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मेरी प्रेमिका compleet

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सोनाली कुर्सी पर बैठ गयी, तभी प्रियंका ने कहा, "सोनाली मैं

चाहती हूँ कि तुम अपने कपड़े उतार पूरी तरह नंगी हो जाओ?"

"तुम मज़ाक कर रही हो या सही मे ऐसा करने को कह रही हो?'

सोनाली ने पूछा.

"में बिल्कुल भी मज़ाक नही कर रही, चलो अब कपड़े उतारो?"

प्रियंका ने कहा.

सोनाली अपने कपड़े उतारने लगी. पहले उसने अपना टॉप उतारा फिर अपनी

काले रंग की ब्रा भी उतार दी. उसकी नंगी चुचियाँ देख कर मेरे

मुँह मे पानी आ गया, में उसके भूरे रंग के निपल चूसने के

लिए बेताब हो गया. सोनाली ने फिर अपनी जीन्स के बटन खोले और

उसे निकल दिया, फिर अपनी काली रंग की पैंटी भी उतार दी. अब वो

पूरी तरह से नंगी थी.

में प्रियंका के पास आकर खड़ा हो गया.

"राज अब तुम अपने कपड़े उतारो?' प्रियंका ने कहा.

मैने अपने कपड़े उतरे और जब मैने अपनी शॉर्ट्स उतारी तो मेरा

लंड फूँकार मारते हुए बाहर को उछल पड़ा. मेरे खड़े लंड का सुपाडा

ठीक प्रियंका के मुँह की तरफ था.

"कितना प्यारा लंड है तुम्हारा. राज कितना बड़ा है ये?' प्रियंका ने

मेरे लंड को पकड़ लिया. उसके स्पर्श ने मेरे शरीर मे एक सिरहन सी

भर दी. मेरा लंड एवं शरीर एक बार के लिए कांप उठा.

"करीब 9' इंच का है." मैने कहा.

"सही मे ऐसा ही लगता है, अब तुम मेरे कपड़े उतारो?" प्रियंका ने

जैसे हुक्म दिया. उसे इस तरह निर्देश देना शायद अच्छा लग रहा

था.

प्रियंका ने अपने हाथ हवा मे उठा दिए, जिससे मे उसका टॉप उतार

सकूँ. उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ एक टाइट ब्रा मे क़ैद थी, पर उस

पारदर्शी ब्रा से उसके निपल साफ झलक रहे थे. मैने उसकी ब्रा को

फिलहाल छोड़ दिया.

फिर मैने उसकी जीन्स नीचे खिसका कर निकाल दी.

में उसकी नंगी जाँघो पर हाथ फिराने लगा. उसे भी शायद मज़ा

आने लगा था, वो सिसकने लगी थी. मैने देखा कि उसकी पैंटी पर एक

धब्बा सा बन गया था शायद उसकी चूत गीली हो गयी थी. प्रियंका

बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी, मैने उसकी पैंटी को नीचे खिसका

निकाल दिया.

प्रियंका मेरी तरफ घूम गयी जिससे में उसकी ब्रा के हुक खोल

सकूँ. मैने उसकी पीठ पर उंगलियाँ फिराते हुए उसकी ब्रा के हुक

खोल दिए.

ब्रा के खुलते हुई जैसे दो कबूतर फॅड्फाडा के बाहर आ गये. उसके

निपल कोठोर हो चुके थे. प्रियंका अपनी चुचियों से खेलने लगी.

मैने फिर अपनी उंगलियाँ उसकी पैंटी के एलास्टिक मे फँसाई और नीचे

खिसकाने लगा. मुझे पहले उसकी झांते दिखाई दी जो कि सोनाली की

झांतों से काफ़ी घनी थी. मैने उसकी पैंटी को और नीचे को खिसकाया

तो उसकी चूत पूरे उन्माद मे नज़र आई.

प्रियंका ने पैंटी अपने पाँव से बाहर निकाल दी. में उसकी चूत देख

कर ही समझ गया कि लड़की काफ़ी चुदाई हुई है, उसकी चूत सोनाली

की चूत की तरह टाइट नही थी. थोड़ी ढीली लग रही थी. फिर वो

बिस्तर पर लेट गयी.

 


प्रियंका की चूत की पंखुड़िया उसके रस से भीग कर चमक रही

थी. उसने अपनी टाँगे फैलाई, "देख क्या रहे हो? मेरे चोदु राजा, आओ

और अब मेरी छूट को चूसो." उसने कहा.

में खिसकता हुआ उसकी टाँगो के बीच पहुँचा, मेरा लंड उछल रहा

था. में उसकी चूत को चाटने लगा, उसने मेरे बालों को कस कर

पकड़ा और मेरे सिर को अपनी चूत पर पूरी तरह से दबा दिया.

प्रियंका अपने कुल्हों को और उपर उठाते हुए ज़ोर से सिसकी, "ओह

हाआँ चूऊओस्स्सूओ ऑश हाआअँ चूऊस लूऊ अपणीईिइ साआली की

चूऊत को."

में अपनी जीभ को हिलाते हुए उसकी चूत को चाटे जा रहा था.

उसकी चूत का स्वाद करीब करीब सोनाली की चूत जैसा ही था.

मैने अपनी जीब को त्रिकोण का आकार दिया और उसकी चूत मे जितनी अंदर

तक घुसा सकता था घुसा दिया. तभी उसकी चूत ने दुबारा मेरी

जीब पर पानी छोड़ दिया.

"मुझे थोड़ा सुसताने दो." प्रियंका ने कहा. में भी उसके बगल मे

लेट गया. उसने सोनाली की तरफ देखा, "मेरी छोटी बहना, मज़ा आया

नज़ारा देख कर?"

प्रियंका की चूत चूसने मे में इतना खो गया था कि में सोनाली

को एकदम भूल ही गया था. सोनाली अभी भी कुर्सी पर बैठी थी.

उसने अपनी जंघे सिकोड रखी थी जिससे उसकी चूत ढँक जाए.

"मेरी प्यारी बहना. मुझसे क्या शर्मा रही हो, ज़रा अपनी चूत तो

दिखाओ." प्रियंका ने सोनाली से कहा.

सोनाली ने अपनी टाँगे फैला दी. "थोड़ा और फैला कर दिखाओ?"

प्रियंका ने कहा.

सोनाली ने अपनी टाँगे और फैला दी. हम दोनो देख रहे थे कि उसकी

चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी. उसकी चूत देख कर ही मेरा लंड

झटके मारने लगा.

"लगता है हमारा नज़ारा देख कर तुम भी गरमा गयी हो?" प्रियंका

ने कहा.

"हां मेरी चूत मे आग लगी हुई है." सोनाली ने कहा.

"अपनी उंगलियाँ अपनी चूत मे डाल अंदर बाहर करो?" प्रियंका ने

कहा.

सोनाली ने कोई देर नही की जैसे वो प्रियंका के हुक्म का इंतेज़ार कर

रही थी. उसने तुरंत अपनी दो उंगलियाँ अपनी चूत मे डाली और अंदर

बाहर करने लगी. हम दोनो सोनाली को अपने आप से खेलते देखने लगे.

सोनाली जोरों से उंगली अंदर बाहर कर रही थी और सिसक रही

थी, "ओह मेरिइइ चूओत मे तूओ आअग लाग गयी है हाां."

सोनाली की कई दिन से चुदाई नही हुई थी, उपर से रात का सपना

शायद इन्ही बातों ने उसे काफ़ी गरमा दिया था.

"राकेश तुम्हारी चुदाई करके बहुत खुश होता सोनाली." प्रियंका ने

कहा. "राकेश को लड़की जब बहुत गरम हो तो चोदने मे मज़ा आता

है. आज वो अपने वीर्य से तुम्हारी चूत को लबालब भर देता."

सोनाली शयाद अभी भी रात के सपने मे खोई हुई थी, "हां मुझे

भी अच्छा लगता अगर आज राकेश अपने मस्त और मोटे लंड से मुझे

चोदता." ये सोचते हुए ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

"सुना राज, तुम्हारी माशूक कितनी बड़ी छिनाल है. पहले तो अपने

भाई से चुदवाया, और अब इसकी चूत राकेश से चुदवाने के सपने देख

पानी छोड़ रही है. अगर इसे थोड़ा सा भी मौका मिले तो ये रंडी किसी

से भी चुदवा सकती है."

"हां ये है तो पक्की छिनाल," मैने कहा, "पर इसी लिए मुझे इससे

प्यार है."

"सोनाली ज़रा मेरी बॅग से वो डिल्डो तो निकाल कर लाना जो में अपने

साथ लेकर आई थी." प्रियंका ने कहा.

 


सोनाली अपनी कुर्सी से उठी और लिविंग रूम मे चली गयी. वो आपस

आई तो उसके हाथ मे एक 12'इंची नकली लंड था, जो दिखने मे एकदम

असली लंड जैसा लग रहा था. वही सुपाडे का आकार बना हुआ था और

नसे भी वैसे ही तनती दिखाई दे रही थी.

"सोनाली अब इस नकली लंड को अपनी चूत मे घुसाओ और खुद की चुदाई

करो?" प्रियंका ने कहा.

सोनाली वापस कुर्सी पर बैठ गयी और मेरी तरफ देखने लगी, वो

ऐसे मेरी तरफ देख रही थी जैसे मुझसे इज़ाज़त माँग रही हो.

मैने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा.

सोनाली अब उस नकली लंड को अपनी चूत मे घुसाने लगी, "हाआँ

सोनाली और अंदर तक घुसाओ हाआँ." प्रियंका चिल्ला रही थी.

सोनाली ने अपनी दोनो टाँगे उठा कर कुर्सी के हत्थे पर रख दी जिससे

उसकी चूत और फैल गयी. अब वो उस डिल्डो को जोरों से अपनी चूत के

अंदर बाहर कर रही थी.

"सोनाली अब थोड़ी देर व्यस्त रहेगी." कहकर प्रियंका ने मेरे लंड को

अपने मुँह मे ले लिया. मुझे ऐसा लगा कि में जन्नत मे पहुँच गया

हू. वैसे वो लंड चूसने मे इतनी माहिर नही थी, फिर भी उसकी जीब

का स्पर्श मुझे पागल किए जा रहा था.

में पिछले दिनो की बातें याद करने लगा, अच्छा ही हुआ कि प्रियंका

ने सोनाली और विजय को चुदाई करते देख लिया, तभी तो मुझे

प्रियंका की चूत चोदने को मिल रही थी.

मेरा लंड चूसने के बाद प्रियंका मुझसे बोली, "राज अब नही रहा

जाता जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मे डाल मुझे चोदो. में तुम्हारे

वीर्य को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती हूँ."

प्रियंका अब घोड़ी बन गयी, मुझे उसके मोटे और भरे कूल्हे अच्छे

लग रहे थे. उसकी गान्ड की गोलाइयाँ सोनाली की गान्ड से बड़ी

थी. "क्या सोच रहे हो राज, जल्दी से मेरी इस गीली और गरम छूट मे

अपना लंड दल दो, डालो ना." प्रियंका अपनी छूट पर हाथ फेरते हुए

बोली.

मैने अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे धीरे

अंदर घुसाने लगा. में इस मौके का पूरा लुफ्ट उठाना चाहता था

कारण मुझे मालूम था कि सिर्फ़ आज ही में प्रियंका की चूत चोद

सकता हूँ भविश्य मे मुझे ये मौका नही मिलने वाला.

में उसके चुतडो को सहलाते हुए इंच दर इंच अपना लंड उसकी चूत

मे घुसा रहा था. जब मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे घुस गया तो

मैने अपने आपको वैसे ही रहने दिया और उसकी चूत की गहराइयों को

मापने लगा.

जब मैने सोनाली को ज़ोर से सिसकते सुना तो उसकी बेहन की चूत मे

धक्के मारने लगा. अब में पागलों की तरह प्रियंका की चूत मे अपना

लंड अंदर बाहर कर रहा था.

प्रियंका भी जोरों से सिसक रही थी, उसकी चिल्लाहट पूरे कमरे मे

गूँज रही थी, "हाां राआज फाड़ दो मेर्र्रिई चूऊओट को

आाज, ऑश अयाया चूओडू कस के चूओड़ो ऑश और जूऊओरों से."

में पूरी ताक़त से जानवरों की तरह उसकी चूत की धुनाई कर रहा

था, "ओह्ह्ह राज सोनाली को देख रहे हो या मेरी चूत मार रहे हो,

जोरों से मारो ना?" प्रियंका ने कहा.

मैने उसकी बात का जवाब तो नही दिया पर उसकी चूतर्डों पर थप्पड़

मारने लगा. में थप्पड़ मारते हुए उसे चोद रहा थे. उसके चुतड

मार से लाल हो गये थे. शायद उसे भी अच्छा लग रहा था, वो मेरे

हर धक्के का साथ अपने चुतड पीछे कर दे रही थी.

"हाआँ राआज चूऊओददूऊव" वो सिसक रही थी, "ओह हाआँ

चूओद दो अपना पानी आअज मेरी चूऊत की प्याअस बुझा दो."

हमारी हालात देख सोनाली ज़्यादा ही गरमा गयी थी, वो जोरों से नकली

लंड को अपनी चूत मे अंदर बाहर कर रही थी, उसे अब कोई फरक

नही पड़ता था कि उसका प्रेमी उसकी बेहन को चोद रहा है, या उसकी

बेहन ने उसे ब्लॅकमेल किया है.

सोनाली अपनी कुर्सी से उठ कर हमारे बिस्तर के पास आकर खड़ी हो

गयी, वो बेहन को चुदते पास से देखना चाहती थी शायद.

"मेरी प्यारी छोटी बहना, क्या तुम नही चाहोगी कि तुम्हारा प्रेमी मेरी

चूत मे अपना पानी छोड़े, ठीक उसी तरह जिस तरह विजय ने तुम्हारी

चूत मे पानी छोड़ा था."

सोनाली अपनी गर्दन हिलाते हुए मेरे पीछे आ गयी और मेरे चूतर्डो

पर थप्पड़ मारने लगी, "हाां चूऊड़ो इसस्सस्स और चूऊओद दो अपने

वीर्य की पिचकारी इसस्सकी चूऊत मे."

 


सोनाली ने अब एक उंगली मेरी गान्ड मे डाल दी और अंदर बाहर करने

लगी, "राज में अब ये नकली लंड तुम्हारी गान्ड मे डाल तुम्हारी गान्ड

मारूँगी."

मैने घबरा के पीछे देखा, सोनाली ने वो नकली लंड अपनी चूत से

बाहर निकाल लिया था. वो डिल्डो उसके चूत रस से भीगा हुआ था. उसने

वो लंड मेरी गान्ड के छेद पर रख दिया.

मैने किसी बात की परवाह नही की और ज़ोर ज़ोर से प्रियंका की चूत मे

धक्के लगाने लगा. सोनाली पीछे से मेरी गान्ड मार रही थी और में

तूफ़ानी अंदाज़ मे प्रियंका को चोद रहा था.

प्रियंका ने एक हाथ नीचे से बढ़ा अपनी चूत पे इस तरह रख दिया

कि जब भी मेरा लंड उसकी चूत से बाहर आता तो उसके हाथ से रगड़

खाता और जब अंदर जाता तो रगड़ता. इस रगाड़ाहट ने मुझे झड़ने

के नज़दीक ला दिया, "ओह प्रीईईयाअंकाअ मेराा चूऊता."

मेरे लंड ने जोरों की पिचकारी उसकी चूत मे छोड़ दी, शायद

प्रियंका की चूत ने भी तभी पानी छोड़ा होगा, वो इतने जोरों से

सिसकी की पड़ोसियों को भी उसकी सिसकारियाँ सुनाई दे गयी होगी.

मुझे कुछ याद नही कि उसके बाद कुछ पल के लिए क्या हुआ होगा. जब

थोड़ी देर के बाद मैने आँख खोली तो देखा कि में अब भी प्रियंका

की पीठ पर लेटा हुआ हूँ, मेरा लंड अभी भी उसकी चूत मे है.

सोनाली हमारे बगल मे लेटी हुई थी.

हम तीनो थक कर चूर हो चुके थे. प्रियंका और मेरा शरीर

पसीने से लथ पथ था. में उसके बदन से उपर उठा तो उसने करवट

बदल ली, मैने देखा कि उसकी चूत सूज कर लाल हो गयी थी.

"ओह राज मज़ा आ गया आज तो, तुमने तो मेरी चूत की जम कर

धुनाई कर दी." कहकर उसने मेरे होठों को चूम लिया.

सोनाली मेरी तरफ ही देख रही थी, "राज आज हमने ये क्या कर दिया?"

वो धीरे से मुझसे बोली.

मैने सोनाली को अपनी बाहों मे ले लिया और बेतहाशा चूमने

लगा, "डरो मत मेरी जान हमने कुछ नही किया. आज की रात सिर्फ़

चुदाई की रात है. तुम चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा."

प्रियंका बिस्तर पर उठ कर दीवार के सहारे बैठ गयी, "सॉरी

सोनाली मैने तुम्हे और तुम्हारे प्रेमी को बुरा भला कहा."

"क्या फरक पड़ता है, जो तुम्हे चाहिए था वो तुम्हे मिल चुका है,

अब मुझे मेरी वो तस्वीरे दे दो." सोनाली थोड़ा नाराज़ होते हुए

बोली.

"हां ज़रूर क्यों नही, में उन्हे अपने साथ मे ही लाई हूँ." कहकर

प्रियंका ने लिविंग रूम से अपने बॅग मे से कुछ तस्वीरे लाकर मुझे

पकड़ा दी.

में उन तस्वीरों को देखने लगा, पहली तस्वीर देखते ही मेरे लंड

ने हरकत करनी शुरू कर दी, तस्वीर में सोनाली अपनी दोनो टाँगे

विजय के कंधे पर रखे हुए थी और विजय उसे चोद रहा था. दूसरी

तस्वीर उसकी चूत की थी जहाँ विजय का लंड अंदर बाहर हो रहा

था. तीसरी तस्वीर सोनाली के चेहरे की थी जिसमे वो चुदाई का मज़ा

ले रही थी. मेरा लंड एक बार फिर खड़ा हो गया था.

"राज को ये तस्वीरे शायद अच्छी लग रही है." प्रियंका ने

कहा, "चिंता मत करो, ऐसी बहुत से तस्वीरे है मेरे पास तुम्हे

दिखाने के लिए."

"तुम्हारा कहने का मतलब क्या है?" मैने पूछा.

"तुम दोनो ने सोच रखा था कि में तुम्हे सब कॉपीस वापस कर

दूँगी, क्या तुम लोगों ने मुझे इतना बेवकूफ़ समझ रखा है."

प्रियांक हंसते हुए बोली.

"ठीक है प्रियंका." सोनाली कुछ कहना चाहती थी कि मैने उसे चुप

करा दिया, "इसे कहने दो सोनाली. तुम्हे और क्या चाहिए प्रियंका?"

"ह्म्म्मा पहले तो में राज से और चुदवाना चाहती हूँ. और क्यों ना

राकेश तुम्हारी चुदाई करे सोनाली डार्लिंग, हमने तुम्हारे मुँह से

सुना कि तुम भी उससे चुदवाना चाहती हो?'

सोनाली ने प्रियंका को गुस्से मे थप्पड़ मार दिया, "साली कुतिया, अपनी

ज़ुबान पे कायम नही रह सकती. तुमने मुझे दो मे से एक काम के लिए

कहा था फिर भी तुम मुझे राकेश से चुदवाना चाहती हो?"

प्रियंका शैतानी हँसी के साथ मुस्कुरा रही थी.

"देखो प्रियंका." मैने कहा, "जैसा तुम चाहती हो हम वैसा कर

सकते है, हम दोनो आपस मे जिंदगी भर चुदाई कर सकते है,

मगर तुमने ये कभी सोचा है कि अगर तुम ये तस्वीरे अपने पिताजी

को दिखओगि तो वो क्या कहेंगे."

प्रियंका ने अपनी गर्दन हिलाई.

"पर तुमने ये नही सोचा कि जब तुम्हारे पिताजी तुम्हारी और मेरी

चुदाई का टेप देखेंगे तो क्या कहेंगे, और जब वो अपनी छोटी बेटी

को तुम्हारे हाथों जलील होते देखेंगे, कि किस तरह तुमने उसे नकली

लंड से अपने आपको चोदने को कहा तो क्या कहेंगे? ज़रा सोचो इस

पर." में मुस्कुराया और सोनाली हँसने लगी.

 
प्रियंका के चेहरे पर घबराहट उभर आई, "कहीं तुम दोनो ने

मेरी……..

"कुतिया उस तरफ देख." सोनाली ने कॅमरा की तरफ इशारा करते हुए

कहा. "अपने दिमाग़ मे भी उस टेप को चुराने की बात नही लाना, क्यों

कि वो कॅमरा सीधे कंप्यूटर से जुड़ा है, जहाँ तुम्हारी चुदाई की

टेप बन रही है."

"तो तुम दोनो ने मुझे फँसा ही लिया." प्रियंका ने कहा.

में आगे बढ़ा और उसके होठों को चूम लिया, "अगर तुम खेल खेल

सकती हो प्रियंका तो क्या हम नही खेल सकते."

थोड़ी देर तक कोई कुछ नही बोला, फिर प्रियंका बोली, "क्या हम

लिविंग रूम मे जाकर वो टेप देख सकते है."

हम सब लिविंग रूम मे आकर वो टेप देखने लगी. इससे अच्छी ब्लू

फिल्म मैने पहले कभी नही देखी थी. टेप देखने के बाद मैने

सोनाली की चूत मे अपनी उंगली डाल अंदर बाहर करते रहा और

प्रियंका मेरे लंड को चूस्ति रही.

सही मे इस पूरे हालत ने प्रियंका को बदल कर रख दिया. जितना वो

अपने बेहन से नफ़रत करती थी, उतना ही करीब आ गये थे दोनो आज

की रात.

पर ये कहानी का अंत नही है, आगे और भी है.

जिस दिन मैने प्रियंका मेरी प्रेमिका सोनाली की बेहन को चोदा था,

जब वो उसी कमरे में हमे देख रही थी, में विजय के साथ बैठ

कर वो टेप देख रहा था जो हमने बनाई थी. हम विजय के कमरे मे

थे और वो टेप देखने को मरे जा रहा था. उसने टेप वीसीआर मे लगा

दी.

"राज दरवाज़ा बंद कर दो?' उसने मुझसे कहा. में उठा और मैने

दरवाज़ा बंद कर दिया. वैसे तो हम दोनो ही घर पर थे पर क्या

पता किस समय कौन आ जाए.

"राज इसे देखो?" विजय ने कहा.

"क्या देखूं?' मैने उसके बगल सोफे पर बैठते हुए कहा.

मैने कभी सोचा भी नही था कि प्रियंका स्क्रीन पर नंगी इतनी

अच्छी दिखेगी. और मेरी सोनाली इतनी मादक लग रही थी कि में क्या

कहूँ, वो कुर्सी पर बैठे हुए ही ऐसी लग रही थी.

पर सोनाली कुर्सी पर ही नही बैठी रही, पर जैसे ही सोनाली ने वो

नकली लंड अपनी चूत मे डाला विजय से रहा नही गया और वो उत्तेजित

हो गया.

"राज उम्मीद है तुम्हे बुरा नही लगेगा, पर इसे देखते हुए में अपने

लंड को मुठियाना चाहता हूँ," उसने अपने पॅंट के ज़िप खोली और अपने

लंड को बाहर निकाल लिया.

मैने अपना ध्यान सीन पर जमाए रखा, सोनाली उस नकली लंड को

अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी, पर में अपने आपको रोक ना

सका और मैने विजय के लंड की ओर देखा.

विजय का लंड दिखने में काफ़ी अच्छा था. करीब 8' इंच की लंबाई

और काफ़ी मोटा था. अब में समझ सकता था कि सोनाली को उसे

चुदवाने में इतना मज़ा क्यों आया. विजय ने अपनी झान्टे बिल्कुल

सॉफ की हुई थी.

"राज तुम चाहो तो मुझे देख सकते हो, और अगर तुम भी मूठ मारना

चाहो तो मार सकते हो, मुझे बुरा नही लगेगा." विजय ने कहा.

एक बार तो मैने सोचा कि क्या सोनाली के भाई के सामने मूठ मारना

उचित रहेगा, पर फिर ये सोचा कि विजय जो देख रहा है उस मे

मैं भी तो हू फिर शरम कैसी, मैने अपनी पॅंट की ज़िप खोली और

अपने खड़े लंड को बाहर निकाल रगड़ने और मसल्ने लगा.

 


स्क्रीन पर सोनाली उस नकली लंड को मेरी गान्ड पर रगड़ रही थी जब

में उसकी बेहन प्रियंका को चोद रहा था.

"क्या सही में सोनाली ने वो लंड तुम्हारी गान्ड मे घुसा दिया था?'

विजय ने पूछा.

"नही उसने सिर्फ़ थोड़ा सा अंदर घुसाया था और तभी मेरे लंड ने

पानी छोड़ दिया था." मैने जवाब दिया.

जब टेप ख़त्म हो गयी विजय मेरी तरफ घूम कर मुझसे पूछा, "राज

तुमने कभी सोचा है कि अगर एक लड़का दूसरे लड़के को चोदे तो कैसा

लगेगा?"

"हां कई बार मैने इस पर सोचा है, ख़ास तौर पर जब चुदवाते

वक़्त जब सोनाली मेरी गान्ड में अपनी उंगली घुसाती है, तब मेरे

मन मे आता था कि काश कोई मेरी गान्ड में लंड डाल दे." मैने

कहा.

"मुझे भी कई बार ऐसा ही लगा, एक राज की बात बताऊ?" विजय ने

कहा.

मैने अपना लंड रगड़ना बंद किया और उसकी तरफ देखने लगा कि वो

क्या कहना चाहता है." मैने अपनी गर्दन हां मे हिला दी.

"मूठ मारना बंद मत करो, अच्छा लगता है." विजय ने कहा.

विजय ने बताया कि किस तरह उसकी एक गर्लफ्रेंड ने नकली लंड अपनी

कमर पर बाँध उसकी गान्ड मारी थी. उसकी ये बात सुनकर में और

उत्तेजित हो गया और अपने लंड जोरों से रगड़ने लगा.

"सही मे उसने ऐसा किया, तुम्हे कैसा महसूस हुआ उस वक़्त?" मैने

पूछा.

"पहले तो बड़ा अजीब सा लगा पर मज़ा भी बहुत आया. हमेशा

चुदाई के वक़्त मुझे सब चीज़ अपने हाथों मे रखना अच्छा लगता

है, पर पहली बार उस दिन मुझे लगा कि में किसी और के हाथों मे

हूँ." विजय ने कहा.

"मुझे पता है." सही मे उस वक़्त का नज़ारा सोच रहा था जब

बाथरूम के बाहर विजय ने अपनी बेहन सोनाली को चोदा था.

"तुम्हे मेरे और सोनाली के बारे मे जान कर बुरा तो नही लगा ना

राज?" विजय ने थोड़ी चिंता दिखाते हुए पूछा.

"नही बिल्कुल बुरा नही लगा पर में तो कहूँगा जिस तरह सोनाली ने

मुझे बताया, में जब भी उस वाकये को याद करता हूँ मेरा लंड

तूरंत खड़ा हो जाता है." मैने कहा.

"सोनाली बहुत अच्छी लड़की है, में तो कहूँगा कि उस जैसी चूत

मैने आज तक नही चोदि." विजय ने कहा.

फिर विजय ने मेरी तरफ देखा और मेरे लंड पर से मेरा हाथ हटा

दिया. उसने सीधे मेरी आँखों मे देखा और अचानक मेरे लंड को

मसल्ने लगा. पहले वो धीरे धीरे करता रहा फिर अपनी रफ़्तार

बढ़ाते हुए मुझे ज़ोर से मुठियाने लगा. आज किसी लड़के के हाथों

लंड मुठियाने मे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

मेरे लंड को मूठ मारते हुए उसने पूछा, "राज क्या इसके पहले कभी

किसी लड़के से मूठ मरवाई है?"

"हां स्कूल के दिनो मे, मेरा एक दोस्त था. हम अक्सर एक दूसरे के

लंड को मुठियाते थे." मैने जवाब दिया.

"बात सिर्फ़ मूठ मारने तक ही रही या इससे भी आगे बढ़ी थी?" उसने

पूछा.

"नही इसके आगे कुछ नही हुआ." मैने कहा.

विजय ने अपने हाथों की गिरफ़्त मेरे लंड पर बढ़ा दी और ज़ोर ज़ोर से

रगड़ने लगा. मेरा पानी छूटने वाला था. उसने मेरी तरफ देखा

जैसे उसे मेरी हालत का पता हो, "राज तुम्हे पता है में क्या करना

चाहता हूँ?"

"कयय्याअ?" मेरी साँसे तेज हो रही थी जिससे मुझे कहा नही जा रहा

था. विजय मेरे पास आ गया उसकी गरम साँसे मेरी सांसो से टकरा

रही थी.

"में एक बार फिर सोनाली को चोदना चाहूँगा. मेरे इस मोटे लंड से

उसकी चूत फाड़ना चाहता हू. अगर तुम चाहो तो हम दोनो मिलकर उसकी

चुदाई कर सकते है." उसने कहा, उसकी आँखों मे खुमारी भरी हुई

थी, और अपने बाँये हाथ से मेरे लंड को और जोरों से मुठियाने लगा.

दाएँ हाथ से वो मेरे लंड की गोलाईयों को मसल्ने लगा और उसी वक़्त

मेरा पानी छूट गया.

 


मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी हवा मे छोड़ दी, दो मेरे पेट पर गिरी

और एक उसके हाथों पर. तुरंत मेरे दिमाग़ मे आया कि विजय क्या कह

रहा था. मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और उसके खड़े लंड

को देखने लगा.

उसका लंड देख कर मेरा मन भी ललचा गया. ग़लत मत समझिए

में गान्डु नही हूँ पर कभी कभी दिल मे ख़याल आ ही जाता है.

सही मे बहुत ही सुन्दर लंड था उसका.

"मेरे होने वाले जीजाजी क्या तुम मेरे लंड को मुठियाना चाहोगे?" उसने

मुस्कुरा कर अपने लंड की ओर इशारा किया.

में जवाब मे मुस्कुराया और उसके लंड को अपने हाथों मे लेकर

रगड़ने लगा.

"ओह राआाज हाां और्र्रर जूऊओरों से आआअहह अयाया मेरा

चूओता." और उसके लंड ने पानी छोड़ दिया.

उस रात सोनाली टाय्लेट मे सीट डाले उस पर बैठी थी. वो अपनी

झान्टो को सॉफ कर रही थी और में दाढ़ी बना रहा था. तभी

मैने उसे अपने और विजय के बारे मे बताया.

"क्या तुम दोनो लड़कों ने एक दूसरे के लंड को मूठ मारी?" सोनाली ने

चौंकते हुए कहा. मैने हां मे गर्दन हिलाई, "और उसने ये भी

कहा कि तुम दोनो मिलकर मुझे चोदो." मैने फिर गर्दन हिलाई.

सोनाली ने अपनी चूत के बाल सॉफ किए और बाकी की लगी क्रीम को

टवल से सॉफ किया, "साला हरामी, अपनी बेहन को रंडी समझता

है," शयाद वो नाराज़ हो गयी थी.

मैने उसके सामने आया और उसके होठों को चूम लिया, "हम दोनो ने एक

दूसरे की मूठ मारी तुम्हे बुरा लगा?"

"नही बुरा तो नही लगा. पर मैने सोचा कि हमारे बीच ये तय हो

गया था कि में विजय से दुबारा नही चुदवाउन्गि." मैने एक बार फिर

उसे चूमा और सॉफ की हुई चूत को सहलाने लगा, "एम्म्म काफ़ी अच्छी

है."

"क्या कर रहे हो राज, पहली मेरी बात का जवाब दो?" उसने मेरे हाथ को

झटकते हुए कहा.

"सही बोलू जान तो मुझे पता नही, हां जो आज उसने मेरे साथ किया

वो मुझे पसंद आया, तुम्हारा भाई मुझे अच्छा लगा. वो एक अच्छा

लड़का है. रही तुम्हारी बात तो में तुमसे प्यार करता हूँ, और

चाहता हूँ कि तुम जिंदगी के पूरे मज़े लो." कहकर मैने अपनी दो

उंगलियाँ उसकी चूत मे डाल दी और अंदर बाहर करने लगा. फिर अपनी

उंगलियों को बाहर निकाल चाटने लगा.

सोनाली ने जवाब दिया, "में कल उससे बात करूँगी." मैने अपनी जेब

से अपना सेल फोन निकाला और उसे पकड़ा दिया, "तुम अभी उससे बात

क्यों नही करती, अभी से अच्छा वक़्त कौन सा होगा?"

सोनाली ने विजय का नंबर मिलाया, जब दोनो ये बात कर रहे थे

मैने अपनी उंगलियाँ फिर एक बार उसकी चूत मे डाल दी थी और अपने

अंगूठे से उसकी चूत को सहला रहा था.

"विजय मुझे तुमसे कुछ बात करनी है." सोनाली थोड़ा गुस्से मे बोली.

"हां सोनाली कहो क्या कहना है?"

"तुम अपने आपको समझते क्या हो?"

"ओह तो राज ने तुम्हे बता दिया, क्या हुआ जो तुम इस तरह पागल हो रही

हो?"

सोनाली के मुँह से हल्की सिसकी निकल रही थी, उसकी चूत पूरी तारह

गीली हो चुकी थी तभी मैने अपनी तीसरी उंगली भी उसकी चूत मे

घुसा दी, "विजय कहीं तुम राज को बहका तो नही रहे जिससे तुम मुझे

दुबारा चोद सको? में जान ना चाहती हूँ."

 


विजय ज़रूर फोन के उस तरफ मुस्कुरा रहा होगा, मुझे लगा कि उसे

ज़रूर चूत मे उंगलियाँ अंदर बाहर होने की आवाज़ सुनाई दे गयी

होगी, "क्या तुम अपने आप से खेल रही हो?" विजय ने पूछा.

"नही राज मेरी चूत मे उंगली कर रहा है."

"कहाँ हो तुम इस वक़्त?"

"में नंगी टाय्लेट मे बैठी हूँ, और राज ने अपनी तीन उंगलियाँ

मेरी………ओह्ह्ह्ह ह हाआँ हाां" तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया

और में किसी प्यासे बच्चे की तरह उसका पानी चूसने लगा.

"ओह सोनाली तुम्हारी बातों ने तो मुझे गरमा दिया, मैने अपना हाथ

अपने लंड पर कस रखा है और मूठ मार रहा हूँ इस वक़्त." विजय ने

फोन के दूसरी ओर से कहा.

मैने उम्मीद की सोनाली ने उसका मोबाइल नंबर ही मिलाया हो कहीं घर

के फोन पर ना मिलाया हो. उनके घर मे पर्रलल लाइन है कहीं इसी

और इनकी बात ना सुन ली हो.

पर इनकी बातों ने मुझे भी गरमा दिया था, मैने अपनी पॅंट खोल दी.

जैसे ही मेरी पॅंट नीचे हुई सोनाली ने मेरे लंड को पकड़ लिया और

मसल्ने लगी.

"सोनाली तुम इस वक़्त क्या कर रही हो बताओ मुझे." विजय शायद जानना

चाहता था.

"अभी इस वक़्त मेरे प्यारे भाई, में राज के लंड को मसल रही हूँ."

सोनाली मुस्कुराते हुए बोली.

 
"क्या उसका लंड पूरा सख़्त है."

"हां पूरा खूँटे की तरह खड़ा है. उसका सुपाड़ा जब चमकता है

तो मुझे बहुत अच्छा लगता है." सोनाली ने कहा.

शायद सोनाली को विजय के हाथों की आवाज़ सुनाई दे रही थी. वो

सोच रही होगी कि किस तरह बिस्तर पर लेटे विजय ने अपनी टाँग फैला

रखी होगी और एक साथ से फोन पकड़े दूसरे हाथ से अपना लंड पे

मूठ मार रहा होगा.

शायद इस ख़याल ने उसे फिर गरमा दिया था, उसकी चूत एक बार फिर

पनिया गयी थी और वो जोरों से मेरे लंड को रगड़ रही थी.

"विजय सच सच बताओ तुम राज को बहका रहे हो ना जिससे मुझे चोद

सको?"

"अगर सच कहूँ मेरी प्यारी बहना, तो उस रात तुम्हारी चुदाई करते

वक़्त मुझे बहुत मज़ा आया, में हमेशा तुम्हारी चूत के सपने

देखा करता हूँ, में एक बार नही कई बार तुम्हारे साथ चुदाई करना

चाहूँगा." विजय ने कहा.

सोनाली ने मेरे लंड को अपने हाथों से छोड़ दिया और अपनी चूत

रगड़ने लगी, "हां विजय मुझे भी अच्छा लगा था, पर तुम जानते

हो कि इसकी वजह से हम कितनी मुसीबत मे पड़ गये थे, और में नही

चाहती कि दुबारा हमे इसका सामना करना पड़े."

विजय ने जवाब दिया, "सोनाली में तुमसे प्यार करता हूँ, और राज भी

मुझे पसंद है. तुम्हे चोदने के लिए में कोई उसे नही बहका रहा

था, में कभी भी तुम दोनो के बीच नही आना चाहूँगा. तुम दोनो की

जोड़ी बहुत अच्छी है. पर मेरी समझ मे नही आता कि हम क्यों नही

आपस मे चुदाई कर सकते है, मेरा मतलब हम तीनो से है."

"ठीक है मुझे लगता है कि हमे मज़ा आएगा." सोनाली ने धीरे से

कहा.

में सोनाली के पास गया और उसे कुतिया बना दिया फिर अपना लंड उसकी

चूत पर घिसने लगा. फिर मैने एक ही झटके मे अपना लंड उसकी

कसी चूत मे घुसा दिया, हे भगवान उसकी चूत इतनी गीली थी की

आसानी से पूरा अंदर घुस गया.

"हीईईय भ्ाागवाअं" वो सिसकी.

"सोनाली क्या राज इस समय तुम्हे चोद रहा है?"

"हहाआआनन्न" वो सिसकी. में उसकी चूत को चोदे जा रहा था.

में ज़ोर के धक्के मार रहा था. उसका पूरा शरीर हिल रहा था जिससे

उसे बात करने मे तकलीफ़ हो रही थी, बड़ी मुश्किल से उसने फोन

हाथ से गिरने से बचाया.

"ऑश सूोनली मेरर्राआ चूओटने वाअला हाीइ." विजय ने कहा,

फिर थोड़ी देर खामोशी छाई रही, और उसे इस बात की परवाह भी

नही थी.

सोनाली ने फोन वॉशिंग मशीन पर रख दिया और टाय्लेट की सीट को

पकड़ आगे पीछे होते हुए मेरे लंड को अंदर तक लेने लगी.

मैने आगे से उसकी चुचियाँ मसल्ते हुए ज़ोर से धक्के पर धक्के मार

रहा था.

वो जोरों से सिसक रही थी, "हाा राज चूऊओदो मुझे और जूओरों

सीए ऑश आआआः हाां चूऊड़ो मेरा प्ाअनीिइ छुदाअ दो." और

उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

"ओह राज आज तो तुमने मेरी चूत फाड़ ही दी है, प्लीस अब अपने लंड

को बाहर निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है." सोनाली ने कहा.

 


मैने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकल लिया. मैने देखा कि सही

मे उसकी चूत सूज कर लाल हो गयी थी, तभी विजय की आवाज़ सुनाई

दी.

"सोनाली तुम मेरी आवाज़ सुन रही हो ना?"

सोनाली ने फोन उठाया, "हां विजय बोलो?"

"फिर क्या सोचा तुमने इस बारे में?" विजय ने पूछा.

"अभी तो में इतना ही कहना चाहूँगी कि आज हम तीनो की शुरुआत

अच्छी हुई है, बाकी बात मे बाद मे करूँगी." कहकर सोनाली ने फोन

काट दिया.

"हे भगवान मेरे पाँव अभी भी काँप रहे है." सोनाली ने मेरी ओर

देखते हुए कहा.

मैने उसके उभरे हुए चूतडो को देखा, और उनके बीच की दरार ने

मेरे लंड को खड़ा कर दिया, मेरा पानी छूटा नही था. मैने सोनाली

को खींचा और अपने लंड को उसकी गान्ड की दरार मे रगड़ने

लगा, "सोनाली मुझे झड़ना है."

"लाओ में तुम्हारे लंड को चूस कर झाड़ा देती हूँ." सोनाली ने कहा.

पर मैने उसकी बात पर ध्यान नही दिया और अपने लंड को पीछे से

उसकी चूत मे एक बार फिर घुसा दिया.

"ओह आआआअ" सोनाली सिसकी.

पर मैने उसके दर्द और सिसकियों पर ध्यान नही दिया और ज़ोर ज़ोर के

धाक्के मार रहा था. उस पर कोई रहम खाए बिना में भयंकर

चुदाई कर रहा था. मुझे याद आया कि किस तरह उसे गंदी बातें

करना पसंद है, जैसे अपने भाई के साथ कर रही थी. ये मेरी

माशूक कितनी छिनाल और चुदासू औरत है मेरी समझ मे आ गया

था.

मुझे उसका वो सपना याद आ गया जो उसने कुछ दिन पहले देखा था,

जिसमे राकेश इसे चोद्ता है. आज से मैने भी उसे उसी तरह व्यवहार

करने की सोच ली थी.

मैने उसकी चुचियों को कस के पकड़ लिया, "हाअ ले मेरा लंड मेरी

राआनदी, मीईईं वो सब तुझे दूओंगा मेरी कुतियाअ जो तुझे

चाहिए." कहकर में और कस के धक्के मार रहा था.

उसकी चूत भी गीली हो गयी थी, मैने अपने हाथ को नीचे से उसकी

चूत पर रखा, "हाां ले रांडी आआब चूद्ददडा मेरे प्ाानी को

हाां ले लीई पूराा लुंद्ड़द्ड ले ले."

"हाां राआाजाआ पेल्ल्ल्ल दूओ पुर्र्राा लुंद्ड़द्ड फ़ाआद दूओ मेरि

चूत कूऊ ओह हाां और्र्रर जूऊरूओं सीए." सोनाली अपने कूल्हे

जोरों से आगे पीछे करते हुए सिसक रही थी.

"तुम्हे गंदी बाते करने मे मज़ा आता है ना?" मैने पूछा.

सोनाली ने कोई जवाब नही दिया, सिर्फ़ सिसक कर रह गयी. मैने उसके

बालों को पकड़ते हुए ज़ोर का धक्का मार पूछा, "चल बता तू क्या

है?"

"मईएईन तुंमहरी च्ीईनाल हूँ, राअंड हूँ तूमम्महरिी हाआँ रांड़

चूओड़ो." वो बोली और उसी वक्क़ मेरे लंड ने उसकी चूत मे पानी छोड़

दिया.

"हां यही हो तुम." कहकर में अपने वीर्य की एक एक बूँद उसकी चूत

मे डालने लगा.

"हां राज, मुझे तुम्हारा वीर्य महसूस हो रहा है, भर दो मेरी

चूत को अपने माल से सिंच को मेरी चूत को अपने पानी से." मुझे

लगा कि उसका भी पानी छूट गया था, पर मैने इस बात की परवाह

नही की.

उसके पास चुदवाने के लिए चूत थी और मुझे चोदना था, मेरे

विचार एक पल के लिए ऐसे ही हो गये थे. मैने अपना लंड उसकी

चूत से निकाला और उसकी गान्ड के छेद पर लगा दिया. पर लंड

चिकना होने से उस छेद से फिसल गया.

 
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