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क्या बकवास करता है।” मखानी मुंह बनाकर कह उठा।।
अंम झूठो बोल्लो का?” बांकेलाल राठौर ने उसकी गर्दन थाम ली।
ये क्या कर रहे हो।” कमला रानी कह उठीं।
थारी इज्जतो पर हाथ डालो यो ।”
मेरे से पूछ कर ही किया है।”
“थारी रजामंदी हौवे?”
“हां ।” ।
बांकेलाल राठौर ने मखानी की गर्दन छोड़ दी।
का जमाना आ गयो हो। औरत खुदो बोल्लो कि म्हारी इज्जतो लूटो।”
बाप, उनका टांका फिट होईला है।”
“ठीको, पर म्हारे सामणो तो यो सबो न करो हो। म्हारे को गुरदासपुरो वाली याद आ जायो हों। वो म्हारे से कितनो प्यार करो हो। लस्सी में मक्खनो का गोला डाल के दिया हो, परो।”
“पर क्या बाप?” ।
वो दूसरों से ब्याह कर लयो हो। म्हारे से शादी करने को, उसका बापो न मानो हो।”
कमला रानी और मखानी ने राहदारी से लगते एक दरवाजे के भीतर प्रवेश किया तो पीछे आते सब भीतर आ पहुंचे और ठिठक गए। ये बहुत बड़ा हॉल था। बैठने और आराम करने का पूरा इंतजाम था। लाइटें रोशन थीं। वहां की साज-सज्जा देखते ही बनती थी। फर्श पर कालीन, छत पर चार फानूस लटक रहे थे। दीवारों पर तरह-तरह की पेंटिंग्स थीं। हर चीज बहुत ही सोच-समझकर लगाई और रखी गई थी।
कमला रानी ऊंचे स्वर में कह उठी।
आप सब यहां आराम करो। उधर नहाने का तालाब है। उस रास्ते पर। जब तक आप लोग नहा-धोकर ताजे होंगे तब तक आपके खाने-पीने का सामान आ जाएगा।”
“मैं किसी से बात करना चाहता हूं।” देवराज चौहान बोला।
“खाने के बाद, बात भी हो जाएगी ।” ।
“मैं जथूरा से मिलना चाहती हूं।” मोना चौधरी ने कहा।
सब हो जाएगा। परंतु कुछ देर आपको इंतजार करना होगा।” कमला रानी बोली।
| फिर कोई आराम करने लगा तो कोई नहाने चल दिया।
परंतु हर कोई जैसे उतावला था, किसी से बात करने के लिए।
……………………………….
पोतेबाबा एक कमरे में टहल रहा था। चेहरे पर सोंच और गम्भीरता के भाव नजर आ रहे थे।
तभी कदमों की आहटें कानों में पड़ीं। पोतेबाबा ठिठककर दरवाजे की तरफ देखने लगा।
तवेरा ने भीतर प्रवेश किया। पोतेबाबा का सिर हिला उसे देखकर।
आपने बुलाया पोतेबाबा?” ।
“हां, मेरी बच्ची। बैठ जाओ।”
तवेरा आगे बढ़ी और कुर्सी पर जा बैठी। वो सफेद लिबास पहने थी, जिस पर सुनहरी रंग की किनारी लगी हुई थी। चुनरी भी ऐसी ही थी। इस लिबास में वो और भी खूबसूरत लग रही थी।
“मेरी बच्ची।” पोतेबाबा ने उसके करीब ही ठिठककर कह्म–“गरुड़ के बारे में मैं तुम्हें समझा चुका हूं कि वो यहाँ की बातें सोबरा को बताता है। उसके पास यंत्र है, जिससे वो सोबरा से बात करता है।”
“आप मुझे सारी बात बता चुके हैं।” तवेरा ने गम्भीर स्वर में कहा—“आपने मुझसे कहा कि गरुड़ को गलत बातें बताकर उसे भटकाना है। ताकि वो सोबरा को गलत ख़बरें दे सके।”
“ठीक समझीं तुम।” पोतेबाबा बोला—“गरुड़ तुमसे ब्याह करने के सपने देख रहा है। उसकी सोचों के पीछे सोबरा की चाल है। सोबरा गरुड़ के द्वारा जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाना चाहता है।”
गरुड़ कब से सोबरा के साथ हैं?”
इसका जवाब मेरे पास नहीं है।” पोतेबाबा ने कहा-“गरुड़ बहुत चालाक है, क्योंकि मुझे कभी भी उस पर जरा भी शक नहीं हुआ। परंतु उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकती थी। बात कभी तो खुलनी ही थी।”
तवेरा की निगाह पोतेबाबा पर रही। सोचों में डूबा पोतेबाबा कह रहा था।
गरुड़ तुम्हारे करीब आना चाहता है। तुम भी उसके पास आने का नाटक करो और उसे गलत खबर देकर सोबरा को भटका दों।”
तवेरा ने सहमति से सिर हिलाया। फिर बोली।
मैं ऐसा ही करूंगी। देवा-मिन्नो कब तक...।” ।
“वो महल में आ चुके हैं। कुछ ही देर में हम उनसे मिलने जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने तवेरा को देखा।
अंम झूठो बोल्लो का?” बांकेलाल राठौर ने उसकी गर्दन थाम ली।
ये क्या कर रहे हो।” कमला रानी कह उठीं।
थारी इज्जतो पर हाथ डालो यो ।”
मेरे से पूछ कर ही किया है।”
“थारी रजामंदी हौवे?”
“हां ।” ।
बांकेलाल राठौर ने मखानी की गर्दन छोड़ दी।
का जमाना आ गयो हो। औरत खुदो बोल्लो कि म्हारी इज्जतो लूटो।”
बाप, उनका टांका फिट होईला है।”
“ठीको, पर म्हारे सामणो तो यो सबो न करो हो। म्हारे को गुरदासपुरो वाली याद आ जायो हों। वो म्हारे से कितनो प्यार करो हो। लस्सी में मक्खनो का गोला डाल के दिया हो, परो।”
“पर क्या बाप?” ।
वो दूसरों से ब्याह कर लयो हो। म्हारे से शादी करने को, उसका बापो न मानो हो।”
कमला रानी और मखानी ने राहदारी से लगते एक दरवाजे के भीतर प्रवेश किया तो पीछे आते सब भीतर आ पहुंचे और ठिठक गए। ये बहुत बड़ा हॉल था। बैठने और आराम करने का पूरा इंतजाम था। लाइटें रोशन थीं। वहां की साज-सज्जा देखते ही बनती थी। फर्श पर कालीन, छत पर चार फानूस लटक रहे थे। दीवारों पर तरह-तरह की पेंटिंग्स थीं। हर चीज बहुत ही सोच-समझकर लगाई और रखी गई थी।
कमला रानी ऊंचे स्वर में कह उठी।
आप सब यहां आराम करो। उधर नहाने का तालाब है। उस रास्ते पर। जब तक आप लोग नहा-धोकर ताजे होंगे तब तक आपके खाने-पीने का सामान आ जाएगा।”
“मैं किसी से बात करना चाहता हूं।” देवराज चौहान बोला।
“खाने के बाद, बात भी हो जाएगी ।” ।
“मैं जथूरा से मिलना चाहती हूं।” मोना चौधरी ने कहा।
सब हो जाएगा। परंतु कुछ देर आपको इंतजार करना होगा।” कमला रानी बोली।
| फिर कोई आराम करने लगा तो कोई नहाने चल दिया।
परंतु हर कोई जैसे उतावला था, किसी से बात करने के लिए।
……………………………….
पोतेबाबा एक कमरे में टहल रहा था। चेहरे पर सोंच और गम्भीरता के भाव नजर आ रहे थे।
तभी कदमों की आहटें कानों में पड़ीं। पोतेबाबा ठिठककर दरवाजे की तरफ देखने लगा।
तवेरा ने भीतर प्रवेश किया। पोतेबाबा का सिर हिला उसे देखकर।
आपने बुलाया पोतेबाबा?” ।
“हां, मेरी बच्ची। बैठ जाओ।”
तवेरा आगे बढ़ी और कुर्सी पर जा बैठी। वो सफेद लिबास पहने थी, जिस पर सुनहरी रंग की किनारी लगी हुई थी। चुनरी भी ऐसी ही थी। इस लिबास में वो और भी खूबसूरत लग रही थी।
“मेरी बच्ची।” पोतेबाबा ने उसके करीब ही ठिठककर कह्म–“गरुड़ के बारे में मैं तुम्हें समझा चुका हूं कि वो यहाँ की बातें सोबरा को बताता है। उसके पास यंत्र है, जिससे वो सोबरा से बात करता है।”
“आप मुझे सारी बात बता चुके हैं।” तवेरा ने गम्भीर स्वर में कहा—“आपने मुझसे कहा कि गरुड़ को गलत बातें बताकर उसे भटकाना है। ताकि वो सोबरा को गलत ख़बरें दे सके।”
“ठीक समझीं तुम।” पोतेबाबा बोला—“गरुड़ तुमसे ब्याह करने के सपने देख रहा है। उसकी सोचों के पीछे सोबरा की चाल है। सोबरा गरुड़ के द्वारा जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाना चाहता है।”
गरुड़ कब से सोबरा के साथ हैं?”
इसका जवाब मेरे पास नहीं है।” पोतेबाबा ने कहा-“गरुड़ बहुत चालाक है, क्योंकि मुझे कभी भी उस पर जरा भी शक नहीं हुआ। परंतु उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकती थी। बात कभी तो खुलनी ही थी।”
तवेरा की निगाह पोतेबाबा पर रही। सोचों में डूबा पोतेबाबा कह रहा था।
गरुड़ तुम्हारे करीब आना चाहता है। तुम भी उसके पास आने का नाटक करो और उसे गलत खबर देकर सोबरा को भटका दों।”
तवेरा ने सहमति से सिर हिलाया। फिर बोली।
मैं ऐसा ही करूंगी। देवा-मिन्नो कब तक...।” ।
“वो महल में आ चुके हैं। कुछ ही देर में हम उनसे मिलने जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने तवेरा को देखा।