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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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सोहनलाल से उसकी नजरें मिलीं। सोहनलाल मुस्कराया और मोना चौधरी की तरफ बढ़ने लगा। मोना चौधरी ने पलटना चाहा कि तभी जगमोहन की शांत आवाज मोना चौधरी के कानों में पड़ी।

हिलना मत ।”

“तुम–जगमोहन ।”

खामोश रहो।”

तब तक सोहनलाल पास आ गया था और मोना चौधरी की तलाशी के लिए हाथ आगे बढ़ाए।

मुझे हाथ मत लगाना।”

“तौ ।” सोहनलाल ठिठका–“अपना हथियार निकालकर मुझे दे दो।”

तुम लोग, बचोगे नहीं।” मोना चौधरी गुर्राई।

सोहनलाल उसे देखता रहा। दांत पीसते हुए मोना चौधरी ने रिवॉल्वर निकालकर उसे दी। सोहनलाल रिवॉल्वर जेब में रखता पीछे हो गया।

जगमोहन ने उसकी कमर से रिवॉल्वर हटाई और वापस रख ली।

गुस्से से भरी मोना चौधरी पलटकर जगमोहन को देखते कह उठी।

ये क्या हरकत है?”

“तुम देवराज चौहान को मारने यहां आई हो ।” जगमोहन शांत था।

“हां, लेकिन तुम्हें कैसे पता, क्या तुम मुझे शूट करोगे?” मोना चौधरी ने कड़वे स्वर में कहा।

“नहीं। मैं तुम्हें और देवराज चौहान को रोकने आया हूं।”

देवराज चौहान को रोकने?”

“वो भी यहां कहीं है, तुम्हें मारने के लिए।”

मुझे मारने के लिए, ये कैसे हो सकता है?” मोना चौधरी के होंठों से निकला।

“मैं नहीं जानता, लेकिन तुम दोनों एक-दूसरे को मारने के लिए यहां हो।”

ये बात तुम्हें कैसे पता है?”

जगमोहन ने स्टेशन की घड़ी को देखा, जहां 11.35 हो रहे थे।

जगमोहन मुस्करा पड़ा। हादसे का 11.30 का वो वक्त निकल चुका था।

सोहनलाल, रिवॉल्वर वापस दे दे।” सोहनलाल ने रिवॉल्वर मोना चौधरी को दे दी। मोना चौधरी उलझन में दिखी। रिवॉल्वर वापस रख ली।

“तुम लोगों की हरकत मेरी समझ में जरा भी नहीं आई।” मोना चौधरी के माथे पर बल दिखे।

“अभी समझ में आ जाएगा। मैं अभी आता हूं।” जगमोहन ने कहा और आगे बढ़ गया।

मोना चौधरी ने सोहनलाल को देखा।

वो कहां गया है?

” देवराज चौहान को लेने।”

मोना चौधरी का चेहरा कठोर हो गया।

“तुम लोग कर क्या रहे हो?

” जगमोहन आकर बताएगा।

” तुम नहीं बता सकते?”

 
मैं कुछ नहीं जानता।” सोहनलाल ने कहा और मुंह फेर लिया।

मैं जा रही हूं। मेरा यहां रुकना जरूरी नहीं...।” मोना चौधरी के शब्द अधूरे ही रह गए। सामने से पारसनाथ और महाजन को आते देखा।

मोना चौधरी अजीब-सी नजरों से उन्हें देखने लगी। वो पास आ गए। कैसी हो बेबी?” महाजन बोला।

ये सब क्या हो रहा है?” मोना चौधरी की आवाज में तीखापन आ गया।

जगमोहन बताएगा।”

तो तुम सब साथ हो।” मोना चौधरी बोली-“तुम दोनों का, इन लोगों के साथ होना हैरानी पैदा करता है।”

भले के लिए ही हम एक-दूसरे के साथ हैं।”

तो तुम लोग इस कोशिश में हो कि मैं देवराज चौहान को शूट न करूं।” । "

“हम इस कोशिश में भी हैं कि देवराज चौहान भी तुम्हें शूट न करे बेबी।”

मैं उसे अब तक गोली मार चुकी होती ।” ।

शांत हो जाओ, हम सब कुछ ठीक करने की...।” ।

“तुमने गलत किया इस तरह।”

मोना चौधरी ।” पारसनाथ खुरदरे स्वर में कह उठा–“ये पूर्वजन्म से वास्ता रखती बातें हैं।”

पूर्वजन्म?” मोना चौधरी चौंकी–“क्या कहना चाहते हो?

" जगमोहन के कहे मुताबिक जथूरा ने ही ये हादसा रचा है।”

“जथूरा, ये कौन है?”

पूर्वजन्म का शख्स है। जगमोहन ही पूरी बात बताएगा। परंतु तुम्हें यहां पाकर हमें जगमोहन की कही बातों पर पूरा विश्वास हो गया है। उसी ने बताया था कि तुम 11.30 पर यहां होओगी।”

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा कि...।”

जगमोहन को वापस आ लेने दो। वो सब कुछ बताएगा ।”

मोना चौधरी के चेहरे पर बेचैनी नजर आ रही थी।

जगमोहन पर निगाह पड़ते ही देवराज चौहान के मस्तिष्क को तीव्र झटका लगा।

इतने में ही जगमोहन पास आ पहुंचा।

तुम–यहां?” देवराज चौहान के होंठों से निकला ।

तुम्हारे लिए ही आया हूं।” जगमोहन गम्भीर था।

तुम्हें कैसे पता कि...।”

तुम यहां मोना चौधरी को मारने आए हो?”

“हां।” देवराज चौहान के होंठ सिकुड़े

 
“तुम्हें कैसे पता?”

“मेरे साथ आओ, उधर।” । जगमोहन देवराज चौहान को लेकर चल पड़ा। देवराज चौहान ने महसूस किया कि कुछ ख़ास ही बात है।

कुछ बात करोगे कि असल बात क्या...।”

एक बार फिर पूर्वजन्म में जाने का खेल शुरू हो गया है।” जगमोहन ने कहा।

ओह, कैसे?”

तुम्हारी और मोना चौधरी की लड़ाई, उसी खेल का हिस्सा है। जथूरा तुम दोनों में झगड़ा कराकर, अपना मतलब साधना चाहता है। ये तो अच्छा हुआ कि मुझे पूर्वाभास होने लगा।”

“पूर्वाभास—ये तुम कैसी बातें कर...”

“मैं तुम्हें सब बताता हूं। वहां मोना चौधरी भी है, उसी के सामने बताऊँगा।” ।

“मोना चौधरी? उसने मुझे मारने के लिए तीन करोड़ की सुपारी ली है। वो...।” ।

“मोना चौधरी को मैंने और सोहनलाल ने मिलकर रोक दिया है। अब उसका दिमाग ठीक है।”

“सोहनलाल भी है।” देवराज चौहान ने मुस्कराकर गहरी सांस ली–“कोई बात थी तो तुम मुझसे फोन पर बात...।”

“मैंने तुमसे इसलिए फोन पर बात नहीं की कि तुम जो काम कर रहे हो, वो पूरा कर लो। मुझे नहीं मालूम था कि तुम मोना चौधरी के फेर में पड़ो हो। पता होता तो तुम्हें पहले ही सावधान कर चुका होता।”

“तुम बहुत कुछ कह रहे हो और मैं समझ नहीं पा रहा।”

वो देखों सामने—मोना चौधरी ।” देवराज चौहान ने मोना चौधरी, महाजन, पारसनाथ और सोहनलाल को देखा।

वे उनके पास जा पहुंचे।

देवराज चौहान को पास आया पाकर मोना चौधरी के होंठ भिंच गए।

“इन लोगों ने तुम्हें बचा लिया देवराज चौहान ।” मोना चौधरी कठोर स्वर में कह उठी-“वरना अब तक मैंने तुम्हें शूट कर देना था।”

देवराज चौहान ने मोना चौधरी को देखा। कहा कुछ नहीं। उसके बाद जगमोहन सारी बातें बताता चला गया।

जगमोहन की बातें देवराज चौहान और मोना चौधरी ने सुनीं। पूरी तरह सुनीं।

मुझे तुम्हारी बातों पर विश्वास नहीं।” मोना चौधरी कह उठी।

विश्वास, करो, मैं सही...।”

मैं देवराज चौहान को मारने के लिए तैयार हो गई। तुम्हारी बातों से ये कैसे साबित होता है कि ये जथूरा का काम है।”

“यहां ऐसा होने वाला है, मुझे पूर्वाभास हो गया...।”

“मैं नहीं मानती इस बात को। तुम्हारे पूर्वाभास को ।”

 
तुम ये सोचो कि मुझे कैसे पता चला कि राजीव चौक के मैट्रो स्टेशन पर ये सब होने वाला है।” ।

सपन चड्ढा से बात बाहर गई होगी कि...” ।

बेबी।” महाजन बोला–“तुम्हें किसने बताया कि देवराज चौहान 11.30 पर यहां आएगा?”

सपन चड्ढा ने बताया ।” महाजन ने देवराज चौहान को देखकर पूछा।

*और तुम्हें किसने बताया कि मोना चौधरी यहां मिलेगी?”

लक्ष्मण दास ने। उसी ने मुझे बताया था कि मोना चौधरी मेरी जान लेना चाहती है।”

क्या ये दोनों एक-दूसरे को जानते हैं?” महाजन ने पूछा।

दोनों दोस्त थे।” देवराज चौहान बोला—“परंतु अब इनमें दुश्मनी है।”

“तुम्हें ये बात किसने कही?”

लक्ष्मण दास ने ।”

लेकिन ।” सोहनलाल कह उटा–“इन दोनों की बातों से तो ये जाहिर है कि इन दोनों ने ही देवराज चौहान और मोना चौधरी को यहां भेजा। ताकि ये एक-दूसरे को मार सकें। खून-खराबा हो।”

सब एक-दूसरे को देखने लगे।

कुछ पल खामोशी रही।

इसका मतलब सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास मिलकर कोई खेल खेल रहे हैं।” मोना चौधरी के दांत भिंच गए।

“लक्ष्मण दास मेरा पुराना जानकार है।” देवराज चौहान ने कहा-“वो ऐसा क्यों करेगा?” ।

इस बात का जवाब तो वो ही देगा ।”

“मैं अभी सपन चड्ढा से...।” मोना चौधरी ने कहना चाहा।

मोना चौधरी ।” पारसनाथ बोला—“हम लोग जहां भी जाएंगे, इकट्ठे जाएंगे। ताकि सबको पता चले कि असल बात क्या है।”

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सपन चड्ढा सोफे पर अधलेटा था। चेहरे पर उखड़ेपन के भाव थे और वो मोमो जिन्न को टहलते हुए देख रहा था। मोमो जिन्न ने उसे देखा और हंसकर बोला।

“मुझे गालियां दे रहा है।”

उससे क्या होगा।” सपन चड्ढा ने गहरी सांस ली।

अब तू समझदारी की बातें करने लगा है।”

वहां क्या मोना चौधरी ने देवराज चौहान को मार दिया होगा?” सपन चड्ढा ने पूछा।

“अभी खबर आ जाएगी।”

आ जाएगी, कौन देगा खबर?” मोमो जिन्न ने सपन चड्ढा को घूरा फिर कह उठा।

तू सवाल बहुत पूछता है। कम बोला कर। काम की बात किया कर। बोलना ही हो तो कह, जथूरा महान है।”

सपन चड्ढा चुप रहा।

कह।”

“जथूरा महान है।”

तेरी आवाज में उत्साह नहीं है। कोई गुण नहीं तुझमें कि तू जथूरा का सेवक बन...।” | मोमो जिन्न कहते-कहते ठिटका फिर आंखें बंद करके इस तरह सिर हिलाने लगा जैसे किसी की बात सुन रहा हो।

सपन चड्ढा की नजरें मोमो जिन्न पर ही रहीं। “जग्गू ने।” मोमो जिन्न के होंठ हिले। मोमो जिन्न सिर हिलाने लगा। “जग्गू का कोई इंतजाम कर—उसे...।” मोमो जिन्न फिर जैसे बात सुनने लगा।

तो जग्गू पर इस वक्त जथूरा की शक्ति काम नहीं कर रही ।”

उधर से कहे गए शब्द मोमो जिन्न फिर सुनने लगा। सपन चड्ढा हैरान था कि वो किससे बात कर रहा है।

तो अब जथूरा इन सब पर कालचक्र फेंकेगा कि ये आपस में ही लड़ मरें। ठीक है।” मोमो जिन्न ने कहा फिर आंखें खोलकर सपन चड्ढा से बोला–“सब गड़बड़ हो गया।”

क्या मतलब?” सपन चड्ढा के माथे पर बल पड़े।

पता चल जाएगा अभी तेरे को।” मोमो जिन्न हंसा–“जा, मैंने तेरे को अपनी गुलामी से आजाद किया।”

*आजाद किया?”

विश्वास नहीं आ रहा?”

न...नहीं।”

विश्वास रख। अब तू मेरे किसी काम का नहीं रहा। जब कभी जरूरत पड़ी तो तेरे पास अवश्य आऊंगा।”

“सिर्फ मेरे पास–लक्ष्मण दास के पास नहीं?"

 
उसके पास भी आऊंगा, जब उसकी जरूरत पड़ी। पहले तुम देवा-मिन्नो से खुद को तो बचा लो।”

“खुद को बचा लो। क्या कहना चाहता है तू?”

उसी पल मोमो जिन्न सपन चड्ढा की आंखों के सामने से गायब हो गया।

सपन चड्ढा ठगा सा उस खाली जगह को देखता रहा। मोमो जिन्न की बातों का मतलब समझने की चेष्टा करने लगा, परंतु समझ नहीं पाया। उसने जल्दी से पास रखा फोन उठाया और नम्बर मिलाया।

"हैलो ।” लक्ष्मण दास की आवाज कानों में पड़ी।

वो चला गया।” सपन चड्ढा तेज स्वर में कह उठा। मोमो जिन्न?”

हां, वो ही, कहता है कि जरूरत पड़ी तो फिर आएगा। और भी अजीब बातें कह रहा था।”

“क्या?”

कहता था, सब गड़बड़ हो गया, हम देवा-मिन्नों से पहले खुद को बचा लें—ऐसी ही बातें ।” ।

इन बातों का क्या मतलब हुआ?”

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा। तू मेरे पास आ जा।”

तेरे पास?"

जाने क्यों घबराहट हो रही है। मोमो जिन्न ने मेरा बुरा हाल कर रखा है।”

“मेरा भी तो बुरा हाल है।”

“आ रहा है मेरे पास?

" पता नहीं, देखता हूं।”

सपन चड्ढा ने फोन बंद किया फिर दीवार पर लगी घड़ी में वक्त देखा, 12 बज रहे थे। उसे अभी तक इस बात पर विश्वास नहीं आ रहा था कि मोमो जिन्न उसके पास से चला गया है। फिर भी उसने खुद को आजाद सा महसूस किया जैसे कि किसी ने उसे बंदी बना रखा हो और अब बंदी ना हो। | सपन चड्ढा उठा। नहा-धोकर कपड़े बदले। एक बजने को हो गया था। नौकर को लंच लगा देने को कहकर ड्राइंग रूम में पहुंचा कि कदमों की आहटें उसके कानों में पड़ीं।

फिर सपन चड्ढा कांपता सा गया। | देवराज चौहान, मोना चौधरी, जगमोहन, सोहनलाल, पारसनाथ

और महाजन उसके सामने थे। | सपन चड्ढा का चेहरा फक्क पड़ गया। जबकि वो मोना चौधरी

के अलावा किसी को जानता नहीं था। |

मोना चौधरी ने उसे कड़वी नजरों से देखा फिर आगे बढ़ी और उसके पास पहुंच गई।

क्या हाल है तेरा?” मोना चौधरी ने शब्दों को चबाकर पूछा।

ठ...ठीक है।”

घबरा क्यों गया मुझे देखकर?”

न...नहीं तो।” सपन चड्ढा ने होंठों पर जीभ फेरी।

ये तो तूने मुझे बताया ही नहीं कि तेरे को कैसे पता चला कि देवराज चौहान 11.30 बजे, राजीव चौक मैट्रो स्टेशन पहुंचेगा।”

म...मोमो जिन्न ने कहा ऐसा कहने को ।”

“मोमो जिन्न?” मोना चौधरी के दांत भिंच गए–“ये कौन है?"

मोमो जिन्न...है।”

सीधी तरह जवाब दे।” मोना चौधरी गुर्राई।

म...मोमो जिन्न ही तो है वो। ठीक कह रहा हूँ मैं।” सपन चड्ढा घबराया-सा कह उठा–“वो दैवीय ताकतों का मालिक लगता था। कभी चार फीट का हो जाता था तो कभी तीन इंच का। मुझसे कहता था कि मैं कहूं जथूरा महान है।”

जथूरा!” सब चौंके। एक-दूसरे को देखा।

 


“कौन जथूरा?”

“पता नहीं, उसे वो अपना मालिक कहता था। मैंने वो ही किया, जो उसने कहा। न करता तो जाने मेरे साथ क्या सलूक करता।”

तभी जगमोहन कह उठा।

“अब ये तो साबित हो गया कि मैंने जो कहा, वो सच है। इन सबके पीछे पूर्वजन्म का जथूरा रहा है।”

*और क्या कहता था मोमो जिन्न?” मोना चौधरी ने पूछा।

वो कहता था कि देवा और मिन्नो में झगड़ा करवाकर, एक को खत्म करवाना है।” |

मोना चौधरी ने गहरी सांस ली।

“तुममें और लक्ष्मण दास में कोई झगड़ा नहीं?” देवराज चौहान ने पूछा। ।

“नहीं। मुझे और लक्ष्मण को मोमो जिन्न ने मजबूर किया, ये सब करने को। हमारी कोई गलती नहीं ।” सपन चड्ढा ने परेशान स्वर में कहा—“उसकी बात को इंकार करो तो वो नंगा करके सड़क पर घुमाने की धमकी देता था।”

वो तुम्हें कहां मिला?” महाजन ने पूछा।

सपन चड्ढा ने गहरी सांस लेकर कहा।

बहुत खतरनाक ढंग से वो हमें मिला। हमारे नाम जानता था, ये जानता था कि लक्ष्मण दास देवराज चौहान को जानता है। हमारे बारे में सब कुछ जानता था। उसने हमें जैसे अदृश्य बंधन में जकड़ लिया था।”

मिला कहां?” सपन चड्ढा ने बताया।

उसकी और बातें बताओ ।”

क्या बताऊं, घंटा-भर पहले यहां था वो, कह रहा था सब गड़बड़ हो गया। फिर खड़े-खड़े ऐसे बोलने लगा जैसे किसी से बात कर रहा हो। उन बातों में दो बार उसने जग्गू का नाम लिया, फिर जैसे किसी से कह रहा हो कि जथूरा अब इन पर कालचक्र फेंकेगा कि ये आपस में लड़ मरें। मेरे को तो समझ नहीं आ रहा कि ये सब क्या हो रहा...”

तभी वहां लक्ष्मण दास ने प्रवेश किया। देवराज चौहान को वहां पाकर घबरा उठा।

आ लक्ष्मण, तू इन सबको मोमो जिन्न के बारे में बता, ये मोना चौधरी है।”

“य...ये देवराज चौहान।” लक्ष्मण दास घबराए स्वर में कह उठा–“मेरी कोई गलती नहीं देवराज चौहान । मोमो जिन्न बहुत ही खतरनाक है। उसने हमें ये सब करने को मजबूर कर दिया था।”

देवराज चौहान ने सपन चड्ढा से पूछा।

कालचक्र क्या है?"

मैं नहीं जानता। मोमो जिन्न के मुंह से ही सुना था ये, तो मैंने बता दिया ।” ।

देवराज चौहान गम्भीरता से उसे देखता रहा।

“हम नई मुसीबत में फंसने जा रहे हैं।” पारसनाथ कह उठा।

जथूरा जो झगड़ा करवाना चाहता था देवराज चौहान और मोना चौधरी में उसमें असफल रहा। अब वो कालचक्र नाम का कोई नया रास्ता इस्तेमाल करने जा रहा है कि हममें झगड़ा हो ।” महाजन ने कहा।

“अगर हम आपस में तय कर लें कि किसी भी हालत में हमें झगड़ा नहीं करना है तो जथूरा को मात दे सकते हैं।” पारसनाथ बोला।

“ये कहने की बात है, जब हालात बनेंगे तो कोई भी पीछे नहीं हटेगा।” सोहनलाल ने कहा।

“ये तो कोशिश कर सकते हैं कि झगड़ा ज्यादा न बढ़े।” जगमोहन ने मोना चौधरी को देखा।

मोना चौधरी, बेहतर होगा कि तुम आने वाले हालातों में होश कायम रखो और देवराज चौहान को अपना दुश्मन न समझो ।”

मैं नहीं जानती क्यों—देवराज चौहान का नाम सुनते ही मैं पागल हो जाती...।”

उस हालत में तुम्हें महाजन और पारसनाथ की बात माननी चाहिए।"

अबकी बार मैं सतर्क रहूंगी।”

सोचने की बात तो ये है कि जथूरा क्यों हममें झगड़ा कराना चाहता है।” देवराज चौहान ने कहा।

“वो चाहता है कि हम पूर्वजन्म का सफर न करें।” जगमोहन बोला—“पोतेबाबा के द्वारा जथूरा कब से मेरे पीछे पड़ा है, परंतु मैं उसकी बात नहीं मान रहा। इसलिए नहीं कि मेरी कोई जिद है, सिर्फ इसलिए कि मैं होने वाले हादसों को टालना चाहता हूं। इस तरह उसकी नहीं चली तो अब वो हममें झगड़ा कराने के लिए कुछ करने जा रहा है।”

“तो हमें क्या करना चाहिए?” महाजन ने सबको देखा।

“हम सतर्क रहने के अलावा कर ही क्या सकते हैं। ध्यान रखेंगे कि आपस में झगड़ा न करें।

कोई कुछ न बोला।

हमें चलना चाहिए। जगमोहन बोला—“रुस्तम राव और बांके पूसा रोड के बंगले में मेरा इंतजार कर रहे होंगे।”

वो भी साथ हैं?” मोना चौधरी के होंठों से निकला।

हां ।”

“उन्होंने भी हर बार पूर्वजन्म का सफर किया है। सबका एक साथ इकट्ठे होना खतरनाक है।” मोना चौधरी कह उठी।

फिर वो सब चले गए।

सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास की सांस में सांस आ गई। “बच गए चड्ढा ।”

सस्ते में बचे । देवराज चौहान और मोना चौधरी से बचे और मोमो जिन्न से भी पीछा छूट गया।”

मुझे तो अब भी यकीन नहीं आ रहा।”

ऐसा मत कह, मुझे यकीन आ रहा है।” सपने चड्ढा ने जैसे खुद को तसल्ली दी।

 
मोमो जिन्न ने तेरे से कहा कि वो फिर नहीं आएगा?” लक्ष्मण दास ने पूछा।।

“हां, ऐसा ही बोला, लेकिन ये भी कहा कि जरूरत पड़ी तो वो फिर भी आ सकता है।”

“ओह।”

लेकिन वो सब पूर्वजन्म की बातें क्यों कर रहे थे?”

क्या पता?" ।

“पागल तो नहीं थे वे सब ।”

ऐसा मत कह। सब खतरनाक थे वे। अवश्य कोई बात है। जो हमारी समझ से बाहर है।” ।

“हां, ये भी हो सकता है।”

“मोमो जिन्न उनमें झगड़ा क्यों करवाना चाहता है, वो क्यों चाहता है कि सब मरें।”

कोई तो बात होगी।”

मोमो जिन्न सीधे-सीधे उन पर हाथ क्यों नहीं डाल देता।”

पागल हो जाऊंगा, इन बातों के बारे में सोचकर। हम बच गए यही बहुत है। साला वो ठिगना जिन्न मेरे से कहता था कि मैं कहूं जथूरा महान है।” सपन चड्ढा ने बुरा सा मुंह बनाकर कहा।

“मेरे से भी कहता था। उल्लू का पट्ठा। लेकिन ये जथूरा है कौन?”

किसी इलाके का बदमाश होगा।”

बदमाशों के पास मोमो जिन्न जैसे जिन्न थोड़े ही होते हैं।”

छोड़ इन बातों को। सब कुछ भूल जा। पूर्वजन्म का सफर, मेरी तो समझ से बाहर है। खाना लग गया होगा।” ।

“मुझे भी भूख लगी...सपन—वो देख–मोमो जिन्न ” लक्ष्मण दास चीखते जैसे स्वर में बोला।

सपन चड्ढा की निगाह उस तरफ गई।

सोफे के पास ही तीन इंच का मोमो जिन्न खड़ा नजर आ रहा था। दोनों को अपनी सांसें रुकती-सी लगीं।

उनके देखते ही देखते मोमो जिन्न बड़ा होकर चार फीट का हो गया।

तो मैं उल्लू का पट्ठा हूं।”

लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा सकपकाए।

तुम दोनों को शिक्षा की जरूरत है। वैसे हो तुम दोनों ही काम के ।”

त...तुम फिर आ गए।” सपन चड्ढा घबराए स्वर में बोला।

क्यों नहीं आऊंगा। अपने गुलामों के पास आने के लिए मुझे | किसी की इजाजत नहीं ।”

तुमने तो कहा था कि तुम हमें आजाद कर रहे...

” ये भी तो कहा था कि जरूरत पड़ी तो फिर आऊंगा।”

त...तो जरूरत पड़ गई?” लक्ष्मण दास हड़बड़ा कर बोला।

हां। जरूरत खत्म कहां हुई है। अभी तो मामला शुरू हुआ है। तुमने सब कुछ उन्हें बता दिया।”

“म...मैंने कुछ नहीं बताया–लक्ष्मण से पूछ लो ।”

मैं यहीं था, सब सुन रहा था।”

“तुम हमारा पीछा क्यों नहीं छोड़ते?”

“अभी तो तुम दोनों ने मेरे बहुत काम करने हैं। पीछा कैसे छोड़ दें। बोलो, जथूरा महान है।”

 
सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास की नजरें मिलीं।

“बोलो।” मोमो जिन्न का स्वर कठोर हो गया।

जथूरा महान है।” दोनों एक साथ बोले।

खूब, इसी तरह धीरे-धीरे मैं तुम दोनों को जथूरा का खास सेवक बना दूंगा। जथूरा सच में महान हैं। उसकी ताकतों की कोई सीमा नहीं। उसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। वो हमेशा हीं जीतता आया है—बोलो।”

जथूरा महान है।”

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वापस मुम्बई । बंगले पर। सोहनलाल, बांकेलाल राठौर और रुस्तम राव जा चुके थे। मोना चौधरी, महाजन और पारसनाथ दिल्ली रह गए थे।

“यहां के हालातों के बारे में तुम मुझे बता देते तो मैं मोना चौधरी के रास्ते से हट जाता।” देवराज चौहान बोला।

“मैंने सोचा तुम्हें डिस्टर्ब क्यों करूं, इसलिए नहीं बताया।” जगमोहन ने कहा।

देवराज चौहान ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया।

जथूरा तुम्हें और मोंना चौधरी को लड़वाकर, किसी एक को ख़त्म कराने पर आमादा है।”

“मेरे विचार में हमें पूर्वजन्म के सफर की तैयारी कर लेनी चाहिए।” देवराज चौहान ने जगमोहन को देखा।

क्यों?”

जथूरा खामोश नहीं बैठने वाला, अबकी बार वो कोई खास पैंतरा इस्तेमाल करेगा।”

“कालचक्र ।” जगमोहन कह उठा–“ये कालचक्र जाने क्या बला है जो...।”

“इतना सब कुछ होने के बाद जथूरा कालचक्र का इस्तेमाल कर रहा है तो यकीनन वो कुछ ख़ास ही होगा।” देवराज चौहान ने कश लेते हुए गम्भीर स्वर में कहा—“हमें जथूरा की चालों से सतर्क रहना चाहिए।”

 
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