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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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साना : थोड़ा सा इंतजार करो….अभी देखना अब तुम्हारे इस लंड को कितनी गरमी मिलने वाली है….

ये कहते हुए साना मेरी जाँघो के पास मुँह करके पैट के बल लेट गयी…..दूसरी तरफ ठीक वैसे ही नीलम भी, लेट गयी……नीलम ने साना की आँखो मे देखते हुए मेरे लंड पर झुकाना शुरू कर दिया…..और अपने होंटो को मेरे लंड के मोटे कॅप पर लगा दिया….मैं एक दम मस्ती से सिसक उठा…. मैने नीलम के खुले हुए बालों को कस्के पकड़ लिया….नीलम ने इस बात का बुरा नही माना. और अपने होंटो को मेरे लंड की कॅप के चारो तरफ कस्ति चली गयी….

थोड़ी ही देर मे मैने की लंड का कॅप नीलम के मुँह मे था, और वो उसे अपने होंटो से दबा-2 कर चूसने लगी…..दूसरी तरफ लेटी साना ने भी देर नही की, और अपनी जीभ और होंटो से मेरे लंड के नीचले हिस्सो को चाटने लगी…..मेरे लंड को अब दोहरी मार पड़ रही थी….मेरा लंड एक दम अकड़ गया था….मैने ने अपने दूसरे हाथ से साना के खुले हुए बालो को पकड़ लिया….दोनो औरतें मेरे लंड पर कुतियों की तरह टूट पड़ी….

नीलम तो मेरे लंड को चूसने मे मगन थी…..और साना कभी मेरे लंड पर लंबी पर अपनी जीभ फिराती, तो कभी मेरे बॉल्स को पकड़ कर मुँह में भर कर चूसने लगती….और फिर दोनो मेरे लंड को नीचे से चूस्ते हुए ऊपेर कॅप तक आती, और दोनो एक दूसरे के होंटो को चूसने लगती.....

मैं आँखें बंद किए हुए जन्नत सा मज़ा ले रहा था…..साना और नीलम जिस जोशीले अंदाज़ मे मेरे लंड को चूस चाट रही थी……देखने से लग रहा था…..जैसे सामने किसी पॉर्न मूवी का सेसन चल रहा हो…..थोड़ी ही देर मे मेरा लंड दोनो के थूक से सन गया….जैसे ही नीलम ने मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला, साना ने उसे अपने मुँह मे भर लिया…….पक-2 गलप -2 जैसी आवाज़ें पूरे रूम मे गूंजने लगी…. “साना यार बहुत मज़ा आ रहा है…..ऐसे जवान लंड के चुप्पे लगाने का स्वाद ही कुछ और है…..”

साना: (मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिलाते हुए) हां सच अम्मी मैने भी इस जैसा दूसरे लंड को कभी नही चूसा, मज़ा आ गया यार…..दिल करता है रोज इस लंड के चुप्पे लगाऊ…..(ये कहते हुए उसने फिर से मेरे लंड को मुँह मे भर लिया….और चूसना शुरू कर दिया….)

नीलम का बेड रूम चुदाई की आवाज़ों से भर गया था…..”बोल पहले तू इस लंड की सवारी करेगे “ साना ने मेरे लंड मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिलाते हुए कहा….तो नीलम बिना कुछ बोले उठ कर बैठ गये…..और दोनो मेरी बगलो में लेट कर मेरे ऊपेर झुक गयी……दोनो के बड़े-2 गुदाज मम्मे मेरे चेहरे के ऊपेर झूलने लगी….एक साथ दो -2 औरतो के गुदाज मम्मों को देख कर मेरी आँखों मे चमक आ गयी…..साना ने निप्पल कुछ ज़्यादा ही लंबे और मोटे थे….देख कर ऐसा लग रहा था…..जैसे चीख-2 कर कह रहे हो….आओ हमे मुँह मे भर कर निचोड़ लो…..मैने भी एक पल के देर ना की, और

मैने साना की निपल को मुँह मे भर लिया….साना मेरे ऊपेर और झुक गयी…..और अपने मम्मे को और ज़्यादा मेरे मुँह मे दबाने लगी….मैने भी उसके मम्मे और निपल को अपने होंटो मे दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया….”अहह हाआँ चूस्सो समीर अहह बहुत अच्छा लग रहा है……” और उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर मेरे लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया….दूसरी तरफ लेटी, नीलम मेरे बॉल्स के साथ खेलने लगी…..मैने ने कभी सोचा ना था कि, ये दोनो औरतें मुझे आज इतना मज़ा देंगे……साना के मम्मे को थोड़ी देर चूसने के बाद मैने मम्मे को मुँह से बाहर निकाला, और नीलम की तरफ देखा…

नीलम ने अपने एक मम्मे को हाथ मे पकड़ कर अपने निपल को और नोकदार बनाते हुए, उसे मेरे मुँह से लगा दिया….मैने भी मुँह खोल नीलम के मम्मेको मुँह में भर लिया……और चूसना शुरू कर दिया…..नीलम की मस्ती में आँखे बंद होने लगी….उसका हाथ मेरे चौड़े सीने पर तेज़ी से घुमाने लगा….दूसरी तरफ लेटी, साना उठ कर मेरे ऊपेर आ गयी….और अपने घुटनो को मेरी कमर के दोनो तरफ रख कर बैठते हुए मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया…..और अपनी फुद्दि के लिप्स पर जैसे ही उसने मेरे लंड की कॅप को रगड़ा, तो वो एक दम से सिसक उठी….”आह लंड तो बहुत गरम है ….” साना की आवाज़ सुन कर नीलम ने भी अपने मम्मे को मेरे मुँह से बाहर निकाला…..और साना को धक्का देकर मेरे ऊपेर से नीचे बेड पर गिरा दिया…”क्या हुआ धक्का क्यों मार रही हो….”

नीलम: पहले ये लंड मेरे अंदर जाएगा….बाद में तेरे….

ये कहते हुए नीलम घुटनो और कोहानियों के बल बेड पर डॉगी स्टाइल मे आ गयी….और अपना एक हाथ पीछे लाते हुए अपनी बूँद को फेला कर अपनी फुद्दि का सूराख मुझे दिखाते हुए बोली…”चल आजा मेरे शेर कर ले अपनी घोड़ी की सवारी…..”

साना: हां समीर पहले इसका भोसड़ा फाड़ दे……इसके भोसड़े मे कब से खुजली मची हुई है…

मैं नीलम के पीछे आकर घुटनो के बल बैठ गया….और अपने लंड की कॅप को नीलम की फुद्दि के सूराख पर टिकाते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा, तो नीलम दर्द से चीख उठी……”आह धीरे ओह्ह्ह्ह तेरा लौडा तो मेरी फुद्दि ही फाड़ देगा…..हाई मर् गयी मैं….” पीछे खड़ी साना ये सब देख कर मुस्कुराते हुए नीलम की बूँद के पास आकर झुक गयी…..और दोनो हाथो से नीलम की बुन्द को फेलाते हुए, मेरी तरफ देख कर मुस्कराते हुए बोली…..चलो रूको ना अब…घुसा दे पूरा अपनी इस गस्ति नीलम की फुददी में…….साना ने नीलम की बुन्द सहलाते हुए कहा…..”

नीलम: आह साना कुछ तो शरम कर…..या सारी शरम इस्लामाबाद में बेच कर खा गये है…..अपनी अम्मी से कोई ऐसे बात करता है….

साना: क्या है अम्मी आज रात के लिए हम दोनो माँ बेटी नही है….जब मेरे सामने इसका लंड ले सकती हो….तो फिर कैसी शरम….वैसे भी दो दिन बाद मैने चले जाना है…समीर तुम क्यों रुक गये….तुम मारते रहो इसकी….

मैं अब नॉर्मल स्पीड से नीलम की फुद्दि के सूराख मे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था….थोड़ी देर बाद नीलम को भी मज़ा आने लगा….और उसने भी अपनी बुन्द को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया….”अहह ओह हइई समीर और तेज .मैं भी देखू कि कितनी अकड़ है तुम्हारे लंड में” आह अहह…….मैने अब पूरी ताक़त के साथ अपना मोटा लंड नीलम की फुद्दि के सूराख मे अंदर तक घुसा रहा था…..और नीलम भी पीछे की तरफ अपनी बुन्द को पीछे की तरफ मेरे लंड पर दबाने लगी…..

मैने एक दम से अपने लंड को पूरा बाहर निकाला. तो साना ने नीलम की बूंद के ऊपेर झुक कर उसकी बुन्द के दोनो पार्ट्स को फेला कर उसकी फुद्दि को देखने लगी….नीलम तो शरम से बेड के गढ्ढे में घुसी जा रही थी…”सीईईई साना कुछ तो शरम कर कन्जरिये….” साना ने नीलम की बात का कोई जवाब ना दिया…और मुस्करा कर मेरी तरफ देखते हुए उसने अपने हाथो की उंगलियों से नीलम की फुद्दि के लिप्स खोल कर मुझे आँख मार कर इशारा किया…और अगले ही पल मैने फिर से अपने लंड को एक ही बार मे नीलम की फुद्दि की गहराइयों मे उतार कर चोदना शुरू कर दिया… ”सीईईईई समीर ओह्ह्ह्ह तूने तो जन्नत ही दिखा दी….”नीलम ने सिसकते हुए सर पीछे की तरफ घुमा कर देखा….

“ जब इतने जवान लंड से चुदवाओगी तो मज़ा तो आएगा ही हहा…” साना ने हंसते हुए नीलम की बूँद पर थप्पड़ मारते हुए कहा….नीलम ने बुरा सा मुँह बनाते हुए मेरी तरफ देखा, और फिर मेरी आँखो में झाँकते हुए बोली….”समीर तुम भी इस कंजरी के साथ मिल गये हो….ये तुम्हारे सामने मेरी बेज़्जती कर रही है…और तुम चुप चाप सुन रहे हो….

मैं: तो आप ही बोलो क्या करूँ….

नीलम: समीर आह समीरररर तेरा लंड एक दम सूखा है….बहुत जलन हो रही है….(नीलम ने मुझे आँख मारते हुए कहा….तो मैं नीलम का इशारा समझ गया….)

मैने साना की तरफ देखा, जो अपने सर को नीलम की बुन्द पर झुकाए हुए नीलम की बुन्द को फेला-2 कर उसकी फुद्दि में अंदर बाहर हो रहे लंड को देख रही थी….मैने एक दम से साना के सर को पकड़ कर उसके सर को नीलम की बुन्द पर दबा दिया….और अपना लंड नीलम की बुन्द के सूराख से बाहर निकलते हुए साना के मुँह में डाल दिया….”ओह्ह्ह्ह उंह समीर……”

साना ने अपने चेहरे को पीछे की तरफ करना चाहा…पर मैने साना के सर को पकड़ कर नीलम की बुन्द पर और दबा दिया…और साना के मुँह में अपने आधे से लंड को डाल कर अंदर बाहर करने लगा….साना के मुँह से घू -2 की आवाज़ आने लगी…थोड़ी देर बाद मैने जब साना के मुँह से अपने लंड को बाहर निकाला तो, मेरा लंड साना के थूक से एक दम गीला होकर चमक रहा था…मैने लंड के कॅप को नीलम की फुद्दि के सूराख पर टिकाते हुए ज़ोर दार धक्का मारा तो, इस बार मेरा लंड नीलम की फुद्दि के सूराख में फिसलता हुआ अंदर जा घुसा…..मैने पूरे जोश और ताक़त से अपने लंड को नीलम की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….

मेरे आगे घोड़ी बनी नीलम भी पुरजोश अंदाज़ में अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश कर रही थी….मैने लंड को अंदर बाहर करते हुए नीलम के खुले हुए बालो को पकड़ कर पीछे की तरफ खेंचते हुए और तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….साना हैरत भरी नज़रों से मुझे देख रही थी….साना भी बहुत ज़यादा गरम हो चुकी थी….वो सीधी होकर घुटनो के बल बैठ गयी…और उसने मेरी टीशर्ट को पकड़ कर ऊपेर करते हुए मेरे निपल को अपने होंटो में लेकर काटना शुरू कर दिया….साना एक हाथ से नीचे अपनी फुद्दि को दबा रही थी….मैं भी एक दम गरम हो चुका था,….नीलम की आहों पुकार भी भी पूरे जोश पर थी… और चन्द ही सेकेंड्स में नीलम के जिस्म ने कांपना शुरू कर दिया….

उसका असर मुझ पर कुछ इस क़दर हुआ कि, मेरे लंड ने भी नीलम की फुद्दि में ही आग उगलनि शुरू कर दी…और मैं अपने लंड को नीलम की फुद्दि की गहराइयों मे दबा कर लंबी लंबी साँस लेने लगा….

 
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जैसे ही मेरा लंड थोड़ा सा ढीला होकर नीलम की फुद्दि से बाहर आया….मैने साना की तरफ देखा और फिर डोर की तरफ इशारा किया….साना मेरी बात समझ कर जल्दी से खड़ी हुई और फॉरन ही बेड से नीचे उतर कर डोर के आगे परदा कर दिया….रूम के अंदर सिर्फ़ एक ज़रिए से देखा जा सकता था….और वो था रूम के डोर का के होल…. अब उसके आगे भी परदा था….मुझे यकीन था कि, अब तक जो भी इस रूम मे हुआ था… वो सब नजीबा ने ज़रूर देखा होगा…..और मैं दिल ही दिल मे ये दुआ भी कर रहा था कि, नजीबा ने मेरे फेस को ना देखा हो….

जैसे ही मेरा लंड नीलम की फुद्दि से बाहर आया….नीलम आगे की तरफ पेट के बल लेट गयी….साना ने बेड पर चढ़ कर फॉरन ही मेरे ढीले हो रहे लंड को मुट्ठी में लेकर दबाना शुरू कर दिया….”ये क्या समीर….ये तो ढीला पड़ने लगा है…”

साना मेरे लंड को ऐसे हिला रही थी….जैसे मूठ मार रही हो….” तो क्या हुआ थोड़ी देर बाद फिर से खड़ा हो जाएगा….” मैने भी साना के मॅमन को अपने दोनो हाथो में लेकर दबाते हुए कहा….”मुझे पता है इसने कैसे खड़ा होना है….” साना मेरे लंड को दबाते हुए मेरे सामने आई….और पेट के बल बल लेट गयी….

साना ने मेरे लंड को हिलाते हुए, अपने होंटो मे लंड की कॅप को लेकर चूसना शुरू कर दिया…..साना अब बेहद गरम हो चुकी थी….और पूरे जोश मे आकर मेरे लंड को तेज़ी से सर हिलाते हुए चूस रही थी….और मैं अपने दोनो हाथो को नीचे करके साना के मम्मों को मसल रहा था….साना कभी मेरे लंड के कॅप को चुस्ती तो कभी अपनी जीभ से मेरे लंड के चारो और चटाना शुरू कर देती..तो कभी लंड को मेरे पेट के साथ लगा कर मेरे बॉल्स को मुँह मे भर कर चूसने लगती.

मैं आज से पहले इतना हार्ड कभी नही हुआ था…मैं इतना मस्त हो चुका था कि, मैने साना के बालो को खोल कर उन्हे कस्के पकड़ हुआ था….और जब साना मेरे लंड को मुँह मे लेती, तो मैं अपनी कमर हिला कर उसके मुँह को ही चोदना शुरू कर देता.

जब वो लंड को चुस्ती तो, अपने हाथों से मेरे बॉल्स को सहलाने लग जाती….साना के होन्ट मेरे लंड के कॅप पर एक दम कसे हुए रगड़ खा रहे थी….मैने साना साना के सर को पकड़ खेंचा और अपना लंड साना के मुँह से बाहर निकला और उसे बेड पर पीछे की ओर धक्का दिया….जैसे ही मैं साना की टाँगो के दरमियाँ आया….साना ने अपनी टाँगो को घुटनो से मोड़ा फिर ऊपेर उठाया और फिर दोनो तरफ खोल लिया….आ

साना ने मेरी तरफ देखा और मुस्कराते हुए बोली....."समीर अब और सबर नही होता..." और फिर खुद ही अपने हाथो को नीचे लाकर साना ने अपनी फुद्दि के लिप्स को खोला .... “ये देखो समीर कैसी गीली हो रही है….” साना ने अपनी फडी का सूराख दिखाते हुए कहा…मैने जैसे ही अपने हाथ की दो उंगलियों को साना की फुद्दि के सूराख पर दबाया तो……

मेरी दोनो उंगलियाँ फिसलते हुए साना की फुद्दि मे घुस गयी...."ओह्ह्ह समीर उंह सीईईईईईईईईईई" साना ने सिसकते हुए, अपने दोनो मम्मों पर अपने हाथ रखते हुए, उन्होने मसलना शुरू कर दिया.....मैं घुटनो बल बैठा और साना की फुद्दि में अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा....और साथ ही झुक कर साना की क्लिट पर अपनी जीभ से रगड़ने लगा. अपनी फुद्दि के फूले हुए दाने पर मेरी जीभ महसूस करते ही, साना का जिस्म एक दम से अकड़ गया.....

और साना ने अपने दोनो हाथों को नीचे लेजाते हुए, मेरे बालो को कस के पकड़ कर सिसकना शुरू कर दिया....."उंह सीईईई ओह समीरर वहाँ पर ना अहह हइईए मेरीए फुद्दि ओह आग लगा दी तूने समीर उंह सीईइ अहह अहह मम्मी....." साना की कमर ऊपेर की तरफ झटके खाने लगी....साना ने मेरे सर से अपने दोनो को हटाया और मेरे कंधो को पकड़ते हुए, मुझे अपने ऊपेर की तरफ खेंचा.... और मेरा तना हुआ लंड साना की फुद्दि के दो इंच ऊपेर झटके खा रहा था....साना अब लंबी-2 साँसे भरते हुए मेरी ओर देख रही थी...और अगले ही पल साना ने मेरे लंड को पकड़ कर लंड की कॅप को अपनी फुद्दि के सूराख पर रगड़ते हुए सेट किया....और फिर से मेरी आँखो में देखने लगी.......

मैने भी साना के ऊपेर झुकते हुए अपने दोनो घुटनो को बेड के किनारे पर टीकाया, और अपनी कमर को आगे की तरफ झटका दिया...."अहह समीर..." जैसे ही मेरे लंड का कॅप साना की फुद्दि के टाइट सूराख में घुसा तो, साना सिसकते हुए मुझसे लिपट गयी....मैने बिना टाइम जाया किए एक और ज़ोर दार धक्का मारा...मेरे लंड का कॅप साना की फुद्दि के सूराख को बुरी तरह फेलाता हुआ और अंदर घुसने लगा....

साना मेरे इस हमले से बुरी तरह मचल उठी....साना की फुद्दि की दीवारे मेरे लंड को कस और छोड़ रही थी...साना ने मेरी कमर पर अपनी टाँगो को कसते हुए, अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उठाया तो मेरा लंड साना की गीली फुद्दि मे फिसलता हुआ पूरा का पूरा जा घुसा....."उंह समीर सीईईईईईईईई हाईए, तुम्हारा सच मे बहुत लंबा है.....इतना मोटा कि मुझे अपनी फुद्दि एक दम टाइट फील हो रही है......"

साना ने अपनी फुद्दि की मासपेशयों को मेरे लंड के चारो ओर कसते हुए कहा...और फिर मदहोशी की हालत मे पागलों की तरह मेरे पूरे फेस पर किस करने लगी....."उंह उंह आ समीरर ओह करो ना....." साना ने अपनी बूँद को ऊपेर की ओर उठाते हुए, अपनी हालत जाहिर की....मैने साना के मम्मों को मसलते हुए उसके लेफ्ट निपल को मुँह मे भर कर सक करने लगा....जैसे ही मैने साना के निपल को मुँह मे लेकर सक करना शुरू किया...साना एक दम से मचल उठी.....

साना ने तेज़ी से अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उछालते हुए सिसकारियाँ भरना शुरू कर दिया......"उंह ओह समीर नही प्लीज़ ओह्ह्ह्ह उंह हाई मेरी फुद्दि अहह ह अहह सीईईईईईईईई उंह उंह समीर नही ओह.........समीर समीर मेरी फुद्दि पानी छोड़ देगी...."

साना एक दम मस्त होकर तेज़ी से अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उछालते हुए मेरे लंड को अपनी फुद्दि मे लेने लगी थी....और मैं साना के सबसे सेन्सिटिव हिस्से यानी कि उसके बाहर की तरफ निकले हुए निपल्स को पूरे जोशो ख़रोश से चूस रहा था....साना को यूँ चुदाई के लिए तड़पटा देख कर मैने भी जोश मे आकर अपने लंड को बाहर निकाल-2 कर अंदर की ओर घस्से लगाने शुरू कर दिए....जैसे ही मेरे लंड का कॅप साना की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुसता साना एक दम से मस्त हो जाती. और अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उठाते हुए अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर दबा देती....

साना: हाईए समीररररर मुझी पहले पता होता कि तेरा ये लंड मुझे इतना सुख देगा तो मैं शाम को ही तुमसे चुदवा लेती.....हाए समीर तुम्हारा लंड तो मेरे धुनि तक जा रहा है.....हाआँ ऐसे ही पूरा डाल दे मेरी फुद्दि मे....अह्ह्ह्ह समीर प्लीज़ फक मी हार्डर.....उंह समीर मैं तो तुम्हे बच्चा ही समझ रही थी....

मैं: अह्ह्ह्ह साना तुम फिकर ना करो.....आज तुम्हारे इस सूखे हुए कुँए से मैं पानी बाहर निकाल दूँगा.....

साना: उंह हाईए समीर तुम मेरी फुद्दि से पानी निकालोगे. जब से तेरे लंड को देखा है तब से मेरी फुद्दि रिसनी शुरू हो गयी थी.....तुम्हे नही पता समीर शाम से मैं 3 बार पैंटी बदल चुकी हूँ....

मैं: (साना की बात सुन कर और जोश मे आकर लंबे-2 शॉट लगाते हुए) तो इस लिए तुमने कच्छि नही पहनी है.....

साना: (शरमाते हुए) हाँ...समीर मेरी इस फुद्दि ने मेरे बुरी हालत कर रखी है शाम से....

 
मैने साना की टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठाते हुए, अपने कंधो पर रख लिया. और अपने दोनो हाथों को उसके सर के पास बेड पर टिकाते हुए आगे की तरफ झुक कर अपने लंड को और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा...

साना: ओह्ह्ह समीर हाआन्ं आईसीए चोद मुझीए अह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है.....पूरा अंदर जा रहा है तेरा लंड......

"हइई समीर ओह हाईए मेरी फुद्दि अहह ले समीर ईए तो आ अभी से ही...उंह हाईए समीर देख तेरे लंड ने निकाल दिया मेरे कुँए से पानी....." साना का जिस्म एक दम से अकड़ने लगा....और वो अपनी बुन्द को और तेज़ी से ऊपेर की ओर उछालने लगी.....मैने भी भी पूरे जोश मे आकर दबादब धक्के मारते हुए साना की फुद्दि की गहराइयों मे अपने लंड को धकेलना शुरू कर दिया.....नीलम हमारी तरफ देख कर लगतार अपनी फुद्दि को मसले जा रही थी…..

और अगले ही पल मेरे लंड की नसें भी फूलने लगी....और मेरे लंड से लावे की बोछार होने लगी....मैं एक दम थक चुका था….मैने अपने लंड को साना की फुद्दि से बाहर निकाला और बेड पर लेट गया….साना ने हम दोनो के ऊपेर रज़ाई की और वो भी मेरे साथ ही लेट गयी……लेटे -2 कब आँख लग गयी पता नही चला… अगले दिन सुबह 5 बजे ही नीलम ने मुझे उठा दिया…. मैने और साना ने उठ कर कपड़े पहने और फिर मैं ऊपेर रूम मे जाकर सो गया….जब आँख खुली तो 10 बज रहे थे….साना ने मुझे बताया कि, उसने नजीबा को बता दिया है…..कि मैं घर वापिस आ चुका हूँ… क्योंकि मुझे सुबह-2 उसके हज़्बेंड को स्टेशन छोड़ने जाना था…

मैं उठ कर फ्रेश हुआ और जब मैं नीचे आया तो, नजीबा नाश्ता कर रही थी… उसने मुझे देख कर स्माइल की और फिर मैने भी नाश्ता किया….आज साना के अब्बू वापिस आने वाले थे….और मेरा यहाँ आज आखरी दिन था….नाश्ते के बाद मैने अपना समान पॅक किया और गाओं वापिस आ गया….घर को खोला और फिर खुद ही सॉफ सफाई की क्योंकि घर में काफ़ी दिनो से सफाई नही हुई थी….सफाई करते-2 दोपहर हो गयी….

मैं अकेला घर पर बोर हो रहा था…और भूक भी लगने लगी थी…दोपहर के 1 बजे मैं अब्बू की बाइक लेकर घर को लॉक करके सिटी की तरफ चल पड़ा….सोचा कि थोड़ा घूम फिर कर टाइम पास कर लूँगा और फिर वहाँ किसी ढाबे से खाना भी खा लूँगा….मैं सिटी पहुँचा और एक ढाबे पर खाना खा के जैसे ही ढाबे से बाहर आया….तो मेरी नज़र अहमद पर पड़ी….जो एक मेडिकल स्टोर पर खड़ा था… मैने बाइक को ढाबे के सामने ही खड़ा रहने दिया और रोड क्रॉस करके जैसे ही उस मेडिकल की दुकान पर पहुँचा तो, मैने देखा कि, आज़म कॉंडम का पॅकेट ले रहा था….जैसे ही अहमद कॉंडम लेकर मुड़ा तो मुझे देख कर चोन्कते हुए बोला…

अहमद: अर्रे ख़ान साहब आप यहाँ….? (अहमद ने जल्दी से कॉंडम का पॅकेट अपनी जेब मे छुपा लिया था….)

मैं: हां यार वो कुछ समान लेने आया था…तुम पर नज़र पड़ी तो सोचा तुम्हारा हाल चाल पूछ लेता हूँ….और सूनाओ कैसे हो….

अहमद: मैं ठीक हूँ…..

मैं: और आज़म….

अहमद: आज़म शाह जी तो, अपने नानके गये है…छुट्टियाँ है ना….

मैं: ओह्ह्ह अच्छा ठीक है….अच्छा किया तुमने बता दिया….नही तो आज़म से मिलने जाने वाला था….

अहमद: और सुनाओ आप लेकर अपनी गर्लफ्रेंड को कोठी पर…..

मैं: नही यार अभी टाइम सेट नही हुआ…..

अहमद: कोई बात नही….जब सेट्टिंग हो जाए तो, चले जाना….कीस तो है ही आपके पास…. वैसे ख़याल रखना कि आप फ्राइडे को वहाँ ना जाएँ……मैं भी आज अपने घर जा रहा हूँ….

मैं: चल ठीक है….वैसे वापिस कब आओगे…

अहमद: 6-7 दिन बाद….

मैं: चल ठीक है मैं चलता हूँ…..

मैं वहाँ से वापिस ढाबे के सामने आया और अपनी बाइक स्टार्ट करके सोचने लगा कि, आज़म घर पर नही है….और ये कह रहा है कि, ये घर जा रहा है….तो फिर कॉंडम किस लिए खरीद रहा है….

मैने पलट कर मेडिकल स्टोर की तरफ देखा तो, अहमद वहाँ नही था….मैने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और आज़म के घर की तरफ चल पड़ा….जैसे ही मैं उस गली में पहुँचा यहाँ आज़म का घर था…मैने देखा कि, अहमद तेज़ी से चलता हुआ घर के अंदर दाखिल हुआ है…मैने बाइक को आज़म के घर के बाहर रोका…और ये चेक करने के लिए गेट खुला है या लॉक है…..मैने गेट को हलका सा पुश ही किया था कि गेट अंदर के तरफ खुल गया….गेट खुलने से हलकी सी आवाज़ भी हुई…पर शुक्र था किसी ने सुनी नही…मैने धीरे से गेट बंद किया और जैसे ही मैं हॉल रूम के डोर पर पहुँचा तो, सामने का नज़ारा देख मेरे पाँव वही जम गये…..

अहमद ने अपनी शलवार घुटनो तक नीचे उतारी हुई थी….और सबीना उसके ढीले से लंड को पकड़ कर दबा कर मूठ मार रही थी…”जल्दी कर कन्जरा….इसको जल्दी खड़ा कर….” सबीना ने अहमद के लंड को हिलाते हुए कहा….”मालकिन आज ज़रूरी है क्या मेरी बस निकल जानी है….?” अहमद ने कॉंडम का पॅकेट खोल कर एक कॉंडम बाहर निकालते हुए कहा….. मुझे ये सब देख कर बहुत बुरा लग रहा था…सबीना मेरे अब्बू को धोखा दे रही थी….और वो अब्बू की पीठ के पीछे एक नौकर के साथ ये सब कुछ कर रही थी…. मुझे पता था कि, कल को अगर इसकी शादी अब्बू के साथ हो गयी तो, हमारी लाइफ बर्बाद कर देगी….मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो रिकोडिंग ऑन कर दी…और उनकी वीडियो बनाने लगा….

सबीना: मुझे तो लगता है इसने अब खड़ा नही होना….चल तू मेरी चाट कर फुद्दि की आग को ठंडा कर दे….तेरे अंकल से भी तो कुछ होता नही है…और तूने भी 7 दिनो बाद आना है…

सबीना जल्दी से सोफे से खड़ी हुई और उसने अपनी शलवार के जबरन में हाथ डाल कर अपनी इलास्टिक वाली शलवार को खोल कर सोफे पर रख दिया…और खुद सोफे पर बैठ कर अपनी टाँगो को चौड़ा कर ऊपेर उठा लिया…अहमद जल्दी से उसकी टाँगो के दरमियाँ आया और नीचे बिछे कालीन पर बैठ कर उसकी फुद्दि के लिप्स को चाटने लगा….”सीईईईई अहह स्वाद आ गया……हां चाट कुत्ते….चाट मेरी फुद्दि को खा जा मेरी फुद्दि आहह ओह तुझे भी अभी घर जाना था…रुक जा अहमद देख आज़म भी घर पर नही है….आहह सीईईईईईईई हइई….सबीना पागलो की तरह अहमद के सर को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर अपनी फुद्दि को उसके होंटो पर रगड़ रही थी….”अहह अहमाद्द्द मेरी बुन्द चाट कुत्ते,……मेरी बुन्द के सूराख पर अपनी जीभ रगड़….”

सबीना ने अपने दोनो हाथो को टाँगो के साइड से नीचे से लेजा कर अपनी बुन्द के पार्ट्स को फेला कर अपनी बुन्द का सूराख अहमद को दिखाते हुए कहा…अहमद ने एक पल भी देर नही की…और एक फर्मदार बच्चे की तरफ अपनी जीभ को उसकी बुन्द के सुराख पर रगड़ने लगा….”सीईईईईईईई हइई अहमद….उंगली डाल मेरी बुन्द के सूराख में और मेरी फुद्दि के दाने को चुस्स….” सबीना ने एक हाथ से अहमद के सर के बालों पकड़ा और उसके होंटो को फिर से अपनी फुद्दि पर लगा दिया….अहमद ने अपने एक उंगली सबीना की गान्ड के सूराख पर धीरे-2 दबाते हुए अंदर करनी शुरू कर दी….”हाईए अहमद हाआँ अब अंदर बाहर कर….तेरे अंकल ने तो अब मेरी बुन्द भी मारना छोड़ दिया…उनका लंड भी अब इतना सख़्त खड़ा नही होता…और ऊपेर से तेरा तो कभी मेरी बुन्द में गया ही नही….अहह हां चाट मेरी फुद्दि….हाई….”

मेरे लिए जितना बहुत था…मैं उतनी रेकॉर्डिंग कर चुका था….मैने वीडियो सेव की और धीरे से आज़म के घर से बाहर आ गया….मुझे पता था कि, आज अहमद थोड़ी देर बाद चला जाएगा…अब मुझे अगला स्टेप उसके बाद ही उठाना था….

 
69

मैने बाइक स्टार्ट की और मार्केट मैं चला गया….वहाँ इधर उधर घूमता रहा….और तकरीबन आधे घंटे बाद मैं फिर से आज़म के घर के तरफ चल पड़ा…जैसे ही मैं आज़म के घर के नज़दीक पहुँचा तो, मेरे मोबाइल रिंग करने लगा…..मैने ब्रेक लगाई और अपना मोबाइल निकाल कर देखा तो अब्बू की कॉल आ रही थी….मैने कॉल पिक की तो दूसरी जानिब से अब्बू की आवाज़ आइ…. “कहाँ हो बर्खूदर… ?”

मैं: जी अब्बू सलाम…

अब्बू: सलाम बेटा….कहाँ हो….?

मैं: जी वो मैं अपने दोस्त के घर जा रहा था…

अब्बू: अच्छा यार वो नाज़िया की कॉल आई थी….उसने बताया कि वो घर पहुँच गयी है… और तुम काफ़ी देर से घर से बाहर हो….

मैं: क्या…..?

अब्बू: हां….अब ऐसा करो….जल्दी से घर जाओ…और नाज़िया से पूछ लो कि, घर में किसी समान की ज़रूरत तो नही है….बाज़ार से लेके देना….

मैं: जी अब्बू….

मैने कॉल कट की और सोचने लगा कि, नाज़िया तो एक महीने की छुट्टी लेकर गयी थी… फिर वो ऐसे अचानक वापिस कैसे आ गयी…..मैने बाइक टर्न की और घर की तरफ चल पड़ा….20 मिनिट बाद मैं घर के बाहर था….मैने बाइक का हॉर्न मारा तो थोड़ी देर बाद नाज़िया ने गेट खोला….और मुझे देख कर हल्की सी स्माइल दी…मैने नाज़िया को इग्नोर किया और बाइक अंदर करके स्टॅंड पर लगाई….”कोई समान लाना हो तो बता दो… मैं ले आता हूँ….” मैने बिना नाज़िया की तरफ देखते हुए कहा….नाज़िया बिना कुछ बोले अपने रूम में चली गयी….मैं बाहर सहन में चारपाई पर बैठ गया…. और सोचने लगा कि ये अचानक ऐसे क्यों वापिस आ गयी है….

थोड़ी देर बाद नाज़िया अपने रूम से बाहर आई….और उसने मुझे एक लिस्ट और पैसे पकड़ाए….मैने एक बार लिस्ट देखी जिसमे घर का कुछ राशन का समान था… मैने पैसे जेब मे डाले और फिर अब्बू की बाइक लेकर मार्केट चला गया….सारा समान खरीद कर नाज़िया को दिया और फिर थोड़ी देर घर पर रुका..पर मेरा दिल वहाँ नही लग रहा था…..मैं उठ कर बाहर चला आया…..और फ़ैज़ के घर की तरफ चल पड़ा…. जैसे ही मैं फ़ैज़ के घर के करीब पहुँचा तो, फ़ैज़ मुझे बाइक पर बैठा नज़र आया… फ़ैज़ ने मुझे देख कर बाइक मेरे पास आकर रोक ली….” कहाँ जा रहे हो…..?” मैने फ़ैज़ से हाथ मिलाया और पूछा….”चल बैठ सिटी जा रहा हूँ…..दोस्तो ने खाने पीने का प्रोग्राम बनाया है…..” खाने पीने से फ़ैज़ का मतलब शराब से था….नाज़िया को देख कर मेरा मूड भी पता नही क्यों खराब था….

इस लिए बिना कुछ सोचे समझे…..मैं उसकी बाइक के पीछे बैठ गया….और हम सिटी आ गये….वहाँ दोस्तो के साथ मोज मस्ती करते रहे….आज नाज़िया की वजह से मैने कुछ ज़यादा ही शराब पी ली थी….कुछ ज़यादा ही नशा हो गया था….खैर सिटी में हमें काफ़ी देर हो चुकी थी….शाम के 5 बजे हम वहाँ से गाओं वापिस आ गये…. फ़ैज़ ने मुझे मेरे घर के बाहर उतार दिया…..और वो अपने घर चला गया….मैने डोर बेल बजाई तो थोड़ी देर बाद नाज़िया ने गेट खोला….जैसे ही उसने गेट खोला मैं नाज़िया को देख कर एक दम से चोंक गया…..नाज़िया ने वाइट कलर की कमीज़ और ऑरेंज कलर की शलवार पहनी हुई थी….नाज़िया ने फुल मेकप किया हुआ था….जैसे कहीं जाने की तैयारी में हो…ऐसी खूबसूरती कि किसी का भी दिल बहक जाए….

पर जैसे ही मैं नाज़िया को इग्नोर करके अंदर जाने के लिए आगे बढ़ा…तो नाज़िया को मेरी सांसो से शराब की स्मेल आ गयी….और वो मुझपर बरस पड़ी

नाज़िया: कहाँ था इतनी देर क्यों लगा दी… शराब पी कर कहीं गिर तो नही गया ऐसे यहाँ नही चले गा अपनी उम्र तो देखो क्या हालत बना रखी है घर पर अगर तुम्हारे अब्बू नही है तो इसका मतलब ये नही कि तुम जो दिल में आए करते रहो….

नाज़िया की बातों को अनसुना करते हुए मैं सीधा अपने रूम में आ गया….और जैसे ही मैं बेड पर लेटा…नाज़िया भी अंदर आ गयी…

 


नाज़िया:मेरी बात का जवाब नही दिया देख कैसी हालत बना रखी है

मैं: आप यहाँ से जाएँ मेरा मूड ठीक नही है

और ये कह कर मैं बेड से उठा और रूम से बाहर निकल कर छत पर आ गया बदल आसमान पर छाए हुए थे जैसे ही मैं ऊपेर पहुँचा अचानक तेज बारिश शुरू हो गयी नाज़िया भी मेरे पीछे आ गयी थी….हम दोनों छत पर भीग गये

नाज़िया: ये सब क्या है समीर…..तुम्हे ये सब करते हुए ज़रा भी शरम नही आई…. कि अगर तुम्हारे अब्बू को पता चलेगा तो उनपर क्या बीतेगी….

मैं: (हम दोनो अभी भी दोनो बारिश में खड़े थे और पूरी तरह भीग चुके थे ) तुम्हे इन्सब से क्या मतलब तुम जाओ यहाँ से…अपना काम करो…

नाज़िया: ऐसे कैसे जाऊं मुझे तुम्हारी बहुत फिकर हो रही थी आख़िर बात क्या है…जो तुमने शराब भी पीनी शुरू कर दी…..

नाज़िया की शलवार कमीज़ भीग कर उसके बदन से चिपक चुकी थी….नाज़िया ने दुपट्टा भी नही लिया हुआ था…. जैसे ही मैने खीज कर नाज़िया की तरफ देखा तो कुछ पलों के लिए पलकें झपकाना भी भूल गया…उसकी वाइट कलर की कमीज़ पूरी तरह से गीली होकर उसके जिस्म से चिपकी हुई थी….और नाज़िया ने नीचे ब्रा भी नही पहनी हुई थी…उसके मम्मे और निपल्स सॉफ दिखाई दे रहे थे…मुझसे बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था…मैने आप को बड़ी मुस्किल से कंट्रोल में किया….और दूसरी तरफ घूम गया नाज़िया ने मुझे मेरे बाजू से पकड़ कर झटके से सीधा किया..

नाज़िया; चुप क्यों है…..?

अब एक बार फिर से मेरी नज़र के सामने उसकी गीली कमीज़ में से झाँकते उसके 38 साइज़ के मम्मे और बड़े-2 निपल्स थे…मुझ से अब बर्दास्त नही हो रहा था हम दोनो छत पर बने स्टोर रूम के साथ खड़े थे…मैने अपने बाजू को झटकते हुए उसे अपना हाथ छुड़ा लिया और नाज़िया को धक्का देकर स्टोर रूम की दीवार से लगा दिया

मैं: तू क्या मेरी बीवी है साली जो मुझसे इतने सवाल जवाब कर रही है….जा जाकर अपना काम कर….

नाज़िया;क्या कहा तुमने (और नाज़िया ने मुझे एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर जड दिया)

मुझे उस वक़्त इतना गुस्सा आया कि मैं गुस्से से लाल हो गया और आगे बढ़ कर नाज़िया को कंधों से पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उसके होंटो पर अपने होन्ट रख दिए नाज़िया ने मुझे ज़ोर लगा कर धक्का दिया और एक और थप्पड़ मेरे गाल पर जड दिया..

मेरी नज़रें नाज़िया के मम्मों पर गढ़ी हुई थी जो सॉफ दिख रही थी जब नाज़िया को अपनी हालत का पता चला तो उसने सर झुका लिया और अपने मम्मों को अपने बाजुओं से छिपाते हुए स्टोर रूम के अंदर भाग गयी….मेरा लंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था….मैं भी उसके पीछे अंदर आ गया नाज़िया ने अपने दोनो हाथों से अपने मम्मों को ढक रखा था….नाज़िया की पीठ मेरी तरफ थी…और मैं उसके पीछे खड़ा था

नाज़िया:वहीं रुक जाओ ये ठीक नही है मुझसे बुरा कोई नही होगा अगर एक कदम भी आगे बढ़े तो….

नाज़िया की शलवार गीली होकर उसकी रानों और बुन्द से एक दम चिपकी हुई थी… जिसे देख कर मेरा लंड पेंट में झटके पे झटके खा रहा था,….मुझसे रहा ना गया और मैने आगे बढ़ कर मैने नाज़िया को पीछे से बाहों मे भर लिया…जैसे ही मैने नाज़िया को अपनी बाजुओं मे लिया…मेरा फुल हार्ड लंड सीधा नाज़िया की शलवार के ऊपेर से उसकी बुन्द की लाइन में जा फँसा….मैने अपने दोनो हाथो से उसकी कमर को पकड़ा हुआ था…जैसे ही नाज़िया को इस बात का अंदाज़ा हुआ कि, मामला हद से आगे बढ़ रहा है…तो उसने अपने दोनो हाथो को अपने मम्मों से हटा कर मेरे दोनो हाथो को पकड़ा और मेरे बाजुओं से निकलने की कॉसिश करने लगी….

मैने भी नाज़िया के हाथो को पकड़ते हुए उसे साइड में दीवार के साथ लगा दिया…नाज़िया की फ्रंट साइड दीवार से दब गयी….”अहह समीर ये क्या कर रहे हो….” इससे पहले कि नाज़िया को कुछ समझ आता. मैने झुक कर नाज़िया की इलास्टिक वाली सलवार को नीचे खेंच दिया…”पागल मत बनो समीर अगर यही सब करना है तो मुझसे बुरा कोई ना होगा….छोड़ो मुझे जाने दो….” नाज़िया ने मुझसे अलग होने के जदोजेहद करते हुए कहा….

लेकिन तब तक मैं अपने पेंट को नीचे सरका चुका था…मैने अपने लंड को हाथ मे लेकर दो टीन बार ही नाज़िया की बुन्द की लाइन में रगड़ा था कि, मेरा लंड पूरी सख्ती से खड़ा हो गया….मेरा साढ़े 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड हवा मे पूरी शिद्दत के साथ झटके खाने लगा….मैने अपने लंड की कॅप को नाज़िया की बुन्द की लाइन में रगड़ते हुए, थोड़ा सा घुटनो को बेंड किया…और फिर उसकी टाँगो के दर्मियान से अपने लंड को गुज़ारते हुए, अपने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सुराख पर सेट करके ज़ोर दार शॉट मारा….मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ एक ही बार- में पूरा का पूरा अंदर जा घुसा….

 


नाज़िया की फुद्दि एक दम खुसक थी..जैसे मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि को चीरता हुआ अंदर घुसा नाज़िया दर्द से एक दम चीख उठी…..”या खुदा मर गयी……”

लेकिन मेरे सर पर तो, वहसी जानवर सवार हो चुका था…मैने नाज़िया के बालों को एक हाथ से पकड़ कर पीछे की तरफ खेंचा और दूसरे हाथ से नाज़िया की लेफ्ट मम्मे को कमीज़ के ऊपेर से दबाते हुए शॉट लगाने शुरू कर दिए….नाज़िया ने अपने फेस को घुमा कर मेरी तरफ देखा तो, उसकी आँखो में आँसू थे…

.”खुदा के लिए मुझ पर तरश खाओ….अहह समीर धीरे ओह हइई अम्मी….काढ़ ले समीर…..” नाज़िया ने दर्द से चिल्लाते हुए कहा,…..

उसकी फुद्दि एक दम खुसक थी…जिसकी वजह से उसे दर्द हो रहा था…लेकिन मुझ पर उसकी दर्द भरी आवाज़ों का कोई असर ना हो रहा था…मैं अपनी ही धुन मे लगतार अपने लंड को नाज़िया की चूत के अंदर बाहर कर रहा था….

मैने और ज़ोर से नाज़िया के बालो को पकड़ कर खींचा तो उसका सर पीछे की ओर हो गया….मैने लंड को पूरी रफतार से नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….”अब बोल मुझ पर हुकम चलाएगी……ये ले साली ले पूरा लंड ले अंदर…” मैने नाज़िया के बालों को छोड़ा और उसकी कमर को दोनो तरफ से पकड़ कर अपने लंड को उसकी फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…

.”अह्ह्ह्ह सीईईईईईईई समीर ओह्ह्ह्ह्ह हट जाओ….अहह छोड़ो मुझे……हइईए ओह अह्ह्ह्ह आह समीर…” कुछ ही देर मे नाज़िया की फुद्दि भी गीली होनी शुरू हो गयी…..अब नाज़िया बिल्कुल भी जदोजेहद नही कर रही थी…..

उसके मूह से आह ओह्ह्ह्ह अहह सीईईईई समीर बस यही लफ़्ज निकल रहे थे… और नाज़िया अपने दोनो हाथो को दीवार पर रख कर खड़ी थी….मेरे धक्के इतने जबरदस्त थे कि, नाज़िया का पूरा बदन हिल रहा था….मेरा लंड एक दम से नाज़िया की फुददी से बाहर आ गया….और वो हुआ जिसका मुझे अंदाज़ा भी ना था….जैसे ही मैने अपने लंड को पकड़ कर दोबारा से नाज़िया की फुद्दि में डालना चाहा….तो नाज़िया ने मजीद अपनी रानों को और खोल लिया…और अपने पैरो की एडियों को उठा कर पंजो के बल हो गयी… जिससे नाज़िया की फुद्दि का सूराख बिल्कुल मेरे लंड के लेवेल पर आ गया था…ये सब देख कर मेरा लंड जो पहले से फुल हार्ड था और ज़यादा सख़्त होने लगा….मैने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर रख कर जैसे ही हल्का सा दबाया तो, तो इस बार मेरा लंड नाज़िया की गीली फुद्दि को चीरता हुआ आसानी से अंदर चला गया….

“सीईईईईईईई अह्ह्ह्ह नाज़िया तुम्हारी फुद्दि बहुत गरम है……” मैने फिर से अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए नाज़िया को चोदना शुरू कर दिया….नाज़िया की आहो पुकार एक बार फिर से शुरू हो गयी….बाहर बारिश का शोर और अंदर नाज़िया की सिसकारियाँ….जब मेरी राने पीछे से नाज़िया की मोटी बुन्द से टकराती तो पूरे रूम में थप-2 की आवाज़ गूँज जाती….मुझे अहसास हो रहा था कि, नाज़िया भी बड़े गैर मामूली तरीके से अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश कर रही है….हालाकी मैं श्योर नही था…..पर ये सब महसूस करके मेरे जिस्म का सारा खून मेरे लंड की रगो में इकट्ठा होना शुरू हो गया….और फिर एक के बाद एक मेरे लंड से लेस्दार पिचकारियाँ निकल कर नाज़िया की फुद्दि को गीला करने लगी….जैसे ही मेरा लंड थोडा सा ढीला हुआ, और मैने अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि से बाहर निकाला तो नाज़िया एक दम से नीचे पैरो के बल बैठ गयी…

 


मैं कुछ पलों के लिए नाज़िया को ऐसे ही पीछे से देखता रहा….पता नही क्यों पर नाज़िया से बात करने की मुझमे कोई हिम्मत नही हो रही थी….मैने अपनी पेंट ऊपेर की और बिना कुछ बोले नीचे आ गया….नीचे रूम में पहुँच कर मैने अपने गीले कपड़े चेंज किए और डोर बंद करके बेड पर लेट गया….मैने डोर की कुण्डी नही लगाई थी….बेड पर रज़ाई ओढ़ कर लेटते ही पता नही कब नींद आ गयी….

मेरी आँख रात के 8 बजे तब खुली जब मुझे अहसास हुआ कि, कोई मुझे मेरे कंधे से पकड़ कर हिला रहा है…..जैसे ही मैने आँख खोल कर देखा तो सामने नाज़िया खड़ी थी….और रूम की लाइट ऑन थी….और नाज़िया ने हाथ में खाने की प्लेट पकड़ी हुई थी….नाज़िया को इस तरह अपने रूम में देख कर मैं एक दम से चोंक गया…और उठ कर बैठ गया…..जैसे ही मैं उठ कर बैठा तो, सामने का नज़ारा देख मेरी आँखे खुली खुली रह गयी….नाज़िया ने वही महरूण कलर की शॉर्ट नाइटी पहनी हुई थी….जो मैने उसे खरीद कर दी थी….नाज़िया के होंटो पर रेड कलर का लिप पैंट लगा हुआ था…और ट्यूब लाइट की रोशनी में उसके होन्ट एक दम ग्लॉसी लग रहे थे…

जब नाज़िया ने मुझे अपनी तरफ ऐसे घूर कर देखते हुए देखा तो उसने अपनी नज़रें झुका ली….”समीर खाना खा लो…” नाज़िया ने मेरी तरफ प्लेट बढ़ाते हुए कहा….

“मुझे नही खाना….मुझे भूख नही है…” मैने अपने फेस को दूसरी तरफ घुमा लिया….

“समीर एक तो सारी ग़लती तुम्हारी है….और ऊपेर से नाराज़ भी तुम हो रहे हो….” नाज़िया ने थोड़ा सीरीयस होते हुए कहा…तो मैने नाज़िया की तरफ देखा तो उसने होंटो पर स्माइल लाते हुए कहा….”समीर आख़िर तुम मुझे इतना परेशान क्यों कर रहे हो….आख़िर मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है…” नाज़िया ने थाली की प्लेट टेबल पर रखते हुए कहा.....

“मैं तुम्हे परेशान करता हूँ….देखो मैने तुमसे पहले भी काफ़ी दफ़ा कहा है कि, मेरे रास्ते में ना आया करो….तुम ही बिनावजह मेरे कामो में टाँग अड़ाती हो….तुम्हें क्या शॉंक है मेरे मामले में टाँग अड़ाने का….”मैने बेड से नीचे उतर कर बाहर जाते हुए कहा….

.”पता नही समीर पर मुझे अब….” नाज़िया बोलते-2 चुप हो गयी….मेरी पीठ नाज़िया की तरफ थी….मैं बाथरूम जाने वाला था…पर नाज़िया की अधूरी बात सुन कर रुक गया,….

.मैने मूड कर नाज़िया की तरफ देखा तो उसने अपने सर को झुका लिया…और अपने दोनो हाथो की उंगलियों को आपस में फँसा कर मलते हुए सरगोशी से भरी आवाज़ मैं बोली…” समीर वो तुम मुझे इस तरह परेशान ना किया करो….मैने कभी तुम्हारे बारे में बुरा नही सोचा….” ये कह कर नाज़िया मेरे पास से गुजर कर अपने रूम में चली गयी,…

.मैं बाथरूम में गया….और पेशाब करते हुए सोचने लगा कि, शायद नाज़िया कहना कुछ और चाहती थी….लेकिन वो कह नही पे…..खैर मैंने उस बात की तरफ ज़यादा ध्यान नही दिया और बाथरूम से फारिघ् होकर बाहर आया….और खाना खा कर फिर से बेड पर लेट गया….

थोड़ी देर पहले ही मैं 4 घंटे सोने के बाद उठा था…..इस लिए अब आँखो में नींद का नामो निशान नही था….मैं काफ़ी देर तक बेड पर करवटें बदलता रहा…. रह रह कर आँखो के सामने नाज़िया आ जाती…..जिसमे उसने वही नाइटी पहनी हुई थी…जिसमे मैं उसका हुश्न ऐसे झलक रहा था….जैसे आसमान से उतरी हुई अप्सरा हो…नाज़िया के बारे में सोच-2 कर मेरा लंड फिर से मेरी शलवार में खड़ा हो गया था….मुझे नज़ाने क्यों ऐसा लग रहा था कि, नाज़िया मुझसे कुछ छुपा रही है….वो अपने दिल की फीलिंग मुझसे छुपाने की कॉसिश कर रही है….शायद नाज़िया को मेरा साथ अच्छा लगने लगा है….ये सब सोचते हुए पता नही क्यों पर मैं अपने आप को नाज़िया के रूम में जाने से ना रोक सका…मैं बेड से नीचे उतरा…और रूम का डोर खोल कर रूम से बाहर आया….बाहर एक दम अंधेरा था….मैने नाज़िया के रूम के डोर के सामने जाकर जैसे ही डोर को हल्का सा पुश किया तो, उस वक़्त मेरी हैरत का कोई ठिकाना ना रहा…जब डोर धीरे-2 खुल गया….

और मैं दबे पाँव नाज़िया के रूम में एंटर हुआ तो मुझे एक और शॉक लगा….नाज़िया बेड पर लेटी हुई थी….उसकी नाइटी उसकी कमर पर इकट्ठी हुई पड़ी थी….नाज़िया की पूरी की पूरी टाँगे एक दम नंगी थी….रूम में हीटर ऑन था….जिसकी वजह से रूम में काफ़ी गर्माहट थी….मैने धीरे से डोर को बंद किया और मैं धीरे से नाज़िया के बेड पर चढ़ा और उनकी टाँगो के सामने बैठ गया…नाज़िया की दोनो टाँगो में बहुत गॅप था….और नाज़िया की फुद्दि मुझे सॉफ दिखाई दे रही थी…..बिना बालो की फुद्दि जो कि पूरी तरह से सफेद गाढ़े पानी से लबलबा रही थी…..मेरा लंड मेरी शलवार में झटके खाने लगा….

 
मेने नाज़िया की फुद्दि की तरफ देखते हुए, अपने लंड को शलवार से बाहर निकाला, और तेज़ी से अपने लंड को हिलाने लगा…. जब नाज़िया की फुद्दि का सूराख सिकुड़ता और फेलता उसे देख मैं और मस्त हो जाता….अब भला सिर्फ़ देख कर लंड हिलाने से कहाँ चैन मिलने वाला था….मैं धीरे -2 नाज़िया के दोनो पैरो के बीच उल्टा लेट गया. और नाज़िया की फुद्दि के पास अपनी नाक को लेजाते हुए नाज़िया की फुद्दि को सुघने लगा….

नाज़िया की फुद्दि से जो महक आ रही थी........वो सच में मदहोश कर देने वाली थी...जिसे सूंघ कर मैं अपने लंड को और तेज़ी से हिलाने लगा....पर अब इतने से कहाँ सबर होने वाला था. नाज़िया की फुद्दि से गाढ़ा सफेद पानी बहता हुआ उनकी बुन्द के सूराख की तरफ जा रहा था. और उसकी बुन्द का सूराख भी उनकी फुद्दि से निकले पानी से सना हुआ था.....मेरी हालत खराब होती जा रही थी....मैं सेक्स की मस्ती में इतना चूर हो गया था कि, अब मैं कुछ भी करने को तैयार था….

मेने अपने राइट हॅंड की बड़ी उंगली को नाज़िया की फुददी के लिप्स के बीच में रख दिया...जैसे ही मेने अपनी उंगली को नाज़िया की फुददी के लिप्स के बीच गुलाबी लबबाते हुए सूराख पर रखा तो नाज़िया के बदन ने हल्का सा झटका खाया...जो मुझे सॉफ महसूस हुआ.....पर ये सोच कर कि नाज़िया तो सोई हुई है.....मैने कोई खास ध्यान नही दया....और उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच धीरे-2 अपनी उंगली को फेरने लगा.....मेरी उंगली उसकी फुद्दि से निकल रहे गाढ़े सफेद पानी से एक दम गीली हो गयी....

मैं दूसरे हाथ से अब और तेज़ी से अपने लंड को हिलाने लगा.....और एक हाथ की उंगलियों की मदद से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स पूरी खोल कर फेला दिए..जिससे अब उसकी फुद्दि का सूराख मुझे सॉफ नज़र आने लगा....अब मेरी बर्दास्त से बाहर होता जा रहा था....नाज़िया की फुद्दि का सूराख अब कुछ और ज़्यादा ही सिकुड़ने और फेलने लगा था.....घर और नाज़िया के रूम में एक दम सन्नाटा छाया हुआ था....मुझे नाज़िया की तेज होती सांसो की आवाज़ भी सॉफ सुनाई दी रही थी...

पर नाज़िया की फुद्दि का गुलाबी सूराख देख कर मैं अपने होश खो बैठा था.....और बिना किसी परवाह के नाज़िया की फुद्दि के सूराख को देखते हुए अपने लंड को तेज़ी से हिला रहा था...मेने फिर से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के बीच अपनी उंगली को फेरना शुरू कर दया.....मैं उठा और रूम की लाइट ऑफ कर दी...और 0 वॉट का बल्ब ऑन कर दिया....उसकी हलकी रोशनी रूम में फेली हुई थी....मैं बेड पर चढ़ा और नाज़िया की टाँगो के बीच जाकर घुटनों के बल बैठ गया.....मेने अपनी शलवार को नीचे सरका कर अपनी पिंडलियों तक सरका दया....और फिर एक बार नाज़िया के चेहरे की तरफ नज़र डाली... उसकी आँखे बंद थी.....पर उसकी साँसे अब बहुत तेज़ी से चल रही थी.....मैने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा

और बड़ी ही अहतयात के साथ अपने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के बीच रख कर दबाया, तो कॅप नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को फेलाता हुआ फुद्दि के सूराख पर जा लगा....तभी नाज़िया की कमर ने एक जबरदस्त झटका खाया....मेने घबरते हुए नाज़िया के चेहरे की तरफ देखा वो अभी भी गहरी नींद मे थी...पर अब उसकी आँखो की पलकें मानो जैसे कांप रहो हो.....पर वासना के नशे में चूर मेने अभी भी कोई खास ध्यान नही दिया...फिर मेने अपने लंड को पकड़ कर नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के बीच रगड़ा....दो तीन बार रगड़ने से ही, मेरे लंड का कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख से निकल रहे कामरस से एक दम गीला हो गया.....

नाज़िया की फुद्दि की गरमी मुझे अपने लंड की कॅप पर महसूस हो रही थी....जैसे मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि की गरमी से पिघल जाएगा.... मैने अपने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर सेट किया....और फिर कुछ पल के लिए रुक कर नाज़िया के चेहरे की तरफ देखा...जब इत्सानन हो गया कि, नाज़िया गहरी नींद में है, मैने अपने लंड की कॅप को धीरे-2 नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर दबाना शुरू कर दिया. मेरे लंड का मोटा और सख़्त कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा...जैसे मेरे लंड का कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख में घुसा तो मेने अपनी नज़रें नाज़िया के चेहरे पर टिका ली....अपने दोनो हाथों को नाज़िया के मम्मों के बगल बिस्तर पर टिका दिया....और अपनी बुन्द को आगे की ओर धकेलते हुए अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के सूराख मे धीरे-2 घुसने लगा.....

 


नाज़िया की फुद्दि इतना पानी छोड़ रही थी कि, मेरा लंड फिसलता हुआ धीरे-2 नाज़िया की फुद्दि की गहराइयों मे उतरता जा रहा था....और नाज़िया की फुद्दि की दीवारे मेरे लंड की कॅप पर रगड़ खा कर मेरे बदन मे सरसराहट पैदा करती जा रही थी....कुछ ही पलों में मेरा साढ़े 8 इंच का लंड पूरा का पूरा नाज़िया की फुद्दि में समा चुका था.....मेने देखा कि, नाज़िया के होन्ट अब हल्के से खुले हुए थे...और हल्का-2 कांप रहे थे....उसकी साँसे अब बेहद तेज़ी से चल रही थी....और उसकी आँखो की पलके अब कुछ ज़्यादा ही हिल रही थी....

पर नाज़िया की फुद्दि की गरमी अपने लंड पर महसूस करके मैं एक दम मस्त हो चुका था... मैने धीरे-2 नाज़िया के चेहरे की ओर देखते हुए अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया....जब मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता. मैं मस्ती मे एक दम मदहोश जाता...अब मैं पूरे रिदम के साथ अपना लंड नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर कर रहा था….तभी मुझे महसूस हुआ कि नाज़िया कि फुद्दि थोड़ा सा ऊपेर की तरफ उठ गयी है….जिससे मेरा लंड स्मूद्ली नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर होने लगा था….

पर फिर भी मेने इस तरफ कोई ध्यान नही दिया…..मेरे धक्कों की रफ़्तार धीरे-2 बढ़ रही थी. मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि से निकल रहे कामरस से भीगा हुआ अंदर बाहर हो रहा था. मेरी आँखे भी हल्की-2 बंद होने लगी थी…

तभी अचानक से मुझे मेरे कंधो पर हाथों की पकड़ महसूस हुई, मैं एक पल के लिए चोन्का और नाज़िया के चेहरे की तरफ देखा तो मेरी हैरत का कोई ठिकाना नही रहा….नाज़िया की आँखे पूरी खुली हुई थी….और साथ ही उनका मूह भी हैरत से पूरा खुला हुआ था….”समीर ये ये ये क्या कर रहे हो तुम….उफ्फ हाईए अम्मी हटो पीछे उफ़फ्फ़ “ नाज़िया की आवाज़ मे गुस्सा था….पर उसका चेहरा उसका साथ नही दे रहा था. और ना ही उसका बदन….मेने पीछे सर घुमा कर देखा तो,

नाज़िया ने अपनी टाँगो को उठाया हुआ था…जैसे खुद ही वो चुदना चाहती हो….मेने अपने लंड को कॅप तक नाज़िया की फुद्दि से बाहर खींचा और फिर नाज़िया के चेहरे की तरफ देखा….”समीर तुम सुन रहे हो ना हटो पीछे वरना मुझसे बुरा कोई ना होगा…तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब मेरे साथ करने की….” मैने दिल ही दिल मे सोचा, साली ने अपनी टाँगे तो ऐसे उठा रखी है….जैसे लंड के लिए तड़प रही हो….और ऊपेर-2 से मेरे सामने नाटक कर रही है…”तुमने सुना नही हटो पीछे अब तुम्हारी खैर नही आने दो तुम्हारे अब्बू अहह अम्मी हइई मर गयी मैं….”

मेने अपने लंड को पूरी ताक़त के साथ एक ही बार मे पूरा का पूरा नाज़िया की फुद्दि मे घुसा दिया….ये देख नाज़िया का मूह ऐसे खुल गया…जैसे उसमे किसी ने लंड फँसा रखा हो…नाज़िया ने मेरे कंधो को कस के पकड़ा और पीछे की ओर धकेलने लगी…पर तब मैं अपने लंड को तीन चार बार नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर कर चुका था….”हाई मैं मर गयी. ” मैं नाज़िया की बात की परवाह किए बिना अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करना जारी रखा….अब मैं पूरी रफ़्तार से अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था…

मेने अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करते हुए, नाज़िया के होंटो को अपने होंटो में भर लिया. और अपनी बुन्द उछाल-2 नाज़िया की फुद्दि मे अपना लंड डालने लगा…नाज़िया की आवाज़ अब मेरे मूह मे घुट कर रह गयी थी.. वो सिर्फ़ उम्म्म ह्म्म्म उन्न्ञणन् कर रही थी…और साथ मुझे पीछे धकेलने की कॉसिश कर रही थी.. पर नाज़िया की टाँगे अब और ऊपेर को उठ चुकी थी…जिससे उसकी फुद्दि का सूराख अब और ऊपेर खुल कर सामने आ चुका था…मैं एक दम जोश से भर उठा, और अपने लंड को कॅप तक बाहर निकाल-2 कर नाज़िया की फुद्दि मे अंदर बाहर करने लगा…नाज़िया के हाथ अब मेरे कंधो से होते हुए पीठ पर आ चुके थे…..मेने नाज़िया के होंटो से अपने होंटो को हटाया और नाज़िया की आँखो मे देखते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा…नाज़िया रुआंसी सी आवाज़ में बोली… “समीर तुम मेरे ये साथ ऐसा क्यों कर रहे हो….अगर किसी को पता चला तो मैं कही की नही रहूंगी….”

मैं: आह नाज़िया मेरी जान तू फिकर ना कर….किसी को कुछ नही पता चलेगा….

 


मैने नाज़िया की टाँगो को घुटनो से मोड़ कर अपने कंधो पर रख दिया…..और खुद उसके ऊपेर झुक कर ताबडतोड़ झटके लगाने शुरू कर दिए….नाज़िया की बुन्द टांगे कंधो पर होने की वजह से बिस्तर से ऊपेर उठ चुकी थी….और मैं अपने लंड को पूरा बाहर निकाल -2 कर नाज़िया की फुद्दि में ठोक रहा था…मेरी रानो की जडे जब नाज़िया की मोटी बुन्द से टकराती तो पूरे रूम में थप-2 की आवाज़ गूँज जाती….

नाज़िया: अह्ह्ह्ह समीर धीरे उफ़फ्फ़ आहह आराम से अह्ह्ह्ह….

नाज़िया अब मस्ती में आँखे बंद किए हुए अपनी बुन्द को धीरे-2 ऊपेर उछालने लगी थी. शायद उसकी बुन्द से मेरे टट्टों के तरकराने की आवाज़ सुन कर वो शरमा रही थी…मेरा लंड किसी एंजिन के पिस्टन की तरह नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था….तभी नाज़िया ने मेरे कंधो को अपनी पूरी ताक़त से कस के पकड़ लिया…उसका बदन झटके खाने लगा…और वो तेज़ी से अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उछालने लगी….”हाए समीर अह्ह्ह्ह उंह मैं गेययी अह्ह्ह्ह ओह सीईईईईईई ह्म्म्म्म ह्म्म्म्म्मम अहह सीईईईईईई” और फिर नाज़िया एक दम से काँपते हुए फारिघ् होने लगी….

उसकी फुद्दि की दीवारे मेरे लंड को अपने अंदर जैसे निचोड़ने लगी थी….मैं भी फारिघ् होने के बेहद करीब था…मेने नाज़िया की टाँगो को अपने कंधे से नीचे उतारा और अपना लंड नाज़िया की फुद्दि से बाहर निकाल कर तेज़ी से हिलाने लगा…मेरे लंड से वीर्य की बोछार होने लगी…. वीर्य की पिचकारियाँ सीधा नाज़िया की पे फुद्दि पर गिरने लगी….नाज़िया हैरत भरी नज़रों से ये सब देख रही थी….मेने उसकी फुद्दि को बाहर से अपने वीर्य से पूरा भर दिया था….

जब मैं फारिघ् होने के बाद शांत हुआ तो, मेने देखा कि मेरा वीरे नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के बीच से बहता हुआ उसकी बुन्द के सूराख तक जा रहा है…जिसे नाज़िया अपनी बुन्द के सूराख पर अपनी उंगली लगा कर देख रही थी…और बुरा सा मूह बना कर मुझे देखती…मैं मुस्कुराता हुआ उठा और उठ कर बाथरूम मे चला गया…

मैं बाथरूम मे गया और वहाँ पहुँच कर अपने लंड को पानी से धोया जो नाज़िया की फुद्दि के पानी से एक दम सना हुआ था…अपने लंड को सॉफ किया और नाज़िया के रूम की तरफ चला गया….. जैसे ही मैं नाज़िया के रूम मे पहुँचा तो नाज़िया ने बेड पर लेटे हुए मेरी तरफ देखा और बेड से नीचे उतरी अपनी चप्पल पहन कर रूम से बाहर जाने लगी.......नाज़िया ने अपने नंगे जिस्म पर वही नाइटी पहनी और रूम से बाहर निकल गयी...

 
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