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एकाएक जगमोहन ने महाजन को एक तरफ उछाला और फुर्ती से खड़ा होकर राधा को देखा।
मैं तेरे को छोडूंगी नहीं।” राधा तलवार की तरह झाडू हिलाती कह उठी।
जगमोहन ने राधा की झाडू एक हाथ से पकड़ी और जोरदार घुसा उसके चेहरे पर मारा।
राधा के होंठों से चीख निकली और वो पीछे जा गिरी।
जगमोहन-5-5-S” महाजन गला फाड़कर चीखा और उस पर झपट पड़ा।
दोनों पागलों की तरह भिड़ गए। राधा आधी बेहोशी की हालत में नीचे पड़ी थी। उसके मुंह से खून निकल रहा था।
अगले पांच मिनट में ही जगमोहन और महाजन के चेहरे खून से भर चुके थे।
“बस, ठीक है मखानी।” जथूरा की फुसफसाहट कानों में पड़ी—“निकल यहां से । इसे बेहोश करके साथ ले लेना।”
जगमोहन ने महाजन को जोरों से धक्का दिया तो महाजन दूर जा गिरा।
“मैं तेरे को, पारसनाथ और मोना चौधरी को छोडूंगा नहीं। मार दूंगा सबको ।” जगमोहन गुर्रा उठा।
तू यहां से जिंदा बचकर नहीं जा सकता जगमोहन ।” राधा अब कुछ-कुछ होश में आ रही थी। वो बोली। इसके हाथ-पांव तोड़ दे नीलू।” ।
तभी जगमोहन ने छोटा सा टेबल उठाया और महाजन पर झपट पड़ा। महाजन कुछ समझ नहीं पाया और टेबल उसके सिर पर आ लगा। महाजन की आंखों के सामने लाल-पीले तारे चमके और वो बेहोश होकर नीचे गिरने लगा तो जगमोहन ने उसे थामा और कंधे पर लादकर दरवाजे की तरफ बढ़ा।
“नीलू को कहां ले जा रहा है। रुक-मैं तेरा खून पी जाऊंगी।” राधा चीखी। उसकी हालत खास बेहतर नहीं थी। | राधा फौरन उसके पास आ पहुंची। | अगले ही पल जगमोहन का जोदार चांटा उसके गाल पर पड़ा तो वो चीखकर नीचे जा गिरी।
“मोना चौधरी से कहना, मैं उसे छोडूंगा नहीं। जगमोहन नाम है मेरा।” ।
जगमोहन दरवाजा खोलकर बाहर निकला और महाजन को लादे अंधेरे में आगे बढ़ गया।
मखानी तूने तो कमाल कर दिया ।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी।
सच में।”
“जथूरा की कसम, तूने तो मेरा दिल जीत लिया।”
“तू बातें बहुत करता है शौहरी, लेकिन मेरे काम की बात नहीं करता।”
“तेरे काम की?”
लड़की ।”
बस एक काम और। फिर तेरे को ऐसी शानदार लड़की दिलाऊंगा कि तू पागल हो जाएगा।”
सच कहता है।” ।
“शौहरी तेरे से झूठ क्यों बोलेगा।”
“इसका क्या करूं?" ।
नीचे रख दे।” । मखानी ने बेहोश महाजन को नीचे अंधरे में एक तरफ डाल दिया। मखानी ने शौहरी को बुदबुदाते सुना।।
अगले ही पल उसने एक नई आवाज सुनी। मुझे कैसे याद कर लिया शौहरी ।” स्त्री की आवाज थी।
कोई बहाना तो मिला तुझे याद करने का।”
|
कभी बिना बहाने के भी याद कर लिया कर। क्या तेरा दिल नहीं करता।”
करता है।” ।
“भौरी बता रही थी कि तू फुर्सत में भौरी के साथ मिलने वाला है। ये सच है।”
हां, वो मुझे पसंद है।
” मैं उससे ज्यादा सुंदर हूं।”
सवाल सुंदरता का नहीं, पसंद का है। लेकिन तेरे से भी मिलूंगा। इस वक्त काम कर ।”
“बोल ।”
ये नील सिंह बेहोश है। इसे वहीं पहुंचाना है, जहां नगीना को पहुंचाया है।”
समझ गई।
मैं तेरे को छोडूंगी नहीं।” राधा तलवार की तरह झाडू हिलाती कह उठी।
जगमोहन ने राधा की झाडू एक हाथ से पकड़ी और जोरदार घुसा उसके चेहरे पर मारा।
राधा के होंठों से चीख निकली और वो पीछे जा गिरी।
जगमोहन-5-5-S” महाजन गला फाड़कर चीखा और उस पर झपट पड़ा।
दोनों पागलों की तरह भिड़ गए। राधा आधी बेहोशी की हालत में नीचे पड़ी थी। उसके मुंह से खून निकल रहा था।
अगले पांच मिनट में ही जगमोहन और महाजन के चेहरे खून से भर चुके थे।
“बस, ठीक है मखानी।” जथूरा की फुसफसाहट कानों में पड़ी—“निकल यहां से । इसे बेहोश करके साथ ले लेना।”
जगमोहन ने महाजन को जोरों से धक्का दिया तो महाजन दूर जा गिरा।
“मैं तेरे को, पारसनाथ और मोना चौधरी को छोडूंगा नहीं। मार दूंगा सबको ।” जगमोहन गुर्रा उठा।
तू यहां से जिंदा बचकर नहीं जा सकता जगमोहन ।” राधा अब कुछ-कुछ होश में आ रही थी। वो बोली। इसके हाथ-पांव तोड़ दे नीलू।” ।
तभी जगमोहन ने छोटा सा टेबल उठाया और महाजन पर झपट पड़ा। महाजन कुछ समझ नहीं पाया और टेबल उसके सिर पर आ लगा। महाजन की आंखों के सामने लाल-पीले तारे चमके और वो बेहोश होकर नीचे गिरने लगा तो जगमोहन ने उसे थामा और कंधे पर लादकर दरवाजे की तरफ बढ़ा।
“नीलू को कहां ले जा रहा है। रुक-मैं तेरा खून पी जाऊंगी।” राधा चीखी। उसकी हालत खास बेहतर नहीं थी। | राधा फौरन उसके पास आ पहुंची। | अगले ही पल जगमोहन का जोदार चांटा उसके गाल पर पड़ा तो वो चीखकर नीचे जा गिरी।
“मोना चौधरी से कहना, मैं उसे छोडूंगा नहीं। जगमोहन नाम है मेरा।” ।
जगमोहन दरवाजा खोलकर बाहर निकला और महाजन को लादे अंधेरे में आगे बढ़ गया।
मखानी तूने तो कमाल कर दिया ।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी।
सच में।”
“जथूरा की कसम, तूने तो मेरा दिल जीत लिया।”
“तू बातें बहुत करता है शौहरी, लेकिन मेरे काम की बात नहीं करता।”
“तेरे काम की?”
लड़की ।”
बस एक काम और। फिर तेरे को ऐसी शानदार लड़की दिलाऊंगा कि तू पागल हो जाएगा।”
सच कहता है।” ।
“शौहरी तेरे से झूठ क्यों बोलेगा।”
“इसका क्या करूं?" ।
नीचे रख दे।” । मखानी ने बेहोश महाजन को नीचे अंधरे में एक तरफ डाल दिया। मखानी ने शौहरी को बुदबुदाते सुना।।
अगले ही पल उसने एक नई आवाज सुनी। मुझे कैसे याद कर लिया शौहरी ।” स्त्री की आवाज थी।
कोई बहाना तो मिला तुझे याद करने का।”
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कभी बिना बहाने के भी याद कर लिया कर। क्या तेरा दिल नहीं करता।”
करता है।” ।
“भौरी बता रही थी कि तू फुर्सत में भौरी के साथ मिलने वाला है। ये सच है।”
हां, वो मुझे पसंद है।
” मैं उससे ज्यादा सुंदर हूं।”
सवाल सुंदरता का नहीं, पसंद का है। लेकिन तेरे से भी मिलूंगा। इस वक्त काम कर ।”
“बोल ।”
ये नील सिंह बेहोश है। इसे वहीं पहुंचाना है, जहां नगीना को पहुंचाया है।”
समझ गई।