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बोल बाप ।”
तंम म्हारी बांहों को थामो लो। म्हारे को डर लागे कि तुम कहीं लुढ़ककर समंदरो में ना जा गिरो।” ।
बाप समुद्र यहां से दूर होईला ।” ।
“सतर्क रईयो छोरे । वक्त का कोई भरोसा नहीं।” बांकेलाल राठौर ने कहा-“म्हारा प्लानो फेल हो गयो हो ।”
कैसा प्लान बाप?”
“अंम सोच के रखो कि बंधनो से आजादो होते ही, अंम कमला रानी और मखानी को ‘वड' दयो। पर वो पैले ही ‘वडे’ गयो हो।”
“तेरे को मेहनत नहीं करने पड़ेला बाप ।”
म्हारे को किसी को वडनो का मौको ना मिल्लो हो। अमं जथूरो को ‘वडो' हो।”
पता नहीं बाप, ईब क्या होने को लिखा है किस्मत में ।”
तभी टापू की जमीन जोरों से हिली।
छोरे। बोत मजो आयो हो। झूला मिल्लो हो म्हारे को। कम्भी इधरो, कम्भी उधरो।”
।
बाप झूले का रस्सा टूटेला तो सीधों समंदरों में गिरेला ।”
तम म्हारी बांह पकड़ो रयो ।”
“तेरे को डर लगेला...।”
म्हारे को थारी चिंतो हौवे कि तंम लुढ़क न जायो।”
तभी मोमो जिन्न् वहां आ पहुंचा। सबने पहली बार मोमों जिन्न को देखा था।
कौन हो तुम?” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े।
“मोमो जिन्न।” ।
ओह, तो तुमने हमें बचाया।” महाजन बोला।
ऐसा ही समझ लो ।”
तुम तो जथूरा के सेवक हो।” मोना चौधरी बोली “फिर हमें क्यों बचाया?”
इसका जवाब नहीं दे सकता।”
छोरे।” बांकेलाल राठौर मोमो जिन्न को देखता कह उठा–“यो मर्द जिन्न हौवे या महिला जिन्न हौवे?”
क्यों बाप?”
नाकों में नथ डाले हो ये। चूड़ियों तो म्हारे को नजर न आयो ।” ।
“ऊपर मर्द होईला, नीचे औरत होईला बाप।”
“यों तो बोत गम्भीरो बातो हौवे कि...।”
तभी मोमो जिन्न् ने बांकेलाल राठौर को गर्दन से पकड़ लिया।
तुम मेरा मजाक उड़ाते हो।”
*अंम थारा मजाक न उड़ावे, अंम तो आपस में बातो करें हो, क्यों छोरा।”
बातें तो तुम करेला आपुन के साथ।”
हां बोल छोरे।” छोरा चुप। मोमो जिन्न ने बांकेलाल राठौर की गर्दन छोड़ते हुए कहा।
अबकी बार सीधे रहना। मुझे पसंद नहीं कि कोई मेरे बारे में उल्टा-सीधा बोले ।”
समझ गयो अंम। तंम गम्भीरो जिन्न हौवे।” बांकेलाल राठौर सकपकाकर बोला।
तभी टापू की जमीन जोरों से कांपी और एक तरफ टेढ़ी हुई। सब लड़खड़ाकर रह गए। जमीन पुनः सीधी होने लगी।
तंम म्हारी बांहों को थामो लो। म्हारे को डर लागे कि तुम कहीं लुढ़ककर समंदरो में ना जा गिरो।” ।
बाप समुद्र यहां से दूर होईला ।” ।
“सतर्क रईयो छोरे । वक्त का कोई भरोसा नहीं।” बांकेलाल राठौर ने कहा-“म्हारा प्लानो फेल हो गयो हो ।”
कैसा प्लान बाप?”
“अंम सोच के रखो कि बंधनो से आजादो होते ही, अंम कमला रानी और मखानी को ‘वड' दयो। पर वो पैले ही ‘वडे’ गयो हो।”
“तेरे को मेहनत नहीं करने पड़ेला बाप ।”
म्हारे को किसी को वडनो का मौको ना मिल्लो हो। अमं जथूरो को ‘वडो' हो।”
पता नहीं बाप, ईब क्या होने को लिखा है किस्मत में ।”
तभी टापू की जमीन जोरों से हिली।
छोरे। बोत मजो आयो हो। झूला मिल्लो हो म्हारे को। कम्भी इधरो, कम्भी उधरो।”
।
बाप झूले का रस्सा टूटेला तो सीधों समंदरों में गिरेला ।”
तम म्हारी बांह पकड़ो रयो ।”
“तेरे को डर लगेला...।”
म्हारे को थारी चिंतो हौवे कि तंम लुढ़क न जायो।”
तभी मोमो जिन्न् वहां आ पहुंचा। सबने पहली बार मोमों जिन्न को देखा था।
कौन हो तुम?” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े।
“मोमो जिन्न।” ।
ओह, तो तुमने हमें बचाया।” महाजन बोला।
ऐसा ही समझ लो ।”
तुम तो जथूरा के सेवक हो।” मोना चौधरी बोली “फिर हमें क्यों बचाया?”
इसका जवाब नहीं दे सकता।”
छोरे।” बांकेलाल राठौर मोमो जिन्न को देखता कह उठा–“यो मर्द जिन्न हौवे या महिला जिन्न हौवे?”
क्यों बाप?”
नाकों में नथ डाले हो ये। चूड़ियों तो म्हारे को नजर न आयो ।” ।
“ऊपर मर्द होईला, नीचे औरत होईला बाप।”
“यों तो बोत गम्भीरो बातो हौवे कि...।”
तभी मोमो जिन्न् ने बांकेलाल राठौर को गर्दन से पकड़ लिया।
तुम मेरा मजाक उड़ाते हो।”
*अंम थारा मजाक न उड़ावे, अंम तो आपस में बातो करें हो, क्यों छोरा।”
बातें तो तुम करेला आपुन के साथ।”
हां बोल छोरे।” छोरा चुप। मोमो जिन्न ने बांकेलाल राठौर की गर्दन छोड़ते हुए कहा।
अबकी बार सीधे रहना। मुझे पसंद नहीं कि कोई मेरे बारे में उल्टा-सीधा बोले ।”
समझ गयो अंम। तंम गम्भीरो जिन्न हौवे।” बांकेलाल राठौर सकपकाकर बोला।
तभी टापू की जमीन जोरों से कांपी और एक तरफ टेढ़ी हुई। सब लड़खड़ाकर रह गए। जमीन पुनः सीधी होने लगी।