• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरा नोकर राजू

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
हम औरतें अपनी यौन भूख पर बहुत नियंत्रण रखती हैं, पर कभी कभी हम भी मजबूर हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही मेरी बहन सीमा के साथ हुआ। इसलिए मैं उसको दोषी नहीं मान रही थी। सेक्स की कमी मुझसे ज्यादा कौन समझ सकता है। पर सीमा ने मुझे अंदर तक कुरेद दिया था। मैं सेक्स की कमी को हमेशा ही नजर अंदाज करती रही थी। शर्म की वजह से या और कुछ, पर मैंने कभी इसके बारे में ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। पर अब अपनी छोटी बहन की चुदास भरी बातें सुनकर मेरे अंदर वह भूख फिर से उभरने लगी थी।

पर डर भी लग रहा था कि सीमा की तरह मेरे बारे में अगर नितिन को पता चल गया तो वह मुझे जान से मार देगा।

जिस तरह सीमा कंफ्यूज थी पहली बार करते वक्त… उसी तरह मैं भी कंफ्यूज थी, सोच सोच कर मेरा दिमाग चकराने लगा था।

मैं बाथरूम गयी और शावर लेने लगी, ऊपर से बरस रही ठंडे पानी की धारों में मेरा मन भी शांत हो जाये यही एक इच्छा थी पर वो शांत नहीं हो रहा था। लगभग दस मिनट मैं पूरे कपड़ों में शावर के नीचे खड़ी रही।

कुछ समय बाद शांति मिली तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए, चुत में उंगली डाल कर देखा तो वह भी पानी पानी हो गयी थी। फिर मैं ठीक से नहाई, तौलिये से अपना नंगा बदन को सुखाने के बाद आईने में खुद की देखने लगी।

“कितना अन्याय कर रही थी मैं अपने बदन पर! मुझे नितिन से उसके बारे में बात करनी होगी, उसे मेरी जरूरतों के बारे में बताना होगा!” फिर से उन्ही विचारों ने मेरे दिमाग पर कब्जा कर दिया।

“मेमसाब, खाना लगा दूँ क्या?” रूम के बाहर से राजू की आवाज आई, वैसे ही मैं होश में आई।

“हा लगा दो.” मैं बोली तो वह नीचे चला गया, मैंने नाईटी पहन ली। अंदर कुछ पहनने की इच्छा नहीं हो रही थी, वैसे भी बहुत गर्मी थी।

मैं नीचे जाकर खाना खाने लगी, राजू मेरे सामने नहीं आ रहा था, शायद वह डर गया था कि दोपहर की बात मुझे पता न चल जाये।

मैंने खाना खत्म किया और ऊपर जाकर बैड पर सो गई, दिमाग में फिर भी वही ख्याल बार बार आ रहे थे… पर क्या करूँ… कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

सोचते सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता नहीं चला।

अचानक दरवाजे पे दस्तक हुई, मैं उठ गई। नींद अभी पूरी नहीं हुई थी, मैं अंगड़ाई लेते हुए बेड से उतरी और दरवाजा खोला।

बाहर का नजारा देखा तो मैं शॉक हो गयी, बाहर राजू खड़ा था, एकदम नंगा।

राजू का पूरा शरीर उसका विशाल लंड मेरी तरफ देख रहा था। उसका कसरती बदन बिल्कुल सीमा ने बोला था वैसे ही था, उसका लंड भी वैसा ही था काला मूसल, उसके ऊपर गुलाबी सुपारी।

गुलाबी… पर सीमा ने तो चॉकलेटी बोली थी, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मैं शॉक में वैसी ही खड़ी रही।

उसने मुझे एक धक्का दिया, उस धक्के से मैं पीछे सरक गई। वह एक हाथ से उसका विशाल लंड पर मुठ मारते हुए और राक्षसी स्माइल देते हुए मुझे पीछे धकेलने लगा। मैं कुछ भी प्रतिकार नहीं कर सकती थी, उसकी राक्षसी मुस्कान देखकर पीछे पीछे हट रही थी।

अचानक मेरे पैर बेड के पास आ कर रुक गए और उसके एक और धक्के से मैं बेड पर बैठ गई।

उसका लंड बिल्कुल मेरे सामने था, उस काले विशाल लंड पर वह मुठ मार रहा रहा। राक्षसी हँसी हँसते हुए मुझे वह सब दिखा रहा था।

मैं होश में आई और उसको पूछा- यह क्या कर रहे हो राजू?

“कुछ नाही मेमसाब, ईह है ना, बहुत जालिम है, एकदम से गरम हुई गवा, अभी तनिक ठंडा करना है.” मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बोला।

“तुम जाओ यहाँ से!” मैं बोली।

“नहीं मेमसाब तनिक इसे ठंडा तो कराई दो!” वह अपना लंड आगे लाते हुए बोला।

“नहीं राजू, तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे दूर धकेलते हुए बोला।

“आईसा का करत हो मेमसाब… जरा सी ठंडक तो मांगत है.” कहकर वह फिर से मेरे सामने खड़ा हो गया। अपना लंड मेरे होठों पर घिसते हुए वह फिर से हँसने लगा।

“आहहह…” मैं चिल्लाई, जलती भट्टी में से निकले लोहे की रॉड की तरह वह गरम था। मेरे होंठ अब जलने लगे थे।

“जल गए मेरे होंठ!” मैं बोली।

“हाँ तभी तो बोले हैं, ईह कमीना बोहुत गरम हुई गवा है, तनिक ठंडा कराई दो!” कहकर वह फिर से अपना लंड मेरे होंठों पर घिसने लगा।

“नहीं राजू तुम जाओ यहाँ से” मैंने उसके लंड को अपने हाथों से दूर धकेलते हुए बोला।

“अरे जानेमन, तनिक ठंडक तो देई दो, तोहार जवानी बड़ी मस्त मस्त है…” ऐसा कह के वह फिर से अपना लंड मेरे होठों पे घुमाने लगा और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा, दबाने नहीं पूरा मसलने लगा।

“नहीं राजू!” मैं रोते हुए बोली।

“का नही… अरे मेमसाब… ईह ससुरा तो तोहार गुलाम होना चाहत है, और तुम हो कि…” वह आगे कुछ बोले उसके पहले मैं वहाँ से उठी।

“राजू, अब तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे बाजू से धकेला।

मेरा शरीर तो कह रहा था कि राजू की बात मान ले… लेकिन दिमाग उचित अनुचित के फेर में पड़ा हुआ था.
 
उसने फिर से मेरे पास आते हुए मुझे धक्का दिया और मुझे बेड पर बिठा दिया- तू ऐसे नहीं मानेगी… तोहार बहन तो गुलाम है इसकी… साली छिनाल रांड, अब तू भी उसकी गुलाम बन… चल ठंडा कर दे इसको!” ऐसा बोलकर उसने मेरे गाल पंजे में पकड़े और ज़ोरों से दबा दिए।

मेरे होंठ खुल गए थे, मेरा प्रतिकार अब मेरी वासना की वजह से कम हो गया था।

उसने मेरे होठों के अंदर दबा दिया, और घपाघप मेरे होंठ चोदने लगा। उसके लंड की गर्मी अब कम हो रही थी पर मेरे होंठ जलने लगे थे। वह दूसरे हाथ से मेरे स्तन को बेरहमी से मसल रहा था। दर्द के कारण मेरे आँखों से आंसू बहने लगे थे, पर उसको उसकी परवाह नहीं थी। वह मजे से मेरे होठों को चोद रहा था, राक्षसी हँसी हंसते हुए सिसकारियाँ भर रहा था।

“अब कैसा लग रहा है… तोहार बहन तो गुलाम है इसकी. अब तू भी बन जा… तुझे भी बहुत खुश रखेगा यह कमीना… तोहार कमीनी चुत भी तो चाही इसे… साली अब तो रांड बन जा इसकी… पियार से बोला था ठंडा कराय दे इसे… तो नहीं बोलत है, साली छिनाल!” वह गचा गच मेरे मुँह को चोद रहा था।

अचानक उसने अपना लंड बाहर निकाला और अपने हाथ से हिलाते हुए अपना पूरा काम रस बाहर निकाला, पूरा मेरे चेहरे पर… मैं उसे अपने हाथ से पौंछने लगी और वह कमरे के बाहर चला गया और जाते वक्त बोला कल तोहार चुत में… मजा आवेगा!

राक्षसी हँसी हंसते हुए वह नीचे चला गया।

मैं उसका वीर्य अपने चेहरे से पौंछ रही थी कि दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी और मेरी आँख खुल गयी।

“ओह नो… वह सपना था!” मन में ख्याल आया, नींद पूरी उड़ गई थी।

मैंने आईने में खुद को देखा तो चेहरे पर कुछ भी नहीं था, हाथ फिराया तो चिपचिपापन भी नहीं था। मैं वैसे ही दरवाजे के पास गई और आवाज दी- कौन है?

“मेमसाब मैं हूँ राजू, चाय तैयार है!” राजू की बाहर से आवाज आ रही थी।

घड़ी में देखा तो रात के नौ बजे थे।

“ठीक है नीचे ही रख दो, मैं तैयार हो कर आती हूँ” मैंने उसे बताया और बाथरूम चली गयी।

फ्रेश होकर बाहर आई, सपने में जो देखा वही आँखों के सामने आ रहा था। पहले तो राजू का डर लगने लगा था, पर सपना है पता चलने के बाद मेरी जान में जान आयी। मैं नीचे चली गयी और चाय पीने लगी तभी राजू बोला- मेमसाब आज कुछ स्वीट बनाता हूँ.

“हाँ राजू कुछ स्वीट ही बनाओ!” उसे इतना ही कह कर मैं अपने रूम में गयी।

उस रात मुझे अच्छे से नींद आयी। दूसरे दिन मैं सुबह सात बजे उठी, फ्रेश हो कर नीचे आ गयी।

राजू ने चाय नाश्ता बनाकर रखा था। वह मुझे बोला- मेमसाब, आज दोपहर को छुट्टी चाही, रंग खेलने जाना है.

“हाँ हाँ… कोई बात नहीं!” मैंने उसे छुट्टी दे दे, वह खुश हुआ और अपना काम करने लगा।

दोपहर को वह मेरे कमरे के बाहर आया और दरवाजा खटखटाया, मैं कुछ सोचते हुए बाल्कनी में खड़ी थी। यह भांग क्या होती है मुझे समझ में नहीं आ रहा था, उसके बारे में मैंने सिर्फ सुना था। पर सीमा की बातें सुनने के बाद पीने का मन भी कर रहा रहा था… पर डर भी लग रहा था, न जाने उसका नशा कैसा होगा।

दरवाजे पे हुई दस्तक सुनकर मैं दरवाजे के पास गई और दरवाजा खोला, बाहर राजू खड़ा था।

“मेमसाब हम जावत हैं.”

“हाँ हाँ ठीक है.” मैं बोली.

“पर जा कहाँ रहे हो?” मैंने उसे पूछा।

“भैय्या के घर पर, वहीं सब इकट्ठा हो कर रंग खेलते हैं.” वह बोला।

“अच्छा…” मैं सुनते हुए बोली- तो मेरा एक काम करोगे?

मैंने पूछा।

“का मेमसाब?” उसने मुझे पूछा।

“मुझे सीमा के घर छोड़ दो, और वहीं से तुम चले जाओ.” मैं बोली.

“नाही मेमसाब, हम उनके घर के पास में छोड़ सकते हैं पर उनके घर नाही जा सकत हैं.” वह बोला।

“हाँ हाँ ठीक है, तुम गाड़ी निकालो, मैं तैयार हो कर आती हूँ.” वह नीचे गाड़ी निकालने चला गया।

मैंने जल्दी से चेंज किया और नीचे आ गयी। राजू गाड़ी निकालकर नीचे ही खड़ा था। मैंने डोर लॉक किया और गाड़ी मैं आ कर बैठ गई।

राजू ने गाड़ी चालू की, रास्ते में बहुत सारे बच्चे और लोग रंग खेल रहे थे।

“और राजू… कितनी देर होली खेलने का इरादा है?” मैं टाइम पास करने के लिए बोली।

“ऐसन है ना मेमसाब, चार छह घंटे तो लग ही जायेंगे!” उसने गाड़ी चलाते हुए जवाब दिया।

“और क्या क्या करते हो तुम?” मैंने पूछा।

“वह क्या है ना… अभी जाकर हम भर पेट खाऊंगा… भाबी के हाथ का खाना… फिर भाँगवा पिएंगे फिर होली खेलेंगे…” वह सब बारीकी से बताने लगा।

“वाह… फिर तो बहुत मजा आएगा.” मैं बोली।

“हाँ बहुत मजा आवत है.” बोलते हुए वो ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली…’ यह गाना गाने लगा।

उसकी बातें सुनकर मुझे उससे जलन होने लगी थी, छोटे छोटे काम करता था लेकिन खुशी क्या है उसे पता थी। और हम इतना पैसा कमाते है ऐश में रहते है फिर भी सुख नहीं।

“आना पड़ेगा तुम्हारी होली देखने के लिए!” मैं बोली।

“हाँ मेमसाब चलो न, अभी चलेंगी तो भी कोनो दिक्कत नाही, उल्टा भाभीजी ख़ुश ही होंगी!” वह बोला।

“नहीं फिर कभी!” मैं बोली।
 
आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने पति के साथ सेक्स से वंचित थी और अपने जवान नौकर के साथ चुदाई के सपने देखने लगी थी.

आज होली के दिन वो अपने भाई भाबी के घर जाने वाला था तो मैंने उसे मेरी बहन सीमा के घर छोड़ देने को कहा.

अब आगे:

उसने सीमा के घर के पास में ही गाड़ी खड़ी की, मैं गाड़ी से उतरी, वह पीछे से बोला- मैं आप को सात बजे लेने को आऊंगा.

मैंने हा में सिर हिलाया और सीमा के घर चली गयी।

शाम के सात बजे थे, मैं राजू के फ़ोन की राह देखने लगी थी, सीमा के घर आकर कुछ अजीब ही लगा। सीमा और राकेश के बीच दूरियां बहुत बढ़ गई थी। राकेश शाम को काम के सिलसिले में बाहर चला गया था, सीमा से भी और कितनी बातें कर सकती थी। अब मुझे बोर लगने लगा था।

करीब बीस मिनट बाद राजू का फ़ोन आया, वह घर के पास आ गया था। मैंने सीमा को बाय बोला और नीचे आ गयी, वह गाड़ी में ही बैठा था। पूरी गाड़ी को रंग लगा हुआ था, राजू भी रंग से भीगा हुआ था। उसने गाड़ी का दरवाजा खोला, मैं गाड़ी में बैठ गयी और उसने गाड़ी चलानी शुरू की।

हम घर पहुँचे, सीमा ने आज फिर भांग और उसके नशे के बारे में बताया था। मन में आ रहा था राजू से मांग लूं पर फिर डर भी लग रहा था।

“मेमसाब खाना लगा दूँ?” राजू ने घर पहुँचते ही पूछा।

“थोड़ी देर में!” मैं उसको बोल कर सोफे पर बैठी, और भांग मांगने के बारे में सोचने लगी।

तभी राजू बाहर आया- मेमसाब दूध खराब हुई गवा, लैके आता हूं.

वह बोला और जाने लगा तो मैंने उसे आवाज दी- राजू यह भांग क्या होती है?

पहले तो वह थोड़ा डर गया फिर हिम्मत कर के बोला- वह नशे की पुड़िया होती है… क्यों… आप को चाही?

“सोच रही हूँ आज पी कर देख लूं, बहुत सुना है उसके बारे में!” मैं हंसती हुई बोली।

“अच्छा, मैं दूध लेकर आता हूं फिर देता हूं आपको बनाइके!” वह चला गया।

मैं ऊपर अपने बेडरूम में गयी, बाथरूम जाकर फ्रेश हो गयी, फिर बैडरूम में टीवी देखने लगी।

थोड़ी देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई तो मैंने दरवाजा खोला, राजू अपने हाथ में ट्रे लेकर खड़ा था।

मैंने उसे अंदर बुलाया।

“ईह लीजिये मेमसाब, स्पेशल भाँगवा… हमार यू पी स्पेशल!” बोलकर उसने टेबल पर ग्लास रखा और चला गया।

मैंने ग्लास हाथ में लिया, मन में आया कि पी लूं या कि नहीं पीऊँ?, यही चल रहा था मेरे मन में… पर नशे पर किसका जोर है।

मैंने एक घूंट पिया। काफी अजीब स्वाद था उसका… पहले दो तीन घूंट मुँह बनाकर पिये, पर बाद में आदत हो गयी।

आधा ग्लास पिया तो मेरा सिर चकराने लगा, मैं सोच रही थी कि कैसे पीते होंगे लोग यह ड्रिंक?

और एक दो घूंट पिये तो मेरा दिमाग ही सुन्न हो गया।

सामने टीवी चालू ही था, उस पर अब पुरषों के फैशन का शो चालू हो गया। एक एक आदमी अजीब अजीब ड्रेस पहनकर आने लगे। उनको देख कर मेरी चुत गीली होने लगी। उसका कारण ही ऐसा था, उनके मजबूत डोले, तेज नजर, हैंडसम चेहरा देख कर कोई भी गर्म हो जाता।

मैं वही शो देखने लगी, मेरी नसों में उत्तेजना बहने लगी। वैसे भी शरीर के बहुत से अंग सुन्न पड़ गए थे। उतने में एक मॉडल आया उसने ब्लू रंग का गाउन पहना हुआ था, और उसकी गाँठ आगे बांधी हुई थी। उसकी आँखें भूरी थी और बालों को किया हुआ कलर उसके चेहरे को सूट कर रहा था।

गाउन स्लीवलेस था इसलिए उसके हाथ के मसल्स साफ साफ दिख रहे थे। उसने स्टेज के आगे आकर अपने आगे की गांठ खोल दी तो उसका गाउन दोनों तरफ खुल गया, सामने का नजारा देखने लायक था।

उसने अंदर सिर्फ एक अंडरवियर पहना था, वो भी बिल्कुल छोटा। उसका अंडर वियर का जालीदार कपड़ा सिर्फ उसके लंड को ढक रहा था। उसका मस्क्युलर बदन किसी को भी अपनी तरफ खींच सकता था। उसके शरीर पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे और उसका गोरा चमकीला बदन मानो जैसे कि वह कामदेव ही हो।

वह सामने ही खड़ा हो कर अपना अंगूठा अपने अंडरवियर के इलास्टिक में डालने लगा, मुझे लगा कि अब वह अपनी अंडरविअर भी उतार देगा। मेरे हाथ अपने आप मेरी चुत पर आ गए। मैं अपनी चुत को भींच कर टीवी देखने लगी।

उसने हल्के से अपना अंगूठा इलास्टिक में घुमाया, फिर अपना भार दायें पैर से बायें पैर पर ले आया और मुस्कुरा कर पीछे मुड़ा। पीछे मुड़ कर वापस जाने लगा पर उसने अपना गाउन उतार दिया।

“अमेजिंग, एकदम सही!” मेरे मुंह से निकला।

उसके अंडर वियर को पीछे से सिर्फ एक धागा था वह भी सजे कूल्हों की दरार में घुसा हुआ था। उसके नितम्ब बिल्कुल नग्न थे, पीछे से भी उसका शरीर मस्कुलर था। धीरे धीरे चलते हुए वह स्टेज के पीछे चला गया।

वह चला गया लेकिन मेरी चुत में आग लगा कर गया। मेरी चुत अब पानी पानी हो गयी थी और मेरी पैंटी भी गीली हो गयी थी, मैं होश खो बैठी थी। टीवी पर एक एक कर कर मॉडल्स आ कर अपनी अंडर गारमेंट्स दिखाकर जा रहा था, पर उनका बदन मुझे पागल कर रहा था।

“मेमसाब, अब खाना लगा दूँ.” राजू बोला।

“हाँ लगा दो!” मैं टल्ली होने लगी थी।

राजू नीचे गया और नीचे से प्लेट लगाने की आवाजें आयी। मैंने ग्लास मुँह पर लगा कर बची हुई सारी भांग पी ली और बेड पर से उठने लगी।

मेरी पूरी पैंटी गीली हो गयी थी। मैंने बेड का सहारा लेते हुए गीली पैंटी को पैर से उतार दिया और बेड का सहारा ले कर चलने लगी। पर सब मुश्किल लग रहा था, लग रहा था कि पैर हवा में ही रुक रहे हैं।
 
मैं मुश्किल से एक दो कदम आगे बढ़ी फिर वही बेड पर बैठ कर राजू को आवाज दी।

राजू दौड़ता हुआ ऊपर आ गया- जी मेमसाब?

“राजूssss आज खाना यही लगाओ… मुझे चलना न…” नशे की वजह से मुझे चलना नहीं हो रहा यह भी बता नहीं सकती थी।

और मैं वही बेड पर गिर गई।

थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा के राजू मुझे बेड पर सुलाने की कोशिश कर रहा था, मैं उसको देख कर मुस्कुराई। वह बहुत सावधानी लेकर मुझे सुलाने की कोशिश कर रहा था, मेरे खुले बदन को और खास अंगों को स्पर्श ना हो इसकी कोशिश कर रहा था।

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसको अपने ऊपर खींचा, अचानक हुई इस घटना से वह संभल नहीं पाया और मेरे शरीर पर गिर गया।

पर अगले ही पल उसने खुद को संभाला और मेरे ऊपर से उठ गया। वह मुझसे दूर जाते हुए बोला- मेमसाब तनिक ठीक से सो… तकिया उधर है!

वह बोल रहा था… पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, मैं बस उसको देख कर मुस्कुरा रही थी। वह कुछ बोलता जा रहा था और मैं सिर्फ मुस्कुरा रही थी।

वह और पीछे हुआ और अचानक नीचे गिर गया। मैंने देखा यो वह मेरी गीली पैंटी पर फिसल कर गिर गया था।

उसने मेरी पैंटी को उठाकर अपने हाथों में पकड़ी।

“राजूsssss… तुमने भांग पिलाई… बहुत बढ़िया थी… बहुत अच्छा लगा पी कर!” मैं अब बड़बड़ाने लगी।

“मेमसाब आप ठीक से सो जाइये.” वह फिर से बोला पर मुझे होश कहाँ था।

“राजू… मेरा एक और काम करोगे?” मैं नशे में बोली।

“क्या मेमसाब?” उसने पूछा।

“मुझे अपना मक्खन खिलाओगे ना राजू??” सुनते ही वह चौंक गया।

“क… क… का” उसने पूछा वैसे ही मैं जोर जोर से हँसने लगी।

“मुझे भी तुम्हारा मक्खन चाहिए जैसे तुमने सीमा को खिलाया है.” कह कर मैं छोटी बच्ची की तरह रोने लगी।

“मेमसाब आप को ज्यादा हो गयी है… आप सो जाओ… सुबह अच्छा लगेगा.” कहकर वह जाने लगा वैसे ही मैं लड़खड़ाते हुए उठी और उसका कुर्ता पकड़कर उसे रोकने की कोशिश करने लगी।

पर नशे की वजह से ठीक से खड़ी नहीं हो सकी और उसका कुर्ता हाथों में पकड़े रख कर ही नीचे गिर गई।

उसका पूरा कुर्ता फट गया।

वह डर कर पीछे मुड़ा, मैं उसके पैरों के पास ही घुटनों के बल गिर पड़ी थी। उसके मेरी तरफ मुड़ते ही उसका लंड मेरे मुँह के सामने आ गया।

मैंने हंसते हुए उसके लंड को पकड़ा, धोती और निक्कर के अंदर छुपा उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था। मैं उसके लंड को सहलाने लगी वैसे ही वह बोला- मेमसाबssss ईह का कर ही हो…

उसके बोलते ही मैं और जोश में आ गयी और धीरे से उसका लंड सहलाने लगी, वह भी सिसकारियाँ लेने लगा।

उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था मेरी चुत भी पानी छोड़ रही थी और मेरे गाउन को भीगो रही थी।

“मेमसाब, छोड़ो मुझे!” कहकर वह अपने लंड से मेरा हाथ हटाने की कोशिश करने लगा।

पर मैं उसका लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी।

उसने एक झटका दे कर मेरा हाथ हटा दिया पर वह वहाँ से गया नहीं। उसकी भी हालत ‘चाहिए… चाहिए… नहीं…’ हो रही थी।

मैं उठने की कोशिश करने लगी पर अचानक गिर पड़ी, तभी उसने मुझे संभालने की कोशिश की। उसी वक्त मेरा एक स्तन उसके हाथ के नीचे आ गया। उसके मजबूत हाथों के नीचे मेरा स्तन मसल गया था और मेरा पूरा शरीर रोमांचित हो गया।

मैंने उसे अपनी बाहों में ज़ोरों से पकड़ लिया। मैंने अपने स्तन उसकी छाती पर दबाए रखे हुए थे और नीचे से कमर हिलाते हुए मेरी चुत उसके लंड पर रगड़ रही थी।

उसका प्रतिकार अब कम हो गया था। कितना भी ईमानदार क्यों न हो वह भी एक पुरुष था, वह अपने हाथ मेरी पीठ पर ले कर आ गया। मैं भी उसको ज़ोरों से भींचते हुए मेरी चुत को उसके लंड पर घिसने लगी।

अचानक ही उसने मुझे धक्का दे दिया और बेड पर गिरा दिया, फिर उसने अपना फटा हुआ कुर्ता निकाल फेंका।

उसके शरीर पर हल्के बाल थे, उसकी मजबूत छाती पर एक दो जगह काटने के निशान थे। साँवले रंग के छाती पर उसका छोटा काला ऐरोला चमक रहा था और उसके बीच में उसका निप्पल किसी मनी की तरह फूला हुआ था।

वह कमर के उपर से नंगा ही मेरे पास आ कर खड़ा हो गया, उसने बदन की मादक खुशबू मेरी नाक में भर गई। मैंने उसके लंड को फिर से पकड़ कर सहला दिया और आगे झुकते हुए उसको चूमा।

“सsssss” सिसकते हुए उसने अपनी कमर आगे की जैसे बिना बोले कह रहा हो कि ‘मेमसाब मेरा लंड खोल दो।’
 
उसके शरीर पर हल्के बाल थे, उसकी मजबूत छाती पर एक दो जगह काटने के निशान थे। साँवले रंग के छाती पर उसका छोटा काला ऐरोला चमक रहा था और उसके बीच में उसका निप्पल किसी मनी की तरह फूला हुआ था।

वह कमर के उपर से नंगा ही मेरे पास आ कर खड़ा हो गया, उसने बदन की मादक खुशबू मेरी नाक में भर गई। मैंने उसके लंड को फिर से पकड़ कर सहला दिया और आगे झुकते हुए उसको चूमा।

“सsssss” सिसकते हुए उसने अपनी कमर आगे की जैसे बिना बोले कह रहा हो कि ‘मेमसाब मेरा लंड खोल दो।’

मैंने उसकी तरफ देखा तो वह मुझे ही देख रहा था। मैं उसके सामने खड़ी हुई फिर अपने हाथ ऊपर उठाकर अपनी आंखें बंद कर के खड़ी होकर उसे मेरा गाउन उतारने का निमंत्रण दिया। पर उसके मन में कुछ और ही था, उसने मुझे धक्का दे कर बेड पर पटक दिया फिर मेरा एक पैर उठाकर तलवे को चूमा।

रोमांच की लहर मेरे पूरे बदन में दौड़ गई।

वह मेरा मेरे तलवे को चूमते हुए आगे बढ़ा और मेरे घुटनों तक चूमा, फिर दूसरे पैर से शुरुआत करते हुए मेरी जांघों तक पहुंचा। मेरा गाउन भी मेरे बदन को जांघों तक ही ढक रहा था।

वह धीरे धीरे गाउन को ऊपर उठाते हुए मेरी जांघों को नंगा कर रहा था और उनको चूम रहा था। पर मेरा गाउन मेरी गांड के नीचे अटका हुआ था इसलिए ऊपर सरक नहीं रहा था।

मैंने अपने चूतड़ उठाकर उसको मेरे गाउन को मेरी गांड के नीचे से निकालने में मदद की, उसने गाउन को मेरी गांड से पीठ के नीचे सरका दिया, अब मेरी कमसिन चुत उसके सामने नंगी हो गयी।

वह घुटनों के बल बैठा और अपने दोनों हाथ मेरे घुटनों पर रखे। मेरी चुत से बहता हुआ पानी उसके मुँह में भी पानी ला रहा था।

वह धीरे धीरे झुकते हुए अपने होंठ मेरे चुत के होठों के करीब लाया, उसकी गरम सांसें मेरी चुत से टकरा रही थी। उसने एक लंबी सांस लेते हुए मेरी चुत की खुशबू अपने फेफड़ों में भरी और दूसरे ही पल उसकी जीभ मेरी चुत की पंखुड़ियों पर घूमने लगी।

“आsss राजूsss” मैं सिसकार उठी।

उसने मेरे चुत के दाने को अपने होठों में पकड़ा और खींचा, मेरी चुत का पानी दाने के ऊपर से बहता हुआ उसके मुंह में चला गया।

उसने मेरा पानी चखते हुए बोला- मेमसाब तोहार लस्सी तो एकदम नशीली है!

सुनते ही मेरे अंदर की वासना बढ़ने लगी और मैंने उसको बोला- तुम हमार लस्सी पिवत है… हमको भी तोहार लस्सी खिलावत है या नहीं?

उसकी भाषा में बोलते ही वह हँसने लगा।

“हा… हा… क्यों नहीं… पर पहले तोहार लस्सी का मजा तो ले लूं!” कहकर उसने फिर से अपना मुँह मेरी जांघो में घुसाते हुए अपनी जीभ मेरी चुत की दरार में डाल दी। उसका थूक मेरी चुत के रस में घुल रहा था, मेरी चुत का दाना भी फूल गया था।

अचानक ही उसकी जीभ मेरे दाने से रगड़ गयी- “उम्म्ह… अहह… हय… याह…” मैं सिसकारियाँ लेने लगी।

वह मेरा दाना चूसने में व्यस्त था।

मेरी चुत में पानी का स्तर बढ़ने लगा, मैंने अपनी टांगें चौड़ी करने से और जोर से चूसने का निमंत्रण दिया, वह भी मजे से मेरी चुत के होठों को तो कभी मेरे दाने को चूस रहा था।

मेरी चुत ने उसकी जीभ को पकड़ लिया और अंदर खींचने लगी, क्या हो रहा है समझने में उसको ज्यादा देर नहीं लगी और मेरी चुत के पानी का घूंट पीते हुए वह खड़ा हो गया। फिर मेरे टांगों में अपने आप को सेट करते हुए अपना लंड मेरी चुत पर रखा। उसने एक बार अपने लंड को मेरी चुत पर नीचे से ऊपर तक रगड़ा और फिर मेरी चुत की दरार में फंसाते हुए अंदर धकेला। उसने आधी ही सुपारी अंदर धकेली और फिर से बाहर निकाली।

“डालो न… अंदर डालो… जल्दी!” मैं अपनी कमर को हिलाते हुए उसका लंड मेरी चुत में लेने की कोशिश करने लगी।

“का मेमसाब… आपकी चुत तो गरम हुई गयी… पर हमारे लंड का क्या?” वह मुस्कुराते हुए बोला।

“वह तो कब से खड़ा है!” मैं बोली।

“हाँ पर तनिक मुँह में लो लै लो न!” वह बोला।

“लूंगी… बाद में लूंगी… पहले मेरी चुत को शांत करो!” मैंने अपने हाथों से उसका लंड पकड़कर मेरी चुत पर रखा।

“ठीक है!” कहकर उसने हल्का सा धक्का दिया तो उसके लंड की सुपारी मेरी चुत में आराम से घुस गई।
 
बहुत ही बड़ी और कड़क थी उसकी सुपारी। उसका लंड सीधा नहीं था, थोड़ा टेड़ा था, बिल्कुल केले की तरह। इसलिए जब उसका आधा लंड अंदर घुस गया था तो अजीब घर्षण का अनुभव दे रहा था।

उसका आधा लंड मेरी चुत में घुसा था पर मुझे पूरा अंदर चाहिए था, बिल्कुल जड़ तक। इसलिए मैं अपनी कमर उठाते हुए उसको पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी।

थोड़ी देर अंदर बाहर करने के बाद उसने अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकाल दिया।

मैंने नाराजगी से उसकी तरफ देखा- क्यों निकाला तुमने?

मैंने पूछा।

“अब तनिक मुँह में लै के मस्त कराई दो इसे!” वह बोला।

“ऐसे ही?” उनका लंड पूरा मेरे कामरस से सना हुआ था।

“हाँ तो का हुवा, ईह तो तोहार ही लस्सी है ना!” वह हंसते हुए बोला और अपना लंड अपने हाथ से हिलाते हुए मेरे पास आया।

बेड पर चढ़ के उसने सिक्सटी नाइन पोजीशन ली और उसने अपना लंड मेरे होठों के नजदीक लाया। फिर कमर हिलाते हुए अपना लंड मेरे होठों पे रगड़ने लगा। उसके लंड की गर्माहट से मैंने अपने होंठ खोले और मेरी जीभ उसके लंड पर घुमाई।

उत्तेजना से उसका लंड और कड़क हो गया। एक उग्र और अजीब टेस्ट थी उसकी, वह मेरे ही कामरस की थी जो उसके लंड पर लगा था।

उसने फिर से कमर हिलाते हुए लंड को नीचे किया मैंने अपने होंठ खोले। उसका सुपारा मेरे मुँह में घुस गया, मैंने मुँह के अंदर ही मेरी जीभ उसके सुपारे पर घुमाई। उसका आधे से ज्यादा लंड मेरे मुँह में घुस गया था और मेरे गले तक घुस गया था। और अंदर नहीं जा सकता यह समझकर उसने अब मेरे मुँह में धक्के देने शुरू कर दिए।

“ईह लो… बहुत बढ़िया है तोहार मुँह!” वह बड़बड़ाने लगा।

“उम्म… उम्म… उम्म!” मैं बोलने का प्रयास कर रही थी पर उसका लंड लगातार मेरे मुँह को चोद रहा था।

“तोहार मुँह में हमार मक्खन दै दे का, अभी पियोगी या बाद मैं?” वह मुझे पूछ रहा था पर बात किसे करने को आ रही थी।

“उम्म… उम्म… ममम..” मैं सिर को ना में हिलाते हुए बोली।

“तो अभी का चाही तुमका?” वह हसते हुए बोला मैंने नजरों से उसे अपनी चुत की तरफ इशारा किया।

“हाँ… ईह लो… अभी देत है तुम का गीला कराई के!” कहते हुए वह नीचे झुका और मेरी चुत के होठों पर जीभ घूमने लगा।

उसकी जबान मेरी चुत पे ऊपर नीचे घूम रही थी, बीच बीच में वह मेरे दाने को भी काट रहा था। अब उसकी जीभ मेरी चुत के अंदर घुसने लगी, मेरे चुत के अंदर आग लगने लगी। उसी वक्त वह अपनी कमर हिलाते हुए मेरे मुँह को चोद रहा था।

कुछ देर हम सिक्सटी नाइन आसान का आनंद लेते रहे, अब मेरी चुत फिर से गरम हो गयी थी। मुझे अब उसका मूसल मेरी चुत में चाहिए था, मैं “उम्म… उम्म..” करके उसको यह बता रही थी। पर उसको समझ नहीं आ रहा था, तो मैंने लंड चुसाई चालू रखी और उसके सिर को अपनी जांघों में भींच लिया। उसका दम घुटने से उसने अपना सिर मेरी जांघों से छुड़ा लिया और अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया।

“मेमसाब अब ठीक से लेट जाओ… हम तोहार ऊपर आवत हैं.” वह बोला।

“नहीं अब तुम लेटो… मैं ऊपर आती हूँ.” मुझे अब उसके लंड पर पूरा कंट्रोल चाहिए था, उसका पूरा लंड मुझे अपनी चुत में लेना था।

वह नीचे लेट गया, मैं उसके ऊपर बैठते हुए अपनी चुत को उसके लंड के ऊपर ले आयी, फिर उसके लंड को मेरी चुत की दरार पर रख कर एक झटके में नीचे बैठ गई।

उसका पूरा लंड जड़ तक मेरी चुत में समा गया था, मुझे एक अलग ही उत्तेजना महसूस हुई, मैंने फिर से उसका लंड मेरी चुत से निकाल लिया और हाथों से अपनी चुत के दरार पर रख कर झट से उस पर बैठ गई।

उसके लंड के टेढ़ेपन की वजह से एक अलग ही उत्तेजना मिल रही थी, उसका लंड मेरी बच्चेदानी के मुँह तक पहुँचा था।

मैंने फिर से कमर उठायी, उसका लंड मेरी चुत के अंदर की दीवार को घिसते हुए बाहर आ गया। अब मैं उसके लंड पर उठक बैठक करने लगी। उसने अपने मर्दाना हाथ मेरे स्तनों पर रखे, अपनी उँगलियों में मेरे निप्पल्स को पकड़ते हुए उनको मसलने लगा, जैसे कि वह आटा मल रहा हो। उसको आटा मलने की आदत ही थी, पर उससे एक अलग ही उत्तेजना मिल रही थी और मैं और जोश में उसके लंड पर उछल कूद कर रही थी। उसको भी उस बात से उत्तेजना मिल रही थी तो वह और जोश में मेरे स्तनों को मसल रहा था।

पाँच सात मिनट तक उसके लंड पर नाचने के बाद मेरी सांस फूलने लगी और मेरी स्पीड कम हो गयी, उसने भी अपने मसलने की स्पीड को कम किया। कुछ समय बाद मैं वैसे ही उसका लंड अपनी चुत में रखकर उसके शरीर पर गिर गई।

“का हुई गवा मेमसाब… थक गई?” वह हंसते हुए बोला।

“हाँ…” मैं अपनी फूली हुई साँसों पर कंट्रोल करते हुए बोली।

“तो फिर चलो मैं आवत हूँ आपके ऊपर!” कहकर उसने मुझे अपनी बांहों में लेकर पलट दिया। उसका लंड मेरी चुत से निकाले बिना ही वह पलट कर मुझे अपने नीचे ले आया और खुद मेरे ऊपर आ गया।

पूरी प्रक्रिया में उसका लंड मेरी बच्चेदानी को रगड़ रहा था।
 
मेरे ऊपर सेट होने के बाद उसने अपना लंड सुपारी तक बाहर निकाला और एक जोर का धक्का दिया।

“आहsss… धीरे!” मैं कराह उठी।

“ईह का मेमसाब इतना हल्का धक्का लगाए है हम, और आप हो कि, फिर आगे कैसे होगा?” वह धक्के देते हुए ही बोल रहा था।

शुरू शुरू में हल्के धक्के देते हुए अब उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैं भी उसको साथ देने लगी, उसके धक्कों से पूरा बेड हिलने लगा था, मैं भी उसमे जोश भर रही थी।

“आह… राजू… जोर से… और जोर से… फाड़ डाल मेरी चुत को!”

“ईह लो… ईह लो… आज बनाता हूँ तोहार चुत का भोसड़ा…” मुझे जवाब देते हुए वह ज़ोरों से धक्के लगाने लगा।

कुछ देर अपनी चरम स्पीड में मुझे चोदने के बाद उसका बदन अकड़ने लगा।

“मेमसाब हम आय रहे है… तोहार चुत मा… ईह लो हमार मक्खन!” वह ऐसा बोला फिर मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर उसको धक्का दे कर बेड पर गिरा दिया, तब तक प्री कम की कुछ बूंदें उसके लंड से बाहर आ गयी थी, मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में लेकर के जोर ज़ोर से चूसने लगी।

वह बेड पर शांति से लेटा था, मैं उसके लंड पर मूठ मारते हुए उसका लंड चूस रही थी। कुछ ही देर बाद उसका लंड अकड़ गया और अगले ही पल उसके कामरस की तेज धार मेरे गले में गिरी, फिर दूसरी फिर तीसरी, चौथी।

फिर वह शांत हो गया, मैंने उसके रस को वैसे हो मुँह में रखा और उसका लंड मुँह से बाहर निकाल लिया, कुछ रस पेट में चला गया था तो कुछ ओवरफ्लो हो कर होठों से बाहर बहने लगा था। मैंने वाशरूम में जाकर अपना मुँह अच्छे से धोया और अपनी चुत भी ठीक से साफ की।

अब तक भांग का नशा उतरने लगा था, राजू ने हाथ का सहारा देते हुए मुझे बेड पर सुलाया और मुझे नींद आ गयी।

उस दिन से राजू मुझे रोज चोदने लगा। चार पांच दिन बाद बद्री चाचा ने मेरे पति को फ़ोन कर के बता दिया कि उम्र होने की वजह से वह अब काम नहीं कर सकता और उसने रिटायरमेंट ले ली। अब राजू ही हमारा परमानेंट नौकर है जो इस घर का और हम दोनों बहनों की चुत की सेवा करता है।
 
Back
Top