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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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क्या बकवास करता है।” मखानी मुंह बनाकर कह उठा।।

अंम झूठो बोल्लो का?” बांकेलाल राठौर ने उसकी गर्दन थाम ली।

ये क्या कर रहे हो।” कमला रानी कह उठीं।

थारी इज्जतो पर हाथ डालो यो ।”

मेरे से पूछ कर ही किया है।”

“थारी रजामंदी हौवे?”

“हां ।” ।

बांकेलाल राठौर ने मखानी की गर्दन छोड़ दी।

का जमाना आ गयो हो। औरत खुदो बोल्लो कि म्हारी इज्जतो लूटो।”

बाप, उनका टांका फिट होईला है।”

“ठीको, पर म्हारे सामणो तो यो सबो न करो हो। म्हारे को गुरदासपुरो वाली याद आ जायो हों। वो म्हारे से कितनो प्यार करो हो। लस्सी में मक्खनो का गोला डाल के दिया हो, परो।”

“पर क्या बाप?” ।

वो दूसरों से ब्याह कर लयो हो। म्हारे से शादी करने को, उसका बापो न मानो हो।”

कमला रानी और मखानी ने राहदारी से लगते एक दरवाजे के भीतर प्रवेश किया तो पीछे आते सब भीतर आ पहुंचे और ठिठक गए। ये बहुत बड़ा हॉल था। बैठने और आराम करने का पूरा इंतजाम था। लाइटें रोशन थीं। वहां की साज-सज्जा देखते ही बनती थी। फर्श पर कालीन, छत पर चार फानूस लटक रहे थे। दीवारों पर तरह-तरह की पेंटिंग्स थीं। हर चीज बहुत ही सोच-समझकर लगाई और रखी गई थी।

कमला रानी ऊंचे स्वर में कह उठी।

आप सब यहां आराम करो। उधर नहाने का तालाब है। उस रास्ते पर। जब तक आप लोग नहा-धोकर ताजे होंगे तब तक आपके खाने-पीने का सामान आ जाएगा।”

“मैं किसी से बात करना चाहता हूं।” देवराज चौहान बोला।

“खाने के बाद, बात भी हो जाएगी ।” ।

“मैं जथूरा से मिलना चाहती हूं।” मोना चौधरी ने कहा।

सब हो जाएगा। परंतु कुछ देर आपको इंतजार करना होगा।” कमला रानी बोली।

| फिर कोई आराम करने लगा तो कोई नहाने चल दिया।

परंतु हर कोई जैसे उतावला था, किसी से बात करने के लिए।

……………………………….

पोतेबाबा एक कमरे में टहल रहा था। चेहरे पर सोंच और गम्भीरता के भाव नजर आ रहे थे।

तभी कदमों की आहटें कानों में पड़ीं। पोतेबाबा ठिठककर दरवाजे की तरफ देखने लगा।

तवेरा ने भीतर प्रवेश किया। पोतेबाबा का सिर हिला उसे देखकर।

आपने बुलाया पोतेबाबा?” ।

“हां, मेरी बच्ची। बैठ जाओ।”

तवेरा आगे बढ़ी और कुर्सी पर जा बैठी। वो सफेद लिबास पहने थी, जिस पर सुनहरी रंग की किनारी लगी हुई थी। चुनरी भी ऐसी ही थी। इस लिबास में वो और भी खूबसूरत लग रही थी।

“मेरी बच्ची।” पोतेबाबा ने उसके करीब ही ठिठककर कह्म–“गरुड़ के बारे में मैं तुम्हें समझा चुका हूं कि वो यहाँ की बातें सोबरा को बताता है। उसके पास यंत्र है, जिससे वो सोबरा से बात करता है।”

“आप मुझे सारी बात बता चुके हैं।” तवेरा ने गम्भीर स्वर में कहा—“आपने मुझसे कहा कि गरुड़ को गलत बातें बताकर उसे भटकाना है। ताकि वो सोबरा को गलत ख़बरें दे सके।”

“ठीक समझीं तुम।” पोतेबाबा बोला—“गरुड़ तुमसे ब्याह करने के सपने देख रहा है। उसकी सोचों के पीछे सोबरा की चाल है। सोबरा गरुड़ के द्वारा जथूरा की हर चीज का मालिक बन जाना चाहता है।”

गरुड़ कब से सोबरा के साथ हैं?”

इसका जवाब मेरे पास नहीं है।” पोतेबाबा ने कहा-“गरुड़ बहुत चालाक है, क्योंकि मुझे कभी भी उस पर जरा भी शक नहीं हुआ। परंतु उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकती थी। बात कभी तो खुलनी ही थी।”

तवेरा की निगाह पोतेबाबा पर रही। सोचों में डूबा पोतेबाबा कह रहा था।

गरुड़ तुम्हारे करीब आना चाहता है। तुम भी उसके पास आने का नाटक करो और उसे गलत खबर देकर सोबरा को भटका दों।”

तवेरा ने सहमति से सिर हिलाया। फिर बोली।

मैं ऐसा ही करूंगी। देवा-मिन्नो कब तक...।” ।

“वो महल में आ चुके हैं। कुछ ही देर में हम उनसे मिलने जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने तवेरा को देखा।
 
मैं उनके साथ जाऊंगी पोतेबाबा।”

“जैसा तुम्हारा मन चाहे मेरी बच्ची ।”

“मैं गरुड़ को भी अपने साथ ही ले जाऊंगी।” तवेरा ने कहा। पोतेबाबा ने तवेरा को देखा।

लेकिन ये जरूरी है कि गरुड़ को हर वक्त बहकाते रहना।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया-“वो साथ रहेगा, तो ताजा हालातों की जानकारी सोबरा को देता रहेगा। मेरे खयाल में उसे इस मौके से दूर रखना ही ठीक होगा।”

। तवेरा के चेहरे पर जहरीली मुस्कान नाच उठी।।

मुझ पर भरोसा रखें। मैं गरुड़ को संभाल लेंगी। परंतु मैं ये जानना चाहती हूं कि आप गरुड़ को कैद क्यों नहीं कर लेते।” ।

गरुड़ को कैद करने का मतलब है, सोबरा को सतर्क करना। जबकि इस वक्त जरूरी काम है, जथूरा को महाकाली की कैद से आजाद कराना। गरुड़ को तो हम कभी भी सजा दे सकते हैं। सोबरा को सब कुछ ठीक लगेगा तो वो लापरवाह रहेगा। जो कि हमारे लिए फायदे वाली बात होगी।”

“सोबरा सावधान हो चुका होगा। उसे खबर मिल चुकी होगी कि देवा-मिन्नो नगरी में पहुंच गए हैं। उसने महाकाली को और भी कस दिया होगा कि जथूरा पर सख्ती कर दे।”

पोतेबाबा कुछ कहने लगा कि तभी रातुला और गरुड़ दरवाजे पर आ पहुंचे।

पोतेबाबा और तवेरा ने उन्हें देखा। गरुड़ उसी पल कह उठा।

पता चला कि देवा और मिन्नों आ गए हैं?”

हां।” पोतेबाबा ने शांत स्वर में कहा“लेकिन तुम दोनों इकट्ठे कैसे आ गए?”

“पोतेबाबा।” रातुला मुस्कराकर बोला-“मैं इधर ही आ रहा था कि गरुड़ भी इधर आता मिल गया।”

“चलो।” पोतेबाबा बोला—“हम देवा और मिन्नों के पास जाने ही वाले थे।”

फिर चारों एक साथ राहदारी में आगे बढ़ गए।

चलते-चलते तवेरा दो कदम पीछे हो गई तो गरुड़ भी चाल धीमी करके, उसके साथ चलने लगा।

“मैं तुम्हारे पास दिन में आया था।” गरुड़ बेहद मीठे स्वर में बोला।

तवेरा मुस्कराई। उसे देखा, दुपट्टा ठीक किया।

मैं व्यस्त थी तब। कोई काम था?”

“सच बात तो ये है कि मैं सिर्फ तुम्हें देखने आया था।” गरुड़ बोला।

“मुझे देखने?” मुस्कराई तवेरा।।

हां” गरुड़ ने चलते-चलते गहरी सांस ली–“तुम्हें देखे देर हो जाए तो मन बेचैन हो उठता है।”

खूब ।” तवेरा होले से हंसी-“तुम मजाक भी करते हो।”

“ये मजाक नहीं, सच है तवेरा। तुम मुझे अच्छी लगती हो।” गरुड़ ने फौरन कहा।

तवेरा कुछ नहीं बोली। मुस्कराती रही । चलती रही।

मैं तुम्हारे पिता की तरफ से चिंतित हूं कि वो कैद में...।”

“मैं चिंतित नहीं हूं अपने पिता की कैद को लेकर ।” तवेरा ने लापरवाही से कहा।

“ये तुम क्या कह रही हो, सब ही चिंतित हैं जथूरा की कैद को लेकर। तुम भी तो...” ।

वो सब दिखावा है।”

“क्या मतलब?”

पिता की कैद के बाद मुझे आजादी मिल गई है।” तवेरा ने कहा-“अगर वो वापस आ गए तो मेरी आजादी छिन जाएगी।”

गरुड पल-भर के लिए हड़बड़ाया फिर् कह उठा।

“वो तुम्हारे पिता हैं तवेरा।”

*अवश्य हैं, लेकिन अब मैं पिता की सब नगरियों की मालकिन बन गई हूं। पिता के पास होते हुए ये सम्भव नहीं था।” तवेरा का स्वर धीमा और होंठों पर मुस्कान थी—“परंतु दूसरों को दिखाने के लिए चिंतित होना पड़ता है।” ।

“तुम्हारी बातों से तो मैं परेशान हो उठा हूं।”

“क्यों?”

कुछ कहते नहीं बन पा रहा। तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए तवेरा।” गरुड़ कुछ उलझन में था।

“अब मैं अपनी सोचों को हकीकत का जामा पहनाने के लिए स्वतंत्र हूं।” तवेरा ने गहरी सांस लेकर कहा-“अब मैं ब्याह करूंगी, शानदार जिंदगी बिताऊंगी और...।”

किससे ब्याह करोगी?”

“मिल जाएगा मेरा राजकुमार ।” तवेरा ने ठंडी आह भरी।

देवा-मिन्नो आ चुके हैं, वो...।”

वो महाकाली का मुकाबला नहीं कर सकते।” तवेरा बोली “वो साधारण इंसान हैं और महाकाली तंत्र-मंत्र की ज्ञाता। महाकाली के सामने देवा-मिन्नो की बिसात ही क्या।”
 
गरुड़ बहुत बातें करना चाहता था, परंतु तब तक उस हॉल में जा पहुंचे, जहां वे सब मौजूद थे।

पोतेबाबा ।” देवराज चौहान ने पोतेबाबा को भीतर प्रवेश करते देखा तो उसके होंठों से निकला।

पहचान लिया तुमने देवा।” पोतेबाबा मुस्कराया।

मन्ने भी थारे को पैचान लियो। तन्ने म्हारे को बोत जोरों से फेंको हो, बंगलो में।”

पोतेबाबा की मुस्कराती निगाह बारी-बारी सब पर गई।

“तुम लोगों को यहां देखकर मुझे सुख महसूस हुआ।” पोतेबाबा बोला।

तभी मखानी जल्दी-से आगे बढ़ा और पोतेबाबा से कह उठा।

तुमने मुझे पहचाना—मैं मखानी हूं।”

कालचक्र से आए हो तुम।” ।

नहीं, मुझे शौहरी लाया है यहां ।”

एक ही बात है।” पोतेबाबा बोला—“मुझसे क्या चाहते हो?”

एक कमरा।”

“कमरा?”

हां।” मखानी ने हाथ से इशारा किया तो कमला रानी पास आ पहुंची–“मुझे और कमला रानी को चाहिए।”

“क्यों?”

“प्यार करना है हमने। क्यों कमला रानी?” कमला रानी ने सहमति में सिर हिलाया।

तो ये बात है।” पोतेबाबा बोला—“काम खत्म हो गया तुम्हारा, जो फुर्सत की बात कर रहे हो।”

काम, बो तो खत्म हो गया। देवा-मिन्नो, सबको यहां ले आए।”

शौहरी से पूछा कि काम खत्म हो गया?”

“नहीं पूछा।” ।

उससे पूछो, फिर मुझसे बात करो।”

“शौहरी ।” उसी पल मखानी ने पुकारा।।

क्या है?” कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी।

“मेरा और कमला रानी का काम पूरा हो गया न?”

नहीं। अभी बहुत कुछ बाकी है। तुम पोतेबाबा से कमरे की मांग क्यों कर रहे हो?”

मुझे कमरा चाहिए।” मखानी ने पांव पटके–“कमला रानी से प्यार करना है मैंने ।”

अभी नहीं।”

“तो कब?” ।

काम के बाद ।”

मेरे से अब और नहीं सहा जाता है। मैं...।”

*अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्हें छोड़कर चला जाऊंगा।”

शौहरी की आवाज कानों में पड़ी—“तब तुम मर जाओगे।”

“ये ज्यादती है।”

अभी जो कहता हूं, वो ही करो। बाकी बातों का मौका भी मिलेगा।”

“कब मिलेगा। जब मैं मर जाऊंगा।”

“अब तुम मर नहीं सकते। क्योंकि कालचक्र ने तुम्हें स्वीकार कर लिया है।”

\

मखानी ने मुंह लटकाकर कमला रानी को देखा।

क्या हुआ मखानी?” कमला रानी ने प्यार से पूछा।

शौहरी इनकार करता है। कहता है अभी काम बाकी है।”

“दिल छोटा मत...।”

दिल? मेरा तो सब कुछ छोटा हो गया है। मैंने सोचा कि यहां हमें प्यार करने का मौका मिलेगा, परंतु...।”

तभी कमला रानी मखानी के कान के पास मुंह ले जाकर कुछ बोली। | उसी पल मखानी का लटका चेहरा खुशी से खिल उठा। वो बोला।

सच?” कसम से।” उसके बाद मखानी की नाराजगी जैसे हवा में धुल गई। पोतेबाबा ने मुस्कराती नजर वहां से हटाई और सबको देखा।

“तुम कह रहे थे कि हमें यहां देखकर तुम्हें सुख मिला।” देवराज चौहान बोला।

हां।” पोतेबाबा बराबर मुस्करा रहा था।

लेकिन तुम तो हमें यहां आने से रोकना चाहते थे।” देवराज चौहान ने कहा।

मेरा ऐसा इरादा कभी नहीं रहा।” पोतेबाबा मुस्कराता रहा। देवराज चौहान की आंखें सिकुड़ीं।।

यो झूटो बोल्ने हो। तंम ही म्हारे को रोको हो, पूर्वजन्म में आने के वास्तो।”

पोतेबाबा मुस्कराता रहा।

“ये सच कह रहे हैं?” मोना चौधरी कह उठी।

हाँ मिन्नो, ये ठीक कह रहे हैं कि मैंने इन्हें रोका, परंतु वो रोकना, झूठ था। सच तो ये था कि मैं तुम सबको यहां लाना चाहता था। परंतु मेरे कहने से तुम लोग पूर्वजन्म में आने को कभी भी तैयार नहीं होते या हो जाते?”

पोतेबाबा की प्रश्न-भरी निगाह सब पर जाने लगी। चंद पल शांति रही फिर महाजन बोला। “शायद हम तैयार नहीं होते। तुम ठीक कहते हो।”

मेरा भी यही खयाल था, तभी मैंने कुछ ऐसी चालें चलीं कि तुम सबको पूर्वजन्म में लाया जा सका। मुंह से मैं जग्गू को ये कहता रहा कि जथूरा तुम लोगों को पूर्वजन्म में प्रवेश नहीं करने देना चाहता, जबकि बिना कहे मेरे काम ऐसे रहे कि तुम लोग पूर्वजन्म में आ सको। जैसे कि जग्गू को जथूरा के तैयार किए हादसों का पूर्वाभास होने लगा। वो आभास कैसे हुआ, मैने ही तो कराया।”

“तुमने बाप?”

हां त्रिवेणीं। जग्गू को पूर्वाभास हो, वो शक्ति मैंने ही तो उसके भीतर डाली।”

तन्ने?”

“सब कुछ मैं ही तो कर रहा था। धीरे-धीरे तुम लोगों को पूर्वजन्म की तरफ धकेले जा रहा था। कुछ खास हादसों का पूर्वाभास होने पर ही, तुम लोग जथूरा की जमीन पर कदम रख सकते थे। वो खास हादसों का पूर्वाभास मैंने जग्गू को कराया। साथ ही मैं जानता था कि जब तुम लोग जानोगे कि जथूरा तुम लोगों को पूर्वजन्म में आने से रोकना चाहता है तो तुम लोगों के इरादे पक्के होंगे, उतना ही पूर्वजन्म में जाने के। मैंने तुम सबको उलझाए रखा कि कि ठीक से सोचकर किसी भी नतीजे पर न पहुंच सको। तुम लोगों की भी गलती नहीं थी, हालात ऐसे बने कि तुम लोग उलझते चले गए। बाकी जो कसर बची, वो मेरे भेजे, कालचक्र ने पूरी कर दी।” ।

“तुमने मेरे में और देवराज चौहान में झगड़ा कराने की चेष्टा की?” मोना चौधरी बोली।

हां ।”

तब हममें से कोई दूसरे को मार देता तो?”

ये सम्भव ही नहीं था ।”

क्यों?”

वक्त रहते मैंने जग्गू को इस बात का एहसास करा दिया था और वो वक्त पर पहुंच गया था।”

ऐसा किया ही क्यों तुमने?”

“तुम लोगों को करीब लाने के लिए। तुम एक हुए तो तभी बातचीत आगे बढ़ी। मैंने ठीक कहा न?”

सबकी निगाह पोतेबाबा पर थी। पोतेबाबा के चेहरे पर मुस्कान छाई थी।
 
हम समझ नहीं पाईला बाप कि तूने ये सब करके अच्छा किएला या बुरा किएला?”

मैंने कुछ भी बुरा नहीं किया।”

तन्ने म्हारे को धोखो दयो कहो कुछो, करो कुछो।”

“तुम सबकी पूर्वजन्म की धरती पर लाने के लिए ऐसा करना जरूरी था। वरना मैं मेहनत ही क्यों करता।”

जगमोहन कहाँ है?” नगीना बोली-“सोहन भैया कहां हैं?”

जग्गू और गुलचंद जथूरा की जमीन पर ही हैं। मैंने उन्हें कालचक्र के नर्म हिस्से में पहुंचाया, जहां उन्हें कोई तकलीफ नहीं होने दी। उस रास्ते से उनका पूर्वजन्म की जमीन पर प्रवेश करा दिया।”

छोरे ।” बांकेलाल राठौर, पोतेबाबा को देखता कह उठा।

बोल बाप।”

यो बूढ़ो तो म्हारे को घिसो हुओ लागे हो।”

बोत घिसेला बाप । इसने दाढ़ी यूं ही सफेद नेई किएला लगेला ।”

“म्हारे को चांस मिल्लो तो अंम ‘वड’ दयो इसो को। यो म्हारे को झूठो बोल के, पूर्वजन्म में खींच लायो हो।” कहने के साथ ही बांकेलाल राठौर का हाथ मूंछ पर पहुंच गया—“तंम म्हारे साथ हौवे ना?”

“यस बाप। आपुन तेरे साथ ही टिकेला।” । देवराज चौहान के होंठ सिकुड़ चुके थे। नजरें पोतेबाबा पर थीं। मोना चौधरी कह उठी। “तूने टापू पर भी मुझे और देवराज चौहान को लाने के लिए आमने-सामने किया।”

मत भूलो कि मेरे भेजे मोमो जिन्न ने ही, तब सब कुछ ठीक किया।” । । “उससे पहले ही हममें से कोई दूसरे पर घातक वार कर देता

तो?”

“ये सम्भव नहीं था। रखवाली के तौर पर मैं जो वहां मौजूद था। सब कुछ मैं ही तो करवा रहा था।” ।

“टापू पर ये सब कराना जरूरी था क्या?” मोना चौधरी तीखे स्वर में बोली।।

“जरूरी था, ताकि तुम लोगों को हर वक्त यही लगे कि सच में कुछ होने वाला है। तभी तो तुम लोग मोमो जिन्न की बात मानकर उसके पीछे-पीछे चले और वहां मौजूद पनडुब्बी में आ बैठे।”

“सच में तुमने खूबसूरत चाल चली।” पारसनाथ कह उठा।

“ये सब करना मेरे लिए मजबूरी थीं। मोमो जिन्न ने जो किया, मेरे कहने पर किया। इधर कालचक्र से भौरी और शौहरी ने अपना काम किया। मखानी और कमला रानी का सही इस्तेमाल किया।”

“तुमने हमें खूब बेवकूफ बनाया।” नगीना कह उठी।

ऐसा न कहो बेला ।” पोतेबाबा ने कहा-“मैंने किसी को मूर्ख नहीं बनाया। मैंने वो ही किया, जो करना जरूरी था मेरे लिए। देवा और मिन्नो को जथूरा की जमीन पर लाना था। इसलिए ये सब करना पड़ा। परंतु ये भी तय है कि देवा और मिन्नों पूर्वजन्म के किसी भी हिस्से में आएंगे तो बाकी जो भी पूर्वजन्म से वास्ता रखता है, उसे भी आना ही पड़ेगा।”

ये जरूरी है!” पारसनाथ ने कहा।

हां। जरूरी है ये। सिलसिला इसी तरह पूर्ण होता है।” पोतेबाबा बोला।

“बातें तुम खूब करते हो पोतेबाबा।” देवराज चौहान कह उठा।

मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा।” ।

चालाकियों से भरा दिमाग है तुम्हारा। वरना हमें पूर्वजन्म में लाने में सफल न हो पाते।”

इसको काबलियत कहते हैं।” पोतेबाबा मुस्कराया—“अब तुम लोगों को भी अपनी काबलियत दिखानी है।” ।

“क्या चाहते हो?” देवराज चौहान ने पूछा-“जाहिर है कोई खास ही वजह होगी, जो तुम हमें इतना जोड़-तोड़ के साथ यहां तक लेकर आए हो। वो वजह भी बता दो। क्या चाहते हो हमसे?” ।

“वो बात भी होगी। पहले हमारा आपस में परिचय हो जाना चाहिए। तुम सबके बारे में हम सब जानते हैं। अब तुम सब हमारे बारे में भी जान लो।” पोतेबाबा कह उठा–“ये तवेरा है जथूरा की बेटी ।” ।

जथूरो की बेटी।” बांकेलाल राठौर बोला—“वो शादी करो हो?”

बाप तेरी ही नहीं हुईला ।”

पोतेबाबा ने अपना कहना जारी रखा।

“ये गरुड़ है, जथूरा का सर्वश्रेष्ठ सेवक। और ये रातुला है जो कि सैनिकों का सरदार है।”

जगमोहन को यहां बुलाओ।” देवराज चौहान ने कहा। क्षणिक खामोशी के बाद पोतेबाबा ने कहा।
 
वो यहां नहीं आ सकता।”

“क्यों?” ।

“जग्गू–गुलचंद और नानिया, तीनों ही सोबरा की जमीन की तरफ जा रहे हैं।”

सोबरा–जथूरा का भाई?”

हो ।”

“नानिया कौन है?” नगीना ने पूछा।

कालचक्र की रानी साहिबा है। उसका असली नाम नानिया है। वो उन दोनों के साथ है।” पोतेबाबा ने कहा। । “वो सोबरा की तरफ क्यों जा रहे हैं, तुम उन्हें हमारे यहां होने की खबर दो। वो यहीं आ जाएंगे।”

“उन्हें पता था कि तुम लोग यहां आ रहे हो, फिर भी वो सोबरा की तरफ जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने कहा-“ऐसी हालत में उन्हें रोकना मुनासिब नहीं। उन्हें जाने देना चाहिए।” ।

हम जगमोहन को अपने पास देखना चाहते...।”

ये सम्भव नहीं।” तवेरा कह उठी–“परंतु वो लोग जल्दी ही तुम लोगों से मिलेंगे।”

ये तुम कैसे कह सकती हो?”

मैंने तंत्र-मंत्र ग्रहण कर रखा है। कई ताकतों से मेरी बात होती है। थोड़ा-बहुत मैं भविष्य में भी झांक लेती हूँ अपनी विद्या से। जग्गू से मिलना लिखा है मेरा। मैं पढ़ चुकी हूं।” ।

ये तो तुम्हारी बात हुई।” देवराज चौहान ने कहा “हम अपनी बात कर्...।”

“हम एक साथ ही कहीं जाने वाले हैं।” तवेरा ने कहा।

कहाँ?” ।

पोतेबाबा इस बारे में बात करेंगे।” तवेरा ने शांत स्वर में कहा।

सबकी निगाह पोतेबाबा की तरफ उठी तो वो बोला।

तुम लोगों को इस तरह पूर्वजन्म में क्यों बुलाया है। मैं सारी बात बताता हूं। आओ उधर कुर्सियों पर बैठें। बात लम्बी भी हो सकती है। सब कुछ बताना ही तो है तुम सबकी ।”

सब कुर्सियों पर जा बैठे। मख़ानी और कमला रानी की नजरें मिलीं।

मखानी ने आंख दबा दी। जवाब में कमला रानी ने भी आंख दबाई।।

‘क्या हरामी चीज मेरे पल्ले पड़ी है। मखानी बड़बड़ा उठा।

पोतेबाबा सब पर नजर मारता गम्भीर स्वर में कह उठा।

“जथूरा और सोबरा के पिता गिरधारी लाल ने बहुत ताकतें हासिल कर रखी थीं। वो अपनी नगरी के जाने-माने व्यक्ति थे। सोबरा और जथूरा बड़े हो चुके थे और जिदंगी के अपने-अपने कार्यों में व्यस्त होते चले गए। सोबरा ने अन्य गुरुकुल से शिक्षा हासिल की तो जथूरा ने अन्य गुरुकुल से। दोनों ही तेज दिमाग के थे और मुसीबतों को झेलते शिक्षा प्राप्त कर ली। दोनों के पास शुरुआती दौर की ताकतें आ चुकी थीं। परंतु जथूरा हमेशा ही सोबरा से ज्यादा तेज रहा। जथूरा ने ताकतें पाने की विद्या को ज्यादा समझा और वो ज्यादा ज्ञानी बन गया। जबकि सोबरा भी कम नहीं था, परंतु जथूरा के पास ज्ञानशक्ति ज्यादा आ गई थी। इस बीच सालों बाद जब उनके पिता गिरधारी का अंतिम वक्त आया तो उसने दोनों बेटों को बुलाया। परंतु सोबरा व्यस्त होने की वजह से समय पर नहीं पहुंच सका, जबकि जथूरा वक्त पर अपने पिता के पास पहुंचा। मते समय गिरधारी लाल ने अपनी ताकतें, जथूरा को दे दीं। बाद में जब बात सोबरा को पता चली तो उसने अपने हक के नाते जथूरा से पिता की दी आधी ताकतें मांगीं। परंतु जथूरा ने ये कहकर देने से इनकार कर दिया कि पिता ने ताकतें सिर्फ उसे सौंपी हैं। इसी बात को लेकर दोनों में मन-मुटाव बढ़ गया।”

ताकतें किस रूप में थीं?” देवराज चौहान ने पूछा।

ताकतों का रूप गुप्त श्लोकों में होता है।” पोतेबाबा ने कहा-“इंसान अपनी विद्या से जो ताकतें हासिल करता है, उसे उन्हीं ताकतों के दम पर अपनी सुविधानुसार छोटे श्लोकों में परिवर्तित कर लेता है। गिरधारी लाल ने अपनी जिंदगी भर की कमाई श्लोकों के रूप में जथूरा को दे दी थी। इस्तेमाल की विधि भी समझा दी थी।”

ये तो तुम कहते हो।” मोना चौधरी बोली। |

"क्या मतलब?”

ये तुम्हारा या जथूरा का कहना है कि गिरधारी लाल ने अपनी ताकतें जथूरा के हवाले कर दी थीं। हो सकता है कि तब गिरधारी लाल ने ये कहा हो कि दोनों भाई ताकतों को आधी-आधी बांट लेना।”

कुछ सोच के बाद पोतेबाबा ने अपना गम्भीर चेहरा हिलाया। ऐसा भी हो सकता है।” वो बोला। “क्या उस वक्त पास में कोई और था?”

कई लोग थे, परंतु इन बातों के दौरान, गिरधारी ने पहले ही उन्हें कमरे से बाहर जाने को कह दिया था।”

“इसका मतलब कोई गवाह नहीं जो ये बता सके कि गिरधारी लाल ने वो ताकतें जथूरा को दी थी।”

“जथूरा ये बात गलत क्यों कहेगा?”

“अपने लालच की खातिर ।”

जथूरा ऐसा नहीं है जो अपने लालच की खातिर भाई से झूठ बोले।”

मोना चौधरी मुस्करा पड़ी। । “अगर वो सच्चा इंसान होता तो अपने पिता द्वारा ताकतें दी जाने के बाद भी वो उन ताकतों को सोबरा के साथ अवश्य बांट लेता।”

पोतेबाबा ने मोना चौधरी को देखा।

तुम मेरे पिता पर बेईमानी की उंगली उठा रहे हो।” तवेरा कह उठी।

“सच बात तो ये है कि अभी तक तुम्हारे पिता ही मुझे बेईमान लगे हैं।”

तवेरा ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला तो उसी पर पोतेबाबा ने टोका।

“शांत हो जाओ मेरी बच्चीं। ये वक्त इस बात को परखने का नहीं है कि कौन सच्चा है या कौन झूठा।”

तवेरा खामोश हो गई। परंतु चेहरे पर नाराजगी रही। वहां गहरी खामोशी छाई हुई थी। पोतेबाबा ने फिर कहना शुरू किया।

“जथूरा ने अपनी ताकतों के साथ पिता से मिली ताकतों का इस्तेमाल किया और देखते ही देखते वो जाना-माना, ताकतों वाला व्यक्ति बन गया। अपने काम से बड़ी शक्तियों को प्रभावित किया और इस तरह जथूरा धीरे-धीरे तरक्की करता हादसों का देवता बन गया। हर तरफ जथूरा का नाम गूंजने लगा। अब जथूरा की दो नगरियों में सिर्फ हादसों को तैयार करने और उन्हें जांचने-परखने का ही काम चलता है। वहां पर हजारों आदमी दिन-रात काम पर लगे रहते हैं।”

“और वो हादसे तैयार करके तुम लोग हमारी दुनिया में भेजते हो।” नगीना बोली।

हां, जथूरा का ये ही काम है।”

परंतु ये गलत बात है।”

“इस पर मेरा कुछ भी कहना ठीक नहीं।” पोतेबाबा बोला–“हादसों का जन्मदाता जथूरा नहीं बनता तो कोई और बनता। जो भी बनता वो ये ही काम करता। ये जथूरा के कर्म हैं। जिन्हें करना उसके लिए आवश्यक है।”

“इन बातों के दौरान जथूरा को भी यहां होना चाहिए।” देवराज चौहान बोला।

“वो यहां क्यों नहीं है, मेरी आगे कही बात से पता चल जाएगा।” पोतेबाबा ने कहा-“उधर सोबरा अपनी विद्या के दम पर ताकतें हासिल करता रहा। सोबरा जथूरा से कम नहीं था, परंतु गिरधारी लाल से मिली ताकतों ने, जथूरा को बहुत आगे पहुंचा दिया था। सोबरा और जथूरा का मन-मुटाव बढ़ते वक्त के साथ दुश्मनी में बदल गया था।
 
आखिरकार सोबरा ने जथूरा को सबक सिखाने के लिए, अपनी सारी ताकतों का इस्तेमाल करके कालचक्र तैयार किया।”

कालचक्र क्या होईला बाप?”

कालचक्र गहरे रहस्यों में डूबा, षड्यंत्रों का हिस्सा होता है। कालचक्र के भीतर हर तरह का हिस्सा संजोया जाता है। जरूरत पड़ने पर, बटन दबाकर उसी हिस्से को सक्रिय कर दिया जाता है। कालचक्र को मशीनों द्वारा कंट्रोल किया जाता है। कालचक्र के बारे में सब कुछ बताना सम्भव तो नहीं, परंतु दुश्मन को हराने के लिए, इसमें हर बाण मौजूद होता है, प्यार का भी, जंग का भी। चालाकियों से भरा होता है कालचक्र। जो भी इसमें एक बार फंस जाता है, वो तभी बाहर निकल सकता है, जब कालचक्र का मालिक चाहें, नहीं तो वो कालचक्र में ही भटकता रहता है। कालचक्र में तुम लोग भी फंस चुके हो। कालचक्र को सही ढंग से तैयार करने में 40 से 50 बरस का वक्त लगता है।”

इतना वक्त?” महाजन कह उठा।।

हां। बढ़िया कालचक्र के लिए 40 से 50 साल का ही वक्त लगता है। छोटा या कम ताकतों वाला कालचक्र 5 बरस में भी तैयार किया जा सकता है। परंतु सोबरा ने 50 बरस लगाकर कालचक्र तैयार किया। सोबरा के आदमियों में जथूरा के लोग थे। जो कि जथूरा को सोबरा की हरकतों की खबर देते रहते थे। जथूरा सोबरा के कालचक्र के बारे में जान चुका था और ये भी जानता था कि सोबरा उस पर कालचक्र का इस्तेमाल करने वाला है। इसलिए जथूरा ने अपनी तैयारियां शुरू कर दीं ।

*कैसी तैयारियां?”

“सोबरा को मात देने की तैयारियां। जथूरा ने वक्त रहते इस बात की पूरी तैयारी कर ली कि सोबरा जब उस पर कालचक्र फेंके तो वो कालचक्र को बंदी बना ले। उसे जब्त कर ले।”

“कालचक्र को बंदी भी बनाया जा सकता है?” पारसनाथ ने पूछा।

“हां। जथूरा के पास बेहिसाब ताकतें थीं। वो हर काम को आसानी से करने का हौसला रखता था और उसने ये कर भी लिया। जथूरा को पहले ही खबर मिल गई सोबरा कब उस पर कालचक्र का दांव फेंकने जा रहा है। जथूरा ने अपनी ताकतों का कवच पहले ही आसमान में फैला दिया कि कालचक्र को खुलने से पहले ही वो कैद कर ले और कैद कर भी लिया जथूरा ने।” पोतेबाबा गम्भीर था।

फिरो?” बांकेलाल राठौर ने मूंछ पर हाथ फेरा।

“परंतु बाद में पता चला कि सोवरा तो और भी गहरा खेल खेल रहा था।”

वों कैसे?” देवराज चौहान के होंठों से निकला। “दरअसल सोबरा ने कालचक्र वाली चाल खेली थी। उसका असली मकसद था कि जथूरा कालचक्र को कैद करे खुद भी कैदी बन जाए।”

वो कैसो बूढ़ो?” बांकेलाल राठौर के होंठों से निकला। “सोबरा को मालूम था कि उसके पास मौजूद कौन-कौन-सा आदमी जथूरा को खबरें भेज रहा है। चालाकी से सोबरा उन्हें वो ही बातें बताता, जो वो चाहता था कि जथूरा तक पहुंचे।

” पोतेबाबा ने शांत स्वर में कहा–“वो चाहता था कि जथूरा कालचक्र को कैद कर ले। क्योंकि सोबरा ने कालचक्र के एक हिस्से में महाकाली की परछाईं को बैठा रखा था, कालचक्र की पहरेदारी के लिए कि कोई कालचक्र को पकड़े तो महाकाली उसे अपनी कैद में कर ले।”

“यो महाकाली कौनो हौवे?”

“जादू, तंत्र-मंत्र की मल्लिका है महाकाली। यूं तो इस तरह किसी को बंदी बनाकर रखने के काम नहीं करती, परंतु सोबरा का उस पर एहसान है इसलिए वो तैयार हो गई थी और ये बात सोबरा ने आम नहीं होने दी। जथूरा तक ये बात नहीं पहुंची कि जो भी कालचक्र को कैद करेगा, महाकाली अपनी ताकतों से उसे बंदी बना लेगी। सोबरा चाहता ही ये था कि जथूरा कालचक्र को अपने अधिकार में ले और महाकाली जथूरा को कैद में रख ले।”

“तुम्हारा मतलब कि जथूरा को इस वक्त महाकाली ने अपने पास बंदी बना रखा है।” मोना चौधरी बोली।

“हां।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“जथूरा इस वक्त हमारे बीच नहीं है।

छोरे।”

बोल बाप।”

महाकाली तो जथूरा की बापो हौवे ।”

बाप नहीं मां, बो औरत होईला ।”

म्हारा मतलबो तो थारी समझ में आ गयो कि नहीं ।”

समझेला बाप ।” रुस्तम राव गम्भीर था। पोतेबाबा पुनः कह उठा।

पचास साल से जथूरा, महाकाली का कैदी है।”

“तुमने चेष्टा तो की होगी जथूरा को आजाद कराने की ।” देवराज चौहान कह उठा।

कुछ खास नहीं ।”

“क्यों?”

“जथूरा को छुड़ा पाना हमारे लिए सम्भव नहीं है।”

*वजह।”

महाकाली ने उसे कैद करके, उस पर देवा और मिन्नो नाम का तिलिस्म बांध दिया है।”

“देवा-मिन्नो?” देवराज चौहान के होंठों से निकला–“तुम्हारा मतलब कि मेरे और मोना चौधरी के नाम का तिलिस्म?”

पोतेबाबा ने सहमति से सिर हिलाया। सबके चेहरे पर उलझन नजर आ रही थी।

“ऐसा क्यों, हमारे ही नाम का तिलिस्म क्यों?”

महाकाली जानती थी कि हम जथूरा को कैद से छुड़ाने का प्रयत्न करेंगे। ऐसे में उसे हर वक्त जथूरा की पहरेदारी पर रहना पड़ता। तो उसने जथूरा की कैद को देवा और मिन्नो नाम के तिलिस्म में बांध दिया कि देवा और मिन्नो के अलावा कोई और उस तक न पहुंच सके। उस वक्त से महाकाली को जथूरा की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती। हमारे सैनिकों ने जब-जब जथूरा को आजाद कराने की चेष्टा की, तिलिस्म में फंसकर वो जान गंवा बैठे।”

नगीना कह उठी।

महाकाली ने देवराज चौहान और मोना चौधरी के नाम का तिलिस्म ही क्यों बांधा?”

“महाकाली ने बहुत दूर की सोचकर ये सब किया।”

वो कैसे?” महाजन ने पूछा।

“महाकाली जानती है कि देवा-मिन्नो का तीसरा जन्म चल रहा है। वो हर तरफ की खबर रखती है। महाकाली को ये भी पता है कि दूसरी दुनिया में मौजूद देवा और मिन्नो में पटती नहीं है। ऐसे में देवा और मिन्नो कभी भी एक साथ, एक जगह इकट्ठे नहीं होंगे और किसी भी एक काम को मिलकर इकट्ठे नहीं करेंगे। इसलिए उसने देवा और मिन्नो नाम का तिलिस्म बांध दिया कि जथूरा हमेशा ही कैद में रहे। देवा और मिन्नो तो जथूरा को आजाद कराने पूर्वजन्म में तो आने से रहे। ये सोचकर महाकाली निश्चिंत हो गई थी।”

तो महाकाली सोचेला कि देवराज चौहान-मोना चौधरी एक साथ इधर नेई आईला ।”

“ये ही सोंचा महाकाली ने।” पोंतेबाबा ने कहा।

तो अब जो भी जथूरा को कैद से छुड़ाने जाता है, वो मारा जाता है।” नगीना ने पूछा। ।
 
“हां। तिलिस्म को देवा और मिन्नों ही तोड़ सकते हैं। ये दोनों ही सिर्फ वहां तक पहुंच सकते हैं। वहां फैली महाकाली की जादुई ताकतें सिर्फ देवा और मिन्नो को ही जथूरा तक पहुंचने की इजाजत देंगी।”

इस कारण तुम हमें चालाकियों से यहां तक लाए?”

पोतेबाबा ने सहमति से सिर हिलाकर कहा। “मजबूरी थी। ऐसा करना पड़ा मुझे। इसके अलावा मेरे पास कोई और रास्ता भी तो नहीं था। सीधे-सीधे तुमसे कहता कि पूर्वजन्म मैं तुम्हारी जरूरत है तो कोई भी आने को तैयार नहीं होता।”

“तुम चाहते हो कि अब हम जथूरा को कैद से आजाद कराएं।” मोना चौधरी बोली। ।

“हां। यही चाहता हूं मैं। मेरी सारी कोशिशें अब इसी बात पर आकर रुकती हैं।”

“तुमने कैसे सोच लिया कि हम तुम्हारी बात मानकर ये काम करेंगे।”

मेरा दिल कहता है कि तुम दोनों इनकार नहीं करोगे।”

खतरे वाले काम में हम हाथ क्यों डालेंगे तुम्हारे लिए?” पोतेबाबा मोना चौधरी को देखता रहा।

तुम्हें ये बात हमें पहले ही स्पष्ट तौर पर बता देनी चाहिए थीं।”

पोतेबाबा खामोश रहा।

तिलिस्म को तोड़ना खेल नहीं होता।” मोना चौधरी ने गम्भीर स्वर में कहा—“पूर्वजन्म में मैं भी नगरी की मालकिन रह चुकी हूं और तिलिस्म विद्या में माहिर थी। ये एक भारी खतरे वाला काम है। आसान नहीं है ये सब करना।” ।

तो मत करो।” तवेरा कह उठी।।

सबकी निगाह तवेरा की तरफ उठ गई। गरुड़ की खोज-भरी निगाह तवेरा के चेहरे पर फिरने लगी।

मखानी बोरियत-भरे अंदाज में चेहरा लटकाए कब से बैठा, रह-रहकर कमला रानी को देख रहा था। लम्बी तपस्या के बाद अब जाकर कमला रानी से नजरें मिली तो मखानी ने आंख के इशारे से उसे चलने को कहा।

कमला रानी ने इनकार में सिर हिलाया।।

मखानी ने झुंझलाकर, पुनः यहां से चुपके-से उठने का इशारा किया।

कमला रानी ने मुंह फेर लिया। | ‘औरत में यही खराबी है कि जब जरूरत पड़ती है तो नखरे दिखाने लगती हैं। ये कमला रानी तो औरतों की मां है। पहले तो मेरे कान में बोल दिया कि चुपके से कहीं जाकर प्यार कर लेंगे। मेरी तबीयत हरी है प्यार करने को तो, खुद उठने का नाम नहीं ले रहीं। मखानी बड़बड़ा उठा–‘साली एक बार हाथ पर चढ़ जाए तो हालत बिगाड़ दूंगा।'

“अगर तुम मेरे पिता को आजाद नहीं कराना चाहते तो न सही।” तवेरा लापरवाही से पुनः बोली।

ये तू क्या कह रही है मेरी बच्ची ।” पोतेबाबा के होंठों से निकला।

“गलत क्या कह दिया।”

देवा और मिन्नो जथूरा को आजाद करा सकते...।” ।

पोतेबाबा।” तवेरा गम्भीर स्वर में कह उठी “पिता की आजादी का मतलब है, मेरी आजादी खत्म। जब से वो कैद हैं तब से मेरा जीवन बदल गया है। मैं कहीं भी आ-जा सकती हूं। उनकी आजादी के बाद,..।”

वो तेरे पिता हैं।”

“मैं परवाह नहीं करती।” तवेरा ने कहा और पलटकर बाहर की तरफ बढ़ गई।

“मेरी बच्ची तुझे क्या हो गया है।” पीछे से पोतेबाबा ने कहा। परंतु तवेरा बाहर निकल गई थी।

“शायद बच्ची की तबीयत ठीक नहीं।” पोतेबाबा ने चिंतित स्वर में कहा और गरुड़ से बोला–“तुम उसे समझाओ गरुड़।”

जी। मैं अभी जाता हूं।” कहने के साथ ही गरुड़ पलटा और बाहर निकलता चला गया।

पास की कुर्सी पर बैठा रातुला धीमे स्वर में पोतेबाबा से कह उठा।।

“ये तुमने क्या किया पोतेबाबा। गरुड़ को तवेरा के पास भेज दिया।”

पोतेबाबा शांत भाव में मुस्कराकर बोला।

गरुड़ के बारे में मैं तवेरा को सब कुछ बता चुका हूं।”

ओह।” ।

तवेरा का ये सब कहना, उसकी किसी चाल का ही हिस्सा है। तुम इस बारे में निश्चिंत रहो रातुला।”

समझ गया।”

फिर पोतेबाबा ऊंचे स्वर में सबसे कह उठा।

तवेरा की बात का बुरा मत मानना। वो अपने पिता की कैद की वजह से बहुत परेशान है।” ।

“म्हारे को तो दूसरों ही स्टोरी लागे।” बांकेलाल राठौर ने सोच-भरे स्वर में कहा—“थारे को का लागे छोरे?”

“ये बात बाद में देखेला बाप ।”

ठीको ।”
 
सबकी नजरें पोतेबाबा पर थीं। “मैं चाहता हूं कि तुम दोनों जथूरा को आजाद कराओ महाकाली की कैद से।”

“जरूरी क्यों है जथूरा को कैद से निकालना?” देवराज चौहान बोला।

“बहुत जरूरी है, जथूरा के बिना हर नगरी की बढ़ोत्तरी रुक गई है। वो होता तो...।” ।

तुमने कालचक्र का हम पर इस्तेमाल किया?”

“हां।” ।

यानी कि जथूरा के बाद तुम उसकी हर चीज के मालिक हो?”

हां ।”

“और जथूरा के आ जाने पर तुम फिर से उसके नौकर बन जाओगे।” ।

मैं अब भी नौकर हूं। जथूरा का सेवक हूं।” पोतेबाबा ने कहा।

उसकी गैरमौजूदगी में तुम अपनी मनमानी कर रहे हो। वो आ गया तो मनमानी ख़त्म हो जाएगी तुम्हारी ।”

पोतेबाबा मुस्करा पड़ा।

“तुम इसे मनमानी कहते हो, जबकि मैं इसे बोझ कहता हूं। कामों के बोझ तले मैं दबा जा रहा...।”

मत करो काम। यहां जथूरा तो है नहीं जो तुम्हें काम...।”

तू मुझे समझता क्या है देवा। क्या मैं चोर सेवक हूं जो कामों से मन चुराता है या बेईमान हूं जो जथूरा की गैरमौजूदगी में सत्ता का फायदा उठाएगा। ऐसा सोचते हो तो गलत सोचते हो। मैं जथूरा का सच्चा सेवक हूं। जथूरा महान है। उस जैसा कोई दूसरा नहीं। मैं दिल से उसका कायल हूं। उसके द्वारा रचित हादसे कितने शानदार होते हैं। मैंने जथूरा से बहुत कुछ सीखा है।”

पर वो तो बेईमान होईला बाप।” ।

“कैसे?” पोतेबाबा ने रुस्तम राव को देखा।

जथूरा सोबरा का हक मारेला। बाप से मिला माल बराबर बांटेला मांगता।”

मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता।”

ये बहस नेई होईला बाप । सच्चाई होईला। जथूरा को उसके पिता से ताकतें न मिलेला तो जथूरा इतना पॉवरफुल नेई बनेला। सारा कमाल तो उस ताकत का होईला बाप ।” रुस्तम राव ने कहा।

“तंम एकदमो फिटो कहो छोरे। जथूरो म्हारे को शुरू से ही हरामो लागे हो।”

खामोश बैठा रातुला कह चुका। जथूरा के बारे में आप लोगों के विचार बहुत गलत हैं।”

तंम म्हारे को गलत बोल्लो हो और म्हारे को कहो भी कि अंम जथूरो को बचावे ।।

“जथूरा महान है।” रातुला कह उठा

“उस जैसा दूसरा कोई नहीं।”

छोरे यो पूंछो तो सीधा न होवे।” । पोतेबाबा ने देवराज चौहान और मोना चौधरी को देखा।

“मैं आशा करता हूं कि तुम दोनों जथूरा को महाकाली की कैद से आजाद करा दोगे।”

“इसलिए कि वों और नए हादसे रचकर हमारी दुनिया के लोगों को...।”

इस बारे में जथूरा से बात की जा सकती है।” पोतेबाबा ने कहा।

“कैसी बात?” ।

“उसे आजाद कराने से पहले उससे वादा ले लेना कि वो नए हादसे नहीं रचेगा।”

वो हादसों का देवता है। हमारी बात क्यों मानेगा?”

उसे आजाद होना है तो जरूर मानेगा।” पोतेबाबा ने शांत स्वर में कहा।

दो पल के लिए चुप्पी छा गई वहां।

तुम आखिर चाहते क्या हो?” मोना चौधरी ने पूछा।

“जथूरा को आजाद करा लेना चाहता हूं।” पोतेबाबा गम्भीर था।

तुम्हारा मतलब कि इस शर्त पर जथूरा को महाकाली की कैद से आजाद कराए कि, वो नए हादसे रचकर हमारी दुनिया में नहीं भेजेगा?” | पोतेबाबा ने सहमति से सिर हिलाया।

“इस काम में बहुत खतरा है पोतेबाबा।” मोना चौधरी गम्भीर स्वर में कह उठी–“किसी के बांधे तिलिस्म को काट के मंजिल तक पहुंचना, खेल नहीं है। जबकि तिलिस्म बांधने वाला तंत्र-मंत्र का विशेष ज्ञानी हो।”

“महाकाली ने देवा और मिन्नो के नाम का तिलिस्म बांधा है। ऐसे में तुम दोनों के लिए तिलिस्म को तोड़ना खास खतरे वाली बात नहीं है।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा-“इसलिए तुम दोनों...।”

“हम ये काम न करें तो?” देवराज चौहान बोला।
 
पोतेबाबा मुस्करा पड़ा।

तो क्या करोगे तुम सब लोग, जबकि पूर्वजन्म में तो आ ही चुके हो ।”

क्या कहना चाहते हो?” ।

“ये तो तुम लोग भी जानते हो कि पूर्वजन्म में प्रवेश कर लेने के बाद तुम लोगों की वापसी तभी हो सकती है, जब पूर्वजन्म का कोई बिगड़ा काम सुधार दो। या तो जथूरा को आजाद कराओ, या फिर तुम लोगों को कोई और बिगड़ा काम तलाश करना पड़ेगा, जिसे कि सुधार सको। क्या पता वो काम इससे भी ज्यादा खतरनाक हो।”

“तो ये चाल थी तुम्हारी ।” देवराज चौहान ने कहा-“तुम सब जानते हो कि पूर्वजन्म में प्रवेश कर आने के बाद हमें कोई एक बिगड़ा काम अवश्य सुधारना होगा, तभी हमारी वापसी के दरवाजे खुलेंगे। तुम सोचते हो कि तुमने हमें फंसा दिया कि ये काम हमें करना ही पड़ेगा। दूसरा बिगड़ा काम ढूंढ़ना भी तो आसान नहीं ।”

“गलत मत सोचो। मैंने तुम लोगों को फंसाया नहीं। अपने काम के लिए तुम्हें यहां लाया जरूर हूं, परंतु तुम लोग फैसला लेने को आजाद हो। नहीं काम करना चाहते तो मत करो।” पोतेबाबा ने कहा।

। “यो म्हारे को चक्करो में लयो हो।”

सोचने की बात होईला बाप ।”

“महाकाली है कहाँ?” नगीना ने पूछा।

उसके बारे में कोई नहीं जानता कि वो कहां है।” पोतेबाबा बोला—“परंतु जथूरा के बारे में पता है।”

कहां है वों?”

अपनी ताकतों से मायावी पहाड़ी बनाकर उसने जथूरा को वहां कैद कर रखा...।”

तभी देवराज चौहान ने टोका।

पूर्वजन्म में प्रवेश करने के बाद मुझे कुछ नजर आया था, यहीं का ही कुछ।” ।

“क्या?” पोतेबाबा ने उसे देखा।

“दो गुफाएं। परंतु बाद में पता लगा कि वो गुफाएं नहीं, नाक के छेद हैं। फिर पत्थर के होंठों को बोलते देखा, जो खुद को आजाद कराने के लिए कह रहा था—वो...।”

वो ही मायावीं पहाड़ी...।” पोतेबाबा गहरी सांस लेकर बोला।

“क्या मतलब?”

महाकाली ने अपनी ताकतों से वो ही मायावी पहाड़ी बनाकर, जथूरा को भीतर कैद कर रखा है। जो पत्थर की आकृति का चेहरा तुमने देखा, वो जथूरा का चेहरा है। जो कि पहाड़ी के ठीक ऊपर, इस तरह रखा है, जैसे वो आसमान को देख रहा हो। उसके नाक के छेद, जो कि गुफा की तरह हैं। उन्हीं में से रास्ता भीतर को जथूरा तक जाता है, परंतु जो भी उस रास्ते से भीतर प्रवेश करता है, वो जीवित लौट के नहीं आता।”

“मुझे कैसे जथूरा का वो चेहरा दिखा या उसके हिलते होंठ या फिर उसकी आवाज सुनाई दी?”

“जथूरा ने तुम लोगों की मौजूदगी का अपनी जमीन पर एहसास पा लिया होगा। तभी उसने खुद को आजाद कराने की पुकार लगाई होगी। ये अच्छी बात है कि जथूरा पूरी तरह अपने होश में है।” पोतेबाबा ने चैन की सांस ली। फिर मोना चौधरी से कह उठा–“क्या तुम्हें भी ऐसा कुछ एहसास हुआ मिन्नो?”

नहीं।”

तुम्हें भी ऐसा कोई एहसास होता तो बेहतर रहता। क्या पता अब हो जाए।” ।

तुम पहाड़ी के बारे में बता रहे थे।” महाजन कह उठा। पोतेबाबा ने सबको देखा। कुछ पल सोच के कह उठा।

क्या ये अच्छा नहीं होगा कि पहले तुम लोग ये फैसला ले लो कि जथूरा को आजाद कराओगे या नहीं?”

“अगर हमारा इनकार हुआ तो तुम हमारे साथ क्या व्यवहार करोगे?" पारसनाथ कह उठा।

“कोई भी अपने मन में बुरी आशंका न रखे।” पोतेबाबा मुस्कराकर बोला—“तुम लोगों के इनकार करने पर भी यहां किसी के मन में बुरी भावना नहीं आएगी। तुम सब जब तक चाहो, यहां मेहमान बनकर रह सकते हो।”

“यों म्हारे को अमूलो मकखनों लगा रहो हो ।” वो सब एक दूसरे को देखने लगे।

तुम लोगों को यहां तक लाना जरूरी था। वो मैं ले आया। अब आगे काम करना या न करना, तुम्हारी मर्जी पर है।”

“मुर्गोखाने में बिठा दयो म्हारे को, ईब मर्जी बोल्लो हो ।” पोंतेबाबा उठता हुआ बोला।

बाहर दरवाजे पर हर वक्त दो सेवक मौजूद रहेंगे। आप लोगों को किसी भी चीज की जरूरत हो तो उनसे कह सकते हैं। मुझे बुलाना हो तो भी उनसे कह सकते हैं। यहां आप कहीं भी जाने को आजाद हो। कोई रोक-टोक नहीं है।”

रातुला भी उठ खड़ा हुआ।

सोच-विचार में आप जितना भी वक्त लेना चाहें ले सकते हैं।” उसके बाद पोतेबाबा और रातुला वहां से बाहर निकल गए। उनके जाने के बाद खामोशी-सी आ ठहरी उधर।।

“मेरे खयाल में हमें जथूरा की आजादी के लिए कुछ करना चाहिए।” नगीना बोली-“वो मुसीबत में है। ऐसे में किसी के काम आना, बुरी बात नहीं है।”

“उसने सोबरा के साथ ज्यादती की है।” देवराज चौहान ने कहा-“उसने सोबरा का हक मारा है।”

“तो सोबरा ने उसे सजा भी दे दी। पचास सालों से वो बंदी बना हुआ है।” नगीना ने कहा।

“हमें क्या पता कि सोबरा इस वक्त उसकी सजा के बारे में क्या सोचता है।” देवराज चौहान ने नगींना को देखा।

तभी मोना चौधरी कह उठी। “सोबरा भी कम नहीं है।”

अंम भी यो हीं सोच्चो हो।” बांकेलाल राठौर बोला—“जथूरो को जादूगरनी कैद में फंसा दयो हो।”

“हम जथूरा को कैद से निकाले तो सोबरा को ये बात बुरी लग सकती है।” देवराज चौहान ने कहा-“ये दो भाइयों का मामला है। हमें बीच में नहीं आना चाहिए।”

बहुत कठोर हैं आप।” नगीना कह उठी।

बात कठोरता की नहीं नगीना, बात ये है कि जथूरा ने अपने पिता से प्राप्त ताकतों का इस्तेमाल करके, खुद बड़ी ताकत बन गया। जबकि सोबरा भी उन ताकतों को पाने का हकदार था। वो अपने अधिकार से वंचित रहा। इसी कारण सोबरा ने कालचक्र की आड़ में जथूरा को फंसा दिया। इसमें हमारे बीच में आने की गुंजाईश ही नहीं है।”

“सोबरा से बात की जाए?” महाजन बोला।

वो नहीं मानेगा।” देवराज चौहान ने कहा—“क्योंकि इस वक्त बाजी उसके हाथ में है।”

“तुम्हारे मन में क्या है देवराज चौहान ।” मोना चौधरी बोली_“इस काम को करने की इच्छा रखते हो या नहीं?” | अगर जथूरा सोबरा के साथ पिता की दी ताकतें बांटने पर राजी हो जाता है और हमारी दुनिया में नए हादसे रचकर नहीं भेजेगा तो, मैं ये करने को तैयार हो सकता हूं।” देवराज चौहान ने कहा।

“जथूरा तो सामने है नहीं कि उससे बात की जा सके।” मोना चौधरी बोली।

पोतेबाबा के शब्दों की कोई कीमत नहीं है।”

वो पहले ही कह चुका है कि जथूरा अगर शर्ते माने तो उसे आजाद करना, वरना नहीं ।”

पोतेबाबा चाहता है कि किसी भी तरह हम जथूरा को आजाद करने के लिए यहां से चल पड़े।”

हां। ऐसी ही बात है।”

लेकिन हमें पूर्वजन्म का कोई काम तो सुधारना ही पड़ेगा। तभी हम वापस अपनी दुनिया में जा सकेंगे। किसी बिगड़े काम को संवारना हमारे लिए भी अच्छी बात है। पूर्वजन्म के जो काम पहले जन्म में अधूरे रह गए थे, वो हम इस रूप में पूरे करेंगे।” महाजन कह उठा।

नगीना देवराज चौहान से बोली। “आपको ये काम करना होगा।”
 
“मुझे सोचने दो।” देवराज चौहान बोला।

बेहतर होगा कि हम ये काम करें ताकि हमारे लिए वापस अपनी दुनिया में जाने का रास्ता खुल सके।” मोना चौधरी बोली “हम जितना वक्त सोचने में लगाएंगे। हमें उतनी ही देर पूर्वजन्म में रहना पड़ेगा।”

। “मोना चौधरी ठीक कहती है।” नगीना ने तुरंत सिर हिलाया।

“अगर तुम सबकी यही मर्जी है तो, मैं तैयार हूं।” देवराज चौहान ने सोच-भरे स्वर में कहा।।

जथूरा तक अगर पहुंच गए तो उससे वो बातें कर लेंगे, जो हमारे मन में हैं ।” मोना चौधरी कह उठी।

। “छोरे।” बांकेलाल राठौर का हाथ मूंछ पर जा पहुंचा-अंम महाकाली को ‘वड' दयों।”

“पक्का बाप ।”

तंम म्हारे साथ हो ना?”

“पक्का बाप ।”

कमला रानी सब बातों को ध्यान से सुन रही थी। तभी उसने मखानी को देखा। मखानी उसे खा जाने वाली नजरों से घूर रहा था। कमला रानी मुस्करा पड़ी। वो उठी और बाथरूम की तरफ चल दी। चलते-चलते कमला रानी ने मखानी को देखा और आंख से इशारा कर दिया।

मखानी खिल उठा।

काम बन गया था।

ललचाई नजरों से वो कमला रानी को उस रास्ते पर जाते देखता रहा, जो खुले बाथरूम की तरफ जाता था। जब कमला रानी चली गई तो मखानी उठा और उसी रास्ते की तरफ बढ़ गया।

“तंम उसो को पीछो-पीछो क्यों खिसको हो?” बांकेलाल राठौर मखानी से कह उठा।

मखानी ने ऐसे दर्शाया, जैसे सुना ही न हो।

जाने दे बाप ।” रुस्तम राव ने बांके की टांग पर हाथ मारा–“उसने पीछे आने का इशारा किएला है।”

“फिरो ठीको। अॅम सोचो के कंई पे इज्जत लूटनो का केसो न तैयार हो जावे।”

तवेरा कमरे से निकली तो पीछे से आकर गरुड़ उसके साथ चलने लगा।

“तुम कैसी बातें कर रही हो तवेरा?” गरुड़ कह उठा। तुम्हें मेरी बातें पसंद नहीं तो, मेरे पास मत आओ।”

वो बात नहीं, मैं तुम्हारे साथ हूं।” गरुड़ जल्दी से बोला—“तुम नाराज मत होवो।”

दोनों आगे बढ़ते जा रहे थे। तवेरा ने चेहरे पर उखड़ापन ओढ़ रखा था।

कम-से-कम तुम्हें दूसरों के सामने तो अपनी भावनाएं छिपाकर रखनी चाहिए।” ।

“मैं नगरी की मालकिन हूं। मेरा जो मन चाहेगा, वो ही करूंगी।”

“ये बात तो तुम ठीक कह रही हो।”

सच?” चलते हुए तवेरा ने उसे देखा।

“हां-हां, मैं झूठ क्यों बोलूंगा?” ।

“मुझे लगता है कि कोई भी मेरे से सहमत नहीं होगा कि मैं पिता को वहीं कैद में रहने दें।”

ठीक कहती हो।”

“तुम सहमत हो?"

मैं तो तुम्हारे साथ हूं तवेरा।”

“सच कह रहे हो?”

मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगा। तुम मुझे अच्छी लगती हो। तुम्हारी हर बात मुझे अच्छी लगती है।”

“ओह गरुड़। तुम कितने अच्छे हो।” तवेरा मुस्कराई।

गरुड़ भी मुस्कराया।

“मैंने कभी तुम पर ध्यान क्यों नहीं दिया। तुम बहुत समझदार हो ।”

गरुड़ मुस्कराता रहा।

अब तुम मुझे अच्छे लगने लगे हो।”

सच तवेरा।” ।

हां। तुममें वो सब बातें हैं जो नगरी को संभाल सको।” तवेरा कह उठी।।

क्या मतलब?”

सोचती हूं कि कहीं तुम ही तो मेरे सपनों के राजकुमार नहीं हो, जिसका मुझे इंतजार था।” ।

“ओह, तवेरा तुमने तो मेरे दिल की बात कह दी।” गरुड़ जल्दी से कह उठा।

क्या तुम भी मेरे बारे में कुछ ऐसा ही सोचते हो?”

हां तवेरा, तुम्हें लेकर तो मैंने कितने सपने ले रखे हैं, परंतु कभी कहने की हिम्मत नहीं पड़ी।”

तवेरा ठिठकी और गरुड़ को देखने लगी। गरुड़ भी रुका।।

तुम्हें मेरा साथ देना होगा गरुड़, अगर मेरे से ब्याह करना चाहते हो।” तवेरा ने कहा।

मैं तैयार हूं। बोलो क्या करूं?”

मैं अपने पिता की आजादी नहीं चाहती।”

“परंतु इस बारे में मैं क्या कर सकता हूं?”

“देवा-मिन्नो अगर पिताजी को आजाद कराने जाएं तो उनका काम बिगाड़ देना होगा।”

ये मैं कैसे करूंगा?”

तुम साथ रहना। हम किसी अच्छे मौके को ढूंढेंगे।”

“साथ रहना, मैं समझा नहीं?”

देवा-मिन्नो अगर पिताजी को आजाद कराने में महाकाली की पहाड़ी की तरफ जाने लगेंगे तो मैं भी साथ चलूंगी और बहाने से तुम्हें भी साथ ले लूंगी। मेरी बात को पोतेबाबा इनकार नहीं कर सकेगा।”

“समझ गया। तुमने जथूरा से चालाकियां हासिल की हैं।” गुरुड़ मुस्करा पड़ा।

“मैं अपने आप में भी कम नहीं हूं। तंत्र-मंत्र में मैंने महारथ हासिल की है।”

परंतु महाकाली से कम हो ।”

हाँ। वो तो बहुत बड़ी जादूगरनी है। अब तुम मेरे पास से जाओ। कोई देखेगा तो शक करेगा कि हममें इतनी देर तक क्या बातें हो रही हैं।” तवेरा कह उठी–“तुम कितने अच्छे हो गरुड़।” ।
 
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