मैं बेड से खड़ा हुआ था…तो नाज़िया की नज़र शलवार में खड़े मेरे लंड पर पड़ी… उसने शलवार को आगे से ऊपेर उठा रखा था….ऊपेर से मेने टीशर्ट पहन ली थी….उसके नज़रे मेरे लंड पर अटकी हुई थी…..जैसे ही मैं बाहर जाने लगा तो, नाज़िया ने काँपती हुई आवाज़ से कहा….”कपड़े तो पहन लो….”
मैने नाज़िया की तरफ देखा पर बोला कुछ नही….और रूम से बाहर निकल कर ड्रॉयिंग रूम में आ गया… जब मैं ड्रॉयिंग रूम में पहुँचा तो, देख सबा भी सहमी से बैठी थी…. मैं सबा के सामने खड़ा हो गया…उसने भी एक बार मेरी शलवार में खड़े लंड को देखा और फिर सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देखते हुए बोली….
सबा: समीर कुछ होगा तो नही…
मैं: कुछ नही होगा…अगर कुछ होना होता तो, मैं इतना बड़ा कदम उठाता ही क्यों…बस इतना समझ लो कि तुम ये सब करके मेरी बहुत बड़ी मदद कर रही हो…
सबा: अगर ये बात है तो, मैं भी कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ….
मैं: अच्छा ठीक है…तुम यही बैठो…जैसे ही मैं तुम्हे कहूँगा शुरू हो जाना…
सबा ने हां मैं सर हिलाया तो, मैं रूम के डोर के पास आकर खड़ा हो गया… और किचन की तरफ देखते हुए अपने लंड को शलवार से बाहर निकाल कर हिलाने लगा…थोड़ी देर बाद नाज़िया मुझे किचन से बाहर आती हुई नज़र आई….मैं जल्दी से सोफे पर सबा के पास जाकर बैठ गया….रूम के डोर पर परदा लगा हुआ था…पर साइड से अंदर देखा जा सकता था….
मैने सबा के हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रखा और उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर चूसना शुरू कर दिया…फिर मैने जैसे ही उसके होंटो पर अपने होंटो का दबाव बढ़ाया तो, उसने अपने होंटो को ढीला छोड़ दिया….मैं उसके होंटो को अपने होंटो में दबा-2 कर चूसने लगा…उसके होंटो को अपने दाँतों से काटने लगा….वो साँस लेने के लिए अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करती और फिर मेरे चेहरे को अपने हाथो से पकड़ कर अपने होंटो पर झुका देती…इतनी देर में नाज़िया को रूम के अंदर आ जाना चाहिए था…अगर वो अंदर नही आई थी…तो इसका मतलब सॉफ था कि, या तो वो मुझे और सबा को इस हाल में देख कर वापिस जा चुकी थी….या फिर दीवार की आड़ से छुप कर हमे देख रही थी…मैने सबा के होंटो को चूस्ते हुए बाहर देखा पर मुझे नाज़िया नज़र नही आई….सबा लगातार मेरे लंड को हिलाए जा रही थी…
मैने फिर से उसके होंटो को अपने होंटो में भर कर उसके होंटो को चूसने लगा…सबा ने अपने दोनो हाथों को नीचे लेजाते हुए, अपनी इलास्टिक्क वाली शलवार को उतार दिया…..और फिर मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी पैंटी के अंदर डाल दिया. और फिर अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करते हुए मेरी आँखो में झाँकते हुए बोली “सीईई देखो ना समीर….ये कितनी गीली है….सुबह से तुम्हारे बारे में सोच -2 कर पानी छोड़ रही है…”
मैने उसकी फुद्दि के लिप्स में जैसे ही अपनी उंगलियों को फिराया तो, मेरी हैरानी का ठिकाना नही रहा….उसकी फुद्दि उसके अंदर से निकल रहे गाढ़े लेसदार पानी से सरोबार थी….उसकी पैंटी भी नीचे से गील हो चुकी थी….मैने भी उसके आँखो में देखते हुए, उसकी फुद्दि के सुराख पर जैसे ही अपनी दो उंगलियों को दबाया तो, मेरी उंगलियाँ उसकी फुद्दि में फिसलती हुई अंदर चली गयी….
“ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह समीर….सुबह से मेरी फुद्दि में खुजली हो रही थी.…समीर…..प्लीज़ मुझे चोदो ना” मैने सबा की फुददी में तेज़ी से अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…मैने अपने दूसरा हाथ ऊपेर लेजाते हुए उसकी कमीज़ को ऊपेर करना शुरू कर दिया…तो, उसने खुद भी अपने हाथो अपनी कमीज़ और ब्रा को ऊपेर उठा दिया.....जैसे ही सबा के कसे हुए मम्मे उसकी ब्रा की क़ैद से आज़ाद हुए.....मैं सबा के मम्मो पर घुरते हुए टूट पड़ा....और उसके तने हुए निपल को मुँह में लेकर पागलो की तरह चूसने लगा...."उंह समीररर ओह्ह्ह्ह चूस लो मेरे दूध...अह्ह्ह्ह तेज-2 चूसो उम्ह्ह्ह्ह्ह" मैने सबा के दूसरे निपल को अपनी उंगलियों में लेकर जैसे ही दबाना शुरू किया तो, सबा ने अपने मम्मे को पकड़ कर मेरे मुँह में और धकेलना शुरू कर दिया....
सबा अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी....वो अपने हाथ से मेरे लंड को तेज़ी से हिला रही थी....मैं उसके मम्मे को और ज़ोर-2 से चूसने लगा....तो उसने भी मेरे लंड को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया...फिर सबा एक दम से अलग हुई, और अपनी पैंटी को उतार कर वही सोफे पर फेंक दिया...सबा खड़ी हुई और उसने मुझे सोफे पर धक्का देकर बैठा दिया....और खुद मेरे एक साइड पर सोफे पर चढ़ते हुए, मेरे लंड को पकड़ कर अपनी जीभ निकाली और फिर लंड के कॅप को जीभ पर मारते हुए मेरी आँखो में झाँका.......
सबा: समीर तुम्हारा लॉलीपोप बहुत टेस्टी है.....दिल करता है...इसे दिन भर चुस्ती रहूं....
ये कहते हुए सबा ने मेरे लंड की कॅप को अपने होंटो में भर लिया... और फिर अपने होंटो का दबाव मेरे लंड के कॅप पर बढ़ाते हुए धीरे-2 अंदर बाहर करने लगी...मैने सबा के बालो पकड़ कर उसके सर को अपने लंड पर दबाना शुरू कर दिया...अचानक से मेरी नज़र डोर पर पड़ी...बाहर नाज़िया आँखे फाडे देख रही थी...धीरे-2 सबा की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी....वो और तेज़ी से मेरे लंड के चुप्पे लगाने लगी थी.....
फिर सबा एक दम से उठी और अपनी फुद्दि मे अपनी उंगलियों को घुसाते हुए दो चार बार अंदर बाहर किया और फिर अपनी उंगलियों पर लगे फुद्दि से निकले कामरस को मेरे लंड के कॅप के चारो तरफ फेलाते हुए मलने लगी....
और अगले ही पल सबा मेरे ऊपेर दोनो तरफ टाँगे फेला कर बैठ गयी....मैने अपने लंड को पकड़ कर उसकी फुद्दि के सुराख पर जैसे ही लगाया तो सबा एक दम से सिसक उठी....उसने अपनी दोनो हाथो को मेरे चेस्ट पर रखा और धीरे-2 अपनी बुन्द को नीचे की ओर दबाने लगी.... उसकी फुद्दि का सुराख मेरे लंड के कॅप के चारो तरफ फेलने लगा...और मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के सुराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा....कुछ ही पलों में सबा की फुद्दि में मेरा पूरा लंड अंदर बाहर हो रहा था...मैं लगतार सबा की बुन्द के दोनो पार्ट्स को फैला-2 कर दबा रहा था....और बीच -2 में सबा की बुन्द पर थप्पड़ जड देता...
सबा की गोरे-2 चुतड़ों पर मेरी उंगलयों के लाल निशान छप्प चुके थे.....वो और भी मदहोश होकर तेज़ी से अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे उछालने लगी थी...."ओह्ह्ह्ह हाईए समीर चोद मुझे….अह्ह्ह्ह तेरा लंड मैं तो तेरे लंड की गुलाम हो गयी हूँ… समीर....ओह्ह्ह्ह आज कितने दिनो बाद फुद्दि को सकून आया है….कल मेरी बुन्द की खुजली भी मिटा देना….तुम्हारे लंड को वहाँ लिए हुए भी कई दिन हो गये है… ओह्ह्ह हाईए मेरी फुद्दि ने अह्ह्ह ओह्ह्ह समीर.....ओह्ह्ह्ह मूत गइई ओह्ह्ह साली उंह.......
बाहर नाज़िया हैरत भरी नज़रों से हम दोनो की तरफ देख रही थी…मैं सीधा उसे नही देख रहा था….तिरछी नज़रो से देख रहा था…जैसे ही मेरे लंड ने सबा की फुद्दि में पानी छोड़ा….तो मैने सीधे-2 नाज़िया की तरफ देखा….जैसे ही हमारी नज़रें मिली…मैने मुस्कराते हुए उसे आँख मार दी…नाज़िया फॉरन वहाँ से पीछे हट गयी….सबा मेरे ऊपेर से उठ कर सोफे पर बैठ गयी….और अपनी पैंटी उठा कर पहले उसने मेरे लंड को सॉफ किया और फिर अपनी फुद्दि को…..मैने शलवार पहनी और सबा को एक शोप्पर दिया…जिसमे उसने अपनी पैंटी डाली और अपने कपड़े पहनने लगी… “अब खुश हो….” सबा ने मुस्कराते हुए कहा…
मैं: हां बहुत खुश हूँ….
सबा: अब देखना कही वो कोई बेखेड़ा ना खड़ा कर दे….
मैं: मैने कहा ना फिकर करने की कोई ज़रूरत नही….कुछ नही होता…अभी तक कुछ हुआ क्या…
उसके बाद सबा चली गयी….मैनें गेट बंद किया और जैसे ही मूड कर अपने रूम में जाने लगा तो, देखा नाज़िया बरामदे में खड़ी मेरे तरफ देख रही थी… उसका चेहरा गुस्से से सुर्ख हो रहा था…और वो लंबी-2 साँस ले रही थी…