S
StoryPublisher
Guest
“उसो बोल्लो, सीधी तरहो नगीना भाभी को वापस दे दयो, वरनो अंम उसो को ‘वड' दयो।”
फोन लग गया। मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। "हैलो।” ।
मेरे सामने बांकेलाल राठौर बैठा है।” पारसनाथ कह उठा–“उसका कहना है कि तुमने नगीना को उठा लिया है।”
नगीना को?” मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। हां। क्या तुम मुम्बई में हो?"
नहीं, मैं तो अपने फ्लैट पर हूँ दिल्ली में। शाम को बाहर भी नहीं निकली। बांके ये बात कहता है?”
वो कह रहा है। गुस्से में है।”
“मैंने ये काम नहीं किया।” पारसनाथ ने फोन बंद किया और बांकेलाल राठौर से बोला।
मोना चौधरी कहती है कि उसने ये सब नहीं किया।” ।
“म्हारे को बेवकूफ बनायो हो।” बांकेलाल राठौर ने गुस्से से कहा और रिवॉल्वर निकाल ली।
उसकी ऊंची आवाज पर कइयों ने इधर देखा। पारसनाथ के होंठ भिंच गए। डिसूजा ने रिवॉल्वर निकाली और बांकेलाल राठौर की तरफ कर दी।
रिवॉल्वर वापस रखो।” डिसूजा गुर्राया।
बांकेलाल राठौर ने डिसूजा के रिवॉल्वर पर हाथ रखकर उसे पीछे किया।
“तंम इधर से चलो जायो। म्हारे को पारसनाथ से बात करने दयो ।” ।
डिसूजा खड़ा रहा। पारसनाथ के चेहरे पर कठोरता सिमटी पड़ी थी।
पारसनाथो, मोन्नो चौधरी झूठो बोल्लो हो। नगीनों उसे पासो हौवो हो, म्हारे को...।”
तभी पारसनाथ का फोन बजने लगा।
बातों कर, यो मोन्नो चौधरी का फोनो हौवे । ईब वो थारे से। कहो कि नगीनो उसो के पास हौवे ।”
हैलो ।” पारसनाथ ने बांके को घूरते बात की। पारसनाथ, मैं जगमोहन बोल रहा हूं दिल्ली से ।” पारसनाथ की आंखें सिकुड़ीं।
कहो।”
“मोना चौधरी यहां से नगीना को ले गई है।” जगमोहन की आवाज़ कानों में पड़ी।
पारसनाथ के माथे पर बल नजर आने लगे।
फोन लग गया। मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। "हैलो।” ।
मेरे सामने बांकेलाल राठौर बैठा है।” पारसनाथ कह उठा–“उसका कहना है कि तुमने नगीना को उठा लिया है।”
नगीना को?” मोना चौधरी की आवाज कानों में पड़ी। हां। क्या तुम मुम्बई में हो?"
नहीं, मैं तो अपने फ्लैट पर हूँ दिल्ली में। शाम को बाहर भी नहीं निकली। बांके ये बात कहता है?”
वो कह रहा है। गुस्से में है।”
“मैंने ये काम नहीं किया।” पारसनाथ ने फोन बंद किया और बांकेलाल राठौर से बोला।
मोना चौधरी कहती है कि उसने ये सब नहीं किया।” ।
“म्हारे को बेवकूफ बनायो हो।” बांकेलाल राठौर ने गुस्से से कहा और रिवॉल्वर निकाल ली।
उसकी ऊंची आवाज पर कइयों ने इधर देखा। पारसनाथ के होंठ भिंच गए। डिसूजा ने रिवॉल्वर निकाली और बांकेलाल राठौर की तरफ कर दी।
रिवॉल्वर वापस रखो।” डिसूजा गुर्राया।
बांकेलाल राठौर ने डिसूजा के रिवॉल्वर पर हाथ रखकर उसे पीछे किया।
“तंम इधर से चलो जायो। म्हारे को पारसनाथ से बात करने दयो ।” ।
डिसूजा खड़ा रहा। पारसनाथ के चेहरे पर कठोरता सिमटी पड़ी थी।
पारसनाथो, मोन्नो चौधरी झूठो बोल्लो हो। नगीनों उसे पासो हौवो हो, म्हारे को...।”
तभी पारसनाथ का फोन बजने लगा।
बातों कर, यो मोन्नो चौधरी का फोनो हौवे । ईब वो थारे से। कहो कि नगीनो उसो के पास हौवे ।”
हैलो ।” पारसनाथ ने बांके को घूरते बात की। पारसनाथ, मैं जगमोहन बोल रहा हूं दिल्ली से ।” पारसनाथ की आंखें सिकुड़ीं।
कहो।”
“मोना चौधरी यहां से नगीना को ले गई है।” जगमोहन की आवाज़ कानों में पड़ी।
पारसनाथ के माथे पर बल नजर आने लगे।