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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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एकाएक जगमोहन ने महाजन को एक तरफ उछाला और फुर्ती से खड़ा होकर राधा को देखा।

मैं तेरे को छोडूंगी नहीं।” राधा तलवार की तरह झाडू हिलाती कह उठी।

जगमोहन ने राधा की झाडू एक हाथ से पकड़ी और जोरदार घुसा उसके चेहरे पर मारा।

राधा के होंठों से चीख निकली और वो पीछे जा गिरी।

जगमोहन-5-5-S” महाजन गला फाड़कर चीखा और उस पर झपट पड़ा।

दोनों पागलों की तरह भिड़ गए। राधा आधी बेहोशी की हालत में नीचे पड़ी थी। उसके मुंह से खून निकल रहा था।

अगले पांच मिनट में ही जगमोहन और महाजन के चेहरे खून से भर चुके थे।

“बस, ठीक है मखानी।” जथूरा की फुसफसाहट कानों में पड़ी—“निकल यहां से । इसे बेहोश करके साथ ले लेना।”

जगमोहन ने महाजन को जोरों से धक्का दिया तो महाजन दूर जा गिरा।

“मैं तेरे को, पारसनाथ और मोना चौधरी को छोडूंगा नहीं। मार दूंगा सबको ।” जगमोहन गुर्रा उठा।

तू यहां से जिंदा बचकर नहीं जा सकता जगमोहन ।” राधा अब कुछ-कुछ होश में आ रही थी। वो बोली। इसके हाथ-पांव तोड़ दे नीलू।” ।

तभी जगमोहन ने छोटा सा टेबल उठाया और महाजन पर झपट पड़ा। महाजन कुछ समझ नहीं पाया और टेबल उसके सिर पर आ लगा। महाजन की आंखों के सामने लाल-पीले तारे चमके और वो बेहोश होकर नीचे गिरने लगा तो जगमोहन ने उसे थामा और कंधे पर लादकर दरवाजे की तरफ बढ़ा।

“नीलू को कहां ले जा रहा है। रुक-मैं तेरा खून पी जाऊंगी।” राधा चीखी। उसकी हालत खास बेहतर नहीं थी। | राधा फौरन उसके पास आ पहुंची। | अगले ही पल जगमोहन का जोदार चांटा उसके गाल पर पड़ा तो वो चीखकर नीचे जा गिरी।

“मोना चौधरी से कहना, मैं उसे छोडूंगा नहीं। जगमोहन नाम है मेरा।” ।

जगमोहन दरवाजा खोलकर बाहर निकला और महाजन को लादे अंधेरे में आगे बढ़ गया।

मखानी तूने तो कमाल कर दिया ।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी।

सच में।”

“जथूरा की कसम, तूने तो मेरा दिल जीत लिया।”

“तू बातें बहुत करता है शौहरी, लेकिन मेरे काम की बात नहीं करता।”

“तेरे काम की?”

लड़की ।”

बस एक काम और। फिर तेरे को ऐसी शानदार लड़की दिलाऊंगा कि तू पागल हो जाएगा।”

सच कहता है।” ।

“शौहरी तेरे से झूठ क्यों बोलेगा।”

“इसका क्या करूं?" ।

नीचे रख दे।” । मखानी ने बेहोश महाजन को नीचे अंधरे में एक तरफ डाल दिया। मखानी ने शौहरी को बुदबुदाते सुना।।

अगले ही पल उसने एक नई आवाज सुनी। मुझे कैसे याद कर लिया शौहरी ।” स्त्री की आवाज थी।

कोई बहाना तो मिला तुझे याद करने का।”

|

कभी बिना बहाने के भी याद कर लिया कर। क्या तेरा दिल नहीं करता।”

करता है।” ।

“भौरी बता रही थी कि तू फुर्सत में भौरी के साथ मिलने वाला है। ये सच है।”

हां, वो मुझे पसंद है।

” मैं उससे ज्यादा सुंदर हूं।”

सवाल सुंदरता का नहीं, पसंद का है। लेकिन तेरे से भी मिलूंगा। इस वक्त काम कर ।”

“बोल ।”

ये नील सिंह बेहोश है। इसे वहीं पहुंचाना है, जहां नगीना को पहुंचाया है।”

समझ गई।

 
” चल मखानी।” शौहरी ने मखानी से कहा। ये।” उसने महाजन की तरफ इशारा किया। “इसे वास्मा ठिकाने पर पहुंचा देगी।”

वास्मा वो ही जिससे तू बात कर रहा था?

” हां ।” मखानी वहां से चल पड़ा।

वास्मा नील सिंह को कहां ले जाएगी?"

“ये तेरे जानने वाली बात नहीं है।”

तू भी रंगीन मिजाज है मेरी तरह। वो तेरे को मिलने के लिए कह रही थी।" ।

“इन बातों की तरफ ध्यान मत दे। अपने काम को पूरा कर।

तेरे को लड़की नहीं चाहिए क्या?” ।

“क्यों नहीं चाहिए। बता अब क्या करना है?”

“यहीं रह। नील सिंह की पत्नी मिन्नो को सारे हालात बताएगी, तो मिन्नो जरूर यहां आएगी।”

तेरे को मिन्नो से मार-पिटाई करनी है, फिर भाग जाना है।

” भाग जाना है?”

हां। तेरे में इस वक्त जगमोहन की ताकतें हैं और जगमोहन मिन्नो से जीत नहीं सकता। इसलिए भाग चलना है। तेरे को ये दिखाना है, तू इन सब के पीछे पड़ चुका है। किसी को नहीं छोड़ेगा।”

समझ गया। मिन्नो को कुछ कहना भी है तो बता दे ।

” कहना है, सुन लें कि उससे कैसे बात करनी है।”

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मोना चौधरी ने महाजन के घर के बाहर कार रोकी फिर उतरकर तेजी से दरवाजे की तरफ बढ़ी।।

तभी अंधेरे में छिपा बैठा जगमोहन मोना चौधरी पर झपट पड़ा।

मोना चौधरी खुद को संभाल न पाई और नीचे जा गिरी। तुरंत ही उछलकर खड़ी हुई। अंधेरे में भी उसने सामने खड़े जगमोहन को पहचाना और उसके दांत भिंचते चले गए।

जगमोहन गुर्राहट भरे स्वर में कह उठा। | “मैं जानता था कि राधा तेरे को फोन करेगी, तू यहां आएगी। मैं तेरा ही इंतजार कर रहा था मोना चौधरी ।”

महाजन कहां है?" मोना चौधरी गुर्राई।।

“तू उसे पाना चाहती है तो नगीना भाभी को मेरे हवाले कर दे।”

“नगीना मेरे पास नहीं है। मैंने उसका अपहरण नहीं किया।” मोना चौधरी ने गुस्से से कहा।

“झूठ बोलती है कमीनी ।”

जगमोहन ।” मोना चौधरी गुर्रा उठी–“जुबान को लगाम दे और महाजन को मेरे हवाले कर ।”

“नगीना भाभी और महाजन की अदला-बदली कर ले ।”

“मैं तेरे को कैसे समझाऊं कि मैंने नगीना के साथ कुछ नहीं किया है।”

तेरा ये हामीपन मेरे साथ नहीं चलेगा मोना चौधरी ।”

उसी पल मोना चौधरी ने जगमोहन पर छलांग लगा दी। जगमोहन सतर्क था, उसने फुर्ती से खुद को बचाया।

मोना चौधरी के पांव जमीन पर पड़े। वो ठिटककर पलटी और जगमोहन को घूरने लगी।

“तूने कहा था कि जथूरा हम लोगों में झगड़ा करवाने की चेष्टा करेगा।”

सपन चड्ढा ने बताई थी ये बात। मोमो जिन्न ने उससे कहीं थी।” ।

तो तू समझता क्यों नहीं कि ये जथूरा की ही कोई चाल है।

” तेरे को किसने कहा?”

 
क्योंकि मैंने नगीना का अपहरण नहीं किया, मैं दिल्ली में ही थी। नगीना मुम्बई में थी।” ।

“तेरे को किसने बताया कि नगीना मुम्बई में थी?”

पारसनाथ ने। उसका फोन आया था। तुमने भी तो पारसनाथ से बात की । तुमने पारसनाथ को बताया कि तुम मुम्बई में हो, जबकि हकीकत में तुम लोग दिल्ली में ही हो। बांके ने पारसनाथ के पास पहुंचकर झगड़ा किया।”

\

नगीना भाभी मुझे न मिली तो मैं तुम सबको मार दूंगा।

” पागल मत बन ।” मोना चौधरी ने दांत भींचकर कहा।

जगमोहन ने उसी क्षण रिवॉल्वर निकालकर हाथ में ले ली। मोना चौधरी का चेहरा बेहद कठोर हो गया। “अकेला है तू?” मोना चौधरी गुर्राई।

तेरे लिए काफी हूं।”

मतलब कि इस वक्त तेरे को अच्छा-बुरा समझाने वाला कोई नहीं।” शब्दों को चबाकर मोना चौधरी ने कहा।

“तूने कई बार कोशिश की देवराज चौहान को मारने की ।” वो भी हिसाब अब पूरा हो जाएगा। मैं सारी की सारी गोलियां तेरे शरीर में उतार दूंगा। बचना चाहती है तो नगीना को...।”

“ठीक है। चल मेरे साथ ।” मोना चौधरी कह उठी।

कहां?

” जहां मैंने नगीना को रखा हुआ है। उसे तेरे हवाले कर देती

* “अब आई रास्ते पर, पहले तो नखरे दिखा रही थी।” जगमोहन ने कड़वे स्वर में कहा—“रिवॉल्वर देखकर अकल आ गई।”

मोना चौधरी वहां खड़ी जगमोहन को देखती रही।

अंधेरा था उनके बीच।। “तू कार चलाएगी। मैं रिवॉल्वर लेकर पीछे बैठूँगा ।” जगमोहन ने कहा।

मोना चौधरी कार की तरफ बढ़ी। रिवॉल्वर थामे जगमोहन भी कार की तरफ बढ़ा।

अंधेरे का फायदा उठाते हुए मोना चौधरी ने जूते की जोरदार टोकर उसकी रिवॉल्वर पर मारी। रिवॉल्वर अंधरे में कहीं दूर जा गिरी। मोना चौधरी ने सिर की ठोकर, उसके चेहरे पर मारी।

जगमोहन चीखा। मोना चौधरी ने ताबड़तोड़ घूसे जगमोहन पर बरसा दिए।

जगमोहन नीचे जा गिरा। हांफने लगा। मोना चौधरी उसकी छाती पर पांव रखकर, गुर्रा उठी।

तो तू मुझे मारेगा।

” मैं तुझे जिंदा नहीं...।”

मोना चौधरी ने जूते की ठोकर उसके चेहरे पर मारी।

जगमोहन पुनः चीखा।। ।

“अब मैं तुझे बहुत बुरी मौत दूंगी।” एकाएक मोना चौधरी गुर्राई–“तुझे...” ।

उसी क्षण जगमोहन ने मोना चौधरी की टांग पकड़ी और तीव्रता से झटका दिया।

मोना चौधरी लड़खड़ाकर नीचे जा गिरी। जगमोहन फुर्ती से खड़ा हुआ और पलटकर भागते हुए चीखा।

मैं फिर आऊंगा मोना चौधरी । तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा। बुरी मौत मारूंगा तुझे ।”

जगमोहन वहां से भागता चला गया।

“अब भाग मत ।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी—“मिन्नो तेरे पीछे नहीं आ रही ।”

जगमोहन ने दौड़ना बंद किया और चलने लगा। मखानी, तूने तो बहुत बढ़िया काम किया।”

“अभी और काम तो नहीं हैं?”

"नहीं।”

तो लड़की ला।”

पूछता हूं।” फिर शौहरी की आवाज कानों में पड़ी_“भौरी, कमला रानी क्या कर रही है?”

एक काम लेने जा रही हूं। उसे देवा के बंगले पर भेज रही हूं, जहां भवर सिंह और त्रिवेणी भी हैं।”

" “ये काम निबट जाए तो बताना। मखानी को लड़की चाहिए।”

समझ गई। लेकिन इतनी दूर से कमला रानी, मखानी को कैसे मिलेगी?” ।

“तेरी शक्तियां कब काम आएंगी। तू तो पलों में कमला रानी को दिल्ली पहुंचा देगी।”

“तू शरारती हो गया है शौहरी ।”

“मैं मखानी को खुश रखना चाहता हूं। कमला रानी भी खुश हो जाएगी।”

मेरे को कब खुश करेगा तू?” ।

इन कामों से फुर्सत मिले, तब ही तो मिल पाऊंगा तेरे से।”

“तेरे से मिलने का दिल बहुत कर रहा है।”

“जल्दी मिलेंगे।”

मखानी बोल पड़ा।

ये भौरी थी?”

हां ।”

मेरी बात की आड़ में तू अपनी खिचड़ी पका रहा है।”

मेरे पास वक्त कहां। बहुत काम करने हैं।”

“ये कमला रानी कौन है?”

वो ही लड़की, जिसका इंतजाम तेरे लिए कर रहा हूं।”

इस लड़की के नाम से तो लगता है कि इसकी उम्र सौ साल से कम नहीं होगी।” मखानी ने शिकायती स्वर में कहा।

एकदम कड़क है, मिन्नो को देखा अभी तूने—वो कैसी है?”

“बढ़िया-मजेदार।”

कमला रानी, मिन्नों के रूप में ही मिलेगी तुझसे । समझा क्या?” कहकर शौहरी हंस पड़ा।

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मोना चौधरी ने महाजन के घर के भीतर प्रवेश किया। ड्राइंग रूम सारा अस्त-व्यस्त दिखा।

एक कुर्सी राधा बैठी नजर आई। उसका होंठ सूजा हुआ था। मोना चौधरी को देखते ही उसकी आंखें छलक आईं। वो उठी और दौड़कर मोना चौधरी से जा लिपटीं।

“मोना चौधरी, वो नीलू को बेहोश करके अपने साथ ले गया।” राधा की आंखों से आंसू बह निकले। |

मोना चौधरी का चेहरा बेहद कठोर हो गया। उसने राधा को अपने से अलग किया।

तुम्हें जगमोहन ने मारा है।” मोना चौधरी गुर्राई।

हां। वो अपना नाम जगमोहन ही बता रहा था, कौन था वो?” राधा ने भए स्वर में कहा।

हौसला रखो, सब ठीक हो जाएगा ।” मोना चौधरी की आंखें गुस्से से जल रही थीं।

नीलू को....” । ।

“वो भी वापस आ जाएगा। जगमोहन मरेगा मेरे हाथों से। बुरी मौत मरेगा ।” मोना चौधरी गुर्रा उठी।

“क्या तुमने किसी नगीना को उठाया है, वो नगीना की मांग कर रहा था।”

“मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। जगमोहन का दिमाग खराब हुआ पड़ा है।” मोना चौधरी ने कहा और फोन निकालकर पारसनाथ का नम्बर मिलाने लगी। दूसरी बारी की कोशिश पर नम्बर लगा।

हैलो ।” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी। तुम सितारा को, राधा के पास भेज दो पारसनाथ।”

क्यों?” उधर से पारसनाथ का उलझन्-भरा स्वर आया।

जगमोहन यहां झगड़ा करके, महाजन को बेहोश करके अपने साथ ले गया।”

ये कैसे हो सकता है?

” क्यों नहीं हो सकता?” मोना चौधरी के दांत भिंच गए।

जगमोहन मुम्बई में है, वो...।”

उसने झूठ कहा तुमसे। सब कुछ झूठ कहा। जगमोहन, बांके और बाकी सब भी दिल्ली में ही हैं। जगमोहन अभी यहां से गया है। जब मैं आई तो जगमोहन ने मुझे मारना चाहा। वो नगीना को पूछ रहा था।” ।

“ओह।”

लेकिन बाद में भाग गया।” ।

भाग गया। वो भागने वालों में से नहीं है मोना चौधरी ।” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी।

“न भागता तो मारा जाता।”

“मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा। ये सब अजीब बातें हो रही हैं। बांके मेरे पास अकेला आया। उधर जगमोहन अकेला दिखा। जबकि वो झगड़ा करने आया था तो उसे साथ में किसी को रखना चाहिए था।”

“मेरे ख्याल में वे सब अपने-अपने तौर पर नगीना की तलाश कर रहे हैं।”

“तो तुम मानती हो कि नगीना गायब है।”

“जरूर होगी। तभी तो देवराज चौहान के साथ हमारे पीछे पड़ रहे हैं

तुमने ये सोचा है कि वो हमारे पीछे क्यों पड़ रहे हैं? पारसनाथ का आने वाला स्वर गम्भीर था।

क्योंकि उन्हें शक है कि नगींना को हमने उठाया...।

” “तुमने ।”

हां, मैंने नगीना का अपहरण किया है।

” “वो ऐसा क्यों कह रहे हैं?

” मोना चौधरी के होंठ भिंच गए।

जवाब दो मोना चौधरी। क्या वो हमसे झगड़ा करना चाहते हैं, इसलिए ऐसा कर रहे हैं?”

ये बात नहीं हो सकती ।” तो वे लोग तुम्हारा ही नाम क्यों ले रहे हैं?

” मोना चौधरी ने कुछ नहीं कहा।

 
“इस मामले में अवश्य कुछ रहस्य है। हमें जथूरा को नहीं भूलना चाहिए, जिसके बारे में सपन चड्ढा ने बताया था। जथूरा किसी कालचक्र का इस्तेमाल कर रहा है, हम लोगों में झगड़ा करवाने के लिए और अब झगड़ा ही हो रहा है। तुमने नगीना का अपहरण किया है या नहीं, बात ये नहीं, बात ये है कि देवराज चौहान की तरफ से कहा जा रहा है कि तुमने, उसकी पत्नी को उठाया है और ये बात वो लोग खामखाह तो कहेंगे नहीं । हमें, इस मामले की तह तक पहुंचाना चाहिए।”

मोना चौधरी के क्रोध भरे चेहरे पर सोच के भाव उभरे। फिर बोली।

जब तक हम लोग देवराज चौहान के लोगों से बात न करें, तब तक तह तक नहीं पहुंचा जा सकता।”

तुम ठीक कहती हो। मैं जगमोहन को फोन करके देखता हूं। महाजन को भी वापस मांगता है।”

“मुझे नहीं लगता कि वो इन हालातों में तुम्हारे फोन की परवाह करेगा।”

देखता हूं।”

सितारा को यहां भेजो। उसके आने तक मैं राधा के पास हूं।” मोना चौधरी ने गम्भीर, गुस्से भरे स्वर में कहा और फोन बंद कर दिया।

देवराज चौहान और जगमोहन बंगले पर पहुंचे तो, पांच मिनट बाद बांकेलाल राठौर और रुस्तम राव भी आ गए।

“अंम मोन्नो चौधरी को ‘वड' दयो। वो म्हारी भाभी को उठा ले गयो हो।” बांकेलाल राठौर गुस्से में था।

“हालात बिगड़े हुए और समझ से बाहर हैं।”

कैसे बाप?” रुस्तम राव कठोर स्वर में बोला।

पारसनाथ का कहना है कि बांके उसके रेस्टोरेंट पहुंचा। उससे वहां झगड़ा किया। उसके आदमी डिसूजा को गोली मारी।”

नेई बाप । बाप तो उधर खुर्राटे मारेला था ।”

“सत्या कहती है कि नगीना भाभी मोना चौधरी से बात कर रही थी फिर भाभी गायब हो गई। बात करने पर पारसनाथ कहता है कि मोना चौधरी दिल्ली में है। मुम्बई में नहीं । ऐसे में हम किस बात पर यकीन करें और किस पर नहीं। पारसनाथ को हम ये नहीं कह सकते कि वो दोनों बातें झूठ कह रहा है। उसकी एक बात को हम सच मानें तो भी गड़बड़ है। दोनों बातें सच मानें

तो हमें मानना पड़ेगा कि इस वक्त दो बांके और दो मोना चौधरी मौजूद हैं। एक-एक दिल्ली में। एक-एक मुम्बई में। मतलब कि यकीन के साथ कुछ भी कहना कठिन है कि...।”

“पारसनाथ इस तरह का झूठ बोलकर बच नहीं सकता।” देवराज चौहान ने कहा।

। “क्या कहना चाहते हो?” जगमोहन ने उसे देखा।

मेरे खयाल में पारसनाथ झूठ नहीं कह रहा।” देवराज चौहान गम्भीर था।

तो तुम मानते हो कि दो-दो मोना चौधरी और बांके...।” ।

लेकिन ये भी कैसे मुमकिन है।” देवराज चौहान बोला।

“जथूरा की शक्तियां, क्या इस बात को मुमकिन नहीं कर सकतीं?” जगमोहन ने गम्भीरता से कहा। देवराज चौहान के होंठ भिंच गए।

शायद ये सब कुछ होना ही, जथूरा का कालचक्र है। वो हममें झगड़ा करा रहा है।”

म्हारे को जथूरा मिल जावे तो अंम उसी को ‘वड' दयो।” बांकेलाल राठौर गुर्राया।

आपुन उसको बोत मारेला ।”

तभी जगमोहन का फोन बजा। "हैलो।” जगमोहन ने बात की।

जगमोहन । मैं पारसनाथ बोल रहा हूं।” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी।

ओह–कहो।

” ये तुमने अच्छा नहीं किया।

” “क्या?” जगमोहन के माथे पर बल पड़े–“अच्छा नहीं किया?”

महाजन को तुम उठाकर ले गए। राधा को भी मारा और मोना चौधरी की जान लेनी चाही।”

सन्न रह गया जगमोहन।।

मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि नगीना को मोना चौधरी ने नहीं उठाया। तुम्हें मेरी बात का भरोसा करना चाहिए था।” ।

“तुमने क्या कहा कि मैंने क्या किया है?" जगमोहन ने गहरी सांस लेकर पूछा।।

“तुम भी जानते हो कि...।”

“तुम कहो, मैं तुम्हारे मुंह से फिर सुनना चाहता हूं।” जगमोहन की आंखें सिकुड़ी हुई थीं।

“तुम महाजन के घर गए। उससे नगीना के बारे में पूछा। झगड़ा किया फिर उसे बेहोश करके अपने साथ ले गए। इस दौरान तुमने महाजन की पत्नी राधा को भी मारा।”

“मैंने मारा?” ।

“हां, तुमने । कुछ देर बाद मोना चौधरी वहां पहुंची तो रिवॉल्वर निकालकर तुमने उसकी जान लेनी चाही। जबकि हममें ये बात तय थी कि जथूरा हमारा झगड़ा करवाने की चेष्टा करेगा, परंतु हमें नहीं झगड़ना है। अच्छा यही होगा कि तुम महाजन को आजाद कर दो।” पारसनाथ का स्वर गम्भीर और कठोर था।

 
देवराज चौहान, बांके, रुस्तम की नजरें जगमोहन पर थीं।

“तुम्हारे कहे मुताबिक, मैंने जो-जो किया, उसके लिए मुझे दिल्ली में होना चाहिए।” जगमोहन बोला।

“तुम दिल्ली में ही हो।” ।

नहीं, मैं मुम्बई में हूँ और तुम अपना कोई आदमी मेरे पास भेजकर, अपनी तसल्ली कर सकते हो।”

“ये बात मुझे मोना चौधरी ने बताई है, तो क्या वो झूठ कह रही है?” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी।

जगमोहन ने कहने के लिए मुंह खोला कि चुप रह गया। फिर गम्भीर स्वर में बोला।

“शायद वो सच कह रही है।”

क्या मतलब?”

“जिस तरह बांके और मोना चौधरी दो जगह मौजूद थे, इसी तरह मैं भी मैं भी अब दो जगह मौजूद हो गया हूं।”

“तुम्हारा मतलब कि वो तुम नहीं थे?”

“नहीं ।”

तो कौन था वो?”

“जथूरा कोई चाल चल रहा है कि हममें झगड़ा हो ।” जगमोहन सोचों में डूबा कह उठा–“अब मैं यकीनी तौर पर कह सकता हूं कि मोना चौधरी ने नगीना भाभी का अपहरण नहीं किया। तुम्हारे रेस्टोरेंट में पहुंचकर तुमसे झगड़ा करने वाला बांके, बांके नहीं था और मैं—वो नहीं जिसने महाजन और मोना चौधरी से झगड़ा किया। से सब गहरी चाल है हम में झगड़ा करवाने की। ये तो अच्छा है कि मेरी तुमसे बात हो रही है। हम लोग गलतफहमी में नहीं पड़े।”

“मैं तुम्हारी बात समझ रहा हूं, लेकिन फिर भी...।”

“मैं अब भी कहता हूं कि हमें जथूरा के इस खतरनाक खेल से सावधान रहना है।” जगमोहन कह उठा।

ये सब होता रहा तो कोई कब तक चुप बैठेगा। कभी तो झगड़ा होगा ही।”

“हम समझदार बनकर चलेंगे तो, सब कुछ ठीक रह सकता है।” जगमोहन बोला–“मोना चौधरी अब कहां है?”

“वो, महाजन की पत्नी राधा के पास है। मेरी पत्नी सितारा राधा के पास गई है, वहां पहुंचने ही वाली होगी।”

मोना चौधरी को ये सब बातें समझाओ। उसे शांत रखो।” सुबह बात करूंगा मोना चौधरी से।”

कोई नई बात हो तो मेरे से अवश्य बात कर लेना। हममें गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।”

मुझे महाजन की चिंता हो रही है।”

हमें भी नगीना की चिंता है। जथूरा उनकी जान का नुकसान नहीं कर सकता। ये तो मैं जानता हूं।”

बात खत्म हो गई।

जगमोहन ने फोन बंद करके देवराज चौहान, बांके और रुस्तम राव को देखा।

अब मेरा हमशक्ल भी नजर आने लगा है।” जगमोहन ने गम्भीर स्वर में कहा।।

मामला खतरनाक होता जा रहा है।” देवराज चौहान ने कहा।

“मेरे हमशक्ल ने महाजन की पत्नी को मारा। महाजन को ले गया और मोना चौधरी को भी मारा है।” ।

“यो तो घनी गम्भीर बातो हौवे।” ।

अफसोस तो इस बात का है कि हम जथूरा के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते और वो सब कुछ करने को आजाद है।” जगमोहन ने कहा।

“जथूरा इन हरकतों में हमें उलझा रहा है, ताकि हम परेशान होकर मोना चौधरी से झगड़ा करें और जान-माल का नुकसान हो ।” देवराज चौहान ने कहा-“जथूरा बहुत ही शातिर चालें चल रहा है। वो पूरी कोशिश कर रहा है कि हम पूर्वजन्म की यात्रा न कर पाएं ।”

“हम जथूरा को कामयाब नहीं होने देंगे।”

येई चलेगा तो जथूरा सफल हो जाएगा बाप। हममें कभी भी कोई गलती करेला और...।” ।

हम गलती नहीं करेंगे।” जगमोहन ने दृढ स्वर में कहा।

गलती हो जाईला बाप और पता भी नहीं, लगेईला ।”

रुस्तम ठीक कहता है। हमारे चेहरों में, या फिर उनके चेहरों में कोई कुछ करे, तो दूसरा कभी भी क्रोध में हरकत में आ सकता

 
जगमोहन ने होंठ भींचकर देवराज चौहान को देखा। तभी कॉल बेल बजी।

चारों चौंके। आधी रात हो रही थी। कौन आ सकता है इस समय?

मैं देखता हूं।” कहने के साथ ही देवराज चौहान ने रिवॉल्वर निकाली और दरवाजे की तरफ बढ़ गया।

दरवाजे के पास पहुंचकर ठिठका देवराज चौहान। सबकी निगाह उस पर थी।

कौन है?” देवराज चौहान ने दरवाजे के पास मुंह ले जाकर पूछा।

“मैं, लक्ष्मण दास ।”

देवराज चौहान ने आवाज को पहचाना, वो लक्ष्मण दास की ही आवाज थी।

रिवॉल्वर सतर्कता से थामे, देवराज चौहान ने दरवाजा खोला।

पोर्च में जल रही रोशनी में लक्ष्मण दास दिखा। फिर सपन चड्ढा नजर आया। परंतु उनके पीछे नजर पड़ते ही देवराज चौहान बुरी तरह चौंका। वो मोना चौधरी थी।

“तुम?" देवराज चौहान के होंठों से निकला। उसने रिवॉल्वर वापस जेब में रख ली।।

मैं तुमसे मिलना चाहती थी।” मोना चौधरी गम्भीर स्वर में बोली-“लेकिन तुम्हारा पता-ठिकाना नहीं जानती थी, इसलिए लक्ष्मण दास को किसी तरह तैयार किया कि वो मुझे तुम तक ले आए तो ये साथ में सपन चड्ढा को भी ले आया।” |

देवराज चौहान अभी भी हक्का-बक्का था। पीछे हटकर, उसने तीनों को भीतर आने का रास्ता दे दिया।

तीनों भीतर आ गए। देवराज चौहान ने दरवाजा बंद किया और पलटा।

मोना चौधरी को सामने पाकर, जगमोहन, बांके और रुस्तम राव चिहुंक पड़े।

“तुम?” जगमोहन के होंठों से निकला।

“बाप ।” रुस्तम राव, बांके से कह उठा–“घोटाला होईला ।”

बांकेलाल राठौर मूंछों पर हाथ फेरते मोना चौधरी को देखने लगा।

मोना चौधरी ने उलझन-भरे ढंग से तीनों को देखा फिर पलटकर देवराज चौहान को देखा, इसके साथ ही बोली।

“तुम लोग मुझे यहां देखकर इतने परेशान हैरान क्यों हो?"

“तुम मोना चौधरी नहीं हो।” जगमोहन दांत भींचकर बोला। मोना चौधरी के चेहरे पर अजीब से भाव उभरे।

मैं मोना चौधरी नहीं हूं कितनी अजीब बात है कि तुम कह रहे...।” ।

“तुम उसकी हमशकल हो, जथूरा की कोई चाल हो।” जगमोहन का स्वर बेहद सख्त था।

“क्या कह रहे हो?” मोना चौधरी हक्की-बक्की थी।

मोना चौधरी इस वक्त दिल्ली में है—वो...।”

*मैं मोना चौधरी हूं।”

नहीं। तुम मोना चौधरी नहीं हो।” जगमोहन ने दृढ़ स्वर में कहा।

“मैं तुम्हारे सामने खड़ी हूं और तुम कहते हो कि मैं, मैं नहीं हूं। मैं दिल्ली में हूं।” । ।

“हां। यही मैंने कहा। असली मोना चौधरी दिल्ली में है। अभी पारसनाथ से मेरी बात हुई है।”

“क्या बकवास कर रहे हो।” मोना चौधरी के माथे पर बल पड़े-“मैं दिल्ली से, लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा के साथ आठ बजे की फ्लाइट पर चली थी। ये बात तुम इन दोनों से पूछ सकते हो।”

लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा ने तुरंत सिर हिलाया। “मोना चौधरी ठीक कह रही है।” सपन चड्ढा बोला।

कितनी अजीब बात है कि मोना चौधरी सामने खड़ी है और तुम कहते हो कि ये मोना चौधरी नहीं है।” लक्ष्मण दास कह उठा।

जगमोहन कुछ कहता, उससे पहले ही देवराज चौहान ने कहा।

तुम हमसे क्यों मिलना चाहती थीं?”

 
बांके की वजह से।” मोना चौधरी ने बांकेलाल राठौर को देखा–“इसने पारसनाथ के यहां जो किया वो...।”

तुम्हें पारसनाथ ने बताया नहीं कि वो बांके का हमशक्ल था।”

“बताया, ये भी बताया कि मेरी हमशक्ल ने नगीना का अपहरण किया है। लेकिन मुझे इन बातों पर विश्वास नहीं। तुम लोग बांके की गलत हरकत को दबाने के लिए, नया बहाना सुना रहे हो ।” मोना चौधरी ने तीखे स्वर में कहा।

तुम्हारा मतलब कि हम गलत कह रहे हैं।” देवराज चौहान ने चुभते स्वर में कहा।

। “हां ।”

फिर तो हमें तुमसे नगीना की वापसी की बात करनी चाहिए, जो तुम्हारे पास है।" ।

“मैंने ये काम नहीं किया। नगीना का अपहरण मैं क्यों करूंगी?” मोना चौधरी कह उठी।

“हमारे पास आंखों देखे गवाह हैं।”

गवाह झूठे हैं।”

वो सच्चे हैं। नगीना की नौकरानी सत्या ने तुम्हें नगीना के साथ बातें करते देखा, फिर तुम दोनों गायब हो गईं।”

“मैं नगीना से मिली ही नहीं। मुझे नहीं मालूम वो किधर रहती

“हम सत्या को झूठा नहीं मान सकते, जिसने तुम्हें अपनी आंखों से देखा, तुम्हारा हुलिया बताया। नगीना ने सत्या से भी कहा कि वो मोना चौधरी से बात कर रही है।” देवराज चौहान एक-एक शब्द चबाकर बोला।

“तुम गलत कह रहे हो देवराज चौहान, वो मैं थी ही नहीं।” मोना चौधरी ने कहा।

“दूसरी हो सकती है।”

वो दूसरी ही होगी।”

“वो ही तो हम कह रहे हैं कि इस वक्त दो मोना चौधरी और दो बांके, सुनने को मिल रहे हैं। पारसनाथ से जिस बांके ने झगड़ा किया वो नकली था। बांके तो यहां पर हमारे पास था तब।” ।

मोना चौधरी के होंठ भिंच गए।

“ये असली मोना चौधरी नहीं है।” जगमोहन ने कहा और फोन निकाल कर पारसनाथ के नम्बर मिलाने लगा।

बकवास मत करो। मैं मोना चौधरी ही हूं।

” अभी पता चल जाता है।” जगमोहन ने सतर्क स्वर में कहा।

छोरे, यो मामलो तो घनो उलझो गयो।” बांकेलाल राठौर बोला।

“बाप, अपनी खोपड़ी घूमेला है।” रुस्तम राव ने गहरी सांस लेकर कहा।

दिखो तो यो मोन्नो चौधरो ही।” ।

ये ही तो झमेला हेईला कि ये मोना चौधरी दिखेला है।

” जगमोहन की पारसनाथ से बात हुई।

मोना चौधरी कहां है?” मोना चौधरी पर नजर मारते जगमोहन ने पूछा।

“अभी सितारा का फोन आया था कि वो राधा के पास पहुंच गई है।” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी—“सितारा के पहुंचने तक मोना चौधरी, राधा के पास ही थी। उसके बाद चली गई।

“ये कब की बात है?”

अभी की ।”

अब तुम्हें ये जानकर खुशी होगी कि मोना चौधरी अभी-अभी हमारे पास आई है।”

क्या?"

दिल्ली से मुम्बई वो पलक झपकते ही पहुंच गई। साथ में सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास भी हैं।”

“ये नहीं हो सकता।” ।

हुआ पड़ा है ये।” जगमोहन तीखे स्वर में बोला-“मोना चौधरी कहती है कि वो आठ बजे वाली फ्लाइट से दिल्ली से चली।”

“पैसेंजर लिस्ट से सच्चाई पता चल सकती है।”

अब तुम किसे असली मोना चौधरी कहोगे। दिल्ली वाली को या मुम्बई वाली को।”

पारसनाथ की आवाज नहीं आई। तभी मोना चौधरी जगमोहन की तरफ बढ़ते कह उठी।

मुझे बात करने दो, पारसनाथ से।” जगमोहन ने फोन मोना चौधरी को थमा दिया।

पारसनाथ ।” मोना चौधरी फोन पर बोली-“क्या हो रहा है। ये सब?”

मेरा तो दिमाग खराब हो चुका है।

” हुआ क्या?"

घंटा-भर पहले तुमने ही मुझे फोन पर कहा था कि जगमोहन, राधा को घायल करके, महाजन को बेहोश करके ले गया और उसने तुम्हें भी मारने की चेष्टा की। तुमने सितारा को, राधा के पास भेजने को कहा तो मैंने...।”

“मैंने आठ बजे लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा के साथ मुम्बई की फ्लाइट पकड़ी थी। कुछ देर पहले ही देवराज चौहान के पास पहुंची हूं। मैं तुम्हें कैसे फोन कर सकती हूं। जगमोहन मुझे कैसे मारने की कोशिश कर सकता है। बकवास कर रहे हो तुम?”

“मैं सही कह रहा हूं मोना चौधरी। तुमने ही मुझे फोन किया था।”

नहीं, वो मैं नहीं थी।”

तो कौन था वो?”

 
ये तुम पता करो। मेरा फोन भी मेरे पास है। मालूम करो तुम्हें फोन करने वाली कौन है?”

। “वो ही होगी, जिसने नगीना का अपहरण किया।”

मोना चौधरी का चेहरा कठोर हो गया। “ढूंढो उसे और खत्म कर दो।”

ये सब जथूरा कोई चाल चल रहा है। जो हम सबमें झगड़ा करवाना चाहता है।”

“तुम उस मोना चौधरी की खबर लो।”

अभी जाता हूँ मैं।” ।

मोना चौधरी ने फोन बंद करके जगमोहन को दिया और बोली।

मैं ही असली मोना चौधरी हूँ। वो कोई बहरूपिया है। पारसनाथ कुछ ही देर में उसे तलाश कर लेगा।”

“हमें नहीं मालूम तुम बहरुपिया हो या दूसरी ।”

मोना चौधरी ने कड़वी मुस्कान के साथ जगमोहन से कहा।

इस बात का यकीन तुम्हें दिलाने की जरूरत नहीं समझती।

” हमें तो जरूरत है।”

क्यों?”

क्योंकि नकली मोना चौधरी के पास नगीना अभी है।”

मैं नकली नहीं, असली हूं।” फिर वो लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा से बोली-“चलो, हमें वापस दिल्ली जाना है। जिस काम के लिए मैं मुम्बई आई थी, उसकी अब जरूरत नहीं रही। बांके के बहरूपिये ने, पारसनाथ के यहां झगड़ा किया, ये जान गई हूं मैं ।”

*और।” जगमोहन बोला—“मैंने जो महाजन के यहां किया—वो।”

“वो तुम्हारा बहरुपिया था, जो महाजन को ले गया। मैं उसे ढूंढ़ निकालूंगी। अगर ये काम जथूरा कर रहा है तब वो बचेगा नहीं। हमें पूरी कोशिश करनी है कि इन हालातों के बीच, हममें झगड़ा पैदा न हो।” मोना चौधरी गम्भीर स्वर में कह उठी।

जगमोहन ने देवराज चौहान को देखा। | मोना चौधरी लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा के साथ बाहर निकल गई।

चुप्पी-सी आ ठहरी वहां। देवराज चौहान ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया।

यो तो अजीब बातों हो रईयो हो।” बांकेलाल राठौर ने गम्भीर स्वर में कहा–“एक-दूसरों के नकली चेहरो सामनो आ रहो हो। अंम किस पर भरोसो करो हो। यो तो खोपड़ी खराबो करनो वालो बातो हौओ हो ।” ।

देवराज चौहान ने कश लिया। आंखों में गहरी सोच के भाव थे।

“सच में दिमाग खराब हो रहा है।” जगमोहन बोला।।

क्यों बाप?” रुस्तम राव देवराज चौहान से कह उठा–“तुम क्या सोचते हो?”

हम इन हालातों को समझते हुए भी, ज्यादा देर तक अपने पर काबू नहीं रख सकते ।” देवराज चौहान ने कहा।

ये क्या कहते हो?”

“मैं ठीक कह रहा हूं। जथूरा ऐसी शानदार चालें चल रहा है। कि समझते हुए भी हम कोई रास्ता नहीं चुन सकते। इसका अंत झगड़े पर ही आकर खत्म होगा और वो अपनी कोशिश में सफल हो जाएगा।” देवराज चौहान ने कश लिया।

“हम सतर्क रहकर...।”

ज्यादा देर सतर्कता का दामन नहीं पकड़े रह सकते। कभी भी कोई भी घटना, किसी का दिमाग खराब कर सकती है और कुछ भी हो सकता है।”

“देवराज चौहानो ठीको बोल्लो हो ।” । जगमोहन के होंठ भिंच गए।

हमारे पास देखते रहने के अलावा, करने को कुछ नहीं है। देखते रहो। सब्र का बांध टूटे तो दूसरे पर झपट पड़ो। बस यही होगा।”

“मैं ये नहीं होने...।”

एकाएक जगमोहन के मस्तिष्क में बिजलियां कौंधीं। उसने दोनों हाथों से अपना सिर थाम लिया। आंखें बंद होती चली गईं। बिजली के तेज धमाके बज रहे थे उसके दिमाग में, फिर सब कुछ शांत होता चला गया। उसके बाद जगमोहन के मस्तिष्क में वो ही जगह देखी, जो वो पहले देख चुका था। वहां नगीना को उसी मुद्रा में बेहोश पड़े देखा, परंतु चंद कदमों के फासले पर, अब महाजन भी वहां बेहोशी की मुद्रा में पड़ा हुआ था। वहां की हर जगह शांत थी। समुद्र की लहरों का शोर कानों में पड़ रहा था। चट्टानों से भरी पथरली जमीन। लम्बे, हवा से हिलते पेड़। नीचे पत्थरों को छोड़कर, हर जगह घास नजर आ रही थी। एक तीन फुटा, घास में से कच्चा रास्ता, एक तरफ जा रहा था।

फिर जगमोहन सामान्य होता चला गया।

देवराज चौहान, रुस्तम राव और बांके की नजरें जगमोहन पर थीं।।

“का हो गयो थारो को, सिरो दर्दो से फट जावो का?” |

जगमोहन ने दोनों हाथ सिर से हटाए, आंखें खोलीं और देवराज

चौहान को देखा।

महाजन, नगीना भाभी के पास बेहोश पड़ा देखा। मैंने पूर्वाभास में देखा है अभी-अभी ।” ।

“तो जथूरा हमें इस तरह ले जाकर एक जगह इकट्ठा कर रहा है।” देवराज चौहान बोला।

यही लगता है।”

“वो कौन सी जगह है?”

“मैं समझ नहीं पाया। लेकिन समुद्र के किनारे चट्टानों-भरी पथरीली जमीन है। वहां घास भी है, पेड़ भी, पगडंडी भी।

” जगमोहन ने गम्भीर स्वर में कहा-“मैं नहीं जानता कि वो जगह कहां पर है।”

छोरो समझो का?

" समझेला है बाप ।”

तभी जगमोहन के कानों में पोतेबाबा की फुसफुसाहट गूंजी। “बहुत देर से तेरे से बात नहीं हुई जग्गू।” जगमोहन चौंककर पलटा। कुछ भी नजर नहीं आया।

पोतेबाबा।” जगमोहन के भिंचे होंठों से निकला। लगता है तू भी मेरे बिना उदास हो गया जग्गू।

” तू कमीना है।” जगमोहन ने दांत पीसकर कहा।

पोतेबाबा के हंसने का स्वर गूंजा।।

पोतेबाबा आ गयो छोरो ।

” नजर नेई आरेला बाप ।” तभी देवराज चौहान ने सिगरेट का धुआं आवाज की तरफ फेंका।।

अगले ही पल पोतेबाबा की आकृति सी नजर आई। चेहरे की आकृति । धुएं की लकीरों जैसी।

“ये सब जथूरा का फेंका कालचक्र है।” पोतेबाबा की आवाज सबने सुनी–“इससे कोई बच नहीं सकता।”

“जथूरा का कालचक्र हमारे सामने फेल हो जाएगा।” जगमोहन ने तीखे स्वर में कहा।

ऐसा कभी नहीं हो सकता। अभी भी वक्त है। मान जा, पीछे हट जा। जथूरा के हादसों में दखल न दे।”

“जो बात नहीं हो सकती, वो कह ही मत।”

“तुम सब का बुरा वक्त आने वाला है। एक वक्त ऐसा आएगा कि तुम लोग अपनी परछाईं पर भी शक करने लगोगे कि वो भी तुम्हारी है कि नहीं। इतने तंग आ जाओगे कि एक-दूसरे की जान लिए बिना नहीं रह पाओगे।”

तंम तो दूर बैठो के मजे लियो हो।” ।

जग्गू, जथूरा नहीं चाहता है कि तुम पूर्वजन्म की यात्रा करो। मामूली सी तो बात है। तुम लोग क्यों...।”

। “मुझे पूर्वाभास कौन करा रहा है पोतेबाबा?” जगमोहन ने पूछा।

ये पता चल जाता तो जथूरा कब का इस मामले को खत्म कर देता। परंतु उसका पता नहीं चल रहा ।” |

“हमें कैसे पता कि पूर्वजन्म को कौन-सा रास्ता जाता है। जथूरा तो खामखाह डर रहा है।” जगमोहन मुस्कराकर बोला । |

“जो तुम्हें पूर्वाभास करा रहा है, वो तुम लोगों को पूर्वजन्म में प्रवेश करने वाले रास्ते पर ले जाएगा।”

ऐसा होगा?”

हां ।”

तो तुम्हें पहले से ही पता है कि ये सब होने वाला है तो हमें रोक क्यों रहे हो?" जगमोहन ने कहा।

“इसलिए कि अगर तुम मान जाओ तो ये सफर रोका जा सकता है। या देवा या मिन्नो में से एक मर जाएं तो पूर्वजन्म की यात्रा हमेशा-हमेशा के लिए रुक जाएगी। तुम लोगों की पूर्वजन्म की यात्रा जथूरा के हक में अच्छी नहीं रहेगी। इसलिए रोका जा रहा है तुम सबको। अगर जथूरा ने तुम लोगों की ये यात्रा रोक दी तो जथूरा बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो जाएगा।”

“तड़प रहा होगा जथूरा, हमें रोकने को ।”

“कोशिश तो वो कर ही रहा है। मान जाओ जग्गू। फायदे में रहोगे।”

नगीना कहां है?"

“नगीना और नील सिंह सुरक्षित हैं। एक जगह पर दोनों बेहोश पड़े हैं तुम...।”

यही वो वक्त था, जब देवराज चौहान ने फुर्ती से रिवॉल्वर निकाली और जहां पोते बाबा के खड़े होने का अहसास था, उस तरफ करके गोली चला दी।

तेज धमाका गूंजा फिर सब कुछ शांत हो गया। दो पलों तक तो कोई स्वर ही न उभरा।

“तुमने अपनी कोशिश कर ली देवा ।” पोतेबाबा का मुस्कराता स्वर सबके कानों में पड़ा।

देवराज चौहान के होंठों से गहरी सांस निकली फिर कह उठा।

तो गोली तेरे को नहीं लगी।”

लगी। इस तरह जैसे तुम लोगों को छोटा-सा कंकर लगता है, वैसे मुझे गोली लगी। तुम क्या समझते हो कि तुम्हारे ये मामूली से खिलौने मेरा अहित कर सकेंगे? नहीं, तुम लोग मेरे को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। मैं हर तरफ से सुरक्षित होकर, इस दुनिया में आया हूँ।” |

 
देवराज चौहान ने रिवॉल्वर जेब में रख ली।

देवा की इस हरकत से जाहिर है कि तुम लोग, मेरी बात न मानकर अपना खेल ही चालू रखना चाहते हो। मर्जी तुम लोगों की। बुरा भुगतोगे तुम लोग। जथूरा का कालचक्र तुम लोगों को कहीं का नहीं छोड़ेगा ।”

“अंम थारी चुटियो को पकड़कर घुमायो पोतो बाबे ।”

“तुम लोग मामूली इंसान हो मेरे सामने। जाता हूं, अब भुगतना तुम लोग।”

उसके बाद पोतेबाबा की आवाज नहीं आई। | चुप्पी-सी आ ठहरी वहां ।।

“हम लोगों के पास करने को कुछ नहीं है।” देवराज चौहान बोला–“और जथूरा अपने मन की किए जा रहा है।”

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