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सुमेरा को वहाँ बैठा देख मेरा सारा जोश ठंडा पड़ गया….उन दोनो की नज़र मुझ पर नही पड़ी थी….मैने एक बात नोट की सुमेरा कुछ परेशान दिखाई दे रही थी…उसने नाज़िया के दोनो हाथो को पकड़ा हुआ था…और नाज़िया के सामने बेड पर बैठी हुई थी…”बेटा आज तुमने जो भी देखा है….प्लीज़ वो सब किसी को ना बताना… वरना मेरी इज़्ज़त खाक में मिल जाएगी….देखो तुम मुझे अपनी अम्मी की तरह मानती हो ना…तो मेरी ये बात मान लो बेटी…ये बात किसी को ना बताना….”
नाज़िया: चाची जी मैने आप से कहा ना कि, आप बेफिकर हो जाएँ….मैं किसी को नही बताउन्गी…आप मुझ पर भरोसा करें….
सुमेरा: कसम खाओ कि तुमने जो भी आज देखा उसका जिकर किसी से नही करोगी…
नाज़िया: खुदा की कसम मैं इस बारे मे किसी से बात नही करूँगी….
सुमेरा: फ़ाज़ल से भी नही….(मेरे अब्बू के बारे में बात कर रही थी…)
नाज़िया: जी उनसे भी इसका जिकर नही करूँगी….
सुमेरा: अब जाके दिल को सकून आया है….मैं तो डर ही गयी थी….
नाज़िया: हहा घबराने की ज़रूरत नही…मैं किसी को नही बताने वाली….
सुमेरा: अच्छा तुम घर क्यों आई थी….कोई काम था…
नाज़िया: वो मैने रीदा को बॅंक मे अकाउंट खोलने के फॉर्म दिए थे…वही लेने आई थी…सोचा था कि, अगर आप को कुछ समझ नही आ रहा होगा तो, वो भी बता कर फॉर्म भरवा दूँगी…..
सुमेरा: ओह्ह्ह अच्छा कोई बात नही कल भर लेंगे…..
मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि, आख़िर नाज़िया ने सुमेरा के घर में ऐसा क्या देख लिया था…..जिसको छुपाने के लिए सुमेरा नाज़िया की मिन्नते कर रही थी… “एक बात पूछूँ चाची जी….”
सुमेरा: हां पूछ….
नाज़िया: क्या रीदा को इस बात का बुरा नही लगता….
सुमेरा: नही….वो बुरा नही मानती…..(सुमेरा ने शर्मिंदगी से ना मे सर हिलाते हुए कहा….)
नाज़िया: कमाल है….पर ये सब हुआ कैसे….
सुमेरा: अब तुम्हे क्या बताऊ…ये बहुत पुरानी बात है…बस ऐसे ही एक दिन ये सब हो गया था….
नाज़िया: प्लीज़ मुझे बताओ सारी बात…आख़िर आप दोनो माँ बेटी मे ऐसी अंडर स्टॅंडिंग कैसे हो गयी…मुझे तो अब भी यकीन नही हो रहा….ये सब कैसे शुरू हुआ….मुझे सारी बात बताईं….
सुमेरा: अब तुम इतना कह रही हो तो सुनो….पर मुझे वादा करो कि तुम किसी को बताओगी नही….
नाज़िया: अब्ब्ब्ब खुदा की कसम भी खा ली है…अब इससे ऊपेर आपको कैसे यकीन दिलाऊ….
सुमेरा: अच्छा तो सुनो…ये तब की बात है जब रीदा 6थ क्लास मे पढ़ती थी…. उस वक़्त मेरे सास ससुर जिंदा थे….मेरे शोहार फ़ारूक़ के बड़े भाई साहब की फॅमिली भी हमारे साथ ही रहती थी…हमारा एक ही घर था….बसीर रीदा का हज़्बेंड मेरे जेठ का बड़ा बेटा है….उस वक़्त वो 8थ क्लास मे पढ़ता था…बसीर का छोटा भाई आसिफ़ उस वक़्त 5थ क्लास मे था…और उससे एक साल पहले मेरे हस्शीद (सुमेरा का बेटा…) हुआ था….हम एक ही घर मे रहते थे….मेरे जेठ जी आर्मी मे थे… इसीलिए वो बाहर ही रहते थे….मेरी जेठानी और उनके बच्चे साथ मे रहते थे… हुआ कुछ ऐसा था कि, एक बार मेरी जेठानी की अम्मी बीमार पड़ गयी…और उसे एकदम से अपने अम्मी अब्बू के घर जाना पड़ा….
उस वक़्त घर पर सिर्फ़ मेरे शोहार ही थे….जिसके साथ मेरी जेठानी जा सकती थी… उस वक़्त घर की औरते ऐसे अकेली कहीं नही जाती थी….तो उस दिन मेरे शोहर मेरी जेठानी को लेकर उसके मायके चले गये….. उस वक़्त गाँव मे लाइट तो थी…पर आती बहुत कम थी….उस दिन जब रात ढलने लगी थी…..मैने खाना तैयार करने लगी…पहले मैने अपने सास ससुर को खाना खिलाया…. फिर हस्सद जो उस वक़्त 1 साल का था…उसको अपनी सास को पकड़ा कर रीदा बसीर और आसिफ़ को किचन मे ही बैठा कर खाना खिलाने लगी…. रीदा और बसीर ने जल्दी जल्दी खाना खाया…और उठ कर अपने दादा दादी के कमरे मे चले गये….वो अक्सर रात को अपने दादा दादी से कहानी सुन कर उनके साथ ही सोते थे… आसिफ़ जो उस वक़्त बसीर से उम्र मे 4 साल छोटा था…वो अभी भी धीरे-2 खाना खा रहा था….तभी मुझे हस्शाद के रोने की आवाज़ आई…