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"किधर होईला निशान?" रुस्तम राव बोला।
“इन्हीं रास्तों में देखो, शायद कुछ समझ सको।” बांदा बोला।
“तुम क्यों चाहोगे कि हम जथूरा के पास जा पहुंचे।” नगीना ने कहा।
"ठीक कहा बेला।” बांदा ने सिर हिलाया।
“इस नाते मैं ये भी कह सकती हूं कि ऐसा कोई निशान होगा ही नहीं, जिससे रास्ता समझा जा सके।"
"विश्वास करो, ऐसा निशान है।” बांदा ने कहा- ये बात मैं सच बोल रहा हूं।"
और वो बांदा की बात पर यकीन करके, रास्तों में देखते हुए इस बात का इशारा ढूंढ़ने लगे कि कौन-से रास्ते में जाना उनके लिए बेहतर होगा।
मखानी ने मुस्कराकर कमला रानी को देखा। कमला रानी ने फौरन मुंह फेर लिया। मखानी पास पहुंचा और धीरे-से उसे कोहनी मारी।
“क्या है?"
“धीरे बोल, क्यों सबको सुनाती है।"
"तंग मत कर मुझे।"
"जिस रास्ते से आए हैं, थोड़ा-सा उधर आ-जा।"
"क्यों?" कमला रानी ने उसे घूरा।
"मेरे से क्या पूछती है, तेरे को नहीं पता।” मखानी धीमे स्वर में बोला।
“मैं नहीं आऊंगी।"
"फिर नखरे।"
“नहीं आऊंगी।” कमला रानी ने इंकार में सिर हिलाया।
"दिल मत तोड़।”
"ये वक्त नहीं है इन बातों का।"
"इन बातों के लिए हर वक्त, वक्त होता है। नखरे मत झाड़। उधर चल।”
"नहीं।” कमला रानी ने कहा और वहीं नीचे बैठ गई।
'नहीं मानने वाली ये।' मखानी बड़बड़ा उठा। "भौरी।”
कमला रानी बड़बड़ाई। "क्या है?" भौरी की फसफसाहट कानों में पड़ी।
"तेरे को पता है कि कौन-से रास्ते से भीतर जाना ठीक होगा?" कमला रानी ने पूछा।
"मुझे कुछ नहीं पता। इस जगह में तो मैं पहली बार आई हूं। अब देलूंगी कि महाकाली ने यहां क्या-क्या इंतजाम कर रखा है।"
तभी मखानी पास ही बैठ गया। कमला रानी ने मखानी को देखा।
मखानी दांत फाड़कर मुस्कराया और आंख से उधर चलने का इशारा किया।
“तेरे को कोई और काम नहीं है।” कमला रानी ने झल्लाकर कहा।
“इसी काम से फुर्सत नहीं मिलती तो दूसरा क्या काम करूंगा।" मखानी ने मुस्कराकर कहा।
“चूल्हे में जा।” कमला रानी भुनभुनाकर दूसरी तरफ देखने लगी। ___
“अड़ गई मेरी कमला रानी।” मखानी गहरी सांस लेकर कह उठा।
वो सब काफी देर उन रास्तों में देखते, समझने की चेष्टा करते रहे। परंतु कुछ समझ में नहीं आया।
इस दौरान बांदा शांत बैठा रहा।
"मेरे खयाल में बांदा ने झूठ कहा है कि इन रास्तों से हमें कोई इशारा मिल सकता है।” मोना चौधरी कह उठी।
मन-ही-मन बाकी सब भी ये ही सोच रहे थे।
“ये ही तो मुसीबत है कि कोई मेरी बात का यकीन नहीं करता।” बांदा कह उठा।
“इन्हीं रास्तों में देखो, शायद कुछ समझ सको।” बांदा बोला।
“तुम क्यों चाहोगे कि हम जथूरा के पास जा पहुंचे।” नगीना ने कहा।
"ठीक कहा बेला।” बांदा ने सिर हिलाया।
“इस नाते मैं ये भी कह सकती हूं कि ऐसा कोई निशान होगा ही नहीं, जिससे रास्ता समझा जा सके।"
"विश्वास करो, ऐसा निशान है।” बांदा ने कहा- ये बात मैं सच बोल रहा हूं।"
और वो बांदा की बात पर यकीन करके, रास्तों में देखते हुए इस बात का इशारा ढूंढ़ने लगे कि कौन-से रास्ते में जाना उनके लिए बेहतर होगा।
मखानी ने मुस्कराकर कमला रानी को देखा। कमला रानी ने फौरन मुंह फेर लिया। मखानी पास पहुंचा और धीरे-से उसे कोहनी मारी।
“क्या है?"
“धीरे बोल, क्यों सबको सुनाती है।"
"तंग मत कर मुझे।"
"जिस रास्ते से आए हैं, थोड़ा-सा उधर आ-जा।"
"क्यों?" कमला रानी ने उसे घूरा।
"मेरे से क्या पूछती है, तेरे को नहीं पता।” मखानी धीमे स्वर में बोला।
“मैं नहीं आऊंगी।"
"फिर नखरे।"
“नहीं आऊंगी।” कमला रानी ने इंकार में सिर हिलाया।
"दिल मत तोड़।”
"ये वक्त नहीं है इन बातों का।"
"इन बातों के लिए हर वक्त, वक्त होता है। नखरे मत झाड़। उधर चल।”
"नहीं।” कमला रानी ने कहा और वहीं नीचे बैठ गई।
'नहीं मानने वाली ये।' मखानी बड़बड़ा उठा। "भौरी।”
कमला रानी बड़बड़ाई। "क्या है?" भौरी की फसफसाहट कानों में पड़ी।
"तेरे को पता है कि कौन-से रास्ते से भीतर जाना ठीक होगा?" कमला रानी ने पूछा।
"मुझे कुछ नहीं पता। इस जगह में तो मैं पहली बार आई हूं। अब देलूंगी कि महाकाली ने यहां क्या-क्या इंतजाम कर रखा है।"
तभी मखानी पास ही बैठ गया। कमला रानी ने मखानी को देखा।
मखानी दांत फाड़कर मुस्कराया और आंख से उधर चलने का इशारा किया।
“तेरे को कोई और काम नहीं है।” कमला रानी ने झल्लाकर कहा।
“इसी काम से फुर्सत नहीं मिलती तो दूसरा क्या काम करूंगा।" मखानी ने मुस्कराकर कहा।
“चूल्हे में जा।” कमला रानी भुनभुनाकर दूसरी तरफ देखने लगी। ___
“अड़ गई मेरी कमला रानी।” मखानी गहरी सांस लेकर कह उठा।
वो सब काफी देर उन रास्तों में देखते, समझने की चेष्टा करते रहे। परंतु कुछ समझ में नहीं आया।
इस दौरान बांदा शांत बैठा रहा।
"मेरे खयाल में बांदा ने झूठ कहा है कि इन रास्तों से हमें कोई इशारा मिल सकता है।” मोना चौधरी कह उठी।
मन-ही-मन बाकी सब भी ये ही सोच रहे थे।
“ये ही तो मुसीबत है कि कोई मेरी बात का यकीन नहीं करता।” बांदा कह उठा।