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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“उसो बोल्लो, सीधी तरहो नगीना भाभी को वापस दे दयो, वरनो अंम उसो को ‘वड' दयो।”

फोन लग गया। मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। "हैलो।” ।

मेरे सामने बांकेलाल राठौर बैठा है।” पारसनाथ कह उठा–“उसका कहना है कि तुमने नगीना को उठा लिया है।”

नगीना को?” मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। हां। क्या तुम मुम्बई में हो?"

नहीं, मैं तो अपने फ्लैट पर हूँ दिल्ली में। शाम को बाहर भी नहीं निकली। बांके ये बात कहता है?”

वो कह रहा है। गुस्से में है।”

“मैंने ये काम नहीं किया।” पारसनाथ ने फोन बंद किया और बांकेलाल राठौर से बोला।

मोना चौधरी कहती है कि उसने ये सब नहीं किया।” ।

“म्हारे को बेवकूफ बनायो हो।” बांकेलाल राठौर ने गुस्से से कहा और रिवॉल्वर निकाल ली।

उसकी ऊंची आवाज पर कइयों ने इधर देखा। पारसनाथ के होंठ भिंच गए। डिसूजा ने रिवॉल्वर निकाली और बांकेलाल राठौर की तरफ कर दी।

रिवॉल्वर वापस रखो।” डिसूजा गुर्राया।

बांकेलाल राठौर ने डिसूजा के रिवॉल्वर पर हाथ रखकर उसे पीछे किया।

“तंम इधर से चलो जायो। म्हारे को पारसनाथ से बात करने दयो ।” ।

डिसूजा खड़ा रहा। पारसनाथ के चेहरे पर कठोरता सिमटी पड़ी थी।

पारसनाथो, मोन्नो चौधरी झूठो बोल्लो हो। नगीनों उसे पासो हौवो हो, म्हारे को...।”

तभी पारसनाथ का फोन बजने लगा।

बातों कर, यो मोन्नो चौधरी का फोनो हौवे । ईब वो थारे से। कहो कि नगीनो उसो के पास हौवे ।”

हैलो ।” पारसनाथ ने बांके को घूरते बात की। पारसनाथ, मैं जगमोहन बोल रहा हूं दिल्ली से ।” पारसनाथ की आंखें सिकुड़ीं।

कहो।”

“मोना चौधरी यहां से नगीना को ले गई है।” जगमोहन की आवाज़ कानों में पड़ी।

पारसनाथ के माथे पर बल नजर आने लगे।

 
बांकेलाल राठौर इस वक्त मेरे सामने बैठा है और वो भी यहीं बात कह रहा है।” ।

“क्या कहते हो?" जगमोहन की चौंकी आवाज, पारसनाथ ने सुनी।

"इसमें हैरान होने की क्या बात है जगमोहन?” ।

ये नहीं हो सकता। भला बांके तुम्हारे पास और वो भी यही बात कह रहा है।”

“इस बारे में मैंने मोना चौधरी से बात की है। वो कहती है ये काम उसने नहीं किया।”

उसने किया है ये काम। नगीना उसके पास है।” ।

नहीं है।”

नगीना की नौकरानी सत्या ने मोना चौधरी को देखा है। नगींना ने मोना चौधरी का नाम लेकर बात की।”

ये गलत है।

” ये सहीं है। मोना चौधरी से मेरी बात कराओ।”

वो यहां नहीं है। उसका फोन नम्बर, मैं तुम्हें नहीं दे सकता।”

पल भर की खामोशी के बाद जगमोहन की आवाज कानों में पड़ी।

बांके से मेरी बात बराओ।”

पारसनाथ ने बांके की तरफ फोन बढ़ाया।

जगमोहन से बात करो।”

बांकेलाल राठौर ने फोन थामा और बात की।

हैलो।” । तुम वहां क्या कर रहे...।”

“मोन्नो चौधरी नगीनो भाभी को उठा लयो, अंम इधरो...।”

तुम्हें ये बात किसने कहीं कि भाभी को मोना चौधरी ले गई है।” उधर से जगमोहन ने पूछा।

म्हारे को पतो हौवे ।।

कैसे पता चली ये बात?”

बादो में बतायो थारो को । ईबो म्हारे को पारसनाथ से बातों कर लेने दयो।”

तुम उससे कोई बात नहीं करोगे। वापस आ जाओ।”

“अंम...।” बांकेलाल राठौर ने कहना चाहा।।

रुस्तम से बात कराओ।

” छोरो म्हारे पास न हौवे ।”

किधर है वो?"

वो मुम्बई में बिजी हौवे । तंम म्हारे को पूछने दो कि नगीना को किधर रखों हो, मोन्नो चौधरीं ।”

बांके तुम...।”

बांकेलाल राठौर ने फोन बंद कर दिया । टेबल पर रखा। रिवॉल्वर अभी भी पारसनाथ की तरफ थी।

“बोल्लो, म्हारे को नगीनो भाभी की जरूरत हौवे, मोन्नो चौधरी से पूछो कि...” ।

 
“मोना चौधरी के पास नहीं है नगीना।” | उसी पल बांके ने पास खड़े डिसूजा की टांग पर गोली चला

दी।

फायर का तेज धमाका हुआ। डिसूजा की चीख गूंजी। वो टांग थामे नीचे बैठता चला गया। पारसनाथ ने उसी पल, बांकेलाल राठौर पर छलांग लगा दी। वहां बैठे लोगों की चीखें गुंज।

पारसनाथ और बांकेलाल राठौर, दोनों आपस में भिड़े नीचे गिरते चले गए।

“तंम म्हारे को पकड़ो हो।” बांकेलाल राठौर ने अपने ऊपर पड़े पारसनाथ को दूर उछाल फेंका।

पारसनाथ फौरन संभला। रिवॉल्वर बांके के हाथ से छूट चुकी थी।

पारसनाथ तेजी से बांकेलाल राठौर पर झपटा। बांके ने उसे चूंसा मारा, जिसे रोककर पारसनाथ ने जूते की जोरदार ठोकर उसके पेट में मारी।।

बांके चीखकर पीछे को हुआ।

पारसनाथ ने नीचे पड़ी बांके की रिवॉल्वर उठा ली। खतरनाक हो चुका था पारसनाथ का चेहरा।

बांकेलाल राठौर भी सुलग रहा था।

अगर मोना चौधरी ने नगीना को उठाया होता तो मैं तेरे को पक्का गोली मार देता बांके। लेकिन मामला कुछ और है। मोना चौधरी ने नगीना को नहीं उठाया। तेरे को गलतफहमी है, इसलिए तेरे को जाने दे रहा हूं।”

*अंम थारे को ‘वड' दयो।” बांकेलाल राठौर गुर्राया।

निकल जा यहां से ।”

“अंम फिर आयो हो ।” बांकेलाल राठौर ने दांत भींचकर कहा और बाहर की तरफ बढ़ गया।

पारसनाथ उसे तब तक देखता रहा, जब तक कि वो बाहर न निकल गया।

वहां खाना खाने वाले लोग घबराकर पहले ही जा चुके थे। पारसनाथ ने डिसूजा को चैक किया। खतरे से बाहर थी उसकी हालत। गोली मांस को छीलती निकल गई थी।

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मखानी।” कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी—“तूने तो कमाल कर दिया।”

तो मैंने बढ़िया काम किया।” बांकेलाल राठौर मुस्कराया।

निःसंदेह ।”

अब बता लड़की कहां मिलेगी मुझे?”

“अभी काम बाकी है।”

क्या मुझे दोबारा पारसनाथ के पास जाना होगा?”

“नहीं। महाजन के पास जाना है। इसी तरह का झगड़ा उससे करना है। उससे थोड़ा ज्यादा झगड़ा करना।”

“समझ गया। लेकिन महाजन कहां है, मैं नहीं जानता।”

मुझे सब पता है। चल मैं तेरे को वहां ले चलता हूं।”

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फोन बंद होते ही जगमोहन ने देवराज चौहान को देखा। देवराज चौहान की निगाह पहले से ही जगमोहन पर थीं, वो

बोला।

क्या हुआ?

मेरा दिमाग खराब हो रहा है। कुछ समझ में नहीं आ रहा।” जगमोहन बोला-“बांके इस वक्त पारसनाथ के पास है और उससे पूछ रहा है कि नगीना भाभी को, मोना चौधरी ने कहां रखा है।”

“बांके को कैसे पता कि मोना चौधरी ने नगीना को उठाया है।” देवराज चौहान के होंठों से निकला।

ये ही तो दिमाग खराब करने वाली बात है।” ।

“कुछ देर पहले तो नगीना को मोना चौधरी ले गई है। ये बात बांके को पता चल गई। बांके पारसनाथ के पास भी पहुंच गया, जबकि वो दिन में, हमारे साथ ही मुम्बई पहुंचा। ये सब कैसे हों सकता है।”

"ये हो रहा है। एक और अजीब बात है, बांके और रुस्तम एक साथ ही जाते हैं, लेकिन पारसनाथ के पास बांके अकेला गया है।”

देवराज चौहान ने सत्या को बुलाकर पूछा।

बांकेलाल राठौर यहां आया था?" ।

मैं नहीं जानती, इस नाम वाले को ।” सत्या बोली।

“मूंछों वाला है वो।” देवराज चौहान ने बांके का हुलिया बताया।

ये आदमी तो यहां कभी नहीं आया।” सत्या ने कहा।

तुम जाओ।

” खाना लगा दें?” सत्या ने पूछा।

“नहीं।” सत्या चली गई।

जगमोहन हाथ में थमे फोन का नम्बर मिलाता बोला।

रुस्तम से पूछता हूं, वो बताएगा कि ये बात बांके को कैसे पता चली कि नगीना भाभी को मोना चौधरी ले गई।”

देवराज चौहान के होंठ भिंच गए।

पारसनाथ कहता है कि उसने मोना चौधरी से पूछा है, ये काम मोना चौधरी ने नहीं किया।” ।

“झूठ बोलती है मोना चौधरी।” देवराज चौहान गुर्रा उटा–“सत्या झूठ नहीं कह सकती कि यहां मोना चौधरी आई थी। नगीना ने ही सत्या से कहा कि वो मोना चौधरी से बात कर

लेकिन मोना चौधरी मुम्बई में है।” ये सम्भव नहीं हो सकता।”

हां, ये सम्भव हो ही नहीं सकता।” जगमोहन ने परेशान स्वर में कहा।।

बांकेलाल राठौर इतनी जल्दी पारसनाथ के पास कैसे पहुंच गया। उसे कैसे पता चला गया कि मोना चौधरी ने नगीना

को...।

तभी फोन लग गया। | "हैलो ।” रुस्तम राव की आवाज जगमोहन के कानों में पड़ी।

रुस्तम ।” जगमोहन ने कहा-“बांके को कैसे पता चला कि मोना चौधरी ने नगीना भाभी को उठा लिया है।” | पल भर की खामोशी के बाद रुस्तम राव की आवाज कानों में पड़ी।

“क्या बोला बाप, आपुन समझेला नेई ।”

जगमोहन ने अपनी बात फिर दोहराई।

तुम्हारा मतलब कि नगीना दीदी को, मोना चौधरी ने उठाईला हैं बाप?” रुस्तम राव की आवाज कानों में पड़ी।

तुम्हें नहीं पता?

” नेई बाप । अम्भी तुमसे ही पता चलेला है। आपुन अम्भी...।

” बांके दिल्ली कब गया?" ।

बाप तो तुम्हारे साथ ही मुम्बई पौंचेला है। आने के बाद नींद मारेला है। अभी तक उठा नहीं ।”

क्या कह रहे हो। बांकेलाल राठौर तुम्हारे पास है?

” सामने बाप–खुर्र-खुर्रा रईला है।

” बात करा।

” बाप से।

” हां, बात करा।”

जगमोहन तेज स्वर में बोला। देवराज चौहान के होंठ भिंच चुके थे। नजरें जगमोहन पर थीं।

“रुस्तम कहता है कि बांके दिल्ली से आने के बाद, अभी तक नींद ले रहा है।”

ये नहीं हो सकता।” देवराज चौहान के भिंचे होंठों से निकला।

“मैं भी तो यही कहता हूं कि नहीं हो सकता। बांके अभी तो दिल्ली में, पारसनाथ के पास था।” जगमोहन अजीब-से स्वर में बोला।।

तभी फोन द्वारा बांके की नींद से भरी आवाज जगमोहन के कानों में पड़ी।

“म्हारी नींद के दुश्मन तंम क्यों बनो हो । मन्ने थारी का भैंस खोली क्या?”

तुम दिल्ली में हो?"

 


“ओह अंम किधर हौवे। थारे साथो तो विमान में बैठोकर मुम्बई पौंचो हो। टिकट भी थारी ही लगो हो।”

मतलब कि कुछ देर पहले तुम पारसनाथ के पास नहीं थे?” जगमोहन अचकचाया।

पारसनाथों के पासो। अंम उधर क्यों हौवे। अंम तो इधर, सपणे देखो है कि म्हारी गुरदासपुरो वाली ने चार बच्चों...” ।

बांके ।

” बोल्लो ।

” “मैंने कुछ देर पहले तुमसे बात की, जब तुम पारसनाथ के पास थे।” जगमोहन ने गम्भीर स्वर में कहा।।

अंम दो जगहों, एक साथ कैसे हौवे?

” मैंने तुमसे बात की।”

छोरे से पूछ लयो। अंम तो इथ ही नींदो मारो हो। बात का हौवे। थारी प्राबलमों का हौवे?”

“मोना चौधरी नगीना भाभी को, उसके बंगले से उठाकर ले गई है।”

कबो?

" थोड़ी देर पहले।” ।

“अंम मोन्नो चौधरी को ‘वड' दयो।” बांकेलाल राठौर की गुर्राहट कानों में पड़ी।

लेकिन मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है।”

मैंने अभी तुमसे बात की और तुम कहते हो कि मैं नींद ले रहा था।”

पक्को ।”

अगर तुम रुस्तम के पास मौजूद न होते तो मैं तुम्हारी बात पर कभी यकीन नहीं करता।” जगमोहन गम्भीर स्वर में कह रहा था—“कहीं पारसनाथ तो तुम्हारे पास नहीं, मुम्बई में?"

“पारसनाथो?" बांके की आवाज कानों में पड़ी—“म्हारे को थारी खोपड़ी खराब हो गयो लागे हो ।”

“शायद ।” जगमोहन के होंठ भिंच गए।

“भाभी किधर हौवे ईब?" ।

पता नहीं ।”

अंम अम्भी पौंचो हो ।

” बंगले पर आना। हम भी वहीं पहुंच रहे हैं।”

“ईब किधरो हो?”

नगीना भाभी के बंगले पर।” जगमोहन ने कहा और फोन बंद करके देवराज चौहान को देखा।

देवराज चौहान को भी अपना दिमाग हिला सा लग रहा था वो बोला।

“क्या तुम्हें पक्का यकीन है कि पारसनाथ ने, बांके से ही तुम्हारी बात कराई थी?"

मैं धोखा खाने वाला नहीं। वो बांकेलाल राठौर ही था।” जगमोहन ने कहा।

तो फिर अभी तुमने किससे बात की?"

“बांके से ।”

तुम्हारा मतलब कि दो बांके हैं। एक दिल्ली में और एक मुम्बई में।” जगमोहन ने होंठ भींच लिए।

“पारसनाथ से फिर बात करो ।” जगमोहन पारसनाथ का नम्बर मिलाने लगा।

ये सब अजीब हो रहा है।” देवराज चौहान ने कहा-“ऐसा नहीं होना चाहिए। हम कहीं पर गलती कर रहे हैं।”

“हम कहीं भी गलती नहीं कर रहे। जो सामने है, वो ही बात कर रहे हैं।”

नम्बर लग गया। जगमोहन बोला।

बांके अभी भी तुम्हारे पास है पारसनाथ?”

नहीं।” पारसनाथ का कठोर स्वर जगमोहन के कानों में पड़ा।

“क्या हुआ तुम्हें?” उसके बदले स्वर पर जगमोहन ने पूछा।

 
वो मेरे आदमी को, टांग पर गोली मारकर गया है, डिसूजा को और मैंने उसे सही-सलामत जाने दिया।”

जगमोहन ने गहरी सांस लेकर कहा। “गलत किया उसने । बहुत गलत किया, लेकिन हम बहुत परेशान

क्यों?

” मोना चौधरी, नगीना भाभी को...।” ।

मोना चौधरी ने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने बात कर ली है। उससे। नगीना कहां पर थी?”

मुम्बई–बंगले पर ।”

और मोना चौधरी दिल्ली में है।”

ये कैसे सम्भव है। नौकरानी सत्या ने मोना चौधरी को देखकर, उसका हुलिया बयान किया है।”

“मुझ पर विश्वास करो। मोना चौधरी दिल्ली में है।”

“एक और परेशानी है। बांके अभी तुम्हारे पास था?" जगमोहन ने पूछा।

“तुम्हें यकीन है कि वो बांके ही था?”

पूरा यकीन है कि वो बांके था, परंतु तुम अजीब-सा सवाल क्यों पूछ रहे हो?”

“क्योंकि बांके मुम्बई में है, मैंने अभी उससे बात की है।”

ये कैसे हो सकता है?” उधर से पारसनाथ का अजीब-सा स्वर कानों में पड़ा।

“मैंने ठीक कहा है।”

“तुम्हारा मतलब कि दो बांके और दो मोना चौधरी नजर आ रही हैं।”

इस तरफ तो जगमोहन ने ध्यान नहीं दिया था। वो चौंका।

ये ही बात, ये ही बात है।

” क्या हो रहा है ये सब?”

“जथूरा का कालचक्र हो सकता है ये। जथूरा हममें झगड़ा कराना चाहता है।”

ओह।”

इधर नकली मोना चौधरी ने नगीना को गायब कर दिया, उधर नकली बांके ने तुम्हारे आदमी को गोली मारी।”

मुझे घूसा भी मारा।”

“तो झगड़े की पूरी कोशिश की गई।”

ऐसा ही समझ लो, परंतु मुझे विश्वास नहीं आ रहा था कि मोना चौधरी और बांके के डुप्लीकेट भी हैं कहीं।”

“ये जथूरा का कारनामा है। वो नकली चेहरे वालों से ऐसी हरकतें करा रहा है कि हम झगड़े...।” जगमोहन बोला-“लेकिन हमने बचकर रहना है। हमने झगड़ा नहीं करना है।”

“ज्यादा देर बचकर नहीं रहा जा सकता, जथूरा की इस चाल से।” पारसनाथ का स्वर कानों में पड़ा।

“बच्चों जैसी बातें मत करो, पारसनाथ ।”

“मैंने सही कहा है।”

 
तुम इस बारे में मोना चौधरी से बात करो। उसे सतर्क कर दो कि वो इस तरह के किसी मामले में, झगड़े में न पड़े।”

कोई कब तक रुकेगा?”

“मोना चौधरी ने नगीना भाभी को उठा लिया। हम हालातों को समझकर रुके हुए हैं कि नहीं। इस तरह तुम लोग भी सब्र रख सकते हो, ये हमारी कमजोरी ही होगी कि जानते-बूझते हम जथूरा की चालों में आ जाएं।” ।

पारसनाथ की आवाज नहीं आई।

सुन रहे हो तुम मेरी बात?”

मैं मोना चौधरी से बात करता हूं।” पारसनाथ का गम्भीर स्वर कानों में पड़ा।

“करो। मेरा फोन नम्बर तुम्हारे फोन में आ गया है। जरूरत पड़ने पर मुझसे बात करना।”

उधर से पारसनाथ ने फोन काट दिया था। जगमोहन देवराज चौहान से बोला।

दो बांके और दो मोना चौधरी का वजूद है इस वक्त ।

” ये कैसे सम्भव है?”

जथूरा के पास शक्तियां हैं, वो ही ये सब कुछ कर रहा है। हुममें और मोना चौधरी में, झगड़ा कराना उसकी इस वक्त की मुख्य जरूरत है। जथूरा नहीं चाहता कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश करें।

वो यहीं पर हमसे झगड़ा कराकर, खून-खराबा करवा देना चाहता है। खासतौर से मोना चौधरी या तुममें से वो एक को मरवा देना चाहता है। तुम दोनों में से एक के मरने पर, ग्रहों की वो शक्तियां खत्म हो जाएंगी, जो कि पूर्वजन्म की बुरी ताकतों पर भारी पड़ती हैं। मुझे पूरा यकीन है कि जथूरा अभी और कमाल दिखाएगा।”

मुझे नगीना की चिंता है।” देवराज चौहान बोला।

“भाभी की चिंता मुझे भी है, परंतु ये बात हमें हर वक्त याद रखनी है कि जथूरा अपना खेल शुरू कर चुका है और हमें उसके खेल के मोहरे नहीं बनना है। सोच-समझकर उसकी चाल का जवाब देना है।” जगमोहन अपने शब्दों पर जोर देकर बोला।

“नगीना कहां होगी?”

“मुझे नहीं मालूम, परंतु पूर्वाभास ने मुझे जो दिखाया था, उसके हिसाब से उसे इस वक्त कहीं पर बेहोश पड़े होना चाहिए।”

“अगर ये जथूरा का खेल हे तो हम नगीना को नहीं ढूंढ सकते ।”

जथूरा नगीना भाभी की जान नहीं लेगा।

” ये तुम कैसे कह सकते हो?”

 
जथूरा तब तक हम लोगों में से किसी की जान नहीं ले सकता, जब तक कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न कर जाएं। हमारी जान लेने के लिए जथूरा की शक्तियां यहां काम नहीं करतीं। ऐसा पोतेबाबा ने कहा था।” | देवराज चौहान ने सिगरेट सुलगाई।

“चलो, हमें बंगले पर पहुंचना है। बांके और रुस्तम वहां पहुंचने वाले होंगे। हम सब मिलकर कोई रास्ता निकालेंगे कि नगीना भाभी को वापस लाया जा सके और जथूरा के कालचक्र का कोई जवाब दें। लेकिन मुझे चिंता इस बात की है कि जथूरा कोई नई चाल न चल दे और बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाए, जिसका हम जवाब न दे सकें।”

देवराज चौहान उठ खड़ा हुआ।

सत्या ।” जगमोहन ने पुकारा–“दरवाजा बंद कर लो।”

फौरन ही सत्या वहां आ गई।

लेकिन बीवीजी तो...।”

हम उन्हें ढूंढ़ रहे हैं, वो जल्दी वापस आ जाएगी।” जगमोहन ने कहा।

सत्या की आंखें भर आईं।

“बीवीजी कितनी खुश थी कि आप दोनों उनके साथ खाना खाएंगे। वो तो...।” ।

जगमोहन देवराज चौहान का हाथ पकड़े बाहर निकल गया।

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ये है सामने नील सिंह यानी कि आज के महाजन का घर ।” मखानी के कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी—“परंतु यहां पर तुझे जगमोहन के रूप में जाना है।”

जगमोहन के रूप में। लेकिन मैं तो बांकेलाल राठौर बना...।

” उसकी तू फिक्र मत कर। मैं तेरा रूप अभी बदल देता हूं।

” ऐसा हो सकता है।”

क्यों नहीं हो सकता। कालचक्र की शक्तियां हमारे साथ हैं। मैं तेरा दिमाग भी जगमोहन जैसा बना दूंगा।”

दर्द होगा।

” थोड़ा-सा। पहले जितना नहीं ।”

अगले ही पल मखानी को अपने शरीर में तीव्र सिहरन दौड़ती महसूस हुई। कुछ पीड़ा भी।

मखानी ने पीड़ा को आसानी से सह लिया। उसने अपने शरीर में कुछ बदलाव महसूस किए। अब वो जगमोहन के रूप में था।

“य...ये मैं तो बदल गया। मेरी मूंछे कहां गईं?" मखानी अपने चेहरे को छूता कह उठा।

“जगमोहन की मूंछे नहीं हैं। तेरे को मूंछे पसंद हैं तो मैं बाद में तुझे फिर बांके बना दूंगा ।” ।

“मैं ऐसा भी ठीक हूं, लेकिन मेरा अपना असली चेहरा क्या है?” मखानी ने पूछा।

“तेरा अपना चेहरा कोई भी नहीं है, तू दूसरों के चेहरों में ही जिएगा।”

“ओह। कोई बात नहीं। जवान तो रहूंगा। मुझे लड़की मिलनी चाहिए।” ।

 
“जरूर मिलेगी। अब मैं तेरा दिमाग बदलकर जग्गू जैसा कर रहा हूं। उसके बाद तू नील सिंह से मिलेगा। उससे जो बातें करनी हैं, वो भी तेरे दिमाग में भर देता हूं।”

“जल्दी कर। उसके बाद मैं लड़की के पास...”

इसके बाद तुझे मिन्नों के पास भेजूंगा फिर तेरे को शानदार लड़की भी दिलवा दूंगा।”

वादा ।” ।

शौहरी का वादा ।

” “ठीक है। जल्दी से मेरा दिमाग बदल। मैं काम खत्म करके फारिग हो जाना चाहता हूं।”

मखानी ने स्विच पर उंगली रखी तो भीतर बेल बजने की आवाज गूंजी।

दो पल उसने इंतजार किया। रात के बारह बज रहे थे।

दरवाजा खुला, महाजन दिखा। जगमोहन को सामने पाकर चौंका।

“तम?

हां मैं ।” कहने के साथ ही जगमोहन ने जोरदार घूसा उसके चेहरे पर मारा।

महाजन लड़खड़ाकर दो-तीन कदम पीछे हो गया।

जगमोहन भीतर आ गया। चेहरे पर क्रोध के सुलगते भाव नाच रहे थे।

नगीना भाभी कहां है?" जगमोहन गुर्राया।

महाजन संभला। उसने जगमोहन को घूरा।

तुमने अभी पारसनाथ से फोन पर बात की थी।

” हां, की थी ।” ।

“तुमने उसे कहा कि तुम मुम्बई में हो।” अब तुम दिल्ली में, यहां मेरे पास कैसे पहुंच गए?”

फालतू बात मत कर, नगीना भाभी के बारे में बता ।” जगमोहन तेज स्वर में बोला।

“इसका मतलब तुमने पारसनाथ से गलत कहा कि तुम मुम्बई में हो। तुम दिल्ली में ही हो। बांके भी यहीं था। पारसनाथ को तुमने गलत खबर दी। दो बेबी और दो बांके होने की बात गलत

तो तू समझ गया।” महाजन का चेहरा कठोर होने लगा।

तो ये सब चाल है तुम लोगों की ।

” हमें नगीना भाभी वापस चाहिए।"

वो हमारे पास नहीं है।

” “मोना चौधरी ने उसे मुम्बई से, उसके बंगले से उठाया है।”

ये बात गलत है। बेबी दिल्ली में ही है।

” तो तू शराफत से नहीं बताएगा।” जगमोहन गुर्राया। महाजन के दांत भिंच गए। तभी भीतर से राधा की आवाज आई।

“क्या बात है नीलू । कौन है?”

महाजन और जगमोहन एक-दूसरे को घूरे जा रहे थे।

 
ये मेरा घर है।” महाजन ने कठोर स्वर में कहा।

मुझे नगीना भाभी वापस चाहिए वो...।" ।

मुझसे झगड़ा करके तू गलती कर रहा है जगमोहन।” महाजन ने दांत पीसकर कहा।।

“ये ही बात मैं तेरे से कहना चाहता...।” जगमोहन का चेहरा क्रोध में तप रहा था।

होश में आ, नगीना को बेबी ने नहीं उठाया।

” तो नहीं मानेगा तू?” जगमोहन ने दांत किटकिटाए।

बेवकूफ, भूल गया तू, तूने ही कहा था कि जथूरा हममें झगड़ा करवाने की चेष्टा...”

“तो इसका ये मतलब नहीं कि मोना चौधरी नगीना भाभी का अपहरण कर लें।”

ये सब नहीं किया बेबी ने।”

तभी जगमोहन उछला और तीर की भांति महाजन से जा टकराया।

| महाजन खुद को संभाल न सका और नीचे जा गिरा। अगले ही पल खड़ा हुआ और गुस्से से भरा जगमोहन पर झपट पड़ा। एक घूसा जगमोहन के पेट में और दूसरा उसके चेहरे पर मारा।

जगमोहन खुद को संभाल न सका और दोहरा होता चला गया। महाजन ने उसके सिर के बाल पकड़कर चेहरा ऊपर किया और घुटना उसके चेहरे पर मारा। | जगमोहन हल्की-सी चीख के साथ पीछे को जा गिरा। संभला। महाजन को खूनी निगाहों से देखा। उसके होंठों से खून बह निकला था। सिर के बाल बिखर गए थे। |

“डर गया मखानी ।” उसके कानों में शौहरी की फुसफुसाहट गुंजी–“घबरा मत, जग्गू में बहुत दम है। महाजन इस वक्त तेरा मुकाबला नहीं कर सकता। तू इसे मार-मार के बुरा हाल कर दे।” | अगले ही पल जगमोहन के होंठों से गुर्राहट निकली और वो उछलकर खड़ा हो गया।

मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा महाजन ।” जगमोहन ने दांत किटकिटाकर कहा।

तभी वहां राधा ने कदम रखा।

वो एक पल में ही माहौल को भांप गई। फौरन दोनों के बीच आकर जगमोहन से बोली।

क्यों रे, तू मेरे नीलू से झगड़ा करता है। मेरे से मुकाबला कर्, मैं ही तेरे हाथ-पांव तोड़ दूंगी।”

बीच में से हट जा राधा।” महाजन गुर्राया।

नहीं—मैं...।

” सुना नहीं, हट–जा ।” महाजन गुस्से से चीखा। राधा महाजन की तरफ पलटकर ऊंचे स्वर में बोली।

क्यों हट जाऊं। मैं क्या कम हूं। इस जैसों को तो मैं ही सीधा कर दूं।” |

महाजन ने खतरनाक अंदाज में जगमोहन को आगे बढ़ते देखा तो, उसने राधा की बांह पकड़कर एक तरफ कर दिया उसे । उसके होंठों से धीमी-धीमी गुर्राहट निकल रही थी।

अगले ही पल महाजन ने जगमोहन पर छलांग लगा दी। दोनों के जिस्म आपस में टकराए और नीचे जा गिरे। फर्श पर ही दोनों गुत्थम-गुत्था हो गए। जिसे मौका मिलता, वो ही दूसरे को मार देता। घबराई राधा भागकर झाडू ले आई और गुस्से से भरी जब भी उसे मौका मिलता, वो जगमोहन के सिर पर झाडू मार देती और जो मुंह में आए बोले जा रही थी।

 
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