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सोहनलाल से उसकी नजरें मिलीं। सोहनलाल मुस्कराया और मोना चौधरी की तरफ बढ़ने लगा। मोना चौधरी ने पलटना चाहा कि तभी जगमोहन की शांत आवाज मोना चौधरी के कानों में पड़ी।
हिलना मत ।”
“तुम–जगमोहन ।”
खामोश रहो।”
तब तक सोहनलाल पास आ गया था और मोना चौधरी की तलाशी के लिए हाथ आगे बढ़ाए।
मुझे हाथ मत लगाना।”
“तौ ।” सोहनलाल ठिठका–“अपना हथियार निकालकर मुझे दे दो।”
तुम लोग, बचोगे नहीं।” मोना चौधरी गुर्राई।
सोहनलाल उसे देखता रहा। दांत पीसते हुए मोना चौधरी ने रिवॉल्वर निकालकर उसे दी। सोहनलाल रिवॉल्वर जेब में रखता पीछे हो गया।
जगमोहन ने उसकी कमर से रिवॉल्वर हटाई और वापस रख ली।
गुस्से से भरी मोना चौधरी पलटकर जगमोहन को देखते कह उठी।
ये क्या हरकत है?”
“तुम देवराज चौहान को मारने यहां आई हो ।” जगमोहन शांत था।
“हां, लेकिन तुम्हें कैसे पता, क्या तुम मुझे शूट करोगे?” मोना चौधरी ने कड़वे स्वर में कहा।
“नहीं। मैं तुम्हें और देवराज चौहान को रोकने आया हूं।”
देवराज चौहान को रोकने?”
“वो भी यहां कहीं है, तुम्हें मारने के लिए।”
मुझे मारने के लिए, ये कैसे हो सकता है?” मोना चौधरी के होंठों से निकला।
“मैं नहीं जानता, लेकिन तुम दोनों एक-दूसरे को मारने के लिए यहां हो।”
ये बात तुम्हें कैसे पता है?”
जगमोहन ने स्टेशन की घड़ी को देखा, जहां 11.35 हो रहे थे।
जगमोहन मुस्करा पड़ा। हादसे का 11.30 का वो वक्त निकल चुका था।
सोहनलाल, रिवॉल्वर वापस दे दे।” सोहनलाल ने रिवॉल्वर मोना चौधरी को दे दी। मोना चौधरी उलझन में दिखी। रिवॉल्वर वापस रख ली।
“तुम लोगों की हरकत मेरी समझ में जरा भी नहीं आई।” मोना चौधरी के माथे पर बल दिखे।
“अभी समझ में आ जाएगा। मैं अभी आता हूं।” जगमोहन ने कहा और आगे बढ़ गया।
मोना चौधरी ने सोहनलाल को देखा।
वो कहां गया है?
” देवराज चौहान को लेने।”
मोना चौधरी का चेहरा कठोर हो गया।
“तुम लोग कर क्या रहे हो?
” जगमोहन आकर बताएगा।
” तुम नहीं बता सकते?”
हिलना मत ।”
“तुम–जगमोहन ।”
खामोश रहो।”
तब तक सोहनलाल पास आ गया था और मोना चौधरी की तलाशी के लिए हाथ आगे बढ़ाए।
मुझे हाथ मत लगाना।”
“तौ ।” सोहनलाल ठिठका–“अपना हथियार निकालकर मुझे दे दो।”
तुम लोग, बचोगे नहीं।” मोना चौधरी गुर्राई।
सोहनलाल उसे देखता रहा। दांत पीसते हुए मोना चौधरी ने रिवॉल्वर निकालकर उसे दी। सोहनलाल रिवॉल्वर जेब में रखता पीछे हो गया।
जगमोहन ने उसकी कमर से रिवॉल्वर हटाई और वापस रख ली।
गुस्से से भरी मोना चौधरी पलटकर जगमोहन को देखते कह उठी।
ये क्या हरकत है?”
“तुम देवराज चौहान को मारने यहां आई हो ।” जगमोहन शांत था।
“हां, लेकिन तुम्हें कैसे पता, क्या तुम मुझे शूट करोगे?” मोना चौधरी ने कड़वे स्वर में कहा।
“नहीं। मैं तुम्हें और देवराज चौहान को रोकने आया हूं।”
देवराज चौहान को रोकने?”
“वो भी यहां कहीं है, तुम्हें मारने के लिए।”
मुझे मारने के लिए, ये कैसे हो सकता है?” मोना चौधरी के होंठों से निकला।
“मैं नहीं जानता, लेकिन तुम दोनों एक-दूसरे को मारने के लिए यहां हो।”
ये बात तुम्हें कैसे पता है?”
जगमोहन ने स्टेशन की घड़ी को देखा, जहां 11.35 हो रहे थे।
जगमोहन मुस्करा पड़ा। हादसे का 11.30 का वो वक्त निकल चुका था।
सोहनलाल, रिवॉल्वर वापस दे दे।” सोहनलाल ने रिवॉल्वर मोना चौधरी को दे दी। मोना चौधरी उलझन में दिखी। रिवॉल्वर वापस रख ली।
“तुम लोगों की हरकत मेरी समझ में जरा भी नहीं आई।” मोना चौधरी के माथे पर बल दिखे।
“अभी समझ में आ जाएगा। मैं अभी आता हूं।” जगमोहन ने कहा और आगे बढ़ गया।
मोना चौधरी ने सोहनलाल को देखा।
वो कहां गया है?
” देवराज चौहान को लेने।”
मोना चौधरी का चेहरा कठोर हो गया।
“तुम लोग कर क्या रहे हो?
” जगमोहन आकर बताएगा।
” तुम नहीं बता सकते?”