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हंसराज वापस कमला रानी और मखानी के पास आ पहुंचा। दोनों कड़ाहे से चंद कदमों के फासले पर आ ठहरे थे।
रस्से से बंधी, कड़ाहे के ऊपर लटकती मोना चौधरी ने कमला रानी और मखानी को देखा। कड़ाहे के उबलते तेल की गर्मी से मोना चौधरी का चेहरा पसीने से भरा लाल हो रहा था। उसके चेहरे से टपकती पसीने की बूंदें कड़ाहे में टपक रही थीं। सेक की वजह से उसका बुरा हाल हो रहा था।
कैसा लग रहा है मिन्नों ।” कमला रानी खिलखिलाकर हंसी ।
मोना चौधरी ने होंठ भींच लिए। मशालों के प्रकाश में वहां का जर्रा-जर्रा स्पष्ट नजर आ रहा था।
तेरी मौत आ ही गई।” कमला रानी ने कहा-“मौत देखकर कैसा लग रहा है।”
मैं ऐसे हाल में हूं कि तेरी बात का जवाब दे ही नहीं सकती।” मोना चौधरी गुस्से में गुर्रा उठी।।
“रस्सा ढीला करो।” मखानी ऊंचे स्वर में बोला। |
मोना चौधरी से बंधा रस्सा, मोटी डाल से होकर, दो आदमियों ने थाम रखा था। उन्होंने रस्सा थोड़ा सा ढीला किया तो मोना चौधरी एक हाथ भर नीचे, कड़ाहे की तरफ आ गई।
मात्र पांच फुट दूर था कड़ाहा।। खौलते तेल की गर्मी से मोना चौधरी का बुरा हाल था।
ये फैसले की रात है मिन्नों। फैसला तो हो के ही रहेगा।” कमला रानी ने कहा-“वरना तू रात भर इसी हाल में रहेगी और सुबह होने से पहले तेरे को कड़ाहे में फेंक दिया जाएगा।” ।
“तू कुतिया है।” मोना चौधरी चीखी।
“तेरी जगह मैं होती तो मैं भी तेरे को कुतिया कहती।” कमला रानी हंस पड़ी—“लेकिन मैं यहां तेरी बातों का बुरा मानने नहीं आई। अपना काम करने आई हूं, जथूरा महान है, उसकी महानता से ऊंचा दूसरा कोई नहीं है।”
वो डरपोक है।”
नहीं, वो बहादुर है।”
बहादुर होता तो खुद सामने आता।” मोना चौधरी चीखी—“परंतु वो तो डरकर छिपा पड़ा है।”
सेवकों के होते हुए उसे सामने आने की क्या जरूरत है।” मखानी ने कहा-“सेवक इसी काम के लिए होते हैं।”
तभी कमला रानी के कान में भौरी की फुसफुसाहट पड़ी। “काम की बात कर कमला रानी ।”
बोल मिन्नो।” कमला रानी ऊंचे स्वर में बोली-“अब तेरे साथ क्या सलूक करूं। अपनी जान बचाना चाहती है तो तेरे को देवा का मुकाबला करना होगा। उसे मौत देनी होगी। नहीं तो तेरी मौत पक्की
“देवराज चौहान से मेरा कोई झगड़ा नहीं है।”
“मानती हूं कि देवा से तेरा झगड़ा नहीं है। तेरा झगड़ा तेरी अपनी जिंदगी और मौत से है। अपनी जिदंगी बचानी है तो उसके लिए तेरे को देवा को खत्म करना होगा।”
“ये कभी नहीं होगा।”
तो तूने मरने का फैसला कर लिया?” कमला रानी क्रोध से कह उठी।।
मोना चौधरी खामोश रही। होंठ भींच लिए।
जवाब दे। अगर तेरा पक्का इंकार है तो तुझे अभी कड़ाहे में फेंक दूती हूं।”
“फेंक इसे।” मखानी कह उठा।
जवाब तो सुन लेने दे मखानी। तब मैं...।”
फेंक दो इसे कड़ाहे में ।” मखानी चीखा।
ठहरो।” कमला रानी और जोरों से बोली-“पहले जवाब सुनने दो।
बोल मिन्नो, पक्का इंकार है तो अभी फेंकें कड़ाहे में?”
मोना चौधरी के होंठ भिंच गए।
चुप रहने से काम नहीं चलेगा।” ।
“मुझे सोचने दे।”
“ठीक है, सोच ले, तेरे को कुछ देर का वक्त देती हूं।” कहकर कमला रानी ने मखानी को देखा।
बहुत हिम्मत वाली है मिन्नो।” मखानी धीमे स्वर में बोला।
उसकी हिम्मत तोड़ने के लिए ही तो, घंटों लगाकर कड़ाहे का तेल खौलाया गया है मख़ानी।” आवाज धीमी थी।
जानता हूं।”
रस्से से बंधी, कड़ाहे के ऊपर लटकती मोना चौधरी ने कमला रानी और मखानी को देखा। कड़ाहे के उबलते तेल की गर्मी से मोना चौधरी का चेहरा पसीने से भरा लाल हो रहा था। उसके चेहरे से टपकती पसीने की बूंदें कड़ाहे में टपक रही थीं। सेक की वजह से उसका बुरा हाल हो रहा था।
कैसा लग रहा है मिन्नों ।” कमला रानी खिलखिलाकर हंसी ।
मोना चौधरी ने होंठ भींच लिए। मशालों के प्रकाश में वहां का जर्रा-जर्रा स्पष्ट नजर आ रहा था।
तेरी मौत आ ही गई।” कमला रानी ने कहा-“मौत देखकर कैसा लग रहा है।”
मैं ऐसे हाल में हूं कि तेरी बात का जवाब दे ही नहीं सकती।” मोना चौधरी गुस्से में गुर्रा उठी।।
“रस्सा ढीला करो।” मखानी ऊंचे स्वर में बोला। |
मोना चौधरी से बंधा रस्सा, मोटी डाल से होकर, दो आदमियों ने थाम रखा था। उन्होंने रस्सा थोड़ा सा ढीला किया तो मोना चौधरी एक हाथ भर नीचे, कड़ाहे की तरफ आ गई।
मात्र पांच फुट दूर था कड़ाहा।। खौलते तेल की गर्मी से मोना चौधरी का बुरा हाल था।
ये फैसले की रात है मिन्नों। फैसला तो हो के ही रहेगा।” कमला रानी ने कहा-“वरना तू रात भर इसी हाल में रहेगी और सुबह होने से पहले तेरे को कड़ाहे में फेंक दिया जाएगा।” ।
“तू कुतिया है।” मोना चौधरी चीखी।
“तेरी जगह मैं होती तो मैं भी तेरे को कुतिया कहती।” कमला रानी हंस पड़ी—“लेकिन मैं यहां तेरी बातों का बुरा मानने नहीं आई। अपना काम करने आई हूं, जथूरा महान है, उसकी महानता से ऊंचा दूसरा कोई नहीं है।”
वो डरपोक है।”
नहीं, वो बहादुर है।”
बहादुर होता तो खुद सामने आता।” मोना चौधरी चीखी—“परंतु वो तो डरकर छिपा पड़ा है।”
सेवकों के होते हुए उसे सामने आने की क्या जरूरत है।” मखानी ने कहा-“सेवक इसी काम के लिए होते हैं।”
तभी कमला रानी के कान में भौरी की फुसफुसाहट पड़ी। “काम की बात कर कमला रानी ।”
बोल मिन्नो।” कमला रानी ऊंचे स्वर में बोली-“अब तेरे साथ क्या सलूक करूं। अपनी जान बचाना चाहती है तो तेरे को देवा का मुकाबला करना होगा। उसे मौत देनी होगी। नहीं तो तेरी मौत पक्की
“देवराज चौहान से मेरा कोई झगड़ा नहीं है।”
“मानती हूं कि देवा से तेरा झगड़ा नहीं है। तेरा झगड़ा तेरी अपनी जिंदगी और मौत से है। अपनी जिदंगी बचानी है तो उसके लिए तेरे को देवा को खत्म करना होगा।”
“ये कभी नहीं होगा।”
तो तूने मरने का फैसला कर लिया?” कमला रानी क्रोध से कह उठी।।
मोना चौधरी खामोश रही। होंठ भींच लिए।
जवाब दे। अगर तेरा पक्का इंकार है तो तुझे अभी कड़ाहे में फेंक दूती हूं।”
“फेंक इसे।” मखानी कह उठा।
जवाब तो सुन लेने दे मखानी। तब मैं...।”
फेंक दो इसे कड़ाहे में ।” मखानी चीखा।
ठहरो।” कमला रानी और जोरों से बोली-“पहले जवाब सुनने दो।
बोल मिन्नो, पक्का इंकार है तो अभी फेंकें कड़ाहे में?”
मोना चौधरी के होंठ भिंच गए।
चुप रहने से काम नहीं चलेगा।” ।
“मुझे सोचने दे।”
“ठीक है, सोच ले, तेरे को कुछ देर का वक्त देती हूं।” कहकर कमला रानी ने मखानी को देखा।
बहुत हिम्मत वाली है मिन्नो।” मखानी धीमे स्वर में बोला।
उसकी हिम्मत तोड़ने के लिए ही तो, घंटों लगाकर कड़ाहे का तेल खौलाया गया है मख़ानी।” आवाज धीमी थी।
जानता हूं।”