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Guest
ज़य की इस बात से सब को शॉक लगा मुझे छोड़ के.. क्यूँ कि ये मुझे उसने उपर ही कहा था, वो यहाँ रहके मेरी मदद नहीं कर सकता, पर मुझे बहुत टाइम देगा.. ये वादा वो यहाँ निभा रहा था... ये बात सुनके मानो अंशु और शन्नो की तो हवाइयाँ ही उड़ गयी... विजय चाचा की तो जैसे गान्ड हाथ में आ गयी हो...
डॅड:- नहीं ज़य, तुम नहीं जाओगे अब्रॉड.. तुम यहीं रह के बिज़्नेस सम्भालो,
ज़य:- कम ऑन डॅड... मैं आपकी फॅक्टरीस में क्या करूँगा, मैं मास कम्यूनिकेशन का स्टूडेंट हूँ, आप भैया को दो ना फॅक्टरीस.. ही ईज़ आ मास्टर
डॅड:- पर बेटे, हम इतना टाइम कैसे रोक सकते हैं शादी को
"पूजा जी... आप को कोई प्राब्लम है अगर ये शादी लेट हुई तो" ज़य ने पूजा को देखते हुए कहा
पूजा ने कोई जवाब नहीं दिया... उसे शांत देख मोम बीच में बोली
"वो कैसे जवाब देगी... उसके मा बाप है ना, "
ज़य:- कम ऑन मोम... शादी पूजा और भाई को करनी है, उसके मोम डॅड से क्या फरक पड़ेगा.. और भाई मेरे बिना शादी नहीं करेंगे आइ नो..
और मेरा फ़ैसला नहीं बदलेगा, मैं अपना करियर आधे में छोड़ के फॅक्टरी में नहीं बैठूँगा.. ये डॅड भी जानते हैं.. डिस्कशन ओवर ओके...
ये कहके ज़य खाने बैठ गया... जिस ज़य के आने की खुशी सब को थी, उसने एक ही झटके में सब को हिला डाला.. सिर्फ़ एक चेहरा था जो ज़य की इस बात से बदला नहीं था.. ये ज़य और मैने दोनो ने नोटीस किया...
खाना ख़ाके ज़य और मैं मेरे रूम में निकल गये गेम खेलने के लिए
"देखा आपने... सब बातों में सिर्फ़ पूजा ने ही अपना चेहरा नहीं बदला.. मैने कहा आप सही हो... अब जाके उससे बात करो"
ज़य ने इतना कहा ही था, कि मेरा दरवाज़ा नॉक हुआ... जैसे ही ज़य ने दरवाज़ा ओपन किया, सामने पूजा थी
"आइए.. हम आपकी ही बातें कर रहे थे.." ज़य ने उसे अंदर आते हुए कहा
पूजा:- भैया.. मैं सिर्फ़ आपके सवाल का जवाब देने आई हूँ..
"कौनसा सवाल पूजा जी" ज़य ने पूजा से सर्प्राइज़ होके पूछा
"... मैं आपके लिए आप जितना कहेंगे उतनी देर वेट कर सकती हूँ.. और भैया... थॅंक यू, आपने इतना टाइम दिया हमे..." पूजा ने ज़य से नज़रें मिलाते हुए कहा
"मैं जानता हूँ भाभी... आपको और भाई को टाइम की ज़रूरत है, पर उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरत है साथ रहने की, और कुछ बातें सॉफ करने की..."
ज़य ने पूजा से सीधे पॉइंट पे आके बात की.. और पहली बार उसने पूजा को भाभी कहा...
"मैं सिर्फ़ एक बात बताना चाहूँगी आप दोनो को.. मेरा कोई इरादा नहीं आपको नुकसान पहुँचाने का.. मैं और मेरी मोम, सिर्फ़ एक कठपुतली हैं.. हमे कोई और चला रहा है... कोई है जो आप लोगों को नुकसान पहुँचाना चाहता है.."
पूजा ने एक ही साँस में हमे ये बात कही.. कहते कहते उसकी आँखों में आँसू थे, पर वो फिर भी खुद को संभाल रही थी...
"पूजा... कौन है, क्यूँ पहेलियों में मुझसे बात कर रही हो.. मैं जानता हूँ तुम्हारे इरादे ग़लत नहीं है, पर तुम अटलीस्ट मुझे बताओ तो कि इन सब के पीछे कौन है.. तुम क्यूँ कठपुतली बन रही हो... मैं भी तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ"
मैने इतना कहा ही था कि पूजा ने अपनी आँखें बड़ी की और मुझे घूर के बोलने लगी
"नहीं .. आप मेरी मदद नहीं करें , नहीं तो"
"नहीं तो क्या भाभी.." ज़य ने बीच में आते हुए कहा
"मौत्त... मौत निस्चित है.."
पूजा हमे सिर्फ़ इतना बोलके मेरे रूम से निकल के नीचे चली गयी.. उसकी बात सुनके ज़य और मैं दोनो हिल गये थे.. कुछ सेकेंड्स तक ज़य और मैं एक दूसरे को देखते रहे... हमारा दिमाग़ हिला हुआ था, ज़य जो कुछ देर पहले शांत था, उसके माथे पे शिकन आ गयी थी, पसीने से भीग चुका था..
"चिंता मत कर तू छोटू... तुझे तेरा भाई कुछ नहीं होने देगा.." मैं ज़य के सर पे हाथ फेरता हुआ बोला
"भाई.. चिंता नहीं है, पर मैं सिर्फ़ ये सोच रहा हूँ, कि पूजा अगर पूरी बात नहीं बता सकती, तो आधी बात भी क्यूँ बताई... इससे अच्छा तो ना बताती.. कम से कम दिल को शांति तो थी कि हम सही जा रहे हैं" ज़य ने चिंतित स्वर में कहा
"वोई तो.. पर फिर भी, काफ़ी मदद होगी इससे.." मैने सोफे पे बैठते हुए कहा
"ठीक है भाई... आप फिलहाल आराम कीजिए, मैं मेरे कुछ दोस्तों से मिलके आता हूँ, रात को बात करते हैं" ज़य ने अपने कपड़े बदलते हुए कहा
मैं:- चल बाइ.. अच्छा सुन, ये पकड़, और एंजाय कर ओके..
"क्या भाई आप ना... मुझे बिगाड़ रहे हो हीही" जे ने मुझसे पैसे लेते हुए कहा और निकल गया बाहर..