S
StoryPublisher
Guest
“बार-बार ये बात कहकर मुझे शर्मिंदा मत करो।” गरुड़ ने प्यार से कहा।
तवेरा मुस्कराई और आगे बढ़ गई। खुशी से गरुड़ के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।
वो तो तवेरा को शीशे में उतारना चाहता था, परंतु सारा काम अचानक ही उसके पक्ष में बन गया। तवेरा उससे ब्याह करने को तैयार थी।
वो नहीं चाहती थी कि उसके पिता महाकाली की कैद से आजाद हो।।
वो नगरी की मालकिन बनकर रहना चाहती थी और आजाद जिंदगी बिताना चाहती थी।
“ओह। गरुड़ बड़बड़ाया–“ये सब कितना अच्छा हो रहा है। बिल्कुल मेरी इच्छा की तरह। | गरुड़ सीधा अपने कमरे में पहुंचा और दरवाजा बंद करके अलमारी की तरफ बढ़ गया। वो इस बात को जरा भी महसूस नहीं कर सका कि उस कमरे में रातुला का आदमी पहले से ही छिपा हुआ
| गरुड़ ने अलमारी खोलकर वो किताब निकाली और उसके भीतर मौजूद यंत्र से सम्बंध बनाकर सोबरा से बात करने की कोशिश में लग गया।
सोबरा से बात हो भी गई। मैंने कर दिया सोबरा ।” गरुड़ खुशी से बोला।
क्या?” यंत्र में से महीन-सी सोबरा की आवाज उभरी।
“तवेरा मेरे से ब्याह करने को तैयार है।” गरुड़ ने कहा।
ये अच्छी खबर दी।”
“मेरी उससे स्पष्ट बात हुई है। परंतु अपने पिता के बारे में उसका व्यवहार अजीब-सा है।”
वो कैसे?
“तवेरा नहीं चाहती कि उसके पिता को आजादी मिले। वो पिता के बिना आजाद जीवन जीना चाहती है।”
सोबरा की तरफ से आवाज नहीं आई।
सोवरा ।” गरुड़ ने पुकारा।
सुन रहा हूं। सोच रहा हूं, तवेरा ऐसी तो नहीं थी।”
“हां, अचानक ही उसके व्यवहार में मैंने ये बदलाव पाया।”
मेरे खयाल में तुम्हें सतर्क हो जाना चाहिए गरुड़।”
क्या मतलब?”
“ये तवेरा की कोई चाल भी हो सकती है। हो सकता है कि उसे तुम पर शक हो गया हो।”
* “मुझे ऐसा नहीं लगता।” ।
“मुझे ऐसा ही लगता है। तवेरा तो जथूरा की भक्त है। अपने पिता की इच्छा के बिना कभी कोई कदम नहीं उठाती। ऐसे में वो एकाएक कैसे जथूरा के खिलाफ हो सकती है। अवश्य इसमें कोई रहस्य है।” सोबरा की आवाज यंत्र से निकल रही थी—“मेरे खयाल में तुम्हें तवेरा की बात पर यकीन नहीं करना चाहिए। परंतु उसके साथ ही रहो और चाल को पहचानो।”
समझ गया।” ।
“देवा और मिन्नो का क्या हुआ?”
वो और उनके साथी महल में आ पहुंचे...।”
जानता हूं, आगे की बात बताओ।” ।
“अभी तक देवा और मिन्नो जथूरा को महाकाली की कैद से छुड़ाने को तैयार नहीं हुए।”
क्या कहते हैं वे?”
गरुड़ ने वहां हुई बातचीत के बारे में बताया।
वो तैयार हो जाएंगे।” सारी बात सुनकर, उधर से सोबरा की आवाज आई–“इसके अलावा उनके पास अब दूसरा रास्ता नहीं।”
मैं क्या करूं?”
“तुम इसी तरह उनके बीच रहो। परंतु तवेरा के दिल में क्या बात है, उसे जानने की चेष्टा करो। मुझे तो ऐसा ही लगता है कि तवेरा को तुम पर किसी बात की वजह से शक हो गया है। वो शायद तुम्हें बातों से भटका रही हो।”
। “मुझे विश्वास नहीं होता तुम्हारी बात पर ।”
आने वाले वक्त का रुख देखो। शायद कोई नई बात पता चले।”
बातचीत खत्म करके गरुड़ ने किताब वापस अलमारी में रखी और कमरे से बाहर निकल गया। | कमरे में छिपा रातुला का आदमी छिपी जगह से बाहर निकला और गरुड़ को गया पाकर कमरे से बाहर आ गया।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रातुला पोतेबाबा से मिला।
हमारी आशंका सही साबित हुई।” रातुला ने कहा-“गरुड़, यहां की खबरें सोबरा को दे रहा है। मेरे आदमी ने सारी बातचीत सुनी।”
“मुझे वो बातें बताओ।” रातुला ने अपने आदमी से सुनी सारी बातें बताईं।
गरुड़ गम्भीर अपराध कर रहा है। पोतेबाबा शांत स्वर में कह उठा।
“अति गम्भीर ।”
गरुड़ जन्म-भर की कैद का हकदार है। परंतु ये सजा अभी नहीं, जथूरा के आजाद होने के बाद देंगे।”
“सोबरा को शक है कि तवेरा कोई चाल चल रही है। उसने ई चाल चल रही है। उसने
“कोई बावधन किया है।
कोई बात नहीं, मैं तवेरा को इस बारे में सावधान कर दूंगा।”
“सोबरा आसानी से पहचान गया कि तवेरा कोई चाल खेल रही
“शक तो होना ही था, क्योंकि तवेरा ने अचानक ऐसी बात कह दी थी कि जिस पर फौरन विश्वास करना कठिन है। परंतु मुझे पूरा यकीन है कि तवेरा गरुड़ को धोखे में रखे रखेगी और सोबरा तक उल्टी खबरें पहुंचाएगी। तुम समझते हो कि ये बात यहीं खत्म हो गई। नहीं, अब सोबरा तवेरा के बारे में सोच रहा होगा कि वो उलट क्यों गई। वो सोच रहा होगा कि गरुड़ जब तवेरा से ब्याह कर लेगा तों, गरुड़ की आड़ लेकर, वो जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाएगा। ऐसे ढेरों खयाल उसके भीतर से उठ रहे होंगे। यानी कि वो जो सोचना चाहता होगा, वो नहीं सोच पा रहा होगा। गरुड़ का सहारा लेकर हुमने उसकी सोचों को भटका दिया। इसका फायदा हमें आने वाले वक्त में मिलेगा।” पोतेबाबा ने कहा।
“क्या सोबरा को भटकाना आसान है?”
गरुड़ के द्वारा खबरें उस तक पहुंचेंगी तो आसान है। उसे गरुड़ पर भरोसा होगा। तभी तो वो ये खेल खेल रहा है।”
“गरुड़ ने हमें धोखा दिया।”
तवेरा मुस्कराई और आगे बढ़ गई। खुशी से गरुड़ के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।
वो तो तवेरा को शीशे में उतारना चाहता था, परंतु सारा काम अचानक ही उसके पक्ष में बन गया। तवेरा उससे ब्याह करने को तैयार थी।
वो नहीं चाहती थी कि उसके पिता महाकाली की कैद से आजाद हो।।
वो नगरी की मालकिन बनकर रहना चाहती थी और आजाद जिंदगी बिताना चाहती थी।
“ओह। गरुड़ बड़बड़ाया–“ये सब कितना अच्छा हो रहा है। बिल्कुल मेरी इच्छा की तरह। | गरुड़ सीधा अपने कमरे में पहुंचा और दरवाजा बंद करके अलमारी की तरफ बढ़ गया। वो इस बात को जरा भी महसूस नहीं कर सका कि उस कमरे में रातुला का आदमी पहले से ही छिपा हुआ
| गरुड़ ने अलमारी खोलकर वो किताब निकाली और उसके भीतर मौजूद यंत्र से सम्बंध बनाकर सोबरा से बात करने की कोशिश में लग गया।
सोबरा से बात हो भी गई। मैंने कर दिया सोबरा ।” गरुड़ खुशी से बोला।
क्या?” यंत्र में से महीन-सी सोबरा की आवाज उभरी।
“तवेरा मेरे से ब्याह करने को तैयार है।” गरुड़ ने कहा।
ये अच्छी खबर दी।”
“मेरी उससे स्पष्ट बात हुई है। परंतु अपने पिता के बारे में उसका व्यवहार अजीब-सा है।”
वो कैसे?
“तवेरा नहीं चाहती कि उसके पिता को आजादी मिले। वो पिता के बिना आजाद जीवन जीना चाहती है।”
सोबरा की तरफ से आवाज नहीं आई।
सोवरा ।” गरुड़ ने पुकारा।
सुन रहा हूं। सोच रहा हूं, तवेरा ऐसी तो नहीं थी।”
“हां, अचानक ही उसके व्यवहार में मैंने ये बदलाव पाया।”
मेरे खयाल में तुम्हें सतर्क हो जाना चाहिए गरुड़।”
क्या मतलब?”
“ये तवेरा की कोई चाल भी हो सकती है। हो सकता है कि उसे तुम पर शक हो गया हो।”
* “मुझे ऐसा नहीं लगता।” ।
“मुझे ऐसा ही लगता है। तवेरा तो जथूरा की भक्त है। अपने पिता की इच्छा के बिना कभी कोई कदम नहीं उठाती। ऐसे में वो एकाएक कैसे जथूरा के खिलाफ हो सकती है। अवश्य इसमें कोई रहस्य है।” सोबरा की आवाज यंत्र से निकल रही थी—“मेरे खयाल में तुम्हें तवेरा की बात पर यकीन नहीं करना चाहिए। परंतु उसके साथ ही रहो और चाल को पहचानो।”
समझ गया।” ।
“देवा और मिन्नो का क्या हुआ?”
वो और उनके साथी महल में आ पहुंचे...।”
जानता हूं, आगे की बात बताओ।” ।
“अभी तक देवा और मिन्नो जथूरा को महाकाली की कैद से छुड़ाने को तैयार नहीं हुए।”
क्या कहते हैं वे?”
गरुड़ ने वहां हुई बातचीत के बारे में बताया।
वो तैयार हो जाएंगे।” सारी बात सुनकर, उधर से सोबरा की आवाज आई–“इसके अलावा उनके पास अब दूसरा रास्ता नहीं।”
मैं क्या करूं?”
“तुम इसी तरह उनके बीच रहो। परंतु तवेरा के दिल में क्या बात है, उसे जानने की चेष्टा करो। मुझे तो ऐसा ही लगता है कि तवेरा को तुम पर किसी बात की वजह से शक हो गया है। वो शायद तुम्हें बातों से भटका रही हो।”
। “मुझे विश्वास नहीं होता तुम्हारी बात पर ।”
आने वाले वक्त का रुख देखो। शायद कोई नई बात पता चले।”
बातचीत खत्म करके गरुड़ ने किताब वापस अलमारी में रखी और कमरे से बाहर निकल गया। | कमरे में छिपा रातुला का आदमी छिपी जगह से बाहर निकला और गरुड़ को गया पाकर कमरे से बाहर आ गया।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रातुला पोतेबाबा से मिला।
हमारी आशंका सही साबित हुई।” रातुला ने कहा-“गरुड़, यहां की खबरें सोबरा को दे रहा है। मेरे आदमी ने सारी बातचीत सुनी।”
“मुझे वो बातें बताओ।” रातुला ने अपने आदमी से सुनी सारी बातें बताईं।
गरुड़ गम्भीर अपराध कर रहा है। पोतेबाबा शांत स्वर में कह उठा।
“अति गम्भीर ।”
गरुड़ जन्म-भर की कैद का हकदार है। परंतु ये सजा अभी नहीं, जथूरा के आजाद होने के बाद देंगे।”
“सोबरा को शक है कि तवेरा कोई चाल चल रही है। उसने ई चाल चल रही है। उसने
“कोई बावधन किया है।
कोई बात नहीं, मैं तवेरा को इस बारे में सावधान कर दूंगा।”
“सोबरा आसानी से पहचान गया कि तवेरा कोई चाल खेल रही
“शक तो होना ही था, क्योंकि तवेरा ने अचानक ऐसी बात कह दी थी कि जिस पर फौरन विश्वास करना कठिन है। परंतु मुझे पूरा यकीन है कि तवेरा गरुड़ को धोखे में रखे रखेगी और सोबरा तक उल्टी खबरें पहुंचाएगी। तुम समझते हो कि ये बात यहीं खत्म हो गई। नहीं, अब सोबरा तवेरा के बारे में सोच रहा होगा कि वो उलट क्यों गई। वो सोच रहा होगा कि गरुड़ जब तवेरा से ब्याह कर लेगा तों, गरुड़ की आड़ लेकर, वो जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाएगा। ऐसे ढेरों खयाल उसके भीतर से उठ रहे होंगे। यानी कि वो जो सोचना चाहता होगा, वो नहीं सोच पा रहा होगा। गरुड़ का सहारा लेकर हुमने उसकी सोचों को भटका दिया। इसका फायदा हमें आने वाले वक्त में मिलेगा।” पोतेबाबा ने कहा।
“क्या सोबरा को भटकाना आसान है?”
गरुड़ के द्वारा खबरें उस तक पहुंचेंगी तो आसान है। उसे गरुड़ पर भरोसा होगा। तभी तो वो ये खेल खेल रहा है।”
“गरुड़ ने हमें धोखा दिया।”