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“ओ के। ओ के। तंम म्हारी सेवो करो। इत्तो ही बोत हौवे।" वो सबसे कह उठा।
"मेरे खयाल में पहले तालाब में औरतों को नहाने दिया जाए तो बेहतर होगा। आप सब मर्द पीठ मोड़कर इधर बैठ जाइए।"
"तंम का करो हो?"
“मैं भी पीठ मोड़कर आप सब के साथ ही बैलूंगा।"
“फिरो ठोको हौवे।"
नहाने के बाद सबने राहत महसूस की। थकान कुछ कम हुई।
वो व्यक्ति उन सबको वापस झोपड़ों के पास ले आया। एक जलती मशाल के नीचे पेड़ों के बड़े-बड़े पत्ते बिछाकर बैठने के लिए बिछौना बना रखा था। उस व्यक्ति ने सबको वहीं बैठने को कहा
और वहां मौजूद अन्यों को खाना परोसने को कहा।
"सांभरा कहां है?" मोना चौधरी ने कहा।
"उन्हें अभी आपके आने की खबर भिजवाता हूं।"
“अभी तक खबर भी नहीं दी उसे।” नगीना ने कहा।
“सांभरा का आदेश था कि जब नहाकर आप सब खाने के लिए बैठे तो उन्हें खबर दी जाए।"
वो व्यक्ति एक झोंपड़े की तरफ चला गया।
"कैसा अजीब है सांभरा। इतनी बड़ी नगरी का मालिक होते हुए इस तरह पहाड़ पर रह रहा है।" महाजन ने कहा। ___
“ऐसा करने की कोई खास वजह होगी।” पारसनाथ ने कहा।
"जो वजहो भी हौवे, म्हारे को तो पहाड़ पर गर्मा-गर्म खाणो मिल्लो हो।"
"भूख लगेला है बाप।" सबको ही भूख लग रही थी।
“वापसो परो भी म्हारे को गर्म-गर्म खाणों मिल्लो हो । वो बांबो म्हारे वास्ते उधरो हलवाई बैठायो हो।"
__ “तेरे को खाने का चस्का लगेला बाप।"
"भूखो बोत लगो हो म्हारे पेटो में।"
मखानी और कमला रानी पास-पास बैठे थे। या यूं कहें कि जब कमला रानी बैठी, तब मखानी तुरंत उसकी बगल में आ बैठा था कि कोई दूसरा वहां न बैठ जाए। मौका पाकर मखानी प्यार से बोला।
"कमला रानी।"
"मेरे खयाल में पहले तालाब में औरतों को नहाने दिया जाए तो बेहतर होगा। आप सब मर्द पीठ मोड़कर इधर बैठ जाइए।"
"तंम का करो हो?"
“मैं भी पीठ मोड़कर आप सब के साथ ही बैलूंगा।"
“फिरो ठोको हौवे।"
नहाने के बाद सबने राहत महसूस की। थकान कुछ कम हुई।
वो व्यक्ति उन सबको वापस झोपड़ों के पास ले आया। एक जलती मशाल के नीचे पेड़ों के बड़े-बड़े पत्ते बिछाकर बैठने के लिए बिछौना बना रखा था। उस व्यक्ति ने सबको वहीं बैठने को कहा
और वहां मौजूद अन्यों को खाना परोसने को कहा।
"सांभरा कहां है?" मोना चौधरी ने कहा।
"उन्हें अभी आपके आने की खबर भिजवाता हूं।"
“अभी तक खबर भी नहीं दी उसे।” नगीना ने कहा।
“सांभरा का आदेश था कि जब नहाकर आप सब खाने के लिए बैठे तो उन्हें खबर दी जाए।"
वो व्यक्ति एक झोंपड़े की तरफ चला गया।
"कैसा अजीब है सांभरा। इतनी बड़ी नगरी का मालिक होते हुए इस तरह पहाड़ पर रह रहा है।" महाजन ने कहा। ___
“ऐसा करने की कोई खास वजह होगी।” पारसनाथ ने कहा।
"जो वजहो भी हौवे, म्हारे को तो पहाड़ पर गर्मा-गर्म खाणो मिल्लो हो।"
"भूख लगेला है बाप।" सबको ही भूख लग रही थी।
“वापसो परो भी म्हारे को गर्म-गर्म खाणों मिल्लो हो । वो बांबो म्हारे वास्ते उधरो हलवाई बैठायो हो।"
__ “तेरे को खाने का चस्का लगेला बाप।"
"भूखो बोत लगो हो म्हारे पेटो में।"
मखानी और कमला रानी पास-पास बैठे थे। या यूं कहें कि जब कमला रानी बैठी, तब मखानी तुरंत उसकी बगल में आ बैठा था कि कोई दूसरा वहां न बैठ जाए। मौका पाकर मखानी प्यार से बोला।
"कमला रानी।"