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मेरी प्रेमिका compleet

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सोनाली तुरंत सोफे पर से खड़ी हो गयी और अपनी चूत पर हाथ रख

लिया जिससे मेरा वीर्य उसकी चूत से चूह कर नीचे कार्पेट पर ना गिर

पड़े.

वो सीधे बाथरूम मे गयी और टाय्लेट पर बैठ गयी. मुझे उसके

पेशाब करने की आवाज़ सुनाई दे रही थी.

उसने दरवाज़ा खुला रखा था जिससे मुझे सब दिखाई दे रहा था. वो

पेशाब करती हुई बड़ी अच्छी लग रही थी.

"सॉरी डार्लिंग मुझे जोरों से पेशाब आ रही थी." सोनाली ने दो

टिश्यू पेपर उठा अपनी चूत पौन्छ्ते हुए कहा.

"तुम्हे ये सब बताने के पीछे दो कारण है." सोनाली ने टाय्लेट की

फ्लश खींची और वापस लिविंग रूम मे आ गयी. वो सोफे पर आकर

मेरे बगल में बैठ गयी और अपनी सिर मेरी छाती पे रख मेरी

आँखों मे देखने लगी.

"बताओ मुझे तुमने ऐसा क्यों सोचा?" मैने फिर से सोनाली से पूछा.

"ठीक है बताती हूँ. पहली बात मुझे ऐसा लगा कि हमारा प्यार

इतना मजबूत हो गया है कि मेरी बात सुन तुम मुझे माफ़ कर दोगे,

एक बार तो मैने सोचा की तुम्हे नही बताऊ पर मुझे विश्वास सा था

कि तुम मुझे ज़रूर समझ लोगे." में मुस्कुराया मुझे उसके

आत्मविश्वास पर गर्व सा हो गया.

"और दूसरी और सबसे बड़ी बात, मुझे ऐसा लगने लगा कि तुम्हे पता

चल जाएगा इससे बेहतर है कि में ही तुम्हे बता दूं. उस रात

प्रियंका ने मुझे और विजय को चुदाई करते हुए देख लिया था.

शायद में और विजय इतनी ज़ोर से सिसक रहे थे कि अपने कमरे में

जाते हुए उसने हमारे आवाज़ें सुन ली होगी."

"तुम्हे तो पता ही है कि उसका कमरा मेरे कमरे के बगल में है.

उसने विजय को मुझे चोद्ते और मेरी चूत की फोटो खींचते हुए भी

देख लिया था." सोनाली ने बताया.

"फिर क्या हुआ?"

सोनाली ने मेरे होठों को चूमते हुए कहा, "वो कुतिया ये सब देखने

के बाद एक दम अंजान बनी रही जैसे उसे कुछ पता ही ना हो. उस दिन

के बाद में विजय से दूर रहने लगी, में नही चाहती थी कि ये सब

दुबारा हम दोनो के बीच हो."

में सोनाली के निपल से खेलने लगा. मैने देखा कि वो गर्माती जा

रही थी, उसके निपल तन कर खड़े हो चुके थे.

"तीन दिन पहले वो मेरे पास आई और मुझसे कहा कि उसे पता है कि

मेरे और विजय के बीच क्या हुआ था. उसने मुझे धमकी दी कि वो

सबकुछ तुम्हे बता देगी अगर मैने उसके लिए कुछ नही किया तो."

सोनाली ने कहा.

"इसका मतलब है कि उसने तुम्हे ब्लॅकमेल किया."

"हां कुतिया छिनाल साली." "ओह राज कितना अच्छा लग रहा है,

ज़रा ज़ोर से मेरे निप्प्प्ल को दबाओ ना."

में उसके निपल को जोरों से भींचने लगा. मैने अपना हाथ नीचे

बढ़ाया और उसकी चूत से खेलने लगा.

"वो तुमसे क्या करवाना चाहती थी?" मैने पूछा.

सोनाली मुझे बताने लगी कि किस तरह प्रियंका ने उसे फँसाया था.

सोनाली बाथरूम मे स्नान कर रही थी उसी वक्त प्रियंका बाथरूम मे

आ गयी, उसने दरवाज़ा खटखटाने की ज़रूरत नही समझी.

"प्रियंका तुम यहाँ क्या कर रही हो? देख नही सकती के में स्नान कर

रही हूँ." सोनाली गुस्सा करते हुए बोली.

"तो क्या हुआ, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है." प्रियंका ने

कहा.

प्रियंका अपनी बेहन सोनाली के सुंदर बदन को घुरे जा रही थी.

उसे जलन और नफ़रत थी अपनी बेहन की सुंदरता और उसकी प्यारी

चुचियों से. ऐसा नही था कि प्रियंका बदसूरत थी, पर बहुत

सुंदर भी नही थी.

प्रियंका को जलन थी सोनाली के तीखे नाक नक्श से, उसे चिढ़ थी

उसके दोस्तों से जो वो अपने साथ घर लेकर आती थी. प्रियंका कभी

अपने किसी दोस्त को घर नही लाती थी.

"तुम राकेश को तो जानती हो ना?" प्रियंका ने पूछा.

 


सोनाली को उसकी बकवास सुनने में कोई दिलचस्पी नही थी, "कौन

राकेश."

"राकेश मेरा मालिक जिसकी दुकान पर में काम करती हूँ." प्रियंका

ने कहा.

"वो काला सांड." सोनाली बोली.

"हां वही," प्रियंका ने अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा. फिर वो अपनी

बेहन के पीछे आ गयी और उसके कंधों पर हाथ रख दिया.

"क्यों क्या हुआ उसे?" सोनाली थोड़ा विचलित सी हो गयी थी. पता नही

क्यों उसे प्रियंका के हाथ अपने शरीर पर सुहा नही रहे थे.

प्रियंका सोनाली के थोड़ा करीब आती हुई बोली, "राकेश हमेशा से

तुमसे आकर्षित रहा है. कल उसने मुझसे कहा कि वो तुम्हे चोदना

चाहता है."

"तो में क्या करूँ इसमे, चोदने के लिए मेरा प्रेमी है मेरे पास."

सोनाली ने उससे कहा.

"सच कह रही हो! अगर ऐसा है तो फिर विजय से उस दिन क्यों चुदवा

रही थी." प्रियंका उसके कान मे धीरे से बोली.

सोनाली के तो पसीने छूट गये. डर के मारे उसका शरीर काँपने लगा,

इसका मतलब है कि प्रियंका ने सब कुछ देख लिया था, "मेरी समझ

मे नही आ रहा कि तुम क्या बकवास कर रहही हो."

प्रियंका ने सोनाली के कंधे जोरों से पकड़ते हुए कहा, "सोनाली

मुझे ज़्यादा बनाने की कोशिश मत करो. मैने तुम्हे और विजय को

चुदाई करते हुए देखा है, और विजय ने तुम्हारी वीर्य भरी छूट

की फोटो भी ली थी."

"तुम ये साबित नही कर सकती." सोनाली थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए बोली.

"सही क्या नही कर सकती, जब राज को बताउन्गि तो वो क्या कहेगा,

पिताजी क्या कहेंगे. फिर घर मे सिर्फ़ विजय के पास ही डिजिटल कॅमरा

नही है मेरे पास भी है," उसकी ये बात ने सोनाली को सच मुच

डरा दिया था.

सोनाली समझ गयी कि उस पर मुसीबत आ गयी है, "ठीक है आख़िर

तुम क्या चाहती हो?"

प्रियंका ने सोनाली के कंधे छोड़ दिए. फिर अपना हाथ नीचे की ओर

बढ़ाते हुए उसके मम्मे पकड़ लिए और उसके निपल को भींचने लगी.

"तुम्हारे पास दो रास्ते है, एक तुम राकेश से चुदवा लो, जैसे उसका

दिल चाहे वो तुम्हे चोदेगा."

प्रियंका थोड़ी देर के लिए रुकी. उसने अपनी गिरफ़्त सोनाली की

चुचियों पर बढ़ा दी और ज़ोर से दबाने लगी, "और दूसरा रास्ता

शायद तुम्हारे लिए बेहतर हो सकता है……………"

"और वो क्या है? मेरे निपल भींचना बंद करो?"

पर प्रियंका ने उसके निपल भींचना बंद करने के बजाय और जोरों

से भींच दिया. सोनाली को दर्द तो हुआ पर साथ ही उसके शरीर मे

उत्तेजना भी दौड़ गयी.

 


"दूसरा तरीका है कि राज तुम्हारा प्रेमी मेरी चुदाई करे. में

चाहती हूँ कि वो अपने लंड से मेरी चूत की उतनी ही भयंकर

चुदाई करे जितनी विजय ने रात को तुम्हारी चूत की थी.

सोनाली कुछ देर तक सोचती रही, "साली कुतिया ने सब कुछ देख लिया

है और अब मेरे प्रेमी से चुदवाना चाहती है."

थोड़ी देर चुप रहने के बाद सोनाली बोली, "राज हमेशा कहता था कि

तुम्हे सुधारने के लिए तुम्हारी कस कर चुदाई होनी चाहिए, पर

तुम्हे चोदने की उसकी कभी ख्वाइश नही रही इसलिए इस बात को तो

तुम भूल ही जाओ तो अच्छा है."

प्रियंका सोनाली के निपल अब और भी जोरों से भींच रही थी,

सोनाली ज़ुबान से कबुल करे या नही पर उसे हर छन हर पल का मज़ा

आ रहा था.

"देखो मेरी प्यारी बहना, तुम्हारे पास सिर्फ़ एक हफ़्ता है सोचने के

लिए. या तो तुम राकेश से चुदवा लो. और में खुद भी देखना

चाहती हूँ कि उसका काला 10' इंची लंड तुम्हारी गोरी चिकनी चूत मे

घुसता हुआ कैसा लगता है. और या फिर मुझे राज से चुदवा दो, राज

को कैसे तय्यार करती हो ये तुम्हारी समस्या है समझी."

प्रियंका ने अब सोनाली के निपल छोड़ दिए, और अपना हाथ नीचे कर

अपनी दो उंगलियाँ अब उसकी चूत मे घुसा दी.

"हां एक बात और है, अगर राज मुझे चोद्ता है तो में चाहूँगी कि

तुम उस वक़्त वहीं रहो. मुझे अच्छा लगेगा कि तुम मुझे राज से

चुदवाते देखो." प्रियंका ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत मे अंदर बाहर

करते हुए कहा.

सोनाली को प्रियंका के हाथों से मज़ा आ रहा था. उसकी चूत झड़ने

के कगार पर थी पर उसी वक़्त प्रियंका उठ कर खड़ी हो गयी, "याद

रखना सोनाली एक हफ़्ता है तुम्हारे पास, सिर्फ़ एक हफ़्ता."

प्रियंका बाथरूम से बाहर चली गयी. सोनाली ने तुरंत प्रियंका की

उंगलियों की जगह अपनी उंगलियाँ अपनी चूत मे डाल अंदर बाहर करने

लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, "ओह आआआआआहह."

सोनाली ने जो मुझे बताया उसे सुनकर मुझे विश्वास नही हो रहा था.

सोनाली जब तक अपनी कहानी सुनाती रही मैने उसके शरीर को छुआ तक

नही था.

थोड़ी देर चुप रहने के बाद मैने कहा, "प्रियंका बड़ी छिनाल है,

उसने हम लोगो को अच्छी तरह फाँस लिया है."

"हां मुझे भी ऐसा ही लग रहा है." सोनाली ने कहा.

"क्या तुमने विजय को इस बारे में बताया है?" मैने सोनाली से पूछा.

सोनाली अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए बोली, "नही, सबसे पहले में

तुम्हे सब कुछ बताना चाहती थी जिससे वो मुझे फिर कभी ब्लॅकमेल

ना कर सके."

"एक बात से तो तुम निस्सींत रहो, अगर उस रात को उसने तुम्हारी और

विजय की तस्वीरें खींची है तो वो उन तस्वीरों को तुम्हारे माता

पिता को दिखाने की हिम्मत नही कर पाएगी." मैने कहा.

"हो सकता है वो ना दिखाए पर हमे आगे क्या करना चाहिए?" सोनाली

ने पूछा.

"खैर मुझे तुम्हारे बारे में नही मालूम, पर अगर तुमने राकेश

से चुदवाया तो मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगेगा, उस कुत्ते को में एक

पल के लिए सहन नही कर सकता." मैने कहा.

"डार्लिंग वो हरामी का बच्चा मुझे भी अच्छा नही लगता. साला

हमेशा अपनी गंदी नज़रों से मुझे घूरता रहता है. उसका लंड अपनी

चूत मे लेने से पहले तो मरना ज़्यादा पसंद करूँगी." सोनाली मेरी

छाती के बालों के बीच हाथ फेरते हुए बोली.

 


मैने सोनाली के माथे को चूमते हुए कहा, "इससे तो हमारे पास

प्रियंका का बताया दूसरा रास्ता ही बचता है, है ना."

सोनाली मेरी आँखों मे झाँकने लगी, उसके चेहरे पर अस्चर्य के

भाव थे, "अब ये ना कहना कि तुम प्रियंका को वो देना चाहते हो जो

उसे चाहिए, कहीं तुम तो प्रियंका को चोदने मे ज़्यादा इंट्रेस्टेड

नही हो."

मैने सोनाली के होठों को चूम लिया, "में उसे चोदना चाहता हूँ,

नही ऐसी बात नही है."

मैने सोनाली से झूठ बोला था. माना प्रियंका एक छिनाल लड़की थी,

पर अक्सर में सोचा करता था कि वो नंगी होगी तो कैसी लगेगी. क्या

उसकी चूत भी उसकी बेहन की चूत की तरह गोरी और चिकनी है, क्या

उसकी चूत का स्वाद सोनाली की चूत से कुछ अलग है. हालाँकि सोनाली

अपने भाई से चुदवा चुकी थी फिर भी में अभी अपने विचार उसे

नही बताना चाहता था.

"समस्या एक और भी है," मैने कहा, "चलो हम प्रियंका की ख्वाइश

पूरी कर भी देते हैं और वो हमें वो सब फोटोस जो उसने खींची

है हमे वापस कर देती है, पर इस का क्या सबूत कि उसके पास उन

फोटोस की कॉपीस नही होगी."

"हां ये तो मैने सोचा ही नही था." सोनाली बोली.

"मेरा कहने का मतलब ये है," मैने अपनी बात जारी रखते हुए

कहा, "कि हो सकता है की उसने उन तस्वीरों की कई कॉपीस बना रखी

हो."

सोनाली बोली, "क्यों ना हम उसके कमरे की तलाशी ले लें."

"तलाशी तो ले सकते हैं पर क्या पता उसने वो तस्वीरें अपनी किसी

सहेली के यहाँ रखी हो?" मैने कहा.

"क्या वो ऐसा कर सकती है." सोनाली थोड़ी डरी हुई आवाज़ में बोली.

"हां हो सकता है, क्या पता उसने एक कॉपी राकेश को दे दी हो?" मैने

कहा. ये बात समस्या खड़ी कर सकती है. मेरी समझ में नही आ

रहा कि हमें क्या करना चाहिए."

"सो तो सोचेंगे, सबसे पहला सवाल ये है कि क्या तुम मेरी बेहन को

चोदना चाहते हो? सोनाली ने पूछा.

वो जिस तरह मेरी और देख रही थी उससे मेरी समझ मे नही आ रहा

था कि वो सही में पूछ रही थी या ये उसका शरारत भरा प्रश्न

था.

"हां में तुम्हारी बेहन को चोदुन्गा. अगर में उसके के साथ कुछ ना

कर पाया तो कम से कम तुम तो वहाँ रहोगी." मैने मज़ाक करते हुए

कहा.

सोनाली मेरी बात सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दी, "ठीक है फिर इस शनिवार

को हमारे यहाँ उसके जनमदिन की पार्टी है. हम सभी वहाँ होंगे,

में उसे साइड मे लेजा कर सब कुछ तय कर लूँगी. मेरी राय तो ये है

कि तुम उसे अपने घर मे चोदने की बजाय हमारे घर में चोदो इससे हमे कोई

पकड़ नही पाएगा."

"तुम ठीक कह रही हो. तस्वीरों को हासिल करने का तरीका बाद मे

सोचेंगे." मैने कहा.

हमारे बीच सब कुछ तय हो गया था.

शनिवार की शाम को में सोनाली के घर पहुँचा. जब मुझे पता

चल चुका है कि विजय अपनी बेहन यानी मेरी प्रेमिका को चोद चुका

है, उसे देख कर मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था.

में ख़यालों में उस नज़ारे की कल्पना करने लगा जब विजय सोनाली

को चोद रहा होगा, साथ ही में उस तस्वीर को देखने के लिए मरा

ज़ा रहा था जिसमे सोनाली की चूत से विजय का वीर्य बह रहा था.

शुरू में विजय से बात करते हुए मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था.

थोड़ी देर में में और सोनाली भीड़ मे से खिसक कर विजय के कमरे

मे घुस गये.

"राज में तुम्हे विजय का आल्बम दिखाती हूँ जिसमे उसने सब लड़कियों

की चूत की तस्वीरें लगा रखी है." सोनाली बोली.

विजय ने वो आल्बम अपनी अलमारी के पीछे छुपा रखी थी. सोनाली को

मालूम था कि उसे कैसे निकाला जाता है. आल्बम नंगी लड़कियों और

उनकी चूत की तस्वीरों से भरी पड़ी थी. सभी लड़कियाँ काफ़ी

सुंदर लग रही थी.

 
"राज ये देखो, ये मेरी चूत की तस्वीर है." सोनाली ने एक तस्वीर

की ओर इशारा करते हुए कहा.

तस्वीर को देखते ही मेरा लंड झटके से खड़ा हो गया. मैने

तस्वीर को ध्यान से देखा, विजय का वीर्य उसके चूत से बूँद बूँद

कर टपकता महसूस हुआ. काफ़ी अच्छी तस्वीर थी.

"मैने तुम्हारे भाई से इसकी एक कॉपी माँगूंगा और फ्रेम कराकर मेरे

बेडरूम मे लगा लूँगा." मैने हंसते हुए कहा.

सोनाली और मैने एक दूसरे को देखा फिर आपस मे चूमने लगे.

सोनाली बिस्तर पर लेट गयी और में उसके उपर लेट ते हुए उसे चूम

रहा था उसके बदन को मसल रहा था.

तभी विजय ने कमरे मे कदम रखा, "क्या तुम दोनो भूल से ग़लत

कमरे मे नही आ गये हो?"

हम दोनो उठ कर खड़े हो गये, "सॉरी विजय." सोनाली ने कहा. तभी

विजय का ध्यान ज़मीन पर गिरे उसकी आल्बम पर पड़ा.

"में राज को तुम्हारी चूतो की आल्बम दिखा रही थी भाई." सोनाली

ने कहा.

"अच्छा तो ये बात है," विजय मुझे देखते हुए कहा.

"विजय राज को सब पता है." सोनाली ने अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा.

मैने पहली बार विजय के चेहर पर मुस्कुराहट देखी.

"विजय मुझे पता है तुम्हारे और सोनाली के बीच जो कुछ हुआ, हो

जाता है यार." मैने महॉल को सामान्य बनाने की कोशिश की.

"तुम्हे बिल्कुल बुरा नही लगा राज? विजय ने पूछा.

"अभी तक तो नही लगा हां अगर तुम मुझे इन तसेवीर की कॉपी नही

दोगे तो बहुत बुरा लगेगा." मैने हंसते हुए कहा.

मेरी बात सुनकर विजय मुस्कुरा दिया.

"हां तब तक ही जब तक कि भविष्या में ये दुबारा ना हो?" मैने

कहा.

फिर हमने विजय को बताया कि किस तरह प्रियंका सोनाली को ब्लॅकमेल

कर रही है.

विजय को हमारी बात सुन बहुत गुस्सा आया और वो उसी वक्त प्रियंका

से बात करना चाहता था. पर मेरे समझाने पर वो हमारे साथ

शामिल हो गया, "राज एक आइडिया है, जब तुम प्रियंका की चुदाई कर

रहे हो, क्यों ना में वो नज़ारा कमेरे में क़ैद कर लूँ."

"मतलब तुम चुदाई की फिल्म बनाना चाहते हो?" सोनाली ने पूछा.

"नहीं चुदाई की फिल्म नही, बल्कि अपने बचाव के लिए सबूत इकट्ठा

करना चाहता हूँ. अगर वो भविश्य में फिर कभी ब्लॅकमेल करने

की कोशिश करे तो हम भी ये फिल्म दिखा कह सकते हैं कि किस तरह

उसने तुम्हारे प्रेमी को बहकाया और उकसाया था." विजय ने कहा.

मुझे विजय का आइडिया पसंद आ गया, शायद उसका सोचना सही हो.

हम सब वापस हॉल मे आ गये. हम ने बड़े धूम धाम से प्रियंका का

जनमदिन मनाया. प्रियंका का बॉस राकेश भी पार्टी में आया हुआ

था.

थोड़ी देर बाद सोनाली प्रियंका को साइड मे ले गयी और उससे सब तय

कर लिया. अगले शनिवार की शाम का टाइम तय हुआ, प्रियंका मेरे घर

आनेवाली थी अपनी ख्वाइश पूरी करने के लिए.

संजोग से सोनाली बाथरूम के बाहर राकेश से टकरा गयी, "ओह हाई

सोनाली, और कैसा चल रहा है?" उसने पूछा.

"ठीक हूँ राकेश, आप कैसे हैं?" ना चाहते हुए भी सोनाली ने जवाब

दिया. प्रियंका से जो राकेश ने कहा था वो बात अब भी उसके दिमाग़

में घूम रही थी. पता नही प्रियंका ने उसकी तस्वीर इसे भी कही

दिखा ना दी हो. ये सब सोचें उसके दिमाग़ को परेशान किए हुए थी.

 


"और बताओ तुम्हारे और विजय के बीच कैसा चल रहा है?' राकेश

शरारत से मुस्कुराते हुए बोला.

"हम दोनो ठीक है, पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो?' सोनाली झल्लाते

हुए बोली.

राकेश फिर एक बार मुस्कुराते हुए बोला, "बस ऐसे ही पूछ रहा था,

कोई खास वजह नही है. तुम मेरे साथ बाहर घूमने कब चलोगि?"

"तुम्हे ये बात प्रियंका से कहनी चाहिए, वो तुम्हे शायद पसंद भी

करती है." सोनाली ने जवाब दिया.

राकेश सिर्फ़ मुस्कुराया और बाथरूम मे चला गया. सोनाली की समझ

मे नही आ रहा था कि वो राकेश को क्या समझे. जहाँ तक अभी

बातचीत का सवाल था राकेश ने एक भले इंसान की तरह उससे बात

की थी. वो कहीं से भी ग़लत इंसान नज़र नही आया था, जैसा उसने

उसके बारे में सोचा था.

जिस दिन प्रियंका मेरे घर आने वाली थी उस दिन सुबह जब में और

सोनाली बिस्तर में नंगे लेटे हुए थे. सोनाली का आधा शरीर मेरे

बदन पर था, और हम अभी एक अच्छी नींद लेकर उठे थे.

"राज आज रात मुझे एक अजीब सा सपना आया." सोनाली ने कहा.

"ऐसा क्या सपना आया सोनाली?" मैने पूछा.

 
"राज मैने देखा कि में प्रियंका जहाँ काम करती है, उस दुकान की

और बढ़ रही हूँ. मैं उसे वहाँ से तुम्हारे पास लाना चाहती थी

जिससे तुम उसे चोद सको. जब में दुकान में घुसी तो मुझे दुकान एक

दम सुनसान दिखाई पड़ी, पर एक शेल्फ के पीछे से कुछ आवाज़ें आ

रही थी. जब में उस शेल्फ के पास पहुँची तो देखती हूँ कि तुम

वहाँ घोड़ी बनी प्रियंका को पीछे से चोद रहे हो." सोनाली ने कहा.

"अच्छा…………फिर क्या देखा तुमने?" मैने पूछा.

"तभी मैने देखा कि दो हाथों ने पीछे से मेरे मम्मो को पकड़ लिया

है. फिर उन हाथों ने मेरी शर्ट खोल दी. मैने घूम कर पीछे

देखा तो पाया राकेश मेर पीछे खड़ा है और जैसे कह रहा हो कि वो

आज मुझे चोद के छोड़ेगा." सोनाली थोड़ी सांस लेते हुए बोली.

"मैने उसके हाथों से अपने मम्मे छुड़ाए और वहाँ से भाग ली. दौड़ते

वक़्त मेरी चुचियों मेरे नंगे सीने पर उछल रही थी. पर पता

नही इससे पहले कि में दुकान के दरवाज़े तक पहुँचती राकेश फिर

मेरे सामने था." सोनाली ने बताया.

"फिर क्या हुआ?' मैने उसके बदन को सहलाते हुए पूछा.

"मैने देखा कि राकेश मेरे सामने मदरजात नंगा खड़ा है. उसका

काला हबशी लंड जो करीब 10' इंच का होगा मेरे सामने था. उसके

खड़े लंड को देख मेरी चूत भी गीली हो गयी थी, पर में उसके

लंड को अपनी चूत मे नही लेना चाहती थी. मैने फिर वहाँ से

भागने की कोशिश की पर राकेश ने मुझे पकड़ मेरे गाल पर एक ज़ोर

का थप्पड़ मार दिया." सोनाली बोली.

"उसने तुम्हे थप्पड़ मारा, फिर?" मैने पूछा.

"फिर क्या, उसका थप्पड़ खाते ही में ज़मीन पर गिर पड़ी. उसने मेरी

टाँगे पकड़ मेरी स्कर्ट और पैंटी उतार दी. फिर मेरी दोनो टाँगे

फैला दी और मेरी गीली चूत के सामने अपना लंड कर दिया."

"फिर क्या हुआ."

"फिर उसने तुम्हे और प्रियंका को अपनी मदद के लिए आवाज़ दी. तुम

दोनो हमारे पास आए और तुम्हे कहा, "हां हम ज़रूर तुम्हारी मदद

करेंगे."

"तुम्हारा इतना कहते ही प्रियंका ने मेरा दायां पाओ पकड़ लिया और

तुमने बाया. अब तुम दोनो मेरे पैरों को फैलाने लगे, इतनी ज़ोर से तुम

दोनो ने मेरी टाँगो को फैलाया कि मेरी चूत भी फैल गयी." इतना

कहकर सोनाली थोड़ी देर के लिए रुक गयी और मेरी पयज़ामा मे बने

तंबू की ओर देखने लगी.

"सही मे, फिर क्या हुआ?" मैने पूछा.

"फिर राकेश मेरे उपर लेट गया और अपने लंड को मेरी चूत पर

रगड़ने लगा. शायद वो अपने लंड के सुपाडे को मेरी चूत के रस से

गीला कर रहा था. मेरा शरीर काँप रहा था. फिर राकेश ने अपने

लंड को मेरी चूत पे रख अंदर घुसाने की कोशिश की. उसका लंड

सही मे बहुत मोटा था, मेरे ख़याल से तुम्हारे लंड से भी ज़्यादा

मोटा था. में उसे जोरों से थप्पड़ मारना चाहती थी पर हिम्मत नही

जुटा पाई." सोनाली ने कहा.

"उसने फिर अपने लंड के सुपाडे को अंदर घुसाने की कोशिश की पर

नाकामयाब रहा, शायद मेरी चूत इतनी गीली नही हुई थी कि उसके

भारी भयंकर लंड को अंदर ले सके."

"मैने अपने लंड को तुम्हारी चूत क्यों घुसा नही पा रहा हूँ

कुतिया?" राकेश ज़ोर से चिल्लाया. तभी तुमने एक क्रीम की शीशी उसके

हाथों मे पकड़ा दी. फिर उसने थोड़ी क्रीम अपनी उंगलियों मे ली और

मेरी चूत के अंदर मलने लगा. फिर क्रीम अपने लंड पर लगा उसने

एक ही धक्के मे अपना लंड मेरी चूत मे डाल दिया." सोनाली ने कहा.

"राकेश ने जब मुझे जोरों से चोदना शुरू किया तो में दर्द से

तड़प रही थी, चिल्ला रही थी, मैने उसे रुकने के लिए कहा पर वो

था कि मुझे जानवर की तरह जोरों से चोदे ही जा रहा था. मैने

सहयता के लिए तुम्हे पुकारा पर तुम तो मेरी टाँगो फैलाने मे खोए

हुए थे." सोनाली ने कहा.

"राकेश चोदो इसे और ज़ोर से चोदो. इसकी छोटी सी चूत को

फाड़ दो आअज. तुम्हारा कााला लंड जब इसकी गोरी चूत के

अंदर बाहर हो रहा है तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. फाड़

दो इसकी चूत को खून निकलना चहािए इसकी चूत से."

प्रियंका जोरों से बोल कर राकेश को और उत्तेजित कर रही थी.

 


"राकेश मुझे जोरों से चोदे जा रहा था. तब तुम दोनो ने मेरी

टाँगे छोड़ दी पर मुझ में ताक़त नही थी कि में अपनी टाँगो को

सिकोड पाती. मैने अपनी टाँगे जैसी थी वैसे ही रहने दी."

"तभी प्रियंका मेरे उपर आ कर उसने अपनी जांघे मेरे अगल बगल

रख अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, "मेरी चूत को चूस कुतिया."

उसने कहा.

"मैने अपनी जीभ उसकी चूत मे डाल दी और उसकी चूत को चूसने

लगी. अब में राकेश को नही देख सकती थी, पर उसके लंड को अपनी

चूत के अंदर बाहर होते महसूस कर रही थी. जिस तरह से वो मुझे

चोद रहा था ज़रूर मेरी चूत से खून निकल आया होगा."

"तभी प्रियंका की चूत ने मेरे मुँह मे पानी छोड़ दिया, उसने मेरी

गर्दन को इस तरह अपनी टाँगो मे जाकड़ रखा था कि उसका रस पीने के

अलावा मेरे पास कोई चारा भी नही था."

"जब प्रियंका मेरे उपर से उठ गयी तो राकेस ने मुझे पेट के बल

लिटा दिया. अब वो मुझे पीछे से चोद रहा था, और मेरे मम्मे नीचे

कार्पेट पर रगड़ रहे थे. मेरी चूत अब उसके लंड को झेलने के

लायक शायद हो चुकी थी. तभी उसने अपने लंड को मेरी चूत से

बाहर निकाला और मेरे चुतडो को थोड़ा फैला मेरी गान्ड के छेद पर

थोड़ा थूक दिया."

"जब उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला तो मैने थोड़ी राहत

की साँस ली पर उसने अपने लंड को मेरी गान्ड के छेद पर रख दबाना

शुरू किया. आख़िर उसका लंड मेरी कुँवारी गान्ड मे अंदर तक घुस

चुका था. मेरी गान्ड भी शायद फॅट चुकी थी, क्यों कि मुझे बहुत

दर्द हो रहा था."

"प्लीज रुक जाआओ मुझे बहुत दर्द हूऊ रहा है, जो तुम

कहूओगे मेंन करूँगिइइ." में दर्द मे चिल्ला रही थी, पर मेरी

चीखों का राकेश पर कोई असर नही हो रहा था.

राकेश जोरों से मेरी गान्ड मार रहा था, और उसके हर धक्के के साथ

मेरी चूत नीचे कार्पेट पर रगड़ खा रही थी. पता नही उसके

धक्कों का कमाल था या फिर मेरी चूत का कार्पट पर रगड़ने का

कमाल था, थोड़ी ही देर में चिल्ला रही थी, "ओह राकेश ःःआआआआण

माअरो मेरी गाअंड को फ़ाआद दो आाज मेरी गाअंड को आापने हबशी

लंड से, मुझे अपनी रंडी Bआना लो ओह आआअज चूऊड़ो

मुझीई."

"ओह रंडी मुझे जोर से चुदने को कह रही है,

चोदुन्गा और जोरों से चोदुन्गा मेरी छिनाल." कहकर राकेश

जोरों से मेरी गान्ड मारने लगा.

"हाां आईससे ही चूऊड़ो ओह आहह हाां और जूऊर सीई

ऑश मेरे राआजा ईीई मेराा चूऊओटा चूऊऊथा." और मेरी

चूत ने पानी छोड़ दिया.

"राकेश भी झड़ने के करीब था, उसने मेरे बालों से पकड़ मेरे

चेहरे को अपने लंड के करीब किया. उसका लंड क्रीम रस से

लिथड़ा हुआ था. उसने अपने लंड को मेरे मुँह पर दबाया और मैने

अपना मुँह खोलते हुए उसके लंड को अंदर ले लिया."

"उसने अपने लंड को मेरे गले तक डालते हुए अपना पानी छोड़ दिया.

उसका वीर्य मेरे गले से होते हुए मेरे पेट में पहुँच गया और

तभी मुझे लगा कि मैने उसकी रांड़ बन गयी हू और वो मुझे जब

चाहे मेरे किसी भी छेद मे अपना लंड घुसा सकता है."

 


ये वो समय था जब सोनाली ने अपने सपने की कहानी समाप्त की. जिस

तरह से सोनाली ने अपने सपने को बयान किया था में उसी में खोया

हुआ था.

"ओह्ह्ह राज पता नही मुझे क्या होते जेया रहा है. मैने ऐसा सपना

पहले कभी नही देखा." सोनाली ने कहा.

"सोनाली तुम ज़्यादा चिंता मत करो, शायद तुम्हारी बेहन के ब्लॅक

मेलिंग व्यवहार ने तुम्हारे दिमाग़ पर असर कर दिया है. ये एक

भयंकर सपना था इसे भूल जाओ. तुम्हे राकेश से चुदवाने की कोई

ज़रूरत नही है. सुबह तक सब ठीक हो जाएगा." मैने सोनाली को

समझाते हुए कहा.

हम थोड़ी देर खामोश रहे तभी सोनाली बोली., "राज एक बात कहूँ

बुरा तो नही मनोगे?"

"नही मानूँगा तुम कहो तो?" मैने कहा.

"प्रियंका के साथ आज शाम को ज़्यादा मज़े लेने की कोशिश ना

करना." सोनाली ने कहा.

"में तुमसे वादा करता हूँ." कहकर मैने सोनाली को चूम लिया.

 


रात के ठीक 8.00 बजे प्रियंका ने मेरे फ्लॅट की घंटी बजाई. मैने

दरवाज़ा खोला और उसे अंदर आने को कहा. आज प्रियंका कुछ ज़्यादा ही

सुन्दर लग रही थी. उसने मेकप भी अच्छा किया हुआ था. टाइट जीन्स

पहन रखी थी जिससे उसके गोल और बड़े चुतड के उभार साफ दिखाई

दे रहे थे. उसकी चुचियाँ सोनाली से काफ़ी बड़ी और भारी भारी थी.

"हाई राज क्या हाल है?" प्रियंका ने अंदर आते हुए कहा. वो हॉल मे

आ गयी. मैने देख रहा था कि सोनाली अपनी बेहन को देख कर काफ़ी

नर्वस हो गयी थी. दोनो एक दूसरे के गले मिले और हम सब फिर चाइ

पीने बैठ गये.

"जानू अब शुरू हो जाएँ." प्रियंका ने चाइ ख़त्म करते हुए कहा.

आज वो एक दम रंडी कहूँ या छिनाल उस तरह पेश आ रही थी.

"क्यों नही हम बेडरूम मे चलते है." मैने प्रियंका से कहा. विजय

ने कॅमरा बेडरूम मे छुपा कर लगाया था इसलिए हमारा बेडरूम मे

जाना ज़रूरी था.

"हां बेडरूम मे मज़ा आएगा, लेकिन पहले में टाय्लेट जाना चाहती

हूँ." कहकर प्रियंका बाथरूम मे चली गयी, में और सोनाली

बेडरूम मे आ गये और मैने कॅमरा चालू कर दिया.

"सोनाली तुम ठीक तो हो ना?" मैने कमरे मे आते हुए उससे पूछा.

"हां ठीक हूँ, बस प्रियंका जिस तरह हमे अपनी उंगलियों पर नचा

रही है वो अच्छा नही लग रहा." सोनाली ने कहा.

तभी प्रियंका ने कमरे मे कदम रखा, "और मेरी बहना क्या हाल

है, आज में राज से पूरे मज़े लूँगी. सोनाली तुम ऐसा करो वहाँ

बिस्तर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जाओ और वो सब देखो जो आज राज

मेरे साथ करने वाला है."

 
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