तुम कौन होईला बाप?" __

“यो सब करो के तंम अपणी शक्ति का परीक्षण करो के, का दिखायो हो?"
 
“त्रिवेणी और भंवर सिंह । तुम दोनों की जोड़ी इस जन्म में भी चल रही है।" नीलकंठ ने कहा।

“जौड़ा-थारा का मतलबो हौवे। अंम शादी न करो हो, जो तंम जौड़ी बोल्लो हो।”

नीलकंठ हंसकर कह उठा।। “पुरानी यादें फिर से ताजा हो गई हैं, तुम लोगों के बीच आकर।"

सब खामोश से मोना चौधरी को देखे जा रहे थे।

"मेरे बारे में जानना चाहते हो। बहुत अजीब लग रहा है, तुम लोगों को अपने बारे में बताना। क्योंकि मेरे बारे में तो तुम लोग जानते ही हो, परंतु नया जन्म लेकर भूले हुए हो। खैर, सुन लो मेरे बारे में... मैं...।"

-

तभी मोना चौधरी के शरीर को झटका-सा लगा।

वो लड़खड़ाकर ठिठक गई। इसके साथ ही मोना चौधरी की निगाह हर तरफ घूमी। फिर नजरें हवा में लहराते एक चमकीले बिंदु पर जा टिकी जो कि मध्यम-सा इधर-उधर लहरा रहा था। __“कौन है?" मोना चौधरी के होंठों से नीलकंठ का स्वर निकला। नजरें चमकते बिंदु पर थीं।

बाकी सब भी उस चमकीले बिंदु को देख चुके थे।

“तू बहुत कमीना है।” वहां महाकाली की आवाज गूंजी।

"तु, महाकाली।” मोना चौधरी के होंठों से नीलकंठ की आवाज निकली—“यहां क्यों आई?”

"तेरी करतूत खींच लाई।"

“मैंने क्या कर दिया ऐसा?" नीलकंठ हंसा।

“यहां क्यों आया?"

"मेरी मर्जी।"

“मैंने पूछा है कि तूने मिन्नो के शरीर पर अधिकार क्यों किया, क्या चाहता है त?" __

“वाह, बात तो ऐसे कर रही है जैसे तेरे को कुछ पता ही न हो।” ___

“सब पता है मेरे को, तू अपने मुंह से बता।” महाकाली की आवाज सबको सुनाई दे रही थी।

“मैं मिन्नो का नुकसान होते नहीं देख सकता।” नीलकंठ की आवाज मोना चौधरी के होंठों से निकली।

"क्या नुकसान हो गया जो तू तड़प उठा।"

“हुआ नहीं है, परंतु अभी होगा। ये देवा के साथ जथूरा को आजाद कराने जा रही है।"

"तो?"

“जथूरा को तूने कैद कर रखा है। तू नहीं चाहती वो आजाद हो। जो ऐसी कोशिश करेगा, तू उसे मार देगी। या वो खुद ही तेरे बिछाए जाल में फंसकर, अपनी जान गवां देगा।” नीलकंठ बोला।

“और तू ये सब होने से रोक लेगा।"

"कोशिश तो कर सकता हूं।"

"बहुत भला चाहता है मिन्नो का। महाकाली के स्वर में कड़वापन था—“तेरा एकतरफा प्यार अभी भी जिंदा है, जबकि मिन्नो ने कभी भी तेरी जरा भी परवाह नहीं की।"

“न करे। मुझे तो परवाह है मिन्नो की।"

“पागल मत बन। हम दोनों एक ही गुरु के शिष्य हैं और हमें झगड़ना नहीं चाहिए।"

"मेरा भी यही खयाल है।” नीलकंठ मुस्कराया।

“छोड़ दे मिन्नो को और चला जा यहां से।”

“तू सोबरा की चौकीदारी छोड़ दे। जथूरा को आजाद कर दे। पीछे हट जा।" _

“मैंने सोबरा से वादा कर रखा है कि जथूरा को सुरक्षित कैद में रसुंगी और आजाद नहीं होने दूंगी।"

"तेरे जैसी को सोबरा की बात इस कदर मानते पाकर, मुझे अच्छा नहीं लग रहा महाकाली।" ___

“सोबरा का एक एहसान है मुझ पर।"

"जो तेरा मन करे तू वो ही कर। मैं तेरे पास नहीं आया। तू ही मेरे पास आई है।"

"मिन्नो को छोड़कर तू चला जा।"

"कभी नहीं।"

"मेरे से झगड़ा करेगा नीलकंठ ।"

"मैं मिन्नो की सहायता करूंगा।"

"मेरे खिलाफ?"

“तेरे से मुझे कुछ नहीं लेना-देना। मैं तो सिर्फ मिन्नो का बचाव चाहता हूं। उसी के लिए आया हूं।"

“इस रास्ते पर चला तो झगड़ा होगा। मैं तेरे साथ कोई रियायत नहीं करूंगी।" महाकाली ने गुस्से से कहा।

“क्या करेगी तू मेरा?" नीलकंठ ने कड़वे स्वर में कहा।

"तू जानता है कि तेरे से ज्यादा ताकतवर हूं।"

"बेशक। परंतु मुझे जीतने के लिए, तेरे को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।"

"देवा-मिन्नो के साथ तवेरा है। तू बीच में मत आ।"

"ये तो तूने अच्छी बात बताई। सुना है तवेरा तंत्र-मंत्र की बढ़िया विद्या जानती है।" ___

“तो तू पीछे नहीं हटेगा?" महाकाली की आवाज में गुस्सा भरा था।

"मैं मिन्नो से प्यार करता हूं।" “वो तो तेरे से नहीं करती।”

“तो क्या हो गया, मैं तो करता हूं। हो सकता है वो अब मुझसे प्यार करने लगे।"

“नहीं करेगी। उसकी दुनिया जुदा है।"

"कोई बात नहीं, मैं हर हाल में उसका भला चाहूंगा।" मोना चौधरी के होंठ हिल रहे थे। नीलकंठ की आवाज बाहर निकल रही

थी।

"नुकसान उठाएगा।"

"मुझे समझा मत। हम एक ही गुरु के चेले हैं। मेरा बुरा करेगी तो तू भी नहीं बचेगी। नुकसान तो तुझे भी होगा।"

उसी पल चमकता बिंदु लुप्त हो गया।
 
मोना चौधरी ने मुस्कराकर सबको देखा और नीलकंठ की आवाज निकली। __ “अब तो आपको कुछ हद तक अंदाजा हो गया होगा कि मैं कौन हूं। मैं मिन्नो का पुराना प्रेमी नीलकंठ हूं। गुलचंद का यार होता था, परंतु मिन्नो के लिए चाहत थी मेरे मन में। ये जुदा बात है कि मिन्नो ने कभी मेरी परवाह नहीं की।"

"तो अब क्या चाहते हो?" देवराज चौहान ने पूछा।

"मैं मिन्नो का भला चाहता हूं। ये तेरे साथ जथूरा को आजाद करने के लिए जा रही है और महाकाली जथूरा को आजाद करने वाली नहीं। जो ये काम करेगा, उसे किसी तरह अपने जाल में फंसाकर मार देगी। जबकि मैं मिन्नो का अहित होता नहीं देख सकता। इसलिए आया हूं कि महाकाली से मिन्नो का बचाव कर सकूँ।"

"कैसे करोगे बचाव?" महाजन ने पूछा। ____

“जो पढ़ाई महाकाली ने पढ़ी है, वो ही मैंने पढ़ी है, ये जुदा बात है कि वो मेरे से तेज है। आज उसका नाम है। परंतु मैं इस बात की पूरी कोशिश करूंगा कि मिन्नो का अहित न हो।"

“जथूरा की कैद के बारे में तुम क्या जानते हो?" पारसनाथ ने पूछा।

' “महाकाली ने जथूरा को अपनी ताकतों से बनाई कृत्रिम पहाड़ी के भीतर तिलिस्म के जाल में कैद कर रखा है। उस पहाड़ी के भीतर, रहस्यों की दुनिया बसा रखी है महाकाली ने। ऐसा मकड़जाल बिछा रखा है कि जो एक बार भीतर गया वो वहीं फंसकर रह गया। बाहर नहीं आ सकता वो।" मोना चौधरी के होंठों से निकलने वाली नीलकंठ की आवाज गम्भीर थी—“मेरी कोशिश होगी कि पहाड़ी के भीतर महाकाली के मकड़जाल से तुम लोगों को बचाऊं। तुम लोगों को जथूरा तक पहुंचा सकू। मिन्नो जो चाहती है, उसकी इच्छा को पूरा करके, मुझे खुशी होगी।"

“तुम भी तो खतरे में पड़ सकते हो।” नगीना बोली।

"मैं।” नीलकंठ मुस्करा पड़ा—“मुझे कुछ नहीं होगा। मेरा शरीर तो पास में है नहीं। मैं अपनी ताकतों के सहारे मिन्नो के भीतर आया हूं। अगर कुछ नुकसान हुआ तो मिन्नो का होगा। जो मैं नहीं होने दूंगा।" ___

“तुम्हें यकीन नहीं कि तुम महाकाली की ताकतों से पार पा लोगे?"

“पूरा यकीन नहीं है। वो ताकतवर है, फिर भी मैं तुम लोगों के बहुत काम आऊंगा। वो परेशान हो जाएगी। इन सब बातों में एक अच्छी बात ये भी है कि तवेरा तुम लोगों के साथ है। सुना है वो भी तंत्र-मंत्र में खासी माहिर है।” ____

“तुम्हारी ऐसी कोई शर्त तो नहीं कि मोना चौधरी तुम्हें चाहे, तभी तुम हमारी सहायता..."

“नहीं परसू। ये तो मेरी इच्छा की बात है कि मैं तुम लोगों की, खासतौर से मिन्नो की सहायता करना चाहता हूं। बरसों बाद मुझे मिन्नो के काम आने का मौका मिला है तो पीछे क्यों हटूंगा।"

“अब तुम क्या करोगे?" "तुम लोग सुबह यहां से रवाना होने वाले हो?” नीलकंठ बोला।

“हर जरूरत के वक्त तुम लोग मुझे अपने पास पाओगे। मैं मिन्नो में आ जाया करूंगा।"

सब चुप रहे। नीलकंठ की आवाज पुनः सुनाई दी। "मैं अब जाता हूं।"

“बेबी को तुम्हारे बारे में क्या कहें?"

"कुछ भी कहने की जरूरत नहीं। वो सब जान गई है। मैंने हर बात उसके दिमाग में डाल दी है।"

"ओह।" उसके बाद नीलकंठ की आवाज नहीं आई। वहां खामोशी सी आ ठहरी।

कमला रानी और मखानी कुर्सियों पर पास-पास ही बैठे थे। मखानी कमला रानी के कान में बोला।

"बाथरूम में चलें?"

"हट ।” कमला रानी ने मुंह बनाया—“बार-बार थोड़े न जाते हैं।"

"दिल कर रहा...।"

“अपने दिल को संभाल के रख। अभी मेरा दिल नहीं कर रहा। तेरे को तो ये ही सब सूझता है।"

.

तभी सबने मोना चौधरी को गहरी सांस लेते देखा।

मोना चौधरी ने सबको देखा फिर एकाएक मुस्कराकर कह उठी।

"नीलकंठ से मिलकर हैरान हो रहे हो।”

“तुम्हें...कैसे पता?" महाजन कह उठा।

“यहां जो भी हुआ, उसकी जानकारी नीलकंठ ने मेरे भीतर डाल दी है।" मोना चौधरी ने कहा। ___

“तुम...तुम जानती हो उसे—याद है नीलकंठ की?"

“याद नहीं थी, परंतु नीलकंठ ने याद दिला दी। मस्तिष्क की दबी परतों को सामने ला दिया। अब मुझे सब कुछ याद है। नीलकंठ भी, जथूरा भी, महाकाली भी।"

“यानी तुम्हें सब याद आ गया?"

"हां।"

"कौन था नीलकंठ?"

“सोहनलाल यानी कि गुलचंद का यार हुआ करता था। मेरे पे नजर रखता था। जहां मैं जाती, मेरे पीछे चला आया करता था। दो-चार बार प्यार का इजहार भी किया। लेकिन मैंने डांटकर मना कर दिया। उसके बाद भी वो मेरी ताक में ही रहा करता था कि मुझे देख ले। उसके बाद नगरी में आपसी लड़ाई छिड़नी आरम्भ हो गई थी। हम सबके मारे जाने के बाद जो बचे उन्होंने अपना रास्ता चुना। नीलकंठ तंत्र-मंत्र की विद्या लेने गुरुजी की शरण में चला गया था। वहां महाकाली भी शिक्षा ले रही थी।" मोना चौधरी ने सोच-भरे स्वर में बताया।

__ "और जथरा?" नगीना ने पूछा।

“जथूरा ने नागमणि से शिक्षा ली। साधारण-सा व्यक्ति होता था जथूरा। नागमणि को जाने क्यों जंच गया। यूं नागमणि आसानी से किसी को अपना शिष्य नहीं बनाती। जथूरा को कई कठिन परीक्षाएं देनी पड़ीं। उनमें सफल होना पड़ा। जथुरा के भाई सोबरा ने भी नागमणि से ही शिक्षा पाई। परंतु नागमणि जथूरा पर ज्यादा मेहरबान रही। यही वजह है कि जथूरा काफी आगे निकल गया और सोबरा उससे कुछ कमजोर पड़ गया। जथूरा की जगमोहन से बना करती थी। उनमें कम ही मुलाकात हो पाती थी, परंतु वे अच्छे दोस्त थे।"

सबकी निगाह मोना चौधरी पर थी।

“अब क्या होगा?" पारसनाथ बोला।

"नीलकंठ मुझसे एकतरफा प्यार करता है। यही वजह है कि वो मेरी सहायता को आगे आया है।" मोना चौधरी ने कहा।

"लेकिन नीलकंठ महाकाली का मुकाबला नहीं कर सकता।"

"बेशक नहीं कर सकता। परंतु साथ में जथूरा की बेटी तवेरा भी है। इन दोनों के साथ होने पर हमें बहुत हौंसला रहेगा। राह में आने वाली कठिनाइयों से ये हमें बचा सकते हैं।” मोना चौधरी बोली।

"इसमें कोई शक नहीं।"

"लेकिन नीलकंठ अपने शरीर के साथ सीधी तरह हमारे सामने क्यों नहीं आता?" नगीना ने कहा। ___

“वो नहीं आ सकता। वो लम्बी समाधि में गया हुआ है। समाधि तोड़नी पड़ेगी उसे और नुकसान में रहेगा। परंतु वो मेरे शरीर के अंदर आता रहेगा। उसकी मौजूदगी की कमी महसूस नहीं होगी। वो सिर्फ मेरा भला चाहता है। वो मेरे बारे में ही सोचेगा। मेरे अलावा किसी और का भी भला हो जाए तो जदा बाद है।"

___“लेकिन हम सब एक ही तो हैं।"

“हैं। परंतु नीलकंठ मेरा ही भला करेगा।" मोना चौधरी मस्कराकर बोली—“ये बात उसने स्पष्ट कही है।"

"तुमसे कही?" __

“मेरे दिमाग में डाली है। वो मेरे से बात नहीं कर सकता। परंतु जो कहना हो उसे, वो बात मेरे दिमाग में डाल सकता है।" ___

“तो नीलकंठ कल से तुम्हारे साथ रहेगा?"

"हां। कल हम जथूरा को आजाद कराने के लिए चल रहे हैं। पोतेबाबा रात-रात में सफर की तैयारी कर देगा। जब भी जरूरत पडेगी नीलकंठ मेरे में आ जाएगा। उसकी चेष्टा यही है कि महाकाली मेरे को क्षति न पहुंचा सके।" ।

बांकेलाल राठौर ने रुस्तम राव के कान में कहा। "छोरे यो तो घणा प्यार का मामलो लागे हो।"

"नीलकंठ सीरियस प्यार करेला बाप।"

"म्हारी वो गुरदासपूरो बाली म्हारे से सीरियस प्यार न करो हो। दूसरों के चार बच्चे जण के बैठो हो वो तो।"

"उसका प्यार सच्चा नेई होईला बाप।”

"सच्चो प्यार होवो, म्हारे को लस्सी के गिलासो में मकखनो का गोला डालो के दयो, पर वो म्हारी लस्सी निकाल भी लयो।"

“लस्सी निकालेगा तुम्हारी। वो कैसे बाप?"

"तंम नेई समझो हो। बच्चो हो अम्भी।” बांकेलाल राठौर ने गहरी सांस ली।

मखानी ने कमला रानी को कोहनी मारी।

कमला रानी ने उसे देखा तो मखानी ने आंख के इशारे से बाथरूम की तरफ चलने का इशारा किया।

कमला रानी ने मुंह बनाकर, चेहरा घुमा लिया।

'साली नखरे बहुत दिखाती है।' मखानी बड़बड़ाया—'सारी मेहनत तो मैंने ही करनी है, तब भी इसे नखरे सूझ रहे हैं।'

तभी देवराज चौहान कह उठा।

"मेरे खयाल में ये अच्छी बात है कि नीलकंठ के रूप में हमें एक सहायक मिल गया, जो कि हमें ठीक रास्ता दिखाएगा।"

“मोना चौधरी को।” पारसनाथ मुस्कराया।

"हम मोना चौधरी के साथ ही तो हैं।” देवराज चौहान बोला।

“महाकाली को नहीं भूलना चाहिए, वो हमारे लिए अब जाने क्या जाल बिछा रही होगी। नगीना कह उठी।
 
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