• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
“नहीं रह सकते। क्योंकि उसके पास ताकतें हैं, वो...” “अब हम सब अलग-अलग हो चुके हैं, जो कि अच्छी बात है।”

जथूरा की याद है तुम्हें?

” नहीं।” ।

पोतेबाबा की भी याद नहीं?

” नहीं ।” तभी जगमोहन की आंखें सिकुड़ीं।

सिगरेट के धुएं में उसे हाथ की उंगलियां पल भर के लिए दिखाई दी थीं।

उधर धुआं फेंको ।” जगमोहन के होंठों से निकला।

क्या?” देवराज चौहान ने जगमोहन को देखा।

उधर धुआं फेंको। उधर, वहां शायद पोतेबाबा है। वो आ चुका है।” जगमोहन व्याकुल स्वर में बोला।

देवराज चौहान ने ऐसा ही किया।

अगले ही पल धुएं में पोतेबाबा की आकृति चमकती चली गई। देवराज चौहान के चेहरे पर अजीब से भाव उभरे, उस आकृति को देखकर।

य...ये पोतेबाबा है।”

पोतेबाबा का दाढ़ी वाला चेहरा मुस्करा पड़ा।

मैं धूप लाता हूं। उसके धुएं में इसकी आकृति आधी-अधूरी नजर आती रहेगी।” कहकर जगमोहन चला गया।

“कैसा है तू देवा?” पोतेबाबा की आवाज सुनाई दी। आकृति सोफे की तरफ बढ़ गई। | अगले ही पल आकृति धुएं से बाहर थी। नजर आनी बंद हो गई। | देवराज चौहान ने पुनः कश लेकर सोफा चेयर पर धुआं फेंका तो वहां बैठा पोतेबाबा दिखा।

देवा को पोतेबाबा का सलाम।” देवराज चौहान उसे देखता रहा।

पहचाना मुझे?” पोतेबाबा की आकृति के होंठ हिले ।।

“नहीं।"

तीसरा जन्म है तुम्हारा। जन्मों की यादों के पीछे खो चुकी हैं तुम्हारी यादें । लेकिन तुम्हें कभी भी सब कुछ याद आ सकता है

क्यों याद आ सकता है?”

क्योंकि अब पूर्वजन्म से तुम्हारे तार जुड़ते जा रहे हैं, तभी तो तुम मेरे से बात कर रहे हो ।”

तुम हकीकत में कौन हो?"

जथूरा का सबसे खास सेवक ।”

मैं जथूरा को भी नहीं जानता।”

मैं अपने मुंह से तेरे को जथूरा की याद नहीं दिलाऊंगा। अपने बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि मैं गुलचंद का यार हुआ करता था।”

सोहनलाल का?” ।

“हां, उसके बाद जथूरा की सेवा में चला गया और आज जथूरा का खास हूं।”

देवराज चौहान पोतेबाबा की आधी-अधूरी नजर आ रही आकृति को देखे जा रहा था।

तभी जगमोहन मोटी-सी धूप जलाकर वहां ले आया था। उसमें उठता धुआं वहां फैलने लगा। धूप को उसने पास टेबल पर रख दिया। अब धुएं में पोतेबाबा की आकृति बहुत हद तक स्पष्ट नजर आने लगी थीं।

“क्या बात हुई?” जगमोहन ने देवराज चौहान को देखा।

*अभी तो कुछ खास बात नहीं हुई।”

देवराज चौहान ने कहा फिर पोतेबाबा से बोला “तुम चाहते क्या हो?”

 
“मैं जग्गू से चाहता था कि जथूरा के कामों में दखल न दे। उसके हादसों को न रोके। जथूरा की कोई दुश्मन शक्ति जग्गू को जथूरा के द्वारा कराए जाने वाले हादसों का पूर्वाभास करा रही है। वो शक्ति हादसों की इस तरह की कड़ी से पूर्वाभास जग्गू को करा रही है कि तम लोग पूर्वजन्म की यात्रा करने पर मजबूर हो जाओ।”

। “तुम्हें या जथूरा को इसमें क्या परेशानी है?”

तुम लोगों की इस बार की पूर्वजन्म की यात्रा जथूरा के महल पर जाकर खत्म होगी। जथूरा से झगड़ा होगा तुम सबका और जथूरा नहीं चाहता कि ऐसा झगड़ा हो। वो नहीं चाहता कि जग्गू को कुछ हो ।”

बकवास है।” जगमोहन बड़बड़ा उठा।

जगमोहन को कुछ होने में जथूरा को क्या तकलीफ है।” देवराज चौहान ने तीखे स्वर में पूछा।

“जथूरा पर जग्गू का कोई एहसान है। वो नहीं चाहता कि जग्गू उससे टक्कर ले और जान गंवा बैठे।” ।

“तुम जथूरा से कह दो कि वो जगमोहन की चिंता न करें ।” देवराज चौहान बोला।।

अवश्य कहूंगा देवा। तुम क्यों नहीं मानते मेरी बात?

” क्या-बोलो?

” जग्गू को जथूरा के मामलों में दखल देने से मना कर दो।”

“मैं जथूरा के हक में कोई काम क्यों करूं। वो हमारी दुनिया में हादसे तैयार करके भेजता है। लोगों को खामखाह मौत के मुंह में भेजता है जो कि गलत बात है। तुम जथूरा को ये सब करने को मना कर दो।”

“ये सम्भव नहीं। हादसों का देवता है जथूरा। वो अपने कर्म से पीछे कैसे हट सकता है?”

“तो हम भी अपने कर्म से पीछे नहीं हट सकते।”

मैं तुम्हें अमूल्य पत्थर दूंगा। जिसकी कीमत इस दुनिया में बहुत है।” पोतेबाबा के होंठ हिलते दिखे।

नहीं चाहिए हमें तुमसे कुछ ।”

सोच लो देवा ।” पोतेबाबा गम्भीर हो उठा–“जथूरा का तुम बाल भी बांका नहीं कर सकते ।”

 
हमें कुछ नहीं करना जथूरा का।”

“मेरी बात नहीं मानोगे तो तुम्हारे और जथूरा के रास्ते एक होते चले जाएंगे। फिर झगड़ा तो होगा ही।” ।

“इस बारे में जथूरा को सोचना चाहिए।”

जथूरा कह रहा था कि देवा समझदार है, वो जरूर तेरी बात मान जाएगा।” ।

देवराज चौहान ने कड़वी निगाहों से पोतेबाबा की आकृति को देखा फिर कह उठा।

जथूरा से कह देना कि देवराज चौहान बहुत बड़ा बेवकूफ है।”

अवश्य कहूंगा कि तुमने ऐसा कहा। परंतु तुम लोग जथूरा के कहर से बच नहीं सकते।” ।

जथूरा को इस तरह पीछे नहीं पड़ना चाहिए।” देवराज चौहान ने कहा।

जग्गू नहीं मानता जथूरा की बात। तू नहीं मानता तो कहर तो बरपेगा ही।”

देवराज चौहान के चेहरे पर कठोरता आ ठहरी। तभी जगमोहन बोला।

“अब तुम क्या करने वाले हो। मोमो जिन्न ने सपन चड्ढा के सामने कालचक्र का जिक्र किया था।”

“हां कालचक्र अब तुम सब पर फेंका जाने वाला है। जथूरा के कालचक्र से कोई नहीं बच सका अब तक। जथूरा कालचक्र का इस्तेमाल ही तब करता है जब सामने वाला उसकी बात न माने ।”

“कालचक्र है क्या?” जगमोहन की आंखें सिकुड़ीं।

“अभी नहीं बताऊंगा। आने वाले वक्त में खुद ही तुम लोगों को एहसास हो जाएगा।” पोतेबाबा हंस पड़ा-“तुम लोग अपने को बहुत बड़े समझते हो, लेकिन कालचक्र में फंसकर पिस जाओगे। पागल हो जाओगे।”

उल्लू का पट्टा।” जगमोहन कुढ़कर बोला।।

“अब मैं तेरी बात का बुरा नहीं मानूंगा जग्गू ।”

देवराज चौहान सोच-भरे स्वर में कह उठा।

जथूरा हादसों का देवता है।”

हां देवा ।” पोतेबाबा की रेखाओं वाली आकृति के होंठ हिलते दिखे।

तो वो हमें मारने के लिए कोई भी हादसा रच सकता है।”

नहीं, जथूरा की शक्तियां तुम लोगों पर तब तक असर नहीं करेंगी, जब तक तुम लोग पूर्वजन्म में प्रवेश नहीं करते।” ।

“तो कालचक्र कैसे असर करेगा हम पर वो भी तो...।”

 
“वो कालचक्र जथूरा का अपना नहीं है। सोबरा का कालचक्र है वो। सोबरा ने कभी वो कालचक्र जथूरा पर काबू पाने के लिए फेंका था, परंतु जथूरा ने उस कालचक्र को अपनी ताकतों के सहारे कैद कर लिया। अब उसी कालचक्र पर जथूरा नई कहानी रचकर, तुम सबके नाम पर छोड़ने जा रहा है। बचेगा कोई भी नहीं ।”

“कालचक्र छोड़ने पर क्या होगा?”

“ये नहीं बताऊंगा।” पोतेबाबा हंसा–“तुम लोग भुगतोगे तो समझ जाओगे।”

बताने में क्या हर्ज है?”

मेरा बहुत-सा वक्त खराब होगा। अभी भी वक्त है, कालचक्र से बच सकते हो।” पोतेबाबा बोला।

कि जगमोहन जथूरा के रचे हादसों में दखल न दें।”

ठीक समझे ।”

“हम तुम्हारी या जथूरा की कोई बात नहीं मानेंगे।” देवराज चौहान ने दृढ़ स्वर में कहा।

तभी जगमोहन कह उठा। “सोबरा कौन है?”

नहीं जानते, ओह तुम लोगों को तो अभी कुछ भी याद नहीं आया। सोबरा जथूरा का भाई है। परंतु दोनों में कभी नहीं बनी। दोनों एक-दूसरे पर वार करते रहते हैं। दोनों के पिता जगन्नाथ के पास शक्तियों वाली कुछ चाबियां थीं, जिन्हें जगन्नाथ के मरते ही जथूरा ने हासिल कर लिया और अब सोबरा उन शक्तियों वाली चाबियों को पाना चाहता है।”

“तो हमेशा की तरह वहां पर अपने ही झंझट पहले से चालू हैं।” जगमोहन ने कहा।

ये तो हर दुनिया में चलते रहते हैं। तो मैं जाऊं?"

“तुम आए ही क्यों थे?"

“एक बार बात करने। ये सोचकर कि शायद देवा कोई ठीक फैसला ले ले। परंतु कोई फायदा नहीं हुआ।” ।

देवराज चौहान कठोर निगाहों से पोतेबाबा की आकृति को देखे जा रहा था।

जथूरा गलत कदम उठा रहा है।” देवराज चौहान कह उठा।

“वो तुम लोगों को पूर्वजन्म में नहीं आने देना चाहता और तुम लोगों के कर्म, तुम्हारे कदम पूर्वजन्म की तरफ बढ़ा रहे हैं।”

दो पल खामोशी रही। | फिर पोतेबाबा की आकृति को सोफे से उठते देखा। उसके बाद वो धुएं के दायरे से दूर होते हुए गायब हो गया।

देवराज चौहान और जगमोहन की नजरें मिलीं।

“मेरे खयाल में खतरनाक मामला शुरू होने वाला है, जाने कैसा है कालचक्र?" जगमोहन बोला।

देवराज चौहान कुछ कहने लगा कि तभी जेब में मौजूद मोबाइल बज उठा।

"हैलो ।” देवराज चौहान ने मोबाइल निकालकर बात की।

कहां हैं आप?” नगीना की मीठी आवाज कानों में पड़ी।

जगमोहन के पास बंगले पर ।” देवराज चौहान ने गहरी सांस लेकर कहा।

“आ रहे हैं, मैंने खाना तैयार कर रखा है। जगमोहन को भी साथ ले आइए।” ।

कुछ देर में आता हूँ न ।” कहकर देवराज चौहान ने मोबाइल बंद कर दिया।

“नगीना भाभी का फोन था?" जगमोहन ने पूछा। ।

“हां, उसने खाना तैयार कर रखा है। तुम्हें भी बुला रही है।” देवराज चौहान ने कहा।

फिर तो मैं जरूर जाऊंगा।” जगमोहन मुस्कराया।

“जथूरा के कालचक्र के बारे में हमें गम्भीर हो जाना चाहिए।” देवराज चौहान बोला-“वो हमें मुसीबत में डाल...।”



कभी-कभी सोचता हूं कि जथूरा के रास्ते से हट जाऊं, परंतु जब होने वाले हादसे का पूर्वाभास होता है तो उस तरफ भाग जाता हूं

देवराज चौहान मुस्करा पड़ा।

क्या हुआ?” जगमोहन ने पूछा।

ये पूर्वजन्म का मामला है। तुम इससे बचे नहीं रह सकते। ये जब-जब शुरू हुआ, हमें पूर्वजन्म में प्रवेश करना पड़ा।”

जगमोहन ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला कि उसी पल उसके मस्तिष्क में बिजलियां कौंधीं। उसने दोनों हाथों से सिर थाम लिया। आंखें बंद होती चली गईं। मस्तिष्क में बिजलियां चमक रही थीं।

क्या हुआ?” देवराज चौहान उसकी बदलती हालत पर चौंका।

चुप रहो।” जगमोहन के होंठों से कठिनता से ये शब्द निकले।

परंतु उस आवाज को सुनकर देवराज चौंक पड़ा। वो आवाज जगमोहन की नहीं थी। देवराज चौहान वहीं खड़ा हैरानी से, जगमोहन को देखता रहा।

 
एकाएक जगमोहन के मस्तिष्क में चमकती बिजलियां थम गईं। सब कुछ शांत नजर आने लगा। उसके मस्तिष्क ने देखा कि वो जगह बेहद शांत है। हरे-भरे पेड़ों से भरी जगह। वहां चट्टानें भी थीं, जमीन भी थी। कुछ दूर छोटी-सी बस्ती बनी नजर आ रही थी। वहां छांव भी थी, धूप भी थी। हवा में नमी थी। उसके कान पानी की छपाक-छपाक सुन रहे थे। फिर उसने समुद्र की लहरों को देखा जो किनारे पर आतीं और वहां आपस में टकराकर आवाज करतीं और झाग बनाती लुप्त हो जातीं। ये समुद्र के किनारे कोई जगह थी, परंतु शोर-शराबे से दूर। वहां के नजारे जगमोहन का मस्तिष्क देख रहा था कि तभी धूप में एक चट्टान पर पड़ा उसे कोई दिखा वो औंधे मुंह पड़ा हुआ था। जगमोहन को लगा जैसे वो उसके पास जा पहुंचा हो। वो कोई युवती थी। गुलाबी सूट पहने थी। दुपट्टा उसके गले में फंसा था। उसके सिर के बाल कंधे तक लम्बे थे, जो कि इस वक्त अस्त-व्यस्त थे। | जगमोहन को लगा कि जैसे वो उसे पहले भी कहीं देख चुका था वो औंधी पड़ी बेहोश जैसी लग रही थी।

जगमोहन को लगा जैसे वो उसके बेहद करीब पहुंच गया हो। उसका कंधा पकड़कर उसे हिला रहा हो। परंतु उसके हिलाने का युवती पर कोई असर नहीं हुआ तो उसने युवती को सीधा किया। उसके चेहरे पर नजर पड़ते ही वो चौंका। वो नगीना थी जो कि इस वक्त गहरी बेहोशी में थी।

अगले ही पल जगमोहन का मस्तिष्क शांत होता चला गया। दिमाग में उठा तूफान–बिजलियां थम गई थीं।

जगमोहन गहरी-गहरी सांसें लेने लगा। उसने आंखें खोलीं। सिर पर रखे दोनों हाथ हटा लिए। देवराज चौहान की निगाह एकटक जगमोहन पर थीं।

“जगमोहन।” देवराज चौहान बोला—“क्या हुआ तुम्हें तुम...।”

“नगीना भाभी।” जगमोहन के होंठों से निकला।

क्या मतलब?” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े।

मुझे पूर्वाभास हुआ है। नगीना भाभी खतरे में है। हमें जल्दी-से नगीना भाभी के पास पहुंचना होगा।” जगमोहन तेज स्वर में बोला।

“लेकिन तुमने क्या देखा था।”

रास्ते में बताऊंगा।” जगमोहन कहता हुआ बाहर की तरफ दौड़ा।

देवराज चौहान भी उसके पीछे चल पड़ा।

“जब तुम्हें कुछ हुआ था तो मैंने तुम्हें पुकारा।” देवराज चौहान उसके पीछे बढ़ता कह उठा–“तब तुमने मुझे चुप रहने को कहा, लेकिन उस वक्त तुम्हारे होंठों से निकली आवाज तुम्हारी आवाज नहीं थी।”

“चुप रहो, मुझे पहले नगीना भाभी को बचाना है। मुझे लगता है जथूरा ने अपना कालचक्र छोड़ दिया है।”

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
शाम के 7.30 बजे थे।

उस पार्क में बच्चे और औरतें मौजूद थे। धीरे-धीरे अंधेरा होता जा रहा था। बच्चे और औरतें घर जाने लगे थे। वो बूढ़ी सी, पतली औरत बैंच पर चश्मा लगाए बैठी थी। सत्तर बरस की उसकी उम्र होगी। बाल पूरे सफेद थे। चूहे की पूंछ की तरह, पतली-सी चुटिया बनी, गर्दन से जरा ही नीचे थी। पास में पांच फीट की लाठी रखी थी, जिसे थामकर वो चलती थी।

वो बूढ़ी औरत भी घर जाने को सोचने लगी थी। | उसी पार्क के ऊपर रुई जैसा बाल के साईज का सफेद गोला तैर रहा था, जिस पर किसी की नजर नहीं गई थी। ज्योंही अंधेरा होना शुरू हुआ, पार्क के लोग धीरे-धीरे घर जाने लगे तो वो रुई का गोला सफेद-सी आकृति में बदला और नीचे आकर वो आकृति बूढ़ी औरत के सिर पर मंडराने लगी। " ऐसे अंधेरे जैसे समय में उस आकृति को देख पाना आसान नहीं था।

फिर वो आकृति जैसे बूढ़ी औरत के सिर में समाती चली गई।

बुढ़िया के मस्तिष्क को कुछ असुविधा-सी हुई। वो उठ खड़ी हुई। आस-पास उसने देखा। पास रखी लाठी उठा ली। एक-दो बार उसने सिर पर हाथ फेरा। फिर कह उठी।

कौन है?" स्वर बूढ़ा ही था।

“मैं-भौरी।” ।

बुढ़िया को लगा जैसे उसके कान में कोई फुसफुसाया है। भौरी कौन?”

भौरी ।” इस बार फुसफुसाहट में चंचलता आ गई थी।

“तू मेरे अंदर क्यों आ गई?” बूढ़ी औरत के होंट से निकला।

काम है।”

क्या?” ।

तेरे से नहीं, कहीं और काम है। लेकिन उस काम के लिए मुझे शरीर भी तो चाहिए, सो तेरा ले लिया।”

चली जा। मैं तुझे अपना शरीर इस्तेमाल न करने देंगी।”

“सोच ले। तू बूढ़ी हो चुकी है। मैं तेरे को जवान बना देंगी।”

जवान?

” खूबसूरत भी।”

झूठ बोलती है तू। मैं बूढ़ी हो चुकी हूं। तू भला मुझे कैसे जवान बना सकती है?"

ऐसी जवान बना देंगी कि मर्द तेरे पे मरेंगे। तू बच्चे जन सकेगी। बोल बना दूं?”

बना।”

तेरे शरीर में रहकर मेरे को कोई काम करना है। वो तू मुझे करने देगी।”

जवान बनने के बाद?”

हां। इस हाल में तो तू मेरे काम की नहीं। तेरी हां है तो कह, तेरे को जवान बना दें।”

“मैं क्यों मना करूंगी, जवान बनने से ।” बुढ़िया कह उठी।

रंगीन मिजाज है तू। इस उम्र में भी जवान होकर, मजे लेने के सपने देखती है तू।”

“तूने ही तो कहा है कि तू मुझे जवान बना देगीं। मैं तेरे को बुलाने तो नहीं गई। नहीं बना सकती तो जा।”

भौरी बड़े कमाल की है। तू अपना नाम तो बता ।

” कमला रानी।”

“मैं तेरे को जवान बना रही हूं। थोड़ी-सी तकलीफ होगी। तू घबराना नहीं ।”

तकलीफ मैं बूढ़ी तकलीफ नहीं सह सकती।” ।

वो तू मुझ पर छोड़ दे। तेरे को कुछ नहीं होगा। भौरी का हाथ अब तेरे पर है।”

अगले ही पल बूढ़ी औरत के पूरे शरीर में दर्द की लहर दौड़ी।

उसने चीखने के लिए मुंह खोला, परंतु चीख जैसे गले में ही घुटकर रह गई।

सब्र रख ।” भौरी की फुसफुसाहट उसे सुनाई दी। तब तक पार्क में अंधेरा छा चुका था।

एकाएक बूढ़ी औरत ने अपने शरीर में अजीब सा बदलाव महसूस किया। अजीब-सी सनसनाहट शरीर में दौड़ती चली गई।

फिर सब कुछ थम गया । बूढ़ी औरत ने लाठी छोड़ी और अपने शरीर को टटोल-टटोल कर देखने लगी।

वो सच में जवान हो गई थी। परंतु अंधेरे के कारण, वो खुद को देख नहीं पा रही थी।

 
“जवान हो गई हूं।

जवान हो गई।” बूढ़ी का स्वर भी अब जवानी से भर गया था।

देखा भौरी का कमाल ।”

त...तू सच में मेरे लिए भगवान बनकर आई है। भला हो तेरा जो तूने....।।

अब तू जवान है, जवान की तरह बात कर। बुजुर्गों की तरह आशीर्वाद देना छोड़ दे।”

आह, घर जाकर मैं अपने बेटे को हैरान कर देंगी कि वो...।

” “तू घर नहीं जाएगी।”

क्यों?

” भूल गई तूने मेरे से वादा किया था कि मेरा काम करेगी।”

“न करूं तो?

मैं तेरे को फिर बूढ़ी बना देंगी। तेरी जान ले लूंगी। बहुत खतरनाक हूँ मैं। भौरी है मेरा नाम ।”

कमला रानी कांप उठी। म...मेरी जान मत लेना।”

“तो अपना वादा निभा ।”

वो तो ठीक है, परंतु मेरे घर वाले मेरा इंतजार करेंगे। मुझे ढूंढेंगे।”

" “तेरी परवाह किसी को नहीं है। तू घर न गई तो वो सोचेंगे बूढ़ी से जान छूटी। वैसे भी तू क्या समझती है कि तेरे घर वाले तेरे को पहचान लेंगे। वो तेरे को नहीं पहचानेंगे। तेरे को घर में नहीं घुसने देंगे।”

“ये तू क्या कह रही है?”

“सही कह रही हूं। अब तू अपनी बहू-बेटी से ज्यादा जवान है और मैंने तेरा चेहरा भी बदल दिया है।" |

"चेहरा भी बदल दिया–कैसे?” कमला रानी हैरान सी कह उठी। ‘

“जिस चेहरे को मैंने अपनी आंखों में बसाकर मंत्र पढ़ा तेरे लिए, तू उसी के चेहरे जैसी जवान हो गई। तेरे शरीर का एक-एक हिस्सा उस जैसा हो गया। कुछ ही देर में तेरी आवाज भी उसी की तरह हो जाएगी।”

मैं किसके जैसी हो गई?”

मोना चौधरी के जैसी। उसकी हर चीज, हर अदा, सब कुछ तेरे में आ चुकी है।”

ये...ये नहीं हो सकता।

” मैंने कर दिया है।”

ओह, मोना चौधरी है कौन?”

तूने अब मेरे साथ ही रहना है। धीरे-धीरे तेरे को सब पता चल जाएगा।"

“मैं कब तक तेरे साथ रहूंगी?”

“जब तक मैं तेरे से काम नहीं ले लेती ।”

ये कब तक चलेगा। एक-दो दिन...”

 
महीना-दो महीने भी लग सकते हैं। याद रख मैंने तुझे जवानी दी है, भरपूर शरीर दिया है। बेहद खूबसूरत चेहरा दिया है। तेरे को मेरा एहसान याद रखना चाहिए और मेरा कहना मानते रहना है। तभी तेरी जवानी सुरक्षित है। क्या तू चाहती है कि तू पहले की तरह फिर बूढ़ी हो जाए। लाठी पकड़कर चले?"

न...नहीं चाहती।” कमला रानी ने कांपकर कहा।

तो मेरी हर बात मानती रहना ।”

“मानूंगी। लेकिन तु असल में है कौन?"

मैं सोबरा के कालचक्र का छोटा-सा हिस्सा हूं और अब कालचक्र उसके भाई जथूरा के इशारे पर काम कर रहा है।”

मैं समझी नहीं।”

कालचक्र पर जथूरा का कब्जा है अब । कालचक्र अब वो ही करेगा, जो जथूरा का आदेश होगा।”

मैं अब भी नहीं समझी।”

तू कुछ मत समझ ।” भौरी उसके कानों में कह उठी–“तू अब मेरी दुनिया में आ चुकी है। जरूरत के मुताबिक मैं तेरे भीतर वो सब चीजें डाल देंगी, कि तू सब कुछ समझकर, मेरे मुताबिक काम करे । चल अब चलें ।”

कहां?”

“अब मेरी कमला रानी भौरी के लिए अपना पहला काम करेगी।”

कमला रानी चल पड़ी।

“तेरा नाम मोना चौधरी है। बाकी सब बातें मैं अभी तेरे दिमाग में डाल देती हूं, जिसकी तुझे जरूरत पड़ेगी।”

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

उस छोटे से बंगले की रोशनियां रोशन थीं।

नगीना नौकरानी सत्या के साथ किचन में व्यस्त थी। वो खुश थी कि देवराज चौहान और जगमोहन पहुंचने वाले हैं। किचन खाने के सामानों की महक से महक रहा था।

जल्दी कर सत्या, कोई चीज छूट न जाए।” नगीना कह उठी।

कुछ नहीं छूटेगा बीवी जी। मुझे सब याद है।” उसी पल कॉल बेल बजी।।

लो।” नगीना के होंठों से निकला “वो आ गए।”

“आप दरवाजा खेलिए बीवीजी, मैं इधर का सारा काम ठीक से संभाल लेंगी।”

नगीना किचन से बाहर निकली और मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ गई। उसके चेहरे पर खुशी चमक रही थी। कई दिन से देवराज चौहान को देखा नहीं था उसने। नगीना ने खुशी-खुशी दरवाजा खोला।

अगले ही पल वो बुरी तरह चौंकी। सिटपिटा-सी गई भीतर ही भीतर। सामने मोना चौधरी खड़ी थी। | जींस की पैंट और स्कीवीं पहने। परफ्यूम की महक नगीना की सांसों से टकराई।।

“तुम?” नगीना के होंठों से निकला।

हैरान हो गई नगीना।” मोना चौधरी कह उठी-“देवराज चौहान का इंतजार कर रही है।”

“तुझे कैसे पता?" नगीना ने नागवार स्वर में कहा।

मुझे तो सब खबर रहती है। इस वक्त तू देवराज चौहान के लिए तरह-तरह के पकवान बना रही है।” ।

नगीना मोना चौधरी को देखती रही फिर बोली।

तेरे-मेरे बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं कि तू मेरे से कोई मजाक कर सके।”

“मुझे भीतर आने को नहीं कहेगी?”

जरूरत नहीं समझती ।” नगीना ने शुष्क स्वर में कहा।

हम दोनों में पूर्वजन्म का रिश्ता है नगीना।”

तू मेरे पास किसलिए आई है?" नगीना बोली।

“काम है। लेकिन तू तो मुझे भीतर ही आने को नहीं कह रही । क्या, मैं यहीं खड़ी बात करूंगी?”

हां ।”

नाराज क्यों है मुझसे?”

तू मेरे पति को जान से मारने की, कई बार कोशिश कर चुकी है।” नगीना ने तीखे स्वर में कहा।

मोना चौधरी हौले-से हंसी।।

तू अभी भी बीती बातों को दिल से लगाए बैठी है।”

तभी सत्या वहां आ पहुंची।

बीवीजी काम हो गया। अगले ही पल सत्या मोना चौधरी को दरवाजे के बाहर खड़ी देखकर ठिठकी।

“तू जा सत्या, मैं मोना चौधरी से बात कर रही हूं।” सत्या चली गई।

नगीना।” मोना चौधरी धीमे स्वर में बोली-“तू मुझे नहीं जानती, मैं भौरी हूं।”

“भौरी?” नगीना के माथे पर बल पड़े–“तू जो भी है चली जा यहां से। देवराज चौहान आने वाला है और...।”

इसी पल नगीना की सांसों से भीनी-भीनी सुगंध टकराई। नगीना के होश गुम होने लगे।

 
इससे पहले कि नगीना नीचे गिरती, मोना चौधरी ने उसे थामा, कंधे पर लादा और तेजी से गेट की तरफ बढ़ गई। तभी कमला रानी के कानों में भौरी कीं फुसफुसाहट पड़ी।

क्यों, कैसा लगा कमला रानी?"

“अच्छा लगा। ये काम मेरे लिए नया है। क्या सच में मेरे में इतनी ताकत आ गई है कि किसी को उठा सकें?”

“उठा तो रखा है, तू खुद ही देख ले।” भौरी मुस्कराई।

जाना कहां है?"

फिक्र मत कर। मैं तेरे साथ हूं। अब तो तूने मेरे साथ रहकर हर पल मौज ही करनी है। अब तू सच में रानी बन गई है। मेरा हुक्म मानती रह और रानी बनकर जिंदगी बिता।” ।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

देवराज चौहान और जगमोहन नगीना वाले बंगले पर पहुंचे। गेट खुला था। प्रवेश दरवाजा भी खुला दिखा।

भाभी।” जगमोहन तेज स्वर में पुकारते हुए भीतर प्रवेश कर गया। देवराज चौहान उसके पीछे था।

भाभी ।” जगमोहन ने पुनः ऊंचे स्वर में पुकारा। सत्या किचन से निकलकर उसके सामने आ गई।

जगमोहन भैया, आपनमस्कार ।” सत्या कह उठी।

भाभी कहां है?”

सत्या ने भीतर प्रवेश कर चुके देवराज चौहान को भी देखा

और कह उठी। | “बीवीजी, अभी तो यहीं थीं, दरवाजे पर मोना चौधरी मैडम से बात कर रही...।” ।

“मोना चौधरी?” जगमोहन चौंका।

देवराज चौहान के माथे पर बल उभर आए।

“बीवीजी ने ही कहा था कि वो मोना चौधरी से बात कर रही है, जब मैंने उन्हें बुलाया तो।”

तुमने मोना चौधरी को देखा था?” देवराज चौहान ने पूछा।

हां ।” सत्या ने बाहर नजर मारी—“आप बीवीजी से पूछ लीजिए—वो...” ।

वो नज़र नहीं आ रहीं यहां ।”

“भीतर होगी।”

होती तो मेरे पुकारने पर आ गई होती।” जगमोहन ने व्याकुलता में कहा।

“मैं देखती हूं।” कहने के साथ ही सत्या भीतर चली गई।

देवराज चौहान और जगमोहन की नजरें मिलीं।

मुझे हैरानी है कि मोना चौधरी यहां थी।” जगमोहन बोला।

मुझे यकीन नहीं आता कि वो नगीना के पास आएगी। उसे नगीना के बंगले का पता नहीं चल सकता।”

लेकिन वो यहां थी। सत्या उसका नाम लेकर कह रही है।” देवराज चौहान के होंठों में कसाव आ गया। सत्या जल्दी ही लौट आई।

बीवीजी तो बंगले में नहीं हैं।” वो बोली।

“मुझे बताओ कि मोना चौधरी देखने में कैसी लग रहीं थी—उसका हुलिया।” |

"मैंने जरा सा तो देखा था उसे । मैंने सोचा वो बीवीजी की।

कोई पहचान वाली...।”

तुम उसका हुलिया बताओ।”

सत्या ने हुलिया बताया। ठीक मोना चौधरी का हुलिया।

“वो ही थी।” जगमोहन के होंठों से निकला।

लेकिन हुआ क्या?"

भाभी कहीं गायब हो गई है, मोना चौधरी से बातें करते-करते। कहीं चली गई है।”

 
Back
Top