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मेरी कमसिन जवानी की आग complete

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तभी चाचा बोले- संध्या तुम तो पूरी बड़ी हो गई हो.

इस समय उनको मेरी नंगी गांड दिखाई दे रही थी, अब जाकर सामने मम्मी का पेटीकोट मुझे नजर आया. जैसे ही उसे पकड़ने को बढ़ी और पेटीकोट को उठाया, तभी मुझसे पेटीकोट चाचा ने छीन लिया और बोली- तू ऐसे ही खड़ी रह संध्या, अब मुझसे क्या छुपा रही है, मैंने तेरा सब कुछ देख लिया.. वो भी बहुत अच्छे से देख लिया. आज तेरे मां-बाप भाई सबको बताता हूं तेरी ये करतूत कि तूने अपने मौसी के बेटे और बहन के लड़के से एक साथ दो लड़कों से मुँह काला करवा लिया जमकर चुदाई करवाई है.

मैं हाथ जोड़कर खड़ी हो गई और रोने लगी. ऐसा लग रहा था कि मुँह कैसे दिखाऊंगी अपने घर में, मैं बोली कि मुझसे गलती हो गई प्लीज किसी से नहीं बताना चाचा, नहीं तो मैं मर जाऊंगी, मुझसे गलती हो गई.मैंने चाचा के पैर पकड़ लिए.

तब चाचा बोले- नहीं कोई गलती नहीं हुई, तू इतना डर क्यों रही है संध्या? यह उम्र इसीलिए होती है, सब इस उम्र में करते हैं.यह कह कर वे एकदम से मेरी ओर घूरने लगे और मेरे सर पर हाथ रखकर बोले- रो और डर मत, मैं तुझे बचा लूंगा पर तुझे भी मेरा साथ देना होगा संध्या.बिना कुछ सोचे-समझे मैं बोली- चाचा मैं जिंदगी भर आप जो कहेंगे सब करूंगी, आपका पूरा साथ दूंगी गॉड प्रामिस, मम्मी की कसम चाचा, बस मुझे आज बचा लो और किसी को मत बताना बस.

चाचा बोले- फिर से सोच ले संध्या, मैं तुझे चोदूंगा और अपने दोस्त के साथ चोदूंगा.. क्योंकि तुझे दो मर्दों की जरूरत है, तू तो पागलपन कर देने वाली हद पार कर गई है..एकदम मस्त माल हो गई है तू.मैंने फिर कुछ ना सोचा-समझा और हां बोल दिया. मैं बोली- चाचा मुझे कोई दिक्कत नहीं है, बस ये आज की बात किसी को भी भी पता नहीं चले.

चाचा बोले- फिर डन.. वादा तुझसे संध्या कभी किसी को पता नहीं चलेगी आज की ये बात मैं तेरे साथ हूं.यह कह कर चाचा ने मुझे अपने गले से लगा लिया और बोले- सच बोलूं तुम्हें देखकर लगता है कि जैसे तू आसमान की परी है संध्या.

उन्होंने अपना हाथ धीरे से मेरे नीचे नंगी चूत में ले गए और बोले- यह तेरी चूत से रस बह रहा है, तू तो बहुत चुदासी हो रही है, चल जल्दी से तुम्हारी चूत को मैं साफ कर दूं और तुम्हें एक अलग सा मजा भी दे दूं.

मैं उस समय मजबूर थी, कुछ नहीं कह सकी चाचा से, पर मुझे उनकी ये बात बहुत अजीब सी लगी. वो बिल्कुल बुड्ढे थे, मैं छोटी सी लड़की थी, वो मुझसे उम्र में लगभग चालीस वर्ष के बड़े थे. चाचा ने मुझे उसी रजाई में बैठने को बोला. मैं झिझक रही थी क्योंकि वह मेरे बाबा की उम्र के थे, बहुत ही बड़े थे. मुझे थोड़ा नहीं बहुत बेकार सा लगा.

पर चाचा नहीं माने और मेरा हाथ पकड़ कर बोले- संध्या तू बैठ जा बस दो मिनट के लिए.. मुझे फिर जाना भी है.

मैं बोली- यह ठीक नहीं है चाचा, आप मुझसे बहुत बड़े हैं, मुझे छोड़ दीजिए, भगवान के लिए मेरे साथ ऐसा मत करिए. आपको चाचा सब कहते हैं तो मैं भी कहती हूं, पर आप मेरे पापा के चाचा हो, यानि मेरे बाबा हुए.. प्लीज मुझे छोड़ दो, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं.

चाचा बोले- चल छोड़ दिया पर आज तेरे बाप को ये सब तेरे कारनामे बताता हूं.

दोस्तो, मेरी वासना भरी कहानी पर आप अपने कमेन्ट कर सकते हैं.

 
अब तक की इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा था कि मेरी चुत पीयूष चाट रहा था और मैं लाल जी का लंड चूस रही थी, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. पीयूष के दोस्त के आने की ग़लतफ़हमी में दरवाजा खोल दिया और अन्दर मोहल्ले के चाचा जी आ गए. चाचा जी ने मुझे चोदने की शर्त पर किसी से न कहने की बात रख दी, जिसे पहले मैंने मान लिया, फिर मना करने लगी.

अब आगे..

चाचा जी बोले- अभी बात डन की थी और अभी से नाटक करने लगी. तू उम्र को क्या चूत से चाटेगी, तुझे तो लंड से मतलब है कि उम्र से चल. रूक आज तुझे बताता हूं, अब मैं जा रहा हूं.

उनकी धमकी से मैं बेहद डर गई और चाचा से बोली- ठीक है चाचा पर सिर्फ दो मिनट के लिए ही.. आपने कहा है.

मैं उनके 2 मिनट कहने पर उनके हाथ पकड़ने पर उसी फर्श में पड़ी रजाई पर बैठ गई, जैसे ही मैं बैठी चाचा भी बिल्कुल मेरे सामने मुझसे चिपक कर बैठ गए और बोले- तू बहुत सेक्सी है संध्या.. क्या तो हुस्न और जिस्म है तेरा.. तुझे नंगी हालत में कोई मरा मर्द भी देख ले तो जी उठेगा.

उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों मम्मों को पकड़ कर तेजी से दबाना चालू कर दिया. वे मेरे दोनों मम्मों के निप्पल को उंगलियों से रगड़ने लगे. उनके इस तरह के तरीके से मेरे अन्दर की जो घबराहट थी, वो हट गई और मुझे कुछ कुछ होने लगा. अब अपने आप मेरी आंखें बंद होने लगीं.

तभी मेरे दूध को चूसते हुए चाचा बोले- संध्या तू तो आग है.. कितना गर्म है तेरा बदन आहहहह…चाचा ने मुझसे लिपट कर मेरे गालों को चूमा. उसके बाद मेरी गर्दन को अपनी जीभ से चाटने लगे. उनकी इस हरकत से मैं मचल उठी.

इसके बाद तो चाचा ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर ऐसा चूमा कि मैं बता नहीं सकती कि किसी ने ऐसा किस नहीं किया था. मेरे बदन में न जाने क्या हुआ कि मैं भी यह भूल गई कि वह उम्रदराज मर्द हैं. बस मैं उनसे लिपट गई, अपने दोनों हाथों से चाचा को अपने बांहों में कस लिया. चाचा मेरे होंठों को चूसने और चाटने लगे, मैं भी चूसने लगी.

अब मेरे बदन में वही सब होने लगा, जो पीयूष और लालजी के साथ करने में हो रहा था.

चाचा ने होंठ के बाद सीधे मेरे मम्मों को पकड़ कर तेजी से दबाया और बोले- संध्या, ये तो बहुत कड़क हैं, पर क्या गजब के हैं. आज मेरी लाइफ बन गई.वे सीधे मेरे दोनों दूध को कसके चूसने लगे. अब जो बचा हुआ होश था, वह भी नहीं रहा.

मैं चाचा की शर्ट और बनियान के अन्दर हाथ डालने लगी, तो चाचा बोले- कपड़े उतार दूं क्या संध्या?मैं बोली- हां चाचा.तो चाचा बोले- आज तू उतार मेरे कपड़े.. मजा आ जाएगा.

मैं चाचा की शर्ट के बटन खोलने लगी और कुछ ही पलों में शर्ट उतार दी, फिर उनकी बनियान भी उतार दी.चाचा के सीने में बहुत बाल थे और सब सफेद हो चुके थे.

फिर चाचा खड़े हो गए और बोले- अब पैंट भी उतार दे मेरी जान.. तू बहुत मस्त है.

मैंने जैसे ही चाचा के पैंट की बटन खोल कर ज़िप खोली और पैंट नीचे खिसकाने लगी.. उनके अंडरवियर में उनका लंड बहुत खड़ा महसूस हुआ. मैंने चाचा की पैंट भी उतार कर उनके शरीर से अलग कर दिया. अब सिर्फ चाचा के शरीर में उनकी अंडरवियर बची.

चाचा बोले- इसको भी उतार संध्या इसी के अन्दर तो तेरे काम का औजार है.मैं मुस्कुरा दी और चाचा की अंडरवियर पकड़ कर तेजी से नीचे खिसका दी. उनका बहुत ही बड़ा सा लंड मेरे मुँह के पास सामने आ गया. तो चाचा ने अपने मूसल लंड को मेरे होंठों में लगा दिया और बोले- इसे चूस संध्या.. बहुत मजा आएगा.

वे मेरे बालों को पकड़ कर अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने लगे. मैंने मुँह खोला तो चाचा ने अपना लौड़ा मेरे मुँह में अन्दर घुसा दिया. बहुत ही अजीब गंध उनके लंड की.. मेरे अन्दर समा गई, पर मैं पूरी मस्ती में मदहोशी में थी, तो चाचा का लौड़ा चूसने लगी और चाटने लगी.

मैं घुटनों के बल बैठी थी और चाचा खड़े थे. अब चाचा अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर बाहर करने लगे और गंदी गंदी गालियां देने लगे. चाचा अकड़े भी जा रहे थे.

वे बोले- संध्या तू बहुत बड़ी रंडी है. आह साली छिनाल संध्या.. और जोर से चूस लंड को मादरचोदी.. तेरे को दस-दस लंड से चुदवाऊंगा, बहनचोदी बहुत मस्त लंड चूसती है..चाचा लंड चुसवाते हुए इतनी सेक्सी और गंदी गालियां दे रहे थे कि बता नहीं सकती. अब वे झुककर मेरे दोनों दूध भी अपने हाथों से दबाने लगे. इतने में बिल्कुल मेरे सामने से चाचा के लिए आवाज आई. ये आवाज गांव के ही दो किसानों की थी.

 
वे सीन देख कर बोले- क्या चाचा, हमें बाहर खड़ा करके क्या करने लगे हो. तुमने तो कहा था कि मैं कुल्हाड़ी लेने जा रहा हूं और अन्दर आकर ये क्या गुल खिला रहे हो? कम से कम दरवाजा तो बंद कर लेते चाचा.. अगर इस लड़की के माता-पिता आ जाते तो क्या होता? और ये लड़की तो तुम्हारी नातिन की उम्र की है, इसको भी नहीं छोड़ा तुमने चाचा.. ये लड़की तो लगता है पूरी अपनी मां पे गई है, जैसी मां छिनाल है, साली वैसी ही बेटी है.

मैं फिर से डर के मारे पीछे मुड़कर खड़ी हो गई. एक सामने मम्मी का पेटीकोट दिख गया था, मैंने उससे खुद को ढक लिया.

तब उं दोनों को चाचा बोले- अरे कमीनो, अब देख लिया है तो जाकर दरवाजा तो बंद कर आओ. फिर मुझे ज्ञान का भाषण देना.तभी उनमें से एक गया और मेरे घर दरवाजा बंद कर दिया.

चाचा ने अपने खेत में काम करने वाले उन दोनों से पूछा कि दो लड़के थे वहां, नहीं हैं उधर क्या?तो वह किसान बोले- नहीं, जब हम लोग अन्दर आए थे तब तो यहां कोई लड़के नहीं दिखे.मैं सोचने लगी कि पीयूष और लालजी लगता है घर के बाहर डर के मारे भाग गए.

इतने में वे दोनों किसान दरवाजा बंद करके नजदीक आ गए. तब चाचा बोले कि बस 5-10 मिनट रूको जल्दी चलते हैं.

वे दोनों मेरी नंगी जवानी को घूर कर देखने लगे.

चाचा बोले- अब तुम लोगों ने तो सब देख ही लिया है, तो तुमसे क्या छुपाना.वो किसान बोले- अरे चाचा, तुम बहुत बड़े वाले निकले हो, इस लड़की की मां से भी तुम्हारा चक्कर था ही और अब उसकी बेटी को भी पटा लिया. पर यह तो बहुत छोटी कमसिन है.तब चाचा बोले कि यह छोटी नहीं है बहुत खेली खाई है, जब मैं अभी अन्दर आया था तो यह अपनी मौसी के लड़के और बहन के लड़के से चुदाई करवा रही थी. दो दो लड़के एक साथ इसके ऊपर चढ़े हुए थे.इस पर वे दोनों किसान बोले- अरे तो रंडी की बेटी रंडी ही तो होगी, इसकी मां के भी बड़े किस्से हैं.

उनकी बातें सुनकर अपनी मम्मी के बारे में जाना तो मुझे बिल्कुल भी नहीं आश्चर्य हुआ. क्योंकि मैं हमेशा से जानती थी कि मेरी मम्मी के कई यार हैं. पापा मुंबई चले जाते हैं, तब पापा के दोस्त मम्मी के साथ अकेले में रहते हैं. पर ये मुझे अच्छा नहीं लगा कि यहां कोई मेरी मम्मी की बुराई करे. तब भी मैं बुरा नहीं मानी.

इतने में चाचा ने उन दोनों में से एक को मनोहर नाम से बुलाया, वह मुड़हा जाति का था. यह आदिवासी जाति में से होते हैं, जो खेत में मजदूरी करते हैं. दूसरे का नाम चाचा ने दिनेश बोला, वह उन्हीं के परिवार का था, जो चाचा से उनका खेत खेती करने के लिए लिए हुए था.

जिसका नाम दिनेश था, उससे चाचा ने बोला- दिनेश तेरा मन हो तो आजा.. थकान उतार ले, फिर चलते हैं खेत में.दिनेश बोला- अभी तो इसको देखा भी नहीं कैसी है? कभी ध्यान भी नहीं दिया आपके घर आते थे और चले जाते थे जरा इधर घुमाइये, इसे देखें तो कैसी दिखती है यह छोकरी?

चाचा मेरी तरफ आए और बोले- संध्या तुम बिल्कुल चिंता नहीं करो, ना इनसे शर्माओ.. ना ही डरो. यह दोनों मेरे दाएं बाएं हाथ हैं. यह बात यहीं की यहीं रहेगी, तुम बिल्कुल बेफिक्र हो जाओ, यह कभी किसी से जिक्र भी नहीं करेंगे. जो मैं कहता हूं, यह उतना ही करते और जानते हैं. चलो इनसे शरमाओ नहीं, थोड़ा इनकी तरफ घूम जाओ.

चाचा ने मुझे मेरी पीठ तरफ से पकड़ कर उनकी तरफ घुमा दिया. मैं घूम तो गई, पर बहुत घबरा रही थी और शर्म आ रही थी. शर्म के मारे मैंने अपनी आंखें नीचे की हुई थीं. अपने बदन में एक वही जो पेटीकोट लपेट लिया था, उसी को पकड़े वैसे ही नीचे की ओर सर को झुकाए खड़ी हो गई थी.

मुझे वह दोनों देखते ही बोले कि यह तो बिल्कुल ऊपर से आई परी की तरह सुंदर है. इसकी मां को देखा था, यह कहीं से भी अपने मां बाप की बेटी नहीं लगती है. ये तो टीवी में आने वाली हीरोइन के जैसी है. जरा चाचा इससे इसका वह कपड़ा तो हटाओ.

चाचा ने झटके से वह पेटीकोट मेरे बदन से मेरे हाथ से खींच दिया, मैं पूरी नंगी उन दोनों के सामने हो गई. अब मेरे बदन पर कुछ नहीं था. मुझे देखने के लिए दिनेश सामने खड़ा था.

जैसे ही उसने मुझको पूरी नंगी देखा तो बोल उठा- चाचा सच में तुमने क्या माल पटाया है, यह उम्र में छोटी लग सकती है, पर यह बहुत बड़ी माल आइटम है. इसको चाचा तुमने कितनी बार चोदा है?चाचा बोले- आज यह पहली बार मुझसे चुदेगी और अब तो अपन तीनों ही इसको चोदेंगे.

ऐसा कहकर चाचा मेरे पीछे लिपट गए. उनका लंड मेरे पीछे गांड में चुभोने लगा.

चाचा ने बोला- दिनेश तुम भी कपड़े उतार लो, जरा संध्या से गले तो मिल लो.दिनेश मेरी तरफ बढ़ गया और सीधे मेरी नाभि को चूम कर बोला- ऐसी सेक्सी नाभि मैंने नहीं देखी.

 
उसने अपनी हथेली को मेरी जांघों से रगड़ते हुए ले जाकर चूत में रख दिया और अपना हाथ चूत में रगड़ने लगा.

वो इस तरह से हाथ चला रहा था कि मेरी सांसें उखड़ने लगी. तभी एकदम से उसने मेरी चूत में अपनी उंगली पूरी की पूरी घुसा दी. मैं उछल पड़ी और जोर से मेरे मुँह से ‘उंहहह आहहहह..’ निकल गया. अपने आप मेरे हाथ दिनेश के बालों में चले गए और उधर मेरे पीछे रोहण चाचा अपना लौड़ा मेरे गांड में घुसाने की कोशिश कर रहे थे, पर घुस नहीं रहा था.

पर मुझे अपनी गांड में उनके इस हरकत से गुदगुदी बहुत हो रही थी और मैं उछल उछल जा रही थी.

उधर वो मजदूर जिसका नाम मनोहर था, वो बोला- क्यों चाचा मैं ऐसे ही सूखा खड़ा रहूं क्या दर्शक बनकर, मैं भी इंसान हूं.. ऐसा माल और ऐसा सीन देखकर मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है अब.. मैं यहां से बाहर चला जाऊं क्या?चाचा मेरे कान में धीरे से बोले- क्यों संध्या डार्लिंग इसको भी बुला लें, बाहर जाके कुछ गड़बड़ ना करे.मैं बोली- जो आपको ठीक लगे चाचा.

चाचा मनोहर से बोले- चल आज तेरी जिंदगी को भी हसीन बना दिया जाए.. संध्या को चोदना मतलब हीरोइन को चोदना है. आज इसे चोद कर तेरी लाइफ बन जाएगी.. मनोहर चल आ जा.तभी मनोहर बोला कि मुझे आप कहां सैट करेंगे.. इसके दोनों छेद तो आप दोनों ने पहले ही कब्जाए हुए हैं.चाचा बोले- अरे यह कोई ऐसी जगह नहीं जहां सैट करना पड़ता है, बस तुझे जहां ठीक लगे सैट हो जाना.. तू आ भर जा.वो मेरी तरफ आने लगा तो चाचा बोले- मनोहर जहां तेरा मन करे.. शुरू हो जा.मनोहर ने अपनी जात दिखाई और लंड सहलाते हुए बोला- आप कहीं ऊंच-नीच का फर्क तो नहीं लगाओगे?चाचा बोले- अबे तू आ… कोई दिक्कत नहीं, आ जा.

तभी मनोहर मेरे सामने खड़े होकर अपनी शर्ट खोलने लगा और पैन्ट खोलकर नीचे उतार दिया. अब उसके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था.

वो बोला- चाचा मैं अब इसे भी उतार रहा हूं.चाचा बोले- अबे भोसड़ी के हर बात पूछेगा क्या.. जो करना है कर यार.. कुछ बातें इससे संध्या से पूछ लिया कर.

उसने सीधे अपनी अंडरवियर उतार कर फेंक दिया. जैसे ही अंडरवियर उतारा, मैंने देखा कि उसका लंड बहुत ही बड़ा था. चाचा और दिनेश से जस्ट डबल बहुत ही बड़ा और वह भी काले रंग का था. पूरा खड़ा लंड था. वो मेरी तरफ लंड हिलाता हुआ आया. मुझे वो थोड़ा गंदा लग रहा था, पर उसका लंड बहुत ही मस्त था.

उसने दिनेश को बोला कि भाई थोड़ा इधर उधर हो जाओ या इसको लिटा लो.दिनेश थोड़ा खिसका तो आकर मुझसे लिपट गया और बोला- तू एकदम गजब माल हो रखी है, बहुत-बहुत किस्मत वाली है तू जो तुझे मेरा मस्त लौड़ा मिलेगा.

मनोहर ने मुझसे लिपट कर मेरे होंठों को ऐसे जोर से चूमा कि मेरी सांस ही रुक गई. उसके मुँह से गंध आ रही थी. पर वो इस अंदाज मेरे होंठों को चूमने लगा कि मैं मनोहर से ना चाहते हुए लिपट गई और उसका साथ देने लगी. वो मेरे होंठ चूसने लगा और मेरे मुँह के अन्दर अपनी जीभ डाल कर अपनी जीभ से मेरे जीभ को चूसने और चाटने लगा. मनोहर का लंड मेरी जांघों के बीच में ऐसे चुभ रहा था, जैसे कोई लोहे का रॉड हो. उसका लंड एकदम सख्त लौड़ा था. मैं जानबूझ कर मनोहर से सट गई, चिपक गई.

तभी चाचा बोले- सुनो दिनेश और मनोहर, अब संध्या बिल्कुल तड़पने लगी है.. बहुत चुदासी हो गई है. देखो संध्या खड़े-खड़े कांप रही है, इसका बहुत मन करने लगा है. इसे जल्दी नहीं चोदेंगे तो पागल हो जाएगी.तभी दिनेश ने बोला- सच है चाचा, अब इसे यहीं लिटा देते हैं, इसे लिटाकर फिर मस्त चोदने के लिए पोजीशन बनाते हैं.

तीनों थोड़ा थोड़ा हट गए. चाचा मुझसे लिपटे लिपटे बोले कि चल संध्या डार्लिंग अब लेट जा, अब अपन मस्त चुदाई का खेल शुरू करते हैं.. वाइल्ड सेक्स करेंगे.

उन्होंने मुझे कमर से पकड़ कर वहीं फर्श पर पड़ी रजाई में लिटा दिया. जैसे ही मैं लेटी, चाचा ने मेरे दोनों चूतड़ों को फैला कर गांड के छेद को खोला और जोर जोर से गांड चाटने लगे. उन्होंने मेरी गांड में अन्दर तक अपनी जीभ घुसा दी. मैं जीभ की खुरदुरापन महसूस करके एकदम से उछल पड़ी. करीब पांच मिनट तक चाचा मेरी गांड में जीभ घुसेड़ कर उसको पागल कुत्ते की तरह चूसते रहे.

मैं बोली- चाचा मैं मर जाऊंगी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा कुछ करो.

दिनेश के बदन में कुछ कपड़े थे, वह भी उसने पूरे उतार दिए और पूरा नंगा हो कर मेरे सामने तरफ आ गया.

तभी मनोहर ने अपना लौड़ा मेरे मुँह के पास लाकर बोला- साली छिनाल संध्या, चल आज मेरे लंड को इतना चूस.. और ऐसे चूस की सभी रंडियां फेल हो जाएं.यह कहते हुए मेरे बाल पकड़ कर अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने लगा. मनोहर का लंड बहुत बड़ा था.

जब मैंने मुँह नहीं खोला तो चाचा बोले- मुँह खोल दे संध्या, मनोहर जैसे लंड लड़की को बड़े भाग्य से मिलता है, तू पागल हो जाएगी इसके लंड को चूस कर.. और इससे चुदवा कर, यह बहुत मस्त चुदाई करता है.. बड़े अच्छे से चुदाई करेगा.

मनोहर ने मेरे दोनों मम्मों को पकड़ के इतनी जोर से दबाया कि ऐसा लगा, जैसे मेरी जान निकल गई.

मैं उससे बोली कि ऐसा मत करो यार.. बहुत दर्द हो रहा है. ये कहने के लिए मैंने जैसे ही अपना मुँह खोला तो मनोहर ने अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर घुसा दिया.

जैसे ही लंड घुसा मनोहर कराह भर कर बोला- आह.. संध्या मेरी जान चल अब इसे चाट और चूस.. क्या मस्त होंठ और मुँह है तेरा.. जिसपे मेरा लंड घुसा है, चल रंडी चूस इसे..

 
उसने मेरे बालों को पकड़ कर पूरा लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. उधर दिनेश ने नीचे मेरी टांगों को फैला दिया. मेरी चूत को पूरा खोल दिया, फिर बड़े ही ध्यान से देखने लगा.

उसने मेरी चूत में उंगली और हाथ रख कर कहा- चाचा ऐसी गुलाबी मस्त चूत मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी.. जैसी संध्या की चूत है. साली की चूत बिल्कुल मक्खन हो रखी है. सच में चाचा तुमने क्या माल पटाया है. चाचा, आज आपने तो हम दोनों की किस्मत बना दी, मैं तो कहूंगा कि संध्या को आप अपनी परमानेंट अपनी रखैल बना लो, इसकी मम्मी का चक्कर छोड़ो, जो करना है इसी के लिए किया करो. पैसे कपड़े और भी सामान संध्या को ही सीधे दिया करो. अब इसकी मम्मी को रहने दो, वो खटारा हो चुकी है. संध्या, तुम चाचा की रखैल बन जाओ, मालामाल हो जाओगी.

ऐसा कहते हुए दिनेश मेरी चूत को बहुत जोर जोर से चाटने लगा. जैसे ही दिनेश ने मेरी चूत में अपनी जीभ को डाला, मुझे जाने कैसा सुरूर होने लगा कि मैं इतना उत्तेजित होने लगी कि बता नहीं सकती. मैं अपने आप अपनी कमर को उछालने लगी और मनोहर का लंड पूरा का पूरा मुँह में अन्दर-बाहर करने लगी.

चाचा बोले- संध्या, मैं तेरी मम्मी को बहुत चोदता हूं, ये बात मुहल्ले और गांव में सबको पता है कि तेरी मम्मी मेरी रखैल की तरह है. पर तेरी मम्मी के और भी यार हैं, सब पैसे वालों को तेरी मम्मी फंसा के रखती है. आज से जैसा दिनेश बोलता है, तू वैसा ही कर ले, तू मेरी रंडी और रखैल बन जा, तेरा पूरा खर्चा मैं उठाऊंगा. पढ़ाई से लेकर हर बात का तेरे पहनने, घूमने तुझे खर्च के लिए पैसे भी दूंगा. तुझे बहुत मजा आएगा, तुम देखना हम तीनों मिलकर तुम्हें जन्नत का मजा हमेशा देते रहेंगे और मैं तुझे अलग-अलग एक से एक कड़क लंड दिलवाता रहूंगा. तुम उन नए लड़कों को भूल जाओगी, जिनसे अभी चिपकी थी. ये नये लड़के किसी काम के नहीं होते, फ्री में चोदना जानते हैं बस. कभी तुम्हें कुछ काम पड़ जाए, तो ये दूर भाग जाते हैं, जैसे अभी भाग गए थे. उस वक्त सिर्फ हम लोग ही काम आएंगे.

मैं फुल पागल हो रही थी क्योंकि मुँह में मनोहर का लंड पूरा घुसा था, दिनेश चूत बेहद गंदे तरीके से चाटने में लगा था, चाचा मेरी गांड को फैलाए चाटे जा रहे थे.

मैंने मनोहर का लंड मुँह से निकाला और चाचा से बोली- चाचा जो भी आप मम्मी को, मेरे लिए देते हो और जैसा आपका मम्मी से रिश्ता है, उसे देते रहना.. और वैसा ही रिश्ता मम्मी से बनाए रखना. मैं अपनी मम्मी को बहुत मानती हूं, मेरे हिस्से का भी सब मम्मी को ही दे दिया करना. मेरे और आप लोगों के बीच का ये रिलेशन किसी को भी पता नहीं लगना चाहिए. सच में आप तीनों बहुत मस्त हो, मुझे जाने कैसा लग रहा है.. मुझे अब होश नहीं है. बहुत अलग तरह का मजा आ रहा है, बस चोरी से चुपके चुपके कैसे भी मुझे ऐसा ही आप तीनों रोज ऐसे ही मुझे जमकर चोदना, चूमना और चाटना. चाचा अब कुछ ऐसा करो कि मेरे शरीर की ये जलन ये आग बुझ जाए. मैं बहुत ही छोटी हूं, ये रखैल क्या होती है, ये सब नहीं जानती हूं. अभी बस सेक्स कहानियों में चुदाई की मस्ती को पढ़ा है.. रंडी और रखैल के बारे में पर जो भी हो, ये मुझे आप तीनों जल्दी से जमकर कुछ करो. आज से मैं आप लोगों की रंडी भी हूं और रखैल भी बन गई हूँ.. जो भी बोलो वो सब हो गई हूँ.

तभी मनोहर बोला- संध्या तू तो बहुत मस्त है.. साली इतनी छोटी उम्र में तू रंडी और रखैल बन गई. आगे तो तू सबको बेहाल कर देगी, मेरे दो मजदूर भाई हैं.. उनके लंड बहुत लम्बे चौड़े हैं. उनसे तुझे एक बार जरूर चुदवाऊंगा. वो दोनों आधे आधे घंटे तक लगातार चोदते हैं. उनका लौड़ा मेरे हाथ के बराबर मोटा और लम्बा लौड़ा है. उनसे चुदाई कर चुकी सब औरतें कहती हैं कि वो दोनों इंसान नहीं, जानवर हैं.. औरतें और लड़कियां उनसे चुदने को तरसती हैं.

मैं पागल हुए जा रही थी, मुझे होश नहीं था. मैं बोली- मनोहर, अभी बुला उन दोनों को.. मुझे उनसे अभी चुदवा दो, मुझसे रहा नहीं जा रहा.. बुलाओ अभी.चाचा बोले- मनोहर, ये संध्या पागल हो चुकी है.. इसकी बातों में मत आना. अभी उन दोनों को नहीं बुलाया जा सकता है संध्या.. अभी तो आज हम तीनों ही तेरे चूत और गांड की खुजली मिटायेंगे और देख हम तीनों ही तुझे जन्नत से भी ज्यादा मजा अभी दिए देते हैं.

ऐसा कहकर चाचा ने पीछे मेरी गांड के छेद के लिए मेरे दोनों कूल्हों को फैला दिया और गांड में उंगली धीरे धीरे चलाने लगे.. साथ ही वे मेरी पीठ को अपने होंठों से चूमते रहे.

तभी दिनेश अपनी दो उंगली मेरी चूत में डालने लगा और धीरे से अन्दर घुसा दिया. जैसे ही चूत में दिनेश की उंगली घुसी. मैंने फिर से मनोहर का लौड़ा पूरा पकड़ कर खींच लिया और मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी.

 
दिनेश इतनी जोर से चूत में उंगली चलाने लगा कि मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था. इसलिए मनोहर का पूरा लंड अपने दांतों से काटने लगी, चूसने लगी.मनोहर बोला- अरे चाचा यह तो पागल हो गई.. मेरा लंड लगता है, खा ही लेगी.

चाचा बोले- हां बिल्कुल सही बोल रहा है तू.. आज इसको संभालना मुश्किल होगा. तुम इस चुसाई को दिक्कत मत मानो.. इसको लंड चूसने दो, खाने दो. इस दिनेश ने संध्या को पागल कर दिया है.. देखो कितना जोर जोर से चूत में दो दो उंगलियां डाले अन्दर बाहर चला रहा है. साथ में चूत भी चाटते जा रहा है. अरे संध्या नई लड़की है, पागल नहीं होगी तो क्या होगी. उसमें भी कोई कोई लड़की के अन्दर बहुत ज्यादा सेक्स की इच्छा होती है, उन लड़कियों में से है ये संध्या.

दिनेश के द्वारा मेरी चूत में उंगली करने और चूत चूसने से मैं जोर जोर से हांफने लगी, मेरी सांसें तेज होने लगीं.

चाचा बोले- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा और मैं संध्या की गांड में लंड डाल रहा हूं.उन्होंने मेरे कूल्हों को फैला कर गांड को चाटना शुरू किया. मुझे बहुत गुदगुदी होने लगी. अब चाचा ने अपना लंड निकाल कर मेरी गांड पर रखा.चाचा ने बोला- संध्या, देखना मैं तेरी गांड में डाल रहा हूं.

उन्होंने पीछे से मेरे बाल पकड़ कर अपना लौड़ा मेरी गांड में सैट किया. जैसे ही चाचा का लंड मेरी गांड के छेद में टच हुआ, मुझे बहुत अजीब सी फीलिंग हुई. मन में लगा कि सीधे अन्दर घुसा दें, पर मैं यह बोल नहीं पाई.

परन्तु चाचा ने जैसे मेरे अन्दर की आवाज को सुन लिया हो, वो मुझसे बोले- बहुत ही मस्त माल है तू संध्या.. और तेरी गांड का तो कहना ही क्या, अब मैं तेरी गांड को चोदने जा रहा हूं.

यह कहते हुए मेरी गांड में अपना लौड़ा घुसाने लगे. जैसे ही अन्दर लंड गांड में घुसने लगा, इतना तेज दर्द शुरू हुआ कि असहनीय.. मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती.मैं बोली- चाचा बहुत दर्द हो रहा है.. बाहर निकाल लो अपना लंड.. मुझे नहीं करवाना.

पर चाचा ने मेरी एक नहीं सुनी और अपने लंड का दूसरा झटका बहुत तेजी से मेरी गांड में मारा.. और इस झटके में उन्होंने अपना आधा लौड़ा घुसेड़ दिया. इधर मनोहर ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया, जिससे मेरी आवाज़ अब निकल नहीं पा रही थी.

परन्तु मेरी गांड में मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लंड मेरे मुँह में था तो मेरी आवाज भी नहीं निकल पा रही थी.

चाचा मेरे दूध मसलते हुए बोले- तुम लोग ऐसे में बहुत टाइम लगाओगे, संध्या पागल हो रही है.

चाचा मेरी गांड में अपना लंड जोर से घुसा रहे थे, पर अब तक वे आधा ही लंड घुसा सके थे. मैं दर्द के मारे मनोहर से लिपट गई और जोर से रोने लगी. मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे. मेरी गांड में चाचा के लंड घुसने पर बहुत दर्द हुआ था. चाचा ने मेरी कमर पकड़ी और मुझसे लिपटे रहे. पर मेरे दर्द को देखते हुए उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड से थोड़ी देर के लिए बाहर निकाल लिया.

अब चाचा ने मनोहर को बोला कि तू संध्या की चूत में अपना लंड डाल.. क्योंकि तेरा लौड़ा बहुत बड़ा है और हर लड़की बड़े लंड से ही चुदाई करवानी पंसद करती है.फिर चाचा दिनेश को बोले- तू दिनेश संध्या के मुँह में अपना लौड़ा डाल देना ताकि ये चीख न पाए.

यह कहकर चाचा ने एक बार फिर अपना लंड जोर से मेरी गांड में घुसेड़ दिया. मैं फिर से दर्द से तड़पने लगी.

चाचा बोले- दिनेश तू सामने की तरफ है, इसलिए संध्या के दूध को कस कर दबा और मसल कर चूस.

तभी दिनेश उठा और अपना मुँह मेरी चूत से हटा कर मेरे दोनों मम्मों को पकड़ कर मसलने लगा. वो अपने दोनों हाथों से और बहुत मस्त तरीके से मेरे मम्मों को दबाने लगा. उसने मेरे बाएं चूचे को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.

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साथ बने रहने के लिये बहुत धन्यवाद दोस्तो

 
अब तक इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा कि चाचा ने मेरी गांड में अपना लंड घुसेड़ रखा था और मनोहर ने मेरे मुँह में अपना लंड ठूंस रखा था. नीचे मेरी चुत को दिनेश चाटने में लगा था.

अब आगे..

अब मनोहर ने मेरे मुँह से अपना लंड निकाला, मुँह से लंड निकलते ही मैं चीखने लगी, रोने लगी, बोलने लगी कि चाचा छोड़ दो मुझे, मुझे नहीं करवाना बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा.

तभी चाचा बोले- अरे मेरी जान संध्या, अभी तो आधा ही घुसा है.. देख तुझे कितना मजा आने वाला है, रो मत थोड़ा सब्र रख.. बस थोड़ी ही देर में तू बहुत इंज्वाय करेगी. आज तेरी मस्त चुदाई करने वाला हूं.. तू अभी से घबरा मत. देख हम तीनों मिलकर कैसे तेरी चुदाई करते हैं, तुम खुद थोड़ी देर बाद हम तीनों से बोलेगी कि फाड़ दो मेरी चूत और गांड. बस पांच सात मिनट थोड़ा दर्द सह ले.

मनोहर ने मेरे पैरों तरफ आकर मेरे पैर के तलवे चाटना शुरू कर दिया. मुझे गुदगुदी होने लगी. फिर मेरे पैर के अंगूठे चूसने लगा. एक अलग ही तरह से मनोहर मुझे प्यार करने लगा. मेरी टांगों को अपने जीभ से नीचे से ऊपर की ओर चाटने लगा. मुझे सच में बहुत अच्छा महसूस होने लगा. मुझे गांड में फंसे चाचा के लंड का दर्द महसूस नहीं हो रहा था. अब मनोहर मेरी जांघों के पास चाटने लगा. जैसे ही मनोहर की जीभ मेरी जांघों में चलने लगी, मैं पूरी की पूरी मदहोश होने लगी.

अब मनोहर मेरी चूत के पास जो हल्के हल्के बाल थे, उनको सहलाने लगा और उसने मेरी चूत में अपना मुँह रख दिया और नाक से अपने चूत को मेरी सूंघने लगा. वो बोला- संध्या, तेरे चूत की क्या मदमस्त करने वाली खुशबू है.. लगता है बस तेरी चूत की उंहहहह ओह सुगंध को सारी उम्र लेता रहूं.

इसके बाद मनोहर ने अपनी जीभ से पहले चूत के पास जो बाल थे, उन्हें चाटा और फिर मेरी दोनों टांगों को चौड़ा किया. जैसे ही मेरी चूत खुली देखी, वो बोला- संध्या, तू मुझसे शादी कर ले, मैं अपनी बीवी को छोड़ दूंगा और तेरी चूत को सारी उम्र देखकर, चाटकर गुजार दूंगा, मैंने आज तक तेरी जैसी खूबसूरत गुलाबी चूत नहीं देखी.

उसकी बातें सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा, पर मैं कुछ नहीं बोली. इसके बाद मनोहर ने अपने कंधे पर मेरी एक टांग उठा कर रख लिया और मेरी चूत को अपने जीभ से इतनी जोर जोर से चाटने लगा कि मैं अब खुद को नहीं सम्हाल पाई. इस वक्त चाचा का लंड मेरी गांड में घुसा हुआ था.

मैं दिनेश को, जो मेरे सामने था उसे पकड़ने लगी और उसको बोली- दिनेश कुछ करो.. मुझसे रहा नहीं जा रहा है.. प्लीज कुछ करो.

मैं दिनेश से लिपट कर दिनेश के होंठों को जमकर चूसने लगी. दिनेश ने भी मेरे होंठों को बहुत दबाकर चूसा. उसने मेरा मुँह खोलकर जीभ को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगा. मैं बता नहीं सकती कि उस समय मेरा क्या हाल था.

नीचे मनोहर ऐसे रगड़ कर चूत को चाट रहा था और खा रहा था कि बस पूछो मत. ऊपर दिनेश ने अब मेरे एक दूध को पकड़कर इतने जोर से दबा दिया कि मेरी चीख निकल गई. वो उस दूध को और जोर से मसलने लगा.

मेरे होंठों को छोड़ कर दिनेश बोला कि चाचा अब संध्या बहुत ज्यादा चुदासी हो गई है.. और गर्म करना ठीक नहीं है. इसे अब चोदना शुरू करो.चाचा बोले- तू ठीक कह रहा है दिनेश.. ये संध्या चुदाई के लिए पागल हो रही है. इसकी चूत, गांड और मुँह में एक साथ लंड घुसाना है, जिससे इसे आज एक नया अहसास चुदाई का हो.

मुझसे चाचा ने कहा- संध्या बोल.. सारे छेद एक साथ चोदें कि नहीं?मैं बोली- मुझे कुछ नहीं पता चाचा जो मन हो करो.. पर ये मेरी आग को मेरी तड़प को खत्म करो.. इसे मिटाओ.चाचा बोले कि ठीक है, एक साथ तीनों छेदों में लंड डालेंगे.. सह लोगी?मैं फिर से बोली- चाचा मुझे कुछ नहीं पता.. जो भी करना है, बस जल्दी करो.. मुझसे रहा नहीं जा रहा है.

चाचा ने मनोहर को बोला- तुझे संध्या से शादी करना है ना.. चल चूत में लंड डाल और ऐसा चोद कि तेरे अलावा संध्या को किसी का लंड पसंद ही नहीं आए. दिखा दे अपनी मर्दानगी.मनोहर बोला- चाचा संध्या की चूत को जबरदस्त चोदूंगा, चाहे फट क्यों न जाए.

अब मनोहर ने मेरी दोनों टांगों को पूरा फैलाकर अपने कंधे पर चढ़ा लिया और अपने मोटे लम्बे लंड को मेरी चूत में टच कराया.. मतलब मेरी चूत के मुहाने पर मनोहर का लंड रख गया.मुझे ऐसा लगा कि बिना देर किए मनोहर लंड को सीधा घुसा दे.

मनोहर बोला- संध्या, तेरी चूत बहुत चुदासी है और मेरा लौड़ा भी पागल हो रहा है, अब मैं तेरी चूत में लंड घुसा रहा हूं.

उसने तुरंत मेरी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया, मेरी चूत बहने लगी थी मतलब बहुत गीली हो चुकी थी. तो मनोहर के लंड का टोपा तो आराम से घुस गया.

 
तभी मनोहर ने बोला कि चाचा ये संध्या तो बहुत बड़ी छिनाल है.. साली इतनी छोटी उम्र में न जाने कितने बड़े बड़े लंड से चुदवा चुकी है कि मेरा लंड आराम से घुस रहा है.जबकि मनोहर का लौड़ा चूत की चिकनाहट के कारण घुसा था.

चाचा बोले कि मनोहर इसकी मां भी तो रंडी ही है, बनती बड़ी सती सावित्री है पर पैसे लेकर चुदवाती है, वैसी ही संध्या होगी. अभी जब मैं आया था तब दो कम उम्र के लड़के अपने ऊपर चढ़ाए हुए थी.

मैं बोली- चाचा, सच बताओ मम्मी पैसे लेकर करवाती है क्या?चाचा बोले- हां संध्या तेरी मम्मी को तो कई बार तो मैंने पैसे देकर चोदा है. साली छिनाल एक बार तो बोली थी कि मुझे पांच हजार चाहिए, कैसे भी एक घंटे के अन्दर ला कर दो. मैं बोला खेत में हूं, हम चार पांच लोग हैं. तो बोली मैं खेत आती हूं. मैं बोला कि सब चोदेंगे, तो तेरी मम्मी बोली हाँ ठीक है, पर मुझे पैसे अभी चाहिए. वो साली चुत चुदवाने खेत पर ही आ गई. तब हम तक वहां छह लोग हो चुके थे, तेरी मम्मी सभी छह लोगों से एक साथ जमके चुदवाई और पांच हजार रुपए लिए और आ गई. वो कई लोगों से जुड़ी है, बहुत बड़ी रंडी है तेरी मम्मी. तू भी तो धमाल है संध्या तेरे को मैं मजे भी दिलाऊंगा और पैसे भी कमवाऊंगा.

मैं अभी कुछ कहती कि चाचा ने मनोहर से कहा- मनोहर एक झटके में डाल पूरा लंड संध्या की चूत में.. निकाल इसकी चीख.. अगर मर्द लड़की की चीख ना निकाले तो वो मर्द ही कैसा.. भले ही लड़की छिनाल हो, इधर मैं भी संध्या की गांड में अपना पूरा लौड़ा घुसा रहा हूं.

इतना बोल कर चाचा ने अपना लंड लगाया, उधर मनोहर ने अपना लौड़ा पूरा एक झटके में पूरी ताकत से मेरी चूत में पेल दिया. मेरी चूत को चीरता हुआ मनोहर का लंड घुस गया. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं मर गई और मेरी चूत फट गई.. पर मैं बहुत जोर से चिल्लाई कि बचाओ मनोहर ने मेरी चूत फाड़ दी.

जैसे ही चीखी दिनेश ने मेरा मुँह पकड़ लिया और अपने हाथ से मेरा मुँह दबा दिया. इससे मेरी आवाज़ अब बन्द हो गई, मुझे लगा कि दर्द से मेरी जान निकल जाएगी.

मैं बहुत जोर से झटका देकर बोली- मुझे छोड़ दो मुझे नहीं करना, मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा तुम लोग बहुत कमीने हो.. बहुत घटिया हो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज छोड़ दो, भगवान के लिए छोड़ दो.

जोर जोर से रोने लगी मैं, उन तीनों से गिड़गिड़ाने लगी, पर उन तीनों ने छोड़ा नहीं बल्कि मनोहर ने और जोर से मेरे अन्दर लंड डाल दिया. फिर अन्दर बाहर करने लगा.मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रोने लगी कि मुझे छोड़ दो मुझे नहीं करवाना, मुझे जाने दो, मैं मर जाऊंगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज छोड़ दो मुझे मत चोदो.. मुझे नहीं चुदवाना.

तभी चाचा बोले- माँ की लौड़ी… कमीनी चिल्ला मत.. भोसड़ी वाली शोर करेगी तो पूरा कस्बा यहां इकट्ठा हो जाएगा और फिर सारे के सारे तुझे चोदेंगे. तेरे जैसे माल को कोई छुड़ाने वाला नहीं और न ही कोई छोड़ने वाला.. समझी, संध्या तू इतना चुदवा चुकी होगी, फिर भी तुझे दर्द है.. साली नाटक मत कर आवाज मत निकालना. मैं अभी तेरी गांड में अपना लंड डालता हूं.

यह कहकर चाचा जोर से एक झटके में मेरी गांड में अपना पूरा लंड घुसाने लगे. जब नहीं घुस रहा था तो चाचा ने मेरे बाल पकड़ कर पूरी ताकत से अपना लंड मेरी गांड के अन्दर पेल कर घुसा दिया.

मैं बहुत जोर से चीखी बहुत जोर से चिल्लाई- बचाओ मुझे मार डाला और रोने लगी, मम्मी बचा लो, हे भगवान मुझे बचा लो मर जाऊंगी मुझे नहीं करवाना मुझे मत चोदो.ऐसा मैं बहुत चिल्ला रही थी, पर दोनों तब तक अपना लंड अन्दर डाल चुके थे.

दिनेश बोला- अबे मनोहर, तूने सच में संध्या की चूत फाड़ दी. देख संध्या की चूत से खून बह चला, कहीं ये सील पैक तो नहीं थी संध्या? देख जरा मनोहर और बता.मनोहर बोला- अरे दिनेश भाई, ये छिनाल की लड़की है.. कभी सील पैक होगी, अभी हम लोगों को चोदने को इसलिए मिली है, क्यों कि चाचा खुद संध्या को दो लड़कों से चुदाई करते पा चुके हैं. न जाने ये संध्या कितने लंड खा चुकी होगी, पर फिर भी देखता हूं.

मनोहर ने अपना आधा लंड चूत से निकाला और मेरी चूत खोल कर देख कर अपनी उंगली मेरी चूत में डाल कर बोला कि हां थोड़ा बहुत खून निकला है क्योंकि ये संध्या नई लड़की है, कम उम्र की है और वो मर्द ही कैसा, जो लड़की की चूत से खून ना निकाले.. और वो लंड भी किस काम का जो इतनी छोटी उम्र की लड़की की चूत ना फाड़े.. और यह संध्या तो एक नंबर की रंडी है.फिर से मनोहर मेरे बालों को पकड़ कर जोर से जितनी ताकत थी, उस पूरी ताकत से मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया.

वो मेरे होंठों को चूसने लगा और बोला- ले साली कुतिया संध्या, बहुत चिल्ला रही है और चिल्ला और रो मादरचोदी संध्या, क्या माल है तू, इतनी टाइट चूत तो एक सील पैक लड़की की नहीं होती है.

वो इतनी गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था. जो भी उसके मन में आ रहा था, वो सब मनोहर बोलते हुए मेरी चूत को ताकत के साथ चोदने लगा.

मनोहर बोला- दिनेश, तू संध्या के मुँह में अपना लौड़ा डाल के मुँह की जबरदस्त चुदाई कर.इतना सुनते ही तुरंत दिनेश अपना लंड मेरे मुँह के पास करके मेरे होंठों में अपना लंड रगड़ने लगा और घुसाने लगा.

मैं कराहते हुए बोली- नहीं मैं नहीं चूसूंगी लंड.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज दिनेश मुझे छोड़ दो, मैं तेरे पैर पड़ती हूं मुझे इस हरामी चाचा और मनोहर से बचा लो, ये दोनों मुझे आज चोद कर मार डालेंगे.. दर्द के मारे मुझसे रहा नहीं जाता, बचा लो दिनेश.

मैं रोने लगी मेरे आंसू लगातार बह रहे थे, बहुत दर्द हो रहा था. पर चाचा मेरी गांड में अपना लंड डाल कर जोर जोर से चोद रहे थे. चाचा मेरी गांड में अब अपने मोटे लंड को अन्दर बाहर करने लगे.

चाचा मेरे दूध दबाते हुए बोले- मनोहर तू ऐसा कर कि संध्या की चूत में अपना लंड पूरा अन्दर घुसा कर थोड़ी देर फंसाए रख, अन्दर बाहर मत करना. यही मैं इसके गांड में करता हूं. देखना संध्या का दर्द पांच मिनट के अन्दर गायब हो जाएगा.

मनोहर ने अपना लंड मेरी चूत में पूरा अन्दर करके उसे वहीं रोक दिया और चाचा ने भी अपना लौड़ा गांड में पूरा अन्दर डाल कर मुझसे लिपट गए और मेरी पीठ और गर्दन को पीछे से चूमने और चाटने लगे.

इधर मनोहर मेरे मम्मों को मसलने लगा हाथों से दबाने लगा और फिर मेरे दूध चूसने लगा. इतने में ही पता नहीं क्या इसमें जादू हुआ कि मेरा पूरा दर्द गायब होने लगा और धीरे-धीरे चूत और गांड दोनों जगह अजीब सी गुदगुदी लगने लगी.

अब मेरा हाथ अपने आप ही दिनेश के लंड पर चला गया और दिनेश का लंड हाथों में पकड़ा, उससे पहले अपने आंसू पोंछे, अपने आप दिनेश का लंड हाथ से रगड़ने लगी और अपने मुँह तरफ खींचने लगी.

तभी चाचा बोले- देखो यह संध्या का दर्द गायब हो गया है, अब मनोहर संध्या की चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करो और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाना. तब देखना संध्या को हम तीनों की मर्दानगी संध्या की चुदाई में फेल हो जाएगी. ये साली इतना चुदवाएगी कि हम सब फेल हो जाएंगे.मनोहर बोला- मैं नहीं फेल होऊंगा चाचा. चाचा बोले- चल दिखा दे.. फिर बात कर.

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कहानी जारी रहेगी

 
अब तक की इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा कि चाचा और मनोहर दोनों मेरी गांड और चुत में लंड घुस्से हुए मुझे धकापेल चोद रहे थे.अब आगे..

मनोहर ने अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू किया, उधर चाचा भी मेरी गांड में अपना लंड जड़ तक घुसा दे रहे थे. फिर उसे पूरा अन्दर डाल के बाहर निकाल लेते.

मुझे बहुत अजीब सी सुरसुराहट हो रही थी. अब सारा का सारा दर्द पता नहीं कहां चला गया. ऐसी सेक्सी गुदगुदी महसूस होने लगी कि मुझे कुछ होश नहीं रहा कि मैं कहां हूं.दो-तीन मिनट बाद मैं अपनी कमर उछालने लगी, पता नहीं दर्द कहां गायब हो गया, मुझे खुद समझ नहीं आया.

मैं चाचा को बोली- चाचा मुझे कुछ होने लगा है.. बहुत सुरसुरी गुदगुदाहट हो रही है.. आपने यह क्या करवाया मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. आह चाचा कुछ करिये ऐसा कि मैं नार्मल हो जाऊं.. आप तीनों को जो भी करना है, जल्दी करो मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा है. मेरे बदन को मसल दो. अब मैं पागल हो रही हूं चाचा, क्या बताऊं कैसे बताऊं कैसा फील हो रहा है अब, आज के पहले कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ, पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं बहुत चिल्ला कर गंदी बातें गंदी गालियां दूं और मुझे अब कुछ लिहाज नहीं है, तुम तीनों बुरा नहीं मानना.. मैं पागल हो रही हूं.

चाचा बोले- संध्या, इसी आनन्द के बेपनाह मजे के लिए तो लड़की चुदाई करवाती है और मर्द इसी पागलपन के लिए चोदते हैं. अब तू सब भूल जा संध्या और बिल्कुल बाजारू रांड हो जा, जितनी गंदी गालियां, गंदी बातें बोल सकती है, खुलकर बोल.. उसी में तुझे आज जन्नत मिलेगी. बिल्कुल जानवर बन जा संध्या बहुत मजा आएगा, तुझे भी हम तीनों को भी. हम तीनों भी बस तुझे चोदते हुए पागल ही हो रहे हैं.. तू भी हम तीनों की किसी बात का बुरा मत मानना.

मैं बोली- नहीं, मैं भी बुरा नहीं मानूंगी मुझे जो भी बोलना है बोलो.. और जो करना है, जैसे भी करना है, करो. अब मुझसे रहा नहीं जाता.तभी चाचा बोले- साली संध्या, तू बहुत बड़ी रंडी है.. तुझे आज हम तीनों बहुत चोदेंगे अपनी रखैल बना लेंगे.. बता बनेगी हमारी रखैल?मैं बोली- हां चाचा, बनूंगी तुम्हारी रखैल आज से अभी से.. मेरे अन्दर बहुत जलन हो रही है.

चाचा पूछने लगे- कहां जलन हो रही है?मैं बोली- चूत और गांड दोनों जगह हो रही है.मनोहर लंड ठेलते हुए बोला- अब नहीं होगी मेरी जान.

वो मेरे बाल पकड़ कर अपने लंड से जोर जोर से धक्के चूत में मारने लगा. मैं जोर-जोर से आवाज करने लगी ‘ऊंहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… वोहहहह…’मैं बोली- मनोहर और अन्दर लंड डाल कुत्ते भड़वे.. और घुसा जोर से बहुत मस्त चोदता है.तभी दिनेश अपना लंड पकड़ के मेरे मुँह में डाल कर बोला- तुझे चुदते देख कर संध्या मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. ले मेरा लौड़ा खड़ा है, इसे चाट और चूस.

ऐसा कह के मेरे मुँह में पूरा अन्दर डाल के गले तक उतार दिया. मुझे खांसी आने लगी. तब थोड़ा बाहर निकाला और फिर अन्दर बाहर करके मेरे मुँह को दिनेश चोदने लगा.

उधर मैंने थोड़ी गांड को पीछे किया तो चाचा जोर-जोर से गांड में मेरे लंड डालकर थूक लगाकर गांड में चोदने लगे.

अब मेरे गांड में और चूत में पूरा अन्दर तक लंड घुसा रहे थे. मैं मनोहर को पकड़ कर और अपनी बांहों में जकड़ कर उससे बोली- आह मस्त चोदता है तू.. मैं तुझसे ही चुदवाऊंगी, तू भले ही किसी भी जाति का रहे, मैं तेरी रखैल बन जाऊंगी बस कुतिया की तरह मुझे जमके चोद मनोहर साले हरामी.

मैं चाचा को भी बोली- चाचा, अभी से मैं तेरी रखैल बन गई.. जमके और चोद मुझे मेरी गांड को आज अपने लंड की गुलाम बना दे.. ऊंहहह मेरे चाचा जोर जोर से धक्का लगा.

अब मेरे तीनों तरफ लंड घुस चुके थे. दिनेश मेरे मुँह के अन्दर लंड डाल कर बहुत तेजी से अन्दर बाहर कर रहा था और जमके मेरे मुँह को चोद रहा था. पीछे चाचा मेरी कमर को कस के पकड़ कर गांड में लौड़ा डाले जमके अन्दर बाहर कर रहे थे. जैसे ही चाचा अन्दर बाहर करते, मुझे बहुत मजा आने लगता था.

मुझे कुछ होश नहीं रहा, तभी मनोहर पूरी ताकत से अपना लंड मेरी चूत में घुसा के अन्दर बाहर करने लगा और बोला- संध्या, तू आज से मेरी बीवी है और मैं तुझे रोज चोदूंगा ऐसे ही साली मादरचोदी कुतिया संध्या, तू बहुत बड़ी रंडी है, तुझे चोद चोद के मैं सब तरह से रंडी बना दूंगा. बता चलेगी मेरे साथ, जहां मैं बोलूंगा, ऐसे ऐसे लंड से चुदवाऊंगा कि तेरी लाइफ में कभी सोच नहीं सकती, वो सभी फौलादी मर्द होंगे.

 
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