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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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मखानी।” वो मुस्कराया।

क्या तुम्हारा पूरा नाम जगमोहन मखानी है?

” नहीं।”

“तो तुमने अपना नाम मखानी क्यों बताया?”

वो मुझे इसी नाम से जानती है।”

लेकिन कमला रानी है कौन...।”

वो आ गई।”

महाजन की नजर झोंपड़े की तरफ उठी।

अभी-अभी कमला रानी बाहर निकली थी। सजी-संवरी। हरे रंग के चमकते कपड़े पहन रखे थे। बालों को पीछे करके बांध रखा था। होंठों पर लिपस्टिक, चेहरे पर मेकअप। वो हसीन लग रही थी।

उसे देखते ही मखानी का चेहरा खिल उठा।

कमला रानी।”

मखानी, मेरे प्यार ।”

मखानी उसकी तरफ दौड़ा। कमला रानी भी आगे बढ़ी। अगले ही पल दोनों एक-दूसरे की बांहों में थे।

महाजन हैरान-परेशान था जगमोहन का ये रूप देखकर।

बस कर कमला रानी।” भौरी की फुसफुसाहट कमला रानी के कान में पड़ीं—“काम की तरफ ध्यान दे।”

कमला रानी ने उसी पल मखानी को अपने से अलग किया।

चल भीतर चलते हैं।” मख़ानी व्याकुल-सा कह उठा।

“भौरी कहती है पहले काम।”

कुछ देर की बात...।”

नहीं। मुझे भौरी की बात माननी है पहले। काम के वक्त बाकी बातें नहीं ।”

उसी पल शौहरी की आवाज मखानी के कानों में पड़ी। “कमला रानी को देखकर तू सब कुछ भूल जाता है मखानी।”

क्या करूं, अपने पर काबू नहीं रख पाता।”

काबू रख। काम कर। उसके बाद तेरे को और कमला रानी को अकेले में जाने का मौका मिलेगा।” ।

ठीक है।” मखानी ने मुंह लटकाकर कहा।

कमला रानी की नजर महाजन पर गई।

तो इसे लाया हैं तू–एक ही...”

“बाकी भी टापू पर हैं। अपने आदमी भेज और उन्हें मंगवा ले।”

अभी भेजती हूं।” । तू किसके रूप में है कमला रानी?”

ये कालचक्र का भीतरी हिस्सा है। यहां मैं इस बस्ती की मालकिन के रूप में हूं। ये सब बस्ती वाले मेरा हुक्म मानते हैं। कल ही मैं यहां आई। भौरी ने मुझे यहां पहुंचाया। जो यहां की मालकिन थी, वो भीतर कमरे में सोई पड़ी है। तब तक सोई रहेगी जब तक मैं अपने काम करके चली नहीं जाती। उसी का रूप मुझे भौरी ने दिया है।”

क्या उसका नाम भी कमला रानी है?”

“नहीं। कल मैंने बस्ती में सबसे कह दिया था कि अब मेरा नया नाम कमला रानी है। यही वजह रही है कि तुम्हें मुझ तक आने में कोई परेशानी नहीं हुई।” कमला रानी ने कहा।

“तेरे को अपने करीब पाकर मैं बहुत खुश हूं।”

“ये बातें छोड़, आगे का काम कर ।” ।

तू बाकी लोगों को पकड़ने के लिए, बस्ती के आदमी भेज और...।”

“मैंने सब तैयारी कर रखी है। आज रात ही मैं देवा और मिन्नो का मुकाबला कराकर, एक की जान...।”

लेकिन वो लोग तो तय किए बैठे हैं कि उन्हें झगड़ा नहीं करना है।” मखानी ने कहा।

वों बेवकूफ हैं सब। मेरे इंतजाम के सामने वो बौने हैं।”

वो कैसे?”

तभी महाजन पास आ पहुंचा।

“तुम दोनों क्या बातें कर रहे हो।” महाजन उलझन में बोला–“ये कौन-सी जगह है?”

मखानी और कमला रानी की नजरें मिलीं।

“इसका इंतजाम कर...”

 
हंसराज।” कमला रानी ऊंचे स्वर में कह उठी।

किस इंतजाम की बात कर रहे हो तुम?” महाजन ने मखानी से पूछा।

तेरा इंतजाम।” मखानी जहरीले स्वर में मुस्करा पड़ा।

“मेरा इंतजाम क्या मतलब?” महाजन चौंका।

मैं जगमोहन नहीं हूं।”

“नहीं है जगमोहन तू ।” महाजन अचकचाया–“ये कैसे हो सकता है।”

“मैं जगमोहन का नकली रूप हूं। मखानी हूँ मैं ।” मखानी ने कड़वे स्वर में कहा“कालचक्र का हिस्सा हूं।”

। “ओह।” महाजन चौंका।

तभी तीस बरस का हट्टा-कट्ठा काला-सा व्यक्ति वहां आ पहुंचा।

महाजन इन पलों में समझ नहीं पाया कि क्या करे।

“बोल कमला रानी।” हंसराज बोला।

इस टापू पर कुछ अजनबी लोग आए हैं—कितने मखानी?” कमला रानी ने मखानी को देखा।

आठ हैं लक्ष्मण और सपन को मिलाकर ।”

“उन आठों को पकड़ ले आओ। अपने आदमी हर तरफ भेज दो।” ।

“अभी उन्हें पकड़ मंगवाता हूं।” कहने के साथ ही हंसराज वहां से चला गया।

कमीने।” तभी महाजन गुस्से से मखानी पर झपट पड़ा।

कमला रानी ने उसी पल जोरदार ठोकर महाजन के पेट पर मारी।।

महाजन पेट पकड़कर चीखता हुआ दूर जा गिरा।।

वाह कमला रानी । तूने तो कमाल कर दिया।” मखानी हंस पड़ा।

कमला रानी ने दुर खडे आदमी को बुलाकर कहा।

इसे पकड़कर कैद में रखो और सख्त पहरा लगवा दो।”

“जी।” कहकर वह आगे बढ़ा और खड़े होते महाजन को बांह से पकड़ लिया।

छोड़।” महाजन ने क्रोध से बांह छुड़वानी चाही।

परंतु उसने बांह नहीं छोड़ी और किसी को ऊंची आवाज में पुकारा।

फौरन ही दो आदमी वहां पहुंचे। वो तीनों महाजन को थामें वहां से ले गए।

“कैसे फड़फड़ा रहा है।” मखानी बोल पड़ा।

लक्ष्मण और सपन कौन हैं?”

मोमो जिन्न ने, अपना काम निकालने के लिए उन पर अधिकार कर रखा है।”

समझी।”

मखानी प्यार से कमला रानी को देखने लगा।

ऐसे मत देख।” कमला रानी ने गहरी सांस ली–“दिल में कुछ होता तो तुझे पल मेरा भी ऐसा के

“मैं तो तुझे पाने के लिए मरा जा रहा हूं।” ।

“पूछ मत, हाल मेरा भी ऐसा ही है। लेकिन ये काम निबटाना है मुझे। भौरी कहती है कि काम के बाद वो मुझे और तेरे को पूर्वजन्म की दुनिया में ले जाएगी। शौहरी से उसने बात कर ली है। वहां हम सप्ताह में एक बार मिला करेंगे।”

“सप्ताह में एक बार। कम नहीं लगता तेरे को?”

 
कम तो है। परंतु मैं भौरी को धीरे-धीरे तैयार कर लूंगी कि कम-से-कम सप्ताह में दो बार हमें मिलने दे। तू भी इस बारे में शौहरी को राजी करना। वो भी क्या दिन थे जब मैं बूढ़ी होती थी। लाठी टेककर चला करती थी और अपनी मौत का इंतजार कर रही थी ।”

“मैं भी तो बुड्ढा था। लेकिन शौहरी ने मुझे जवानी दी। तेरे से मिलवाया। कितना अच्छा हो गया है अब सब कुछ। कालचक्र कितना अच्छा है कि हमें हर तरफ से मौज करा रहा हैं, बदले में उसके थोड़े से काम ही तो करने पड़ते हैं।”

“बातों में मैं वक्त खराब कर रही हूं। वो सब लोग जल्दी ही यहां आ जाएंगे। उनके लिए तैयारी भी करनी है। तू भीतर आराम कर। मेरे हिस्से के काम अभी बाकी हैं। जाने दे मुझे।” कहकर कमला रानी आगे बढ़ने को हुई कि मखानी ने उसका हाथ थाम लिया।

“छोड़। तू जल्दी गर्म हो जाता है और...।”

“एक चुम्मी दे दे–मैं तो...।”

तभी मखानी के कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी। “तू मानेगा नहीं मखानी।”

एक चुम्मी ही तो ले रहा...।”

कमला रानी का हाथ छोड़ दे। उसे जाने दे। उसे बहुत काम करने हैं।” शौहरी की फुसफुसाहट उसके कानों में पड़ रही थी।

ले, छोड़ दिया।” मखानी ने नाराजगी भरे स्वर में कहा और कमला रानी का हाथ छोड़ दिया।

कमला रानी हंसी। बोली।

लगता है शौहरी से डांट पड़ी है। इसके साथ ही वो चली गई।

मखानी नाराजगी से वहीं बैठ गया।

मखानी।” शौहरी की फुसफुसाहट पुनः कानों में पड़ी।

तूने मेरे को एक चुम्मी भी नहीं लेने दी।” मखानी उखड़े स्वर में कह उठा।

ये चौंचले छोड़, मेरी बात सुन । गम्भीर बात है।”

“क्या?” मखानी अभी भी उखड़ा पड़ा था।

“आज की रात फैसले की रात है।”

वो कैसे?”

“जथूरा के पास ज्यादा वक्त नहीं है कि इन कामों में वो वक्त बर्बाद कर सके। ये टापू समुद्र के बीचोबीच है और कालचक्र का ही हिस्सा है। ये। आज की रात बीतेगी तो ये टापू वापस समुद्र में चला जाएगा।”

“ऐसा क्या?”

हां। आज की रात तूने और कमला रानी ने सफल हो के ही रहना है।”

सफल?”

देवा और मिन्नो में से एक ही बचे। दोनों मर जाएं तो बहुत अच्छा, नहीं एक को मरना ही चाहिए।”

“समझ गया। परंतु हम कालचक्र का हिस्सा हैं। सीधे-सीधे उन्हें नहीं मार सकते।”

तभी तो, कमला रानी कुछ योजना के साथ चल रही है।”

कैसी योजना?”

कमला रानी बताएगी तेरे को। उसने देवा और मिन्नो में झगड़ा कराने का इंतजाम तय कर रखा है। जथूरा के पास ज्यादा वक्त नहीं है। फैसला आज की रात ही होगा।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी।

“न हुआ तो?”

“तू ये क्यों सोचता है कि फैसला न हुआ।”

देवा और मिन्नो ने आपस में झगड़ा न करने के बारे में तय कर रखा है।

ये बात छोड़ो। कमला रानी इस बात को संभाल लेगी।” मखानी चुप रहा।

फिर भी तेरे को बता देता हूं कि अगर आज रात फैसला न हुआ तो क्या होगा।”

“क्या होगा?”

जथूरा सबके लिए पूर्वजन्म में आने का रास्ता खोल देगा।”

“ये क्या बात हुई?” मखानी के होंठों से निकला–“जथूरा तो उन्हें पूर्वजन्म में आने से रोक रहा है।”

 
हां, परंतु वो फैसला कर चुका है कि आज रात काम नहीं हुआ तो जथूरा उन्हें पूर्वजन्म के रास्ते की तरफ धकेल देगा। जथूरा यहां पर इनमें से किसी पर भी वार नहीं कर पा रहा, जबकि पूर्वजन्म से उसकी ताकत से लोग कांपते हैं। वहां पर इसका एक वार ही इन सबको खत्म करने के लिए बहुत होगा।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी। ।

“जथूरा पहले तो इन सबके पूर्वजन्म में प्रवेश करने पर परहेज कर रहा था। तूने ही मेरे को बताया था।”

“अवश्य उसे इन सबके पूर्वजन्म में आने पर परहेज था। अब भी है। देवा और मिन्नो एक साथ पूर्वजन्म में पहुंचेंगे तो दोनों के ग्रह मिलकर जथूरा का नुकसान करेंगे। लेकिन अब जथूरा का विचार बदल गया लगता है, शायद उसकी शक्तियों ने उसे संकेत दिया है कि वो देवा और मिन्नो को मात दे सकता है। या ऐसा ही कुछ है। असल बात तो जथूरा जानता होगा। परंतु तुम लोगों ने भरपूर चेष्टा करनी है कि आज रात ही देवा और मिन्नों में से एक खत्म हो जाए।”

मैं और कमला रानी इस बात की पूरी चेष्टा करेंगे।”

“अगर तुम लोग सफल रहे तो हो सकता है जथूरा खुश होकर तुम दोनों को ईनाम दे दे।”

* “कैसा ईनाम?” ।

“तेरे को और कमला रानी को हमेशा के लिए एक साथ रहने का मौका दे दे वो।”

फिर तो मैं बोर हो जाऊंगा।”

कमला रानी के साथ रहकर?

हां। हर वक्त वो मेरे पास रहेगी तो मैं बोर नहीं होऊंगा उसे देखकर। कहीं और मुंह मारने का मौका ही नहीं मिलेगा ।”

शौहरी के हंसने की आवाज मखानी के कानों में पड़ी। हंसता क्यों है?" ।

तू तो बहुत चालाक है मखानी। घर का माल भी खाना चाहता है और बाहर का भी।”

स्वाद बदलने में बुराई तो नहीं है।”

इसका जवाब तो तेरे को कमला रानी ही देगी।”

“उसे मत बताना ये बात। वरना वो नाराज हो जाएगी।”

चिंता मत कर मखानी। कमला रानी भी तेरे से कम नहीं है।”

“कम नहीं है, क्या मतलब?”

“मतलब छोड़। काम की तरफ ध्यान दे। तुम दोनों के पास काम के लिए आज की रात बची है।”

देवराज चौहान, नगीना, बांके, रुस्तम चट्टानी इलाके से पेड़ों वाले इलाके में प्रवेश कर चुके थे। परंतु अभी तक उन्हें कोई नजर नहीं आया था।

छोरें।”

बोल बाप।”

“यो टापू कां पे स्थित हौवे?”

“आपुन को क्या मालूम बाप।”

म्हारे को पतो हौवे कि तेरे को नेई मालूम।”

बांकेलाल राठौर ने सिर हिलाया।

वे सब मध्यम गति से आगे बढ़ते जा रहे थे।

तो क्यों पूछेला बाप ।”

बात करने को मन करो हो।”

*आपुन को तो हर तरफ समुद्र ही लगेला बाप। ये टापू खास होईला ।”

“एक बात तुम लोगों ने महसूस की।” नगीना बोली-“कोई पक्षी या जानवर भी नजर नहीं आ रहा है। जबकि इस हरी-भरी जगह पर दोनों की मौजूदगी होनी चाहिए।”

लफड़े वाली जगह लगेला है बाप ।”

 
देवराज चौहान की निगाह हर तरफ दौड़ रही थी। उसके चेहरे पर कठोरता थी।

आप क्या सोच रहे हैं?” नगीना ने पूछा।

मेरे खयाल में कालचक्र ने हमें मुसीबत वाली जगह पर ला फेंका है। इस टापू पर जरूर कुछ खास है।”

ये आप कैसे कह सकते हैं।”

“जथूरा का फेंका कालचक्र यूं ही हमें यहां पर नहीं लाने वाला।”

*आपका मतलब कि यहां खतरा आएगा।”

जरूर। परंतु हम समझ नहीं पा रहे कि खतरा कैसा होगा।” देवराज चौहान ने भिंचे स्वर में कहा।

“अंम खतरों को ‘वड' दयो देवराज चौहानो।” बांकेलाल राठौर कह उठा।

“ये जथूरा के कालचक्र का खतरा होगा बांके। जिसका मुकाबला करना हमारे बस से बाहर की बात है। उसने हमें खिलौना बनाकर रखा हुआ है अभी तक। हमने उसे देखा नहीं। परंतु वो हमें देख रहा होगा। हम...।” ।

“यो जथूरो पूर्वजन्मो में हौवे?”

हो ।” *अंम पूर्वजन्मो में पौंचकर जथूरा को ‘वड' दयो ।” बांकेलाल राठौर गुर्राया।

मुझे ये आसान नहीं लगता।”

“क्यों?”

“पूर्वजन्म के बाहर की इस दुनिया में वो हमें खत्म नहीं कर सकता। उसकी ताकत हम पर काम नहीं कर रहीं। परंतु पूर्वजन्म में उसकी ताकत पूरा काम करेगी हम पर। वो कितना शक्तिशाली है, इसका आभास तो हमें हो ही चुका है। पूर्वजन्म में पहुंच गए तो वो हमें पलों में खत्म कर देगा।” देवराज चौहान ने सोच-भरे स्वर में कहा।

“ऐसा होता तो वो तुम सबको पूर्वजन्म में आने से रोकता नहीं।” नगीना कह उठी।

दीदी परफैक्ट कहेला है।” रुस्तम राव ने कहा।

“अम पूर्वजन्मो में जा के जथूरा को ‘वड' दयो।”

बाप, पूर्वजन्म में जाने का रास्ता किधर होईला?”

*अंम ढूढ़ो रास्तो को–अंम...।” ।

तभी देवा के कानों में फुसफुसाहट पड़ी।

देवा।” देवराज चौहान बुरी तरह चौंका।।

पोतेबाबा?” उसके होंठों से निकला।

हां, मैं ही हूं।” पोतेबाबा की फुसफुसाहट पुनः कानों में पड़ी।

पोतेबाबो, फिर आ गयो हो।” बांकेलाल राठौर तीखे स्वर में कह उठा।

“मुझे सुन रहे हो देवा?”

“हां। तुम तो जगमोहन के पास ही आते थे।”

 
वो हालात दूसरे थे, अब हालात बदल गए हैं।” पोतेबाबा की फुसफसाहट कानों में पड़ी।

“अब हालातों को क्या हुआ है?” देवराज चौहान बोला।

“जग्गू वो नहीं है, जो तू समझ रहा है।”

क्या मतलब?” ।

जो तेरे पास था, वो जग्गू का बहरूप था। कालचक्र का हिस्सा था। असली जग्गू तो वो था, जो सोहनलाल को लेने उसके फ्लैट पर गया था परंतु उसके बाद ये तेरे पास लौटा, जो जग्गू का बहरूप, कालचक्र का हिस्सा था।

देवराज चौहान से कुछ कहते न बना, सच्चाई सुनकर।

देवा...।” ।

तो तो जो मेरे साथ जगमोहन था, वो नकली था?” देवराज चौहान के होंठों से निकला।

“हां। वो कालचक्र का पैदा किया जग्गू यानी कि मखानी था।”

“और नगीना?” देवराज चौहान की निगाह नगीना की तरफ गई।

“वेला इस वक्त असली है तेरे पास । परंतु वो नकली थी, जो बंगले पर आई थी, वो कमला रानी थी।”

देवराज चौहान के कदम ठिठक गए। बाकी सब भी रुके।

“मैं तेरी बात का विश्वास क्यों करूं पोतेबाबा?” देवराज चौहान ने कहा।

मैं कभी भी कोई बात गलत नहीं कहता।” ।

तूने ही कहा था कि तू जथुरा का सबसे खास सेवक है।”

“ये बात तो मैं अब भी कहता हूं।”

तो तू ये सब बातें मुझे क्यों बता रहा है, अगर सच कह रहा है तो?”

“मैं जानकारी दे रहा हूं तो तू ले। तुझे क्यों एतराज होता है।” पोतेबाबा की आवाज कानों में पड़ी।

। “सबसे बड़ी बात तो ये है कि जथूरा का सबसे खास सेवक, मेरे से सच बात क्यों बोलेगा?”

“तेरी बात गलत भी नहीं है।”

मुझे तेरी बात का जरा भी भरोसा नहीं है।” देवराज चौहान ने कहा।

मैंने पहले ही कहा है कि मैं झूठ नहीं बोलता।”

मैं इतना जानता हूं कि तू जथूरा का सेवक है। सबसे ख़ास सेवक। फिर तू हमारे हक में बात क्यों करेगा?”

क्योंकि इसकी भी कोई वजह पैदा हो गई है कि मैं तुम्हारे काम आऊँ।”

“कैसी वजह?”

“वो वजह कम-से-कम अभी तो नहीं बता सकता।”

क्यों?”

मेरी अपनी मजबूरी है। लेकिन सही वक्त आया तो जरूर बताऊंगा।”

क्या तू जथूरा के साथ नहीं है?"

जथूरा के साथ हूं।” ।

वो हमारा दुश्मन है।”

हो ।”

तो तू हमारा दोस्त नहीं हो सकता।”

तुम्हारा शुभचिंतक तो बन सकता हूं।”

तू हमारी चिंता क्यों करेगा पोतेबाबा?”

क्योंकि तेरे एक एहसान का उधार है मुझ पर। पूर्वजन्म का एहसान। उसी एहसान को बराबर कर रहा हूं।”

“बेकार की बातों में वक्त बर्बाद मत कर देवा। मैं बहुत खतरे उठाकर तेरे तक, इस कालचक्र के हिस्से में प्रवेश कर सका हूं। मेरा फायदा उठा सकता है तो उठा। जबकि मैं चाहता हूं कि तू मेरा फायदा उठा ले ।”

कैसा फायदा?”

मेरी बातें सुनने में ही तुम्हारा फायदा है।”

सुना।” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े हुए थे।

यो थारे को फंसावो हो। इसो की बतियों में मत फंसनो देवराज चौहान।” बांकेलाल राठौर गुस्से से बोला।

“ये भरोसे के काबिल नेई होईला बाप ।” रुस्तम राव की आंखें सिकुड़ चुकी थीं।

नगीना असमंजस में खड़ी थी।

 
“मेरी बातें सुनने में तो कोई एतराज नहीं। मानो या न मानो, ये तुम लोगों पर है।” इस बार पोतेबाबा की आवाज सबने स्पष्ट सुनी–“मैं अपना फर्ज पूरा करना चाहता हूं।”

कैसा फर्ज?”

“देवा के काम आना चाहता हूं।”

यो तो अजीबो बातो हौवे । जथूरा का सेवक उसके दुश्मन के काम आयो हो।”

“मैं अपनी समझ के हिसाब से, जो कर रहा हूं, वो ठीक है।” पोतेबाबा की आवाज में गम्भीरता आ गई।

पैले इसकी बात सुनेला बाप ।”

तभी देवराज चौहान बोला।

तुम कहते हो कि मेरे साथ यहां पर जगमोहन नहीं, उसका बहुरूप था।”

“हाँ।” पोतेबाबा की आवाज सबने सुनी।

तो जगमोहन कहां है?” गुलचंद को भूल रहे हो तुम।”

“हां, वो भी, दोनों कहां हैं?”

कमला रानी ने उन्हें कालचक्र के भीतर की परतों में फंसा दिया है। इस वक्त वो दोनों कालचक्र में फंसे पड़े हैं।” ।

कहां?”

क्या करोगे जानकर, क्योंकि तुम अभी कालचक्र को जानते ही कहाँ हो। कालचक्र को तो ठीक से जथूरा भी नहीं जानता क्योंकि इसका निर्माता उसका भाई सोबरा है। सोबरा ने जथूरा को हानि पहुंचाने के लिए कालचक्र जथूरा पर फेंका था परंतु वक्त रहते जथूरा को सोबरा की हरकत का आभास हो गया और जथूरा ने बड़ी ताकत का इस्तेमाल करके, कालचक्र को बंदी बना लिया और उसके कंट्रोल करने वाली स्थिति पर काबू पाकर, कालचक्र का मालिक बन बैठा। कालचक्र के भीतर क्या है, कौन-सी चीज कैसे काम करती है, इस बात को तो जथूरा भी नहीं समझ पाया ठीक से ।”

| देवराज चौहान सोंचों में डूबा खामोश रहा।

पोतेबाबा की आवाज फिर आई।

लेकिन इतना बता देता हूं कि जग्गू और गुलचंद बिल्कुल ठीक हैं अभी तक तो।” ।

तंम तो म्हारे वास्ते वो हड्डी हो कि ना तो खाई जावे न उगली जावे।” ।

मुझ पर भरोसा रखो।” पोतेबाबा का स्वर गम्भीर था।

“तुम कहो, क्या कहना चाहते हो?” देवराज चौहान ने कहा।

मैं तुम्हें आने वाले खतरे से सतर्क करने आया हूं, जिसमें तुम लोग अब फंसते जा रहे हो।”

खतरे के बारे में बताओ।”

जथूरा ने इस बात का फैसला ले लिया है कि तुम लोग बेशक पूर्वजन्म में आ सकते हो।”

पहले तो वो हमें पूर्वजन्म में आने से रोक रहा था।”

हां। क्योंकि तुम लोगों का पूर्वजन्म की यात्रा पर जाना, उसके लिए नुकसानदेह था।”

“तो अब उसे नुकसान नहीं रहा?”

मेरे ख्याल में उसने कोई इंतजाम कर लिया है इस बारे में।”

कैसा इंतजाम?”

“उस बारे में मुझे खबर नहीं ।” पोतेबाबा की धीमी आवाज सब सुन रहे थे—“परंतु उसका निश्चिंत हो जाना, इसी तरफ संकेत करता है कि उसे भरोसा है कि तुम लोग उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकोगे।”

फिर?”

इस पर भी आज की रात उसने कालचक्र को छूट दे रखी है। कि वो चाहे तो देवा और मिन्नों में झगड़ा कराकर किसी एक या दोनों को खत्म करा सकता है और कालचक्र ऐसा करने की भरपूर चेष्टा करेगा।” ।

“आज रात ।”

हो। कुछ ही देर में अंधेरा होने वाला है।”

तुम हमारे लिए क्या कर सकते हो?”

मैं सिर्फ तुम्हें सूचना दे सकता हूं। वो ही दे रहा हूं।” पोतेबाबा की आवाज सुनाई दी।

“मैं मोना चौधरी से झगड़ा नहीं करूंगा।” देवराज चौहान ने कहा।

कमला रानी ऐसे हालात पैदा कर देगी कि तुम झगड़ा करो।”

कमला रानी यहां है?”

“इस टापू पर कालचक्र का पूरा घेरा है। बहुत बड़ी बस्ती है। जंगली जैसे लोगों की। कमला रानी उनके सरदार के रूप में यहां मौजूद है। जग्गू यानी कि मखानी उसके पास पहुंच चुका है। कमला रानी अपनी तैयारियों में लग चुकी है। नील सिंह को कैद कर लिया गया है और बाकी सब लोगों को पकड़ने के लिए आदमी भेजे जा चुके हैं।”

तुम्हारा मतलब कि हमें आदमी पकड़ ले जाएंगे।”

हां, एक टोली इसी तरफ आ रही है।”

हम उनका मुकाबला करेंगे और ...।”

कोई फायदा नहीं होगा। तुम लोग उनसे मुकाबला नहीं कर सकते।”

तो हम क्या करें?”

वो तुम्हें—सबको कैद कर लेंगे।”

तुमने कहा कि कालचक्र के पास आज की रात है।” एकाएक देवराज चौहान बोला।

“आज रात के बाद क्या होगा?”

कालचक्र यूं तो तुम लोगों को खत्म कर देगा आज रात। या नहीं भी कर सका तो सुबह तक कालचक्र सिमट जाएगा। कालचक्र की सब चीजें अपने में सिमटती चली जाएंगी। सुबह तुम लोग खुद को गहरे समुद्र के बीचोबीच पाओगे, जहां से किनारा सैकड़ों मीलों दूर होगा।” पोतेबाबा की आवाज में गम्भीरता थी।

देवराज चौहान के होंठ सिकुड़ गए।

फिर हमारा क्या होगा?”

 
मैं नहीं जानता, परंतु ये मुझे पता है कि उस स्थिति में तुम्हारे पूर्वजन्म में प्रवेश करने के दरवाजे खुल जाएंगे। तुम लोग पूर्वजन्म के उस हिस्से में पहुंचोगे, जहां जथूरा का साम्राज्य है।”

“अगर हम जिंदा रहे तो।”

“हां। अगर ये रात तुम सबने सुरक्षित निकाल ली तो।”

रात ठीक से बीत जाए। इसके लिए हमारे हक में कोई बेहतर बात बताओ।”

मैं कुछ नहीं कर सकता। परंतु मोमो जिन्न शायद कुछ करे।”

मोमो जिन्न। वो तो जथूरा के लिए काम करता...।”

हां। परंतु मैंने उसके भीतर इंसानी इच्छाएं जगा दी हैं। अब उसके भीतर ममता के भाव आ गए हैं। वो किसी का बुरा नहीं कर सकता। अच्छा ही करेगा। क्योंकि इंसानी इच्छाएं उसे चैन से नहीं बैठने देतीं ।”

वो अब कहां है?”

टापू पर ही है। लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा के पास ही कहीं होगा। उसकी ड्यूटी उन दोनों से काम लेने की है।”

देवराज चौहान के चेहरे पर सोचें दौड़ रही थीं।

“तुम जथूरा के बारे में बताओ कुछ।” ।

वों माना हुआ वैज्ञानिक है और तपस्या करके उसने शक्तियां भी हासिल कर रखी हैं। ये सच है कि उसका मुकाबला कर पाना आसान नहीं है। वो करामातीं इंसान है। हर कोई उसे इज्जत देता है। सच कहूं तो वो शानदार है।”

और तुम उससे गद्दारी कर रहे हो।”

जाहिर है कि गद्दारी की भी कोई वजह होगी ।”

“वो वजह हमें नहीं बता रहे तुम?”

जब वक्त आएगा, जरूर बताऊंगा।” पोतेबाबा ने कहा-“इस वक्त तुम्हें अपने बारे में सोचना चाहिए।”

“तुमने कहा कि आज रात कालचक्र सिमट जाएगा।”

हां।” ।

“तो कालचक्र के उस हिस्से का क्या होगा, जहां जगमोहन और सोहनलाल हैं।”

वो हिस्सा वैसे का वैसा ही रहेगा, जब तक जग्गू और सोहनलाल का जथूरा कोई फैसला नहीं लेता।”

“कैसा फैसला?”

चंद पलों की खामोशी के बाद पोतेबाबा की आवाज सुनाई दी।

। “सब कुछ तुम पर और मिन्नों पर निर्भर है। आज रात फैसला हो जाएगा कि कालचक्र तुम दोनों में से एक को खत्म करा पाने में सफल होता है या नहीं। अगर कालचक्र सफल हो गया तो जथूरा की सारी परेशानी खत्म हो जाएगी। क्योंकि देवा और मिन्नो की जोड़ी टूट चुकी होगी। जो बचेगा, उसके ग्रह जथूरा का मुकाबला करने के काबिल नहीं रहेंगे। ऐसी स्थिति में जथूरा किसी की भी परवाह नहीं करेगा। परंतु तुम्हारे और मिन्नो के बच जाने की स्थिति में जथूरा चाहेगा कि तुम सब पूर्वजन्म में प्रवेश कर जाओ, ताकि जो उसने सोच रखा है, वैसा सलूक वो तुम लोगों के साथ करा सके। अब वो यूं ही नहीं तुम सबको पूर्वजन्म में आने देगा। उसके पास यकीनन तगड़ा इंतजाम होगा।”

तुम उस इंतजाम के बारे में नहीं जानते?” ।

“नहीं जानता। क्योंकि मैं अभी वापस पूर्वजन्म में लौटा नहीं। जथूरा से बात की नहीं।”

तो तुम्हें कैसे पता चला कि जथूरा क्या प्रोग्राम बना रहा है।”

“सेवकों से बात करके।”

“सेवक तुम्हें कहां मिल गए?”

मेरी तारें पूर्वजन्म की दुनिया से जुड़ी हुई हैं। वो वहां हैं, मैं यहां हूं, परंतु हमारे पास एक दूसरे से बात करने का साधन है। मैं उन सेवक से बात करके ताजा हाल जान सकता हूं।”

वो तुम्हें सुन सकते हैं?” देवराज चौहान ने पूछा।

“अवश्य सुन सकते हैं।”

इस वक्त तुम हमसे, जथूरा से गद्दारी से भरी बातें कर रहे हो, इन्हें भी तो वों सुन...” ।

इस वक्त हमारी बातों को वो नहीं सुन सकेंगे।”

क्यों?”

मैंने कुछ देर के लिए वो चीज अपने से अलग कर दी है, जिसकी वजह से वो बातें सुनते थे।”

ओह।”

“आज की रात तुम लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण है। मैं चाहता हूं कि तुम लोग पूर्वजन्म में प्रवेश कर जाओ। परंतु ये तभी हो सकता है, जबकि तुम और मिन्नो ये रात ठीक से बिता लो।”

। “थारी बातों ने तो म्हारे को और परेशान कर दयो हो।” बांकेलाल

राठौर बोला।

“आने वाले वक्त की थोड़ी-सी तस्वीर मैंने पहले दिखा दी है। हालातों से मुकाबले के लिए खुद को तैयार कर लो।”

म्हारे को हथियार दयो ना और बोल्लो हो मुकाबलो के लिये तैयार हो जावो ।”

“मैं अब जाऊँगा।” पोतेबाबा की आवाज आई–“वो लोग करीब आते जा रहे हैं।”

म्हारे का फंसा के, खुदो भागो हो।”

उसके बाद पोतेबाबा की आवाज नहीं आई। चारों एक-दूसरे को देखने लगे। नगीना कह उठी।

सबसे बड़ा सवाल है कि हम पोतेबाबा की बात का विश्वास करे या न करें?

“आपुन को तो पोतेबाबा फ्राड दिखेला। तुम क्या कहेला

बाप?”

“म्हारा तो दिमागों ही ठप हो गयी हो।”

“मुझे पोतेबाबा की बात का भरोसा नहीं।” नगीना ने कहा।

हो तो म्हारे को भी नहीं। पर दिल कहो हो कि पोतेबाबा की बात, इस बारो मानो ही लो।”

“जो भी पोतेबाबा ने कहा है वो सच-झूठ के रूप में जल्दी ही हमारे सामने आ जाएगा।” देवराज चौहान ने सोच-भरे स्वर में कहा“वो कहता है कि आज की रात फैसले की है और रात आने में ज्यादा वक्त नहीं ।”

“अब क्या करें?” ।

यहां रुके रहने से कोई फायदा नहीं। किस दिशा में जाना है, ये भी पता नहीं। मेरे खयाल में इसी तरह आगे चलते हैं।”

“चल्लो।”

वो सब पुनः पहले की तरह आगे बढ़ने लगे। पेड़ घने थे। दिन का प्रकाश कम हो रहा था। कहीं-कहीं तो जमीन अंधेरे में डूबी दिखने लगती।

“पोतेबाबा की बातों ने म्हारी तो खोपड़ी हिल्ला दयो।” बांकेलाल राठौर जैसे अपने से कह उठा–“आयो, म्हारे पैरों में बम फोड़ो और चल दयो। छोरे ।”

“बाप ।” ।

पोतेबाबा बोल्लो हो कि अंम रात को बचो गयो तो कल को पूर्वजन्म में प्रवेश करो हो।”

हां बाप। खतरे वाला मामला बनेला ।”

पूर्वजन्मो में खतरों बोत बड़ो-बड़ों हौवो।”

तुम तो हर खतरे को ‘वडेला बाप ।”

मजाको नेई छोरे । पूर्वोजन्मो में जानो के सोच के, म्हारा दिल बजो हो।”

रुस्तम राव ने नगीना को देखकर कहा।

दीदी, पूर्वजन्म में जाने का सोचकर तुम्हें कैसा लगईला?”

अभी रात बीच में बाकी है रुस्तम्।”

क्या मतलब?”

पोतेबाबा की बात सच मानें तो ये रात हम पर भारी पड़ सकती है।” नगीना ने गम्भीर स्वर में कहा।

कैसे दीदी?”

कालचक्र कोई मामूली चीज नहीं है। इसका एहसास हमें हो चुका है। वो ही कालचक्र हम सबको घेरने वाला है कि रात के अंधेरे मैं देवराज चौहान और मोना चौधरी का झगड़ा करवा सके। ख़ासतौर से कालचक्र की ये कोशिश होगी तो खुद ही सोचो कि वो कितनी खतरनाक कोशिश होगी।”

परफैक्ट बोलेला दीदी ।”

जैसे भी हो, हमें ये रात आराम से गुजारनी होगी, बिना झगड़े के। जो कि मुझे सम्भव नहीं लगता।” ।

म्हारी तो खोपड़ी हिल गयो। बहूना की बातों में दमो हौवे ।

 
” नगीना ने खामोशी से चल रहे देवराज चौहान को देखा। “आप भी तो कुछ कहिए।” नगीना ने कहा।

मेरे पास कहने को कुछ नहीं है।” देवराज चौहान बोला।

अगर पोतेबाबा ने सच कहा है तो रात को बहुत कुछ हो सकता है।”

जब तक हालात मेरे सामने न हों, मैं कुछ नहीं कह सकता।” देवराज चौहान का स्वर कठोर था।

“हालात तो रात को ही हमारे सामने आएंगे।” नगीना बोली।

रुस्तम राव कुछ कहने लगा कि शब्द उसके होंठों में ही रह गए।

‘खटका’ हुआ था।

स्पष्ट आवाज उभरी थी। जैसे किसी के पांव के नीचे सुखी टहनियां आ गई हैं।

वे चारों ठिठके। नजरें हर तरफ घूम ।।

तभी एक आदमी दिखा। जिसके हाथ में कुल्हाड़ी जैसा हथियार था। वो सूखी लकड़ियों पर खड़ा था। उन लकड़ियों पर या तो उसने पैर जान-बूझकर रखा था या अनजाने में आ गया था।

उसे देखते ही देवराज चौहान के चेहरे पर छाई कठोरता में बढ़ोत्तरी हो गई।

पोतेबाबा की पहली बात तो सच होईला बाप ।”

यो त कल्ला ही दिखो हो। साथ में कोई न होवे। अंम इसो को ‘वड' दयो।”

तभी देवराज चौहान बिजली की सी तेजी से पलटा उसके कानों ने सरसराहट सुनी थी। दूसरी तरफ उसने दो व्यक्ति देखे।

फिर उनके गिर्द फैले आदमियों के दिखने में बढ़ोत्तरी होने लगी। पूरा घेरा था जो उन पर पड़ चुका था।

" “हम घिर चुके हैं।” देवराज चौहान ने कठोर स्वर में कहा—“ये संख्या में बहुत ज्यादा है। इनका मुकाबला करना बेवकूफी होगी ।”

“यों तो म्हारे को कुत्तों की तरहो खींचो के ले जायो ।”

घेरा तंग होने लगा। बचने को कोई रास्ता नहीं था।

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मोना चौधरी और पारसनाथ तेजी से आगे बढ़े जा रहे थे। वो जिस तरफ चल पड़े थे वो चट्टानों से भरा खुला इलाका था। सूर्य पश्चिम की तरफ चलता रहा था। समुद्र से लहरें टकराकर उनकी आंखें चौंधिया रही थीं। ठंडी हवा उन्हें राहत पहुंचा रही थी। वे दोनों समुद्र के किनारे-किनारे आगे बढ़ते रहे थे। ।

“अगर यहां कोई रहता है तो समुद्र के किनारे अवश्य कोई इंसान दिखेगा।” मोना चौधरी बोली।

हता तो जरूर होगा मोना चौधरी ।” पारसनाथ ने कहा। ये तुम कैसे कह सकते हो?”

वीरान जगह पर हमें ला फेंकने से जथूरा का कोई मतलब हल नहीं होने वाला।”

“क्या पता वो चाहता हो कि हम यहां पर भूख-प्यास से तड़पकर मर जाएं।”

ये सम्भव नहीं।”

क्यों?" ।

जगमोहन ने मुझे अपनी और पोतेबाबा की बातचीत के बारे में बताया था, पतेबाबा ने कहा था कि जथूरा हम सब लोंगों पर सीधे-सीधे कोई वार नहीं कर सकता कि जिससे हमारी मौत हो सके। जथूरा का ऐसा वार तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक हम इस पूर्वजन्म में प्रवेश न कर जाएं ।”

पारसनाथ बोला–“वो हममें झगड़ा करवाकर ही हमें मौत दे सकता है और इसी कारण उसने हम सबको एक जगह इकट्ठा किया है।”

“हम झगड़ा नहीं करेंगे।” ।

मेरे खयाल में जथूरा की निगाहों में सबसे कमजोर कड़ी तुम हो।

” मैं—वो कैसे?”

क्योंकि तुम्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है।”

एक बार तो मुझसे गलती हो गई पारसनाथ जो मैं सपन चड्ढा की बातों में आ गई। परंतु अब ऐसा नहीं होगा। सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास पर जथूरा के गुलाम मोमो जिन्न ने काबू पाया हुआ है। दोनों उसके कहने पर चलने को मजबूर थे।” (ये सब विस्तार से जानने के लिए पढ़े राजा पॉकेट बुक्स से अनिल मोहन का पूर्व प्रकाशित उपन्यास 'जथूरा' ।)

मोमो जिन्न इस वक्त टापू पर ही मौजूद है।”

क्योंकि लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा भी यहां हैं।” मोना चौधरी की निगाह आगे बढ़ते हुए बातें करते हुए हर तरफ घूम रही थी। रास्ते में आने वाले छोटे-बड़े पहाड़ी पत्थरों को वो पार करते जा रहे थे। ।

“हां। उन दोनों की हरकतों से हमें सतर्क रहना होगा। वो मोमो जिन्न के हाथों फंसे, फिर कोई गड़बड़ कर सकते हैं।”

दोनों के बीच कुछ चुप्पी आ ठहरी।

उनके शरीर पर पड़ने वाली सीधी धूप कभी-कभी शरीर में चुभन् पैदा कर देती थी।

कुछ देर बाद ये चट्टानी इलाका खत्म होता दिखा। दूर, सामने घने पेड़ों का जंगल नजर आ रहा था।

“अभी तक कोई नजर नहीं आया।” पारसनाथ ने कहा।

हो सकता है उन पेड़ों की तरफ कोई आबादी हो।” मोना चौधरी बोली।।

हमें वापस भी जाना है।”

काम अधूरा छोड़कर वापस जाने का कोई फायदा नहीं। हम आगे जाएंगे। टापू का पूरा चक्कर लगाकर लौटेंगे।”

क्या पता टापू कितना बड़ा है।” पारसनाथ ने गम्भीर स्वर में कहा।।

देखते हैं।” मोना चौधरी ने पारसनाथ को देखा_“शायद आगे हमें जगमोहन-महाजन मिल जाएं।”

पारसनाथ ने सहमति से सिर हिला दिया। दोनों आगे बढ़ते रहे।

“सोहनलाल का हम सबके बीच न होना अजीब बात है।” पारसनाथ बोला—“सिर्फ बो ही नहीं है यहां ।”

इसकी अवश्य ही कोई वजह होगीं ।”

क्या तुम्हें जथूरा की कुछ याद है?”

“नहीं।” मोना चौधरी ने कहा—“अभी तक तो ये नाम मुझे सुना हुआ नहीं लगता।”

तभी एक पत्थर उनके आगे आकर गिरा। दोनों चौंके। उसी पल फुर्ती से पलटे। फिर दोनों के चेहरों पर ही आश्चर्य नाच उठा।

 
पीछे, कुछ कदमों के फासले पर मुस्कराता हुआ पेशीराम (फकीरबाबा) खड़ा था। शरीर पर सफेद धोती। माथे पर चंदन का तिलक। चांदी जैसे बाल पीछे को जाते हुए। गले में मालाएं पड़ी थीं। चेहरे पर ऐसा तेज था कि देखते ही बनता था। अब उसके चेहरे की झुर्रियों में कुछ बढ़ोत्तरी हो गई थी पहले के मुकाबले ।” । |

मोना चौधरी और पारसनाथ ने कम-से-कम इस वक्त तो पेशीराम को देखने की कल्पना नहीं की थी।

दोनों ने अपने चेहरे पर छाए हैरानी के भावों को संभाला।

पेशीराम तुम?” मोना चौधरी के होंठों से निकला।

“कैसी हो मिन्नों?”

“ठीक हूं...।”

*और तुम परसू मजे में हो?” पेशीराम ने पारसनाथ से पूछा। पारसनाथ ने उसे देखते हुए सहमति में सिर हिला दिया।

पेशीराम दो कदम आगे आया और ठिठक गया। सामने ही दूर तक जाता कभी न ख़त्म होने वाला समुद्र था।

मैंने सोचा था कि इस बार तुममें से किसी से नहीं मिलूंगा। हालातों का मुकाबला तुम लोगों को स्वयं ही करने दूंगा।”

तों अब क्यों आए पेशीराम?” मोना चौधरी ने पूछा।

हालात बिगड़ चुके हैं।”

“ये तुम्हें अब पता चला?”

मैं सब हालातों पर नजर रखे हुए था। परंतु अब मुझे सामने आना ही पड़ा। तुम लोग कालचक्र में फंसे हुए हो।”

मालूम है पेशीराम ” । बात सिर्फ इतनी ही होती तो मैं सामने न आता।”

तो?" ।

“तुम लोगों का मुकाबला जथूरा से है। वो शैतान है या यूं कह लो कि बड़ा विद्वान है।”

मोना चौधरी और पारसनाथ की नजरें पेशीराम पर रहीं।

जथूरा के मौत के खेल के सामने तुम लोग कमजोर हो। वो तुम सबको हरा देगा।”

यही कहने आए हो।” पेशीराम गम्भीर नजर आने लगा।

मैं चाहता हूं कि तुम सब वापस पलट जाओ। जथूरा के रास्ते से हट जाओ।”

मोना चौधरी के होंठ सिकुड़े। चेहरे पर कड़वे भाव आ ठहरे।

सुना मोना चौधरी ।” पारसनाथ ने कठोर स्वर में कहा।

“अच्छी तरह से सुना।”

“तुम जानती हो मिन्नो कि मैं तुम्हें कभी भी गलत राय नहीं दूंगा।” पेशीराम बोला।

“लेकिन अब तू बूढ़ा हो गया है पेशीराम।” मोना चौधरी ने व्यंग से कहा।

“बेशक मैं बूढ़ा हो गया हूं।” पेशीराम ने गम्भीर स्वर में कहा-“मैं तो कब से इस शरीर को त्यागने की इच्छा रखता हूं। परंतु श्राप में फंसा पड़ा हूं। जब तक तेरे और देवा में दोस्ती न करा दें, तब तक मुझे श्राप से मुक्ति नहीं मिलेगी। मैं अपने इस शरीर को त्याग नहीं सकता। बूढ़े पर बूढ़ा होता जाऊंगा। तीन जन्मों से मैं इस शरीर के साथ जी रहा हूं। अगर तुम्हारे इस जन्म में भी मैं अपनी कोशिश में सफल न हुआ तो मुझे तुम लोगों के चौथे जन्म का इंतजार करना होगा। फिर वहां कोशिश...।”

“ये बातें पुरानी हो चुकी हैं।”

मेरे लिए तो नई हैं। मेरा तो वो ही जन्म चला आ रहा है।”

“पहले जन्म में सब तेरी ही गलतियां थीं। तूने ही मुझे देवा के खिलाफ भड़काया था।”

उसी का फल तो मैं अभी तक भुगत रहा हूं।”

पेशीराम ।” पारसनाथ कह उठा–“बात अब की, इन हालातों की करो तो बेहतर होगा। हमारे पास वक्त कम है। अंधेरा होने वाला है।”

पेशीराम ने अपने बूढ़े चेहरे पर हाथ फेरा।। कुछ पलों तक वहां खामोशी रहीं, फिर पेशीराम कह उठा।।

“तुम लोग शायद जथूरा का मुकाबला न कर सको। वो तुम पर भारी पड़ेगा।”

तुम क्यों चिंता करते हो।” मोना चौधरी ने कहा।

“मुझे ही तो चिंता करनी है। अगर तेरे को या देवा को कुछ हो गया तो मुझे तुम दोनों के अगले जन्म का इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम लोग जथूरा के रास्ते से हट जाओ।”

“हममें से कोई भी जथूरा के रास्ते में नहीं आया। जथूरा ही हमारे रास्ते में आया था पेशीराम ।” ।

“हां उसकी शक्तियां उसे संकेत दे रही थीं कि देवा और मिन्नो का पूर्वजन्म के उस हिस्से में प्रवेश हो सकता है, जहां उसका साम्राज्य फैला हुआ है। ऐसा होना जथूरा के लिए नुकसानदेह होगा यही वजह रही कि आशंका में भरा जथूरा पहले से ही ऐसे इंतजाम में लग गया कि, तुम लोग पूर्वजन्म में प्रवेश न कर सको। परंतु उल्टा होता रहा। जथूरा की चेष्टाएं तुम लोगों के इरादों को मजबूत करती चली गईं, पूर्व जन्म में प्रवेश करने को। बेशक ये जथूरा की गलती थी, तुम लोगों को रोकने की चेष्टा करना। परंतु ये सच है कि वो तुम सब से ताकतवर है। उसका कुछ बिगाड़ पाना आसान नहीं

तुम हमें पीछे हटने को कह रहे हो?”

पीछे कैसे हटेंगे। हम तो जथूरा के फेंके कालचक्र में फंसे पड़े हैं।” मोना चौधरी बोली।

“मैं तुम सबको कालचक्र से बाहर ले जाऊंगा। तुम लोगों की सामान्य दुनिया में पहुंचा दूंगा।”

“फिर क्या होगा?”

“फिर तुम लोगों का सामना जथूरा से नहीं होगा। सब कुछ पहले की तरह हो जाएगा।”

“तुम हमें कालचक्र से बाहर निकालने को क्यों उतावले हो रहे हो?

“क्योंकि जथूरा भी ऐसा ही चाहता है।”

जथूरा से मिले हो तुम?" ।

“नहीं। परंतु मैंने अपनी शक्तियों से जथूरा के विचारों को महसूस किया है।”

जथूरा ऐसा चाहता है तो वो हमें इस कालचक्र से स्वयं ही निकाल सकता है।”

 
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