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मखानी।” वो मुस्कराया।
क्या तुम्हारा पूरा नाम जगमोहन मखानी है?
” नहीं।”
“तो तुमने अपना नाम मखानी क्यों बताया?”
वो मुझे इसी नाम से जानती है।”
लेकिन कमला रानी है कौन...।”
वो आ गई।”
महाजन की नजर झोंपड़े की तरफ उठी।
अभी-अभी कमला रानी बाहर निकली थी। सजी-संवरी। हरे रंग के चमकते कपड़े पहन रखे थे। बालों को पीछे करके बांध रखा था। होंठों पर लिपस्टिक, चेहरे पर मेकअप। वो हसीन लग रही थी।
उसे देखते ही मखानी का चेहरा खिल उठा।
कमला रानी।”
मखानी, मेरे प्यार ।”
मखानी उसकी तरफ दौड़ा। कमला रानी भी आगे बढ़ी। अगले ही पल दोनों एक-दूसरे की बांहों में थे।
महाजन हैरान-परेशान था जगमोहन का ये रूप देखकर।
बस कर कमला रानी।” भौरी की फुसफुसाहट कमला रानी के कान में पड़ीं—“काम की तरफ ध्यान दे।”
कमला रानी ने उसी पल मखानी को अपने से अलग किया।
चल भीतर चलते हैं।” मख़ानी व्याकुल-सा कह उठा।
“भौरी कहती है पहले काम।”
कुछ देर की बात...।”
नहीं। मुझे भौरी की बात माननी है पहले। काम के वक्त बाकी बातें नहीं ।”
उसी पल शौहरी की आवाज मखानी के कानों में पड़ी। “कमला रानी को देखकर तू सब कुछ भूल जाता है मखानी।”
क्या करूं, अपने पर काबू नहीं रख पाता।”
काबू रख। काम कर। उसके बाद तेरे को और कमला रानी को अकेले में जाने का मौका मिलेगा।” ।
ठीक है।” मखानी ने मुंह लटकाकर कहा।
कमला रानी की नजर महाजन पर गई।
तो इसे लाया हैं तू–एक ही...”
“बाकी भी टापू पर हैं। अपने आदमी भेज और उन्हें मंगवा ले।”
अभी भेजती हूं।” । तू किसके रूप में है कमला रानी?”
ये कालचक्र का भीतरी हिस्सा है। यहां मैं इस बस्ती की मालकिन के रूप में हूं। ये सब बस्ती वाले मेरा हुक्म मानते हैं। कल ही मैं यहां आई। भौरी ने मुझे यहां पहुंचाया। जो यहां की मालकिन थी, वो भीतर कमरे में सोई पड़ी है। तब तक सोई रहेगी जब तक मैं अपने काम करके चली नहीं जाती। उसी का रूप मुझे भौरी ने दिया है।”
क्या उसका नाम भी कमला रानी है?”
“नहीं। कल मैंने बस्ती में सबसे कह दिया था कि अब मेरा नया नाम कमला रानी है। यही वजह रही है कि तुम्हें मुझ तक आने में कोई परेशानी नहीं हुई।” कमला रानी ने कहा।
“तेरे को अपने करीब पाकर मैं बहुत खुश हूं।”
“ये बातें छोड़, आगे का काम कर ।” ।
तू बाकी लोगों को पकड़ने के लिए, बस्ती के आदमी भेज और...।”
“मैंने सब तैयारी कर रखी है। आज रात ही मैं देवा और मिन्नो का मुकाबला कराकर, एक की जान...।”
लेकिन वो लोग तो तय किए बैठे हैं कि उन्हें झगड़ा नहीं करना है।” मखानी ने कहा।
वों बेवकूफ हैं सब। मेरे इंतजाम के सामने वो बौने हैं।”
वो कैसे?”
तभी महाजन पास आ पहुंचा।
“तुम दोनों क्या बातें कर रहे हो।” महाजन उलझन में बोला–“ये कौन-सी जगह है?”
मखानी और कमला रानी की नजरें मिलीं।
“इसका इंतजाम कर...”
क्या तुम्हारा पूरा नाम जगमोहन मखानी है?
” नहीं।”
“तो तुमने अपना नाम मखानी क्यों बताया?”
वो मुझे इसी नाम से जानती है।”
लेकिन कमला रानी है कौन...।”
वो आ गई।”
महाजन की नजर झोंपड़े की तरफ उठी।
अभी-अभी कमला रानी बाहर निकली थी। सजी-संवरी। हरे रंग के चमकते कपड़े पहन रखे थे। बालों को पीछे करके बांध रखा था। होंठों पर लिपस्टिक, चेहरे पर मेकअप। वो हसीन लग रही थी।
उसे देखते ही मखानी का चेहरा खिल उठा।
कमला रानी।”
मखानी, मेरे प्यार ।”
मखानी उसकी तरफ दौड़ा। कमला रानी भी आगे बढ़ी। अगले ही पल दोनों एक-दूसरे की बांहों में थे।
महाजन हैरान-परेशान था जगमोहन का ये रूप देखकर।
बस कर कमला रानी।” भौरी की फुसफुसाहट कमला रानी के कान में पड़ीं—“काम की तरफ ध्यान दे।”
कमला रानी ने उसी पल मखानी को अपने से अलग किया।
चल भीतर चलते हैं।” मख़ानी व्याकुल-सा कह उठा।
“भौरी कहती है पहले काम।”
कुछ देर की बात...।”
नहीं। मुझे भौरी की बात माननी है पहले। काम के वक्त बाकी बातें नहीं ।”
उसी पल शौहरी की आवाज मखानी के कानों में पड़ी। “कमला रानी को देखकर तू सब कुछ भूल जाता है मखानी।”
क्या करूं, अपने पर काबू नहीं रख पाता।”
काबू रख। काम कर। उसके बाद तेरे को और कमला रानी को अकेले में जाने का मौका मिलेगा।” ।
ठीक है।” मखानी ने मुंह लटकाकर कहा।
कमला रानी की नजर महाजन पर गई।
तो इसे लाया हैं तू–एक ही...”
“बाकी भी टापू पर हैं। अपने आदमी भेज और उन्हें मंगवा ले।”
अभी भेजती हूं।” । तू किसके रूप में है कमला रानी?”
ये कालचक्र का भीतरी हिस्सा है। यहां मैं इस बस्ती की मालकिन के रूप में हूं। ये सब बस्ती वाले मेरा हुक्म मानते हैं। कल ही मैं यहां आई। भौरी ने मुझे यहां पहुंचाया। जो यहां की मालकिन थी, वो भीतर कमरे में सोई पड़ी है। तब तक सोई रहेगी जब तक मैं अपने काम करके चली नहीं जाती। उसी का रूप मुझे भौरी ने दिया है।”
क्या उसका नाम भी कमला रानी है?”
“नहीं। कल मैंने बस्ती में सबसे कह दिया था कि अब मेरा नया नाम कमला रानी है। यही वजह रही है कि तुम्हें मुझ तक आने में कोई परेशानी नहीं हुई।” कमला रानी ने कहा।
“तेरे को अपने करीब पाकर मैं बहुत खुश हूं।”
“ये बातें छोड़, आगे का काम कर ।” ।
तू बाकी लोगों को पकड़ने के लिए, बस्ती के आदमी भेज और...।”
“मैंने सब तैयारी कर रखी है। आज रात ही मैं देवा और मिन्नो का मुकाबला कराकर, एक की जान...।”
लेकिन वो लोग तो तय किए बैठे हैं कि उन्हें झगड़ा नहीं करना है।” मखानी ने कहा।
वों बेवकूफ हैं सब। मेरे इंतजाम के सामने वो बौने हैं।”
वो कैसे?”
तभी महाजन पास आ पहुंचा।
“तुम दोनों क्या बातें कर रहे हो।” महाजन उलझन में बोला–“ये कौन-सी जगह है?”
मखानी और कमला रानी की नजरें मिलीं।
“इसका इंतजाम कर...”