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मेरी कमसिन भांजी और बेटी 2

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दोस्तो इस कहानी का पहला भाग ज़रूर पढ़ें मेरी कमसिन भांजी और बेटी 1


मैं और मेरी भानजी मेरी बेटी के स्कूल में गए और उसके प्रिन्सिपल से मिल कर कोई बहान बना कर उस की छुटटी ले ली. फिर उसे ले कर हम बाजार गए और कुछ खाने पीने का सामान ले कर पार्क में आ गए और एक एकांत जगह सी बैठ गए.

कुछ देर हमने इधर उधर की बातें की. तभी हमने देखा कि हमारी बायीं तरफ में एक जवान लड़का और एक युवा लड़की चुम्मा चाटी कर रहे थे. दोनों कॉलेज के स्टूडेंट लग रहे थे, बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड होंगे. लड़का लड़की के बदन को भी बीच बीच में छू रहा था.

मेरी कमसिन बेटी रेखा की नज़र बार बार उधर ही जा रही थी. पिंकी ने रेखा को उस तरफ देखते हुए देखा तो वो भी मुड़ कर देखने लगी और फिर मुस्कुरा कर रेखा से बोली- क्यों रेखा? क्या देख रही हो?

“कुछ नहीं..”

“अरे यार… जवानी का खेल चल रहा है! मजा आ रहा है तो जाओ नजदीक से देख आओ..”

रेखा शायद मुझसे कुछ शर्मा रही थी, इसा लिए बोली- मुझे नहीं देखना, तुम ही देख लो जो देखना है…”

“हुंह… अभी बड़ी नखरे दिखा रही है. कल तो बड़ा मजा ले ले कर सेक्स की बातें कर रही थी?”

पिंकी के चेहरे पर कामुकता के नशे का गुलाबी रंग छा गया. वो उठ कर मेरी बेटी रेखा के बगल में बैठ गई और उसके कंधे पर हाथ रख कर रेखा की उठी हुई चूची मसलते हुए बोली- यार तेरी चूचियां तो हार्ड हो चुकी हैं तुम्हारी. तुम्हारी बुर भी पानी छोड़ रही होगी ना?

अपनी भानजी के मुख से मेरी बेटी के सामने ऎसी खुली अश्लील बातें सुन कर मुझे विश्वास हो गया था कि पिन्की तो आज ही मुझे मेरी बेटी की बुर दिलवा देगी.

लेकिन रेखा झिझकती हुई बोली- पिंकी, क्या करती हो? पापा देख रहे हैं!

पिंकी बोली- अब मैं क्या करूँगी, जिसे करना है वो ही करेगा. जाओ, अपने पापा की गोद में बैठ जाओ.

और उसने रेखा को खींचते हुए मेरी गोद में बैठा दिया.

उसके गोद में बैठते ही मेरा लंड झन्ना गया. रेखा पहले तो थोड़ी झिझकी और मेरी गॉड से उठाने लगी, लेकिन पिंकी ने उसे उठाने नहीं दिया, बोली- कल तो तू अपने पापा से सेक्स की बातें कर रही थी, अब मैं मौक़ा ड़े रही हूँ तो तू ये नौटंकी कर रही है?

इतनी देर में मैं अपनी बेटी की स्कर्ट में हाथ देकर उसकी जांघें सहलाने लगा. क्या चिकनी टांगें थीं. उसके बाद मैंने उसकी चूचियों को सहलाया. उसकी चूचियां पिंकी से छोटी थीं. उसके बाद मैंने अपने होंठ उसके होंठ से लगा दिए और उसकी गुलाब की पंखुरियों जैसे होंठों का रस पीने लगा.

इसमें वो भी मेरा साथ देने लगी.

हम दोनों लिपट गए. पन्द्रह मिनट तक चूमते चाटते रहे फिर दोनों अलग हुए.

अब पिंकी ने कहा- सारा कांड अभी ही कर दोगे या घर के लिए भी कुछ रखोगे?

मैं मुस्कुरा उठा.

पिंकी ने रेखा की ओर देख कर कहा- क्यों रेखा डार्लिंग! मजा आ रहा है न? तुम तो साली पूरी रंडी निकली? अपने सगे बाप से चूची मसलवा कर मज़े ले रही हो?

“तूने तो मज़े ले लिए मेरे बाप से यानि अपने मामा से और दूसरे को चिढ़ाती है.”

“मैं अपने पापा के साथ जो चाहे करूँ तुम्हें क्यों खुजली हो रही है? तू भी ले ले मजे.”
 
पिंकी- मेरी बुर सूज गई न होती तो मैं यहीं चुदवा लेती. आज तू खा ले इनका केला. तू ही अपने निम्बू चुसवा ले मामा से!

मैं- यार तुम दोनों लड़ो मत. मैं दोनों को मजे दूंगा… अब घर चलो.

फिर हम तीनों लोग मजा करते हुए घर आए.

दिन तो यूं ही निकल गया. रात को फिर मैंने अपनी बीवी के खाने में नींद की गोली मिला दी. जब सब सो गए तब मैं उन दोनों के रूम में आ गया. दोनों जागी हुई थीं और मेरे आने का इंतजार कर रही थीं. जाते ही मैंने दोनों को किस किया, अपनी बेटी रेखा को कहा कि कपड़े उतार कर आए. मैं उसका नंगा बदन देखना चाहता हूँ.

रेखा शर्माने लगी तो पिंकी ने उसके सारे कपड़े उतारे और कहा- साली, लंड लेने में शर्म नहीं करेगी तो नंगी होने में क्या शर्म? जिसके लंड के वीर्य से पैदा हुई, उसी से शर्म? न जाने कितनी बार इन्होंने तुम्हारी बुर को देखा होगा. अब जब इनके लंड को तेरी कुँवारी बुर की जरूरत है तो नखरे करती है? अब चलो और जिस लंड से तुम पैदा हुई हो, उस लंड का पानी अपनी बुर में ले लो.

रेखा बोली- यार पिंकी, तुम क्यों इतना परेशान होती हो? मैं भी इस लंड से चुदने के लिए बेताब हूँ..

यह कह कर मेरी बेटी झट से नंगी हो गई. उस कच्ची कली का बदन देखक कर मेरे लंड में सिहरन सी दौड़ गई. दूधिया गोरा बदन, टमाटर जैसी छोटी-छोटी चूचियां, चने की दाल के बराबर निप्पल और बिना झाँटों वाली चिकनी चूत, ख़रबूज़े जैसी गांड.

मैंने उसे वैसे ही गोद में उठा लिया और बेड पर ले गया. बेड पर जाते ही मैंने उसकी चूचियां मुँह में ले लिया और चूसने लगा. रेखा के मुँह से “आह्ह्ह्ह्ह्..” की आवाज़ आने लगी. मैं अपनी हथेली से उसकी बुर रगड़ने लगा. मैं इतना जोश में था कि उसके पूरे बदन को चाटने लगा.

फिर मैंने उसे लिटा दिया और टांगें फैलाकर उसकी छोटी सी फूली हुई बुर को चाटने लगा. मुझे उसकी बुर की ख़ुशबू मदहोश कर रही थी. पांच मिनट बुर को जीभ से चोदने के बाद उसके बुर ने रस छोड़ना शुरू कर दिया, मैंने अपनी जीभ से उसकी बुर के रस को चाट-चाट कर साफ कर दिया.

उसके बाद मैं नंगा हो गया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया.

मैंने पूछा- ये ले सकोगी?

वो बोली- हाँ… क्यों नहीं… जल्दी से डालो पापा.

मैंने पिंकी को क्रीम लाने को कहा. पिंकी क्रीम ले कर आई और रेखा की बुर में लगा दी. फिर पिंकी ने मेरे लंड को चूसकर उस में भी क्रीम लगाई. फिर वो क्रीम रेखा की बुर में लगाते हुए बोली- रेखा रंडी, ले आज तेरी बुर का भोसड़ा बनाने का समय आ गया. आज की तकलीफ़ बर्दाश्त कर लो, फिर तुम्हारे मज़े ही मज़े हैं. मैं तो चली जाऊँगी इस बेटीचोद का ख्याल रखना, बड़ा मस्त चुदाई करता है. बोलो खयाल रखोगी ना?

रेखा- हाँ पिंकी, जरूर रखूंगी अपने बेटीचोद बाप का ख्याल… पहले चुदाई होने तो दो.

पिंकी बोली- हरामजादी तेरी बुर में ज्यादा आग लग रही है, चुदने को बड़ी बेताब हो रही है री कुतिया?

रेखा- चुप कर हरामजादी, खुद तो मेरे पापा से अपनी बुर चुदवा कर मज़े ले चुकी. अब मुझे तो ले लेने दे अपने बाप के लंड का स्वाद!

मैं बोला- तुम दोनों लड़ो मत, तुम दोनों को मज़े दूंगा.

पिंकी बोली- मामा, मैं इसा के साथ लड़ नहीं रही हूँ.. रेखा को ट्रेनिंग दे रही हूं. रेखा को मैं सब सिखा दूंगी.

“अब तो मुझे इस गुड़िया की बुर का मजा लेने दो.”
 
यह कह कर मैंने पिंकी को हटाया और रेखा की टाँगों के बीच आकर लंड का सुपाड़ा उसकी कुँवारी बुर में फंसा कर दबाने लगा. मेरा लंड बार-बार फ़िसल जाता था. तब मैंने पिंकी से कहा कि इसके हाथ ऊपर फैला कर पकड़ लो.

उसने वैसा ही किया. मैंने एक हाथ से उसका मुँह बंद किया और लंड के सुपारे को बुर में सही जगह फंसा कर जोरदार धक्का दे मारा.

उसें जबरन मेरा हाथ हटाया और दर्द के मारे चीखी- ऊऊऊई ईईई.. ऊऊऊ ऊउई.. मर गई… पापा… बहुत दर्द हो रहा है…. निकाल लो!

बोल कर के रेखा छटपटाने लगी. मेरे लंड का कुछ हिस्सा उस की कुँवारी बुर में चला गया था.

मैं दो मिनट तो शांत पड़ा रहा, फिर उसके मुंह पर हाथ रख कर दुबारा धक्का दिया. लगभग आधा लंड रेखा की कुँवारी कच्ची बुर के अन्दर पेवस्त हो गया. रेखा बुरी तरह छटपटा रही थी और उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे.

मैं रुक गया… इन्तजार करने लगा कि मेरी बेटी की बुर का दर्द कुछ कम हो जाए.

पिंकी उसे समझाने लगी- यार, अभी तो पहली बार है, दर्द होगा ही लेकिन कुछ ही देर में मजा आने लगेगा.

मुँह बंद होने के कारण रेखा कुछ नहीं बोल पा रही थी. मेरा लंड उसकी बुर में जकड़ा हुआ था. मैं अपने होंठ से उसकी चूचियों को चाट रहा था.

कुछ देर तक मैंने कुछ नहीं किया. जब मुझे लगा कि वो शांत है, तब मैंने हाथ उसके मुँह से हटाया तो वो रोते हुए बोली- हट जाओ पापा.. मुझे नहीं चुदाना है, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मेरी बुर फट गई है.

मैंने उसे समझाया- मत रो बेटी, पहली बार सब के साथ ऐसा ही होता है. जब मजा आएगा तो तुम्हीं बोलोगी कि और डालो पापा.

इस तरह पुचकारते फुसलाते हुए मैंने उसे शांत किया. फिर उसके होंठ चूसने लगा. जब उसने रोना बंद किया, तब मैंने लंड एकदम धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. मेरे हर दबाब के साथ वो चिहुंकने लगती थी. मैंने अपने हाथ से उसके गालों को सहलाना शुरू किया.

दस मिनट ऐसे ही करने के बाद मैंने अचानक उसका मुँह बंद किया और एक जोरदार धक्का दे मारा. गच्च से मेरा पूरा लंड उसकी बुर की सील को तोड़ता हुआ पूरा अन्दर हो गया.

वो फिर छटपटाने लगी.

पिंकी ने उसे समझाया कि अब हो गया, पूरा लंड तुम्हारी बुर में चला गया है. अब दर्द नहीं होगा.

वो फिर रोने लगी. जवान लड़की की बुर में चालीस साल का लंड जाएगा तो ऐसा ही होता है. वो भी इतनी टाइट बुर कि मुझे लगा कि मेरा लंड भी जख्मी हो गया होगा. क्योंकि मेरा लंड उसकी बुर में एकदम टाइट फंसा हुआ था.

इतना कसी हुई बुर मैंने कभी नहीं महसूस की थी. मैं वैसे ही शांत होकर उसकी ऊपर लेट गया. वो छटपटा रही थी. पिंकी उस सांत्वना दे रही थी.
 
काफी देर की मान मनौव्वल के बाद वो शांत हुई, तब मैंने अपने लंड फिर से अपनी बी की बुर में आगे पीछे करना शुरू किया. काफी देर तक धीरे धीरे लंड पेलने के बाद मैंने देखा कि उसने आँखें बंद कर लीं, तो मैंने हाथ उसके मुँह से हटाया.

पिंकी ने पूछा- रेखा, कैसा लग रहा है अब?

रेखा- अब तो कुछ कुछ ठीक है.

पिंकी- चुदाई को तेजी से किया जाए? अपनी टाँगें थोड़ा-थोड़ा पापा की कमर से लपेट लो.

बस अब मैंने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी. मेरे हर धक्के पर वो “आह्ह्ह्ह्ह्.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ईह्ह्ह्ह्ह्..” करने लगी. अब वह मादक सिसकारियां भरने लगी थी. दस मिनट में ही उसने अपनी बाँहों में मुझे कस लिया और धक्कों के साथ गांड उछाल उछाल कर मजा लेने लगी.

दोस्तो, मैंने अपनी सगी बेटी की बुर की सील तोड़ दी थी.

मैं अपनी बेटी रेखा की मस्त बुर को पेलता रहा, कुछ देर बेटी की चुदाई के बाद मैंने पिंकी को अपने पास बुलाया और पिंकी के रसीले होठों को चूसने लगा. इधर रेखा की कुंवारी बुर को चोद रहा था. अब तो मेरी बेटी रेखा भी अब गांड हिला कर चुदाई का मजा ले रही थी. उसकी दर्द व आनन्द से मिश्रित कराहें, सिसकारियाँ निकाल रही थी- उम्माह… अह… हाह.. हां… हां… ओह्ह!

अब मैं अपने मुँह में पिंकी की छोटी छोटी चुचियों को लेकर चूस रहा था. सच में क्या मस्त मजा आ रहा था, मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं रेखा की चूत में जोर-जोर से लंड पेलने लगा और साथ में पिंकी के होठों को चूसने और काटने लगा. मैं बहुत तेजी से रेखा की कुंवारी चूत चोद रहा था और उंगली से पिंकी की चूत को चोद रहा था.

कुछ ही देर में मेरे लंड से वीर्य रेखा की चूत में गिरने लगा. मेरे साथ साथ रेखा भी झड़ गई और हम दोनों शांत हो गए. पिंकी भी कुछ ही देर में झड़ कर शांत हो गई.

फिर हम लोग एक साथ नंगे ही सो गए.
 
रात के लगभग 3 बजे मुझे अपने लंड पर किसी गीली चीज का अहसास हुआ तो मेरी नींद खुल गई. मैंने देखा कि मेरी भांजी पिंकी और मेरी बेटी रेखा दोनों मेरे लंड को चूस रही हैं. मेरा लंड पूरा टाइट हो चुका है. लंड को कभी पिंकी चूस रही है तो कभी रेखा.. कभी कभी दोनों मेरे लंड को अपनी जीभ से चाट रही हैं.

मुझे जागते देख कर मेरी बेटी रेखा शरमाने लगी लेकिन पिंकी तो पूरी रंडी बन चुकी थी.

फिर मैं उठ कर खड़ा हो गया. दो मासूम कलियों को देख कर मेरा लंड झटके मार रहा था. मैंने दोनों को अपने आगे बिठा दिया और बोला- देखो कौन मेरा लंड सबसे अच्छा चूसती है.

यह कह कर मैं अपना लंड दोनों के गालों में सटाने लगा. सबसे पहले मेरी भांजी पिंकी ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी. उसकी देखा देखी रेखा ने भी मेरे लंड को उसके मुँह से छीन कर अपने मुँह में ले लिया.

इस तरह से दोनों मेरे लंड के लिए एक दूसरे से छीना झपटी कर रही थीं. कभी कभी दोनों एक साथ अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटने लगती थीं. मेरा लंड झटके पर झटके मार रहा था.

दस मिनट के लंड चूसने से मेरा लंड इतना ज्यादा गर्म हो गया था कि मन कर रहा था कि दोनों की चूत एक साथ चोदूँ. मैंने दोनों को डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा. दोनों को कुतिया की तरह झुका दिया और पीछे से दोनों को पेलने लगा. मैं अपना लंड कभी पिंकी की बुर में घुसाता, तो कभी रेखा की बुर में.

दोनों की बुर इतनी टाइट थीं कि मेरा लंड कसा कसा सा जा रहा था. मैं दोनों की बुर को बहुत देर तक चोदता रहा. मेरा लंड रॉड हो चुका था, इसीलिए झड़ने का नाम नहीं ले रहा था. मैं दोनों को गाली दे दे कर पेल रहा था.

“साली तुम दोनों रंडी हो, पिंकी जैसी तेरी मां है.. वैसे ही तुम लोग भी साली रंडी हो. एक दिन इस लंड से तुम दोनों की गांड मारूंगा.. अभी तो चूत मारने में ही तुम लोग का यह हाल हो गया है, जिस दिन तुम दोनों की गांड में अपना लंड डालूंगा, उस दिन तुमको पता चलेगा कि चुदाई क्या होती है.”

यह कह कर मैं दोनों को तेजी से पेलने लगा. आधा घंटा तक मैं चूत बदल बदल कर दोनों की चुदाई करता रहा.. कभी पिंकी को चोदता, तो रेखा से अपना लंड चुसवाता और रेखा की चुदाई करता तो पिंकी से अपना लंड चुसवाता.

मेरा लंड कभी चूत में तो कभी मुँह में मजा ले रहा था. जब मुँह में मेरा लंड जाता तो दोनों के मुँह की गर्मी से मेरा लंड और टाइट हो जाता था. फिर मैं उसे अपनी भांजी और बेटी के चूत में डाल देता. मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरा लंड अब लग रहा था, फट जाएगा.

फिर मैंने दोनों को अपने आगे बैठा दिया और अपना लंड पिंकी के मुँह में घुसा कर अपना बीज गिराने लगा.

मैं पिंकी से बोला- ले साली मेरा वीर्य.. तुम दोनों मिल बांट कर पीना.. कुत्तियों अकेले मत पी जाना साली रंडी..

यह कह कर मैंने अपना पूरा वीर्य पिंकी के मुँह में गिरा दिया. पिंकी और रेखा मेरे वीर्य को मिल बांट कर पी गईं.

अब हम तीनों थक गए थे. हम लोग कपड़े पहन कर अपनी अपनी जगह पर जा कर सो गए. सुबह मेरी ससुराल से फोन आया कि मेरी बीवी की माँ की तबियत थोड़ी ख़राब है.. तो मेरी बीवी मेरे बेटे को लेकर चली गई. वहाँ पहुंच कर बीवी ने फ़ोन पर बताया कि माँ ठीक हैं, मैं कल शाम तक आ जाऊँगी. क्योंकि सब को शादी में जाना है.
 
मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि चलो मेरे पास दो दिन और एक रात है. मैं अपने सभी अरमान पूरे कर लूँगा.

पिंकी और रेखा को भी जब पता चला कि कल शाम तक हम तीनों अकेले हैं तो वो दोनों भी खुश हो गईं.

मैंने दोनों को बुलाया और बोला- देखो अब कल शाम तक हम तीनों घर में पूरे नंगे रहेंगे.. और मस्ती करेंगे, मंजूर है?

पिंकी- मंजूर है.

फिर मैंने पिंकी और रेखा को पूरी नंगी कर दिया. पिंकी ने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए. फिर मेरी बेटी रेखा चाय बनाने चली गई.

अब मैंने पिंकी को नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके गालों से सटाने लगा. पिंकी पूरी रंडी हो चुकी थी, वो मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी. कुछ देर चाटने के बाद मेरे लंड को चूसने लगी.

तभी रेखा नंगी ही चाय लेकर आ गई.- पापा लीजिये.. चाय पीजिये.

तब मैंने उसके छोटी छोटी चूचियों को देखते हुए कहा- मुझे चाय नहीं, दूध पीना है.

तब रेखा ने शरमाते हुए कहा- पापा ज्यादा दूध पीना अच्छी बात नहीं है.. दूध बाद में पी लेना.. अभी चाय पी लो.

मैंने कहा- ठीक है.. लेकिन मैं चाय एक ही शर्त पर पियूंगा.. तू पहले अपने रसीले होंठों से जूठा कर.. तब ही मैं पीऊंगा.

उसने कहा- पापा ऐसा करोगे तो आपको बीमारी हो जाएगी.

मैंने कहा- मुझे कोई परवाह नहीं है.. तू इसे जूठा तो कर.. तब ही मैं ये पीऊंगा.. वरना वापस ले जा ये चाय..

रेखा ने कहा- ठीक है..

उसने चाय का एक सिप लिया और वापस कप में चाय गिरा कर जूठा कर दिया.. फिर प्यार से चाय का कप मेरी और देकर बोली- ये लो पापा.. चाय.

उसने एक सेक्सी स्माइल दी.. मैं पूरी चाय झट से पी गया. तब तक पिंकी ने लंड को चूस चूसकर पूरा गीला कर दिया था.

फिर मैंने रेखा को भी लंड चूसने का इशारा किया, दोनों मेरा लंड चूसने लगीं. मैं सोफे पर बैठा दोनों की नारंगियों को मसलने लगा.

मैं- पिंकी, आज मुझे तुम्हारी कुँवारी गांड मारना है.. बोल मारने दोगी?

पिंकी- मैं एक शर्त पर गांड मारने दूँगी. जब आप वादा करो कि आप मेरे सामने रेखा की कुँवारी गांड में अपना पूरा लंड घुसा के इसे पूरा जवान बनाएंगे.

मैंने रेखा की तरफ देखा.

रेखा- नहीं पापा.. मैंने सुना है गांड में बहुत दर्द होता है. आप मेरी बुर में लंड पेल लेना.

मैं- नहीं बेटी, तुम्हें दर्द नहीं होने दूँगा. पहले पिंकी की कुँवारी गांड मारूँगा, तो तुमको भी ट्रेनिंग मिल जायेगी.

रेखा- ठीक है पापा… लेकिन दर्द होगा तो आप निकाल लेना. पहले पिंकी की गांड मारिए.. मैं तेल लाती हूँ.

पिंकी- ठीक है मैं तैयार हूँ, आप मेरी गांड मार सकते हैं.. लेकिन पहले अपने लंड में तेल या क्रीम लगा लीजिये.

फिर मैंने पिंकी से घोड़ी बनने के लिए बोला, पिंकी सोफे से उतरी और वहीं सोफे का सहारा लेकर घोड़ी बन गई. मैंने उसकी गांड के छेद को देखा वो लंड घुसने की सोच कर खुल बंद हो रहा था. पिंकी को बहुत डर लग रहा था, लेकिन अब वो अपनी बात से पीछे भी नहीं हट सकती थी. उसके चेहरे पर एक रंग आ रहा था और दूसरा रंग जा रहा था.

रेखा पिंकी की ऐसी हालत देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थी. रेखा मेरे लंड पर तेल लगाने लगी. फिर उसने पिंकी की गांड पर भी अच्छे से तेल लगा दिया. मैंने सोच लिया था कि भले ही उसकी चुत मारते वक्त पिंकी पर रहम किया था लेकिन अगर गांड मारने में रहम किया तो पिंकी चीख चीख कर पूरा घर सर पर उठा लेगी.

अब मैं घोड़ी बनी पिंकी की गांड के ठीक पीछे आ गया. मैंने एक हाथ पिंकी की कमर कस कर पकड़ ली और दूसरे हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया. पिंकी समझ गई कि अब उसकी गांड फटने वाली है.
 
एकाएक मैंने पिंकी की गांड का निशाना ले कर ज़ोर का धक्का लगाया लेकिन लंड फिसल गया. मैंने पिंकी के मुँह से हाथ हटाया और उस हाथ से लंड पकड़ कर फिर से एक ज़ोर का धक्का लगाया, एक ही धक्के में मेरा आधा लंड पिंकी की कुँवारी गांड में घुस चुका था.

जैसे ही लंड अंदर घुसा मैंने पिंकी का मुँह बंद करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और सारा घर “आआईयईईईई.. मर गई रे.. उऊहम्म्म…”

पिंकी की चीख से सारा घर थर्रा गया था और पिंकी दर्द के मारे छूटने के लिए फड़फड़ा रही थी.. पर मैंने कोई रहम नहीं दिखाई और पिंकी का मुँह दबा कर फिर से एक धक्का लगा कर अपना पूरा लंड उसकी गांड में पेल दिया.

मैं गचागच धक्के पर धक्के लगाने लगा. पिंकी की हालत और मेरे धक्के देख कर, रेखा की गांड डर के मारे फटे जा रही थी. कुछ ज़ोर के धक्के मारने के बाद मैं रुक गया. अब तक मेरा लंड पिंकी की गांड में अपने लिए जगह बना चुका था और मैं जानता था कि पिंकी को जितना दर्द होना था, हो चुका है.

कुछ देर बाद पिंकी का छटपटाना कम हुआ तो मैंने उसके मुँह से हाथ हटा लिया. हाथ हटते ही पिंकी ज़ोर ज़ोर से हाँफते हुए रोने लगी.

रेखा अभी तक आंखें फाड़े चुपचाप सब तमाशा देख रही थी. मैं पिंकी को रोते देख उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोला- बस पिंकी मेरी जान.. अब रोने से कोई फायदा नहीं है, जितना दर्द होना था हो चुका.. अब सिर्फ़ मजा ही मजा है.

“लेकिन मामा तुम तो किसी कसाई की तरह मेरी गांड फाड़ रहे थे.. थोड़ा आराम से कर लेते.. मैं कहीं भागे तो नहीं जा रही थी..” पिंकी रोते हुए बोली.

“देख पिंकी मैंने तेरे भले के लिए ही ऐसा किया.. अगर मैं धीरे धीरे करता तो तुझे बार बार दर्द होता और ऐसा करने में एक बार ही हुआ. इसीलिए मैंने ऐसा किया.”

मैंने उसे समझाते हुए बोला.

अब पिंकी रोना बंद कर चुकी थी तो मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिया. पिंकी को भी अब धक्के लगने से मजा आने लगा था.

वो भी गांड पीछे कर के मुझको और जोश दिलाते हुए रेखा से बोली- देख साली.. मैंने कैसे एक ही बार में गांड मरवा ली.. नहीं तो एक तू है जिसने ज़रा सा लंड चूत में घुसते ही सारा घर सर पर उठा लिया था, पेलो मामा पेलो और ज़ोर से पेलो अपना लंड मेरी गांड में.. आह फाड़ दो मेरी गांड आज अपने मूसल लंड से आह..

रेखा आंखें फाड़े पिंकी को इतने मोटे लंड से गांड मरवाते देख रही थी और मन ही मन उसकी हिम्मत की दाद भी दे रही थी.

“ले साली ले, ले मेरा लंड संभाल बहुत खुजली थी ना तेरी गांड में.. चल आज मैं तेरी गांड की सारी खुजली मिटा देता हूँ.” यह कह कर मैंने धकाधक पिंकी की गांड में लंड पेलने लगा. पिंकी भी अपनी चुत में उंगली चलाने लगी. कुछ देर बाद मेरी स्पीड बढ़ती गई.

“आहह.. ऊहह.. मैं अब झड़ने वाला हूँ पिंकी..” वो बोली.

“मामा, मैं भी झड़ने वाली हूँ प्लीज़ अपना लंड अब मेरी चुत में डाल दो.. मैं आपके वीर्य को अपनी चुत में गिरते हुए महसूस करना चाहती हूँ.”

पिंकी अपनी चुत से उंगली निकलते हुए बोली. उसके ऐसा बोलते ही मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाल कर उसकी चुत में पेल दिया और दो चार धक्के मारते ही झड़ने लगा.

मेरे लंड ने इतना माल निकाला कि वो चुत में समां ही नहीं पाया और नीचे बहने लगा. पिंकी भी मेरे साथ ही झड़ गई और उसकी चुत ने मेरे लंड को कस कर दबा लिया. हम दोनों ही झड़ने के बाद वहीं भरभरा कर वहीं औंधे गिर कर ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगे.

उधर मेरी बेटी रेखा अभी भी यकीन नहीं कर पा रही थी कि पिंकी अपनी गांड में एक ही बार में इतना मोटा लंड ले चुकी है.

पिंकी की गांड में अब भी दर्द था. वह सोने चली गई. अब मैं और मेरी कमसिन बेटी अकेले थे. मेरी बेटी रेखा पिंकी की गांड चुदाई देखकर पूरी गर्म हो चुकी थी.
 
मेरी बेटी रेखा अभी भी यकीन नहीं कर पा रही थी कि पिंकी अपनी गांड में एक ही बार में इतना मोटा लंड ले चुकी है.

पिंकी की गांड में अब भी दर्द था. वह सोने चली गई. अब मैं और मेरी कमसिन बेटी अकेले थे. मेरी बेटी रेखा पिंकी की गांड चुदाई देखकर पूरी गर्म हो चुकी थी.

“उफ़ जानू… मेरी प्यारी बेटी..” यह कहते हुए मैंने रेखा को एकदम से उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया. मेरा लंड रेखा के रानों के बीच में से बाहर को निकल कर उसके पेट से टच कर रहा था. मेरे लंड के मुँह से चिकना चिकना लेसदार पानी निकाल कर रेखा के पेट पर लग रहा था.

मैंने अपनी बेटी को अपने से लिपटा कर उसके मुँह पर, नाजुक होंठों पर प्यार करना शुरू किया. उसकी दोनों छातियाँ को मैंने अपने हाथों मे पकड़ कर मसलनी शुरू कर दिया.

मैं- बेटी, आज मैं तुझे शीशे के सामने चोदना चाहता हूँ.

रेखा ने कंधे उचका कर कहा- ओके डैड.. आपका जैसे दिल करे वैसे मुझे चोदो..

हम दोनों उठकर शीशे के सामने आ गए. मेरे कमरे में एक बहुत बड़ा शीशा लगा हुआ था जहाँ मेरी बीबी मेकअप किया करती थी.

जैसे ही मैं अपनी बेटी को शीशे के सामने लाया, वह शर्मा गई.. क्योंकि वह पूरी तरह से नंगी थी.. वो भी अपने सगे पापा के साथ, उसे और शर्म आने लगी. मैंने उसकी मॉम को खूब चोदा था तब जाकर मेरी बेटी पैदा हुई थी और आज मैं उसे चोदने वाला था.

जब मैंने शीशे में अपनी नंगी कामुक बेटी को देखा तो वह झेंप गई और अपनी चूत और दूध को छुपाने लगी.

मैं उसके दूध सहलाते हुए बोला- नहीं बेटी.. अपनी चूत को मत छिपाओ.. यही तो तुम्हारी असली खूबसूरती है.

सामने शीशे में रेखा की छोटी सी चूत साफ़ साफ़ दिख रही थी. पिछली रात में ही मैंने उसकी कुँवारी चूत को मस्त तरीके से चोदा कर खोल दिया था. रेखा की चूत एकदम गुलाबी गुलाबी थी, जो सामने शीशे में बंद खुल होते हुए दिख रही थी. मैंने अपनी बेटी को पीछे से पकड़ कर अपनी बांहों में भर रखा था.. और उसकी चुचियों को मसल रहा था. हम दोनों शीशे के सामने बड़ी देर तक खामोशी से एक दूसरे को चूम चाट रहे थे.

अब मुझे रेखा की चूत हर हालत में दुबारा से चोदनी थी क्योंकि मेरा लंड अब अपनी औकात पर आ गया था और रेखा की गांड की दरार में घुसा जा रहा था.

मैंने शीशे के सामने ही अपने दोनों हाथ उसकी चिकनी, पतली दुबली और छरहरी कमर में डाल दिए और झुककर उसके बाएं गाल पर किस कर लिया.. वह झेंप गई क्योंकि शीशे में उसे उसका बाप चूमते हुए उसकी चूत में आग लगा रहा था.

मैं- बेटी… तुम शीशे में नंगी कितनी अच्छी लगती हो. तुम सच में कितनी मस्त माल लग रही हो. कोई भी तुम्हारे यौवन पर मर मिटेगा.

मैं उसकी जवानी की प्रंशसा करते हुए शीशे के सामने ही उसकी चूत में उंगली करने लगा और उसकी नारंगी समान चूचियां चूसने सहलाने लगा.

रेखा ने मेरे लंड को टच करते हुए कहा- डैड.. आप सिर्फ मेरी तारीफ़ कर रहे हो. पर आप भी एकदम अनिल कपूर जितने हॉट और सेक्सी लग रहे हो.

मैंने कहा- और तुम सोनम कपूर सी लग रही हो.

वो मुस्कुरा दी.

मैं उसके गाल पर किस करने लगा. बड़ी देर तक हम दोनों शीशे के सामने खड़े रहे और एक दूसरे के नंगे जिस्म को देखते और चूसते रहे.

फिर रेखा कुछ इस तरह बैठकर मेरा लंड चूसने लगी कि उसे शीशे में लंड चुसाई का सीन साफ़ साफ़ दिखे. वो शीशे में देखकर मेरा लंड चूसते हुए मुस्कुरा रही थी.
 
फिर मैंने शीशे के सामने ही रेखा को एक मेज से सहारा देकर खड़ा कर दिया और अपना घुटने के बल नीचे बैठ गया. अब मैं उसकी रसीली बुर में जीभ घुसेड़ कर चूत पीने लगा. रेखा मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ घुमा रही थी.

उसके मुँह से मादक सिस्कारियां निकल रही थीं- उंह उंह उंह हूँ.. हूँ.. हूँ.. हम्म.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अहह्ह्.. अई.. अई.. डैड चूस लो..

वो तड़प रही थी..

ओह्ह.. कितना मधुर था ये मिलन..

मेरी लम्बी जीभ मजे से उसकी साफ चिकनी चूत को चाट, सहला और पी रही थी. मुझे फुल मजा मिल रहा था. रेखा यौन उत्तेजना कामुकता से पागल हुई जा रही थी. अब मैंने उसकी एक टांग ऊपर को उठा दी. अब तो मुझे उसकी बुर चाटने का और अच्छा मौक़ा मिल गया था.

उफफ्फ्फ्फ़… वह तड़प रही थी, काँप रही थी.. उसे झुरझुरी हो रही थी. मैं तो किसी चुदासे कुत्ते की तरह उसकी बुर चाट रहा था.

फिर मैंने अपनी बेटी रेखा को अपने आगे कर दिया और खुद उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने उसे थोड़ा आगे को झुका दिया और उसकी चूत में अपना मोटा लंड डाल कर उसे चोदने लगा.

उफ्फ्फ्फ़.. ये पहली बार था, जब मैं शीशे के सामने खड़े होकर अपनी सगी बेटी को पेल रहा था. मैंने रेखा को और थोड़ा आगे झुका दिया और पकापक पेलने लगा. वह शीशे के ठीक सामने खड़ी थी, मैं पीछे से उसे कुतिया की तरह चोद रहा था. ये बहुत रोमांटिक और जुनूनी सीन था. मेरा लंड तेज तेज उसकी रसीली चूत की चुदाई कर रहा था. उसके दोनों चूचे तेज तेज हिल रहे थे.

हम बाप बेटी शीशे के सामने खड़े होकर चुदाई का मजा ले रहे थे. वह “उ उ उ उ ऊऊऊ.. ऊँऊँ..ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. हा हा हा.. ओ हो हो…” करके चुद रही थी. मैं अब पूरे जोर से अपनी बेटी की कमसिन चूत चोद रहा था. मेरा लंड उसकी चूत में बहुत टाइट जा रहा था.

मैंने रेखा को टेबल पर बैठा दिया और अपने गले में हाथ डालने को कहा. उसने फट से वो मुद्रा बना ली, फिर मैंने अपने लंड को रेखा की कमसिन चूत में घुसा दिया. लंड को उसकी चूत में घुसेड़ने के बाद मैंने उसे अपनी गोद में भर लिया. मैंने उसे इस तरह उठाया था कि उसकी दोनों टांगों ने मेरी कमर को जकड़ लिया. मैंने खुद अपने दोनों हाथों से उसके नंगे मुलायम चूतड़ नीचे से पकड़ते हुए उसे साध लिया. अब मैं बेड से उतर कर उसे गोद में लेकर फर्श पर खड़ा हो गया. मेरा लंड उसी तरह से मेरी बेटी की चूत में फँसा हुआ था.

मैं इसी तरह अपनी बेटी को गोद में उठाए हुए ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिरर के सामने ले गया- जानू, देखो मिरर में.. कैसे लग रहे हैं हम दोनों बाप बेटी?

रेखा मिरर में देख कर बुरी तरह शर्मा गई. ये खजुराहो की एक मैथुन मुद्रा थी.

रेखा ने मेरे गले से लगते हुए मेरे कान में सरगोशी की- आह.. पापा… आप बड़े वो हैं…
 
मैं मिरर के सामने इस तरह खड़ा था कि मेरी बैक साइड मिरर की तरफ थी. मैंने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा. हम दोनों बाप बेटी बिल्कुल नंगे लंड चूत फंसाए खड़े थे. रेखा मेरी गोद में किसी बंदरिया की तरह लिपटी हुई थी. मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को थामा हुआ था. मेरी उंगलियाँ रेखा की गांड के गोश्त के अन्दर घुसती हुई दिखाई दे रही थीं. उसकी गांड का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था और उसके नीचे मेरा मोटा सख़्त लंड मेरी बेटी की चूत में जड़ तक फँसा हुआ था. चूत के छेद ने मेरे लंड को रबरबैंड की तरह ग्रिप किया हुआ था.

रेखा- कैसी बुरी लग रही हूँ मैं पापा….

मैं- नहीं जानू, तुम बहुत हसीन लग रही हो. बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लड़की मज़े ले कर चुदवाते हुए लगती है. इतना हसीन जिस्म है मेरी बेटी का.. बिल्कुल सोनम कपूर की तरह.. देखो मिरर में कैसे मैंने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांड को पकड़ा हुआ है… और मेरा लंड अपनी जानू बेटी की टाइट चूत मैं कैसा मस्त लग रहा है.

मैंने यह कहते हुए उसकी गांड को ऊपर उठाया, यहाँ तक कि मेरा लंड खिंचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.

मैं- आह बहुत टाइट चूत है मेरी बेटी की.. उफ्फ मज़ा आ गया जानू.. इस तरह तो 3 या 4 धक्कों में ही मेरा वीर्य निकल जाएगा.

यह कहते हुए मैंने उसकी गांड को नीचे करते हुए अपने लंड को उसकी चूत में पुश किया.. फिर बाहर निकाला, फिर किया और फिर बगैर रुके तेज़ी से अपने लंड को अपनी बेटी की चूत में अन्दर बाहर करता रहा. कुछ ही धक्कों में मैं पूरी तरह जोश और मस्ती में आ गया था. उसके गले से अजीब अजीब आवाजें निकल रही थीं. मेरी अपनी हालत खराब हो चुकी थी. मेरे मुँह से गुर्राने की सी आवाज़ निकल रही थी.

मैं- चोद रहा हूँ अपनी जानू को…. लंड जा रहा तेरी चूत में जानू… चुद मेरे लंड से मेरी बच्ची.. चुद अपने पापा के लौड़े से.. आह.. मज़ा आ रहा है.. टाइट चूत है मेरी बेटी की.. आह.. ले..

रेखा- आह.. पापा चोदो अपनी बेटी को.. चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत को.. उफ़ मर गई पापा… बहुत सख़्त लंड है आपका.. उफ़ आपका लंड मेरे पेट में चला गया.. आह.. पापा फट गई मेरी चूत.. चोद दो.. अह.. चोदो.. उफ्फ चुद गई मैं.. ओ मम्मी.. ओह मम्मी.. पापा ने चोद दिया मुझे.. पापा ज़ोर से चोदो.. और ज़ोर से चोदो.. तेज धक्के लगाओ ज़ोर ज़ोर से… अह.. मज़ा आ रहा है…

अब मेरा जिस्म अकड़ना शुरू हो रहा था. मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था. मेरे लंड के सारे छल्ले अकड़ने लगे थे.. और उसकी चूत के अन्दर मेरा लंड फूलने और पिचकने लगा था.

मैं- उफ्फ जानू मेरा वीर्य निकल रहा है तेरी चूत में..

इसके साथ ही मेरा जिस्म बुरी तरह उसे गोद में लिये झटके मारने लगा. मैंने उसकी गांड को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया और नीचे से अपने लंड को पूरी तरह उसकी चूत में कॉर्क जैसा फँसा दिया.

मेरे गर्म गर्म वीर्य की पिचकारियां मुझे उसकी चूत की गहराइयों में जाती हुई साफ महसूस हो रही थीं. इसके साथ ही मैं झड़ रहा था और तभी उसकी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

रेखा बुरी तरह मुझे चूमने चाटने लगी. मेरे मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं. मेरा पूरा जिस्म शिद्दत-ए-जज़्बात से काँप रहा था. मैंने प्यार करते करते उसे बेड पर लिटा दिया और खुद अपना लंड हाथ में लेकर उसके मुँह के ऊपर चढ़ गया.

मैं लंड की टोपी को अपनी बेटी के होंठों से लगाते हुए बोला- रेखा मेरी गुड़िया मेरी प्यारी सी बेटी.. अपने पापा का लंड चूसो मुँह में लेकर.. इसे पूरा साफ कर दो.

उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और साफ कर दिया.

इसके बाद हम दोनों आराम करने लगे. पिंकी अभी सोई हुई थी.

कुछ देर बाद मेरी बेटी रेखा बोली- चलो पापा, खाना खा लेते हैं.

मैं बोला- ठीक है लेकिन हम लोग ऐसे ही नंगे रह कर खाना खाएंगे और तू मेरी गोद में बैठकर खाना खाएगी. तुझे खाने के साथ मेरी आइसक्रीम भी खानी पड़ेगी.. मंजूर है!

मेरी बेटी बोली- ठीक है पापा आज आप जो कहोगे, वह मैं करूँगी.

फिर हम दोनों ने मिल कर टेबल पर खाना सजाया. मैंने अलग से फ्रिज से आइसक्रीम भी निकाल कर सजा दी. इसके बाद मेरी बेटी नंगी मेरी गोद में बैठ गई और हम लोग खाना खाने लगे. मैंने आइसक्रीम को मैंने उसकी चूचियों पर लगा दिया और चूचियों को चूसने लगा. मेरी बेटी भी बहुत गर्म हो गई थी.

मैंने कुछ आइसक्रीम अपने लंड पर भी लगा दी और अपनी बेटी को चूसने का इशारा किया. मेरी बेटी रेखा आइसक्रीम के साथ साथ मेरे लंड को भी चूस रही थी. फिर कभी कभी आइसक्रीम मैं उसके होंठों पर भी लगा देता था और हम दोनों फ्रेंच किस करने लगते. मैं आइसक्रीम के साथ साथ उसके चेहरे को भी चूस और चाट रहा था.
 
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