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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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थोड़ी देर बाद वो स्टॉप आ गया….जहा पर हमें उतरना था….मैं और रानी बस से नीचे उतरे तो, रोड एक दम सुनसान था….रानी ने चारो तरफ देखा और बोली… “ अब तुम मेरे पीछे आना….थोड़ा फाँसला रख कर…..” मेने हां में सर हिला दिया और थोड़ा फाँसला बना कर रानी के पीछे-2 चलने लगा…में रोड से गाओं 1 किमी दूर था… और 5 मिनिट चलने के बाद हम गाओं के बाहर पहुच गये थे…रानी ने मूड कर पीछे मेरी तरफ देखा और गाओं के शुरुआत में ही बने हुए एक छोटे से घर की तरफ इशारा किया…..उस घर में सिर्फ़ एक ही रूम और किचन नज़र आ रहा था…. साइड्स की बाउंड्री 6-7 फीट उँची थी….रानी उस घर की तरफ जाने लगी….और मुझे इशारा कर दिया कि, यही वो घर है…

मैं वही से वापिस लौट आया….और में रोड पर आकर बस का इंतजार करने लगा…आधा घंटे तक इंतजार करने के बाद मुझे बस मिल गयी…में बस में चढ़ा और सिटी की टिकेट ले ली….जहा में कॉलेज जाता था…अब कल रात के बनाए हुए प्लान पर काम करने का वक़्त आ गया था….आधे घंटे बाद में सिटी पहुच गया…बस से उतर कर में सीधा टेलिकॉम के दुकान पर गया…और वहाँ से एक नया नंबर पर्चेस कर लिया….मेने नये नंबर को उसी वक़्त मोबाइल में डाल लिया….ड्युयल सिम फोन होने का यही तो फ़ायदा है…दुकान दार ने बताया कि, कल सुबह तक मेरा नया नंबर शुरू हो जाएगा…मेने दुकान वाले को पैसे दिए…और बस पकड़ कर घर आ गया…उस दिन शाम तक और कोई ख़ास बात नही हुई…में पूरा दिन नाज़िया और नजीबा के बारे में सोचता रहा….और आने वाले दिनो के लिए नये -2 प्लान बनाता रहा… शाम के 6 बजे मैं रानी की बेहन के गाओं जाने के लिए तैयार हो रहा था…और सोच ही रहा था कि, अबू आने वाले होंगे….उनसे क्या बहाना बना कर जाउ…

पता नही अबू रात भर बाहर जाने के लिए राज़ी होंगे भी कि नही…मैं यही सोच रहा था कि, मेरा मोबाइल बजने लगा….मेने कॉल पिक की तो, दूसरी तरफ से अबू की आवाज़ आए….”हेलो समीर….”

मैं: जी अबू कहिए….

अबू: बेटा हम आज रात नही आ सकेंगे…..

मैं: क्यों क्या हुआ….

अबू: वो नाज़िया के भाई साहब ज़िद्द कर रहे है….रुकने के लिए….तो हम लोग कल सुबह आएँगे…..

मैं: जी…

उसके बाद अबू ने मुझे घर पर रहने की हिदायत दी और कॉल कट कर दी….मैं जल्दी से तैयार हुआ….और घर को लॉक करके मेन रोड की तरफ चल पड़ा…शाम के 6:30 बज चुके थे…बाहर ठंड पूरे ज़ोर की पड़ रही थी….चारो तरफ धुन्द चाहने लगी थी….गाओं से मेन रोड तक जो सड़क जाती थी…अब उस पर इक्का दुक्का लोग ही नज़र आ रहे थे…10 मिनिट में मैं मेन रोड पर पहुच गया…. और वहाँ खड़ा होकर बस का इंतजार करने लगा….दिल में अजीब सा डर था… आज पहली बार में बिना अबू की जानकारी के घर से बाहर रहने वाला था…दिल में ये खोफ़ भी था कि, कही अबू को इस बात का पता नही चल जाए…

पर फुद्दि के चक्कर में मेने डर पर काबू कर दिया….थोड़ी देर बाद बस आ गयी… में बस में चढ़ा….बस में भीड़ ज़्यादा नही थी….इसलिए सीट मिल गयी… बस में बैठे हुए भी यही सब दिमाग़ में आ रहा था कि, कही कुछ गड़बड़ नही हो जाए….मेने बस की खिड़की से बाहर देखा तो, पूरी तरह अंधेरा हो चुका था… 20 मिनिट बाद वो स्टॉप आ गया….जहाँ पर मुझे उतरना था….मैं बस से नीचे उतरा और अपना मोबाइल निकाल कर टाइम देखा तो,7 बजने में 5 मिनिट बाकी थे…में दिल ही दिल में दुआ कर रहा था…कि रानी मुझे घर के मेन गेट पर ही मिल जाए…. मैं मेन रोड पर उतर कर गाओं की तरफ जाने वाले रोड की तरफ बढ़ने लगा….वो रास्ता तो एक दम सुनसान था…ना तो कोई शख्स नज़र आ रहा था….

और ना ही कोई जानवर जैसे-2 में गाओं के नज़दीक पहुच रहा था…वैसे -2 मुझे गाओं के घरो में जलती हुई बत्तियाँ नज़र आने लगी….आख़िर कार में वहाँ पहुच गया….जहा से मुझे रानी की बेहन के घर के लिए मुड़ना था…मेने गहरी साँस ली और उस तरफ बढ़ने लगा….मेने दूर से ही देख लिया था कि, उस घर का मेन गेट पूरा खुला हुआ था…उस तरफ ना तो कोई और घर था….और वो रास्ता उस घर के पास पहुच कर ख़तम हो जाता था….आगे सिर्फ़ खेत ही खेत थे….में दिल में यही दुआ कर रहा था कि, उस घर में रानी और उसके भतीजी के इलावा और कोई ना हो….

क्योंकि अगर वहाँ कोई और होता और मुझे वहाँ देख लेता तो, मुझे जवाब देना मुस्किल हो जाता कि, मैं इधर क्या लेने आया हूँ….खैर में धड़कते दिल के साथ आगे बढ़ता रहा था….अब मुझे गेट से अंदर रूम तक नज़ारा सॉफ दिखाई दे रहा था…अंदर सामने एक रूम था…रूम से आगे एक साइड में छोटा सा किचन था….और रूम और किचन के ऊपेर बरामदा था….और उस वक़्त मेरी जान में जान आई.,..जब मेने रानी को उस बरामदे में चारपाई पर बैठे देखा….उसका ध्यान भी बाहर की तरफ था… जब में उस घर के पास पहुचा तो, रानी उठ कर गेट पर आ गयी….क्योंकि अंदर तो, बल्ब जल रहा था….लेकिन बाहर अंधेरा था….इसलिए रानी को पूरा यकीन नही था कि, कॉन आ रहा है….जब तक कि में उसके घर के पास पहुच नही गया….

मुझे देखते ही रानी से स्माइल की और मुझे अंदर आने का इशारा किया…जैसे में अंदर गया…..रानी ने जल्दी से गेट की कुण्डी लगा दी….और मेरा बाज़ू पकड़ कर मुझे अंदर की तरफ लेजाने लगी….” अज़ारा….” रानी ने अंदर जाते हुए आवाज़ लगाई….तो एक लड़की किचन से निकल कर बाहर आई…ओह्ह तो ये है अज़ारा….

अज़ारा सच में वैसी थी….जैसा रानी ने मुझे बताया था….उसकी हाइट मुश्किल से 4 फीट 11 इंच थी….जिस्म रानी की तरह दुबला पतला था…मम्मे एक दम कसे हुए थे…उसने वाइट कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था,…..उसकी कमीज़ में से उसकी ब्लॅक कलर की ब्रा सॉफ नज़र आ रही थी…उम्र भी कुछ ख़ास नही थी…नैन नक्श तीखे थे….पर उसका रंग रानी के मुक़ाबले कही सॉफ था…गोरा कहना भी ग़लत नही होगा….उसके जिस्म पर ब्रा में क़ैद मम्मे उसके जिस्म से अलग ही नज़र आ रहे थे…उसने मुझे देख कर स्माइल की और धीरे से बोली….”सलाम…” मेने भी जवाब दिया तो, रानी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे चारपाई पर बैठा लिया….और खुद मेरे साथ बैठ गयी…थोड़ी देर बाद अज़ारा किचन से बाहर आई….उसके हाथ में पानी का ग्लास था….मेने पानी पिया….तो रानी बोली….

रानी: कोई तकलीफ़ तो नही हुई यहाँ आने में….

मैं: नही आराम से पहुच गया….

तभी अज़ारा ने रानी को किचन के अंदर बुलाया….”खाला ज़रा यहा आएँ….” रानी उठ कर किचन में चली गयी…..मेने देखा कि, किचन का डोर नही था….थोड़ी देर बाद रानी बाहर आई…और मेरा हाथ पकड़ कर बोली….”चलो अंदर जाकर बैठते है… बाहर बहुत सर्दी है…” मैं बिना कुछ बोले उठ कर रानी के साथ अंदर चला गया… अंदर एक तरफ एक डबल बेड था…पुराने ज़माने का…दूसरी तरफ पेटी थी.. जिसके ऊपेर कुछ रज़ाईयाँ और बिस्तर रखे हुए थे….”अब आराम से जूते उतार कर बैठ जाऊ.. में थोड़ी देर में आती हूँ….” रानी बाहर की तरफ जाने लगी…और जाते-2 उसने बरामदे की लाइट ऑफ कर दी…. मेने जूते खोले और बेड पर आराम से बैठ गया… मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था….अंज़ान जगह भी थी….

फिर रानी करीब 10 मिनिट बाद अंदर आई….उसके हाथ में एक थाली थी…. उसने वो थाली मेरे आगे रख दी….”ये क्या है….में खाना खा कर आया हूँ…” मेने रानी की तरफ देखते हुए कहा….तो रानी मुस्कुराते हुए बोली….”अच्छा ठीक है…थोड़ा सा खा लो….” वैसे भी में जो दोपहर का बचा था…वही खा कर आया था…भूक भी लगी थी….इसलिए चुपचाप खाना खाने लगा..रानी बाहर चली गयी…..इस मर्तबा उसने कुछ ज़्यादा ही देर लगा दी थी….शायद वो और अज़ारा दोनो किचन में खाना खाने लगी थी….

 


मेने खाना ख़तम किया और अपना मोबाइल निकाल कर टाइम देखा तो, 8 बज चुके थे…मैं बेड से नीचे उतरा और प्लेट उठा कर जब रूम से बाहर आया तो, देखा कि, रानी और अज़ारा दोनो बर्तन सॉफ कर रही थी….रानी ने मेरी तरफ पलट कर देखा और मुझे हाथ में प्लेट लेकर खड़े देख कर रानी ने जल्दी से मेरे हाथ से प्लेट ले ली. और मुस्कुराते हुए बोली…. “मैं उठा कर ले आती…आप क्यों तकलीफ़ कर रहे है…” मैं रानी की बात का कोई जवाब नही दे पाया….और प्लेट देकर में सहन में एक तरफ बने बाथरूम में चला गया….मेने वहाँ जाकर हाथ मुँह धोया और जब रूम की तरफ वापिस आने लगा तो, रूम के अंदर डोर पर रानी हाथ में टवल लिए खड़ी थी….

हम दोनो एक दूसरे की आँखो में देख रहे थे….और रानी होंठो में मुस्करा रही थी….में रानी के पास जाकर खड़ा हो गया…और टवल से हाथ सॉफ करने लगा… “थोड़ी देर और…..” रानी ने मुस्कुराते हुए कहा….और फिर टवल को टाँग कर बाहर चली गयी…में बेड पर फिर से पुष्ट के साथ पीठ लगा कर बैठ गया…ठंड बहुत ज़्यादा हो गयी थी….हाथ पैर भी काँपने लगे थे…तभी अज़ारा रूम में अंदर आई….उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर सर झुका कर बेड के सामने की तरफ पड़ी पेटी की तरफ बढ़ी….और वहाँ से एक राज़ाई उठा कर उसने बेड पर रख दी….” राज़ाई ले लो…ठंड हो गयी है…” में चुप चाप अज़ारा की तरफ देखता रहा….फिर उसने एक बिस्तर उठाया और बाहर चली गयी…..मुझे ये सब बड़ा अजीब सा लग रहा था….और सोच रहा था कि, घर में एक रूम है….में कैसे एक साथ एक ही रूम में रानी के साथ करूँगा…क्योंकि मुझे अभी भी यकीन नही था कि, अज़ारा मुझे देने के लिए राज़ी हो जाएगी…

मैं बैठा यही सब सोच रहा था कि, रानी रूम के अंदर आई….उसने अंदर आकर डोर बंद किया और कुण्डी लगा दी…रानी ने अपने ऊपेर चादर ली हुई थी….रानी ने चद्दर उतार कर सामने पेटी के ऊपेर रखी और मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखने लगी…..”क्या हुआ ऐसे क्या देख रही हो…..” मेने रानी की तरफ देखते हुए पूछा उसके आँखो में अजीब सी शरारत नज़र आ रही थी….

रानी: सोच रही हूँ….आज तुम मेरी कैसे -2 लेने वाले हो….हाहहाहा

मैं: जैसे तुम कहोगी वैसे ले लूँगा….बोल कैसे –2 देने का इरादा है….

रानी: जैसे तुम्हारी मर्ज़ी आए वैसे करो…..मेने कॉन से तुम्हे रोकना है….

मैं बेड से नीचे उतरा और रानी की तरफ देखते हुए बोला….”ठीक है मैं पेशाब करके आता हूँ….तब तक तुम कपड़े उतार बेड पर लेट कर मेरा इंतजार करो….” मेने डोर खोला और बाहर आ गया…बाहर आकर मेने किचन की तरफ देखा तो, अज़ारा किचन में नीचे तिरपाल पर अपना बिस्तर बिछा कर राज़ाई में घुसी हुई थी… उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर शर्मा कर अपनी नज़ारे घुमा ली… में बाथरूम में चला गया…और वहाँ से फारिघ् होकर जब रूम में वापिस आया तो, रानी राज़ाई के अंदर लेटी हुई थी….मेने डोर बंद किया और पेटी के पास जाकर अपने कपड़े उतारने लगा…

रानी बेड पर रज़ाई ओढ़ कर लेटी हुई मुझे हवस से भरी नॅज़ारो से देख रही थी.. मेने अपने सारे कपड़े उतार कर पेटी पर रख दिए…जैसे ही मेने अपना अंडरवेर उतरा तो मेरा लंड जो उस वक़्त फुल हार्ड हो चुका था…बाहर आते ही हवा में झटके खाने लगा….”सीईइ समीर ये तो कितना सख़्त खड़ा है….” रानी ने मेरे लंड को प्यासी नज़रों से देखते हुए कहा….तो में धीरे -2 बेड की तरफ बढ़ा….”लाइट ऑफ कर दो….” रानी ने मुस्कुराते हुए कहा,….

मैं: रहने दो नही….अंधेरे में मज़ा नही आएगा….

रानी: नही ख़ान साहब लाइट बंद कर दो….ये घर गाओं से बाहर है….दूर से ही लाइट जलती हुई नज़र आ जाती है….इसलिए बंद कर दो….कोई शक नही करे…. इसलिए बोल रही हूँ….

मेने अपनी जॅकेट से अपना मोबाइल निकाला और उसकी फ्लश लाइट ऑन करके लाइट बंद की और

और उस बेड की तरफ बढ़ने लगा….उसकी फ्लश लाइट की रोशनी में रानी का साँवले रंग का जिस्म बहुत ज़्यादा चमक रहा था… जैसे ही मैं उसकी तरफ बढ़ा….रानी पीछे की तरफ धीरे-2 लेट गयी….मेने बेड पर चढ़ कर रज़ाई को उसके जिस्म पर से हटा दिया….उफ्फ…..क्या सीन था….रानी के जिस्म सिर्फ़ लाइट पिंक कलर का ब्रा था….उसका बाकी जिस्म बिल्कुल नंगा था….

उसने अपने बाजू से अपने चेहरे को ढक रखा था….रानी अपनी टाँगो को आपस मैं जोड़ कर लेटी हुई थी…..मेने रानी की टाँगो को पकड़ कर अलग किया और उसकी फुद्दि बेपर्दा हुई, तो उसने शरमा कर करवट बदल ली..और फिर पेट के बल लेट गयी….आज मैं पहली बार उसकी बाहर की तरफ निकली हुई गोल गोश्त से भरी बुन्द को पूरी लाइट में देख रहा था….मेने उसकी बुन्द पर अपने हाथ की हथेली रखते हुए धीरे सहलाना शुरू कर दिया….”शियीयीयीयियी उंह” रानी एक दम से सिसक उठी…..

जैसे ही मेरे ठंडे हाथ उसके बुन्द पर लगे….उसका पूरा बदन काँप गया…मेने फिर उसी हाथ से उसकी ब्रा के स्ट्रॅप्स को पकड़ कर उसके कंधो से सरकाते हुए उसकी बाज़ुओ से निकाल दिए….उसके मम्मे भी अब बाहर आ चुकी थी….पर बेड पर बिछाए हुए बिस्तर पर दबी हुई थी…मेने रानी की थाइस को फेलाया और खुद उसके टाँगो के बीच में बैठ गया….और फिर उसे हाथ से गाइड करते हुए, धीरे-2 डॉगी स्टाइल में ले आया…..रानी भी मेरे हाथ के इशारे से डॉगी स्टाइल में आ चुकी थी…..

मेरे एक हाथ में मोबाइल था…इसीलिए मैं सिर्फ़ एक हाथ को इस्तेमाल कर सकता था…इस लिए रानी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी…. मेने अपने खाली हाथ से रानी की फुद्दि के लिप्स को पकड़ कर फेला दिया…उसकी फुद्दि का सूराख और लिप्स दोनो ही उसकी फुद्दि से निकल रहे गाढ़े पानी से लबरेज थे….”ओह्ह रानी तुम्हारी फुद्दि तो पहले से बहुत गीली है…..देख साली कैसे पानी निकाल रही है…..” मेने अपनी एक उंगली को रानी की फुद्दि में घुसा दिया….रानी मस्ती में एक दम से सिसक उठी…..”शियीयीयी इोह समीरर जीए…. ये तो पूरा दिन नही सुखी…इस लम्हे के इंतजार में….” मेने धीरे-2 अपनी उंगली को रानी की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….”क्यों पूरे दिन से क्यों पानी छोड़ रही है तेरी फुद्दि ? “

 


रानी अब मदहोश होती जा रही थी…..”आपके लंड को याद करके…” रानी ने सिसकते हुए कहा…

.”तो घुसा दूं तुम्हारी फुद्दि में….”

रानी: हाआँ जल्दी करो ना….शाम से बहुत खुजली हो रही है…..

मेने रानी की फुद्दि के सुराख के बीच अपने लंड की कॅप को सेट किया….और धीरे-2 लंड की कॅप को उसकी फुद्दि के सूराख पर दबाने लगा….अगले ही पल रानी की फुद्दि ने लंड की कॅप को चूम कर अंदर ले लिया….रानी ने खुद ही अपनी बुन्द को पीछे की ओर पुश करना शुरू कर दिया…मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुसता चला गया…और कुछ ही पलो में मेरा पूरा साढ़े 8 इंच का लंड रानी की फुद्दि की गहराइयों में समा गया….

रानी: ओह्ह्ह्ह समीर रुक क्यों गये जी आप….आज पूरी ज़ोर से चोदो ना मेरी फुद्दि को….

रानी ने अपनी बुन्द को धीरे-2 हिलाते हुए कहा….मेने अपने लंड को कॅप तक रानी की फुद्दि से बाहर निकाला और फिर कुछ पलो बाद ज़ोर दार धक्का मार कर एक ही बार में अपना पूरा लंड उसकी फुद्दि की गहराइयों में उतार दिया…..”ओह्ह्ह्ह उंह सीईईईई हइई समीरर जी बहुत मज़ा आता है……ज ज जब अपना लंड मेरी फुद्दि में टोकते हो….”

मेने रानी की बुन्द को सहलाते हुए फिर से अपने लंड को धीरे-2 बाहर निकालना शुरू कर दिया…..और इस बार अपना पूरा लंड उसकी फुद्दि से बाहर निकाल लिया…फिर बेड से खड़ा होकर रानी के फेस के पास आकर खड़ा हो गया…रानी अभी भी वैसे ही डॉगी स्टाइल में थी….उसने फेस उठा कर मेरी तरफ देखा….तो मेने अपना एक पैर उठा कर बेड पर रखते हुए अपने लंड को उसके होंठो के पास ले जाते हुए कहा…

मैं: देख रानी तेरी फुद्दि के पानी से मेरा लंड कैसे गीला हो गया है….

रानी अपनी चमकती हुई आँखो से मेरे लंड को देखने लगी….मेने एक हाथ से उसके सर को पकड़ कर उसके होंठो को अपने लंड पर झुकाना शुरू कर दिया…रानी ने सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देखा…..”जान इसे मुँह में लेकर चाटो ना…”

रानी ने एक बार मेरे लंड को देखा और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली… “छी मुझे नही लेना इसे मुँह में….”

मैं: प्लीज़ जान चाटो ना….

रानी: उससे क्या होगा…?

मैं: मुझे अच्छा लगेगा….प्लीज़ चाटो ना….इसे प्यार करो…देखो ये तुम्हारी फुद्दि की खुजली मिटाता है ना….तुम्हे मज़ा देता है ना…तो इसको प्यार करना तुम्हारी ज़िम्मेवारी है….

रानी ने एक बार मेरी आँखो में झाँका और फिर मेरे लंड के करीब अपने होंठो को लाते हुए, उसे अपने रसीले होंठो मे भर लिया….उसने अजीब सा मुँह बना लिया था.. पर शायद मेरा दिल रखने के लिए, उसने लंड को चुप्पे लगाने शुरू कर दिए थी. “अहह ओह्ह्ह्ह शियीयियीयियी रानी तुम कमाल का लंड चुस्ती हो ओह्ह्ह्ह मज़ा आ गया…” मेने रानी के सर को पकड़ कर अपना लंड उसके मुँह में धकेलते हुए कहा…

मेने देखा कि अब रानी भी पूरे जोश और मस्ती में आकर मेरे लंड की कॅप को अपने होंठो से दबा-2 कर चूस रही थी….उसने कुछ ही देर में मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया….मेने उसकी ब्रा पकड़ कर उसके बदन से अलग कर दी….और रानी को पीठ के बल लेटने के लिए कहा….

रानी बेड के किनारे पर पीठ के बल लेट गयी….मेने अपने लंड को हाथ से पकड़ कर रानी की तरफ देखते हुए कहा….”चल अब अपनी फुद्दि खोल कर रास्ता दिखा…” तो रानी ने शरमाते हुए अपने दोनो हाथों से अपनी फुद्दि के लिप्स को पकड़ कर फेला दिया….उसकी फुद्दि का सूराख सच में बहुत गीला था….मेने अपने लंड की कॅप को फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा…तो लंड का कॅप फिर से उसकी फुद्दि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जा घुसा…

रानी: शियीयियीयियी समीर ओह्ह्ह्ह हाईए अब्ब ब्स्स्स बाहर मत निकालना इसे ….ज़ोर ज़ोर से चोदो मुझे….मेरी चीखे निकाल दो….चीर दो मेरी फुद्दि को….

रानी ने लगभग अपनी कमर को उछलाते हुए कहा…और इस बार मेने भी बिना कोई देर किए, अपने लंड को जितना हो सकता था उतनी तेज़ी से उसकी फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….उसके मम्मे मेरे हर धक्के के साथ ऊपेर नीचे हिल रही थी…और वो आँखे बंद किए हुए, अपनी टाँगो को उठा कर फेलाए हुए मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में महसूस करके मस्त होती जा रही थी….

 


वासना का तूफान ऐसा उठा था कि, हम दोनो को कोई होश नही था…बेड के चरमराने की आवाज़ उस शांत माहॉल में गूँज रहे थे…मेरी थाइस लगतार रानी की बुन्द से टकरा कर थप-2 की आवाज़ कर रही थी….”आहह चोदो ना और ज़ोर से चोदो…आह अह्ह्ह्ह ओह मेरी फुद्दि आहह फाड़ दो इस कंजरी को….पूरा अंदर डालो ना…अह्ह्ह्ह फाड़ दीजिए ना….ओह्ह्ह समीर आपका लंड अहह मेरीए अह्ह्ह्ह मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह समीर…”

रानी अब पागलो की तरह सिसक रही थी….मेरा जोश ये सोच-2 कर और बढ़ रहा था कि, बाहर किचन में लेटी हुई अज़ारा किस तरह से अपनी खाला की चुदाई की मस्ती भरी आवाज़ सुन कर अपनी फुद्दि को मसल रही होगी….”हाई समीर आह भर दो मेरी फुद्दि को आह अपने पानी से हाई मेरी फुद्दि तो दूसरी बार झड़ने वाली है…..

ये सुन कर मैं और जोश में आ गया…और पूरी रफतार से अपने लंड को रानी की फुद्दि के अंदर बाहर करने लगा….”अह्ह्ह्ह ले साली ले मेरे लंड का पानी पिला दे अपनी फुद्दि को अहह अह्ह्ह्ह…..” मैं एक दम से गुर्राते हुए फारिघ् होने लगा….रानी मेरे साथ दूसरी बार फारिघ् हो चुकी थी….मेने अपने लंड को बाहर निकाला….और बेड पर लेट गया….

रानी ने मेरे जिस्म को रज़ाई से कवर कर दिया….और मेरी तरफ करवट बदल कर लेट गयी….उसने एक हाथ मेरी चेस्ट पर रखा और धीरे-2 मेरी चेस्ट पर हाथ फेरते हुए बोली….”समीर काश ये रात ख़तम ना हो….”

मैं: अच्छा जी….फिर तो तुम्हारी फुद्दि ज़रूर सूज जाएगी हाहाहा…..

रानी: सूज जाए तो भी मैं तुम्हे देने से इनकार नही करूँगी….तेल लगा कर दे दूँगी….(रानी ने मेरी चेस्ट पर हाथ फेरते हुए धीरे-2 हाथ को लंड की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….)

रानी ने मेरे लंड को पकड़ा और धीरे-2 दबाना शुरू कर दिया….”समीर आपका ये लंड बहुत तगड़ा है….क्या खा कर इतना बड़ा कर लिया इसे….” रानी ने मेरे लंड को हिलाते हुए कहा…

.”अपने आप ही हो गया….मैने तो कुछ नही किया….”

रानी: आप दोपहर को हवेली के तरफ चक्कर लगा लिया करो….

मैं: क्यों…..

रानी: उस वक़्त ज़ेशन खेतो में होता है….और मैं अकेली होती हूँ….

मैं: अगर वो कही ग़लती से वापिस आ गया और उसने तुम्हे मेरे साथ देख लिया तो…

रानी: देखने दो उस कुशरे को…..उसके सामने भी तुम्हारा लंड फुद्दि मैं ले लूँगी…मैं डरती नही हूँ उससे….

मैं: अच्छा जी अगर उसने गाओं में ये बात बता दी तो, मेरा तो अबू ने मार मार के बुरा हाल कर देना है….

रानी: इसी बात का तो डर है…

मैं: अच्छा छोड़ो ये सब…ये बताओ कि उसे बाहर ही सुलाना है….

रानी: क्यों बड़ा दिल कर रहा है उसकी लेने का…..

मैं: नही इतना भी नही कर रहा…..

रानी: अच्छा ठीक है….पेशाब करने के बहाने से बाहर जाओ….मैं उसे अंदर बुला कर पूछती हूँ कि, उसका मूड है या नही…

मैं: ठीक है……

मैं बेड से नीचे उतरा और अपने कपड़े पहने और रूम का डोर खोल कर बाहर आया…मैं रूम के डोर के पास आकर खड़ा हुआ और किचन में देखने लगा वहाँ अज़ारा नीचे बिस्तर पर लेटी हुई थी…और उसने अपने सर के नीचे तकिया रखा हुआ था…जो उसने पीछे दीवार की साथ लगाया हुआ था….किचन में एक साइड पर अभी भी चूल्हेन की आग जल रही थी….जिससे किचन में हलकी रोशनी थी..….तभी उसने मेरी तरफ देखा और मुझे वहाँ डोर पर खड़ा देख कर शरमा कर मुस्कुराने लगी…. मैने भी एक बार उसकी तरफ देखा और बाथरूम की तरफ चला गया…मुझे कुछ करना तो नही था….इसलिए बाथरूम के अंदर जाकर खड़ा होकर वेट करने लगा…

 


मैं थोड़ी देर वहाँ खड़ा रहा और फिर सोचा अंदर जाकर देखता हूँ कि दोनो आपस में क्या बात कर रही है….मैं धीरे से बाथरूम से बाहर आया रूम की तरफ जाने लगा…किचन के पास पहुच कर मैने किचन की विंडो से अंदर झाँका तो, अज़ारा वहाँ नही थी…वो रूम में जा चुकी थी….मैं धीरे रूम के डोर के पास पहुचा और दीवार की आड से अंदर देखने लगा….अंदर रानी शलवार कमीज़ पहन कर बेड पर बैठी थी….और अज़ारा उसके साथ नीचे पैर लटका कर बैठी हुई थी….

अज़ारा: खाला आप को कहाँ से मिल गया ये….तोबा मुझे तो लग रहा था…जैसे बेड ही तोड़ देगा…हाहाहा….

रानी: चुप धीरे बोल….अब बोल क्या प्रोग्राम है…..

अज़ारा: मेरा क्या प्रोग्राम होना है…..आप ऐश करो…..हाहाहा

रानी: तुम्हारा दिल नही कर रहा….हाहाहा झूट मत बोलना…फुद्दि तो तेरी भी गीली हो गयी होगी…..

अज़ारा: हाहाहा सच्ची खाला….जब वो घस्से मार रहा था…तुम्हारी बुन्द और उसकी रानो की टकराने की आवाज़ बाहर तक आ रही थी…..सीईईईईई हाए क्या बताऊ खाला मेरी फुद्दि का तो वो आवाज़ें सुन सुन कर बुरा हाल हो रखा है….

रानी: गश्ती दिल भी कर रहा है….और नखरे भी कर रही है….जल्दी बोल आने वाला होगा….

अज़ारा: रहने दो खाला….आप मस्ती करो उसके साथ मैं ठीक हूँ….

रानी: ऐसे कैसे ठीक हो….तुम यहाँ बैठो मैं उसे भेजती हूँ,….वैसे भी अब तो तुम्हे किसी बात का डर नही होना चाहिए…10 दिन बाद तेरी शादी है….ऐसा मौका बार -2 नही आएगा….तुम रूको मैं उसे अंदर भेजती हूँ….

अज़ारा: पर खाला रूको तो सही….

रानी: लगता है तुम ऐसे नही मनोगी….

रानी अज़ारा की तरफ बढ़ी….और उसे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया….इससे पहले कि अज़ारा सम्भल पाती रानी ने उसकी शलवार को दोनो तरफ से पकड़ा और उसकी इलास्टिक वाली शलवार को एक झटके से खेंच कर उसके जिस्म से अलग करके नीचे फैंक दिया… “आहह खाला कुछ तो शरम करिए….अगर वो अंदर आ गया तो….?” अज़ारा ने पीछे की तरफ होते हुए कहा…

.”तो क्या आ जाएगा तो, उसे कपड़े नही उतारने पड़ेंगे… खुली हुई फुद्दि मारने को मिल जाएगी हाहाहा….” रानी ने बेड पर चढ़ कर अज़ारा को अपने नीचे लिया और ज़बरदस्ती उसके कमीज़ भी उतार दी….रानी के आगे अज़ारा की एक भी ना चली….उसने कुछ ही लम्हो में अज़ारा के सारे कपड़े उतार दिए….

फिर रानी बेड से नीचे उतरी और अज़ारा के कपड़ो को हाथ मे लेकर बाहर आ गयी….इससे पहले कि अज़ारा कुछ बोलती रानी उठ कर बाहर आ गयी….मुझे डोर पर खड़ा देख कर रानी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और फिर शलवार के ऊपेर से मेरे लंड को पकड़ कर दबाते हुए बोली….”बड़ी जल्दी खड़ा हो गया है….अज़ारा की फुद्दि लेने का सुन कर….हाहाहा….” मैने रानी के बात का कोई जवाब ना दिया….”जाओ अंदर और हां वो जो गुब्बारे लाए थे ना…अब उसको यूज़ मत करना…गश्ती की 10 दिन बाद शादी है…कोई फरक नही पड़ता….”

रानी ने मेरे लंड को दो तीन बार हिलाया ही था कि, मेरा लंड पूरी तरह सख़्त हो गया…”गश्ती की फुद्दि मार-2 कर लाल कर देना….” रानी ने आँख मार कर कहा और मेरा लंड छोड़ दिया…मैने एक बार रानी की तरफ देखा और रूम में चला गया….

जैसे ही मैं रूम में दाखिल हुआ, तो देखा अज़ारा एक दम नंगी खड़ी थी. मुझे देखते ही वो एक दम से शरमा गयी…..और अपने मम्मो को अपने हाथो में छुपाने की कॉसिश करते हुए नीचे पैरो के बल बैठ गयी….अज़ारा अपने आपको अपनी बाहों में समेटे हुए, दीवार के साथ कोने में दुबक कर पैरो के बल बैठी थी.....और मैं धीरे-2 अज़ारा की तरफ बढ़ रहा था....,

मेरे कदमो की आहट सुन कर अपने आप में सिमटती जा रही थी. और कुछ ही पल में ठीके उसके पीछे खड़ा था.....और अज़ारा मेरे सामने बिल्कुल नंगी बैठी हुई थी…मेरा लंड फुल हार्ड हो चुका था….मैने अपनी शलवार को उतार कर पैटी पर फेंक दिया….मेने एक हाथ से अज़ारा के सर को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया तो उसने बैठे-2 ही अपने फेस को ऊपेर उठा कर मेरी तरफ देखा....उसकी साँसे उखड़ी हुई थी...और आगे आने वाले पॅलो मैं क्या होने वाला है....ये सोच कर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था....मेने दूसरे हाथ से अज़ारा के एक हाथ को पकड़ा और उसे अपनी तरफ घुमाने लगा.....

जैसे ही अज़ारा बैठे-2 मेरी तरफ घूमी तो उसके नज़र मेरी जाँघो के बीच में झूलते हुए मुन्सल जैसे लंड पर पड़ी.....तो उसने एक लंबी साँस लेते हुए मेरी आँखो में देखा.....मेने अज़ारा का जो हाथ पकड़ा हुआ था. उसे अपनी राइट थाइ पर रख लिया.....मेरा लंड अज़ारा के फेस के ठीक सामने कुछ इंचो के फँसले पर मेरी थाइस के बीच में लटका हुआ था. जिसे देख कर उसकी साँसे अब और तेज हो चली थी.....

"समीर......" उसने मेरे लंड को देख कर गरम होते हुए कहा.....और अगले ही पल उसने अपने दूसरे हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी जीभ बाहर निकालते हुए मेरे लंड की एक साइड से लंड को चाटना शुरू कर दिया....

अज़ारा एक दम गरम हो चुकी थी....जैसे ही अज़ारा की गरम और गीली जीभ मेरे लंड की फूली हुई नसों पर लगी तो मेरे बदन और लंड में करेंट सा दौड़ गया. मुझे अपने लंड की नसों में खून का दौरा एक दम तेज होता हुआ महसूस हो रहा था....मुझे यकीन नही हो रहा था कि अज़ारा इतनी तेज लड़की निकले गी….उसकी जगह कोई और होती तो अब तक अपनी आँखे भी ना खोलती….

अज़ारा अपनी गरम जीभ को मेरे लंड पर रगड़ रही थी….और उसकी गरम साँसे इस बात का सबूत थी कि, वो किस कदर गरम हो चुकी है….अज़ारा ने मेरे लंड को जड से लेकर कॅप तक चाटा…..और फिर कॅप की चमड़ी को पीछे खिसका कर मेरी लाल कॅप को वासना भरी नज़रो से देखते हुए मेरी आँखो में देखा… और फिर से नज़रे लंड की कॅप पर टिकाते हुए, अपने होंटो को लंड की कॅप पर झुकाना शुरू कर दिया…और अगले ही पल मेरे लंड का लाल दहाकता हुआ कॅप अज़ारा के होंटो के बीच में था….

अज़ारा अपने रसीले होंटो में मेरे लंड के कॅप को दबाए हुए बहुत हॉट लग रही थी…..उसे देख कर कोई कह नही सकता था कि, ये अज़ारा कुछ देर पहले ऐसे शरमा रही होगी कि, जैसे आज तक इसने किसी लड़के की तरफ आँख उठा कर नही देखा हो…और अब किसी रंडी की तरह मेरे लंड की कॅप को अपने होंटो के बीच में दबा-2 कर चूस रही थी…अज़ारा के दोनो हाथ मेरी थाइस को सहला रहे थे…और मैं अज़ारा के सर के पकड़ कर अपने लंड की कॅप को उसके मुँह के अंदर बाहर करता हुआ मस्ती में सिसक रहा था……

अज़ारा अब पूरे रंग में आ चुकी थी….और अब मेरे लंड को 4 इंच तक अपने मुँह के अंदर बाहर करते हुए चूस रही थी….मेरे लंड की नसें और फूल चुकी थी…मेने अज़ारा के मुँह से अपना लंड बाहर निकाला और उसे पकड़ कर बेड के पास ले गया…और उसे ज़मीन पर ही डॉगी स्टाइल मे करके उसके पीछे आ गया. अज़ारा ने अपने दोनो हाथों को बेड के ऊपेर रख लिया….मैं अज़ारा के पीछे आया, और नीचे घुटनो के बल बैठते हुए, उसकी बुन्द को पकड़ कर फेला दिया. और फिर उसकी फुद्दि जो कि पहले ही पानी से गीली हो रही थी…उसके लिप्स को फेलाते हुए उसकी फुद्दि के सुराख पर अपना मुँह रख दिया…..

 
जैसे ही मेने अज़ारा की फुद्दि के गुलाबी सुराख को अपनी जीभ निकाल कर रगड़ा अज़ारा एक दम से सिसक उठी….उसने बेड शीट को कस्के दोनो हाथों से पकड़ लिया… “उंह ओह समीर सीईईईईईईई उंह “ अज़ारा ने सिसकते हुए पीछे की तरफ अपना फेस घुमा कर देखा….अज़ारा की आँखो में अब वासना का नशा और मस्ती के लाल डोरे तैर रहे थे….जिसे देख कर लग रहा था कि, वो कामवासना से बहाल हो चुकी है… मेरी गरम जीभ को अपनी फुद्दि के सुराख पर महसूस करते ही, उसने अपनी थाइस को और फेला दिया, और पीछे से अपनी बुन्द ऊपेर की तरफ उठाते हुए अपनी फुद्दि को और बाहर की तरफ निकाल लिया…..

अज़ारा की फुद्दि का दाना किसी अंगूर की तरह मोटा और फूला हुआ था…. जिसे देख मैं अपने आप को रोक ना सका और अज़ारा की फुद्दि के दाने को अपने होंटो में भर कर दबाते हुए चूसना शुरू कर दया…… “ओह सीईईईईई उंह सीईईई आह आह ह अहह उंघह ओह समीरर ओह अज़ारा की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी…और उसकी कमर तेज़ी से झटके खा रही थी…जैसे वो अपनी फुद्दि मेरे होंटो पर खुद ही रगड़ रही हो….”ओह्ह्ह्ह समीर बस अह्ह्ह्ह अब डालो ना अंदर अह्ह्ह्ह……”

मैं एक दम से घुटनो के बल सीधा बैठा और अपने लंड को पकड़ कर कॅप को अज़ारा की फुद्दि के लिप्स के बीच रगड़ा तो मोटे कॅप का दबाव पढ़ते ही, अज़ारा की फुद्दि के लिप्स फेल गये…और मेरे लंड का मोटा दिखता हुआ कॅप अज़ारा की फुद्दि के सुराख पर जा लगा….लंड के कॅप की गरमी को अपनी लबलबाती फुद्दि के सुराख पर अज़ारा एक दम से सिसक उठी……”ओह्ह समीररर हां अंदर कर भी दो अब…..”

मेने अज़ारा के खुले हुए बालो को पकड़ कर अपनी कमर को आगे की ओर दबाना शुरू कर दिया….मेरे लंड का कॅप अज़ारा की टाइट फुद्दि के सुराख को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा तो, अज़ारा ने भी मस्ती में आकर अपनी बुन्द को पीछे की ओर दबाते हुए, अपनी फुद्दि को मेरे लंड के कॅप पर दबाना शुरू कर दिया…लंड का कॅप अज़ारा की फुद्दि से निकले उसके कामरस से चिकना होकर अंदर की ओर घुसने लगा. और जैसे ही मेरे लंड का कॅप अज़ारा की फुद्दि के सुराख में घुसा तो, अज़ारा का बदन एक दम से अकड़ गया…

उसने पीछे की ओर देखते हुए अपनी बुन्द को गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया…और अगले ही पल मेने अज़ारा के खुले हुए बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खेंचा तो अज़ारा ने अपनी गर्दन किसी हीट में आई हुई घोड़ी की तरह ऊपेर उठा ली…और अपनी बुन्द को पीछे की ओर ज़ोर से धकेला….मेरा आधे से ज़्यादा लंड अज़ारा की फुद्दि में घुस गया….और फिर मेने बचे लंड को एक ज़ोर दार धक्का मार कर अज़ारा की फुद्दि की गहराईयो में उतार दिया…..”ओह्ह्ह्ह अहह समीर ओह …” मेरा लंड अज़ारा की फुद्दि में जड तक घुस कर फँसा हुआ था….

और अज़ारा मस्ती में आकर अपनी बुन्द को गोल गोल घुमा रही थी…..जिससे मेरा लंड अज़ारा की फुद्दि की दीवारों पर रगड़ खाने लगा….मेने अज़ारा के बालो को पकड़ते हुए, तेज़ी से अपना लंड उसकी फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.....मेरे जबरदस्त धक्को से अज़ारा हीट मे आई हुई घोड़ी की तरह हिना हिना रही थी....और सिसकारियाँ भरते हुए अपनी बुन्द को पीछे की तरफ धकेल रही थी.....मेरे मोटे लंड ने अज़ारा की फुद्दि के लिप्स को बुरी तरह से खोल रखा था.....और मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि की दीवारों से रगड़-2 कर अंदर बाहर हो रहा था.....

जिस जोश और वहशी पन के साथ मैं अज़ारा को चोद रहा था, उसे कई गुना जोश के साथ अज़ारा अपनी बुन्द पीछे की तरफ धकेलते हुए मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में ले रही थी....."अह्ह्ह्ह समीर हाआँ और ज़ोर से पूरा अंदर डाल दो ओह्ह्ह्ह समीर उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जैसे खाला को चोद रहे थे…वैसे ही मेरी फुद्दि को भी चीर दो........

मैं नीचे फर्श पर घुटनो के बल बैठा हुआ था....इसलिए अब मेरे घुटने सख़्त फर्श पर दर्द करने लगे थे....मैं एक दम से अपने पैरो पे आया और लगभग अज़ारा की बूँद के ऊपेर सवार हो गया....अज़ारा ने एक बार फिर से पीछे मूड कर देखा और मुस्कुराते हुए अपनी बुन्द को और तेज़ी से पीछे की ओर धकेलने लगी......मैने भी फिर से अपने लंड को अज़ारा की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.....इस पोज़िशन में मेरे धक्को की रफ़्तार सच में किसी एंजिन के पिस्टन के तरह हो गयी थी.....

अज़ारा: अह्ह्ह्ह ओह समीर उफ़फ्फ़ धीरीए ओह उंह

अज़ारा ने सिसकते हुए अपने दोनो हाथों को पीछे लाते हुए मेरी दोनो टाँगो की पिंदलियों को पकड़ लिया, उसके मम्मे बेड पर दबे हुए थे... अब मेने अज़ारा के बालो को एक हाथ से पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से अज़ारा के एक कंधे को....अज़ारा की फुद्दि से उसका कामरस बह कर नीचे की तरफ लैस्दार लार की तरह लटक रहा था.....

अज़ारा: अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह समीर ओह मेरा काम होने वाला है…..

मैं: क्या….?

अज़ारा: समीर मैं फारिघ् होने वाली हूँ….

और फिर अज़ारा का बदन एक दम से काँपने लगा.....उसने अपनी बुन्द को पीछे की ओर दबाते हुए, मेरी थाइस से पूरी तरह सटा लिया....और अगले ही पल उसकी फुद्दि में मेरे लंड ने भी उलटी करनी शुरू कर दी... मैं एक दम से निढाल होकर उसके ऊपेर गिर गया....अज़ारा की फुद्दि में बहुत तेज कॉंट्रॅक्षन हो रहा था....जैसे उसकी फुद्दि अंदर ही अंदर मेरे लंड को निचोड़ रही हो.....

मैं अज़ारा के ऊपेर से उठा और बेड पर पीठ के बल लेट गया.....मेरी टांगे बेड से नीचे लटक रही थी....अज़ारा थोड़ी देर बाद सीधी हुई, और मेरी थाइस पर लंड के पास अपने गालों को लगा कर अपना सर रख लिया...और फिर मेरा लंड जिस पर उसकी फुद्दि से निकला हुआ पानी लगा हुआ था....उसे पकड़ कर ऊपेर से नीचे हिलाने लगी....फिर लंड के कॅप पर लगे हुए अपनी फुद्दि के कामरस को अपने अंगूठे से सॉफ करते हुए, लंड के कॅप को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया....

अज़ारा उस कुत्ति की तरह मेरे लंड को चाट रही थी....जब कोई कुत्ति हीट में आकर कुत्ते के लंड को चाटती है....ठीक वैसे ही वो मेरे लंड को मुँह में लिए हुए चूस रही थी....फिर उसने मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला और मेरी बगल में लेट गयी.....

 


मैं और अज़ारा अपनी उखड़ी हुई सांसो को दुरस्त करने की कॉसिश कर रही थी…थोड़ी देर बाद अज़ारा उठी और पैटी पर पड़ी एक पुरानी चद्दर को लपेट कर बाहर चली गयी…मुझे किचन से दोनो के हंस-2 कर बातें करने की आवाज़ आ रही थी…थोड़ी देर बाद रानी रूम में एंटर हुई….उसने मुझे बेड पर नंगा लेटा देखा तो मुस्कराते हुए बोली….”हां जी पड़ गयी कलेजे को ठंडक अब तो खुश हो ना….”

मैने रानी के तरफ देखा और मुस्कराते हुए हां मैं सर हिला दिया…”जाओ उसने अंदर ले आओ…. अभी तो सारी रात पड़ी है….अब तो हम तीनो में कोई परदा नही है…” मैं रानी की बात सुन कर मुस्कुराने लगा और बेड से उठ कर अपनी शलवार पहनी और ऊपेर से सिर्फ़ जॅकेट पहन कर बाहर जाने लगा….

जाते-2 मैने रानी की बुन्द को मुट्ठी में लेकर कस्के दबा दिया…..और बाहर आ गया… अज़ारा किचन मे नही थी…उसकी शलवार कमीज़ अभी भी किचन मे ही बिस्तर पर पड़ी हुई थी…मैं बाथरूम की तरफ गया तो, मुझे अंदर से अज़ारा के पेशाब करने की आवाज़ सुनाई दी….जिसे सुन कर मेरा लंड फिर से हार्ड होने लगा…मैं एक दम से बाथरूम में घुस गया…डोर की जगह एक परदा लगा हुआ था….जब मैं अंदर पहुचा तो, अज़ारा पेशाब करके खड़ी हो चुकी थी….मुझे अचानक अंदर देख कर वो थोड़ा घबराई और फिर शरमाते हुए उसने सर को झुका लिया….”आपको शरम नही आती लड़कियों को ऐसे पेशाब करते हुए देखते हुए…”

मैं: अगर शरम करता तो, आज तुम्हारी फुद्दि कैसे मिलती….

अज़ारा: तोबा आप कैसे बोलते है….

मैने अज़ारा हाथ पकड़ कर पानी तरफ खेंचा तो, वो मेरे साथ लग गयी…और सरगोशी से भरी आवाज़ मैं बोली…”खाला आ जाएगे…”

मैने उसके फेस को अपने हाथो में लेकर ऊपेर उठाया और उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर चूस्ते हुए कहा.. “उसने ही तो तुम्हे लाने भेजा है…बोलो क्या इरादा है…” अज़ारा मेरी बात सुन कर कुछ ना बोली…उसने मेरी चेस्ट पर अपना फेस छुपा लिया…मैने उसको बाजुओं में लेते हुए चद्दर के नीचे से हाथ डाल कर उसकी नंगी बुन्द को अपने हाथों मे लेकड़ धीरे-2 दबाना शुरू कर दिया…

.”सीईईईईईईई समीर……” अज़ारा ने सिसकते हुए मेरी जॅकेट को कस्के पकड़ लिया…. “अब अंदर भी चलना है कि, यही शुरू हो गये हो तुम दोनो शरम करो….” बाहर से रानी की आवाज़ आई तो, हम दोनो हड़बड़ा गये… जब हम बाथरूम से बाहर आए तो, रानी बाहर नही थी….वो रूम मे जा चुकी थी….

हम दोनो जैसे रूम में एंटर हुए तो देखा रानी आईने के सामने खड़ी होकर अपने खुले हुए बालों को सवार रही थी....उसने ने फेस घुमा कर एक बार हम दोनो की तरफ देखा....मैं जाकर बेड पर लेट गया. अज़ारा भी मेरे साथ बेड पर चढ़ गयी. और मेरे लंड को शलवार के ऊपेर से एक हाथ से सहलाने लगी...अज़ारा की आँखो वासना की खुमारी शाम से ही भरी हुई थी....मेने अपना एक हाथ अज़ारा के सर के पीछे लेजाते हुए उसके खुले हुए बालो को कस्के पकड़ा और उसके सर को नीचे की ओर दबाते हुए उसके रसीले होंटो को अपने होंटो में भर लिया.....

अगले ही पल हम वाइल्ड्ली एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे...और अज़ारा अब मेरी शलवार के ऊपेर से मेरे लंड को तेज़ी से हिला रही थी...उधर आयने के सामने खड़ी रानी हमारी तरफ पलटी.....अज़ारा तुमसे तो सबर ही नही हो रहा है....लगता है तेरी फुद्दि में शाम से आग लगी हुई है...." अज़ारा ने अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग काया...और फिर कमर के पास बैठते हुए मेरी शलवार को पकड़ कर नीचे सरकाते हुए मेरे बदन से अलग कर दया......

अज़ारा ने मेरे लंड को जो थोड़ा सा खड़ा हो चुका था...उसको अपने दोनो हाथों से पकड़ते हुए लंड के कॅप की चमड़ी को पीछे की ओर सरकते हुए उसे जीभ निकाल कर चारो तरफ से चाटना शुरू कर दिया. जैसे ही अज़ारा की जीभ मेरे लंड के कॅप पर लगी. मैं एक दम से सिसक उठा...एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से अज़ारा के बालो को और उसके मुँह में अपने लंड के कॅप को घुसा दिया....

अज़ारा ने भी मँज़ी हुई गश्ती के तरह मेरे लंड के मोटे कॅप को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दया....बेड के किनारे खड़ी रानी ये देख कर एक दम से हैरान थी....पर अपनी आँखो के सामने अपनी भतीजी को इस तरह मेरा लंड चूस्ते हुए देख कर वो भी मदहोश हो चुकी थी....रानी ने मेरी ओर देखते हुए अपनी शलवार कमीज़ को पकड़ कर उतार दया और उसे बेड पर फेंकते हुए एक दम से ऊपेर आ गयी....

रानी ने मेरे ऊपेर झुकते हुए मेरे होंटो के करीब अपने होंटो को लाते हुए कहा..."समीर मेरे होंटो को चूसो काट खाओ मेरे होंटो को...." और ये कहते हुए रानी ने मेरे होंटो पर झपट पड़ी और पागलो की तरह मेरे होंटो को चूसने लगी....मेने भी रानी के नीचे वाले होन्ट को अपने होंटो में लेकर चूस्ते हुए अपने दांतो से काटना शुरू कर दिया....अब मैं अपने दोनो हाथो से अपने चेस्ट के ऊपेर झूल रहे रानी के मम्मो को ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था.....और अज़ारा मेरे आधे से ज़्यादा लंड को मुँह में लेकर पूरे जोशो ख़रोश के साथ उसके चुप्पे लगा रही थी....

रानी एक दम से ऊपेर हुई और फिर मेरी तरफ पीठ करके अपनी एक टाँग को मेरी दूसरी तरफ करके मेरे फेस के ऊपेर अपनी फुद्दि ले आई, और अपनी फुद्दि के लिप्स को अपने दोनो हाथों से फैलाते हुए, धीरे -2 अपनी फुद्दि को मेरे मुँह के ऊपेर करने लगी....मेने भी अपनी जीभ निकाल कर उसे नोक दार बनाते हुए रानी की फुद्दि के गुलाबी लबलबा रहे सुराख के अंदर घुसा दया....

 


रानी ने सिसकते हुए एक दम से मेरी थाइस के ऊपेर झुक गयी....अब उसके सामने अज़ारा के मुँह में मेरा लंड था....जिसे वो मदहोश होकर चूस रही थी....अज़ारा ने रानी की तरफ देखा तो उसके होंटो पर शरारती मुस्कान फेल गयी....रानी के मस्ती भरी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी.....उसने भी अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरे लंड के बेस को चाटना शुरू कर दिया....अपने लंड पर दो दो गरम जीभ महसूस करके मैं एक दम से सिसक उठा....

और अपनी जीभ को रानी की फुद्दि में और ज़ोर-2 से रगड़ने लगा...अगले ही पल अज़ारा ने मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया. मेरा लंड कॅप से लेकर जड तक उसके थूक से सना हुआ था...अज़ारा ने बैठते हुए अगले ही पल अपनी चद्दर उतार फेंकी....और फिर मेरी कमर के दोनो तरफ पैर करके मेरे ऊपेर आ गयी....अब दोनो खाला भतीजी एक दूसरे की तरफ फेस किए मेरे ऊपेर थी...रानी ने मेरे लंड को पकड़ा हुआ था और उसे तेज़ी से हिला रही थी...

जैसे ही अज़ारा ने अपनी फुद्दि को मेरे लंड के ऊपेर किया....रानी ने मेरे लंड को हिलाना बंद कर दिया....."खाला मेरी फुद्दि में समीर का लंड डालो ना...." अज़ारा ने अपनी फुद्दि के सुराख को दोनो हाथों से फेलाते हुए कहा....और अगले ही पल रानी ने मेरे लंड के कॅप को उसकी फुद्दि के सुराख पर लगा दिया......"सीईईईईईईईईईई हाई खाला समीर के लंड का कॅप कितना गरम है....." अज़ारा ने सिसकते हुए अपनी फुद्दि को लंड के कॅप पर दबाते हुए कहा....

और मेरे लंड का कॅप अज़ारा की टाइट फुद्दि के सुराख को फैलाता हुआ धीरे -2 अंदर घुसने लगा.....जैसे मेरे आधा लंड अज़ारा की फुद्दि में घुसा रानी ने अपना हाथ मेरे लंड से हटा लिया....और अज़ारा को अपनी बाहों में भरते हुए उसके होंटो पर अपने होन्ट रख दिए....मेने भी नीचे लेटे हुए अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछाला मेरा लंड गतच की आवाज़ से अज़ारा की गीली फुद्दि को खोलता हुआ पूरा अंदर जा घुसा.....

अज़ारा: (रानी के होंटो से अपने होन्ट अलग करते हुए" सीईईईईईईईई उंह ओह्ह्ह खाला घुस गया हाईए मेरी फुद्दि में समीर का लंड पूरा घुस गया...

और उसने सिसकते हुए रानी के निपल्स जो एक दम फूल चुके थे. उसे अपने मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया....."उंह अह्ह्ह्ह चूस मेरे ओह चूस अपने खाला के मम्मो को उम्ह्ह्ह...." रानी ने सिसकते हुए अज़ारा के सर को अपनी बाजुओं में भरते हुए अपने मम्मो पर दबाना शुरू कर दिया....

अज़ारा रानी के निपल्स को चूस्ते हुए अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे उछलाते हुए लंड को अपनी फुद्दि की गहराईयो में लेने लगी....पूरे रूम में दो दो गरम औरतों की सिसकारियों गूँज रही थी...इधर मैं अपनी जीभ से रानी की फुद्दि के सुराख को अंदर तक चोदने के कॉसिश कर रहा था...उसकी फुद्दि से पानी का रिसाव इतना ज़्यादा हो चुका था कि, मैं बार -2 उसके कपड़े से उसकी फुद्दि के सुराख को सॉफ कर रहा था....

दूसरी तरफ अज़ारा किसी रंडी की तरह अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे कर रही थी...और हर पल उसकी स्पीड बढ़ती जा रही थी........अब रानी उसके निपल्स को चूसना शुरू कर दिया......"ओह्ह्ह खाला हाईए मेरी फुद्दि ओह्ह्ह बजने वाली है अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाईए मैं तो गयी खाला......" अज़ारा ने रानी के फेस को पकड़ कर उसके होंटो को फिर से अपने होंटो में भर लिया और तेज़ी से अपने कमर को हिलाने लगी....

हम तीनो की साँसे अब तेज हो चुकी थी...."ओह्ह्ह्ह अज़ारा देख तेरी खाला की फुददी भी अह्ह्ह्ह उंह हाआँ समीर चूस मेरी फुद्दि को अह्ह्ह्ह आहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उंघह उंघह अहह....." फिर तो रानी और अज़ारा की दोनो कमर ने ऐसे झटके खाए कि क्या कहने दोनो का बदन एक दम से अकड़ने लगा....और दोनो फारिघ् हो कर एक दूसरे की बाहों में लिपट गये....

रानी लूड़क कर मेरी बगल मे लेट गयी....अज़ारा भी बदहवास सी मेरे ऊपेर से उठ गयी.....मैं उठ कर बैठ गया...और रानी की टाँगो को उठा कर उसकी थाइस मे घुटनो के बल बैठ गया...रानी मेरे लंड को जो कि अज़ारा की फुद्दि से निकले पानी से एक दम सना हुआ था...उसे देख कर मुस्करा रही थी....."तैयार हो जा अपनी भतीजी की फुद्दि का पानी लगे हुए लंड को अपनी फुद्दि मे लेने के लिए...." मेने अपने लंड को रानी की फुद्दि के लिप्स के बीच मे रगड़ते हुए कहा....

जैसे ही मेरे लंड का कॅप रानी की फुद्दि के फूले हुए दाने पर रगड़ खाया....रानी एक दम से सिसक उठी....उसके होंटो पर कामुकता भरी मुस्कान फेल गयी....ये देख अज़ारा भी उठ कर रानी की कमर के पास बैठ गयी...अपनी खाला को अपनी टाँगो को यूँ उठाए हुए लेटे देख कर अज़ारा की आँखे हैरत से भर गयी....और अगले ही पल उसने झुक कर रानी की फुद्दि के लिप्स को पकड़ कर फेला दिया..

अज़ारा: हाईए खाला आपकी फुद्दि अभी भी कितना पानी छोड़ती है....हाए दिल करता है चाट जाउ.....

अज़ारा की बात सुन कर रानी एक दम से शरमा गयी....उसने सिसकते हुए अपनी आँखे बंद कर ली....."समीर डालो ना अपना लंड खाला की फुद्दि में देखो ना कैसे पानी छोड़ छोड़ कर कमली हो चुकी है...." अज़ारा ने आँख मारते हुए कहा.....

 


मेने अपने लंड के कॅप को रानी की फुद्दि के सुराख पर सेट किया...और उसकी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठाते हुए, एक ज़ोर दार धक्का मारा....."गतछ की आवाज़ पूरे रूम में गूँज गयी...."सीईईईईईई समीर......" रानी ने अपने सर के बालो के पकड़ कर सिसकते हुए कहा.....और अगले ही पल अज़ारा रानी की बगल में लेटते हुए उसकी मम्मो पर झुक गयी....और दोनो मम्मो को पकड़ कर मसलते हुए उनके निपल्स को अपने दाँतों से खेंचते हुए चूसने लगी...

रानी: उम्मह ओह्ह्ह अज़ारा उंह सीईईईईईईईईई हाईए समीरर देख तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया है.....मुझे रंडी बना दिया है तेरे लौडे ने देख कैसे मैं अपनी भतीजी अहह के सामने अपनी फुद्दि खोल कर तेरा लंड ले रही हूँ....

मेने रानी की थाइस को कस्के पकड़ लिया....और घुटनो के बल बैठ कर अपनी कमर को तेज़ी से आगे पीछे हिलाते हुए रानी की फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा......फटछ-2 थप तप थप की आवाज़े मेरे धक्को की रफतार से और तेज होती जा रही थी....अज़ारा अब रानी के ऊपेर दोनो तरफ पैर रख कर झुकी हुई उसके मम्मो को चूस रही थी..

रानी: ओह समीर ओह कितनी तेज चोदते हो तुम....ओह्ह्ह्ह अज़ारा देख मेरी फुद्दि की हालत कैसे हो गयी.....हाईए मैं गयी समीर...

रानी भी जोश में आकर अपनी बुन्द को ऊपेर उठा चुकी थी.....जिससे मेरे लंड का कॅप फुद्दि के सुराख तक बाहर आता और फिर से अंदर घुस कर उसकी बच्चेदानी से जा टकराता.....और अगले ही पल फतच-2 की आवाज़ और तेज हो गयी....रानी की फुद्दि से उबलते हुए काम रस की नदी बह निकली..." ओह्ह्ह समीर ओह्ह्ह्ह ली मेरी फुद्दि फिर से रो पड़ी अह्ह्ह्ह हाईए समीर तेरा लंड कितना अच्छा है........."

रानी के झड्ने के बाद मैं मेने उसकी फुद्दि से अपने लंड को निकाला और रानी के ऊपेर कुतिया की तरह झुकी हुई अज़ारा की फुद्दि के सुराख पर रखते हुए ज़ोर दार धक्का मारा...."अहह समीरर ओह हाईए धीरे समीर ओह्ह्ह उंह ओह....."

रानी: ओह्ह समीर फाड़ दे इस गश्ती के फुद्दि को भी.....साली का बस नही चलता नही तो पूरे मोहल्ले से चुदवा लेती अब तक....इसकी फुद्दि को इतना रगड़ अपने लंड से कि एक साल इसे लंड लेने की ज़रूरत ना पड़े..

मैने अज़ारा की फुद्दि में भी ऐसे कस कस के शॉट मारे कि अज़ारा भी घोड़ी की तरह ऊपेर सर उठा कर हिनहिनाते हुए फारिघ् होने लगी...और अगले ही पल मेरे लंड ने भी अज़ारा की फुद्दि मे उल्टी करनी शुरू कर दी....मेरे लंड से निकला सारा माल अज़ारा अपनी बच्चे दानी में जाता हुआ महसूस करके एक दम से काँप उठी....

उसने अपनी फुद्दि को कस लिया....मेरा लंड तो जैसे रस निकालने वाली मशीन मे फँसा हो...मुझे ऐसा महसूस हो रहा था....उस रात मैने अज़ारा और रानी को कितनी बार चोदा मुझे याद नही….मैने मोबाइल में सुबे 5 बजे का अलार्म लगाया और सो गया….

 
अगली सुबे 5 बजे अलार्म बजा और मैं उठ गया….बाथरूम मे जाकर फ्रेश हुआ और रूम मे आकर अज़ारा और रानी को उठाया…और बताया कि अब मुझे निकलना होगा.. मैने कपड़े पहनने लगा….अज़ारा जल्दी से उठ कर बाथरूम मे गयी…फ्रेश होकर उसने चाइ बनाई…मैं चाइ पी कर वहाँ से निकल कर मैन रोड पर आ गया…मुझे डर था कि, कही अबू और नाज़िया सुबह-2 जल्दी घर ना पहुच जाए…अबू अगर अकेले होते तो, जल्द बाज़ी नही करते…पर मुझे नाज़िया का डर था…मैं जानता था कि, नाज़िया मेरी वजह से (यानी नक़ाब पोश समीर की वजह से वो बस मिस नही करना चाहेगी…) इसलिए मैं उनके घर पहुचने से पहले घर पहुँचना चाहता था…अभी तक अंधेरा था… पहली बस भी 8 बजे से पहले नही मिलने वाली थी….

रोड एक दम सुनसान था….मैं पैदल ही अपने गाओं के तरफ जाने लगा….पर वहाँ से गाओं भी 20 किमी दूर था…और ना ही मुझे कोई सवारी नज़र आ रही थी…मैं पैदल चलता हुआ जा रहा था कि, मुझे पीछे से कुछ आवाज़ सुनाई दी…मैने मूड कर देखा तो, पीछे एक रेहड़ा घोड़ा गाड़ी वाला आ रहा था…बाद मैं मुझे पता चला कि, वो सख्स रोज सुबह -2 सिटी की सब्जी मंडी मे सब्जियाँ लेने जाता है…और वहाँ से सब्जियाँ लाकर अपनी दुकान पर बेचता है….

मैने उसे हाथ दिया तो उसने अपनी घोड़ा गाड़ी रोकी…और बोला….” हां जी कहिए…”

मैं: वो मुझे **** गाओं तक जाना है….अभी कोई बस नही मिल रही क्या आप मुझे वहाँ तक छोड़ देंगे….

आदमी: आजाओ बैठो जी छोड़ देते है…..

मैं उसके घोड़ा गाड़ी मे बैठ गया….पैदल चलने से अच्छा था…कि रेहड़े पर ही चला जाता….खैर तकरीबन 45 मिनिट लगे होंगे गाओं के मोड़ तक पहुचने तक. गाँव के मोड़ पर पहुच कर मैने मोबाइल निकाल कर टाइम देखा तो, 6:30 बज रहे थी…मैं घर पहुचा तो, गली सुनसान थी….मैने राहत की साँस ली और घर का लॉक खोला….और अंदर आकर कुण्डी लगाई और अपने रूम मे आकर बेड पर लेट गया… मैने अपने मोबाइल मैं फिर से 9 बजे का अलार्म सेट किया…रात को ठीक से नींद पूरी नही हुई थी…..इसलिए सोचा थोड़ा और सो लेता हूँ….लेटते ही नींद आ गयी… फिर आँख तब खुली जब मोबाइल का अलार्म बजने लगा…

मैं उठ कर बाथरूम मे गया….और वहाँ से फारिघ् होकर अभी बाहर ही आया था कि, डोर बेल बजी…मैने गेट खोला तो सामने अबू और नाज़िया खड़े थे…अबू ने मोटर साइकल अंदर की और जल्दी से रूम मे चले गये….नाज़िया ने हाथ मे लंच बॉक्स पकड़ा हुआ था….उसने अंदर आकर लंच बॉक्स को टेबल पर रखा और किचन मे प्लेट्स लेकर टेबल रखते हुए बोली…”समीर इसमे खाना है…खा लो….तुम्हारे अबू को आज ट्रनिंग के लिए लाहोर जाना है…..मैं पॅकिंग मे उनकी मदद कर दूं…” मैने नाज़िया की बात का कोई जवाब नही दिया और बैठ कर लंच बॉक्स खोला और खाना खाने लगा…अबू शायद कल ही पॅकिंग करके गये थे….इसलिए उन्हे ज़यादा टाइम ना लगा और थोड़ी देर बाद वो अपना सूटकेस लेकर बाहर आए और मुझसे बोले…

अबू: समीर अपना नाज़िया और घर का ख़याल रखना….

मैं: जी…..

अबू: और हां अब तुम बड़े हो गये हो….मेरी गैर मोजूदगी मे घर की ज़िमेदारी तुम्हारी है….घर का भी ख़याल रखना…

मैं: जी अबू आप बेफिकर होकर ट्रंनिंग पर जाए….

 
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