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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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71

नाज़िया बाहर बाथरूम मे चली गयी….और मैं पानी पीने के लिए किचन मे चला गया….पानी पीने के बाद जब मैं नाज़िया के रूम मे पहुँचा तो, देखा कि नाज़िया बेड पर घुटनो के बल थी….और आगे की तरफ झुक कर बेडशीट को ठीक कर रही थी….उसकी बाहर की तरफ निकली बुन्द देख कर मेरा मन फिर से मचल उठा…मैने आगे बढ़ कर पीछे नाज़िया की बूँद को मुत्थियों में भर कर मसलना शुरू कर दिया…..”अहह सीईईईईईईईई समीर…..” नाज़िया ने सिसकते हुए गर्दन घुमा कर पीछे की तरफ देखा पर उसने कोई रियेक्शन नही दिया…..और आगे की तरफ खिसकती गयी…..नाज़िया ने रज़ाई पकड़ी और अपने ऊपए लेकर करवट के बल लेट गयी…. उसकी पीठ मेरी तरफ थी…… वो फिर से ऐसे रिएक्ट कर रही थी…..जैसे हम दोनो के दर्मियान कुछ हो ही ना….पर मैं आज अपने दोनो के बीच की सारी दूरियाँ मिटा देना चाहता था…

मैं बेड पर चढ़ा और रज़ाई के अंदर घुस गया….और पीछे से नाज़िया को अपनी बाज़ों मैं लेकर उसके जिस्म से लग गया…..नाज़िया की पूरी बॅक साइड मेरे फ्रंट से टच हो रही थी….यहाँ तक कि मुझे अपना आधा खड़ा लंड भी उसकी नंगी बुन्द के पार्ट्स के दर्मियान महसूस हो रहा था….

मैं: क्या हुआ नाराज़ हो….?

मैने अपने हाथ को धीरे उसके पेट पर फेरते हुए कहा….और साथ ही धीरे-2 अपने लंड को उसकी बुन्द की लाइन में दबाने लगा….

.”समीर…..” नाज़िया ने सरगोशी से भरी पर बड़ी ही सीरीयस आवाज़ में मेरा नाम लिया….

.”हां बोलो….क्या बात है….?” मैने धीरे-2 अपने हाथ को नाइटी के ऊपेर से नाज़िया के राइट मम्मे पर रख कर दबाते हुए कहा….

”समीर हम जो भी कर रहे है वो ठीक नही है…हम दोनो के बीच से सब कुछ नही होना चाहिए…..”

मैं: क्यों क्या हुआ…नाज़िया मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…..

नाज़िया: शायद तुम सच कह रहे हो समीर…..पर ये मुनकीन नही है….हम दोनो को ऐसे रिश्ते में नही पड़ना चाहिए…जिसका कोई अंज़ाम ही ना हो…..

मैं: मैं कुछ समझा नही….देखो तुम खुल के बात करो….

नाज़िया: देखो समीर…..मैं तुम्हे पहले भी ये बता चुकी हूँ कि, तुम्हारे अब्बू अब मुझसे प्यार नही करते…और वो अब दूसरी शादी करना चाहते है….

मैं: तो क्या तुम भी अब्बू से अलग होने के बाद दूसरी शादी करना चाहती हो…

नाज़िया: नही समीर…..मैं थक चुकी हूँ… मैं सिर्फ़ यही कहना चाहती हूँ….. आज नही तो कल तुम्हारे अब्बू मुझसे इस बारे में ज़रूर बात करेंगे….और फिर मुझे मजबूरन उनको तलाक़ देना पड़ेगा…फिर मुझे और नज़ीबा को ये घर हमेशा के लिए छोड़ कर जाना पड़ेगा…..और मैं नही चाहती कि, तुम मेरे पीछे अपनी लाइफ बर्बाद करो…..तुम्हारे आगे सारी जिंदगी पड़ी है….तुम्हारा फ्यूचर तुम्हारे अब्बू के साथ है…मेरे पीछे पड़ कर तुम्हे क्या मिलेगा…सिर्फ़ बदनामी ही मिलीगी….ये दुनिया हमारे इस बेनाम रिश्ते को कभी कबूल नही करेगी….मैं अकेली होती तो और बात थी….पर नज़ीबा…..मुझे उसके फ्यूचर के बारे में भी सोचना है….समीर तुम समझदार हो….मुझे उम्मीद है कि तुम मेरी बात को समझोगे…..

मैं: मैं सब समझता हूँ नाज़िया…..पर मैं अब तुम्हारे बिना नही रह सकता…. तुम मुझ पर भरोसा रखो….तुम्हारी तरफ कोई आँख भी उठा के नही देखेगा….मैं वादा करता हूँ…तुम्हारी इज़्ज़त पर कोई दाग नही आएगा….पर प्लीज़ मुझसे दूर मत होना… मैं सब कुछ संभाल लूँगा…मुझे एक बार मोका देकर तो देखो….

नाज़िया: समीर मुझे कुछ समझ में नही आ रहा…..और तुम भी तो समझने की कॉसिश नही कर रहे….समीर मुझे सोचने के लिए थोड़ा सा वक़्त दो…..

मैं: ठीक है सोच लो…पर एक बात याद रखना….अगर तुम मुझसे दूर हुई तो, मैं जिंदा नही रह पाउन्गा….

 


नाज़िया: समीर पागलो जैसी बाते मत करो….अभी तुम्हारी उम्र नही ये सब सोचने की….चलो मान लो कि अगर मैं मान भी लूँ तो तुम बताओ जब तुम्हारे अब्बू दूसरी शादी कर लेंगे…..तो तुम क्या करोगे….तुम उन्हे रोक सकते हो दूसरी शादी करने से…..

मैं: शायद नही….

नाज़िया: तो फिर क्या करोगे….क्योंकि मैं इतनी गिरी हुई और मजबूर नही हूँ कि तुम्हारे अब्बू मेरे होते हुए दूसरी शादी कर लें और मैं यहीं इस घर में बैठी रहूं… तुम क्या चाहते हो तुम्हारे अब्बू की दूसरी शादी के बाद मैं यही रहूं….

मैं: नही….ये फैंसला तुम्हारा है….

नाज़िया: तो फिर क्या तुम अपने अब्बू को छोड़ कर मेरे साथ रहोगे….दुनिया क्या कहेगी…तुम्हें अच्छा लगेगा कि तुम मेरे ऊपेर बोझ बनो और दुनिया तुम्हे ताने दे….

मैं: नही…..फिर तुम ही बताओ मैं क्या करूँ…..

नाज़िया: समीर अपनी स्टडी पर ध्यान दो…और जल्द से जल्द सेट्ल हो जाओ…फिर बाद मे देखेंगे….ताकि अगर कल को तुम्हे अपने अब्बू से अलग भी होना पड़े तो तुम्हे किसी के ऊपेर बोझ ना बनना पड़े….और मुझे भी सोचने का वक़्त दो…. अब तुम अपने रूम मे जाकर सो जाओ…..

नाज़िया ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने मम्मे से हटा दिया….नाज़िया की बातों को सुन कर मैं सुन्न हो चुका था….आख़िर मेरा वजूद ही क्या था…अगर नाज़िया और अब्बू का डाइवोर्स हो जाता तो मजबूरन मुझे अब्बू के साथ रहना पड़ता….और अगर नाज़िया के साथ रहता तो दुनिया वाले नाज़िया और मुझे जीने नही देते…मैं वहाँ से उठ कर अपने रूम में आ गया….और फिर बेड पर रज़ाई लेकर लेट गया…और सोचने लगा कि अब क्या करूँ…..और अपनी मुसीबतों से पार पाने का एक ही रास्ता नज़र आ रहा था कि, मुझे अब जल्द से जल्द इनडिपेंडेंट बनना है….यही सब सोचते-2 पता नही चला कब नींद आ गयी….

अगले दिन जब आँख खुली तो, देखा कि नाज़िया बॅंक जाने के लिए तैयार थी….”समीर नाश्ता बना दिया है खा लेना….मैं बॅंक जा रही हूँ….” नाज़िया ने अपना पर्स उठाया और बाहर चली गयी…

.”दोस्तो दो दिन इस तरह गुजर गये….नाज़िया से मेरी नॉर्मली बात होती पर उससे ज़यादा कुछ ना हुआ….तीसरे दिन दोपहर का वक़्त था….और दो दिन बाद फिर से कॉलेज शुरू होना था…मैं घर पर बैठा अकेला बोर हो रहा था….मैं सबा के घर भी जाकर आ चुका था….सबा दो दिनो से किसी रिश्तेदार के घर गयी हुई थी.. सुमेरा चाची और रीदा के घर भी जाना मुनकीन नही था….क्योंकि रीदा का शोहार गल्फ से एक महीने की छुट्टी पर वापिस आया हुआ था…और इस वक़्त सुमेरा चाची के घर पर ही था….

जब घर पर बैठे-2 बोर हो गया तो, सोचा क्यों ना सिटी जाकर किसी दोस्त से मिल लूँ.. मैने अब्बू की बाइक बाहर निकाली और घर को लॉक लगा कर सिटी की तरफ चल पड़ा… घर से निकलने से पहले ही मैने अपने एक दोस्त को कॉल करके बस स्टॅंड पर बुला लिया था….दोस्त को बस स्टॅंड से पिक किया और हम दोनो एक रेस्टोरेंट में पहुँच गये… वहाँ हमने खाने के लिए ऑर्डर किया और इधर उधर की बातें करने लगे….तभी मेरी नज़र सबीना पर पड़ी….वो दूसरी रो के टेबल पर किसी औरत के साथ बैठी हुई थी…. उसे देख कर नज़ाने क्यों मेरा खून खोलने लगा….मैं सोचने लगा कि, अगर सबीना अब्बू की जिंदगी में ना होती तो, आज ना तो नाज़िया दुखी होती और ना ही मैं….मुझे सबीना पर बहुत गुस्सा आ रहा था….वो तो मेरे अब्बू को भी धोखा दे रही थी….पर मैने दिल ही दिल मे सोच लिया था चाहे कुछ भी हो जाए…

इसको इसके किए की सज़ा तो देनी ही है…तभी वो लेडी जो उसके साथ बैठी थी वो सबीना से बोली….”यार कोई चक्कर चला ना…मेरे बेटे ने इस साल 12थ कर ली है… और तुम तो जानती ही हो कि, हमारे पास इतने पैसे नही है कि, उसे मजीद पढ़ा सके…यार तुम्हारी तो ऊपेर तक बड़ी पहुँच है….मेरे बेटे को किसी गवर्नमेंट जॉब पर लगा दे…”

सबीना: घबरा ना यार….तुम फिकर मत करो…..मार्च मैं हमारी बॅंक नये पोस्ट निकालने वाली है….तुम्हारे बेटे की सेट्टिंग करवा दूँगी….वैसे भी एक आध को तो जॉब दिलवा ही सकती हूँ….

सबीन हवा में बातें नही कर रही थी….यहाँ तक मैं उसे जानता था…उसका काफ़ी रसूख् था….उसके वालिद की भी काफ़ी चलती थी…..सबीना की बात सुन कर मुझे आइडिया आया और मैने मन ही मन सोचा कि, ये साली ही अब मेरी मुसीबतों का हल करेगी… अब किसी तरह इसे अपने काबू में करना होगा….थोड़ी देर बाद वेटर हमारा ऑर्डर ले आया….हमने जल्दी -2 खाना खाया…और फिर मैने अपने दोस्त को उसके घर छोड़ा और सबीना के घर की तरफ चल पड़ा….मैने डोर बेल बजाई तो, थोड़ी देर बाद अहमद ने गेट खोला….और मुझे देख मुस्कराते हुए बोला….”और जी ख़ान साहब कैसे हो…?”

मैं: मैं ठीक हूँ….आज़म कहाँ है….?

अहमद: वो तो जी घूमने गये है अपने मामू के घर…..

मैं: और तुम्हारी मालकिन…..

अहमद: वो तो जी बॅंक में है…

मैं: ओह्ह अच्छा…यार वो क्या मैं आपनी गर्लफ्रेंड को आज वहाँ कोठी पर लेकर जा सकता हूँ…

अहमद: नही नही साह जी….आज तो वो मालकिन के होने वाले शोहार आने वाले है.. आज नही….फिर किसी दिन का प्रोग्राम रख लो….मैं भी वही जाने वाला था….

मैं: अच्छा वैसे कितने बजे आना है उनको….

अहमद: मालकिन और वो अंकल तो शाम को 6 बजे पहुँचेंगे ….

मैं: चल ठीक है फिर मैं चलता हूँ…

अहमद: रूको शाह जी…..वैसे आज क्या प्रोग्राम है….

मैं: बोलो अहमद….

अहमद: वही मिलते है अपने पुराने अड्डे पर….

मैं: कितने बजे मिलोगे…..

अहमद: 6 बजे मालकिन और अंकल आ जाएँगे….उसके बाद 6:30 बजे मिलते है…हम अपना प्रोग्राम बना लेंगे और तब तक वो दोनो अपना एंजाय कर लेंगे….

मैं: ठीक है…..तो 6: 30 बजे मिलते है…

अहमद: ठीक है शाह जी….

 


उसके बाद मैं वहाँ से गाओं वापिस आ गया…शाम को नाज़िया 6 बजे घर वापिस आई… मैने पहले से ही बहाना सोच के रखा था कि, मुझे नाज़िया को क्या कहना है… नाज़िया ने कपड़े चेंज किए और फ्रेश होकर किचन मे रात का खाना बनाने के लिए चली गयी…..मैं उठ कर रूम से बाहर आया….और किचन के डोर के साथ पीठ लगा कर खड़ा हो गया….नाज़िया ने गर्दन घुमा कर मेरी तरफ देखा और फिर से अपने काम में लग गयी…

..”मेरे लिए खाना मत बनाना…..?” मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए कहा….तो नाज़िया ने पलट कर मेरी तरफ देखा और बोली…..” क्यों क्या हुआ….?”

मैं: वो आज मैं अपने दोस्त के घर जा रहा हूँ….उसकी बर्तडे पार्टी है…इसीलिए रात वही रहूँगा….

नाज़िया: पर समीर मैं घर पर अकेली कैसे रहूंगी…..

मैं: क्यों तुम्हे अकेले डर लगता है…?

नाज़िया: नही समीर फिर भी…..

मैं: जाना ज़रूरी है….वरना दोस्त ने नाराज़ हो जाना है….

नाज़िया: ठीक है……

नाज़िया ने गहरी साँस ली और फिर से काम में लग गयी….मैं अपने रूम में आया और जल्दी-2 तैयार हुआ और नाज़िया को बता कर घर से निकल गया…मेन रोड पर पहुँच कर मैने बस पकड़ी और मैं 6:30 वही उसी जगह पर पहुँच गया….जहाँ पर मैने और अहमद ने शराब पी थी.. और मुझे अहमद वही बाहर खड़ा नज़र आ गया….. मैने अहमद से हाथ मिलाया….”तो आ गये शाह जी…..मैने तो सोचा कि शायद आप इतनी ठंड मे ना आएँ…..”

मैं: यार आना तो था ही….अच्छा तुम रूको….मैं बॉटल लेकर आता हूँ….

मैने वहाँ से शराब की एक बॉटल ली और हम उस शॉप के अंदर चले गये… वहाँ पहुँच कर मैने चिकन ऑर्डर किया….और फिर जाम का दौर शुरू हो गया….हम दोनो पहले इधर उधर की बातें करते रहे….और फिर जब एक पेग ख़तम हुआ….तो मैने अहमद से पूछा….”और सुनाओ….वो तुम्हारे अंकल आ गये है या नही…” अहमद ने फिर से ग्लास में दूसरा पेग बनाते हुए मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला….”हां आ गये है….वहाँ भी जाम का दौर शुरू है…”

मैं: अच्छा….तो आज तो फिर तुम्हारी ऐश होने वाली है….?

अहमद ने थोड़ा सा शरमाते हुए मेरी तरफ देखा और दूसरा पेग खींच कर बोला… “ कहाँ ख़ान शहाब यार मैं तो तंग आ गया हूँ….सिर्फ़ पैसो के लिए ये सारे काम कर रहा हूँ…यार इन औरतों ने तो मुझे चूस कर रख दिया है….” अहमद ने थोड़ा गुस्से में कहा….और फिर तीसरा पेग बना कर भी खेंच लिया

…”क्यों क्या हुआ… यार तेरी तो मोज है…फिर तू ऐसी बात क्यों कर रहा है….” मैने अपना दूसरा पेग बनाया और पीने लगा…

अहमद: अब क्या बताऊ ख़ान साहब….इससे पहले मैं अपने गाओं के पास ही एक बड़े ज़मींदार के घर में काम करता था…उसके दो बेटे थे….बड़े बेटे की मौत हो गयी थी….उसकी पत्नी जो उस टाइम 40 के आसपास थी….उसने मुझे अपने जाल मे ऐसा फँसाया कि, क्या बताऊ…फिर एक दिन छोटे बेटे की वाइफ ने हम दोनो को देख लिया और फिर मैं उन्दोनो जेठानी देवरानी के जाल में ऐसा फँसा कि 4 साल में उन्होने ने मेरा सब कुछ चूस लिया….फिर एक दिन उनके ससुर को मुझ पर शक हो गया…पर उन्होने बात दबा ली…कि उनकी बेज़्जती ना हो और मुझे काम से निकाल दिया….उसके बाद मैं यहाँ पर आ गया…

मैं: यार पर सेक्स तो मैं भी करता हूँ…..ऐसा तो नही होता….

अहमद: शाह जी आप मैं और मुझे बहुत फरक है….मुझ ग़रीब को जो सुखी रूखी मिलती थी…खा लेता था….ताक़त कहाँ से आनी थी…जो थी वो उल्टा उन्होने निचोड़ ली….

अहमद की बात पूरी होने के बाद हम दोनो ठहाका लगा कर हँसने लगे…”अहमद ने अपना चोथा पेग भरा और अपना ग्लास उठा कर मुझे देखते हुए बोला…”और रही सही कसर इसने पूरी कर दी हाहाहा….”

आज मेरा प्लान कामयाब हो रहा था….अहमद आधे से ज़यादा बॉटल पी चुका था और मैने अभी तक दूसरा पेग ही पकड़ा हुआ था…धीरे-2 अहमद ने अपनी बॉटल ख़तम कर दी…अहमद एक दम नशे में चूर हो चुका था…और उससे बोला भी नही जा रहा था…7:30 बज चुके थे….अहमद ने दीवार पर लगी घड़ी पर नज़र डाली और फिर लड़खड़ाती हुई ज़ुबान मे बोला…..”शाह जी आप तो लेट हो रहे हो…आपको अब घर चले जाना चाहिए….”

मैं: यार चला तो जाउ….पर घर पर अब्बू को पता चला कि मैं पीकर आया हूँ तो बहुत नाराज़ होंगे….यार कुछ कर ना…मैं इस हालत में घर नही जा सकता….

अहमद: शाह जी मेरे होते हुए घबराने की ज़रूरत नही है….आप मेरे साथ चलो… आज यही कोठी पर सो जाना….

मैं: पर यार वो तेरी मालकिन और अंकल….

अहमद: शाह जी मेरे होते हुए घबराने की ज़रूरत नही…अंकल तो शराब पीकर ऐसे सोते है….कि सुबह ही उठना है….और रही बात मालकिन की तो, ऊपेर इतने रूम खाली हैं उनको क्या पता चलना है….

मैं: चल ठीक है…

 


72

मैने वेटर को बिल दिया….और हम दोनो बाहर आ गये….”शाह जी आज तो सच में बहुत ज़यादा हो गयी….” अहमद ने लड़खड़ा कर चलते हुए कहा…तो मैने उसे सहारा देकर रोड क्रॉस करवाई और फिर हम दोनो उस कोठी की तरफ चल पड़े… वहाँ पहुँच कर मैने धीरे से गेट खोल और फिर अंदर दाखिल होकर गेट बंद किया और कोठी के हॉल के मेन डोर पर पहुँचे तो, अहमद ने मुझे अपनी जेब से डोर की चाबी निकाल कर दी….क्योंकि अहमद इतने ज़यादा नशे मे था कि, वो चाबी भी नही लगा सकता था…मैने धीरे डोर खोला और हम दोनो अंदर दाखिल हुए….मैने अहमद को दीवार के साथ खड़ा किया और डोर को लॉक किया…

.”अब कहाँ जाना है…?” मैने अहमद को सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…तो अहमद ने सीढ़ियों की तरफ देख कर इशारा किया….मैं अहमद को सहारा देकर ऊपेर ले आया….”वो उस रूम में चलिए शाह जी..” अहमद ने धीरे से कहा…तो मैं उस रूम के पास पहुँचा और रूम खोल कर हम दोनो अंदर दाखिल हुए….मैने लाइट ऑन की और रूम का जायज़ा लिया…अंदर एक चारपाई पड़ी हुई थी….

जिस पर बिस्तर बिछा हुआ था…मैने अहमद को चारपाई पर बैठाया और धीरे से बोला.. “तुम कहाँ सोते हो….?” तो अहमद ने नशे में चूर आँखो से मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोला…”आप यहाँ सो जाओ….मेरा रूम वो वाला है….” अहमद ने डोर से बाहर एक रूम की तरफ इशारा करते हुए कहा….” अच्छा तो क्या तुम्हारी मालकिन ऊपेर उस रूम में आती है तुम्हारे पास….”

मेरी बात सुन कर अहमद ने मुस्कुराते हुए हां में सर हिलाया और चारपाई पर लेट गया….उसकी आँखे नशे में बंद होती जा रही थी….मुझे पता था कि, अब वो जल्द ही सो जाएगा…..मैने अहमद के ऊपेर रज़ाई डाल डी….और गर्माहट मिलते ही थोड़ी देर में अहमद को गहरी नींद आ गयी….

तभी मुझे सीढ़ियों से किसी के ऊपेर चढ़ने की आवाज़ आई….तो मैने जल्दी से लाइट ऑफ की और रूम से बाहर आकर उस रूम को बाहर से लॉक कर दिया….अब ऊपेर हॉल में बेहद अंधेरा था…मैं वहाँ लगे हुए एक टेबल के पीछे छुप कर बैठ गया…और फिर मुझे अंधेरे मे एक साया सीढ़ियों से ऊपेर आता नज़र आया….सबीना ऊपेर आ चुकी थी…और ये वही वक़्त था….जब मुझे अपनी जिंदगी का सबसे बेखोप फैंसला लेना था…सबीना अंधेरे में बढ़ती हुई उसी रूम की तरफ जाने लगी….जिस तरफ अहमद ने इशारा किया था….मैने चेहरे पर रुमाल बाँधा…

और फिर जैसे ही सबीना उस रूम मे दाखिल हुई…मैं तेज़ी से टेबल से पीछे से निकल कर उस रूम में पहुँचा….इससे पहले कि सबीना को कुछ समझ आता.. मैने पीछे से उसे अपने बाज़ुओं में पकड़ लिया…और एक हाथ उसके मूह पर रख दिया… “मूह से आवाज़ बाहर नही आनी चाहिए…नही तो अंज़ाम बहुत बुरा होगा….” मैने धीरे से सरगोशी में सबीना के कान के पास अपने होंटो को लेजाकर कहा…और दूसरे हाथ से उसके नाइट गाउन के ऊपेर से उसके लेफ्ट मम्मे को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा…जो उसने उस वक़्त पहना हुआ था…

मेरी बात सुन कर सबीना ने मुझे हैरत से भरी नज़रों से देखा….और लड़खड़ाती हुई ज़ुबान में बोली…”आख़िर तुम हो कॉन….?” अब उसके चेहरे के हाव भाव बदल चुके थे…अब उसे इस बात की परवाह नही थी कि, मैं उसके मम्मों को बेदर्दी मसल रहा हूँ…अब वो इस सोच में डूबी हुई हैरानी और खोफ़ज़दा नज़रों से मेरी तरफ देख रही थी…और ये सोचने की कॉसिश कर रही थी कि, आख़िर मैं हूँ कॉन….मैने उसकी इस हालत का फ़ायदा उठाते हुए उसके मम्मे को दबाते हुए अपने रुमाल को चेहरे से हटा लिया….जैसे ही मैने अपने रुमाल को उतारा तो, मेरे चेहरे को देखते ही उसके चेहरे का रंग और उड़ गया…..

सबीना: समीर तुम….

मैं: हां मैं….तुमने क्या सोचा था कि, तुम अब्बू और मुझे बेवकूफ़ बनाती रहोगे और हम बनता रहेंगे…..

सबीना: ये क्या बदतमीज़ी है….छोड़ो मुझे….और तुम ये सब क्या कह रहे हो…अहमद कहाँ है….और तुम तुम यहाँ कैसे आए….

मैं: चुप साली सब बताता हूँ….पहले ये देख…..

मैने सबीना को छोड़ कर अपने जेब से अपना मोबाइल निकाला और वही वीडियो प्ले करके उसको दिखाए…जो उस दिन मैने उसके घर में बनाए थे…वीडियो देखते ही सबीना का रंग पीला जर्द पड़ गया….”अब बोल ये सब क्या है…तू अब्बू को धोखा दे रही है…और साली तुम उनसे निकाह करने के खवाब देख रही हो…अपने नौकर के साथ ये सब करते हुए तुम्हे शरम नही आती……

सबीना: लिसन समीर आइ आम वेरी सॉरी….मैने तुम्हारे अब्बू के साथ जो कुछ भी किया…मैं उसके लिए माफी मांगती हूँ….पर प्लीज़ समीर ये बात अपने अब्बू को ना बताना…मैं कही की नही रहूंगी….

मैं: मेरे हिसाब से ग़लती की सज़ा मिलती है….माफी नही….सबीना जी….(मैने रूम की लाइट ऑन करते हुए कहा…रूम की लाइट ऑन होते ही पूरे रूम में रोशनी फेल गयी..

मैने सबीना को कंधो से पकड़ घुमा कर दीवार से लगा दिया….”आख़िर तुम चाहते क्या हो…...”सबीना ने हैरत और खोफ़ज़दा नज़रों से मुझे देखते हुए कहा….तो मैने उसके नाइट गाउन के रिब्बन को खोलना शुरू कर दिया…जिसको पेट पर बाँधा जाता है….और जैसे ही मैने उसके गाउन के रिब्बन को खोला तो, उसके नाइट गाउन के दोनो तरफ के पल्ले उसके मम्मों से हट गये….और उसके 38 साइज़ के बड़े-2 मम्मे बाहर मेरी नज़रों के सामने आ गये….”रुक जाओ समीर अहह तुम आह क्या कर रहे हो….मैं कहती हूँ अभी भी वक़्त है छोड़ दो प्लीज़ जाने दो समीर…..कही तुम्हारे अब्बू ऊपेर ना आ जाएँ…” सबीना ने अपने आप को मुझसे छुड़ाने की कॉसिश करते हुए कहा….

 


मैं: चुप कर साली रांड़….उस नौकर की लुल्ली को फुद्दि में लेकर अपने जिस्म की आग को ठंडा करने की कॉसिश करती हो….एक बार मेरा लंड लेकर देख लो….सच कहता हूँ… रोज मुझसे चुदवाने के लिए भीख माँगो गी….

सबीना मेरे सामने दीवार के साथ लगी खड़ी थी…..उसके बड़े-2 मम्मे तेज साँस लेने से ऊपेर नीचे हो रहे थे…..जो उसके गाउन के फ्रंट साइड से खुले होने के कारण अब बेपर्दा हो चुके थे….मैने सबीना की तरफ देखते हुए अपने पाजामे और अंडर वेअर के इलास्टिक को पकड़ कर अपनी रानों तक नीचे सरका दिया…. जैसे ही मेरा लंड बाहर आया तो, सबीना की आँखे खुली की खुली रह गये….शायद सबीना अपनी लाइफ में पहली बार इतना बड़ा लंड देख रही थी….उसके फेस पर हैरत से भरे एक्सप्रेशन सॉफ नज़र आ रहे थे….मैने अपने लंड को पकड़ कर दो चार बार हिलाया और उसकी तरफ देखते हुए बोला…”क्यों कैसा है….?”

और फिर जैसे ही मैं सबीना की तरफ बढ़ा….तो उसने खोफ़ज़ादा अंदाज़ में काँपती हुई आवाज़ में बोला….”नही समीर ये ठीक नही है…तुम्हारे अब्बू और मैं शादी करने वाले है…प्लीज़ ऐसा ना करो…” सबीना ने नज़रें नीचे करते हुए कहा….”ओह्ह कमऑन आंटी इसमे क्या बुरी बात है…..नौकर का ले सकती हो तो, मेरा क्यों नही…..”

ये कहते हुए जैसे ही मैं सबीना के पास पहुँचा…..तो सबीना ने घबरा कर मेरी तरफ पीठ कर ली….अब मंज़र ये था कि सबीना के फ्रंट साइड दीवार से लगी हुई थी….मैने सबीना को पीछे से कमर से पकड़ते हुए अपने लंड को पकड़ कर उसकी बुन्द की लाइन में धंसा दिया…उस वक़्त मैं खुद इतने जोश मे था कि, मुझे पता नही चला कि, मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के सूराख पर जा टिका….जैसे ही सबीना ने मेरे लंड की गरम कॅप को अपनी फुद्दि के सूराख पर महसूस किया…तो उसका बदन एक दम से थरथरा गया….”ना ना नही समीर अहह ओह सीईईईईईईई ओह अम्मी……” इससे पहले कि सबीना मुझे कुछ कह पाती…. मैने एक ज़ोर दार धक्का मार कर अपने आधे से ज़यादा लंड को उसकी फुद्दि के सूराख में घुसा दिया…..

सबीना: ओह्ह्ह्ह शिट अहह रुक जाओ समीर……ओह्ह्ह ये बहुत मोटा है…..

मैं: चुप कर अब क्या पूरा मोहल्ला इकट्ठा करेगी…..

मैने बिना रुके उसके बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खेंचते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….कुछ ही शॉट्स लगाने के बाद मैने महसूस किया कि सबीना की फुद्दि जो पहले एक दम खुसक थी….अब गीली होनी शुरू हो गयी थी…..मैने उसकी कमर से अपने हाथो को हटा कर आगे लेजाते हुए उसके बड़े-2 मम्मों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया….

“कैसा लग रहा है….अह्ह्ह्ह देख अब तो तेरी फुद्दि ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया….सच सच बताना आंटी……उस नौकर के साथ कभी इतना मज़ा आया था…”मैने सबीना के मम्मों को खेंचते हुए अपने लंड को और तेज़ी से सबीना की फुद्दि में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…

.”अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह समीर धीरे-2 नही समीर ये ये ठीक नही है…अगर तुम्हारे अब्बू को पता चला तो मैं कही की नही रहूंगी…..” सबीना ने सिसकते हुए कहा…..

“घबराओ नही आंटी जी…..अब्बू को पता नही चलेगा….ये हमारा सीक्रेट है….और आपकी और अहमद वाली बात भी सीक्रेट ही रहेगी……” मैने अपने लंड को सबीना की फुद्दि की गहराइयों में उतार कर शॉट लगाने बंद करके कहा….

“ पर समीर कही अहमद ना देख ले…..अगर उसे पता चला तो प्राब्लम हो जाएगी….प्लीज़ हट जाओ….कही वो ही तुम्हारे अब्बू को ना बता दे…”सबीना ने गहरी साँसे लेते हुए कहा…

.”उसे पता नही चलेगा…वो तो दूसरे रूम में शराब पेकर सो रहा है…पूरी बॉटल पिलाई है….सुबह से पहले नही उठेगा…और उसके रूम की बाहर से कुण्डी लगा दी है….” अब तक मैं वैसे ही अपना लंड उसकी फुद्दि में डाले खड़ा था……”

समीर तुम तुम क्या…….” सबीना बोलते-2 चुप हो गयी….

मैं: मैं क्या….?

सबीना: तुम क्या फारिघ् हो गये हो…..

मैं: नही तो क्यों…

मुझे अहसास हुआ कि, मैं वैसे ही उसकी फुद्दि मे लंड डाले बिना हरक़त के खड़ा हूँ…सबीना की बात सुनते ही मैने फिर से जबरदस्त शॉट लगाने शुरू कर दिए…

.”ओह्ह्ह्ह समीर प्लीज़ ओह फक…ओह्ह्ह इट्स फील्स सो गुड….” उसने सिसकते हुए कहा…तो मैने अपने लंड को और तेज़ी से उसकी फुद्दि के सूराख के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…. “ओह्ह्ह्ह शिट समीर धीरे उफफफ्फ़ धीरे समीर…इट्स हर्ट ओह्ह्ह्ह उंघह….”

मैं: क्या ज़यादा दर्द हो रहा है…..?

सबीना: नही अहह सीईईईईईईईई ओह समीर मज़ा भी बहुत आ रहा है…

सबीना: ओह्ह्ह्ह समीर ओह्ह्ह समीर यहाँ कोई देख लेगा…प्लीज़ डोर तो बंद कर दो..

मैं: अब यहाँ किसने आना है…..जो देख लेगा….

मैने उसके बालो को पकड़ कर पीछे की तरफ और ज़यादा ज़ोर से खेंचा और पूरी ताक़त से और तेज़ी से अपने लंड को बाहर निकाल-2 कर अंदर घुसाने लगा……”ओह्ह्ह गॉड समीर….अहह ओह्ह्ह्ह समीर….हाई आह धीरे समीर…...”

मैं: चल साली शुरू हो जा….अपनी बूँद हिला आगे पीछे करके….

मैने एक और थप्पड़ उसकी बुन्द पर जड़ते हुए कहा…

.”अहह सीईईई हाां करती हूँ…..” सबीना ने सिसकते हुए धीरे-2 अपनी बुन्द को आगे पीछे करना शुरू कर दिया…मेरा लंड उसकी फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगा…सबीना की फुद्दि जिस कदर पानी छोड़ रही थी….उसे देख कर लग रहा था कि, जैसे मैं किसी 21-22 साल की जवानी से भरपूर लड़की को चोद रहा हूँ….कुछ ही पलों में मेरा लंड उसकी फुद्दि से निकल रहे पानी से सन गया…और फिसलता हुआ अंदर बाहर होने लगा था….मैने सबीना के बालो को छोड़ कर फिर से सबीना की बुन्द को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया….”और तेज…” मैने ज़ोर से सबीना की बुन्द को मसलते हुए कहा…..तो सबीना ने अपनी बुन्द को और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया…..

 


मैं: क्यों मज़ा आ रहा है ना…..मेरा लंड अपनी फुद्दि में लेकर….?

मैने सबीना की बुन्द को मसलते हुए कहा….पर सबीना ने कोई जवाब ना दिया….और अपनी बुन्द को आगे पीछे करती रही….मैने एक और थप्पड़ उसकी बुन्द पर झाड़ते हुए कहा….”बोल साली मज़ा आ रहा है ना….?” इस पर सबीना नही में सर हिलाने लगी….मैने एक और थप्पड़ उसकी दूसरी साइड वाले चूतड़ पर झाड़ दिया….”झूठ बोलती है साली….बोल मज़ा आ रहा है तुझे….देख तेरी फुद्दि कैसे मेरे लंड पर पानी छोड़ रही है….देख मेरा पूरा लंड तेरी फुद्दि के पानी से गीला हो गया है...तुझे मज़ा आ रहा है… तू झूट बोल रही है बोल….”

सबीना: सीईइ अहह ना नही समीर ओह…..

सबीना ने सिसकते हुए नही कहा तो, मैं उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा….और उसकी बुन्द को दोनो तरफ फेला कर मसलते हुए उसकी बुन्द के सूराख के में अपनी उंगली से कुरेदना शुरू कर दिया….”तुम चाहे जितना मर्ज़ी छुपा लो…पर तुम्हारी फुद्दि मेरे लंड पर पानी बहा-2 कर बता रही है कि, तुम्हे मेरा लंड अपनी फुद्दि में कितना अच्छा लग रहा है….” सबीना की स्पीड धीरे-2 अब बढ़ती जा रही थी….जब मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि की गहराइयों से जाकर टकराता तो, सबीना मस्ती मे सिसक उठी…..”अह्ह्ह्ह समीररर प्लीज़ ऐसी बातें मत करो…”

मैं: क्यों शरम आ रही है…..साली लंड लेकर क्या शरमाना….

अचानक से सबीना की स्पीड और तेज हो गयी….उसका बदन अकडने लगा…”ओह्ह समीर ओह्ह्ह गॉड उंह सीईईईईई ओह समीर…..आह हां मज़ा आ रहा है….ओह्ह्ह समीर इतना सुख आज तक नही मिला…..अहह उंह अहह”

सबीना का पूरा बदन थरथरा उठा…उसकी जांघे बुरी तरह से कँपने लगी…,..और फारिघ् हुई वो मेरे ऊपेर लूड़क गयी…. मेरा लंड अभी भी उसकी फुद्दि में घायल नाग की तरह फूँकार रहा था…सबीना की फुद्दि से फारिघ् होते हुए पानी की नदी बह निकली…..सबीना बुरी तरह काँपते हुए नीचे पैरों के बल बैठ गयी…मेरा लंड उसकी फुद्दि से बाहर आ चुका था…जैसे ही वो दीवार के साथ पीठ टिका कर नीचे बैठी….मैने अपने लंड को उसके चेहरे के ठीक ऊपेर करते हुए अपने लंड को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया….

सबीना अपनी आँखे बंद किए हुए बुरी तरह हाँफ रही थी….और कुछ ही पलों में मेरे लंड से गाढ़े सफेद पानी की बोछार निकल कर उसके चेहरे पर गिरने लगी…अपने चेहरे पर मेरे लंड से निकले मेरे पानी को महसूस करते ही, उसका पूरा बदन एक बार फिर से थरथरा गया…..

 


73

मैने अपना पाजामा और अंडरवेर ऊपेर किया तो, सबीना एक दम से खड़ी हो गयी… और अपना गाउन ठीक करते हुए बोली…”समीर अब तुम जाओ यहाँ से….कही ये ना हो कि तुम्हारे अब्बू तुम्हे यहाँ देख लें और कोई मसला हो जाए…” सबीना थोड़ा घबराई हुई आवाज़ में बोली….

मैं: अब्बू कैसे देख लेंगे….तुम तो उन्हे शराब के नशे और नींद की गोली देकर ऊपेर अहमद से चुदने आती हो…..

सबीना: हां पर वो आज तुम्हारे अब्बू ने शराब नही पी….पता नही क्यों पर कह रहे थी कि उनका मूड नही है…..मैं अहमद को ऊपेर यही बताने आई थे….प्लीज़ अब तुम जाओ यहाँ से…..

मैं: पर अब मैं इस वक़्त कहाँ जाऊ….अब तो कोई बस भी नही मिलेगी….

सबीना: अच्छा अच्छा ठीक है तुम एक काम करो…..यही सो जाओ….और अंदर से कुण्डी लगा लेना…सुबह जल्दी यहाँ से चले जाना…कही तुम्हारे अब्बू ने देख लिया तो बहुत बड़ा मसला हो जाना है…

मैं: ठीक है….

सबीना: मैं नीचे जाती हूँ….कही तुम्हारे अब्बू उठ गये तो, मसला हो जाना है…

उसके बाद सबीना नीचे चली गयी….सबीना के जाने के बाद मैने रूम को अंदर से लॉक किया और बेड पर लेट गया…फिर नींद भी आ गयी….मोबाइल पर अलार्म पहले से ही सेट कर लिया था….इसलिए सुबह जल्दी उठने में कोई मसला नही हुआ….और उठ कर में उसी रूम मे गया….जहाँ अहमद सो रहा था….मैने अहमद को उठाया…तो अहमद आँखे मालता हुआ उठ कर बैठ गया… “कितन टाइम हुआ शाह जी….”

मैं: 5 बजे गये है….मुझे अब यहाँ से निकल जाना चाहिए….

अहमद: हां ठीक है शाह जी…..

उसके बाद मैं वहाँ से निकल कर रोड की तरफ चल पड़ा….अहमद मुझे बाहर तक छोड़ गया था…और वहाँ से किसी तरह एक गाड़ी पकड़ी जो सुबह-2 सब्जी मंडी जा रही थी.. उनसे लिफ्ट लेकर किसी तरह अपने गाँव पहुँचा….और घर पहुँच कर मैने डोर बेल बजाई थोड़ी देर बाद नाज़िया ने गेट खोला तो, मुझे सुबह-2 देख कर चोंक गयी…. “समीर इतनी सुबह-2 सब ख़ैरियत तो है….”

मैं: हां सब ठीक है….

उसके बाद मैं अपने रूम मे आ गया….और फिर से आँख लग गयी….फिर आँख 9 बजे तब खुली जब नाज़िया ने मुझे आकर उठाया और कहा कि नाश्ता कर लो…आज नाज़िया की बॅंक से छुट्टी थी….मैने उठ कर नाश्ता किया और फिर ऊपेर छत पर चला गया….आज ऊपेर धूप बहुत अच्छी लगी हुई थी…..मैं छत पर इधर उधर टहलने लागा…. अभी थोड़ा ही टाइम हुआ था कि, मुझे सीढ़ियों से किसी के ऊपेर आने की आवाज़ आई… मैने घूम कर सीढ़ियों की तरफ देखा तो, नाज़िया बेड के गद्दे उठा कर ऊपेर लाई थी….”समीर प्लीज़ स्टोर रूम से तरपाल लाकर नीचे बिछा दो….मुझे गद्दों को धूप लगवानी है….”

नाज़िया की बात सुन कर मैं स्टोर रूम मे गया…..और तरपाल लेकर बाहर आया…फिर मैने तरपाल को छत के बीचो बीच बिछा दिया….तो नाज़िया उस पर गद्दा डाल कर दूसरा गद्दा लेने नीचे चली गयी….मैं फिर से छत पर टहलने लगा…छत पर टहलते -2 मेरी नज़र उस गद्दे पर पड़ी….तो सुस्ती ने घेर लेया….मैं गद्दे के पास गया और चप्पल उतार कर गद्दे पर आँखे बंद करके लेट गया….थोड़ी देर बाद नाज़िया दूसरा गद्दा भी ले आई….और उसे भी तरपाल पर साथ मे डाल दिया….मैने आँखे खोल कर नाज़िया की तरफ देखा तो, वो झुक कर गद्दे को सेट कर रही थी….

 


उस वक़्त उसने महरूण कलर की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी…..और दुपट्टा नही लिया था….झुकने की वजह से उसके मम्मे कमीज़ के गले से बाहर की तरफ आने के लिए मचल रहे थे…उसके दूध जैसे मम्मे जो उस वक़्त उसकी ब्लॅक कलर की ब्रा मे कसे हुए थे….देख कर मेरा लंड मेरे पाजामे में हलचल करने लगा था.. “समीर यहाँ से उठो….मुझे गद्दों को झाड़ना है…” नाज़िया ने गद्दे को सेट करने के बाद स्टोर रूम की तरफ जाते हुए कहा…पर मैं वैसे ही लेटा रहा….थोड़ी देर बाद जब नाज़िया रूम से बाहर आई…तो उसके हाथ मे एक मोटा सा डंडा था…. वो डंडा लेकर गद्दो की तरफ बढ़ी तो, मैने उसकी तरफ हाथ करके कहा… “रूको-2 मुझे मत मारना…उठ रहा हूँ…..”

नाज़िया मेरी बात सुन कर क़हक़हे से हँस पड़ी….और गद्दों के ऊपेर चढ़ कर मेरे पास आती हुई बोली…..”ये तुम्हे मारने के लिए नही लाई हूँ…इससे गद्दों की धूल झाड़नी है…..हाहाहा…..” नाज़िया लगातार हँसे जा रही थी….

”अच्छा जी बड़ी हँसी आ रही है….जाओ मैं भी नही उठता अब….” मैने आँखे बंद करते हुए कहा…तो नाज़िया अपनी हँसी पर कंट्रोल करती हुई बोली…

.”समीर प्लीज़ उठो ना….मुझे गद्दे झाड़ने दो….” मैने आँखे खोल कर नाज़िया की तरफ देखा तो, नाज़िया ने एक हाथ अपनी कमर पर रखा हुआ था…और दूसरे हाथ में डंडा पकड़ा हुआ था….”तुमने सुना नही मैने क्या कहा…जाओ मैं नही उठता…”

नाज़िया: समीर अब उठ भी जाओ…..मुझे काम करने दो….वरना मैने सच मे तुम्हारी डंडे से पिटाई कर देनी है….

नाज़िया की बात सुन कर मैने फिर से आँखे बंद कर ली…नाज़िया ने डंडे को नीचे गद्दे पर फेंका और मेरे करीब आकर मुझ पर झुक गयी…फिर उसने मेरा बाज़ू पकड़ा और मुझे खेंच कर उठाने की कॉसिश करने लगी…नाज़िया ने मुझे मेरी कलाई से पकड़ा हुआ था…जैसे ही मुझे उठाने के लिए नाज़िया ने खेंचना शुरू किया…तो मैने नाज़िया का हाथ पकड़ कर उसे खेंच कर अपने ऊपेर गिरा लिया….नाज़िया को इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था….जैसे ही नाज़िया मेरे ऊपेर गिरी तो, मैने उसकी पीठ पर अपनी बाज़ुओं को कस लिया…..

“अह्ह्ह्ह समीर….ये क्या कर रहे…..छोड़ो जल्दी कोई देख लेगा….” नाज़िया ने मेरी बगलो की साइड से हाथ गद्दे पर रख कर उठने की कॉसिश करते हुए कहा…पर मैने नाज़िया को मजबूती से अपने बाजुओं की ग्रिफ्त मे लिया हुआ था….”छोड़ो समीर कोई देख लेगा….” नाज़िया ने मुझसे अलग होने की जद्दो जेहद करते हुए कहा….”यहाँ पर किसी की नज़र नही पड़ती…..” मैने नाज़िया के चेहरे की तरफ देखते हुए कहा….जो उस वक़्त नाज़िया के ज़ोर लगाने और तेज धूप की वजह से एक दम लाल सूराख हो रहा था… “समीर हट जाओ….मैने तुमसे उस दिन क्या कहा था….”

मैं: मुझे सब याद है….पर मैं कुछ ग़लत तो नही कर रहा हूँ….

मैने अपना एक हाथ नाज़िया की कमर से हटा कर उसके सर के पीछे लेजाते हुए कहा….और उसके सर को पकड़ कर उसके होंटो को अपने होंटो की तरफ झुकाने लगा….ज़ोर लगांने की वजह से नाज़िया की साँसे बहुत तेज चल रही थी…..उसके मम्मे मेरे सीने पर दबे हुए थे….एक नरम सा अहसास और उस अहसास की लेज़्जत मेरे जेहन के हर कोने में घुसती जा रही थी….उसकी गरम और महकती हुई सांसो को अपने फेस पर महसूस करके एक अजीब सा नशा मुझ पर चढ़ता जा रहा था….

.”नही समीर….ये ठीक नही है…?” नाज़िया ने थोड़ी उखड़ी और थोड़ी घबराई हुई आवाज़ में कहा…..घबराई हुई ऐसी कि जैसे नाज़िया को खुद का फिर से बहक जाने का डर हो…

 
नाज़िया की जदोजेहद ख़तम हो चुकी थी….अब वो सिर्फ़ अपने होंटो को मेरे होंटो से दूर रखने की कॉसिश कर रही थी….और फिर जैसे ही मैने उसके होंटो को अपने होंटो के करीब किया…नाज़िया ने अपना फेस एक दम से घुमा लिया…और मेरे होन्ट उसके सुर्ख हो रहे गालो पर जा लगी….पर मैं भी कहाँ बाज़ आने वाला था…मैने जितना हो सकता था….उतना मूह खोला और उसके लेफ्ट साइड के गाल को अपने होंटो में भर कर चूसना शुरू कर दिया….नाज़िया एक दम से तड़प उठी….”सीईईई आआईई अह्ह्ह्ह समीर….” नाज़िया ने एक बार फिर अपनी हथेलयों को गद्दों पर जमा कर ऊपेर उठाने के लिए ताक़त लगाई….पर मैं पहले से ही इसके लिए तैयार था….नतीजतन नाज़िया एक इंच भी ऊपेर ना हो सकी…..

और फिर नाज़िया ने एक गहरी साँस लेकर कसमसाते हुए हथियार डाल दिए….और रुआंसी सी आवाज़ मे बोली…”समीर प्लीज़ हट जाओ ना…

.नाज़िया के मम्मों और पूरे जिस्म को अपने साथ फील करके मेरा लंड एक दम हार्ड हो चुका था…..जो नाज़िया की रानों के नीचे दबा हुआ था….मैने नाज़िया के सर से हाथ हटा कर फिर से दोनो हाथों को नाज़िया की कमर पर कस दिया….और नाज़िया को अपने बाहों में लिए हुए एक दम से पलट गया….इससे पहले कि नाज़िया को कुछ समझ आता….नाज़िया मेरे नीचे आ चुकी थी…

नाज़िया की टांगे एक दम सीधी थी…मैने उसके ऊपेर लेटे-2 अपनी टाँगो को उसकी टाँगो के दर्मियान करना शुरू कर दिया….

और थोड़ी सी जदोजेहद के बाद मैं अपनी टाँगो को उसकी टाँगो के दर्मियान करने मे कामयाब हो गया…..जिसका नतीजा ये हुआ कि, नाज़िया की टांगे मजीद खुल चुकी थी.. और मेरी कमर से नीचे का हिस्सा उसकी रानों के दर्मियान आ चुका था….और मेरा लंड उसकी शलवार के ऊपेर से उसकी फुद्दि पर दब गया….लोहे के रोड की तरह सख़्त लंड को शलवार के ऊपेर से महसूस करके नाज़िया एक दम से सिसक उठती…..”सीईईई अहहाः हहानन्न समीर प्लीज़ छोड़ दो ना…” नाज़िया ने फिर से रुआंसी सी आवाज़ मे ऐसे कहा.. जैसे ये उसकी आख़िरी कॉसिश हो…और अब वो मेरे आगे हथियार डालने वाली हो…उसके गाल कान एक दम लाल सूर्ख हो चुके थे….मैने नाज़िया की बगलो से बाज़ुओं को डाल कर उसे अपने साथ लगाया हुआ था….

नाज़िया एक आँखे मस्ती मे बंद हो चुकी थी…मैने उसका फ़ायदा उठाते हुए नाज़िया के होंटो को अपने होंटो मे लेकर चूसना शुरू कर दिया….फिर कुछ लम्हों बाद जब नाज़िया ने कोई रेस्पॉन्स ना दिया तो, मैने अपने होंटो को नाज़िया के होंटो से अलग कर दिया…पर उसके ऊपेर ऐसे ही लिटाए हुए कपड़ों समैत अपने लंड को उसकी फुद्दि पर रगड़ता रहा….जब मैं शलवार के ऊपेर से उसकी फुद्दि पर अपने लंड को रगड़ता तो, नाज़िया एक दम से सिसकते हुए तड़प उठती….उसने अपने दोनो हाथो से मेरे कंधो को मजबूती से पकड़ रखा था….”सीईईईईई समीर…….अहह….” नाज़िया ने सिसकते हुए मेरे कंधो से अपने हाथो को हटा कर मेरी कमीज़ के कॉलर को पकड़ते हुए कहा… और मस्ती और मदहोशी से भरी आँखो को थोड़ा सा खोल कर मेरी तरफ देखने लगी…

उसकी आँखे ऐसी लग रही थी…..जैसे उसने बहुत ज़यादा नशा कर लिया हो….कुछ लम्हो तक मुझे देखने के बाद नाज़िया ने अपनी आँखे बंद की और फिर धीरे-2 मेरी कमीज़ के कॉलर को पकड़ कर मेरे होंटो को अपने होंटो पर खुद ही झुकाने लगी…और फिर जैसे ही हम दोनो के होंटो का मिलन हुआ था….नाज़िया ने अपने होंटो को खोल कर मेरे होंटो को हल्का सा चूमा और फिर अपने होंटो को अलग कर लिया…मैने नाज़िया को अपनी बाज़ुओं में लिए हुए एक बार फिर पलटा….और खुद पीठ के बल लेटे हुए नाज़िया को अपने ऊपेर ले आया….अब मंज़र ये था कि, नाज़िया मेरे ऊपेर लेटी हुई थी…. उसके दोनो घुटने मेरी रानों के दोनो तरफ गद्दों पर थी….और उसकी फुद्दि ठीक मेरे फुल हार्ड लंड के ऊपेर दबी हुई थी….

इस बार जैसे ही मैने नाज़िया के सर के पीछे एक हाथ रख कर उसके होंटो को अपने होंटो पर झुकाना शुरू किया तो, नाज़िया ने बिना किसी जद्दो जेहद के अपने होंटो को मेरे होंटो से लगा दिया…इस वक़्त तक मैं बेहद गरम हो चुका था… मैने पागलो की तरह नाज़िया के होंटो को चूसना शुरू कर दिया….और इस बार नाज़िया ने मेरा पूरा साथ देते हुए अपने होंटो को खोल कर ढीला छोड़ दिया….मैं नाज़िया के होंटो को चूस्ते हुए लगतार उसके पूरे जिस्म पर हाथ फेर रहा था….और नाज़िया भी इतनी गरम हो चुकी थी….कि वो खुद ही गैरमामूली तरीके से अपनी कमर को हिला कर शलवार के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर रगड़ रही थी….

 


मैने नाज़िया के होंटो को चूस्ते हुए नाज़िया को फिर से अपने बाज़ुओं में लिया और उसे बाज़ुओं मे लिए हुए उठ कर बैठ गया….जिसकी वजह से हम दोनो के होंटो अलग हो गये… मैने नाज़िया की रानों को दोनो तरफ से पकड़ा जो उस उस वक़्त बैठने की वजह से फोल्ड हो गयी थी….और रानों को पकड़ कर मैने उसकी टाँगो को अपनी कमर के पीछे कर दिया….अब नाज़िया मेरी गोद मे बैठी हुई थी….और उसकी टाँगे मेरी कमर के इर्द गिर्द लिपटी हुई थी….नाज़िया ने आँखे खोल कर हैरत से मेरी तरफ देखा…जैसे पूछ रही हो…ये क्या कर रहे हो…पर हम दोनो मे से कोई भी बोल नही रहा था…मेरा लंड अभी भी नाज़िया की फुद्दि के नीचे दबा हुआ था…

नाज़िया के हाथ एक बार फिर से मेरे कंधो पर थे….मैने नाज़िया की आँखो मे देखते हुए उसकी कमर पर हाथ रखते हुए धीरे-2 अपने हाथो को उसकी बुन्द पर ले गया…..और फिर जैसे ही मैने उसकी बुन्द के दोनो पार्ट्स को अपनी हथेलियों मे लेकर दबाया तो, नाज़िया ने सिसकते हुए मेरी तरफ देखा…उसके हाथो की पकड़ मेरे कंधो पर और ज़यादा कस गयी….”सीईईईईईईईईईईईई समीर……ओह…..” नाज़िया ने मस्ती के आगोश मे जाते हुए सिसकी ली….और इस बार नाज़िया ने खुद ही अपने एक हाथ को मेरे सर के पीछे रखा और दूसरे हाथ को मेरे गाल पर रखा…..और फिर पागलो की तरह मेरे होंटो पर टूट पड़ी….

हम दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंटो को चूसने लगे…नाज़िया एक हाथ से लगतार मेरे गाल को सहला रही थी….और दूसरे हाथ की उंगलियों को मेरे बालो में घुमा रही थी…और मैं अपने दोनो हाथो से नाज़िया की बुन्द के दोनो पार्ट्स को अलग -2 करके फेलाते हुए ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था…और उसकी बुन्द को अपने लंड की तरफ पुश कर रहा था…जिससे उसकी फुद्दि मेरे लंड पर लगतार रगड़ खा रही थी…नाज़िया का फेस उस वक़्त ऐसा लग रहा था….जैसे उसमे खून उतर आया हो….”ओह्ह्ह्ह सामीएर सीईईई अहह समीरररर….” नाज़िया ने तड़पते हुए आपने होंटो को मेरे होंटो से अलग किया… और फिर मेरे सर को अपने बाज़ुओं पर कसते हुए मेरे फेस को अपनी कमीज़ के गले के ऊपेर से अपने मम्मों पर लगा दिया…

 
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